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<title> &#45; : राजनीतिक</title>
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<title>RSS को शाखा लगाने के लिए लेनी होगी सरकारी मंजूरी? कर्नाटक के नए बिल से गरमाई सियासत</title>
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<description><![CDATA[ बेंगलुरु   गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने बताया कि कर्नाटक कैबिनेट ने &#039;कर्नाटक सरकारी परिसरों और सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग के नियमन विधेयक, 2026&#039; को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट बैठक के बाद एक बयान में प्रियांक खरगे ने कहा कि इस विधेयक का मकसद निजी व्यक्तियों, संगठनों, संघों और सोसायटियों द्वारा सरकारी परिसरों और सार्वजनिक … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:16:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>RSS, को, शाखा, लगाने, के, लिए, लेनी, होगी, सरकारी, मंजूरी, कर्नाटक, के, नए, बिल, से, गरमाई, सियासत</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बेंगलुरु </strong><br>
 गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने बताया कि कर्नाटक कैबिनेट ने 'कर्नाटक सरकारी परिसरों और सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग के नियमन विधेयक, 2026' को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट बैठक के बाद एक बयान में प्रियांक खरगे ने कहा कि इस विधेयक का मकसद निजी व्यक्तियों, संगठनों, संघों और सोसायटियों द्वारा सरकारी परिसरों और सार्वजनिक संपत्ति के इस्तेमाल के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करना है। माना जा रहा है कि यह कानून सीधे तौर पर राष्ट्रीय स्वयं सेव संघ को प्रभावित करेगा। प्रियांक खरगे बीते कई दिनों से साफ बयान दे रहे थे कि कर्नाटक में संघ को बैन किया जाएगा।</p>
<p>प्रियांक खरगे ने कहा कि यह विधेयक सरकारी जमीनों, इमारतों, खेल के मैदानों, पार्कों, सड़कों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण और जिम्मेदारी से इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। साथ ही, यह इनके दुरुपयोग को रोकता है और जनहित व भलाई के लिए इनकी रक्षा करता है।</p>
<p><strong>नए कानून पर क्या बोले प्रियांक खरगे</strong><br>
प्रियांक खरगे ने आगे कहा कि इस कानून का मकसद जवाबदेही सुनिश्चित करना और सार्वजनिक संपत्तियों के अनधिकृत इस्तेमाल को रोकना है। इस अटकल पर कि यह विधेयक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को निशाना बनाने के लिए है प्रियांग खरगे ने कहा कि सरकार के मन में कोई खास संस्था नहीं है। मंत्री ने कहा कि हर कोई यह क्यों सोच रहा है कि यह किसी खास संस्था, संघ, संगठन, सोसाइटी, क्लब, यूनियन, सिंडिकेट या NGO पर रोक लगाने या उसे नियंत्रित करने के लिए है? मेरी समझ से बाहर है।</p>
<p><strong>मॉनसून सत्र में ही पेश हो सकता है विधेयक</strong><br>
कर्नाटक में मौजूदा मॉनसून सत्र में ही इस विधेयक को पेश किया जा सकता है। इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार के अधीन इमारतों या परिसरों जैसे कि स्कूल, कॉलेज, खेल के मैदान, पार्क, सड़क या फिर जलाशयों के किनारे कोई भी सभा करने से पहले इजाजत लेनी होगी। राज्य के गृह मंत्रालय ने 18 अक्टूबर 2025 को ही यह आदेश जारी किया था। कानून बनने के बाद यह उसी आदेश की जगह ले लेगा।</p>
<p>पहले के आदेश के मुताबिक भी एक जगह पर 10 लोगों के इकट्ठा होने के लिए के लिए परमीशन लेना अिवार्य कर दिया गया था। हालांकि कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी। इसके बाद सरकार ने पुराने आदेश को वापस लेने और उसकी जगह कानून लाने का फैसला किया है। इससे सरकार को सभाओं, जुलूस और सरकारी संपत्ति के इस्तेमाल पर नियंत्रण हासिल हो जाएगा। ऐसे में आरएसएस को भी अपनी शाखाएं लगाने या फिर किसी कार्यक्रम के आयोजन के लिए इजाजत लेनी होगी।</p>
<p>कर्नाटक के मंत्री संतोष लाड ने कहा कि किसी भी संगठन को टारगेट करने के लिए यह कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियों के रख-रखाव को ध्यान में रखते हुए यह कानून लगाया जा रहा है। कर्नाटक सरकार के इस कानून को लेकर बीजेपी ने अपना विरोध दर्ज करवाया है। ऐडवोकेट गिरीश ने कहा कि यह असंववैधानिक नियम है। यह संविधान का आर्टिकल 19 का उल्लंघन कर करता है।</p>
<p>इससे पहले कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर सरकारी स्कूलों कॉलेजों औऱ अन्य स्थानों पर आरएसएस की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग कीथी। उन्होंने कहा था कि सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में आरएसएस अपनी शाखाएँ चला रहा है। वे बच्चों के मन में नकारात्मक विचार भरते हैं।</p>
<p><strong>क्या है कर्नाटक का नया कानून</strong><br>
अधिकारियों के अनुसार, विधेयक में कार्यक्रमों, बैठ इसमें सरकारी संपत्तियों के इस्तेमाल की अनुमति देने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और प्रक्रियाएं प्रस्तावित हैं। इसमें सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग या नुकसान की स्थिति में जुर्माने के प्रावधान भी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में कई जगहों पर सरकारी मैदानों, पार्कों और सामुदायिक भवनों का इस्तेमाल बिना अनुमति के कार्यक्रमों, बैठकों और निजी कामों के लिए किया जा रहा था। इससे सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा था और आम लोगों को दिक्कत हो रही थी। नए विधेयक में स्पष्ट प्रावधान होंगे कि कौन, कब और किस शर्त पर सरकारी परिसर का इस्तेमाल कर सकता है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया, शुल्क और जिम्मेदारी तय की जाएगी। उल्लंघन करने पर जुर्माने और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है।</p>
<p>सरकार का तर्क है कि यह कानून किसी एक समुदाय या संगठन के खिलाफ नहीं है। इसका मकसद सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि टैक्सपेयर के पैसे से बनी संपत्तियों का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से और जनहित में हो।</p>
<p><strong>मोहन भागवत को प्रियांक खरगे ने लिखा था लेटर</strong><br>
2025 से ही खरगे RSS के सार्वजनिक संपत्ति और सरकारी परिसरों के इस्तेमाल का विरोध करते रहे हैं और संगठन से औपचारिक रूप से पंजीकरण कराने की मांग करते रहे हैं। जून 2026 में, खरगे ने RSS को एक खुला पत्र लिखकर उसके कानूनी दर्जे, वित्तीय पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही पर स्पष्टता मांगी थी, क्योंकि संगठन अपने अस्तित्व के 100 साल पूरे कर रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन भारत और विदेशों में 60,000 से ज्यादा शाखाओं और करोड़ों स्वयंसेवकों का दावा करता है। उसकी सार्वजनिक जीवन में अहम मौजूदगी है और इसलिए उसे पारदर्शिता, जवाबदेही और संवैधानिक अनुपालन के उच्चतम मानकों का पालन करना चाहिए।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, यूपी का आपराधिक मानहानि मामला रद्द; समन भी हुआ खारिज</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली कांग्रेस नेता राहुल गांधी को यूपी में दर्ज आपराधिक मानहानि के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. अदालत ने शुक्रवार को इस मामले को रद्द कर दिया. इस निजी क्रिमिनल शिकायत में कांग्रेस सांसद पर वीडी सावरकर को बदनाम करके सांप्रदायिक अशांति फैलाने का आरोप लगाया गया था. दरअसल राहुल … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:16:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>राहुल, गांधी, को, सुप्रीम, कोर्ट, से, बड़ी, राहत, यूपी, का, आपराधिक, मानहानि, मामला, रद्द, समन, भी, हुआ, खारिज</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>कांग्रेस नेता राहुल गांधी को यूपी में दर्ज आपराधिक मानहानि के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. अदालत ने शुक्रवार को इस मामले को रद्द कर दिया. इस निजी क्रिमिनल शिकायत में कांग्रेस सांसद पर वीडी सावरकर को बदनाम करके सांप्रदायिक अशांति फैलाने का आरोप लगाया गया था. दरअसल राहुल गांधी ने ट्रायल कोर्ट के उस समन आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें IPC की धारा 153-A (समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 505 के तहत अपराधों के लिए ट्रायल का सामना करने को कहा गया था। </p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट से राहुल गांधी को बड़ी राहत</strong><br>
 इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा कार्यवाही को रद्द करने से इनकार करने के बाद राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. मामले पर शुक्रवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने पूछा कि क्या राज्य सरकार ने केस चलाने की मंजूरी दी है. इस पर राज्य की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने जवाब दिया कि नहीं कोई मंजूरी नहीं दी गई। </p>
<p><strong>समन जारी करने वाला आदेश रद्द करने की वजह </strong><br>
दरअसल सीआरपीसी की धारा 196 के तहत, IPC की धारा 153A के तहत किसी भी अपराध के संज्ञान के लिए  राज्य सरकार की मंजूरी जरूरी होती है. राहुल गांधी के वकील ने अदालत से अपील करते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार की मंजूरी नहीं है तो समन जारी करने वाला आदेश रद्द किया जाए. उन्होंने कहा कि मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए वापस मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाए. केस चलाने को मंजूरी नहीं है तो वे इस मामले में जरूरी कदम उठाएंगे। </p>
<p><strong>'मंजूरी नहीं है तो मामला वहीं खत्म'</strong><br>
हालांकि, मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस दत्ता ने कहा कि मामले का संज्ञान लेने से पहले मंजूरी जरूरी है. अगर मंजूरी नहीं है तो मामला वहीं खत्म हो जाता है. इसके बाद बेंच ने मामला रद्द करने का आदेश दिया. अदालत ने कहा कि यूपी सरकार की तरफ से दाखिल हलफनामे में अपीलकर्ता-आरोपी पर केस चलाने के लिए मंजूरी का दिए जाने का कोई जिक्र नहीं है. इसीलिए मजिस्ट्रेट द्वारा पारित शिकायत और आदेश रद्द किए जाते हैं। </p>
<p><strong>'फिर ऐसा बर्ताव किया तो हम खुद संज्ञान लेंगे'</strong><br>
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने  पिछले साल छले साल मामले की कार्यवाही पर लगाते हुए राहुल गांधी की सावरकर पर की गईं टिप्पणियों पर मौखिक रूप से कड़ी नाराजगी जताई थी. अदालत ने पूछा था कि क्या आजादी की लड़ाई लड़ने वालों के साथ ऐसा ही बर्ताव किया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा था कि अगर राहुल गांधी ने भविष्य में ऐसी टिप्पणियां दोहराई तो उनके खिलाफ कोर्ट स्वत: संज्ञान लेकर अवमानना ​​की कार्रवाई शुरू करेगा। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>कांग्रेस के ‘मेलोनी’ मजाक पर बढ़ा विवाद, विदेश मंत्रालय ने दी नसीहत&#45; ‘बात सम्मान से रखी जानी चाहिए’</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली कांग्रेस की जॉर्जिया मेलोनी  पर टिप्पणी पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इटली के साथ हमारे मजबूत संबंध, इन्हें और मजबूत करना चाहते हैं, कोई भी बात आदर के साथ रखनी चाहिए.कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तंज कसा … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:16:10 +0530</pubDate>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>कांग्रेस की जॉर्जिया मेलोनी  पर टिप्पणी पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इटली के साथ हमारे मजबूत संबंध, इन्हें और मजबूत करना चाहते हैं, कोई भी बात आदर के साथ रखनी चाहिए.कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तंज कसा था। </p>
<p>इस दौरान कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने भी उनके साथ चुटकी ली थी. राहुल गांधी ने कहा था कि, 'पता नहीं कहां से इनके दिमाग में घुस गया कि गले पड़ना ही विदेश नीति है.' इस दौरान उन्होंने मंच पर संदीप दीक्षित के साथ मिलकर गले लगने का एक्ट भी किया था। </p>
<p>रचनात्मक कांग्रेस कन्वेंशन में बोलते हुए राहुल गांधी ने कई मुद्दे उठाए थे. इसी बीच उन्होंने विदेश नीति को लेकर कहा था कि, 'पता नहीं कहां से इनके दिमाग में घुस गया… अजीब चीजें घुस जाती हैं. इनके माइंड में घुस गया कि फॉरेन पॉलिसी इज दिस…' इस दौरान उन्होंने संदीप दीक्षित को सामने बुलाया था और फिर एक्ट करते हुए उन्हें जोर से गले लगा लिया था. इसके बाद उन्होंने कहा था कि, 'इनको लगता है कि गले लगना ही फॉरेन पॉलिसी है। </p>
<p><strong>संदीप दीक्षित ने कसा था तंज</strong><br>
इसी दौरान संदीप दीक्षित ने राहुल गांधी को रोककर कहा था, 'एक बात पूछ सकता हूं?' फिर उन्होंने तंज करते हुए कहा था, 'मेलोनी समझ कर तो नहीं पकड़ा था…' उनके इस सवाल पर हॉल में ठहाके गूंज उठे थे और राहुल गांधी ने हंसते हुए कहा था, 'नहीं-नहीं, मैं अभी तक वहां नहीं पहुंचा हूं.' राहुल गांधी और संदीप दीक्षित का यह एक्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। </p>
<p>
<strong>राहुल गांधी फेल स्टैंडअप कॉमेडियन: स्वराज</strong><br>
बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'राहुल गांधी ने जिस तरह की असभ्य, भद्दी और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं, उससे वे विपक्ष के नेता कम और एक फेल स्टैंड-अप कॉमेडियन ज्यादा लग रहे थे। वे हल्की और छिछोरी बातें कर रहे थे।'</p>
<p><strong>पीएम मोदी 38 देशों में सुरक्षित किया भारत का भविष्य: स्वराज</strong><br>
बांसुरी स्वराज ने राहुल पर बरसते हुए कहा-'भारत को विपक्ष के ऐसे नेता की जरूरत नहीं है जो 56 साल की उम्र में बच्चों जैसी हरकतें करे। अगर नरेंद्र मोदी की कूटनीति की बात करें, तो वे ऐसे नेता हैं जिन्होंने एक-दो नहीं, बल्कि नौ 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट' (मुक्त व्यापार समझौते) किए हैं, जिससे 38 देशों में भारत का आर्थिक भविष्य सुरक्षित हुआ है। ऐसा लगता है कि राहुल गांधी के पास कोई सकारात्मक एजेंडा नहीं है। अब वे सिर्फ़ सोशल मीडिया मीम्स और रील्स के लिए बयान देते हैं।'</p>
<p><strong>राहुल गांधी 56 साल हो गए, पर बचपना नहीं गया: बांसुरी स्वराज</strong><br>
बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि गांधी की भाषा विपक्ष के नेता से अपेक्षित गरिमा के खिलाफ थी। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के खिलाफ राहुल गांधी ने जिस तरह की असभ्य, अश्लील और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया है, वह विपक्ष के नेता जैसे संवैधानिक पद की गरिमा के पूरी तरह खिलाफ है।'</p>
<p>
अगर नरेंद्र मोदी की कूटनीति की बात करें, तो वे ऐसे नेता हैं जिन्होंने एक-दो नहीं, बल्कि नौ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं, जिससे 38 देशों में भारत का आर्थिक भविष्य सुरक्षित हुआ है।</p>
<p><strong>बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज</strong></p>
<p><strong>कुछ तो परिपक्व होइए, केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने सिखाया</strong></p>
<p>    राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गांधी से परिपक्व होने को कहा और उन पर प्रधानमंत्री पर हमला करके भारत के लोगों का अपमान करने का आरोप लगाया।</p>
<p>    प्रह्लाद जोशी ने कहा, 'राहुल गांधी, आप कब बड़े होंगे? भारत को चलाने के लिए परिपक्व नेतृत्व की जरूरत होती है, न कि नौसिखिया ड्रामेबाजी की। लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को 'जोकर और मसखरे' कहना साबित करता है कि आप अपनी समझ से बाहर की बातें कर रहे हैं।</p>
<p>
<strong>गिरिराज बोले-मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति राहुल गांधी</strong><br>
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने हमले को और तेज़ करते हुए राहुल गांधी को "मानसिक रूप से परेशान" बताया। उन्होंने सोनिया गांधी को सलाह दी कि वे 'उनके लिए मदद का इंतजाम करें'।</p>
<p><strong>निशिकांत दुबे ने इंदिरा गांधी की तस्वीर कर दी शेयर</strong><br>
बीजेपी के झारखंड के गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर क्यूबा यात्रा के दौरान इंदिरा गांधी का एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में इंदिरा गांधी से क्यूबा के राष्ट्रपति फिडेल कास्त्रो गले मिल रहे हैं।</p>
<p>
<strong>हंसना बेहद शर्मनाक, नई गिरावट: मजूमदार</strong><br>
केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने राहुल गांधी की टिप्पणियों को सार्वजनिक बातचीत के स्तर में एक नई गिरावट बताया। उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, 'पीएम नरेंद्र मोदी जी और इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी पर भद्दे मजाक करना और कांग्रेस नेताओं का उस पर हंसना बेहद शर्मनाक है। यह सार्वजनिक बातचीत के स्तर में एक नई गिरावट है। मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं।'</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>MP BJP में बड़े बदलाव की आहट! हेमंत खंडेलवाल की राष्ट्रीय अध्यक्ष से बंद कमरे में 30 मिनट चर्चा</title>
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<description><![CDATA[ भोपाल  mp bjp दतिया उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी में मंथन की प्रक्रिया जारी है। मध्यप्रदेश में संगठन में कसावट लाने की कवायद तेज हो गई है। दतिया में हार के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल गुरुवार को पहली बार दिल्ली पहुंचे। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। इस दौरान दोनों … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:16:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>BJP, में, बड़े, बदलाव, की, आहट, हेमंत, खंडेलवाल, की, राष्ट्रीय, अध्यक्ष, से, बंद, कमरे, में, मिनट, चर्चा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल </strong><br>
mp bjp दतिया उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी में मंथन की प्रक्रिया जारी है। मध्यप्रदेश में संगठन में कसावट लाने की कवायद तेज हो गई है। दतिया में हार के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल गुरुवार को पहली बार दिल्ली पहुंचे। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में चर्चा हुई। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में हेमंत खंडेलवाल ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को चुनाव की हार के पीछे के प्रमुख कारणों का फीडबैक दिया। प्रदेश संगठन में मजबूती के लिए बदलाव के संकेत हैं।</p>
<p>एमपी बीजेपी में दतिया में हार के बाद से जबर्दस्त उथलपुथल मची है। प्रदेश के स​भी वरिष्ठ भाजपा नेता, दिल्ली के शीर्ष नेताओं से मिल चुके हैं। दतिया में उपचुनाव में हार के बाद से मप्र के वरिष्ठ नेताओं की राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकातों ने प्रदेश में सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है।</p>
<p>मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी इससे पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से भेंट कर चुके हैं। इतना ही नहीं, एमपी के पूर्व सीएम व केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह, विस अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी केंद्रीय नेतृत्व से मिल चुके हैं। वहीं प्रदेश के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के दतिया से टिकट कटने पर भी चर्चाएं बनी हैं।</p>
<p><strong>पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं की तमाम गतिविधियों से अवगत कराया</strong><br>
बीजेपी का प्रदेश संगठन दतिया की हार पर एक विस्तृत रिपोर्ट पहले ही दिल्ली भेज चुका है। अब स्वयं प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दिल्ली जाकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से अकेले में मुलाकात की। दतिया विधानसभा उपचुनाव में पार्टी की हार पर बनी समिति की रिपोर्ट से उन्हें अवगत कराया। प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को हार की प्रमुख वजहें बताईं। टिकट वितरण से लेकर परिणाम आने तक की पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं की तमाम गतिविधियों से अवगत कराया।</p>
<p><strong>संगठन में मजबूती और कसावट के लिए बड़े बदलावों की चर्चा</strong><br>
वर्तमान माहौल में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मुलाकात बहुत अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि दतिया के परिणाम ने प्रदेश और केंद्र के शीर्ष नेतृत्व को झकझोर दिया है। संगठन में मजबूती और कसावट के लिए बड़े बदलावों की चर्चा है। सीएम मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं की पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से अलग अलग मुलाकातों को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। ​</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>खरगे के मंच के ‘शुद्धिकरण’ पर भड़के जेपी नड्डा, बोले&#45; ‘दुखदायी है, हम इसकी जांच करेंगे’; सदन में हंगामा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली उत्तराखंड के हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आठ अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद हुए ‘शुद्धिकरण&#039; अनुष्ठान का मुद्दा संसद में उठा. राज्यसभा में बोलते हुए कांग्रेस चीफ खरगे ने ये मुद्दा उठाया. इस पर बीजेपी सांसद जेपी नड्डा ने जवाब दिया. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 19:15:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>खरगे, के, मंच, के, ‘शुद्धिकरण’, पर, भड़के, जेपी, नड्डा, बोले-, ‘दुखदायी, है, हम, इसकी, जांच, करेंगे’, सदन, में, हंगामा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>उत्तराखंड के हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आठ अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद हुए ‘शुद्धिकरण' अनुष्ठान का मुद्दा संसद में उठा. राज्यसभा में बोलते हुए कांग्रेस चीफ खरगे ने ये मुद्दा उठाया. इस पर बीजेपी सांसद जेपी नड्डा ने जवाब दिया. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि जो कुछ भी हुआ वह दुखद है. ऐसी घटना आपके लिए ही नहीं बल्कि समूचे राष्ट्र के लिए दुखद है. हम इसकी जांच करेंगे. जेपी नड्डा ने कहा यह हम सभी के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए दुखदायी है. भाजपा ऐसी चीजों को स्वीकार नहीं करती। </p>
<p>जब मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि आप लोग ऐसा करते हैं. इस पर जेपी नड्डा ने आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि ऐसे आरोप लगाना ठीक नहीं है. जेपी नड्डा ने कहा कि हम तो कह रहे हैं कि जांच की जाएगी. उन्होंने कहा कि हम ऐसी घटना से दुखी हैं और खरगे जी की भावनाओं का भी सम्मान करते हैं। </p>
<p>इस घटना को लेकर राज्यसभा चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने भी दुख जताया. उन्होंने कहा कि हम सभी लोग इस पर दुख जताते हैं. मैं सरकार से भी कहूंगा कि इस घटना को अंजाम देने वालों को पकड़ें और उन्हें सजा दिलाएं।</p>
<p><strong>खरगे ने सदन में क्या कहा?</strong><br>
राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे अपनी बारी आने पर बोलने खड़े हुए तो उन्होंने हल्द्वानी में हुई एक घटना का जिक्र किया. उन्होंने सदन में बोलते हुए कहा, "बड़े दुख के साथ कहना पड़ता है, मैं हल्द्वानी में रामलीला मैदान में भाषण किया. लाखों लोग वाहां पर मौजूद थे. इस दौरान, मैंने किसी समाज और धर्म का नाम नहीं लिया. मैं वहां पर लोगों की समस्याओं को बताया. लेकिन मेरी स्पीच होने के बाद वहां पर बीजेपी के लोग मिलकर हवन करके, उस स्टेज का शुद्धीकरण करने का काम किया. क्या यही लोकतंत्र है। </p>
<p>
<strong>नड्डा बोले- भत्सर्ना करता हूं.</strong><br>
कांग्रेस अध्यक्ष के बोलने के बाद, बीजेपी सांसद जेपी नड्डा बोलने के लिए खड़े हुए और उन्होंने इस घटना पर खेद जताया. उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे के बयान  पर जवाब देते हुए कहा, "खरगे जी ने जो कहा है, यह सच में बहुत दुखदायी विषय है. यह सिर्फ कांग्रेस के लिए नहीं, बल्कि यह हम सबके लिए दुखदायी है. खरगे जी ने कहा कि बीजेपी के लोग थे लेकिन मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि इसमें बीजेपी के लोग शामिल नहीं थे। </p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि अगर आपने यह कहा है, तो हम इसकी तहकीकात करेंगे. मैं इसकी भत्सर्ना करता हूं और राष्ट्रीय अध्यक्ष जी गहराई से देखेंगे. आपकी भावनाओं को जो ठेस पहुंची है, वो सच में खेद का विषय है। </p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला?</strong><br>
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई 'विजय शंखनाद रैली' के बाद मैदान में शुद्धिकरण यज्ञ कराया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक, श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के अध्यक्ष गिरीश पांडे और पंडित मोहन शास्त्री ने कहा कि रैली के बाद रामलीला मैदान में शुद्धिकरण हवन किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि रैली के दौरान धार्मिक नारों और टिप्पणियों से मैदान की पवित्रता प्रभावित हुई है। </p>
<p>संगठन के सदस्यों ने खरगे को सनातन और हिंदू संगठनों का विरोधी बताते हुए कहा कि जिस मैदान में रामलीला का मंचन होता है. वहां ऐसे शख्स के आने के बाद मैदान का शुद्धिकरण किया जाना जरूरी था. संगठन ने खरगे के पिछले कथित सनातन विरोधी बयानों को भी इसका आधार बताया। </p>
<p>कांग्रेस की 'विजय शंखनाद रैली' में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे शामिल हुए थे. रैली के बाद उनके जाने के बाद हुए इस यज्ञ को लेकर अब सियासी गलियारों में बयानबाजी शुरू हो गई है। </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>MP कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक बदलाव, इसी सप्ताह भंग होगी प्रदेश कार्यकारिणी; Gen&#45;Z पर भी मंथन</title>
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<description><![CDATA[ भोपाल  कांग्रेस के प्रकोष्ठ और विभागों को पांच अगस्त को भंग किए जाने के बाद अब इसी सप्ताह पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी (पीसीसी) को भी भंग किया जाएगा। इसमें उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हैं। एक से दो माह में नई कार्यकारिणी बनेगी। इसके बाद प्रकोष्ठ और विभागों का पुनर्गठन किया जाएगा। इसमें … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 18:00:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल</strong><br>
 कांग्रेस के प्रकोष्ठ और विभागों को पांच अगस्त को भंग किए जाने के बाद अब इसी सप्ताह पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी (पीसीसी) को भी भंग किया जाएगा। इसमें उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हैं। एक से दो माह में नई कार्यकारिणी बनेगी। इसके बाद प्रकोष्ठ और विभागों का पुनर्गठन किया जाएगा।</p>
<p>इसमें कार्यकर्ताओं की भी राय ली जाएगी। प्रमुख पदाधिकारियों के चयन के लिए तीन-तीन नामों का पैनल बनेगा, जिसमें एक के नाम को केंद्रीय नेतृत्व हरी झंडी देगा। यह निर्णय मंगलवार को पीसीसी में कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) की बैठक में लिया गया है। बैठक में समिति के कुछ सदस्यों ने यह भी कहा कि नाम लिए जाते हैं, पर जब चयन होता है तो कोई और चेहरा आ जाता है। ऐसा नहीं होना चाहिए।</p>
<p><strong>जेन-जी पर फोकस</strong><br>
पांच घंटे तक चली बैठक में लगभग ढाई घंटे की चर्चा जेन-जी यानी युवाओं पर पर केंद्रित रही। तय किया गया है जबलपुर या इंदौर में जेन-जी से संवाद के लिए 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को भी बुलाने की तैयारी है। युवाओं के जिलेवार सम्मेलन भी होंगे। बैठक में कमल नाथ, दिग्विजय सिंह, अरुण यादव व्यक्तिगत कारणों से सम्मिलित नहीं हुए।</p>
<p><strong>अनुशासन तोड़ने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई<br>
बैठक में जन आंदोलन के मुद्दे और नगरीय निकाय चु</strong>नाव की तैयारियों पर भी चर्चा की गई। इसमें तय किया गया है कि अनुशासन तोड़ने वाले कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। इंटरनेट मीडिया पर विवादित पोस्ट डालने वालों को चिह्नित किया जाएगा। इस पर भी सहमति बनी है कि अन्य विभागों की तरह एससी विभाग की भी कमेटी बनेगी। संभागीय स्तर पर चल रहे प्रशिक्षण शिविरों में रीवा में राहुल गांधी को बुलाने पर चर्चा हुई।</p>
<p><strong>बैठक में किसने क्या कहा</strong><br>
प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने संगठन सृजन अभियान की समीक्षा की। विभाग का प्रकोष्ठों के पुनर्गठन में साफ छवि वालों के नाम तय करने के लिए कहा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा दतिया उपचुनाव प्रदेश में बदलाव के संकेत हैं। इससे कार्यकर्ताओं में उत्साह है। इसका लाभ आगामी नगरीय निकाय चुनाव में मिलेगा।</p>
<p>नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि केन-बेतवा परियोजना में विस्थापित परिवारों के लिए पार्टी लड़ेगी। राज्य सभा सदस्य विवेक तन्खा ने युवा आंदोलन चलाने और सोनम वांगचुक को शामिल करने का सुझाव दिया। महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रीना बौरासी ने जिला कार्यकारिणी के गठन की प्रगति बताई।</p>
<p><strong>बैठक में कांतिलाल भूरिया, कमलेश्वर पटेल, सज्जन सिंह वर्मा, संगठन प्रभारी संजय कामले, एनएसयूआइ के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे सहित प्रमुख पदाधिकारी शामिल हुए।</strong></p>
<p><strong>संभावित तीन-तीन उम्मीदवारों के नाम तय हों</strong>गे<br>
बैठक में अगले वर्ष होने वाले नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियों को लेकर भी लंबी चर्चा हुई। इसमें तय किया गया है कि जिलाध्यक्ष अभी से एससी, एसटी, ओबीसी और अनारक्षित श्रेणी के तीन-तीन नाम चिह्नित कर लें, जिससे आरक्षण निर्धारित होने के बाद प्रत्याशी चयन में जल्दबाजी नहीं हो। दतिया उपचुनाव की तरह ही नगरीय निकाय चुनावों में क्लस्टर और बूथ प्रबंधन का माडल अपनाया जाएगा।</p>
<p>जनआंदोलनों की बनी रूपरेखा, उज्जैन में होगा बड़ा आंदोलन<br>
बैठक में पार्टी ने जनआंदोलन के लिए मुद्दे भी निर्धारित किए हैं। पत्रकारों से बातचीत में पार्टी के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने आरोप लगाया कि उज्जैन में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के विरूद्ध पार्टी उज्जैन में बड़ा प्रदर्शन करेगी। राम मंदिर में चंदा घोटाला, केन-बेतवा लिंक परियोजना में विस्थापित परिवारों की समस्याएं, किसानों को खाद-बीज की उपलब्धता कम होने, कथित पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर बेवजह 62 लाख पुलिस प्रकरण भाजपा सरकार के समय दर्ज किए जाने, छात्र संघ चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाने, युवाओं की समस्याओं की लेकर अलग-अलग तरह से आंदोलन की रणनीति बनी है।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>परिसीमन के खिलाफ थलपति विजय का बड़ा ऐलान, बोले&#45; लोकसभा की सीटें 850 नहीं होने देंगे</title>
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<description><![CDATA[ चेन्नई  परिसीमन बिल को लेकर थलपति विजय ने एक बार फिर विद्रोही तेवर दिखाया है। नीट और FCRA बिल के खिलाफ प्रस्ताव पास करने के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने बुधवार को केंद्र की मोदी सरकार के परिसीमन प्लान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विजय ने तमिलनाडु विधानसभा में लोकसभा सीटों की … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 13:00:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>परिसीमन, के, खिलाफ, थलपति, विजय, का, बड़ा, ऐलान, बोले-, लोकसभा, की, सीटें, 850, नहीं, होने, देंगे</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चेन्नई </strong></p>
<p>परिसीमन बिल को लेकर थलपति विजय ने एक बार फिर विद्रोही तेवर दिखाया है। नीट और FCRA बिल के खिलाफ प्रस्ताव पास करने के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने बुधवार को केंद्र की मोदी सरकार के परिसीमन प्लान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विजय ने तमिलनाडु विधानसभा में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव को पेश करते हुए सीएम विजय ने साफ कर दिया कि वे दक्षिण भारत के अधिकारों की कीमत पर मोदी सरकार को लोकसभा सीटें नहीं बढ़ाने देंगे।</p>
<p>तमिलनाडु सरकार ने केंद्र सरकार के सामने यह स्पष्ट मांग रखी है कि देश में लोकसभा सीटों की कुल संख्या को हमेशा के लिए 543 पर ही फ्रीज रखा जाए। प्रस्ताव में कहा गया है कि तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों ने राष्ट्रीय नीतियों का पालन करते हुए जनसंख्या नियंत्रण को प्रभावी ढंग से लागू किया है। ऐसे में केवल आबादी के आधार पर सीटें बढ़ाने से संसद में तमिलनाडु और दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व हमेशा के लिए कमजोर हो जाएगा।</p>
<p><strong>850 सीटें करने का विरोध</strong><br>
तमिलनाडु सरकार के मुताबिक 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा की सीटें 550 से बढ़ाकर 850 करना उन राज्यों के लिए नुकसानदायक बेहद होगा, जिन्होंने केंद्र के जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से लागू किया है। प्रस्ताव में दक्षिणी राज्यों के हितों की रक्षा को केंद्र सरकार की जिम्मेदारी बताते हुए कहा गया, "यह केंद्र सरकार का कर्तव्य है कि दक्षिणी राज्यों को परिसीमन से किसी भी तरह का नुकसान न हो।…”</p>
<p><strong>महिला आरक्षण पर क्या बोले CM विजय?</strong><br>
प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री विजय ने महिला आरक्षण को लेकर कहा कि इसे मौजूदा सीटों की संख्या के हिसाब से लागू किया जाए। उन्होंने कहा, “2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर ही दिया जाना चाहिए। महिला आरक्षण में अब और देरी नहीं होनी चाहिए। तमिलनाडु में पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने ज्यादा मतदान किया है। महिलाओं को आरक्षण देना कोई रियायत नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का मामला है। 33 फीसदी महिला आरक्षण को बिना किसी और देरी के लागू किया जाना चाहिए।”</p>
<p><strong>केंद्र के सामने चार बड़ी मांगें</strong><br>
प्रस्ताव के जरिए तमिलनाडु सरकार ने केंद्र के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, लोकसभा की कुल सीटें मौजूदा 543 पर ही स्थायी रूप से बरकरार रखी जाएं। दूसरी मांग यह है कि राज्यों के बीच लोकसभा सीटों का बंटवारा मौजूदा प्रतिनिधित्व के अनुपात के आधार पर ही फ्रीज किया जाए। इसके अलावा आबादी और राज्यों के बीच मौजूदा 2.2:1 अनुपात को बनाए रखने की मांग है। वहीं 2029 के लोकसभा चुनाव में मौजूदा 543 सीटों के आधार पर महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिए जाने की भी मांग की गई है।</p>
<p><strong>परिसीमन बिल पर तकरार</strong><br>
गौरतलब है कि इससे पहले सरकार ने बीते 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया था। इसका मकसद लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाकर 850 करना और 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करना था। हालांकि, विधेयक को जरूरी दो-तिहाई विशेष बहुमत नहीं मिल सका और बिल पारित नहीं हो पाया। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने इस बिल का विरोध किया है। विपक्ष की मांग है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग कर लागू किया जाए।</p>]]> </content:encoded>
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<title>FCRA बिल पर विपक्ष में दरार! कांग्रेस ने वापसी की मांग की, TMC&#45;DMK ने अपनाई अलग राह</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली एफसीआरए संशोधन बिल को लेकर विपक्षी दलों के बीच एक राय नहीं बन पा रही है. कांग्रेस जहां बिल को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रही है, वहीं टीएमसी, डीएमके और बीजेडी की तरफ से इसे जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी यानी जेपीसी के पास भेजने की मांग सामने आई है. सरकार भी … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 21:00:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>FCRA, बिल, पर, विपक्ष, में, दरार, कांग्रेस, ने, वापसी, की, मांग, की, TMC-DMK, ने, अपनाई, अलग, राह</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>एफसीआरए संशोधन बिल को लेकर विपक्षी दलों के बीच एक राय नहीं बन पा रही है. कांग्रेस जहां बिल को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रही है, वहीं टीएमसी, डीएमके और बीजेडी की तरफ से इसे जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी यानी जेपीसी के पास भेजने की मांग सामने आई है. सरकार भी बिल को जेपीसी में भेजने के विकल्प पर विचार कर रही है। </p>
<p>एफसीआरए बिल को लेकर कांग्रेस का रुख फिलहाल सबसे सख्त है. पार्टी इसे वापस लेने की मांग कर रही है. विपक्षी दलों के बीच चर्चा के दौरान बिल को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है. वहीं, सरकार की ओर से विपक्षी दलों से बातचीत कर जेपीसी के रास्ते पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। </p>
<p><strong>TMC, DMK और BJD की JPC की मांग</strong><br>
टीएमसी ने राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में पहले बिल को जेपीसी के पास भेजने की बात कही थी, हालांकि बाद में पार्टी की तरफ से इसे वापस लेने की मांग भी सामने आई. डीएमके का कहना है कि बिल को या तो वापस लिया जाए या फिर विस्तृत जांच के लिए जेपीसी के पास भेजा जाए. बीजेडी ने भी बिल को जेपीसी में भेजने की मांग की है। </p>
<p>एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने भी केंद्र से बिल वापस लेने या जेपीसी के पास भेजने की मांग की है. उनका कहना है कि विदेशी फंडिंग को हमेशा संदेह की नजर से नहीं देखा जा सकता। </p>
<p><strong>सरकार की तैयारी, लेकिन संसद की तस्वीर अभी साफ नहीं<br>
एफसीआरए संशोधन बिल 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था. इस</strong>के बाद विभिन्न पक्षों की आपत्तियों के चलते इसे आगे बढ़ाने पर रोक लगी रही. बिल में विदेशी योगदान हासिल करने वाली संस्थाओं के एफसीआरए रजिस्ट्रेशन खत्म होने की स्थिति में उनसे जुड़े एसेट्स के प्रबंधन और निगरानी के लिए नई व्यवस्था का प्रस्ताव है। </p>
<p>सोमवार की बीएसी बैठक में एफसीआरए बिल और प्रस्तावित परिसीमन बिल एजेंडे में शामिल नहीं थे. ऐसे में अब सरकार के सामने विपक्ष से सहमति बनाने और बिल को आगे बढ़ाने के लिए जेपीसी का विकल्प मौजूद है. हालांकि, विपक्षी दलों के बीच ही बिल को लेकर अलग-अलग रुख होने से आगे की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>MP में BJP का ‘Plan Gen&#45;Z’! निकाय चुनाव में युवाओं को मिलेगा मौका, दिखेगा ‘पीढ़ी परिवर्तन’</title>
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<description><![CDATA[ भोपाल  देश और दुनिया में Gen-Z के बीच बढ़ती राजनीतिक सक्रियता और हालिया युवा आंदोलनों के बीच बीजेपी भी नई पीढ़ी से सीधे जुड़ने की तैयारी कर रही है. बताया जा रहा है कि बीजेपी युवाओं से कनेक्ट करने के लिए विशेष अभियान चलाएगी. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि इसके लिए पार्टी … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 20:00:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>में, BJP, का, ‘Plan, Gen-Z’, निकाय, चुनाव, में, युवाओं, को, मिलेगा, मौका, दिखेगा, ‘पीढ़ी, परिवर्तन’</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल </strong></p>
<p>देश और दुनिया में Gen-Z के बीच बढ़ती राजनीतिक सक्रियता और हालिया युवा आंदोलनों के बीच बीजेपी भी नई पीढ़ी से सीधे जुड़ने की तैयारी कर रही है. बताया जा रहा है कि बीजेपी युवाओं से कनेक्ट करने के लिए विशेष अभियान चलाएगी. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि इसके लिए पार्टी की ओर से विशेष अभियान चलाए जाने की रणनीति बनाई जा रही है. इसका मकसद युवाओं को संगठन से जोड़ना और पार्टी की नीतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है. वहीं प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि हम निकाय और पंचायत के चुनावों में नए चेहरे, युवाओं को मौका देंगे। </p>
<p><strong>कांग्रेस ने भी भरी हुंकार</strong><br>
बीजेपी की इस रणनीति पर कांग्रेस ने निशाना साधा है. कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी युवाओं के नाम पर केवल राजनीतिक सम्मेलन और अभियान करती है, लेकिन युवाओं के लिए रोजगार और राजनीतिक भागीदारी के वास्तविक अवसर नहीं देती. कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बरौलिया का कहना है कि बीजेपी युवाओं के साथ छलावा कर रही है. पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि युवाओं को रोजगार नहीं दिया जा रहा और अब टिकट देने के नाम पर भी सिर्फ बातें की जा रही हैं. कांग्रेस ने वास्तव में युवाओं को आगे बढ़ाया है टिकट दिया है. निकाय पंचायत के चुनाव में भी टिकट देंगे। </p>
<p><strong>युवाओं का दिल जीतने की चुनौती</strong><br>
बीजेपी के सामने निकाय चुनाव में युवाओं की नाराजगी और संभावित एंटी-इनकंबेंसी से निपटने की चुनौती भी है. ऐसे में पार्टी पुराने चेहरों की जगह युवा नेताओं और कार्यकर्ताओं को मौका देकर नई ऊर्जा के साथ चुनाव मैदान में उतरना चाहती है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक नगरीय निकाय चुनावों में ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जा सकती है, जो लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे हैं. स्थानीय स्तर पर युवाओं के बीच पकड़ रखते हैं. बीजेपी का मानना है कि नए चेहरों को मौका देने से संगठन में भी नई ऊर्जा आएगी और युवा मतदाताओं के साथ बेहतर संवाद स्थापित किया जा सकेगा। </p>
<p><strong>दोनों पार्टियों ने किया युवाओं के साथ होने का दावा</strong><br>
वहीं कांग्रेस ने दावा किया कि उसने हमेशा युवाओं को राजनीति में आगे बढ़ाने का काम किया है और नगरीय निकाय चुनाव में भी पार्टी युवा चेहरों को टिकट देकर उन्हें नेतृत्व का मौका देगी. अब देखना होगा कि बीजेपी का ‘प्लान Gen-Z’ और ‘पीढ़ी परिवर्तन’ का फॉर्मूला निकाय चुनाव में कितना असरदार साबित होता है और क्या युवा चेहरों पर दांव लगाकर पार्टी जीत की सीढ़ी चढ़ पाती है या नहीं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>छात्रों के मुद्दे पर NDA का विपक्षी अंदाज, संसद परिसर में मार्च; राहुल गांधी पर साधा निशाना</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली संसद के मौजूदा मॉनसून सत्र में हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने विपक्ष के रवैये के खिलाफ संसद भवन के मकर द्वार तक मार्च निकाला। सत्ताधारी सांसदों ने इस दौरान नेता विपक्ष राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। एनडीए सांसदों का आरोप … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 19:00:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>छात्रों, के, मुद्दे, पर, NDA, का, विपक्षी, अंदाज, संसद, परिसर, में, मार्च, राहुल, गांधी, पर, साधा, निशाना</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>संसद के मौजूदा मॉनसून सत्र में हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने विपक्ष के रवैये के खिलाफ संसद भवन के मकर द्वार तक मार्च निकाला। सत्ताधारी सांसदों ने इस दौरान नेता विपक्ष राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। एनडीए सांसदों का आरोप है कि विपक्ष जानबूझकर संसद की कार्यवाही को बाधित कर रहा है और छात्र प्रदर्शन के मुद्दे पर चर्चा से भाग रहा है। इस मार्च से ठीक पहले सत्ता पक्ष के सांसदों ने 'मंगल मिलन' कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई शीर्ष नेता मौजूद रहे।</p>
<p>बता दें कि संसद में जारी गतिरोध समाप्त करने के लिए सरकार ने सोमवार को ही प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई पर चर्चा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की पेशकश की थी। हालांकि कांग्रेस ने कहा कि विपक्ष राम मंदिर से चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री के जवाब तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की अपनी मांगों पर कायम है।</p>
<p>मंगलवार को जब सत्ताधारी दलों ने अपना मार्च निकाला उसी वक्त कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी सदन की ओर जा रही थीं। इस दौरान सांसदों ने उनसे भी सवाल किए। हालांकि प्रियंका बिना कुछ कहे आगे बढ़ गईं।</p>
<p>NDA के सांसदों ने विपक्ष के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान आरोप लगाया कि वे संसद में चर्चा से भाग रहे हैं। BJP सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा, "झारखंड के युवाओं को न्याय मिलना चाहिए। उन पर जिस तरह से लाठीचार्ज किया गया और ज्यादतियां हुईं, उससे राहुल गांधी की सोच का पता चलता है- इससे साफ होता है कि उनके समर्थकों की सरकार वाले राज्य में युवाओं के साथ कैसा बुरा बर्ताव हो रहा है और उन्हें न्याय से कैसे वंचित रखा जा रहा है। फिर भी, दूसरी तरफ, वे खुद तो सदन में आते नहीं, लेकिन गृह मंत्री से जवाब मांगते हैं। गृह मंत्री जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए झूठ फैला रहे हैं और गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं।" BJP सांसद अरुण गोविल ने कहा, "अब जब हम बहस के लिए तैयार हैं, तो वे इससे भाग रहे हैं। विपक्ष बहुत गैर-ज़िम्मेदाराना व्यवहार कर रहा है।"</p>
<p><strong>विपक्ष का भी जोरदार प्रोटेस्ट</strong><br>
बता दें कि इससे पहले कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष भी पिछले कई दिनों से इसी तरह के मार्च निकाल रहा है। अब सत्ताधारी दल भी उसी राह पर है। एनडीए को झारखंड में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद विपक्ष को घेरने को मौका मिल गया है। झारखंड में JMM के साथ कांग्रेस के गठबंधन की सरकार है। भाजपा सांसद राहुल गांधी से जवाब मांगते हुए सवाल भी कर रहे हैं कि क्या छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद कांग्रेस अपना समर्थन वापस लेगी।</p>
<p><strong>इतना ही नहीं, मंगलवार को भी संसद में NDA के अलावा, कांग्रेस के सांसदों ने भी विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस सांसद जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई 'पुलिस कार्रवाई' को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री के खिलाफ विरोध कर रहे हैं।</strong></p>
<p><strong>'मंगल मिलन' में दिखा देशभक्ति का रंग</strong><br>
इससे पहले संसद की लाइब्रेरी बिल्डिंग स्थित जीएमसी बालयोगी ऑडिटोरियम में एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक 'मंगल मिलन' बैठक आयोजित की गई। इस दौरान माहौल पूरी तरह से देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सभी सांसदों के हाथों में तिरंगा था और पूरा हॉल 'वंदे मातरम' तथा 'भारत माता की जय' के नारों से गूंज उठा। इस अहम बैठक में पीएम मोदी के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, किरेन रिजिजू और अर्जुन राम मेघवाल सहित एनडीए के तमाम सांसद उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>मकर द्वार तक मार्च और विपक्ष पर सीधा हमला</strong><br>
'मंगल मिलन' बैठक खत्म होने के बाद एनडीए के सांसदों ने संसद के मकर द्वार की ओर अपना मार्च शुरू किया। प्रदर्शन कर रहे सांसदों के हाथों में तख्तियां थीं। सरकार की ओर से यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया कि गृह मंत्री अमित शाह जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर सदन में बयान देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, लेकिन विपक्षी दल जानबूझकर इस बहस से कन्नी काट रहे हैं।</p>
<p><strong>किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी को दी नसीहत</strong><br>
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस गतिरोध को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा तंज कसा। रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी पिछले कई दिनों से गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की मांग कर रहे थे। अब जब गृह मंत्री उनके सभी सवालों का विस्तार से जवाब देने के लिए तैयार बैठे हैं, तो राहुल गांधी को संसद से "भागना" नहीं चाहिए और सदन में रहकर इस चर्चा में शामिल होना चाहिए।</p>]]> </content:encoded>
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<title>MP कांग्रेस की PAC बैठक में बड़ा फेरबदल, कमलनाथ&#45;दिग्विजय और अरुण यादव नहीं होंगे शामिल</title>
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<description><![CDATA[ भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (PAC) की अहम बैठक मंगलवार को भोपाल स्थित कांग्रेस मुख्यालय में होगी। बैठक में इस बार मुख्य एजेंडा संगठन सृजन और पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना रहेगा।प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी अब तक संगठन सृजन के तहत हुए काम की समीक्षा करेंगे। इसके साथ … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 14:00:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>कांग्रेस, की, PAC, बैठक, में, बड़ा, फेरबदल, कमलनाथ-दिग्विजय, और, अरुण, यादव, नहीं, होंगे, शामिल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल</strong><br>
 मध्य प्रदेश कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (PAC) की अहम बैठक मंगलवार को भोपाल स्थित कांग्रेस मुख्यालय में होगी। बैठक में इस बार मुख्य एजेंडा संगठन सृजन और पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना रहेगा।प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी अब तक संगठन सृजन के तहत हुए काम की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही आगामी दिनों में संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर भी चर्चा होगी।</p>
<p><strong>विमान के इंजन में खराबी, नकुलनाथ छिंदवाड़ा से नहीं उड़ सके</strong><br>
बैठक में पहली बार नकुलनाथ के शामिल होने की संभावना थी, लेकिन छिंदवाड़ा से भोपाल आने वाले विमान के एक इंजन में खराबी आ गई। इसके चलते विमान उड़ान नहीं भर सका और नकुलनाथ बैठक में शामिल नहीं हो पाए।</p>
<p>नकुलनाथ के साथ प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी भी इसी विमान से भोपाल आने वाले थे। विमान में खराबी के बाद हरीश चौधरी कार से छिंदवाड़ा से भोपाल के लिए रवाना हो गए हैं। संभावना है कि वे बैठक में वर्चुअली शामिल होंगे।</p>
<p><strong>पटवारी के कार्यकाल में पहली बार PAC बैठक में शामिल होना था</strong><br>
जीतू पटवारी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद PAC के सदस्य नकुलनाथ पहली बार राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में शामिल होने वाले थे। कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने कुछ दिन पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि इस बार PAC की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी शामिल होंगे। हालांकि, अब नकुलनाथ के विमान में तकनीकी खराबी के कारण उनके बैठक में पहुंचने पर विराम लग गया है।</p>
<p><strong>सभी सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से शामिल होने के लिए बुलाया गया</strong><br>
बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, संगठन महासचिव डॉ. संजय कामले, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा सहित PAC के अन्य सदस्य मौजूद रहेंगे। पिछली बैठक ऑनलाइन आयोजित की गई थी, लेकिन इस बार कमेटी के सभी 37 सदस्यों को बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने के लिए बुलाया गया है।</p>
<p><strong>दिग्विजय सिंह और अरुण यादव फिलहाल विदेश में हैं</strong><br>
बैठक में पार्टी के तीन प्रमुख नेता पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व सांसद अरुण यादव शामिल नहीं होंगे। जानकारी के मुताबिक, दिग्विजय सिंह और अरुण यादव फिलहाल विदेश में हैं, जबकि कमलनाथ की तबीयत ठीक नहीं होने के कारण उनके बैठक में शामिल होने की संभावना नहीं है। वहीं, छिंदवाड़ा के पूर्व सांसद नकुलनाथ के बैठक में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p><strong>दतिया चुनाव की समीक्षा और निकाय चुनाव की तैयारियों पर मंथन</strong><br>
बैठक में दतिया चुनाव की समीक्षा के साथ नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियों को लेकर पार्टी की रणनीति पर मंथन किया जाएगा। इसके अलावा यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई और महिला कांग्रेस की गतिविधियों और संगठनात्मक कामकाज की भी समीक्षा होगी।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>झारखंड क्यों नहीं गईं?’ संसद में BJP सांसद ने प्रियंका गांधी को घेरा, मिला ये जवाब</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  संसद के मॉनसून सत्र के दौरान परिसर में गहमागहमी देखने को मिली। एक तरफ जहां एनडीए और विपक्ष के सांसद आमने-सामने होकर जोरदार नारेबाजी कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ BJP के सांसदों ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी को घेर लिया। बीजेपी सांसदों ने प्रियंका को घेरते हुए सवाल किया कि आखिर वह … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 14:00:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>झारखंड, क्यों, नहीं, गईं’, संसद, में, BJP, सांसद, ने, प्रियंका, गांधी, को, घेरा, मिला, ये, जवाब</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p> संसद के मॉनसून सत्र के दौरान परिसर में गहमागहमी देखने को मिली। एक तरफ जहां एनडीए और विपक्ष के सांसद आमने-सामने होकर जोरदार नारेबाजी कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ BJP के सांसदों ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी को घेर लिया। बीजेपी सांसदों ने प्रियंका को घेरते हुए सवाल किया कि आखिर वह झारखंड क्यों नहीं गईं और वहां के छात्रों के मुद्दे पर क्यों चुप हैं। इस पर प्रियंका गांधी ने <strong>तुरंत जवाब देते हुए कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पहले ही झारखंड के छात्रों से मिल चुके हैं।</strong></p>
<p><strong>'राहुल गांधी ने की है मुलाकात', प्रियंका का पलटवार</strong><br>
संसद परिसर में जैसे ही बीजेपी सांसदों ने प्रियंका गांधी को रोककर सवाल पूछा कि वे झारखंड के छात्रों की समस्याओं पर बोलने से क्यों बच रही हैं, तो प्रियंका ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पहले ही झारखंड के छात्रों से मुलाकात कर चुके हैं और उनकी बात को प्रमुखता से सुन चुके हैं।</p>
<p><strong>संसद परिसर में जमकर हंगामा, विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन</strong><br>
सत्र खत्म होने से ठीक पहले सदन के बाहर भी जबरदस्त घमासान देखने को मिला। विपक्षी सांसद हाथों में नारे लिखे पोस्टर लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ लगातार प्रदर्शन करते दिखे। इसी दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद अक्षय यादव अन्य नेताओं के साथ संसद परिसर में दान-पेटियां और गन्ने का पेड़ लेकर पहुंचे और अनोखे अंदाज में विरोध जताया। परिसर में बढ़ती धक्का-मुक्की और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों को तुरंत 'ह्यूमन चेन' बनाकर स्थिति संभालनी पड़ी।</p>
<p><strong>'मंगल मिलन' बैठक में एनडीए ने बनाई रणनीति</strong><br>
सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले एनडीए सांसदों की 'साप्ताहिक मंगल मिलन' बैठक हुई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू सहित एनडीए के कई बड़े नेता मौजूद रहे। इस बैठक के दौरान मॉनसून सत्र के अंतिम दिनों की रणनीति पर चर्चा हुई, जिसमें विपक्ष के हंगामे के बीच जरूरी विधेयकों को पारित कराने और विपक्ष के हमलों का एकजुट होकर मजबूती से जवाब देने पर सहमति बनी।</p>
<p><strong>हंगामे के चलते लगातार बाधित हुई कार्यवाही</strong><br>
20 जुलाई से शुरू हुआ यह मॉनसून सत्र अब 13 अगस्त को खत्म होने वाला है। पूरे सत्र के दौरान विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई है, जिससे कई दिनों तक प्रश्नकाल भी पूरा नहीं हो सका। बीते दिन भी शोर-शराबे के चलते दोनों सदनों को स्थगित करना पड़ा था।</p>]]> </content:encoded>
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<title>दतिया में BJP का नया प्लान! नरोत्तम मिश्रा पर सस्पेंस, आशुतोष तिवारी को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी</title>
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<description><![CDATA[ भोपाल  उप चुनाव में मिली हार के बाद प्रदेश भाजपा अब नया प्लान लेकर दतिया में उतरने की तैयारी कर रही है। प्लान में बहुत कुछ तय कर लिया है, जिसकी घोषणा होनी बाकी है। नए प्लान के साथ ही दो प्रमुख नेताओं की नई भूमिकाएं भी सामने आ सकती हैं। दतिया उपचुनाव में प्रत्याशी … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 10:00:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>दतिया, में, BJP, का, नया, प्लान, नरोत्तम, मिश्रा, पर, सस्पेंस, आशुतोष, तिवारी, को, मिल, सकती, है, बड़ी, जिम्मेदारी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल</strong><br>
