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<title> &#45; : विदेश</title>
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<title>67 साल की उम्र में ‘गॉसिप’ से कमाई! दावा&#45;चर्चा में महिला ने खरीदे 2 घर, अनोखी कहानी वायरल</title>
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<description><![CDATA[ बोगोटा सोचिए, जिस गॉसिप को लोग अक्सर सिर्फ पड़ोस की चुगली समझते हैं, वही किसी के लिए कमाई का जरिया बन जाए! दुनिया में पैसे कमाने के लिए लोग नौकरी, बिजनेस और तरह-तरह के काम करते हैं, लेकिन कोलंबिया की 67 साल की एक महिला ने ऐसा काम चुना, जिसे सुनकर आप भी हैरान रह … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 18:02:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>साल, की, उम्र, में, ‘गॉसिप’, से, कमाई, दावा-चर्चा, में, महिला, ने, खरीदे, घर, अनोखी, कहानी, वायरल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बोगोटा</strong><br>
सोचिए, जिस गॉसिप को लोग अक्सर सिर्फ पड़ोस की चुगली समझते हैं, वही किसी के लिए कमाई का जरिया बन जाए! दुनिया में पैसे कमाने के लिए लोग नौकरी, बिजनेस और तरह-तरह के काम करते हैं, लेकिन कोलंबिया की 67 साल की एक महिला ने ऐसा काम चुना, जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे. महिला का दावा है कि वह लोगों की पर्सनल बातें और पड़ोस के सीक्रेट बातें चोरी-छिपे सुनती हैं और जरूरत पड़ने पर इन्हें पैसे के बदले दूसरों तक पहुंचाती हैं. हैरानी की बात तो यह है कि महिला के मुताबिक, इसी अनोखे काम से उन्होंने इतना पैसा कमाया कि दो घर तक खरीद लिए। </p>
<p>इस महिला का नाम मिरयम बताया गया है. वह खुद को ‘प्रोफेशनल गॉसिप’ यानी लोगों की बातें इकट्ठा करने वाली महिला बताती हैं. उनका कहना है कि उन्हें बचपन से ही आसपास के लोगों की बातें सुनने और जानने में काफी दिलचस्पी थी. वक्त के साथ यही दिलचस्पी उनकी पहचान बन गई और उन्होंने इसे कमाई के एक अनोखे तरीके में बदल दिया। </p>
<p><strong>घर के बाहर बैठकर सुनती हैं लोगों की बातें</strong><br>
मिरयम का तरीका भी काफी अलग है. रिपोर्ट के मुताबिक वह अक्सर अपने घर के बाहर बैठती हैं और आसपास के लोगों की बातचीत पर ध्यान देती हैं. उनके हाथ में एक नोटबुक भी रहती है, जिसमें वह जरूरी बातें लिखती जाती हैं. वह केवल बातें सुनने तक ही सीमित नहीं रहतीं. उनका दावा है कि वह नाम, तारीख और दूसरी जानकारियां भी नोट करती हैं. कुछ मामलों में उनके पास तस्वीरें भी होती हैं. उनका कहना है कि ऐसा करने से उन्हें अपनी बताई हुई बातों को याद रखने और उनके सही होने का दावा करने में मदद मिलती है. मिरयम के मुताबिक, पड़ोस में होने वाली छोटी-छोटी बातें भी लोगों के लिए काफी दिलचस्प होती हैं. इसलिए वह सामान्य गॉसिप के लिए भी पैसे लेती हैं। </p>
<p>5 हजार से शुरू होती है गॉसिप की कीमत<br>
रिपोर्ट के मुताबिक, मिरयम छोटी या सामान्य गॉसिप बताने के लिए 5,000 से 10,000 कोलंबियाई पेसो तक लेती हैं. अगर बात ज्यादा खास या चौंकाने वाली हो, तो वह ज्यादा पैसे मांगती हैं. मिरयम ने बताया कि एक बार उन्हें 7 लाख कोलंबियाई पेसो मिले थे. यह रकम एक व्यक्ति के अफेयर की बात किसी को न बताने के बदले दी गई थी. मिरयम का दावा है कि कई बार लोग खुद उनके पास आते हैं और उनसे कहते हैं कि किसी खास बात को दूसरों तक न पहुंचाया जाए. ऐसे मामलों में भी वह पैसे कमाने की बात कहती हैं। </p>
<p><strong>गॉसिप से खरीदें दो घर</strong><br>
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात उनकी कमाई को लेकर है. मिरयम का दावा है कि इस अनोखे काम से हुई कमाई ने उन्हें दो घर खरीदने में मदद की. उन्होंने एक वीडियो इंटरव्यू के दौरान अपनी कमाई का हिस्सा भी दिखाया. उनका कहना है कि वह अपने दूसरे घर पर दोस्तों के साथ समय बिताती हैं. वहां बातचीत के दौरान उन्हें आसपास की नई-नई खबरें भी मिलती रहती हैं. यानी उनके लिए दोस्तों के साथ बैठना भी किसी तरह से जानकारी जुटाने का जरिया बन जाता है। </p>
<p><strong>खुद को बताती हैं ‘गॉसिप की क्वीन’</strong><br>
मिरयम को अपने इस काम पर काफी भरोसा है. वह खुद को पड़ोस की ‘गॉसिप क्वीन’ मानती हैं. उनका कहना है कि जहां लोग होंगे, वहां बातें भी होंगी और इसलिए गॉसिप का सिलसिला कभी खत्म नहीं होगा. उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके काम की नकल करने वाले दूसरे लोग भी अब इलाके में सामने आ गए हैं. यानी जिस काम को उन्होंने अपनी खास पहचान बनाया, उसे देखकर दूसरे लोगों ने भी कमाई का रास्ता अपनाने की कोशिश की। </p>
<p><strong>कहानी वायरल होने के बाद उठे सवाल</strong><br>
मिरयम की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी अलग-अलग हैं. कुछ लोगों को यह कमाई का तरीका बेहद मजेदार और अनोखा लग रहा है. वहीं कुछ लोग इसे लोगों की निजी जिंदगी में दखल देने वाला काम मान रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि किसी व्यक्ति की निजी जानकारी को पैसे लेकर दूसरे लोगों तक पहुंचाना कितना सही है. खासकर तब, जब बात रिश्तों और परिवार से जुड़ी हो. हालांकि मिरयम का कहना है कि वह बिना सबूत के किसी बात को आगे नहीं बढ़ातीं। </p>
<p>यह पूरी कहानी एक वायरल इंटरव्यू और रिपोर्टों में मिरयम के दावों पर आधारित है. इससे यह साबित नहीं होता कि उनकी बताई हर जानकारी या दो घर खरीदने का दावा स्वतंत्र रूप से सही है. फिर भी उनकी कहानी ने यह जरूर दिखा दिया है कि सोशल मीडिया के दौर में लोगों की दिलचस्पी को कोई किस तरह एक अनोखे बिजनेस आइडिया में बदल सकता है. मिरयम की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही है कि जिस चीज को आमतौर पर लोग सिर्फ पड़ोस की चुगली समझते हैं, उन्होंने उसी को अपने लिए कमाई का जरिया बना लिया। </p>]]> </content:encoded>
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<title>बांग्लादेश राष्ट्रपति चुनाव की उलटी गिनती शुरू, जानें कब होगा नामांकन और कब पड़ेगा वोट</title>
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<description><![CDATA[ ढाका. बांग्लादेश के निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को औपचारिक रूप से घोषणा की कि देश में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 20 अगस्त को कराया जाएगा। नामांकन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 13 अगस्त तय की गई है। यह चुनाव पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के अचानक इस्तीफे के बाद हो रहा है। निर्वाचन आयोग … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 18:02:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>बांग्लादेश, राष्ट्रपति, चुनाव, की, उलटी, गिनती, शुरू, जानें, कब, होगा, नामांकन, और, कब, पड़ेगा, वोट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ढाका.</strong></p>
<p>बांग्लादेश के निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को औपचारिक रूप से घोषणा की कि देश में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 20 अगस्त को कराया जाएगा। नामांकन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 13 अगस्त तय की गई है। यह चुनाव पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के अचानक इस्तीफे के बाद हो रहा है।</p>
<p>निर्वाचन आयोग सचिवालय के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद ने गुरुवार को बताया कि मतदान 20 अगस्त को दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक जातीय संसद (राष्ट्रीय संसद) के सत्र कक्ष में होगा। संविधान के अनुसार राष्ट्रपति का चुनाव संसद के सदस्य करते हैं, जबकि चुनाव आयोग पूरी प्रक्रिया का संचालन करता है। अगर कोई सर्वसम्मत उम्मीदवार सामने आता है तो मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी।</p>
<p><strong>चुनाव का पूरा कार्यक्रम</strong><br>
अहमद ने बताया कि चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन पत्र 13 अगस्त को सुबह 10:00 बजे से दोपहर 4:00 बजे के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय में जमा किए जा सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) 16 अगस्त को पूर्वाह्न 10:00 बजे से शुरू होगी। उम्मीदवार 18 अगस्त को अपराह्न 4:00 बजे तक अपना नामांकन पत्र वापस ले सकते हैं। न्यूज एजेंसी बीएसएस के अनुसार, अख्तर अहमद ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा संसद के अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद से विस्तृत बातचीत के बाद की गई है। हाफिज उद्दीन अहमद संविधान के प्रावधानों के तहत 90 दिनों के लिए कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर रहे हैं। संविधान के अनुसार इस 90 दिन की समय-सीमा के अंदर ही नए राष्ट्रपति का चुनाव पूरा होना जरूरी है। अहमद ने आगे कहा कि चुनाव के लिए मतदाता सूची पहले ही तैयार कर ली गई है और चुनाव से पहले बाकी सभी प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएंगी।</p>
<p><strong>24 जुलाई को मोहम्मद शहाबुद्दीन ने दिया था इस्तीफा</strong><br>
पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 जुलाई को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। वे अप्रैल 2023 में पांच साल के कार्यकाल के लिए शपथ ले चुके थे। उनका कार्यकाल पूरा होने में अभी लगभग दो साल बाकी थे। 76 वर्षीय शहाबुद्दीन ने इस्तीफे का कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बताया। बता दें कि शहाबुद्दीन पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के लंबे समय से करीबी सहयोगी रहे हैं। वे 1971 के मुक्ति युद्ध के वयोवृद्ध और निचली न्यायपालिका के पूर्व न्यायाधीश थे। पिछली संसद ने उन्हें राष्ट्रपति चुना था। जुलाई-अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए हिंसक सड़क विरोध प्रदर्शनों के काफी समय बाद भी वे अपने संवैधानिक पद पर बने रहे थे। इन प्रदर्शनों ने शेख हसीना की अवामी लीग सरकार को गिरा दिया था। हसीना 5 अगस्त 2024 को भारत भाग गईं और तब से वहीं रह रही हैं। इस्तीफे के समय कुछ अटकलें भी लगाई गई थीं कि प्रधानमंत्री रहमान की सरकार नाममात्र के राष्ट्रपति पद से खुश नहीं थी। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि शहाबुद्दीन ने हसीना से फोन पर संपर्क किया था, जिससे सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के शीर्ष नेतृत्व में नाराजगी हुई। हालांकि पूर्व राष्ट्रपति ने इन रिपोर्टों को 'बेबुनियाद' करार दिया था।</p>
<p><strong>क्या है सदन की स्थिति</strong><br>
प्रधानमंत्री रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के पास 350 सदस्यों वाले सदन में दो-तिहाई बहुमत है। पार्टी ने अभी तक राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार तय नहीं किया है। चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि कार्यक्रम की घोषणा संसद अध्यक्ष से परामर्श के बाद ही की गई है और पूरी प्रक्रिया संविधान के दायरे में पूरी की जाएगी।</p>]]> </content:encoded>
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<title>जंग की मार से टूटा ईरान, पेट भरने के लिए लोग बेचने को मजबूर हुए अपने बाल</title>
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<description><![CDATA[ तेहरान. अमेरिका संग जारी युद्ध के जल्द समाप्त होने के फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। इस अनिश्चितता ने ईरान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह झकझोर दिया है। नकदी की भारी कमी और आसमान छूती महंगाई के कारण आम ईरानी लोग अब गुजारा करने के लिए बेहद असामान्य और हैरान करने वाले कदम … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 17:02:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तेहरान.</strong></p>
<p>अमेरिका संग जारी युद्ध के जल्द समाप्त होने के फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। इस अनिश्चितता ने ईरान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह झकझोर दिया है। नकदी की भारी कमी और आसमान छूती महंगाई के कारण आम ईरानी लोग अब गुजारा करने के लिए बेहद असामान्य और हैरान करने वाले कदम उठा रहे हैं।</p>
<p>लोग अपने असली बालों से लेकर लैपटॉप, इस्तेमाल की हुई परफ्यूम की बोतलें और सेकंड-हैंड कपड़े तक बेचने या किराए पर देने को मजबूर हो गए हैं। ईरानी न्यूज एजेंसी आईएलएनए की रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में परिवार आर्थिक संकट से निपटने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा ले रहे हैं। वे अपने निजी सामान को बेचने या अस्थायी रूप से किराए पर देने का रास्ता अपना रहे हैं। आईएलएनए की रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान में एक नई तरह की 'सर्वाइवल इकॉनमी' यानी अस्तित्व अर्थव्यवस्था तेजी से फल-फूल रही है। परिवार अब उन वस्तुओं को भी नकदी में बदलने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में बेकार या कम मूल्य वाली माना जाता था। असली बाल बेचे जा रहे हैं, इस्तेमाल की हुई परफ्यूम की बोतलें ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर सूचीबद्ध की जा रही हैं, जबकि सेकंड-हैंड कपड़े, काम के जूते और अन्य घरेलू सामान खरीदारों की तलाश में हैं।</p>
<p><strong>किराए पर दे रहे लैपटॉप</strong><br>
रिपोर्ट के मुताबिक, कई विक्रेता खरीदारों को आकर्षित करने के लिए कई कम कीमत वाली वस्तुओं को एक साथ बंडल करके बेच रहे हैं। इससे उन्हें थोड़ी-बहुत नकदी जुटाने में मदद मिल रही है। लैपटॉप का किराया भी अब आम बात हो गई है। ऑफिस के काम, ऑनलाइन कक्षाओं या अन्य अल्पकालिक जरूरतों के लिए लोग लैपटॉप किराए पर ले रहे हैं। इसके अलावा घर के अन्य सामान, जिनकी वास्तविक जरूरत पूरी होने के बाद रीसेल वैल्यू बहुत कम रह जाता है, वे भी अब बाजार में उपलब्ध हैं। बताया जा रहा है कि लोग अपनी परफ्यूम की बोतलों से लेकर रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले छोटे-मोटे सामान तक बेचने को तैयार हैं।</p>
<p><strong>महंगाई की मार से कराह रहा ईरान</strong><br>
रिपोर्ट में बताया गया कि ईरान का आर्थिक दबाव अब आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। आईएलएनए ने देश के सांख्यिकीय केंद्र का हवाला देते हुए बताया कि जुलाई के अंत में समाप्त हुए ईरानी महीने में सालाना मुद्रास्फीति दर 66 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि साल-दर-साल महंगाई 87.9 प्रतिशत के खतरनाक स्तर पर पहुंच गई। खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि और घटती क्रय शक्ति ने परिवारों को मजबूर कर दिया है कि वे अपने रोजाना के खर्चों पर फिर से विचार करें। जरूरी खाद्य पदार्थ खरीदने से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं का खर्च उठाने तक, हर चीज अब चुनौती बन गई है। कई परिवार खर्च कम कर रहे हैं, गैर-जरूरी खरीदारी को टाल रहे हैं और घर खरीदने के बजाय किराए पर रहना ज्यादा व्यावहारिक विकल्प मान रहे हैं।</p>
<p><strong>अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भी तनाव</strong><br>
इस आर्थिक संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध समाप्त करने की चल रही कोशिशों को ईरान का 'आखिरी मौका' करार दिया है। हालांकि, तेहरान ने स्पष्ट रूप से इनकार किया है कि वाशिंगटन के साथ कोई सीधी बातचीत चल रही है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध जल्द समाप्त नहीं होता और आर्थिक राहत के ठोस उपाय नहीं किए जाते, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>तालिबान ने 5 साल में बर्बाद किया लाखों लड़कियों का भविष्य! UNESCO की चेतावनी से दुनिया चिंतित</title>
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<description><![CDATA[ काबुल  अफगानिस्तान में तालिबानी शासन को लेकर लगातार सवाल उठते आए हैं, खासतौर पर यहां महिलाओं की आजादी और उनके अधिकारों की चर्चा सबसे ज्यादा होती है. अब संयुक्त राष्ट्र (UN) की संस्था यूनेस्को की तरफ से बताया गया है कि अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में लौटने के लगभग पांच साल बाद भी लगभग … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 15:31:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>तालिबान, ने, साल, में, बर्बाद, किया, लाखों, लड़कियों, का, भविष्य, UNESCO, की, चेतावनी, से, दुनिया, चिंतित</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>काबुल </strong></p>
<p>अफगानिस्तान में तालिबानी शासन को लेकर लगातार सवाल उठते आए हैं, खासतौर पर यहां महिलाओं की आजादी और उनके अधिकारों की चर्चा सबसे ज्यादा होती है. अब संयुक्त राष्ट्र (UN) की संस्था यूनेस्को की तरफ से बताया गया है कि अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में लौटने के लगभग पांच साल बाद भी लगभग 24 लाख लड़कियां हाई स्कूल की शिक्षा से महरूम हैं, अब यूनेस्को ने लड़कियों की पढ़ाई पर लगी पाबंदियों को तुरंत हटाने की अपील की है. इसमें कहा गया है कि ये ऐसा दुनिया का अकेला ऐसा देश है जहां <strong>लड़कियों और महिलाओं के माध्यमिक और उच्च शिक्षा हासिल करने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। </strong></p>
<p><strong>यूनेस्को ने दी चेतावनी </strong><br>
यूएन की इस संस्था ने चेतावनी दी कि इतने लंबे समय तक शिक्षा से दूर रखना केवल पढ़ाई का अस्थायी रुकावट नहीं है, बल्कि यह पूरी एक पीढ़ी को उनके भविष्य और अवसरों से वंचित कर रहा है. इसे लेकर यूनेस्को की इमरजेंसी एजुकेशन प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर होदा जबेरियन ने कहा, "अफगानिस्तान में महिलाओं की उच्च शिक्षा पर पाबंदी है. किसी बच्चे की शिक्षा में 5 साल का गैप सिर्फ एक अस्थायी रुकावट नहीं है, ये लगभग हाई स्कूल का पूरा एक दौर खो देने जैसा है."  उन्होंने कहा कि यूनेस्को बिना किसी शर्त के लड़कियों की शिक्षा का अधिकार बहाल करने की मांग करता है. ये एक बुनियादी इंसानी हक है और इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता। </p>
<p><strong>20 सालों की मेहनत पर फिरा पानी</strong><br>
साल 2001 में तालिबानी शासन खत्म होने के बाद अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों में सुधार की कोशिश शुरू हुई, लेकिन करीब 20 साल की मेहनत पर तब पानी फिर गया जब 15 अगस्त 2021 को अमेरिकी और नाटो (NATO) सेनाओं की वापसी के बाद तालिबान ने फिर से अफगानिस्तान पर अपना कब्जा कर लिया. इसके बाद से ही महिलाओं के स्कूल, कॉलेज, नौकरियों और सार्वजनिक जीवन में जाने पर<strong> तरह-तरह की पाबंदियां लगा दी गईं। </strong></p>
<p>दुनियाभर की संस्थाओं और देशों के विरोध के बावजूद तालिबान इस चीज पर कट्टर है. तालिबान सरकार इस फैसले को अपना अंदरूनी मामला बताती रही है. वहीं कई मुस्लिम देशों ने भी महिलाओं से उनके बुनियादी अधिकारी छीनने का विरोध किया है. तालिबान लड़कियों को शिक्षा से रोककर उनके करियर ऑप्शन पूरी तरह खत्म कर रहा है, जिससे वो कभी भविष्य में डॉक्टर, टीचर या फिर कोई अधिकारी बनने के लायक नहीं रहें। </p>]]> </content:encoded>
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<title>स्वतंत्रता दिवस पर पतंगबाजी को लेकर अलर्ट, Tata Power&#45;DDL ने बिजली तारों से दूर रहने की अपील</title>
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<description><![CDATA[ चंडीगढ़. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली में पतंगबाजी की तैयारियों के बीच टाटा पावर-डीडीएल ने लोगों से बिजली के खंभों, तारों और अन्य विद्युत प्रतिष्ठानों से सुरक्षित दूरी बनाकर पतंग उड़ाने की अपील की है। कंपनी ने लोगों को धातु की परत वाले और चाइनीज मांझे का इस्तेमाल न करने की सलाह दी है। … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 15:02:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चंडीगढ़.</strong></p>
<p>स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली में पतंगबाजी की तैयारियों के बीच टाटा पावर-डीडीएल ने लोगों से बिजली के खंभों, तारों और अन्य विद्युत प्रतिष्ठानों से सुरक्षित दूरी बनाकर पतंग उड़ाने की अपील की है। कंपनी ने लोगों को धातु की परत वाले और चाइनीज मांझे का इस्तेमाल न करने की सलाह दी है।</p>
<p>कंपनी के अनुसार, धातु की परत वाला मांझा बिजली का सुचालक होता है। इसके बिजली के तारों के संपर्क में आने से तार टूटने या कटने का खतरा रहता है। इससे बिजली का झटका लगने की आशंका भी बढ़ जाती है। हाई वोल्टेज तार टूटने की स्थिति में बड़े इलाके की बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे हजारों उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। टाटा पावर-डीडीएल ने लोगों से पतंग उड़ाने के लिए धातु की परत वाले मांझे की जगह सूती धागे का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। कंपनी ने चाइनीज मांझे से भी पूरी तरह बचने की अपील की है। कंपनी के मुताबिक, धारदार मांझे से दोपहिया वाहन चालकों और पक्षियों के घायल होने का खतरा भी रहता है।</p>
<p>सुरक्षा जागरूकता अभियान के तहत कंपनी ने अपने प्रचार अभियान को भी तेज किया है। जेजे कॉलोनियों और पुनर्वास बस्तियों में मैगा रैलियां आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। कंपनी के सोशल इंपैक्ट ग्रुप (एसआईजी) ने करीब 1,000 आभा सदस्यों के नेटवर्क के जरिए स्थानीय समुदायों को बिजली सुरक्षा के प्रति जागरूक किया है। इसके अलावा, टाटा पावर-डीडीएल ने अपने विद्युत प्रतिष्ठानों और कुछ सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित पतंगबाजी से जुड़े संदेश वाले बैनर लगाए हैं। कंपनी ने एफएम रेडियो चैनलों के साथ साझेदारी कर विशेष सोशल मीडिया सीरीज भी शुरू की है। सुरक्षित पतंगबाजी को लेकर बिजली सुरक्षा संबंधी वीडियो संदेश भी जारी किए जा रहे हैं।</p>
<p>कंपनी दिल्ली के अपने परिचालन क्षेत्रों में आने वाले सरकारी और निजी स्कूलों में विशेष जागरूकता सत्र भी आयोजित कर रही है। इन सत्रों के जरिए बच्चों को पतंगबाजी के दौरान बिजली के तारों और मांझे से जुड़े संभावित खतरों की जानकारी दी जा रही है, ताकि वे जरूरी सावधानी बरतें। </p>]]> </content:encoded>
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<title>डिलीवरी ब्लड का था इस्तेमाल! 2000 साल पुराने पत्थरों पर बने चित्र आज भी क्यों हैं सुरक्षित?</title>
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<description><![CDATA[ बीजिंग  चीन में करीब 2,000 साल पुराने पत्थरों पर बने चित्र आज भी मौजूद हैं. हैरानी की बात ये है कि इन चित्रों ने तेज गर्मी, भारी बारिश, उमस और तूफानों का भी सामना किया, लेकिन फिर भी इनका रंग और आकृतियां लंबे समय तक बची रहीं. अब वैज्ञानिकों ने इन प्राचीन चित्रों की मजबूती … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:19:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>डिलीवरी, ब्लड, का, था, इस्तेमाल, 2000, साल, पुराने, पत्थरों, पर, बने, चित्र, आज, भी, क्यों, हैं, सुरक्षित</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बीजिंग </strong><br>
चीन में करीब 2,000 साल पुराने पत्थरों पर बने चित्र आज भी मौजूद हैं. हैरानी की बात ये है कि इन चित्रों ने तेज गर्मी, भारी बारिश, उमस और तूफानों का भी सामना किया, लेकिन फिर भी इनका रंग और आकृतियां लंबे समय तक बची रहीं. अब वैज्ञानिकों ने इन प्राचीन चित्रों की मजबूती का एक बेहद चौंकाने वाला राज खोजा है। </p>
<p>साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, एक नई रिसर्च के अनुसार, इन चित्रों को बनाने वाले लोग पेंट में इंसानी खून का इस्तेमाल करते थे. इतना ही नहीं, रिसर्चर्स का मानना है कि इस खून का सोर्स हाल ही में बच्चे को जन्म देने वाली महिलाएं हो सकती थीं. यानी प्रसव के दौरान निकले खून का इस आर्ट में इस्तेमाल होता था। </p>
<p><strong>2,000 साल पुराने हैं ये चित्र</strong><br>
दक्षिणी चीन में वियतनाम की सीमा के पास करीब 260 किलोमीटर लंबे इलाके में जगह- जगह चट्टानों पर बने हजारों साल पुराने चित्र मौजूद हैं. इन्हें हुआशान रॉक आर्ट  के नाम से जाना जाता है. गुआंग्शी स्वायत्त क्षेत्र में मौजूद यह जगह इंसानों, जानवरों, नावों, हथियारों और म्यूजिक स्ट्रूमेंट की तस्वीरों के लिए मशहूर है। </p>
<p>इन चित्रों को बनाने का श्रेय प्राचीन लुओयूए  लोगों को दिया जाता है. माना जाता है कि ये लोग उस इलाके में रहते थे, जो आज चीन और वियतनाम के सीमावर्ती क्षेत्रों में आता है. इस ऐतिहासिक जगह को 2016 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। </p>
<p><strong>तेज गर्मी, बारिश और तूफानों के बाद भी नहीं मिटे</strong><br>
इन चित्रों की सबसे खास बात सिर्फ उनकी उम्र नहीं है. जिस इलाके में ये मौजूद हैं, वहां मौसम काफी मुश्किल है. यहां तेज गर्मी और उमस रहती है. भारी बारिश होती है और अक्सर तूफान भी आते हैं। </p>
<p>ऐसे मौसम में हजारों साल तक चट्टानों पर बने रंगों का टिके रहना वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से पहेली बना हुआ था. आखिर ऐसा क्या इस्तेमाल किया गया था, जिसकी वजह से ये पेंटिंग्स इतनी टिकाऊ बनी रहीं? अब वैज्ञानिकों को इसका एक हैरान करने वाला जवाब मिला है। </p>
<p><strong>पेंट में मिलाया गया था इंसानी खून!</strong><br>
जर्नल ऑफ आर्कियोलॉजिकल साइंस में  प्रकाशित एक नई स्टडी के मुताबिक, इन चित्रों को बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए मिश्रण में चूना, लाल मिट्टी और जानवरों के साथ-साथ इंसानी खून भी मिलाया गया था. शोधकर्ताओं ने शानडोंग यूनिवर्सिटी और गुआंग्शी म्यूजियम ऑफ एंथ्रोपोलॉजी के साथ मिलकर इन चित्रों के पेंट के छोटे-छोटे टुकड़ों का अध्ययन किया। </p>
<p>जांच में सभी पेंट सैंपल में सीरम प्रोटीन मिले. ये खून का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं. इतना ही नहीं, वैज्ञानिकों को इंसानी खून से जुड़े ऐसे प्रोटीन भी मिले जो प्रसव और स्तनपान से संबंधित होते हैं। </p>
<p>यही वजह है कि वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि इस्तेमाल किया गया इंसानी खून हाल ही में बच्चे को जन्म देने वाली महिलाओं से लिया गया हो सकता है.रिसर्च का एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस प्रक्रिया में बहुत ज्यादा खून की जरूरत नहीं थी.सिर्फ करीब 8 मिलीलीटर खून से एक वर्ग मीटर क्षेत्र को ढकने वाला पेंट तैयार किया जा सकता था। </p>
<p>वैज्ञानिकों का मानना है कि खून में मौजूद कुछ तत्व चूने के साथ मिलकर एक खास तरह का कैल्शियम कार्बोनेट बनाते थे. इससे पेंट चट्टान की सतह के साथ बेहद मजबूती से जुड़ जाता था. यानी यह पेंट सिर्फ चट्टान के ऊपर चिपका हुआ नहीं था, बल्कि एक तरह से चूना-पत्थर की सतह के साथ जुड़ गया था. रिसर्चर्स ने इसकी मजबूती को इतना असाधारण बताया कि पेंट का सैंपल निकालने के लिए उन्हें <strong>इलेक्ट्रिक ड्रिल तक का इस्तेमाल करना पड़ा। </strong></p>
<p>हालांकि, जहां चट्टान से कैल्शियम कार्बोनेट घिस चुका था, वहां पेंट अपेक्षाकृत आसानी से निकल गया. शोध में यह भी पता चला कि अलग-अलग जगहों पर पेंट का मिश्रण एक जैसा नहीं था.एक साइट से मिले पेंट में करीब 97 फीसदी खून इंसानी था, जबकि पास की दूसरी जगह के सैंपल में लगभग एक-तिहाई हिस्सा गाय के खून का मिला. इससे पता चलता है कि प्राचीन लोग पेंट तैयार करने के लिए इंसान और जानवरों के खून को अलग-अलग अनुपात में इस्तेमाल करते थे। </p>
<p><strong>डिलीवरी के बाद महिलाओं का खून क्यों?</strong><br>
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इंसानी खून इस्तेमाल हुआ, तो वह कहां से आता था? रिसर्चर्स ने अनुमान लगाया है कि इसे बच्चे को जन्म देने के तुरंत बाद महिलाओं से हासिल किया जाता होगा.इसका संबंध उस समय के लुओयूए समाज की मान्यताओं से हो सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस समाज में महिलाओं की प्रजनन क्षमता और मातृत्व को विशेष महत्व दिया जाता था। </p>
<p>रिसर्च पेपर में यह संभावना जताई गई है कि खून का इस्तेमाल उर्वरता, पवित्रता या पूर्वजों के सम्मान जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक विचारों से जुड़ा हो सकता है. हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि महिलाओं के प्रसव के बाद के खून का इस्तेमाल किए जाने की बात वैज्ञानिकों का अनुमान है, प्रत्यक्ष रूप से साबित तथ्य नहीं। </p>
<p><strong>पहले कुछ और माना जाता था</strong><br>
इस खोज से पहले वैज्ञानिकों के पास इन चित्रों की मजबूती को लेकर दूसरी थ्योरी थी. माना जाता था कि पेंट बनाने में ऐसे पौधों के रस का इस्तेमाल किया गया होगा, जिनमें ऑक्सैलिक एसिड की मात्रा ज्यादा होती है. लेकिन नए विश्लेषण में पेंट के अंदर पौधों से जुड़े ऐसे अवशेष नहीं मिले. इसके बजाय इंसानी और जानवरों के खून से जुड़े प्रोटीन मिले. इससे खून के इस्तेमाल वाली थ्योरी को मजबूती मिली है। </p>
<p><strong>इन चित्रों का मकसद सिर्फ सजावट नहीं था?</strong><br>
इन प्राचीन चित्रों को देखकर यह भी सवाल उठता है कि आखिर हजारों साल पहले लोगों ने इतनी मेहनत से इन्हें क्यों बनाया होगा? चित्रों में इंसानों के साथ-साथ नाव, हथियार और संगीत वाद्ययंत्र दिखाई देते हैं. इनमें कुछ ऐसे सामान भी नजर आते हैं जिनका इस्तेमाल धार्मिक या सामुदायिक समारोहों में किया जाता था। </p>
<p>रिसर्चर्स के मुताबिक, ये चित्र सिर्फ रोजमर्रा की जिंदगी दिखाने के लिए नहीं रहे होंगे. इनमें धार्मिक रस्मों, सामुदायिक पहचान और पूर्वजों के सम्मान का भी महत्व हो सकता है। </p>
<p>खास बात यह है कि इन चित्रों में किसी एक व्यक्ति पर ज्यादा जोर नहीं दिया गया. इसके बजाय कई आकृतियां साथ दिखाई देती हैं. इससे संकेत मिलता है कि उस समाज में व्यक्तिगत पहचान से ज्यादा पूरे समुदाय को महत्व दिया जाता था। </p>
<p><strong>क्या लुओयूए समाज मातृसत्तात्मक था?</strong><br>
ऐतिहासिक रिकॉर्ड में लुओयूए समाज को मातृसत्तात्मक बताया गया है. प्राचीन चीनी दस्तावेजों में उनके सामाजिक ढांचे और रिश्तों को लेकर अलग-अलग विवरण मिलते हैं. रिसर्चर्स के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम चीन और लिंगनान इलाके के कई स्थानीय समाजों में हान राजवंश के दौर तक महिलाओं की सामाजिक भूमिका काफी मजबूत थी। </p>
<p>ऐसे में अगर प्राचीन चित्रों को बनाने में प्रसव के बाद महिलाओं के खून का इस्तेमाल हुआ था, तो यह उस समाज में महिलाओं, मातृत्व और प्रजनन क्षमता के विशेष महत्व की ओर इशारा कर सकता है. हालांकि इस हिस्से को लेकर अभी और रिसर्च की जरूरत है। </p>
<p><strong>हजारों साल पुराना रहस्य, मिला हैरान करने वाला जवाब</strong><br>
हुआशान के ये चित्र सिर्फ प्राचीन कला के नमूने नहीं हैं. ये उस दौर के लोगों की जिंदगी, उनकी मान्यताओं और सामाजिक व्यवस्था की झलक भी देते हैं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि 2,000 साल से ज्यादा पुराने इन चित्रों को बचाने में जिस चीज की भूमिका हो सकती है, वह आज के दौर में सुनकर ही हैरान कर देती है—इंसानी खून। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>सऊदी अरब के Aramco पर हूतियों का फिर ड्रोन हमला, मक्का समझौते के बाद पाकिस्तान&#45;तुर्की की परीक्षा</title>
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<description><![CDATA[ रियाद  सऊदी अरब ने जिस खतरे के डर से मक्का समझौता किया था, वो खतरा अब कहर बनकर टूट पड़ा है. आज से पक्के दोस्त का दिखा कर रहे पाकिस्तान-तुर्की की अग्नि परीक्षा शुरू हो गई है. सऊदी अरब में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी ‘अरामको’ की रिफाइनरी पर एक बार फिर हूती विद्रोहियों … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:19:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>सऊदी, अरब, के, Aramco, पर, हूतियों, का, फिर, ड्रोन, हमला, मक्का, समझौते, के, बाद, पाकिस्तान-तुर्की, की, परीक्षा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रियाद<br>
 सऊदी अरब</strong> ने जिस खतरे के डर से मक्का समझौता किया था, वो खतरा अब कहर बनकर टूट पड़ा है. आज से पक्के दोस्त का दिखा कर रहे पाकिस्तान-तुर्की की अग्नि परीक्षा शुरू हो गई है. सऊदी अरब में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी ‘अरामको’ की रिफाइनरी पर एक बार फिर हूती विद्रोहियों का कहर टूटा है. यमन के ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने दक्षिणी सऊदी अरब के जिजान इलाके में मौजूद अरामको रिफाइनरी पर दो-दो ड्रोन से सटीक हमला करने का दावा किया है. मक्का समझौते के बाद सऊदी पर ये पहला अटैक है, ऐसे में दुनिया की नजरें पाकिस्तान और तुर्की की तरफ मुड़ गई हैं। </p>
<p><strong>हूतियों के Aramco अटैक के बाद पाकिस्तान-तुर्की की अग्निपरीक्षा</strong><br>
यमन में बैठे ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने एक बार फिर सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्से में मौजूद अरामको रिफाइनरी को अपना निशाना बनाया है. हूती विद्रोहियों का दावा है कि ये हमला लगातार तीसरी बार किया गया है और ये बिल्कुल सटीक निशाने पर लगा है. इस हमले के बाद पूरे मरुस्थल में सन्नाटा है और सऊदी अरब का तेल नेटवर्क एक बार फिर भारी दबाव में आ गया है। </p>
<p>इस हमले के बाद सऊदी के संकट मोचक बनने का दावा करने वाले पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों की असलियत सामने आने वाली है, वहीं ऐतिहासिक ‘मक्का समझौते’ की भी सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा होने जा रही है। </p>
<p><strong>क्यों हुआ हमला? हूती विद्रोहियों ने दी खुली धमकी</strong><br>
हूती विद्रोहियों की सैन्य विंग के हवाले से सबा एजेंसी ने रिपोर्ट किया है कि ये हमला कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं है. हूतियों का आरोप है कि सऊदी अरब ने यमन के सादा और हज्जा प्रांतों में उनके एयरस्पेस का उल्लंघन किया और देश की संप्रभुता को चुनौती दी. हूती प्रवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि वो यमन की सीमाओं पर होने वाले किसी भी हमले का करारा जवाब देंगे. उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर सऊदी अरब की तरफ से कोई भी आक्रामक कार्रवाई होती है तो उसका जवाब इसी तरह के मिसाइल और ड्रोन हमलों से दिया जाएगा। </p>
<p><strong>क्या टूट गया यमन का सालों पुराना सीजफायर?</strong><br>
इस हमले के साथ ही ये लगभग साफ हो गया है कि यमन में पिछले कुछ सालों से चला आ रहा सीजफायर अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है. यमन के गृहयुद्ध में एक तरफ सऊदी समर्थित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार थी तो दूसरी तरफ ईरान समर्थित हूती विद्रोही। </p>
<p>दोनों पक्षों के बीच जारी सीजफायर पिछले महीने ही उस वक्त डगमगा गया था जब अमेरिका और ईरान के क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच सीधी भिड़ंत बढ़ गई. हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी का ऐलान कर दिया और लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हमले तेज कर दिए. जिजान रिफाइनरी पर हुआ ये नया हमला उसी कड़ी का हिस्सा है। </p>
<p><strong>होर्मुज जलडमरूमध्य से लेकर लाल सागर तक बिछा बारूद</strong><br>
एक तरफ हूती विद्रोही लाल सागर और सऊदी तेल ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर रखा है। </p>
<p>ये समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार की रीढ़ की हड्डी माना जाता है. तेहरान और वाशिंगटन के बीच जारी तनाव ने इस रास्ते को दुनिया का सबसे खतरनाक मोड़ बना दिया है. ऐसे में अगर सऊदी अरब के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार हमले होते रहे, तो पूरे यूरोप और एशिया में ईंधन का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। </p>
<p><strong>अब पता चलेगी पाकिस्तान और तुर्की की असलियत!</strong><br>
पाकिस्तान हमेशा से खुद को रियाद का सबसे बड़ा रणनीतिक और सैन्य रक्षक बताता आया है. जब भी सऊदी अरब की सुरक्षा पर बात आती है, इस्लामाबाद बड़े-बड़े दावे करता ह  लेकिन जब ईरान समर्थित हूती विद्रोही सीधी चुनौती दे रहे हैं, तब क्या पाकिस्तान अपनी सेना या रणनीतिक मदद सऊदी अरब के बचाव में भेजेगा? या फिर वो ईरान के डर से पीछे हट जाएगा? इस हमले ने पाकिस्तान की कागजी बयानबाजी और जमीनी हकीकत का अंतर साफ कर दिया है। </p>
<p>तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन खुद को मुस्लिम अमहियत का लीडर साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते. तुर्की के ड्रोन और सैन्य तकनीक की दुनिया भर में चर्चा होती है. लेकिन सऊदी अरामको पर हुए इस हमले के बाद तुर्की क्या रुख अपनाता है, इस पर पूरी दुनिया की नजरें हैं. तुर्की का ईरान के साथ भी कारोबारी रिश्ता है और सऊदी अरब के साथ भी वह संबंध सुधारने की कोशिश कर रहा है. अब तुर्की को चुनना होगा कि वो सऊदी के साथ खड़ा होता है या खलीफा बनने का नाटक करता रहेगा है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान ने गिराए अमेरिका के 45 Reaper ड्रोन! 25% बेड़ा हुआ तबाह, हथियारों के स्टॉक पर बढ़ा संकट</title>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन ईरान के साथ चल रही जंग में अमेरिका को अपने MQ-9 रीपर ड्रोन का बड़ा नुकसान हुआ है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अब तक कम से कम 45 रीपर ड्रोन खो चुके हैं. यह युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका के कुल रीपर ड्रोन का करीब 25 फीसदी है. इन ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:19:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, ने, गिराए, अमेरिका, के, Reaper, ड्रोन, 25, बेड़ा, हुआ, तबाह, हथियारों, के, स्टॉक, पर, बढ़ा, संकट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन</strong></p>
<p>ईरान के साथ चल रही जंग में अमेरिका को अपने MQ-9 रीपर ड्रोन का बड़ा नुकसान हुआ है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अब तक कम से कम 45 रीपर ड्रोन खो चुके हैं. यह युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका के कुल रीपर ड्रोन का करीब 25 फीसदी है. इन ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी और हमले के लिए किया जाता है. एक रीपर ड्रोन की कीमत उसके सेंसर और हथियारों के हिसाब से 30 से 50 मिलियन डॉलर तक हो सकती है। </p>
<p>इन 45 ड्रोन के नुकसान की कीमत 1.3 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकती है. हालांकि, सभी ड्रोन दुश्मन के हमले में नहीं गिरे. एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, कुछ ड्रोन का अपने ऑपरेटर से संपर्क टूट गया था, जिसके बाद वे क्रैश हो गए. अमेरिका को जंग में ड्रोन के साथ तकनीकी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा है। </p>
<p><strong>होर्मुज के पास ज्यादा इस्तेमाल हुए रीपर</strong><br>
अमेरिकी सेना ने ईरान युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास रीपर ड्रोन का काफी इस्तेमाल किया. यह समुद्री रास्ता बहुत अहम है और ईरान-अमेरिका तनाव का एक बड़ा केंद्र बना हुआ है. रीपर ड्रोन लंबे समय तक आसमान में रहकर निगरानी कर सकता है और जरूरत पड़ने पर हमला भी कर सकता है। </p>
<p>इसकी रफ्तार कम होती है और यह कई बार कम ऊंचाई पर उड़ता है. इसी वजह से ईरान की सेना और यमन व इराक में उसके सहयोगी गुटों के लिए इन्हें निशाना बनाना आसान हो सकता है। </p>
<p><strong>अमेरिका के पास कितने रीपर ड्रोन थे?<br>
युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिकी सेना के पा</strong>स करीब 185 रीपर ड्रोन थे. इनमें 165 एयर फोर्स और 20 मरीन कॉर्प्स के पास थे. मरीन कॉर्प्स ने कहा है कि उसके किसी रीपर ड्रोन का नुकसान नहीं हुआ है। </p>
<p>मई में एयर फोर्स के लेफ्टिनेंट जनरल डेविड टैबर ने अमेरिकी सीनेट को बताया था कि अमेरिका के पास करीब 135 रीपर ड्रोन बचे थे. उस समय उन्होंने ड्रोन के लगातार हो रहे नुकसान पर चिंता जताई थी। </p>
<p>अमेरिका अब पुराने रीपर ड्रोन को धीरे-धीरे हटाने की तैयारी कर रहा है. उनकी जगह कम कीमत वाले हथियारबंद ड्रोन लाने की योजना है. ये ड्रोन एक साथ कई ड्रोन के समूह में काम कर सकेंगे। </p>
<p><strong>मिसाइलों का स्टॉक भी घटा</strong></p>
<p>ईरान युद्ध में अमेरिका ने बड़ी संख्या में मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया है. युद्ध के पहले महीने में अमेरिकी सेना ने 850 से ज्यादा टॉमहॉक क्रूज मिसाइल और 1,000 से ज्यादा पैट्रियट और THAAD मिसाइलें इस्तेमाल कीं। <br>
THAAD मिसाइलों का इस्तेमाल दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए किया जाता है. अमेरिका की मौजूदा क्षमता एक साल में ज्यादा से ज्यादा 96 THAAD इंटरसेप्टर बनाने की है. लेकिन अगले साल अमेरिका को 857 और अगले पांच साल में करीब 2,600 <strong>THAAD इंटरसेप्टर की जरूरत बताई गई है। </strong></p>
<p><strong>हथियारों का भंडार भरना बड़ी चुनौती</strong><br>
अमेरिकी सरकार ईरान युद्ध के खर्च और हथियारों की भरपाई के लिए कांग्रेस से 67 अरब डॉलर के अतिरिक्त बजट की मांग कर रही है. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के मुताबिक, सितंबर के अंत तक युद्ध पर करीब 37.5 अरब डॉलर खर्च हो सकते हैं। </p>
<p>ईरान युद्ध के साथ यूक्रेन को दिए गए अमेरिकी हथियारों ने भी अमेरिका के सैन्य भंडार पर दबाव बढ़ाया है. अब ड्रोन और मिसाइलों को फिर से तैयार करने की जरूरत है. लेकिन नए हथियार बनाने में समय लगेगा. ऐसे में अमेरिका के सामने युद्ध का खर्च संभालने और हथियारों का भंडार फिर भरने, दोनों की चुनौती है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>US के दो और राज्यों ने 15 अगस्त को घोषित किया ‘India Independence Day’, भारतवंशियों को सम्मान</title>
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<description><![CDATA[ न्यूयॉर्क. अमेरिका के न्यू जर्सी और न्यूयॉर्क राज्यों ने 15 अगस्त 2026 को &#039;भारत स्वतंत्रता दिवस&#039; घोषित किया है। दुनियाभर में उत्साह के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह होने शुरू हो गए हैं। इसी बीच इन दोनों राज्यों ने यह घोषणा की है। इसके साथ ही भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:19:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>के, दो, और, राज्यों, ने, अगस्त, को, घोषित, किया, ‘India, Independence, Day’, भारतवंशियों, को, सम्मान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>न्यूयॉर्क.</strong></p>
<p>अमेरिका के न्यू जर्सी और न्यूयॉर्क राज्यों ने 15 अगस्त 2026 को 'भारत स्वतंत्रता दिवस' घोषित किया है। दुनियाभर में उत्साह के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह होने शुरू हो गए हैं। इसी बीच इन दोनों राज्यों ने यह घोषणा की है। इसके साथ ही भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे दोस्ताना संबंधों को भी सम्मान दिया गया है।</p>
<p>न्यूयॉर्क में भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कई पोस्ट कर इन घोषणाओं की जानकारी साझा की। दूतावास ने न्यू जर्सी की गवर्नर मिकी शेरिल को धन्यवाद दिया। उन्होंने 15 अगस्त 2026 को न्यू जर्सी में 'भारत स्वतंत्रता दिवस' घोषित किया है। इस घोषणा में न्यू जर्सी में रह रहे भारतीय मूल के अमेरिकियों के अहम योगदान को भी मान्यता दी गई है। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, शोध, तकनीक, कारोबार, सार्वजनिक सेवा और सामुदायिक नेतृत्व जैसे क्षेत्रों में इस समुदाय के योगदान का जिक्र किया गया है।</p>
<p><strong>घोषणा में क्या कहा गया?</strong><br>
घोषणा में भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चली आ रहे दोस्ताना संबंधों और बढ़ती साझेदारी को भी रेखांकित किया गया है। इसमें शिक्षा, कारोबार, तकनीक, स्वास्थ्य सेवा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में दोनों देशों के बढ़ते संबंधों का जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया कि भारत का स्वतंत्रता दिवस उन अनगिनत लोगों के साहस, दूरदृष्टि और बलिदान को सम्मान देता है, जिनके शांतिपूर्ण स्वतंत्रता आंदोलन ने दुनियाभर की पीढ़ियों को प्रेरित किया। इस आंदोलन ने न्याय, समानता और मानव गरिमा के सार्वभौमिक सिद्धांतों को भी मजबूत किया।</p>
<p><strong>भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने क्या कहा?</strong><br>
महावाणिज्य दूतावास ने एक्स पर एक अन्य पोस्ट में कहा कि न्यूयॉर्क भी भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहा है। इस मौके पर भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत संबंधों को विशेष रूप से सम्मान दिया जा रहा है। दूतावास ने न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होकुल का भी आभार जताया। उन्होंने 15 अगस्त 2026 को पूरे न्यूयॉर्क राज्य में 'भारत स्वतंत्रता दिवस' घोषित किया है।  दूतावास ने कहा कि यह घोषणा भारत की आजादी की यात्रा और भारत-अमेरिका के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों का जश्न मनाती है। इसमें न्यूयॉर्क में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के अहम योगदान को भी मान्यता दी गई है।</p>
<p>समुदाय ने राज्य के सांस्कृतिक, आर्थिक और नागरिक जीवन में अहम योगदान दिया है। घोषणा में बताया गया कि भारत की आजादी की राह अहिंसक विरोध, सच्चाई, आत्म-अनुशासन और नैतिक साहस जैसे मूल्यों के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता से बनी थी। इसमें यह भी कहा गया कि अमेरिका में हर साल भारत के स्वतंत्रता दिवस का आयोजन अब अलग-अलग संस्कृतियों के बीच सद्भाव की एक शानदार मिसाल बन चुका है। रंग-बिरंगे समारोहों में कई पीढ़ियों के लोग एक साथ शामिल होते हैं। वे भारत और अमेरिका की समृद्ध देशभक्ति की परंपराओं का गर्व के साथ सम्मान करते हैं। ये आयोजन दोनों लोकतांत्रिक देशों को जोड़ने वाले गहरे संबंधों का प्रतीक हैं।</p>
<p><strong>80वें स्वतंत्रता दिवस पर क्या रहेगा खास?</strong><br>
भारत अब अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है। इस साल के समारोह में 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने को भी खास तौर पर याद किया जाएगा। इस ऐतिहासिक मौके पर 'युवा शक्ति' पर भी विशेष जोर रहेगा। इसमें छात्रों और युवा नागरिकों की उपलब्धियों और उनके योगदान को सम्मान दिया जाएगा। 80वें स्वतंत्रता दिवस के समारोहों में भारत की गहरी ऐतिहासिक परंपराओं के साथ देश की नई पीढ़ी और उसके भविष्य की ओर बढ़ते कदमों को भी प्रमुखता दी जाएगी।</p>]]> </content:encoded>
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<title>चीन की ‘अंडरवियर सिटी’! यहां इनरवियर से चलती है पूरी इकोनॉमी, जानें पूरी कहानी</title>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:19:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>चीन, की, ‘अंडरवियर, सिटी’, यहां, इनरवियर, से, चलती, है, पूरी, इकोनॉमी, जानें, पूरी, कहानी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गुआराओ</strong><br>
एक फैक्ट्री में दर्जनों कर्मचारी अपने-अपने काम में जुटे हैं. कहीं सिलाई मशीन की लगातार आवाज सुनाई दे रही है तो कहीं तैयार ब्रा के ढेर लगे हैं. हर कर्मचारी को उत्पादन की एक छोटी-सी जिम्मेदारी मिली है. कोई कपड़ा काट रहा है, कोई सिलाई कर रहा है और कोई अगले चरण के लिए उसे आगे बढ़ा रहा है. देखने में यह किसी आम कपड़ा फैक्ट्री जैसा लगता है, लेकिन चीन के इस शहर की खासियत कुछ और है। </p>
<p>यह शहर है गुआराओ , जिसे चीन में 'अंडरवियर सिटी' कहा जाता है. यहां की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा ब्रा, बनियान और अंडरवियर बनाने के कारोबार पर टिका है. यहां हर साल करोड़ों की संख्या में इनरवियर तैयार किए जाते हैं और चीन के साथ-साथ दूसरे देशों में भी भेजे जाते हैं। </p>
<p><strong>हर दिन बनते हैं लाखों इनरवियर</strong><br>
गुआराओ की एक अंडरवियर फैक्ट्री में रोजाना करीब 30 से 40 हजार मोटी पैड वाली ब्रा और अंडरवियर तैयार होती हैं. फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारी उत्पादन लाइन पर एक ही काम को बार-बार करते हैं. एक कर्मचारी का काम पूरा होते ही कपड़ा अगले कर्मचारी के पास पहुंच जाता है और इसी तरह धीरे-धीरे तैयार होती है एक ब्रा या अंडरवियर। </p>
<p>गुआराओ में ऐसी सिर्फ एक-दो फैक्ट्रियां नहीं हैं. पूरे शहर में हजारों छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां अंडरवियर बनाने के काम में लगी हैं. आंकड़ों के मुताबिक, शहर में हर साल करीब 35 करोड़ ब्रा और 43 करोड़ बनियान और अंडरवियर तैयार किए जाते हैं. यहां बनने वाले इनरवियर का बड़ा हिस्सा चीन के घरेलू बाजार में बिकता है, जबकि काफी सामान विदेशों में भी भेजा जाता है। </p>
<p>कहा जाता है कि शहर के औद्योगिक उत्पादन में अंडरवियर से जुड़े सामान की हिस्सेदारी करीब 80 फीसदी है. यानी इस शहर में कपड़े का कारोबार कहें या अंडरवियर की इंडस्ट्री, दोनों लगभग एक ही बात हो गई है। </p>
<p><strong>सड़क से फैक्ट्री तक… हर जगह अंडरवियर का कारोबार</strong><br>
गुआराओ में अंडरवियर सिर्फ फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं है. शहर में जगह-जगह लिंजरी के विज्ञापन देखने को मिलते हैं. बड़े-बड़े होर्डिंग्स पर मॉडल्स को अलग-अलग तरह के अंडरवियर पहने दिखाया जाता है. इसी वजह से स्थानीय प्रशासन भी गुआराओ को 'अंडरवियर सिटी' यानी 'अंडरवियर का शहर' कहता है। </p>
<p>शहर के लिए यह उद्योग सिर्फ कपड़े बनाने का काम नहीं, बल्कि रोजगार और कमाई का सबसे बड़ा जरिया है. हजारों लोग सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से इसी कारोबार से जुड़े हैं। </p>
<p><strong>1982 में शुरू हुआ था अंडरवियर का कारोबार</strong><br>
गुआराओ में अंडरवियर बनाने का कारोबार बहुत पुराना नहीं है. इसकी शुरुआत करीब 1982 में हुई थी. पड़ोसी हांगकांग और ताइवान से आए निवेश ने यहां इस उद्योग को बढ़ने में मदद की। </p>
<p>शहर की लोकेशन और अपेक्षाकृत सस्ता मजदूर मिलने की वजह से यहां फैक्ट्रियां तेजी से बढ़ने लगीं. खासकर 1995 से 2005 के बीच अंडरवियर का कारोबार तेजी से फैला और गुआराओ एक बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर गया.लेकिन तेज औद्योगिक विकास के साथ शहर को प्रदूषण जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ा। </p>
<p><strong>सिर्फ अंडरवियर पर टिकी अर्थव्यवस्था, अब बढ़ी चिंता</strong><br>
गुआराओ की सबसे बड़ी ताकत ही अब उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बनती दिख रही है. शहर का उद्योग मुख्य रूप से एक ही क्षेत्र पर निर्भर है. ऐसे में अगर अंडरवियर के कारोबार में मंदी आती है या दूसरे देशों से प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, तो इसका सीधा असर पूरे शहर पर पड़ता है। </p>
<p>फैक्ट्री मालिकों का कहना है कि उत्पादन की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन ग्राहक ज्यादा कीमत चुकाने के लिए तैयार नहीं हैं. यानी खर्च बढ़ रहा है, लेकिन सामान की कीमत उसी हिसाब से बढ़ाना मुश्किल है. इसका असर छोटे और मध्यम स्तर की फैक्ट्रियों पर भी पड़ रहा है। </p>
<p><strong>थाईलैंड और वियतनाम से बढ़ी टक्कर</strong><br>
गुआराओ के सामने अब सिर्फ घरेलू बाजार की चुनौती नहीं है. थाईलैंड और वियतनाम जैसे देश भी अंडरवियर बनाने के क्षेत्र में चीन को टक्कर दे रहे हैं. इन देशों में कुछ मामलों में मैन्युफैक्चरिंग लागत और टैक्स कम होने के कारण कंपनियों के लिए वहां उत्पादन करना ज्यादा फायदेमंद पड़ सकता है. 2008 के बाद से मिड और लो-एंड अंडरवियर के कुछ ऑर्डर चीन से इन देशों की ओर जाने लगे. इसका असर गुआराओ के निर्यात पर भी पड़ा। </p>
<p>चीन की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ी, लेकिन गुआराओ जैसे कई छोटे औद्योगिक शहर अपनी पुरानी इंडस्ट्री से बाहर नहीं निकल पाए. अंडरवियर उद्योग पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता अब शहर के लोगों को परेशान कर रही है। </p>
<p>कई लोग बेहतर रोजगार और भविष्य की तलाश में आसपास के शहरों और दूसरे देशों की ओर जाने लगे हैं. कुछ फैक्ट्री मालिक कारोबार बंद करके शहर छोड़ चुके हैं.</p>
<p>गुआराओ की कहानी सिर्फ एक शहर की कहानी नहीं है. चीन में ऐसे कई शहर हैं जहां एक ही तरह के सामान का उत्पादन पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था को चलाता है. किसी शहर में प्लास्टिक के खिलौने बनते हैं तो किसी में कपड़े या दूसरे सस्ते सामान। </p>
<p>ऐसे 'वन-इंडस्ट्री टाउन' ने चीन को दुनिया का बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में अहम भूमिका निभाई. लेकिन इन शहरों की मुश्किल यह है कि अगर सस्ता उत्पादन करने वाला कोई दूसरा देश बाजार में आ जाए, तो पूरी स्थानीय अर्थव्यवस्था दबाव में आ सकती है। </p>
<p>गुआराओ में आज भी सिलाई मशीनों की आवाज और अंडरवियर के ढेर दिखाई देते हैं. लेकिन इन करोड़ों ब्रा और अंडरवियर के पीछे अब एक सवाल भी खड़ा है. अगर पूरी अर्थव्यवस्था एक ही उद्योग पर टिकी हो, तो बदलते वक्त के साथ शहर खुद को कितना बदल पाएगा?</p>]]> </content:encoded>
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<title>चीन के पड़ोस में बदले समीकरण, भारत के लिए खुला बड़ा रणनीतिक मौका; ड्रैगन की बढ़ी टेंशन</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जिस तरह के हालात बन रहे हैं, उनसे दुनिया के तमाम देश सतर्क हो गए हैं. जिस तरह से संप्रभु देश पर अटैक किए जा रहे हैं, उनसे अन्‍य देशों में डर का भाव पैदा हो रहा है. इसका असर ग्‍लोबल लेवल पर स्‍पष्‍ट तौर पर देखा जा सकता है. … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:19:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>पश्चिम एशिया में जिस तरह के हालात बन रहे हैं, उनसे दुनिया के तमाम देश सतर्क हो गए हैं. जिस तरह से संप्रभु देश पर अटैक किए जा रहे हैं, उनसे अन्‍य देशों में डर का भाव पैदा हो रहा है. इसका असर ग्‍लोबल लेवल पर स्‍पष्‍ट तौर पर देखा जा सकता है. हथियार खरीदने या फिर उसे डेवलप करने पर इन्‍वेस्‍टमेंट काफी बढ़ चुका है. सालों से शांति और डिफेंसिव डिफेंस पॉलिसी (सुरक्षात्‍मक रक्षा नीति) पर चलने वाले देश भी अब अपने सिस्‍टम को दुरुस्‍त करने में जुट गए हैं. उनमें जापान का नाम सबसे टॉप पर है. दशकों से शांतिपूर्ण और डिफेंसिव अप्रोच वाली नीति पर चलने वाला जापान अब अपनी इस नीति से इतर चलता हुआ दिख रहा है. हाल में जापान की ओर से दो मिसाइलों का परीक्षण किया गया है. इनमें से एक मिसाइल की रेंज तो 1600 किलोमीटर बताई जा रही है. इससे इंडो-पैसिफिक रेंज में पावर बैलेंस की स्थिति बनने की संभावना प्रबल हो गई है. दूसरी तरफ, चीन के लिए यह खबर कतई अच्‍छी नहीं है, क्‍योंकि निकट भविष्‍य में उसकी मनमानियों पर रोक लग सकती है. सामरिक रूप से यह स्थिति भारत के लिए काफी अच्‍छी साबित हो सकती है, क्‍योंकि भारत और जापान के बीच ऐतिहासिक रूप से अच्‍छे संबंध हैं. भारत के बॉर्डर इलाके में चीन अपना नापाक मंसूबा समय-समय पर दिखाता रहा है, ऐसे में हिंद-प्रशांत में सैन्‍य रूप से मजबूत दोस्‍त के होने से तस्‍वीर बदल सकती है। </p>
<p>जापान ने अपनी रक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देते हुए लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल सिस्‍टम्‍स के सफल परीक्षण किए हैं. ‘एशिया टाइम्‍स’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी टॉमहॉक (Tomahawk) क्रूज मिसाइल और स्वदेशी अपग्रेडेड टाइप-12 मिसाइल के परीक्षणों को केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि जापान की सैन्य रणनीति में बड़े परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है. अब तक केवल रक्षात्मक सैन्य नीति अपनाने वाला जापान धीरे-धीरे ऐसी क्षमता विकसित कर रहा है, जिससे वह दुश्मन के ठिकानों पर जवाबी हमला भी कर सके. यह बदलाव हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर किया जा रहा है. जुलाई के अंतिम सप्ताह में जापान के रक्षा मंत्रालय ने दो महत्वपूर्ण टेस्‍ट किए. पहला परीक्षण जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JMSDF) ने अमेरिकी नेवी के सहयोग से प्रशांत महासागर में किया, जिसमें कोंगो क्‍लास के एजिस डिस्‍ट्रॉयर जेएस चोकाई (JS Chokai) से टॉमहॉक लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल दागी गई. इसके साथ ही जापान सतह पर तैनात वॉरशिप से टॉमहॉक मिसाइल का <strong>प्रक्षेपण करने वाला तीसरा विदेशी देश बन गया। </strong></p>
<p><strong>900 किलोमीटर रेंज वाली मिसाइल</strong><br>
दूसरा परीक्षण गिफू एयर बेस पर किया गया, जहां जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JASDF) ने F-2 लड़ाकू विमान से अपग्रेडेड टाइप-12 एयर-लॉन्च मिसाइल का फ्लाइट टेस्‍ट शुरू किया. इस नई मिसाइल की मारक क्षमता 900 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है, जबकि भविष्य में विकसित किए जा रहे वेरिएंट की रेंज 1,600 किलोमीटर तक हो सकती है. इन हथियारों को कम रडार पहचान वाली, नेटवर्क आधारित और लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाली प्रणाली के रूप में विकसित किया जा रहा है। </p>
<p><strong>अमेरिका से 400 टॉमहॉक की खरीद</strong><br>
जापान फिलहाल अमेरिका से 400 टॉमहॉक मिसाइलें खरीद रहा है. इन्हें अंतरिम व्यवस्था के रूप में शामिल किया जाएगा, जबकि वित्त वर्ष 2027 तक स्वदेशी लंबी दूरी की स्टैंडऑफ मिसाइलों को सेवा में शामिल करने की योजना है. आधिकारिक तौर पर टोक्यो अभी भी अपनी रक्षात्मक नीति को बरकरार रखने की बात कहता है, लेकिन नई क्षमताओं को देखते हुए कई रणनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि जापान अब केवल हमले को रोकने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर दुश्मन के सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करने में भी सक्षम होना चाहता है। </p>
<p><strong>चीन की मनमानी पर लगाम</strong><br>
इस बदलाव का सबसे अधिक असर चीन के साथ रणनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है. हाल के महीनों में जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी द्वारा परमाणु हथियारों पर चर्चा की संभावना जताने और प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची द्वारा ताइवान को जापान की संप्रभुता से जुड़ा सुरक्षा मुद्दा बताए जाने के बाद बीजिंग की चिंताएं और बढ़ गई हैं. विश्लेषकों का मानना है कि यदि जापान पहली बार हमला करने की क्षमता विकसित करता है, तो चीन भी अपनी परमाणु और सैन्य रणनीति में बदलाव कर सकता है, जिससे क्षेत्र में सामरिक अस्थिरता बढ़ने का खतरा रहेगा. हालांकि, केवल लंबी दूरी की मिसाइलें हासिल कर लेना पर्याप्त नहीं है. जापान के पास अभी स्वतंत्र ‘किल चेन’ यानी लक्ष्य की पहचान, निगरानी, हमला और नुकसान के आकलन की पूरी क्षमता नहीं है. इस पूरी प्रक्रिया के लिए वह अभी भी अमेरिकी खुफिया, निगरानी और टोही (ISR) सिस्‍टम पर काफी हद तक निर्भर है. यदि किसी संकट के दौरान अमेरिका और जापान के बीच समन्वय में कमी आती है या चीन कम्‍यूनिकेशन और मॉनिटरिंग मेकेनिज्‍म को बाधित करने में सफल होता है, तो जापान की नई मिसाइल क्षमता का प्रभाव सीमित हो सकता है। </p>
<p><strong>जापान की चुनौतियां</strong><br>
जापान के सामने एक अन्य बड़ी चुनौती हथियारों के प्रोडक्‍शन और स्‍टोरेज की है. रक्षा विश्लेषकों के अनुसार देश का रक्षा उद्योग अभी सीमित उत्पादन क्षमता वाला है और कई महत्वपूर्ण पुर्जों के लिए विदेशों पर निर्भर है. अमेरिका में टॉमहॉक मिसाइलों के उत्पादन में तेजी लाने में भी कई वर्ष लग सकते हैं. वैश्विक संघर्षों और बढ़ती मांग के कारण इन मिसाइलों की आपूर्ति में लगभग 47 महीने तक का समय लग सकता है. इसके अलावा जापान ने F-35 लड़ाकू विमान, आधुनिक F-15 और एजिस वॉरशिप जैसे महंगे प्लेटफॉर्म पर अधिक निवेश किया है, जबकि पर्याप्त संख्या में मिसाइलों और इंटरसेप्टर का भंडार अभी भी चुनौती बना हुआ है। </p>
<p><strong>युद्ध पर क्‍या कहता है जापान का संविधान</strong><br>
रणनीतिक स्तर पर भी कई प्रश्न बने हुए हैं. जापानी संविधान और वॉर डिफेंस पॉलिसी के तहत सैन्य बल का उपयोग केवल आत्मरक्षा के लिए किया जा सकता है. सरकार का तर्क है कि यदि किसी सशस्त्र हमले के जवाब में न्यूनतम आवश्यक बल का प्रयोग किया जाए तो दुश्मन के क्षेत्र में हमला भी संवैधानिक हो सकता है. लेकिन विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी कोमेतो का कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि जवाबी कार्रवाई केवल वास्तविक हमले के बाद होगी या दुश्मन की तैयारी को भी हमले का आधार माना जाएगा. उनका तर्क है कि अस्पष्ट नियम भविष्य में पूर्व-निवारक हमलों का रास्ता खोल सकते हैं और जापान को अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य अभियानों में अधिक गहराई से शामिल कर सकते हैं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>पुतिन का बड़ा कदम! जापान के दावे वाले कुरील द्वीप पहुंचे, बढ़ा रूस&#45;जापान तनाव</title>
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<description><![CDATA[ मॉस्को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अचानक जापान के दावे वाले एक ऐसे आईलैंड पर पहुंच गए हैं, जिसे लेकर दोनों देशों के बीच दशकों से विवाद चला आ रहा है. रूसी मीडिया के मुताबिक, पुतिन कुरील द्वीप समूह के इतुरुप यानी एतोरोफु आईलैंड पहुंचे. यह इलाका जापान के होक्काइडो द्वीप के उत्तर में स्थित … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 22:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मॉस्को</strong></p>
<p>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अचानक जापान के दावे वाले एक ऐसे आईलैंड पर पहुंच गए हैं, जिसे लेकर दोनों देशों के बीच दशकों से विवाद चला आ रहा है. रूसी मीडिया के मुताबिक, पुतिन कुरील द्वीप समूह के इतुरुप यानी एतोरोफु आईलैंड पहुंचे. यह इलाका जापान के होक्काइडो द्वीप के उत्तर में स्थित है और रूस के कब्जे में है, लेकिन जापान इसे अपना उत्तरी क्षेत्र मानता है। </p>
<p>राष्ट्रपति पुतिन का यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि रूस और जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अब तक औपचारिक शांति संधि नहीं की है और इस विवाद को इसकी बड़ी वजह माना जाता है। </p>
<p>राष्ट्रपति पुतिन ने इतुरुप में यास्नी फिश प्रोसेसिंग प्लांट का दौरा किया. रूसी सरकारी समाचार एजेंसी TASS के मुताबिक, यह कुरील द्वीप समूह की पुतिन की पहली व्यक्तिगत यात्रा है. उन्होंने स्थानीय अधिकारियों से मुलाकात की और मछली उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों को देखा. एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्थानीय मौसम की तारीफ करते हुए इसे रिसॉर्ट जैसा बताया. इस दौरान उन्होंने स्थानीय मछलियों और कैवियार का भी जायजा लिया। </p>
<p><strong>जापान ने जताया कड़ा विरोध<br>
पुतिन के इतुरुप पहुंचने पर जापान ने तुरंत वि</strong>रोध दर्ज कराया. जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने कहा कि एतोरोफु समेत उत्तरी क्षेत्र ऐतिहासिक और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर जापान का अभिन्न हिस्सा हैं. उन्होंने रूस के राष्ट्रपति की यात्रा को लेकर जापान की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया. यह दौरा दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद क्षेत्रीय विवाद को और तूल दे सकता है। </p>
<p><strong>उत्तर कोरिया की मिसाइल के बाद पुतिन का दौरा</strong><br>
पुतिन का इतुरुप दौरा ऐसे समय हुआ है जब रूस के सुदूर पूर्व में बड़े नौसैनिक सैन्य अभ्यास चल रहे हैं. इसके एक दिन पहले रूस के सहयोगी उत्तर कोरिया ने कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्वी समुद्री इलाके की ओर बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी. यह परीक्षण दक्षिण कोरिया और अमेरिका के प्रस्तावित संयुक्त सैन्य अभ्यास से कुछ दिन पहले हुआ है, जिसका प्योंगयांग लगातार विरोध करता रहा है। </p>
<p>रूस, उत्तर कोरिया और चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक नजदीकी और जापान के साथ क्षेत्रीय विवादों के बीच पुतिन का जापान के दावे वाले आईलैंड का दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य तनाव पहले ही बढ़ा हुआ है. हालांकि इस दौरे को सीधे किसी नए सैन्य टकराव की शुरुआत मानना जल्दबाजी होगी, लेकिन इससे रूस-जापान के पुराने क्षेत्रीय विवाद और इलाके की सुरक्षा चिंताओं पर बहस जरूर तेज हो गई है। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>OpenAI के दफ्तर में घुसे प्रदर्शनकारी, 13 गिरफ्तार; अमेरिका&#45;यूरोप में क्यों बढ़ रहा AI का विरोध?</title>
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<description><![CDATA[ वॉशिंगटन अमेरिका और यूरोप में AI के खिलाफ विरोध भी तेज होता जा रहा है. ताजा मामला अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी का है, जहां प्रदर्शनकारियों ने OpenAI के दफ्तर में घुसकर AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के खिलाफ प्रदर्शन किया. फ्यूचरिज्म की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में OpenAI  के वॉशिंगटन डीसी स्थित … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 21:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>OpenAI, के, दफ्तर, में, घुसे, प्रदर्शनकारी, गिरफ्तार, अमेरिका-यूरोप, में, क्यों, बढ़, रहा, का, विरोध</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन</strong><br>
अमेरिका और यूरोप में AI के खिलाफ विरोध भी तेज होता जा रहा है. ताजा मामला अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी का है, जहां प्रदर्शनकारियों ने OpenAI के दफ्तर में घुसकर AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के खिलाफ प्रदर्शन किया. फ्यूचरिज्म की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में OpenAI  के वॉशिंगटन डीसी स्थित लॉबिंग ऑफिस में करीब दो घंटे तक प्रदर्शन हुआ और 13 छात्रों को गिरफ्तार किया गया। </p>
<p>यह सिर्फ एक कंपनी के दफ्तर के बाहर हुआ नॉर्मल प्रोटेस्ट नहीं है. दरअसल अमेरिका और यूरोप में पिछले कुछ समय से AI को लेकर अलग-अलग मुद्दों पर लोगों का गुस्सा सामने आ रहा है. कहीं लोगों को अपनी नौकरी जाने का डर है, कहीं कलाकार अपने काम के इस्तेमाल को लेकर परेशान हैं, तो कहीं AI के लिए बनाए जा रहे बड़े डेटा सेंटर्स बिजली और पानी की भारी खपत को लेकर विरोध का कारण बन रहे हैं। </p>
<p>मार्च 2026 में सैन फ्रांसिस्को में भी प्रोटेस्टर्स OpenAI के मुख्यालय से लेकर एलॉन मस्क के xAI तक मार्च कर चुके हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, प्रोटेस्टर्स AI के डेवेलपमेंट को रोकने की मांग कर रहे थे। </p>
<p><strong>OpenAI के दफ्तर में प्रदर्शन क्यों हुआ?</strong><br>
वॉशिंगटन डीसी में हुआ यह प्रदर्शन AI के तेजी से बढ़ते असर और उसके संभावित नुकसान को लेकर था. उनका कहना है कि एआई कंपनियां जिस रफ्तार से नई तकनीक बना रही हैं, उसके मुकाबले सरकारों की तरफ से नियम और सुरक्षा इंतजाम उतनी तेजी से नहीं बन रहे हैं. यही वजह है कि अमेरिका में एआई को लेकर विरोध करने वाले अलग-अलग समूह अब कंपनियों के दफ्तरों, सरकारी संस्थानों और डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। </p>
<p>मार्च में सैन फ्रांसिस्को में OpenAI,  Anthropic और Google Deepmind से जुड़े ठिकानों पर भी प्रोटेस्ट हुआ था. जुलाई में सैन फ्रांसिस्को में स्टॉपएआई से जुड़े लोगों ने इन कंपनियों के खिलाफ मार्च किया और एआई की रफ्तार पर सवाल उठाए। </p>
<p><strong>सबसे बड़ा डर नौकरी जाने का है</strong><br>
AI के खिलाफ गुस्से की सबसे बड़ी वजह नौकरी है. ब्रिटेन में किंग्स कॉलेज लंदन की 2026 की एक स्टडी में सामने आया कि करीब 10 में से 7 लोग AI की वजह से होने वाले नौकरी के नुकसान के आर्थिक असर को लेकर चिंतित हैं. 57 फीसदी लोगों को लगता है कि AI बड़े पैमाने पर बेरोजगारी ला सकता है. वहीं करीब 22 फीसदी लोगों का मानना है कि AI की वजह से इतनी तेजी से नौकरियां खत्म हो सकती हैं कि इससे सामाजिक अशांति पैदा हो सकती है। </p>
<p>युवाओं और नई नौकरी शुरू करने वालों को लेकर डर और ज्यादा है. स्टडी में करीब 10 में से 6 लोगों ने माना कि एआई की वजह से शुरुआती स्तर की सफेदपोश नौकरियों पर बड़ा असर पड़ सकता है.  यही डर अब सिर्फ कर्मचारियों तक नहीं है. यूरोप में सरकारें भी इस बात पर चर्चा कर रही हैं कि AI के दौर में लोगों की नौकरियां कैसे बचाई जाएं और कर्मचारियों को नई स्किल कैसे दी जाए। </p>
<p><strong>कलाकारों को डर, उनका काम लेकर AI बना रहा कंटेंट</strong><br>
AI के खिलाफ दूसरा बड़ा मोर्चा कलाकारों और क्रिएटर्स का है. AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए बड़ी मात्रा में डेटा की जरूरत होती है. इसमें इंटरनेट पर मौजूद किताबें, तस्वीरें, संगीत, लेख और दूसरे तरह का कंटेंट शामिल हो सकता है. कलाकारों और लेखकों का सवाल है कि अगर उनकी मेहनत से तैयार किए गए काम का इस्तेमाल एआई मॉडल को ट्रेन करने में हो रहा है, तो इसके लिए उनकी इजाजत और उन्हें पैसे क्यों नहीं मिल रहे?</p>
<p>यूरोप में यह मुद्दा इतना बड़ा हो चुका है कि यूरोपीय संसद ने एआई और कॉपीराइट को लेकर नए नियमों की जरूरत पर जोर दिया है. संसद की रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई ट्रेनिंग में कॉपीराइट वाले काम के इस्तेमाल को लेकर मौजूदा नियम काफी नहीं हैं. इसमें एआई कंपनियों से ज्यादा पारदर्शिता और क्रिएटर्स के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा की मांग की गई है। </p>
<p><strong>लेखकों ने खाली पन्नों वाली किताबें छाप कर किया विरोध</strong><br>
मार्च में करीब 10 हजार लेखकों ने ब्रिटेन में एआई के खिलाफ एक अनोखा विरोध भी किया था. उन्होंने ऐसी किताब प्रकाशित की जिसमें लेखकों के नाम तो थे, लेकिन बाकी पन्ने खाली थे. इसका मकसद यह दिखाना था कि अगर एआई कंपनियों को इंसानों के लिखे काम का इस्तेमाल बिना इजाजत करने दिया गया, तो भविष्य में असली लेखकों और उनके काम की जगह क्या बचेगी। </p>
<p>संगीत की दुनिया में भी ऐसा विरोध देखने को मिला है. एक हजार से ज्यादा कलाकारों ने AI के खिलाफ एक ऐसा म्यूजिक एल्बम जारी किया था जिसमें रिकॉर्डिंग की जगह खाली स्टूडियो की आवाजें थीं. यह विरोध एआई मॉडल की ट्रेनिंग में कलाकारों के काम के इस्तेमाल को लेकर था। </p>
<p><strong>अमेरिका में अब AI डेटा सेंटर भी विरोध की वजह बन रहे हैं</strong><br>
AI के खिलाफ अमेरिका में एक नया मोर्चा डेटा सेंटर को लेकर खुला है. AI मॉडल चलाने के लिए बहुत बड़ी कंप्यूटिंग ताकत चाहिए. इसके लिए विशाल डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं. इन सेंटरों को चलाने के लिए बहुत ज्यादा बिजली और पानी की जरूरत होती है. यही बात स्थानीय लोगों को परेशान कर रही है. कहीं लोग डेटा सेंटर के शोर से परेशान हैं तो कहीं इसके साइड इफेक्ट्स से। </p>
<p>अमेरिका के कई इलाकों में लोगों का कहना है कि उनके शहर और गांव AI कंपनियों के डेटा सेंटर के लिए बिजली, पानी, जमीन और दूसरी सुविधाओं का बोझ क्यों उठाएं. उन्हें यह भी डर है कि बड़े डेटा सेंटर से पर्यावरण पर असर पड़ेगा, बिजली की कीमत बढ़ सकती है और स्थानीय लोगों को जितनी नौकरियां मिलने की उम्मीद दिखाई जा रही है, असल में उतनी नौकरियां लंबे समय तक नहीं मिलेंगी। </p>
<p>हाल के महीनों में अमेरिका में डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स के खिलाफ विरोध काफी बढ़ा है. फ्लोरिडा में AI डेटा सेंटर के विरोध में अलग-अलग विचारधारा वाले लोग भी एक साथ आए हैं. वहां लोगों की चिंता पानी, पर्यावरण, बिजली और स्थानीय समुदाय की भूमिका को लेकर है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान के डर से बदला ट्रंप का विमान? खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताई तुर्की से लौटने की पूरी कहानी</title>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन तुर्की में अमेरिकी राष्ट्रपति की जान को खतरा था और इसके लिए उन्होंने ट्रक में छिपकर अपना प्लेन बदल लिया. दुनिया को लगा कि ट्रंप अपने एयर फोर्स वन प्लेन में बैठकर जा रहे हैं लेकिन ट्रंप चकमा देते हुए किसी और प्लेन से अमेरिका पहुंचे. मीडिया में इस खबर के सामने आने के … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 20:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, के, डर, से, बदला, ट्रंप, का, विमान, खुद, अमेरिकी, राष्ट्रपति, ने, बताई, तुर्की, से, लौटने, की, पूरी, कहानी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन</strong></p>
<p>तुर्की में अमेरिकी राष्ट्रपति की जान को खतरा था और इसके लिए उन्होंने ट्रक में छिपकर अपना प्लेन बदल लिया. दुनिया को लगा कि ट्रंप अपने एयर फोर्स वन प्लेन में बैठकर जा रहे हैं लेकिन ट्रंप चकमा देते हुए किसी और प्लेन से अमेरिका पहुंचे. मीडिया में इस खबर के सामने आने के बाद आखिरकर ट्रंप ने भी इसे स्वीकार कर लिया है. डोनाल्ड ट्रंप ने माना है कि पिछले महीने तुर्की में हुए नाटो सम्मेलन से लौटते समय उन्होंने चुपचाप अपना प्लेन बदल लिया था. यह फैसला सीक्रेट सर्विस और अमेरिकी सेना की सलाह पर लिया गया था, क्योंकि उन्हें लेकर एक खतरा था. ट्रंप ने यह बात वॉशिंगटन पोस्ट की इस घटना पर रिपोर्ट आने के कुछ ही समय बाद मान ली है। </p>
<p>मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने सीक्रेट सर्विस और सेना की बात मानी और दूसरे प्लेन में बैठ गए। <br>
ट्रंप ने कहा, “यह पूरी तरह सीक्रेट सर्विस पर निर्भर है. मैं वही करता हूं जो वे चाहते हैं. मैं सीक्रेट सर्विस और सेना की बात मानता हूं. वे चाहते थे कि मैं दूसरी फ्लाइट और दूसरे प्लेन से जाऊं. उसकी सुरक्षा भी उतनी ही थी, लेकिन वे चाहते थे कि मैं ऐसा करूं, इसलिए मैंने किया. मैं वही करता हूं जो वे कहते हैं. मुझे लगता है कि वहां कोई खतरा था. मुझे बहुत सारी धमकियां मिलती हैं। </p>
<p><strong>रिपोर्ट में क्या पता चला?</strong><br>
राष्ट्रपति ट्रंप का यह बयान वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के बाद आया है. अखबार ने बताया था कि 8 जुलाई को तुर्की में नाटो सम्मेलन में शामिल होने के कुछ समय बाद ट्रंप ने ईरान की तरफ से हत्या की कोशिश के खतरे के बीच चुपचाप देश से बाहर निकलने के लिए एक सीक्रेट फ्लाइट ली थी। </p>
<p>खास बात है कि ट्रंप को बचाने के लिए ऐसी कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी बहुत कम लोगों को थी. इसे पत्रकारों और व्हाइट हाउस के कुछ कर्मचारियों से भी छिपाकर किया गया था. उन्हें तो लगा था कि वे उसी प्लेन में हैं, जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप भी सफर कर रहे हैं. जब मीडिया ने ट्रंप से पूछा कि क्या एयर फोर्स वन में उड़ान भरना खतरनाक था, तो उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि जिस प्लेन से मैंने उड़ान भरी, वह असल में ज्यादा खतरे में था. क्योंकि मुझे लगता है कि हमलावरों के उस प्लेन को निशाना बनाने की ज्यादा संभावना थी। </p>
<p><strong>ट्रंप ने ट्रक में बैठकर प्लेन बदला</strong><br>
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप कैमरों के सामने तो पुराने एयर फोर्स वन विमान में सवार हुए थे. लेकिन कुछ मिनट बाद उन्हें चुपचाप एक छोटे विमान एयर फोर्स सी-32ए में ले जाया गया. दूसरे प्लेन में चुपचाप जाने के लिए एयरपोर्ट के एक कैटरिंग ट्रक का इस्तेमाल किया गया. ऐसे ट्रक आमतौर पर उड़ान से पहले प्लेन में खाना और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाने के लिए इस्तेमाल होते हैं। </p>
<p>ट्रंप और उनके कई सहयोगी इसी कैटरिंग ट्रक में सवार हुए. ट्रक को हाइड्रोलिक सिस्टम की मदद से ऊपर उठाकर प्लेन के पास ले जाया गया. इसे एयर फोर्स वन के मुख्य दरवाजे के दूसरी तरफ मौजूद एक दरवाजे के सामने खड़ा किया गया, ताकि ट्रंप को किसी की नजर में आए बिना प्लेन से बाहर निकाला जा सके. इस तरह एयर फोर्स वन को एक “दिखावटी प्लेन” यानी डिकॉय बनाया गया था. उसमें मीडिया के लोग और व्हाइट हाउस के कुछ कर्मचारी मौजूद थे, जबकि ट्रंप पहले ही दूसरे प्लेन में चले गए थे. दुनिया को लग रहा था कि ट्रंप भी उसी प्लेन पर थे, जबकि ऐसा नहीं था। </p>
<p>अब सवाल उठ रहा है कि क्या मीडिया के लोगों और व्हाइट हाउस के कुछ कर्मचारियों की जान को खतरे में डाला गया. अगर ट्रंप की जान को खतरा था तो इन लोगों की जान को भी तो खतरा था. अगर सचमुच इस प्लेन पर अटैक हो जाता तो। </p>]]> </content:encoded>
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<title>बलूचिस्तान में बढ़ा तनाव! BLA के हमलों से पाकिस्तानी सेना पर दबाव, मुखबिरों को निशाना बनाने का दावा</title>
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<description><![CDATA[ बलूचिस्तान  बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने बलूचिस्तान प्रांत को अब किस तरह से अपने कब्जे में कर लिया है, इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि BLA सीधे-सीधे कह रही है कि वो पाकिस्तानी हूकूमत के मुखबरिों को नहीं छोड़ेगी. हाल ही में इस संगठन ने क्वेटा में एक व्यक्ति की … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 19:30:15 +0530</pubDate>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बलूचिस्तान </strong><br>
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने बलूचिस्तान प्रांत को अब किस तरह से अपने कब्जे में कर लिया है, इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि BLA सीधे-सीधे कह रही है कि वो पाकिस्तानी हूकूमत के मुखबरिों को नहीं छोड़ेगी. हाल ही में इस संगठन ने क्वेटा में एक व्यक्ति की हत्या की जिम्मेदारी ली है. उनकी ओर से इसकी वजह बताते हुए कहा गया है कि मारे गए व्यक्ति का नाम फारूक मोहम्मद हसनी था और उसे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के साथ काम करने की वजह से मारा गया है। </p>
<p>सूत्रों के मुताबिक ये घटना क्वेटा के सरयाब मिल इलाके में हुई. BLA का कहना है कि मारे गए फारूक मोहम्मद शख्स हसनी को खुफिया एजेंसियों से जुड़े एक समूह का सदस्य माना जाता था. संगठन ने आरोप लगाया कि वह बलूचिस्तान में सैन्य और खुफिया कार्रवाइयों में मदद करता था. BLA की खुफिया ब्रांच ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखी हुई थी और जैसे ही वो मंगुचर से क्वेटा आया, उसे विद्रोही संगठन ने मौत के घाट उतार दिया। </p>
<p><strong>BLA  का ‘हंट एंड किल’ अभियान तेज </strong><br>
BLA  ने इसे ‘ऑपरेशन गोबात’ और नए ‘हंट एंड किल’ अभियान का हिस्सा बताया. संगठन का दावा है कि हसनी बलूच अलगाववादी आंदोलन के समर्थकों की पहचान कराने या उनके खिलाफ कार्रवाई में मदद करता था. इसके साथ ही उसे जबरन लापता किए जाने के मामलों में भी राज्य एजेंसियों की सहायता करने का आरोप लगाया गया. यह घटना ऐसे वक्त में हुई है, जब बलूचिस्तान में लंबे विद्रोह चल रहा है और बलूचों ने खुद को आजाद घोषित कर दिया है. BLA  समेत कई बलूच समूह पाकिस्तानी राज्य और सुरक्षा बलों पर राजनीतिक दमन, लापता होने और फर्जी मुठभेड़ों का आरोप लगाते रहे हैं और उनका खुलकर विरोध करते हैं। </p>
<p><strong>पाकिस्तानी फौज के हाथ-पांव काट रहा संगठन</strong><br>
पाकिस्तान सरकार इन समूहों को उग्रवादी और अलगाववादी बताती है, जो सुरक्षा कर्मियों, आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे पर हमले करते हैं. BLA इस वक्त काफी मजबूत स्थिति में है और वो अब अपनी कार्रवाइयों को ज्यादा खुफिया-आधारित बता रहा है. वह उन लोगों को निशाना बनाने का दावा करता है जिन्हें वह सहयोगी या मुखबिर मानता है, ताकि पाकिस्तानी फौज की पैठ इलाके में बिल्कुल खत्म हो जाए. क्वेटा की यह गोलीबारी संघर्ष के व्यक्तिगत स्वरूप को भी दिखाती है, जहां सुरक्षा बलों और सरकारी ठिकानों के साथ-साथ संदिग्ध सहयोगियों को भी निशाना बनाया जा रहा है. संगठन ने बलूचिस्तान की पूर्ण आजादी की अपनी मांग दोहराई है और चेतावनी दी है कि राज्य की मदद करने वालों को आगे भी निशाना बनाया जा सकता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>बशर अल असद को मौत की सजा! 24 साल तक सीरिया पर किया राज, देश छोड़कर रूस भागा था तानाशाह</title>
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<description><![CDATA[ दमिश्क सीरिया की एक अदालत ने देश के पूर्व शासक बशर अल-असद को मौत की सजा सुना दी. इस अदालत ने गृह युद्ध के दौरान युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराते हुए बशर अल-असद को उनकी गैर-मौजूदगी में मौत की सजा सुनाई. बशर अल-असद ने 24 सालों तक सीरिया पर शासन … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 20:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>बशर, अल, असद, को, मौत, की, सजा, साल, तक, सीरिया, पर, किया, राज, देश, छोड़कर, रूस, भागा, था, तानाशाह</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दमिश्क</strong></p>
<p>सीरिया की एक अदालत ने देश के पूर्व शासक बशर अल-असद को मौत की सजा सुना दी. इस अदालत ने गृह युद्ध के दौरान युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराते हुए बशर अल-असद को उनकी गैर-मौजूदगी में मौत की सजा सुनाई. बशर अल-असद ने 24 सालों तक सीरिया पर शासन किया था. लेकिन दिसंबर 2024 में इस्लामी ताकतों के दमिश्क के करीब पहुंचने के बाद बशर अल-असद अपने परिवार के साथ रूस भाग गए थे और तब से वहीं हैं। </p>
<p>13 सालों के गृह युद्ध में लगभग पांच लाख लोग मारे गए थे और लाखों लोग विस्थापित हुए. सीरिया का बुनियादी ढांचा बर्बाद हो चुका है। </p>
<p><strong>कोर्ट ने क्या कहा?</strong><br>
अदालत ने पाया कि 2011 में डेरा प्रांत में असद की सरकार द्वारा किए गए अपराध मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आते हैं. सीरियाई सेना के पूर्व लीडर और बशर के छोटे भाई माहेर अल-असद को भी मौत की सजा सुनाई गई है. इसके साथ ही अदालत ने बशर अल-असद के चचेरा भाई आतेफ नजीब को भी मौत की सजा दी है. आतेफ नजीब सीरियाई सेना के एक पूर्व ब्रिगेडियर जनरल हैं. 2011 में असद के शासन में नजीब दक्षिणी सीरिया के दारा प्रांत में पॉलिटिकल सिक्योरिटी ब्रांच के प्रमुख थे। </p>
<p>आतेफ नजीब को पिछले साल जनवरी में गिरफ्तार किया गया था. उन्हें हत्या, 15 साल से कम उम्र के बच्चों की जानबूझकर हत्या और यातना देने से मौत देने जैसे अपराधों का दोषी ठहराया गया है. अदालत ने नजीब को लेकर कहा कि उस पर लगे आरोप इंसानियत के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आते हैं और उन्हें सबसे कड़ी सजा, यानी मौत की सजा सुनाई गई है। </p>
<p><strong>असद के प‍िता ने 30 साल तक संभाली थी सत्‍ता</strong><br>
नजीब सीरियाई सेना के पूर्व ब्रिगेडियर जनरल हैं, जो 2011 में असद के शासनकाल के दौरान दक्षिणी सीरिया के दारा प्रांत में राजनीतिक सुरक्षा इकाई के प्रमुख थे। सीरिया में अभी अल सारा का शासन है जो तुर्की की मदद से सत्‍ता में आए हैं। हाल ही में सीरियाई राष्‍ट्रपति अल सारा ने पुतिन से मुलाकात की थी। अल सारा अमेरिका के साथ भी अपने रिश्‍ते मजबूत कर रहे हैं।</p>
<p>अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक इस आदेश से सीरियाई लोगों ने बड़ी राहत की सांस ली है। बशर अल असद ने अपने प‍िता की मौत के बाद साल 2000 में सत्‍ता संभाली थी। असद के पिता हाफिज अल असद ने करीब 30 साल तक सीरिया पर शासन किया था। बशर अल असद ने दिसंबर 2024 में पद से हटाए जाने तक सत्‍ता संभाली थी। सीरिया में साल 2011 में गृहयुद्ध शुरू हुआ था। इसे असद की सेना ने ताकत के बल पर कुचल द‍िया था। यह अशांति तेजी से पूरे देश में फैल गई थी।</p>
<p>
50 से ज्यादा सालों तक सीरिया पर हाफेज अल-असद और फिर उनके बेटे बशर अल-असद का शासन रहा. 'अरब स्प्रिंग' के दौरान, 2011 में 2.3 करोड़ की आबादी वाले इस देश में उनके दमनकारी शासन के खिलाफ विद्रोह शुरू हो गया. इससे 13 साल तक चला एक भयानक गृहयुद्ध छिड़ गया, जिसमें 'सीरियन ऑब्जर्वेटरी ऑफ ह्यूमन राइट्स' के अनुसार, पांच लाख से ज़्यादा लोग मारे गए। </p>
<p>लाखों लोग देश छोड़कर लेबनान, जॉर्डन, तुर्की और यूरोप चले गए. असद परिवार ने सत्ता में बने रहने के लिए धार्मिक और सांप्रदायिक तनावों का फायदा उठाया. यह वही विरासत है जिसके कारण सीरिया में अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ हिंसा फिर से भड़क रही है, जबकि यह वादा किया गया था कि देश के नए नेता सीरिया के लिए ऐसा राजनीतिक भविष्य बनाएंगे जिसमें सभी समुदायों को शामिल किया जाएगा और उनका प्रतिनिधित्व होगा। </p>
<p><strong>अभी सीरिया पर किसका शासन है?</strong><br>
बशर अल-असद को सत्ता से हटारकर सीरिया की कमान राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने संभाली है, जिसे अमेरिका ने अपना सपोर्ट दे रखा है. खास बात है कि साल 2013 में जिस समय बराक ओबामा राष्‍ट्रपति थे, अमेरिका ने शरा को ग्‍लोबल टेररिस्‍ट घोषित कर दिया था. उसकी गिरफ्तारी में मददगार जानकारी देने वाले को 1 करोड़ डॉलर का इनाम देने की घोषणा की थी. लेकिन जब दिसंबर 2024 में, असद का पतन हुआ तो व्‍हाइट हाउस ने चुपचाप इस इनाम के ऐलान को वापस ले लिया। </p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान जंग में अमेरिका को बड़ा झटका! 20 अमेरिकी ठिकाने प्रभावित, 42 विमान हुए नष्ट या क्षतिग्रस्त</title>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 15:30:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, जंग, में, अमेरिका, को, बड़ा, झटका, अमेरिकी, ठिकाने, प्रभावित, विमान, हुए, नष्ट, या, क्षतिग्रस्त</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन</strong><br>
फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया. इसका मकसद ईरान की मिसाइल, ड्रोन और सैन्य क्षमता को कमजोर करना था. जवाब में ईरान ने मध्य पूर्व में फैले अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए. रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने 2000 से अधिक मिसाइल और ड्रोन दागे। </p>
<p>इनमें बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और एकतरफा हमलावर ड्रोन शामिल थे. अमेरिका और सहयोगियों ने ज्यादातर को रोक लिया, लेकिन कई हमले लक्ष्य तक पहुंच गए. इससे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया और अमेरिकी सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा। </p>
<p>ईरानी हमलों से अमेरिका को करीब 13 अरब डॉलर (123,818 करोड़ रुपए) का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है. इसमें इमारतों, रडार सिस्टम, ईंधन डिपो, हैंगर और अन्य बुनियादी ढांचे की मरम्मत का खर्च शामिल है. कुल सैन्य अभियान की लागत पेंटागन के अनुसार 29 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जिसमें उपकरण मरम्मत भी शामिल है।  </p>
<p>सैटेलाइट इमेज और कांग्रेसनल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि नुकसान आधिकारिक बयानों से कहीं ज्यादा था. हैंगर, बैरक, संचार केंद्र और एयर डिफेंस सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हुए. कई ठिकानों को खाली करना पड़ा या संचालन सीमित करना पड़ा। </p>
<p><strong>प्रभावित सुविधाएं और विमानों का नुकसान</strong><br>
ईरान ने आठ देशों में 20 अमेरिकी या अमेरिका से जुड़े सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया. इनमें सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, इराक और अन्य जगहों के एयर बेस शामिल हैं. प्रिंस सुल्तान एयर बेस (सऊदी अरब), अल उद्देद (कतर), अली अल सलेम (कुवैत) और अल धफरा (यूएई) जैसे प्रमुख ठिकानों को बार-बार निशाना बनाया गया। </p>
<p>रिसर्च सर्विस की रिपोर्ट के अनुसार कम से कम 42 अमेरिकी विमान क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए. इनमें F-15E, F-35A, KC-135 टैंकर, E-3 सेंट्र्री एवाक्स, MQ-9 रीपर ड्रोन और अन्य शामिल हैं. कई विमान जमीन पर पार्क किए हुए थे जब उन पर हमला हुआ। </p>
<p>ये हमले दिखाते हैं कि आधुनिक युद्ध में सस्ते ड्रोन और मिसाइल महंगे रक्षा सिस्टम को चुनौती दे सकते हैं. अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम जैसे पैट्रियट और थैड ने कई हमलों को रोका, लेकिन कुछ घुस गए. इससे क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों की सुरक्षा पर सवाल उठे. सैनिकों की मौत और घायलों की संख्या भी बढ़ी। </p>
<p>कई ठिकानों पर नुकसान इतना था कि संचालन प्रभावित हुआ. विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान ने अमेरिकी ठिकानों की कमजोरियों का अध्ययन कर सटीक निशाना साधा. इससे अमेरिका को मिसाइल डिफेंस और बेस सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई। </p>
<p>इस संघर्ष से दोनों पक्षों को भारी कीमत चुकानी पड़ी. अमेरिका ने ईरान की कई सैन्य क्षमताएं नष्ट कीं, लेकिन खुद को भी बड़ा नुकसान हुआ. मरम्मत और नए उपकरणों की लागत लंबे समय तक बजट पर असर डालेगी. क्षेत्र में स्थिरता अब भी नाजुक है. यह घटना याद दिलाती है कि बड़े पैमाने के संघर्ष में नुकसान सिर्फ एक तरफ नहीं होता. भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए कूटनीति और मजबूत रक्षा दोनों जरूरी हैं। </p>
<p><strong>अमेरिकी हमलों में ईरान में भयानक तबाही</strong><br>
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, हाल के अमेरिकी हमलों में दर्जनों लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने भी अपने कई और सैनिकों के घायल होने की पुष्टि की है। ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही प्रभावी रूप से बाधित कर दी, जिससे वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हुआ।</p>
<p><strong>कच्चे तेल की कीमतों में तेजी</strong><br>
 कच्चे तेल की कीमत 86 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जबकि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या तीन सप्ताह के न्यूनतम स्तर पर आ गई। युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत चल रही थी। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर युद्ध समाप्त करने और लंबे समय तक चलने वाले पश्चिम एशिया संघर्ष से दूरी बनाने का घरेलू राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है।</p>