 उप चुनाव में मिली हार के बाद प्रदेश भाजपा अब नया प्लान लेकर दतिया में उतरने की तैयारी कर रही है। प्लान में बहुत कुछ तय कर लिया है, जिसकी घोषणा होनी बाकी है। नए प्लान के साथ ही दो प्रमुख नेताओं की नई भूमिकाएं भी सामने आ सकती हैं। दतिया उपचुनाव में प्रत्याशी रहे आशुतोष तिवारी को जहां बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है वहीं नरोत्तम मिश्रा की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। दतिया में उनके योगदान और प्रभुत्व को पार्टी नकार नहीं पा रही।</p>
<p><strong>दतिया में हार की जिम्मेदारी तय होनी बाकी, तब तक भाजपा जारी नहीं करेगी नया प्लान</strong></p>
<p>बीजेपी के नए प्लान का सबसे बड़ा हिस्सा दतिया जिले की नई कार्यकारिणी है। अभी यह तय नहीं हुआ है कि कार्यकारिणी को एक ही बार में जारी किया जाए या फिर इसकी टुकड़ों में घोषणा की जाए। चूंकि दतिया में हार की जिम्मेदारी तय होनी बाकी है, तब तक भाजपा नया प्लान जारी नहीं करेगी।</p>
<p><strong>कांग्रेस 2028 में तीसरी जीत के लिए अभी से कर रही तैयारी</strong><br>
उधर उप चुनाव जीत चुकी कांग्रेस 2028 के चुनाव में भी जीत को बरकरार रखने की तैयारी में है। कांग्रेस यह सीट किसी हाल में खोना नहीं चाहेगी। चूंकि घनश्याम सिंह मजबूत प्रत्याशी थे, जो विधायक बन चुके हैं। वे दतिया में अपनी स्वीकारोक्ति बढ़ाएंगे। वहीं भाजपा को इन दो साल में जमीनी स्तर पर जन विश्वास जीतना होगा।</p>
<p><strong>भाजपा की हार का अंतर बढ़कर 5604</strong><br>
भाजपा ने 6 मंडलों के 46 शक्ति केंद्रों पर पूरा जोर लगाया। लेकिन चुनाव परिणाम के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि, 2023 में भाजपा पूरे नगर पालिका क्षेत्र में 2691 वोटों से पीछे रही थी।</p>
<p>लेकिन 2026 के उपचुनाव के आंकड़े बताते हैं कि नगर मंडल में भाजपा की हार का अंतर बढ़कर 5604 हो गया है। भाजपा के लिए शहर के अंतर में 2913 वोटों का और नुकसान हुआ, जो उपचुनाव में हार का सबसे बड़ा कारण बना।</p>
<p><strong>नए जिलाध्यक्ष के लिए आशुतोष और घनश्याम के नाम</strong><br>
दतिया में नए जिलाध्यक्ष की दौड़ में पूर्व विधायक घनश्याम पिरोनिया और हाल ही में चुनाव हारे आशुतोष तिवारी के नाम चर्चा में हैं। घनश्याम पिरोनिया दलित वर्ग से आते हैं। आजाद समाज पार्टी के दलित वोटरों को साधने के लिए भाजपा उन्हें जिलाध्यक्ष बना सकती है।</p>
<p>वहीं, यदि पार्टी नरोत्तम के खिलाफ कड़ा संदेश देना चाहती है तो आशुतोष तिवारी को जिलाध्यक्ष बनाकर उन्हें मजबूत नेता के रूप में <strong>स्थापित करने की कोशिश कर सकती है।</strong></p>
<p><strong>तय की जाएगी जिम्मेदारी</strong><br>
चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट बीजेपी हाईकमान को सौंपी जाएगी. रिपोर्ट के आधार पर सभी की जिम्मेदारी तय की जाएगी. जिम्मेदारी तय <strong>करने के फैसले से कयास लगाए जा रहे हैं कि जिम्मेदार नेताओं पर पार्टी एक्शन भी ले सकती है। </strong></p>
<p><strong>नरोत्तम मिश्रा का बार-बार हो रहा जिक्र</strong><br>
दरअसल, दतिया में हार के कारणों की जब भी चर्चा होती है, बार बार पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम सामने आता है. दतिया में नरोत्तम मिश्रा काफी मजबूत नेता माने जाते हैं. वर्षों से उनका इस सीट पर दबदबा रहा है. इस बीच जब उन्हें टिकट न देकर पार्टी ने पहली बार चुनाव लड़ रहे आशुतोष मिश्रा को मैदान में उतारा तो नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों में खासा नाराजगी दिखी. नरोत्तम खुद पार्टी के इस फैसले <strong>से भावुक हो गए थे. विशेषज्ञों का कहना है कि उनके समर्थकों की नाराजगी भी बीजेपी की हार का कारण हो सकती है। </strong></p>
<p><strong>नया चेहरा लाने पर बीजेपी को हुआ नुकसान?</strong><br>
दतिया सीट पर उपचुनाव में 6 बार के विधायक नरोत्तम मिश्रा की जगह नए चेहरे को उम्मीदवार बनाने का BJP का फैसला सफल नहीं रहा. कांग्रेस ने यह सीट बरकरार रखी. कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने सोमवार को BJP के आशुतोष तिवारी को 6016 मतों से हराया.  राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, BJP की हार केवल एक विधानसभा सीट का नुकसान नहीं है बल्कि यह मध्य प्रदेश में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के लिए भी बड़ा झटका है। </p>
<p><strong>दतिया में बीजेपी की ये 3 अहम चुनौतियां</strong></p>
<p><strong>अभी तय करना होगा, दतिया का चेहरा:</strong></p>
<p>भाजपा दतिया में काफी कुछ बदलना चाहती है इसके लिए कई मोर्चों पर काम करने की योजना है। अगले कुछ ही दिनों में दतिया में वह चेहरा घोषित हो सकता है, जो भविष्य में दतिया सीट का चेहरा हो। यूं कहें कि जिले में भाजपा को जिताने वाला हो।<br>
<strong>सर्वमान्य मुखिया की तलाश:</strong></p>
<p>नए प्लान में भाजपा प्रत्याशी रहे आशुतोष तिवारी को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। यह उनकी इच्छा पर भी निर्भर होगा। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, दतिया में जो हालात हैं, उसे देखकर ऐसा चेहरा नहीं थोप सकते, जो जमीनी पकड़ व सर्वमान्य श्रेणी से बाहर हो।</p>
<p><strong>नरोत्तम पर स्थिति स्पष्ट नहीं:</strong><br>
पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा भाजपा के कद्दावर नेताओं में एक हैं। दतिया में भाजपा को मजबूती देने में उनकी मेहनत को नकारा नहीं जा सकता। ऐसे में अभी नरोत्तम की भूमिका तय करनी होगी। यदि ऐसा नहीं हुआ तो आगामी चुनावों में इसके फायदे कम, नुकसान ज्यादा हो सकते हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<title>PM मोदी से मिले शरद पवार गुट के सांसद, महाराष्ट्र की सियासत में क्या पक रही है खिचड़ी?</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली महाराष्ट्र की सियासत में एक नई सियासी बिसात बिछती नजर आ रही है. बांकीपुर में बीजेपी के मात देकर विधायक बने प्रशांत किशोर महाराष्ट्र में डिप्टीसीएम सुनेत्रा पवार के साथ मेल-मुलाकात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ सियासी के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार और बीजेपी के बीचनजदीकियां बढ़ रही है. शरद … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Aug 2026 21:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मोदी, से, मिले, शरद, पवार, गुट, के, सांसद, महाराष्ट्र, की, सियासत, में, क्या, पक, रही, है, खिचड़ी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>महाराष्ट्र की सियासत में एक नई सियासी बिसात बिछती नजर आ रही है. बांकीपुर में बीजेपी के मात देकर विधायक बने प्रशांत किशोर महाराष्ट्र में डिप्टीसीएम सुनेत्रा पवार के साथ मेल-मुलाकात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ सियासी के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार और बीजेपी के बीचनजदीकियां बढ़ रही है. शरद पवार के सभी सांसद सोमवार को पीएम मोदी से संसद भवन में मुलाकात कि। </p>
<p>शरद पवार के सभी आठ लोकसभा सांसद संसद भवन स्थिति प्रधानमंत्री कार्यलय में पीएम मोदी से मुलाकात हुई. आधे घंटे तक एनसीपी (एसपी) सांसदों ने पीएम मोदी के बात किया. इस मुलाकात के पीछे की वजह महाराष्ट्र के अहम मुद्दों को लेकर एनसीपी (एसपी) के सांसद प्रधानमंत्री मोदी के साथ किया। </p>
<p>सुप्रिया सुले के मुताबिक पार्टी ने महाराष्ट्र से जुड़े कई गंभीर और लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों पर प्रधानमंत्री का ध्यान खींचने के लिए मुलाकात का समय मांगा था. संसद की कार्यवाही लगातार बाधित होने के कारण सांसदों ने अब सीधे प्रधानमंत्री से मिलकर राज्य की समस्याएं रखने का फैसला किया है। </p>
<p><strong>पीएम मोदी से एनसीपी सांसदों ने रखी कई मांग</strong><br>
शरद पवार गुट के सांसदों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच आधे घंटे तक बैठक चली. इस दौरान शरद पवार के सांसदों ने पीएम मोदी से खुलकर बात की. सांसदों ने प्रधानमंत्री के सामने महाराष्ट्र में सूखे और सिंचाई से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई. सांसदों ने प्रधानमंत्री के साथ अपने संसदीय क्षेत्रों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की।</p>
<p>पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान शरद पवार के सांसदों ने मांग किया है कि महात्मा ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले, शाहीर अन्ना भाऊ साठे और तुकडोजी महाराज को भारत रत्न दिया जाए. नवी मुंबई एयरपोर्ट का नाम डी. वाई. पाटिल एयरपोर्ट रखने की मांग भी की गई। </p>
<p>एनसीपी (एसपी) सांसदों ने प्रधानमंत्री को एक लिखित ज्ञापन सौंपा, NCP-SP के सांसदों ने प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक को सकारात्मक बताया.प्रधानमंत्री ने कहा कि इन समस्याओं पर ध्यान देने की ज़रूरत है और उन्होंने इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई का भरोसा दिलाया।</p>
<p><strong>सुप्रिया सुले ने बताया पीएम से क्यों मिल रहे</strong><br>
सुप्रिया सुले ने बताया कि महाराष्ट्र के सामने इस समय कई गंभीर चुनौतियां हैं. इनमें पानी की कमी, किसानों की आत्महत्या, तेजी से बढ़ता शहरीकरण और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों से जुड़ी समस्याएं प्रमुख हैं. उन्होंने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना यानी MPLAD फंड का मुद्दा भी उठाया। </p>
<p>सुले के मुताबिक, सांसदों को अपने क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए मिलने वाले 5 करोड़ रुपये के फंड का इस्तेमाल करने में भी कई व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की ओर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिलने के कारण इन फंडों का इस्तेमाल प्रभावित हो रहा है। </p>
<p><strong>बीजेपी ने किया मुलाकात का स्वागत</strong><br>
बीजेपी नेता नवनीत राणा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि महाराष्ट्र के विकास के लिए अगर शरद पवार की पार्टी के सांसद मिल रहे हैं. मुझे लगता है कि वो महाराष्ट्र की और प्रगति के बारे में सोच रहे हैं और इस सोच के साथ पीएम मोदी से मिल रहे हैं तो इसमें किसी तरह की कोई बुरी बात नहीं है। </p>
<p>नवनीत राणा ने कहा कि कयास तो कुछ भी लगाया जा सकता है. मुझे लगता है कि हर कयास अच्छा ही होगा महाराष्ट्र के विकास के लिए. मुझे लगता है कि अगर वो कुछ सोच भी रहे हैं तो इससे बड़ी अच्छी बात हो नहीं सकती है.उन्होंने आगे कहा कि अगर वो महाराष्ट्र के विकास के लिए मिलते हैं पीएम मोदी से, उनसे विनती करते हैं तो अच्छा है. जो आप लोग सोच रहे हैं, वो हो जाये तो ये महाराष्ट्र और उनके क्षेत्र का नसीब होगा। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>TMC के बागी सांसदों में भी बढ़ी दूरी, यूसुफ पठान समेत 3 सांसद BJP से क्यों बना रहे दूरी?</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली बंगाल में टीएमसी की करारी हार के बाद 20 सांसदों ने विद्रोह किया और वे नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का हिस्सा हो गए। यह स्पष्ट था एनडीए का समर्थन करने के लिए ही इस पार्टी का दामन थामा गया है। वहीं अब कई बागी सांसदों में असंतोष साफ नजर आ रहा … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Aug 2026 17:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>बंगाल में टीएमसी की करारी हार के बाद 20 सांसदों ने विद्रोह किया और वे नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का हिस्सा हो गए। यह स्पष्ट था एनडीए का समर्थन करने के लिए ही इस पार्टी का दामन थामा गया है। वहीं अब कई बागी सांसदों में असंतोष साफ नजर आ रहा है और ऐसे में बागी गुट में दरार पड़ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ये तीनों ही सांसद मुर्शिदाबाद में मुस्लिम बहुल सीटों से चुने गए सांसद हैं। इनमें पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान का भी नाम शामिल है। वह बहरामपुर से सांसद हैं।</p>
<p><strong>बीजेपी से करीबी, वोट बैंक को खतरा</strong><br>
सूत्रों के मुताबिक इन तीनों ही सांसदों का मानना है कि बीजेपी से करीबी रखने पर उनका वोट बैंक बुरी तरह प्रभावित होगा। ऐसे में उनका यही कहना है कि बीजेपी के करीब जाना मतलब अपने क्षेत्र की जनता को धोखा देना है। यूसुफ पठान के अलावा इस लिस्ट में मुर्शिदाबाद से सांसद अबू ताहिर खान और जंगीपुर से सांसद खलीलुर रहमान शामिल हैं।</p>
<p><strong>एनडीए की बैठक से भी बनाई दूरी</strong><br>
हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एनडीए की बैठख में भी तीनों सांसद शामिल नहीं हुए थे। हालांकि दिल्ली में ही जब शुभेंदु अधिकारी ने बैठक बुलाई तो ये तीनों सांसद पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के मुद्दे पर अपनी बात रखने के लिए वे बैठक में गए थे। बता दें कि अबू ताहिर काफी अनुभवी नेता हैं। 2019 में वह टीएमसी में शामिल हुए थे और जंगीपुर <strong>से दो बार के सांसद हैं।</strong></p>
<p><strong>क्या बोले अबू ताहिर</strong><br>
बीते दिनों सांसद अबू ताहिर ने कहा कि वह ''एनडीए में नहीं हैं'', हालांकि वह शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कई सहयोगी दलों के सांसदों के लिए नाश्ते पर आयोजित बैठक में शामिल हुए। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से सांसद ताहिर ने कहा कि इस कार्यक्रम में वह सिर्फ लोगों के मुद्दे उठाने के लिए शामिल हुए। इन मुद्दों में, राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम कथित तौर पर हटाए जाने, मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर पाबंदी और उनके संसदीय क्षेत्र में नयी रेलवे लाइन की मांग शामिल है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक अपनी चिंताओं से उन्हें सीधे अवगत कराने का एक अवसर था, न कि भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को समर्थन देने का कोई संकेत। बता दें कि कल्याण बनर्जी समेत कुछ सांसद अब भी ममता बनर्जी के ही समर्थन में हैं। बनर्जी ने कहा कि बागी सांसद सबको गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा, इन लोगों ने स्पीकर को पत्र देकर कहा कि वे एनसीपीआई के सदस्य हैं। एनसीपीआई पहले सेही एनडीए का हिस्सा है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>राजनाथ सिंह ने रक्तदान अभियान को बताया सैनिकों के प्रति देश की जिम्मेदारी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली में ‘सिंदूर आर्मी महा ब्लड डोनेशन यात्रा’ के दूसरे वर्ष के अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिस्सा लिया और रक्तदान को सैनिकों के प्रति देश की जिम्मेदारी से जोड़ा। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने जहां भारत के पराक्रम को दिखाया, वहीं यह रक्तदान … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Aug 2026 11:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>राजनाथ, सिंह, ने, रक्तदान, अभियान, को, बताया, सैनिकों, के, प्रति, देश, की, जिम्मेदारी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 राजधानी दिल्ली में ‘सिंदूर आर्मी महा ब्लड डोनेशन यात्रा’ के दूसरे वर्ष के अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिस्सा लिया और रक्तदान को सैनिकों के प्रति देश की जिम्मेदारी से जोड़ा। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने जहां भारत के पराक्रम को दिखाया, वहीं यह रक्तदान अभियान देश की करुणा और संवेदनशीलता का प्रतीक है।</p>
<p><strong>‘ऑपरेशन सिंदूर’ शौर्य, रक्तदान करुणा का प्रतीक</strong><br>
राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर वीरता के एक आयाम का प्रतीक था, जबकि सिंदूर रक्तदान अभियान करुणा का दूसरा आयाम दिखाता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह सैनिक देश की रक्षा के लिए अपना जीवन दांव पर लगाते हैं, उसी तरह नागरिक भी रक्तदान के जरिए घायल जवानों की मदद कर सकते हैं।</p>
<p>ऑपरेशन सिंदूर वीरता का आयाम था, वहीं ‘सिंदूर महारक्तदान यात्रा' करुणा का आयाम है। तब सीमा के पार जाकर भारत की संतानों की सुरक्षा सुनिश्चित की, और आज हम यह संकल्प ले रहे हैं कि देश की सेवा में घायल एक भी सैनिक रक्त की कमी से न जूझे। यही विश्वास, यही भावना भारत की आत्मा है।</p>
<p><strong>सीमा पार दुश्मनों को दिया जवाब</strong><br>
रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने सीमा पार जाकर उन लोगों को करारा जवाब दिया, जिन्होंने देश के बच्चों पर हाथ उठाने की हिम्मत की थी। उन्होंने कहा कि उस समय भारतीय सशस्त्र बलों ने अपने साहस और पराक्रम का परिचय दिया। अब देश के भीतर रक्तदान के जरिए सैनिकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का समय है।</p>
<p>अब दूर-दराज क्षेत्रों तक पहुंचेगी अग्निशमन सेवाएं, सीएम हेमंत बोले- आधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम जरूरी</p>
<p><strong>‘एक भी जवान को खून की कमी से जूझना न पड़े’</strong><br>
राजनाथ सिंह ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश की सेवा करते हुए घायल होने वाला कोई भी सैनिक खून की कमी के कारण परेशानी में न पड़े। उन्होंने रक्तदान को सैनिकों के प्रति सम्मान और सेवा का माध्यम बताया। उनका कहना था कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों के लिए नागरिकों का यह योगदान बेहद महत्वपूर्ण है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>ममता बनर्जी के काफिले पर हमला, भीड़ ने कीचड़, जूते&#45;चप्पल और बोतलें फेंकी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हलिशहर में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिला पर भीड़ ने हमला कर दिया. दरअसल, पूर्व सीएम का काफिल एक मृत तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ता के घर जा रहा था. तभी गुस्साई भीड़ ने उसे बीच रास्ते में रोक लिया और हमला कर दिया. प्रदर्शनकारियों … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 21:45:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हलिशहर में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिला पर भीड़ ने हमला कर दिया. दरअसल, पूर्व सीएम का काफिल एक मृत तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ता के घर जा रहा था. तभी गुस्साई भीड़ ने उसे बीच रास्ते में रोक लिया और हमला कर दिया.</p>
<p>प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री की गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया, उस पर कीचड़ फेंका और पानी की बोतलें, जूते तथा चप्पलें बरसाईं. आक्रोशित भीड़ ने ममता बनर्जी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. गुस्साई भीड़ ने उन्हें चोर और डकैतों की रानी जैसे ताने दिए.</p>
<p>स्थिति को बिगड़ता देख मौके पर तुरंत पुलिस बल पहुंचा और सुरक्षा के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उस इलाके से सुरक्षित बाहर निकाला.</p>
<p><strong>'बड़ा-बड़ा पत्थर मारा गया, माथा फट जाता…'</strong><br>
 पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी गाड़ी पर हुए हमले को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि पुलिस के सामने ही कुछ असामाजिक तत्वों ने उनकी गाड़ी पर बड़े-बड़े पत्थर फेंके. हमला इतना भयानक था कि अगर गाड़ी की खिड़कियां खुली होतीं, तो उनका सिर फट जाता और वे सभी लोग मारे भी जा सकते थे.</p>
<p> ममता बनर्जी ने हैरानी जताते हुए कहा कि ऐसा उन्होंने अपनी जिंदगी में पहले कभी नहीं देखा और यह सब सीधे पुलिस की मौजूदगी में हुआ है. उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पुलिस भाजपा को सुरक्षा दे रही है.</p>
<p> ममता बनर्जी ने सवालिया लहजे में कहा कि आखिर यह सब क्या चल रहा है? राज्य में हालात किस ओर जा रहे हैं?</p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला?</strong><br>
मिली जानकारी के मुताबिक, ममता बनर्जी एक स्थानीय मृत तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ता के परिवार से मिलने उनके घर जा रही थीं. शुक्रवार को पुलिस कस्टडी में संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई थी.<br>
रास्ते में जैसे ही उनका काफिला हलिशहर पहुंचा, वहां पहले से मौजूद गुस्साई भीड़ ने गाड़ियों को आगे बढ़ने से रोक दिया. यह विरोध प्रदर्शन इतना उग्र था कि कुछ ही पलों में हालात काबू से बाहर होने लगे.</p>
<p>प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इस कदर सातवें आसमान पर था कि उन्होंने ममता बनर्जी की गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया. भीड़ ने गाड़ी पर कीचड़ फेंकने के साथ-साथ पानी की बोतलें, जूते और चप्पलें बरसानी शुरू कर दीं. गाड़ी के आसपास भारी हंगामा होता रहा और चारों तरफ तनाव फैल गया.</p>
<p>इस दौरान आक्रोशित भीड़ ने तीखे और आक्रामक नारे भी लगाए. प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री को चोर और डकैतों की रानी कहकर संबोधित किया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया.</p>
<p><strong>कस्टडी में मौत को लेकर भड़का गुस्सा</strong><br>
पार्टी कार्यकर्ता की संदिग्ध मौत की वजह भीड़ गुस्से में थी. मृतक कार्यकर्ता के परिवार वालों ने स्थानीय पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. परिवार का कहना है कि पुलिस हिरासत के दौरान बेरहमी से पिटाई करने की वजह से उनकी मौत हुई है. इसी घटना के बाद से स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं के दिलों में पुलिस प्रशासन के खिलाफ भारी रोष सुलग रहा था, जो ममता बनर्जी के दौरे के वक्त खुलकर सामने आ गया.</p>
<p>जैसे ही हालात बिगड़ने लगे और भीड़ आक्रामक हो गई, मौके पर मौजूद सुरक्षा बलों और स्थानीय पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला. किसी तरह भीड़ को नियंत्रित करते हुए पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाया और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उस तनावपूर्ण इलाके से सुरक्षित बाहर निकालकर दूसरी जगह पहुंचाया. इस घटना के बाद से पूरे इलाके में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है और प्रशासन पूरी एहतियात बरत रहा है.</p>]]> </content:encoded>
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<title>सुनेत्रा पवार&#45;प्रशांत किशोर की मुलाकात पर बोलीं सुप्रिया सुले, ‘यह उनका अंदरूनी मामला’</title>
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<description><![CDATA[ मुंबई महाराष्ट्र् में एनसीपी नेता सुनेत्रा पवार और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की मुलाकात से राजनीति गरमा गई है। एनडीए की सहयोगी एनसीपी का प्रशांत किशोर से मिलना राजनीतिक पंडितों को हजम नहीं हो रहा है। इसी बीच एनसीपी शरद पवार गुट की कार्यवाहक अध्यक्षा सुप्रिया सुले ने भी इस मीटिंग पर अपनी चुप्पी तोड़ी … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 19:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई</strong><br>
महाराष्ट्र् में एनसीपी नेता सुनेत्रा पवार और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की मुलाकात से राजनीति गरमा गई है। एनडीए की सहयोगी एनसीपी का प्रशांत किशोर से मिलना राजनीतिक पंडितों को हजम नहीं हो रहा है। इसी बीच एनसीपी शरद पवार गुट की कार्यवाहक अध्यक्षा सुप्रिया सुले ने भी इस मीटिंग पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। शनिवार को मीडिया से बात करते हुए सुले ने कहा कि अजित पवार गुट प्रशांत किशोर के साथ मिलकर क्या काम करना चाहता है। यह उनका अंदरूनी मामला है।</p>
<p>मीडिया से बात कर रही सुप्रिया सुले से जब जनसुराज के प्रशांत किशोर और डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार की मुलाकात के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इस पर ज्यादा बात करने से इनकार किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशांत किशोर काफी पहले से उनके दोस्त हैं और उन्होंने हाल ही में बिहार के बाकीपुर में एक बहुत बड़ी लड़ाई जीती है।</p>
<p><strong>प्रशांत किशोर मेरे अच्छे दोस्त- सुप्रिया सुले</strong><br>
बारामती से सांसद सुप्रिया सुले ने कहा, "प्रशांत किशोर कई सालों से मेरे अच्छे निजी दोस्त रहे हैं। मैंने उनके काम को करीब से देखा है और मैंने कभी अपनी दोस्ती को छिपाया नहीं है। वे पेशेवर तौर पर स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और किसके साथ काम करना है, यह उनका अपना फैसला है।" अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सुले ने कहा, "अजित पवार के नेतृत्व वाली NCP प्रशांत किशोर के साथ काम करना चाहती है या नहीं, यह उनका अंदरूनी मामला है।"</p>
<p>बता दें, इस हफ्ते की शुरुआत में देश में सबसे सफल चुनावी रणनीतिकार माने जाने वाले प्रशांत किशोर ने पिछले हफ्ते ही एनसीपी नेता और डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार से मुलाकात की थी।</p>
<p><strong>सुप्रिया सुले ने बिहार में प्रशांत किशोर के काम की तारीफ की</strong><br>
सुप्रिया सुले ने बिहार में प्रशांत किशोर के काम की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने बांकीपुर में एक बड़ी जीत हासिल की है। भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी पूरी राजनीतिक मशीनरी होने के बाद भी प्रशांत किशोर को नहीं रोक पाई। उन्होंने कहा, "इस स्थिति को देखते हुए हमें प्रशांत किशोर की तारीफ करनी चाहिए। वह मेहनती हैं और पिछले कुछ सालों में कई राजनीतिक दलों के साथ काम कर चुके हैं।"</p>
<p><strong>सुप्रिया ने खुद का उदाहरण देकर भाजपा पर कसा तंज</strong><br>
प्रशांत किशोर का जिक्र करते हुए सुप्रिया सुले ने जमीनी स्तर पर राजनीतिक प्रदर्शन की अहमियत बताते हुए भाजपा पर तंज कसा। उन्होंने कहा, "अगर उनकी पार्टी स्थानीय स्तर से लेकर दिल्ली तक सत्ता में होती और फिर भी बारामती के कटेवाड़ी में उनके अपने बूथ पर नतीजा खराब रहता, तो वह इसे एक गंभीर चेतावनी मानतीं।</p>
<p>उन्होंने कहा, "अगर हम स्थानीय स्तर से लेकर दिल्ली तक सत्ता में होते और बारामती के कटेवाड़ी में हमारे अपने बूथ पर नतीजा खराब रहता, तो मुझे लगता कि मुझमें कोई गंभीर कमी थी।"</p>
<p>बता दें, महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व एनसीपी के दोनों धड़ों को एक करना चाहता है। हालांकि, सुनेत्रा पवार गुट ने इसके लिए इनकार कर दिया। अब सुनेत्रा पवार का प्रशांत किशोर के साथ बैठक करना एनडीए के लिए एक शुभ संकेत नहीं माना जा रहा है। क्योंकि प्रशांत किशोर खुलकर एनडीए के खिलाफ ही चुनाव लड़ रहे हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<title>नीट पेपर लीक विवाद पर धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान, बोले&#45; पद मेरे लिए महत्वपूर्ण नहीं</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली नीट पेपर लीक को लेकर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाद इस्तीफा देने वाले पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान सामने आया है। उन्होंने अपने इस्तीफे को लेकर फिर से दोहराया कि नीट पेपर लीक के मामले में युवा पीढ़ी को गुमराह करने की कोशिश हुई थी। इसके बाद देश … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 16:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
नीट पेपर लीक को लेकर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाद इस्तीफा देने वाले पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान सामने आया है। उन्होंने अपने इस्तीफे को लेकर फिर से दोहराया कि नीट पेपर लीक के मामले में युवा पीढ़ी को गुमराह करने की कोशिश हुई थी। इसके बाद देश और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इस्तीफा दे दिया।</p>
<p>वरिष्ठ भाजपा नेता और संबलपुर से सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को भुवनेश्वर के जीएम विश्वविद्यालय में छात्रों और शिक्षकों को दिए अपने संबोधन के दौरान इस्तीफे पर पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जोर देकर कहा, "जेन जी हमारे बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। पिछले 10 वर्षों में 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं। उनकी अपनी आकांक्षाएं हैं और वे भारत को 'विश्व गुरु' बनाएंगे। मेरे लिए पद महत्वपूर्ण नहीं था।''</p>
<p><strong>ओडिशा में प्रधान का विरोध कर रहे BJD कार्यकर्ता</strong><br>
बता दें, राष्ट्रीय स्तर पर विरोध का सामना कर रहे पूर्व शिक्षा मंत्री के लिए उनके गृह राज्य में भी हालात सामान्य नहीं है। क्षेत्रीय पार्टी बीजेडी के कार्यकर्ता उनके लगभग हर कार्यक्रम में विरोध प्रदर्शन करते हुए नजर आते हैं। रायराखोल में ऐसे ही एक कार्यक्रम के दौरान प्रधान के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वह इन नारों से परेशान नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं एक किसान का बेटा हूं। भले ही आप मुझे वापस जाने के लिए कहें, मैं वापस नहीं जाऊंगा, मैं लौटकर आऊंगा।"</p>
<p><strong>नवीन पटनायक पर लगाया लोगों को भड़काने का आरोप</strong><br>
धर्मेंद्र प्रधान ने बीजू जनता दल के अध्यक्ष नवीन पटनायक के ऊपर युवाओं को उनके खिलाफ बरगलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "नवीन बाबू मुझे ओडिशा के लोगों के लिए शर्म की बात और एक बुरा व्यक्ति भी कहते हैं। क्या मैंने कभी ऐसा कुछ किया है जिससे ओडिशा के लोगों को शर्मिंदगी उठानी पड़े?" इस पर सभा में मौजूद लोगों ने जोर से "नहीं" में जवाब दिया। उन्होंने कहा, "हो सकता है कि मैं राज्य के लिए सम्मान न ला रहा होऊं, लेकिन मैंने अपने काम से कभी भी लोगों को शर्मिंदा नहीं किया है। मैं कभी भी ऐसा कोई काम नहीं करूंगा जिससे राज्य की प्रतिष्ठा धूमिल हो।"</p>
<p>बता दें, जिस दौरान प्रधान यह बयान दे रहे थे उस दौरान मंच पर बीजेडी विधायक और ओडिशा विधानसभा के उपनेता प्रसन्ना आचार्य भी मौजूद थे।</p>
<p><strong>इस्तीफे के बाद भी प्रधान ने छात्रों को गुमराह करने का लगाया था आरोप</strong><br>
पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे को सार्वजनिक करने के बाद भी बयान जारी किया था। उस दौरान भी उन्होंने छात्रों को गुमराह किए जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि जेन जी को गुमराह किया गया है। लेकिन 20 जुलाई की घटना को देखते हुए और बच्चों और देश की सुरक्षा को ध्यान में रखकर वह इस्तीफा दे रहे हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<title>महिला आरक्षण पर राहुल गांधी और रिजिजू आमने&#45;सामने, केंद्रीय मंत्री ने बताए संविधान के नियम</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली महिला आरक्षण बिल को लेकर राहुल गांधी और किरेन रिजिजू के बीच सोशल मीडिया पर जंग खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। राहुल गांधी के पलटवार के बाद अब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरने रिजिजू ने उन्हें नियम-कानून बताए हैं। किरेन रिजिजू ने क्या कहा? राहुल गांधी को यह पता है … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 12:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>महिला, आरक्षण, पर, राहुल, गांधी, और, रिजिजू, आमने-सामने, केंद्रीय, मंत्री, ने, बताए, संविधान, के, नियम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
महिला आरक्षण बिल को लेकर राहुल गांधी और किरेन रिजिजू के बीच सोशल मीडिया पर जंग खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। राहुल गांधी के पलटवार के बाद अब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरने रिजिजू ने उन्हें नियम-कानून बताए हैं।</p>
<p><strong>किरेन रिजिजू ने क्या कहा?</strong><br>
राहुल गांधी को यह पता है कि संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 ( नारी शक्ति वंदन अधिनियम ) में लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटों के आरक्षण का प्रावधान किया गया है।</p>
<p><strong>2. यह तब लागू होगा</strong><br>
    (a) जब परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो जाए।<br>
    (b) 2023 के बाद प्रकाशित जनगणना के आंकड़ों के आधार पर। इसका मतलब है 2026 के बाद प्रकाशित जनगणना के आंकड़े।</p>
<p>    3. साल 2026 के बाद जनगणना के आंकड़े जारी करने की प्रक्रिया अभी चल रही है। हालांकि, इन्हें अंतिम रूप से जारी होने में काफी समय लग सकता है (जाति-आधारित जनगणना के कारण)। इसे देखते हुए, महिला आरक्षण लागू करने में काफी देरी हो सकती है, और कम से कम 2034 के आम चुनावों से पहले तो ऐसा नहीं हो पाएगा।<br>
    4. इसलिए, 2029 में होने वाले अगले आम चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने के लिए, हाल ही में प्रकाशित जनगणना के आंकड़ों के आधार पर जल्द से जल्द परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत है।<br>
    5. संविधान में संशोधनों के साथ लोकसभा में पेश किए गए परिसीमन विधेयक 2026 के तहत इसे लागू करने का तरीका प्रस्तावित किया गया है।<br>
    6. हालांकि, इस मकसद से पेश किया गया संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 गिर गया है।</p>
<p><strong>राहुल गांधी ने कहा था?</strong><br>
संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते किरेन रिजिजू से बेहतर यह कौन जानता होगा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, कांग्रेस के पूर्ण समर्थन के साथ। लेकिन सवाल यह है कि तीन साल बाद भी वह लागू क्यों नहीं हुआ और अब आप उसे परिसीमन से बेवजह क्यों जोड़ना चाहते हैं? 2023 का कानून लागू कीजिए। बिना किसी शर्त के।</p>
<p><strong>राहुल गांधी की सोच में बदलाव</strong><br>
दरअसल, कांग्रेस के आधिकारिक अकाउंट से शेयर एक वीडियो को रिट्वीट करते हुए रिजिजू ने लिखा था कि कांग्रेस पार्टी की ओर से एक सकारात्मक संदेश लगता है। महिलाओं के प्रति राहुल गांधी की सोच में स्पष्ट बदलाव दिख रहा है। अब मुझे उम्मीद है कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण विधेयक का बिना किसी शर्त के समर्थन करेगी।</p>
<p><strong>यहां से हुई थी शुरुआत</strong><br>
बता दें कि कांग्रेस ने राहुल गांधी का एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें राहुल गांधी ने कहा था कि भारत की महिलाओं की ऊर्जा दबी हुई है। उन्हें खुद को जाहिर करने या कल्पना करने की आजादी नहीं है। मेरे हिसाब से कोई भी देश तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक वहां की महिलाएं खुद को जाहिर न कर पाएं। और मुझे लगता है कि मेरी राजनीति का एक बड़ा हिस्सा इस बात पर केंद्रित है कि इस देश में राजनीति कैसी होनी चाहिए। हम चाहते हैं कि लोगों को यह समझाया जाए कि महिलाओं की अभिव्यक्ति के बिना हमारा देश अधूरा और पिछड़ा हुआ है।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>पीएम मोदी से मुलाकात के बाद SAD का बड़ा दांव, महिला आरक्षण बिल पर दिया समर्थन</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के ठीक अगले ही दिन शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने एक बड़ा सियासी दांव चला है. पार्टी ने महिला आरक्षण बिल और परिसीमन से जुड़े केंद्र सरकार के नए प्रस्ताव को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है. इस बड़े फैसले के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 12:45:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>पीएम, मोदी, से, मुलाकात, के, बाद, SAD, का, बड़ा, दांव, महिला, आरक्षण, बिल, पर, दिया, समर्थन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के ठीक अगले ही दिन शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने एक बड़ा सियासी दांव चला है. पार्टी ने महिला आरक्षण बिल और परिसीमन से जुड़े केंद्र सरकार के नए प्रस्ताव को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है. इस बड़े फैसले के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल बढ़ गई है और दोनों पुराने सहयोगियों के दोबारा साथ आने के कयास लगाए जाने लगे हैं.</p>
<p>चंडीगढ़ में SAD प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के आवास पर पार्टी के बड़े नेताओं का मंथन हुआ. काफी देर चली इस बैठक में आगे की रणनीति पर बात हुई. इसके बाद सुखबीर सिंह बादल ने साफ कर दिया कि उनकी पार्टी संसद में महिला आरक्षण बिल का खुलकर साथ देगी.</p>
<p>परिसीमन को लेकर भी पार्टी ने अपनी पुरानी जिद्द छोड़ दी है. अकाली दल अब केंद्र के उस नए प्लान के साथ खड़ा हो गया है, जिसके तहत देश के हर राज्य में लोकसभा सीटें 50 प्रतिशत बढ़ाई जानी हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने बताया कि पहले 2011 की जनगणना से परिसीमन जोड़ने का विरोध किया जा रहा था. अब जब सभी राज्यों में सीटें बराबर अनुपात में बढ़ाने की बात है, तो पार्टी को इस पर कोई आपत्ति नहीं है.</p>
<p><strong>केजरीवाल के बयान पर पलटवार</strong><br>
पीएम मोदी से मुलाकात के बाद जब अकाली दल के समर्थन की खबरें आईं, तो आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर तंज कसा. उन्होंने लिखा, "ना-ना करते प्यार तुम ही से कर बैठे. तो क्या चंदा चोर पार्टी और बेअदबी पार्टी का गठबंधन हो रहा है?"</p>
<p>केजरीवाल के इस बयान पर अकाली दल ने भी पलटवार करने में देरी नहीं की. पार्टी नेता दलजीत सिंह चीमा ने चुटकी लेते हुए कहा कि विरोधी नेताओं की ऐसी बातें सीधे तौर पर उनकी घबराहट और डर को जाहिर कर रही हैं. उन्हें समझ आ गया है कि पंजाब का सियासी माहौल बदलने वाला है.</p>
<p><strong>पंजाब में फिर जम सकती है पुरानी जोड़ी</strong><br>
बता दें कि 7 अगस्त (शुक्रवार) को प्रधानमंत्री से हुई मुलाकात के बाद अकाली दल के इस फैसले को दोनों दलों के बीच पिघलती बर्फ (यानी कम होती दूरियों) के रूप में देखा जा रहा है. जानकारों का मानना है कि यह कदम पंजाब की राजनीति में एक नए समीकरण की शुरुआत हो सकता है.</p>
<p>हालांकि, बीजेपी के साथ गठबंधन के सीधे सवाल पर दलजीत सिंह चीमा थोड़ा संभलकर बोले. उन्होंने कहा कि फिलहाल सिर्फ उन्हीं फैसलों को सामने रखा जा रहा है, जो आज की बैठक में तय किए गए हैं.</p>
<p>फिलहाल अकाली दल ने महिला आरक्षण बिल और परिसीमन के प्रस्ताव पर अपना रुख साफ कर दिया है. अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि BJP और SAD के रिश्तों को लेकर आगे क्या फैसला होता है.</p>]]> </content:encoded>
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<title>TMC सांसद अभिषेक बनर्जी ने हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती, विदेश में इलाज का मामला</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली तृणमूल कांग्रेस TMC के सांसद अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उन्हें आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया गया था।  दरअसल, अभिषेक बनर्जी ने अपनी आंखों के इलाज के लिए विदेश … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 10:45:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>TMC, सांसद, अभिषेक, बनर्जी, ने, हाईकोर्ट, के, फैसले, को, दी, चुनौती, विदेश, में, इलाज, का, मामला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>तृणमूल कांग्रेस TMC के सांसद अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उन्हें आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया गया था। </p>
<p>दरअसल, अभिषेक बनर्जी ने अपनी आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की इजाजत मांगते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. हालांकि, 5 अगस्त को हाईकोर्ट ने उनकी यह अर्जी खारिज कर दी थी। </p>
<p>हाईकोर्ट का कहना था कि सांसद कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम SSKM अस्पताल में मेडिकल बोर्ड के सामने अपनी मेडिकल जांच कराने के लिए पेश होने को तैयार नहीं थे. कोर्ट का मानना था कि अगर वे मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होते, तो स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की राय के आधार पर यह तय किया जा सकता था कि वाकई उन्हें विदेश जाकर इलाज कराने की जरूरत है या नहीं। </p>
<p>मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने से इनकार करने के बाद हाईकोर्ट ने इस मामले में आगे कोई राहत देने से मना कर दिया और याचिका को खारिज कर दिया। <br>
गौरतलब है, इससे पहले 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट से कहा था कि वह अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा से जुड़ी याचिका पर एक हफ्ते के अंदर सुनवाई करे. सुप्रीम कोर्ट में बनर्जी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील गोपाल नारायणन ने अदालत को बताया था कि यह याचिका हाईकोर्ट के उस आदेश में संशोधन के लिए है जिसके तहत उन्हें इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगी गई थी। </p>
<p>दरअसल, यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के प्रचार के दौरान 27 अप्रैल को एक जनसभा में विरोधी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित बयानों से जुड़े एक मामले से उपजा है. इस मामले में हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ किसी भी तरह की कड़ी कार्रवाई पर रोक अंतरिम सुरक्षा बढ़ा दी थी। </p>
<p>यह सुरक्षा 6 अक्टूबर तक या अगले आदेश तक बढ़ाई गई थी. हालांकि, इस राहत के साथ कोर्ट ने यह शर्त भी रखी थी कि बनर्जी जांच में पूरा सहयोग करेंगे और कोर्ट की इजाजत के बगैर देश छोड़कर बाहर नहीं जाएंगे। </p>
<p><strong>हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की थी अर्जी?</strong><br>
सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट ने साफ किया था कि जब इस मामले की जांच अभी चल रही है, तब याचिकाकर्ता को विदेश जाने की इजाजत देना सही नहीं है. कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि कोलकाता में ही कई जाने-माने और प्रतिष्ठित आई क्लीनिक मौजूद हैं, जहां इलाज मुमकिन है. टीएमसी सांसद ने अपने ऊपर दर्ज एफआईआर को रद्द करने की भी मांग की थी, जिस पर कोर्ट ने नियमों के तहत सुनवाई की बात कही थी। </p>]]> </content:encoded>
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<title>PM मोदी से राघव चड्ढा की मुलाकात, पंजाब में ‘बिग रोल’ को लेकर सियासी चर्चाएं तेज</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली शनिवार को BJP सांसद राघव चड्ढा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अचानक हुई मुलाक़ात ने चर्चाओं का बाज़ार गर्म कर दिया है. AAP के पूर्व नेता ने इस मुलाक़ात की तस्वीरें &#039;X&#039; पर शेयर करते हुए इसे &quot;यादगार सुबह&quot; बताया. पंजाब विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले हुई इस मुलाक़ात ने राजनीतिक … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 22:30:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मोदी, से, राघव, चड्ढा, की, मुलाकात, पंजाब, में, ‘बिग, रोल’, को, लेकर, सियासी, चर्चाएं, तेज</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
शनिवार को BJP सांसद राघव चड्ढा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अचानक हुई मुलाक़ात ने चर्चाओं का बाज़ार गर्म कर दिया है. AAP के पूर्व नेता ने इस मुलाक़ात की तस्वीरें 'X' पर शेयर करते हुए इसे "यादगार सुबह" बताया. पंजाब विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले हुई इस मुलाक़ात ने राजनीतिक गलियारों में कई अटकलों को हवा दे दी है. शुक्रवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने भी प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की थी। </p>
<p>राघव चड्ढा ने इस साल की शुरुआत में AAP से बगावत करके छह अन्य सांसदों के साथ भाजपा का दामन थामा था. उन्होंने मुलाक़ात में हुई बातचीत का ब्योरा तो नहीं दिया, लेकिन इसे "ज्ञानवर्धक बातचीत" ज़रूर बताया। </p>
<p>चड्ढा ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का सौभाग्य मिला. यह एक विस्तृत और ज्ञानवर्धक बातचीत थी. उनके बहुमूल्य समय और उनसे मिली सीख व मार्गदर्शन के लिए मैं उनका दिल से आभारी हूं। </p>
<p><strong>राघव चड्ढा पर बड़ा दांव खेल सकती है बीजेपी</strong><br>
चर्चा है कि बीजेपी उनके Gen Z से अच्छे कनेक्ट, तीन भाषाओं पर बढ़िया पकड़ के साथ पंजाब चुनाव में उनका इस्तेमाल करना चाहती है। राघव चड्ढा पहले राज्यसभा में बीजेपी के नए सांसदों के साथ पीएम नरेंद्र मोदी से मिले थे। इसकी तस्वीरें भी सामने आई थीं। अब उनकी वन टू वन मीटिंग से राजनीति को गरमा दिया है। एक्स पर राघव चड्ढा ने लिखा है कि एक ऐसी सुबह जिसे मैं हमेशा याद रखूंगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का मौका मिला। एक डिटेल्ड और अच्छी बातचीत हुई। उनके इतने समय और उनकी समझ और गाइडेंस से फायदा उठाने के मौके के लिए बहुत आभारी हूं।</p>
<p><strong>Gen Z प्रोटेस्ट ने बदल दी है रणनीति</strong><br>
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि जंतर-मंतर पर हुए Gen Z प्रोटेस्ट ने अब बीजेपी की रणनीति को बदल दिया है। पीएम नरेंद्र मोदी की नई टीम में अनुभवी से ज्यादा ऊर्जावान चेहरों का समावेश होगा। पीएम मोदी Gen Z से न सिर्फ कनेक्ट बढ़ा रहे हैं बल्कि एक बड़ी रणनीति पर काम कर रहे हैं। जो 2029 प्रभाव में रहेगी। ऐसे में राघव चड्ढा के अलावा कम उम्र के कई सांसदों की लॉटरी लग सकती है। राघव चड्ढा पूर्व में आम आदमी पार्टी के पोस्टर ब्वॉय रह चुके हैं। उनके पास अच्छी संवाद कला है। इतना ही नहीं वह सेलिब्रेटी फेस होने के साथ एक अच्छा बैकग्राउंड रखते हैं। राघव चड्ढा की मौजूदा उम्र 37 साल है। वह 31 साल की आयु में दिल्ली के विधायक बने थे।</p>
<p><strong>क्यों हुई मुलाकात?</strong><br>
चड्ढा और प्रधानमंत्री की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब BJP ने विधानसभा चुनावों से पहले पंजाब में अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज़ कर दी हैं. पंजाब में अगले साल चुनाव होने वाले हैं. चड्ढा राज्यसभा सांसद हैं, राज्यसभा में वे पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हैं. जालंधर से उनका पैतृक संबंध है, ऐसे में चुनाव में उन्हें अहम जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है। </p>
<p>चड्ढा AAP के शुरुआती दिनों से ही पार्टी से जुड़े थे लेकिन अप्रैल में एक बड़ा उलटफेर करते हुए वे छह अन्य सांसदों के साथ भाजपा में शामिल हो गए थे. कभी पंजाब के 'असली मुख्यमंत्री' माने जाने वाले राघव चड्ढा का पार्टी छोड़ना AAP के लिए एक बड़ा झटका था. झटका लगना तो लाज़मी है क्योंकि यही एकमात्र ऐसा राज्य है जहां अभी AAP की सरकार है। </p>
<p><strong>भाजपा में शामिल होने के बाद पहली मुलाकात</strong><br>
राघव चड्ढा के बीजेपी में शामिल होने के बाद उनकी पीएम मोदी के साथ पहली मुलाकात थी। राघव चड्ढा ने इससे पहले पीएम मोदी की तारीफ की थी। इस समय पीएम मोदी सबसे लंबे समय तक निवार्चित पीएम बने थे। उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा था। राघव चड्ढा ने लंबा-चौड़ा पोस्ट करते हुए लिखा था कि इतिहास रच दिया गया है। उन्होंने लिखा था, "भारत आम तौर पर एक देश नहीं है। यह 1.4 अरब लोगों की सभ्यता है। 22 तय भाषाओं और सैकड़ों बोलियों की धरती; कई धर्मों, जातियों, समुदायों और पंथों की; अनगिनत क्षेत्रों और जीवन के तरीकों की, जो साथ-साथ रहते हैं। हम दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी हैं, जिसके वोटर लगभग 98 करोड़ हैं, जो पूरे यूरोप में रहने वाले लोगों से भी ज़्यादा है। यह हमारे चुनाव को शायद दुनिया भर में सबसे मुश्किल चुनाव बनाता है। फिर भी, इन 1.4 अरब लोगों में से, एक ही नेता को बार-बार देश की कमान सौंपी गई है। 2014, 2019, 2024 में भारत के लोगों से लगातार तीन बार जनादेश, हर बार विश्वास का नया काम। इतने बड़े और अलग-अलग तरह के देश का भरोसा एक बार भी जीतना कमाल की बात है। इसे बिना रुके तीन बार जीतना बहुत खास है।"</p>
<p><strong>राज्यसभा की याचिका समिति के अध्यक्ष हैं राघव</strong><br>
राघव चड्ढा को मई में राज्यसभा की याचिका समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। राज्यसभा के सभापति सी.पी.राधाकृष्णन ने याचिका समिति का पुनर्गठन करने के बाद सदन के 10 सदस्यों को इस समिति के लिए नामित किया था। समिति में चड्ढा के अलावा हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल, मयंककुमार नायक, मस्तान राव यादव बीडा, जेबी माथेर हिशाम, सुभाशीष खुंटिया, रवंगवरा नारजारी और संदोष कुमार पी. अन्य सदस्य हैं।</p>
<p><strong>अब BJP के साथ जुड़ने पर, चड्ढा को कोई अहम भूमिका मिलने की उम्मीद है. </strong><br>
उन्हें न सिर्फ़ पंजाब की चुनावी राजनीति की अच्छी समझ है, बल्कि उनकी शहरी छवि भी BJP को अमृतसर, लुधियाना और जालंधर जैसे शहरों में अपनी पकड़ मज़बूत करने में सफलता दिला सकती है. खास तौर पर SAD से अलग होने के बाद, BJP को पंजाब में कारोबारी समुदायों और मिडिल-क्लास वोटरों के बीच अपना समर्थन बढ़ाने में थोड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा है. ऐसे में चड्ढा मददगार साबित हो सकते हैं। </p>
<p>खास बात यह है कि चड्ढा की मुलाकात से पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी की सुखबीर सिंह बादल से मुलाकात हुई थी. ऐसे में, यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि भाजपा अपने पुराने सहयोगियों के साथ फिर से रिश्ते सुधारने पर विचार कर सकती है। </p>
<p>अकाली दल, जिसकी हालत AAP के उभार के बाद से कमज़ोर हुई है भाजपा से मिलने के लिए इच्छुक नजर आ रही है. SAD अब सिमटकर तीन विधायक और एक सांसद तक रह गया है। </p>
<p>पंजाब में तेजी से बदलते राजनीतिक माहौल के बीच, अगर चड्ढा को कोई भूमिका मिलती है, तो क्या वे BJP की किस्मत बदल पाएंगे? यह तो आने वाले वक्त में ही पता चल पाएगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>अकाली दल करेगा महिला आरक्षण और परिसीमन बिल का समर्थन, BJP से गठबंधन के संकेत तेज</title>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 22:30:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>अकाली, दल, करेगा, महिला, आरक्षण, और, परिसीमन, बिल, का, समर्थन, BJP, से, गठबंधन, के, संकेत, तेज</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली</p>
<p>अकाली दल ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वो महिला आरक्षण और परिसीमन बिल का समर्थन करने जा रहा है. यह ऐलान भी उस समय किया गया है जब शुक्रवार को सुखबीर बादल औ पीएम नरेंद्र मोदी की अहम मुलाकात हुई थी. उस मुलाकात में क्या चर्चा हुई, इसे लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई, लेकिन पंजाब के राजनीतिक गलियारों हलचल तेज है कि दो पुराने साथी फिर साथ आ सकते हैं। </p>
<p>जानकारी के लिए बता दें कि 2020 में अकाली दल और बीजेपी के रास्ते अगल हो गए थे. तीन कृषि कानूनों को लेकर मतभेद पैदा हुए और कई सालों में गठबंधन टूट गया था. लेकिन अब बदले हुए समीकरणों में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को चुनौती देने के लिए दोनों ही दल एक बार फिर साथ आ सकते हैं. अभी तक बीजेपी या फिर अकाली दल ने किसी भी प्रकार के गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन संकेत जरूर मिलने लगे हैं कि एक बार फिर आपसी सहमति बन सकती है। </p>
<p>यहां पर समझने वाली बात यह है कि अकाली दल का वर्तमान में सिर्फ एक ही सांसद है, ऐसे में लोकसभा में पार्टी सत्तारूढ़ एनडीए की ज्यादा मदद नहीं कर सकती है. इस वजह से भी कयास इस बात के ज्यादा हैं कि पंजाब चुनाव को लेकर कोई सहमति बन सकती है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>विजय थलपति को बड़ा झटका, परिसीमन बैठक से 37 सांसद गायब; विपक्ष ने किया बायकॉट</title>
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<description><![CDATA[ चेन्नई तमिलनाडु की राजनीति में शनिवार को एक अहम घटनाक्रम देखने को मिला। राज्य के मुख्यमंत्री विजय थलपति द्वारा परिसीमन के मुद्दे पर बुलाई गई सर्वदलीय सांसदों की बैठक से विपक्षी दल DMK और AIADMK समेत कई पार्टियों ने दूरी बना ली है। राज्य के कुल 57 सांसदों में से 37 ने इस बैठक का … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>विजय, थलपति, को, बड़ा, झटका, परिसीमन, बैठक, से, सांसद, गायब, विपक्ष, ने, किया, बायकॉट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चेन्नई</strong></p>
<p>तमिलनाडु की राजनीति में शनिवार को एक अहम घटनाक्रम देखने को मिला। राज्य के मुख्यमंत्री विजय थलपति द्वारा परिसीमन के मुद्दे पर बुलाई गई सर्वदलीय सांसदों की बैठक से विपक्षी दल DMK और AIADMK समेत कई पार्टियों ने दूरी बना ली है। राज्य के कुल 57 सांसदों में से 37 ने इस बैठक का बहिष्कार करने का फैसला किया है, जिसे सीएम विजय की इस पहल के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। यह बैठक आज दिन में 3 बजे बुलाई गई है।</p>
<p><strong>सिर्फ 20 सांसद ही बैठक में शामिल होंगे?</strong><br>
बैठक में सांसदों की संभावित उपस्थिति के आंकड़े बताते हैं कि सीएम विजय की इस मुहिम को सभी दलों का साथ नहीं मिल सका है:</p>
<p><strong>    कुल सांसद: 57<br>
    बैठक का बायकॉट करने वाले: 37 सांसद<br>
    बैठक में शामिल होने वाले: मात्र 20 सांसद (मुख्य रूप से कांग्रेस और उसके छोटे सहयोगी दल)</strong></p>
<p>बैठक में शामिल होने वाले इन 20 सांसदों में कांग्रेस के 12, VCK के 2, CPI के 2, CPI(M) के 2, MDMK का 1 और IUML का 1 सांसद शामिल है।</p>
<p>दूसरी तरफ, बायकॉट करने वालों की कमान DMK के पास है, जिसके सभी 30 सांसदों ने बैठक से किनारा कर लिया है। इसके अलावा विपक्षी पार्टी AIADMK के 4 और PMK, MNM और DMDK के 1-1 सांसद ने भी इसमें हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है।</p>
<p><strong>DMK ने बताया 'अनावश्यक', लगाया ध्यान भटकाने का आरोप</strong><br>
बैठक के बहिष्कार को लेकर DMK सांसद कनिमोझी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सीएम विजय द्वारा बुलाई गई इस बैठक को पूरी तरह 'अनावश्यक' करार दिया। कनिमोझी ने आरोप लगाया कि इसका मुख्य मकसद कावेरी नदी के अहम मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब केंद्र सरकार की तरफ से संसद के मौजूदा सत्र में परिसीमन बिल पेश करने की कोई आधिकारिक घोषणा ही नहीं हुई है और संशोधित ड्राफ्ट बिल भी उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे में चर्चा करने के लिए कुछ नया है ही नहीं।</p>
<p>सरकारी सूत्रों ने बताया कि तमिलनाडु के मुख्य सचिव एम. साई कुमार ने छह और सात अगस्त को सांसदों को अलग से आमंत्रण भेजे थे। DMK सूत्रों ने कहा कि उनकी पार्टी के सांसद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने इस रुख पर कायम है कि जब सरकार मेकेदातू मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाएगी तभी वह चर्चा में शामिल होगी।</p>
<p><strong>कांग्रेस ने साधा निशाना</strong><br>
इस बीच कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने एक बयान में कहा, ''जो लोग अपनी राजनीति को तमिलनाडु के हितों से ऊपर रखते हैं, वे बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला कर सकते हैं। लेकिन जो लोग तमिलनाडु को पहले और राजनीति को बाद में रखते हैं, वे मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में शामिल होंगे।''</p>
<p>टैगोर ने कहा, ''यह पार्टी की राजनीति का मुद्दा नहीं है। यह तमिलनाडु के अधिकारों, हितों और भविष्य का सवाल है। तमिलनाडु की जनता देख रही है और वह याद रखेगी कि जरूरत के समय राज्य के साथ कौन खड़ा था।'' कांग्रेस तमिलनाडु में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की सहयोगी है।</p>
<p><strong>आखिर क्यों बुलाई गई यह बैठक?</strong><br>
सीएम विजय ने यह बैठक परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर राज्य का एक साझा और एकजुट रुख तय करने के लिए बुलाई। दरअसल, इस बात को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं कि नए परिसीमन से दक्षिण भारतीय राज्यों के संसदीय सीटों की संख्या कम हो सकती है। लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की यह अहम बैठक शनिवार दोपहर 3 बजे चेन्नई के कलैवानर अरंगम में निर्धारित की गई है।</p>
<p><strong>क्या है परिसीमन बिल 2026?</strong><br>
परिसीमन बिल 2026 को 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। इस बिल का मुख्य मकसद संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों का दोबारा सीमांकन करना, लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना और महिला आरक्षण लागू करना था। हालांकि, यह बिल संसद में पास नहीं हो सका था क्योंकि इसे पास कराने के लिए उपस्थित और वोट करने वाले सदस्यों का जरूरी दो-तिहाई विशेष बहुमत नहीं मिल पाया था।</p>]]> </content:encoded>
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<title>‘कॉकरोच जितना असरदार नहीं रहा कांग्रेस का प्रदर्शन’, शशि थरूर ने फिर उठाए पार्टी पर सवाल</title>
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<description><![CDATA[ मुंबई  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को स्वीकार किया कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की तरफ से हाल ही में हुए छात्र प्रदर्शनों में उठाए गए मुद्दे कांग्रेस के छात्र आउटरीच कार्यक्रम &#039;छात्रों की गूंज&#039; का ही हिस्सा थे। हालांकि, उन्होंने बेबाकी से माना कि कांग्रेस का अभियान युवाओं और … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 12:30:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>‘कॉकरोच, जितना, असरदार, नहीं, रहा, कांग्रेस, का, प्रदर्शन’, शशि, थरूर, ने, फिर, उठाए, पार्टी, पर, सवाल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई </strong></p>
<p>कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को स्वीकार किया कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की तरफ से हाल ही में हुए छात्र प्रदर्शनों में उठाए गए मुद्दे कांग्रेस के छात्र आउटरीच कार्यक्रम 'छात्रों की गूंज' का ही हिस्सा थे। हालांकि, उन्होंने बेबाकी से माना कि कांग्रेस का अभियान युवाओं और Gen Z के बीच वैसी गूंज या प्रतिक्रिया हासिल करने में नाकाम रहा, जैसी CJP के प्रदर्शन को मिली।</p>
<p>मुंबई में 'इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस' (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में थरूर ने पार्टी के लिए आत्ममंथन की जरूरत पर जोर दिया।</p>
<p><strong>क्या हम Gen-Z की नब्ज पकड़ने में चूक गए?</strong><br>
जंतर-मंतर पर हुए CJP के प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, "CJP ने जंतर-मंतर पर जिन मुद्दों को उठाया, उन्हें हम बहुत पहले ही उठा चुके थे। हमारा 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम चल रहा था, जिसके तहत राहुल गांधी खुद पेपर लीक के मुद्दों पर छात्रों को संबोधित कर रहे थे। लेकिन हमें खुद से यह सवाल पूछना होगा- हमसे कहां चूक हुई? क्या हम छात्रों को ठीक से सुन नहीं पाए? क्या Gen Z की नब्ज पर हमारी पकड़ ढीली रह गई थी?"</p>
<p><strong>नीट-यूजी 2026 विवाद और 'Gen Z' आंदोलन</strong><br>
नीट-यूजी 2026 परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक के बाद CJP ने 20 जून से जंतर-मंतर पर बड़ा आंदोलन शुरू किया था। छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और जवाबदेही की मांग की थी।</p>
<p>यह आंदोलन तब और बड़ा हो गया जब जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए।</p>
<p><strong>CJP ने 20 जुलाई को 'संसद मार्च' का आह्वान किया था।</strong><br>
मार्च से कुछ दिन पहले सोनम वांगचुक को धरना स्थल से हटा दिया गया। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस बल प्रयोग किया गया, जिसे लेकर विपक्ष ने संसद तक में सरकार का घेराव किया।</p>
<p><strong>कांग्रेस का 'छात्रों की गूंज' अभियान</strong><br>
पेपर लीक के मुद्दे पर सबसे पहले आवाज उठाने वालों में कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) शामिल था। मई 2026 में परीक्षा रद्द होने के बाद एनएसयूआई ने दिल्ली में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था।</p>
<p>इसके बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 17 जून को राजस्थान के कोटा से 'छात्रों की गूंज' अभियान की शुरुआत की थी।</p>
<p><strong>    कोटा</strong>: राहुल गांधी ने कोचिंग हब कोटा में छात्रों के सपनों के शोषण को उजागर किया।<br>
<strong>    देहरादून</strong>: उत्तराखंड में धांधली और पेपर लीक के तंत्र पर सवाल उठाए।<br>
<strong>    प्रयागराज:</strong> उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में युवाओं के सामने खड़े बेरोजगारी के संकट को रेखांकित किया।</p>
<p>राहुल गांधी ने कहा था कि देश का युवा इस व्यवस्था के खिलाफ खड़ा हो चुका है और कांग्रेस उनकी आवाज को देश के कोने-कोने तक पहुंचाएगी। इसके बावजूद शशि थरूर के इस बयान ने यह बहस छेड़ दी है कि मुख्य विपक्षी दल युवाओं और नए दौर के प्रदर्शनकारियों से सीधे जुड़ने के रणनीतिक तरीके खोज रहा है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>शेर की दहाड़ है प्यारे… Sayani Ghosh ने PM Modi के साथ शेयर की तस्वीर, जानिए कैप्शन में क्या लिखा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली तृणमूल कांग्रेस छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हुए सांसदों के एक समूह ने पहली बार, मंगलवार को एनडीए की संसदीय दल की बैठक में हिस्सा लिया। ‘मंगल मिलन’ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और शीर्ष केंद्रीय मंत्री भी उपस्थित थे। राजग संसदीय दल की बैठक संसद भवन परिसर में हुई। … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>तृणमूल कांग्रेस छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हुए सांसदों के एक समूह ने पहली बार, मंगलवार को एनडीए की संसदीय दल की बैठक में हिस्सा लिया। ‘मंगल मिलन’ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और शीर्ष केंद्रीय मंत्री भी उपस्थित थे। राजग संसदीय दल की बैठक संसद भवन परिसर में हुई। सायोनी घोष ने इसका वीडियो एक्स पर पोस्ट किया है। तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सदस्य हाल में अपनी पार्टी के खिलाफ बगावत करने के बाद एनसीपीआई में शामिल हुए थे। हालांकि, वे लोकसभा में तृणमूल सांसदों से अलग बैठ रहे हैं, लेकिन सदन के अध्यक्ष ओम बिरला ने एनसीपीआई को मान्यता देने पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है। एनसीपीआई में शामिल होने के बाद, सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राजग के प्रति अपनी निष्ठा जताई। इस समूह के एक प्रमुख नेता, सुदीप बंद्योपाध्याय ने हाल में प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी।</p>
<p><strong>काफी सार्थक रही चर्चा</strong><br>
एनसीपीआई की सांसद सायोनी घोष ने कहाकि मैंने राजग की बैठक में भाग लिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में यह एक अत्यंत ज्ञानवर्धक बैठक थी। आज हमने मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर चर्चा की। यह काफी सकारात्मक चर्चा रही। उन्होंने लोकसभा में आज चर्चा के लिए पेश किए जाने वाले ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक 2026’ का संदर्भ देते हुए कहाकि प्रश्नपत्र लीक रोधी इस विधेयक का सभी को समर्थन करना चाहिए।</p>
<p>एक अन्य सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बताया कि यह पहला मौका था जब एनसीपीआई के 20 सांसदों को राजग की ‘मंगल मिलन’ बैठक में आमंत्रित किया गया। उन्होंने कहाकि हमें देश की प्रगति, मुक्त व्यापार समझौतों और किसानों के बारे में जानकारी दी गई… जो आंकड़े हमें प्राप्त हुए हैं, उनसे हम जनता को भी इन विषयों के बारे में बेहतर तरीके से समझा सकेंगे।</p>
<p><strong>क्या बोलीं शताब्दी रॉय</strong><br>
अभिनेत्री से नेता बनीं शताब्दी रॉय ने कहा कि बैठक में सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने कहाकि हमने पहले ऐसी चीजें नहीं देखी थी। यह सब व्यवस्थित था। उन्होंने हमें बताया कि कौन से विधेयक आने वाले हैं। प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं कहा। यह बैठक नीट प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा में अन्य गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के कुछ दिनों बाद हुई, जिसके कारण धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। बैठक में वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह, जेपी नड्डा, नितिन गडकरी, पीयूष गोयल, किरेन रीजीजू और राजग के सहयोगी दलों के सांसद शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने कहाकि बैठक दो विषयों पर केंद्रित थी, व्यापार और मत्स्य पालन।</p>]]> </content:encoded>
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<title>दतिया उपचुनाव हार के बाद BJP में बड़ा बदलाव तय? नरोत्तम युग के अंत के संकेत, जिलाध्यक्ष पद पर मंथन तेज</title>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 11:30:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>दतिया, उपचुनाव, हार, के, बाद, BJP, में, बड़ा, बदलाव, तय, नरोत्तम, युग, के, अंत, के, संकेत, जिलाध्यक्ष, पद, पर, मंथन, तेज</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> ग्वालियर</strong></p>
<p> दतिया विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में पराजय के बाद भाजपा के सामने दतिया में नरोत्तम मुक्त जिला दतिया में नए सिरे से संगठन की संरचना और जिलाध्यक्ष का चयन बड़ी चुनौती माना जा रहा है। दतिया जिलाध्यक्ष की कमान सौंपने के लिए भाजपा प्रभावशाली चेहरे की तलाश कर रही है। जो कि संगठन को मजबूत करने के साथ पूर्व गृहमंत्री के प्रभाव के सामने मजबूती के साथ खड़ा रह सके।</p>
<p><strong>आशुतोष-घनश्याम पर हो रहा है विचार</strong><br>
प्रदेश नेतृत्व आशुतोष तिवारी की दतिया जिले में सक्रियता बनाए रखने के लिए प्रभावी भूमिका में लाने पर विचार हो रहा है। तिवारी अंचल में संभागीय संगठन दायित्व संभाल चुके हैं। उन्हें संगठन को नए सिरे से खड़ा करना और संगठन के प्रति निष्ठावान कार्यकर्ताओं को गढ़ने का अनुभव भी है। जिलाध्यक्ष के लिए आशुतोष तिवारी के बाद दूसरा नाम घनश्याम पिरौनिया का है।</p>
<p>जो कि अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित भांडेर से विधायक रह चुके हैं और क्षेत्र अनुसूचित वर्ग चुनाव की दृष्टि से निर्णायक भूमिका है। अकेले दतिया विधानसभा क्षेत्र में 23.8 प्रतिशत हैं। दूसरी तरफ मिश्रा समर्थकों पर शुरू हुई कार्रवाई को रोकने के लिए भोपाल व दिल्ली में नेताओं के दरवाजे में दस्तक दे रहे हैं। ताकि आगे होने वाली कार्रवाईयों से समर्थकों को बचा सके।</p>
<p><strong>अनुसूचित वर्ग को साधने के लिए घनश्याम की होगी प्रभावी भूमिका</strong><br>
संगठन को नए सिरे से खड़ा करने के लिए वरिष्ठ भाजपा नेता आशुतोष तिवारी का नाम सबसे आगे चल रहा है। तिवारी पूर्व में संभागीय संगठन का दायित्व निभा चुके हैं और उन्हें बूथ स्तर तक संगठन विस्तार तथा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का अनुभव है। प्रदेश नेतृत्व उन्हें दतिया में प्रभावी भूमिका देकर संगठन को नई दिशा देने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि उन्हें ऐसी जिम्मेदारी दी जा सकती है, जिससे वे जिले में संगठन को मजबूत करने और नए नेतृत्व को तैयार करने का काम कर सकें।</p>
<p>जिलाध्यक्ष पद के लिए दूसरा प्रमुख नाम पूर्व विधायक घनश्याम पिरौनिया का है। अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित भांडेर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके पिरौनिया संगठन और क्षेत्रीय राजनीति दोनों में सक्रिय रहे हैं। दतिया विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित वर्ग के मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 23.8 प्रतिशत है। बसपा के विकल्प के रूप में अनुसूचित वर्ग की राजनीति करने वाले राजनीतिक दल आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदर यादव को भी 23 हजार वोट हासिल करने में कामयाब हुए हैं। ऐसे में यदि भाजपा सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर निर्णय लेती है तो पिरौनिया मजबूत दावेदार साबित हो सकते हैं।</p>
<p><strong>बुंदेलखंड की राजनीति का केंद्र हैं दतिया</strong><br>
उपचुनाव के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा समर्थकों पर शुरू हुई संगठनात्मक कार्रवाई ने भी पार्टी के भीतर हलचल बढ़ा दी है। सूत्र बताते हैं कि कई नेता भोपाल और दिल्ली में वरिष्ठ नेतृत्व से लगातार संपर्क कर रहे हैं, ताकि समर्थकों के खिलाफ प्रस्तावित अनुशासनात्मक कार्रवाई को रोका जा सके। हालांकि प्रदेश नेतृत्व इस बार संगठनात्मक अनुशासन और जवाबदेही के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाए हुए है। भाजपा के लिए दतिया केवल एक जिला नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।</p>
<p>इसलिए उपचुनाव की हार के बाद यहां होने वाला संगठनात्मक पुनर्गठन भविष्य की चुनावी रणनीति की दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि नई जिला टीम गुटीय राजनीति से ऊपर उठकर संगठन को मजबूत करे और कार्यकर्ताओं का विश्वास दोबारा हासिल करे। ऐसे में जिलाध्यक्ष की नियुक्ति और संगठन में होने वाले बदलाव आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश भाजपा की राजनीति का महत्वपूर्ण घटनाक्रम साबित हो सकते हैं।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>अभिजीत दीपके ही नहीं, CJP के कई पदाधिकारियों का भी AAP से कनेक्शन; नए खुलासे से बढ़ी चर्चा</title>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 15:30:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली के आंदोलन में मिली सफलता के बाद अपने आकार और विचार में देशव्यापी विस्तार की योजना बना ली है। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में अभिजीत दीपके के आवास पर दो दिन तक चली बैठक में उन चेहरों का ऐलान भी कर दिया गया, जिनके पास राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी होगी। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को जहां राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने का ऐलान हुआ तो अब तक प्रवक्ता रहे सौरभ दास और आशुतोष रांका को सह संयोजक की भूमिक दी गई है। खास बात यह है कि अधिकतर बड़े पद ऐसे लोगों के पास रहेंगे, जिनका आम आदमी पार्टी (आप) से जुड़ाव है।</p>
<p><strong>CJP के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके</strong><br>
सीजेपी के राष्ट्रीय संयोजक बनाए गए अभिजीत दीपके भी आम आदमी पार्टी का हिस्सा रहे हैं। वह पढ़ाई के लिए अमेरिका जाने से पहले 2020 से 2023 तक 'आप' की सोशल मीडिया टीम का हिस्सा रहे हैं। खुद दीपके ने भी कई इंटरव्यू के दौरान इस बात का स्वीकार किया है कि वह अरविंद केजरीवाल की पार्टी के लिए काम कर चुके हैं।</p>
<p><strong>सह-संयोजक आशुतोष रांका</strong><br>
सीजेपी के सह संयोजक की जिम्मेदारी संभालने जा रहे आशुतोष रांका भी पिछले कुछ महीने तक 'आप' के साथ थे। वह राजस्थान में आप <strong>के पदाधिकारी थे। सीजेपी के गठन के बाद पहले उन्हें प्रवक्ता और अब सह-संयोजक की भूमिका दी गई है।</strong></p>
<p><strong>संगठन प्रभारी आजिंक्य शिंदे</strong><br>
राष्ट्रीय संयोजक और दो सह संयोजकों के बाद पार्टी में सबसे अहम पद राष्ट्रीय संगठन प्रभारी का रखा गया है, जिसकी जिम्मेदारी आंजिक्य शिंदे के पास होगी। दिलचस्प है कि शिंदे भी 'आप' से जुड़े हुए हैं। वह महाराष्ट्र में 'आप' के यूथ विंग के मुखिया थे।</p>
<p><strong>मीडिया विभाग के प्रमुख विजय रेड्डी मलांगी</strong><br>
मीडिया विभाग के प्रमुख के अलावा साउथ जोन को संभालने की जिम्मेदारी विजय रेड्डी मलांगी को दी गई है, जो तेलंगाना में 'आप' के सक्रिय नेता रहे हैं। बताया जाता है कि वह तेलंगाना में स्टेट यूथ विंग के वर्किंग प्रेसिडेंट भी रहे हैं।</p>
<p><strong>सौरभ दास भी AAP के समर्थक</strong><br>
सह संयोजक और सीजेपी आंदोलन के प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे सौरभ दास भले ही 'आप' के सदस्य नहीं हैं, लेकिन वह अरविंद केजरीवाल की पार्टी का समय-समय पर समर्थन करते रहे हैं। जस्टिस स्वर्ण कांता के खिलाफ जब अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी ने मोर्चा खोला तो सौरभ दास भी उनके साथ थे। दास ने जस्टिस स्वर्ण कांता को लेकर कई दावे किए जिन्हें आधार बनाकर 'आप' नेताओं ने जज पर सवाल खड़े किए थे।</p>]]> </content:encoded>
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<title>‘मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जा रहे’, युसूफ पठान ने जताई नाराजगी; अमित शाह से की हस्तक्षेप की मांग</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर &#039;एनसीपीआई&#039; में शामिल हुए तीन बागी सांसदों ने अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में तत्काल दखल देने की गुहार लगाई है। बहरामपुर से सांसद और पूर्व क्रिकेटर युसूफ पठान … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>‘मस्जिदों, से, लाउडस्पीकर, हटाए, जा, रहे’, युसूफ, पठान, ने, जताई, नाराजगी, अमित, शाह, से, की, हस्तक्षेप, की, मांग</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली </strong></p>
<p>पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर 'एनसीपीआई' में शामिल हुए तीन बागी सांसदों ने अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में तत्काल दखल देने की गुहार लगाई है। बहरामपुर से सांसद और पूर्व क्रिकेटर युसूफ पठान समेत तीन सांसदों ने गृह मंत्रालय को ज्ञापन सौंपकर पुलिस की इस कार्रवाई को रोकने की मांग की है।</p>
<p><strong>अमित शाह से क्या बोले तीनों सांसद?</strong><br>
2024 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी के टिकट पर चुनाव जीतने वाले बहरामपुर के सांसद युसूफ पठान, मुर्शिदाबाद के सांसद अबू ताहेर खान और जंगीपुर के सांसद खलीलुर रहमान ने  गृह मंत्री के कार्यालय को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा।</p>
<p>सांसदों ने ज्ञापन में कहा है कि वे शोर नियंत्रण पर कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह से सम्मान करते हैं। हालांकि, सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि नियमों का पालन 'निष्पक्ष, एक समान और संवेदनशील' तरीके से हो, ताकि किसी की धार्मिक भावनाएं आहत न हों।</p>
<p><strong>क्या है पूरा विवाद और पुलिस की दलील?</strong><br>
दरअसल, पश्चिम बंगाल से ऐसी खबरें आ रही थीं कि स्थानीय पुलिस द्वारा मस्जिदों से अजान के लिए इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर जबरन हटाए जा रहे हैं। इसी के विरोध में सांसदों ने यह कदम उठाया है। दूसरी ओर, इस मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई किसी एक समुदाय के खिलाफ नहीं की जा रही है। ध्वनि प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेशों के तहत सभी धार्मिक स्थलों पर समान रूप से नियमों को लागू किया जा रहा है।</p>
<p><strong>NDA की बैठकों से दूर क्यों हैं ये सांसद?</strong><br>
बता दें कि ये तीनों सांसद उन 20 सांसदों के समूह में शामिल हैं, जिन्होंने टीएमसी का साथ छोड़कर एनसीपीआई का दामन थामा है। एनसीपीआई एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है, जिसने त्रिपुरा में दो विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था और इसे चंद सौ वोट ही मिले थे। यह पार्टी बीजेपी का समर्थन करती है। हालांकि, बंगाल के मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले से आने वाले इन तीनों मुस्लिम सांसदों ने हाल ही में एनडीए की बैठकों से दूरी बना ली थी। उनका स्पष्ट कहना था कि वे ऐसे किसी भी कानून का समर्थन नहीं करेंगे जो मुसलमानों के हितों के <strong>खिलाफ जाता हो।</strong></p>
<p><strong>वोटर लिस्ट से 4.55 लाख नाम कटने का भी उठाया मुद्दा</strong><br>
लाउडस्पीकर विवाद के अलावा, इन सांसदों ने मतदाता पहचान पत्र (EPIC) ट्रिब्यूनल के लंबित मामलों में हो रही भारी देरी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। सांसदों ने बताया कि कई असली मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं और वे ट्रिब्यूनल के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। इस देरी की वजह से आम लोगों को पासपोर्ट वेरिफिकेशन, जमीन की रजिस्ट्री और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने में भारी परेशानी हो रही है।</p>
<p>सांसदों ने मांग की है कि इस साल के अंत तक सभी लंबित और असली मामलों का तेजी से निपटारा किया जाए। गौरतलब है कि चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत अकेले मुर्शिदाबाद जिले में 4.55 लाख नाम हटाए गए हैं। यह आंकड़ा राज्य के सभी जिलों में सबसे अधिक है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>ममता बनर्जी को मिली बड़ी राहत? NCPI बगावत के बाद ताहिर, रहमान और पठान समेत 20 सांसदों पर संकट</title>
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<description><![CDATA[ कलकत्ता  ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी से 20 सांसदों के बगावत का मामला उलझ गया है. बीसों सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजेन पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) ज्वांइन किया था. इनमें वे तीन मुस्लिम सांसद भी थे जो कभी ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाते हैं. इन तीनों सांसदों के नाम हैं- पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान, … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:30:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ममता, बनर्जी, को, मिली, बड़ी, राहत, NCPI, बगावत, के, बाद, ताहिर, रहमान, और, पठान, समेत, सांसदों, पर, संकट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कलकत्ता</strong></p>
<p> ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी से 20 सांसदों के बगावत का मामला उलझ गया है. बीसों सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजेन पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) ज्वांइन किया था. इनमें वे तीन मुस्लिम सांसद भी थे जो कभी ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाते हैं. इन तीनों सांसदों के नाम हैं- पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान, अबू ताहेर और खलीलुर रहमान. अब इन तीनों मुस्लिम सांसदों ने NCPI के भीतर बगावत कर दी है. इन्होंने एनडीए के साथ जाने के NCPI के प्रस्ताव का विरोध किया है. इनके इस विरोध से बागियों को मान्यता मिलने का पूरा मामला जलेबी की तरह उलझ गया है। </p>
<p><strong>विलय को अभी तक मान्यता नहीं</strong><br>
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने NCPI में टीएमसी के बागियों के विलय को अभी तक आधिकारिक तौर मान्यता नहीं दी है. यानी सदन में वे अभी तक एक अलग राजनीतिक दल नहीं हैं. यह सब काम लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को करना है. लेकिन, स्पीकर ने इन बागी सांसदों के लिए सदन में बैठने की अलग व्यवस्था तो की है लेकिन अभी तक मान्यता नहीं दी है. इस बीच यह नया पेंच सामने आया है. 18 जुलाई को संसद के मानसून सत्र शुरू होने के वक्त स्पीकर ने इन बागियों को मूल टीएमसी के सदस्यों से अलग बिठाया था। </p>
<p><strong>विलय को मंजूरी की क्या है स्थिति</strong><br>
गुरुवार की तारीख तक स्पीकर ने टीएमसी के बागियों की NCPI में विलय को मंजूरी नहीं दी है. दूसरी तरह बीते दिनों स्पीकर ने शिवसेना में उद्धव गुट के छह सांसदों के विलय को मंजूरी दे दी थी. टीएमसी के बागियों के विलय को लेकर दल-बदल कानून के तहत गंभीर सवाल उठाए गए थे. इस बीच NCPI में नया बगावत हो गया है. ऐसे में पूरा मामला जलेबी की तरह उलझ गया है. कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञ दल-बदल कानून के 10वें शेड्यूल के तहत दो तिहाई सांसदों के टूटने को सदन में मान्यता देने की कानूनी वैधता की जांच कर रहे हैं। </p>
<p><strong>कानूनी विवाद</strong><br>
दरअलस, ममता बनर्जी गुट ने बागी सांसदों के NCPI में विलय की कोशिश के खिलाफ कानूनी जंग छेड़ दी है. उसने स्पीकर ओम बिड़ला को पत्र लिखा है कि उनकी पार्टी अब भी एक और अटूट है. पार्टी का दावा है कि कोई गुट सदन में खुद के लिए अलग पहचान का दावा नहीं कर सकता. इस कारण स्पीकर अभी तक इन बागियों की स्थिति को लेकर कोई कानूनी फैसला नहीं ले पाए हैं। </p>
<p><strong>आगे क्या</strong><br>
मौजूदा स्थिति में टीएमसी के इन बागियों को कानूनी और संवैधानिक तौर पर NCPI का सदस्य नहीं माना गया है. हालांकि व्यवहारिक तौर पर सरकार उनको अलग मान रही है. इस बीच बागियों में भी अब बगावत हो गया है. ऐसे में कई स्थितियां पैदा हो रही है। </p>
<p>1- क्या अब टीएमसी में बगावत के लिए जरूरी दो-तिहाई सदस्य नहीं जूट पाएंगे. टीएमके पास कुल 28 सांसद थे. लोकसभा में बगावत के लिए कम से कम 20 सांसदों के जरूरत थी. बागियों ने ये संख्या बल तो जुटा लिया लेकिन अब इनमें से तीन मुस्लिम सांसदों अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान ने NCPI पार्टी के एनडीए का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया है। </p>
<p>अब सवाल यह है कि इन तीनों मुस्लिम सांसदों की बगावत के बाद क्या 20 सांसदों वाला बागी गुट खुद अल्पमत में आ गया है. ऐसे में टीएमसी से बगावत के कारण उनकी सांसदी चली जाएगी। </p>
<p>या फिर अगर NCPI को एक पार्टी माना जाता है तो उसमें नए सिरे से बगावत के लिए फिर तो तिहाई सदस्य चाहिए. यानी कम से 14 सांसदों को बागी बनना होगा. लेकिन अभी केवल तीन सांसदों ने बागी रुख अपनाया है. ऐसे में क्या तीनों मुस्लिम सांसदों की सदस्यता जाएगी। </p>
<p><strong>हर स्थिति में ममता के हाथ में लड्डू</strong><br>
इन दोनों स्थितियों में ममता बनर्जी के हाथ में लड्डू है. अगर सभी 20 सांसद बागी करार दिए जाते हैं तो उनकी सीटों पर फिर से चुनाव होंगे और ममता दमखम के साथ मैदान में उतरेंगी. अगर तीन मुस्लिम सांसदों को बागी करार दिया जाता है तो भी वहां उप चुनाव होंगे और ममता दमखम के साथ चुनाव लड़ेगी. ये तीनों मुस्लिम बहुल सीट हैं और वहां भाजपा को बड़ी चुनौती मिलेगी. यानी पूरा खेल अब बुरी तरह उलझ गया है। </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>लोकसभा में NDA दो&#45;तिहाई बहुमत से कितना दूर? विपक्ष के 22 सांसदों के बदले रुख से बढ़ी सियासी हलचल</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली तमिलनाडु में बदली राजनीतिक परिस्थितियों के बाद केंद्र के परिसीमन विधेयक पर द्रमुक के रुख में भी बदलाव दिख रहा है। राज्य में चुनाव से पहले इस बिल का खुला विरोध कर रही द्रमुक अब कह रही है कि विधेयक के प्रावधानों को देखने के बाद इसके समर्थन करने या नहीं करने का … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:30:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>तमिलनाडु में बदली राजनीतिक परिस्थितियों के बाद केंद्र के परिसीमन विधेयक पर द्रमुक के रुख में भी बदलाव दिख रहा है। राज्य में चुनाव से पहले इस बिल का खुला विरोध कर रही द्रमुक अब कह रही है कि विधेयक के प्रावधानों को देखने के बाद इसके समर्थन करने या नहीं करने का फैसला लिया जाएगा।</p>
<p>सूत्रों का कहना है उसके इस रुख का मतलब है कि यदि बिल में यह प्रावधान होता है कि राज्यों में विधानसभा की मौजूदा सीटों की संख्या में समान रूप से 50% की वृद्धि होगी तो द्रमुक समर्थन देने के लिए तैयार हो सकती है। अप्रैल में जो बिल सरकार ने पेश किया था, तब ऐसी बात कही गई थी लेकिन यह विधेयक में नहीं थी। वह विधेयक पारित नहीं हो पाया था।</p>
<p><strong>पहले विरोध में थी DMK</strong><br>
सरकार पिछले सत्र में जब यह बिल लाई थी तो द्रमुक ने इसका खुलकर विरोध किया था और इसे तमिलनाडु के हितों के खिलाफ बताया था। तब विधेयक के प्रावधानों की बात पर कोई चर्चा नहीं हुई थी। सूत्रों का कहना है कि द्रमुक के दबाव में ही तब इंडिया गठबंधन ने इस विधेयक का विरोध किया था। तब सरकार को भी ऐसी उम्मीद नहीं थी कि स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने वाली कांग्रेस इस विधेयक का विरोध करेगी। द्रमुक के वरिष्ठ नेता त्रिरुचि शिवा ने कहा कि जो रुख पहले था, वह अब नहीं है। अब हम कह रहे हैं कि पहले विधेयक का प्रारूप सामने हो, उसके बाद निर्णय करेंगे।</p>
<p>द्रमुक के लोकसभा में 22 सदस्य हैं जो सरकार को दो तिहाई बहुमत से इस विधेयक को पारित कराने में अहम साबित हो सकते हैं। इस बिल को पारित करने के लिए सरकार को लोकसभा में 360 सांसदों का समर्थन चाहिए। अभी तक एनडीए के पास 326 तक की संख्या हुई है। बता दें कि इससे पूर्व कांग्रेस के टीवीके सरकार को समर्थन देने के मुद्दे पर नाराज द्रमुक इंडिया गठबंधन से अलग हो चुका है। ऐसे में सत्ता पक्ष की उम्मीदें उससे बढ़ी हैं।</p>
<p><strong>विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव नहीं</strong><br>
पीटीआई भाषा के अनुसार, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार रात कहा कि महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर 16 से 18 अगस्त के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार मौजूदा मॉनसून सत्र में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने की नए सिरे से कोशिश कर रही है। इस विधेयक का मकसद 2029 में लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करना है।</p>
<p>कुछ राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि स्वतंत्रता दिवस के बाद संसद का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण संशोधन विधेयक फिर से पेश किए जा सकते हैं। इस बारे में पूछे जाने पर रीजीजू ने विशेष सत्र के किसी भी प्रस्ताव से इनकार किया।</p>]]> </content:encoded>
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<title>राज्यसभा में जमकर हंगामा, BJP सांसदों के ‘कांग्रेस दफ्तर में मिलेंगे आतंकवादी’ नारे से बढ़ा सियासी विवाद</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली संसद के उच्च सदन राज्यसभा में गुरुवार को जोरदार हंगामा देखने को मिला. इस दौरान बीजेपी नेता और महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल सुखदेवराव बोंडे के एक बयान के बाद सदन में कांग्रेस के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई. सदन में &#039;आतंकवादी कहां मिलेंगे… कांग्रेस के दफ्तर में&#039; जैसे नारे गूंज उठे।  सदन … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 06 Aug 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>राज्यसभा, में, जमकर, हंगामा, BJP, सांसदों, के, ‘कांग्रेस, दफ्तर, में, मिलेंगे, आतंकवादी’, नारे, से, बढ़ा, सियासी, विवाद</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
संसद के उच्च सदन राज्यसभा में गुरुवार को जोरदार हंगामा देखने को मिला. इस दौरान बीजेपी नेता और महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल सुखदेवराव बोंडे के एक बयान के बाद सदन में कांग्रेस के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई. सदन में 'आतंकवादी कहां मिलेंगे… कांग्रेस के दफ्तर में' जैसे नारे गूंज उठे। </p>
<p>सदन में चर्चा के दौरान अपनी बात रखते हुए बीजेपी सांसद अनिल बोंडे ने साल 2014 से पहले के राजनीतिक माहौल का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 2014 से पहले बच्चा-बच्चा ये बोल सकता था कि कोयला चोर, भ्रष्टाचारी और आतंकवादी कहां मिलेंगे?</p>
<p>जैसे ही बोंडे ने ये सवाल किया, सत्ता पक्ष में बैठे बीजेपी के दूसरे सांसदों ने तुरंत जवाब देते हुए नारा लगाया- 'कांग्रेस के दफ्तर में। </p>
<p><strong>'देशद्रोही कहां मिलेंगे?' पर भी लगे नारे</strong><br>
इसके बाद सांसद अनिल बोंडे ने सदन में आगे कहा, 'देशद्रोही कहां मिलेंगे?, सैन्य विरोधी कहां मिलेंगे? और किसान विरोधी कहां मिलेंगे?' इन सभी सवालों पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने नारे लगाए, 'कांग्रेस के दफ्तर में। </p>
<p>सदन में लगातार हो रही इस नारेबाजी और हंगामे को देखते हुए पीठासीन अधिकारी उपसभापति हरिवंश ने तुरंत हस्तक्षेप किया. उपसभापति ने बोंडे को टोकते हुए विषय पर ही बोलने की सख्त हिदायत दी और कहा कि मुद्दे से न भटकें, सिर्फ वही रिकॉर्ड पर जाएगा।</p>
<p> <strong>कांग्रेस ने दी प्रतिक्रिया</strong><br>
वहीं बीजेपी सांसदों के विवादित नारों पर कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, 'जिस बीजेपी सांसद ने ये बात कही है सदन में, अगर ये सच है तो ये बताएं कि 2014 के बाद उन्होंने कितने आतंकवादी गिरफ्तार किए हैं कांग्रेस दफ्तर से? आपकी सरकार आते ही आपने हमारे कांग्रेस दफ्तर में बैठे कितने आतंकवादी चिन्हित किए और फिर गिरफ्तार किए. अगर नहीं किए गिरफ्तार तो ये आपकी सरकार की नाकामी है. ये सब ध्यान भटकाने की कोशिश है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>अवधेश नायक बने मध्य प्रदेश कांग्रेस के महासचिव, दतिया उपचुनाव में अहम भूमिका का मिला इनाम</title>
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<description><![CDATA[ भोपाल दतिया उपचुनाव में पार्टी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अवधेश नायक को प्रदेश कांग्रेस महासचिव बनाया गया। चुनाव के दौरान उनसे इसका वादा किया गया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के अनुमोदन से उनके नियुक्ति आदेश जारी किए हैं। 11 अगस्त को भोपाल में मध्य प्रदेश कांग्रेस … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 06 Aug 2026 15:30:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>अवधेश, नायक, बने, मध्य, प्रदेश, कांग्रेस, के, महासचिव, दतिया, उपचुनाव, में, अहम, भूमिका, का, मिला, इनाम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल</strong><br>
दतिया उपचुनाव में पार्टी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अवधेश नायक को प्रदेश कांग्रेस महासचिव बनाया गया। चुनाव के दौरान उनसे इसका वादा किया गया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के अनुमोदन से उनके नियुक्ति आदेश जारी किए हैं।</p>
<p>11 अगस्त को भोपाल में मध्य प्रदेश कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक होगी। इसमें दिग्विजय सहित सभी वरिष्ठ नेता होंगे शामिल। बैठक में आगामी चुनाव और कार्यक्रमों को लेकर होगी चर्चा।</p>
<p>अवधेश नायक 2023 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। इसके पीछे के वजह नरोत्तम मिश्रा से उनका मतभेद माना जाता है। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें टिकट दिया था। हाल ही में नायक ने दतिया चुनाव में हुई भाजपा की हार के बाद पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर निशाना साधा था।</p>
<p>टिकट की दौड़ में था नायक का नाम उल्लेखनीय है कि 2023 विधानसभा चुनाव और 2026 के दतिया उपचुनाव में अवधेश नायक का नाम टिकट की दौड़ में प्रमुखता से रहा, लेकिन दोनों बार पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया।</p>
<p>इसके बावजूद उन्होंने उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभाई। नियुक्ति पर अवधेश नायक ने कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसका पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगे और 2028 के <strong>विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत से काम करेंगे।</strong></p>
<p><strong>दतिया जीत के बाद संगठन पर कांग्रेस का फोकस</strong><br>
दतिया उपचुनाव में मिली जीत के बाद कांग्रेस संगठनात्मक विस्तार और कार्यकर्ताओं को नई जिम्मेदारियां देने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि उपचुनाव के सकारात्मक परिणाम से कार्यकर्ताओं में नया उत्साह आया है, जिसे आगामी विधानसभा चुनाव तक मजबूत संगठन में बदलना आवश्यक है।</p>
<p>इसी रणनीति के तहत अनुभवी नेताओं को अहम जिम्मेदारियां देकर जिला और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय बनाने की कवायद तेज कर दी गई है।</p>
<p><strong>2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी को मिलेगी मजबूती</strong><br>
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में जुटी है। प्रदेश महासचिव के रूप में अवधेश नायक की नियुक्ति को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>‘PoK अलग देश…’ NC सांसद के बयान से सियासी भूचाल, विपक्ष ने घेरा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद चौधरी मोहम्मद रमजान के पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK को लेकर दिए बयान से सियासी विवाद खड़ा हो गया है. दिल्ली में दिए बयान में रमजान ने कहा कि PoK एक अलग देश है और भारत का उससे कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि PoK के … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 22:30:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>‘PoK, अलग, देश…’, सांसद, के, बयान, से, सियासी, भूचाल, विपक्ष, ने, घेरा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद चौधरी मोहम्मद रमजान के पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK को लेकर दिए बयान से सियासी विवाद खड़ा हो गया है. दिल्ली में दिए बयान में रमजान ने कहा कि PoK एक अलग देश है और भारत का उससे कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि PoK के मामलों को पाकिस्तान सरकार देखेगी और वह वहां के लोगों की परेशानियों पर बात नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें वहां के लोगों ने भारतीय संसद में नहीं भेजा है. सांसद के इस बयान के बाद PoK को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। </p>
<p>नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद रमजान ने कहा, "हमें PoK की परवाह नहीं है. यह एक अलग देश है, यह दूसरे देश का हिस्सा है. पाकिस्तान सरकार उसके मामलों को देखेगी." उन्होंने यह भी कहा कि वह PoK में रहने वाले लोगों के दर्द की बात नहीं करेंगे, क्योंकि उन्होंने उन्हें भारतीय संसद में नहीं भेजा है। </p>
<p>आर्टिकल 370 हटे हुए बुधवार को 7 साल हो चुके हैं। इस मौके पर NC यानी नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद ने विवादित बयान दे दिया है। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर अलग देश है। खास बात है कि राज्य में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार है, जिसमें सबसे बड़ा दल एनसी है। इससे पहले पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने विरोध प्रदर्शन किया था।</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सांसद मोहम्मद रमजान ने पीओके के तार पाकिस्तान से जोड़े हैं। उन्होंने कहा है कि PoJK अलग देश है। साथ ही यह हिस्सा पाकिस्तान की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, 'हमें पीओके की चिंता नहीं है। वह एक अलग देश है। वह दूसरे देश का हिस्सा है। पाकिस्तान सरकार उसके मामलों को देखेगी' खास बात है कि भारत पीओके को देश का अभिन्न अंग मानता है। ऐसे में इस बयान को लेकर बड़ा राजनीतिक बवाल होने के आसार हैं। फिलहाल, इसपर एनसी की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है।<br>
<strong>फारूक अब्दुल्ला ने भी उठाए थे सवाल</strong></p>
<p>नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन और उसे केंद्र शासित प्रदेश में बदलने का बड़ा असर पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि अगर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में बनी रहती है तो इस तरह के कदमों को अन्य राज्यों में भी दोहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हुए घटनाक्रम का भारत के संघीय ढांचे पर व्यापक प्रभाव पड़ा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, 'जम्मू-कश्मीर को देखिए… एक राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया गया, जो मौलिक कानूनों के पूरी तरह खिलाफ है। और अगर वे सत्ता में बने रहे तो वे ऐसा अन्य राज्यों के साथ भी करेंगे, यह तय मानिए।' जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की विविधता तभी कायम रह सकती है, जब राज्य एकजुट होकर खड़े रहें।</p>
<p>नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने राज्य का दर्जा बहाल करने की अपनी मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश की व्यवस्था ने निर्वाचित सरकार को 'लगभग सभी अधिकारों से वंचित' कर दिया है, जबकि वास्तविक अधिकार केंद्र के पास हैं।</p>
<p><strong>PoK में इंटरनेट बंद, JAAC लगातार कर रही आंदोलन</strong><br>
एनसी सांसद का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में राजनीतिक और मानवीय संकट को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC के नेतृत्व में महंगाई, प्रशासनिक नीतियों और चुनावों को लेकर प्रदर्शन हुए हैं. इन प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई, नागरिकों की मौत और इंटरनेट बंद किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। </p>
<p><strong>भारत ने PoK में हुए चुनाव की आलोचना की</strong><br>
इसी बीच PoK में हुए दूसरे चरण के चुनाव को लेकर भारत सरकार भी पाकिस्तान पर निशाना साध चुकी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने वहां की चुनावी प्रक्रिया को "पूरी तरह ढकोसला" बताते हुए कहा था कि चुनावी कवायद से जमीनी हकीकत नहीं <strong>छिपाई जा सकती. भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने लोगों के असंतोष का जवाब दमन और बल प्रयोग से दिया है। </strong></p>
<p><strong>PoK प्रोटेस्ट पर महबूबा मुफ्ती की राय</strong><br>
PoK के हालात को लेकर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी हाल ही में अपनी बात रखी थी. उन्होंने कहा कि एलओसी के उस पार के लोगों की भी शांति, सम्मान और अपने भविष्य को तय करने की आकांक्षा है. उन्होंने पाकिस्तान की ओर से प्रतिनिधि संस्थाओं को कमजोर किए जाने पर सवाल उठाए। </p>
<p><strong>PoK में विदेशी मीडिया पर बैन</strong><br>
वहीं, PoK में अशांति के बीच पाकिस्तान में डिजिटल न्यूज वेबसाइटों और अल जजीरा इंग्लिश की पहुंच सीमित किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं, हालांकि पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे माहौल में NC सांसद का PoK को लेकर यह बयान राजनीतिक विवाद को और हवा दे सकता है। </p>
<p><strong>PoK में चुनाव पर भारत ने उठाए सवाल</strong></p>
<p>भारत ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 'तथाकथित' स्थानीय चुनाव 'पूरी तरह से दिखावा' हैं और ऐसी 'खोखली' कवायदें उस इलाके की 'जमीनी हकीकत' को छिपा नहीं सकतीं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी नियमित प्रेसवार्ता में कहा, 'पीओके में तथाकथित स्थानीय चुनाव पूरी तरह से दिखावा हैं। असल स्थिति यह है कि वहां बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं और पाकिस्तानी बलों की ओर से अंधाधुंध हत्याएं की जा रही हैं। ऐसी खोखली कवायदें हकीकत को छिपा नहीं सकतीं।'</p>]]> </content:encoded>
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<title>रिजिजू से मुलाकात में राहुल गांधी ने ठुकराया अनुरोध, संसद का गतिरोध बरकरार रहा आज</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  संसद के मानसून सत्र का तीसरा हफ्ता शुरू हो चुका है लेकिन सदन में गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी से संपर्क किया ताकि इस गतिरोध का कोई समाधान निकाला जा सके। सूत्रों ने बताया कि … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>रिजिजू, से, मुलाकात, में, राहुल, गांधी, ने, ठुकराया, अनुरोध, संसद, का, गतिरोध, बरकरार, रहा, आज</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 संसद के मानसून सत्र का तीसरा हफ्ता शुरू हो चुका है लेकिन सदन में गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी से संपर्क किया ताकि इस गतिरोध का कोई समाधान निकाला जा सके।</p>
<p>सूत्रों ने बताया कि विपक्ष की नारेबाजी के बीच लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद स्थगित कर दी गई, जिसके तुरंत बाद रिजिजू ने गांधी से उनके चैंबर में मुलाकात की।</p>
<p>राहुल गांधी ने सिरे से खारिज किया अनुरोध<br>
सूत्रों के मुताबिक, रिजिजू ने परिसीमन बिल और महिला आरक्षण संशोधन बिल पर कांग्रेस का सहयोग मांगा, जिन्हें सरकार मौजूदा सत्र में फिर से पेश करने की इच्छुक है। वहीं राहुल गांधी ने सरकार के अनुरोध को सिरे से खारिज कर दिया।</p>
<p><strong>राहुल गांधी ने क्या कहा?</strong><br>
विपक्ष के नेता ने किरेन रिजिजू से कहा कि जब तक राम मंदिर में कथित तौर पर चंदा चोरी होने के मामले पर चर्चा नहीं होती और राजधानी में 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह का बयान नहीं आता, तब तक सदन की कार्यवाही नहीं चल सकती।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी से मिलने के बाद किरेन रिजिजू ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और गृह मंत्री से मुलाकात की और संसद में जारी गतिरोध पर चर्चा की। अड़ियल विपक्ष ने इस सत्र में परिसीमन बिल पास करने की सरकार की योजना में अड़ंगा लगा दिया है।</p>
<p><strong>सरकार को क्या उम्मीद है?</strong><br>
सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना से नेताओं के पाला बदलने की वजह से सदन में बदली हुई संख्या-बल के दम पर सरकार को उम्मीद थी कि वह उस विवादित बिल को पास करा लेगी, जो पिछले सत्र में पास नहीं हो पाया था।</p>
<p>विपक्ष छात्रों पर की गई कार्रवाई को लेकर अमित शाह को निशाना बना रहा है और सदन में उनसे बयान की मांग कर रहा है। सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग का फैसला मजिस्ट्रेट करता है, न कि गृह मंत्री।</p>]]> </content:encoded>
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<title>दतिया उपचुनाव हार के बाद BJP का बड़ा एक्शन, जिला कार्यकारिणी भंग; मंडल&#45;मोर्चा और प्रकोष्ठ भी हटाए</title>
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<description><![CDATA[ भोपाल  दतिया उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी में एक्शन शुरू हो गया है। मंगलवार को बीजेपी ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए दतिया जिले का पूरा संगठन भंग कर दिया है। पार्टी नेतृत्व ने उपचुनाव परिणामों की समीक्षा के बाद जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह सहित पूरी जिला कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>दतिया, उपचुनाव, हार, के, बाद, BJP, का, बड़ा, एक्शन, जिला, कार्यकारिणी, भंग, मंडल-मोर्चा, और, प्रकोष्ठ, भी, हटाए</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल</strong><br>
 दतिया उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी में एक्शन शुरू हो गया है। मंगलवार को बीजेपी ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए दतिया जिले का पूरा संगठन भंग कर दिया है। पार्टी नेतृत्व ने उपचुनाव परिणामों की समीक्षा के बाद जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह सहित पूरी जिला कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया है।</p>
<p>दतिया उपचुनाव में हार के बाद भोपाल में समीक्षा बैठक हुई थी। बैठक में जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया है। अब बीजेपी ने अनुशासनात्मक कार्यवाही की है। मंगलवार को जारी लेटर ने कहा गया है कि मंडल, मोर्चा, प्रकोष्ठ, प्रकल्प और विभागों की सभी इकाइयों को भंग किया जाता है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर यह कार्रवाई उपचुनाव परिणामों की समीक्षा के लिए गठित विशेष समिति की अनुशंसाओं के आधार पर की गई है। पार्टी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि दतिया में संगठनात्मक स्तर पर व्यापक पुनर्गठन किया जाएगा।</p>
<p><strong>कांग्रेस ने बरकरार रखी सीट</strong></p>
<p>दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6,056 वोटों से हराया. यह सीट कांग्रेस के राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने के बाद खाली हुई थी. 30 जुलाई को मतदान हुआ था, जबकि 4 अगस्त को नतीजे घोषित किए गए. कांग्रेस ने यह सीट अपने पास बरकरार रखी। </p>
<p><strong>बीजेपी के लिए क्यों बढ़ी चिंता?</strong><br>
दतिया को लंबे समय से बीजेपी का मजबूत इलाका माना जाता रहा है. इस बार पार्टी ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था. चुनाव प्रचार में सीएम मोहन यादव और नरोत्तम मिश्रा दोनों ने हिस्सा लिया, लेकिन पार्टी जीत नहीं सकी. इसके बाद उम्मीदवार के चयन, स्थानीय रणनीति और संगठन की भूमिका पर सवाल उठने लगे। </p>
<p>नतीजों में एक आंकड़ा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. नरोत्तम मिश्रा के बूथ नंबर-121 पर भी बीजेपी पीछे रह गई. यहां कांग्रेस को 291 वोट मिले, जबकि बीजेपी को 264 वोट ही मिले. इसके बाद पार्टी के भीतर समीक्षा की मांग तेज हो गई. राजनीतिक गलियारों में भीतरघात और बूथ प्रबंधन को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं, हालांकि पार्टी ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। </p>
<p><strong>दतिया में बीजेपी के पिछड़ने की मुख्य वजह</strong></p>
<p><strong>1- डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से पार्टी के भीतर असंतोष और बगावत हुई.<br>
2- बीजेपी का ब्राह्मण कार्ड और जातीय समीकरण अपेक्षित असर नहीं दिखा सके.<br>
3- कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम की मजबूत स्थानीय पकड़ और जनसंपर्क का फायदा मिला.<br>
4- बीजेपी की संगठनात्मक रणनीति और बूथ प्रबंधन अपेक्षा के अनुरूप प्रभावी नहीं रहा. </strong></p>
<p>पूरे जिला संगठन को एक साथ भंग करना बताता है कि बीजेपी इस हार को सिर्फ एक सीट का नुकसान नहीं मान रही. पार्टी अब दतिया में नई टीम के साथ नई शुरुआत करना चाहती है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि नए संगठन में किन चेहरों को जगह मिलती है और पार्टी इस हार से क्या सीख लेती है। </p>
<p><strong>सीएम आवास पर हुई थी बैठक<br>
दतिया में हार के बाद बीजेपी एक्शन मोड में आ गई। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आवास पर समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। जिसमें प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, चुनाव प्रभारी, मंत्री और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए थे।</strong></p>
<p><strong>    दतिया उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी का एक्शन<br>
    दतिया जिले की कार्यकारिणी को भंग किया<br>
    समीक्षा बैठक के बाद पार्टी का फैसला<br>
    हेमंत खंडेलवाल ने सख्त कार्रवाई का दिया था इशारा</strong></p>
<p>
<strong>बीजेपी को मिली थी हार</strong><br>
दतिया विधानसभा उपचुनाव के रिजल्ट सोमवार को घोषित किए गए थे। उपचुनाव में बीजेपी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। यहां से कांग्रेस के घनश्याम सिंह को जीत मिली है। भाजपा को 6,016 वोटों से मिली हार के बाद ही प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि था कि पार्टी समीक्षा करेगी और अनुशासनहीनता की भूमिका मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।<br>
पवन तिवारी</p>]]> </content:encoded>
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<title>गिरिराज सिंह का महबूबा मुफ्ती पर बड़ा हमला, बोले&#45; ‘आतंकियों का साथ देती रही हैं’</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने आज यानी बुधवार को पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती को आड़े हाथों लिया है. केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने महबूबा मुफ्ती को आतंकी बताया है. तिरंगा उल्टा पकड़ने से जुड़े सवाल पर गिरिराज सिंह ने कहा कि महबूबा मुफ्ती ने हमेशा आतंकियों का ही साथ दिया है. गौरतलब … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 16:30:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने आज यानी बुधवार को पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती को आड़े हाथों लिया है. केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने महबूबा मुफ्ती को आतंकी बताया है. तिरंगा उल्टा पकड़ने से जुड़े सवाल पर गिरिराज सिंह ने कहा कि महबूबा मुफ्ती ने हमेशा आतंकियों का ही साथ दिया है. गौरतलब है कि आज यानी 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने की बरसी है। </p>
<p>दरअसल, 370 हटाए जाने की बरसी की पूर्व संध्या पर मंगलवार शाम को महबूबा मुफ्ती ने अनुच्छेद 370 हटने के विरोध में प्रदर्शन किया. इस दौरान महबूबा मुफ्ती ने उल्टा तिरंगा पकड़ा था. इसे लेकर सियासी बवाल हो गया है. जब गिरिराज सिंह से महबूबा मुफ्ती के उल्टा तिरंगा पकड़ने पर सवाल किया गया तो उन्होंने महबूबा मुफ्ती को सीधे आतंकी बता दिया। </p>
<p><strong>‘महबूबा मुफ्ती तो आतंकी है’</strong><br>
गिरिराज सिंह ने कहा, ‘महबूबा मुफ्ती तो आतंकी है, ऐसा इसलिए कह सक रहा हूं क्योंकि उ सब दिन आतंकियों का साथ दी. थोड़ा बहुत दिन हमलोगों के साथ रहे, ठीक करने का कोशिश किया, नै ठीक हुए तो छोड़ दिए.’ गौरतलब है कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती मंगलवार रात यहां विरोध प्रदर्शन के दौरान उल्टा राष्ट्रीय ध्वज पकड़े हुए दिखाई दीं, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया। </p>
<p><strong>महबूबा मुफ्ती ने किया प्रदर्शन</strong><br>
महबूबा मुफ्ती ने अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए को निष्प्रभावी करके जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के विरोध में श्रीनगर स्थित पीडीपी कार्यालय के बाहर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ धरना दिया. धरने के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री राष्ट्रध्वज और पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य का झंडा थामे हुए थीं. हालांकि, अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रध्वज गलती से उल्टा पकड़ा गया था। </p>
<p><strong>क्या महबूबा मुफ्ती पर होगी कार्रवाई?</strong><br>
अधिकारियों ने बताया कि अब पीडीपी प्रमुख के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने पर विचार किया जा रहा है. राष्ट्रध्वज को गलत तरीके से प्रदर्शित करना भारत की ध्वज संहिता का उल्लंघन माना जाता है. नियमों के अनुसार, राष्ट्रध्वज में सबसे ऊपर हमेशा केसरिया रंग, बीच में सफेद रंग और सबसे नीचे हरा रंग होना चाहिए. सफेद रंग पर 24 तीलियों वाला गहरे नीले रंग का अशोक चक्र होना अनिवार्य है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>RSS कार्यक्रम में शामिल होने की अटकलों पर शशि थरूर की सफाई, बोले&#45; जानें क्या है पूरा मामला</title>
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<description><![CDATA[ मुंबई  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के मुंबई में आयोजित होने वाले जेन जी इवेंट को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। इस बीच इस कार्यक्रम में उनके साथ कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर के भी शामिल होने की खबरें सामने आईं। सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा तेज हो जाने के बाद … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई </strong></p>
<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के मुंबई में आयोजित होने वाले जेन जी इवेंट को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। इस बीच इस कार्यक्रम में उनके साथ कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर के भी शामिल होने की खबरें सामने आईं। सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा तेज हो जाने के बाद अब शशि थरूर ने खुद सामने आकर इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति साफ कर दी है।</p>
<p>चर्चाओं पर जवाब देते हुए शशि थरूर ने बताया कि वे इस कार्यक्रम के आयोजक संस्थान 'इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस' (IIMUN) के सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि सलाहकार बोर्ड में शामिल होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वे संस्था के हर सत्र में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें या हर वक्ता के विचारों का समर्थन करें। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में यह भी लिखा कि वे अभिव्यक्ति की आजादी में पूरा यकीन रखते हैं।</p>
<p><strong>क्या बोले थरूर?</strong><br>
शशि थरूर ने एक पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा, “यह आरएसएस का संगठन नहीं है। यह छात्रों का आंदोलन है, जो अलग अलग विचारधाराओं से जुड़े शिक्षाविदों और थिंकर्स को छात्रों से बातचीत करने के लिए बुलाता है। मैं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास करता हूं और 7 और 8 तारीख को होने वाली इसकी बोर्ड बैठक और कार्यक्रमों की अध्यक्षता करूंगा। मिस्टर भागवत 6 तारीख को इनसे मुलाकात करेंगे, उस समय मैं संसद सत्र के लिए दिल्ली में रहूंगा।”</p>
<p><strong>मोहन भागवत करेंगे जेन जी से बात</strong><br>
बता दें कि IIMUN के 15 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक युवा सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। उद्घाटन समारोह 6 अगस्त 2026 को मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) में आयोजित होगा। इस दौरान देश भर के 100 से अधिक शहरों के स्कूलों और कॉलेजों के 15 से 19 साल के 2,000 से अधिक छात्र हिस्सा लेंगे। सत्र का विषय "द रोल ऑफ यूथ इन यूनाइटिंग द वर्ल्ड, द इंडियन वे" रखा गया है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत इस युवा सम्मेलन में छात्रों को संबोधित करेंगे और उनसे संवाद करेंगे।</p>
<p>हाल ही में नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधारों को लेकर देश भर में हुए छात्र आंदोलनों के बाद जेन जी चर्चा में आ गए थे। IIMUN नेतृत्व का कहना है कि यह संवाद नई पीढ़ी के विचारों को सुनने और देश के नेताओं से रूबरू कराने का एक निष्पक्ष मंच है। वहीं कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि युवाओं के साथ संवाद का स्वागत है, लेकिन अगर इसका नेतृत्व युवा या 'जेन जी' के प्रतिनिधि ही करतें तो यह और भी बेहतर होगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>‘संघ परिवार गांधी फैमिली से बेहतर’… BJP में शामिल होते ही सुष्मिता देव ने बताई बड़ी वजह</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुई राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पहली बार खुलकर कहा है कि संघ परिवार गांधी फैमिली से बेहतर और ज्यादा लोकतांत्रिक है। दशकों तक कांग्रेस और पांच साल टीएमसी से जुड़ी रहीं देव ने &#039;द इंडियन एक्सप्रेस&#039; से बातचीत में अपनी राजनीतिक यात्रा, पुरानी पार्टियों से मोहभंग … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 10:30:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>‘संघ, परिवार, गांधी, फैमिली, से, बेहतर’…, BJP, में, शामिल, होते, ही, सुष्मिता, देव, ने, बताई, बड़ी, वजह</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुई राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पहली बार खुलकर कहा है कि संघ परिवार गांधी फैमिली से बेहतर और ज्यादा लोकतांत्रिक है। दशकों तक कांग्रेस और पांच साल टीएमसी से जुड़ी रहीं देव ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' से बातचीत में अपनी राजनीतिक यात्रा, पुरानी पार्टियों से मोहभंग और भाजपा चुनने के कारणों पर विस्तार से बात की। इस दौरान उन्होंने नीट पेपर लीक विवाद, छात्र विरोध प्रदर्शनों पर सरकार के रवैये, संसद में भाषा के इस्तेमाल और आरएसएस की भूमिका पर भी अपने विचार रखे।<br>
<strong>तीन पार्टियों का अनुभव और वैचारिक अंतर</strong></p>