<p><strong>ईरान में पीने के पानी का संकट</strong><br>
ईरान के सरकारी टेलीविजन के अनुसार, अमेरिका के हवाई हमलों में ईरान के दक्षिणी होरमोज़गान प्रांत में स्थित एक बिजली संयंत्र और समुद्री जल को मीठा बनाने के संयंत्र को निशाना बनाया गया। ये हमले बोंजी नामक गांव में किए गए, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के तट पर स्थित है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, रातभर हुए हवाई हमलों में दो सुरंगें और एक पुल क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे बंदर अब्बास जाने वाले प्रमुख राजमार्गों में से एक पर यातायात बाधित हो गया। बंदर अब्बास शहर होर्मुज जलडमरूमध्य के सबसे संकरे हिस्से के निकट स्थित है। ईरान ने यह भी बताया कि जलडमरूमध्य के भीतर स्थित सामरिक महत्व के केशम द्वीप पर भी हवाई हमले किए गए।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>क्या पाकिस्तान में तख्तापलट की तैयारी कर रहे हैं आसिम मुनीर? चौतरफा संकट के बीच बढ़ी हलचल</title>
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<description><![CDATA[ इस्लामबाद  पाकिस्तान इस वक्त चौतरफा जल रहा है। पहले से आर्थिक बदहाली झेल रहे पाकिस्तान में जहां एक तरफ बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने 85 फीसदी हिस्से पर कब्जा करने का दावा कर दिया है, वहीं खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने पाक सैनिकों की नाक में दम कर दिया है। इधर … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 14:30:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इस्लामबाद </strong></p>
<p>पाकिस्तान इस वक्त चौतरफा जल रहा है। पहले से आर्थिक बदहाली झेल रहे पाकिस्तान में जहां एक तरफ बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने 85 फीसदी हिस्से पर कब्जा करने का दावा कर दिया है, वहीं खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने पाक सैनिकों की नाक में दम कर दिया है। इधर पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) का आंदोलन जारी है। इस चौतरफा संकट के बीच इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी के सैन्य हेडक्वॉर्टर तक एक ही चर्चा गर्म है- क्या सैन्य प्रमुख जनरल असीम मुनीर देश में तख्तापलट करने वाले हैं?</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्ताज के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की लाचार सरकार को हटाकर आसिम मुनीर खुद 'चीफ मार्शल लॉ एडमिनिस्ट्रेटर' बनने का मन बना रहे हैं, ताकि देश को पूर्ण रूप से गृहयुद्ध में जाने से बचाया जा सके। रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के मुख्यालय में इसे लेकर एक मीटिंग भी हुई है।</p>
<p><strong>बलूचिस्तान में दहली पाकिस्तानी सेना</strong><br>
बलूचिस्तान प्रांत में BLA ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ मोर्चा पूरी तरह खोल दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक BLA के रेड में सैंकड़ों पाकिस्तानी सैनिक और पुलिसकर्मी मारे जा चुके हैं। BLA ड्रोन तकनीक और आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल कर सैन्य ठिकानों और चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के प्रोजेक्ट्स को निशाना बना रही है। कई इलाकों में बलूच विद्रोहियों का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि पाकिस्तानी सेना बैकफुट पर आ चुकी है और स्थानीय आबादी का भी सेना से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है।</p>
<p><strong>PoK में बगावत</strong><br>
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में दशकों से दमन झेल रही जनता का गुस्सा अब फूट पड़ा है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में महीनों से जारी विरोध प्रदर्शन ने शहबाज सरकार की नाक में दम कर रखा है। रावलकोट समेत PoK के प्रमुख शहरों में प्रदर्शनकारी खुलेआम कह रहे हैं कि वे पाकिस्तान का हिस्सा नहीं हैं। पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों से तंग आ चुकी जनता अब सीधे इस्लामाबाद की गद्दी को चुनौती दे रही है।</p>
<p><strong>खैबर पख्तूनख्वा में TTP का बढ़ता दबदबा</strong><br>
इधर अफगानिस्तान सीमा से सटे खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पाक को गहरा जख्म दे रहा है। TTP लगातार पुलिस थानों, सैन्य काफिलों और चौकियों को निशाना बना रहा है। पाकिस्तान और अफगान तालिबान सरकार के बीच भी सीमा पर भारी तनाव बना हुआ है।</p>
<p><strong>तख्तापलट करेंगे आसिम मुनीर?</strong><br>
पाकिस्तान में जब-जब सरकार लाचार हुई है, तब-तब सेना ने तख्तापलट किया है। अब आसिम मुनीर भी अय्यूब खान, जिया-उल-हक या परवेज मुशर्रफ की राह अपनाते नजर आ सकते हैं। फिलहाल अलग-अलग मोर्चों पर संकट से निपटने में शहबाज शरीफ सरकार पूरी तरह से नाकामयाब साबित हुई है। BLA और TTP के हमलों में रोज दर्जनों फौजी मारे जा रहे हैं। सेना की छवि भी दांव पर है। ऐसे में मुनीर की स्क्रिप्ट रेडी है। पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी आदिल रजा ने हाल ही में इसे लेकर एक बड़ा दावा भी किया है। उनके मुताबिक 7 घंटे तक चली ISI की एक मीटिंग में इस बात पर सहमति बनी है कि देश का मौजूदा सिस्टम अब गिर चुका है और एक नए सिस्टम पर काम जारी है।</p>
<p><strong>कैसे सत्ता पर कब्जा कर सकते हैं मुनीर?</strong><br>
विशेषज्ञों के मुताबिक आसिम मुनीर तख्तापलट को दो चरणों में अंजाम दे सकते हैं। आसिम मुनीर पहले शहबाज सरकार से देश में नेशनल इमरजेंसी या सेना को सीधे विशेषाधिकार देने का ऐलान करवा सकते हैं। इससे संसद का वजूद सिर्फ नाममात्र का रह जाएगा। इसके बाद अगर BLA और PoK का प्रदर्शन इस्लामाबाद तक पहुंचता है, तो मुनीर देश को टूटने से बचाने का बहाना बनाकर शहबाज शरीफ को बर्खास्त कर देंगे, संविधान को निलंबित करेंगे और सीधे मार्शल लॉ लागू कर खुद राष्ट्रपति बन सकते हैं।</p>
<p><strong>भारत के लिए खतरा?</strong><br>
इतिहास गवाह है कि जब भी पाकिस्तान में कोई सैन्य तानाशाह तख्तापलट कर गद्दी पर बैठता है, तो वह सबसे पहले कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए भारत विरोधी कार्ड खेलता है। अगर आसिम मुनीर तख्तापलट करते हैं, तो अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाने के लिए वो भारत-पाक सीमा पर युद्ध जैसा माहौल बनाने की नापाक कोशिश कर सकते हैं। हालांकि भारत ऐसी किसी भी स्थिति में मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>ट्रंप के पीछे हटने के बीच ईरान की खुली धमकी, जमीनी हमले की कोशिश पर दी कड़ी चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ तेहरान  ईरान ने अमेरिका को सीधे शब्दों में धमकी दे दी है. ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिकी सैनिकों ने उसकी जमीन पर पैर भी रखा, तो हम उनकी गर्दनें काट देंगे. यह बयान ऐसे वक्त आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद इस टकराव से निकलने का रास्ता तलाशते नजर आ रहे … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Aug 2026 22:15:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ट्रंप, के, पीछे, हटने, के, बीच, ईरान, की, खुली, धमकी, जमीनी, हमले, की, कोशिश, पर, दी, कड़ी, चेतावनी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तेहरान </strong><br>
ईरान ने अमेरिका को सीधे शब्दों में धमकी दे दी है. ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिकी सैनिकों ने उसकी जमीन पर पैर भी रखा, तो हम उनकी गर्दनें काट देंगे. यह बयान ऐसे वक्त आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद इस टकराव से निकलने का रास्ता तलाशते नजर आ रहे हैं. ईरानी सेना की ग्राउंड फोर्स के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अली जहांशाही ने साफ कहा, ‘अगर कोई अमेरिकी सैन्यकर्मी ईरान की जमीन पर कदम रखता है, तो हम उन्हें काट देंगे’. उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान हर खतरे का ‘कड़ा और रोकने वाला जवाब’ देने के लिए पूरी तरह तैयार है. उनके मुताबिक, ईरानी सेना सीमाओं पर पूरी कॉम्बैट रेडीनेस में है और हर गतिविधि पर नजर रख रही है. वहीं ट्रंप चुनाव से पहले इस समस्या का हल निकालना चाहते हैं. इसके लिए वह अपनी सबसे बड़ी डिमांड परमाणु हथियारों पर भी कदम <strong>पीछे करने को तैयार हैं। </strong></p>
<p><strong>बातचीत भी, धमकी भी</strong><br>
ईरान की तरफ से एक तरफ यह सख्त चेतावनी है, तो दूसरी तरफ कूटनीतिक चैनल भी पूरी तरह बंद नहीं हैं. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा, ‘हम फिलहाल अमेरिका से सीधे बातचीत नहीं कर रहे हैं. संदेशों का आदान-प्रदान बिचौलियों के जरिए हो रहा है.’ उन्होंने साफ कर दिया कि जब तक अमेरिका अपने पुराने समझौते के उल्लंघन की भरपाई नहीं करता, तब तक सीधी बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है. अराघची ने यह भी बताया कि ओमान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है, लेकिन इसे खोलना अमेरिका की ‘भरपाई’ पर निर्भर करेगा। </p>
<p><strong>युद्ध ने ट्रंप की मुश्किल बढ़ाई</strong><br>
उधर अमेरिका में हालात ट्रंप के लिए आसान नहीं दिख रहे. मिडटर्म चुनाव करीब हैं और ट्रंप प्रशासन जनता को यह दिखाना चाहता है कि उसने ईरान के खिलाफ जंग जीत ली. वाल स्ट्रीट जर्नल की खबर के मुताबिक ट्रंप बिना न्यूक्लियर डील के ही बातचीत को फाइनल करने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं. यह सीधे पीछे हटने वाला कदम माना जा रहा है, क्योंकि इस युद्ध की असली जड़ न्यूक्लियर ही है. लेकिन ईरान ने शर्तों की ऐसी लिस्ट रख दी है, जिससे मामला और फंस गया है. तेहरान ने अरबों डॉलर की पेमेंट, अमेरिकी सैनिकों की वापसी और नेवल ब्लॉकेड खत्म करने की मांग रखी है. यही वजह है कि डील की राह और मुश्किल हो गई है। </p>
<p><strong>होर्मुज पर अटका खेल</strong><br>
होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे टकराव का सबसे अहम मोर्चा बना हुआ है. ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों के चलते यहां शिपिंग प्रभावित हुई है और वैश्विक तेल बाजार भी हिल गया है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ओमान और ईरान के बीच बातचीत में कुछ प्रगति हुई है और जल्द कोई समझौता हो सकता है, जिससे शिपिंग बहाल हो सके. लेकिन इसके साथ ही अमेरिका को ईरानी बंदरगाहों पर लगी पाबंदियां हटानी होंगी। </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>होर्मुज में अमेरिका की ‘महाघेराबंदी’! 20 युद्धपोत तैनात, 55 जहाजों ने बदला रास्ता; ईरान पर बढ़ा दबाव</title>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) होर्मुज स्ट्रेट के आसपास 20 से अधिक युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। यह कदम वाशिंगटन द्वारा ईरान के खिलाफ अपनी नाकाबंदी को और सख्त बनाने के बीच उठाया गया है। यह तैनाती होर्मुज के आसपास बढ़ते तनाव के मद्देनजर की गई है। तेहरान … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Aug 2026 21:15:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>होर्मुज, में, अमेरिका, की, ‘महाघेराबंदी’, युद्धपोत, तैनात, जहाजों, ने, बदला, रास्ता, ईरान, पर, बढ़ा, दबाव</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन</strong></p>
<p>ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) होर्मुज स्ट्रेट के आसपास 20 से अधिक युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। यह कदम वाशिंगटन द्वारा ईरान के खिलाफ अपनी नाकाबंदी को और सख्त बनाने के बीच उठाया गया है। यह तैनाती होर्मुज के आसपास बढ़ते तनाव के मद्देनजर की गई है। तेहरान ने साफ कहा है कि वाणिज्यिक शिपिंग के लिए इस रणनीतिक जलमार्ग को फिर से खोलने से पहले उसकी मांगें पूरी की जानी चाहिए।</p>
<p>सेंटकॉम के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के विध्वंसक यूएसएस रॉस पर सवार नाविक भी इस क्षेत्र में तैनात बलों का हिस्सा हैं। कमांड ने कहा कि ये युद्धपोत सैन्य मिशनों का समर्थन कर रहे हैं, जिनमें 'ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी को सख्ती से लागू करना' शामिल है। अमेरिकी सैन्य कमांड ने आगे बताया कि 9 अगस्त तक सेंटकॉम ने 55 वाणिज्यिक जहाजों को दूसरी दिशा में मोड़ दिया है, दो को रोका है और दो पर चढ़कर नियमों का पालन सुनिश्चित किया है।</p>
<p><strong>ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई तेज</strong><br>
यह तैनाती ऐसे समय हुई है जब खबर है कि ईरान और ओमान एक समझौते के करीब पहुंच गए हैं, जिससे होर्मुज से होकर नई शिपिंग लेन बन सकती हैं। रॉयटर्स के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि होर्मुज पर ओमान के साथ समझौता अपने 'अंतिम चरण' में है। हालांकि, तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जलमार्ग को फिर से खोलना अमेरिका की कुछ शर्तों के पूरा होने पर निर्भर करेगा।</p>
<p>ईरान ने अमेरिकी हमलों से हुए नुकसान का मुआवजा, प्रतिबंधों और सैन्य धमकियों को समाप्त करने तथा खाड़ी में अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटाने की मांग की है। वहीं, न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि बिना रुकावट वाणिज्यिक शिपिंग फिर से शुरू करने के समझौते की घोषणा के बाद वाशिंगटन ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटा देगा। अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई ईरान द्वारा अपने वादे पूरे करने से जुड़ी होगी।</p>
<p><strong>अंतिम चरण में होर्मुज जलसंधि समझौता</strong><br>
ईरान-ओमान के संभावित समझौते से ऐसी शिपिंग लेन बनने की उम्मीद है, जिनका उपयोग होर्मुज को फिर से खोलने की शर्तें पूरी होने के बाद किया जा सकेगा। रॉयटर्स के अनुसार, इस व्यवस्था से बड़े तेल और गैस शिपिंग मार्गों से सुरक्षित रास्ता फिर से शुरू हो सकता है। फिर भी, अराघची ने दोहराया कि जब तक वाशिंगटन तेहरान की मांगें पूरी नहीं करता, ईरान जलमार्ग को फिर से नहीं खोलेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच सीधी बातचीत नहीं हो रही है, बल्कि मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान चल रहा है।</p>
<p><strong>ईरान ने जलमार्ग खोलने की शर्तें रखीं</strong><br>
ईरानी अधिकारियों ने जलमार्ग फिर से खोलने के लिए शर्तों की एक लंबी सूची पेश की है। ईरान की शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा संस्था के सचिव मोहम्मद बाकर जोलकादर ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी धमकियों को समाप्त करने, ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के खिलाफ हमले रोकने, अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटाने, प्रतिबंध हटाने और ईरान की फ्रीज संपत्ति जारी करने की मांग की।</p>
<p>दूसरी ओर वाशिंगटन का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना और क्षेत्र के लिए खतरा पैदा करने की उसकी क्षमता को कम करना था।जून में वाशिंगटन और तेहरान के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी थी, जिसके बाद जुलाई में खाड़ी में ईरानी शिपिंग पर अमेरिका ने फिर से रोक लगा दी। तेहरान ने इसे संघर्ष विराम का उल्लंघन बताया, जो तब तक टूट चुका था।</p>]]> </content:encoded>
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<item>
<title>Meta की बढ़ी टेंशन! अमेरिका में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन की मांग, सर्वे में सामने आई बड़ी बात</title>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन सोशल मीडिया हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. सुबह उठते ही इंस्टाग्राम खोलना हो या फेसबुक पर दोस्तों और परिवार की खबर लेना, करोड़ों लोग इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन अब अमेरिका में इन्हीं सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता दिख रहा है. एक नए Reuters/Ipsos … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Aug 2026 20:15:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन</strong></p>
<p>सोशल मीडिया हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. सुबह उठते ही इंस्टाग्राम खोलना हो या फेसबुक पर दोस्तों और परिवार की खबर लेना, करोड़ों लोग इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन अब अमेरिका में इन्हीं सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता दिख रहा है. एक नए Reuters/Ipsos सर्वे में 61 फीसदी अमेरिकियों ने कहा है कि सोशल मीडिया कंपनियों पर सरकार को और सख्त नजर रखनी चाहिए. इतना ही नहीं, 66 फीसदी लोग चाहते हैं कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने के लिए कंपनियों के लिए उम्र की वेरिफिकेशन जरूरी किया जाए। </p>
<p><strong>अमेरिका में लोगों का मूड क्यों बदल रहा है?</strong><br>
Reuters/Ipsos का यह सर्वे 4,505 अमेरिकी लोगों के बीच किया गया था और इसमें करीब 2 फीसदी का मार्जिन ऑफ एरर है. सर्वे में 61 फीसदी लोगों ने सोशल मीडिया कंपनियों पर ज्यादा सख्त निगरानी की मांग की. दिलचस्प बात यह है कि यह सोच सिर्फ किसी एक पोलिटिकल पार्टी तक सीमित नहीं है. 71 फीसदी डेमोक्रैक्ट और 62 फीसदी रिपब्लिकन ने ज्यादा निगरानी का समर्थन किया। </p>
<p>सबसे ज्यादा चिंता बच्चों को लेकर है. 66 फीसदी लोगों ने ऐसे कानूनों का समर्थन किया जिनमें सोशल मीडिया कंपनियों को 16 साल से कम उम्र के यूजर्स की उम्र चेक करनी पड़े. रिपब्लिकन्स में इसका समर्थन 74 फीसदी और डेमोक्रैट्स में 69 फीसदी रहा. यानी बच्चों को सोशल मीडिया से बचाने का मुद्दा अमेरिका में काफी हद तक दोनों तरफ के लोगों को एक साथ ला रहा है। </p>
<p><strong>लोग खुद मानते हैं कि सोशल मनीडिया की लत लग सकती है</strong><br>
सर्वे का एक और आंकड़ा काफी चौंकाने वाला है. 85 फीसदी अमेरिकियों का मानना है कि सोशल मीडिया बच्चों के लिए एडिक्टिव हो सकता है. लगभग इतनी ही बड़ी संख्या मानती है कि इसका इस्तेमाल बच्चों की मेंटल हेल्थ के लिए नुकसानदेह हो सकता है. वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया को पसंद करने वालों की संख्या भी बहुत ज्यादा है. 70 फीसदी लोगों ने कहा कि इन प्लेटफॉर्म्स पर समय बिताना उन्हें मजेदार लगता है. 52 फीसदी लोगों ने माना कि वे सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा समय बिताते हैं। </p>
<p>यानी समस्या यह नहीं है कि लोग फेसबुक या इंस्टाग्राम इस्तेमाल ही नहीं करना चाहते. समस्या यह है कि लोग चाहते हैं कि इन कंपनियों पर कुछ नियम हों, खासकर जब बात बच्चों की हो। </p>
<p><strong>मेटा के खिलाफ बढ़ता जा रहा है कानूनी दबाव</strong><br>
यह सर्वे ऐसे समय आया है जब मेटा के खिलाफ अमेरिका में कई मामलों में कानूनी दबाव बढ़ रहा है. हाल ही में न्यू मेक्सिको की एक अदालत ने मेटा को 567 मिलियन डॉलर का भुगतान करने का आदेश दिया. यह पैसा युवाओं की मेंटल हेल्थ से जुड़े कामों के लिए इस्तेमाल किया जाना है. इससे पहले इसी मामले में Meta पर 375 मिलियन डॉलर का जूरी अवॉर्ड लगाया गया था. दोनों को जोड़ें तो इस मामले में कंपनी की कुल फाइनांशियल लाइब्लिटी करीब 942 मिलियन डॉलर हो जाती है </p>
<p>न्यू मेक्सिको के जज ब्रायन बीडशीड ने Meta के फेसबुक और इंस्टाग्राम के डिजाइन और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए. अदालत ने मेटा को कई बदलाव करने का आदेश दिया है. इनमें बच्चों की उम्र की बेहतर जांच, नाबालिगों के लिए इस्तेमाल की कुछ सीमाएं, रात और स्कूल के समय नोटिफिकेशन्स बंद करना और कुछ मामलों में पेरेंट्स की अनुमति जैसी चीजें शामिल हैं. मेटा इस फैसले के खिलाफ अपील करने की तैयारी में है। </p>
<p>इस मामले में एक खास बात यह भी है कि अदालत ने मेटा के प्लेटफॉर्म्स को सिर्फ किसी एक बच्चे को नुकसान पहुंचाने वाली चीज के तौर पर नहीं देखा, बल्कि बड़े स्तर पर समाज पर असर डालने वाली समस्या के रूप में देखा. रॉयटर्स के मुताबिक जज ने Meta के डिजाइन को लेकर काफी सख्त रुख अपनाया. हालांकि अदालत के आदेश का असर सीधे न्यू मेक्सिको में है, वहां के अटॉर्नी जनरल का कहना है कि यह फैसला दूसरे मामलों के लिए एक उदाहरण बन सकता है। </p>
<p><strong>फेसबुक और इंस्टाग्राम पर क्या बदल सकता है?</strong><br>
इसका मतलब यह नहीं है कि कल से फेसबुक या इंस्टाग्राम बंद हो जाएंगे. बल्कि आने वाले समय में इन प्लेटफॉर्म्स पर एज वेरिफिकेशन और चाइल्ड सेफ्टी से जुड़े नियम और सख्त हो सकते हैं। </p>
<p>मिसाल के लिए न्यू मेक्सिको के आदेश में नाबालिगों के लिए रात और स्कूल के समय पुश नोटिफिकेशन पर रोक, उम्र की बेहतर जांच और बच्चों के अकाउंट को लेकर ज्यादा सख्त नियम शामिल हैं. कुछ मामलों में प्लेटफॉर्म को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कम उम्र के बच्चे सिस्टम में अपनी सही उम्र छिपाकर अकाउंट न बना सकें </p>
<p>अमेरिका के कई राज्यों में पहले से ही बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग कानून बनाए जा चुके हैं. कुछ जगहों पर एज वेरिफिकेशन, कुछ जगहों पर पेरेंट कंसेंट और कुछ जगहों पर बच्चों के लिए एडिक्टिव फीचर्स को लिमिट करने की कोशिश हो रही है। </p>
<p><strong>Meta के लिए सबसे बड़ी चिंता सिर्फ जुर्माना नहीं है</strong><br>
मेटा जैसी कंपनियों के लिए समस्या सिर्फ करोड़ों डॉलर का Fine नहीं है. अगर अलग-अलग राज्यों और अदालतों से ऐसे नियम आने लगते हैं जिनमें एज वेरिफिकेशन, नोटिफिकेशन रिकॉमेंडेशन और बच्चों के लिए दूसरे फीचर्स में बदलाव करना पड़े, तो कंपनियों को अपने पूरे प्रोडक्ट डिजाइन में बदलाव करना पड़ सकता है। </p>
<p>रॉयटर्स के मुताबिक 29 अमेरिकी राज्यों से जुड़ा एक अलग फेडरल ट्रायल भी 12 अगस्त से कैलिफोर्निया में शुरू होने वाला है. इसमें मेटा समेत दूसरी कंपनियों पर बच्चों और टीनेजर्स को लेकर इसी तरह के आरोपों की सुनवाई होनी है. मेटा इन <br>
आरोपों से इनकार करता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>पीओके में हिंसा के बाद बैकफुट पर PML&#45;N, प्रदर्शनकारियों से बातचीत को तैयार शहबाज सरकार</title>
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<description><![CDATA[ कराची पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में तथाकथित सरकार की कमान संभालने की तैयारी कर रहे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनके भाई नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) महीनों से चल रही हिंसा के बाद क्षेत्र के प्रदर्शनकारियों से निपटने में पीछे हटती नजर आ रही है। प्रधानमंत्री के सलाहकार राणा … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Aug 2026 11:15:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>पीओके, में, हिंसा, के, बाद, बैकफुट, पर, PML-N, प्रदर्शनकारियों, से, बातचीत, को, तैयार, शहबाज, सरकार</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कराची</strong><br>
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में तथाकथित सरकार की कमान संभालने की तैयारी कर रहे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनके भाई नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) महीनों से चल रही हिंसा के बाद क्षेत्र के प्रदर्शनकारियों से निपटने में पीछे हटती नजर आ रही है। प्रधानमंत्री के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने शनिवार को कहा कि पीओके में 99 प्रतिशत प्रदर्शनकारी 'देशभक्त' लोग हैं। उन्होंने बताया कि राजनीतिक दल के प्रतिनिधि जल्द ही प्रतिबंधित जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के सदस्यों से मुलाकात करेंगे।</p>
<p>बता दें कि कुछ दिन पहले तक पार्टी का दावा था कि प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान के सदस्य प्रदर्शनकारियों में शामिल हैं, ताकि सरकार की कार्रवाई को जायज ठहराया जा सके। गौरतलब है कि पीओके में 'चुनाव' के तीसरे चरण से पहले शनिवार को एक रैली को संबोधित करते हुए सनाउल्लाह ने कहा कि जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी से जुड़े 99 प्रतिशत लोग हमारे देशभक्त भाई हैं। सनाउल्लाह ने आगे कहा कि जब पीएमएल-एन सरकार दो-तिहाई बहुमत से बनेगी, तो वह जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के प्रतिनिधियों के साथ बैठेगी। उनका पहला काम इस मुद्दे को सुलझाना होगा।</p>
<p><strong>अब तक 25 सीटें जीती है शहबाज की पार्टी</strong><br>
बता दें कि अब तक हुए दो चरणों के चुनावों में सरकार समर्थित पीएमएल-एन ने 25 सीटें जीती हैं। इससे पीओके की तथाकथित असेंबली में बहुमत का आंकड़ा पार हो गया है। असेंबली में कुल 45 चुनी हुई सीटें हैं। इन चुनावों में बड़े पैमाने पर हिंसा और धांधली के आरोप लगे हैं। पीएमएल-एन के लिए यह पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के साथ सीधा मुकाबला था, जो केंद्र सरकार में उसका गठबंधन साझेदार है। तीसरे और अंतिम चरण में सोमवार को चार सीटों पर मतदान होगा, जबकि सात निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिए गए हैं।</p>
<p><strong>दो महीने से जारी विरोध-प्रदर्शन</strong><br>
पीओके में दो महीने से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। जेएएसी, जो इन प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहा है, में छात्र, व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, वकील, सामाजिक कार्यकर्ता समेत विभिन्न वर्गों के कार्यकर्ता शामिल हैं। जून में स्थानीय सरकार ने इस समूह पर प्रतिबंध लगा दिया था। समूह की मुख्य मांग पोक्क में 12 विवादित शरणार्थी सीटों को समाप्त करना है। जेएएसी का आरोप है कि सरकार इन सीटों का इस्तेमाल पीओके में अपनी पसंद का तथाकथित प्रधानमंत्री बनाने के लिए करती है।<br>
प्रदर्शनों के कारण सुरक्षा बलों ने सख्त कार्रवाई की।</p>
<p>27 जुलाई को तीन चरणों के चुनाव शुरू होते ही तनाव बढ़ गया। जेएएसी का आरोप है कि चुनाव शुरू होने के बाद महिलाओं और बच्चों समेत 40 से अधिक लोग मारे गए हैं। समूह का दावा है कि जून के पहले सप्ताह से अब तक कुल 400 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने किसी भी आम नागरिक की मौत से इनकार किया है और जेएएसी के आंकड़ों को 'बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया' करार दिया है।</p>
<p><strong>क्या है भारत का रूख</strong><br>
भारत का स्पष्ट रुख है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश उसके अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं। नई दिल्ली यह भी दावा करती है कि पाकिस्तान ने इन केंद्र शासित प्रदेशों के कुछ हिस्सों पर अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>इजरायल ने सभी सैन्य छुट्टियां कीं रद्द, ईरान पर नए हमले की अटकलें तेज</title>
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<pubDate>Mon, 10 Aug 2026 10:15:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>इजरायल, ने, सभी, सैन्य, छुट्टियां, कीं, रद्द, ईरान, पर, नए, हमले, की, अटकलें, तेज</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तेहरान</strong><br>
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है। संभव है कि बहुत जल्द ही अच्छी खबर सामने आए। इस बीच एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। खबर है कि इजरायल की सैन्य बलों ने सभी सैन्य छुट्टियां रद्द कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार, इस कदम से संकेत मिलते हैं कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान पर नए हमले की तैयारी कर सकते हैं। इजरायली चैनल 13 के अनुसार, यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब इजरायल कथित तौर पर तेहरान के खिलाफ एकतरफा सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। इजरायल इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि अमेरिका अब उसकी शर्तों पर युद्ध जारी रखने को तैयार नहीं है।</p>
<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका इस संघर्ष से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहा है। अमेरिकी जनरल डैन केन 'ऑफ-रैंप' की तलाश में हैं और उनका मानना है कि ईरान को हराने के लिए केवल एयरपावर पर्याप्त नहीं होगी। इस बीच, इजरायल अमेरिकी कूटनीति को गतिरोध के रूप में देख रहा है और स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है। यह आकलन तब सामने आया है जब इजरायल का मानना है कि ईरान इस अभियान में अपेक्षा से अधिक समय तक टिका हुआ है।</p>
<p>रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि नेतन्याहू ने वरिष्ठ सरकारी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) अधिकारियों के खिलाफ हमले का आदेश दिया है। हालांकि, एकतरफा इजरायली ऑपरेशन से इजरायल खुद ईरान का प्रमुख निशाना बन सकता है।</p>
<p><strong>आईडीएफ ने सभी छुट्टियां क्यों रद्द कीं?</strong><br>
रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने आधिकारिक रूप से सभी सैन्य छुट्टियां रद्द कर दी हैं। यह कदम इसलिए ध्यान खींच रहा है क्योंकि इजरायल ने 26 फरवरी को भी ऐसा ही किया था। वह कदम ईरान के सुप्रीम लीडर के परिसर को निशाना बनाने वाले हमलों से ठीक 48 घंटे पहले उठाया गया था। इस नए फैसले से संभावना बढ़ गई है कि इजरायल एक और बड़े ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है।</p>
<p><strong>ईरान ने हाइफा और तेल अवीव को दी धमकी</strong><br>
ईरान ने पहले ही चेतावनी दी है कि अगर इजरायल तनाव बढ़ाता है तो वह सीधे हाइफा रिफाइनरी और तेल अवीव को निशाना बना सकता है। सूत्रों के अनुसार, इजरायल के इंटरसेप्टर स्टॉक बहुत कम हैं, जिससे नए हमले के बदले का सामना करना मुश्किल हो सकता है। तेहरान ने पहले भी मिसाइल हमलों के दौरान इजरायली एयर डिफेंस को भेदने की क्षमता दिखाई है। ऐसे में एकतरफा हमला ईरान के जवाबी हमले को आमंत्रित कर सकता है, जो इजरायल की कमजोर एयर-डिफेंस क्षमताओं पर भारी पड़ सकता है।</p>
<p><strong>इजरायल में अक्टूबर में होंगे चुनाव</strong><br>
ईरान पर हमले के फैसले को नेतन्याहू के सामने मौजूद राजनीतिक परिस्थितियों से भी जोड़ा जा रहा है। अक्टूबर में चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में नेतन्याहू को अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए जीत की जरूरत बताई जा रही है। ईरान पर हमला उनका अंतिम विकल्प माना जा रहा है। हालांकि, ईरान पहले ही दिखा चुका है कि वह अमेरिकी हमलों का सामना कर सकता है और अधिक मजबूत होकर उभर सकता है। इसलिए, अमेरिकी मदद के बिना अकेले कार्रवाई करने वाला इजरायल ईरान को हराने में विफलता का सामना कर सकता है।</p>
<p><strong>युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान की नई शर्तें</strong><br>
नए हमले की खबरें ऐसे समय में आई हैं जब ईरान ने अमेरिका के सामने नई सख्त शर्तें रखी हैं। होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर बातचीत जारी है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त तेल शिपिंग मार्गों में से एक है। ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोलगदर ने कहा कि अमेरिका को 'अपना बर्ताव ठीक करना चाहिए' और स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए कई शर्तें रखीं। इनमें अमेरिकी प्रतिबंध हटाना और युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा देना शामिल है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>पेंटागन ने हथियार उत्पादन बढ़ाने का दिया आदेश, ईरान युद्ध से घटा अमेरिकी स्टॉक</title>
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<description><![CDATA[ वॉशिंगटन पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) देश की डिफेंस इंडस्ट्री पर हथियारों का प्रोडक्शन तेज करने का दबाव डाल रहा है। कंपनियों से प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कहा जा रहा है ताकि गोला-बारूद और दूसरे हथियारों के तेजी से कम हुए स्टॉक को भरा जा सके। इसमें ईरान के साथ चल रही लड़ाई में इस्तेमाल हुए … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Aug 2026 10:15:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>पेंटागन, ने, हथियार, उत्पादन, बढ़ाने, का, दिया, आदेश, ईरान, युद्ध, से, घटा, अमेरिकी, स्टॉक</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन</strong><br>
पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) देश की डिफेंस इंडस्ट्री पर हथियारों का प्रोडक्शन तेज करने का दबाव डाल रहा है। कंपनियों से प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कहा जा रहा है ताकि गोला-बारूद और दूसरे हथियारों के तेजी से कम हुए स्टॉक को भरा जा सके। इसमें ईरान के साथ चल रही लड़ाई में इस्तेमाल हुए हथियार भी शामिल हैं। पेंटागन की यह कोशिश ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका के एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव की चर्चा है।</p>
<p>पेंटागन प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने शनिवार को कहा कि विभाग गोला-बारूद की खरीद बढ़ाने पर काम कर रहा है ताकि हमारे सैनिकों को जरूरत के हिसाब से हथियार मिल सकें। उन्होंने इस प्रक्रिया को तेज करने के विभाग के प्रयासों की पुष्टि करते हुए कहा कि यह आधुनिकीकरण के उस प्रयास का हिस्सा है, जो पांच महीने पुराने संघर्ष (ईरान युद्ध) से पहले ही शुरू हो गया था।</p>
<p><strong>हथियार कंपनियों पर दबाव</strong><br>
द वॉशिंगटन पोस्ट को मिले एक मेमो के अनुसार, डिप्टी डिफेंस सेक्रेटरी स्टीव फीनबर्ग ने बुधवार को इंडस्ट्री के नेताओं को पत्र लिखकर उन्हें 21 दिन से ज्यादा का समय नहीं दिया है। इसी दौरान उनको महत्वपूर्ण क्षमताओं के लिए डिलीवरी शेड्यूल को काफी तेज और आक्रामक बनाने या प्रोडक्शन बढ़ाने की योजनाएं जमा करनी हैं<br>
फीनबर्ग ने लिखा, सालों तक चलने वाले डेवलपमेंट साइकल स्वीकार्य नहीं हैं। हमें अपने प्रोग्राम शेड्यूल को तेज करते हुए प्रोडक्शन क्षमता बढ़ानी होगी। यह मेमो ऐसे समय में आया है, जब ईरान के साथ लड़ाई में अमेरिकी सेना के एडवांस्ड मिसाइल इंटरसेप्टर का स्टॉक कम हो गया है। लड़ाई फिर शुरू होने पर अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा बढ़ सकता है।</p>
<p><strong>अमेरिका पर एयर डिफेंस की कमी</strong><br>
वॉशिंगटन के थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के अनुसार, पैट्रियट और THAAD इंटरसेप्टर का स्टॉक कम होने से अमेरिका और खाड़ी के उसके सहयोगी देशों को एयर डिफेंस सिस्टम को बचाने का जोखिम उठाना पड़ सकता है। अमेरिकी सेना अगर ईरान के ड्रोन और मिसाइलों के खिलाफ कम मिसाइलें लॉन्च करेगी तो हमले की संभावना बढ़ेगी।</p>
<p>CSIS के पिछले महीने के एक अनुमान के मुताबिक, युद्ध से पहले अमेरिका की पैट्रियट इंटरसेप्टर की संख्या 2,330 थी। यह अप्रैल में सीजफायर लागू होने के समय घटकर 1,030 रह गई थी। हाल की लड़ाई के बाद अब इनका स्टॉक 759 से 827 के बीच होने का अनुमान है। यह संख्या संघर्ष शुरू होने से पहले की तुलना में कम से कम 65% घट गई है।</p>
<p>CSIS ने बताया कि THAAD इंटरसेप्टर की संख्या युद्ध से पहले 452 थी, जो अप्रैल में सीजफायर की शुरुआत में घटकर 232 से 262 के बीच रह गई थी। अमेरिका कुछ इन्वेंट्री को फिर से भरकर इंटरसेप्टर की संख्या 234 से 278 के बीच करने में कामयाब रहा। इसके बावजूद यह स्टॉक संघर्ष से पहले की तुलना में 38 प्रतिशत कम है।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान संघर्ष के बीच अमेरिकी हथियार भंडार पर दबाव, पेंटागन ने उत्पादन बढ़ाने का दिया आदेश</title>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 21:15:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, संघर्ष, के, बीच, अमेरिकी, हथियार, भंडार, पर, दबाव, पेंटागन, ने, उत्पादन, बढ़ाने, का, दिया, आदेश</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन</strong><br>
अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन ने डिफेंस सेक्टर से हथियारों और गोला-बारूद का प्रोडक्शन तेजी से बढ़ाने को कहा है। यह कदम अमेरिकी सैन्य भंडार में कमी की चिंताओं के बीच उठाया गया है। खासकर ईरान के साथ पिछले 5 महीने से जारी संघर्ष के दौरान बड़ी मात्रा में मिसाइल रोधी हथियारों के इस्तेमाल के बाद अमेरिकी भंडार पर दबाव बढ़ा है। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने कहा कि विभाग हथियारों की खरीद बढ़ाने पर काम कर रहा है, ताकि सैनिकों को खतरे के समय हथियार उपलब्ध कराए जा सकें। उन्होंने कहा कि हथियार उत्पादन में तेजी लाने की कोशिश पिछले एक सप्ताह में तेज हुई है। यह सैन्य आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है, जो ईरान संघर्ष से पहले ही शुरू हो चुका था।</p>
<p>उप रक्षा मंत्री स्टीव फीनबर्ग ने बुधवार को रक्षा कंपनियों के प्रमुखों को पत्र भेजकर अधिकतम 21 दिनों के भीतर अपनी योजनाएं सौंपने को कहा है। पत्र में सैन्य क्षमताओं की आपूर्ति को काफी तेज करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए आक्रामक कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। फीनबर्ग ने कहा कि वर्षों तक चलने वाली विकास और उत्पादन प्रक्रिया अब स्वीकार्य नहीं है। अमेरिका को कार्यक्रमों की समयसीमा में भारी तेजी लाने के साथ उत्पादन क्षमता का तत्काल विस्तार करना होगा।</p>
<p><strong>क्या हथियारों के भंडार में आई कमी?</strong><br>
सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के अनुसार, ईरान के साथ हालिया लड़ाई में अमेरिका के पहले से कम हो चुके मिसाइल रोधी हथियारों के भंडार में और कमी आई है। पैट्रियट और थाड मिसाइल रोधी प्रणालियों के सीमित भंडार के कारण अमेरिका और उसके मध्य-पूर्वी सहयोगियों को अपनी हवाई सुरक्षा के इस्तेमाल में अधिक जोखिम उठाना पड़ सकता है। उदाहरण के तौर पर देखा जाए तो अमेरिकी सेना ईरान से आने वाले ड्रोन और मिसाइलों पर कम संख्या में अवरोधक मिसाइलें दाग सकती है, जिससे कुछ हमलावर हथियारों के लक्ष्य तक पहुंचने की आशंका बढ़ सकती है।</p>
<p>CSIS के अनुमान के मुताबिक, युद्ध से पहले अमेरिका के पास 2330 पैट्रियट अवरोधक मिसाइलें थीं, जो अप्रैल में संघर्षविराम के समय घटकर 1030 रह गई थीं। हालिया लड़ाई के बाद यह संख्या 759 से 827 के बीच रह गई है। थाड मिसाइल रोधी प्रणाली का भंडार भी संघर्ष से पहले के मुकाबले काफी कम हुआ है। युद्ध से पहले अमेरिका के पास 452 थाड अवरोधक मिसाइलें थीं, जो अप्रैल में संघर्षविराम की शुरुआत के समय घटकर 232 से 262 के बीच रह गई थीं। इसके बाद कुछ मिसाइलों की भरपाई की गई और भंडार 234 से 278 के बीच पहुंचा, लेकिन यह अभी भी युद्ध से पहले के स्तर से कम से कम 38 प्रतिशत नीचे है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान की दो टूक&#45; अमेरिका ने शर्तें नहीं मानीं तो नहीं खुलेगा होर्मुज जलडमरूमध्य</title>
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<description><![CDATA[ तेहरान ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा है कि अमेरिका जब तक अपने व्यवहार में सुधार नहीं करता, होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला जाएगा। इस नए रुख के साथ ईरान ने जलमार्ग और वहां होने वाले आवागमन को लेकर किसी समझौते के लिए बातचीत को प्रभावित करने वाली नई शर्तें रख दी हैं। ईरान के … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 20:15:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, की, दो, टूक-, अमेरिका, ने, शर्तें, नहीं, मानीं, तो, नहीं, खुलेगा, होर्मुज, जलडमरूमध्य</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तेहरान</strong><br>
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा है कि अमेरिका जब तक अपने व्यवहार में सुधार नहीं करता, होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला जाएगा। इस नए रुख के साथ ईरान ने जलमार्ग और वहां होने वाले आवागमन को लेकर किसी समझौते के लिए बातचीत को प्रभावित करने वाली नई शर्तें रख दी हैं। ईरान के सरकारी प्रसारक ने परिषद के सचिव एवं रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर मोहम्मद बाघेर जुलघद्र का बयान प्रसारित किया। बयान में कहा गया कि अमेरिका को दोबारा कभी ईरान को धमकी नहीं देनी चाहिए और उसे ईरान तथा क्षेत्र में उसके सशस्त्र सहयोगियों के साथ जारी युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करना चाहिए।</p>
<p><strong>रखी हैं कई शर्तें</strong><br>
इसमें कहा गया कि अमेरिका को ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंध को हटाना होगा। साथ ही क्षेत्र से अपनी सैन्य मौजूदगी वापस लेनी होगी। बयान में यह भी कहा गया कि इसके अलावा उसे युद्ध से हुए नुकसान की पूरी भरपाई करनी होगी। प्रतिबंध हटाने होंगे और ईरान की जब्त की गई संपत्तियों को बिना किसी शर्त जारी करना होगा। अमेरिका की ओर से इस पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। अमेरिका ने पूर्व में कहा था कि वह होर्मुज की नाकाबंदी समाप्त करने से पहले वहां की व्यवस्था को लेकर एक स्वीकार्य समझौता चाहता है। ईरान ने इससे पूर्व कहा था कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन को लेकर ओमान के साथ एक समझौते के करीब पहुंच गया है।</p>
<p><strong>पाकिस्तान ने इजरायल को बताया खतरा</strong><br>
उधर, सऊदी अरब और तुर्की के साथ त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने के अगले ही दिन पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बार फिर इजरायल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने इजरायल को पूरे मुस्लिम जगत के लिए खतरा बताते हुए उसके खिलाफ एकजुट सैन्य मोर्चा बनाने का आह्वान किया।</p>
<p>स्थानीय मीडिया से बातचीत में आसिफ ने कहाकि इजरायल के मुद्दे पर सभी मुस्लिम देशों को एकजुट होना ही होगा, इसमें मुझे कोई संदेह नहीं है। इजरायल को अवैध देश करार देते हुए उन्होंने दावा किया कि इजरायल बाल्फोर घोषणापत्र की देन है, जिसे 1940 के दशक में एक अवैध राष्ट्र के रूप में स्थापित किया गया था। यह क्षेत्र के किसी भी देश के लिए सीधा खतरा बन सकता है।</p>
<p>गौरतलब है कि 1917 में बाल्फोर घोषणापत्र जारी होने के समय इस क्षेत्र का आधिकारिक नाम ‘फिलिस्तीन’ था। यह तब तुर्की के ऑटोमन साम्राज्य के अधीन था। ब्रिटिश सरकार ने इसी क्षेत्र में यहूदियों के लिए एक राष्ट्र बनाने का समर्थन किया था, जिसके तीन दशक बाद 1948 में इजरायल की नींव पड़ी। अतीत में भी इजरायल को पाकिस्तान ‘मानवता के लिए अभिशाप’ और कैंसर जैसा देश बता चुके आसिफ ने कहाकि 27 अक्टूबर को होने वाले चुनावों में अगर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हार भी जाते हैं, तब भी इजरायल के अस्तित्व के खिलाफ उनका कड़ा विरोध नहीं बदलेगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>भारत&#45;बांग्लादेश सीमा पर बढ़ा तनाव, BSF की गोली से बांग्लादेशी नागरिक की मौत का दावा</title>
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<description><![CDATA[ ढाका  बांग्लादेश और भारत के बीच सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों के बीच तनाव बढ़ने की खबर है। बांग्लादेश की बॉर्डर फोर्स ने कहा है कि भारत के सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने एक बांग्लादेशी नागरिक की गोली मारकर हत्या कर दी है। बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने मृतक की पहचान कुलाउरी के मुरीछारा स्लम … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 18:15:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>भारत-बांग्लादेश, सीमा, पर, बढ़ा, तनाव, BSF, की, गोली, से, बांग्लादेशी, नागरिक, की, मौत, का, दावा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ढाका</strong><br>
 बांग्लादेश और भारत के बीच सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों के बीच तनाव बढ़ने की खबर है। बांग्लादेश की बॉर्डर फोर्स ने कहा है कि भारत के सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने एक बांग्लादेशी नागरिक की गोली मारकर हत्या कर दी है। बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने मृतक की पहचान कुलाउरी के मुरीछारा स्लम में रहने वाले 20 साल के तारा मिया के रूप में की है, जो भारतीय सीमा में घुस गया था।</p>
<p><strong>BSF ने घुसपैठियों पर चलाई गोली</strong><br>
BGB की बटालियन के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल सरकार आसिफ महमूद ने बताया कि रविवार 9 जुलाई को सुबह करीब 4 बजे तस्करों का एक समूह कुलाउरा सीमा से भारतीय इलाके में घुस गया था। BSF ने कथित तस्करों के समूह पर गोली चलाई, जिसमें तारा मिया की मौत हो गई। तारा मिया के खिलाफ तस्करी का मामला दर्ज किया गया था।</p>
<p><strong>बांग्लादेशियों ने भारतीय को किया अगवा</strong><br>