<p>सुष्मिता देव ने बताया कि उन्होंने अपना राजनीतिक करियर छात्र राजनीति से शुरू किया था। वे कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई से जुड़ी थीं और 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस से तृणमूल में जाना कोई वैचारिक बदलाव नहीं था। ममता दीदी खुद कांग्रेस से निकलीं और यह पार्टी बनाई। लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हो गया कि बंगाल में या देश के किसी भी हिस्से में तृणमूल का वोट शेयर वैचारिक नहीं, बल्कि पूरी तरह नेता-केंद्रित है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि कांग्रेस का एक वैचारिक आधार है। अगर किसी को भाजपा पसंद नहीं है, तो वह कांग्रेस को वोट देता है। वहीं भाजपा का वोट पूरी तरह वैचारिक है। उन्होंने कहा कि जब उनके दो सांसद थे या जब उनके पास कोई सांसद नहीं था, और आज जब वे सत्ता पक्ष में हैं, उन्होंने कभी अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया।<br>
<strong>नेतृत्व और आंतरिक लोकतंत्र</strong></p>
<p>पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व के बारे में बोलते हुए देव ने कहा कि कांग्रेस हर चुनाव के बाद कई समीक्षा बैठकें करती है। इससे पार्टी लोकतांत्रिक लगती है, लेकिन जब बात लागू करने की आती है तो अंदरूनी सहमति की कमी साफ नजर आती है। तृणमूल कांग्रेस में चर्चा के लिए शायद ही कोई मंच है। सत्ता पूरी तरह एक व्यक्ति के हाथ में है क्योंकि उन्होंने पार्टी बनाई और उसे चलाया। सारी डोर उन्हीं के हाथ में रहती है।</p>
<p>वहीं, आलोचकों के इस आरोप पर कि भाजपा में उनकी कोई आवाज नहीं होगी और सत्ता सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के हाथ में है, देव ने इसे गलत बताया। उन्होंने कहा कि सभी सांसदों के पास एक गार्डियन मंत्री होता है। आप उनसे अपने राज्य की दिक्कतों के बारे में खुलकर बात कर सकते हैं। इसके अलावा संगठन भी है। आप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के पास भी जा सकते हैं। अगर कुछ भी काम नहीं करता, चाहे आपको पसंद हो या न हो, संघ परिवार की नजरें और कान जमीन पर हैं।<br>
<strong>संघ परिवार से मुलाकात और भूमिका</strong></p>
<p>संघ परिवार से किसी से मुलाकात के सवाल पर देव ने कहा कि उन्होंने सीधे किसी से मुलाकात नहीं की है, लेकिन यह बात उन्हें साफ है कि संघ के बहुत बड़े और अनुभवी नेता संसदीय व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। इसमें कई तरह के जुड़ाव होते हैं। कांग्रेस से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस में अगर शीर्ष पर कोई आपसे नाराज हो जाए तो आपका करियर खत्म हो जाता है। आप परिवार को लेकर कांग्रेस में टिक नहीं सकते। लेकिन अगर आप भाजपा में काबिल इंसान हैं तो वे हमेशा एक मंच रहेंगे।</p>
<p>भाजपा में संघ परिवार की भूमिका पर कांग्रेस नेताओं द्वारा की जाने वाली आलोचना का जवाब देते हुए देव ने कहा कि कांग्रेस पर भी एक परिवार का राज है। एक पार्टी गांधी परिवार के साथ है और भाजपा के लिए उनका आइडियोलॉग संघ परिवार है। आरएसएस जैसा बड़ा संगठन होना बेहतर है, जहां अलग-अलग दिशाओं में अलग-अलग विचार हों। परिवार तो दोनों तरफ है। उधर फर्स्ट फैमिली है और इधर संघ परिवार है। लेकिन संघ परिवार कहीं ज्यादा लोकतांत्रिक है क्योंकि यह एक परिवार से बड़ा संस्थान है।<br>
<strong>काग्रेस ने अपनी विचारधारा को कमजोर किया</strong></p>
<p>कांग्रेस की विचारधारा के सवाल पर देव ने कहा कि कांग्रेस ने लगातार अपनी विचारधारा को कमजोर किया है। उन्होंने उदाहरण दिए कि महाराष्ट्र में पहली बार शिवसेना के साथ गठबंधन, एमके स्टालिन के साथ लंबे समय तक रहने के बाद अचानक टीवीके के साथ चले जाना, और असम में कम्युनल पार्टियों के साथ नहीं होने का दावा करने के बावजूद बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन। उन्होंने कहा कि वे वैसी कांग्रेस नहीं हैं जैसी मेरे पिता के समय में हुआ करती थी। बता दें कि उनके दिवंगत पिता संतोष मोहन देव असम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रहे थे।<br>
<strong>तृणमूल से नाराज क्यों?</strong></p>
<p>तृणमूल कांग्रेस से निराश होने के कारण बताते हुए देव ने कहा कि उनकी हालत पार्टी के अन्य नेताओं जैसी नहीं थी क्योंकि वे बंगाल में जमीनी स्तर पर राजनीति करने वाली नहीं थीं। उन्हें लगा कि तृणमूल के लिए बंगाल के बाहर पार्टी का विस्तार करना बहुत मुश्किल था। उनके पास कांग्रेस और भाजपा में से एक को चुनने का विकल्प था। उत्तर-पूर्व के राज्यों में भाजपा के कामकाज और बढ़ती स्वीकार्यता को देखते हुए उन्होंने फैसला किया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और गृह मंत्री अमित शाह से बात करने के बाद उन्हें साफ हो गया कि अगले 10-15 साल अपने लोगों के लिए काम करने के लिए भाजपा ही सही पार्टी है।<br>
<strong>आरएसएस के प्रति पुरानी सोच</strong></p>
<p>अपने राजनीतिक करियर के शुरुआती दिनों में आरएसएस और संघ परिवार के प्रति विचारों पर देव ने बताया कि छात्र राजनीति शुरू करते समय वे एबीवीपी के खिलाफ थीं। हमें भगवा से एलर्जी होती थी। अब शिक्षा व्यवस्था और सिलेबस बदलने की बहस पर उन्होंने कहा कि भाजपा के सत्ता में आने से पहले पाठ्यक्रम में इतनी हेराफेरी होती थी कि आजादी के आंदोलन में सिर्फ कांग्रेस के लोगों की भूमिका को ही उजागर किया जाता था। विपक्ष के नेताओं द्वारा संघ परिवार पर शिक्षा व्यवस्था चलाने का आरोप लगाने पर उन्होंने कहा कि गांधी परिवार ने नेहरू के योगदान को आगे बढ़ाया, लेकिन असली सिलेबस वह होना चाहिए जो सभी अलग-अलग विचारधाराओं के बारे में बात करे। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता केबी हेडगेवार से शाखा में मिले थे, लेकिन कांग्रेस कभी यह बात नहीं कहती।<br>
<strong>छात्र विरोध प्रदर्शन और सरकार का रवैया</strong></p>
<p>छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर सरकार के रवैये के बारे में देव ने कहा कि एक समय जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शनों का अड्डा हुआ करता था। कांग्रेस सरकार के दौरान किसी मंत्री को उन प्रदर्शनों में जाते शायद ही देखा गया, निर्भया मामले तक नहीं। मोदी सरकार ने नए कानून लाकर और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के जरिए इसे अच्छे से संभाला। अब कोर्ट में यह तय होना है कि इस्तेमाल किया गया बल सही और जरूरी था या ज्यादा। उन्होंने कहा कि संसद की ओर मार्च कर रहे हजारों लोगों को देखते हुए गेट पर रोकना और संसद की <strong>सुरक्षा गृह मंत्री की जिम्मेदारी है।</strong></p>
<p>वहीं, दोनों सदनों में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा गृह मंत्री को दोषी ठहराने पर देव ने कहा कि एक जिम्मेदार विपक्ष के नेता को देश का कानून पता होना चाहिए। पुराने सीआरपीसी और नए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में स्पष्ट है कि कौन इस तरह का आदेश दे सकता है और किन परिस्थितियों में कार्यपालिका के पास जाना पड़ता है। इसलिए अमित शाह पर पेलेट्स डालने जैसे आरोप पूरी तरह गलत इरादे वाले राजनीतिक बयान हैं।<br>
<strong>संसद की भाषा और जेन जी</strong></p>
<p>संसद में दोनों तरफ से हो रही बातचीत, खासकर भाजपा की कुछ महिला सांसदों की भाषा पर देव ने कहा कि यह बातचीत बिल्कुल ठीक नहीं है। उन्होंने पूछा कि क्या वे राज्यसभा में जाकर कह सकती हैं कि असम में किसी ने विपक्ष को बेवकूफ कहा? सरकार को घेरने का पूरा हक है, लेकिन संसद कोई सड़क या चुनावी रैली नहीं है। विपक्ष के नेता को याद रखना चाहिए कि वे संवैधानिक पद पर हैं।</p>
<p>युवाओं के विरोध प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि जेन जी सबसे युवा पीढ़ी है। उनसे बड़ों जैसा बर्ताव करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। सबसे ऊंचे संवैधानिक पदों के लिए इस्तेमाल की जा रही भाषा देखकर वे बहुत परेशान हुईं। सरकार के रवैये के बारे में उन्होंने बताया कि बिल में साफ कहा गया है कि सर्विस प्रोवाइडर्स, पेपर लीक करने वाले और सिस्टम में शामिल लोगों पर केस चलेगा, लेकिन लीक हुआ पेपर खरीदने वाले छात्रों पर कोई केस न<strong>हीं है।<br>
पार्टी बदलने के बाद का अनुभव</strong></p>
<p>वहीं, पार्टी बदलने के बाद के अनुभव पर देव ने कहा कि वे अब तक एनडीए की दो बैठकों में शामिल हो चुकी हैं। पहली बार उन्हें लगा कि प्रधानमंत्री जैसा काम करते हैं, वह पूरा पहले नहीं देखा जाता था। पहले वे उनकी आलोचना कर रही थीं क्योंकि जो सामग्री मिलती थी वह विपक्ष से आती थी। लेकिन एनडीए के कार्यक्रम में जाने के बाद उन्हें लगा कि एक पार्टी के रूप में सरकार के अच्छे कामों को लोगों तक पहुंचाने के लिए और बहुत कुछ करने की जरूरत है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>चेन्नई में सियासी ड्रामा! त्रिशा टिप्पणी मामले में उदयनिधि स्टालिन को हाईकोर्ट से राहत, रिहाई के आदेश</title>
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<description><![CDATA[ चेन्नई  मद्रास हाई कोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु पुलिस को निर्देश दिया कि वे DMK नेता और पूर्व डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन से पूछताछ के बाद उन्हें रिहा कर दें। उनसे कावेरी जल-बंटवारे के विवाद को लेकर तंजावुर में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर &quot;दोहरे अर्थ&quot; वाली टिप्पणी करने के मामले … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 19:30:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>चेन्नई, में, सियासी, ड्रामा, त्रिशा, टिप्पणी, मामले, में, उदयनिधि, स्टालिन, को, हाईकोर्ट, से, राहत, रिहाई, के, आदेश</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चेन्नई</strong><br>
 मद्रास हाई कोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु पुलिस को निर्देश दिया कि वे DMK नेता और पूर्व डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन से पूछताछ के बाद उन्हें रिहा कर दें। उनसे कावेरी जल-बंटवारे के विवाद को लेकर तंजावुर में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर "दोहरे अर्थ" वाली टिप्पणी करने के मामले में पूछताछ की जानी थी।</p>
<p>कोर्ट ने यह निर्देश तब दिया जब तमिलनाडु सरकार ने उसे बताया कि पूछताछ के बाद उदयनिधि को स्टेशन बेल पर रिहा कर दिया जाएगा। विपक्ष के नेता को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर कथित तौर पर निशाना साधने वाली टिप्पणियों के लिए हिरासत में लिए जाने के कुछ घंटों बाद, एडवोकेट जनरल पी.एस. रमन ने कोर्ट को बताया कि पूछताछ के बाद उदयनिधि को हिरासत में नहीं रखा जाएगा।</p>
<p>यह बात उदयनिधि की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कही गई। सरकार के आश्वासन को रिकॉर्ड करते हुए, जस्टिस जी.के. इलानथिराययन ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि उन्हें ज़्यादा देर तक हिरासत में न रखा जाए और दिन खत्म होने से पहले उन्हें रिहा कर दिया जाए। यह राजनीतिक टकराव तब शुरू हुआ जब उदयनिधि ने तंजावुर में कावेरी जल-बंटवारे के विवाद और कर्नाटक के प्रस्तावित मेकेदातु बांध प्रोजेक्ट को लेकर सत्ताधारी TVK सरकार के रवैये के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया।</p>
<p>इससे पहले पुलिस की हिरासत में ले जाए जाते समय मुस्कुराते हुए दिखे उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि वह इस गिरफ्तारी को 'मज़ाक' मानते हैं और 'कानूनी तौर पर इसका सामना करेंगे'। DMK ने इस गिरफ्तारी की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। DMK नेता TKS एलंगोवन ने कहा, 'किसी के खिलाफ कुछ नहीं कहा गया। उदयनिधि ने विजय की नाकामियों को गिनाया। भाषण में कुछ भी अपमानजनक नहीं था। उन्होंने त्रिशा का नाम तक नहीं लिया।'</p>
<p>TVK के अमेरिकाई नारायणन ने आरोप को खारिज करते हुए कहा, 'उदयनिधि स्टालिन को मुख्यमंत्री विजय या TVK के खिलाफ बोलने के लिए नहीं, बल्कि एक महिला का अपमान करने के लिए गिरफ्तार किया गया है।' उदयनिधि पर तंज कसते हुए TVK नेता ने कहा कि उन्हें अपना नाम बदलकर 'वल्गर-निधि' (अश्लील-निधि) कर लेना चाहिए। सोमवार को तंजावुर में कावेरी विवाद को लेकर आयोजित एक विरोध सभा को संबोधित करते हुए, उदयनिधि ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि तमिलनाडु को कावेरी का एक भी बूंद पानी नहीं मिला, जबकि मुख्यमंत्री बेपरवाह बने रहे।</p>
<p>रैली ने तब एक विवादास्पद मोड़ ले लिया जब भीड़ में से किसी ने 'त्रिशा, त्रिशा' के नारे लगाए। अपना भाषण रोकते हुए, उदयनिधि ने चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान के साथ आपत्तिजनक दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी की, जिससे भारी राजनीतिक विरोध शुरू हो गया। इस टिप्पणी की कड़ी आलोचना करते हुए TVK ने राष्ट्रीय महिला आयोग को पत्र लिखकर DMK नेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। पार्टी ने उदयनिधि के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी।</p>
<p>TVK ने NCW को दी अपनी शिकायत में कहा है, 'उदयनिधि स्टालिन ने दर्शकों के नारों से प्रेरित होकर एक प्रमुख महिला सार्वजनिक हस्ती को निशाना बनाते हुए आपत्तिजनक, दोहरे अर्थ वाली टिप्पणियां और अश्लील इशारे किए।' शिकायत में आगे कहा गया, 'एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक मंच से ऐसी भाषा का इस्तेमाल सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के वस्तुकरण और मौखिक उत्पीड़न को सामान्य बनाता है।' इससे पहले, तमिलनाडु बीजेपी ने उदयनिधि की टिप्पणियों को लेकर उनकी गिरफ्तारी की मांग भी की थी।</p>
<p><strong>जिसकी मां, पत्नी और बेटी हो, इतनी भद्दी बातें नहीं करेगा</strong><br>
बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने सोमवार को कहा, 'तंजावुर में मुख्यमंत्री विजय और तृषा के बारे में उदयनिधि स्टालिन का दोहरे अर्थ वाला भाषण घिनौना, अश्लील, भद्दा और शर्मनाक है। सच तो यह है कि कोई बदमाश या चोर भी, जिसकी मां, पत्नी और बेटी हो, इतनी भद्दी बातें नहीं करेगा। कोई भी मां, पत्नी या बेटी ऐसे लोगों को माफ नहीं करेगी जो इस तरह की बातें करते हैं। लेकिन यह शर्मनाक है कि पूर्व मुख्यमंत्री एम के स्टालिन चुपचाप देखते रहते हैं, जबकि खुद को 'द्रविड़ मॉडल' कहने वाले लोग सार्वजनिक रूप से इस तरह की बातें करते हैं।'</p>
<p>उन्होंने आगे कहा,'इस घटिया भाषण के लिए उदयनिधि स्टालिन को गिरफ्तार करने और जेल भेजने से तमिलनाडु का सम्मान बढ़ेगा।' दुर्भाग्य से, यह पहली बार नहीं है जब तृषा के बारे में आपत्तिजनक तरीके से बात की गई है, अक्सर विजय ही मुख्य निशाना होते हैं। जब से उनके रिश्ते की अफवाहें सामने आई हैं, सिनेमा और राजनीति दोनों इलाकों के लोग इस पर टिप्पणी करने में संकोच नहीं करते। इस साल की शुरुआत में, तमिलनाडु बीजेपी नेता नैनार नागेंद्रन ने टिप्पणी की थी कि राजनीति में आने से पहले विजय को 'तृषा के घर से बाहर निकलना' चाहिए। उस समय उनकी कानूनी टीम ने उनकी ओर से जवाब दिया था।</p>]]> </content:encoded>
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<title>दतिया की सियासत में बड़ा खुलासा! पूर्व विधायक का दावा&#45; ‘भीतरघात और सांठगांठ से उपचुनाव रुकवाने की थी कोशिश’</title>
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<description><![CDATA[ दतिया  दतिया विधानसभा उपचुनाव की मतगणना से ठीक 24 घंटे पहले कांग्रेस से निष्कासित पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने रविवार को कई बड़े आरोप लगाया था। उन्होंने न सिर्फ पार्टी के भीतरघात की बात कही, बल्कि नए विधायक घनश्याम सिंह और भाजपा के दिग्गज डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बीच सांठगांठ का भी दावा किया। भारती … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>दतिया, की, सियासत, में, बड़ा, खुलासा, पूर्व, विधायक, का, दावा-, ‘भीतरघात, और, सांठगांठ, से, उपचुनाव, रुकवाने, की, थी, कोशिश’</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दतिया </strong></p>
<p>दतिया विधानसभा उपचुनाव की मतगणना से ठीक 24 घंटे पहले कांग्रेस से निष्कासित पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने रविवार को कई बड़े आरोप लगाया था। उन्होंने न सिर्फ पार्टी के भीतरघात की बात कही, बल्कि नए विधायक घनश्याम सिंह और भाजपा के दिग्गज डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बीच सांठगांठ का भी दावा किया। भारती का कहना है कि दतिया की राजनीति में उनका मकसद एक व्यक्ति के दबदबे को खत्म करना था और उसमें वे सफल हुए।</p>
<p><strong>'मुझे फर्जी केस में फंसाकर अयोग्य कराया गया'</strong><br>
निष्कासन पर सवाल के जवाब में भारती ने कहा कि उन्हें बलि का बकरा बनाए जाने से गुरेज नहीं है। 2023 में जनता ने फैसला सुना दिया था। मुझे फर्जी केस में फंसाकर अयोग्य कराया गया। लेकिन मेरी लड़ाई खत्म नहीं हुई। विधायक की कुर्सी बड़ी नहीं है, दतिया की सियासत बदलना बड़ा है। सबसे बड़ा आरोप उन्होंने नवनिर्वाचित विधायक घनश्याम सिंह पर लगाया। भारती के अनुसार, जब उन्होंने डॉ. नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ पेड न्यूज का केस चुनाव आयोग में दायर किया था, तब गवाह के तौर पर घनश्याम सिंह का नाम दिया गया था। लेकिन उन्होंने कोर्ट में बयान देने से इनकार कर दिया।</p>
<p>आज भी वे डॉ. मिश्रा की तारीफ करते हैं। मुझे पूरा शक है कि वे उनके इशारे पर काम कर रहे हैं। यही कारण है कि वर्षों तक दतिया से दूर रहने वाले और लगातार चुनाव हारने वाले व्यक्ति को अचानक टिकट मिल गया। भारती ने सबसे चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट से राहत न मिलने पर जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तो उसी समय डॉ. नरोत्तम मिश्रा की टिकट कट गई थी।</p>
<p>भारती ने कहा कि मेरे वकील के पास उनके दो वकील आए। ऑफर था कि सुप्रीम कोर्ट से स्टे दिलवा देंगे, आप सिर्फ तकनीकी आपत्ति हटवा दीजिए। उनका मकसद चुनाव टलवाना था। कहा गया कि आप ढाई साल विधायक रहिए। मैंने साफ मना कर दिया। जरूरत पड़ी तो उन वकीलों के नाम भी बताऊंगा। भारती ने कहा कि पार्टी नेताओं ने उनसे चुनाव न लड़ने की बात की थी। उन्होंने खुद भी परिवार के लिए टिकट नहीं मांगा और सुझाव दिया कि किसी ओबीसी चेहरे को मौका दिया जाए।</p>
<p><strong>'इतनी जल्दी में फैसला किसके दबाव में हुआ'?</strong><br>
जैसे ही डॉ. मिश्रा की टिकट कटी, घनश्याम सिंह मैदान में आ गए। लगता है उन्हें पहले से भरोसा दिलाया गया था कि मदद मिलेगी। निष्कासन की प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए भारती ने कहा कि कांग्रेस के संविधान में अनुशासन समिति और सुनवाई का प्रावधान है। मुझे न नोटिस मिला, न पक्ष रखने का मौका। इतनी जल्दी में फैसला किसके दबाव में हुआ, इसका जवाब आलाकमान दे। </p>
<p>भारती का आरोप है कि दतिया में कांग्रेस के अंदर ही दो तरह के लोग हैं। जो लड़े, वे जेल गए, आर्थिक नुकसान उठाया। लेकिन कुछ लोग हर बार बच जाते हैं। जनता सब समझ रही है कि असली संघर्ष किसने किया। उपचुनाव में कांग्रेस की जीत पर उन्होंने कहा कि यह उनकी 2009 से चली आ रही लड़ाई का नतीजा है। घनश्याम सिंह का इसमें कोई योगदान नहीं। मजबूत भाजपा नेता को हराने का काम जमीनी कार्यकर्ताओं ने किया।</p>]]> </content:encoded>
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<title>जिसे इस्तीफा देना है दे दो…’, बागी विधायकों पर CM शिवकुमार का 440 वोल्ट वाला बयान</title>
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<description><![CDATA[ बेंगलुरु  कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस के भीतर नाराजगी के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने नाराज हो रहे विधायकों को कड़ा संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि यदि कोई विधायक इस्तीफा देना चाहता है तो उसे कोई नहीं रोक सकता और अगर इस्तीफा दिया गया तो वह उसे &quot;पलभर में स्वीकार&quot; कर लेंगे. … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 16:30:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बेंगलुरु </strong><br>
कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस के भीतर नाराजगी के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने नाराज हो रहे विधायकों को कड़ा संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि यदि कोई विधायक इस्तीफा देना चाहता है तो उसे कोई नहीं रोक सकता और अगर इस्तीफा दिया गया तो वह उसे "पलभर में स्वीकार" कर लेंगे. साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति में धैर्य रखना जरूरी है और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर पार्टी का हित होना चाहिए। </p>
<p>मंगलवार को सदाशिवनगर स्थित अपने आवास के बाहर पत्रकारों से बातचीत में डीके शिवकुमार ने कहा कि राजनीति में ऐसे उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि धर्म सिंह और सिद्धरमैया के मंत्रिमंडल में उन्हें और जी. परमेश्वर को मंत्री पद नहीं मिला था, लेकिन उन्होंने धैर्य नहीं खोया. उन्होंने कहा, "क्या तब हमने इस्तीफा दे दिया था? अगर राजनीतिक भविष्य बनाना है तो पार्टी सबसे ऊपर होनी चाहिए। </p>
<p>मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि वीरेंद्र पाटिल के समय एस. बंगारप्पा को मंत्री नहीं बनाया गया था, लेकिन बाद में वही मुख्यमंत्री बने. इसी तरह धर्म सिंह और मल्लिकार्जुन खड़गे को भी कई अवसरों पर पद नहीं मिला, लेकिन उन्होंने संगठन के साथ बने रहकर आगे बड़ी जिम्मेदारियां निभाईं। </p>
<p>डीके शिवकुमार ने कहा कि बोर्ड और निगमों के अध्यक्षों तथा पदाधिकारियों को भी इस्तीफा देने के निर्देश दिए जाएंगे. उन्होंने बताया कि सभी को पहले ही यह जानकारी दे दी गई थी कि इन पदों का कार्यकाल ढाई वर्ष का होगा. यह बात विधायकों और मंत्रियों दोनों को पहले से बता दी गई थी. उन्होंने कहा कि सबसे पहले पार्टी कार्यकर्ताओं को अवसर दिया जाएगा, उसके बाद विधायकों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी. यदि कोई नया फैसला होगा तो वह स्वयं मीडिया को इसकी जानकारी देंगे। </p>
<p>मुख्यमंत्री ने नई जिम्मेदारी संभालने वाले मंत्रियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत अपने-अपने प्रभार वाले जिलों का दौरा करें और वहां सूखा तथा बाढ़ की स्थिति का आकलन करें. उन्होंने अधिकारियों को भी आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए हैं ताकि मंत्री मौके पर जाकर हालात की समीक्षा कर सकें और प्रभावित क्षेत्रों के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>दतिया उपचुनाव से पहले कांग्रेस का बड़ा एक्शन, पूर्व विधायक राजेंद्र भारती सस्पेंड; भितरघात का आरोप</title>
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<description><![CDATA[ दतिया   दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आने से ठीक एक दिन पहले कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस ने यहां के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को पार्टी ने निलंबित कर दिया है। राजेंद्र भारती ने कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी और वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणी की … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 03 Aug 2026 13:15:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>दतिया, उपचुनाव, से, पहले, कांग्रेस, का, बड़ा, एक्शन, पूर्व, विधायक, राजेंद्र, भारती, सस्पेंड, भितरघात, का, आरोप</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दतिया </strong></p>
<p> दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आने से ठीक एक दिन पहले कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस ने यहां के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को पार्टी ने निलंबित कर दिया है। राजेंद्र भारती ने कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी और <strong>वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणी की थी।</strong></p>
<p><strong>पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित</strong><br>
अनुशासनहीनता और पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयानबाजी करने के गंभीर आरोपों के चलते कांग्रेस आलाकमान ने कड़ा कदम उठाते हुए पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है। निलंबन का यह आदेश कांग्रेस <strong>के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की ओर से जारी किया गया है।</strong></p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला?</strong><br>
दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान संपन्न हुआ था और 3 अगस्त को मतों की गिनती होनी है। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह ने पार्टी हाईकमान को एक लिखित शिकायत भेजी थी।  शिकायत में कांग्रेस प्रत्याशी ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती पर गंभीर भितरघात और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया था। कुंवर घनश्याम सिंह का आरोप था कि राजेंद्र भारती ने पार्टी को हरवाने के लिए बीजेपी से फंडिंग ली और सोची-समझी साजिश के तहत कांग्रेस के खिलाफ काम किया। प्रत्याशी ने उन्हें पार्टी से पूरी तरह निष्कासित करने की मांग की थी, जिसके बाद संगठन ने यह कार्रवाई की है।</p>
<p><strong>राजेंद्र भारती का पलटवार</strong><br>
दूसरी ओर राजेंद्र भारती ने निलंबन और आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा था कि घनश्याम सिंह संभावित हार के डर से इस तरह की अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने उल्टा आरोप मढ़ते हुए कहा कि घनश्याम सिंह ने स्वयं पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की सहमति से चुनाव लड़ा है और उनके पूरे चुनावी फंड मैनेजमेंट में भी बीजेपी से जुड़े लोगों की ही मुख्य भूमिका रही है।</p>
<p>​परिणामों से ठीक पहले हुए इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम और गुटबाज़ी ने दतिया के सियासी पारे को और बढ़ा दिया है। अब सभी की निगाहें 3 अगस्त को आने वाले नतीजों पर टिक गई हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<title>पंजाब कांग्रेस की बैठक में चन्नी समर्थकों के नारे, मंच से नाराजगी</title>
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<description><![CDATA[ चंडीगढ़ 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारी में कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है. इसी कड़ी में &#039;हर बूथ, कांग्रेस मजबूत&#039; अभियान के तहत राज्यभर में बैठकें आयोजित की जा रही हैं. रविवार को बरनाला में हुई कांग्रेस की कैंपेन कमेटी की बैठक में पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल, … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 16:15:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>पंजाब, कांग्रेस, की, बैठक, में, चन्नी, समर्थकों, के, नारे, मंच, से, नाराजगी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चंडीगढ़</strong><br>
2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारी में कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है. इसी कड़ी में 'हर बूथ, कांग्रेस मजबूत' अभियान के तहत राज्यभर में बैठकें आयोजित की जा रही हैं.</p>
<p>रविवार को बरनाला में हुई कांग्रेस की कैंपेन कमेटी की बैठक में पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, बरनाला विधायक कुलदीप सिंह काला ढिल्लों, पूर्व मंत्री राज कुमार वेरका और वरिष्ठ नेता रज़िया सुल्ताना समेत कई नेता मौजूद रहे.</p>
<p>हालांकि, बैठक की शुरुआत में ही माहौल गर्म हो गया.पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थन में 'चन्नी जिंदाबाद' के नारे लगने लगे, जिस पर रज़िया सुल्ताना नाराज हो गईं. उन्होंने मंच से ही माहौल खराब करने वालों को बाहर निकालने की बात कही, जिसके बाद कुछ देर तक बैठक में हंगामे की स्थिति बनी रही.</p>
<p>रजिया सुल्ताना ने स्पष्ट रूप से कहा कि कुछ लोग हैं जो पार्टी का माहौल खराब करना चाहते हैं. उनका कहना है कि जो लोग माहौल खराब कर रहे हैं उन्हें पार्टी से बाहर निकाला जाना चाहिए, किसी भी नेता को पार्टी का माहौल खराब करने नहीं दिया जाएगा.</p>
<p>मंच से कहा गया कि कार्यकर्ता इस तरह अनुशासन को भंग न करें. रजिया सुल्ताना ने कहा कि कुछ लोग जानबुझकर पार्टी में माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं.</p>
<p>हालांकि बाद में स्थिति संभालते हुए रजिया सुल्ताना ने 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की जीत का दावा किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी एकजुट है और आने वाले समय में पार्टी जीत हासिल करेगी.</p>
<p>कांग्रेस में बहुत समय से बिखराव की खबरें आ रही हैं, कहा जा रहा है कि गुटबाजी हो रही है. हालांकि पंजाब कांग्रेस ने इसे सिरे से खारिज करते हुए हमेशा एकजुटता की बातें कही हैं.</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>कावेरी जल विवाद फिर भड़का, तमिलनाडु&#45;कर्नाटक आमने&#45;सामने, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली भारत के दो राज्य तमिलनाडु और कर्नाटक एक बार फिर से कावेरी जल विवाद के चलते उलझे हुए नजर आ रहे हैं। तमिलनाडु के नए नवेले मुख्यमंत्री थलपति विजय भी इस मुद्दे पर फंसते हुए नजर आ रहे हैं। मॉनसून के दौरान कम वर्षा की वजह से कर्नाटक ने पानी छोड़ने से इनकार … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 14:15:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>कावेरी, जल, विवाद, फिर, भड़का, तमिलनाडु-कर्नाटक, आमने-सामने, सुप्रीम, कोर्ट, पहुंचा, मामला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
भारत के दो राज्य तमिलनाडु और कर्नाटक एक बार फिर से कावेरी जल विवाद के चलते उलझे हुए नजर आ रहे हैं। तमिलनाडु के नए नवेले मुख्यमंत्री थलपति विजय भी इस मुद्दे पर फंसते हुए नजर आ रहे हैं। मॉनसून के दौरान कम वर्षा की वजह से कर्नाटक ने पानी छोड़ने से इनकार कर दिया है। इसकी वजह से एक बार फिर से यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। थलपति विजय को पीछे करके तमिलनाडु का मुख्य विपक्षी दल डीएमके इस मुद्दे पर देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गया है। यह मामला राजनैतिक पार्टी से ऊपर उठकर दोनों राज्यों के बीच की लड़ाई बन गया है। एक तरफ कर्नाटक में सर्वदलीय बैठक बुलाई जा रही है। वहीं, तमिलनाडु में भी डीएमके इसी तरह की पहल की मांग कर रही है।</p>
<p>दोनों राज्यों की राजनैतिक सरगर्मी बढ़ाने वाला यह कावेरी जल विवाद आज का नहीं है। इस नदी का उद्गम स्थल कर्नाटक में है। इस वजह से कर्नाटक इस पर ऐतिहासिक रूप से अपना अधिकार बताता रहा है। लेकिन मॉनसून में बारिश की कमी और दोनों राज्यों की इस नदी पर निर्भरता की वजह से यह विवाद हर साल सामने आ जाता है। आइए इस पूरे विवाद को गहनता के साथ समझते हैं।<br>
क्या है कावेरी नदी का विवाद</p>
<p>कर्नाटक से शुरू होने वाली कावेरी नदी अपनी ऐतिहासिकता के लिए जानी जाती है। यह कर्नाटक कोडागू से निकलती है और तमिलनाडु होते हुए बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। इसकी लंबाई कुल 800 किलोमीटर के लगभग है। इसका डेल्टा क्षेत्र केरल और पुडुचेरी में भी फैला हुआ है। ऐसे में यह चारों राज्य की इस नदी के ऊपर काफी ज्यादा निर्भर करते हैं। लेकिन इनमें सबसे ज्यादा विवाद तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच में ही होता है। क्योंकि इस नदी का ज्यादातर उपयोग यही दोनों राज्य करते हैं।</p>
<p>बढ़ती जनसंख्या और कृषि के लिए बढ़ते पानी के उपभोग की वजह से कावेरी नदी का जल दोनों राज्यों के लिए आम तौर पर कम पड़ जाता है। इसलिए हर साल यह विवाद बढ़ता जाता है।</p>
<p><strong>कावेरी जल विवाद की टाइमलाइन</strong><br>
कावेरी जल को लेकर पहला ज्ञात समझौता वर्ष 1892 में सामने आया था। उस वक्त तत्कालीन मैसूर (आज का कर्नाटक) राज्य और मद्रास प्रेसिडेंसी (आज का तमिलनाडु) ने इस पर एक नियम लागू किया था कि अगर मैसूर किसी बड़े प्रोजेक्ट का निर्माण करना चाहता है, तो वह शुरुआत करने से पहले मद्रास से इसकी इजाजत लेगा।</p>
<p><strong>1924 में नया समझौता</strong><br>
लगातार पानी की बढ़ती जरूरतों और विवाद से बचने के लिए मैसूर रियासत और मद्रास प्रेसीडेंसी ने एक नया समझौता किया। 50 सालों के लिए किए गए इस समझौते के मुताबिक मैसूर को कृष्णराज सागर बांध बनाने की अनुमति मिली। दूसरी तरफ मद्रास प्रेसिडेंसी को भी मेट्टूर बांध बनाने की इजाजत मिल गई। इसके बाद करीब 50 सालों तक दोनों राज्य थोड़े बहुत तनाव के बीच शांति से रहते रहे। आजादी के बाद भी इसी समझौते के तहत पानी का बंटवारा होता रहा।</p>
<p><strong>2. 1974 में समझौता खत्म, विवाद शुरू</strong><br>
1974 में आजादी के पहले किया गया समझौता खत्म हो गया। यहीं से एक नया और बड़ा विवाद शुरू हो गया। बढ़ती जरूरतों की वजह से कर्नाटक ने नया समझौता करने से इनकार कर दिया और तमिलनाडु के साथ पानी साझा करने से भी कन्नी काट ली। तमिलनाडु की तरफ से कहा गया कि इस मामले पर पुराने अधिकार बने रहने चाहिए लेकिन कर्नाटक इसके लिए तैयार नहीं हुआ।</p>
<p><strong>3. 1986 में तमिलनाडु सरकार ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा</strong><br>
1974 में समझौता समाप्त होने के बाद कर्नाटक सरकार ने नई बांध परियोजनाएं पर ध्यान देना शुरू कर दिया। कावेरी के जल का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करने की जुगत में दोनों राज्यों के बीच में विवाद बढ़ता गया। इसके परिणामस्वरूप तमिलनाडु की तत्कालीन सरकार 1986 में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। चार साल तक चले केस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (CWDT) का गठन कर दिया।</p>
<p><strong>4. 1991 में CWDT का पहला आदेश जारी</strong><br>
1991 में CWDT ने अपना पहला अंतरिम आदेश जारी करते हुए कर्नाटक को हर साल तमिलनाडु के लिए 205 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (TMC) पानी छोड़ने का आदेश दिया। यहीं से कन्नड़ और तमिल समूहों का विरोध शुरू हो गया। 1991 में आए इस फैसले का कर्नाटक में बड़े स्तर पर विरोध हुआ। लोग सड़कों पर आ गए। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने इस फैसले को पटलने की कोशिश की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश को जारी कर दिया। इसके बाद कर्नाटक ने पानी छोड़ा और आने वाले कुछ सालों तक मॉनसून में अच्छी बारिश हुई। लेकिन विवाद बना रहा। 1993 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जय ललिता अनशन पर बैठ गईं।</p>
<p><strong>5. 1998 में केंद्र ने साधा मामला</strong><br>
1998 में केंद्र ने दोनों राज्यों के बीच बढ़ते विवाद को थामने के लिए एक संस्थागत व्यवस्था बनाने का प्रयास किया। इसके लिए कावेरी नदी अधिकरण (CRA) का गठन किया गया। ताकि इस मुद्दे से जुड़े विवादों को सुलझाया जा सके।</p>
<p><strong>6. 2002 में भीषण सूखे ने बढ़ाया विवाद</strong><br>
वर्ष 2002 मॉनसून की कमी की वजह से दक्षिण भारत में भयंकर सूखा पड़ा। इसलिए कर्नाटक ने अपनी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पानी छोड़ने से इनकार कर दिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अध्यक्षता वाले CRA ने इस मामले में आदेश जारी करते हुए कर्नाटक को 9000 क्यूसेक पानी तमिलनाडु के लिए छोड़ने का आदेश दिया। लेकिन तमिलनाडु को यह रास नहीं आया और तत्कालीन राज्य सरकार ने जाकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया।</p>
<p>इस दौरान दोनों राज्यों में जमकर विरोध प्रदर्शन हुए। लोग सड़कों पर आ गए और राजनीतिक पार्टियां के लोग अपने-अपने राज्यों को लेकर बात करने लगे। लोगों में भी इस बात का जमकर विरोध देखने को मिला। 18 सितंबर 2002 को कर्नाटक के एक किसान ने नदी में कूदकर अपनी जान दे दी। इसके बाद मामला और भी ज्यादा भड़क गया।</p>
<p>वर्ष 2005 आते-आते मामला इतना ज्यादा बढ़ गया कि कर्नाटक ने तमिलनाडु को पानी देने से ही इनकार कर दिया।</p>
<p><strong>7. 2007 में CWDT ने सुनाया अपना फैसला</strong><br>
1991 में बने CWDT ने 16 साल की सुनवाई के बाद अपना अंतिम आदेश जारी किया। इसके मुताबिक चारों राज्यों कर्नटाक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी को कावेरी नदी का पानी का हिस्सा मिलना तय हुआ। लेकिन इस फैसले में तमिलनाडु को ज्यादा पानी दिया गया था। इसकी वजह से पूरे कर्नाटक में आंदोलन शुरू हो गए। और देखते ही देखते यह आंदोलन हिंसक हो गए। हालांकि, इसके बाद भी इस फैसले को ही लागू कर दिया गया।</p>
<p>तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जय ललिता के प्रयासों के फलस्वरूप भारत सरकार ने 2013 में न्यायाधिकरण के फैसले को ही आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया।</p>
<p><strong>8. 2016 में फिर भड़क गया विवाद</strong><br>
2013 में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किए गए फैसले के बाद भी 2016 में जब कम बारिश हुई, तो यह विवाद एक बार फिर से खड़ा हो गया। कर्नाटक ने पानी छोड़ने से इनकार कर दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2 सितंबर को कर्नाटक सरकार से 'जियो और जीने दो' की नीति का पालन करते हुए पानी छोड़ने का अनुरोध किया। इसके बाद एपेक्स कोर्ट ने भी कर्नाटक से 15000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा। 7 सितंबर को कर्नाटक ने जैसे ही पानी छोडने की शुरुआत की। पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर हिंसक आंदोलन होने लगे। इसमें एक एक व्यक्ति की मौत हो गई। हिंसक भीड़ ने तमिल लोगों और तमिल नाम वाले व्यापारियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। कई बसें जला दी गईं और संपत्ति को भी जमकर नुकसान पहुंचाया गया।</p>
<p><strong>9. 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने दिया नया आदेश</strong><br>
2018 में दोनों राज्यों के बीच बढ़ते विवाद को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नया फैसला दिया। इसमें CWDT के फैसले में थोड़ा बदलाव करते हुए। कर्नाटक के हिस्से को थोड़ा बढ़ाकर और तमिलनाडु के हिस्से को थोड़ा कम कर दिया गया। इसके साथ ही कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण का गठन किया गया। ताकि नियमों को पूरी ईमानदारी के साथ पूरा किया जा सके।</p>
<p><strong>10. 2023 में फिर बढ़ गया विवाद</strong><br>
2023 में मॉनसून में एक बार फिर से कम बारिश हुई। इसके बाद एक बार फिर से दोनों राज्य आमने-सामने आकर खड़े हो गए। तमिलनाडु ने पानी छोड़ने का आग्रह किया। लेकिन कर्नाटक ने यह कहकर खारिज कर दिया कि उसके बांधों में पर्याप्त पानी नहीं है। मामला दोबारा प्राधिकरण में पहुंचा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कर्नाटक 15 दिनों तक लगातार 5000 क्यसेक पानी छोड़ने के लिए राजी हुआ।</p>
<p><strong>11. 2026 में फिर शुरू हुआ मामला</strong><br>
वर्ष 2026 में एक बार फिर से मॉनसून में कम बारिश हुई है। इस वजह से एक बार फिर से दोनों राज्यों के बीच में तनाव बढ़ गया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पानी छोड़ने से इनकार कर दिया है। इतना ही नहीं उन्होंने तमिलनाडु सीएम की मिलने की पेशकश को भी यह कहकर ठुकरा दिया है कि अभी सही समय नहीं है। कर्नाटक में सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है, वहीं दूसरी ओर तमिलनाडु में डीएमके यही मांग कर रही है। विजय सरकार चुप्पी साधे हुए है, जबकि डीएमके इस मामले पर मुखर है।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>मायावती का बड़ा एक्शन, अशोक सिद्धार्थ और बेनीवाल बसपा से निष्कासित</title>
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<description><![CDATA[ लखनऊ उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में बड़े पैमाने पर फेरबदल और कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है. पार्टी सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर कड़ा कदम उठाते हुए अपने समधी (आकाश आनंद के ससुर) अशोक सिद्धार्थ और बीएसपी कोआर्डिनेटर रणधीर सिंह बेनीवाल को पार्टी से … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 14:15:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मायावती, का, बड़ा, एक्शन, अशोक, सिद्धार्थ, और, बेनीवाल, बसपा, से, निष्कासित</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लखनऊ</strong><br>
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में बड़े पैमाने पर फेरबदल और कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है. पार्टी सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर कड़ा कदम उठाते हुए अपने समधी (आकाश आनंद के ससुर) अशोक सिद्धार्थ और बीएसपी कोआर्डिनेटर रणधीर सिंह बेनीवाल को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है.</p>
<p>पार्टी से बाहर करने से पहले मायावती ने अशोक सिद्धार्थ से दिल्ली, कर्नाटक, ओडिशा और पश्चिम बंगाल राज्यों का प्रभार वापस ले लिया था. वहीं, रणधीर सिंह बेनीवाल के पास पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारियां थीं.</p>
<p>इन सभी जिम्मेदारियों से हटाने के बाद सोशल मीडिया पर आधिकारिक पोस्ट के जरिए दोनों नेताओं को पार्टी से निष्कासित करने का ऐलान किया गया.</p>
<p>एक्स पर पोस्ट कर किया ऐलान<br>
यूपी में आगामी विधानसभा आम चुनावों की तैयारी के लिए उम्मीदवारों को तय करने का अधिकार पूरी तरह से उनके पास है. उन्होंने लखनऊ पार्टी कार्यालय में खुद बैठकें कर दो दर्जन से ज्यादा उम्मीदवार तय/फाइनल कर दिए हैं और आगे भी सभी सीटों पर टिकट वही तय करेंगी.</p>
<p>आकाश आनंद केवल पार्टी के तय किए गए उम्मीदवारों की घोषणा के लिए जनसभाएं कर रहे हैं, जिसका उनके कद को घटाने या बढ़ाने से कोई लेना-देना नहीं है. मायावती ने पार्टी के लोगों और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे आकाश आनंद के बारे में सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अनाप-शनाप बातों और अफवाहों से सावधान रहें, क्योंकि इसमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है. ऐसे सभी शरारती व जातिवादी तत्वों से पार्टी के लोगों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए.<br>
 </p>]]> </content:encoded>
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<title>शहजाद पूनावाला ने BJP से दिया इस्तीफा, जानिए पार्टी छोड़ने के पीछे क्या रही वजह</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया है. CNN-News18 के सूत्रों के मुताबिक, भाजपा में लंबे समय से प्रवक्ता रहे शहजाद पूनावाला ने निजी कारणों से यह इस्तीफा दिया है. उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. इस्तीफा देने का कारण अभी स्पष्ट … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 14:15:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>शहजाद, पूनावाला, ने, BJP, से, दिया, इस्तीफा, जानिए, पार्टी, छोड़ने, के, पीछे, क्या, रही, वजह</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया है. CNN-News18 के सूत्रों के मुताबिक, भाजपा में लंबे समय से प्रवक्ता रहे शहजाद पूनावाला ने निजी कारणों से यह इस्तीफा दिया है. उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. इस्तीफा देने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। </p>
<p>सूत्रों के अनुसार, इस्तीफे को लेकर जल्द ही इस बारे में शहजाद पूनावाला की ओर से एक आधिकारिक बयान जारी किया जाएगा.  शहजाद पूनावाला अपनी बेहतरीन बहस करने की क्षमता के लिए पहचाने जाते हैं. शहजाद पूनावाला भाजपा के मुखर प्रवक्ता रहे हैं. वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कट्टर समर्थक रहे हैं। </p>
<p>सोशल मीडिया एकाउंट एक्स पर उनके बायो में भाजपा का जिक्र कहीं नहीं दिख रहा है. एक्स पर मौजूद बायो में उन्होंने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आजीवन समर्थक बताया है. वहीं, इंस्टाग्राम पर पूनावाला के बायो में उन्हें अब भी BJP का राष्ट्रीय प्रवक्ता बताया गया है। </p>
<p><strong>कौन हैं शहजाद पूनावाला?</strong><br>
शहजाद पूनावाला भाजपा के मुखर प्रवक्ताओं में से एक हैं. वह पेशे से वकील और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता हैं. शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस के साथ अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. हालांकि, 2017 में वे तब चर्चा में आए जब उन्होंने पार्टी की आंतरिक चुनाव प्रक्रिया के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बगावत की. उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया राहुल गांधी को अध्यक्ष पद पर बिठाने के मकसद से ‘धांधली’ वाली थी। </p>
<p>इस सार्वजनिक विवाद के कारण कांग्रेस पार्टी और उनके अपने परिवार के सदस्यों (जिनमें उनके भाई तहसीन पूनावाला भी शामिल थे) ने उनसे सार्वजनिक रूप से दूरी बना ली. इसके बाद वे बीजेपी में शामिल हो गए. भाजपा में उन्हें अहम सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखने के लिए राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया गया। </p>]]> </content:encoded>
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<title>ममता बनर्जी को लग सकता है बड़ा झटका? अमित शाह के साथ दिखे सौगत रॉय, शत्रुघ्न सिन्हा ने नड्डा को बताया पुराना दोस्त</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक और झटका लग सकता है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद और ममता के वफादार सौगत रॉय और शत्रुघ्न सिन्हा की एक तस्वीर सुर्खियां बटोर रही हैं, जिनमें वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा के साथ संसद की कैंटीन में दोपहर … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 12:15:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ममता, बनर्जी, को, लग, सकता, है, बड़ा, झटका, अमित, शाह, के, साथ, दिखे, सौगत, रॉय, शत्रुघ्न, सिन्हा, ने, नड्डा, को, बताया, पुराना, दोस्त</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक और झटका लग सकता है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद और ममता के वफादार सौगत रॉय और शत्रुघ्न सिन्हा की एक तस्वीर सुर्खियां बटोर रही हैं, जिनमें वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा के साथ संसद की कैंटीन में दोपहर का भोजन करते नजर आ रहे हैं। तस्वीरें सामने आने के बाद उनके भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की अटकलें तेज हो गईं। शत्रुघ्न सिन्हा से जब इस तस्वीर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने नड्डा को अपना पुराना दोस्त करार दिया।</p>
<p>हालांकि सौगत रॉय ने तुरंत पलटवार करते हुए एनडीए (NDA) की बैठक से NCPI के तीन मुस्लिम सांसदों की गैरमौजूदगी को उजागर कर पूरे मामले का रुख ही मोड़ दिया। आपको बता दें कि लीक हुई तस्वीरों में सौगत रॉय संसद कैंटीन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ एक ही टेबल पर नजर आ रहे थे। उनके साथ आसनसोल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा भी मौजूद थे।</p>
<p>तस्वीरों पर सफाई देते हुए सौगत रॉय ने किसी भी तरह की राजनीतिक साजिश या दलबदल की संभावनाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया। संसद के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, "कैंटीन में अमित शाह से कोई राजनीतिक बातचीत नहीं हुई। नड्डा जी से भी कोई अलग से बात नहीं हुई। अमित शाह और एक अन्य भाजपा नेता उसी मेज पर आए। हम पहले वहां बैठे थे, वे जल्द ही चले गए। हमारी आपस में कोई बात नहीं हुई। असल में भाजपा के लोग हमसे संपर्क कर रहे हैं। हम तो एनडीए में गए लोगों से वापस लौटने के लिए कह रहे हैं।"</p>
<p><strong>नड्डा मेरे पुराने दोस्त</strong><br>
 रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व भाजपा नेता और टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है और नड्डा उनके एक पुराने मित्र हैं, इसलिए वे वहां बैठे थे।</p>
<p><strong>काकोली घोष दस्तीदार का तीखा बयान</strong></p>
<p>श्रीरामपुर से सांसद कल्याण बनर्जी और बेलेघाटा से विधायक कुणाल घोष ने कहा कि संसद या विधानसभा में सामाजिक मुलाकातों के दौरान ऐसी तस्वीरें खिंचना आम बात है और इसका कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। कुणाल घोष ने कहा, "ऐसी अटकलों का कोई अंत नहीं है। इन बातों का हमारी विचारधारा या राजनीति से कोई संबंध नहीं है।" हालांकि तृणमूल कांग्रेस (NCPI) की ही सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने इस विवाद में घी डालने का काम किया। उन्होंने संकेत दिया कि रॉय का यह लंच एक सोची-समझी डबल ट्रैक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।</p>
<p>काकोली घोष ने कहा, "मैंने तस्वीरों को ध्यान से देखा है। शायद वे कुछ योजना बना रहे हैं। हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है। वे सीधे बात कर रहे हैं। राजनीति में ऐसा ही होता है, यह एक डबल ट्रैक है।"</p>]]> </content:encoded>
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<title>जेपी नड्डा से शत्रुघ्न सिन्हा की मुलाकात से बढ़ीं अटकलें, क्या TMC में होने वाली है बड़ी टूट?</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक तस्वीर ने नई बहस छेड़ दी है. संसद परिसर में बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और सौगत रॉय की मौजूदगी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. दोनों नेताओं की नड्डा के साथ बातचीत और … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 16:15:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक तस्वीर ने नई बहस छेड़ दी है. संसद परिसर में बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और सौगत रॉय की मौजूदगी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. दोनों नेताओं की नड्डा के साथ बातचीत और भोजन करते हुए तस्वीर सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हैं. हालांकि, अब तक किसी भी पक्ष की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। </p>
<p><strong>एक तस्वीर ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल</strong><br>
संसद के एनेक्सी भवन में बुधवार को क्षय रोग (टीबी) से जुड़े कार्यक्रम का आयोजन हुआ था. इसमें पश्चिम बंगाल के कई सांसद शामिल हुए. इसी दौरान बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और सीनियर सांसद सौगत रॉय एक ही जगह नजर आए. यही तस्वीर अब चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गई है। </p>
<p><strong>नड्डा से लंबी बातचीत की चर्चा</strong><br>
सूत्रों के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान शत्रुघ्न सिन्हा ने जेपी नड्डा से काफी देर तक बातचीत की. उसी टेबल पर सौगत रॉय भी बैठे हुए थे और खाना खा रहे थे. हालांकि दोनों नेताओं और नड्डा के बीच आखिर क्या बातचीत हुई, इसकी कोई जानकारी सामने नहीं आई है. इसी वजह से राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं। </p>
<p><strong>दूसरी तस्वीर ने बढ़ाया सस्पेंस</strong><br>
बाद में एक और तस्वीर सामने आई. इसमें जेपी नड्डा खाना खाते नजर आए जबकि सौगत रॉय उनके सामने खड़े दिखाई दिए. इस तस्वीर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह के दावे होने लगे. कई लोग इसे सामान्य मुलाकात बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे बदलते राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। </p>
<p><strong>पहले से मुश्किल दौर में टीएमसी</strong><br>
इन तस्वीरों की चर्चा ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी को लेकर पहले से कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं. हाल के दिनों में पार्टी के कई नेताओं और सांसदों ने पाला बदला हैं. ऐसे में इस नई तस्वीर ने ममता बनर्जीus  के नेतृत्व वाली पार्टी को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है। </p>
<p><strong>एनसीपीआई को लेकर भी जारी है बहस</strong><br>
रिपोर्ट के मुताबिक, संसद के मानसून सत्र से पहले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एनसीपीआई को सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया था. बाद में एनडीए की बैठक में भी उनके नेताओं की मौजूदगी चर्चा का विषय बनी. इसी बीच अब शत्रुघ्न सिन्हा और सौगत रॉय की नड्डा के साथ तस्वीर सामने आने से राजनीतिक चर्चाओं को और हवा मिल गई है। </p>
<p><strong>किसी ने नहीं दी आधिकारिक सफाई</strong><br>
अब तक टीएमसी, बीजेपी, शत्रुघ्न सिन्हा या सौगत रॉय की ओर से इस मुलाकात पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. यही वजह है कि तस्वीर को लेकर सिर्फ कयास लगाए जा रहे हैं. यह सामान्य संसदीय मुलाकात थी या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश छिपा है, इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>लोकसभा की कार्यवाही से क्यों हटाई गईं दोनों भाई&#45;बहन की टिप्पणियां? एक फैसले ने बढ़ाई सियासी हलचल</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली एंटी पेपर लीक बिल यानी &#039;लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026&#039; पर आज (29 जुलाई को) दूसरे दिन लोकसभा में चर्चा हो रही है। चर्चा के दौरान बुधवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए, जिसका सत्तापक्ष ने तीखा विरोध किया और उनसे … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 21:15:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>एंटी पेपर लीक बिल यानी 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' पर आज (29 जुलाई को) दूसरे दिन लोकसभा में चर्चा हो रही है। चर्चा के दौरान बुधवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए, जिसका सत्तापक्ष ने तीखा विरोध किया और उनसे माफी की मांग की। इस पर सदन में दोनों पक्ष की तरफ से हंगामा होने लगा। इसे देखते हुए सदन का कार्यवाही स्थगित कर दी गई। इससे पहले चर्चा के दौरान राहुल गांधी के भाषण में कथित असंसदीय शब्द के इस्तेमाल को लेकर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके कारण सदन में भारी हंगामा हुआ।</p>
<p>दरअसल, राहुल गांधी ने पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा के दौरान कहा कि हाल ही में उनकी एक 18 वर्षीय छात्र से बातचीत हुई थी। उस छात्र का हवाला देते उन्होंने हुए कहा कि उसके अनुसार देश में तीन तरह के लोग हैं। पहला छात्र, दूसरा एक असंसदीय शब्द और तीसरा उन लोगों का अनुसरण करने वाले अंधभक्त। तभी गांधी द्वारा इस असंसदीय शब्द का इस्तेमाल करने पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने आपत्ति जताते हुए हस्तक्षेप किया और कहा कि विपक्ष के नेता या सदन का कोई भी सदस्य द्वारा सदन में इस प्रकार के किसी असंसदीय शब्दों का प्रयोग नहीं किया जा सकता। उन्होंने अध्यक्ष से इस पर संज्ञान लेने और उक्त शब्द को कार्यवाही से हटाने की मांग की।</p>
<p><strong>सदन में दोनों पक्ष की तरफ से हंगामा</strong><br>
इसको लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक शुरु हो गई। हंगामा दोनों पक्षों से शुरु हो गया। दोनों पक्षों के सदस्य अपनी-अपनी सीटों पर खड़े होकर बोलने लगे, जिससे सदन में शोर-शराबा और हंगामे की स्थिति पैदा हो गई। रिजिजू ने कहा कि गांधी को असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गांधी बच्चे का नाम नहीं ले रहे हैं लेकिन जिस शब्द का इस्तेमाल इन्होंने किया उसको हटा देना चाहिए। उनका कहना था कि यह गलत शब्द और नियम के अनुसार इस शब्द का इस्तेमाल नहीं हो सकता है। उनका कहना था कि नियम पुस्तिका में भी इस शब्द का इस्तेमाल असंसदीय है। उन्होंने कहा कि असंसदीय शब्द उन्होंने नहीं बनाया है बल्कि यह नियम पुस्तक में है इसके बावजूद गांधी लगातार गलत शब्द बोल रहे हैं।</p>
<p><strong>असंसदीय शब्द को सदन की प्रक्रिया से हटा देंगे</strong><br>
किरेन रिजिजू ने कहा "मैं बार-बार आपसे अनुरोध करता हूं कि आप उस शब्द का इस्तेमाल मत कीजिए हम आपको सुनने के लिए बैठे हैं। हमारे पक्ष के लोग असंसदीय शब्द के इस्तेमाल के कारण उत्तेजित हुए हैं इसलिए मैं विपक्ष के नेता से आग्रह करता हूं वह असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल नहीं करे।" हंगामा दोनों तरफ से बढ़ने लगा तो अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी से कहा कि वह विपक्ष के नेता हैं और इस पद की गरिमा होती है। उन्होंने कहा कि गांधी को गरिमा का खयाल रखते हुए शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए और असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह असंसदीय शब्द को सदन की प्रक्रिया से हटा देंगे। बिरला ने कहा कि विपक्ष के नेता को सिर्फ विधेयक पर बोलना चाहिए। बाद में लोकसभा सचिवालय की तरफ से बताया गया कि सदन की कार्यवाही से उस असंसदीय शब्द को एक्सपंज (हटा देना) कर दिया गया है।</p>
<p><strong>प्रियंका गांधी की बातें भी एक्सपंज हुईं</strong><br>
बता दें कि इससे एक दिन पहले यानी मंगलवार को राहुल गांधी की बहन और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी के भाषण से भी एक वाक्य को एक्सपंज किया गया था, जिसमें उन्होंने नए शिक्षा मंत्री पर बलात्कारियों की रिहाई का समर्थन करने का दावा किया था। मंगलवार को भी लोकसभा में प्रियंका के आरोप पर सत्ता पक्ष ने हंगामा किया था। हंगामे के बाद स्पीकर ने उनकी इस बात को सदन की कार्यवाही से बाहर कर दिया था। दो दिनों के अंदर यह दूसरा मौका है, जब भाई-बहन (राहुल-प्रियंका) की बातों को एक्सपंज किया गया है। चर्चा है कि राहुल गांधी ने अमित शाह पर जो आरोप लगाया है कि उन्होंने छात्र आंदोलन के दौरान फायरिंग के आदेश दिए थे, उसे भी एक्सपंज किया जा सकता है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ वारंट जारी, कोर्ट ने पेश होने का दिया आदेश; जानिए पूरा मामला</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मुसीबत बढ़ गई है. मल्लिकार्जुन खरगे (मल्लिकार्जुन खड़गे) के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ है. पंजाब में संगरूर की अदालत ने मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. उन्हें 19 सितंबर तक पेश होने को कहा गया है. यहां ध्यान देने वाली बात है कि मल्लिकार्जुन … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 18:15:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>कांग्रेस, अध्यक्ष, मल्लिकार्जुन, खरगे, के, खिलाफ, वारंट, जारी, कोर्ट, ने, पेश, होने, का, दिया, आदेश, जानिए, पूरा, मामला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली </strong></p>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मुसीबत बढ़ गई है. मल्लिकार्जुन खरगे (मल्लिकार्जुन खड़गे) के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ है. पंजाब में संगरूर की अदालत ने मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. उन्हें 19 सितंबर तक पेश होने को कहा गया है. यहां ध्यान देने वाली बात है कि मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ जारी यह वारंट जमानती है. हालांकि, उन्हें अदालत में पेश होकर जमानत लेनी होगी. बता दें कि कर्नाटक चुनाव के दौरान बजरंग दल की तुलना पीएफआई से करने पर मल्लिकार्जुन खरगे की मुसीबत बढ़ी है.</p>
<p>दरअसल, यह मामला 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान की गई टिप्पणियों को लेकर बजरंग दल द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है. शिकायत के अनुसार, मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में बजरंग दल की तुलना प्रतिबंधित संगठन PFI से की थी. तब कहा था कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वह बजरंग दल पर प्रतिबंध लगा देगी. इस मामले में अब अदालती कार्यवाही चल रही है. मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और अदालत इस मामले में अगला कदम उठा रही है.</p>
<p>संगरूर की अदालत के फैसले के मुताबिक, अदालत ने मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ 15,000 रुपये का जमानती वारंट जारी किया है. अगर 19 सितंबर 2026 को मल्लिकार्जुन खरगे अदालत में पेश नहीं होते हैं तो फिर उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया जाएगा. इससे पहले अदालत ने मल्लिकार्जुन खरगे को नोटिस जारी किया था.</p>
<p><strong>किस केस में फंसे कांग्रेस अध्यक्ष खरगे?</strong><br>
दरअसल, ये मामला साल 2023 का है. इस मामले में पंजाब के संगरूर निवासी हितेश भारद्वाज की शिकायत पर कोर्ट ने कार्रवाई है. हितेश भारद्वाज बजरंग दल से जुड़े हुए हैं. उन्होंने अपनी शिकायत में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दिए गए उस बयान का जिक्र किया गया है, जिसमें उन्होंने बजरंग दल की तुलना पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से की थी. इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस की सरकार बनने पर बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की भी बात कही थी। </p>
<p><strong>कोर्ट ने जारी किया 15 हजार का जमानती वारंट</strong><br>
इसी मामले में संगरूर की अदालत ने कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के खिलाफ 15,000 रुपये का जमानती वारंट जारी किया है. जानकारी के मुताबिक, पहले इस मामले को सिविल प्रकृति का माना गया लेकिन अब अदालत ने इसे आपराधिक प्रकृति का मानते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। </p>
<p><strong>कांग्रेस अध्यक्ष को खुद होना होगा कोर्ट में पेश</strong><br>
संगरूर की अदालत ने खरगे को वारंट जारी करते हुए स्पस्ट किया है कि अगर मल्लिकार्जुन खड़गे अगली सुनवाई की तारीख 19 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश नहीं होते हैं, तो उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) भी जारी किया जा सकता है. बता दें कि कोर्ट ने इससे पहले भी मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ नोटिस जारी किया था। </p>
<p><strong>जानें क्या है पूरा मामला?</strong><br>
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर बजरंग दल और प्रतिबंधित पीएफआई में तुलना करने का आरोप लगा है. इसी मामले में हिंदूवादी संगठन ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर सौ करोड़ की मानहानि का केस किया है. याचिकाकर्ता ने संगरूर जिला अदालत में कहा था कि 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में बजरंग दल की तुलना सिमी और अल-कायदा जैसे राष्ट्र-विरोधी संगठनों से की थी। </p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला</strong><br>
दरअसल, खरगे पर बजरंग दल और प्रतिबंधित पीएफआई में तुलना करने का आरोप लगा है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर हिन्दूवादी संगठन ने सौ करोड़ की मानहानि का केस किया है. संगरूर जिला कोर्ट में याचिकाकर्ता ने कहा था कि 2023 कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में बजरंग दल की तुलना ‘सिमी और अल-कायदा जैसे राष्ट्र-विरोधी संगठनों’ से की थी.</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>संसद में राहुल गांधी के ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ वाले बयान पर बवाल, हंगामे के बाद रिकॉर्ड से हटाए गए शब्द</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली: लोकसभा में एंटी पेपर लीक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने दो टूक कहा कि छात्रों का गुस्सा जायज था। देश के युवाओं का सम्मान हो, वो सम्मान चाहते हैं। छात्रों के प्रदर्शन में नफरत या गुस्सा नहीं था। यही युवा हमारा भविष्य संवारेंगे। ऐसे में युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 16:15:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>संसद, में, राहुल, गांधी, के, ‘इडियट’, और, ‘अंधभक्त’, वाले, बयान, पर, बवाल, हंगामे, के, बाद, रिकॉर्ड, से, हटाए, गए, शब्द</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली:</strong></p>
<p>लोकसभा में एंटी पेपर लीक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने दो टूक कहा कि छात्रों का गुस्सा जायज था। देश के युवाओं का सम्मान हो, वो सम्मान चाहते हैं। छात्रों के प्रदर्शन में नफरत या गुस्सा नहीं था। यही युवा हमारा भविष्य संवारेंगे। ऐसे में युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए चर्चा जरूरी है। बीजेपी नेताओं को ये बात समझनी चाहिए।</p>
<p>राहुल गांधी ने इस दौरान स्टूडेंट, इंडियट के साथ ही तीसरी कैटेगरी अंधभक्त का जिक्र किया। नेता प्रतिपक्ष के इतना कहते ही हंगामा शुरू हो गया। किरेन रिरिजू ने इसे सदन की कार्यवाही से हटाने की अपील की, जिसके बाद स्पीकर ने इसे हटा दिया। इसके बाद राहुल गांधी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर ऐसा कमेंट किया जिस पर हंगामा हो गया।</p>
<p><strong>राहुल गांधी बोले- देश के भविष्य ने हमारी सड़कों पर क्या किया</strong><br>
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि मैं बहुत उत्साहित था और इस बात से आश्वस्त था कि देश के भविष्य ने हमारी सड़कों पर क्या किया। यह गुस्सा, हिंसा या नफरत नहीं थी। यह देश के युवाओं और आने वाली पीढ़ी की भावनाओं की गहरी अभिव्यक्ति थी। मुझे लगता है कि सभी राजनीतिक दलों को, जिसमें BJP के मेरे साथी भी शामिल हैं, इस भावना का सम्मान करना चाहिए। मुझे पूरा यकीन है कि अगर बीजेपी के मेरे साथी अपने बच्चों से पूछें कि उनके भाई-बहन जो कर रहे थे, उसके बारे में वे क्या सोचते हैं, तो उन्हें अपने बच्चों का भी समर्थन ही मिलेगा। जो हुआ है उसमें कुछ भी गलत नहीं है और हर भारतीय को इस पर गर्व होना चाहिए।</p>
<p><strong>‘अंधभक्त’ और ‘इडियट’ शब्दों पर शुरू हुआ विवाद</strong><br>
लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपनी बात रख रहे थे. उन्होंने नीट परीक्षा, छात्रों के आंदोलन और देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए. राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि आज देश के युवा परीक्षा व्यवस्था को लेकर परेशान हैं. उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का भी जिक्र किया और कहा कि उनकी आवाज को सुना जाना चाहिए. इसी दौरान राहुल गांधी ने एक छात्रा से हुई बातचीत का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि छात्रा ने ऐसे लोगों के लिए ‘इडियट (Idiot)’ शब्द का इस्तेमाल किया, जो यह मानते हैं कि उन्हें सब कुछ पता है और वे कुछ नया सीखना नहीं चाहते. इसके अलावा राहुल गांधी के भाषण में ‘अंधभक्त’ और ‘बेवकूफ’ जैसे शब्दों का भी जिक्र आया. इन्हीं शब्दों को लेकर सत्ता पक्ष के सांसदों ने आपत्ति जताई और सदन में हंगामा शुरू हो गया। </p>
<p><strong>हंगामे के बीच राहुल गांधी ने जोड़े हाथ</strong><br>
राहुल गांधी लगातार अपनी बात रखने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन सत्ता पक्ष के सांसद उनके बयान पर विरोध जता रहे थे. सदन में शोर बढ़ने लगा तो राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की तरफ देखा. इसके बाद उन्होंने हाथ जोड़कर कहा, “सर, अगर आप चाहते हैं कि इस देश में सिर्फ बीजेपी बोले तो मैं चुप होकर यहां बैठ जाता हूं. मैं बैठ जाता हूं, कोई प्रॉब्लम नहीं है. टाइम बता दीजिए, कितना समय ले लिया.” राहुल गांधी के इस बयान के बाद सदन का माहौल और गरमा गया. सोशल मीडिया पर भी उनका यह वीडियो तेजी से वायरल होने लगा. लोग इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया देने लगे। </p>
<p>
<strong>सदन में किया इडियट और अंधभक्त का जिक्र, मचा हंगामा</strong><br>
राहुल गांधी ने आगे कहा कि हालात ऐसे बने कि प्रोटेस्ट के लिए छात्रों को उतरना पड़ा। दुनिया कैसे बदल रही, युवा समझ रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों पर देश को गर्व है। इसी दौरान राहुल गांधी ने अंध भक्त का जिक्र किया, जिसे लेकर सदन में हंगामा शुरू हो गया। उन्होंने सदन में एक लड़की का जिक्र करते हुए कहा कि मैंने उनसे पूछा कि अंधभक्त को आप कहां रखना चाहेंगीं। इसी के बाद विवाद हुआ।</p>
<p><strong>मैं जब बोलता हूं तो सत्तापक्ष चिल्लाने लगता है: राहुल गांधी</strong><br>
राहुल गांधी ने जैसे ही अंध भक्त शब्द का जिक्र किया, सत्ता पक्ष की ओर से सवाल उठाए गए। किरेन रिजिजू सामने आए, उन्होंने कहा कि ये शब्द असंसदीय है। उन्होंने स्पीकर से इसे सदन की कार्यवाही से हटाने की भी अपील कर दी। रिजिजू ने कहा कि इस शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति है। उधर राहुल गांधी ने कहा कि मैं जैसे ही बोलता हूं सदन में हंगामा होने लगता है। जैसे ही मैं बोलता हूं रिजिजू खड़े हो जाते हैं। राहुल गांधी ने ये भी कहा कि क्या देश में सिर्फ बीजेपी बोलेगी? हालांकि, सदन से असंसदीय शब्द हटाए जाने के बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी।</p>
<p><strong>राहुल गांधी बोले- प्रधान नहीं, आरएसएस छात्रों की दुश्मन</strong><br>
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि एग्जाम का पूरा सिस्टम वसूली से भरा है। शिक्षा व्यवस्था पर आरएसएस का कब्जा है। हर बड़े पद पर आरएसएस को लोग बैठे हैं। धर्मेंद्र प्रधान ने कभी शिक्ष मंत्रालय को चलाया ही नहीं। धर्मेंद्र प्रधान आरएसएस के मुखौटा थे। छात्रों ने साहस से आरएसएस का सामना किया। प्रधान नहीं, आरएसएस छात्रों की दुश्मन है। उन्होंने कहा कि हमारा सिस्टम बहुत खराब और क्रूर है। हर चीज का निजीकरण किया जा रहा है। यह जबरन वसूली का सिस्टम है, यह बहुत बेरहम और खराब सिस्टम है।</p>
<p><strong>राहुल बोले- धर्मेंद्र तो बस एक चेहरा हैं…</strong><br>
राहुल गांधी ने आगे कहा कि इस सिस्टम की आत्मा पर RSS का कब्जा हो गया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि हम UPA नहीं हैं, हमारे मंत्री कभी इस्तीफा नहीं देते। वे सही कह रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दिखावटी है क्योंकि धर्मेंद्र प्रधान ने कभी शिक्षा मंत्रालय नहीं चलाया। शिक्षा मंत्रालय को चलाने वाला संगठन RSS है। इसे चलाने वाला व्यक्ति मंत्री के ऑफिस में बैठा OSD है तो, छात्र असल में इसलिए नाराज हैं क्योंकि उन्हें भारत में छात्र बने रहने, अपने जुनून को फॉलो करने, अपनी बात कहने और अपने मन के सवाल पूछने की इजाजत नहीं है। उन्हें RSS की मनगढ़ंत और बेतुकी हिस्ट्री को मानना पड़ता है। धर्मेंद्र प्रधान तो बस एक चेहरा हैं, असली दुश्मन RSS है। वे ही लोग हैं जो चाहते हैं कि आप 'अंधभक्त' बनें।</p>
<p><strong>'गृह मंत्री ने छात्रों को पीटने के आदेश दिए', राहुल गांधी के आरोप पर घमासान</strong><br>
राहुल गांधी ने इस दौरान कहा कि गृह मंत्री के पास यहां बैठने का साहस नहीं है। गृह मंत्री का नाम लेते ही फिर से हंगामा शुरू हो गया। राहुल गांधी ने कहा कि चर्चा के दौरान गृह मंत्री सदन में मौजूद क्यों नहीं हैं। गृह मंत्री को सदन में आने की हिम्मत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री के आदेश पर ही छात्रों के ऊपर फायरिंग की गई। उन्होंने ही छात्रों के पीटने के आदेश दिए। राहुल गांधी के आरोप लगाते हुए किरेन रिजिजू ने पलटवार कर दिया।</p>
<p><strong>किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से की माफी की मांग, सदन में हंगामा</strong><br>
किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से इस आरोप को लेकर माफी की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ऐसा कैसे कह सकते हैं कि गृह मंत्री ने छात्रों को पीटने के आदेश दिए। किस आधार पर नेता प्रतिपक्ष ने गृह मंत्री को लेकर कमेंट किया। राहुल गांधी बयान पर ब्यौरा दें। रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी को इस टिप्पणी के लिए माफी मांगनी होगी। गृह मंत्री को लेकर राहुल गांधी का बयान गलत है। स्पीकर ने भी राहुल गांधी को नसीहत दी कि बिना तथ्यों के किसी पर आरोप नहीं लगाएं।</p>
<p><strong>लोकसभा में बुधवार को भी नहीं चला प्रश्नकाल</strong><br>
इससे पहले संसद का मानसून सत्र लगातार हंगामे के कारण बाधित है। बुधवार को भी संसद की कार्यवाही शुरू होने पर लोकसभा में हंगामा खड़ा हो गया। प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष की तरफ से नारेबाजी के कारण बाद में सदन को दोपहर तक के लिए स्थगित कर दिया गया। बुधवार सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर स्पीकर ओम बिरला ने ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पदक विजेताओं को बधाई दी।</p>
<p><strong>स्पीकर की अपील 'प्रश्नकाल की कार्यवाही चलने दें'</strong><br>
इसके बाद, स्पीकर ने प्रश्नकाल की कार्यवाही का संचालन किया। हालांकि, जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने सांसदों से सदन को सुचारू रूप से चलने देने का आग्रह किया, लेकिन विपक्ष ने नारेबाजी बंद नहीं की।</p>
<p><strong>विपक्ष का हंगामा जारी</strong><br>
विपक्ष के हंगामे पर ओम बिरला ने कहा कि मैं आपसे आग्रह करता हूं कि प्रश्नकाल के दौरान कभी भी प्रश्नकाल को बाधित न करें। प्रश्नकाल संसद सदस्यों के लिए होता है और सरकार की जवाबदेही तय होती है। कई सदस्यों ने मुझसे मिलकर आग्रह भी किया कि प्रश्नकाल चलने दिया जाए। आप (विपक्ष) संसद सदस्यों के हक को नहीं मार सकते हैं।</p>
<p><strong>विपक्ष को हर मुद्दे पर बोलने का समय दिया: बिरला</strong><br>
स्पीकर ने कहा कि मैंने विपक्ष को हर मुद्दे और विषय पर बोलने का प्राप्त समय दिया है, लेकिन इस तरीके से सदस्यों के प्रश्नकाल के समय को बाधित न करें। यह बिल्कुल उचित नहीं है। मैं फिर से आग्रह करता हूं कि सभी सदस्य अपनी सीटों पर जाकर बैठें और प्रश्नकाल के बाद चर्चा में हिस्सा लें।</p>
<p>विपक्ष के सदस्यों से स्पीकर ओम बिरला ने आगे कहा कि आप सदन को बाधित करना चाहते हैं और नियोजित तरीके से गतिरोध पैदा करना चाहते हैं, जो संसदीय परंपराओं को अनुसार नहीं है। इसके बावजूद विपक्ष के सदस्य अपनी सीटों पर नहीं लौटे और हंगामा जारी रहा। बाद में स्पीकर ओम बिरला ने सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।<br>
रुचिर शुक्ला</p>]]> </content:encoded>
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<title>संसद में प्रियंका गांधी के बयान पर बवाल, स्पीकर ने रिकॉर्ड से हटवाए शब्द; एंटी पेपर लीक बिल पर सरकार को घेरा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने आज लोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर बोलते हुए मौजूदा शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को निशाने पर लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि एक ऐसे व्यक्ति को इस पद पर आसीन किया गया जिसने एक गर्भवती महिला के आरोपियों की रिहाई पर अपनी सहमति जताई, खुशी जताई।  … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 23:15:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>संसद, में, प्रियंका, गांधी, के, बयान, पर, बवाल, स्पीकर, ने, रिकॉर्ड, से, हटवाए, शब्द, एंटी, पेपर, लीक, बिल, पर, सरकार, को, घेरा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने आज लोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर बोलते हुए मौजूदा शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को निशाने पर लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि एक ऐसे व्यक्ति को इस पद पर आसीन किया गया जिसने एक गर्भवती महिला के आरोपियों की रिहाई पर अपनी सहमति जताई, खुशी जताई। </p>
<p>प्रियंका गांधी ने कहा, "प्रधानमंत्री जी ने नया शिक्षा मंत्री को चुना. एक ऐसे व्यक्ति को इस पद पर आसीन किया जिसने एक गर्भवती महिला की बलात्कारियों की रिहाई पर अपनी सहमति व्यक्त की। </p>
<p><strong>किरेन रिजिजू ने प्रियंका गांधी के बयान पर क्या कहा?</strong><br>
प्रियंका के इस बयान पर सत्ता रूढ़ पक्ष ने जब सवाल उठाया तो उन्होंने कहा कि ये अखबारों में हैं. इसपर सत्ता पक्ष ने कांग्रेस नेता को अपने बयान को साबित करने को कहा. फिर संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने बीच में बोलते हुए कहा कि प्रियंका को ऐसे बयान नहीं देना चाहिए। </p>
<p>किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताते हुए कहा, "इस तरह का बयान चरित्र हनन है. प्रियंका भले पहली बार चुनकर आई हैं, लेकिन अपनी पार्टी की सीनियर लीडर हैं। </p>
<p><strong>स्पीकर ने बयान को कार्यवाही से हटाया</strong><br>
स्पीकर ओम बिरला ने इस बयान को संसद की कार्यवाही से हटा दिया. स्पीकर ने कहा, "मेरा मानना है कि ये सदन लोकतांत्रिक संस्था का सदन है. यहां कहा गया एक एक शब्द रिपोर्ट में रहता है. मैं आग्रह करूंगा कि बिना तथ्यों के इस तरह की बात सदन के पटल पर नहीं रखना चाहिए। </p>
<p><strong>छात्रों के प्रदर्शन को लेकर क्या बोलीं प्रियंका गांधी?</strong><br>
प्रियंका गांधी ने छात्रों के प्रदर्शन को लेकर कहा कि पिछले दिनों हजारों बच्चे सड़क पर उतरे. गांधीजी के दिखाए रास्ते पर अहिंसा और सत्य को अपने दिल में रखते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया. उन्होंने अपनी आवाज उठाई. ये उस भारत के बच्चे हैं जो गांव में रहते हैं, महानगरों में रहते हैं, छोटे कस्बों में रहते हैं. जहां मां अपने गहने बेच देती है, पिता अपनी जमीन गिरवी रख देता है, एक परिवार अपनी पूरी जिंदगी की कमाई बच्चे के सपने पर खर्च देता है और अब उन्हीं बच्चों को लगने लगा है कि इस देश में मेहनत से ज्यादा बेईमानी मायने रखती है. तब सिर्फ एक छात्र नहीं हारता, उम्मीद हारती है। </p>
<p><strong>छात्रों के प्रदर्शन पर क्या बोलीं प्रियंका?</strong><br>
संसद में प्रियंका गांधी ने बीते दिनों हुए छात्रों के प्रदर्शन पर भी बात रखी. उन्होंने कहा कि 'पिछले दिनों हजारों बच्चे सड़क पर उतरे. अपनी पीड़ा व्यक्त की. गांधीजी के दिखाए रास्ते पर अहिंसा और सत्य को अपने दिल में रखते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया. उन्होंने अपनी आवाज उठाई. ये उस भारत के बच्चे हैं जो गांव में रहते हैं, महानगरों में रहते हैं, छोटे कस्बों में रहते हैं. जहां मां अपने गहने बेच देती है, पिता अपनी जमीन गिरवी रख देता है, एक परिवार अपनी पूरी जिंदगी की कमाई बच्चे के सपने पर खर्च देता है और अब उन्हीं बच्चों को लगने लगा है कि इस देश में मेहनत से ज्यादा बेईमानी मायने रखती है. तब सिर्फ एक छात्र नहीं हारता, उम्मीद हारती है। </p>
<p><strong>प्रियंका की टिप्पणी पर हुआ बवाल</strong><br>
प्रियंका गांधी ने कहा कि आपकी सरकार ने करोड़ों छात्रों को क्या संदेश दिया. आपको किस बात का अभिमान है. ये कौनसा अहंकार है. जहां आंखों में शर्म होना चाहिए, वहां बेशर्मी और स्वागत के नगाड़े बजा रहे हैं. एक तरफ मातम है, दुख है और यहां आप फूलमाला डाल रहे हैं. कोई आप पर कैसे यकीन करे. प्रधानमंत्री जी ने नया शिक्षा मंत्री चुना. एक ऐसे व्यक्ति को पद पर आसीन किया, जिसने एक गर्भवती महिला के बलात्कारियों की रिहाई पर अपनी सहमति व्यक्ति की. देश की करोड़ों लड़कियों को इससे क्या संदेश दिया। </p>]]> </content:encoded>
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<title>क्या राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष पद से हटाए जा सकते हैं? जानिए क्या कहते हैं नियम, कानून और सरकार की भूमिका</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने की बात कही है. उन्होंने राहुल गांधी पर विदेशी ताकतों के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया और उनकी विदेश यात्राओं की जांच के लिए एसआईटी बनाने की मांग भी की. ऐसे में … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 17:15:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने की बात कही है. उन्होंने राहुल गांधी पर विदेशी ताकतों के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया और उनकी विदेश यात्राओं की जांच के लिए एसआईटी बनाने की मांग भी की. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या लोकसभा में सिर्फ प्रस्ताव लाकर नेता प्रतिपक्ष को हटाया जा सकता है? संविधान और कानून इस बारे में क्या कहते हैं?</p>
<p><strong>नेता प्रतिपक्ष का पद कैसे मिलता है?</strong><br>
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद संविधान में नहीं, बल्कि सैलरी एंड अलाउएंसेज ऑफ लीडर ऑफ ऑपोजिशन इन पार्लियामेंट एक्ट, 1977 के तहत मान्यता प्राप्त है. इस कानून के मुताबिक लोकसभा में सरकार के खिलाफ सबसे अधिक सांसदों वाली पार्टी का नेता, जिसे लोकसभा अध्यक्ष मान्यता दें, वही नेता प्रतिपक्ष होता है. यहां एक और क्लाज है कि उस पार्टी के पास सदन की कुछ संख्या बल के कम से कम 10 फीसदी सदस्य होने चाहिए. यानी यह पद किसी चुनाव या सदन में मतदान से नहीं मिलता, बल्कि सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को स्पीकर द्वारा औपचारिक मान्यता देने के बाद मिलता है। </p>
<p><strong>क्या सरकार प्रस्ताव लाकर राहुल गांधी को हटा सकती है?</strong><br>
सीधा जवाब है- नहीं. कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि सरकार या कोई सांसद लोकसभा में प्रस्ताव लाकर नेता प्रतिपक्ष को पद से हटा दे. नेता प्रतिपक्ष को हटाने की कोई अलग संसदीय प्रक्रिया निर्धारित नहीं है. यदि कांग्रेस राहुल गांधी की जगह किसी दूसरे नेता को चुन ले या राहुल गांधी लोकसभा की सदस्यता खो दें, तब स्थिति बदल सकती है. इसके अलावा यदि किसी कानूनी या संवैधानिक कारण से उनकी सदस्यता समाप्त हो जाए, तो नेता प्रतिपक्ष का पद भी स्वतः समाप्त हो जाएगा. लेकिन, सदन में उनके खिलाफ कोई प्रस्ताव लाकर ऐसा नहीं किया जा सकता है. दरअसल, केवल संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ ही सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है. इसमें लोकसभा स्पीकर, डिप्टी स्पीकर, राज्यसभा के सभापति, सदन के नेता और प्रधानमंत्री का पद शामिल है </p>
<p>
<strong>स्पीकर की भूमिका कितनी अहम?</strong><br>
1977 के कानून के अनुसार नेता प्रतिपक्ष को मान्यता देने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष के पास होता है. हालांकि पूर्व लोकसभा महासचिव पीडीटी आचार्य ने इंडियन एक्सप्रेस में लिखे अपने लेख में स्पष्ट किया था कि स्पीकर के पास इस मामले में मनमानी का अधिकार नहीं है. यदि सबसे बड़े विपक्षी दल ने अपने नेता का नाम भेजा है, तो स्पीकर को उसे मान्यता देनी होती है। <br>
.<br>
<strong>क्या 10 फीसदी सांसदों का नियम लागू होता है?</strong><br>
लंबे समय से यह धारणा रही है कि नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए किसी पार्टी के पास लोकसभा की कुल सदस्य संख्या का 10 प्रतिशत होना जरूरी है. लेकिन इसको लेकर भी संसदीय विशेषज्ञ एकमत नहीं है. 2014 और 2019 में लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के पास 10 फीसदी से कम सांसद थे. इस कारण पार्टी को प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं मिला था. कुछ जानकारी कहते हैं कि 10 प्रतिशत का नियम केवल संसदीय सुविधाओं के लिए किसी दल को मान्यता प्राप्त पार्टी का दर्जा देने से जुड़ा है. इसका नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति से सीधा संबंध नहीं है। </p>
<p><strong>नेता प्रतिपक्ष की क्या जिम्मेदारियां होती हैं?</strong><br>
नेता प्रतिपक्ष सिर्फ विपक्ष का राजनीतिक चेहरा नहीं होता. यह कई महत्वपूर्ण नियुक्ति समितियों का सदस्य भी होता है. इनमें सीबीआई निदेशक, केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी), लोकपाल, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) और कुछ अन्य संवैधानिक संस्थाओं के प्रमुखों के चयन से जुड़ी समितियां शामिल हैं. इसलिए यह पद लोकतांत्रिक व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। </p>
<p><strong>निशिकांत दुबे ने क्या कहा?</strong><br>
निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेशी ताकतों के प्रभाव में काम कर रहे हैं और 2004 से 2026 तक उनकी विदेश यात्राओं, मुलाकातों तथा कथित समझौतों की जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में एसआईटी जांच की मांग करेंगे और राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष के पद से हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने की कोशिश करेंगे. हालांकि कांग्रेस ने इन आरोपों पर पहले भी भाजपा के ऐसे दावों को राजनीतिक और निराधार बताया है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>NDA बैठक में पहुंचीं सायोनी घोष, शुभेंदु अधिकारी से होगी मुलाकात; 4 महीने में क्यों बदले सियासी तेवर?</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली कभी ममता बनर्जी की करीबी रहीं लोकसभा सांसद सायोनी घोष मंगलवार को NDA की मीटिंग में पहुंचीं हैं। हालांकि, वह अकेली नहीं हैं। इनमें वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार समेत कई बड़े नाम शामिल हैं। खबर है कि इससे पहले ही सुदीप बंदोपाध्याय पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मुलाकात कर चुके हैं। … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 15:15:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>NDA, बैठक, में, पहुंचीं, सायोनी, घोष, शुभेंदु, अधिकारी, से, होगी, मुलाकात, महीने, में, क्यों, बदले, सियासी, तेवर</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>कभी ममता बनर्जी की करीबी रहीं लोकसभा सांसद सायोनी घोष मंगलवार को NDA की मीटिंग में पहुंचीं हैं। हालांकि, वह अकेली नहीं हैं। इनमें वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार समेत कई बड़े नाम शामिल हैं। खबर है कि इससे पहले ही सुदीप बंदोपाध्याय पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मुलाकात कर चुके हैं। कह जा रहा है कि वह बागी सांसदों से भी आज मिल सकते हैं।</p>
<p>मंगलवार सुबह संसद में एनडीए के सांसदों की अहम मंगल मिलन बैठक शुरू हो गई है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह समेत कई बड़े नेता शामिल हुए हैं। यह बैठक ऐसे समय पर हुई है, जब 12 बजे लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 चर्चा होने जा रही है। कहा जा रहा है कि इस विषय पर चर्चा के लिए कम से कम छह घंटे का समय निर्धारित किया गया है।</p>
<p>मोदी सरकार संसद में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' लेकर आई है, जिस पर सायोनी घोष ने स्वागत किया है. पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा से भागने के लिए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा है. अब सरकार ने संसद में बिल पर चर्चा के लिए सायोनी घोष के नाम को भी शामिल किया है. </p>
<p>संसद के सायोनी घोष के भाषणों ने उन्हें एक अलग पहचान दी.उनके भाषण सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं.वो बांग्ला, हिंदी और अंग्रेज़ी में धाराप्रवाह बोलती हैं. 2024 से अभी तक मोदी सरकार पर हमलावर रहती थी, लेकिन अब सरकार के पक्ष में अपनी बात रखेंगे. ऐसे में सभी की निगाहें है कि संसद में वो किस तरह से विपक्ष पर निशाना साधती हैं? </p>
<p><strong>सायोनी घोष ने बदला सियासी गियर</strong><br>
सियासत में सायोनी घोष को आए हुए पांच साल हुए हैं. 2021 में विधानसभा चुनाव लड़ी, लेकिन जीत नहीं सकी. इसके बाद 2024 में टीएमसी के टिकट पर जाधवपुर सीट से सांसद चुनी गईं. 30 साल की सायोनी घोष ने बहुत कम समय में अपनी राजनीतिक पहचान बनाई. संसद से सड़क मुखर रहती हैं. सोयीनी अक्सर अपने भाषणों में गीतों और शायरी का भी ख़ूब इस्तेमाल करती हैं. इस तरह से उनके भाषण के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं। </p>
<p>2024 में सांसद बनने के बाद से लेकर अप्रैल 2026 तक सायोनी घोष को पीएम मोदी और बीजेपी के मुखर विरोधी चेहरे के तौर पर जाना जाता रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजे आने के बाद सियासी पाला बदल लिया. टीएमसी से बगावत कर काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में सायोनी घोष एनसीपीआई में शामिल हो गईं और मोदी सरकार के समर्थन में उतर गई. इस तरह से उन्होंने अपना सियासी गियर बदल दिया है, अभी तक उनके निशाने पर मोदी सरकार रहा करती थी, लेकिन अब विपक्ष उनके टारगेट पर आ गया है।  </p>
<p><strong>विपक्ष को सायोनी घोष ने सुनाई खरी खरी</strong><br>
लोकसभा सांसद सायोनी घोष ने पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा से भागने के लिए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा दिए जाने के बाद अब हम चर्चा करेंगे. इस्तीफा उन्होंने दे दिया, उसके बाद भी विपक्ष चर्चा करने से भाग रहा. सदन का हर दिन, हर मिनट बहुत कीमती होता है. मुझे लगता है कि देश के युवा और छात्र-छात्राओं को भी जानना चाहिए कि इस नए बिल में क्या आ रहा है, क्या-क्या रिफॉर्म्स हम लोग एड्रेस करना चाहते हैं। </p>
<p>सायोनी घोष ने कहा कि विपक्ष आलोचना करे, डिस्कस करे, कंस्ट्रक्टिव डिबेट हो. उनके भी अगर कोई सुझाव हों तो वह दें. संसद और सदन और सरकार उसका अमल करे, हेल्दी डेमोक्रेसी की वही छवि होनी चाहिए, लेकिन विपक्ष चर्चा करने से भाग रहा है. वो सिर्फ राजनीति कर रहा है. इस तरह सायोनी घोष ने विपक्ष पर जमकर हमले किए। </p>
<p><strong>संसद में सरकार की ढाल बनेगी सायोनी घोष</strong><br>
नरेंद्र मोदी सरकार ने सोमवार को लोकसभा में पेपर लीक रोकने के लिए और कड़े कानून के लिए एक विधेयक पेश किया है. सरकार और स्पीकर ने चर्चा शुरू कराने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण ऐसा हो नहीं सका. मंगलवार को संसद में चर्चा होनी है, जिसके लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। </p>
<p>मोदी सरकार ने चर्चा के लिए सत्तापक्ष की तरफ से जिन सांसदों के नाम दिए हैं, उसमें सायोनी घोष का भी नाम शामिल हैं.सायोनी घोष सांसद बनने के बाद पहली बार मोदी सरकार के लिए सदन में सियासी ढाल बनेंगी और मजबूती से बात रखेंगी. मोदी सरकार की तरफ से वो विपक्ष पर निशाना साधेंगी. ऐसे में देखना होगा कि सायोनी घोष किस तरह से विपक्ष के खिलाफ आक्रामक तेवर अख्तियार करती हैं? </p>
<p><strong>सायोनी घोष के निशाने पर जब रही मोदी सरकार</strong><br>
सायोनी घोष ने संसद में अपना आखिरी भाषण अप्रैल में दिया था.संसद में दिए गए उनके एक चर्चित भाषण में उन्होंने भारतीय संविधान को अपने लिए भगवद् गीता बताया था.इस भाषण में घोष ने कहा था कि जिस तरह से ये संसद प्रधानमंत्री के लिए एक मंदिर है,इसी तरह ये हमारे लिए भी एक मंदिर है और भारत का गणतंत्र हमारे लिए पूजा है. संविधान हमारी भगवद् गीता है। </p>
<p>संसद के बजट सत्र के दौरान सायोनी घोष ने अपने संसदीय भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ़ इशारा करते हुए कहा था, हम लड़ते हैं आपसे, संविधान हाथ में लेकर लड़ते हैं, हाथ में हमारे तलवार नहीं है सर. सयानी ने भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा था, 'भारत किससे तेल ख़रीदेगा कितने दिनों के अंदर ख़रीदेगा, किससे दोस्ती निभाएगा किससे दुश्मनी बरक़रार रखेगा, कोई और देश का राष्ट्रपति हमें ट्विटर पर आकर लेक्चर देता है और आप कहते हैं कि हम विरोध ना करें और हम चुप बैठे। </p>
<p>सयानी अपने भाषणों में गीतों और शायरी का भी ख़ूब इस्तेमाल करती हैं. वो अक्सर संसद में अपनी शायरी के जरिए पीएम मोदी और बीजेपी पर निशाना साधती थी, लेकिन अब सियासी पाला बदलने के साथ ही उनके तेवर भी बदल गए हैं. अब उनके टारगेट पर सरकार नहीं बल्कि विपक्ष है. मॉनसून सत्र के दौरान मीडिया से बात करते हुए घोष ने विपक्ष को कठघरे में खड़ी करती नजर आईं हैं। </p>
<p><strong>कौन-कौन हुआ शामिल</strong><br>
एनडीए की इस बैठक में NCPI यानी नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर चुके तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट के कई सांसद शामिल हुए। इनमें काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, सायनी घोष का नाम शामिल है। वही, भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर राज्यसभा पहुंचीं सुष्मिता देव समेत कई अन्य नेता भी बैठक में पहुंचे।</p>
<p><strong>CM शुभेंदु अधिकारी से हो सकती है मीटिंग</strong><br>
पीटीआई भाषा के मुताबिक, अधिकारी मंगलवार को नई दिल्ली में उन 20 बागी सांसदों से दूसरी बार मिल सकते हैं, जो कम जानी-मानी पार्टी एनसीपीआई में शामिल हो गए थे। इस मुलाकात से इस संसदीय गुट के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं, जिसमें भाजपा के साथ इसके संभावित विलय की बात भी शामिल है।</p>
<p>हालांकि, न तो एनसीपीआई और न ही भाजपा ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि की है कि मंगलवार की बैठक के एजेंडे में विलय शामिल है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अभी तक इन 20 बागी सांसदों के दल-बदल को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है, हालांकि सदन में उनके बैठने की व्यवस्था बदल दी गई है।</p>
<p>बीरभूम की सांसद शताब्दी रॉय ने कहा कि बैठक एक बजे पश्चिम बंगाल सरकार के अतिथि गृह बंग भवन में होगी। रॉय ने कहा, 'हमारे कई सांसदों के पास कुछ जरूरी मामलों को लेकर सवाल हैं और वे उन पर स्पष्टीकरण चाहते हैं; वे इन मामलों को मुख्यमंत्री के सामने रख सकते हैं। साथ ही, उनके पास मुख्यमंत्री के सामने रखने के लिए कुछ मुद्दे और सुझाव भी हो सकते हैं।'</p>]]> </content:encoded>
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<title>यूपी चुनाव से पहले अखिलेश का बड़ा दांव, सामान्य सीटों पर भी दलित उम्मीदवार उतार सकती है सपा</title>
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<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 11:15:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लखनऊ</strong><br>
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. राज्य की राजनीति में अब तक यह परिपाटी रही है कि दलितों की चुनावी हिस्सेदारी आमतौर पर केवल आरक्षित सीटों तक ही सीमित रखी जाती है. लेकिन 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में यह अघोषित परिपाटी दम तोड़ सकती है. अपने सामाजिक आधार को व्यापक बनाने और अपने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) एजेंडे को और अधिक मजबूत करने के लिए, समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी जातिगत रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. पार्टी सामान्य सीटों पर भी दलित उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की बड़ी योजना पर काम कर रही है। </p>
<p><strong>MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण से आगे का विस्तार</strong><br>
 पार्टी के सूत्रों के अनुसार, यह कदम सपा के पारंपरिक मुस्लिम-यादव समर्थन आधार से आगे बढ़कर खुद को एक व्यापक सामाजिक गठबंधन के रूप में पेश करने का एक सोचा-समझा प्रयास है. यदि आंकड़ों पर नजर डालें, तो 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने सामान्य (अनारक्षित) सीटों पर एक भी दलित उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा था. उस दौरान सपा ने दलित वर्ग के उम्मीदवारों को केवल उत्तर प्रदेश की निर्धारित 84 सुरक्षित (SC) सीटों पर ही टिकट दिए थे (जिनमें से 2022 के चुनाव में सपा गठबंधन ने केवल 20 सीटें जीती थीं, जबकि एनडीए ने अधिकांश सीटें जीती थीं). इसके विपरीत, सपा ने 2017 और 2022 के चुनावों में सामान्य सीटों पर 100 से अधिक (लगभग 115 से 125) बड़ी संख्या में ओबीसी उम्मीदवारों (यादव, कुर्मी, शाक्य, मौर्य, सैनी, राजभर, निषाद आदि) को टिकट दिए थे. इसलिए, सामान्य सीटों पर दलित प्रत्याशी उतारना 2017 और 2022 के मुकाबले एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक रणनीतिक बदलाव होगा। </p>
<p><strong>लोकसभा चुनावों की सफलता से प्रेरणा</strong><br>
2022 के विधानसभा चुनावों में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने दलित उम्मीदवारों को मुख्य रूप से आरक्षित सीटों तक ही सीमित रखा था, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में फैजाबाद (अयोध्या) और मेरठ जैसी हाई-प्रोफाइल सामान्य सीटों पर दलित उम्मीदवारों (जैसे फैजाबाद से अवधेश प्रसाद) को उतारकर एक नई शुरुआत की गई थी. इस सफल प्रयोग से उत्साहित होकर सपा अब विधानसभा चुनाव में भी इसे दोहराना चाहती है. इस नई राजनीतिक रणनीति का मुख्य केंद्र पश्चिम उत्तर प्रदेश और मध्य उत्तर प्रदेश (अवध) बनेगा, जहाँ दलित बिरादरी की आबादी क्रमशः 23% और 25% है (जबकि पूरे राज्य में दलितों की कुल आबादी करीब 21% है) .</p>
<p>पार्टी का मानना है कि कठिन निर्वाचन क्षेत्रों और सामान्य सीटों पर भी दलित और ओबीसी उम्मीदवारों को नामांकित करने से, भाजपा विरोधी वोट एकजुट होंगे और पड़ोसी क्षेत्रों में एक लहर प्रभाव (Ripple Effect) पैदा होगा. सपा सूत्रों ने भाजपा के गढ़ सरोजिनीनगर का हवाला देते हुए बताया कि भले ही वहाँ पासी उम्मीदवार तुरंत न जीते, लेकिन उसकी उम्मीदवारी मलिहाबाद और बख्शी का तालब जैसे आसपास के निर्वाचन क्षेत्रों के समीकरणों को पूरी तरह प्रभावित कर सकती है. पार्टी ऐसी ही सीटों की पहचान कर रही है जहाँ यह रणनीति गेम-चेंजर साबित हो सकती है। </p>
<p><strong>बसपा के जनाधार में बिखराव </strong><br>
पिछले डेढ़ दशकों में बसपा के लगातार छिटकते जनाधार के कारण राज्य के दलित वोट बैंक में तेजी से बिखराव हुआ है. भाजपा ने पहले गैर-जाटव दलितों को साधकर इसका लाभ उठाया था, और अब 2024 के लोकसभा चुनावों में सपा ने भी इस वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी की है. वर्तमान में भाजपा और सपा दोनों ही जाटव व गैर-जाटव वोटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की होड़ में हैं. सपा ऐसी सीटें तलाश रही है जहाँ उसके मूल वोट बैंक (यादव व मुस्लिम) के साथ दलितों की संख्या अधिक हो, जिससे जीत सुनिश्चित की जा सके. वहीं, दूसरी ओर भाजपा भी ऐसी सीटें चिह्नित कर रही है जहाँ अगड़े, अति पिछड़ों और दलितों का गठजोड़ एक अजेय समीकरण बना सके.सामान्य सीटों पर दलित जीत के ऐतिहासिक अपवादसामान्य सीटों पर दलितों का लड़ना और जीतना पूरी तरह नया नहीं है, हालांकि यह अब तक बहुत सीमित और प्रतीकात्मक रहा है. कांशीराम ने वर्ष 1991 में कांशीराम ने इटावा की सामान्य सीट से चुनाव जीता था। </p>
<p>वर्तमान लोकसभा में अयोध्या (फैजाबाद) से जीतने वाले अवधेश प्रसाद एक बड़ा उदाहरण हैं. इसके अलावा देश के अन्य हिस्सों में किरेन रिजिजू (एसटी – अरुणाचल प्रदेश पश्चिम), चरणजीत सिंह चन्नी (एससी – जालंधर) और झारखंड के पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी जैसे नेता सामान्य सीटों से प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। </p>
<p>सपा सूत्रों के अनुसार, उनका मुख्य ध्यान PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) संयोजन को और अधिक धार देना है, जिसने 2024 में शानदार परिणाम दिए थे. भाजपा ने सपा के इस कदम को खारिज करते हुए तीखा हमला बोला है. पार्टी प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि जब भी सपा सत्ता में थी, उसने दलितों के खिलाफ सबसे ज्यादा अत्याचार किए, उनकी जमीनों पर अतिक्रमण किया, बसपा प्रमुख मायावती का अपमान किया और दलित दिग्गजों के नाम पर रखे गए संस्थानों के नाम बदल दिए. भाजपा का दावा है कि दलित और ओबीसी आज भी पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में शीर्ष पदों पर मजबूती से काबिज हैं। </p>
<p>वरिष्ठ पत्रकार और अन्य राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 1990 के दशक के सपा-बसपा गठबंधन के पतन के बाद दलितों और यादवों के बीच ऐतिहासिक तनाव रहे हैं. अखिलेश यादव इस अंतर को पाटने की कोशिश जरूर कर रहे हैं, लेकिन यह देखना बाकी है कि दलित इसे वास्तविक राजनीतिक पहुंच मानते हैं या सिर्फ चुनावी गणना. इस प्रकार, 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सपा का यह नया प्रयोग उत्तर प्रदेश के पारंपरिक जातिगत समीकरणों को पूरी तरह नया आकार देने की क्षमता रखता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>राहुल गांधी पर BJP का बड़ा दांव! नेता प्रतिपक्ष पद से हटाने के लिए संसद में लाएगी प्रस्ताव</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली बीजेपी के निशाने पर एक बार फिर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी है। झारखंड (गोड्डा) से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। दुबे का दावा है कि बीजेपी बहुत जल्द राहुल गांधी को विपक्ष के नेता के पद से हटाने के लिए संसद में एक प्रस्ताव … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 23:15:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>राहुल, गांधी, पर, BJP, का, बड़ा, दांव, नेता, प्रतिपक्ष, पद, से, हटाने, के, लिए, संसद, में, लाएगी, प्रस्ताव</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>बीजेपी के निशाने पर एक बार फिर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी है। झारखंड (गोड्डा) से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। दुबे का दावा है कि बीजेपी बहुत जल्द राहुल गांधी को विपक्ष के नेता के पद से हटाने के लिए संसद में एक प्रस्ताव लाने की तैयारी कर सकती है। उनका कहना है कि राहुल गांधी की जवाबदेही तय होना बहुत जरूरी है, क्योंकि 2004 से लेकर <strong>2026 के बीच उन्होंने जो भी विदेश यात्राएं की हैं, उनके बारे में किसी को कोई साफ जानकारी नहीं है।</strong></p>
<p><strong>विदेश दौरों और जॉर्ज सोरोस से रिश्तों पर उठाए सवाल</strong><br>
निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जब भी विदेश जाते हैं, तो देश, सरकार और संविधान के खिलाफ ही बयानबाजी करते हैं।</p>
<p>उन्होंने सवाल उठाया कि विदेश दौरों के दौरान राहुल किससे मिलते हैं, वहां क्या करते हैं और किस तरह के आंदोलनों को बढ़ावा देने के लिए फंडिंग की बात होती है, यह सब रहस्य बना हुआ है।</p>
<p>दुबे ने दावा किया कि राहुल गांधी की यात्राओं में अमेरिकी उद्योगपति जॉर्ज सोरोस से जुड़े लोग शामिल थे।<br>
उन्होंने 2008 में कांग्रेस और चीन के बीच हुए कथित समझौते का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उस 'गुप्त डील' को आज तक जनता के सामने जाहिर क्यों नहीं किया गया?<br>
<strong>SIT जांच और देश तोड़ने के साजिश के गंभीर आरोप</strong></p>
<p>बीजेपी सांसद का मानना है कि विपक्ष का नेता जब देश से बाहर जाता है, तो उसे भारत की नीतियों और रुख का प्रतिनिधित्व करना चाहिए, न कि देश की छवि बिगाड़नी चाहिए।</p>
<p>इसीलिए उन्होंने मांग की है कि साल 2004 से 2026 तक की राहुल गांधी की सभी विदेश यात्राओं, उनके दोस्तों और तमाम गुप्त समझौतों की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए।</p>
<p>राहुल गांधी पर और सख्त हमला बोलते हुए उन्होंने यहां तक कह दिया कि वे विदेशी ताकतों के हाथों में खेल रहे हैं और देश को बांटने की साजिशों में शामिल हैं।</p>
<p><strong>किस माहौल में आया यह बयान?</strong><br>
निशिकांत दुबे का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राहुल गांधी खुद संसद में सरकार से तीखे सवाल पूछ रहे हैं। हाल ही में 20 जुलाई को हुए छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई, पेलेट गन के इस्तेमाल और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए राहुल गांधी ने गृहमंत्री अमित शाह से जवाब मांगा था। इसी के पलटवार में बीजेपी की तरफ से यह बड़ा हमला किया गया है।</p>
<p><strong>सदन में पहले भी राहुल को घेर चुकी है सरकार</strong><br>
सरकार ने संसद में राहुल गांधी के खिलाफ फरवरी 2026 में लोकसभा में एक सब्सटेंसिव मोशन या गंभीर प्रस्ताव पेश किया था, जबकि इससे पहले अलग-अलग बयानों व भाषणों पर विशेषाधिकार हनन के प्रस्ताव लाने की चेतावनियां या नोटिस दिए गए थे।</p>
<p>बजट सत्र के दौरान भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ नियम 352(5) और 353 के तहत एक सब्सटेंसिव मोशन पेश किया। इसमें राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने और देश की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए उनकी सदस्यता रद्द करने व चुनाव लड़ने पर रोक की मांग की गई थी।</p>]]> </content:encoded>
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<title>‘पेपर के बाद पेट्रोल वाला आंदोलन’! अरविंद केजरीवाल का बड़ा ऐलान, सरकार पर साधा निशाना</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद अब सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अरविंद केजरीवाल ने पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाए जाने का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री से इसके समाधान की मांग की … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 19:15:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद अब सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अरविंद केजरीवाल ने पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाए जाने का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री से इसके समाधान की मांग की है। उन्होंने शनिवार (1 अगस्त) को इसके लिए दिल्ली में एक टाउनहॉल कार्यक्रम का आयोजन किया है।</p>
<p>अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पहले तो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को एक 'अहंकारी सरकार' का झुकना बताया। फिर उन्होंने E20 का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री से अपील की कि लगे हाथ इसका भी समाधान हो। केजरीवाल ने कहा, 'सभी को बहुत बधाई हो। देश के युवाओं ने एक अहंकारी सरकार को झुका दिया। धर्मेंद्र प्रधान जी को इस्तीफा देना पड़ा जनता के सामने। अब मेरी प्रधानमंत्री जी निवेदन है कि लगे हाथों E20 का भी मामला सॉल्व (समाधान) कर दो। लोग बहुत परेशान हैं, लोगों की गाड़ियां खराब हो रही हैं, माइलेज खराब हो रही है। इसलिए प्रधानमंत्री जी से निवेदन है कि इससे पहले कि यह मुद्दा बड़ा बने आप ही आगे बढ़कर सॉल्व कर दो।'</p>
<p><strong>E20 के खिलाफ टाउनहॉल</strong><br>
अरविंद केजरीवाल ने E20 के खिलाफ दिल्ली में एक टाउनहॉल आयोजित करने की बात कही। उन्होंने इसमें हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद जाहिर की और ऑनलाइन भी लोगों को जोड़ने की व्यवस्था बताई। उन्होंने कहा, 'इस दिशा में सभी को एक साथ लाने के लिए हम शनिवार को एक कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं, 'नेशनल टाउनहॉल अगेनस्ट E20'। इसमें हमें उम्मीद है कि हजारों लोग शामिल होंगे।'</p>
<p>केजरीवाल ने कहा कि यह 12 बजे दिन में शुरू होगा। उन्होंने कहा कि जो लोग दिल्ली और आसपास के शहरों से हैं वो कॉस्टीट्यूशन क्लब में सुबह साढ़े 11 बजे तक पहुंच जाएं। जो लोग दिल्ली से बाहर हैं और नहीं आ सकते हैं वो ऑनलाइन जुड़ें। उन्होंने एक नंबर (8588833212) जारी करते हुए कहा, 'हमें वॉट्सऐप कर दीजिए। हम शुक्रवार शाम तक एक लिंक भेज दीजिए। आप इस पर क्लिक करके हमारे साथ ऑनलाइन जुड़ सकते हैं। इस टाउनहॉल में हम इस मद्दे में दिलचस्पी रखने वाले ऐक्सपर्ट और पीड़ितों को एक प्लैटफॉर्म पर लाएंगे और बोलने का मौका देंगे और आगे की रणनीति तय होगी कि कैसे सरकार को मजबूर किया जाए कि इसे वापस ले।'</p>
<p><strong>चिट्ठियां लेकर पीएम के घर जाऊंगा: अरविंद केजरीवाल</strong><br>
अरविंद केजरीवाल से जब पूछा गया कि क्या वह इस मुद्दे पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे तो उन्होंने कहा कि सबकुछ किया जाएगा। अभी तो बस यह शुरुआत है। पूर्व सीएम ने यह भी कहा कि उन्होंने एक ऑनलाइन पिटीशन की शुरुआत की थी, जिस पर 2 लाख से अधिक लोग चिट्ठियां भेज चुके हैं। केजरीवाल ने कहा, ‘इन्हें लेकर मैं प्रधानमंत्री के घर भी जाऊंगा, लेकिन वह शनिवार के बाद, अगले हफ्ते।’</p>]]> </content:encoded>
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<title>थलपति विजय के बाद क्या धनुष भी करेंगे राजनीति में एंट्री? अभिनेता ने दिया बड़ा हिंट</title>
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<description><![CDATA[ बेंगलुरु    सिनेमा और राजनीति का गहरा नाता रहा है. कई बड़े सितारे फिल्मों में छाने के बाद नेता बनकर लोगों की सेवा कर रहे हैं. अब साउथ इंडस्ट्री के सुपरस्टार धनुष के राजनीति में कदम रखने की चर्चा जोरों-शोरों पर है।  दरअसल, एक्टर-डायरेक्टर धनुष ने फैंस से अपनी एकजुटता को समाज सेवा की दिशा में … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 19:15:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>थलपति, विजय, के, बाद, क्या, धनुष, भी, करेंगे, राजनीति, में, एंट्री, अभिनेता, ने, दिया, बड़ा, हिंट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बेंगलुरु </strong><br>
  सिनेमा और राजनीति का गहरा नाता रहा है. कई बड़े सितारे फिल्मों में छाने के बाद नेता बनकर लोगों की सेवा कर रहे हैं. अब साउथ इंडस्ट्री के सुपरस्टार धनुष के राजनीति में कदम रखने की चर्चा जोरों-शोरों पर है। </p>
<p>दरअसल, एक्टर-डायरेक्टर धनुष ने फैंस से अपनी एकजुटता को समाज सेवा की दिशा में मोड़ने की अपील की, जिसने उनके राजनीति में शामिल होने की अटकलों को तेज कर दिया है. रविवार को धनुष के फैंस ने एक ब्लड डोनेशन कैम्प का आयोजन किया. इस दौरान जनता से बात करते हुए एक्टर ने अपने फैंस से अपील की कि वो सिर्फ फिल्मों का जश्न मनाने तक सीमित न रहें, बल्कि समाज में भलाई के कामों में बढ़-चढ़कर हिस्सा भी लें। </p>
<p><strong>राजनीति में शामिल होंगे धनुष?</strong></p>
<p>इवेंट में स्टेज पर आकर धनुष ने फैंस से कहा- एक ही जगह पर इतने सारे लोग जमा हुए हैं. इस तरह की एकजुटता में बहुत बड़ी ताकत होती है. हमें इस एकजुटता को एक मकसद देना चाहिए. सिर्फ ऑडियो लॉन्च और मीट-अप्स तक सीमित रहने के बजाय, हमें और ज्यादा भलाई के काम करने चाहिए. अपने इलाके के लोगों और अपने आसपास रहने वाले परिवारों की जरूरतों को समझें और जिस तरह भी मुमकिन हो उनकी मदद करें. आप उनके लिए जो भी मदद कर सकते हैं करिए. मैं आप सभी पर और भी ज्यादा गर्व करना चाहता हूं. मुझे यकीन है कि आप ऐसा करेंगे। </p>
<p>इवेंट से धनुष की स्पीच का वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया, जिसके बाद फैंस यह कयास लगाने लगे कि थलपति विजय के बाद अब धनुष भी राजनीति में कदम रखने जा रहे हैं। </p>
<p><strong> फैंस ने कही ये बात</strong><br>
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर यूजर ने वायरल वीडियो पर लिखा- लगता है राजनीति में आने वालों की कतार लंबी होती जा रही है. हर किसी को लग रहा है कि अगर थलपति विजय राजनीति में आ सकते हैं, तो मैं क्यों नहीं?  वहीं एक दूसरे यूजर ने कमेंट किया- राजनीति में स्वागत है धनुष. तमिलनाडु को सिर्फ सत्ता के पीछे भागने वाले कलाकारों की नहीं, बल्कि शिक्षित, अनुशासित और साहसी आवाजों की जरूरत है.  एक तीसरे यूजर ने बात जोड़ते हुए लिखा- लगता है धनुष जल्दी अपनी नई पार्टी लॉन्च कर सकते हैं। </p>
<p>अब धनुष पॉलिटिक्स में एंट्री करेंगे या नहीं ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा. लेकिन उनके फैंस ने अभी से ही उन्हें राजनीति में देखने की इच्छा और खुशी जाहिर कर दी है. आपको क्या लगता है कि थलपति विजय की तरह धनुष भी राजनीतिक मैदान में उतरेंगे या नहीं?</p>]]> </content:encoded>
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<title>भोपाल में पानी की टंकी पर चढ़े युवा कांग्रेस कार्यकर्ता, मांगा अमित शाह का इस्तीफा</title>
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<description><![CDATA[ भोपाल में पानी की टंकी पर चढ़े युवा कांग्रेस कार्यकर्ता, मांगा अमित शाह का इस्तीफा अमित शाह के इस्तीफे की मांग तेज, युवा कांग्रेस ने दी चेतवानी  भोपाल  केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। भोपाल में युवा कांग्रेस … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 12:15:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल में पानी की टंकी पर चढ़े युवा कांग्रेस कार्यकर्ता, मांगा अमित शाह का इस्तीफा</strong></p>
<p><strong>अमित शाह के इस्तीफे की मांग तेज, युवा कांग्रेस ने दी चेतवानी </strong></p>
<p><strong>भोपाल</strong><br>
 केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। भोपाल में युवा कांग्रेस ने अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। शहर के बीचों-बीच हजारों फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़कर कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और बीजेपी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।</p>
<p>भोपाल युवा कांग्रेस अध्यक्ष अमित खत्री ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपने हक, अधिकार और शिक्षा के मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और पेलेट गन का इस्तेमाल किया।छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। </p>
<p> अमित खत्री ने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए बल प्रयोग का सबसे दर्दनाक उदाहरण जबलपुर के इरशाद मंसूरी हैं, जिनकी आंख में पेलेट गन का छर्रा लगा उनकी आँखों को रोशनी जा सकती है। ये बताता है कि भाजपा सरकार युवा विरोधी हैं। <br>
छात्रों पर हुई कार्रवाई की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार शिक्षा, रोजगार और अधिकार मांगने वाले युवाओं की आवाज को बल प्रयोग से दबाना चाहती है।</p>
<p>युवा कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों पर हुए अत्याचार के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई और अमित शाह ने इस्तीफा नहीं दिया तो दोबारा जंतर मंतर बनाने में देश के युवा पीछे नहीं हटेंगे।</p>
<p>इस अवसर पर युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव सलमान गौरी, जिला उपाध्यक्ष नीरज यादव, जिला महासचिव अनीस शर्मा, उत्तर विधानसभा अध्यक्ष नावेद सिद्दीकी, साद उस्मानी सहित अन्य कार्यकर्ता  मौजूद रहे।</p>]]> </content:encoded>
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<title>धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा: जंतर&#45;मंतर आंदोलन से बदली भाजपा की रणनीति की कहानी</title>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 19:15:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>धर्मेंद्र, प्रधान, इस्तीफा:, जंतर-मंतर, आंदोलन, से, बदली, भाजपा, की, रणनीति, की, कहानी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
कॉलेज की तख्तियों और लकड़ी की कुर्सियों पर आपने भी तीर की निशान वाला दिल और कई घिसे-पिटे संदेश पढ़े होंगे. उन्हीं में एक पंक्ति अक्सर दिखती थी- "आज (Today) एक उपहार है, इसलिए इसे प्रेजेंट (Present) कहते हैं."  बीजेपी ने ऐसे किसी छोटे शहर के कॉलेज में पढ़ाई नहीं की.</p>
<p>लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा की राजनीतिक शिक्षा किसी छोटे शहर के कॉलेज की बेंचों पर नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के बाद की धूप, पसीने और कड़ी प्रतिस्पर्धा वाली सड़कों पर हुई है, जहां सिर्फ़ टिके रहना ही एक बड़ी चुनौती हुआ करती थी और हमेशा आने वाले कल की चिंता सताती थी.</p>
<p>भारत में लाखों लोगों का मानना था कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर उनका इस्तीफा मांगने के लिए जुटी भीड़ के बेकाबू होने से बहुत पहले ही पद छोड़ देना चाहिए था. पहले नीट-यूजी का पेपर लीक हुआ और उसके तुरंत बाद सीबीएसई की ऑनलाइन मार्किंग स्कीम की गड़बड़ी सामने आई, ऐसे में छात्रों का आक्रोश वाजिब था.</p>
<p>जब भारत की उच्च शिक्षा टेबल पर बिखरे जेंगा (Jenga) के ब्लॉक की तरह बिखरती हुई दिख रही थी, तब न तो पार्टी की ओर से और न ही सरकार की ओर से कोई कार्रवाई या संवाद हुआ. विपक्ष के नदारद रहने पर, कॉकरोच (CJP) टेबल पर आ गए. सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल से इस नए-नवेले आंदोलन को हवा दी. लेकिन वे जो हासिल करने में असफल हो सकते थे, उसे दिल्ली पुलिस और आरएएफ ने कर दिखाया. 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों- जिनमें से हजारों नाबालिग थे. उस पर बल प्रयोग ने भाजपा को राजनीतिक रूप से एक ऐसी गली में धकेल दिया, जहां से निकलना मुश्किल था.</p>
<p>हालांकि, प्रधान को हटाने में जितनी देरी हुई, उसने खुद को उतनी ही एक कठोर सत्ता के रूप में पेश किया, जो लोगों की मांगों को पूरा करने के लिए कोई नरम रूख नहीं दिखा रही थी. 'अगर कल ऐसा हुआ तो…' वाली सोच के साथ भाजपा ने उस स्थिति को टालने की कोशिश की, जिसका अंत होना तय था.</p>