इसके पहले शनिवार को बांग्लादेश जिले के पंचगढ़ जिले में भारतीय सीमा पर तनाव बढ़ गया जब स्थानीय लोगों ने एक भारतीय युवक को अगवा कर लिया। अगवा किए गए भारतीय नागरिक की पहचान भारत के जलपाईगुड़ी जिले के राजगंज इलाके में रहने वाले 35 साल के दीपांकर गोप के रूप में हुई है।</p>
<p>बांग्लादेशियों का कहना है कि उन्होंने यह कदम एक 78 साल के बांग्लादेशी को बीएसएफ के हाथों कथित अपहरण के जवाब में उठाया है। तनाव बढ़ने के बीच बीजीबी और बीएसएफ के कंपनी कमांडरों की फ्लैग मीटिंग हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।</p>
<p>बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गोप को शनिवार सुबह बिराजोत सीमा पर मेन पिलर नंबर 742 के सब-पिलर नंबर 12 के पास पकड़ा गया। इसमें कहा गया कि दीपांकर गोप बांग्लादेशी इलाके में गन्ने के खेत में घुस गया था।</p>
<p><strong>बांग्लादेश नागरिक को छोड़ने की मांग</strong><br>
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसके पहले एक बांग्लादेशी किसान तमीज उद्दीन को बीएसएफ ने पकड़ लिया था। आरोप है कि तमीज उद्दीन बुधवार सुबह अपनी गाय खोजते हुए बिराजोत बॉर्डर इलाके में गए थे। स्थानीय लोगों ने कहा कि अगर बीएसएफ तमीज उद्दीन को वापस बांग्लादेश भेज देती है तो गोप को भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा।<br>
विवेक सिंह</p>]]> </content:encoded>
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<title>होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए ईरान ने रखीं 5 शर्तें, अमेरिका पर बढ़ा दबाव</title>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 15:15:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>होर्मुज, स्ट्रेट, खोलने, के, लिए, ईरान, ने, रखीं, शर्तें, अमेरिका, पर, बढ़ा, दबाव</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तेहरान</strong><br>
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार जारी है। होर्मुज स्ट्रेट के आस पास भी लगातार जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है। हाल में संयुक्त अरब अमीरात (uae) की तरफ से कहा गया है कि उसके एक जहाज को ईरानी मिसाइल से निशाना बनाया गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर होर्मुज पर स्थिति कब और कैसे सामान्य होगी। इसका जवाब भी तेहरान ने दे दिया है</p>
<p>ईरान की 'सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल' ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट तब तक नहीं खुलेगा जब तक अमेरिका "अपना व्यवहार नहीं सुधारता"। इसके साथ ही काउंसिल ने कुछ और मांगें भी रखी हैं। ईरानी अर्ध सरकारी मीडिया के मुताबिक काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाकर जोलगद्र ने एक बयान जारी करके इन शर्तों की एक लिस्ट बताई है।</p>
<p><strong>इस लिस्ट के मुताबिक…</strong><br>
1. अमेरिका ईरान को फिर कभी धमकी नहीं देगा।</p>
<p>2.अमेरिका, ईरान और उसके सहयोगियों के साथ युद्ध को हमेशा के लिए छोड़ देगा।</p>
<p>3. अमेरिका को ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी हटानी चाहिए और उस इलाके से अपनी सेना वापस बुलानी चाहिए।</p>
<p>4. अमेरिका को इस युद्ध की वजह से ईरान को हुए नुकसान की भरपाई करनी होगी</p>
<p>5. अमेरिका, ईरान से सारे प्रतिबंध हटाए और उसकी जिस भी संपत्ति को जब्त किया गया है। उसको बिना किसी शर्त के साथ जारी करे।</p>
<p>ईरान की इन शर्तों पर अभी तक संयुक्त राज्य अमेरिका की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है। अमेरिका शुरुआत से यह कहता आ रहा है कि होर्मुज पर कोई टैक्स नहीं लगेगा और युद्ध के पहले वाली स्थिति ही बहाल होगी। हालांकि, ईरान इसके लिए तैयार नहीं है।</p>
<p><strong>ओमान के साथ मिलकर होर्मुज पर टैक्स लगाने की कोशिश में ईरान</strong><br>
अमेरिका और ईरान युद्ध से पहले सभी के लिए सामान्य रूप से खुले होर्मुज पर अब नई पाबंदी लगने की आशंका बढ़ गई है। तेहरान का कहना है कि वह ओमान के साथ मिलकर फीस लगाने को लेकर प्रस्ताव बना रहा है। हालांकि, ओमान की तरफ से इस तरह के टैक्स को लेकर इनकार ही किया गया है। युद्ध के पहले ईरान नेभी कभी इस तरह की बात नहीं की है लेकिन अमेरिकी हमले ने उसे होर्मुज को हथियार की तरह उपयोग करने का रास्ता दे दिया है।</p>
<p>दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बातचीत जारी है। हालांकि, तनाव भी लगातार बढ़ रहा है। दूसरे दौर के युद्ध के बाद फिलहाल शांति बनी हुई है, लेकिन तनाव की वजह से होर्मुज पर पाबंदी लगी हुई है। कई देशों के जहाजों पर हमला हुआ है। इसकी वजह से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चैन बुरी तरह से प्रभावित हुई है। इसका सबसे बड़ा असर खाड़ी देशों के ऊपर भी पड़ा है। इन देशों का ज्यादातर व्यापार होर्मुज स्ट्रेट या फिर लाल सागर के बाब अल मंडेब से होता है। होर्मुज पर ईरान जहाजों को निशाना बना रहा है। वहीं, दूसरी तरफ लाल सागर में हूथी विद्रोही निशाना बना रहे हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<title>होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान&#45;ओमान में डील करीब, अस्थायी समुद्री रूट पर बनी सहमति</title>
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<description><![CDATA[  तेहरान ईरान ने कहा कि वह होर्मुज स्ट्रेट में एक नए समुद्री ट्रांजिट रूट पर ओमान के साथ डील के बहुत करीब है और इस हफ्ते उम्मीदें बढ़ीं कि जल्द ही एक घोषणा हो सकती है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को कहा कि बातचीत करने वाले फारस की खाड़ी में आने-जाने … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 14:15:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> तेहरान</strong><br>
ईरान ने कहा कि वह होर्मुज स्ट्रेट में एक नए समुद्री ट्रांजिट रूट पर ओमान के साथ डील के बहुत करीब है और इस हफ्ते उम्मीदें बढ़ीं कि जल्द ही एक घोषणा हो सकती है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को कहा कि बातचीत करने वाले फारस की खाड़ी में आने-जाने वाले जहाजों के लिए टेम्पररी लेन पर काम कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी समझौते से स्ट्रेट तुरंत फिर से नहीं खुलेगा, जिससे यह संकेत मिलता है कि एनर्जी सप्लाई के लिए कोई भी राहत सीमित हो सकती है।</p>
<p>अराघची ने जून में साइन किए गए अब खत्म हो चुके मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग का जिक्र करते हुए कहा, “स्ट्रेट को खोलना दूसरी शर्तों पर निर्भर है, जिसमें इस्लामाबाद एग्रीमेंट के अमेरिका के उल्लंघन के लिए मुआवजा भी शामिल है।” अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर एक महीने से भी कम समय तक चला और होर्मुज पर कंट्रोल को लेकर मतभेदों के कारण टूट गया।</p>
<p>यह साफ नहीं है कि वॉशिंगटन, जिसके बारे में ईरान का कहना है कि वह होर्मुज डील का हिस्सा नहीं है, फाइनल एग्रीमेंट पर कैसे रिएक्ट करेगा। अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप महीनों से इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि होर्मुज से नेविगेशन बिना किसी रुकावट के फिर से शुरू किया जाना चाहिए, और अगर ईरान वॉटरवे को फिर से खोलने में नाकाम रहता है तो उस पर नए हमले करने की धमकी दी है।</p>
<p>अमेरिका ने ईरानी पोर्ट्स पर भी ब्लॉकेड बनाए रखा है। रॉयटर्स ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि कमर्शियल शिपिंग को फिर से शुरू करने के लिए ओमान और ईरान के बीच डील की घोषणा होने के बाद अमेरिका नेवल ब्लॉकेड हटा देगा। अधिकारी ने कहा कि जल्द ही एक डील होने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>विदेशी सेनाओं को निकलना होगा: ईरान</strong><br>
वहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता के अंतरराष्ट्रीय मामलों के वरिष्ठ सलाहकार अली अकबर विलायती ने शनिवार को कहा कि विदेशी सेनाओं को इस क्षेत्र से बाहर जाना होगा, क्योंकि उनकी मौजूदगी ही यहां असुरक्षा की मुख्य वजह है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में विलायती ने कहा, "अमेरिका और इजरायली शासन की हार ने इस विश्वास को और मजबूत कर दिया है कि असुरक्षा का मुख्य कारण बनी विदेशी सेनाओं को इस क्षेत्र को छोड़ना ही होगा।" उन्होंने कहा कि हाल के घटनाक्रमों ने सशस्त्र बलों की क्षमता, ईरानियों की दृढ़ता और प्रतिरोध की धुरी के साहस को साबित किया है। उन्होंने ने क्षेत्रीय देशों के बीच अधिक सहयोग का भी आह्वान किया और कहा कि बेहतर तालमेल से क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है, हालांकि उन्होंने इस पर विस्तार से कोई जानकारी नहीं दी।</p>]]> </content:encoded>
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<title>क्या बांग्लादेश बन रहा है ‘दूसरा पाकिस्तान’? ISI, कट्टरपंथ और भारत की बढ़ती चिंता</title>
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<description><![CDATA[ लाहौर 1971 में शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व में पाकिस्तान से आजाद होकर एक धर्मनिरपेक्ष और संप्रभु राष्ट्र के रूप में उभरा बांग्लादेश आज अपनी राजनीतिक और रणनीतिक दिशा के सबसे संवेदनशील मोड़ पर खड़ा है। मुजीबुर रहमान के नाती और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे सजीव वाजेद जॉय के हाल ही में दिए … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 13:15:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>क्या, बांग्लादेश, बन, रहा, है, ‘दूसरा, पाकिस्तान’, ISI, कट्टरपंथ, और, भारत, की, बढ़ती, चिंता</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>लाहौर<br>
1971 में शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व में पाकिस्तान से आजाद होकर एक धर्मनिरपेक्ष और संप्रभु राष्ट्र के रूप में उभरा बांग्लादेश आज अपनी राजनीतिक और रणनीतिक दिशा के सबसे संवेदनशील मोड़ पर खड़ा है। मुजीबुर रहमान के नाती और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे सजीव वाजेद जॉय के हाल ही में दिए गए एक बयान ने दक्षिण एशियाई कूटनीति में नई बहस छेड़ दी है।</p>
<p>दिल्ली में फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम को वर्चुअल संबोधित करते हुए वाजेद ने दावा किया कि बांग्लादेश भारत की पूर्वी सीमा पर "दूसरा पाकिस्तान" बनता जा रहा है। इस कार्यक्रम में अगस्त 2024 में सत्ता गंवाने के बाद शेख हसीना ने भी पहली बार सार्वजनिक रूप से हिस्सा लिया और दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का ऐलान किया।</p>
<p><strong>क्या सचमुच बांग्लादेश में पाकिस्तान और ISI का प्रभाव बढ़ रहा है?</strong><br>
शेख हसीना सरकार के पतन के बाद अंतरिम सरकार (मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में) और वर्तमान बीएनपी (BNP) शासन के दौरान बांग्लादेश और पाकिस्तान के रिश्तों में अप्रत्याशित नरमी देखी गई है। सुरक्षा विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बदलाव के कई मेन पॉइंट हैं।</p>
<p>ISI की बढ़ती सक्रियता: सजीव वाजेद का आरोप है कि ढाका में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को 'खुली छूट' मिल गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, ढाका स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में एक समर्पित आईएसआई सेल की बात सामने आई है</p>
<p>उच्च स्तरीय सैन्य व राजनयिक दौरे: पाकिस्तान के आईएसआई प्रमुख और अन्य सैन्य अधिकारियों ने ढाका का दौरा किया, जिसे दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने के नेटवर्क के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>सीधी कनेक्टिविटी और वीजा में छूट: दशकों से बंद कराची-चिटगांव सीधे समुद्री व्यापार मार्ग को फिर से शुरू किया गया, सीधी उड़ानों पर लगी रोक हटी और राजनयिकों व सैन्य कर्मियों के लिए वीजा-मुक्त पहुंच पर सहमति बनी।</p>
<p><strong>कट्टरपंथ और सेना का 'इस्लामीकरण'</strong><br>
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, बांग्लादेश के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में कट्टरपंथ और धर्म का प्रभाव बढ़ा है।</p>
<p>शेख हसीना सरकार के दौरान आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंधित किए गए 'जमात-ए-इस्लामी' जैसे कट्टरपंथी संगठनों से प्रतिबंध हटा दिया गया।</p>
<p>हिज्ब-उत-तहरीर (Hizb-ut-Tahrir) जैसे संगठनों द्वारा खुलेआम रैलियां निकालना और जेलों से सजायाफ्ता आतंकवादियों की रिहाई क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनी है।</p>
<p>इतना ही नहीं बांग्लादेश सेना में चार खलीफाओं के नाम पर नई इकाइयां बनाई गईं और कुछ सैन्य बटालियनों के युद्ध घोष को बदलकर 'अल्लाह-हू-अकबर' किया गया।</p>
<p><strong>भारत का रुख क्या है?</strong><br>
सजीव वाजेद की इस चेतावनी पर भारत का रुख संतुलित और व्यावहारिक बना हुआ है।</p>
<p>भारत सरकार ने साफ किया कि शेख हसीना या उनके बेटे की ओर से दिए गए बयानों से भारत सरकार का कोई लेना-देना नहीं है और न ही वह इन विचारों का समर्थन करती है।</p>
<p>भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने कहा है कि वह बांग्लादेश के सीमावर्ती घटनाक्रमों पर "कड़ी नजर" रख रही हैं, हालांकि वर्तमान में सीमा पर किसी सीधे बड़े आतंकी खतरे का फ्लैग जारी नहीं किया गया है।</p>
<p>4,000 किलोमीटर से लंबी सीमा, व्यापार, बिजली सप्लाई और क्षेत्रीय स्थिरता के कारण ढाका और नई दिल्ली दोनों एक-दूसरे को नजरअंदाज नहीं कर सकते।</p>
<p><strong>क्या बांग्लादेश इतिहास दोहरा रहा है?</strong><br>
विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश की तुलना पाकिस्तान के 'हाइब्रिड मॉडल'- जहां सेना सीधे सरकार चलाती है, से पूरी तरह करना जल्दबाजी होगी, क्योंकि ढाका में नागरिक प्रशासन और बीएनपी सरकार ही नीतियां तय कर रही है।</p>
<p>हालांकि, भारत के लिए अपने पूर्वी मोर्चे पर ISI का बढ़ता प्रभाव और बढ़ता कट्टरपंथ निश्चित रूप से एक नई सुरक्षा चुनौती पेश करता है। भारत का प्रयास अब नई ढाका सरकार के साथ ऐसे कूटनीतिक संतुलन को तलाशने का है, जिससे भारत की सुरक्षा चिंताएं हल हों और बांग्लादेश की विकास से जुड़ी जरूरतें पूरी हों।</p>]]> </content:encoded>
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<title>स्ट्रेस कम करने के लिए महिला ने की ₹258 करोड़ की शॉपिंग, ऑनलाइन ऑर्डर कैंसिल करने पर पहुंची जेल</title>
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<description><![CDATA[ टोक्यो  जापान के एक रेस्टोरेंट में काम करने वाली महिला ने अपना स्ट्रेस दूर करने के लिए 258 करोड़ रुपये की ऑनलाइन शॉपिंग कर डाली. लेकिन ऑर्डर किए गए प्रोडक्ट्स में से एक भी उस तक नहीं पहुंचा. जब भी डिलीवरी बॉय उसके ऑर्डर को लेकर डोरस्टेप पर आता था तो वो किसी और के … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 11:15:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>स्ट्रेस, कम, करने, के, लिए, महिला, ने, की, ₹258, करोड़, की, शॉपिंग, ऑनलाइन, ऑर्डर, कैंसिल, करने, पर, पहुंची, जेल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>टोक्यो </strong></p>
<p>जापान के एक रेस्टोरेंट में काम करने वाली महिला ने अपना स्ट्रेस दूर करने के लिए 258 करोड़ रुपये की ऑनलाइन शॉपिंग कर डाली. लेकिन ऑर्डर किए गए प्रोडक्ट्स में से एक भी उस तक नहीं पहुंचा. जब भी डिलीवरी बॉय उसके ऑर्डर को लेकर डोरस्टेप पर आता था तो वो किसी और के दरवाजे की घंटी बजा देता था. ऐसा इसीलिए होता था क्योंकि महिला अपना एड्रेस देने के बजाय उसे नकली पते पर भेज देती थी, जिससे ऑर्डर अपने आप कैंसिल हो जाता था। </p>
<p><strong>डिलीवरी में 45 लाख खर्च</strong><br>
ये सिलसिला करीब 2 साल तक चलता रहा. इस दौरान महिला ने 2000 से ज्यादा ऑर्डर कैंसिल अलग-अलग तरह से कैंसिल किए. कुछ मामलों ने उसने ऑनलाइन पार्सल की पेमेंट के लिए कन्वीनियंस स्टोर का ऑप्शन चुना था, लेकिन तय समय के अंदर पेमेंट नहीं की. जबकि कुछ मामलों ने उसने साफ तौर पर डिलीवरी बॉय से उस पार्सल को लेने से कैश ऑन डिलीवरी के वक्त इनकार कर दिया. जापानी ब्रॉडकास्टर FNN प्राइम ऑनलाइन के मुताबिक, बार-बार ऑर्डर कैंसिल होने की वजह से शुएशा (Shueisha's Jump Characters Store) को डिलीवरी और उससे जुड़े खर्चों में लगभग 75 लाख येन (करीब 45 लाख रुपये) का नुकसान हुआ। </p>
<p><strong>'मुझे बहुत सुकून मिलता था'</strong><br>
टीवी असाही न्यूज के अनुसार, 32 साल की योशिदा ने जांच एजेंसी को बताया, 'मुझे ऑनलाइन शॉप पर एनिमे कैरेक्टर्स के सामान देखना बहुत अच्छा लगता था. रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत ज्यादा तनाव था. जब भी मैं कोई सामान उपलब्ध होने से पहले ऑर्डर कर लेती थी, तो मुझे एक अजीब सी संतुष्टि मिलती थी और सारा तनाव दूर हो जाता था. कंपनी से मेरी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है. मैं यह सब खुद के लिए कर रही थी। </p>
<p><strong>238 नकली अकाउंट्स का यूज किया</strong><br>
FNN की रिपोर्ट के अनुसार, योशिदा ने लगभग 6 साल पहले इस ऑनलाइन स्टोर से शॉपिंग करना शुरू किया था. शुरुआत में वो जो भी ऑर्डर करती थी, उसे मंगाती भी थी. लेकिन, सामान ऑर्डर करने और फिर उसे तुरंत रद्द करने का यह सिलसिला अक्टूबर 2023 के आसपास शुरू हुआ और लगभग दो साल तक चलता रहा. इस दौरान उसने खरीदारी करने के लिए 238 अलग-अलग अकाउंट्स का इस्तेमाल किया।</p>
<p>
<strong>कंपनी ने कार्रवाई की मांग की</strong><br>
हालांकि शुएशा कंपनी का कहना है कि महिला की इस हरकत की वजह से लंबे समय तक उन वास्तविक ग्राहकों का नुकसान हुआ, जो वास्तव में उत्पाद खरीदना चाहते थे और उन्हें न्यायपूर्ण अवसर नहीं मिला. कंपनी ने पुलिस से इस मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की है. रिपोर्ट्स के अनुसार, योशिदा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोप स्वीकार कर लिए हैं. जापानी कानून के तहत, धोखाधड़ी के जरिए किसी के व्यवसाय में रुकावट डालने के आरोप में अब उस पर कार्रवाई की जा रही है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>भारत पर 100% टैरिफ को अपनों ने बताया ‘आत्मघाती कदम’, ट्रंप प्रशासन पर उठे सवाल</title>
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<description><![CDATA[ वॉशिंगटन रूसी तेल खरीदने पर ट्रंप प्रशासन भारत समेत पांच देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है. अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के मुख्य खरीदारों (जैसे चीन और भारत) पर टैरिफ लगाने वाले बिल को बहुमत से मंजूरी दे दी है. यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 23:00:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>भारत, पर, 100, टैरिफ, को, अपनों, ने, बताया, ‘आत्मघाती, कदम’, ट्रंप, प्रशासन, पर, उठे, सवाल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन</strong><br>
रूसी तेल खरीदने पर ट्रंप प्रशासन भारत समेत पांच देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है. अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के मुख्य खरीदारों (जैसे चीन और भारत) पर टैरिफ लगाने वाले बिल को बहुमत से मंजूरी दे दी है. यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों के सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की अनुमति देता है जो रूसी तेल और गैस के शीर्ष आयातक हैं। </p>
<p>हालांकि, ट्रंप के इस फैसले का अमेरिका में ही विरोध होने लगा है. एक अमेरिका सीनेटर ने तो इस कदम पर सवाल भी उठाए हैं. उन्होंने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा, 'ऐसे समय में जब हम चीन के साथ चल रहे कंपटीशन में मदद करने के लिए भारत का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, भारत पर 100% टैरिफ लगाना पूरी तरह से आत्मघाती कदम है' .</p>
<p><strong>अमेरिकी सीनेटर्स ने दी ट्रंप प्रशासन को चेतावनी</strong></p>
<p>अमेरिकी सीनेटर रॉब वाइडेन और रैंड पॉल ने भारत और चीन पर प्रस्तावित 100% टैरिफ का विरोध किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस कदम से अमेरिकी हितों को नुकसान हो सकता है और अहम साझेदारों के साथ रिश्तों में तनाव आ सकता है। उन्होंने कहा 'ऐसे समय में जब हम चीन के साथ मुकाबले में मदद के लिए भारत को अपने साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं उस पर 100% टैरिफ लगाना पूरी तरह से हमारे अपने ही हितों के खिलाफ होगा।'</p>
<p>अमेरिकी सीनेटर्स ने अमेरिकी सीनेट में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल पर बहस के दौरान अपनी गहरी आपत्तियां जताईं हैं। हालांकि आपत्तियों के बावजूद ये बिल बहुमत से पास हुआ है। सीनेटर पॉल ने प्रस्तावित टैरिफ को अमेरिका के लिए 'अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने' जैसा बताया और कहा कि इतने भारी शुल्क से भारत के साथ वॉशिंगटन के रिश्ते अस्थिर हो सकते हैं। रॉब वाइडेन ने भी भारत पर लगाए जाने वाले प्रस्तावित टैरिफ का विरोध किया है।</p>
<p><strong>अमेरिका में कौन सा बिल पास हुआ?</strong><br>
अमेरिकी सीनेट ने हाल ही में एक बड़ा विधेयक पास किया है, जिसका मकसद रूस की ऊर्जा कमाई पर चोट करना है. ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम के इस बिल को भारी बहुमत से मंजूरी मिली. इसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह अधिकार दिया गया है कि जो देश रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखेंगे, उनके सामान पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है. इस लिस्ट में भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार देशों के साथ अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया भी शामिल हैं. विधेयक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उनके सहयोगियों, ओलिगार्क्स और वित्तीय संस्थानों पर भी कड़े प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। </p>
<p><strong>डेमोक्रेट सांसद भी परेशान</strong><br>
लांकि, इस बिल को लेकर अमेरिकी राजनीति में भी मतभेद सामने आ रहे हैं. कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने भी चिंता जताई है कि इससे राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की बहुत ज्यादा शक्तियां मिल जाएंगी, जिसका असर वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है. यह विधेयक अब प्रतिनिधि सभा में जाएगा, जहां इस पर अगले सत्र में चर्चा और मतदान होगा. लेकिन उससे पहले ही भारत पर संभावित टैरिफ को लेकर अमेरिका के भीतर उठती आवाजें यह संकेत दे रही हैं कि इस फैसले का असर सिर्फ विदेश नीति ही नहीं, बल्कि अमेरिका की अपनी आर्थिक और रणनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। </p>
<p><strong>बिल में रूसी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव</strong><br>
अमेरिका ने जो बिल तैयार किया है उसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, सीनियर पॉलिटिकल और मिलिट्री अधिकारियों, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस, एनर्जी प्रोजेक्ट्स और रूस की युद्ध कोशिशों से जुड़ी दूसरी संस्थाओं पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। यह कानून उन पुराने और नए झंडे वाले तेल टैंकरों पर भी प्रतिबंध बढ़ाएगा जिनका इस्तेमाल रूस कथित तौर पर अपने एनर्जी एक्सपोर्ट पर लगे मौजूदा अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है।<br>
राष्ट्रपति के पास प्रतिबंधों या रोक को हटाने का अधिकार भी होगा अगर वे कांग्रेस को यह विश्वास दिलाते हैं कि ऐसा करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है।</p>
<p>रूसी तेल खरीदने वाले मुल्कों पर पहले भी ट्रंप प्रशासन पाबंदी लगाता रहा है. हालांकि इस बार 100 फीसदी टैरिफ का प्रस्ताव बहुत ही सख्त माना जा रहा है. इस बिल को लाने के पीछे तर्क दिया गया कि इस तरह का व्यापार यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा देता है। </p>
<p>वर्तमान में चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया रूस से तेल और गैस के टॉप पांच खरीदार हैं. रूस पर प्रतिबंधों के अलावा, यह बिल 'ईरान सैंक्शन एक्ट ऑफ 1996' की टाइम लिमिट को 2031 तक बढ़ा देगा. यह कानून ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर फाइन लगाएगा। </p>
<p>वोटिंग के बाद, सीनेटर ब्लूमेंथल ने मीडिया से कहा, 'ये कड़े प्रतिबंध और टैरिफ उन सभी को रोक देंगे जो इस जानलेवा, आपराधिक और आक्रामक जंग में शामिल हैं। </p>
<p>वहीं कुछ डेमोक्रेट्स ने चेताया कि यह बिल ट्रंप को टैरिफ से जुड़े नए अधिकार देगा. अब यह बिल मंज़ूरी के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा) में जाएगा, जहां 31 अगस्त को इस पर चर्चा होने की उम्मीद है। </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>थाईलैंड में सनकी छात्र का खूनी तांडव, दादा&#45;दादी समेत 8 की हत्या; स्कूल में भी मचाया कत्लेआम</title>
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<description><![CDATA[  बैंकॉक थाईलैंड में नौंवी क्लास के एक सनकी छात्र ने शुक्रवार के दिन को खूनी शुक्रवार में बदल दिया. उसने एक दो नहीं, कुल 8 लोगों की जान ले ली है. क्या घर वालें और क्या स्कूल के टीचर और दूसरे बच्चे, उसने जरा भी रहम नहीं दिखाई है. थाईलैंड की नेशनल पुलिस ने एक … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 13:15:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>थाईलैंड, में, सनकी, छात्र, का, खूनी, तांडव, दादा-दादी, समेत, की, हत्या, स्कूल, में, भी, मचाया, कत्लेआम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> बैंकॉक</strong><br>
थाईलैंड में नौंवी क्लास के एक सनकी छात्र ने शुक्रवार के दिन को खूनी शुक्रवार में बदल दिया. उसने एक दो नहीं, कुल 8 लोगों की जान ले ली है. क्या घर वालें और क्या स्कूल के टीचर और दूसरे बच्चे, उसने जरा भी रहम नहीं दिखाई है. थाईलैंड की नेशनल पुलिस ने एक बयान में कहा कि इस छात्र ने सबसे पहले अपने दादा की हैंडगन से अपने दादा-दादी की गोली मारकर हत्या की. फिर वह देश की राजधानी बैंकॉक के उत्तर में स्थित अपने स्कूल पहुंचा और वहां ताबड़तोड़ गोलीबारी की। </p>
<p>इस तरह स्कूल में भी उसने तीन टीचरों और तीन छात्रों को मार डाला है. इस गोलीबारी में कई अन्य छात्र भी घायल हुए हैं. पुलिस के अनुसार, नौवीं क्लास के इस शूटर छात्र ने अपने दादा की 9mm की हैंडगन का इस्तेमाल किया है. उसके दादाजी खुद एक टीचर थे। </p>
<p><strong>स्थानीय ब्रॉडकास्टर थाई PBC ने बताया कि इस स्कूल का नाम डेबसिरिन नोंथाबुरी स्कूल है। </strong></p>
<p><strong>हमलावर छात्र का क्या हुआ?</strong><br>
हमलावर छात्र अभी जिंदा है या उसकी मौत हो चुकी है, उसे लेकर अलग-अलग खबरें आ रही हैं. न्यूज एजेंसी AFP ने खबर दी है कि कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने हमलावार छात्र को गोली मारकर मार डाला, जबकि अन्य रिपोर्टों में कहा गया कि उसने आत्महत्या कर ली. वही न्यूज एजेंसी एपी की खबर है कि शूटर को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। </p>
<p><strong>इसी साल थाईलैंड के स्कूल में हुई थी गोलीबारी</strong><br>
एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस इलाके में यह गोलीबारी हुई, वहां थाईलैंड में सबसे ज्यादा लोगों के पास बंदूकें हैं. अनुमान है कि इस क्षेत्र में करीब 1 करोड़ बंदूकें मौजूद हैं. इसका मतलब है कि लगभग हर सात लोगों पर एक बंदूक आती है. हालांकि, बंदूक कानूनों को सख्त बनाने के कई पुराने वादे किए गए, लेकिन गोलीबारी की घटनाएं अब भी नहीं रुकी हैं। </p>
<p>इसी साल फरवरी में थाईलैंड के दक्षिणी हिस्से के एक स्कूल में एक किशोर ने गोलीबारी कर दी थी. बाद में थाई पुलिस ने उसे गोली मारकर गिरफ्तार किया. इस हमले में स्कूल के प्रिंसिपल की मौत हो गई थी, जबकि दो छात्र घायल हुए थे। </p>
<p>वहीं, साल 2022 में बंदूक और चाकू से लैस एक पूर्व पुलिसकर्मी देश के उत्तरी इलाके की एक नर्सरी में घुस गया था. उसने वहां 24 बच्चों और 12 वयस्कों की हत्या कर दी थी. यह घटना थाईलैंड के इतिहास के सबसे भयावह नरसंहारों में गिनी जाती है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>दिल्ली में शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस से बांग्लादेश में सियासी भूचाल, अखबारों ने जताया कड़ा विरोध</title>
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<description><![CDATA[ ढाका  दिल्ली में बुधवार को शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बांग्लादेश में दो तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली. एक तरफ अवामी लीग समर्थकों ने फिर से वापसी की उम्मीद देखनी शुरू की, तो दूसरी तरफ हसीना और अवामी लीग के विरोधियों की नाराजगी भी तेज हो गई. इसी बीच बांग्लादेश के क्रिकेटर … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 06 Aug 2026 22:00:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ढाका </strong></p>
<p>दिल्ली में बुधवार को शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बांग्लादेश में दो तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली. एक तरफ अवामी लीग समर्थकों ने फिर से वापसी की उम्मीद देखनी शुरू की, तो दूसरी तरफ हसीना और अवामी लीग के विरोधियों की नाराजगी भी तेज हो गई. इसी बीच बांग्लादेश के क्रिकेटर शाकिब अल हसन के घर पर रात में बमबाजी और हमला हुआ। </p>
<p>इस पूरी घटना से पहले भी ढाका कई दिनों से आपत्ति जता रहा था, लेकिन भारत ने उस पर ध्यान नहीं दिया. विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि यह कार्यक्रम एक निजी संस्था की पहल पर हुआ और इसमें सरकार किसी भी तरह से शामिल नहीं है. मामला पूरी तरह गैर सरकारी है। </p>
<p>अब बड़ा सवाल यह है कि शेख हसीना के सार्वजनिक रूप से सामने आने और उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस को बांग्लादेशी मीडिया ने कैसे कवर किया. ज्यादातर बांग्लादेशी न्यूज प्लेटफॉर्म्स ने शेख हसीना के बयान से ज्यादा बीएनपी सरकार की नाराजगी को प्रमुखता दी। </p>
<p><strong>बांग्लादेशी मीडिया ने शेख हसीना के प्रेस कॉन्फ्रेंस को कैसे कवर किया?</strong><br>
'बांग्लादेश प्रतिदिन' ने इस आयोजन को नकारात्मक ढंग से पेश किया. अखबार ने मुख्य रूप से बांग्लादेश सरकार के गुस्से को सामने रखा. उसके पहले पन्ने की सुर्खी थी, 'दिल्ली के कार्यक्रम में दंडित हसीना को बयान देने की अनुमति पर नाराज प्रतिक्रिया। </p>
<p>दूसरी तरफ, बांग्लादेश के लोकप्रिय अखबार 'प्रथम आलो' ने शेख हसीना के भाषण को कवर ही नहीं किया. उसने शाकिब अल हसन के घर पर हमले की खबर छापी. इस तरह यह दिखाया गया कि दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर बांग्लादेश के एक हिस्से में गुस्सा है. 'प्रथम आलो' में हसीना के भाषण पर कोई खबर नजर नहीं आई। </p>
<p>'दैनिक इत्तेफाक' ने शेख हसीना के बयान के विरोध में बांग्लादेश में क्या क्या हुआ, इसी पर फोकस रखा. उसने बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहउद्दीन अहमद की टिप्पणी को मुख्य खबर बनाया. उनका कहना था, 'अवामी लीग की किस्मत तय करेगी अदालत। </p>
<p>इसी रिपोर्ट में अवामी लीग सरकार के पूर्व गृह राज्य मंत्री तंजीम अहमद सोहेल ताज की टिप्पणी भी प्रमुख रही. उन्होंने हसीना को निशाना बनाते हुए कहा, 'अपने कामों की जिम्मेदारी स्वीकार किए बिना पार्टी को भ्रमित किया जा रहा है और देश लौटने का अवास्तविक सपना दिखाया जा रहा है। </p>
<p><strong>कई अखबारों ने शेख हसीना के बयान को कवर नहीं किया</strong><br>
'कालेर कंठ' ने भी ढाका की नाराजगी को ही उभारा. दिल्ली के कार्यक्रम को लेकर बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय की कड़ी प्रतिक्रिया को प्रमुखता दी, जबकि हसीना ने क्या कहा, इस पर कुछ भी प्रकाशित नहीं किया गया. 'जुगांतर' ने भी लगभग यही रास्ता अपनाया. उसने भी 'दैनिक इत्तेफाक' की तरह तंजीम अहमद सोहेल ताज की आलोचना को पहले पन्ने पर जगह दी। </p>
<p>अंग्रेजी समाचार माध्यम 'ढाका ट्रिब्यून' ने भी हसीना के बयान की खबर से दूरी बनाई और बीएनपी सरकार के गुस्से को पहले पन्ने की मुख्य खबर के तौर पर छापा. उसने विस्तार से बताया कि हसीना के बयान से बांग्लादेश सरकार नाराज है। </p>
<p><strong>शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने का किया ऐलान</strong><br>
'बांग्लादेश पोस्ट' ने जमात ए इस्लामी के प्रमुख सॉफिकुर रहमान की चेतावनी को प्रमुखता दी. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वह इसी साल दिसंबर में शायद बांग्लादेश लौटेंगी. इसी को लेकर सॉफिकुर रहमान ने कहा कि एक और क्रांति सामने है. यानी उन्होंने जोरदार इशारा दिया कि बांग्लादेश फिर अशांत हो सकता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>यूरोप की ‘गंगा’ सूखने लगी, अंतरिक्ष से दिखी नदी की उभरी तलहटी; गर्मी ने तोड़े रिकॉर्ड</title>
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<description><![CDATA[ लंदन  यूरोप की नदियां अब सिर्फ जमीन पर ही नहीं, अंतरिक्ष से भी सिकुड़ती हुई नजर आने लगी हैं. भीषण गर्मी और लगातार पड़ रहे सूखे ने हालात इतने खराब कर दिए हैं कि सैटेलाइट तस्वीरों में नदी किनारों की चौड़ी रेत की पट्टियां और पानी के भीतर रहने वाले हिस्से तक साफ दिखाई दे … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 06 Aug 2026 22:00:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लंदन </strong></p>
<p>यूरोप की नदियां अब सिर्फ जमीन पर ही नहीं, अंतरिक्ष से भी सिकुड़ती हुई नजर आने लगी हैं. भीषण गर्मी और लगातार पड़ रहे सूखे ने हालात इतने खराब कर दिए हैं कि सैटेलाइट तस्वीरों में नदी किनारों की चौड़ी रेत की पट्टियां और पानी के भीतर रहने वाले हिस्से तक साफ दिखाई दे रहे हैं. 2023 और 2025 की तस्वीरों से तुलना करें तो फर्क चौंकाने वाला है. ताजा सैटेलाइट तस्वीरें दिखाती हैं कि यूरोप की कई प्रमुख नदियां सामान्य दिनों की तुलना में काफी छोटी हो चुकी हैं. जहां पहले पानी बहता था, वहां अब रेत और सूखी जमीन नजर आ रही है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है. लगातार पड़ रही हीटवेव और बारिश की भारी कमी ने नदियों का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर तक गिरा दिया है. नीचे दी गई तस्वीर में आप देख सकते हैं कि ऑस्ट्रिया के वियना के पास डेन्यूब नदी का जलस्तर कितना घट गया है. ऊपर की तस्वीर 30 जुलाई 2026 की है, जबकि नीचे की तस्वीर 7 अगस्त 2025 की. एक साल के भीतर नदी के बीच बने रेत के टापू (सैंडबैंक) पहले की तुलना में कहीं अधिक साफ दिखाई दे रहे हैं। </p>
<p>
<strong>डैन्यूब ने तोड़ दिया पुराना रिकॉर्ड</strong><br>
यूरोप की दूसरी सबसे लंबी नदी डैन्यूब का जलस्तर हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में सोमवार को सिर्फ 4 इंच रह गया. इस नदी को आप यूरोप की गंगा भी कह सकते हैं. कई देशों की लाइफलाइन इस पर निर्भर करती है. अब यह 2018 में बने 13 इंच के पिछले रिकॉर्ड से भी काफी नीचे है. मौसम विभाग को आशंका है कि इस सप्ताह तापमान और बढ़ने पर जलस्तर में और गिरावट आ सकती है। </p>
<p><strong>पानी के लिए चट्टान तक उड़ानी पड़ी</strong><br>
सूखती डैन्यूब नदी ने रोमानिया में बिजली संकट भी खड़ा कर दिया है. देश के सेरनावोडा परमाणु बिजली संयंत्र तक पर्याप्त पानी पहुंचाने के लिए रोमानियाई नौसेना को विस्फोटकों से चट्टान उड़ानी पड़ी ताकि नदी का पानी प्लांट की ओर मोड़ा जा सके. यही नहीं, अब सरकार डैन्यूब की एक शाखा में पत्थरों से भरी दो बार्ज डुबोकर अस्थायी बांध बनाने की तैयारी कर रही है, जिससे ज्यादा पानी परमाणु संयंत्र तक पहुंचाया जा सके। </p>
<p><strong>हंगरी में बिजली संकट गहराया</strong><br>
डैन्यूब का जलस्तर गिरने का असर हंगरी के पाक्स परमाणु बिजली संयंत्र पर भी पड़ा है. देश की करीब आधी बिजली पैदा करने वाला यह प्लांट डैन्यूब के पानी से ठंडा किया जाता है. लेकिन पानी की कमी के कारण इसके सभी रिएक्टरों में से सिर्फ एक ही चल रहा है और संयंत्र करीब 10 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रहा है. अगर नदी का जलस्तर और गिरा तो संयंत्र पूरी तरह बंद होने का खतरा भी पैदा हो सकता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>यूरोपीय संघ में अवैध प्रवासन 55% घटा, दो साल में बड़ा बदलाव; EU आयुक्त का दावा</title>
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<description><![CDATA[ ब्रुसेल्स  यूरोपीय संघ (ईयू) की बाहरी सीमाओं पर अवैध रूप से प्रवेश करने के मामलों में पिछले दो वर्षों के दौरान 55 प्रतिशत और 2026 की शुरुआत से अब तक लगभग 40 प्रतिशत की कमी दर्ज की गयी है। यह जानकारी यूरोपीय संघ के आंतरिक मामलों एवं प्रवासन आयुक्त मैग्नस ब्रूनर ने दी।  ब्रूनर ने … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 23:00:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>यूरोपीय, संघ, में, अवैध, प्रवासन, 55, घटा, दो, साल, में, बड़ा, बदलाव, आयुक्त, का, दावा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ब्रुसेल्स</strong><br>
 यूरोपीय संघ (ईयू) की बाहरी सीमाओं पर अवैध रूप से प्रवेश करने के मामलों में पिछले दो वर्षों के दौरान 55 प्रतिशत और 2026 की शुरुआत से अब तक लगभग 40 प्रतिशत की कमी दर्ज की गयी है। यह जानकारी यूरोपीय संघ के आंतरिक मामलों एवं प्रवासन आयुक्त मैग्नस ब्रूनर ने दी।</p>
<p> ब्रूनर ने ब्रुसेल्स में मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस वर्ष की शुरुआत से अब तक यूरोपीय संघ की बाहरी सीमाओं पर अवैध रूप से सीमा पार करने के 49 हजार से कुछ अधिक मामले दर्ज किये गये हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह संख्या अक्टूबर 2015 के केवल एक सप्ताह के दौरान ग्रीस के द्वीपों पर पहुंचे प्रवासियों के बराबर है।</p>
<p>स्यूटी में हाल में उत्पन्न स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह यूरोप की सामूहिक क्षमता और बाहरी सीमाओं की सुरक्षा की एक बड़ी परीक्षा थी, लेकिन यूरोपीय संघ इस चुनौती से सफलतापूर्वक निपटने में सक्षम रहा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि स्पेन के गृह मंत्री फर्नांडो ग्रांडे-मार्लास्का ने पुष्टि की है कि स्थिति नियंत्रण में है, कोई भी प्रवासी स्पेन के मुख्य भूभाग तक नहीं पहुंचा है और शेंगेन क्षेत्र भी इससे प्रभावित नहीं हुआ है।</p>
<p> ब्रूनर ने कहा कि यह संकट यूरोपीय संघ के नये 'प्रवासन एवं शरण समझौते' (ईयू पैक्ट ऑन माइग्रेशन एंड असाइलम) की पहली बड़ी परीक्षा थी, जिसके प्रमुख प्रावधान जून से लागू हुए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यूरोपीय आयोग का मानना है कि बाहरी सीमाओं पर कड़ी निगरानी, त्वरित प्रक्रियाओं और अवैध प्रवासियों की वापसी व्यवस्था में सुधार जैसे नए उपायों के सकारात्मक परिणाम मिलने लगे हैं।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह उत्तरी अफ्रीका में मोरक्को की सीमा से लगे स्पेन के स्वायत्त शहर सेउटा में बड़ी संख्या में प्रवासी पहुंच गए थे। एक ही दिन में लगभग 60 हजार लोगों ने सीमा पार की थी, जबकि शहर की कुल आबादी करीब 85 हजार है। इसके बाद डेनमार्क, इटली, चेक गणराज्य और फिनलैंड सहित कई यूरोपीय संघ सदस्य देशों के अधिकारियों ने स्पेन की शेंगेन क्षेत्र की सदस्यता अस्थायी रूप से निलंबित करने की मांग की थी।</p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान युद्ध में अमेरिका का मिसाइल भंडार खाली होने की कगार पर! स्टॉक में भारी कमी की रिपोर्ट</title>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन अमेरिका और ईरान के बीच पांच महीने से चल रहे युद्ध ने अमेरिकी सैन्य भंडार पर गहरा असर डाला है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी सेना ने अपनी अत्यधिक सटीक लंबी दूरी की मिसाइलों का बड़ा हिस्सा खर्च कर दिया है. आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम यानी ATACMS और PrSM का लगभग पूरा स्टॉक … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 23:00:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, युद्ध, में, अमेरिका, का, मिसाइल, भंडार, खाली, होने, की, कगार, पर, स्टॉक, में, भारी, कमी, की, रिपोर्ट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन</strong></p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच पांच महीने से चल रहे युद्ध ने अमेरिकी सैन्य भंडार पर गहरा असर डाला है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी सेना ने अपनी अत्यधिक सटीक लंबी दूरी की मिसाइलों का बड़ा हिस्सा खर्च कर दिया है. आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम यानी ATACMS और PrSM का लगभग पूरा स्टॉक इस्तेमाल हो चुका है। </p>
<p>ये मिसाइलें सुरक्षित दूरी से सटीक हमले करने की क्षमता रखती हैं. प्रत्येक की कीमत दस लाख डॉलर से अधिक है. वैश्विक टोमाहॉक क्रूज मिसाइल आपूर्ति का भी आधा हिस्सा खर्च हो गया है. यह जानकारी पहले सार्वजनिक नहीं हुई थी. अमेरिकी सैन्य तैयारियों को लेकर चिंता पैदा कर रही है।</p>
<p>ATACMS और PrSM मुख्य रूप से जमीन से जमीन पर मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलें हैं. एटीएसीएमएस का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में भी हुआ था जहां इन्होंने रूसी ठिकानों पर हमले में मदद की. पीआरएसएम नई और अधिक एडवांस है जो एटीएसीएमएस की जगह ले रही है. युद्ध शुरू होने से पहले सेंट्रल कमांड के पास जो भूमि आधारित मिसाइलें थीं वे लगभग समाप्त हो गईं लेकिन अन्य जगहों से आपूर्ति करके उन्हें फिर से भरा गया। </p>
<p>माहॉक मिसाइलें जहाजों, क्रूजरों और पनडुब्बियों से दागी जाती हैं. मजबूत रक्षा वाले ठिकानों पर पायलटों को जोखिम में डाले बिना हमला करने का मुख्य साधन रही हैं. इनके अलावा रक्षात्मक हथियारों का भी बड़ा हिस्सा खर्च हुआ. सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी से जुलाई तक पैट्रियट इंटरसेप्टर का करीब 65% और THAAD बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर का कम से कम 38% स्टॉक कम हो गया. ये सिस्टम आने वाली मिसाइलों को नष्ट करने में प्रभावी माने जाते हैं। </p>
<p><strong>क्यों खर्च हुआ इतना बड़ा भंडार</strong><br>
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी में इजरायल के साथ मिलकर ईरान युद्ध शुरू किया था और इसे छोटा संघर्ष बताया था. लेकिन युद्ध लंबा खिंच गया. प्रशासन ने जोखिम भरे पायलट वाले बमबारी मिशनों से बचने के लिए इन सटीक मिसाइलों का अधिक इस्तेमाल किया. ये हथियार सुरक्षित दूरी से हमला करने देते हैं इसलिए मजबूत वायु रक्षा वाले दुश्मन जैसे चीन के खिलाफ भी मूल्यवान माने जाते हैं। </p>
<p>मिसाइल भंडार में कमी को लेकर प्रशासन के अंदर तनावपूर्ण चर्चाएं हुईं कि अमेरिका कितने समय तक ईरान पर हमले जारी रख सकता है बिना अन्य संकटों का जवाब देने की क्षमता खोए. कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि सैन्य सलाहकारों ने भंडार की चेतावनी दी जिसके चलते बड़ा हमला टाला गया. एक अमेरिकी अधिकारी ने इसे खाड़ी देशों के दबाव से जोड़ा। </p>
<p>अधिकारियों को डर है कि कम स्टॉक रूस और चीन जैसे विरोधियों को रोकने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है. अगर ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले दोबारा शुरू हुए तो राष्ट्रपति ट्रंप को अधिक जोखिम वाले पायलट मिशनों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। </p>
<p>रक्षात्मक हथियारों की कमी भी चिंता का विषय है क्योंकि ये अमेरिकी ठिकानों और सहयोगियों की रक्षा करते हैं. सैन्य नेताओं ने हफ्तों से पैट्रियट जैसी रक्षात्मक मिसाइलों के घटते भंडार की चेतावनी दी थी. विश्लेषकों का कहना है कि कुछ गोला-बारूद और मिसाइलों का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर है लेकिन लंबे युद्ध के लिए आपूर्ति पर्याप्त नहीं पड़ सकती। </p>
<p>व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति ट्रंप का बयान जारी किया जिसमें कहा गया कि अमेरिका के पास दुनिया में सबसे अधिक गोला-बारूद है और जरूरत से कहीं ज्यादा. रक्षा कंपनियां इस समय पहले से कहीं अधिक उत्पादन कर रही हैं और संयंत्रों का विस्तार रिकॉर्ड स्तर पर हो रहा है. पेंटागन प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी सेना दुनिया की सबसे शक्तिशाली है. राष्ट्रपति के चयनित समय व स्थान पर काम करने के लिए सब कुछ उपलब्ध है। <br>
लॉकहीड मार्टिन  ATACMS, PrSM और THAAD बनाती है जबकि रेथियॉन टोमाहॉक और पैट्रियट बनाती है. रेथियॉन ने टोमाहॉक उत्पादन बढ़ाने के लिए पेंटागन के साथ बहुवर्षीय समझौते की दिशा में प्रगति की है. सेना ने कहा है कि एटीएसीएमएस को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है. उत्पादन पीआरएसएम की ओर शिफ्ट हो रहा है. 2027 के लिए बड़ी संख्या में पीआरएसएम का ऑर्डर दिया गया है। </p>
<p>यह स्थिति आधुनिक युद्ध में सटीक गोला-बारूद की मांग और आपूर्ति के असंतुलन को उजागर करती है. छोटे समझे गए संघर्ष लंबे खिंच सकते हैं. भंडार पर दबाव डाल सकते हैं. अमेरिका अन्य क्षेत्रों में भी तैनाती बनाए रखना चाहता है इसलिए वैश्विक आपूर्ति का प्रबंधन चुनौतीपूर्ण है. उत्पादन बढ़ाने के प्रयास जारी हैं लेकिन नई मिसाइलें बनाने में समय लगता है। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>लाल सागर में फिर हूती का हमला, सऊदी अरब के तेल टैंकर को बनाया निशाना; 13 दिन में 8वां जहाज तबाह</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली अमेरिका- ईरान जंग के बीच होर्मुज के साथ-साथ लाल सागर का पानी भी खौल रहा है. यमन में रहने वाले ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने बुधवार, 5 अगस्त को कहा कि उन्होंने लाल सागर में यानबू के पास सऊदी अरब के एक तेल टैंकर पर हमला किया है. उधर अमेरिका और ईरान ने … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 20:00:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>लाल, सागर, में, फिर, हूती, का, हमला, सऊदी, अरब, के, तेल, टैंकर, को, बनाया, निशाना, दिन, में, 8वां, जहाज, तबाह</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>अमेरिका- ईरान जंग के बीच होर्मुज के साथ-साथ लाल सागर का पानी भी खौल रहा है. यमन में रहने वाले ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने बुधवार, 5 अगस्त को कहा कि उन्होंने लाल सागर में यानबू के पास सऊदी अरब के एक तेल टैंकर पर हमला किया है. उधर अमेरिका और ईरान ने होर्मुज में नाकेबंदी कर रखी है तो इधर हूती विद्रोही ने लाल सागर में सऊदी अरब की समुद्री नाकेबंदी जारी रखे हुए हैं. एक दिन पहले भी यमन के पश्चिमी तट के पास हूती के मिसाइल हमले के बाद भारत के झंडे वाला एक मालवाहक जहाज पलट गया था और डूब गया था। </p>
<p>न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार हूती समूह के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने एक वीडियो जारी कर यह दावा किया है. इसमें उन्होंने कहा कि समूह ने उत्तरी लाल सागर में यानबू के तट के पास कई बैलिस्टिक मिसाइलों से सऊदी तेल टैंकर 'वफा' को सफलतापूर्वक निशाना बनाया. उन्होंने कहा कि 22 जुलाई को नाकेबंदी शुरू होने के बाद से यह आठवां जहाज है जिसे हूती विद्रोहियों ने निशाना बनाया है। </p>
<p><strong>एक दिन पहले भारतीय जहाज पर हुआ था हमला</strong><br>
इससे पहले यमन के तट के निकट मंगलवार को भारतीय झंडे वाले एक कमर्शियल जहाज पर हमला हुआ था. इस जहाज का नाम एमएसवी फैज नूर ओलिया है. भारत के विदेश मंत्रलय ने बताया कि जहाज पर 13 भारतीय नागरिक सवार थे और सभी को बचा लिया गया. भारत ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की थी और कहा कि इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया जाना बंद होना चाहिए। </p>
<p>विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को बचाने में सहयोग के लिए यमन के अधिकारियों का धन्यवाद किया. यमन सरकार ने भी इस हूती हमले की कड़ी निंदा की है. यमन के विदेश और प्रवासी मामलों के मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि विस्फोटक से भरी नाव से किए गए इस हमले में जहाज पूरी तरह डूब गया. इसमें 13 भारतीयों समेत कुल 14 नाविक सवार थे और सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया. मंत्रालय ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय और समुद्री नियमों का खुला उल्लंघन करार दिया। </p>]]> </content:encoded>
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<title>Pakistan Army ने छोड़ा WhatsApp! अब चीनी ऐप WeChat से होगी बातचीत, भारत में पहले से बैन</title>
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<description><![CDATA[ इस्लामबाद  पाकिस्तान की सेना ने अपने सभी सैन्य अधिकारियों और जवानों को WhatsApp यूज करने से मना किया है. आपको बता दें कि वॉट्सऐप अमेरिकी कंपनी मेटा का प्लेटफॉर्म है. पाकिस्तानी सेना अधिकारियों और जवानों को वॉट्सऐप की जगह चीन के WeChat ऐप पर जाने का निर्देश दिया है. यह फैसला ऐसे समय में आया … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 11:15:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Pakistan, Army, ने, छोड़ा, WhatsApp, अब, चीनी, ऐप, WeChat, से, होगी, बातचीत, भारत, में, पहले, से, बैन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इस्लामबाद </strong></p>
<p>पाकिस्तान की सेना ने अपने सभी सैन्य अधिकारियों और जवानों को WhatsApp यूज करने से मना किया है. आपको बता दें कि वॉट्सऐप अमेरिकी कंपनी मेटा का प्लेटफॉर्म है. पाकिस्तानी सेना अधिकारियों और जवानों को वॉट्सऐप की जगह चीन के WeChat ऐप पर जाने का निर्देश दिया है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब चीन और पाकिस्तान के बीच रक्षा और रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। </p>
<p> सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान सेना की ओर से जारी एक इंटर्नल ऑर्डर में सभी सैन्य अधिकारियों, जवानों और प्रशासनिक कर्मचारियों से कहा गया है कि वे धीरे-धीरे वॉट्सऐप का इस्तेमाल बंद करें और आधिकारिक व सैन्य बातचीत के लिए WeChat अपनाएं. बता दें कि भारत ने काफी पहले ही WeChat को बैन कर दिया था, इसलिए अब भारत में ये ऐप उपलब्ध नहीं है। </p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान सेना का मानना है कि पश्चिमी देशों के मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर निगरानी, डेटा लीक और बातचीत इंटरसेप्ट होने का खतरा ज्यादा है. इसी वजह से सेना अब चीनी प्लेटफॉर्म WeChat का इस्तेमाल करना चाहती है. गौरतलब है कि WeChat चीन का सबसे बड़ा मैसेजिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है. यह सिर्फ चैटिंग ऐप नहीं है, बल्कि इसके जरिए वीडियो कॉल, फाइल शेयरिंग, पेमेंट और कई दूसरी डिजिटल सेवाएं भी मिलती हैं. इस तरह के ऐप्स को सुपर ऐप भी कहा जाता है. चीन में करोड़ों लोग इसका इस्तेमाल करते हैं और यह वहां का सबसे पॉपुलर ऐप भी है। </p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि WeChat अपनाने से पाकिस्तान और चीन की सेनाओं के बीच डिजिटल सिस्टम को एक जैसा बनाने में मदद मिलेगी. इससे दोनों देशों के बीच सैन्य जानकारी साझा करना, संयुक्त ऑपरेशन के दौरान बातचीत करना और इंटेलिजेंस कोऑर्डिनेशन पहले से आसान हो सकता है। </p>
<p>दरअसल, पिछले कुछ सालों में चीन और पाकिस्तान के रक्षा संबंध काफी तेजी से बढ़े हैं. पहले दोनों देशों के बीच सहयोग मुख्य रूप से हथियारों की खरीद तक सीमित था. पाकिस्तान ने चीन से लड़ाकू विमान, युद्धपोत और एयर डिफेंस सिस्टम खरीदे हैं. लेकिन अब यह साझेदारी सिर्फ हथियारों तक सीमित नहीं रह गई है। </p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देश अब साइबर क्षमता बढ़ाने, सुरक्षित कम्युनिकेशन सिस्टम विकसित करने, साझा कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल तैयार करने और इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करने पर भी साथ काम कर रहे हैं. ऐसे में WeChat पर जाने का फैसला इसी बड़े बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। </p>
<p><strong>भारत में क्यों बैन WeChat?</strong><br>
भारत ने जून 2020 में 59 पॉपुलर चीनी ऐप्स बैन किए थे. इन ऐप में टिक टॉक, यूसी ब्राउजर और WeChat जैसे बड़े नाम शामिल थे. सरकार ने नेशनल सिक्योरिटी कंसर्न की वजह से इन ऐप को बैन किया था. मिनिस्ट्री ने तब कहा था कि उनके पास क्रेडिबल इनपुट हैं जिससे ये साबित होता है कि ये ऐप्स भारत का डेटा चीन भेज रहे थे. इस बैन को इनफॉर्मेशन टेक ऐक्ट 2000 के Section 69A तहत लागू किया गयाा था. बता दें कि बैन से ठीक दो हफ्ते पहले गलवन वैली क्लैश हुआ था। </p>]]> </content:encoded>
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<title>बलूचिस्तान की आजादी का दावा फिर चर्चा में, स्वतंत्रता दिवस और कथित संविधान को लेकर बढ़ी हलचल</title>
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<description><![CDATA[ बलूचिस्तान  पाकिस्तान में पीओके में अब तक विरोध प्रदर्शन की वजह से हंगामा मचा ही हुआ था कि अब पाकिस्तान के सबसे बड़े और संसाधनों से भरे हुए प्रांत बलूचिस्तान ने अपनी आजादी का दिन भी घोषित कर दिया है. यहां पर राजनीतिक हलचल तब तेज हो गई, जब खुद रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने 11 … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 10:00:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>बलूचिस्तान, की, आजादी, का, दावा, फिर, चर्चा, में, स्वतंत्रता, दिवस, और, कथित, संविधान, को, लेकर, बढ़ी, हलचल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बलूचिस्तान </strong><br>
पाकिस्तान में पीओके में अब तक विरोध प्रदर्शन की वजह से हंगामा मचा ही हुआ था कि अब पाकिस्तान के सबसे बड़े और संसाधनों से भरे हुए प्रांत बलूचिस्तान ने अपनी आजादी का दिन भी घोषित कर दिया है. यहां पर राजनीतिक हलचल तब तेज हो गई, जब खुद रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने 11 अगस्त को बलूचिस्तान का स्वतंत्रता दिवस घोषित किया है और दुनिया भर में रहने वाले बलूच लोगों से इसे बड़े स्तर पर मनाने की अपील की है. संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की मांग की है और वो आने वाले 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के तौर पर मनाने भी वाला है। </p>
<p>यह घोषणा ऐसे समय आई है जब कुछ  हफ्ते पहले ही इस समूह ने बलूचिस्तान को पाकिस्तान से स्वतंत्र घोषित करने का दावा किया था. इस दावे को पाकिस्तान ने स्वीकार नहीं किया है और दुनिया में बलूचिस्तान को पाकिस्तान का ही हिस्सा माना जाता है. हालांकि इस प्रांत ने खुद को कभी भी पाकिस्तान का हिस्सा नहीं माना और यहां सालों से आजादी का संघर्ष चलता आया है. अब बलूच आंदोलन से जुड़े नेता मीर यार बलोच ने दुनिया के अलग-अलग देशों में रहने वाले बलूच समुदाय से 11 अगस्त को अपने घरों, बाजारों, दुकानों, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर कथित स्वतंत्र बलूचिस्तान का झंडा फहराने की अपील की है. उनके मुताबिक 11 अगस्त को हर साल बलूचिस्तान का स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा। </p>
<p><strong>11 अगस्त को ही क्यों चुना गया?</strong><br>
रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान का दावा है कि 11 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन समाप्त होने से ठीक पहले, बलूचिस्तान ने खुद को स्वतंत्र घोषित किया था. बताया जाता है कि उस वक्त पाकिस्तान ने भी कलात नाम की इस रियासत की स्वतंत्रता को माना था लेकिन बाद में छल से उसने इसे पाकिस्तान में मिलने के लिए मजबूर किया. संगठन का कहना है कि उस समय इस घोषणा की खबर अंतरराष्ट्रीय मीडिया, जिसमें द न्यूयॉर्क टाइम्स शामिल हैं और ऑल इंडिया रेडियो ने भी प्रसारित की थी. इसी ऐतिहासिक दावे के आधार पर संगठन 11 अगस्त को बलूचिस्तान स्वतंत्रता दिवस मनाएगा. वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बलूचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा भले ही माना जाए, उसने कभी ये स्वीकार नहीं किया। </p>
<p><strong>अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांगी मान्यता </strong></p>
<p>रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने कहा है कि जब तक पाकिस्तान अपनी वर्तमान स्थिति में रहेगा, तब तक क्षेत्र में स्थायी शांति, विकास और समृद्धि संभव नहीं है. संगठन ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान की स्वतंत्रता को मान्यता देने और उसके समर्थन में आगे आने की अपील की है. संगठन ने यह भी दावा किया कि लगभग 6 करोड़ बलूच खुद को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र का नागरिक मानते हैं। </p>
<p><strong>बलूचिस्तान ने बनाया है अपना संविधान भी </strong><br>
8 फरवरी 2026 के दिन बलूचिस्तान ने अपना संविधान भी छापा था. बलूचिस्तान की आजादी का खाका, यानी उसका ‘अंतरिम संविधान’ आधिकारिक तौर पर दुनिया के सामने पेश किया जा चुका है, जिसे बलूच नेता मीर यार बलूच ने तैयार किया है. मीर यार बलूच ने कहा है कि यह संविधान उन लाखों शहीदों के खून से लिखा गया है जिन्हें पाकिस्तानी सेना ने गायब किया या प्रताड़ित किया. यह चार्टर दुनिया को एक स्पष्ट संदेश देता है क‍ि बलूचिस्तान न तो पाकिस्तान है और न ही धार्मिक चरमपंथियों की पनाहगाह. यह एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य का ब्लूप्रिंट है, जहां हर धर्म की बात होगी. इस संविधान की खास बात ये है कि इसे हिंदी में भी लिखा गया है और<strong> धर्मनिरपेक्षता के नाम पर हिंदुओं के हक की भी बात की गई है –</strong></p>
<p> </p>
<ul>
<li>    बलूच‍िस्‍तान संव‍िधान की पहली लाइन ही धर्म और राजनीति को अलग करती है. यह जिहाद और आतंक की फैक्ट्री चलाने वाले पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी वैचारिक हार है। </li>
<li>    जहां पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का जीना दूभर है, वहीं बलूचिस्तान का संविधान हिंदू, सिख और ईसाई समुदायों को पूर्ण सुरक्षा और समानता की गारंटी देता है. यह चार्टर सर्वधर्म समभाव की नींव पर टिका है, जो पाकिस्तान के दो-राष्ट्र सिद्धांत की धज्जियां उड़ाता है। </li>
<li>    इस चार्टर को दुनिया की 11 प्रमुख भाषाओं में अनुवादित किया गया है. इसमें हिंदी, मराठी, गुजराती और पंजाबी शामिल हैं. यह वैश्विक मंच पर बलूचिस्तान की बढ़ती स्वीकार्यता और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती का सबूत है। </li>
</ul>
<p><strong>पाकिस्तान पर गंभीर आरोप</strong><br>
रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने आरोप लगाया कि विभाजन के बाद पूरे क्षेत्र में लंबे समय तक संघर्ष, आतंकवाद, आर्थिक अस्थिरता और राजनीतिक संकट बने रहे. संगठन का दावा है कि पाकिस्तान की नीतियों ने न केवल दक्षिण एशिया बल्कि अन्य क्षेत्रों को भी प्रभावित किया. बयान में कश्मीर विवाद, मार्च 1948 में बलूचिस्तान में हुई सैन्य कार्रवाई, 1971 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) का अलग होना, सोवियत-अफगान युद्ध, 1998 के चागई परमाणु परीक्षण और 11 सितंबर 2001 के बाद की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया. संगठन का आरोप है कि इन घटनाओं ने क्षेत्र में अस्थिरता और हिंसा को बढ़ावा दिया। </p>
<p><strong>बलूचिस्तान की मौजूदा स्थिति क्या है?</strong><br>
वर्तमान समय में पाकिस्तान 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है, जबकि भारत 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है. इस बीच रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस बताता है. हालांकि बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में किसी भी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था या संयुक्त राष्ट्र ने मान्यता नहीं दी है, लेकिन वो इसकी मांग करता रहा है. अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक समुदाय की नजर में यह अभी भी पाकिस्तान का हिस्सा है लेकिन 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस घोषित करने और वैश्विक मान्यता की मांग ने इस मुद्दे को एक बार फिर ग्लोबल मंच पर खड़ा कर दिया है और पड़ोसी देश की आंतरिक सिरफुटव्वल को उजागर कर दिया है। </p>
<p> </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>पाकिस्तान को ट्रंप का बड़ा झटका! अमेरिका&#45;ईरान वार्ता से मुनीर और शहबाज को रखा बाहर</title>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन अमेरिका और ईरान के बीच फिर बातचीत की कोशिश शुरू होने के बीच पाकिस्तान की कथित मध्यस्थता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत की पहल उसके कहने पर हो रही है और इसमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 14:45:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>पाकिस्तान, को, ट्रंप, का, बड़ा, झटका, अमेरिका-ईरान, वार्ता, से, मुनीर, और, शहबाज, को, रखा, बाहर</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन</strong></p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच फिर बातचीत की कोशिश शुरू होने के बीच पाकिस्तान की कथित मध्यस्थता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत की पहल उसके कहने पर हो रही है और इसमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर की अहम भूमिका है. खास बात यह रही कि ट्रंप ने इस बार पाकिस्तान का नाम नहीं लिया। </p>
<p>ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब, UAE और कतर ने अमेरिका को ईरान पर बड़े सैन्य हमले से पीछे हटने और बातचीत का रास्ता अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया. उनके मुताबिक, अब बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों का समाधान तलाशना अहम है. हालांकि, ईरान ने ट्रंप के सीधे बातचीत शुरू होने के दावे को खारिज किया है और कहा है कि फिलहाल उसकी बातचीत ओमान के साथ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को लेकर हो रही है। </p>
<p><strong>तो क्या पाकिस्तान मध्यस्थता से बाहर हो गया?</strong><br>
जून 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद पाकिस्तान और कतर को औपचारिक तौर पर मध्यस्थ पक्ष बताया गया था. कतर के विदेश मंत्रालय ने भी जून में कहा था कि वह पाकिस्तान की अगुवाई वाली मध्यस्थता का समर्थन कर रहा है. 22 जून को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में हुई हाई-लेवल बैठक में अमेरिका और ईरान के साथ कतर और पाकिस्तान दोनों मध्यस्थ पक्ष के तौर पर शामिल हुए थे. उस समय परमाणु मुद्दे, प्रतिबंधों और आगे की बातचीत के लिए मंच बनाने पर चर्चा हुई थी। </p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप के बयान से ऐसा संकेत जरूर मिलता है कि मौजूदा चरण में खाड़ी देश ज्यादा प्रमुख भूमिका में दिखाई दे रहे हैं, लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि पाकिस्तान पूरी तरह मध्यस्थता से बाहर हो गया है। </p>
<p><strong>पाकिस्तान को लेकर क्यों उठे सवाल?</strong><br>
पाकिस्तान की समस्या यह है कि वह एक तरफ ईरान के साथ अपने भौगोलिक और धार्मिक-सामाजिक संबंधों का फायदा उठा सकता है, तो दूसरी तरफ अमेरिका और सऊदी अरब के साथ उसके रणनीतिक रिश्ते भी हैं. यही संतुलन उसकी मध्यस्थता को मुश्किल बनाता है. हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि जून में खुद ट्रंप ने पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता को बातचीत आगे बढ़ाने में मददगार बताया था। </p>
<p><strong>खाड़ी देशों की भूमिका क्यों बढ़ी?</strong><br>
सऊदी अरब, UAE और कतर सीधे इस संकट से प्रभावित हैं. होर्मुज स्ट्रेट में तनाव का सीधा असर खाड़ी की अर्थव्यवस्था, तेल निर्यात और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ता है. इसी वजह से इन देशों की कोशिश है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बड़ी जंग न छिड़े. मई में भी इन तीनों देशों ने ट्रंप से सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत को मौका देने की अपील की थी। </p>
<p>ऐसे में ट्रंप का ताजा बयान पाकिस्तान के लिए जरूर एक कूटनीतिक झटका दिख सकता है, लेकिन तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है. दोहा और मस्कट इस समय बातचीत के अहम केंद्र बनते दिख रहे हैं, जबकि पाकिस्तान की भूमिका पर्दे के पीछे या अगले दौर की बातचीत में फिर सामने आ सकती है। </p>
<p>सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार इस्लामाबाद सिर्फ एक सहायक मध्यस्थ रहेगा या फिर अमेरिका-ईरान के बीच अगले बड़े समझौते में दोबारा केंद्रीय भूमिका हासिल कर पाएगा. अगर ऐसा नहीं होता है तो यह पाकिस्तान के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं होगा, जिसके नेता अभी हाल के दिनों तक ही ट्रंप की आंखों का तारा बने हुए थे। </p>]]> </content:encoded>
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<title>यूरोप के इस देश में किराए पर मिलते हैं ‘पति’, महिलाएं घंटों के हिसाब से करती हैं भुगतान; जानिए क्या है वजह</title>
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<description><![CDATA[ रिगा  हमारे देश में शादी के बाद लड़का पति बनता है और उसके बाद भी घर के लगभग सभी कामों की जिम्मेदारी औरतों पर रहती है। आज हम आपको ऐसे देश के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां किराए पर पति मिल जाते हैं और यहां की औरतें इस सुविधा का पूरा फायदा उठाती … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 11:00:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>यूरोप, के, इस, देश, में, किराए, पर, मिलते, हैं, ‘पति’, महिलाएं, घंटों, के, हिसाब, से, करती, हैं, भुगतान, जानिए, क्या, है, वजह</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रिगा </strong></p>
<p>हमारे देश में शादी के बाद लड़का पति बनता है और उसके बाद भी घर के लगभग सभी कामों की जिम्मेदारी औरतों पर रहती है। आज हम आपको ऐसे देश के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां किराए पर पति मिल जाते हैं और यहां की औरतें इस सुविधा का पूरा फायदा उठाती हैं। यहां पर महिलाएं घंटे के हिसाब से पति को रेंट पर लेती हैं और काम पूरा होने के बाद पेमेंट कर देती हैं। रेंट पर हस्बैंड लेने पर ना ही कोई कमिटमेंट होता है और ना ही कोई रिश्ता। किराए पर पति मिलने की बात थोड़ी अजीब जरूर लग रही है लेकिन यूरोप के इस देश में यही ट्रेंड है। यहां पर आदमियों का इतना अकाल है कि महिलाएं इस सर्विस को अपनाती हैं। चलिए आपको इस बारे में पूरी जानकारी देते हैं।</p>
<p><strong>यूरोप का कौन सा देश</strong><br>
उत्तरी यूरोप के बाल्टिक क्षेत्र में स्थित देश लातविया (Latvia) में एक घंटे के हिसाब से पति किराए पर मिलते हैं। यह सर्विस पूरी तरह से पेड होती हैं और इसमें कोई प्यार, शादी, रिश्ता या फिर कमिटमेंट जैसी चीजें नहीं होती हैं। इस सर्विस में कुछ ही घंटों के लिए पति को हायर किया जा सकता है।</p>
<p><strong>इस सर्विस में क्या होता है</strong><br>
हस्बैंड फॉर एन ऑवर पूरी तरह से प्रोफेशनल सर्विस है, जिसमें सभी आदमियों को घर के काम करने की ट्रेनिंग दी जाती है। लातविया में ज्यादातर महिलाएं अकेले रहती हैं और ऐसे में उन्हें घर के बेसिक कामों जैसे नल ठीक करना, पानी भरना, पाइप सही करना, पर्दे टांगना, मरम्मत का काम करने के लिए मर्दों की जरूरत पड़ती है। इन कामों के लिए महिलाएं 1 या 2 घंटे के लिए किसी भी आदमी को हायर कर सकती हैं। काम पूरा हो जाने के बाद पैसे दिए जाते हैं और फिर सर्विस खत्म। ऐसे समझ लीजिए कि ऐप के जरिए किसी आदमी को घर के कामों के लिए बुक किया, वह आया उसने काम पूरा किया और आपने पेमेंट कर दी।</p>
<p>
<strong>महिलाएं सर्विस को कर रही पसंद</strong><br>
लातविया में Komanda24 और Remontdarbi.lv जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इस तरह की सुविधा को उपलब्ध कराते हैं और इनके जरिए ही बुकिंग हो सकती है। महिलाओं के बीच ये ट्रेंड काफी पॉपुलर हो चुका है और औरतों को ये पसंद भी आ रहा है। खासतौर पर सिंगल मदर, वर्किंग या फिर बूढ़ी औरतों के लिए ये सर्विस काफी मददगार साबित हो रही है।</p>
<p><strong>रेंटिंग हस्बैंड की क्या है वजह</strong><br>
बता दें यूरोप के लातविया देश में औरतों की अपेक्षा पुरुषों की जनसंख्या काफी कम है। यहां पर महिलाओं की तुलना में पुरुष लगभग 15.5% तक कम है और यही कारण है कि घर के भारी-भरकम काम के लिए यह देश ‘husband for an hour’ जैसी सर्विस दे रहा है।</p>
<p><strong>कहां से शुरू हुआ ये कॉन्सेप्ट</strong><br>
साल 2022 में लौरा यंग नाम की महिला ने अपने पति को दूसरों के घर के छोटे-मोटे कामों के लिए किराए पर भेजना शुरू किया, जिससे घर में कुछ पैसे आ सके। तभी से ये कॉन्सेप्ट काफी वायरल हुआ और कई महिलाओं ने इसे पसंद भी किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लौरा के पति जेम्स आधे दिन के 44 डॉलर यानी 4 हजार रुपये की कमाई करते थे और पूरे दिन के 280 डॉलर यानी 27 हजार रुपये कमा लेते थे। ऐसे आदमियों के लिए ये सर्विस कमाई का जरिया बन गई और औरतों के लिए सुविधा। अब लातविया में ये सर्विस हर कोई अपना रहा है और कई पुरुष काम की तलाश में भी इस देश में आकर बसने लगे हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<title>एक्वेरियम से फैला किलर एल्गी, अमेरिका में मची पर्यावरणीय तबाही</title>
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<pubDate>Mon, 03 Aug 2026 11:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>एक्वेरियम, से, फैला, किलर, एल्गी, अमेरिका, में, मची, पर्यावरणीय, तबाही</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन</strong><br>
 कई बहुत बड़ी पारिस्थितिक आपदाएं बहुत अप्रत्याशित स्थानों से शुरू होती हैं। अमेरिका में एक बड़े क्षेत्र के पानी से जुड़ी एक एक ऐसी ही आपदा की शुरुआत घरेलू एक्वेरियम से हुई। सेंटर फॉर इनवेसिव स्पीशीज रिसर्च की एक ऑनलाइन रिपोर्ट में कहा गया है कि एक सजावटी समुद्री शैवाल कैलेरपा टैक्सिफोलिया (किलर एल्गी) 2000 में दक्षिणी कैलिफोर्निया के तटीय जल में फैल गया था। इसकी वजह एक एक्वेरियम मालिक के अवैध रूप से समुद्री पौधों को इसमें लगाना थी।</p>
<p>एक्वेरियम से समुद्र में किलर एल्गी के पहुंचने की घटना एक पर्यावरणीय आपातकाल और 7 मिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत वाले छह साल के उन्मूलन अभियान में बदल गई। यह इस बात का सबसे नाटकीय उदाहरण है कि कैसे एक गैर-खतरनाक एक्वेरियम प्रजाति एक विनाशकारी आक्रामक खतरा बन सकती है।</p>
<p><strong>जानलेवा शैवाल का प्रकोप</strong><br>
कैलेरपा टैक्सिफोलिया, जिसे आमतौर पर किलर एल्गी के नाम से जाना जाता है, कैरिबियन, हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों के उष्णकटिबंधीय जल में उत्पन्न होता है। इसकी आक्रामक कहानी यूरोप में शुरू हुई। 1980 के दशक में जर्मनी के स्टटगार्ट स्थित विल्हेल्मा चिड़ियाघर के एक्वेरियम प्रबंधकों ने प्रदर्शन टैंकों के लिए ठंडे वातावरण में उगने वाली एक किस्म विकसित की।</p>
<p>साल 1984 में मोनाको के समुद्र विज्ञान संग्रहालय से यह संशोधित किस्म गलती से भूमध्य सागर में पहुंच गई और हजारों हेक्टेयर समुद्री तल पर फैल गई। कई समुद्री पौधों के विपरीत यह किस्म ठंडे पानी में उगती है। नम परिस्थितियों में 10 दिनों तक पानी के बाहर जीवित रह सकती है और चट्टानी रीफ, रेतीले तल, कीचड़ वाले मैदान, समुद्री घास के मैदानों और जलमग्न आवासों में पाई जाती है।</p>
<p><strong>यह इतनी तेजी से क्यों फैली?</strong><br>
कैलेरपा टैक्सिफोलिया की सबसे दिलचस्प विशेषताओं में से एक इसकी प्रजनन क्षमता है। यह आक्रामक किस्म अलैंगिक विखंडन से प्रजनन करती है। यहां तक कि एक सेंटीमीटर का सबसे छोटा टुकड़ा नए पौधे में विकसित हो सकता है। समुद्री धाराओं, नावों के लंगरों, मछली पकड़ने के उपकरणों और जहाजों से निकले गिट्टी वाले पानी के माध्यम से टुकड़ों को अनजाने में लंबी दूरी तक ले जाया जा सकता है। इससे नई बस्तियां तेजी से स्थापित हो सकती हैं।</p>
<p>एक बार जम जाने के बाद मजबूती की वजह से इस प्रजाति को कंट्रोल करना बहुत मुश्किल हो जाता है। शैवाल (एल्गी) के घने पानी के नीचे के मैदान सूरज की रोशनी को रोककर और कॉलर्पेनाइन नाम के जहरीले कंपाउंड छोड़कर स्थानीय समुद्री शैवाल, समुद्री घास और समुद्री अकशेरुकी जीवों का दम घोंट देते हैं। इससे स्थानीय आवास कम हो जाते हैं और मछलियां घट जाती हैं। इससे बायोडायवर्सिटी कम हो जाती है और समुद्री इकोसिस्टम बिगड़ जाता है।</p>
<p><strong>कैलिफोर्निया की महंगी लड़ाई</strong><br>
कुछ मछलियां इस शैवाल को खाती हैं, उनके शरीर में जहर जमा हो जाता है। इससे वे इंसानों के खाने लायक नहीं रहतीं और स्थानीय मछली पकड़ने के उद्योग के लिए खतरा पैदा हो जाता है। कॉलर्पा के फैलने से भूमध्य सागर के कुछ इलाकों में तटीय इकोसिस्टम बुरी तरह बदल गए हैं और कमर्शियल रूप से महत्वपूर्ण मछली पकड़ने वाले इलाकों पर भी असर पड़ा है।</p>
<p>अमेरिका के कैलिफोर्निया में शैवाल को खत्म करने की कोशिश में छह साल लगे और यह आधिकारिक तौर पर 2006 में खत्म हुई। इस पूरे अभियान में 7 मिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का खर्च आया। कैलिफोर्निया में सैन डिएगो के पास आगुआ हेडिओंडा लैगून और बाद में लॉस एंजिल्स के पास हंटिंगटन हार्बर में शैवाल मिलने के बाद अधिकारियों ने तेजी से कदम उठाए।</p>
<p><strong>वैज्ञानिकों का लंबा संघर्ष</strong><br>
वैज्ञानिकों ने प्रभावित इलाकों को पानी के नीचे बड़े तिरपालों से ढका, उन्हें रेत की बोरियों से सील किया और संक्रमण को खत्म करने के लिए नीचे क्लोरीन पंप किया। घेरे के अंदर क्लोरीन ने शैवाल को तो मार दिया लेकिन साथ ही कवर के नीचे फंसी मछलियों, पौधों और अन्य समुद्री जीवों को भी मार डाला।</p>
<p>पर्यावरण के लिए कठोर होने के बावजूद इन कदमों को ही कैलिफोर्निया तट पर इस आक्रामक प्रजाति को फैलने से रोकने का एकमात्र व्यावहारिक विकल्प माना गया। इसे खत्म करने की कोशिश में छह साल लगे और यह आधिकारिक तौर पर 2006 में खत्म हुई, जिसमें 7 मिलियन अमेरिकी डॉलर का खर्च आया।</p>]]> </content:encoded>
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<title>सेउटा में बड़ा माइग्रेंट संकट: 60 हजार लोगों की घुसपैठ, 67 की मौत के बाद बढ़ा तनाव</title>
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<description><![CDATA[  सेउटा  स्पेश के सेउटा में उस समय मानवीय संकट पैदा हो गया, जब लगभग 60 हजार माइग्रेंट्स मोरक्को से बॉर्डर पार करके जिब्राल्टर जलडमरूमध्य के पास दाखिल हो गए। इस अचानक हुई घुसपैठ के कारण इलाके में भारी भीड़भाड़ और तनाव फैल गया, जिसकी चपेट में आकर 67 लोगों की मौत हो गई। स्पैनिश सरकार … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 03 Aug 2026 10:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>सेउटा, में, बड़ा, माइग्रेंट, संकट:, हजार, लोगों, की, घुसपैठ, की, मौत, के, बाद, बढ़ा, तनाव</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p> <strong>सेउटा</strong><br>
 स्पेश के सेउटा में उस समय मानवीय संकट पैदा हो गया, जब लगभग 60 हजार माइग्रेंट्स मोरक्को से बॉर्डर पार करके जिब्राल्टर जलडमरूमध्य के पास दाखिल हो गए। इस अचानक हुई घुसपैठ के कारण इलाके में भारी भीड़भाड़ और तनाव फैल गया, जिसकी चपेट में आकर 67 लोगों की मौत हो गई।</p>
<p>स्पैनिश सरकार के अनुसार, इनमें से 48 हजार से ज्यादा माइग्रेंट्स कुछ ही घंटों के भीतर वापस मोरक्को लौट गए। वापस लौटने वाले कई लोगों ने सेउटा के अंदर बेहद खराब और दयनीय हालात का हवाला दिया।</p>
<p>स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मैड्रिड प्रशासन ने भविष्य में लोगों की ऐसी किसी भी बड़ी भीड़ को रोकने के लिए सेउटा के समुद्री तट के एक हिस्से पर 500 मीटर का मजबूत समुद्री बैरियर तैनात कर दिया है।</p>
<p><strong>सीमा सुरक्षा की ढील बनी वजह</strong><br>
सेउटा में घुसी माइग्रेंट्स की भीड़ के घुसने का कारणों के पीछे पहला और बड़ा कारण मोरक्को द्वारा सीमा सुरक्षा को लागू करने में बरती गई ढील को माना जा रहा है। जब हजारों की संख्या में लोग सेउटा में जमा हो रहे थे, तब मोरक्कन सुरक्षा बल महज खड़े होकर तमाशा देख रहे थे।</p>
<p>सेउटा और मोरक्को के बीच बॉर्डर बनाने वाले ब्रेकवाटर तक पहुंचने के लिए पुलिस और सहायक बलों को सुरक्षा घेराबंदी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे यह साफ होता है कि माइग्रेंट्स को जानबूझकर आगे बढ़ने दिया गया था।</p>
<p>कई माइग्रेंट्स ने भी इस बात की पुष्टि की है कि मोरक्कन पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोका नहीं और सीधे स्पैनिश बॉर्डर की ओर जाने दिया।</p>
<p><strong>सोशल मीडिया की रही बड़ी भूमिका</strong><br>
माइग्रेशन शोधकर्ता लोरेंजो गैब्रिएली का कहना है कि मोरक्को के अधिकारियों के शामिल या मौन सहमति के बिना एक ही दिन में लगभग 50 हजार लोगों का बॉर्डर पार करना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन है। हालांकि, इस बात के अभी तक कोई पुख्ता सबूत सामने नहीं आए हैं कि रबात सरकार ने जानबूझकर इस संकट को अंजाम दिया था।</p>
<p>वहीं इसके पीछे सोशल मीडिया की भी बड़ी भूमिका रही। वायरल वीडिय और पोस्ट्स ने कई युवाओं में यूरोप में प्रवेश करने की उम्मीद जगाई। हजारों लोगों के सेउटा में घुसने के वीडियो देखकर कई माइग्रेंट्स ने जान जोखिम में डालकर यह सफर तय किया।</p>
<p>वापस लौटने वाले युवाओं ने यह स्वीकार किया है कि वे दोस्तों के मैसेज और उन भ्रामक वीडियो से आकर्षित हुए थे, जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि कड़ी सुरक्षा वाले बॉर्डर को आसानी से तोड़ा जा सकता है।</p>
<p><strong>माइग्रेंट्स को दी जा रही थी ट्रेनिंग</strong><br>
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के 'सेंटर ऑन माइग्रेशन, पॉलिसी एंड सोसाइटी' की वरिष्ठ शोधकर्ता मिरियम चेर्टी ने बताया कि ऑनलाइन पोस्ट्स के जरिए माइग्रेंट्स को बॉर्डर पार करने और स्पेन में घुसने पर क्या कहना चाहिए, इसकी बकायदा प्रैक्टिकल गाइडेंस दी जा रही थी।</p>
<p>वहीं स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने माइग्रेंट्स को गुमराह करने और स्पेन में रहने की संभावनाओं को लेकर झूठी जानकारी फैलाने के लिए मानव तस्करी नेटवर्क को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।</p>
<p>इसके अलावा, इतनी बड़ी संख्या में सेउटा में माइग्रेंट्स के स्पेन में घुसने की बड़ी वजह स्पेन के सुप्रीम कोर्ट का 8 जुलाई का एक फैसला भी बना। कोर्ट ने आदेश दिया था कि समुद्र के रास्ते आने वाले माइग्रेंट्स को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए तुरंत वापस नहीं भेजा जा सका।</p>
<p>हालांकि इस फैसले ने अवैध प्रवेश को कानूनी नहीं बनाया और न ही स्पेन में रहने की गारंटी दी, लेकिन इस खबर को मोरक्को के सोशल मीडिया पर इस तरह फैलाया गया जिससे युवाओं में स्पेन जाने की होड़ मच गई।</p>
<p><strong>पीछे छिपी एक गहरी आर्थिक सच्चाई</strong><br>
इंटरव्यू के दौरान कई माइग्रेंट्स ने बेरोजगारी, कम वेतन और अपन देश में अवसरों की भारी कमी को इस खतरनाक कदम की मुख्य वजय बताया। मोरक्को इस समय धीमी आर्थिक वृद्धि, लंबे समय से जारी सूखे, महंगाई और युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी से जूझ रहा है।</p>
<p>21 साल के अब्देल्लाह बौजी ने अपनी लाचारी व्यक्त करते हुए कहा कि 14 साल पढ़ाई करने के बाद भी उसके लिए अपने देश में कुछ नहीं है और उसे बेहद कम सैलरी पर 12-12 घंटे काम करना पड़ता है।</p>
<p>कई युवाओं का स्पेन पहुंचने का सपना सेउटा पहुंचते ही टूट गया। ब्राहिम नाम के एक युवक ने बताया कि सोशल मीडिया वीडियो देखकर आया था, लेकिन वहां पहुंचकर उसे तीन दिन बिना खाने के केवल पानी पर गुजारने पड़े, क्योंकि उसके पास पैसे नहीं थे. उसने सेउटा की तुलना एक जेल से की जहां सब कुछ बंद था।</p>
<p>इस घटना के बाद स्पेन की माइग्रेशन पॉलिसी भी जांच और राजनीतिक बहस के दायरे में आग गई है। कंजर्वेटिव और कट्टर दक्षिणपंथी विपक्षी दलों का तर्क है कि प्रधानमंत्री सांचेज की नीतियों ने देश को अवैध माइग्रेंट्स के लिए ज्यादा आकर्षक बना दिया है, जबिक सांचेज ने इन दावों को खारिज करते हुए तस्करों और अफवाहों को दोषी ठहराया है।</p>
<p><strong>दोनों देशों के बीच पुराना तनाव</strong><br>
एक और बड़ी वजह इस घटनाक्रम के पीछे है। स्पेन और मोरक्को के बीच के ऐतिहासिक और कूटनीतिक तनाव भी इसके पीछे की एक वजह है। मोरक्को लंबे समय से सेउटा और मेलिला पर अपना दावा ठोकता रहा है और राजनीतिक तनाव के समय मोरक्को ने माइग्रेशन को कूटनीतिक दबाव के रूप में इस्तेमाल किया है।</p>
<p>एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक दोनों देशों को बीच राजनीतिक मतभेद और सीमावर्ती क्षेत्रों की आर्थिक तंगी का स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक सिर्फ भौतिक बैरियर लगाकर ऐसे गंभीर मानवीय संकटों को रोकना मुमकिन नहीं होगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>DR कांगो में इबोला का कहर: 3500 से ज्यादा मामले, WHO ने जताई बड़े खतरे की आशंका</title>
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<description><![CDATA[ ब्राजाविल  डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला आने वाले दिनों में बहुत तेजी से फैल सकता है, जो बड़े पैमाने पर मौतों की वजह बन सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने शनिवार को यह चेतावनी जारी की है। डब्ल्यूएचओ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इबोला का प्रकोप तेजी से … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 03 Aug 2026 10:00:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ब्राजाविल</strong><br>
 डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला आने वाले दिनों में बहुत तेजी से फैल सकता है, जो बड़े पैमाने पर मौतों की वजह बन सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने शनिवार को यह चेतावनी जारी की है। डब्ल्यूएचओ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इबोला का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर बहुत गंभीरता बरतने की जरूरत है। डीआर कांगो में इबोला के मामलों की संख्या 3,500 के आंंकड़े को पार कर गई है।</p>
<p>WHO के अनुसार, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में बुंडिबुग्यो वायरस बीमारी (BVD) का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। इसका संक्रमण लगातार फैल रहा है और मामलों व मौतों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यह डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में अब तक का सबसे बड़ा इबोला प्रकोप है।</p>
<p><strong>WHO की चेतावनी</strong><br>
15 मई को प्रकोप की घोषणा के बाद से 30 जुलाई तक कुल 3,605 मामलों की पुष्टि हुई है और 1,587 मौतें हुई हैं। इसमें मृत्यु दर (CFR) 44 प्रतिशत रही है। WHO ने चेतावनी दी है कि स्थिति बहुत जटिल बनी हुई है क्योंकि संक्रमण की कड़ियों को तोड़ा नहीं जा सका है। नए संक्रमण और मौतें लगातार बढ़ रही हैं।</p>
<p>दक्षिण सूडान और युगांडा की सीमा से लगा उत्तर-पूर्वी DRC का इतुरी प्रांत बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित है। यह जटिल मानवीय और संघर्ष-ग्रस्त माहौल में फैल रहा है, जहां लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ रहा है। यहां आबादी की आवाजाही बहुत ज्यादा है और साफ भोजन और आश्रय जैसी जरूरी सेवाएं सीमित हैं।</p>
<p><strong>दूसरा सबसे बड़ा इबोला प्रकोप</strong><br>
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला के नवीनतम प्रकोप ने 2018 और 2020 के बीच देश में आई सबसे घातक महामारी के दौरान दर्ज किए गए मामलों की कुल संख्या को पार कर लिया है। उस महामारी में 3,500 संक्रमणों में से 2,300 लोगों की मौत हो गई थी। कांगों में इस वर्ष के प्रकोप में पांच प्रांतों में 1,556 मौतों सहित 3,532 इबोला मामलों की पुष्टि हो चुकी है।</p>
<p>यह प्रकोप दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इबोला महामारी में तब्दील हो गया है । संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम के कार्यवाहक कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ ने रॉयटर्स को बताया हैा कि यह अब तक की सबसे तेजी से फैलने वाली इबोला महामारी है। दुनिया को इस पर और अधिक ध्यान देने की जरूरत है।</p>
<p>इबोला एक गंभीर और घातक बीमारी है, जो संक्रमित जानवरों से और संक्रमित लोगों के शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलती है। इसका अभी तक कोई टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है।</p>
<p>अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के अनुसार, यह प्रकोप असामान्य रूप से घातक साबित हुआ है, जिसने अपने पहले तीन महीनों में पिछले इबोला प्रकोपों की तुलना में उसी चरण तक पांच गुना अधिक लोगों की जान ले ली है। केवल 2014-16 में पश्चिम अफ्रीका में फैला प्रकोप इससे भी बड़ा था। इसमें गिनी , लाइबेरिया और सिएरा लियोन में 28,616 मामले दर्ज किए गए थे ।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>भारत&#45;अफगानिस्तान की बढ़ती नजदीकियों से बौखलाया पाकिस्तान, सेना ने दिया विवादित बयान</title>
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<description><![CDATA[ लाहौर भारत और अफगानिस्तान के मजबूत होते रिश्तों को देखकर पाकिस्तान फिर से बौखला गया है. पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद विवादित बयान दिया है. उन्होंने दोनों देशों के बीच की नजदीकी पर सवाल उठाते हुए धार्मिक संदर्भों का इस्तेमाल किया है. दरअसल, हाल ही … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 03 Aug 2026 09:45:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लाहौर</strong><br>
भारत और अफगानिस्तान के मजबूत होते रिश्तों को देखकर पाकिस्तान फिर से बौखला गया है. पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद विवादित बयान दिया है. उन्होंने दोनों देशों के बीच की नजदीकी पर सवाल उठाते हुए धार्मिक संदर्भों का इस्तेमाल किया है.</p>
<p>दरअसल, हाल ही में अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के एक मंत्री ने भारत का दौरा किया था. इस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत और अफगानिस्तान के लोगों का डीएनए एक ही है. उन्होंने दोनों देशों के बीच पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्तों की बात कही थी. उनके इसी बयान से पाकिस्तान की सेना भड़क गई है.</p>
<p>तालिबान मंत्री के बयान पर जवाब देते हुए पाकिस्तानी सैन्य प्रवक्ता ने कुरान की एक आयत का जिक्र कर दिया. उन्होंने कहा कि मुसलमानों को काफिरों यानी गैर मुसलमानों को अपना दोस्त या रक्षक नहीं बनाना चाहिए.</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, 'हम शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने (अफगान) यह बात मान ली. मैं आम अफगान लोगों की बात नहीं कर रहा हूं. मैं तालिबान सरकार की बात कर रहा हूं. आम अफगान जनता इस सरकार के जुल्म से परेशान है. दोनों का डीएनए एक जैसा नहीं हो सकता.'</p>
<p><strong>'तालिबान-भारत के बीच मालिक-गुलाम का रिश्ता'</strong><br>
पाकिस्तानी प्रवक्ता इतने पर ही नहीं रुके. उन्होंने भारत की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी और आरएसएस पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने दावा किया कि तालिबान और भारत के बीच 'मालिक और गुलाम' जैसा रिश्ता है.</p>
<p>पाकिस्तानी प्रवक्ता ने कहा, 'भारतीय बीजेपी या आरएसएस और तालिबान शासन के बीच का असली रिश्ता मालिक और गुलाम का है. भारत में दमनकारी व्यवस्था उनकी मालिक है, और वे उसके नौकर हैं. आरएसएस क्या कर रहा है? यह तथाकथित 'हिंदू राष्ट्र' क्या कर रहा है? यह मुसलमानों का उत्पीड़न कर रहा है, कश्मीरी लोगों का उत्पीड़न कर रहा है, अन्याय कर रहा है. और वे (तालिबान) क्या कर रहे हैं? वे उनसे भी बढ़कर उस एजेंडे की सेवा कर रहे हैं. यह किस तरह का इस्लाम है? वे उससे भी बड़ा अहित कर रहे हैं.</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि तालिबान सरकार भारत के इशारों पर काम कर रही है. हालांकि, भारत हमेशा से पाकिस्तान के इन आरोपों को खारिज करता रहा है.</p>
<p>पाक सेना के प्रवक्ता ने तालिबान सरकार पर भी तीखे सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि यह सरकार महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार कर रही है. बैठे-बैठे फतवे जारी कर रही है. उनका दावा था कि तालिबान की इन हरकतों का इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं है.</p>
<p>वहीं इस पूरी बयानबाजी पर भारतीय खुफिया सूत्रों का मानना है कि पाकिस्तान इस वक्त बहुत बड़े आंतरिक संकट से गुजर रहा है. बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में आए दिन आतंकी हमले हो रहे हैं. वहां की जनता सरकार और सेना से नाराज है.</p>
<p>इसके अलावा, चीन की CPEC परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर भी पाकिस्तान पर भारी दबाव है. अपनी इन्हीं नाकामियों से अपने देश की जनता का ध्यान भटकाने के लिए पाक सेना इस तरह की बयानबाजी कर रही है. पाकिस्तान के पास भारत के खिलाफ कोई सबूत नहीं है. वह सिर्फ अपनी गलतियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की कोशिश कर रहा है.</p>]]> </content:encoded>
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<title>ट्रंप के दावे को ईरान ने किया खारिज, बोला&#45; हर हालात के लिए तैयार</title>
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<description><![CDATA[ वॉशिंगटन अमेरिका और ईरान के बीच मिडिल ईस्ट में जंग जारी है। समझौता होने के बाद भी अमेरिका ने ईरान पर कई हमले किए हैं, जिसका तेहरान भी जवाब दे रहा है। हालांकि, इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा कि ईरान ने अमेरिका से हमले न करने के लिए कहा है। इस दावे … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 03 Aug 2026 09:45:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन</strong><br>