<p>आखिर, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा सिर्फ़ एक पद छोड़ने का मामला नहीं था, बल्कि वह एक ऐसी मिसाल बन सकता था, जिसका असर आने वाले कल और न जाने कितने समय तक रहने वाला था. शायद इसी वजह को देखते हुए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने आख़िरी वक्त तक उन्हें बचाने की हरसंभव कोशिश की.</p>
<p>हालांकि, जितनी देरी धर्मेंद्र प्रधान को हटाने में हुई, उतना ही सरकार अड़ियल और सख्त नजर आई. संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने को था इसलिए राजधानी में राजनीतिक हलचल और तेज़ हो गई. विपक्षी दलों के नेता जंतर-मंतर पहुंचने लगे जिससे वे आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक के साथ फ्रेम में दिख सकें.</p>
<p>मॉनसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ और पहला हफ़्ता बिना किसी कामकाज के गुज़र गया. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सदन के भीतर और प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया. विपक्ष सदन का कामकाज चलने देने के मूड में नहीं था. विपक्ष को पता था कि सरकार का मकसद क्या था और सरकार को भी पता था कि विपक्ष क्या चाहता है.</p>
<p>ऐसे में केंद्र सरकार के दो वरिष्ठ मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह मैदान में उतारे गए. कॉकरोच जनता पार्टी से बातचीत का ज़िम्मा उन्हें सौंपा गया. सबसे पहले उन्होंने वांगचुक को अनशन खत्म करने के लिए मनाया और उनकी मांगों को भी कुछ कम कराया. लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी, अब यह विरोध प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी या वांगचुक से बहुत बड़ा हो चुका था. विरोध का स्वर तेज हो चुका था और इसके लिए किसी की बलिदान ज़रूरी हो गया था.</p>
<p>न तो कड़े कानून, न फास्ट-ट्रैक अदालतें और न ही पोर्ट्रेट मोड वाले वीडियो इस धधकती आग को शांत कर सकते थे. उसे एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी, जो ढह चुकी शिक्षा व्यवस्था का प्रतीक बन चुका था- धर्मेंद्र प्रधान. तब भाजपा ने भविष्य के बारे में गंभीरता से सोचना शुरू किया. परंपराओं और मिसालों की चिंता बाद में भी की जा सकती थी, लेकिन बड़े राजनीतिक लक्ष्य ज्यादा महत्वपूर्ण थे.</p>
<p><strong>मॉनसून सत्र पर थी सरकार की नजर</strong><br>
सूत्रों की मानें तो, इस मॉनसून सत्र में परिसीमन बिल सदन के पटल पर पेश किया जा सकता है. हालांकि सरकार द्वारा सूचीबद्ध पांच बिलों में यह बिल शामिल नहीं था, लेकिन खबरों की मानें तो 13 अगस्त से पहले सरकार इस बिल को पेश कर सकती है.  यह बिल बहुत अहम है, इसे पहले भी मोदी सरकार ने पेश करने की कोशिश की थी. अप्रैल में महिला आरक्षण बिल से जोड़ते हुए इसे पास कराने के लिए एक विशेष सत्र आहूत किया गया था. लेकिन सरकार दो तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई थी और ये बिल गिर गया था.</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, Delimitation विधेयक मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है. हालांकि सरकार की ओर से सूचीबद्ध पांच विधेयकों में इसका नाम नहीं था, लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक 13 अगस्त तक चलने वाले इस सत्र में इसे लाया जा सकता है. यह विधेयक बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अप्रैल में मोदी सरकार ने इसे महिला आरक्षण विधेयक के साथ जोड़कर विशेष सत्र में पारित कराने की कोशिश की थी, लेकिन दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाने के कारण यह प्रयास विफल हो गया.</p>
<p>यह पहली बार था जब मोदी सरकार द्वारा लाया गया कोई संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका. लेकिन अप्रैल के बाद सियासी परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं. हाल के दल-बदल, दलों के भीतर कलह, विपक्ष की कमजोर एकजुटता और राजनीतिक पुनर्संरेखण ने सरकार को उम्मीद दी कि अब वह सीमांकन विधेयक पारित कराने की फिर कोशिश कर सकती है.</p>
<p>2024 के लोकसभा चुनाव के बाद एनडीए के पास 293 सांसद थे, जिनमें भाजपा के 240 सांसद शामिल थे. बाद में यह संख्या बढ़कर 318 हो गई. इसमें मुख्य योगदान तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के एनडीए के साथ आने और शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने का रहा. राज्यसभा में जून 2024 के मध्य तक एनडीए के पास 101 सदस्य थे. अब यह संख्या बढ़कर 152 हो चुकी है.</p>
<p>यह बढ़ोतरी किसी चमत्कार का परिणाम नहीं थी, बल्कि सीमांकन के बड़े लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बेहद सोच-समझकर और लगातार की गई राजनीतिक रणनीति का नतीजा थी. इस राजनीतिक इंजीनियरिंग के साथ-साथ शरद पवार और एमके स्टालिन जैसे नेताओं को भी साथ लाना जरूरी था, जो किसी आसान काम से कम नहीं था.</p>
<p><strong>भारी पड़े कॉकरोच</strong><br>
ऐसे में यह मानसून सत्र भाजपा के साहस, राजनीतिक कौशल और खासकर कांग्रेस सहित विपक्ष में बढ़ती टूट-फूट का मंच बनने वाला था. लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन बाकी सभी मुद्दों पर भारी पड़ गया. कांग्रेस ने इस मौके का इस्तेमाल भाजपा के संसदीय एजेंडे को पटरी से उतारने के लिए किया. जब तक जंतर-मंतर का आंदोलन उग्र बना रहता, सरकार अपना एजेंडा आगे नहीं बढ़ा सकती थी. इसलिए अंततः धर्मेंद्र प्रधान राजनीतिक बलि की भेंट चढ़ गए.</p>
<p>इसलिए, यह एक तरफ प्रतिष्ठा और प्रधान, तो दूसरी तरफ कड़ी मेहनत और बड़े लक्ष्यों के बीच का चयन था. इसलिए, मोदी सरकार ने स्थिति को संभालने और किसी और दिन बड़ी लड़ाई लड़ने के लिए पीछे हटने का रास्ता चुना.ऑप्टिक्स पहले ही खराब हो चुका था. वरिष्ठ नेता नड्डा और सिंह नौसिखिए सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ बातचीत कर रहे थे, जो दोनों हाथ बांधकर बैठे थे. अनुभवी जोड़ी के लिए यह कोई बहुत अच्छी तस्वीर नहीं थी.</p>
<p>हालांकि सरकार के बारे में माना जाता है कि वह बहुत ही कम मौकों पर रणनीतिक रूप से पीछे हटती है. लंबे किसान आंदोलन के बाद तीन कृषि कानूनों को वापस लेना इसका एक उदाहरण है. जंतर-मंतर के प्रदर्शन की तरह ही वह विरोध भी एक बिल्कुल अलग रूप ले रहा था. कोई भी सरकार नहीं चाहती कि कोई प्रदर्शन हाईजैक हो जाए और वह ऐसी आग में बदल जाए जो उसके नियंत्रण से बाहर हो जाएसंसद में दांव पर बहुत कुछ लगा था और प्रधान की कुर्सी जाना एक छोटी सी कुर्बानी थी.</p>
<p>हालांकि हर कोई जानता है कि उस पार्टी के लिए परंपरा, प्रतिष्ठा और अनुशासन का क्या मतलब है जिसकी जड़ें परंपराओं में रची-बसी हैं. जो सभ्यता से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करना चाहती है. सवाल तो बना रहेगा कि आखिर भाजपा ने इस मुद्दे को इतना आगे बढ़ने को क्यों दिया? भाजपा, जो हमेशा कल की प्लानिंग करती है उसने प्रधान की बलि कल ही क्यों नहीं दे दी?<br>
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<title>तेजप्रताप की गिरफ्तारी पर भड़के तेजस्वी, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ पटना पटना  में NEET पेपर लीक को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद पुलिस ने जनशक्ति जनता दल सुप्रीमो तेजप्रताप यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस की इस कार्रवाई से तेजप्रताप यादव के छोटे भाई तेजस्वी यादव आगबबूला हो गए हैं। बड़े भाई की गिरफ्तारी से गुस्साए तेजस्वी यादव ने चेतावनी दी है … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 19:15:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>तेजप्रताप, की, गिरफ्तारी, पर, भड़के, तेजस्वी, बड़े, आंदोलन, की, दी, चेतावनी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पटना</strong><br>
पटना  में NEET पेपर लीक को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद पुलिस ने जनशक्ति जनता दल सुप्रीमो तेजप्रताप यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस की इस कार्रवाई से तेजप्रताप यादव के छोटे भाई तेजस्वी यादव आगबबूला हो गए हैं। बड़े भाई की गिरफ्तारी से गुस्साए तेजस्वी यादव ने चेतावनी दी है कि अगर उन्हें रिहा नहीं किया गया तो वो बड़ा आांदोलन करेंगे। पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान तेजस्वी यादव ने कहा, 'हमारे बड़े भाई तेजप्रताप यादव को गिरफ्तार किया गया। उनपर धाराएं लगाई गईं।</p>
<p>हम सरकार को सलाह देना चाहते हैं कि जितने भी छात्र या लोगों पर इस आंदोलन को लेकर एफआईआर किया गया है, जब दिल्ली में तय हो गया था कि सभी केस वापस लिए जाएंगे। तो हम आग्रह करना नहीं चाहेंगे बल्कि हम सरकार को चेतावनी देना चाहते हैं कि अगर कल तक जिन्हें जेल में डाला गया है और जिन छात्रों पर मुकदमा दर्ज किया गया है अगर उनपर से मुकदमा वापस नहीं लिया गया और जेल में डाले गए लोगों को रिहा नहीं किया तो हमलोग बड़ा आंदोलन करेंगे।</p>
<p>पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने आगे यह भी कहा कि बिहार में पिछले 21 साल में जितने भी पेपर लीक हुए हैं फिर चाहे वो सिपाही भर्ती हो या बीपीएससी हो, चाहे नीट का मामला हो या कोई भी परीक्षा होती है तो बड़े पैमाने पर गड़बड़-घोटाला होता है। ये सरकार ही लीक है। इसलिए हम सभी लोग एकजुट होकर मौजूदा सरकार को जब गिराएंगे नहीं तब तक यह मामला रूकने वाला नहीं है। इस सरकार में भ्रष्टाचारी, अपराधी लोगों का बोलबाला है और उन्हीं का राज चलता है।</p>
<p>बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आगे कहा कि सीवान में छात्रों पर एके-47 से गोली चलाई गई। सीवान के तीन छात्र जख्मी हुए हैं। हर जगह से ऐसी खबर आ रही है कि बिहार में विभिन्न जिलों में पुलिस ने गलत तरीके से कार्रवाई की है। लोगों पर लाठियां बरसाई गई हैं और लोगों पर फर्जी मुकदमा किया गया है। कल तक रिहा नहीं करेंगे तो हमलोग एक बड़ा आंदोलन करेंगे। तेजस्वी यादव ने पटना के मेदांता अस्पताल में जाकर सीवान के उन घायल छात्रों से भी मुलाकात की है जो शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान जख्मी हो गए थे।</p>
<p>तेजस्वी यादव ने घायल छात्रों के परिजनों से भी बातचीत की है। तेजस्वी यादव ने कहा कि जिन छात्रों ने अपने हक के लिए आंदोलन किया, मैं उनका धन्यवाद करता हूं। उन्होंने अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ी। जब यह तय हो चुका है कि आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे, तब भी बिहार में छात्रों पर केस दर्ज कर उन्हें जबरन जेल भेजा जा रहा है।</p>
<p><strong>तेजप्रताप यादव बेऊर जेल में हैं कैद</strong><br>
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में शनिवार को बिहार बंद के दौरान 13 जिलों में भारी उपद्रव हुआ। उधर, पुलिस ने देर रात पूर्व मंत्री और जेजेडी प्रमुख तेज प्रताप यादव को गिरफ्तार कर लिया। उन पर रामगुलाम चौक पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों को हिंसा के लिए भड़काने का आरोप है। तेजप्रताप यादव के वकील ने दावा किया है उनपर धारा 307 लगाया गया है जो कि हत्या की कोशिश से संबंधित है। जेजेडी प्रमुख की गिरफ्तारी पर पार्टी नेता वीणा मानवी ने भी नाराजगी जताई है और कहा है कि पुलिस ने यह बताया ही नहीं कि उन्हें किस जुर्म में अरेस्ट किया गया है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा: नीट विवाद के बीच सामने आई अंदरूनी कहानी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली शिक्षा मंत्री के पद से शनिवार को इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान के रेजिग्नेशन को लेकर अब अंदर की कहानी सामने आ रही है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, नीट पेपर लीक विवाद और छात्रों के आंदोलन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने दो बार अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी, लेकिन … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 14:15:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>धर्मेंद्र, प्रधान, इस्तीफा:, नीट, विवाद, के, बीच, सामने, आई, अंदरूनी, कहानी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
शिक्षा मंत्री के पद से शनिवार को इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान के रेजिग्नेशन को लेकर अब अंदर की कहानी सामने आ रही है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, नीट पेपर लीक विवाद और छात्रों के आंदोलन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने दो बार अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी, लेकिन दोनों बार सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया.</p>
<p>सरकार का मानना था कि किसी मंत्री का इस्तीफा समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही तय करना ज्यादा जरूरी है. सूत्रों के अनुसार, 20 जुलाई को वरिष्ठ मंत्रियों की एक उच्चस्तरीय बैठक में भी धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा देने की इच्छा जताई थी. हालांकि उस समय भी उन्हें शिक्षा क्षेत्र में चल रहे सुधारों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाने के लिए कहा गया और इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया.</p>
<p>सरकार के भीतर यह सोच थी कि किसी मंत्री का इस्तीफा देना सबसे आसान विकल्प होता है. यह जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने जैसा है. मोदी सरकार की प्राथमिकता समस्या से पीछे हटने के बजाय उसके समाधान पर काम करने की रही है.  </p>
<p><strong>फिर आखिर क्या बदला?</strong><br>
सूत्रों के मुताबिक, स्थिति उस समय बदली जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के बीच दूसरे दौर की बातचीत हुई. इस दौरान CJP ने 20 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च जैसी एक और बड़े स्तर की रैली निकालने की चेतावनी दी. सरकार पहले से ही पुलिस कार्रवाई में छात्रों के घायल होने और आंदोलन के लगातार विस्तार को लेकर चिंतित थी.</p>
<p>इसी बीच सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को रिपोर्ट दी कि कुछ असामाजिक और राष्ट्रविरोधी तत्व आंदोलन का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं. डिजिटल मॉनिटरिंग के दौरान 400 से अधिक सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान की गई, जिनमें करीब 100 इंस्टाग्राम अकाउंट पाकिस्तान से संचालित होने का दावा किया गया.</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच में इनमें से कई अकाउंट पहले भी भारत विरोधी प्रचार और भ्रामक सूचनाएं फैलाने से जुड़े पाए गए. प्रारंभिक विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से कई खाते पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सक्रिय थे, और कथित तौर पर भारतीय सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर भारत विरोधी बातें, गलत सूचना और दुष्प्रचार फैला रहे थे.</p>
<p><strong>और ऐसे हुआ इस्तीफा…</strong><br>
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस की फेसियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के जरिए 20 से 24 जुलाई के बीच जंतर-मंतर के आसपास करीब 400 ऐसे लोगों की पहचान भी की गई, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड बताया गया. इनमें कुछ लोगों के 20 जुलाई की हिंसा और तोड़फोड़ से जुड़े होने की भी आशंका जताई गई.</p>
<p>इन सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना और तनाव को बढ़ने से रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसी के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा सौंपा, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया. इसके कुछ ही घंटों बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया.</p>]]> </content:encoded>
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<title>‘व्यापक हितों को प्राथमिकता देते हुए छोड़ा पद’: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर नितिन नवीन का बड़ा बयान</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  NEET पेपर लीक विवाद पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उनके इस कदम का समर्थन किया है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने एक्स पर लिखा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 20:15:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>‘व्यापक, हितों, को, प्राथमिकता, देते, हुए, छोड़ा, पद’:, धर्मेंद्र, प्रधान, के, इस्तीफे, पर, नितिन, नवीन, का, बड़ा, बयान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 NEET पेपर लीक विवाद पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उनके इस कदम का समर्थन किया है।</p>
<p>बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने एक्स पर लिखा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के तौर पर, धर्मेंद्र प्रधान ने भारत के शिक्षा में सुधार लाने और ऐतिहासिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) व अन्य पहलों को सफलतापूर्वक लागू करने में अहम भूमिका निभाई है।</p>
<p><strong>पार्टी धर्मेंद्र प्रधान के साथ मजबूती से खड़ी है- नितिन नवीन</strong><br>
व्यापक हितों को प्राथमिकता देते हुए उनका पद छोड़ने का निर्णय सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा के उच्चतम मानदंडों को दर्शाता है। पार्टी इस निर्णय में धर्मेंद्र प्रधान के साथ मजबूती से खड़ी है। मैं उनके भविष्य के प्रयासों के लिए उन्हें शुभकामनाएं देता हूं।</p>
<p><strong>धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा</strong><br>
नीट पेपर लीक विवाद पर आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, पेपर लीक के खिलाफ कॉककोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हो रहे प्रदर्शनों की बड़ी जीत है, जिसका केंद्र दिल्ली का जंतर-मंतर था।</p>
<p><strong>CJP ने की थी इस्तीफे की मांग</strong><br>
सरकार ने प्रदर्शनकारियों की अन्य मांगों को मानने का भरोसा दिया था। उसमें, नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना और इस हफ्ते की शुरुआत में संसद तक मार्च में शामिल लोगों को खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करना। फिर भी प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहे।</p>
<p><strong>धर्मेंद्र प्रधान ने ली पेपर लीक की जिम्मेदारी</strong><br>
इस्तीफा देने के बाद, प्रधान ने कहा कि उन्होंने नीट पेपर लीक की पूरी जिम्मेदारी ली और कभी भी स्थिति से मुंह नहीं मोड़ा, लेकिन जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने बाधाएं पैदा करने और छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की।</p>
<p><strong>धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा</strong><br>
धर्मेंद्र प्रधान में 'एक्स' पर पोस्ट में लिखा, "जंतर-मंतर और पूरे देश की स्थिति को देखते हुए, जिसका मकसद देश-विरोधी ताकतों को इनका फायदा उठाने से रोकना, राष्ट्रीय एकता बनाए रखाना, यह सुनिश्चित करना कि किसी भी भारतीय छात्र का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न फंसे, और हमारे बच्चों को अपनी पढ़ाई पर समय देने और अपना करियर बनाने पर ध्यान केंद्रित करने देना है। मैंने माननीय प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।"</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलें तेज: दिल्ली की हलचल से बढ़ा सियासी पारा</title>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 19:15:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मोदी, कैबिनेट, में, फेरबदल, की, अटकलें, तेज:, दिल्ली, की, हलचल, से, बढ़ा, सियासी, पारा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नईदिल्ली </strong><br>
   <br>
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली का सियासी माहौल अचानक गर्म हो गया है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दिल्ली पहुंच रहे हैं, जहां उनकी मुलाकात गृहमंत्री अमित शाह से होगी. इस बैठक को केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल से जोड़कर देखा जा रहा है. चर्चा है कि शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे को केंद्र सरकार में जगह मिल सकती है. हालांकि, इस पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। </p>
<p>धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद देवेंद्र फडणवीस दिल्ली रवाना हो गए. राजधानी में उनकी अमित शाह के साथ बैठक तय है. इस मुलाकात ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चाओं को और तेज कर दिया है। </p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मंत्रिमंडल के संभावित फेरबदल पर चर्चा हो सकती है. इसी दौरान शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के नाम पर भी विचार होने की बात सामने आ रही है. माना जा रहा है कि उन्हें केंद्र सरकार में जिम्मेदारी मिल सकती है. हालांकि, सरकार की तरफ से अब तक इसकी पुष्टि नहीं की गई है। </p>
<p><strong>धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया?</strong><br>
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर इस्तीफे की जानकारी देते हुए इसकी वजह भी बताई. उन्होंने कहा कि पिछले चार दशक से वह छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए काम करते रहे हैं. उनका मानना है कि मजबूत और सबको साथ लेकर चलने वाली शिक्षा व्यवस्था ही देश के विकास की असली नींव है। </p>
<p>उन्होंने लिखा कि 3 मई 2026 को हुई NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायत मिलते ही सरकार ने तुरंत कदम उठाए. मामले की जांच CBI को सौंपी गई. परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने का फैसला लिया गया. साथ ही अगले साल से NEET को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने की घोषणा भी की गई। </p>
<p><strong>'युवाओं का भविष्य सबसे पहले'</strong><br>
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि 20 लाख से ज्यादा छात्रों की निष्पक्ष परीक्षा कराना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी. केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, छात्रों और अभिभावकों के सहयोग से 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा सफलतापूर्वक कराई गई. 16 जुलाई को आए नतीजों में कई गरीब और वंचित परिवारों के छात्रों ने सफलता हासिल की। </p>
<p>अपने इस्तीफे पर उन्होंने लिखा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं ने उन्हें गहराई से आहत किया. यह किसी व्यक्तिगत सम्मान का सवाल नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का मामला है. वह नहीं चाहते कि छात्रों का भविष्य कानूनी विवाद या राजनीतिक टकराव में उलझे. इसी सोच के साथ उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया। </p>]]> </content:encoded>
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<title>INDIA गठबंधन में तकरार! अखिलेश यादव और केसी वेणुगोपाल आमने&#45;सामने, बढ़ी सियासी गर्मी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली नीट पेपर लीक मामले में विरोध प्रदर्शन और मांगों को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेता चाहे सड़क पर एक साथ दिख रहे हों लेकिन सदन के भीतर एक राय नहीं दिख रही है. आज दोपहर बारह बजे जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तब हंगामा हो रहा था. अखिलेश यादव … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 20:15:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>INDIA, गठबंधन, में, तकरार, अखिलेश, यादव, और, केसी, वेणुगोपाल, आमने-सामने, बढ़ी, सियासी, गर्मी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>नीट पेपर लीक मामले में विरोध प्रदर्शन और मांगों को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेता चाहे सड़क पर एक साथ दिख रहे हों लेकिन सदन के भीतर एक राय नहीं दिख रही है. आज दोपहर बारह बजे जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तब हंगामा हो रहा था. अखिलेश यादव समेत सपा के सांसद भी अपनी आवाज उठा रहे थे और अपनी बात रखना चाहते थे. अखिलेश यादव अपनी बात कहना चाह रहे थे लेकिन स्पीकर ने कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल को बोलने के लिए कहा. उनके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू बोलने लगे. इससे पहले अखिलेश ने सदन में BJP और कांग्रेस के बीच किसी डील का दावा किया था। </p>
<p><strong>सपा और कांग्रेस में मतभेद</strong><br>
बता दें कि लोकसभा में नीट पेपर लीक के मुद्दे पर बोलने का मौका सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस को दिए जाने पर भी अखिलेश नाराज हो गए थे. स्पीकर ओम बिरला के सामने आपत्ति जताते हुए अखिलेश ने कहा कि आपने बीजेपी-कांग्रेस को बोलने का मौका दिया, क्या आपने इनसे समझौता कर लिया. अध्यक्ष जी, यह पक्ष बिल्कुल ठीक नहीं है. ये युवा-छात्र हम सभी के हैं. हम सभी उनके लिए लड़ रहे हैं. ये मामला बीजेपी, कांग्रेस या सपा का नहीं बल्कि छात्रों का है. अब केसी वेणुगोपाल के साथ उनकी तीखी बहस का मामला सामने आया है। </p>
<p><strong>अखिलेश और वेणुगोपाल के बीच तीखी बहस</strong><br>
सूत्रों के मुताबिक, इस दावे को लेकर केसी वेणुगोपाल ने अखिलेश से सवाल-जवाब किए. वहीं सपा मुखिया ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि इस्तीफे बाद में भी दिए जा सकते हैं. सबसे पहले, हमें छात्रों पर की गई बर्बरता के लिए जवाब चाहिए. इसी मुद्दे पर दोनों के बीच बहस हो गई। </p>
<p><strong>सदन में भी अखिलेश को आया गुस्सा</strong><br>
नीट मामले पर अखिलेश ने सदन में कहा था कि यह मामला कांग्रेस, समाजवादी पार्टी या भाजपा का नहीं है, बल्कि यह नौजवानों और छात्रों का है. अगर छात्रों की नहीं सुनी जाएगी तो हम सड़कों पर आएंगे. उन्होंने विरोध प्रदर्शनों से निपटने के सरकार के तरीके की आलोचना की और आरोप लगाया कि प्रदर्शनों के दौरान छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया. सरकार ने छात्रों के साथ जैसा बर्ताव किया, उनके हाथ-सिर तोड़े गए, उनके कपड़े फाड़े गए</p>
<p><strong>'पीएम आवास के बाहर भीड़ लेकर तो हम पहुंचे थे' <br>
सूत्रों के अनुसार सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद भी वेणुगो</strong>पाल और अखिलेश यादव के बीच बातचीत होती रही. वेणुगोपाल ने अखिलेश से पूछा कि इस्तीफे की मांग पर जोर क्यों नहीं दिया? उन्होंने आगे कहा कि यह तो छात्रों की मांग है जो हम यहां उठा रहे हैं. अखिलेश ने यह भी शिकायत की कि कांग्रेस के शीर्ष नेता अन्य विपक्षी दलों को बिना बताए और बिना उन्हें भरोसे में लिए कल पीएम आवास के बाहर धरने पर क्यों चले गए? जबकि पीएम आवास के बाहर भीड़ लेकर वही पहुंचे थे. इसके बाद अखिलेश यादव ने स्पीकर से मुलाकात भी की। </p>
<p><strong>कांग्रेस को मौका मिलने पर अखिलेश नाराज</strong><br>
इससे पहले, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सदन में नीट का विषय उठाया और व्यापक चर्चा की मांग की. इस पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार इस मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार है. स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि सभी पक्षों की राय आ चुकी है. आप (समाजवादी पार्टी) भी चर्चा चाहते हैं, वे (कांग्रेस) भी चर्चा चाहते हैं और सरकार भी चर्चा के लिए तैयार है. लेकिन इस तरह सदन की गैलरी में खड़े होकर चर्चा नहीं हो सकती. इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। </p>]]> </content:encoded>
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<title>सपा की अंदरूनी कलह बढ़ाएगा इमरान मसूद का बयान&#45;	डॉ. स्मिता यादव</title>
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<description><![CDATA[ एक कांग्रेस नेता के बयान ने समाजवादी पार्टी में हंगामा मचा दिया है। कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने कहा है कि समाजवादी पार्टी को मुसलमान बतौर लीडर बर्दाश्त नहीं है। निहितार्थ यह कि बतौर वोटर तो समाजवादी पार्टी में मुसलमानों का स्वागत है, लेकिन नेता के रूप में नहीं। मतलब आप मुसलमान हैं तो सपा … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 11:15:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>सपा, की, अंदरूनी, कलह, बढ़ाएगा, इमरान, मसूद, का, बयान-	डॉ., स्मिता, यादव</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>एक कांग्रेस नेता के बयान ने समाजवादी पार्टी में हंगामा मचा दिया है। कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने कहा है कि समाजवादी पार्टी को मुसलमान बतौर लीडर बर्दाश्त नहीं है। निहितार्थ यह कि बतौर वोटर तो समाजवादी पार्टी में मुसलमानों का स्वागत है, लेकिन नेता के रूप में नहीं। मतलब आप मुसलमान हैं तो सपा के जीतने की स्थिति में हो सकता है मंत्री बना दिए जाएं, लेकिन मुख्यमंत्री बन जाएं, यह मुमकिन नहीं। सरल शब्दों में कहें तो समाजवादी पार्टी या उसकी सरकार की कमान किसी मुसलमान के हाथ में नहीं दी जाएगी। </p>
<p>इमरान मसूद ने एक तरह से ओवैसी के उस सवाल को जायज़ बता दिया है, जिसमें वह कहते हैं कि मुसलमान, भारत की पॉलिटिकल पार्टियों में सिर्फ दरी बिछाने के लिए हैं, सत्ता में भागीदारी के लिए नहीं। हालांकि यह वाक्य भारत की हर उस पार्टी के लिए सही ठहरता है, जिसने मुसलमानों के तुष्टीकरण के लिए काम किया। बीजेपी को छोड़कर लगभग सभी पार्टियों का चरित्र वही है।</p>
<p>मसूद के इस बयान के बाद से सपा के भीतर बतकही शुरू हो गई है। पहली पंक्ति के नेता इस बात से डरे हुए हैं कि इमरान मसूद की यह बात सपा के भीतर मुस्लिम कार्यकर्ताओं में फैल न जाए और वे कुछ दिनों में इस सवाल का जवाब न ढूंढ़ने लगें कि सपा में मुसलमानों का भविष्य क्या है? मुस्लिम कार्यकर्ता सपा में किसी ताकतवर मुस्लिम लीडर का नाम खोजते भी हैं तो बमुश्किल एक नाम आज़म खां का मिलता है, जो अपनी ही कौम पर अत्याचार करने और भ्रष्टाचार के मामलों में जेल में हैं। लिहाज़ा उनका यह डर जायज़ है कि सपा में मेरा या मेरी कौम का मुस्तकबिल क्या है? </p>
<p>पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से सपा के पास 11 सीटें हैं, जो अच्छी खासी मुस्लिम जनसंख्या वाले इलाके हैं। अगर चुनाव से 6 महीने पहले इस इलाके के मुस्लिम वोटरों में यह असमंजस फैल गया कि वे सपा की ओर ही रहें, या फिर कांग्रेस की ओर जाएं, तो ये सपा के लिए कोई अच्छी तस्वीर नहीं है। आने वाले समय में समाजवादी पार्टी में मुस्लिम नेताओं का असंतोष बाहर आएगा, यह तय है। मुरादाबाद में कमाल अख्तर और जावेद अली का सिर उठाना इस बात का सबूत है कि तलवारें म्यान से बाहर आने लगी हैं। आज़म खां की राजनीति लगभग खत्म होने के कगार पर है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुस्लिम नेता चाहते हैं कि उनकी भागीदारी सूबे की राजनीति में और बढ़े और सत्ता मिलने पर कुर्सी भी मिले। बहुत मुमकिन है कि सपा के भीतर मुस्लिम नेताओं के इस उहापोह का इस्तेमाल ओवैसी की पार्टी कर ले जाए। आखिर बिहार में उसने अपना परफॉर्मेंस पिछले चुनाव में दोहराया तो है ही, साबित भी किया है कि मुसलमान ओवैसी की इस बात का यकीन करने लगे हैं कि सारे राजनैतिक दल उनसे अभी तक दरी बिछवाने का काम ही करवाते आ रहे हैं।</p>
<p>उधर अखिलेश का सनातनी वोटों का लालच मुस्लिम वोटरों को वैसे ही असमंजस में डाल रहा है। उनको लगने लगा है कि अगर अखिलेश आज अयोध्या को विश्वविख्यात धर्म नगरी बनाने का वादा कर रहे हैं, तो कल मुख्यमंत्री बनने के लिए मथुरा व काशी के विवादास्पद स्थलों को भी हिंदुओं को देने की बात न करने लगें। यह डर मुसलमानों के असमंजस को और पुख्ता करता है, भयावह बनाता है।</p>
<p>द्वैध में फंसा यही मुसलमान सपा नेतृत्व के लिए घातक सिद्ध होने वाला है, क्योंकि गैर भाजपा पार्टियों ने हमेशा उसका इस्तेमाल निगेटिव वोटिंग के लिए किया। यानी बीजेपी को जो पार्टी हराए, मुसलमान उसी को वोट दें। ऐसी अपील कई दशकों से होती आई है और इसीलिए मुसलमान सपा, आरजेडी, आप और कांग्रेस जैसे राजनैतिक दलों के औज़ार बनते गए। यह अलग बात है कि जीतने पर इन पार्टियों ने उनके मुस्तकबिल के लिए कभी कोई काम नहीं किया। इसीलिए इस बार उत्तर प्रदेश का मुसलमान ओवैसी में भी अपना भविष्य तलाश सकता है। ज़ाहिर है उसका शिफ्ट सपा को भारी नुकसान पहुंचाने वाला है। याद कीजिए इमरान मसूद को वो तल्ख बयान, जिसमें उन्होंने कहा कि सुल्तानपुर के एनकाउंटर के बाद सपा नेता यादव परिवारों से तो मिलने गए, लेकिन कोई भी मुस्लिम परिवारों से मिलने नहीं गया। इस तल्खी को छोटा न समझिए। आने वाले समय में सपा व कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे में भी इसकी झलक मिलना तय है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>मता बनर्जी को बड़ा झटका, TMC के 3 बैंक खाते फ्रीज, जेट&#45;हेलीकॉप्टर खरीद मामले से जुड़ा विवाद</title>
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<description><![CDATA[ कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद ममता बनर्जी को लगातार झटके पर झटका मिल रहा है. कोलकाता हाईकोर्ट ने सोमवार (20 जुलाई) को तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट को प्रवर्तन निदेशालय की ओर से फ्रीज किए गए पार्टी के तीन बैंक खातों को संचालित करने की अंतरिम अनुमति देने से … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 19:00:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मता, बनर्जी, को, बड़ा, झटका, TMC, के, बैंक, खाते, फ्रीज, जेट-हेलीकॉप्टर, खरीद, मामले, से, जुड़ा, विवाद</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कोलकाता</strong></p>
<p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद ममता बनर्जी को लगातार झटके पर झटका मिल रहा है. कोलकाता हाईकोर्ट ने सोमवार (20 जुलाई) को तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट को प्रवर्तन निदेशालय की ओर से फ्रीज किए गए पार्टी के तीन बैंक खातों को संचालित करने की अंतरिम अनुमति देने से इनकार कर दिया. ईडी ने तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों को फ्रीज किया था, जिनमें कुल 440.42 करोड़ रुपये जमा थे. यह कार्रवाई राज्य पुलिस की एफआईआर के आधार पर शुरू की गई जांच के तहत की गई. मामले में कथित वित्तीय गड़बड़ियों, अवैध रूप से धन जुटाने और पार्टी के कुछ बैंक खातों के जरिए संदिग्ध रकम के लेनदेन की जांच की जा रही है। </p>
<p>मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने 13 जुलाई को अंतरिम आदेश सुरक्षित रख लिया था. सोमवार को अदालत ने ममता <strong>बनर्जी गुट की अंतरिम राहत की मांग खारिज कर दी। </strong></p>
<p><strong>पिछली सुनवाई में कोर्ट की टिप्पणी</strong><br>
इस दौरान अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई थी कि एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद इतनी जल्दी में खाते फ्रीज क्यों किए गए। कोर्ट ने टिप्पणी की थी, "18 जून को FIR दर्ज हुई और अगले ही दिन 19 जून को आनन-फानन में खाते फ्रीज कर दिए गए। इस शुरुआती स्टेज पर कोर्ट को ऐसा कोई ठोस आधार या सबूत नहीं दिख रहा, जिसके दम पर इतनी हड़बड़ी में यह कदम उठाया गया।" कोर्ट ने यह भी कहा था कि जब आम नागरिक पुलिस के पास जाते हैं, तब तो ऐसी तत्परता शायद ही कभी देखने को मिलती है।</p>
<p><strong>पैसे निकालने के लिए रखी गई थीं शर्तें</strong><br>
तब कोर्ट ने कहा था कि पार्टी इन खातों से सिर्फ अपने दिन-प्रतिदिन के कामकाज का खर्च ही निकाल पाएगी। इसके अलावा,  किसी अन्य काम के लिए पैसे नहीं निकाले जा सकेंगे। बैंक में चेक जमा करने से पहले उस पर TMC के दो अधिकृत पदाधिकारियों के हस्ताक्षर होने चाहिए। पदाधिकारियों के साइन के बाद उस चेक पर स्पेशल ऑफिसर (रिटायर्ड जज) के भी काउंटर-सिग्नेचर होने जरूरी हैं।</p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला? </strong><br>
राज्य पुलिस की ओर से दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों को ईडी ने 440.42 करोड़ रुपये की राशि के साथ फ्रीज कर दिया है। यह कार्रवाई पार्टी के कुछ बैंक खातों के माध्यम से कथित बेईमान वित्तीय लेनदेन, अवैध रूप से धन संग्रह और संदिग्ध धन के हस्तांतरण के सं<strong>बंध में की गई जांच के सिलसिले में की गई है।</strong></p>
<p><strong>ईडी के जांच में क्या मिला?</strong><br>
मामले में पक्षों की दलीलें समाप्त होने के बाद न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने 13 जुलाई को प्रार्थना पर अंतरिम आदेश सुरक्षित रख लिया था।अधिकारियों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि अप्रैल 2023 और जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उसकी संबंधित इकाई को लगभग 160 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए थे। </p>
<p><strong>कंपनी पर क्या आरोप है?</strong><br>
कंपनी पर आरोप है कि उसने 2023 और 2026 के बीच 82.96 करोड़ रुपये एक अन्य नवगठित इकाई को हस्तांतरित किए। यह पाया गया कि इस इकाई को एक बड़ी राशि हस्तांतरित की गई थी।अधिकारियों ने बताया कि इसमें से 112 करोड़ रुपये का इस्तेमाल एम्ब्रेयर लेगेसी 600 बिजनेस जेट और अगस्तावेस्टलैंड 109एसपी हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए किया गया था।</p>
<p><strong>क्या हैं आरोप?</strong></p>
<p>पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, ईडी की शुरुआती जांच में सामने आया कि अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से करीब 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी एक अन्य इकाई को ट्रांसफर किए गए. जांच एजेंसी का आरोप है कि कंपनी ने 2023 से 2026 के बीच 82.96 करोड़ रुपये एक अन्य नई कंपनी को ट्रांसफर किए. अधिकारियों के मुताबिक, इस कंपनी को बड़ी रकम भेजी गई थी. जांच में यह भी सामने आया कि इनमें से 112 करोड़ रुपये का इस्तेमाल एम्ब्रेयर लेगेसी 600 बिजनेस जेट और अगस्तावेस्टलैंड 109SP हेलीकॉप्टर खरीदने में किया गया। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>MP BJP: भाजयुमो ने 15 जिलों के अध्यक्षों की घोषणा की, ग्वालियर नगर की कमान शिवम राजावत को</title>
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<description><![CDATA[ भोपाल भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने संगठन विस्तार के तहत 15 जिलों के जिला अध्यक्षों के नाम घोषित किए हैं। जिन जिलों में अध्यक्ष पद को लेकर कई दावेदार थे, वहां संगठन ने संतुलन बनाते हुए कुछ नेताओं को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी भी सौंपी है। जारी सूची के अनुसार सागर … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 16:00:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल</strong></p>
<p>भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने संगठन विस्तार के तहत 15 जिलों के जिला अध्यक्षों के नाम घोषित किए हैं। जिन जिलों में अध्यक्ष पद को लेकर कई दावेदार थे, वहां संगठन ने संतुलन बनाते हुए कुछ नेताओं को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी भी सौंपी है। जारी सूची के अनुसार सागर ग्रामीण में आयुष पाण्डेय, हरदा में धर्मेंद्र पाल, सीधी में अजय गुप्ता, टीकमगढ़ में संकल्प जैन, खरगोन में अंकुश जायसवाल, जबलपुर ग्रामीण में पंकज तिवारी, बैतूल में विक्रम वैद्य, झाबुआ में प्रकाश परमार और ग्वालियर नगर में शिवम राजावत को जिला अध्यक्ष बनाया गया है।</p>
<p>  इसके अलावा रतलाम में अनुकूल सोनी, बड़वानी में निशांत पंवार, शहडोल में प्रियंम त्रिपाठी, सीहोर में महेंद्र ठाकुर, खंडवा में सागर अरतानी और उज्जैन नगर में नितिन सेन को भी जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। संगठन ने सात जिलों में जिला महामंत्री भी नियुक्त किए हैं। इनमें ग्वालियर नगर में गौरव मिश्रा, रतलाम में कृष्णा डिंडोरे, बड़वानी में शिवम मिश्रा, शहडोल में नितिन राणा, सीहोर में हर्षित मेवाड़ा और खंडवा में शुभम पटेल शामिल हैं।  </p>
<p><strong>गौरव मिश्रा को मिली महामंत्री की कमान</strong></p>
<p>भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने ग्वालियर का जिलाध्यक्ष शिवम राजावत (रानू) को बनाया है।शिवम राजावत सदाशिव नगर में निवास करते हैं। जो कि मोर्चे की रीति-नीति में बढ़चढ़कर भाग लेते हैं।वहीं जिला महामंत्री गौरव मिश्रा को बनाया गया है। दोनों की नियुक्ति पर अमन शर्मा, ऋषभ शर्मा, सौरभ शर्मा ने बधाई दी है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>संसद सत्र से पहले PM मोदी का राहुल गांधी पर बड़ा हमला, बोले&#45; 56 नहीं, 28 साल के नौजवान देश को आगे बढ़ा रहे</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली धानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के मॉनसून सत्र के सार्थक होने की उम्मीद जताई. उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती उपलब्धियों की तारीफ करते हुए की. उन्होंने इनोवेशन को बढ़ावा देने और देश की अंतरिक्ष क्षमताओं का विस्तार करने में प्राइवेट सेक्टर की भूमिका की भी तारीफ की. … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 12:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>संसद, सत्र, से, पहले, मोदी, का, राहुल, गांधी, पर, बड़ा, हमला, बोले-, नहीं, साल, के, नौजवान, देश, को, आगे, बढ़ा, रहे</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
धानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के मॉनसून सत्र के सार्थक होने की उम्मीद जताई. उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती उपलब्धियों की तारीफ करते हुए की. उन्होंने इनोवेशन को बढ़ावा देने और देश की अंतरिक्ष क्षमताओं का विस्तार करने में प्राइवेट सेक्टर की भूमिका की भी तारीफ की. अपने संबोधन में पीएम मोदी ने राहुल गांधी पर बिना नाम लिए तंज कसा। </p>
<p>पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, "भारत के एक युवा स्टार्टअप ने बहुत बड़ी सिद्धि प्राप्त की है. विश्व के कम ही देश हैं, जहां इस प्रकार के प्राइवेट ताकत बनी है. भारत के युवाओं ने अंतरिक्ष में नई उड़ान भरी है, बहुत बड़ी सफलता है। </p>
<p>स्काईरूट एयरोस्पेस का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, इसमें जो नौजवान काम कर रहे हैं, उनकी एवरेज उम्र सिर्फ 28 साल है. ऐसे नौजवानों ने ये काम करके दिखाया है. मैं किसी 56 साल के नौजवान की बात नहीं कर रहा हूं। </p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि मैं देश के 28 के एवरेज वाले नौजवानों की बात कर रहा हूं, जिन्होंने अंतरिक्ष में देश का झंडा गाड़ दिया है. इन स्टार्टअप्स और उनकी युवा टीमों ने अंतरिक्ष में भारत का झंडा गाड़ दिया है। </p>
<p><strong> 'जहां तर्क होते हैं… तथ्य होते हैं, वहां तूफान की जरूरत नहीं</strong><br>
संसद के मानसून सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये सत्र काफी ऐतिहासिक है. इस सत्र में सरकार कई अहम बिल लाने वाली हैं. साथ ही पीएम ने विपक्षी दलों से सकारात्मक रवैए अपनाने और सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप चलाने की अपील की। </p>
<p>पीएम ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, 'मानसून हो या और मानसून सत्र, अगर दोनों ही प्रो एक्टिव हो, तो बहुत ही प्रोडक्टिव होते हैं. और दोनों प्रोडक्टिव होते हैं, तो देश का कल्याण होता है, जीव मात्र का कल्याण होता है. इसलिए हम यही प्रार्थना करते हैं कि मानसून भी प्रोएक्टिव रहे और मानसून सत्र भी प्रोडक्टिव रहे। </p>
<p>पीएम ने कहा, पिछले एक महीने में देश ने अनेक सिद्धियां प्राप्त की हैं. देशवासी गर्व से भर जाएं, इस प्रकार की सिद्धियों का सिलसिला चला है. चाहे राष्ट्रीय हो, अंतरराष्ट्रीय हो और अब तो अंतरिक्ष भी हो, एक प्रकार से भारत के लिए गर्व के पल रहे हैं. अब हम अंतरिक्ष के क्षेत्र की भी बात कर सकते हैं. पिछले साल मॉनसून सत्र से ठीक पहले, एक भारतीय नागरिक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर थे. दो दिन पहले, भारत के युवाओं के नेतृत्व वाले एक स्टार्ट-अप ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की, जिसे अब तक बहुत कम देश ही हासिल कर पाए हैं। </p>
<p>पीएम ने आगे बोलते हुए कहा कि ये संयोग नहीं, बल्कि एक संदेश है और बड़ा मजबूत संदेश है कि हमारे देश के युवाओं की क्षमता और उनकी आकांक्षा अंतरिक्ष जितनी असीम हैं. उन्होंने भारतीयों में आत्मविश्वास जगाया और दुनिया में भारत का मान बढ़ाया. ये संदेश देता है कि हमारे युवाओं की क्षमताएं और महत्वाकांक्षाएं अंतरिक्ष की तरह ही असीम हैं। </p>
<p><strong>संसद ने पेश हो सकते ये विधेयक</strong><br>
जानकारी के अनुसार, मानसून सत्र में सरकार कई अहम विधेयक पेश कर सकती है, जिसमें आयकर संशोधन विधेयक, 2026– ये बिल पहले जारी किए गए, जो अध्यादेश की जगह लेगा. सर्वोच्च न्यायालय संशोधन विधेयक, 2026- जजों की संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 किया जाएगा. राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन विधेयक, 2026- राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को कानूनी संरक्षण मिलेगा. जन्म और मृत्यु का पंजीकरण संशोधन विधेयक, 2026- रजिस्ट्रेशन में देरी पर जुर्माने और नियम को सख्त बनाया जाएगा. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास संशोधन विधेयक, 2026- MSME को वित्तीय राहत देने और व्यापार को आसान बनाने के लिए सुधार होंगे. विदेशी अंशदान संशोधन विधेयक, 2026- विदेशी चंदे के इस्तेमाल पर सख्त निगरानी होगी. विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025: UGC, AICTE, NCTE की जगह एक रेगुलेटर अथॉरिटी बनाई जाएगी। </p>
<p><strong>25 दिन चलेगा मॉनसून सत्र</strong><br>
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि संसद का मानसून सत्र, 2026 सोमवार, 20 जुलाई, 2026 से शुरू होगा जो सरकारी कामकाज की आवश्यकतानुसार गुरुवार, 13 अगस्त, 2026 तक चलेगा. 25 दिनों तक चले वाले  इस सत्र में कुल 19 बैठकें निर्धारित हैं. इन बैठकों में राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक, बहस चर्चा और कई अहम फैसले होंगे।</p>]]> </content:encoded>
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<title>मानसून सत्र से पहले दो विवादित बिलों पर JPC बैठक टली</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली संसद के मानसून सत्र से पहले सरकार के दो बड़े और विवादित बिलों पर बनी संयुक्त संसदीय समितियों-JPC की बैठकों में अचानक देरी देखी जा रही है। भ्रष्टाचार-रोधी बिल पर रिपोर्ट को मंजूरी देने की प्रक्रिया टलने के एक दिन बाद, सोमवार को उच्च शिक्षा से जुड़े &#039;विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल&#039; की … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 11:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मानसून, सत्र, से, पहले, दो, विवादित, बिलों, पर, JPC, बैठक, टली</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong><br>
संसद के मानसून सत्र से पहले सरकार के दो बड़े और विवादित बिलों पर बनी संयुक्त संसदीय समितियों-JPC की बैठकों में अचानक देरी देखी जा रही है।</p>
<p>भ्रष्टाचार-रोधी बिल पर रिपोर्ट को मंजूरी देने की प्रक्रिया टलने के एक दिन बाद, सोमवार को उच्च शिक्षा से जुड़े 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल' की जांच कर रही JPC की बैठक भी रद्द कर दी गई।</p>
<p>सूत्रों को मुताबिक, बीजेपी सांसद दग्गुबाती पुरंदेश्वरी की अध्यक्षता वाली JPC को सोमवार को अपनी रिपोर्ट को मंजूरी देनी थी, लेकिन बैठक टाल दी गई। अगली तारीख अभी तय नहीं है। यह पैनल देश के कई उच्च शिक्षा रेगुलेटर्स को हटाकर एक ही मुख्य संस्था बनाने के सरकार के प्रस्ताव की जांच कर रहा है।</p>
<p>इससे पहले बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली JPC ने भी अपनी बैठक टाल दी थी। यह समिति उस संविधान संशोधन बिल की जांच कर रही है जिसमें गंभीर आरोपों में 30 दिन तक गिरफ्तार रहने पर PM, CM और मंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान है। बैठक बीच में ही रोक दी गई थी, जबकि सदस्य पहले ही 5 में से 2 सिफारिशों को बहुमत के पास कर चुके थे।</p>
<p>दोनों पैनलों के सदस्यों को अंतिम बैठकों से कुछ दिन पहले ही ड्राफ्ट रिपोर्ट दे दी गई थी।<br>
इस घटनाक्रम को सरकार की उस रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें वह टकराव वाले मुद्दों से फिलहाल बचना चाहती है। सरकार अभी DMK और NCP (SP) जैसी विपक्षी पार्टियों को लोकसभा और विधानसभाओं की सीटें बढ़ाने और परिसीमन से जुड़े अपने बड़े राजनीतिक कदम के लिए मनाने में जुटी है। गैर-NDA पार्टियों ने इन दोनों बिलों का कड़ा विरोध किया है।</p>
<p>संभावना जताई जा रही है कि संसद के मौजूदा सत्र में भ्रष्टाचार-रोधी और उच्च शिक्षा रेगुलेशन से जुड़ा कोई भी बिल पेश नहीं किया जाएगा।<br>
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से ठीक दो दिन पहले, बहुत विवादित बिलों पर बनी दो JPC, जिनमें से एक के लिए संविधान संशोधन की जरूरत है और दूसरा संविधान के दायरे से बाहर जाकर काम करने का साफ मामला है, ने अपनी रिपोर्ट को मंजूरी देने का काम टाल दिया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि 17 अप्रैल को लोकसभा में मोदी सरकार को जो शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी, उसका असर साफ तौर पर अभी भी बना हुआ है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>डिलिमिटेशन बिल पर बदले डीएमके के सुर, कांग्रेस को लगा झटका</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली गठबंधन टूटते ही एमके स्टालिन की डीमएके ने कांग्रेस के साथ खेल कर दिया है। दरअसल, अटकलें हैं कि संसद के मॉनसून सत्र में केंद्र सरकार एक बार फिर से डिलिमिटेशन बिल ला सकती है। हालांकि, अभी तक ऑफिशियली लिस्ट नहीं किया गया है। बिल पास करवाने के लिए जरूरी दो-तिहाई की संख्या … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 11:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
गठबंधन टूटते ही एमके स्टालिन की डीमएके ने कांग्रेस के साथ खेल कर दिया है। दरअसल, अटकलें हैं कि संसद के मॉनसून सत्र में केंद्र सरकार एक बार फिर से डिलिमिटेशन बिल ला सकती है। हालांकि, अभी तक ऑफिशियली लिस्ट नहीं किया गया है। बिल पास करवाने के लिए जरूरी दो-तिहाई की संख्या जुटाई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, पिछली बार विरोध में रहने वाली डीएमके इस बार इसका समर्थन कर सकती है। इनसाइड स्टोरी के अनुसार, रविवार को हुई ऑल पार्टी मीटिंग पर रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सांसद प्रेमचंद्रन का कहना है कि डीएमके इस बिल के सपोर्ट के लिए राजी हो गई है, लेकिन दूसरी ओर डीएमके सांसद तिरुचि शिवा का कहना है कि सरकार ने अभी तक कोई साफ प्रस्ताव नहीं दिया है।</p>
<p>सरकार ने बजट सत्र के दौरान लोकसभा में डिलिमिटेशन बिल पेश किया था, लेकिन जब वह पास नहीं हो सका था। अब टीएमसी और शिवसेना यूबीटी में बड़ी टूट होने के बाद संख्या दो तिहाई के करीब पहुंचने लगी है। माना जा रहा है कि डीएमके भी इसका सपोर्ट कर सकती है। डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने 'CNN-न्यूज 18' से बताया, ''सरकार डिलिमिटेशन के लिए कोई साफ प्रस्ताव नहीं लाई है। दक्षिण राज्यों के हितों पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। महिला आरक्षण बिल को मौजूदा संख्या के साथ तुरंत लागू करना चाहिए। डिलिमिटेशन पर हम सरकार से ज्यादा स्पष्टता चाहते हैं।''</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, डीएमके चाहती है कि बिल में हर राज्य में 50 फीसदी सीटों की बढ़ोतरी वाला प्रावधान को जोड़ा जाए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह यह बात पिछली बार जब बिल पेश हुआ था, तब कह भी चुके हैं। सूत्रों ने कहा, ''अगर बिल में यह मेंशन होता है तो वे (डीएमके) पॉजिटिव तरीके से विचार करने के लिए तैयार हैं।''</p>
<p>हालांकि, सरकार ने मॉनसून सत्र में इसे दोबारा पेश करने के लिए लिस्ट नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि सरकार जरूरी संख्या जुटा लेगी। डीएमके के तेवर में बदलाव तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से आया है। दरअसल, कई दशकों पुराना कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन विजय की पार्टी टीवीके के सबसे ज्यादा सीटें जीतने के बाद टूट गया। कांग्रेस ने विजय को समर्थन दिया, जिसके बाद टीवीके सरकार बन सकी। इससे डीएमके काफी नाराज हो गई और उसने कांग्रेस पर धोखा देने का आरोप लगाया।</p>
<p><strong>डीएमके के सपोर्ट से कैसे पास हो सकता है बिल?</strong><br>
डीलिमिटेशन बिल संवैधानिक संशोधन की प्रक्रिया से गुजरेगा, जिसकी वजह से इसे पास करने के लिए दो तिहाई संख्या की जरूरत होगी। इस बिल के पक्ष में पिछली बार 298 सांसदों ने वोट किया था। मई में बंगाल चुनाव के नतीजे आने के बाद टीएमसी के 20 सांसद ममता बनर्जी के गुट से टूट गए और एनसीपीआई में विलय कर लिए, जिससे यह संख्या बढ़कर 318 पहुंच गई। इसके अलावा, शिवसेना यूबीटी के छह सांसद शिवसेना शिंदे गुट में चले गए। इससे संख्या बढ़कर 324 हो गई है। अब डीएमके का रुख काफी अहम माना जा रहा है। डीएमके के पास इस समय 22 सांसद हैं। दो तिहाई के लिए लगभग 360 सांसदों की जरूरत होगी। अगर डीएमके तैयार हो जाती है तो संख्या बढ़कर 346 हो जाएगी। वहीं, सूत्रों के अनुसार, शरद पवार की एनसीपी एसपी भी एनडीए में शामिल हो सकती है। एनसीपी एसपी के पास आठ सांसद हैं। इससे कुल संख्या बढ़कर 354 हो सकती है। वहीं, कुछ सांसद या छोटी पार्टियां गैर हाजिर रहकर जरूरी दो तिहाई के आंकड़े को कम कर सकती है, जिससे यह बिल पास हो सकता है। ऐसे में डीएमके का बिल को सपोर्ट करना बहुत जरूरी है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>अभिषेक बनर्जी को हाईकोर्ट से राहत, डायमंड हार्बर ऑफिस तोड़ने पर लगी रोक</title>
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<description><![CDATA[ कलकत्ता हाईकोर्ट ने रविवार को तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत दी। अदालत ने दक्षिण 24 परगना जिले के आमतला स्थित डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र की ऑफिस को तोड़े जाने की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी। रविवार को विशेष सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राजा बसु चौधरी ने राज्य सरकार को निर्देश दिया … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 21:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>अभिषेक, बनर्जी, को, हाईकोर्ट, से, राहत, डायमंड, हार्बर, ऑफिस, तोड़ने, पर, लगी, रोक</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कलकत्ता</strong><br>
हाईकोर्ट ने रविवार को तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत दी। अदालत ने दक्षिण 24 परगना जिले के आमतला स्थित डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र की ऑफिस को तोड़े जाने की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी। रविवार को विशेष सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राजा बसु चौधरी ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह आमतला स्थित भवन से जुड़े सभी दस्तावेज अदालत में पेश करे। यह भवन कथित तौर पर लीप्स एंड बाउंड्स कंपनी के स्वामित्व में है। प्रवर्तन निदेशालय ने एक अन्य मामले में दावा किया कि अभिषेक बनर्जी इस कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।</p>
<p>अदालत ने आदेश दिया कि डायमंड हार्बर रोड स्थित इस भवन को जुलाई के अंत तक यथास्थिति में रखा जाए और तब तक किसी तरह की तोड़फोड़ न की जाए। मामले की अगली सुनवाई नियमित पीठ के समक्ष होगी। भवन की मालिक कंपनी लीप्स एंड बाउंड्स ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को चुनौती दी है। दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने शनिवार को इस भवन को गिराने की कार्रवाई शुरू की थी। प्रशासन का आरोप है कि भवन बिना स्वीकृत नक्शे के बनाया गया था और निर्माण में नियमों का उल्लंघन किया गया है।</p>
<p><strong>भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप</strong><br>
अभिषेक बनर्जी ने रविवार को आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के अधीन पुलिस कानून तोड़ने वाली बन गई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने सत्तारूढ़ भाजपा के साथ मिलीभगत कर यह कार्रवाई की है। डायमंड हार्बर से सांसद बनर्जी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उनके लोकसभा क्षेत्र में अमतला स्थित उनके कार्यालय को ढहा दिया गया, जबकि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट बुलडोजर से की जाने वाली ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को असंवैधानिक ठहरा चुके हैं।</p>
<p>पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कहा, 'बंगाल में कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ती दिख रही हैं। वीडियो में पश्चिम बंगाल पुलिस के जवान भाजपा के गुंडों के साथ मिलकर लैपटॉप, प्रिंटर, दस्तावेज, मेज, कुर्सियां और अन्य सामान से भरे बक्से ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं।' उन्होंने एक्स पर लिखा कि यह ध्वस्तीकरण नहीं था, बल्कि वर्दी पहनकर की गई चोरी थी, जिसे कानून के शासन के प्रति पूरी तरह अवमानना के साथ अंजाम दिया गया। यह सब तब हुआ, जब मामला अभी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने कहा, 'जिन पर कानून की रक्षा करने की जिम्मेदारी है, वही कानून तोड़ने वाले बन गए हैं। पश्चिम बंगाल पुलिस पर शर्म आती है।'</p>]]> </content:encoded>