अमेरिका और ईरान के बीच मिडिल ईस्ट में जंग जारी है। समझौता होने के बाद भी अमेरिका ने ईरान पर कई हमले किए हैं, जिसका तेहरान भी जवाब दे रहा है। हालांकि, इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा कि ईरान ने अमेरिका से हमले न करने के लिए कहा है। इस दावे को ईरान की मीडिया ने खारिज कर दिया है और कहा है कि वह हर हालात के लिए तैयार है। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने रविवार को डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे को गलत बताया कि इस्लामिक रिपब्लिक ने अमेरिका से नए हमले न करने को कहा था। ईरान के पलटवार से साफ है कि वह अमेरिका के सामने हमले न करने के लिए गिड़गिड़ाया नहीं था।</p>
<p>सैन्य अधिकारियों का हवाला देते हुए, ईरानी एजेंसी ने कहा कि यह आरोप एक नया झूठ है और ईरानी सेना हाई अलर्ट पर है और किसी भी हालात के लिए तैयार है। शनिवार को ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ जाने के लिए तैयार है, लेकिन तेहरान और दूसरे मिडिल ईस्ट देशों ने उनसे नए हमले रोकने को कहा था। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह फैसला ईरान के साथ डील होने पर ही लिया है। ट्रंप ने एक ट्रुथ सोशल पोस्ट में लिखा, "इसमें होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत पूरी तरह से खोलना और ईरान के न्यूक्लियर खतरे को खत्म करना शामिल होगा।" रविवार को, ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने ईरानी बातचीत करने वालों के एक करीबी सोर्स का हवाला देते हुए कहा, "जब तक अमेरिका अपनी दुश्मनी भरी हरकतें जारी रखेगा, होर्मुज स्ट्रेट बंद रहेगा।'' ईरान ने जंग शुरू होने के बाद से ही होर्मुज को ब्लॉक कर रखा है, जिससे जहाजों को पानी का रास्ता इस्तेमाल करने से पहले इजाजत लेनी पड़ती है और ट्रांजिट फीस देनी पड़ती है।</p>
<p><strong>सभी उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल करेगा ईरान</strong><br>
ईरान ने यह भी कहा कि वह अमेरिका की धमकियों, कथित अवैध सैन्य हमलों और समुद्री दबाव का डटकर मुकाबला करता रहेगा तथा आत्मरक्षा के लिए सभी उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल करेगा। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में आरोप लगाया कि अमेरिका ने 18 जून को युद्ध समाप्त करने संबंधी समझौता ज्ञापन (एमओयू) का उल्लंघन करते हुए ईरानी बंदरगाहों और वाणिज्यिक जहाजों पर हमले जारी रखे हैं, नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर रखी है, आर्थिक दबाव बढ़ाया है और अवैध धमकियां दी हैं। मंत्रालय ने कहा कि जारी नौसैनिक नाकेबंदी आक्रामक कार्रवाई का स्पष्ट उदाहरण है। बयान में आरोप लगाया गया कि सैन्य एवं गैर-सैन्य ठिकानों, नागरिक बुनियादी ढांचे और ईरानी नागरिकों पर अमेरिकी हमले संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन हैं।</p>
<p><strong>ईरान अपना बचाव जारी रखेगा</strong><br>
ईरान ने क्षेत्रीय देशों से कहा कि अमेरिका के कथित अवैध हमलों के जवाब में की गई उसकी रक्षात्मक कार्रवाई को किसी भी स्थिति में उन देशों के खिलाफ हमला नहीं माना जाना चाहिए। बयान में कहा गया, "अमेरिका और उसके कुछ क्षेत्रीय साझेदारों द्वारा जहाजों को असुरक्षित और अनधिकृत दक्षिणी मार्ग से गुजरने की अनुमति देने पर जोर देने का उद्देश्य केवल समझौता ज्ञापन के अनुच्छेद-5 को निष्प्रभावी करना और ईरान को अपने दायित्वों के निर्वहन से रोकना नहीं था, बल्कि यह सैन्य गतिविधियों और आवाजाही को छिपाने का माध्यम भी था।" विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय स्वतंत्रता, गरिमा और संप्रभुता की रक्षा के लिए अमेरिका-इजरायल गठबंधन के खिलाफ मजबूती से अपना बचाव जारी रखेगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>PoK चुनाव पर बवाल: अवामी एक्शन कमेटी ने पाकिस्तान सेना पर लगाए गंभीर आरोप</title>
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<description><![CDATA[ इस्लामाबाद पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के बीच अवामी एक्शन कमेटी (AAC) ने पाकिस्तान की सेना और प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। समिति का साफ कहना है कि पूरे चुनाव प्रक्रिया को &#039;बंदूक की नोक पर&#039; चलाया जा रहा है और इसे लोकतंत्र का नाम … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 03 Aug 2026 09:45:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>PoK, चुनाव, पर, बवाल:, अवामी, एक्शन, कमेटी, ने, पाकिस्तान, सेना, पर, लगाए, गंभीर, आरोप</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इस्लामाबाद</strong><br>
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के बीच अवामी एक्शन कमेटी (AAC) ने पाकिस्तान की सेना और प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। समिति का साफ कहना है कि पूरे चुनाव प्रक्रिया को 'बंदूक की नोक पर' चलाया जा रहा है और इसे लोकतंत्र का नाम देकर महज एक दिखावा किया जा रहा है। जेएएसी नेताओं का दावा है कि इन चुनावों में न तो स्वतंत्रता है, न निष्पक्षता और न ही कोई वास्तविक लोकतांत्रिक विश्वसनीयता है।</p>
<p>सीएनएन-न्यूज18 से बात करते हुए एएसी के प्रमुख नेता उमर नज़ीर कश्मीरी ने संगठन की ओर से स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि कमेटी इस पूरे आयोजन को 'लोकतंत्र के नाम पर चुनावी ड्रामा' मानती है और इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि अवामी एक्शन कमेटी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बिल्कुल नहीं है। हम तो हमेशा से स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की मांग करते आए हैं। लेकिन हम चुनाव के नाम पर हो रही धोखाधड़ी और दबाव की राजनीति को बर्दाश्त नहीं करेंगे।</p>
<p>उमर नजीर कश्मीरी ने आगे बताया कि पीओके में चुनाव प्रक्रिया को शुरू से ही सेना के दबाव में चलाया जा रहा है। उनके अनुसार, समान अवसर देने की बजाय पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसियां सक्रिय रूप से हस्तक्षेप कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 95 प्रतिशत असली और लोकप्रिय कश्मीरी प्रतिनिधियों को चुनाव लड़ने से जानबूझकर रोका गया है। कई उम्मीदवारों पर दबाव बनाया गया, धमकियां दी गईं और कुछ को प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। इस वजह से पूरी चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।</p>
<p>पहले चरण के चुनाव का जिक्र करते हुए उमर नजीर ने कहा कि पीओके की बड़ी आबादी ने पहले ही इन चुनावों का खुला बहिष्कार कर दिया था। लोगों ने बूथों से दूर रहकर अपना विरोध दर्ज कराया। अब दूसरे चरण में भी यही माहौल बना हुआ है। कई क्षेत्रों से बहिष्कार की मांगें जोर पकड़ रही हैं और आम नागरिकों में इन चुनावों के प्रति गहरा अविश्वास देखने को मिल रहा है। एएसी का मानना है कि जब जनता का बड़ा हिस्सा प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार कर रहा है तो ऐसे चुनावों को लोकतांत्रिक कहना बेमानी है।</p>
<p>उमर नजीर कश्मीरी ने कहा कि मौजूदा सरकारी ढांचा लोगों की जरूरतों और आकांक्षाओं को पूरा करने में पूरी तरह विफल रहा है। इसलिए पूरे इलाके में प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था को नए सिरे से गढ़ने की जरूरत है। तभी लोगों की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी और जवाबदेही का माहौल बनेगा। इस दौरान उमर नजीर ने स्पष्ट किया कि एएसी का संघर्ष सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं है। समिति 'हक-ए-हुकमरानी' यानी स्व-शासन के अधिकार और 'हक-ए-मालिकियत' यानी अपनी जमीन और संसाधनों पर मालिकाना हक के लिए अपना आंदोलन लगातार जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि कमेटी का लक्ष्य लोगों के उन अधिकारों को वापस दिलाना है जो लंबे समय से छीने गए हैं।</p>
<p>दूसरी ओर पाकिस्तान के आधिकारिक पक्ष की बात करें तो वहां के अधिकारियों का दावा है कि पीओके असेंबली चुनाव पूरी तरह कानून के अनुसार और उचित सुरक्षा व्यवस्था के साथ हो रहे हैं। उन्होंने किसी भी दबाव या हस्तक्षेप से इनकार किया है। हालांकि अवामी एक्शन कमेटी के इन गंभीर आरोपों पर पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>यूक्रेन का रूस पर बड़ा ड्रोन हमला, तेल रिफाइनरी में लगी भीषण आग</title>
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<description><![CDATA[ कीव रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग अब विनाशकारी मोड़ ले चुका है। दोनों देश एक दूसरे पर ताबड़तोड़ हमला कर रहे हैं। इस बीच यूक्रेनी सेना ने स के सारातोव क्षेत्र में रोसनेफ्ट पीजेएससी की प्रमुख तेल रिफाइनरी पर जोरदार ड्रोन हमला किया। हमले के कारण रिफाइनरी में भीषण आग लग गई। यूक्रेन … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 22:45:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>यूक्रेन, का, रूस, पर, बड़ा, ड्रोन, हमला, तेल, रिफाइनरी, में, लगी, भीषण, आग</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कीव</strong><br>
रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग अब विनाशकारी मोड़ ले चुका है। दोनों देश एक दूसरे पर ताबड़तोड़ हमला कर रहे हैं। इस बीच यूक्रेनी सेना ने स के सारातोव क्षेत्र में रोसनेफ्ट पीजेएससी की प्रमुख तेल रिफाइनरी पर जोरदार ड्रोन हमला किया। हमले के कारण रिफाइनरी में भीषण आग लग गई। यूक्रेन के जनरल स्टाफ ने टेलीग्राम पर जारी आधिकारिक बयान में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यूक्रेनी बलों ने अपने दुश्मन की ईंधन उत्पादन क्षमता को लगभग रोजाना निशाना बनाने की रणनीति के तहत यह हमला किया।</p>
<p>जनरल स्टाफ के अनुसार, यूक्रेनी सेना ने मॉस्को से करीब 730 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और कीव से 1000 किलोमीटर से अधिक पूर्व स्थित सारातोव क्षेत्र के एंगेल्स एयरफील्ड पर भी एक साथ हमला बोला। एंगेल्स एयरबेस रूसी वायु सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण ऑपरेटिंग हब माना जाता है। यहां Tu-95 लंबे दूरी के रणनीतिक बमवर्षक विमान तैनात हैं, जिनका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ क्रूज मिसाइल हमले करने के लिए नियमित रूप से किया जाता रहा है।</p>
<p>क्षेत्रीय अधिकारियों ने बताया कि हमले के बाद सारातोव और एंगेल्स शहरों में सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी नुकसान पहुंचा है। इस हमले में दो नागरिकों की मौत हो गई है। नासा के फायर इन्फॉर्मेशन फॉर रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम द्वारा रविवार को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में सारातोव रिफाइनरी के आसपास नई गर्मी संबंधी गड़बड़ियां साफ नजर आ रही हैं, जो सक्रिय आग का संकेत दे रही हैं।</p>
<p>बता दें कि यह हमला जुलाई के अंतिम दिनों में यूक्रेन द्वारा रूस की तेल रिफाइनरियों पर तेज किए गए हमलों की श्रृंखला का हिस्सा है। पिछले कुछ हफ्तों की सापेक्ष शांति के बाद यूक्रेन ने सीमा से दूर स्थित रूसी ऊर्जा सुविधाओं को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को कीव ने रूस की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक पर हमला किया था, जबकि शनिवार को बश्कोर्तोस्तान गणराज्य के उफा शहर को निशाना बनाया गया, जहां तीन बाशनेफ्ट रिफाइनरियां स्थित हैं।</p>
<p>बश्कोर्तोस्तान के प्रमुख रादिय खाबिरोव ने रविवार को बताया कि गणराज्य की औद्योगिक सुविधाओं पर एक और बड़ा ड्रोन हमला हुआ। उन्होंने बिना ज्यादा डिटेल दिए कहा कि उफा के एक औद्योगिक क्षेत्र में आग लग गई है। इन हमलो से रूस की ईंधन आपूर्ति व्यवस्था पर फिर से दबाव बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। इससे पहले देश के कई इलाकों में पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर लिमिट लगाई गई थी या कमी के बाद उन्हें हटाया गया था। बता दें कि सारातोव रिफाइनरी की क्षमता रोजाना लगभग 1 लाख 40 हजार बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करने की है। इस पर इससे पहले 8 जुलाई को भी हमला हुआ था। उस हमले के बाद रिफाइनरी ने कुछ समय बाद काम फिर से शुरू कर दिया था।</p>]]> </content:encoded>
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<title>इंडोनेशिया में यात्री फेरी में लगी भीषण आग, 5 की मौत 41 लापता</title>
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<description><![CDATA[  मदुरा इंडोनेशिया के मदुरा द्वीप के पास रविवार (2 अगस्त) को एक यात्री फेरी में आग लगने से कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 41 लोग अभी भी लापता हैं. हादसे के बाद बड़े स्तर पर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया है. इंडोनेशिया की सर्च एंड रेस्क्यू एजेंसी के … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 20:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>इंडोनेशिया, में, यात्री, फेरी, में, लगी, भीषण, आग, की, मौत, लापता</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p> <strong>मदुरा</strong><br>
इंडोनेशिया के मदुरा द्वीप के पास रविवार (2 अगस्त) को एक यात्री फेरी में आग लगने से कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 41 लोग अभी भी लापता हैं. हादसे के बाद बड़े स्तर पर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया है. इंडोनेशिया की सर्च एंड रेस्क्यू एजेंसी के मुताबिक, फेरी में यात्रियों और क्रू मेंबर्स समेत कुल 271 लोग सवार थे. रविवार दोपहर तक कम से कम 225 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था, जबकि लापता लोगों की तलाश जारी थी.</p>
<p>यह फेरी पूर्वी जावा प्रांत के सुराबाया से दक्षिण सुलावेसी के मकासर जा रही थी. इसी दौरान जावा के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित मदुरा द्वीप के पास फेरी में आग लग गई.</p>
<p>रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए कई जहाजों को तैनात किया गया है. अधिकारी आसपास के समुद्री इलाके में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं. फेरी में आग लगने की वजह का तत्काल पता नहीं चल सका है.</p>
<p><strong>पहले भी हुआ था हादसा</strong><br>
इंडोनेशिया में इससे करीब एक साल पहले भी फेरी में आग लगने की एक जानलेवा घटना हुई थी. जुलाई 2025 में उत्तरी सुलावेसी प्रांत के पास एक यात्री जहाज में आग लगने से कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि करीब 150 लोगों को बचाया गया था.</p>
<p>KM Barcelona 5 नाम का यह जहाज करीब 280 लोगों को लेकर जा रहा था. पिछले साल 19 जुलाई को प्रांत की राजधानी मनाडो के पास समुद्र में सफर के दौरान जहाज में आग लग गई थी.</p>
<p>साल 2025 की इस घटना के अलावा भी इंडोनेशिया में फेरी में आग लगने और समुद्री हादसों के कई मामले सामने आ चुके हैं. मई 2021 में टर्नेट से रवाना होने के कुछ समय बाद मोलुक्का सागर में KM Karya Indah फेरी में आग लग गई थी. आग लगने के बाद यात्रियों और क्रू मेंबर्स को समुद्र में कूदना पड़ा था. अधिकारियों और स्थानीय मछली पकड़ने वाली नौकाओं की मदद से सभी 181 यात्रियों और 14 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचा लिया गया था. यात्रियों में 22 बच्चे भी शामिल थे. इस हादसे में किसी की मौत नहीं हुई थी.</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>बांग्लादेश सीमा पर नई सैन्य छावनी की तैयारी, भारत&#45;म्यांमार इलाके में बढ़ी हलचल</title>
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<description><![CDATA[ ढाका बांग्लादेश सेना चुपचाप नाइखोंगछारी में एक नए छावनी बना रही है। इसके लिए जरूरी बुनियादी ढांचा बनाने की तैयारी की जा रही है। यह इलाका बांग्लादेश-म्यांमार सीमा के पास है और यहां अच्छी तरह से हथियारों से लैस रोहिंग्या लड़ाकों की भारी मौजूदगी है। कम से कम दो बांग्लादेशी सूत्रों ने &#039;नॉर्थईस्ट न्यूज&#039; को … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 18:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>बांग्लादेश, सीमा, पर, नई, सैन्य, छावनी, की, तैयारी, भारत-म्यांमार, इलाके, में, बढ़ी, हलचल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ढाका</strong><br>
बांग्लादेश सेना चुपचाप नाइखोंगछारी में एक नए छावनी बना रही है। इसके लिए जरूरी बुनियादी ढांचा बनाने की तैयारी की जा रही है। यह इलाका बांग्लादेश-म्यांमार सीमा के पास है और यहां अच्छी तरह से हथियारों से लैस रोहिंग्या लड़ाकों की भारी मौजूदगी है। कम से कम दो बांग्लादेशी सूत्रों ने 'नॉर्थईस्ट न्यूज' को अलग-अलग बताया है कि जमीन के एक खास हिस्से की सीमा तय करने के लिए 'झंडे लगाकर निशान' लगाने का काम चल रहा है जहां सेना का नया केंद्र बनाया जाएगा।</p>
<p>बांग्लादेशी सूत्रों ने रिपोर्ट में बताया है कि नया छावनी इलाका रामू (कॉक्स बाज़ार जिले में) के पास बनेगा जो बांग्लादेश सेना की 10वीं इन्फैंट्री डिवीज़न का हेडक्वार्टर है। बांदरबन जिले का आखिरी गांव, केओकराडोंग, बांग्लादेश-म्यांमार-भारत के मिलन बिंदु के बहुत पास है। भारतीय तरफ मिजोरम जिले में डुडुक्सोरा है और उसके आगे परवा है जहां BSF की एक यूनिट तैनात है।</p>
<p><strong>भारत-म्यांमार सीमा के करीब सैन्य छावनी</strong><br>
रिपोर्ट के मुताबिक कहा जा रहा है कि टेकनाफ के उत्तर में और नाइखोंगछारी (बांदरबन जिले में) से ज्यादा दूर नहीं है और सिलखाली में जमीन साफ करने और मिट्टी को समतल करने का काम भी शुरू हो गया है। नॉर्थईस्ट न्यूज की ही एक रिपोर्ट में पिछले साल अप्रैल में बताया गया था कि सेना की योजना कॉक्स बाजार जिले के पूर्वी तट पर सिलखाली में एक सुविधा केंद्र बनाने की है जो एक सप्लाई बेस के तौर पर काम करेगा।</p>
<p>इस सप्लाई बेस के लिए ज़मीन तय कर ली गई थी। फरवरी 2025 में बांग्लादेश के आर्मी चीफ जनरल वाकर-उज़-ज़मान ने खुद सिल्कली के आस-पास के इलाकों का दौरा किया था और प्रस्तावित सप्लाई बेस के लिए जगह चुनी। टेकनाफ से 30 किलोमीटर उत्तर में स्थित सिल्कली बंगाल की खाड़ी के किनारे बसा एक छोटा सा रेवेन्यू विलेज है। बांग्लादेश सेना आर्टिलरी हथियारों मुख्य रूप से तुर्की में बनी फील्ड गन और एंटी-टैंक गाइडेड हथियारों साथ ही मोर्टार और छोटे हथियारों के लिए एक फील्ड फायरिंग रेंज चलाती है। वहीं तुर्की से नये ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम भी खरीदने की योजना है इसीलिए सवाल ये है कि क्या यहां तुर्की के हथियारों की तैनाती की जाएगी?</p>]]> </content:encoded>
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<title>अमेरिका के आयडहो में बर्गर रेस्तरां पर अंधाधुंध फायरिंग, कई लोगों की मौत की आशंका</title>
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<description><![CDATA[  आयडहो अमेरिका के आयडहो में अंधाधुंध गोलीबारी के बाद कई लोगों के मारे जाने की खबर है। जानकारी के मुताबिक दक्षिण आयडहो के एक बर्गर रेस्तरां में गोलीबारी की घटना हुई है। इसमें हमलावर समेत कई लोगों के मारे जाने की आशंका है। पुलिस ने बताया कि यह पता लागने की कोशिश की जा रही … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 17:45:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>अमेरिका, के, आयडहो, में, बर्गर, रेस्तरां, पर, अंधाधुंध, फायरिंग, कई, लोगों, की, मौत, की, आशंका</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p> <strong>आयडहो</strong><br>
अमेरिका के आयडहो में अंधाधुंध गोलीबारी के बाद कई लोगों के मारे जाने की खबर है। जानकारी के मुताबिक दक्षिण आयडहो के एक बर्गर रेस्तरां में गोलीबारी की घटना हुई है। इसमें हमलावर समेत कई लोगों के मारे जाने की आशंका है। पुलिस ने बताया कि यह पता लागने की कोशिश की जा रही है कि शूटर ने हमला क्यों किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले पुलिस ने बताया था कि इस घटना में पांच लोग बुरी तरह घायल हुए हैं। हालांकि अब कई लोगों के मरने की बात कही जा रही है। स्पष्ट आंकड़ा सामने अब तक नहीं रखा गया है।</p>
<p><strong>एक शख्स ने हमलावर को भी मार दिया</strong><br>
एक प्रत्यक्षदर्शी लेन कोएहन ने बताया कि वह एन-आउट रेस्तरां के बाहर रुके थे तभी देखा कि एक शख्स एआर-स्टाइल राइफल से फायरिंग कर रहा है। इसके बाद एक शख्स ने पिस्तौल से शूटर पर गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद देखा कि एन-आउट यूनिफॉर्म पहने एक शख्स किसी को रेस्तरां से घसीटता हुआ बाहर ला रहा है। उसके सीने पर गोली लगी थी और खून बह रहा था। पैरामेडिकल स्टाफ आने तक पिस्तौल वाला शख्स वहीं खड़ा था।</p>
<p><strong>रेस्टोरेंट में मची चीख-पुकार</strong><br>
घटनास्थल पर मौजूद दोदारो ने बताया, रेस्तरां में अफरा-तफरी मच गई और सब चीखते-चिल्लाते हुए इधर-उधर भागने लगे। यह बहुत ही डरावना माहौल था। बता दें कि जहां पर यह हमला हुआ है वहीं से थोड़ी ही दूर पर काफी व्यवस्त रहने वाली एक बाजार है। पुलिस ने बताया कि वह प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ कर रही है। प्रशासन का कहना है कि घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया है और उनका इलाज चल रहा है।</p>
<p>बता दें कि यह अमेरिका का बेहद कम जनसंख्या वाला प्रांत है। यहां करीब 56 हजार लोग रहते हैं। यह उत्तरी नेवेडा बॉर्डर से 120 किलोमीटर की दूरी पर है। इससे पहले सिएटल के फूड फेस्टिवल में गोलीबारी हुई थी जिसमें कम से कम दो लोगों की मौत हो गई थी। अमेरिका में इस तरह की गोलीबारी की घटनाएं आम हो गई हैं. आए दिन कहीं ना कहीं गोलीबारी की घटना सामने आती है जिसमें कई लोगों की जान चली जाती है। हथियार रखने के नियमों में ढील की वजह से ऐसी घटनाएं होती रहती हैं।</p>
<p>सीएटल की एक किशोर अदालत में दाखिल दस्तावेज में पुलिस ने कहा कि उनका मानना है कि गोली चलाने वाले कम से कम तीन लोग थे। इनमें 15 वर्षीय आरोपी, उसका एक परिचित जिसकी घटनास्थल पर मौत हो गई, और कम से कम एक अन्य अज्ञात संदिग्ध शामिल है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>अवैध प्रवासियों से परेशान स्पेन ने मोरक्को सीमा पर 500 मीटर बैरियर बनाया</title>
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<description><![CDATA[ मैड्रिड मोरक्को से घुस आए अवैध प्रवासियों के चलते स्पेन में काफी समस्या हुई है। अब स्पेन ने इससे निपटने के लिए नया तरीका इस्तेमाल करने का फैसला किया है। स्पेन ने घोषणा की है कि वह अपने उत्तरी अफ़्रीकी क्षेत्र स्यूटा और पड़ोसी मोरक्को के बीच समुद्री सीमा पर 500 मीटर लंबा (1,600 फीट) … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 16:45:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>अवैध, प्रवासियों, से, परेशान, स्पेन, ने, मोरक्को, सीमा, पर, 500, मीटर, बैरियर, बनाया</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मैड्रिड</strong><br>
मोरक्को से घुस आए अवैध प्रवासियों के चलते स्पेन में काफी समस्या हुई है। अब स्पेन ने इससे निपटने के लिए नया तरीका इस्तेमाल करने का फैसला किया है। स्पेन ने घोषणा की है कि वह अपने उत्तरी अफ़्रीकी क्षेत्र स्यूटा और पड़ोसी मोरक्को के बीच समुद्री सीमा पर 500 मीटर लंबा (1,600 फीट) बैरियर बनाएगा। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सेउटा के तटीय इलाके में ताराजल ब्रेकवॉटर के पास एक तैरता हुआ अवरोध लगाया गया था। गौरतलब है कि मोरक्को के साथ लगती स्पेन के सेउटा सीमा पर मरने वालों की संख्या बढ़कर 67 हो गई है। स्पेन सरकार ने शनिवार को यह जानकारी दी।</p>
<p><strong>ब्रेकवॉटर बैरियर को पार कर गए</strong><br>
स्पेन सरकार ने कहाकि मृतकों में कुछ ऐसे लोग शामिल हैं जो डूब गए और कुछ ‘ब्रेकवॉटर बैरियर’ को पार करने की भगदड़ में मारे गए। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने सेउटा की घटनाओं पर यूरोपीय संघ के कुछ नेताओं की प्रतिक्रिया की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहाकि स्पेन को यूरोपीय संघ के सीमा-रहित शेंगेन क्षेत्र से निलंबित करने की मांग पूर्वाग्रह, फर्जी खबरों, अज्ञानता या राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित है। शनिवार सुबह तैरकर सेउटा के ताराजल तट पर पहुंचे कुछ थके-हारे प्रवासियों को सैनिकों ने सीमा के पार वापस भेज दिया।</p>
<p><strong>गृह मंत्रालय ने क्या कहा</strong><br>
स्पेन के गृह मंत्रालय का कहना है कि उत्तरी अफ्रीका में स्पेन के इलाके में दाखिल होने वालों में ज्यादातर लोग पहले ही मोरक्को लौट चुके हैं। स्पेन के गृह मंत्री फर्नांडो ग्रांडे-मार्लास्का ने शनिवार को सेउटा में पत्रकारों से कहाकि हम कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्ती से पेश आते हैं। जब यह सवाल पूछा गया कि दोनों तरफ कड़ी सुरक्षा के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में लोग सीमा कैसे पार कर पाए और क्या मोरक्को से सेउटा को कोई खतरा है, तो मार्लास्का ने रबात में मौजूद सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहाकि इन घटनाओं का स्पेन और मोरक्को को मिलकर जायजा लेने की जरूरत है। लेकिन पड़ोसी देशों के साथ सहयोग की वजह से ही स्पेन 24 घंटे में हालात को सामान्य कर पाया।</p>
<p><strong>इटनी ने शुरू की यात्रियों की जांच</strong><br>
उधर, इटली ने स्पेन से आने वाले यात्रियों पर अस्थायी रूप से सीमा पर जांच शुरू कर दी है। फ्रांस ने भी अपनी सीमाओं पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है। प्रधानमंत्री सांचेज ने यूरोपीय संघ के गृह मंत्रियों की आपातकालीन बैठक बुलाने का भी आह्वान किया है। करीब 84,000 की आबादी वाले सेउटा शहर पर इस अचानक आए दबाव के कारण स्पेन और पूरे यूरोप में राजनीतिक बहस छिड़ गई है। इटली ने हवाई और समुद्री मार्ग से स्पेन से आने वाले गैर-यूरोपीय संघ के नागरिकों की जांच शुरू कर दी है। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने कहा कि यूरोपीय सीमाओं की सुरक्षा के लिए यह कदम आवश्यक था।</p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान पर बड़े हमले की तैयारी में था अमेरिका, सऊदी की सलाह के बाद ट्रंप ने बदला फैसला</title>
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<description><![CDATA[ वॉशिंगटन ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ देने वाले सऊदी अरब ने डोनाल्ड ट्रंप को सलाह दी है कि वह युद्ध को ज्यादा ना बढ़ाएं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बड़े हमले का प्लान कैंसल कर दिया है।सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने वाइट हाउस से कहा था कि ईरान में … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 15:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन</strong><br>
ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ देने वाले सऊदी अरब ने डोनाल्ड ट्रंप को सलाह दी है कि वह युद्ध को ज्यादा ना बढ़ाएं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बड़े हमले का प्लान कैंसल कर दिया है।सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने वाइट हाउस से कहा था कि ईरान में संकट और बड़ा करने की जरूरत नहीं है। हालांकि वाइट हाउस की तरफ से इसपर कोई प्रतिक्रिया अब तक नहीं दी गई थी। रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि अमेरिका ने ईरान पर बड़े हमले का प्लान सऊदी अरब की वजह से ही कैंसल कर दिया है।</p>
<p>इससे पहले क्राउन प्रिंस ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर फोन पर बात की थी और पूछा था कि आखिर ईरान पर कितना बड़ा हमला करने का वह प्लान बना रहे हैं। इस सप्ताह अमेरिका और सऊदी अरब ने मिलकर ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए थे। इसके अलावा क्राउन प्रिंस ने अपने भाई और रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान को वॉशइंगटन भेजा था। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की है।</p>
<p><strong>अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी कर दी चेतावनी</strong><br>
ईरान के साथ बढञते तनाव के बीच अमेरिका ने पश्चिम एशिया से अपने नागरिकों को निकलने की चेतावनी जारी कर दी है। यरुशलम और पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों की राजधानियों में स्थित अमेरिकी दूतावासों ने एक जैसे सुरक्षा अलर्ट जारी किए, जिसमें अमेरिकी नागरिकों को पश्चिम एशिया में यात्रा करने को लेकर चेतावनी दी गई।</p>
<p>बता दें कि पिछले पांच महीने से अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी चरम पर है। अब होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर दोनों देश आमने-सामने हैं। वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने ईरान पर अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तेहरान ने पिछले महीने अमेरिका के साथ युद्धविराम संबंधी एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन इसके तुरंत बाद उसने उसे तोड़ दिया, वाणिज्यिक जहाजों पर हमला किया और अमेरिकी सैनिकों की हत्या की।</p>
<p>लेविट ने शुक्रवार शाम एक बयान में कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप इस तरह की आतंकवादी हरकत बर्दाश्त नहीं करेंगे। जब तक ईरान राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार सार्थक तरीके से बातचीत की मेज पर नहीं आता, तब तक उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।' इस बीच कुवैत की सेना ने शनिवार को कहा कि उसके बल उन ड्रोन हमलों का जवाब दे रहे हैं, जो देश पर ईरान के हमलों का ही हिस्सा थे।</p>]]> </content:encoded>
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<title>सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से स्पेन के इस शहर में मचा संकट, खाने तक के पड़े लाले</title>
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<description><![CDATA[ सेउटा स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी एन्क्लेव सेउटा में इन दिनों एक अभूतपूर्व मानवीय और सीमा संकट पैदा हो गया है। एक अफवाह और सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या के कारण मोरक्को से लगभग 60,000 प्रवासी अचानक स्पेन के इस छोटे से शहर में घुस गए। हालात इतने बेकाबू हो गए कि शहर में … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 09:45:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>सुप्रीम, कोर्ट, के, एक, फैसले, से, स्पेन, के, इस, शहर, में, मचा, संकट, खाने, तक, के, पड़े, लाले</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सेउटा</strong></p>
<p>स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी एन्क्लेव सेउटा में इन दिनों एक अभूतपूर्व मानवीय और सीमा संकट पैदा हो गया है। एक अफवाह और सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या के कारण मोरक्को से लगभग 60,000 प्रवासी अचानक स्पेन के इस छोटे से शहर में घुस गए। हालात इतने बेकाबू हो गए कि शहर में राशन और खाने-पीने की भारी किल्लत हो गई है। वहीं, भगदड़ और समुद्र पार करने की कोशिश में अब तक कम से कम 57 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट के किस फैसले से शुरू हुआ बवाल?</strong><br>
इस पूरे बवाल के पीछे स्पेन के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले की गलत व्याख्या और अफवाह को मुख्य वजह माना जा रहा है। बीते 8 जुलाई को स्पेन के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि समुद्र के रास्ते आने वाले प्रवासियों को तुरंत वापस नहीं भेजा जा सकता। मानव तस्करी करने वाले गिरोहों ने इस फैसले को सोशल मीडिया पर अफवाह की तरह फैला दिया। प्रवासियों को लगा कि अगर वे समुद्र के रास्ते स्पेन पहुंच गए, तो उन्हें वहां से नहीं निकाला जाएगा और उन्हें स्पेन में रहने की इजाजत मिल जाएगी। इसी गलतफहमी और रोजगार की उम्मीद में हजारों युवा, महिलाएं और छोटे बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर समुद्र की लहरों से जूझते हुए सेउटा की सीमा में घुस गए।</p>
<p>इस खबर के फैलते ही, मात्र 24 घंटे के भीतर मोरक्को से 60,000 से अधिक प्रवासी (जिनमें ज्यादातर युवा और बच्चे शामिल थे) तैरकर या पैदल ही सेउटा की सीमा में घुस गए। स्पेन के प्रधानमंत्री प्रेडो सांचेज के मुताबिक, यह पूरा संकट मानव तस्करों द्वारा फैलाई गई एक अफवाह का नतीजा है।</p>
<p><strong>क्षमता से 2400% ज्यादा बोझ, खाने का अकाल और सड़कों पर सो रहे लोग</strong><br>
सेउटा की सामान्य आबादी से भी ज्यादा लोग अचानक वहां पहुंच गए। रिसेप्शन सेंटर अपनी क्षमता से 2400 प्रतिशत अधिक भर गए, जिससे पूरा प्रशासन चरमरा गया। इतनी बड़ी संख्या में प्रवासियों के पहुंचने से सेउटा में हाहाकार मच गया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, दुकानों का सारा सामान खत्म हो गया है और ब्रेड जैसी बुनियादी चीजें भी नहीं मिल रही हैं।</p>
<p>हजारों प्रवासी, जिनमें अकेले आए बच्चे भी शामिल हैं, बिना छत के पार्कों और फुटपाथों पर सोने को मजबूर हैं। शहर के मेयर ने इसे 'गंभीर मानवीय संकट' बताते हुए स्पेन सरकार से राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने की मांग की है।</p>
<p><strong>57 लोगों की मौत से मचा कोहराम</strong><br>
भीड़ के कारण मची भगदड़ और ब्रेकवॉटर (समुद्री बाड़) को तैरकर पार करने की कोशिश में भारी जानमाल का नुकसान हुआ है। स्पेन के अधिकारियों के अनुसार, अब तक 57 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। कई लोगों की मौत समुद्र में डूबने से हुई, जबकि कुछ सीमा पर लगी बाड़ पार करते समय <strong>भगदड़ में कुचले गए।</strong></p>
<p><strong>क्यों उलटे पांव लौट रहे हैं प्रवासी?</strong><br>
स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि जो प्रवासी बेहतर जिंदगी और रोजगार की तलाश में स्पेन आए थे, वे अब खुद अपनी मर्जी से मोरक्को वापस लौट रहे हैं।</p>
<p>स्पेनिश अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 48,300 से अधिक प्रवासी वापस लौट चुके हैं। वापस लौटने वाले एक 20 वर्षीय युवक अयमान ने बताया, "सेउटा के अंदर बिल्कुल खाना नहीं था और सेना ने हमें बुरी तरह खदेड़ दिया।" रोजगार की उम्मीद में आए युवाओं ने पाया कि वहां न तो काम है, न सिर छुपाने की जगह और न ही दो वक्त की रोटी। कई लोग दो दिन से बिना पानी के फंसे हुए थे।</p>
<p>इस संकट के बाद स्पेनिश सेना को तैनात कर दिया गया है। स्पेन के प्रधानमंत्री ने इसे देश की क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन करार देते हुए साफ किया है कि अवैध रूप से घुसे सभी लोगों की तेजी से वापसी सुनिश्चित की जाएगी।</p>]]> </content:encoded>
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<title>स्पेन बॉर्डर पर बढ़ा तनाव! मुस्लिम देश से युवाओं की घुसपैठ के बाद उतरी सेना, कई लोगों की मौत</title>
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<description><![CDATA[ मैड्रिड यूरोप के बॉर्डर पर एक बार फिर से बड़ा सुरक्षा खतरा पैदा हो गया है. मुस्लिम बहुल अफ्रीकी देश मोरक्‍को से हजारों की तादाद में लोग समंदर तैरकर या फिर लैंड बॉर्डर के जरिये यूरोपीय देश स्‍पेन में दाखिल हो रहे हैं. बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों में हजारों की तादाद … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 12:45:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>स्पेन, बॉर्डर, पर, बढ़ा, तनाव, मुस्लिम, देश, से, युवाओं, की, घुसपैठ, के, बाद, उतरी, सेना, कई, लोगों, की, मौत</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मैड्रिड </strong></p>
<p>यूरोप के बॉर्डर पर एक बार फिर से बड़ा सुरक्षा खतरा पैदा हो गया है. मुस्लिम बहुल अफ्रीकी देश मोरक्‍को से हजारों की तादाद में लोग समंदर तैरकर या फिर लैंड बॉर्डर के जरिये यूरोपीय देश स्‍पेन में दाखिल हो रहे हैं. बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों में हजारों की तादाद में मोरक्‍को वासी अवैध तरीके से बॉर्डर क्रॉस कर स्‍पेन के सेउटा में दाखिल हो गए. मोरक्‍को के बेलगाम शरणार्थियों के चलते स्‍पेन के सीमावर्ती इलाके सेउटा में बवाल मच गया. स्‍थानीय सरकार ने केंद्र से आर्मी को तैनात करने और नेशनल इमरजेंसी घोषित करने की मांग की है. हालांकि, स्‍पेन सरकार की ओर से अभी तक आपातकाल की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन हालात पर काबू पाने के लिए बॉर्डर पर आर्मी को बख्‍तरबंद गाड़ियों के साथ तैनात कर दयिा गया है. उधर, स्‍पेन के बॉर्डर पर बवाल को देखते हुए इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने चेतावनी जारी की है. लीबिया और सीरिया संकट के दौरान जर्मनी की तरह इटली भी अवैध शरणार्थियों का भुक्‍तभोगी रहा था। </p>
<p>स्पेन के उत्तर अफ्रीकी क्षेत्र सेउटा (Ceuta) में मोरक्को की ओर से बड़ी संख्या में अवैध प्रवासियों के प्रवेश के बाद गंभीर मानवीय और सुरक्षा संकट पैदा हो गया है. हालात को नियंत्रित करने के लिए स्पेन सरकार ने सीमा पर सेना तैनात करने का फैसला किया है. न्‍यूज एजेंसी ‘AP’ स्थानीय प्रशासन का कहना है कि हजारों प्रवासियों के अचानक पहुंचने से सीमा सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई है, जबकि बॉर्डर पार करने की कोशिश के दौरान कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई है. वहीं, बीबीसी की रिपोर्ट की मानें मो बॉर्डर क्रॉस करने के चक्‍कर में कम से कम 60 लोगों की मौत हुई है. सेउटा के क्षेत्रीय प्रमुख जुआन जीसस विवास ने कहा कि पिछले एक सप्ताह से लगातार अवैध प्रवासियों का दबाव बढ़ रहा है और स्थानीय संसाधन पूरी तरह जवाब दे रहे हैं. उन्होंने केंद्र सरकार से अतिरिक्त पुलिस बल और सैन्य सहायता भेजने की मांग की थी. इसके बाद स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज और गृह मंत्री फर्नांडो ग्रांडे मार्लास्का ने सेउटाका दौरा करने की घोषणा की। </p>
<p><strong>समंदर तैरकर कर रहे पार</strong><br>
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय मीडिया के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग तैरकर, हवा से भरे ट्यूब और अन्य फ्लोटेशन उपकरणों की मदद से समुद्र पार कर स्यूटा पहुंचे. कई प्रवासी सीमा पर लगी बाड़ के गेट से दौड़ते हुए स्पेनिश क्षेत्र में दाखिल हुए. बॉर्डर में घुसने वाले अधिकांश प्रवासी युवा पुरुष हैं. हालांकि, महिलाओं और छोटे बच्चों वाले परिवार भी इस भीड़ में शामिल थे. स्पेन की सिविल गार्ड का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारी राशिद स्बीही ने कहा कि स्थिति पूरी तरह अराजक हो चुकी है और सीमा व्यवस्था लगभग ध्वस्त हो गई है. प्रवासियों की सही संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं. कुछ स्पेनिश मीडिया संस्थानों ने गुरुवार को दो से तीन हजार लोगों के सीमा पार करने का अनुमान लगाया है, जबकि सरकारी ब्रॉडकास्‍टर आरटीवीई के अनुसार पिछले दो सप्ताह में 1,500 से अधिक (ज्यादातर मोरक्को के युवा) सेउटा पहुंचे हैं. स्थानीय प्रशासन ने बताया कि बिना मां-बाप वाले नाबालिगों के लिए बनाए गए आश्रय केंद्र अपनी क्षमता से कई गुना अधिक लोगों को शरण देने के लिए मजबूर हैं. हाल के महीनों में समुद्र से लगभग 60 शव बरामद किए जाने की भी जानकारी दी गई है, जिससे इस मार्ग की खतरनाक स्थिति उजागर होती है। </p>
<p><strong>गृह मंत्रालय अलर्ट</strong><br>
स्पेन के गृह मंत्रालय का कहना है कि मानव तस्करी से जुड़े गिरोह हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का फायदा उठाकर लोगों को अवैध रूप से स्यूटा पहुंचने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. अदालत ने इस महीने फैसला दिया था कि समुद्र के रास्ते स्यूटा या मेलिला पहुंचने की कोशिश करने वाले प्रवासियों को बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए तुरंत मोरक्को वापस नहीं भेजा जा सकता. हालांकि कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि अधिकांश प्रवासियों को इस कानूनी फैसले की जानकारी ही नहीं थी. स्पेन और मोरक्को दोनों सरकारों ने कहा है कि वे इस संकट से निपटने के लिए मिलकर काम कर रही हैं. दोनों देशों ने अवैध रूप से सेउटा पहुंचे लोगों की जल्द वापसी सुनिश्चित करने और सीमा पर निगरानी मजबूत करने पर सहमति जताई है। </p>
<p><strong>इटली की पीएम मेलोनी की चेतावनी</strong><br>
दूसरी ओर, इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने सेउटा की तस्वीरों पर चिंता जताते हुए कहा कि अनियंत्रित अवैध प्रवासन यूरोप की सीमा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है और आवश्यकता पड़ने पर इटली असाधारण कदम उठाने के लिए तैयार है. मेलोनी ने X पर पोस्‍ट शेयर कर कहा, ‘सेउटा से सामने आ रही तस्वीरें बेहद चिंताजनक हैं और एक बार फिर यह साबित करती हैं कि अनियंत्रित अवैध प्रवासन यूरोप की सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक वास्तविक खतरा है. मैंने गृह मंत्री माटेओ पियांतेदोसी से बातचीत की है. इटली मूकदर्शक बनकर नहीं रहेगा. हम संबंधित अधिकारियों और संस्थाओं की बैठक बुला रहे हैं और इन बैठकों के बाद हम सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए असाधारण कदम उठाने के लिए तैयार हैं. इनमें स्पेन के साथ शेंगेन क्षेत्र (Schengen Area) की व्यवस्था को निलंबित करना भी शामिल हो सकता है. अवैध प्रवासन के मुद्दे पर हम एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे. सीमाओं की रक्षा करना, मानव तस्करों पर सख्त कार्रवाई करना और अवैध प्रवासियों की प्रभावी वापसी (रिपैट्रिएशन) सुनिश्चित करना इस सरकार की नीति आगे भी बनी रहेगी। </p>
<p>सेउटा और मेलिला अफ्रीका में स्थित स्पेन के दो छोटे क्षेत्र हैं, जो यूरोपीय संघ और अफ्रीका के बीच एकमात्र लैंड बॉर्डर का प्रतिनिधित्व करते हैं. वर्ष 2021 में भी सेउटा में ऐसा ही बड़ा संकट सामने आया था, जब मात्र दो दिनों में लगभग 8,000 प्रवासी सीमा पार कर स्पेनिश क्षेत्र में प्रवेश कर गए थे. मौजूदा घटनाक्रम ने एक बार फिर यूरोप में अवैध प्रवासन, सीमा सुरक्षा और मानवीय संकट को लेकर नई बहस छेड़ दी है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>PoK में बगावत की आग! 4 दिनों में 50 मौतों के बाद इस्लामाबाद में भारी विरोध, शहबाज सरकार पर बढ़ा दबाव</title>
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<description><![CDATA[  इस्लामाबाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पिछले तीन-चार दिनों से जारी हिंसा और विरोध प्रदर्शनों को लेकर बड़ा बयान सामने आया है. जम्मू-कश्मीर जॉइंट पीपुल्स एक्शन कमेटी (JAAC) के सदस्य सरदार उमर नज़ीर कश्मीरी ने कहा है कि बीते कुछ दिनों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 50 से ज्यादा लोगों की जान गई है … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 12:45:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>PoK, में, बगावत, की, आग, दिनों, में, मौतों, के, बाद, इस्लामाबाद, में, भारी, विरोध, शहबाज, सरकार, पर, बढ़ा, दबाव</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> इस्लामाबाद</strong><br>
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पिछले तीन-चार दिनों से जारी हिंसा और विरोध प्रदर्शनों को लेकर बड़ा बयान सामने आया है. जम्मू-कश्मीर जॉइंट पीपुल्स एक्शन कमेटी (JAAC) के सदस्य सरदार उमर नज़ीर कश्मीरी ने कहा है कि बीते कुछ दिनों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 50 से ज्यादा लोगों की जान गई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। </p>
<p>उन्होंने इसे बर्बर आतंकवाद बताया. इसी बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 31 जुलाई को एक बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसमें पूर्व सीनेटर मुश्ताक खान समेत कई पाकिस्तानी और कश्मीरी लोग शामिल हुए. इस प्रदर्शन को लेकर उमर नज़ीर कश्मीरी ने आभार जताया है। </p>
<p>उमर नज़ीर कश्मीरी ने बताया कि वे रावलाकोट के डी-चौक पर अपने धरना स्थल पर मौजूद हैं और यह धरना लगातार जारी है. उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार दिनों में बड़े पैमाने पर लोगों की जान गई है और कई साथी घायल हुए हैं. उनका आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सीधी गोलीबारी की गई, जिसकी वजह से इतनी मौतें हुईं. उन्होंने यह भी बताया कि इसी तरह की घटनाएं मुज़फ्फराबाद में भी हुई हैं। </p>
<p>उन्होंने कहा कि 31 जुलाई को सीनेटर मुश्ताक साहब ने इस्लामाबाद के जी-10 मरकज़ में एक बड़ी रैली बुलाई थी. इस रैली में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी और कश्मीरी लोग शामिल हुए और उन्होंने अपनी एकजुटता दिखाई। </p>
<p>उमर नज़ीर कश्मीरी ने सीनेटर मुश्ताक खान और इस प्रदर्शन को आयोजित करने वाले सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने यह धन्यवाद जम्मू-कश्मीर जॉइंट पीपुल्स एक्शन कमेटी की पूरी कोर कमेटी और कश्मीरी जनता की तरफ से दिया। </p>