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<title>परिसीमन बिल पर कांग्रेस ने किया इनकार, जयराम रमेश ने खबरों को बताया झूठा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र को लेकर बुलाई गई सर्वदलीय बैठके के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने परिसीमन बिल को लेकर पार्टी का रुख स्पष्ट किया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस प्रस्तावित विधेयक का समर्थन नहीं कर रही है और मीडिया में दिखाई जा रही खबरें … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 20:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>परिसीमन, बिल, पर, कांग्रेस, ने, किया, इनकार, जयराम, रमेश, ने, खबरों, को, बताया, झूठा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र को लेकर बुलाई गई सर्वदलीय बैठके के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने परिसीमन बिल को लेकर पार्टी का रुख स्पष्ट किया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस प्रस्तावित विधेयक का समर्थन नहीं कर रही है और मीडिया में दिखाई जा रही खबरें निराधार हैं.</p>
<p>जयराम रमेश ने चैनल पर दिखाई जा रही खबरों निराधार बताते हुए उन मीडिया हाउसों को आड़े हाथों लिया जो विपक्ष के रुख को लेकर गलत दावे कर रहे हैं. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ' कुछ टीवी चैनल जान-बूझकर फैलाई गई- ये खबर दिखा रहे हैं कि कांग्रेस ने चल रही सर्वदलीय बैठक में परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) का समर्थन किया गया है. ये पूरी तरह से झूठी और मनगढ़ंत खबर है.'</p>
<p>चर्चा है कि 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में मोदी सरकार एक बार फिर महिला आरक्षण और लोकसभा और विधानसभा की सीटों को बढ़ाने वाला परिसीमन बिल को पेश कर सकती है, जिसे पास कराने के लिए दो-तिहाई की बहुमत जरूरत होगी. अप्रैल में संसद के विशेष संत्र के दौरान नंबर गेम न होने के चलते सरकार बिल पास नहीं करा सकी थी, लेकिन तीन महीने बाद सरकार परिसीमन बिल को फिर से पेश कर पास कराने की जुगत में है. सूत्रों का कहना है कि इस बार सरकार परिसीमन बिल में सभी राज्यों में 50 प्रतिशत सीटों की बढ़ोतरी कर सकती है.</p>
<p><strong>क्या है नंबर गेम</strong><br>
लोकसभा में नंबर गेम पर नजर टाले तो लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, जिनमें से फिलहाल 3 सीटें खाली हैं. इस लिहाज से संविधान में संसोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 360 सदस्यों के समर्थन की जरूरत होगी. अप्रैल के विशेष सत्र में एनडीए को 298 सांसदों का सर्मथन मिला था, जबकि बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 293 सांसदों का सर्मथन है. लेकिन अब टीएमसी के बागियों का एनसीपीआई में विलय, साथ ही कांग्रेस और डीएमके गठबंधन में दरार का फायदा सरकार उठाना चाहेगी. अगर इन सांसदों का समर्थन सरकार को मिलता है तो सदन में एनडीए की स्थिति पहले बहुत ज्यादा मजबूत हो जाएगी.</p>
<p>आंकड़ों की बात करें तो एनडीए के 293, एनसीपीईआ के 20 और डीएमके के 22 सांसदों को जोड़ें तो ये संख्या करीब 335 तक पहुंच सकती है.  </p>
<p>दूसरी ओर महाराष्ट्र में हुए राजनीतिक बदलाव के बाद शिवसेना (यूबीटी)  के छह सांसदों ने शिंदे की शिवसेना में विलय कर लिया है. साथ ही वाईएसआरसीपी और एक निर्दलीय सांसद का भी वक्त-वक्त पर एनडीए को सपोर्ट मिलता रहा है. ऐसे में ये संख्या बल 346 के करीब पहुंच जाता है. इसके अलावा महाराष्ट्र के दिग्गज नेता शरद पवार की पार्टी के 8 सांसदों के भी सरकार को सपोर्ट करने की चर्चा है. ऐसे में ये संख्या 354 पहुंच सकती हैं और इसी स्थिति में एनडीए को सिर्फ छह सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी, जिसके लिए बीजेपी ने पिछले कुछ दिनों से अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है. हालांकि, सरकार द्वारा मॉनसून सत्र में परिसीमन बिल पेश किए जाने के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है.</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>शिंदे गुट में शिवसेना UBT के 6 सांसदों के विलय को मंजूरी, कोर्ट जाएगा मामला</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली शिवसेना (UBT) के 6 बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना में विलय की मंजूरी के बाद पार्टी ने इसे असंवैधानिक बताया है। शिवसेना (UBT) नेता अंबादास दानवे ने शनिवार को कहा कि लोकसभा स्पीकर के इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। दानवे ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 15:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>शिंदे, गुट, में, शिवसेना, UBT, के, सांसदों, के, विलय, को, मंजूरी, कोर्ट, जाएगा, मामला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
शिवसेना (UBT) के 6 बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना में विलय की मंजूरी के बाद पार्टी ने इसे असंवैधानिक बताया है। शिवसेना (UBT) नेता अंबादास दानवे ने शनिवार को कहा कि लोकसभा स्पीकर के इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। दानवे ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार, एक पार्टी का दूसरी पार्टी में विलय हो सकता है, लेकिन विधायकों या सांसदों का कोई समूह अपने स्तर पर ऐसा नहीं कर सकता।</p>
<p>उन्होंने कहा कि शिवसेना (UBT) के बागी सांसद एक अलग गुट बना सकते थे। दानवे ने कहा, 'यह मंजूरी गैर-कानूनी है। हम इस फैसले को चुनौती देंगे।' पूर्व सांसद और शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के सदस्य संजय निरुपम ने कहा कि विलय से दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है।</p>
<p>उन्होंने कहा, 'सभी छह सांसदों ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत पूरी तरह से संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए (उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट से) अलग होने का फैसला किया। इसी के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ने इस विलय को मंजूरी दी है। हम इस फैसले का स्वागत करते हैं।' बता दें कि इन छह सांसदों के विलय के बाद लोकसभा में शिवसेना के सांसदों की संख्या सात से बढ़कर 13 हो गई है।</p>
<p><strong>टीएमसी के बागियों को भी मंजूरी</strong><br>
सूत्रों ने बताया कि तृणमूल के 20 बागी सांसद सदन में अपनी मूल पार्टी से अलग बैठेंगे। इन बागी सांसदों की इस मांग पर अभी कोई स्पष्टता नहीं है कि उन्हें एनसीपीआई के सांसदों के रूप में आधिकारिक मान्यता दी जाए। तृणमूल और शिवसेना (उबाठा) ने बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की थी। सूत्रों के मुताबिक, संसद के कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञों से विचार-विमर्श किया गया तथा उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को अंतिम निर्णय लेने में मदद के लिए अपने सुझाव दिए। ये निर्णय संसद के मानसून सत्र से दो दिन पहले लिए गए, जो 20 जुलाई से शुरू होगा।</p>
<p><strong>क्या है राज्यसभा का गणित</strong><br>
राज्यसभा में इस समय कुल प्रभावी सदस्यों की संख्या 242 है । इनमें से 141 सांसद एनडीए के पास हैं। मनोनीत और निर्दलीय सदस्यों की मदद से एनडीए का समर्थन 151 तक पहुंच रहा है। हाल के राजनीतिक उलटफेर के बाद लोकसभा में सत्ताधारी गठबंधन के पास 348 का आंकड़ा हो सकता है। यह दो तिहाई बहुमत से 12 सीट कम है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>मानसून सत्र से पहले NDA मजबूत, शिवसेना और TMC बागियों से बढ़ी ताकत</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले एनडीए पहले से काफी अधिक बढ़ गई है। एक तरफ जहां लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को शिवसेना (UBT) के छह बागी सांसदों को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की मान्यता दे दी है। वहीं, दूसरी ओर टीएमसी के के 20 … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 15:45:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मानसून, सत्र, से, पहले, NDA, मजबूत, शिवसेना, और, TMC, बागियों, से, बढ़ी, ताकत</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले एनडीए पहले से काफी अधिक बढ़ गई है। एक तरफ जहां लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को शिवसेना (UBT) के छह बागी सांसदों को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की मान्यता दे दी है। वहीं, दूसरी ओर टीएमसी के के 20 बागी सांसदों को भी संसद में एनडीए के साथ बैठने के लिए अलग सीटें दी गई हैं।</p>
<p>विपक्षी खेमे में चल रही आंतरिक कलह का फायदा सीधे तौर पर एनडीए को मिल रहा है, इसका नतीजा यह है कि बजट सत्र के दौरान NDA के पास 295 सांसद थे, वहीं अब सोमवार से शुरू हो रहे मानसून सत्र में एनडीए की ताकत बढ़कर 320 से ज्यादा सांसदों की हो जाएगी।</p>
<p><strong>सुदीप बंद्योपाध्याय ने की पीएम मोदी से मुलाकात</strong><br>
दरअसल, संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले टीएमसी के वरिष्ठ नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इनकी मुलाकात के बाद बागी टीएमसी गुट के सूत्रों ने दावा किया कि पीएम मोदी ने उनका एनडीए में स्वागत किया है। सुदीप बंद्योपाध्याय ने स्पष्ट किया है कि वह और काकोली घोष दस्तीदार आगामी बैठक में हिस्सा लेंगे।</p>
<p>इस सियासी बदलाव का खुलासा संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के एक पत्र से हुआ। सर्वदलीय बैठक के लिए सुदीप बंद्योपाध्याय को भेजे गए आमंत्रण पत्र में उन्हें नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के सदस्य के रूप में संबोधित किया गया है।</p>
<p>उन्होंने पत्र में आगे जानकारी दी कि इन सभी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से नए दल के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया। यह मामला फिलहाल स्पीकर के विचाराधीन है।</p>
<p><strong>TMC ने साधा निशाना</strong><br>
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर टीएमसी की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। टीएमसी नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट पर लिखा, " एक तरफ लोकसभा अध्यक्ष इन 20 गद्दारों को आधिकारिक रिकॉर्ड में अभी भी टीएमसी का सांसद मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ ही मिनटों के भीतर केंद्रीय मंत्री ने उन्हें नई पार्टी के नाम पर सर्वदलीय बैठक के लिए आमंत्रित भी कर लिया।"</p>
<p>हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ने 20 बागी TMC सांसदों के NCPI में विलय पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन उन्होंने ने बागी TMC गुट की उस मांग को मान लिया है जिसके तहत उन्हें NDA के हिस्से के तौर पर लोकसभा में अलग सीटें दी जाएं। इसका साफ तौर पर मतलब यह है कि टीएमसी के बागी सांसद मानसून सत्र के दौरान अहम मुद्दों पर सत्ताधारी गठबंधन के साथ वोट कर सकेंगे।</p>
<p><strong>कहां जाएंगे शिवसेना (UBT) के 6 बागी सांसद?</strong><br>
इधर शिवसेना (UBT) ने अपने छह बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी। उद्धव गुट का तर्क था कि किसी भी दल का विलय पार्टी के मुख्य संगठन की ओर से तय होना चाहिए, न कि केवल संसदीय दल के फैसले से।</p>
<p>हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कम से कम शिवसेना के बागियों के मामले में इस कानूनी राय को स्वीकार करने का फैसला किया है कि अगर किसी संसदीय दल के दो-तिहाई सदस्य चाहें, तो वे दूसरी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। स्पीकर के इस फैसले के तहत शिवसेना (UBT) के 6 बागी सांसदों को एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की मंजूरी मिल गई है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>संसद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में बागी TMC सांसदों पर विपक्ष का हंगामा</title>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 13:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>संसद, सत्र, से, पहले, सर्वदलीय, बैठक, में, बागी, TMC, सांसदों, पर, विपक्ष, का, हंगामा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
20 जुलाई से संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने जा रहा है. इससे पहले रविवार को दिल्ली में एक अहम सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तृणमूल कांग्रेस के बागी नेताओं की नई पार्टी NCPI को भी इस सर्वदलीय बैठक में बुलाया है. बागी टीएमसी सांसदों को मीटिंग में बुलाने पर विपक्ष ने इस बैठक से सांकेतिक रूप से वॉकआउट कर दिया था.</p>
<p>दरअसल लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अभी तक इन बागी सांसदों की नई पार्टी NCPI को आधिकारिक तौर पर मान्यता नहीं दी है. विपक्ष का कहना है कि स्पीकर ने टीएमसी के बागी सांसदों को मान्यता नहीं दी है तो उन्हें बिना मान्यता के इस सर्वदलीय बैठक में कैसे बुलाया. इसीलिए विपक्ष ने मीटिंग से वॉकआउट कर दिया था, हालांकि बाद में वो बैठक में फिर शामिल हो गया.</p>
<p>वहीं, बागी सांसदों ने मांग की थी कि उन्हें मुख्य टीएमसी सांसदों के साथ न बिठाया जाए. इस मांग को स्वीकार करते हुए उनके बैठने के लिए अलग बेंचों पर सीटों का इंतजाम किया है.</p>
<p><strong>बागी TMC सांसदों को बुलाए जाने पर विरोध</strong><br>
TMC MP महुआ मोइत्रा ने कहा, 'आज, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, DMK, JMM, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, लेफ्ट पार्टियां, शिवसेना UBT समेत पूरा विपक्ष विरोध में ऑल पार्टी मीटिंग से बाहर चला गया है. क्योंकि तथाकथित NCPI, जो एक अनरिकॉग्नाइज्ड पार्टी है, टेबल ऑफिस की दी गई लिस्ट में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की संख्या 28 दिखाई गई है. इन तथाकथित बागी 20 MPs, उनके मर्जर को स्पीकर ने मंजूरी नहीं दी है, 20 डिसक्वालिफिकेशन पिटीशन अभी भी पेंडिंग हैं.'</p>
<p>मोइत्रा ने आगे कहा कि 91वें अमेंडमेंट के बाद, एक अलग ब्लॉक के लिए कोई जगह नहीं है. तो पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर ने इन 20 बागी MPs को किस आधार पर इनविटेशन दिया और वो इस मीटिंग में कैसे शामिल हो रहे हैं? हमने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है और अपने विरोध के सिंबल के तौर पर वॉकआउट किया है.</p>
<p>JMM सांसद महुआ माझी ने बैठक से पहले पत्रकारों से कहा, 'आप देख सकते हैं कि BJP कैसे दूसरी पार्टियों के MPs को अपने साथ ला रही है. शायद अभी भी जरूरी संख्या से लगभग छह सीटें कम हैं. इसलिए, उन्हें जरूर INDIA के विपक्षी गुट पर निर्भर रहना होगा. उन्होंने महिला रिजर्वेशन बिल को- जिसे हमने 2023 में बिना किसी विवाद के एकमत से पास कर दिया था, डीलिमिटेशन प्रोसेस से जोड़ने की कोशिश की.'</p>
<p>माझी ने आगे कहा, 'हम सभी महिला रिजर्वेशन का समर्थन करते हैं, लेकिन जिस तरह से वो इसके साथ डीलिमिटेशन लाने की कोशिश कर रहे थे, उसे लेकर आशंकाएं थीं, खासकर डीलिमिटेशन कमीशन की बनावट को लेकर… झारखंड जैसे राज्य में, अगर 2011 की जनगणना के आधार पर डीलिमिटेशन किया जाता, तो ST सीटों का काफी नुकसान होता. अगर सरकार ये भरोसा दिलाती कि कोई सीट नहीं जाएगी, बशर्ते सभी विपक्षी पार्टियां सहमत हों- हमारी पार्टी अपने रुख पर फिर से सोच सकती है. लेकिन अभी तक, इस मामले पर कोई चर्चा नहीं हुई है.'</p>
<p><strong>सरकार का एजेंडा और विपक्ष की रणनीति</strong><br>
इस बार मॉनसून सत्र में सरकार का एजेंडा बिलों पर केंद्रित है. सरकार नए स्वरूप में परिसीमन बिल, महिला आरक्षण बिल को आगे बढ़ाने और प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को हटाने से जुड़े प्रस्तावित विधेयक पर चर्चा करना चाहती है. वहीं विपक्ष की सरकार को कई मोर्चों पर घेरने की रणनीति है. विपक्ष E20 विवाद, महंगाई, विदेश नीति और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को संसद में उठाएगा.</p>
<p><strong>किरेन रिजिजू की विपक्ष को नसीहत</strong><br>
मीटिंग शुरू होने से पहले किरेन रिजिजू ने मॉनसून सत्र को लेकर विपक्ष को सख्त हिदायत दी थी. उन्होंने कहा, 'संसद का मानसून सत्र कल से शुरू हो रहा है. सरकार ने आज सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई है. हम सभी राजनीतिक दलों से इस मानसून सत्र के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने में योगदान देने और सहयोग करने का आग्रह करते हैं. संसद हर किसी की है; विधायी व्यवसाय और सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले विधेयकों के संबंध में, मुझे उम्मीद है कि सत्तारूढ़ दल और सभी विपक्षी दलों के सदस्य भाग लेंगे.'</p>
<p>रिजिजू ने आगे कहा था कि संसद जितनी बेहतर चलेगी, देश को उतना ही ज्यादा लाभ होगा. मैं एक बार फिर सभी दलों के नेताओं से सदन के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने और इस प्रक्रिया में योगदान देने की अपील करता हूं. हम विपक्ष की बात सुनेंगे और हम उम्मीद करते हैं कि वो भी हमारी बात सुनेंगे.</p>]]> </content:encoded>
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<title>स्टालिन की DMK और विजय थलापति की TVK एकजुट, इस बिल के विरोध में साथ आए दोनों दल</title>
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<description><![CDATA[ चेन्नई संसद के मॉनसून सत्र से पहले तमिलनाडु में परिसीमन को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सत्ताधारी पार्टी टीवीके ने इस मुद्दे पर हाथ मिला लिया है और दोनों दलों ने बिल का कड़ा विरोध करने का ऐलान किया है। भले ही केंद्र … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 12:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चेन्नई</strong></p>
<p>संसद के मॉनसून सत्र से पहले तमिलनाडु में परिसीमन को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सत्ताधारी पार्टी टीवीके ने इस मुद्दे पर हाथ मिला लिया है और दोनों दलों ने बिल का कड़ा विरोध करने का ऐलान किया है।</p>
<p>भले ही केंद्र सरकार के 20 जुलाई से शुरू होने वाले मॉनसून सत्र के एजेंडे में फिलहाल 'परिसीमन पैकेज' शामिल नहीं है, लेकिन तमिलनाडु में इसके खिलाफ लामबंदी शुरू हो गई है। राज्य की प्रमुख पार्टी डीएमके और सत्ताधारी दल तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने साफ कर दिया है कि अगर संसद में परिसीमन लागू करने से जुड़ा कोई भी बिल लाया जाता है, तो उसका कड़ा विरोध किया जाएगा।</p>
<p><strong>केंद्र ने राज्यों के अधिकार छीने तो करेंगे विरोध: डीएमके</strong><br>
डीएमके प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि अगर केंद्र की बीजेपी सरकार राज्यों के अधिकारों का हनन करने वाला या संविधान के खिलाफ कोई नया कानून लाती है, तो पार्टी उसके खिलाफ खड़ी होगी। उन्होंने बताया कि बीजेपी की ओर से इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने के संकेत दिए गए हैं, लेकिन पार्टी किसी भी अंतिम फैसले से पहले पूरी जानकारी मिलने का इंतजार करेगी। अन्नादुरई ने कहा, "अगर पिछली बार की तरह बिल पास किया गया, तो इसमें हमारा ही नुकसान है।"</p>
<p><strong>स्टालिन ने सांसदों को दिए कड़े निर्देश</strong><br>
इससे पहले 16 जुलाई को डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने अपनी पार्टी के सांसदों के साथ एक अहम बैठक की थी। इस दौरान उन्होंने सांसदों को निर्देश दिया कि वे संसद में एक 'रचनात्मक विपक्ष' की भूमिका निभाएं और तमिलनाडु के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कदम का डटकर विरोध करें।</p>
<p>बता दें कि डीएमके लंबे समय से परिसीमन प्रस्ताव की मुखर विरोधी रही है। इसी साल 16 अप्रैल को एमके स्टालिन ने इस प्रस्तावित बिल की एक प्रतीकात्मक कॉपी को 'काला कानून' बताते हुए जला दिया था। उनका आरोप है कि इसका तमिल लोगों पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। अगले ही दिन संसद में यह बिल और संबंधित संवैधानिक संशोधन दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहे थे।</p>
<p><strong>'तमिलनाडु अपना प्रतिनिधित्व छिनने नहीं देगा'</strong><br>
तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख और राज्य के मुख्यमंत्री थलापति विजय भी इस मामले में पूरी तरह से डीएमके के सुर में सुर मिला रहे हैं। विधानसभा चुनावों से पहले ही विजय ने परिसीमन की कवायद को केंद्र सरकार का 'भेदभावपूर्ण' कदम करार दिया था। सत्ता संभालने के बाद, 10 जुलाई को करूर के दौरे पर उन्होंने अपना स्टैंड एक बार फिर साफ किया।</p>
<p>सीएम विजय ने कहा, "केंद्र सरकार की ओर से परिसीमन लागू करने की चर्चाएं सामने आ रही हैं। इसे कोई भी पेश करे, तमिलनाडु इसे दृढ़ता से खारिज करेगा। हम अपना सही प्रतिनिधित्व छिनने नहीं देंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई हमारा हक ना मार सके।"</p>
<p><strong>बीजेपी ने किया बचाव, एआईएडीएमके ने साधी चुप्पी</strong><br>
एक तरफ जहां राज्य की प्रमुख पार्टियां इसके विरोध में मुखर हैं, वहीं बीजेपी ने परिसीमन का बचाव किया है। बीजेपी प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "परिसीमन तो होना ही है, वास्तव में इसे साल 2000 में ही हो जाना चाहिए था।" दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर मुख्य विपक्षी दल एआईएडीएमके के नेताओं ने फिलहाल कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>महिला आरक्षण&#45;परिसीमन पर NDA को मिल सकता है DMK का साथ? विवादित बिल होल्ड की चर्चा के बीच समझें लोकसभा का नया गणित</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक के लिए सरकार लोकसभा में दो तिहाई बहुमत हासिल करती दिख रही है. इस कड़ी में नया नाम डीएमके का जुड़ता दिख रहा है. लोकसभा में डीएमके के 22 सांसद हैं. पिछली बार डीएमके ने इन विधेयकों का कड़ा विरोध किया था और उसके नेता तथा तमिलनाडु के … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 11:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>महिला, आरक्षण-परिसीमन, पर, NDA, को, मिल, सकता, है, DMK, का, साथ, विवादित, बिल, होल्ड, की, चर्चा, के, बीच, समझें, लोकसभा, का, नया, गणित</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक के लिए सरकार लोकसभा में दो तिहाई बहुमत हासिल करती दिख रही है. इस कड़ी में नया नाम डीएमके का जुड़ता दिख रहा है. लोकसभा में डीएमके के 22 सांसद हैं. पिछली बार डीएमके ने इन विधेयकों का कड़ा विरोध किया था और उसके नेता तथा तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सार्वजनिक रूप से विधेयकों की प्रति जलाई थी. लेकिन बीते तीन-चार महीनों में गंगा-गोदावरी में काफी पानी बह चुका है. तमिलनाडु में डीएमके सत्ता से बाहर हो गई है. पश्चिम बंगाल में टीएमसी भी सत्ता से बाहर होकर दो फाड़ हो चुकी है. उसका एक बड़ा धड़ा एनडीए के साथ आ चुका है. महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना-यूबीटी बुरी तरह टूट चुकी है. शरद पवार की एनसीपी-एसपी सरकार के साथ डील करने में लगी है. ऐसे में लोकसभा में भाजपा के लिए दो-तिहाई बहुमत हासिल करना अब लगभग तय लग रहा है. सूत्रों का दावा है कि एनडीए के रणनीतिकार विपक्ष में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को छोड़कर लगभग सभी दलों के साथ संपर्क में हैं. इन सभी गैर कांग्रेस- गैर सपा दलों को साधने के लिए सरकार ने भी कुछ मुद्दों पर नरम रुख अपनाया है। </p>
<p>दरअसल, सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल अपने सहयोगियों को साथ रखना नहीं थी, बल्कि ऐसे विपक्षी दलों को भी भरोसा दिलाना था जिन्हें परिसीमन के बाद अपने राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कमी आने का डर है. दक्षिण भारत के राज्यों की सबसे बड़ी चिंता यही रही है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद परिसीमन के बाद उनकी लोकसभा सीटों का अनुपात घट सकता है। </p>
<p><strong>डीएमके के रुख में बदलाव</strong><br>
यहीं से डीएमके के रुख में बदलाव के संकेत दिखाई देते हैं. पार्टी ने पहली बार साफ कहा है कि यदि केंद्र सरकार तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों के हितों की ठोस और लिखित गारंटी देती है तो बातचीत का रास्ता खुल सकता है. डीएमके का कहना है कि सरकार पहले यह स्पष्ट करे कि परिसीमन के बाद किस राज्य को कितनी सीटें मिलेंगी. यदि दक्षिणी राज्यों का हिस्सा कम नहीं होता है तो पार्टी अपने पुराने रुख पर पुनर्विचार कर सकती है. यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ माह पहले तक इसी डीएमके ने परिसीमन और महिला आरक्षण को एक साथ लागू करने के प्रस्ताव का सबसे मुखर विरोध किया था. अब उसके तेवर पहले जैसे नहीं दिख रहे हैं। </p>
<p><strong>सरकार ने चली बड़ी चाल</strong><br>
उधर, सरकार ने भी समानांतर तौर पर एक ऐसा कदम उठाया है जिसे छोटे दलों को साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को 30 दिन से अधिक की न्यायिक हिरासत में रहने पर पद से हटाने वाले विवादित संविधान संशोधन विधेयक को फिलहाल आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया गया है. संसद की संयुक्त समिति ने भी इस पर और व्यापक विचार-विमर्श की जरूरत बताई है.  रिपोर्ट के मुताबिक सरकार मानसून सत्र में इस विधेयक को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं है। </p>
<p>इस फैसले का राजनीतिक संदेश साफ माना जा रहा है. विपक्ष के कई क्षेत्रीय दलों को आशंका थी कि इस कानून का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों की सरकारें गिराने के लिए किया जा सकता है. जब सरकार ने फिलहाल इस विधेयक से दूरी बनाई तो उन दलों के लिए महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे दूसरे संविधान संशोधन विधेयकों पर सकारात्मक रुख अपनाने की गुंजाइश बढ़ गई। </p>
<p><strong>एनडीए का संभावित कुनबा</strong></p>
<p><strong>एनडीए (आधिकारिक) │ 293 │<br>
├─────────────────────────────────────┼──────┤<br>
│ डीएमके (संभावित समर्थन) │ +22 │<br>
├─────────────────────────────────────┼──────┤<br>
│ टीएमसी के एनडीए समर्थक सांसद │ +20 │<br>
├─────────────────────────────────────┼──────┤<br>
│ शिवसेना (उद्धव) से आए सांसद │ +6 │<br>
├─────────────────────────────────────┼──────┤<br>
│ एनसीपी (शरद पवार) (संभावित) │ +8 │<br>
├─────────────────────────────────────┼──────┤<br>
│ कुल संभावित समर्थन │ 349 │</strong><br>
└─────────────────────────────────────┴──────┘</p>
<p><strong> कांग्रेस और सपा को छोड़ सभी दलों से संपर्क</strong></p>
<p> <strong>रिपोर्ट</strong> के मुताबकि एनडीए के रणनीतिकार कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रीय दलों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं. डीएमके के अलावा राजद, झारखंड मुक्ति मोर्चा, आम आदमी पार्टी और कुछ अन्य दलों से भी बातचीत हो सकती है. हालांकि इनमें से किसी दल ने अभी सार्वजनिक रूप से समर्थन का ऐलान नहीं किया है, लेकिन सरकार को उम्मीद है कि सदन में विरोध पहले जितना मजबूत नहीं रहेगा. इन दलों से सांसद वोटिंग से दूर रहकर भी एक तरह स विधेयक का समर्थन कर सकते हैं। </p>
<p><strong>लोकसभा के मौजूदा आंकड़ें</strong></p>
<p>लोकसभा के मौजूदा आंकड़े भी सरकार के पक्ष में जाते दिखाई दे रहे हैं. एनडीए के पास अपने दम पर लगभग 293 सांसद हैं. यदि डीएमके के 22 सांसद समर्थन देते हैं तो यह संख्या 315 तक पहुंच जाएगी. टीएमसी के एनडीए समर्थक धड़ों की संख्या 20 है. शिवसेना उद्धव गुट से बगावत कर शिवसेना में छह सांसद शामिल हुए हैं. यानी और 26 सांसद सरकार के साथ हैं. अगर शरद पवार की एनसीपी-एसपी के आठ सांसद भी सरकार के साथ आते हैं तो यह आंकड़ा 34 का होगा. इस तरह एनडीए का कुल कुनबा 349 तक पहुंच जाता है. मौजूदा स्थिति में अगर लोकसभा के सभी 543 सदस्य सदन में मौजूद रहते हैं तो दो-तिहाई के लिए 363 सांसदों की जरूरत पड़ेगी. अगर कुछ सांसद वोटिंग में भाग नहीं लेते हैं तो दो-तिहाई के जरूरी संख्या बल घट जाएगा. नियम यह है कि वोटिंग में हिस्सा लेने वाले सांसदों में से दो-तिहाई अगर किसी संविधान संशोधन विधेयक के समर्थन में वोट करते हैं तो उस विधेयक को पास माना जाएगा। </p>
<p><strong>लोकसभा में छोटे दलों की स्थिति</strong></p>
<p> <strong>राजद (RJD) │ 4 │<br>
├──────────────────────────────────────┼─────┤<br>
│ माकपा (CPI-M) │ 4 │<br>
├──────────────────────────────────────┼─────┤<br>
│ इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) │ 3 │<br>
├──────────────────────────────────────┼─────┤<br>
│ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) │ 3 │<br>
├──────────────────────────────────────┼─────┤<br>
│ भाकपा (CPI) │ 2 │<br>
├──────────────────────────────────────┼─────┤<br>
│ भाकपा (माले) लिबरेशन │ 2 │<br>
├──────────────────────────────────────┼─────┤<br>
│ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) │ 2 │<br>
├──────────────────────────────────────┼─────┤<br>
│ वीसीके (VCK) │ 2 │<br>
├──────────────────────────────────────┼─────┤<br>
│ भारत आदिवासी पार्टी (BAP) │ 1 │<br>
├──────────────────────────────────────┼─────┤<br>
│ कुल सांसद │ 23 │</strong><br>
└──────────────────────────────────────┴─────┘<br>
<strong>अब इन छोटे दलों का साधने की कोशिश</strong><br>
इंडिया गठबंधन में कांग्रेस और सपा को छोड़ दें तो… राजद के पास 4, माकपा के पास 4, मुस्लिम लीग के पास 3, झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास 3, भाकपा के पास 2, भाकपा-माले के पास 2, नेशनल कांफ्रेस के पास 2, वीसीके के पास 2 और भारत आदिवासी पार्टी के पास 1 सांसद हैं. यानी ये करीब 23 लोकसभा सांसद ऐसे हैं जो वोटिंग के दौरान अहम रोल निभा सकते हैं. सरकार इनको साधने की कोशिश कर रही है. इनके वोटिंग से दूर रहने भर से भी सरकार की राह एकदम आसान हो जाएगी। </p>
<h2> </h2>]]> </content:encoded>
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<title>दतिया में विरोध पर संगठन भारी, वार्ड&#45;बूथ प्रबंधन और सामाजिक समीकरणों से बढ़त बनाने में जुटी BJP</title>
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<description><![CDATA[ दतिया   दतिया विधानसभा उपचुनाव अब भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदलता जा रहा है। दोनों दलों के लिए यह चुनाव केवल एक सीट जीतने का सवाल नहीं, बल्कि आगामी नगरीय निकाय और विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक संदेश देने का अवसर भी है। टिकट वितरण के बाद पैदा हुए … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 10:45:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दतिया </strong></p>
<p> दतिया विधानसभा उपचुनाव अब भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदलता जा रहा है। दोनों दलों के लिए यह चुनाव केवल एक सीट जीतने का सवाल नहीं, बल्कि आगामी नगरीय निकाय और विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक संदेश देने का अवसर भी है। टिकट वितरण के बाद पैदा हुए असंतोष के बावजूद भाजपा ने संगठन, बूथ प्रबंधन और सामाजिक समीकरणों पर पूरा फोकस कर शुरुआती बढ़त बनाने की कोशिश शुरू कर दी है।</p>
<p>वहीं कांग्रेस इस चुनाव को विजयपुर उपचुनाव की रणनीति के आधार पर लड़ने की तैयारी कर रही है। भाजपा ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित करने के साथ ही उठे राजनीतिक बंवडर को कंट्रोल करने के साथ ही चुनावी प्रबंधन को वार्ड और बूथ स्तर तक सक्रिय कर दिया है। पार्टी का पूरा जोर बूथ को मजबूत करने, सामाजिक संगठनों तक पहुंच बढ़ाने और प्रभावशाली जातीय नेतृत्व को चुनावी अभियान से जोड़ने पर है।</p>
<p><strong>मुख्य मुकाबला आशुतोष तिवारी और घनश्याम सिंह के बीच</strong><br>
ग्वालियर-चंबल अंचल के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी जा रही है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रस्तावित सभाओं के माध्यम से भाजपा चुनाव प्रचार को निर्णायक बढ़त देने की रणनीति पर काम कर रही है।</p>
<p>मुख्य मुकाबला भाजपा के आशुतोष तिवारी व कांग्रेस के घनश्याम सिंह के बीच है। चुनाव में दामोदार यादव व किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर संजना नंद गिरी महाराज भी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए मैदान में हैं।</p>
<p><strong>फिलहाल इनको चुनाव प्रबंधन के लिए उतारा</strong><br>
भाजपा कुशल रणनीतिकार उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, चुनाव प्रभारी सांसद भारत सिंह कुशवाह, उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष ऊषा अग्रवाल, सांसद संध्या राय, पूर्व मंत्री इमरती देवी, अपेक्स के अध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव, रणवीर रावत, पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया सहित भाजपा के कई प्रदेशस्तरीय नेता दतिया कैंप किए हुए हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<title>परिसीमन बिल पर बढ़ी सियासी हलचल, कांग्रेस को डीएमके के रुख पर भरोसा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  जब से यह चर्चा शुरू हुई है कि नरेंद्र मोदी सरकार एक बार फिर से मानसून सत्र में परिसीमन बिल लाने की कोशिश कर सकती है, विपक्षी दलों में सबसे ज्यादा कांग्रेस असहज हो रही है। कांग्रेस की असहजता यूं ही नहीं है, पिछले तीन महीने में ही देश के राजनीतिक हालात पूरी … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:30:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>परिसीमन, बिल, पर, बढ़ी, सियासी, हलचल, कांग्रेस, को, डीएमके, के, रुख, पर, भरोसा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 जब से यह चर्चा शुरू हुई है कि नरेंद्र मोदी सरकार एक बार फिर से मानसून सत्र में परिसीमन बिल लाने की कोशिश कर सकती है, विपक्षी दलों में सबसे ज्यादा कांग्रेस असहज हो रही है। कांग्रेस की असहजता यूं ही नहीं है, पिछले तीन महीने में ही देश के राजनीतिक हालात पूरी तरह से पलट चुके। ऐसे में कांग्रेस इस बात पर पूरा भरोसा जता रही है, कि भले ही डीएमके विपक्षी इंडी अलायंस से अलग हो चुका हो, परिसीमन पर वह सरकार के साथ नहीं जाएगा।</p>
<p><strong>बीजेपी-डीएमके कभी एक नहीं हो सकते-कांग्रेस</strong><br>
कांग्रेस सांसद और पार्टी प्रवक्ता जयराम रमेश ने बीजेपी और डीएमके में नजदीकी बढ़ने की अटकलों को लेकर न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा है, 'बीजेपी और डीएमके कभी एक नहीं हो सकते..ये विचारधारा अलग है। अभी देखिए क्या होता है?'</p>
<p><strong>थलपति विजय के साथ, लेकिन डीएमके से भी संपर्क में</strong><br>
दरअसल, मोदी सरकार इससे पहले लोकसभा में सीटों की संख्या में लगभग 50% की बढ़ोतरी वाला बिल अप्रैल में संसद के विशेष सत्र में लेकर आई थी। संविधान संशोधन की वजह से इसके लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी। लेकिन, तब विपक्षी एकता की वजह से लोकसभा में यह विधेयक गिर गया। इसके तुरंत बाद हुए पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों में जो नतीजे आए, उसने राजनीतिक परिस्थितियां बदल दीं और डीएमके ने इंडिया गठबंधन से किनारा कर लिया।</p>
<p>ये बात सही है कि (तमिलनाडु में) हम टीवीके को समर्थन दे रहे हैं। (थलपति सी जोसेफ विजय की सरकार में) हमारे दो कैबिनेट मंत्री हैं। पर हम भी डीएमके सांसदों के संपर्क में हैं। उनसे बातचीत हो रही है।</p>
<p><strong>डीएमके अभी भी विपक्षी दल- कांग्रेस</strong><br>
कांग्रेस का दावा है कि 'डीएमके अभी भी विपक्षी दल है। वो सत्ता दल नहीं है। एनडीए का घटक दल नहीं है। ये सही है कि उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा में अलग सीटिंग अरेंजमेंट मांगा है। ये सब चलते रहेंगे। '</p>
<p>मुझे पूरा विश्वास है कि जब वक्त आएगा, डीएमके भी खड़ा होकर कहेगा कि जो परिसीमन बिल लाया जा रहा है, वो राज्यों के हित में नहीं है..वो संघीय ढांचे को बिगाड़ता है। वो दक्षिण भारतीय राज्यों की आशंकाएं दूर नहीं करता।</p>
<p><strong>131वां संविधान संशोधन बिल आ सकता है</strong><br>
    दरअसल, अटकलें लग रही हैं कि मोदी सरकार मानसून सत्र में 131वां संविधान संशोधन बिल पास कराने की फिर से कोशिश कर सकती है।<br>
    इससे 2029 के आम चुनावों से पहले नए परिसीमन का रास्ता साफ हो जाएगा।<br>
    इस बिल के पास होने से लोकसभा में सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़कर 850 हो जाएगी।<br>
    इसके साथ ही महिलाओं के लिए भी लोकसभा में 33% सीटें आरक्षित करने का रास्ता साफ हो जाएगा।<br>
    अप्रैल,2026 में संसद के विशेष सत्र में केंद्र सरकार इसके लिए लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने में नाकाम रही थी।</p>
<p><strong>विधानसभा चुनावों के बाद बदल गई विपक्ष की राजनीति</strong></p>
<ul>
<li>इसके फौरन बाद ही पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए और देश का सियासी समीकरण बदल गया।</li>
<li>बंगाल में टीएमसी और तमिलनाडु में डीएमके सरकारों की करारी हार हुई।</li>
<li>टीएमसी के 20 और शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा सांसद गुट बनाकर अलग हो गए।</li>
<li>टीएमसी के राज्यसभा सांसदों ने भी इस्तीफा देना शुरू कर दिया।</li>
<li>आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने राज्यसभा सभापति को अलग गुट के तौर पर मान्यता देने की मांग कर दी।</li>
<li>कहा जा रहा है कि यह बीजेपी की संसदीय रणनीति का हिस्सा है।</li>
<li>इसके तहत ये सांसद एनडीए का कुनबा बढ़ाएंगे।</li>
<li>वहीं डीएमके जैसी पार्टी के बारे में कहा जा रहा है कि उससे विधेयक पर संभावित वोटिंग के दौरान अलग रहकर उसका परोक्ष समर्थन करने के लिए मनाया जा रहा है।</li>
<li>पिछले दो दिनों में एनसीपी (एसपी) और शिवसेना (यूबीटी) के भी परिसीमन बिल को लेकर सुर बदले नजर आ रहे हैं।</li>
</ul>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>राजनाथ सिंह का कांग्रेस पर हमला, बोले&#45; RSS को प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने संगठन की तुलना मां के प्रेम से करते हुए कहा कि RSS को किसी रजिस्ट्रेशन, प्रमाणपत्र या सरकारी मान्यता की जरूरत नहीं है, क्योंकि वह राष्ट्रसेवा के भाव से काम करने वाला एक … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:30:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>राजनाथ, सिंह, का, कांग्रेस, पर, हमला, बोले-, RSS, को, प्रमाणपत्र, की, जरूरत, नहीं</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने संगठन की तुलना मां के प्रेम से करते हुए कहा कि RSS को किसी रजिस्ट्रेशन, प्रमाणपत्र या सरकारी मान्यता की जरूरत नहीं है, क्योंकि वह राष्ट्रसेवा के भाव से काम करने वाला एक सभ्यतागत संगठन है.</p>
<p>दरअसल, दिल्ली में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि संघ ने हमेशा 'राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम' की भावना से काम किया है. इसी का परिणाम है कि आज RSS दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन बन चुका है.</p>
<p>उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, 'हाल ही में कांग्रेस के एक बड़े नेता पूछ रहे थे कि RSS रजिस्टर्ड क्यों नहीं है. ऐसी बातों का जवाब नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि संविधान हर व्यक्ति को संगठन बनाने का अधिकार देता है."</p>
<p>राजनाथ सिंह ने अपनी बात को उदाहरणों के जरिए समझाते हुए कहा, 'मां के प्रेम का कोई लाइसेंस नहीं होता. गुरु के संस्कार किसी सरकारी मुहर के मोहताज नहीं होते. मां गंगा को बहने के लिए लाइसेंस नहीं चाहिए और सूर्य को प्रकाश देने के लिए रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होती.'</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि इसी तरह RSS एक Civilisational Force है, जिसे किसी सर्टिफिकेशन या वैलिडेशन की जरूरत नहीं है. संघ 'सेवा धर्मः परमः श्रेयः' की भावना के साथ लगातार राष्ट्रसेवा में लगा हुआ है और आगे भी इसी भावना से कार्य करता रहेगा.</p>
<p><strong>कांग्रेस ने संगठन के रजिस्ट्रेशन को लेकर उठाए थे सवाल</strong><br>
बता दें कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष में है. इसको लेकर हाल ही में कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने RSS प्रमुख मोहन भागवत को संबोधित पत्र में कई सवाल उठाए थे. इस पत्र को प्रियांक ने एक्स पर भी पोस्ट करते हुए पूछा था कि भारत का सबसे बड़ा सोशियो-कल्चरल संगठन बिना रजिस्ट्रेशन के क्यों काम कर रहा है.</p>
<p>उन्होंने संगठन की फंडिंग, उसके टैक्स कम्प्लायंस और ऑडिट की जरूरत का मुद्दा भी उठाया था. इस पत्र में प्रियंक खड़गे ने कहा था कि इतने बड़े स्तर पर काम करने वाले संगठन को अपने कानूनी दर्जे, पंजीकरण, पदाधिकारियों, फंडिंग, खर्च, कर भुगतान और सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमति जैसी जानकारियां सार्वजनिक करनी चाहिए. उन्होंने सवाल किया कि जब आम नागरिकों, गैर-सरकारी संगठनों (NGO), ट्रस्टों, मंदिरों, श्रमिक संगठनों और कंपनियों को कानून के तहत पंजीकरण और नियमों का पालन करना पड़ता है, तो RSS इससे अलग क्यों रहे?</p>]]> </content:encoded>
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<title>संजय राउत का दावा, फडणवीस जा सकते हैं दिल्ली महाराष्ट्र में बदलाव संभव</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत के दावे ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है. संजय राउत ने शुक्रवार को दावा किया कि अगर आने वाले एक-दो महीनों में केंद्र सरकार में मंत्रिमंडल का विस्तार या फेरबदल होता है, तो महाराष्ट्र की राजनीति में भी बड़े बदलाव देखने … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 22:30:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत के दावे ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है. संजय राउत ने शुक्रवार को दावा किया कि अगर आने वाले एक-दो महीनों में केंद्र सरकार में मंत्रिमंडल का विस्तार या फेरबदल होता है, तो महाराष्ट्र की राजनीति में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को केंद्र में जिम्मेदारी दी जा सकती है और राज्य में बीजेपी का कोई वरिष्ठ मंत्री मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है.</p>
<p><strong>नागपुर में मीडिया बातचीत में दिया बयान</strong><br>
नागपुर दौरे पर पहुंचे संजय राउत ने पत्रकारों से बातचीत में यह बयान दिया. वह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के 'राम रक्षा आंदोलन' की तैयारियों का जायजा लेने के लिए नागपुर पहुंचे थे. उनसे जब केंद्र और महाराष्ट्र में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यदि केंद्र में बदलाव होता है तो उसका असर महाराष्ट्र की सत्ता पर भी दिखाई देगा.</p>
<p>राउत ने कहा, 'अगर केंद्र में मंत्रिमंडल का फेरबदल होता है तो देवेंद्र फडणवीस देश की सेवा के लिए दिल्ली जा सकते हैं और महाराष्ट्र में बीजेपी का कोई वरिष्ठ मंत्री मुख्यमंत्री बन सकता है." हालांकि उन्होंने इस संबंध में कोई ठोस आधार या नाम नहीं बताया.</p>
<p><strong>18 जुलाई से शुरू हो रहा है 'राम रक्षा आंदोलन'</strong><br>
इस दौरान संजय राउत ने 18 जुलाई को नागपुर में आयोजित होने वाले 'राम रक्षा आंदोलन' की भी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और धन के दुरुपयोग के आरोपों के विरोध में आयोजित किया जा रहा है.</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस आंदोलन में सभी हिंदुत्ववादी संगठनों को आमंत्रित किया गया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को भी निमंत्रण भेजा गया है. राउत ने कहा, "हमने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से अनुरोध किया है कि यदि वे स्वयं नहीं आ सकें तो अपना कोई प्रतिनिधि भेजें. इसके अलावा बीजेपी सहित अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं और स्थानीय विधायकों को भी आमंत्रित किया गया है."</p>
<p>राउत के मुताबिक विदर्भ क्षेत्र के सभी 11 जिलों से बड़ी संख्या में राम भक्त और शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ता इस आंदोलन में शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राम भक्तों की आस्था और पारदर्शिता की मांग से जुड़ा आंदोलन है.</p>
<p><strong>खड़गे ने की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग</strong><br>
संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्र पर भी संजय राउत ने प्रतिक्रिया दी. खड़गे ने परिसीमन (डिलिमिटेशन) के मुद्दे पर संसद सत्र शुरू होने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है.</p>
<p>राउत ने कहा, "खड़गे जो कह रहे हैं, हम उससे सहमत हैं." उन्होंने संकेत दिया कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक राजनीतिक सहमति बननी चाहिए.</p>
<p>गौरतलब है कि केंद्र सरकार संसद के 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश कर सकती है. इस प्रस्ताव में लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और नए सिरे से परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने का प्रावधान बताया जा रहा है.</p>
<p>सोनम वांगचुक के समर्थन में जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन और भूख हड़ताल पर भी संजय राउत ने केंद्र सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि वहां केवल सोनम वांगचुक ही नहीं, बल्कि एक 20 वर्षीय युवती भी अनशन पर बैठी है, लेकिन उनकी बिगड़ती तबीयत की खबर प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और राष्ट्रपति तक नहीं पहुंच रही है.</p>
<p>राउत ने आरोप लगाया कि "सत्ता में बैठे लोगों ने संवेदनशीलता खो दी है. क्या मोदी मंत्रिमंडल में किसी में इतनी हिम्मत है कि वह सोनम वांगचुक के समर्थन में खड़ा हो सके?" उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक विरोध और लोगों की आवाज को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.</p>]]> </content:encoded>
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<title>दीघा जगन्नाथ धाम विवाद फिर गरमाया, पुरी दैतापति ने ममता पर साधा निशाना</title>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 16:30:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>दीघा, जगन्नाथ, धाम, विवाद, फिर, गरमाया, पुरी, दैतापति, ने, ममता, पर, साधा, निशाना</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
पश्चिम बंगाल के 'दीघा' में जगन्नाथ स्वामी की पत्थऱ की मूर्ति और 'धाम' कहे जाने को लेकर विवाद शुरू से ही चला आ रहा है। वहीं रथ यात्रा के बीच पुरी जगन्नाथ मंत्री के प्रमुख पाणिग्रही, जगन्नाथ दैतापति ने कहा कि ममता बनर्जी को इतना घमंड था कि उन्होंने उनकी सलाह नहीं मानी। एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान दैतापति ने कहा कि उनका किसी भी पार्टी से लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, मैं वही सलहा दे रहा था जो कि शास्त्रगत है। मुझे 'दीघा धाम' शब्द पर आपत्ति थी। मंदिर कहीं भी बनाया जा सकता है लेकिन उसे धाम नहीं कहा जा सकता।</p>
<p>दैतापति ने कहा, ममता बनर्जी ने मेरी सलाह नहीं मानी। उन्होंने दीघा के साथ धामलिखा और पत्थर की मूर्ति की स्थापना कर दी। जबकि केवल पुरी को ही जगन्नाथ धाम कहा जा सकता है। देश में जगन्नाथ स्वामी के हजारों मंदिर होंगे लेकिन उन्हें धाम नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा, भगवान किसी के घमंड को बर्दाश्त नहीं करते। इसीलिए बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार उखाड़ फेंकी गई।</p>
<p><strong>दैतापति ने की शुभेंदु अधिकारी की तारीफ</strong><br>
बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तारीफ करते हुए दैतापति ने कहा कि सरकार बनने के बाद ही उन्होंने दीघा से धाम शब्द हटाया। शुभेंदु हमारे शिष्य हैं और उन्होंने वही किया जो सही था। बता दें कि कई धर्मगुरु कह चुके हैं कि दीघा के साथ धाम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके अलावा जगन्नाथ स्वामी की मूर्ति लकड़ी की ही बनाई जानी चाहिए। इसे पत्थर का नहीं बनाया जाना चाहिए।</p>
<p>इससे पहले पुरी के मुख्य पुजारी राजेश दैतापति ने कहा दीघा मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के दौरान इसकी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि पुरी मंदिर द्वारा कहा गया था कि धर्म शास्त्र के अनुसार ही किसी पवित्र मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होनी चाहिए। लेकिन ममता बनर्जी की सरकार ने उनकी एक भी नहीं मानी। इसके अलावा दैतापति भवानी दास ने कहा था, मंदिर बनाना पुण्य का काम है। लेकिन धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। कोई भी मंदिर बनाने के लिए स्वतंत्र है। लेकिन धाम सिर्फ चार हैं और पांचवां नहीं हो सकता। उन्होंने कहा था कि दीघा एक सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र हो सकता है।</p>
<p>दैतापति भवानी दास ने कहा था कि ममता बनर्जी ने महाप्रभु की पत्थऱ की मूर्ति बना दी जो कि धर्म विरुद्ध है। भगवान जगन्नाथ की मूर्ति लकड़ी की ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा था, ओडिशा में भी इसी तरह का अधर्म हुआ था और अब पश्चिम बंगाल में हुआ है। उसका परिणाम आप लोगों के सामने है। भगवान को लेकर कभी राजनीति नहीं करनी चाहिए।</p>
<p><strong>मई 2025 में हुई थी दीघा में स्थापना</strong><br>
दीघा में मई 2025 में भगवान जगन्नाथ की स्थापना की गई थी। पुरी मंदिर के तर्ज पर ही यहां मंदिर बनवाया गया था। कहा जा रहा था कि हिंदुओं का वोट बटोरने के लिए यह मंदिर बनाया गया है। इसको लेकर विवाद तभी से शुरू हो गया था।</p>]]> </content:encoded>
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<title>महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर मोदी सरकार का मिशन&#45;360, बदला संसद का गणित</title>
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<description><![CDATA[ नई  दिल्ली  संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है. मोदी सरकार एक बार फिर से महिला के लिए 33 फीसदी आरक्षण वाला बिल और लोकसभा में सीट बढ़ाने वाले परिसीमन बिल को दोबारा से संसद सत्र में लाने की तैयार में है. अप्रैल में संसद के विशेष सत्र के दौरान मोदी … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 15:15:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>महिला, आरक्षण, और, परिसीमन, बिल, पर, मोदी, सरकार, का, मिशन-360, बदला, संसद, का, गणित</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई  दिल्ली</strong><br>
 संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है. मोदी सरकार एक बार फिर से महिला के लिए 33 फीसदी आरक्षण वाला बिल और लोकसभा में सीट बढ़ाने वाले परिसीमन बिल को दोबारा से संसद सत्र में लाने की तैयार में है. अप्रैल में संसद के विशेष सत्र के दौरान मोदी सरकार इस बिल को लेकर आई थी, लेकिन दो-तिहाई बहुमत न जुटा पाने के चलते पास नहीं करा सकी थी. ये मोदी सरकार के लिए बड़ा सियासी झटका था.</p>
<p>नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार रहा जब एनडीए सरकार किसी बिल को सांसद से पास नहीं करा सकी थी. अब तीन महीने के बाद एक बार फिर से सरकार महिल आरक्षण और परिसीमन बिल को मॉनसून सत्र में पास कराने की प्लानिंग में है. ऐसे में अप्रैल से जुलाई आते-आते सिर्फ मौसम का मिजाज ही नहीं बदला बल्कि संसद का सियासी गणित भी बदल गया है.</p>
<p>अप्रैल में संसद के विशेष सत्र के दौरान बिल पर वोटिंग हुई थी तो सरकार दो-तिहाई बहुमत न होने से बिल गिर गया था. सियासत में तीन महीने का समय बड़े-बड़े समीकरणों को उलटने-पलटने के लिए काफी होता है. मॉनसून सत्र आते-आते ऐसी पतझड़ हुई कि विपक्ष के कई सांसद टूट सरकार के खेमे में खड़े हैं. इस तरह परिसीमन बिल को दोबारा पास कराने की जमीन तैयार की है, जो रणनीतिक रूप से काफी दिलचस्प है.</p>
<p><strong>तीन महीने में कैसे बदल गया पूरा गेम</strong><br>
मोदी सरकार संसद के विशेष सत्र के दौरान यानी अप्रैल में जब परिसीमन बिल को पास कराने की कवायद की तो सफल नहीं रही. सदन में मौजूद 528 सदस्यों में से 298 ने बिल के पक्ष में और 230 ने खिलाफ वोट डाले थे. संविधान संसोधन बिल के लिए मौजदू सांसद सदस्यों के दो-तिहाई सदस्य चाहिए होते हैं. लोकसभा में फिलहाल 540 सदस्य हैं, जिसके आधार पर दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सदस्यों का समर्थन बनता है.</p>
<p>अप्रैल में बिल गिरने की सबसे बड़ी वजह यह थी कि सरकार के पास लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई (2/3) बहुमत नहीं था. सरकार ने इसे साधने के लिए विपक्ष को अपने खेमे के साथ लाने की कोशिश की थी, लेकिन विपक्षी एकजुटता के चलते सफल नहीं हो सकी थी. उसके बाद से ही सरकार ने दो-तिहाई बहुमत जुटाने के लिए अपना सियासी तानाबाना बुनना शुरू कर दिया था.</p>
<p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद सियासत ही बदल गई.  ममता बनर्जी की टीएमसी, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में बगावत के बाद शरद पवार का मन बदल गया है. इसके बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी का तेवर भी ढीले पड़ गए हैं.  डीएमके और कांग्रेस की दोस्ती भी टूट गई है. ऐसे में सरकार के हौसले बुलंद हैं और महिला आरक्षण व परिसीमन बिल को मॉनसून सत्र में पास कराने के लिए अपने नंबर को पक्का कर रही है.</p>
<p><strong>मॉनसून सत्र आते-आते सियासी पतझड़</strong><br>
अप्रैल से जुलाई के बीच NDA सरकार ने लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत (360सीटें) का जादुई आंकड़ा हासिल करने के लिए विपक्ष के बड़े किलों में सेंध लगाई है. विपक्षी खेमे में सबसे बड़ा झटका पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी को लगा है. टीएमसी के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने ममता बनर्जी से अलग होकर एनडीए के समर्थन में खड़े दिखाई दे रहे हैं. इतना ही नहीं टीएमसी के 13 राज्यसभा सांसदों में से 4 सांसद इस्तीफा दे दिए हैं, जिसमें तीन सांसद बीजेपी से चुन लिए गए हैं.</p>
<p>महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे गुट को भी नुकसान उठाना पड़ा है, जहां उनके 9 में से 6 लोकसभा सांसदों ने शिंदे की पार्टी में शामिल हो गए हैं. इस तरह विपक्ष के दो बड़े सहयोगी दलों में टूट पड़ी. इसके अलावा शरद पवार की पार्टी के 8 लोकसभा सांसद हैं. शरद पवार ने भी परिसीमन बिल पर मोदी सरकार को समर्थन करने के संकेत दिए हैं. शरद पवार के बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी के तेवर ढीले पड़ गए हैं. संजय राउत ने कुछ शर्तों के साथ सरकार को समर्थन करने के संकेत दिए हैं.</p>
<p>डीएमके अब तमिलनाडु की सत्ता से बाहर है और कांग्रेस के साथ उसके रिश्ते खराब हो गए हैं. डीएमके 22 लोकसभा सांसद हैं, जो लोकसभा स्पीकर से सदन में कांग्रेस से अलग बैठने के लिए कहा है. इस तरह डीएमके पर भी सरकार की नजर है और उसके समर्थन हासिल करने के लिए बैकडोर से साझने में जुटी है.</p>
<p><strong>दो-तिहाई बहुमत के कितने करीब सरकार</strong><br>
लोकसभा में कुल 543 सीटें है, जिसमें से फिलहाल 3 सीटें खाली है. इस लिहाज से संविधान संसोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत 360 सदस्यों के जरूरत होती है. अप्रैल में एनडीए को 298 सांसदों का समर्थन मिला था. बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए के पास 293 सांसदों का सैमर्थन है. तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए एनसीपीआई के 20 सांसदों के साथ-साथ डीएमके के 22 सांसदों का भी समर्थन सरकार को मिलता है, तो संसद में सरकार की स्थिति और मजबूत हो सकती है.</p>
<p>मौजूदा आंकड़ों को देखें तो एनडीए के पास फिलहाल लगभग 293 सांसद हैं. इसमें टीएमसी से एनसीपीआई में गए 20 और डीएमके के 22 सांसद जुड़ते हैं, तो यह संख्या करीब 335 तक पहुंच जाएगी. इसके अलावा सरकार को समय-समय पर वाईएसआरसीपी के 4 सांसदों और एक निर्दलीय सांसद का भी समर्थन मिलता रहा है. ऐसे में यह संख्या लगभग 340 तक पहुंच सकती है.</p>
<p>हाल ही में महाराष्ट्र की राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है. उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के साथ आने के बाद यदि इन्हें भी एनडीए के समर्थन में जोड़ा जाए तो गठबंधन की ताकत करीब 346 सांसदों तक पहुंच सकती है.  शरद पवार की पार्टी के 8 सांसद भी सरकार का समर्थन करते हैं, तो एनडीए का आंकड़ा बढ़कर 354 सांसदों तक पहुंच सकता है. ऐसे में उसे दो-तिहाई बहुमत हासिल  के लिए केवल छह और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी. ऐसे में उद्धव ठाकरे के तीन सांसदों का समर्थन मिल जाता है तो फिर ये नंबर 357 पहुंच जाएगा और उसे सिर्फ तीन सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी.</p>
<p><strong>मोदी सरकार की एक्सरसाइज तेज</strong><br>
मोदी सरकार अपने मिशन-360 से अभी तीन  कदम दूर है यानि दो-तिहाई बहुमत के लिए 3 अतरिक्त सांसदों के समर्थन जुटाना होगा. इस राजनीतिक गणित के बीच पिछले कुछ दिनों में बीजेपी नेतृत्व की गतिविधियां तेज रही हैं. गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की. इसके अलावा उन्होंने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिंदे गुट में शामिल हुए छह सांसदों से भी अलग-अलग बैठकें की हैं. इसके अलावा कुछ अन्य दलों से भी संपर्क साधा जा रहा है, लेकिन दूसरी तरफ विपक्ष भी एक्टिव है.</p>]]> </content:encoded>
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<title>प्रोजेक्ट मेघालय केस में बड़ा एक्शन, विजय की TVK सरकार गिराने की साजिश जांच तेज</title>
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<description><![CDATA[ चेन्नई  तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) की सरकार को अस्थिर करने की कथित साजिश प्रोजेक्ट मेघालय को लेकर चेन्नई पुलिस ने जांच तेज कर दी है। इस मामले में अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोप है कि TVK के 15 विधायकों को … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 13:15:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>प्रोजेक्ट, मेघालय, केस, में, बड़ा, एक्शन, विजय, की, TVK, सरकार, गिराने, की, साजिश, जांच, तेज</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चेन्नई</strong><br>
 तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) की सरकार को अस्थिर करने की कथित साजिश प्रोजेक्ट मेघालय को लेकर चेन्नई पुलिस ने जांच तेज कर दी है। इस मामले में अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।<br>
आरोप है कि TVK के 15 विधायकों को 35-35 करोड़ रुपये ऑफर किए गए थे।</p>
<p><strong>विधायक ने दर्ज कराई शिकायत</strong><br>
यह शिकायत उथंगराई से TVK विधायक एन. एलैयाराजा ने दर्ज कराई थी। विधायक का आरोप है कि यूट्यूबर थिरुनावुक्कारासु, जो ओपिनियन पोलिंग ग्रुप IDPS चलाते हैं, और अन्य लोगों ने विधानसभा में पार्टी व्हिप के खिलाफ वोट करने के लिए उन्हें 35 करोड़ रुपये की पेशकश की।</p>
<p>विधायक एलैयाराजा ने कहा कि ऑफर ठुकराने के बाद उन्हें और उनके परिवार को धमकियां भी मिलीं। पुलिस जांच में सामने आया कि प्रोजेक्ट मेघायल नाम की एक योजना के तहत करीब 15 TVK विधायकों से संपर्क कर उन्हें पैसे का लालच देकर पार्टी छोड़ने के लिए मनाने की कोशिश की गई थी।</p>
<p>पुलिस ने इस मामले की जांच के सिलसिले में इस हफ्ते क्षेत्रीय न्यूज चैनल पुथिया थलाइमुराई के सीनियर पत्रकार विजयन से पूछताछ की। पुलिस का कहना है कि सबूतों से पता चला है कि विजयन का मुख्य आरोपी थिरुनावुक्कारासु से संपर्क था और उन्होंने उसे मैजेज भी भेजे थे।</p>
<p>15 और 16 जुलाई को पूछताछ के बाद पुलिस ने फोरेंसिक जांच के लिए विजयन का मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया।</p>
<p>चेन्नई प्रेस क्लब ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। क्लब ने कहा कि विजयन से देर रात तक पूछताछ की गई, बिना उचित प्रक्रिया के फोन जब्त किया गया और अगले दिन फिर बुलाया गया। इसे प्रेस की आजादी पर हमला बताया। वहीं पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हो रही है।</p>
<p>वहीं इस मामले में DMK के पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है। DMK ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि TVK राजनीतिक फायदा लेने के लिए झूठे आरोप लगा रही है। DMK ने कहा कि वह कानूनी तरीके से इसका जवाब देगी।</p>
<p>पुलिस ने रिश्वत की कथित कोशिश के मामले में अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में प्रोजेक्ट मेघालय नाम की साजिश का जिक्र आया है, जिसका मकसद विजय की नेतृत्व वाली TVK सरकार को गिराना बताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क और फंडिंग के स्त्रोतों की जांच कर रही है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>दो तिहाई बहुमत से सिर्फ 6 सांसद दूर NDA, क्या मॉनसून सत्र में आगे बढ़ेगा परिसीमन का एजेंडा?</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली मॉनसून सत्र से पहले बड़ा देश की राजनीति में पावर गेम खेला जा रहा है. शरद पवार की पार्टी ने लोकसभा में परिसीमन बिल का समर्थन करने के संकेत दिए हैं. अगर ऐसा हुआ तो फिर शरद पवार के 8 सांसदों से मोदी सरकार के लोकसभा में दो तिहाई बहुमत के मिशन को … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 11:15:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>दो, तिहाई, बहुमत, से, सिर्फ, सांसद, दूर, NDA, क्या, मॉनसून, सत्र, में, आगे, बढ़ेगा, परिसीमन, का, एजेंडा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>मॉनसून सत्र से पहले बड़ा देश की राजनीति में पावर गेम खेला जा रहा है. शरद पवार की पार्टी ने लोकसभा में परिसीमन बिल का समर्थन करने के संकेत दिए हैं. अगर ऐसा हुआ तो फिर शरद पवार के 8 सांसदों से मोदी सरकार के लोकसभा में दो तिहाई बहुमत के मिशन को मजबूती मिलेगी। </p>
<p>इंडिया गठबंधन की जिस एकता के दम पर राहुल गांधी ने अप्रैल में मोदी सरकार को संसद में हराने का दावा किया था क्या वो एकता मॉनसून सत्र शुरु होने से पहले तार-तार होने लगी है। </p>
<p>TMC में टूट के बाद सबसे बड़ा सवाल ये था कि क्या शरद पवार और एमके स्टालिन की पार्टी का स्टैंड बदलेगा? 20 जुलाई को शुरू हो रहे मॉनसून सत्र से पहले शरद पवार को लेकर पहली बार पुख्ता संकेत मिला है कि शरद पवार की बेटी और पार्टी सांसद सुप्रिया सुले इशारा करती दिखीं कि परिसीमन बिल को NCP शरद गुट समर्थन कर सकता है।</p>
<p>अप्रैल में ये बिल संसद में गिर गया था क्योंकि मोदी सरकार दो तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई थी. लेकिन इस बिल पर शरद पवार की NCP सुर बदलती है तो सरकार के 2 तिहाई बहुमत के मिशन को नई ताकत मिल जाएगी। </p>
<p>सुप्रिया सुले ने कहा कि NCP SP परिसीमन पर नया बिल के पेश होने के बाद उस पर फैसला करेगी, अगर सभी राज्यों में 50% सीटें बढ़ाई जातीं तो परिसीमन बिल पर सभी पार्टियों की सहमति बन सकती थी। </p>
<p><strong>मॉनसून सत्र से पहले बदला राजनीतिक माहौल</strong><br>
20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले राजनीतिक दलों के बीच बैठकों और रणनीति का दौर तेज हो गया है. इसी दौरान एनसीपी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले के बयान ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है. उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी परिसीमन विधेयक पर अंतिम फैसला नए बिल का मसौदा सामने आने के बाद करेगी. सुप्रिया सुले ने कहा कि यदि सभी राज्यों में समान रूप से लगभग 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाई जाती हैं, तो इस प्रस्ताव पर व्यापक सहमति बनने की संभावना है. उनके इस बयान को सरकार के प्रति नरम रुख के तौर पर देखा जा रहा है। </p>
<p><strong>अप्रैल में नहीं मिल पाया था दो-तिहाई समर्थन</strong><br>
परिसीमन से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) विधेयक अप्रैल 2026 में लोकसभा में पेश किया गया था. उस समय सरकार को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका और विधेयक पारित नहीं हो पाया. वोटिंग के दौरान विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे. उस समय सदन में उपस्थित सांसदों की संख्या के आधार पर सरकार को 352 सांसदों का समर्थन चाहिए था, लेकिन विपक्ष की एकजुटता के कारण यह आंकड़ा हासिल नहीं हो सका। </p>
<p><strong>सरकार पहले ही दे चुकी है 50 प्रतिशत सीट बढ़ाने का संकेत</strong><br>
अप्रैल में हुई बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष की आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की थी. उन्होंने सदन में कहा था कि यदि सभी राज्यों में समान रूप से सीटें बढ़ाने पर सहमति बनती है, तो सरकार इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेने के लिए तैयार है. अब सुप्रिया सुले की ओर से लगभग इसी प्रकार की शर्त सामने आने के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार और एनसीपी के बीच इस मुद्दे पर सहमति बनने की संभावना बढ़ गई है। </p>
<p><strong>क्या शरद पवार बदल रहे हैं अपनी राजनीतिक रणनीति?</strong><br>
हाल के दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में हुई कई मुलाकातों ने भी चर्चाओं को हवा दी है. एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल की पहले शरद पवार और फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है. इसी दौरान दिल्ली में अमित शाह और एकनाथ शिंदे की बैठक भी हुई, जिसमें शिवसेना से जुड़े कई सांसद मौजूद रहे. इन घटनाओं के बाद एनसीपी के बदलते रुख को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। </p>
<p><strong>अब नजर DMK के रुख पर</strong><br>
राजनीतिक समीकरणों में अब सबसे अधिक चर्चा तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके को लेकर हो रही है. लोकसभा में डीएमके के 22 सांसद हैं और यदि वह भी सरकार का समर्थन करती है तो परिसीमन विधेयक पारित कराने का रास्ता काफी आसान हो सकता है. जानकारी के मुताबिक सरकार अप्रैल के बाद से ही डीएमके के साथ संवाद बढ़ाने में लगी हुई है ताकि इस महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन पर व्यापक समर्थन जुटाया जा सके। </p>
<p><strong>कांग्रेस की बढ़ी चिंता</strong><br>
एनसीपी के संभावित समर्थन की चर्चाओं के बीच कांग्रेस के भीतर भी बेचैनी दिखाई दे रही है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने विपक्षी एकता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया है. राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि शरद पवार सरकार के साथ किसी मुद्दे पर खड़े होते हैं, तो इसका असर पूरे INDIA गठबंधन की रणनीति पर पड़ सकता है. विश्लेषकों का मानना है कि शरद पवार फिलहाल किसी गठबंधन परिवर्तन की बजाय अपनी पार्टी को राजनीतिक रूप से सुरक्षित रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। </p>
<p><strong>दो-तिहाई बहुमत का गणित कैसे बदलेगा?</strong><br>
लोकसभा में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने की है. पिछली बार मिले 298 समर्थन के आधार पर यदि सरकार फिर वही संख्या हासिल करती है और इसके साथ तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों, शिवसेना के नए सहयोगी सांसदों तथा एनसीपी (शरद गुट) का संभावित समर्थन जोड़ती है, तो सरकार बहुमत के लक्ष्य के काफी करीब पहुंच सकती है. यदि आगे चलकर डीएमके भी समर्थन देती है, तो आवश्यक संख्या और भी आसानी से पूरी हो सकती है. ऐसे में कुछ छोटे दलों की अनुपस्थिति या तटस्थ रहने की स्थिति भी सरकार के पक्ष में जा सकती है। </p>
<p><strong>मानसून सत्र में परिसीमन बिल रहेगा सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा</strong><br>
20 जुलाई 2026 से शुरू होने वाला मानसून सत्र केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सत्ता और विपक्ष की राजनीतिक ताकत की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है. परिसीमन विधेयक को लेकर आने वाले दिनों में विभिन्न दलों का अंतिम रुख तय करेगा कि सरकार अपने दो-तिहाई बहुमत के लक्ष्य तक पहुंच पाती है या विपक्ष एक बार फिर संख्या बल के सहारे उसे रोकने में सफल रहता है. फिलहाल राजनीतिक संकेत यही बताते हैं कि संसद शुरू होने से पहले ही सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और आने वाले कुछ दिन राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने वाले साबित हो सकते हैं। </p>
<p><strong>सुप्रिया सुले के सपोर्ट से NDA का कॉन्फिडेंस हाई</strong><br>
सुप्रिया सुले की ये शर्त पहले से सरकार मानने को तैयार है. आपको याद होगा कि विपक्ष का समर्थन जुटाने के लिए अप्रैल महीने में अमित शाह ने सदन के अंदर विपक्ष की इस चिंता को घंटेभर में दूर करने का ऑफर दिया था। </p>
<p>अमित शाह ने पिछली बार की चर्चा के दौरान कहा था कि अगर 50 फीसदी सीटें बढ़ाने की बात है तो सदन को एक घंटे के लिए स्थगित करें इसे अभी कर दिया जाएगा।  </p>
<p>अप्रैल में मात खाने के बाद सरकार की तरफ से लगातार इस बिल को पास करवाने के लिए बहुमत जुटाया जा रहा है. इसीलिए परिसीमन जैसे अहम मुद्दे पर अगर INDIA गठबंधन में शामिल NCP का सत्र से पहले सरकार को समर्थन मिलता है तो ये काफी अहम बात होगी. क्योंकि शरद पवार को लेकर चर्चा यहां तक चल रही है कि वे NDA में शामिल हो सकते हैं. इसकी एक बड़ी वजह एनसीपी शरद गुट के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल का पहले शरद पवार और फिर देंवेंद्र फडणवीस से मिलना है। </p>
<p>जयंत पाटिल देंवेंद्र फडणवीस से मिलते हैं तो दिल्ली में अमित शाह और एकनाथ शिंदे की मुलाकात होती है. इस दौरान शिवसेना UBT छोड़कर आए सभी 6 सांसद भी मौजूद रहे. और अगली सुबह शरद पवार की पार्टी परिसीमन बिल पर सरकार के करीब आती दिखी। </p>
<p><strong>दलबदल से कितना बदला राजनीतिक गणित?</strong><br>
एनडीए के पास पहले से 293 सांसदों का समर्थन था। हाल के दलबदल के बाद राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। सबसे बड़ा झटका तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को लगा, जहां 20 बागी सांसदों ने दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए पार्टी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय कर लिया और एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया।</p>
<p>    वहीं, महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद बगावत कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए। इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद लोकसभा में एनडीए की ताकत बढ़कर 318 से 319 सांसदों तक पहुंच गई है। हालांकि, दो-तिहाई बहुमत के लिए जरूरी 360 के आंकड़े से गठबंधन अब भी 41 से 42 सांसद दूर है।</p>
<p>    सरकार बनाने के लिए 272 का आंकड़ा पर्याप्त है, लेकिन संविधान संशोधन जैसे बड़े विधेयकों के लिए, यदि सभी सदस्य मतदान करें, तो 362 वोट तक पहुंचना होगा। हालांकि, किसी भी संविधान संशोधन या प्रस्ताव को पारित करने के लिए 352 का जादुई आंकड़ा भी महत्वपूर्ण होता है। यह संख्या 'उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों' के आधार पर तय होती है। यही वजह है कि बीजेपी चुनावी जीत के साथ-साथ संसद में अपनी संख्या बढ़ाने की रणनीति पर भी काम कर रही है।</p>
<p><strong>हालिया राजनीतिक बदलावों की बात करें, तो स्थिति इस प्रकार है:</strong></p>
<p>    तृणमूल कांग्रेस (TMC): 20 लोकसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थामा और एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया।</p>
<p>    शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे): 6 लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए।</p>
<p><strong>विपक्षी दलों में टूट से बदल रहा राजनीतिक गणित</strong><br>
हाल के महीनों में तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के कई सांसदों ने अपने दल छोड़ दिए। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से कुछ सांसद बीजेपी या उसके सहयोगी दलों के साथ चले गए, जबकि कुछ ने एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया। इन घटनाओं ने संसद में राजनीतिक समीकरण बदलने की चर्चा तेज कर दी है।</p>
<p><strong>बीजेपी के लिए आगे की चुनौती क्या?</strong><br>
रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी की रणनीति दो मोर्चों पर आगे बढ़ने की है-एक तरफ चुनाव जीतकर सीटें बढ़ाना और दूसरी तरफ विपक्षी दलों से आने वाले सांसदों को अपने साथ जोड़ना। हालांकि दो-तिहाई बहुमत का लक्ष्य हासिल करना अभी भी आसान नहीं माना जा रहा। परिसीमन और 'एक देश, एक चुनाव' जैसे मुद्दों पर विपक्ष लगातार विरोध कर रहा है। ऐसे में आने वाले चुनाव और संसद के भीतर बदलता राजनीतिक गणित ही तय करेगा कि बीजेपी इस अहम आंकड़े तक पहुंच पाती है या नहीं।</p>
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<title>टीएमसी में बगावत तेज, रवींद्रनाथ घोष ने अभिषेक बनर्जी पर साधा निशाना</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, उत्तर बंगाल विकास विभाग के पूर्व मंत्री और बागी गुट के रवींद्रनाथ घोष ने रविवार को दावा किया कि अगर ममता बनर्जी अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को सक्रिय राजनीति से अलग करने में सफल हो जाती हैं, तो ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल अधिकांश … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:16:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>टीएमसी, में, बगावत, तेज, रवींद्रनाथ, घोष, ने, अभिषेक, बनर्जी, पर, साधा, निशाना</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, उत्तर बंगाल विकास विभाग के पूर्व मंत्री और बागी गुट के रवींद्रनाथ घोष ने रविवार को दावा किया कि अगर ममता बनर्जी अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को सक्रिय राजनीति से अलग करने में सफल हो जाती हैं, तो ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल अधिकांश असंतुष्ट नेता टीएमसी में लौट आएंगे। नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट में शामिल होने वाले घोष नवीनतम सदस्य हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी के गुट से अपने संबंध तोड़ लिए। इससे कूचबिहार में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव आया है और मुश्किलों से घिरी पार्टी में मतभेद और गहरे हो गए हैं।</p>
<p>यह घटनाक्रम तब हुआ है जब बागी गुट ने पार्टी पर कब्जा करने की कोशिशें तेज कर दी हैं और अपनी समानांतर राज्य और जिला समितियां बनाई हैं। इस कदम से ममता बनर्जी के कई पुराने वफादार, जिनमें बीरभूम के कद्दावर नेता अनुब्रत मंडल भी शामिल हैं, उनके खेमे में आ गए हैं, जो राजनीतिक बगावत से संगठन बनाने की दिशा में एक निर्णायक बदलाव है। बागी गुट द्वारा घोष को पार्टी का कूचबिहार जिला अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना है। उन्होंने अभिषेक बनर्जी और राजनीतिक परामर्श कंपनी आई-पैक की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को जो हार मिली, वह काफी हद तक इन्हीं के प्रभाव का नतीजा थी</p>
<p><strong>'अभिषेक बनर्जी को दूर करने से वापस आ जाएंगे नेता'</strong><br>
घोष ने संवाददाताओं से कहा, "पार्टी के कई नेताओं से बात करने के बाद मुझे जो समझ आया है, वह यह है कि ममता बनर्जी को अभिषेक को सक्रिय राजनीति से दूर करना होगा, कम से कम कुछ समय के लिए। मेरा मानना ​​है कि इससे नाराज नेता और कार्यकर्ता उनके पास वापस आ जाएंगे।" उन्होंने कहा, “इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अभिषेक की मनमानी… 80 से अधिक मौजूदा विधायकों और मंत्रियों के टिकट काट दिए गए तथा कई अन्य नेताओं को संगठनात्मक पदों से हटा दिया गया, इसका पार्टी पर गंभीर असर पड़ा।”</p>
<p><strong>'ममता दीदी से ताकत कहीं और सिमट गई'</strong><br>
दो दशक से ज्यादा समय तक तृणमूल के जिला अध्यक्ष रहे और ममता बनर्जी के लंबे समय से सहयोगी रहे घोष ने सवाल उठाया कि क्या पार्टी प्रमुख का पार्टी पर असरदार नियंत्रण बना हुआ है। उन्होंने दावा किया, "क्या सच में अब दीदी के हाथों में कोई ताकत बची है? ताकत कहीं और सिमट गई है और अहम जिम्मेदारियां नाकाबिल लोगों को सौंप दी गई हैं। अगर ममता बनर्जी चाहें भी तो भी वे कोई काम नहीं कर पाएंगी।"</p>
<p><strong>'अभिषेक बनर्जी में राजनीतिक अनुभव की कमी'</strong><br>
जब उनसे पूछा गया कि क्या पार्टी का बंटवारा और चुनावी हार अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व का नतीजा थी, तो घोष ने कहा, "उनमें राजनीतिक अनुभव की कमी है। वे किसी राजनीतिक आंदोलन से नहीं आए हैं। और आई-पैक क्या थी? यह युवाओं का एक समूह है जो हमें बताता है कि क्या करना है।" घोष ने कहा, "हम राजनीतिक संघर्षों और सालों की कड़ी मेहनत से आगे बढ़े हैं। 2011 या 2016 में आई-पैक नहीं थी। अचानक वह अपरिहार्य हो गयी। आखिर में, उन्होंने पार्टी को बर्बाद कर दिया और चले गए।" ममता बनर्जी से सीधे अपनी चिंताएं बताने के बजाय पाला बदलने के सवाल पर घोष ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस एक ही है और उसमें कोई गुट नहीं हैं। उन्होंने कहा, "हमें वहां रहना होगा जहां बहुमत है। उत्तर बंगाल के सभी विधायक और नेता एक जगह इकट्ठा हो गए हैं। मैंने पार्टी कार्यकर्ताओं का साथ देने के लिए यह फैसला लिया है।"</p>]]> </content:encoded>
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<title>राज्यसभा से दतिया उपचुनाव तक भाजपा का बड़ा दांव, युवा और जमीनी नेताओं को सौंपी भविष्य की कमान</title>
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<description><![CDATA[ भोपाल भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश में राज्यसभा से लेकर दतिया उपचुनाव तक पीढ़ी परिवर्तन का संदेश दिया है। राज्यसभा भेजे गए रजनीश अग्रवाल मौजूदा राजनेताओं में तीसरी पीढ़ी के हैं। दूसरे राज्यसभा सदस्य महेश केवट भी लगभग 52 वर्ष के हैं। अब दतिया उपचुनाव में 51 वर्ष के आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:16:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>राज्यसभा, से, दतिया, उपचुनाव, तक, भाजपा, का, बड़ा, दांव, युवा, और, जमीनी, नेताओं, को, सौंपी, भविष्य, की, कमान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल</strong><br>
भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश में राज्यसभा से लेकर दतिया उपचुनाव तक पीढ़ी परिवर्तन का संदेश दिया है। राज्यसभा भेजे गए रजनीश अग्रवाल मौजूदा राजनेताओं में तीसरी पीढ़ी के हैं। दूसरे राज्यसभा सदस्य महेश केवट भी लगभग 52 वर्ष के हैं। अब दतिया उपचुनाव में 51 वर्ष के आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है।</p>
<p><strong>जमीनी कार्यकर्ताओं पर जताया भरोसा</strong><br>
ये तीनों ही नए चेहरे हैं और 55 वर्ष से कम आयु के हैं। सभी की पृष्ठभूमि संघ से जुड़ी रही है। तरुण चुघ को छोड़ दें तो मध्य प्रदेश से आशुतोष तिवारी, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट जमीनी कार्यकर्ता हैं, न कोई पॉलिटिकल एप्रोच और न ही दावेदारी। काम और पार्टी के प्रति समर्पण की बदौलत उम्मीदवार बनाए गए। इससे राष्ट्रीय नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया है कि युवाओं और समर्पित कार्यकर्ताओं को महत्व मिलेगा।</p>
<p><strong>दिग्गजों के बीच नई पीढ़ी को मौका</strong><br>
मध्य प्रदेश में भाजपा ने 1990 दौरान आई पीढ़ी अब भी राजनीति में सक्रिय है। शिवराज सिंह चौहान से लेकर कैलाश विजयवर्गीय तक दिग्गज नेता इनमें शामिल हैं। इसके बाद की पीढ़ी में विष्णु दत्त शर्मा से लेकर डा. मोहन यादव जैसे चेहरे हैं। अब पार्टी ने फिर नई पीढ़ी के लोगों को आगे बढ़ाना आरंभ कर दिया है। इस बड़े कदम ने प्रदेश के कई दिग्गज और वरिष्ठ नेताओं के सामने एक लकीर भी खींच दी है।</p>
<p><strong>दतिया में विरोध के बावजूद संगठन का स्पष्ट संदेश</strong><br>
पार्टी ने यह साफ कर दिया है कि अब चुनाव जीतने की क्षमता, साफ छवि और संगठन के प्रति वफादारी ही सर्वोपरि होगी। दतिया में डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों के विरोध प्रदर्शन और कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफे के बावजूद, पार्टी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश संगठन ने स्पष्ट किया है कि पूरी पार्टी एकजुट होकर आशुतोष तिवारी को चुनाव जिताने के लिए मैदान में उतर गई है। यह 'पीढ़ी परिवर्तन' मध्य प्रदेश में आने वाले समय के लिए भाजपा की एक नई और युवा लीडरशिप की नींव रख रहा है।</p>
<p><strong>बिना गुटीय राजनीति के लगातार पार्टी का काम करते रहे रजनीश, महेश व आशुतोष</strong><br>
पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर उप चुनाव के उम्मीदवार बनाए गए आशुतोष तिवारी भाजपा के बेहद पुराने और अनुभवी कार्यकर्ता हैं। वह भाजपा के संभागीय संगठन मंत्री रह चुके हैं और मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन (कैबिनेट मंत्री दर्जा) के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। मूल रूप से ग्वालियर-चंबल अंचल के रहने वाले तिवारी एक सीधे और साफ छवि के संगठन निष्ठ नेता माने जाते हैं।</p>
<p><strong>मुलाकात, बोले- यह तय हो गया मेरा कद बड़ा नहीं, पार्टी बहुत ऊपर</strong><br>
इससे ठीक पहले, जून 2026 में हुए राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने मध्य प्रदेश के पारंपरिक दिग्गजों को दरकिनार कर दो नए चेहरों- रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को राज्य सभा चुनाव लड़ाकर उच्च सदन में भेजा। रजनीश अग्रवाल ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपना कैरियर आरंभ किया था। भाजपा के प्रदेश मंत्री और लंबे समय तक पार्टी के प्रवक्ता रहे हैं। उनकी छवि एक प्रखर वक्ता और संगठन के समर्पित रणनीतिकार की रही है, जो बिना किसी गुटीय राजनीति के लगातार पार्टी का काम करते रहे।</p>
<p>इसी तरह मध्य प्रदेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष रहे महेश केवट को राज्यसभा भेजकर भाजपा ने एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक संदेश दिया। केवट समाज से आने वाले महेश केवट बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं और बुंदेलखंड अंचल में जमीनी स्तर पर सक्रिय रहे हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<title>डिलिमिटेशन बिल पर शरद पवार का बड़ा दांव, NCP (SP) ने समर्थन का किया ऐलान</title>
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<description><![CDATA[  मुंबई महाराष्ट्र के दिग्गज नेता और एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने विपक्षी दलों का गच्चा देते हुए संसद में डिलिमिटेशन बिल का सपोर्ट करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है. सूत्रों के अनुसार, NCP (SP) संसद डिलिमिटेशन बिल का समर्थन करेगी. ये फैसला राजनीतिक गलियारों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि NCP (SP) … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:16:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>डिलिमिटेशन, बिल, पर, शरद, पवार, का, बड़ा, दांव, NCP, SP, ने, समर्थन, का, किया, ऐलान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> मुंबई</strong></p>
<p>महाराष्ट्र के दिग्गज नेता और एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने विपक्षी दलों का गच्चा देते हुए संसद में डिलिमिटेशन बिल का सपोर्ट करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है. सूत्रों के अनुसार, NCP (SP) संसद डिलिमिटेशन बिल का समर्थन करेगी. ये फैसला राजनीतिक गलियारों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि NCP (SP) विपक्षी खेमे की प्रमुख पार्टियों में शामिल है। डिलिमिटेशन बिल देश में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमा निर्धारण (Delimitation) की प्रक्रिया से संबंधित है जो जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों को नए सिरे से निर्धारित किया जाएगा। </p>
<p>NCP (SP) के इस फैसले से महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है. पार्टी के इस कदम को कुछ लोग रणनीतिक माना जा रहा है, जबकि कुछ इसे केंद्र सरकार के साथ सकारात्मक रुख के तौर पर देख रहे हैं. अभी तक NCP (SP) की ओर से इस मुद्दे पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्र इस खबर को पुष्ट करते हुए बता रहे हैं कि पार्टी परिसीमन बिल के पक्ष में वोट करने या समर्थन जताने की तैयारी में है। </p>
<p>परिसीमन बिल देश में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमा निर्धारण (Delimitation) की प्रक्रिया से संबंधित है जो जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों को नए सिरे से निर्धारित किया जाएगा. इस बिल के पास होने से संविधान के कुछ अनुच्छेदों में बदलाव किया जाएगा, ताकि सीटों का बंटवारा मौजूदा जनसंख्या के हिसाब से हो सके. अप्रैल में पेश किए विधेयक के अनुसार, लोकसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या बढ़ाकर 815 हो सकती है. इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 तक सीटें हो सकती हैं. जिसके लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़कर कुल 850 हो सकती है। </p>
<p>अभी सीटों की संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर तय है, जबकि देश की आबादी और हालात काफी बदल चुके हैं. सरकार का कहना है कि लंबे समय से सीटों का नया बंटवारा रुका हुआ था. इस विधेयक से वह रोक हटेगी और एक परिसीमन आयोग बनेगा, जो नए चुनावी क्षेत्र तय कर सकेगा. इस विधेयक के तहत नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलने वाली सीटों की संख्या बदली जाएगी. साथ ही संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं नए सिरे से तय की जाएंगी, ताकि हर क्षेत्र में जनसंख्या के अनुसार संतुलन बनाया जा सके। </p>
<p><strong>अप्रैल में गिरा था बिल</strong><br>
आपको बता दें कि इस साल अप्रैल में संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा संवैधानिक संशोधन बिल पेश किया था, तब विपक्ष ने एकजुटता दिखाते हुए बिल का जोरदार विरोध किया और संसद में बिल के खिलाफ वोट कर विधेयक को गिरा दिया था. बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, जबकि विरोध में 230 वोट पड़े थे. बिल को पेश करने के दौरान सदन में कुल 528 सांसद मौजूद थे. पारित होने के लिए 352 वोट चाहिए थे. तब सरकार 54 वोट से चूक गई थी. तब बिल के गिरने के बाद PM मोदी ने कहा था कि हमारे पास नंबर नहीं थे, इसका मतलब ये नहीं कि हम हार गए. आगे और मौके आएंगे। </p>]]> </content:encoded>
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<title>TMC के बागी सांसदों को ओम बिरला का बड़ा आश्वासन, ममता बनर्जी की बढ़ सकती है मुश्किलें</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर उठे कलह के बाद जल्द ही संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने जा रहा है। 20 जुलाई से शुरू होने वाले इस सत्र से पहले अब टीएमसी के बागी सांसदों ने एक बड़ा दावा किया है। बागी सांसदों की अगुवाई करने वालीं काकोली घोष दस्तीदार ने … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:16:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर उठे कलह के बाद जल्द ही संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने जा रहा है। 20 जुलाई से शुरू होने वाले इस सत्र से पहले अब टीएमसी के बागी सांसदों ने एक बड़ा दावा किया है। बागी सांसदों की अगुवाई करने वालीं काकोली घोष दस्तीदार ने कहा है उन्हें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से आश्वासन मिला है कि बागी सांसदों को लोकसभा में बैठने के लिए नई सीटें मिलेंगीं। साथ ही इन सांसदों को अलग दफ्तर भी मिल सकता है।</p>
<p>बता दें कि ये सभी सांसद पिछले महीने 'नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में शामिल हो चुके हैं। अब संसद का सत्र शुरू होने से ठीक पहले 19 जुलाई को होने वाली सर्वदलीय बैठक में NCPI के दो प्रतिनिधियों को शामिल होने का न्योता मिला है। इसे संसद में नए गुट को अनौपचारिक मान्यता के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।</p>
<p><strong>काकोली घोष का क्या दावा</strong><br>
बारासात क्षेत्र से काकोली घोष दस्तीदार ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा, “हमने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात की थी। उन्होंने हमें आश्वासन दिया है कि हमें संसद में एक नया कार्यालय मिलेगा और वे हमारे लिए नई सीटें आवंटित करेंगे। हमारे दो प्रतिनिधि 19 जुलाई को होने वाली सर्वदलीय बैठक में भी शामिल होंगे।”</p>
<p>इससे पहले बागी सांसदों के गुट के सुदीप बंदोपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार ने बीते सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी। सूत्रों के अनुसार उन्होंने निचले सदन में पार्टी के 20 सांसदों के बैठने की व्यवस्था पर चर्चा की। सूत्रों ने पीटीआई भाषा को बताया कि सोमवार को हुई इस बैठक में उन्होंने नए संसद भवन में पार्टी के लिए कार्यालय आवंटित करने पर भी बातचीत की।</p>
<p><strong>ममता खेमे ने भी दायर की है याचिका</strong><br>
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के साथ यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए 20 सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की हैं। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने इससे पहले ओम बिरला से मुलाकात कर संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत बागी 20 सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग करते हुए 20 अलग-अलग याचिकाएं सौंपी थीं। बनर्जी ने अपनी याचिका में कहा था कि दूसरे दल में शामिल होकर इन सांसदों ने स्वेच्छा से तृणमूल कांग्रेस की सदस्यता छोड़ दी है, इसलिए उन्हें अयोग्य ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से यह भी आग्रह किया था कि पार्टी के अलग गुट होने का दावा करने वाले किसी भी समूह को कोई मान्यता, दर्जा या सुविधा नहीं दी जाए।</p>
<p><strong>कब तक फैसला?</strong><br>
इस बीच रिपोर्ट्स के मुताबिक संसद के मानसून सत्र से पहले ही NCPI के विलय को औपचारिक मान्यता मिल सकती है। लोकसभा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "स्पीकर जल्द ही तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) के बागी सांसदों से जुड़े मामलों पर फैसला लेंगे। फैसला होने के बाद इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।" गौरतलब है कि ममता बनर्जी की टीएमसी के 20 सांसदों के बगावत के बाद शिवसेना यूबीटी के भी 9 में से 6 लोकसभा सांसद शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) में शामिल हो गए थे।</p>]]> </content:encoded>
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<title>ममता बनर्जी को बड़ा सियासी झटका, मदन मित्रा बागी TMC गुट के साथ आए</title>
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<description><![CDATA[ कोलकाता पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ी खबर सामने आई है. तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मदन मित्रा पार्टी के बागी खेमे में शामिल हो गए हैं. यह बागी खेमा विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में चल रहा है. ये पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:16:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ममता, बनर्जी, को, बड़ा, सियासी, झटका, मदन, मित्रा, बागी, TMC, गुट, के, साथ, आए</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कोलकाता</strong></p>
<p>पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ी खबर सामने आई है. तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मदन मित्रा पार्टी के बागी खेमे में शामिल हो गए हैं. यह बागी खेमा विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में चल रहा है. ये पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका है। </p>
<p>मदन मित्रा पार्टी के पुराने और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं. वह पहले भी सरकार में मंत्री रह चुके हैं और पार्टी में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. ऐसे में बागी खेमे में शामिल होने का सीधा असर टीएमसी की अंदरूनी राजनीति पर पड़ेगा. पार्टी के भीतर पहले से ही असंतोष की खबरें आती रही हैं और अब इस नए घटनाक्रम ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।  </p>
<p>मंगलवार रात मदन मित्रा अचानक एंटाली के पूर्व विधायक स्वर्णकमल साहा के घर पहुंचे थे. यहीं से उनके पाला बदलने की चर्चाएं शुरू हो गई थीं. स्वर्णकमल साहा के बेटे संदीपन साहा खुद एंटाली से विधायक हैं और ऋतब्रत बनर्जी गुट के अहम नेता माने जाते हैं. यानी मदन मित्रा का इस घर में जाना साफ इशारा था कि वह ममता बनर्जी के खेमे से दूरी बना रहे हैं। </p>
<p>बुधवार दोपहर वह खुद गाड़ी चलाकर विधानसभा पहुंचे और वहीं ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात के बाद इस्तीफे का ऐलान कर दिया और बागी गुट में शामिल हो गए। </p>
<p>दरअसल, मदन मित्रा पहले से ही नगर भर्ती घोटाले में जांच एजेंसियों के घेरे में हैं. पिछले साल अक्टूबर में सीबीआई ने उनके घर पर पांच घंटे तक तलाशी ली थी. इस साल जून में ईडी ने भी उनके घर पर छापेमारी की थी। </p>
<p>यह छापेमारी कोलकाता और आसपास के इलाकों की सात जगहों पर हुई थी, जिसमें उनका भवानीपुर और कालीघाट वाला घर भी शामिल था. इसके अलावा दक्षिणेश्वर, संतोषपुर, जोका और बेलेघाटा में भी ईडी ने तलाशी ली थी। </p>
<p>अब इसी घोटाले में ईडी ने मदन मित्रा की पत्नी और दोनों बेटों को समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया है. परिवार को नोटिस मिलते ही मदन मित्रा का स्वर्णकमल साहा के घर पहुंचना नई चर्चाओं की वजह बना. सूत्रों के मुताबिक वह रात करीब साढ़े दस बजे तक वहीं मौजूद रहे थे. लंबे समय से ममता बनर्जी के भरोसेमंद रहे मदन मित्रा के इस कदम से टीएमसी में हलचल मच गई है। </p>
<p><strong>मदन मित्रा ने अभिषेक बनर्जी पर साधा निशाना</strong></p>
<p>मदन मित्रा ने तृणमूल कांग्रेस (ममता बनर्जी) का साथ छोड़ दिया है और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी तृणमूल कांग्रेस (TMC) गुट में शामिल हो गए हैं। अपने फैसले पर मदन मित्रा ने कहा- "मैंने अभिषेक बनर्जी को सुझाव दिया था कि वे छह महीने या एक साल के लिए हट जाएं। मैंने उनसे कहा था कि आइए पार्टी को मज़बूत करते हैं, और फिर आप वापस आकर अपनी जगह ले सकते हैं, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने कहा, मैं पार्टी नहीं छोड़ूंगा। पार्टी डूब रही है; नाव डूब चुकी है। लोग मर रहे हैं। फिर भी, पार्टी ने तय किया या यूं कहें कि उसे यह मानने पर मजबूर किया गया कि बाकी सब मर जाएं तो ठीक है, लेकिन अभिषेक को बचाना जरूरी है। यह बहुत दुखद है। पार्टी सबकी है, फिर भी ऐसा लगता है कि यह सिर्फ अभिषेक की सेवा करने तक ही सीमित रह गई है।</p>
<p><strong>मित्रा ममता बनर्जी से की अपील</strong><br>
मदन मित्रा ने कहा- "मैं ममता जी से गुजारिश करता हूं कि आइए इसे एक मैराथन की तरह देखें। रास्ते में हम ज़रूर एक-दूसरे से मिलेंगे। देखते हैं कौन सा घोड़ा आगे निकलता है। मैंने सभी पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है। हालांकि, मैं अभी भी MLA हूं। मैंने तृणमूल से जुड़ी हर चीज़ छोड़ दी है। इसका मतलब है कि काम-काज के लिहाज से मैं अब तृणमूल MLA नहीं रहा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>ममता बनर्जी की TMC को हाई कोर्ट से झटका, धर्मतला में रैली की अनुमति नहीं मिली</title>
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<description><![CDATA[  कोलकाता ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका लगा है. कारण, कोर्ट से 21 जुलाई को धर्मतला में विक्टोरिया हाउस के सामने रैली करने की इजाजत नहीं मिली है. हालांकि, हाईकोर्ट ने उन्हें बिड़ला तारामंडल के सामने एक खास जगह पर &#039;शहीद दिवस&#039; मनाने की इजाजत दे दी है।  जस्टिस सौगत भट्टाचार्य … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:16:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> कोलकाता</strong></p>
<p>ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका लगा है. कारण, कोर्ट से 21 जुलाई को धर्मतला में विक्टोरिया हाउस के सामने रैली करने की इजाजत नहीं मिली है. हालांकि, हाईकोर्ट ने उन्हें बिड़ला तारामंडल के सामने एक खास जगह पर 'शहीद दिवस' मनाने की इजाजत दे दी है। </p>
<p>जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने आदेश दिया कि कार्यक्रम में अधिकतम 2,500 कार्यकर्ता और समर्थक ही शामिल हो सकेंगे. यह सभा दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक आयोजित होगी. अदालत ने कोलकाता पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और यातायात सामान्य रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। </p>
<p>हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि कालीघाट टीएमसी इकाई को 18 जुलाई शाम 4 बजे तक 20 स्वयंसेवकों के नाम और मोबाइल नंबर पुलिस के संयुक्त आयुक्त को सौंपने होंगे. इन स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी होगी कि सड़क के दूसरी ओर समर्थकों की वजह से कोई बाधा उत्पन्न न हो. अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्देशों का उल्लंघन होने पर संबंधित स्वयंसेवक जिम्मेदार होंगे।</p>
<p>सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि बिरला तारामंडल के सामने बड़ी संख्या में लोगों की सभा की अनुमति देना संभव नहीं है. सरकार ने कहा कि वहां सीमित संख्या में लोगों के जुटने की ही इजाजत दी जा सकती है, जबकि सुबोध मल्लिक स्क्वायर में करीब 2,000 लोगों के एकत्र होने की अनुमति दी जा सकती है। </p>
<p>टीएमसी की ओर से वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि उनकी पार्टी ने कई बार अनुमति के लिए आवेदन किया था, लेकिन बाद में आवेदन करने वाले अन्य संगठनों को अनुमति दे दी गई. उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार ने पहले ही स्थिति स्पष्ट कर दी होती तो पार्टी उसी के अनुसार अपनी तैयारियां कर लेती। </p>
<p><strong>टीएमसी हर साल मनाती है शहीद दिवस</strong><br>
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस हर साल 21 जुलाई को 'शहीद दिवस' मनाती है. यह दिन 1993 में पुलिस फायरिंग में मारे गए 13 कांग्रेस कार्यकर्ताओं की स्मृति में मनाया जाता है. इस वर्ष अलग-अलग स्थानों पर तीन राजनीतिक दलों को कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मिली है. कांग्रेस को शहीद मीनार मैदान, रितोब्रतो गुट की तृणमूल कांग्रेस को मेयो रोड स्थित गांधी प्रतिमा के सामने और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को बिरला तारामंडल के सामने कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी गई है। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>CM विजय की मंत्रियों को सख्त चेतावनी, भ्रष्टाचार में नाम आया तो जाएगी कुर्सी</title>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:16:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>विजय, की, मंत्रियों, को, सख्त, चेतावनी, भ्रष्टाचार, में, नाम, आया, तो, जाएगी, कुर्सी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चेन्नई</strong></p>
<p>अभिनेता से राजनेता बने विजय की अगुवाई वाली तमिलनाडु सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है. सीएम विजय की अगुवाई वाली सरकार ने वित्तीय गड़बड़ी और रिश्वतखोरी के आरोप में ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन के छह अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में इस बड़े एक्शन के बाद सीएम विजय ने अब अपने मंत्रियों को भी दो टूक संदेश दे दिया है। </p>
<p>सीएम विजय ने मंत्रियों को भी भ्रष्टाचार के मामलों में नाम आने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दे दी है. उन्होंने कहा है कि ऐसे व्यक्तियों को तुरंत ही मंत्री पद से हटा दिया जाएगा. भ्रष्टाचार के मामलों में जिस किसी भी मंत्री का नाम आएगा, उसके खिलाफ किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी. सीएम ने मंत्रियों को साफ संदेश दे दिया है कि भ्रष्टाचार के आरोप लगे तो मंत्री की कुर्सी जाएगी। </p>
<p>उन्होंने कहा कि हमारी सरकार भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है और हम भ्रष्टाचार मुक्त शासन चलाएंगे. गौरतलब है कि भ्रष्टाचार को लेकर सीएम विजय की जीरो टॉलरेंस नीति पर कार्रवाई करते हुए जीसीसी कमिश्नर समीरन ने छह अधिकारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए थे। </p>
<p> खास बातचीत में यह भी कहा था कि निलंबन सिर्फ शुरुआती कार्रवाई है और जांच पूरी होने के बाद यह तय किया जाएगा कि संबंधित अधिकारी को सेवा से बर्खास्त किया जाए या उसे वीआरएस लेने का विकल्प दिया जाए। </p>]]> </content:encoded>
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<title>TMC की राज्यसभा सांसद कोयल मलिक ने दिया इस्तीफा, ममता बनर्जी को लगा बड़ा राजनीतिक झटका</title>
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<description><![CDATA[ कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) टूट गई है। ज्यादातर सांसद और विधायक पार्टी से दूर हो चुके हैं। किसी ने नया गुट बना लिया है तो किसी ने दूसरे दल के साथ विलय कर लिया। अब गुरुवार को ममता बनर्जी को एक और … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:16:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>TMC, की, राज्यसभा, सांसद, कोयल, मलिक, ने, दिया, इस्तीफा, ममता, बनर्जी, को, लगा, बड़ा, राजनीतिक, झटका</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कलकत्ता</strong></p>
<p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) टूट गई है। ज्यादातर सांसद और विधायक पार्टी से दूर हो चुके हैं। किसी ने नया गुट बना लिया है तो किसी ने दूसरे दल के साथ विलय कर लिया। अब गुरुवार को ममता बनर्जी को एक और झटका लगा है। पार्टी की राज्यसभा सांसद और एक्ट्रेस कोयल मलिक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, वह एक महीने पहले ही इस्तीफे का ऐलान कर चुकी थीं, लेकिन आज उन्होंने आधिकारिक तौर पर इस्तीफा भेज दिया।</p>
<p><strong>चंद महीनों में ही दे दिया इस्तीफा</strong><br>
कोयल मलिक TMC की राज्यसभा सांसद थीं और ममता बनर्जी ने उन्हें इसी साल अप्रैल महीने में ही राज्यसभा भेजा था। महज चंद महीनों के भीतर उन्होंने इस्तीफा दे दिया। कोयल मलिक के अलावा, सुष्मिता देव, शुखेंदु शेखर आदि ने भी राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था। बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए और पार्टी की ओर से फिर से राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बन गए। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद ममता बनर्जी के करीबी नेता एक के बाद एक साथ छोड़ते जा रहे हैं। लोकसभा में 20 से ज्यादा सांसद काकोली के नेतृत्व वाले गुट के साथ एनसीपीआई में विलय कर चुके हैं। वहीं, 60 से ज्यादा विधायक भी ममता का साथ छोड़ चुके हैं। बीते दिन, मदन मित्रा ने भी टीएमसी से इस्तीफा देते हुए बागी गुट ज्वाइन कर लिया।</p>
<p><strong>हालांकि इनसे पहले 3 अन्य राज्यसभा सांसदों ने भी टीएमसी की सदस्यता छोड़ दी थी और वे बीजेपी में शामिल हो गए थे. अब वे सभी राज्यसभा के उपचुनावों में उम्मीदवारी पेश कर रहे हैं। </strong></p>
<p>बता दें कि गुरुवार को टीएमसी नेता और एक्ट्रेस कोएल मल्लिक ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की और अपना इस्तीफा सौंप दिया. कोयल मलिक के इस्तीफे को पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के करीबी मदन मित्रा से भी जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने भी एक दिन पहले ही टीएमसी से इस्तीफा दिया है. कोयल मलिक से पहले सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बारिक ने भी टीएमसी के साथ राज्यसभा से इस्तीफा दिया था। </p>
<p>टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को पश्‍च‍िम बंगाल में चुनाव हारने के बाद लगातार झटके लग रहे हैं. सांसदों से लेकर व‍िधायकों और पार्षदों तक में उनके ख‍िलाफ आक्रोश देखने को मि‍ला है और वे पार्टी से टूट-टूटकर बाहर जा रहे हैं। </p>
<p><strong>बागी गुट में शामिल हुए मदन मित्रा</strong><br>
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले विधायक मदन मित्रा बुधवार को नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट में शामिल हो गए। विधायक ने दावा किया कि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी थी। कामरहाटी से विधायक मित्रा ने घोषणा की कि वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की सभी राष्ट्रीय और संगठनात्मक समितियों से इस्तीफा दे रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से भी तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है।</p>
<p><strong>'मैंने अपना कमरा बदला है, मकान नहीं'</strong><br>
इस घटनाक्रम को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जो बीते कुछ महीने से अभूतपूर्व बगावत का सामना कर रहा है। मित्रा ने बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात के बाद पत्रकारों से कहा, ''मैंने अपना कमरा बदला है, मकान नहीं। मैं तृणमूल कांग्रेस का ही हिस्सा हूं।'' उन्होंने कहा, ''शायद उस कमरे में आरामदायक बिस्तर था, जबकि इस कमरे में केवल एक चारपाई है। मैंने चारपाई को चुना है।'' उन्होंने घोषणा की कि वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट में अब कोई संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे, हालांकि वह तृणमूल कांग्रेस के विधायक बने रहेंगे।</p>]]> </content:encoded>
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<title>महिला आरक्षण पर बदले सियासी समीकरण? सरकार दो&#45;तिहाई बहुमत के करीब, शरद पवार के रुख पर बढ़ी चर्चा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली यह बात इसी साल बस 3 महीने पहले की ही है. अप्रैल में संसद का विशेष सत्र चल रहा था, जब महिला आरक्षण और नई सीटों के परिसीमन बिल के लिए भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने पूरा जोर लगा दिया. लोकसभा में संविधान संशोधन बिल (131वें संशोधन) के मुद्दे पर वोटिंग … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:16:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>महिला, आरक्षण, पर, बदले, सियासी, समीकरण, सरकार, दो-तिहाई, बहुमत, के, करीब, शरद, पवार, के, रुख, पर, बढ़ी, चर्चा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>यह बात इसी साल बस 3 महीने पहले की ही है. अप्रैल में संसद का विशेष सत्र चल रहा था, जब महिला आरक्षण और नई सीटों के परिसीमन बिल के लिए भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने पूरा जोर लगा दिया. लोकसभा में संविधान संशोधन बिल (131वें संशोधन) के मुद्दे पर वोटिंग के दौरान सरकार जरूरी दो तिहाई बहुमत जुटा पाने में नाकाम रही थी. अब 20 जुलाई से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र से पहले सरकार ने एक बार फिर से महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लागू करने के लिए कमर कसकर तैयारी शुरू कर दी है. इसके लिए लोकसभा में ताजा समीकरण तैयार होने लगा है. नंबर गेम के लिए पश्चिम बंगाल से लेकर महाराष्ट्र और तमिलनाडु तक नजर है। </p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह अब किसी भी कीमत पर महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन बिल को पास करवाने की तैयारी में हैं. इसके साथ ही वन नेशन वन इलेक्शन यानी एक देश और एक चुनाव का प्रस्ताव भी आ सकता है. इसको भारत की राजनीति और संसदीय इतिहास में ऐतिहासिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. इस प्रस्ताव के तहत सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होगी और लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 तक पहुंच जाएगी. खास बात यह रहेगी कुल बढ़ी हुई सीटों में से 33 फीसदी एक तिहाई सीटें यानी कि 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगी। </p>
<p>सरकार की पूरी तैयारी है कि 2029 में होने वाला लोकसभा चुनाव इसी नए बिल और नए परिसीमन के आधार पर लड़ा जाएगा. अभी फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि सरकार के पास समर्थन के लिए जरूरी संख्या बल आएगा कैसे? संसद का आगामी सत्र देश की राजनीति और विधायी इतिहास के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संख्या बल का जो खेल पिछले कुछ महीनों से चल रहा था, वह अब एक नए मोड़ पर आ खड़ा हुआ है. आइए समझते हैं कि क्यों दो-तिहाई का यह आंकड़ा इतना महत्वपूर्ण है और पिछले तीन महीनों में ऐसा क्या बदला जिसने पूरे समीकरण को पलट कर रख दिया है?</p>
<p><strong>क्यों इतना महत्वपूर्ण है दो-तिहाई का आंकड़ा?</strong><br>
किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को संसद के दोनों सदनों में पास कराने के लिए दो बड़े पड़ावों को पार करना होता है. पहला नियम है- विधेयक को सदन की कुल सदस्य संख्या के आधे से अधिक का समर्थन मिलना अनिवार्य है. दूसरा नियम है कि मतदान के समय सदन में उपस्थित और वोट करने वाले सदस्यों का कम से कम दो-तिहाई समर्थन मिलना जरूरी है। </p>
<p>यही वह मोर्चा था, जहां सरकार इस साल अप्रैल में चूक गई थी. लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों के नए परिसीमन और विस्तार के बाद महिलाओं को आरक्षण देने के प्रावधान वाले संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, जबकि विरोध में 230 वोट आए. मतदान में कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया था, जिसके चलते विशेष बहुमत के लिए दो-तिहाई का आंकड़ा 352 होना जरूरी था. पक्ष में 298 वोट होने के बावजूद सरकार विशेष बहुमत के आंकड़े से 54 वोट पीछे रह गई और विधेयक गिर गया. इस हार ने साफ कर दिया कि एनडीए सामान्य विधेयकों को तो आसानी से पास करा सकता है लेकिन संविधान संशोधन के लिए उसके पास जरूरी जादुई आंकड़ा नहीं था। </p>
<p><strong>तो अप्रैल से अब तक क्या-क्या बदल गया?</strong><br>
पिछले तीन महीनों में देश का पॉलिटिकल सिनेरियो दिलचस्प तरीके से बदला है. दिलचस्प बात यह है कि यह बदलाव किसी नए आम चुनाव के कारण नहीं बल्कि दलबदल, पार्टियों में टूट, बदलते गठबंधनों और संसद में खाली हुई सीटों के कारण आया है. इन घटनाक्रमों ने जहां एक तरफ एनडीए को मजबूत किया है, वहीं विपक्ष की ताकत को लगातार समेटा है. आइए समझते हैं कि ये कैसे हुआ?</p>
<p><strong>अब दो-तिहाई के कितने करीब है NDA?</strong><br>
एनडीए अभी अप्रैल की तुलना में बेहद मजबूत स्थिति में है लेकिन अभी भी वह अपने दम पर पूर्ण विशेष बहुमत की गारंटी से थोड़ा दूर है. लोकसभा में मौजूदा स्थिति की बात करें तो एनडीए के पास वर्तमान में लगभग 293 सांसद हैं. हालांकि नया समीकरण भी है. टीएमसी के अगर 20 बागी और शिवसेना (UBT) के 6 पूर्व सांसद इसमें जुड़ते हैं तो यह आंकड़ा 319 तक पहुंच जाता है. इसके साथ ही डीएमके के 22 सांसद भी चुनिंदा मुद्दों पर सरकार के साथ आते हैं, तो एनडीए का आंकड़ा 341 तक जा सकता है. एनसीपी (शरद पवार) गुट के 8 सांसदों के आने से भी बल मिलेगा और नंबर 349 तक पहुंच सकता है। </p>
<p><strong>वॉकआउट और एब्सेंट रहने की सियासत! </strong><br>
हालांकि अभी भी यह बहुमत के लिए जरूरी दो-तिहाई यानी 352 सांसदों के आंकड़े से कम ही है. ऐसा माना जा रहा है कि विपक्षी क्षेत्रीय दलों के कुछ और सांसदों को तोड़ने के साथ ही वोटिंग के समय अनुपस्थित रहने और वॉकआउट की रणनीति पर काम कर सकती है. इसके लिए भाजपा की नजरें झारखंड की झामुमो और ओडिशा की बीजू जनता दल पर टिकी है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>परिसीमन बिल पर बदले सुर! सुप्रिया सुले के बाद अब संजय राउत ने भी मोदी सरकार को समर्थन के दिए संकेत</title>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:16:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई </strong></p>
<p>लोकसभा में परिसीमन बिल पास कराने में जुटी नरेंद्र मोदी सरकार को एक तगड़ा सपोर्ट मिला है. केंद्र की नीतियों का प्रखर विरोध करने वाली शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी परिसीमन बिल का सपोर्ट कर सकती है. गुरुवार को उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियां प्रस्तावित परिसीमन बिल का विरोध करेंगी, लेकिन अगर सरकार उनके सुझाए गए संशोधनों को शामिल करती है, तो वे समर्थन देने पर विचार कर सकते हैं।  </p>
<p><strong>बुधवार को NCP SP की नेता सुप्रिया सुले ने भी कहा था कि सरकार अगर उनकी मांग मानती है तो उनकी पार्टी इस बिल का लोकसभा में समर्थन कर सकती है। </strong></p>
<p>सुप्रिया सुले के बाद संजय राउत की ओर से भी परिसीमन बिल पर पॉजिटिव बयान आया है. संजय राउत नागपुर में पत्रकारों से बात कर रहे थे. शनिवार को अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी के खिलाफ सेना (UBT) का 'राम रक्षा आंदोलन' होने वाला है, उसी के सिलसिले में वे यह बात कह रहे थे।</p>
<p>खास बात यह है कि नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (SP) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने बुधवार को कहा कि अगर परिसीमन बिल – जो NDA सरकार का एक अहम विधायी एजेंडा है – सभी राज्यों में सीटों में एक समान 50 प्रतिशत बढ़ोतरी पर आधारित है, तो "इसका विरोध करने का कोई खास कारण नहीं होगा." हालांकि, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ऐसे प्रस्ताव का समर्थन करने का कोई भी फ़ैसला विपक्षी INDIA गठबंधन के भीतर चर्चा के बाद ही लिया जाएगा। </p>
<p>सरकार संसद के मॉनसून सत्र में, जो 20 जुलाई से शुरू हो रहा है, संविधान (131वां संशोधन) बिल लाने जा रही है.  इस बिल में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव है। </p>
<p><strong>परिसीमन बिल पर सपोर्ट पर विचार करेंगे</strong><br>
सुले की टिप्पणियों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में राउत ने कहा कि अभी इस बारे में कोई फ़ैसला नहीं हुआ है कि यह बिल इस सत्र में पेश किया जाएगा या नहीं. "जब बिल आएगा, तो हम सब बैठकर फ़ैसला करेंगे और आगे क्या करना है, इस पर सामूहिक निर्णय लिया जाएगा। </p>
<p>उन्होंने कहा, "लेकिन आज आप जो खबरें फैला रहे हैं कि पार्टी (NCP-SP) में टूट होगी और बहुमत दिखाने के लिए विधायकों और सांसदों को तोड़ा जाएगा, वगैरह-वगैरह, इन बातों का कोई आधार नहीं है। </p>
<p>राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने आगे कहा कि वे परिसीमन बिल का विरोध करेंगे, लेकिन अगर उनके सुझावों के अनुसार इसमें ज़रूरी संशोधन किए जाते हैं, तो विपक्ष इस पर "विचार कर सकता है। </p>
<p>मंगलवार रात NCP (SP) नेता जयंत पाटिल की फडणवीस के साथ हुई मुलाक़ात और शरद पवार की पार्टी के BJP के नेतृत्व वाले सत्ताधारी महायुति गठबंधन में शामिल होने की अटकलों के बारे में पूछे जाने पर, राउत ने कहा कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक, पाटिल अपने चुनाव क्षेत्र से जुड़े किसी मुद्दे पर CM से मिलने गए थे। </p>
<p>पाटिल NCP (SP) के एक अहम सदस्य और विपक्षी महा विकास अघाड़ी के प्रमुख नेता हैं. उन्होंने कहा, "आप जो कह रहे हैं, उसमें से मुझे कुछ भी सच नहीं लगता। </p>
<p>राउत ने दावा किया कि Sena (UBT) और NCP (SP) के बारे में अफ़वाहें सत्ताधारी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना फैला रही है ताकि मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके। </p>
<p>संजय राउत नेता ने कहा कि उन्होंने सुले से बात की है और वह गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बारे में साफ़ तौर पर बताएंगी। </p>
<p><strong>शिवसेना UBT के पास 3 सांसद</strong><br>
लोकसभा में इस वक्त शिवसेना UBT के 6  सांसद रह गए हैं. 2024 के चुनाव में शिवसेना UBT के 9 सांसद जीते थे. इनमें से हाल ही में 6 सांसद टूटकर एकनाश शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए. इस तरह से शिवसेना UBT के 3 सांसद बच गए हैं। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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