<p>साथ ही उन्होंने पाकिस्तान और कश्मीर के उन सभी लोगों का भी आभार जताया, जिन्होंने इस्लामाबाद में एकजुट होकर यह बड़ा प्रदर्शन किया. उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक प्रदर्शन था। </p>
<p>उमर नज़ीर कश्मीरी ने उम्मीद जताई कि आगे भी लोग इसी तरह उनके साथ खड़े रहेंगे और उनकी आवाज़ को मजबूती से उठाते रहेंगे. यह पूरा मामला पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चल रहे विरोध आंदोलन से जुड़ा हुआ है, जो लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>कारों के बाद अब हवाई जहाज में भी मिलेगा सनरूफ का मजा! अंदर का नजारा देख रह जाएंगे दंग</title>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 10:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन</strong></p>
<p>अमेरिका की जेटजीरो (JetZero) कंपनी एक ऐसा पैसेंजर प्लेन बना रही है जो दिखने में किसी हवाई जहाज जैसा नहीं, बल्कि समुद्र की मैंटा रे (Manta Rays) मछली जैसा चौड़ा और चपटा है. सबसे खास बात यह है कि इस पूरे विमान में एक भी पारंपरिक कांच वाली खिड़की नहीं होगी. इस वजह से यह प्लेन (Windowless Z4 Aircraft) आज के आम हवाई जहाजों के मुकाबले बहुत हल्का होगा और काफी ऊंचाई पर उड़ेगा. कंपनी का दावा है कि इससे 50% तक फ्यूल की बचत होगी, जिसका फायदा आम जनता के लिए सस्ती टिकट के जरिए मिल सकता है। </p>
<p>अब आप सोच रहे होंगे कि अगर खिड़की नहीं होगी, तो अंदर बैठे यात्रियों को कैसा लगेगा? क्या उन्हें घुटन महसूस नहीं होगी? इसी बात का जवाब 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट में सामने आया है। </p>
<p><strong>दीवारों पर स्क्रीन, छत पर सनरूफ</strong><br>
रिपोर्ट के मुताबिक, प्लेन के अंदर खिड़कियों की जगह दीवारों पर बड़ी-बड़ी डिजिटल स्क्रीन लगाई जाएंगी, जो बाहर का लाइव नजारा दिखाएंगी. इसके अलावा, केबिन के अंदर बंद-बंद सा महसूस न हो, इसके लिए प्लेन की छत पर एक स्काईलाइट (Like Fixes Sunroof) दी जाएगी. इससे सूरज की रोशनी सीधे अंदर आएगी और यात्रियों को ऐसा लगेगा जैसे वे किसी बंद डिब्बे में नहीं, बल्कि अपने घर के खुले ड्राइंग रूम में बैठे हैं। </p>
<p>यह प्लेन आज के कमर्शियल जहाजों से करीब 10,000 फीट ज्यादा ऊंचाई पर उड़ेगा, जिसका मतलब है कि खराब मौसम में होने वाले टर्बुलेंस से भी यात्रियों को काफी हद तक राहत मिलेगी। </p>
<p><strong>चलने-फिरने की खुली जगह मिलेगी</strong><br>
रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्लेन का केबिन इतना चौड़ा है कि इसमें चलने-फिरने के लिए चार अलग-अलग गलियारे बनाए गए हैं. साथ ही टॉयलेट के बाहर यात्रियों के खड़े होने के लिए एक अलग से वेटिंग एरिया दिया गया है. इसकी सीटों को भी इस तरह डिजाइन किया गया है कि हर यात्री को अपनी एक अलग स्पेस मिलेगी और सिर के ऊपर सामान रखने के लिए भी सबका अपना पर्सनल केबिन होगा. पूरे रास्ते हाई-स्पीड स्टारलिंक वाई-फाई की सुविधा रहेगी, ताकि आप आराम से अपना काम या मनोरंजन कर सकें। </p>
<p><strong>हवा में कब उड़ान भरे ये प्लेन?</strong><br>
यूनाइटेड एयरलाइंस वेंचर के मैनेजिंग डायरेक्टर एंड्रयू चांग ने द सन से बातचीत में इसे मशहूर 'कॉनकॉर्ड' विमान के बाद का सबसे बड़ा बदलाव मान रहे हैं. यही वजह है कि अमेरिकी सरकार भी बोइंग जैसी बड़ी कंपनियों के सालों पुराने एकाधिकार को चुनौती देने के लिए इस नए स्टार्टअप के साथ खड़ी हो गई है। </p>
<p>जेटजीरो को अपनी पहली फैक्ट्री लगाने के लिए अमेरिकी बैंक से 3 बिलियन डॉलर यानी करीब 28,617 करोड़ रुपये का लोन मिला है. डेल्टा और यूनाइटेड जैसी दुनिया की दिग्गज एयरलाइंस ने अभी से इस प्लेन को खरीदने की तैयारी शुरू कर दी है। </p>
<p><strong>गल्फ एयर के मार्टिन गॉस और जेटज़ीरो के टॉम ओ'लेरी ने 21 जुलाई को Z4 के लिए एक लेटर ऑफ इंटेंट पर साइन किए। </strong></p>
<p>हाल ही में हुए फर्नबरो इंटरनेशनल एयरशो में बहरीन की राष्ट्रीय विमान सेवा गल्फ एयर'(Gulf Air) ने भी जेटजीरो के साथ एक बड़ा समझौता (LOI) साइन कर लिया है. इसके तहत गल्फ एयर अपने बेड़े में ऐसे 24 विमान शामिल करने की योजना बना रही है, जो 2030 की शुरुआत से यूरोप और एशिया के रूट पर उड़ान भरेंगे। </p>
<p>अगर सब कुछ तय प्लानिंग के हिसाब से चला, तो साल 2027 के अंत तक इसका पहला मॉडल टेस्टिंग के लिए उड़ान भरेगा और साल 2030 से 2032 के बीच यह आम यात्रियों के सफर के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>कराची में गैंगवार की वापसी? गैंगस्टर उजैर बलोच के भाई पर ताबड़तोड़ फायरिंग से मचा हड़कंप</title>
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<description><![CDATA[ बलूचिस्तान  पाकिस्तान के सबसे चर्चित गैंगस्टरों में गिने जाने वाले उजैर बलोच के भाई जुबैर बलोच पर गुरुवार शाम कराची के ल्यारी इलाके में जानलेवा हमला हुआ. डॉन न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, दो हथियारबंद हमलावरों ने बाइक पर पहुंचकर जुबैर पर अंधाधुंध फायरिंग की और मौके से फरार हो गए. पुलिस के अनुसार, हमले … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 19:45:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बलूचिस्तान </strong></p>
<p>पाकिस्तान के सबसे चर्चित गैंगस्टरों में गिने जाने वाले उजैर बलोच के भाई जुबैर बलोच पर गुरुवार शाम कराची के ल्यारी इलाके में जानलेवा हमला हुआ. डॉन न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, दो हथियारबंद हमलावरों ने बाइक पर पहुंचकर जुबैर पर अंधाधुंध फायरिंग की और मौके से फरार हो गए. पुलिस के अनुसार, हमले में 40 साल के जुबैर बलोच गंभीर रूप से घायल हुए हैं. उनके सीने और पेट में कई गोलियां लगीं. उन्हें तुरंत सिविल अस्पताल कराची ले जाया गया, जहां उनकी सर्जरी की गई. गोलीबारी में दो राहगीर भी घायल हुए। </p>
<p><strong>कैसे हुआ हमला?</strong><br>
साउथ DIG सैयद असद रजा ने डॉन न्यूज को बताया कि जुबैर अपने घर के बाहर सिंगु लेन इलाके में मौजूद था, तभी मोटरसाइकिल पर आए दो हमलावरों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी. रिपोर्ट के मुताबिक, पास की एक दुकान के मालिक ने जवाबी फायरिंग की, जिसके बाद हमलावर चेहरा ढककर मौके से भाग निकले। </p>
<p><strong>पुलिस किन एंगल से कर रही जांच?</strong><br>
DIG रजा के अनुसार, पुलिस इस हमले की जांच कई पहलुओं से कर रही है. इसमें गैंगवार, पुरानी व्यक्तिगत दुश्मनी और दूसरे संभावित कारण शामिल हैं. एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने नाम न बताने की शर्त पर डॉन को बताया कि जुबैर हाल ही में एक राजनीतिक दल में शामिल हुए थे और पिछले कुछ महीनों से इलाके में उस पार्टी के झंडे लगा रहे थे. उसी व्यक्ति ने यह दावा भी किया कि कराची ऑपरेशन के दौरान दुबई और ईरान भागे कुछ गैंग सदस्य हालिया अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद वापस लौट आए हैं. हालांकि यह स्थानीय स्तर पर चल रही चर्चा है और इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>₹5.64 लाख करोड़ की मेगा डिफेंस डील! THAAD मिसाइल सिस्टम से दुश्मनों की हर चाल होगी नाकाम</title>
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<description><![CDATA[  वाशिंगटन  ईरान जंग ने दुनिया के सबसे ताकतवर देश को घूंट-घूंट कर पानी पिला रहा है. हालात ऐसे हो गए हैं कि अमेरिकी सेना को हथियारों की कमी का अहसास होने लगा है. ईरान की तरफ से सस्‍ते ड्रोन और मिसाइल अटैक की वजह से अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगियों को व्‍यापक नुकसान उठाना पड़ा … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 10:45:15 +0530</pubDate>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> वाशिंगटन </strong></p>
<p>ईरान जंग ने दुनिया के सबसे ताकतवर देश को घूंट-घूंट कर पानी पिला रहा है. हालात ऐसे हो गए हैं कि अमेरिकी सेना को हथियारों की कमी का अहसास होने लगा है. ईरान की तरफ से सस्‍ते ड्रोन और मिसाइल अटैक की वजह से अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगियों को व्‍यापक नुकसान उठाना पड़ा है. ईरान ने पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिका और उसके सहयोगियों के कई सैन्‍य ठिकानों को निशाना बनया है. तेहरान के इन हमलों में अमेरिका के कुछ सैनिकों को जान भी गंवानी पड़ी है. यह स्थिति अमेरिका और सहयोगी देशों के कमजोर होते एयर डिफेंस सिस्‍टम को भी दिखाता है. अमेरिका ईरान के साथ जारी जंग में THAAD एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम का पुरजोर इस्‍तेमाल कर रहा है. लगातार यूज की वजह से THAAD में इस्‍तेमाल होने वाले पैट्र‍ियट इंटरसेप्‍टर मिसाइल की कमी खलने लगी है. डोनाल्‍ड ट्रंप की सरकार ने इस कमी को दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. पेंटागन ने अमेरिकी डिफेंस कंपनी लॉकहीड मार्टिन को पैट्र‍ियट इंटरसेप्‍टर मिसाइल बनाने के लिए 58.6 अरब डॉलर (₹564691 करोड़) का ठेका दिया है, ताकि मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत किया जा सके। </p>
<p>जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने अपनी वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करने और तेजी से घटते मिसाइल भंडार की भरपाई के लिए रक्षा क्षेत्र का अब तक का एक बड़ा कदम उठाया है. अमेरिकी सेना ने रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन के साथ पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों के उत्पादन के लिए 58.6 अरब डॉलर का 7 साल का कॉन्‍ट्रैक्‍ट किया है. यह समझौता वित्तीय वर्ष 2026 से 2032 तक लागू रहेगा और इसका उद्देश्य पैट्रियट मिसाइलों के उत्पादन में तेजी लाकर अमेरिकी सेना तथा उसके सहयोगी देशों की जरूरतों को पूरा करना है. पेंटागन के अनुसार, इससे पहले अप्रैल 2026 में लॉकहीड मार्टिन को 4.7 अरब डॉलर का एक वर्षीय अनुबंध दिया गया था. अब उसी व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए 7 साल के मल्‍टी-ईयर खरीद कार्यक्रम में बदल दिया गया है. यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब ईरान और यूक्रेन से जुड़े सैन्य अभियानों के कारण अमेरिका के एडवांस वेपंस और एयर डिफेंस मिसाइल के भंडार पर भारी दबाव पड़ा है। </p>
<p><strong>THAAD और पैट्रियट को लेकर चिंता</strong><br>
हाल के वर्षों में अमेरिका ने यूक्रेन सहित कई सहयोगी देशों को बड़ी संख्या में हथियार उपलब्ध कराए हैं. वहीं, मध्य-पूर्व में अपनी सैन्य कार्रवाई के दौरान भी अमेरिकी सेना ने बड़ी मात्रा में हथियारों और वायु रक्षा मिसाइलों का इस्तेमाल किया है. इसके चलते पैट्रियट और थाड (THAAD) जैसे प्रमुख एयर डिफेंस सिस्टम के इंटरसेप्टर मिसाइलों की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है. वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के हालिया आकलन के अनुसार, अमेरिकी सेना के पास फिलहाल 1,000 से भी कम पैट्रियट इंटरसेप्टर और 250 से कम थाड इंटरसेप्टर शेष हैं. दोनों प्रणालियों का हाल के महीनों में मध्य-पूर्व में व्यापक उपयोग हुआ है। </p>
<p><strong>तीन गुना तक बढ़ेगा उत्‍पादन</strong><br>
लॉकहीड मार्टिन ने कहा है कि नए कॉन्‍ट्रैक्‍ट के तहत वह 2030 तक PAC-3 MSE इंटरसेप्टर मिसाइलों की उत्पादन क्षमता को तीन गुना तक बढ़ाएगी. कंपनी ने यह भी घोषणा की कि अर्कांसस स्थित अपने कैमडेन संयंत्र में कर्मचारियों की संख्या लगभग 1,200 से बढ़ाकर 1,850 की जाएगी. इसके अलावा कंपनी 2030 तक अमेरिका में 20 से अधिक मैन्‍यूफैक्‍चरिंग यूनिट के आधुनिकीकरण पर 8 से 9 अरब डॉलर का निवेश करेगी, जिसमें अलबामा और अर्कांसस में नए आयुध उत्पादन केंद्र भी शामिल हैं. PAC-3 MSE पैट्रियट वायु रक्षा प्रणाली का अत्याधुनिक हिट-टू-किल इंटरसेप्टर है, जिसे बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और लड़ाकू विमानों को हवा में ही नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है. अमेरिकी प्रशासन रक्षा उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने रक्षा कंपनियों पर उत्पादन क्षमता बढ़ाने और सरकारी अनुबंधों को प्राथमिकता देने का दबाव भी बढ़ाया है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>भारतीय महिला ने अमेरिकी सैनिक से की शादी, सिर्फ ₹13 हजार में मिला घर! बताए कई चौंकाने वाले फायदे</title>
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<description><![CDATA[ न्यूयॉर्क सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर अमेरिकी सेना से जुड़े फायदों के बारे में बता रही हैं। इस महिला का नाम मेघा है और उनकी शादी अमेरिकी सेना के जवान मिशेल लेलैंड हिल से हुई है। कपल ने अपने ज्वाइंट इंस्टाग्राम अकाउंट … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 10:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>न्यूयॉर्क</strong></p>
<p>सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर अमेरिकी सेना से जुड़े फायदों के बारे में बता रही हैं। इस महिला का नाम मेघा है और उनकी शादी अमेरिकी सेना के जवान मिशेल लेलैंड हिल से हुई है। कपल ने अपने ज्वाइंट इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर कर अमेरिकी मिलिट्री परिवार होने के 'तीन सबसे बड़े फायदों' का खुलासा किया है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद इंटरनेट पर लोग अमेरिकी और भारतीय सेना की सुविधाओं की तुलना कर रहे हैं।</p>
<p><strong>अमेरिकी सेना के 3 सबसे बड़े फायदे</strong><br>
वायरल क्लिप में मेघा अपने पति मिशेल से अमेरिकी सेना के जवानों को मिलने वाले फायदों के बारे में बताने को कहती हैं। मिशेल ने यह तीन मुख्य फायदे गिनाए हैं।</p>
<p>जिंदगीभर की मुफ्त शिक्षा- मिशेल ने इसे "जीवन भर के लिए मुफ्त शिक्षा" बताया है। उन्होंने कहा कि पूरे देश के किसी भी स्कूल में पढ़ाई करने के लिए हर महीने 1000 डॉलर दिए जाते हैं।</p>
<p>फ्री हेल्थकेयर- सैन्य कर्मियों को 'डिपार्टमेंट ऑफ वेटरन्स अफेयर्स' के जरिए जिंदगी भर मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं मिलती हैं। वे देश भर में मौजूद किसी भी मेडिकल सुविधा केंद्र में अपना इलाज करा सकते हैं।</p>
<p>महज 13,000 रुपये में खुद का घर- कपल के मुताबिक घर खरीदने के लिए सेना के जवानों को सिर्फ पेपरवर्क यानी कागजी कार्रवाई के पैसे देने होते हैं। मिशेल बताते हैं कि इसके लिए महज 140 डॉलर का खर्च आता है और घर की चाबियां आपको मिल जाती हैं। इस पर मेघा आगे कहती हैं कि 140 डॉलर यानी लगभग 13,000 रुपये देकर आप अपना घर खरीद सकते हैं। एक अन्य वीडियो में मेघा और मिशेल बताते हैं कि उन्हें बतौर सैनिक उन्हें 4200 डॉलर हर महीने मिलते हैं जोकि भारत के लिहाज 4 लाख रुपये के बराबर है।</p>
<p><strong>वीडियो पर आए 22 लाख से ज्यादा व्यूज, लोगों ने दिए ऐसे रिएक्शन</strong><br>
इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को अब तक 22 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है। कमेंट सेक्शन में यूजर्स जमकर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या भारतीय रक्षा परिवारों को भी इसी तरह के फायदे मिलते हैं या नहीं। एक यूजर ने मजाक करते हुए लिखा, "लकी लड़की, उसे सरकारी नौकरी वाला पति मिल गया।" दूसरे यूजर ने लिखा कि ये सभी और इससे भी ज्यादा सुविधाएं भारतीय रक्षा कर्मियों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को भी उपलब्ध हैं।</p>
<p>एक अन्य यूजर ने भारतीय सेना से जुड़े अपने बचपन के अनुभव शेयर करते हुए लिखा, "भारत में भी ऐसा ही है। मेरे पिता सेना में थे और हमें कैंटोनमेंट एरिया में आर्मी क्वार्टर मिलता था। सेना द्वारा चलाए जाने वाले मिलिट्री स्कूलों में बेहतरीन पढ़ाई, जिसमें पिक-एंड-ड्रॉप सुविधा और उच्च शिक्षित आर्मी पत्नियां टीचर होती थीं। खाने का भत्ता बहुत ज्यादा था और सेना के इलाके में डिस्काउंटेड ग्रॉसरी भी मिलती थी।"</p>
<p><strong>2 महीने में मिल गया ग्रीन कार्ड</strong><br>
मेघा एक अन्य वीडियो में बताती हैं कि उन्हें सिर्फ 2 महीनों में अपना ग्रीन कार्ड मिल गया। बता दें कि ग्रीन कार्ड अमेरिका में एक स्थाई निवासी कार्ड होता है। यह एक आधिकारिक पहचान पत्र है। यह किसी व्यक्ति को अपना मूल देश छोड़े बिना अमेरिका में हमेशा के लिए रहने और काम करने की अनुमति देता है। मेघा बताती हैं, "मेरे पति अमेरिकी आर्मी से हैं और उन्होंने दो युद्धों में सेवा की है; हमारी इमिग्रेशन की प्रक्रिया हमारी उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से पूरी हुई।"</p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान ने दोस्त चीन को दिया बड़ा झटका! फैसले से बीजिंग को लगा तगड़ा झटका, जानें पूरा मामला</title>
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<description><![CDATA[ कुवैत सिटी  ईरान ने अब अपने ही इंटरनेशनल पार्टनर चीन की फर्म पर हमला किया है. ये हमला कुवैत में हुआ है. कुवैत की सेना ने बताया कि गुरुवार सुबह ईरान के हमले में उत्तरी कुवैत में एक चीनी कंपनी की इमारत को निशाना बनाया गया, जिससे इमारत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और एक … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 22:45:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, ने, दोस्त, चीन, को, दिया, बड़ा, झटका, फैसले, से, बीजिंग, को, लगा, तगड़ा, झटका, जानें, पूरा, मामला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कुवैत सिटी </strong><br>
ईरान ने अब अपने ही इंटरनेशनल पार्टनर चीन की फर्म पर हमला किया है. ये हमला कुवैत में हुआ है. कुवैत की सेना ने बताया कि गुरुवार सुबह ईरान के हमले में उत्तरी कुवैत में एक चीनी कंपनी की इमारत को निशाना बनाया गया, जिससे इमारत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और एक कर्मचारी की मौत हो गई. यह घटना जॉर्डन के एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा ईरान से दागी गई पांच मिसाइलों को मार गिराए जाने के कुछ घंटों बाद हुई है। </p>
<p>ये हमले तब हुए जब अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने "ईरान के खिलाफ हमलों का एक बड़ा दौर" पूरा कर लिया है. ये हमले जॉर्डन में अमेरिकी ठिकाने पर ईरान द्वारा पहले किए गए मिसाइल हमले के जवाब में किए गए थे। </p>
<p>सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के "दर्जनों" ठिकानों पर हमले किए. इनमें मिलिट्री कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन फैसिलिटी, और तटीय निगरानी व डिफेंस साइटें शामिल थीं। </p>
<p>जॉर्डन की सरकारी समाचार एजेंसी 'पेट्रा' ने देश की सेना के प्रवक्ता के हवाले से बताया कि जॉर्डन द्वारा मिसाइलों को रोके जाने से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। </p>
<p><strong>ईरान और चीन के 'अच्छे' रिश्ते</strong><br>
ईरान जंग के बीच चीन और ईरान के रिश्ते संतुलित रहे हैं. लेकिन इस बीच कुवैत में चीनी फर्म पर ईरान का हमला दोनों देशों के संबंधों को तनावपूर्ण कर सकता है.  कूटनीतिक रूप से चीन ने अमेरिका-इजराइल के हमलों की निंदा की, ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का समर्थन किया और युद्धविराम की अपील की. उसने पाकिस्तान के साथ मिलकर शांति प्रस्ताव दिए और ईरान को युद्ध रोकने के लिए प्रेरित भी किया। </p>
<p> चीन ने खुद को क्षेत्र में शांति बनाने वाला देश दिखाया, जबकि अमेरिका को अस्थिरता फैलाने वाला बताया. साथ ही उसने खाड़ी देशों के साथ भी संतुलन बनाए रखा, क्योंकि उसके वहां बड़े आर्थिक हित हैं। </p>
<p><strong>ईरान को कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलें मिलीं</strong><br>
जहां तक ईरान की रक्षा जरूरतों का सवाल है तो चीन ने ईरान की काफी मदद की है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने दावा किया है कि चीन कुछ ही हफ्तों में कंधे से दागी जाने वाली 'शोल्डर-फायर्ड एयर-डिफेंस मिसाइल लॉन्चर' की पहली खेप तेहरान भेजने वाला है. चीन कुल मिलाकर 400 मिसाइलों की खेप ईरान को सप्लाई करने जा रहा है. लेकिन ऐन वक्त में ईरान द्वारा कुवैत में चाइनीज फर्म पर हमले की खबर आई है। </p>
<p><strong>सऊदी का ईरान को संदेश</strong><br>
ईरान और अमेरिका की लड़ाई शुरू होने के लगभग आधा साल पूरे होने को हैं. लेकिन इस लड़ाई का दायरा बढ़ता जा रहा है. अब इस युद्ध में सऊदी अरब की सीधी एंट्री हो गई है। </p>
<p>सऊदी अरब ने इराकी मिलिशिया पर पिछले कुछ दिनों में अपने तेल ठिकानों पर ड्रोन से हमला करने का आरोप लगाया है. इराकी मिलिशिया के एक ग्रुप ने शुरू में इन आरोपों से इनकार किया, जबकि ईरान समर्थित एक और ग्रुप यानी कि यमन के हूती विद्रोहियों ने कहा कि उन्होंने एक अलग लेकिन संबंधित संघर्ष के तहत सऊदी एनर्जी साइट पर हमला किया था। </p>
<p><strong>सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से अलग-अलग मुलाकात की। </strong></p>
<p>सऊदी अरब ने ईरान यह संदेश दिया है कि वह ईरान या उसके प्रॉक्सी द्वारा सऊदी तेल उद्योग और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने को बर्दाश्त नहीं करेगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>जापान में 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, क्यूशू द्वीप पर सुनामी अलर्ट जारी</title>
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<description><![CDATA[ नागासाकी जापान के क्यूशू द्वीप पर मंगलवार को 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया. यह भूकंप कुमामोतो क्षेत्र में आया और इसके बाद सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई. जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक भूकंप के बाद 1 मीटर तक ऊंची लहरें उठने की आशंका जताई गई है. तटीय इलाकों में रहने … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 18:45:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>जापान, में, 7.1, तीव्रता, का, शक्तिशाली, भूकंप, क्यूशू, द्वीप, पर, सुनामी, अलर्ट, जारी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नागासाकी</strong><br>
जापान के क्यूशू द्वीप पर मंगलवार को 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया. यह भूकंप कुमामोतो क्षेत्र में आया और इसके बाद सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई. जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक भूकंप के बाद 1 मीटर तक ऊंची लहरें उठने की आशंका जताई गई है. तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है.</p>
<p>जापान सरकार ने कुमामोतो के अलावा नागासाकी, कागोशिमा, फुकुओका, सागा, ओइता और मियाजाकी प्रान्तों में भी आपातकालीन भूकंप चेतावनी जारी की है. ये सभी इलाके क्यूशू द्वीप पर स्थित हैं. यह जानकारी न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने दी है.</p>
<p>राहत की बात यह है कि अभी तक किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई है. स्थानीय प्रशासन भूकंप से हुए असर का आकलन कर रहा है और साथ ही सुनामी के खतरे पर भी लगातार नजर बनाए हुए है. आपातकालीन टीमें अलर्ट पर हैं और स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है.</p>
<p>जापान दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां भूकंप सबसे ज्यादा आते हैं. इसी वजह से यहां भूकंप और सुनामी की चेतावनी देने वाला सिस्टम दुनिया के सबसे बेहतर सिस्टम में गिना जाता है.</p>
<p>यह सिस्टम कुछ ही सेकंड में लोगों को अलर्ट भेज देता है जिससे जान माल का नुकसान कम करने में मदद मिलती है. क्यूशू द्वीप पर रहने वाले लोगों को फिलहाल सतर्क रहने और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है. आने वाले घंटों में स्थिति साफ होने की उम्मीद है.</p>
<p><strong>कुमामोटो में था भूकंप का केंद्र</strong><br>
भूकंप का सबसे ज्यादा असर कुमामोटो प्रांत के कई शहरों और कस्बों में देखा गया. यात्सुशिरो, उतो, मशिकी और मिसातो में शिंदो पैमाने पर 6 दर्ज किया गया. वहीं कुमामोटो शहर के मिनामी वार्ड में भी तेज झटके महसूस किए गए. जापान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कुमामोटो के अन्य हिस्सों के साथ-साथ नागासाकी, कागोशिमा, फुकुओका, सागा और मियाजाकी प्रांतों में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. इन इलाकों में शिंदो स्केल पर 5 या उससे अधिक तीव्रता दर्ज की गई. जापान मौसम विभाग के मुताबिक भूकंप का केंद्र कुमामोटो शहर के दक्षिण में स्थित उकी शहर के पास था और इसकी गहराई करीब 10 किलोमीटर थी. भूकंप के कारण कुमामोटो प्रांत में लगभग 45,600 घरों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई. बिजली बहाल करने के लिए राहत और मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। </p>
<p><strong>कुमामोटो 2016 में झेल चुका है विनाशकारी भूकंप</strong></p>
<p>यह भूकंप अप्रैल, 2016 में आए विनाशकारी कुमामोटो भूकंपों की याद दिलाता है. उस समय आए दो बड़े भूकंपों में 278 लोगों की मौत हुई थी और करीब 2,800 लोग घायल हुए थे. जापान के कुमामोटो प्रांत में 14 और 16 अप्रैल 2016 को दो बड़े भूकंप आए थे. उन भूकंपों में ऐतिहासिक कुमामोटो किले को भी भारी नुकसान पहुंचा था. किले के पुनर्निर्माण का काम अब भी जारी है और इसके वर्ष 2052 तक पूरा होने की उम्मीद है. इसके अलावा भूकंप के चलते आसो ओहाशी ब्रिज पूरी तरह ढह गया था, सड़कें, रेलवे लाइनें, अस्पताल और बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ था. जापान को करीब ₹2.3 लाख करोड़ का नुकसान भूकंप की वजह से हुआ था। </p>
<p><strong>जापान के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?</strong><br>
जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कुमामोटो प्रांत में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद सभी संबंधित एजेंसियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. प्रधानमंत्री की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि सबसे पहले भूकंप से हुए नुकसान का जल्द से जल्द आकलन किया जाए.</p>
<p>इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत और बचाव अभियान तेज करने को कहा गया है. निर्देश में साफ कहा गया है कि मानव जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने तथा उनकी जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं.</p>
<p>प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह भी कहा है कि सरकार एकजुट होकर काम करे और लोगों को निकासी, नुकसान की स्थिति और अन्य जरूरी जानकारी समय पर और सही तरीके से उपलब्ध कराई जाए.</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>PoK में चुनावी हिंसा का खूनी खेल! ‘रावलकोट में लाशें ही लाशें…’, धांधली के आरोपों के बीच मचा बवाल</title>
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<description><![CDATA[ रावलकोट पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) में स्थानीय चुनावों के पहले चरण के दौरान भारी हिंसा, खूनखराबा और अराजकता फैल गई है। एक ओर जहां राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर खुलेआम चुनाव में धांधली का आरोप लगा रही हैं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी ने रावलकोट और कोटली जैसे इलाकों को युद्धक्षेत्र … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 14:45:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>PoK, में, चुनावी, हिंसा, का, खूनी, खेल, ‘रावलकोट, में, लाशें, ही, लाशें…’, धांधली, के, आरोपों, के, बीच, मचा, बवाल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रावलकोट</strong></p>
<p>पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) में स्थानीय चुनावों के पहले चरण के दौरान भारी हिंसा, खूनखराबा और अराजकता फैल गई है। एक ओर जहां राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर खुलेआम चुनाव में धांधली का आरोप लगा रही हैं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी ने रावलकोट और कोटली जैसे इलाकों को युद्धक्षेत्र में बदल दिया है।</p>
<p><strong>रावलकोट के भयावह हालात: सड़कों पर लाशें और खून</strong><br>
रावलकोट में पिछले 52 दिनों से चल रहे 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) के प्रदर्शनों को कुचलने के लिए पाकिस्तानी बलों द्वारा की गई कार्रवाई ने खौफनाक रूप ले लिया है। स्थानीय लोगों के बयान बेहद डरावने हैं। रावलकोट में मौजूद चश्मदीद और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अकील भाई ने वीडियो जारी कर बताया कि वहां हर तरफ लाशें और घायल लोग नजर आ रहे हैं। उन्होंने भारी हथियारों से की गई फायरिंग का जिक्र करते हुए कहा कि कश्मीरियों का खून सड़कों पर बह रहा है।</p>
<p>प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पाकिस्तानी रेंजर्स ने शांतिपूर्ण तरीके से मार्च कर रहे लोगों पर सीधे गोलियां चलाईं। एक घटना में 15 से 20 लोगों को गोली लगने की पुष्टि हुई है, जिससे हताहतों की संख्या काफी अधिक होने की आशंका है।</p>
<p>अस्पतालों में एंबुलेंस और गाड़ियां कम पड़ गई हैं, और लोग अपने कंधों पर घायलों को ले जाने के लिए मजबूर हैं। स्थानीय लोगों ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।</p>
<p>एक चश्मदीद ने बताया, "हालात बहुत ज्यादा खराब हो चुके हैं। रावलकोट में लाशें ही लाशें हैं। जख्मी ही जख्मी हैं। खुदा हमारा साथ दे। अभी अपनी जान बचाकर आया हूं। जो भी नेशनल मीडिया देख रही है, प्लीज हमारा साथ दें। बेशुमार लाशें पड़ी हैं।"</p>
<p><strong>चुनाव में खुलेआम धांधली और हत्या</strong><br>
मीरपुर डिवीजन की 13 विधानसभा सीटों पर हो रहे मतदान का पहला चरण बड़े पैमाने पर चुनावी अनियमितताओं और राजनीतिक हिंसा का शिकार हुआ है। कोटली जिले के निक्याल में मतदान के दौरान पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के 35 वर्षीय कार्यकर्ता मुख्तार यूनुस की गोली मारकर हत्या कर दी गई।</p>
<p>PPP के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए हत्या और बूथ कैप्चरिंग का सीधा आरोप पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के समर्थकों पर लगाया है।</p>
<p>पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने इस चुनाव का पूरी तरह बहिष्कार किया है। स्थानीय अधिकारियों का आरोप है कि इस चुनाव के नतीजे पाकिस्तान की सेना पहले ही तय कर चुकी है, ताकि क्षेत्र में उनका नियंत्रण और कड़ा हो सके।</p>
<p><strong>विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह</strong><br>
PoJK में यह गुस्सा अचानक नहीं भड़का है। लगातार चल रहे इस जन-आंदोलन की प्रमुख वजहें इस प्रकार हैं।</p>
<p>    600 से अधिक नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी रिहाई की मांग हो रही है। सरकार ने नागरिक अधिकारों की बात करने वाली समिति JAAC को प्रतिबंधित कर दिया है।</p>
<p>    लोग महंगाई, बिजली-पानी की कमी और संसाधनों के भारी शोषण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।</p>
<p>    विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करने की मांग को लेकर भी लंबे समय से तनाव बना हुआ था, जिसे प्रशासन ने खारिज कर दिया।</p>
<p>चुनाव की आड़ में पाकिस्तानी सेना और प्रशासन द्वारा नागरिक अधिकारों के दमन ने PoJK में मानवाधिकारों का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। धांधली और राज्य प्रायोजित हिंसा ने वहां के लोगों को बगावत पर मजबूर कर दिया है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>होर्मुज पर ईरान का सख्त रुख! संप्रभुता हमारी पहली प्राथमिकता, अमेरिका से बातचीत के लिए रखीं 3 शर्तें</title>
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<description><![CDATA[ तेहरान ईरान ने  कहा कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है और इस समुद्री मार्ग के प्रबंधन को लेकर ओमान के साथ सकारात्मक बातचीत जारी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान की तत्काल प्राथमिकता बातचीत के बजाय अपनी संप्रभुता की रक्षा करना है, उन्होंने … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 09:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तेहरान</strong><br>
ईरान ने  कहा कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है और इस समुद्री मार्ग के प्रबंधन को लेकर ओमान के साथ सकारात्मक बातचीत जारी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान की तत्काल प्राथमिकता बातचीत के बजाय अपनी संप्रभुता की रक्षा करना है, उन्होंने हालांकि यह भी स्वीकार किया कि ईरान मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका के साथ संदेशों का आदान-प्रदान जारी रखे हुए है। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच सीधी बातचीत के लिए फिलहाल स्थितियां मौजूद नहीं हैं।</p>
<p><strong>अमेरिका से बातचीत के लिए रखीं 3 शर्तें</strong></p>
<p>ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से किसी नए रास्ते या वैकल्पिक रूट के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। ईरान ने साफ किया है कि होर्मुज पर वह किसी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा और अब ये समुद्री रास्ता युद्ध पूर्व की स्थिति में वापस नहीं जाएगा। ईरान की ओर से ऐसे समय ये कहा गया है, जब अमेरिका ने दो हफ्ते से जारी हमले रोक दिए हैं और चीजों को बातचीत की तरफ ले जाने की कोशिश हो रही है। ईरान ने अमेरिका से समझौते पर बातचीत के लिए तीन शर्तें रखी हैं।</p>
<p>अल-अरबिया के अनुसार, तेहरान चाहता है कि बातचीत शुरू होने से पहले होर्मुज पर यह पक्का किया जाए कि इस समुद्री गलियारे पर ईरान का नियंत्रण रहेगा। यह उसकी पहली शर्त है। दूसरी शर्त ईरान के फ्रीज किए गए फंड जारी करने की है। तीसरे पड़ाव में ईरान ने परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा की बात कही है। ईरान ने मध्यस्थ पाकिस्तान से कहा है कि वह शर्तों पर जिनेवा, दोहा या इस्लामाबाद में बातचीत के लिए तैयार है।</p>
<p><strong>होर्मुज खोलने पर बातचीत जारी</strong><br>
रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के जलमार्गों को फिर से खोलने पर ओमान और ईरान के बीच दो दिन की बातचीत में काफी प्रगति हुई है। एक ईरानी अधिकारी ने कहा है कि ओमान के अधिकारी चर्चा के बाद शनिवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर के आसपास तेहरान से रवाना हुए हैं।</p>
<p>होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर ओमान और ईरान के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है। क्षेत्रीय अधिकारियों ने कहा है कि किसी नतीजे के लिए अभी और बातचीत की जरूरत है। हालांकि होर्मुज पर डोनाल्ड ट्रंप का रुख क्या रहता है, इस पर सभी की नजर है।</p>
<p><strong>होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण</strong><br>
ईरानी संसद के डिप्टी स्पीकर ने जोर देकर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य युद्ध-पूर्व की स्थिति में वापस नहीं आएगा। अब इस समुद्री रूट से यातायात ईरान तत करेगा। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण बना होने का दावा किया है।</p>
<p>IRGC ने कहा हैकि ईरान की अनुमति के बिना एक पक्षी भी होर्मुज से से नहीं गुजर सकता है। IRGC ने यह भी कहा कि उसकी चेतावनी जारी करने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में छह जहाजों को रोका गया। इससे यह साबित होता है कि उस इलाके में नेविगेशन पर ईरान का पूरा नियंत्रण है।</p>
<p><strong>ईरान-अमेरिका में हमले रुके</strong><br>
अमेरिका ने 13 दिनों के हमलों के बाद ईरान पर हमले रोक दिए हैं। इसके बाद ईरानी सेना ने भी जवाबी हमले रोकने का ऐलान किया है। दोनों पक्षों के हमले रोकने से बातचीत फिर शुरू होने की उम्मीद बंधी है। माइक वाल्ट्ज ने कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीति को समय देने के लिए हमले रोके हैं।</p>
<p><strong>पाकिस्तान में भी हो सकती है बातचीत</strong></p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने पाकिस्तान को भी संदेश भेजा है कि वह जिनेवा, दोहा या इस्लामाबाद में आगे की वार्ता के लिए तैयार है. इस बीच ओमान और ईरान के बीच हॉर्मुज के आसपास समुद्री रास्तों को फिर से सामान्य करने को लेकर दो दिनों तक बातचीत हुई। </p>
<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बातचीत में कुछ प्रगति हुई है. इसी दौरान अमेरिका ने भी ईरान पर अपने हवाई हमले फिलहाल रोक दिए. इससे कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बढ़ी है. हालांकि, क्षेत्रीय अधिकारियों का कहना है कि अंतिम समझौते के लिए अभी और दौर की बातचीत जरूरी होगी। </p>
<p><strong>‘हॉर्मुज पर हमारा पूरा नियंत्रण’</strong><br>
ईरान ने दावा किया कि हाल ही में एक तेल टैंकर निर्धारित समुद्री मार्ग छोड़कर दूसरे रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहा था. इसी दौरान वह समुद्री सुरंग से टकरा गया. उसमें विस्फोट हो गया. ईरान की संसद के उपाध्यक्ष ने कहा कि अब हॉर्मुज कभी भी युद्ध से पहले जैसी स्थिति में नहीं लौटेगा। </p>
<p>वहीं, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान की सहमति के बिना हॉर्मुज से एक परिंदा भी पर नहीं मार सकता. आईआरजीसी ने यह भी दावा किया कि उसने चेतावनी देने के बाद हॉर्मुज में छह जहाजों को रोक दिया गया. इसे उसने इस क्षेत्र पर अपने कंट्रोल का सबूत बताया। </p>
<p><strong>अमेरिका पर समझौता तोड़ने का आरोप</strong><br>
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर हॉर्मुज से जुड़े समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि समझौते का अनुच्छेद-5 पूरी तरह स्पष्ट था, लेकिन अमेरिका ने जानबूझकर उसकी शर्तों का पालन नहीं किया। </p>
<p><strong>दुनिया की टिकीं नजरें</strong><br>
हालांकि बातचीत आगे बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं. लेकिन हॉर्मुज को लेकर तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. जानकारों का मानना है कि यह समुद्री मार्ग दुनिया की तेल आपूर्ति का सबसे अहम रास्ता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बड़ा असर डाल सकता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>ब्राजील ने ठुकराया अमेरिकी अधिकारियों का वीजा, चुनाव को लेकर बढ़ा विवाद</title>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 15:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ब्राजील, ने, ठुकराया, अमेरिकी, अधिकारियों, का, वीजा, चुनाव, को, लेकर, बढ़ा, विवाद</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ब्रासीलिया</strong><br>
ब्राजील ने दो अमेरिकी अधिकारियों के वीजा अनुरोधों को ठुकरा दिया है। ये दोनों अमेरिकी अधिकारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर ब्राजील की चुनावी प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के लिए वहां जाने की योजना बना रहे थे। ट्रंप कई बार ब्राजील के वर्तमान वामपंथी राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने ब्राजील पर 50 प्रतिशत का टैरिफ भी लगाया था, जिसे बाद में कम कर दिया गया। अब ब्राजील के इस कदम से ट्रंप का भड़कना तय माना जा रहा है। ऐसी आशंका है कि ट्रंप एक बार फिर ब्राजील पर भारी टैरिफ लगा सकते हैं।</p>
<p><strong>ब्राजील के चुनाव को प्रभावित कर रहा अमेरिका?</strong><br>
ब्राजील के अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि अमेरिका की योजना देश में अक्तूबर में होने वाले चुनाव को प्रभावित करने की है। इस चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा का मुकाबला दक्षिणपंथी झुकाव वाले सीनेटर फ्लेवियो बोल्सोनारो से होगा। फ्लेवियो बोल्सोनारो ट्रंप के सहयोगी और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। जायर बोल्सोनारो पिछला चुनाव लूला से हार गए थे।</p>
<p><strong>ब्राजील ने किन अमेरिकी अधिकारियों का वीजा ठुकराया</strong><br>
ब्राजील ने जिन अमेरिकी अधिकारियों का वीजा अनुरोध ठुकराया है, उनमें विदेश विभाग के 'ब्यूरो ऑफ डेमोक्रेसी, ह्यूमन राइट्स एंड लेबर' की असिस्टेंट सेक्रेटरी राइली एम बार्न्स और डिप्टी असिस्टेंट सेक्रेटरी सैमुअल सैमसन शामिल थे। उन्होंने कहा कि वीजा को खारिज करने का फैसला ऐसे सबूतों पर आधारित था, जो हालात का राजनीतिक फायदा और ब्राजील की चुनाव प्रणाली को कमजोर करने की एक नई कोशिश की ओर इशारा करते हैं।</p>
<p><strong>अमेरिकी विदेश विभाग ने ब्राजील के आरोपों को खारिज किया</strong><br>
इससे पहले शनिवार को, अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि बार्न्स और सैमसन 27 जुलाई से 30 जुलाई तक ब्रासीलिया का दौरा करेंगे। वे सरकारी अधिकारियों, धार्मिक नेताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों से मिलकर चुनाव की निष्पक्षता, धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चर्चा करेंगे। प्रवक्ता ने ब्राज़ील के चुनावों को कमज़ोर करने की किसी भी "साज़िश" की बात को खारिज कर दिया। उन्होंने ऐसे दावों को "बेबुनियाद" बताया और कहा कि यह दौरा सामान्य है और 'ब्यूरो ऑफ़ डेमोक्रेसी, ह्यूमन राइट्स एंड लेबर' के कानूनी अधिकार क्षेत्र के अनुरूप है।</p>
<p><strong>पूरी दुनिया में चुनावों को प्रभावित कर रहा अमेरिका</strong><br>
अमेरिका पूरी दुनिया में चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। इसका ताजा सबूत लैटिन अमेरिका में देखने को मिला है। ट्रंप ने कोलंबिया के कोलंबिया के चुनाव में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति एबेलार्डो डी ला एस्प्रिएला को पूरी तरह समर्थन का ऐलान किया था। इसके अलावा अमेरिका ने अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली की जीत के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। ट्रंप चिली के राष्ट्रपति जोस एंटोनियो कास्ट का भी समर्थन करते हैं।</p>
<p><strong>जायर बोल्सोनारो ने चुनाव प्रणाली पर उठाए सवाल</strong><br>
जायर बोल्सोनारो ने 2022 के चुनाव से पहले ब्राजील की चुनावी प्रणाली पर भरोसा कम करने की बार-बार कोशिश की थी। उनका यह काम ठीक वैसा ही था, जैसा डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडन की जीत के वक्त किया था। उस समय बाइडन के कार्यकाल में अमेरिकी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी के निदेशक ने बोल्सोनारो प्रशासन से कहा था कि वे ब्राजील की वोटिंग प्रणाली पर शक करना बंद करें। फिर भी 2022 के चुनावों में हार के बाद बोल्सोनारो ने विदेशी राजनयिकों को बुलाकर बिना किसी सबूत के आरोप लगाए कि ब्राजील की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग प्रणाली में धोखाधड़ी हो सकती है।</p>
<p><strong>बोल्सोनारो के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध, जेल की सजा</strong><br>
उनकी यह चाल उल्टी पड़ गई। ब्राजील में चुनावों की देखरेख करने वाली सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट ने बाद में फैसला सुनाया कि बोल्सोनारो ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया है और उन्हें 2030 तक किसी भी सार्वजनिक पद के लिए चुनाव लड़ने से रोक दिया। बाद में बोल्सोनारो को चुनाव नतीजों को पलटने और सत्ता में बने रहने की साजिश रचने के लिए दोषी ठहराया गया और 27 साल की जेल की सजा सुनाई गई। वे अभी नजरबंदी (हाउस अरेस्ट) में अपनी सजा काट रहे हैं। अब, उनके बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो ने देश की चुनावी प्रणाली पर फिर से शक पैदा कर दिया है, जो सोशल मीडिया पर फैल रहा है।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>वेस्ट बैंक में फिर भड़की हिंसा, इजरायली सेटलर्स पर मस्जिद जलाने का आरोप</title>
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<description><![CDATA[ रामल्लाह  इजरायल और फिलिस्तीन में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। रविवार तड़के इजरायल की नई बस्तियों में बसने वालों ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनी गांवों पर हमला किया। फिलिस्तीनी अधिकारियों ने दावा किया कि इस दौरान इजरायली सेटलर्स ने दो मस्जिदों में आग लगा दी और इमारतों पर बदला … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:45:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>वेस्ट, बैंक, में, फिर, भड़की, हिंसा, इजरायली, सेटलर्स, पर, मस्जिद, जलाने, का, आरोप</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रामल्लाह</strong><br>
 इजरायल और फिलिस्तीन में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। रविवार तड़के इजरायल की नई बस्तियों में बसने वालों ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनी गांवों पर हमला किया। फिलिस्तीनी अधिकारियों ने दावा किया कि इस दौरान इजरायली सेटलर्स ने दो मस्जिदों में आग लगा दी और इमारतों पर बदला लेने के स्लोगन लिखे। यह हमला शुक्रवार को हुई हिंसा के बाद हुआ है, जिसमें इजरायली सेटलर्स की भीड़ के नाब्लस इलाके के दक्षिण पश्चिम में स्थित ताल गांव में घुसपैठ की थी। इस दौरान हुई झड़पों में चार फिलिस्तीनी और दो इजरायली सैनिक मारे गए थे।</p>
<p><strong>इजरायल-फिलिस्तीन में झड़पें तेज</strong><br>
फिलिस्तीनी अधिकारियों ने दावा किया कि इजरायली सेटलर्स का सामना करने के लिए लोग अपने घरों से बाहर निकले, जिनके बाद दोनों पक्षों में गोलीबारी शुरू हो गई। दोनों ही पक्षों ने एक दूसरे पर हमले किए। संयुक्त राष्ट्र और फिलिस्तीनी प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, इस साल इजरायली हमले में दर्जनों फिलिस्तीनी मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। हालांकि, इजरायल ने फिलिस्तीनी गांवों पर सेटलर्स के हमलों का खंडन किया है और उसे अपनी जमीन बनाया है। इजरायल का दावा है कि फिलिस्तीनियों ने अवैध रूप से उनकी जमीन पर कब्जा किया है।</p>
<p><strong>नेतन्याहू ने वेस्ट बैंक में सैन्य तैनाती बढ़ाई</strong><br>
शुक्रवार की इस घटना के बाद, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उस इलाके में और सैनिक तैनात करने का आदेश दिया और कहा कि सुरक्षा बढ़ाने के लिए और बस्तियों को मंजूरी दी जाएगी। इजरायल में इसी साल अक्तूबर में चुनाव होने हैं, जिसमें प्रधानमंत्री नेतन्याहू की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। इस बीच इजरायल के वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच समेत कई नेताओं ने वेस्ट बैंक पर कब्जा करने की मांग की है।</p>
<p><strong>फिलिस्तीनियों ने क्या बताया?</strong><br>
नाब्लस के दक्षिण-पूर्व में स्थित कुसरा गांव की परिषद के प्रमुख अब्देल अजीम वादी ने कहा कि बसने वालों ने रविवार तड़के उनके गांव में हाल ही में बनी एक मस्जिद में आग लगा दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने दीवारों पर हिब्रू भाषा में नारे लिखे, जिनमें 'यहूदी बदला' और 'ताल' के पास मारे गए इज़राइलियों में से एक का नाम शामिल था। उन्होंने बताया, "गांव को 2011 से बार-बार हमलों का सामना करना पड़ा है, और युद्ध के बाद से ये हमले बढ़ गए हैं।"</p>
<p><strong>यहूदी बस्तियों को बड़े पैमाने पर अवैध माना जाता है</strong><br>
ज्यादातर देश और संयुक्त राष्ट्र की संस्थाएं वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों को अवैध मानती हैं जबकि फिलिस्तीनी गाज़ा, वेस्ट बैंक और पूर्वी यरूशलेम में एक स्वतंत्र देश बनाना चाहते हैं। हालांकि, इजरायल इन दोनों का विरोध करता है। अक्टूबर 2023 में गाजा पर काबिज हमास आतंकियों के खिलाफ इजरायल के युद्ध में इलाक को भारी नुकसान पहुंचा है। इजरायल-हमास युद्ध में गाजा के करीब 60000 से अधिक लोग मारे गए हैं।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>वेस्ट बैंक में बड़े सैन्य अभियान की तैयारी, नेतन्याहू का बड़ा ऐलान</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली इजरायल और फिलिस्तीन के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि इजराइल कब्जे वाले वेस्ट बैंक में बड़े स्तर पर कार्रवाई के लिए तैयार है. उनके इस बयान को इलाके में सैन्य अभियान तेज करने के संकेत के तौर … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>वेस्ट, बैंक, में, बड़े, सैन्य, अभियान, की, तैयारी, नेतन्याहू, का, बड़ा, ऐलान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
इजरायल और फिलिस्तीन के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि इजराइल कब्जे वाले वेस्ट बैंक में बड़े स्तर पर कार्रवाई के लिए तैयार है. उनके इस बयान को इलाके में सैन्य अभियान तेज करने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.</p>
<p>अल जजीरा के मुताबिक, नेतन्याहू ने पत्रकारों से कहा कि सुरक्षा बलों को गांवों में जाने, तलाशी लेने, हथियार जब्त करने और लोगों को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए हैं. क्षेत्र में जारी छापों और हिंसक झड़पों के बीच यह रुख काफी सख्त माना जा रहा है. बातचीत के दौरान यह बात जोर देकर कही गई कि 'आतंकी ठिकानों' के खिलाफ इजरायल व्यापक कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है. सेना का ध्यान इस समय पूरे इलाके में अपनी पकड़ मजबूत करने और सुरक्षा अभियानों को कड़ा करने पर केंद्रित है.</p>
<p>नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है, जब वेस्ट बैंक में इजरायली सेना की छापेमारी जारी है. इसी दौरान कुछ इलाकों में इजरायली बस्तियों के लोगों की ओर से भी हमलों की खबरें सामने आई हैं. ऐसे में इस बयान को मौजूदा अभियान को और आगे बढ़ाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.</p>
<p><strong>स्थानीय निवासियों का छलका दर्द</strong><br>
दूसरी तरफ, अल जजीरा से बात करते हुए 'यूथ अगेंस्ट सेटलमेंट्स' के संस्थापक ईसा अमरो ने जमीनी हकीकत बयां की. उनका कहना है कि कब्जे वाले क्षेत्रों में रहने वाले फिलिस्तीनी नागरिक हर दिन हिंसा का सामना करने को मजबूर हैं. हाल के महीनों में हमले काफी ज्यादा बढ़ गए हैं. जब भी कोई नागरिक अपने घर, परिवार या संपत्ति का बचाव करने की कोशिश करता है, उस पर हमला कर दिया जाता है या हिरासत में ले लिया जाता है.</p>
<p>ईसा अमरो ने दावा किया कि लगातार हमलों के डर से हाल के वर्षों में 20 से ज्यादा फिलिस्तीनी समुदाय अपने गांव छोड़ चुके हैं. उनके मुताबिक, सैकड़ों परिवार अपना घर, जमीन और बस्तियां छोड़ने को मजबूर हुए हैं. उन्होंने इसे 'जातीय सफाए' जैसा बताया.<br>
 </p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान युद्ध में अमेरिकी सैनिकों की मौत छिपाने के आरोपों में घिरा ट्रंप प्रशासन</title>
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<description><![CDATA[ वॉशिंगटन  डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन कथित तौर पर ईरान युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की सही जानकारी नहीं दे रहा है। ट्रंप प्रशासन पर मरने वाले सैनिकों की जानकारी छुपाने का इल्जाम पूर्व अमेरिकी रक्षा मंत्री लियोन पैनेटा और दूसरे डिफेंस एक्सपर्ट ने लगाए हैं। रक्षा विभाग ने पिछले ढाई महीनों से प्रेस ब्रीफिंग नहीं … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 09:45:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, युद्ध, में, अमेरिकी, सैनिकों, की, मौत, छिपाने, के, आरोपों, में, घिरा, ट्रंप, प्रशासन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन</strong><br>
 डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन कथित तौर पर ईरान युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की सही जानकारी नहीं दे रहा है। ट्रंप प्रशासन पर मरने वाले सैनिकों की जानकारी छुपाने का इल्जाम पूर्व अमेरिकी रक्षा मंत्री लियोन पैनेटा और दूसरे डिफेंस एक्सपर्ट ने लगाए हैं। रक्षा विभाग ने पिछले ढाई महीनों से प्रेस ब्रीफिंग नहीं की है। इससे इन दावों को बल मिला है कि ट्रंप प्रशासन के अधिकारी नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के चलते सैनिकों की मौतों को छुपा रहे हैं। पैनेटा ने गार्डियन से बात करते हुए कहा है कि पेंटागन ईरान युद्ध में हताहत अमेरिकी सैनिकों के बारे में जानकारी साझा करने में शर्मनाक रवैया अपना रहा है।</p>
<p>अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने के आंकड़े द गार्डियन ने बताते हुए कहा है कि अब तक युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या 18 और घायलों की संख्या 430 हैं। पेंटागन ने बीते सोमवार को कहा है कि 7 जुलाई के बाद से 100 सैनिक घायल हुए हैं। हालांकि उसने यह भी कहा कि 96 प्रतिशत सैनिक ड्यूटी पर लौट आए हैं।</p>
<p><strong>अमेरिकी सैनिकों की मौत पर सवाल</strong><br>
रक्षा विभाग ने शुरू में आंकड़े जारी नहीं किए थे लेकिन बाद में सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी पुष्टि की। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक अलग रिपोर्ट में कहा गया कि पेंटागन की वेबसाइट पर मरने वालों की संख्या 18 से घटाकर 14 कर दी गई थी। एक अधिकारी ने इसके लिए डाटा में अस्थायी तौर पर आई गड़बड़ी को जिम्मेदार बताया है।</p>
<p>अफगानिस्तान और इराक युद्धों के दौरान पेंटागन की साप्ताहिक ब्रीफिंग करने वाले लियोन पैनेटा कहते है कि अमेरिकी लोगों से जानकारी छिपाने की जानबूझकर कोशिश की जा रही है। विदेश विभाग के पूर्व प्रवक्ता नेड प्राइस मानते हैं कि यह प्रेस के साथ सामान्य टकराव से आगे है। इसका मकसद जनता को युद्ध की असल कीमत से बचाना है।</p>
<p>सही समय पर रिपोर्टिंग ना होने से डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के इरादों पर गंभीर सवाल उठते हैं। सैनिकों की कई चोटों या जान के नुकसान का पता महीनों या सालों तक नहीं चल पाता है।</p>
<p><strong>प्रेस ब्रीफिंग को किया सीमित</strong><br>
द गार्डियन के अनुसार, पांच महीने पहले युद्ध शुरू होने के बाद से पेंटागन ने मीडिया की पहुंच को लगातार सीमित किया है। न्यूयॉर्क टाइम्स, NPR और पोलिटिको जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के लंबे समय से चले आ रहे डेस्क हटा दिए गए हैं। इनकी जगह ट्रंप के प्रति अनुकूल माने जाने वाले न्यूज संस्थानों को दी गई है।</p>
<p>रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने कहा कि पूर्व की तुलना में ट्रंप प्रशासन पेंटागन मीडिया के प्रति अधिक शत्रुतापूर्ण रहा है। प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने इस बात से इनकार किया कि विभाग हताहतों की रिपोर्ट को कम करके दिखा रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग ने ईरान में अमेरिकी अभियानों के बारे में लगातार रियल-टाइम अपडेट दिए हैं।</p>
<p><strong>ईरान युद्ध में अमेरिका का खर्च</strong><br>
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हफ्ते ईरान के साथ अमेरिकी युद्ध को लेकर भी तीखे सवालों और विरोध का सामना किया है। अनुमान के मुताबिक, इस युद्ध पर अब तक अमेरिका के 37.5 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। रिपब्लिकन पार्टी सेना और वाइट हाउस की प्राथमिकताओं के लिए 95 अरब डॉलर का पैकेज तैयार कर रही है।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>काला सागर में जहाज पर हमला, दो भारतीय नाविक लापता, तलाश जारी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच काला सागर (Black Sea) के समुद्री क्षेत्र में कमर्शिलय जहाजों पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। यूक्रेन के प्रमुख बंदरगाह शहर ओडेसा में शनिवार (25 जुलाई) को एक और मर्चेंट वेसल &#039;MV AGN Ragnar&#039; हमले का शिकार हो गया। इस जहाज पर चार भारतीय नागरिक (नाविक) … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 19:45:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>काला, सागर, में, जहाज, पर, हमला, दो, भारतीय, नाविक, लापता, तलाश, जारी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच काला सागर (Black Sea) के समुद्री क्षेत्र में कमर्शिलय जहाजों पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। यूक्रेन के प्रमुख बंदरगाह शहर ओडेसा में शनिवार (25 जुलाई) को एक और मर्चेंट वेसल 'MV AGN Ragnar' हमले का शिकार हो गया।</p>
<p>इस जहाज पर चार भारतीय नागरिक (नाविक) सवार थे। कीव स्थित भारतीय दूतावास ने रविवार को बयान जारी कर पुष्टि की है कि चार में से दो भारतीय नागरिक पूरी तरह सुरक्षित हैं, जबकि बाकी दो लापता भारतीय क्रू मेंबर्स की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।</p>
<p><strong>एक हफ्ते में दूसरा बड़ा हमला, दूतावास रख रहा नजर</strong><br>
यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा, "25 जुलाई को ओडेसा पोर्ट पर मर्चेंट वेसल MV AGN रागनर पर हुए हमले के बाद भारतीय दूतावास स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। जहाज पर 4 भारतीय नागरिक सवार थे। ताजा जानकारी के मुताबिक, 2 भारतीय सुरक्षित हैं और अन्य 2 के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और दूतावास स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है।"</p>
<p>दूतावास ने आपातकालीन स्थिति के लिए फोन नंबर (+38 0933559958) भी जारी किया है।<br>
यह घटना इसलिए भी बेहद चिंताजनक है क्योंकि महज कुछ ही दिन पहले, 19 जुलाई को ओडेसा पोर्ट से रवाना हो रहे मालवाहक जहाज 'MV Golden Leo' पर हुए हमले में 4 भारतीय नाविकों की जान चली गई थी। उस घटना के बाद भारत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए वरिष्ठ रूसी राजनयिक को तलब किया था।</p>
<p><strong>विदेश मंत्रालय ने जारी की सख्त ट्रैवल एडवाइजरी</strong><br>
काला सागर में जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों में अब तक कम से कम 5 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस क्षेत्र में काम करने वाले सभी भारतीय नाविकों और मर्चेंट नेवी कर्मियों के लिए एक विस्तृत सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने चेतावनी देते हुए कहा कि अप्रैल महीने से काला सागर में कमर्शियल जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों में भारी इजाफा हुआ है। ऐसे जोखिम भरे समुद्री रास्तों से गुजरने वाले जहाजों को सतर्क रहने की जरूरत है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने नाविकों को सलाह दी है कि किसी भी शिपिंग कंपनी या रिक्रूटमेंट एजेंसी के साथ काम शुरू करने से पहले जहाज का रूट, रुकने वाले पोर्ट, बीमा कवर, सुरक्षा इंतजाम और इमरजेंसी रिस्पॉन्स की पूरी जानकारी हासिल कर लें।</p>
<p><strong>इमरजेंसी नंबर</strong><br>
काला सागर क्षेत्र में फंसे या किसी भी तरह की सहायता चाहने वाले भारतीय नाविक इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:<br>
    भारतीय दूतावास, मॉस्को (रूस): +7 9652773414<br>
    भारतीय दूतावास, कीव (यूक्रेन): +38 0933559958</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ईरान पर हमले रोकने का ट्रंप का आदेश, बातचीत से समाधान की कोशिश</title>
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<description><![CDATA[  वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सेना को ईरान में नए हमले न करने का निर्देश दिया है। द न्यूयॉर्क टाइम्स और एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को शीर्ष सलाहकारों और कैबिनेट सदस्यों के साथ बैठक के बाद ट्रंप ने यह फैसला लिया। लगातार 13 दिनों तक ईरान पर सैन्य हमले कराने के … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 17:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, पर, हमले, रोकने, का, ट्रंप, का, आदेश, बातचीत, से, समाधान, की, कोशिश</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> वाशिंगटन</strong><br>
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सेना को ईरान में नए हमले न करने का निर्देश दिया है। द न्यूयॉर्क टाइम्स और एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को शीर्ष सलाहकारों और कैबिनेट सदस्यों के साथ बैठक के बाद ट्रंप ने यह फैसला लिया।</p>
<p>लगातार 13 दिनों तक ईरान पर सैन्य हमले कराने के बाद ट्रंप ने शुक्रवार को नए हमलों पर रोक लगाने का निर्देश दिया। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वे व्यापक युद्ध के बजाय ईरान के साथ बातचीत के जरिए एक समझदारी भरा समझौता चाहते हैं।</p>
<p><strong>अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने दी चेतावनी</strong><br>
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि अगर अभियान और बढ़ाया गया तो मिडिल-ईस्ट में तैनात अमेरिकी सेना के पास पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों और अन्य एयर डिफेंस हथियारों का भंडार गंभीर रूप से कम हो सकता है।</p>
<p>ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने सलाह दी है कि ईरान के खिलाफ बड़े युद्ध अभियान फिर से शुरू करना संभव है, लेकिन इससे सेना के सेंट्रल कमांड के लिए उपलब्ध इंटरसेप्टर खतरनाक रूप से समाप्त हो जाएंगे, जिससे मिडिल-ईस्ट में तैनात अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।</p>
<p>एक्सियोस के अनुसार, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हमले रोकने का फैसला अस्थायी है या लंबे समय तक लागू रहेगा। हालांकि, यदि ट्रंप फिर से हमले शुरू करने का आदेश देते हैं, तो अमेरिकी सेना बहुत ही कम समय में अपनी तैयारियां पूरी कर हमला बोल सकती है।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी सेना अभी भी बड़े पैमाने पर सैन्य अभियानों में संभावित वापसी की योजनाएं तैयार कर रही है, लेकिन ट्रंप ने फिलहाल उस दिशा में आगे बढ़ने के आदेश नहीं दिए हैं। इस पूरे मामले पर जब व्हाइट हाउस से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।</p>
<p><strong>हमले रोकने का फैसला और ट्रंप का रुख</strong><br>
बताया जा रहा है कि शुक्रवार को भी अमेरिकी सेना ने राष्ट्रपति ट्रंप के सामने रोजाना की तरह हमले की योजना पेश की थी, लेकिन उन्होंने इसे मंजूरी नहीं दी। इसके बजाय, ट्रंप ने सेना को ईरान पर हमले न करने का निर्देश दिया।</p>
<p><strong>ईरान के साथ समझौता करना समझदारी</strong><br>
इस निर्देश के कुछ ही देर बाद ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनके पास हमले जारी रखने या उन्हें और तेज करने का विकल्प खुला है, जिसमें ईरान के पास मौजूद हर चीज को नष्ट करना भी शामिल है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी नजर में सबसे समझदारी वाली रणनीति ईरान के साथ समझौता करना है।</p>
<p>ट्रंप ने कहा, "हम इस समय ईरानियों से बात कर रहे हैं। मुझे लगता है कि जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, वे वार्ता को लेकर और गंभीर होते जा रहे हैं। हम सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, लेकिन फिलहाल हम उनसे बातचीत कर रहे हैं।"</p>
<p><strong>हाई अलर्ट पर था इजरायल</strong><br>
इस पूरे घटनाक्रम के बीच इजरायली अधिकारियों का कहना है कि शुक्रवार को अमेरिका द्वारा एक और दौर के हमलों की पूरी आशंका थी। इसको लेकर इजरायल ने अपनी तैयारियां कर ली थी और वो हाई अलर्ट पर थे, क्योंकि उन्हें डर था कि इसके जवाब में इजरायल पर भी हमला हो सकता है।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान&#45;अमेरिका युद्ध में खाड़ी देश उतरे मैदान में, पहली बार सीधा हमला</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली ईरान और अमेरिका में युद्ध के बीच पहली बार ऐसा हुआ है जब खाड़ी के कई देशों ने सीधा सैन्य हमला शुरू कर दिया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक बहरीन और कुवैत ईरान पर सीधे हमले कर रहे हैं। इन दोनों देशों ने सऊदी अरब की मदद से ईरान … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 16:45:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान-अमेरिका, युद्ध, में, खाड़ी, देश, उतरे, मैदान, में, पहली, बार, सीधा, हमला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
ईरान और अमेरिका में युद्ध के बीच पहली बार ऐसा हुआ है जब खाड़ी के कई देशों ने सीधा सैन्य हमला शुरू कर दिया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक बहरीन और कुवैत ईरान पर सीधे हमले कर रहे हैं। इन दोनों देशों ने सऊदी अरब की मदद से ईरान के मिसाइल स्टोरेज और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। सऊदी अरब उन्हें इंटेलिजेंस और डिफेंसिव एयर कवर देकर मदद कर रहा है। बता दें कि ईरान लंबे समय से उन देशों को निशाना बना रहा है जिनमें अमेरिका के बेस हैं।</p>
<p><strong>खाड़ी देश देने लगे ईरान को जवाब</strong><br>
इससे पहले खाड़ी के देश केवल आत्मरक्षा का प्रयास करते थे और ईरान की तरफ से छोड़ी गई मिसाइलों और ड्रोन को निष्ट कर देते थे। खाड़ी के देशों ने युद्ध बढ़ने की आशंका से कभी सीधे युद्ध में भाग नहीं लिया। हालांकि ईरान के लगातार हमलों को देखते हुए अब खाड़ी देशों ने भी युद्ध के लिए कमर कस ली है। फिलहाल दो देशों ने ही ईरान के खिलाफ अभियान शुरू किया है। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि ओमान और कतर जैसे देशों ने अभी हमले नहीं शुरू किए हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के खिलाफ यूएई के अभियान में सऊदी अरब भी शामिल था। वहीं बहरीन और कुवैत ने तो अपना मोर्चा ही खोल दिया है। दोनों की खाड़ी देशों पर हाल के दिनों में ईरान की तरफ से ताबड़तोड़ हमले किए गए हैं। ईरान खाड़ी देशों में अमेरिकी बेस और उनके सैन्य उपकरणों को निशाना बनाने की कोशिश करता है। वह बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में ज्यादा हमले करता है। इसके अलावा यूएई के कई शहरों में ईरान ने तबाही मचाने की कोशिश की। इन खाड़ी देशों में अकसर सायरन बजाए जाते हैं।</p>
<p><strong>कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमला</strong><br>
ईरान का कहना है कि कुवैत में उसने अमेरिकी ठिकानों, जैसे कि कैंप उडैरी, कैंप दोहा और कैंप आरिफजान पर हमला किया है। इसके अलावा अली अल सलेम एयरबेस को भी निशाना बनाया गया है। बहरीन के गृह वि भाग का कहना है कि शनिवार को भी देश में सायरन बजाए गए और लोगों से सुरक्षित जगहों पर ही रुकने को कहा गया है।</p>
<p>बता दें कि एक दिन पहले ही ईरान ने उत्तरी ईराक के एक शहर को भी निशाना बनाया है। ये घटनाएं अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के खिलाफ लगातार 13वीं रात हमले करने की घोषणा के कुछ घंटों बाद हुईं। गौरतलब है कि होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर ईरान और आमेरिका में तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। वहीं दुनियाभर में ऊर्जा संकट गहरा रहा है। यह जलडमरूमध्य दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक अहम मार्ग है और ताजा लड़ाई का केंद्र भी यही है। ईरानी हमलों से यह जलमार्ग बंद हो सकता है, जिससे दुनिया भर में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं और भारी आर्थिक उथल-पुथल मच सकती है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>नेपाल में भारतीय नोटों पर राहत, अब 200 और 500 रुपये करेंसी की अनुमति</title>
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<description><![CDATA[ काठमांडू नेपाल ने भारतीय करेंसी के आने-जाने पर लगी पाबंदियों में ढील दी है। अब भारतीय और नेपाली नागरिक 9 नवंबर 2016 के बाद जारी किए गए 200 और 500 रुपये के भारतीय नोट अपने साथ ले जा सकते हैं। नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) के मुताबिक, इन नोटों को प्रति व्यक्ति 25,000 रुपये की सीमा … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 16:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>नेपाल, में, भारतीय, नोटों, पर, राहत, अब, 200, और, 500, रुपये, करेंसी, की, अनुमति</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>काठमांडू</strong><br>
नेपाल ने भारतीय करेंसी के आने-जाने पर लगी पाबंदियों में ढील दी है। अब भारतीय और नेपाली नागरिक 9 नवंबर 2016 के बाद जारी किए गए 200 और 500 रुपये के भारतीय नोट अपने साथ ले जा सकते हैं।</p>
<p>नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) के मुताबिक, इन नोटों को प्रति व्यक्ति 25,000 रुपये की सीमा तक नेपाल में लाया या ले जाया जा सकता है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, नए नियमों के तहत दोनों देशों के नागरिक मौजूदा नियमों का पालन करते हुए मंजूर किए गए करेंसी नोट नेपाल ला सकते हैं।</p>
<p><strong>नोटबंदी के पहले जारी किए नोट रहेंगे प्रतिबंधित</strong><br>
एनआरबी ने अपनी ताजा सूचना में साफ किया है कि 2016 में नोटबंदी से पहले जारी किए गए पुराने भारतीय करेंसी नोट नेपाल में प्रतिबंधित रहेंगे। एनआरबी ने यह भी कहा कि नई व्यवस्था के तहत सिर्फ 9 नवंबर 2016 के बाद जारी किए गए नए डिजाइन वाले 500 रुपये और 200 रुपये के भारतीय नोटों को ही मंजूरी दी जाएगी।</p>
<p>केंद्रीय बैंक ने शुरू में 11 फरवरी को नेपाल राजपत्र (गजट) में यह प्रावधान प्रकाशित किया था। हालांकि, गुरुवार को उसने एक और सूचना जारी करके इसके लागू होने की प्रक्रिया को साफ किया और सीमा पार करेंसी के लेन-देन से जुड़ी चिंताओं को दूर किया।</p>
<p><strong>किन लोगों को होगी इजाजत</strong><br>
एनआरबी के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल ने कहा कि नेपाली नागरिकों को भारत के अलावा किसी अन्य देश से नेपाल में भारतीय करेंसी लाने की इजाजत नहीं होगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि नेपाली नागरिकों द्वारा नेपाल से बाहर ले जाई जाने वाली भारतीय करेंसी को सिर्फ भारत ही ले जाया जा सकेगा, किसी तीसरे देश नहीं।</p>
<p>पौडेल ने कहा कि इस नए प्रावधान से नेपाल आने वाले भारतीय पर्यटकों और भारत के साथ व्यापार और कारोबार करने वाले नेपाली नागरिकों को आसानी होगी। यह नियम बदलाव उन पाबंदियों के बाद हुआ है जो 8 नवंबर 2016 को भारत में नोटबंदी की घोषणा के बाद लगाई गई थीं, जब 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट चलन से हटा दिए गए थे।</p>
<p>भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और पर्यटकों का मुख्य स्रोत बना हुआ है, जबकि हजारों नेपाली नागरिक काम, शिक्षा और व्यापार के लिए भारत आते-जाते हैं। एनआरबी ने यह भी बताया कि नेपाली नागरिक और विदेशी पर्यटक बिना कस्टम्स डिक्लेरेशन भरे 5,000 डॉलर तक की विदेशी मुद्रा या दूसरी मुद्राओं में इसके बराबर की रकम नेपाल ला सकते हैं। इस सीमा से ज्यादा रकम होने पर नेपाल पहुंचने पर उसकी जानकारी देनी होगी।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने कार्यकाल पूरा होने से पहले दिया इस्तीफा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने कार्यकाल के खत्म होने से दो साल पहले ही शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। वह अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के पूर्व सहयोगी थे। कुछ वक्त पहले ऐसी खबरें आई थीं कि शहाबुद्दीन ने शेख हसीना को फोन किया था। इसको लेकर काफी ज्यादा बवाल मचा था। … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 13:45:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>बांग्लादेश, के, राष्ट्रपति, मोहम्मद, शहाबुद्दीन, ने, कार्यकाल, पूरा, होने, से, पहले, दिया, इस्तीफा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने कार्यकाल के खत्म होने से दो साल पहले ही शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। वह अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के पूर्व सहयोगी थे। कुछ वक्त पहले ऐसी खबरें आई थीं कि शहाबुद्दीन ने शेख हसीना को फोन किया था। इसको लेकर काफी ज्यादा बवाल मचा था। बता दें कि बांग्लादेश की वर्तमान बीएनपी सरकार के मुखिया तारिक रहमान और शेख हसीना के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। ऐसे में प्रधानमंत्री रहमान को यह बात काफी नागवार गुजरी थी। बता दें कि शेख हसीना ने कुछ दिन पहले ही बांग्लादेश वापसी की बात कही थी।</p>
<p>‘द डेली स्टार’ अखबार के अनुसार, 76 वर्षीय नेता ने अपने इस्तीफे की वजह के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहाकि मैं स्वास्थ्य संबंधी कई दिक्कतों से जूझ रहा हूं। राष्ट्रपति भवन ‘बंगभवन’ के एक प्रवक्ता ने बताया कि शहाबुद्दीन के प्रतिनिधि उनका त्यागपत्र लेकर संसद के लिए निकल चुके हैं। त्यागपत्र संसद के अध्यक्ष हफीजुद्दीन अहमद को सौंपा जाएगा, जो बांग्लादेश के संविधान के अनुसार नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर काम करेंगे।</p>
<p><strong>हसीना सरकार के समय से पद पर थे</strong><br>
प्रवक्ता ने कहाकि जब तक संसद के अध्यक्ष को त्यागपत्र नहीं मिल जाता, मैं इस्तीफे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं कर सकता। साल 1971 के मुक्ति संग्राम में भूमिका निभाने वाले और निचली अदालत के न्यायाधीश रहे शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में पांच साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी। उन्हें देश की पिछली संसद ने सर्वोच्च पद के लिए चुना था और वह एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे, जो जुलाई-अगस्त 2024 में छात्रों के हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद भी अपने संवैधानिक पद पर बने हुए थे। इन विरोध-प्रदर्शनों के बाद हसीना की अवामी लीग सरकार गिर गई थी। हसीना भारत चली गई थीं और पांच अगस्त 2024 से वहीं रह रही हैं।</p>
<p><strong>लंदन में इलाज के दौरान क्या हुआ था</strong><br>
बताया जाता है कि इसी साल मई में राष्ट्रपति शहाबु्द्दीन इलाज के लिए लंदन गए थे। इसी दौरान उन्होंने निर्वासित प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ संपर्क करने की कोशिश की थी। इसके बाद काफी ज्यादा बवाल मचा था। बताया जा रहा है कि यह मामला सामने आने के बाद ही बांग्लादेश के राष्ट्रपति पर दबाव बढ़ने लगा था। गुरुवार को एक बैठक के दौरान उन्होंने पद छोड़ने की बात कही थी। बता दें कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना बांग्लादेश में हुए आंदोलन के बाद से ही देश छोड़ चुकी हैं। वह भारत भारत में रह चुकी हैं। हालांकि उन्होंने हाल ही में कहा था कि वह इसी साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी।</p>
<p><strong>पहले भी हुई थी हटाने की मांग</strong><br>
पांच अगस्त 2024 को हुए राजनीतिक तख्तापलट के बाद भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन में और समेत कई राजनीतिक दलों ने उन्हें पद से हटाने की मांग की थी। हालांकि, उस समय अंतरिम सरकार ने संवैधानिक कारणों का हवाला देते हुए उन्हें नहीं हटाया था और बाद में यह मुद्दा शांत हो गया था।</p>
<p>12 फरवरी को हुए राष्ट्रीय संसदीय चुनावों में बंगलादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की जीत और सरकार गठन के बाद राष्ट्रपति बदलने की चर्चाएं एक बार फिर शुरू हो गई थीं। हालांकि बीएनपी नेताओं ने मार्च में कहा था कि राष्ट्रपति का कार्यकाल बाकी होने के कारण पार्टी के भीतर इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है, लेकिन इसके चार महीने बाद शहाबुद्दीन के इस्तीफे की खबर सामने आ गई।</p>]]> </content:encoded>
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<title>यूरोप में कुदरत का कहर: फ्रांस और स्पेन में भीषण जंगल की आग, 2 लाख से अधिक लोग पलायन को मजबूर</title>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 09:45:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पेरिस </strong></p>
<p>यूरोप इस समय कुदरत के भीषण और खौफनाक रूप का सामना कर रहा है. फ्रांस के दक्षिण-पश्चिमी इलाकों और स्पेन के मध्य भागों में जंगलों की आग इतनी बेकाबू हो चुकी है कि अब तक 2 लाख से ज्यादा लोगों को अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर भागना पड़ा है। आलम यह है कि फ्रांस के तटीय इलाकों में जान बचाने के लिए लोगों को नावों और वॉटर टैक्सियों के जरिए समुद्र के रास्ते निकलना पड़ रहा है. भीषण गर्मी, तेज हवाओं और लगातार बढ़ रहे तापमान ने इस आग को इतना खतरनाक बना दिया है कि दोनों देशों के दमकलकर्मी भी बेबस नजर आ रहे हैं। </p>
<p><strong>फ्रांस में बोर्डो शहर की ओर बढ़ रही है आग</strong><br>
फ्रांस के गिरोंड और लैंडेस विभागों में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है. फ्रांसीसी गृह मंत्रालय के अनुसार, अकेले इन इलाकों से लगभग 1,41,000 लोगों को निकाला गया है. आर्चचोन और कैप फेरेट प्रायद्वीप के पास से करीब 1,500 लोगों को छोटी वॉटर टैक्सियों और बड़ी नावों के जरिए रेस्क्यू करके सुरक्षित निकाला गया। </p>
<p>फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने चेतावनी दी है कि हवा की दिशा बदलने के कारण यह आग अब और विशाल रूप ले चुकी है और सीधे बोर्डो महानगर की तरफ बढ़ रही है. आग अब तक 140 वर्ग किलोमीटर के इलाके को अपनी चपेट में ले चुकी है. इस दौरान दर्जनों दमकलकर्मी झुलसकर घायल हुए हैं. हालात की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री से क्राइसिस रेस्पॉन्स यूनिट को सक्रिय करने और सेना को मैदान में उतारने का निर्देश दिया है। </p>
<p>फ्रांसीसी अधिकारियों ने सैकड़ों दमकलकर्मियों को तैनात किया, साथ ही आग पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त जमीनी और हवाई संसाधन भी भेजे गए। तट के किनारे दक्षिण में लगी एक दूसरी भीषण आग भी बेकाबू रही, तेज हवाओं के कारण आग बुझाने के अभियान में और भी मुश्किलें आ रही थीं। फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज़ ने बताया कि गिरोंडे विभाग से 40,000 लोगों को और लैंडेस विभाग से 23,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।</p>
<p>आग की भयावहता के कारण फ्रांस और स्पेन दोनों के अग्निशमन संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा था, इसलिए उन्होंने यूरोपीय संघ के अन्य सदस्य देशों से सहायता का अनुरोध किया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने कहा कि देश को कई यूरोपीय देशों से अतिरिक्त सहायता मिलेगी, जिनमें क्रोएशिया और पुर्तगाल से अग्निशमन विमान, साथ ही चेक गणराज्य और स्लोवाकिया से भारी-भरकम हेलीकॉप्टर शामिल हैं। स्पेन को इटली और ग्रीस से जल-वर्षा करने वाले विमान भी मिलने वाले थे।</p>
<p> </p>
<p><strong>स्पेन में पहली बार राष्ट्रीय आपातकाल</strong><br>
उधर स्पेन में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि सरकार को इतिहास में पहली बार जंगलों की आग के लिए 'राष्ट्रीय आपातकाल' घोषित करना पड़ा है. राजधानी मैड्रिड और पास के आविला प्रांत से करीब 60,000 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है. इसके अलावा 20,000 लोगों को अपने-अपने घरों के भीतर ही रहने के निर्देश दिए गए हैं। </p>
<p>मैड्रिड के करीब दो अलग-अलग आग आपस में मिलकर एक विशाल दावानल बन चुकी हैं, जिसने 30 वर्ग किलोमीटर के इलाके को भस्म कर दिया है. इसे मैड्रिड के इतिहास की सबसे भयावह आग बताया जा रहा है. अधिकारियों की सबसे बड़ी चिंता 16वीं शताब्दी के ऐतिहासिक महल और मठ 'एस्कॉरियल' को बचाने की है। </p>
<p><strong>कैसे भड़की यह भीषण आग?</strong><br>
बताया जा रहा है कि दोनों देशों में यह आग 39 डिग्री सेल्सियस से अधिक के रिकॉर्ड तापमान और भीषण गर्मी के कारण तेजी से फैली है. फ्रांस में आग लगने का कारण दुर्घटनात्मक माना जा रहा है, जबकि स्पेन के आविला में एक शख्स को प्रतिबंधित क्षेत्र में भारी मशीनरी चलाने के आरोप में हिरासत में लिया गया है. माना जा रहा है कि इस मशीन से निकली चिंगारी ने जंगल में आग लगने का काम किया है। </p>
<p>जलवायु परिवर्तन के अलावा, ग्रामीण इलाकों में खेती का कम होना भी एक बड़ा कारण है. पहले खेत आबादी और जंगलों के बीच एक बफर जोन का काम करते थे, लेकिन अब झाड़ियां और पेड़ सीधे लोगों के मकानों तक पहुंच चुके हैं. ऐसे में आग सीधे बस्तियों में दाखिल हो रही है। </p>
<p><strong>यूरोपीय संघ से मांगी गई मदद</strong><br>
आग के विकराल रूप को देखते हुए फ्रांस और स्पेन ने यूरोपीय संघ से मदद मांगी है. फ्रांस को क्रोएशिया, पुर्तगाल, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य से अग्निशामक विमान और भारी-भरकम ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर मिल रहे हैं. वहीं, स्पेन की मदद के लिए इटली और ग्रीस ने अपने विशेष कैनडेयर विमान भेजे हैं. स्पेन की सेना के 1,000 से अधिक जवान भी जमीनी स्तर पर आग पर काबू पाने में जुटे हुए हैं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान के खिलाफ खाड़ी देशों का बड़ा मोर्चा! बहरीन और कुवैत के सीक्रेट हमलों से बढ़ा तनाव</title>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 22:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, के, खिलाफ, खाड़ी, देशों, का, बड़ा, मोर्चा, बहरीन, और, कुवैत, के, सीक्रेट, हमलों, से, बढ़ा, तनाव</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तेहरान </strong></p>
<p>2026 के ईरान युद्ध में एक नया मोड़ आया है. बहरीन और कुवैत ने सीक्रेट रूप से अपने जेट विमानों को ईरान के अंदर भेजकर सैन्य ठिकानों पर हमले किए. यह खाड़ी देशों की तरफ से ईरान के खिलाफ पहली सामने से जवाबी कार्रवाई मानी जा रही है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इन हमलों में खुफिया जानकारी मुहैया कराई और एयर कवर दिया. यह घटना दिखाती है कि लंबे युद्ध ने अरब देशों को कितनी मुश्किल स्थिति में डाल दिया है। </p>
<p>पहले वे अप्रत्यक्ष रूप से शामिल थे, लेकिन अब उन्हें सीधे ईरान का सामना करना पड़ रहा है. यह हमले इस महीने की शुरुआत में हुए. इनमें ड्रोन और मिसाइल स्टोरेज डिपो समेत कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. यह अरब देशों की नई रणनीति का संकेत है। </p>
<p>ईरान के साथ युद्ध लंबा खिंचने के कारण खाड़ी देश चिंतित हैं. ईरान ने पहले बहरीन और कुवैत पर ड्रोन-मिसाइल हमले किए थे. इन हमलों में अमेरिकी ठिकानों और तेल सुविधाओं को निशाना बनाया गया. अब बहरीन और कुवैत ने जवाब दिया. लोगों के अनुसार, हमले सीक्रेट रूप से किए गए। </p>
<p>बहरीन और कुवैत के जेट विमानों ने ईरान के अंदर घुसकर ड्रोन और मिसाइल रखने वाले गोदामों तथा अन्य सैन्य स्थानों पर बमबारी की. UAE ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई – उसने टारगेट की जानकारी दी और हमलावर विमानों को सुरक्षा कवर प्रदान किया. यह UAE की तरफ से युद्ध की शुरुआत में किए गए हमलों के बाद एक बार फिर सक्रिय भूमिका है। </p>
<p>यह घटना अरब देशों के बीच सहयोग की नई शुरुआत लग रही है. पहले प्रत्येक देश अलग-अलग अमेरिका का साथ देता था, लेकिन अब वे ईरान के खिलाफ मिलकर काम कर रहे हैं। </p>
<p><strong>अरब देशों की मजबूरी और बदलती रणनीति</strong><br>
खाड़ी देश लंबे समय से ईरान से खतरा महसूस करते रहे हैं. ईरान समर्थित मिलिशिया, हूती विद्रोही और सीधे हमले उनके तेल निर्यात, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं. 2026 का युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने खाड़ी देशों को भी निशाना बनाया. बहरीन में अमेरिकी नौसेना ठिकाने हैं. कुवैत में बड़े सैन्य बेस हैं. UAE भी अमेरिका का प्रमुख सहयोगी है। </p>
<p>अब अरब देशों ने सोचा है कि चुप रहने से काम नहीं चलेगा. अगर वे ईरान को जवाब नहीं देते, तो ईरान और आक्रामक होता जाएगा. बहरीन-कुवैत के हमले इसी सोच का नतीजा हैं. यह अरब रेकनिंग कहा जा रहा है. यानी अरब देश अब युद्ध की वास्तविकता को समझकर सक्रिय हो रहे हैं। </p>
<p>UAE का सहयोग महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके पास बेहतर खुफिया तंत्र और एयर फोर्स है. इससे भविष्य में अरब देशों का एक अनौपचारिक गठबंधन बन सकता है, जो ईरान का मुकाबला करे. हमलों में मुख्य रूप से ईरान के ड्रोन और मिसाइल भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया गया। </p>
<p>ये केंद्र ईरान की हमलावर क्षमता के लिए जरूरी हैं. इन्हें नष्ट करने से ईरान की खाड़ी देशों पर हमले की क्षमता कम हो सकती है. हालांकि हमले सीमित थे, लेकिन उनका संदेश साफ है – खाड़ी देश अब चुप नहीं बैठेंगे. ईरान ने इन हमलों की निंदा की है. जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है. इससे युद्ध और बढ़ सकता है। </p>
<p>विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे हमले ईरान की आर्थिक और सैन्य क्षमता पर दबाव डालते हैं. ईरान पहले से ही अमेरिका-इजराइल हमलों से जूझ रहा है. अब अगर खाड़ी देश भी शामिल हो गए, तो ईरान चारों तरफ से घिर जाएगा। </p>
<p><strong>क्षेत्रीय सहयोग और भविष्य की चुनौतियां</strong><br>
यह घटना खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों के बीच बढ़ते समन्वय को दिखाती है. सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और कुवैत ईरान के विस्तारवाद से चिंतित हैं. युद्ध लंबा चलने से उनका तेल व्यापार प्रभावित हो रहा है, शिपिंग रूट असुरक्षित हो गए हैं और पर्यटन व निवेश पर असर पड़ रहा है। </p>
<p>UAE द्वारा खुफिया सहयोग और एयर कवर देना बडिंग अरब कॉपोरेशन का उदाहरण है. भविष्य में संयुक्त अभियान या साझा एयर डिफेंस सिस्टम बन सकते हैं. लेकिन चुनौतियां भी हैं – ईरान प्रॉक्सी के जरिए जवाब दे सकता है, जैसे इराक या यमन से हमले। </p>
<p>अमेरिका इन देशों का समर्थन कर रहा है, लेकिन खाड़ी देश अब खुद को मजबूत दिखाना चाहते हैं. वे नहीं चाहते कि युद्ध उनके देशों में फैल जाए. पहले मुख्य लड़ाई ईरान बनाम अमेरिका-इजरायल थी, अब अरब देश सीधे शामिल हो गए हैं. इससे ईरान पर दबाव बढ़ेगा, लेकिन क्षेत्रीय अस्थिरता भी बढ़ सकती है। </p>
<p>अरब देशों की यह कार्रवाई दिखाती है कि वे लंबे युद्ध के लिए तैयार हो रहे हैं. वे ईरान को कमजोर करने के लिए हर रास्ता आजमा रहे हैं. हालांकि, पूरी तरह से जंग से बचने की कोशिश भी जारी है, क्योंकि इससे पूरा खाड़ी क्षेत्र तबाह हो सकता है। </p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसे हमले जारी रहे, तो ईरान को बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. लेकिन फिलहाल दोनों पक्ष आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान पर नई जंग की चेतावनी के बीच ट्रंप को एक्सपर्ट की नसीहत, बोले&#45; ‘अमेरिका का हाल वियतनाम जैसा हो सकता है’</title>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन मिडिल ईस्ट में शांति की कोई किरण नजर नहीं आ रही है. उल्टा हालात दिन-प्रतिदिन बदतर होते जा रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सबसे खतरनाक और बड़े हमले की खुली धमकी दे दी है. उन्होंने कहा है कि अगर ईरान गंभीर वार्ता नहीं करता तो अमेरिका पूरे दम के साथ … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 09:45:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, पर, नई, जंग, की, चेतावनी, के, बीच, ट्रंप, को, एक्सपर्ट, की, नसीहत, बोले-, ‘अमेरिका, का, हाल, वियतनाम, जैसा, हो, सकता, है’</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन</strong><br>
मिडिल ईस्ट में शांति की कोई किरण नजर नहीं आ रही है. उल्टा हालात दिन-प्रतिदिन बदतर होते जा रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सबसे खतरनाक और बड़े हमले की खुली धमकी दे दी है. उन्होंने कहा है कि अगर ईरान गंभीर वार्ता नहीं करता तो अमेरिका पूरे दम के साथ हमला कर सकता है। </p>
<p>यह धमकी ऐसे समय आई है जब जून में हुआ सीजफायर पहले ही टूट चुका है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया है. दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग को लेकर ईरान की धमकियों ने पूरा ग्लोबल इकोनॉमी को हिला दिया है। </p>
<p>ट्रंप ने Axios को दिए इंटरव्यू में साफ कहा कि ईरान पर अभी तक पर्याप्त दबाव नहीं बना है. अमेरिकी सेना लगातार कई रातों से ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले कर रही है. इजरायल भी तैयार खड़ा है, हालांकि ट्रंप का कहना है कि फिलहाल उसे जरूरत नहीं पड़ेगी. तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं, जो पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। </p>
<p>ईरान पहले ही साफ कर चुका है कि उस पर दोबारा हमला हुआ तो वह सिर्फ अपने इलाके तक जवाब सीमित नहीं रखेगा. हाल के दिनों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों में कई अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं. वहीं, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा भी अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। </p>
<p><strong>पश्चिम एशिया में फैल जाएगी ईरान की जंग</strong><br>
डेविड हर्स्ट का मानना है कि अमेरिका की सबसे बड़ी मुश्किल सिर्फ ईरान की सेना नहीं, बल्कि उसका 'असममित युद्ध' का मॉडल है. यानी ईरान ने खाड़ी के कई मुल्कों में शिया समूह स्थापित कर रखे हैं जिसे वो हथियार मुहैया कराता है. सस्ते ड्रोन, मिसाइलें और समुद्री मार्गों पर दबाव बनाकर ईरान अपेक्षाकृत कम लागत में अमेरिका और उसके सहयोगियों को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है. यही वजह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर जैसे अहम समुद्री रास्ते लगातार वैश्विक चिंता का कारण बने हुए हैं। </p>
<p>अगर यह जंग और बढ़ती है तो असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा. तेल की कीमतों, वैश्विक शिपिंग और दुनिया की सप्लाई चेन पर इसका सीधा असर पड़ सकता है. कई जहाज पहले ही अपने रूट बदल चुके हैं, जबकि ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ने लगी है। </p>
<p>दूसरी तरफ, अमेरिका के भीतर भी इस युद्ध को लेकर समर्थन पहले जैसा नहीं दिख रहा. हालिया सर्वे बताते हैं कि बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक इस संघर्ष को लंबा खींचने के पक्ष में नहीं हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चला और अमेरिकी सैनिकों की मौत का आंकड़ा बढ़ा, तो इसका असर ट्रंप की घरेलू राजनीति पर भी पड़ सकता है। </p>
<p><strong>अमेरिका का कैसे होगा वियतनाम जैसा हाल?</strong><br>
इसी संदर्भ में विशेषज्ञ वियतनाम युद्ध का उदाहरण देते हैं. उनका कहना है कि अमेरिका ने वियतनाम में भी शुरुआत में अपनी सैन्य ताकत पर भरोसा किया था, लेकिन धीरे-धीरे वह एक लंबे और महंगे युद्ध में फंस गया. आखिरकार सैन्य शक्ति के बावजूद उसे पीछे हटना पड़ा. विशेषज्ञों का तर्क है कि ईरान में भी ऐसा ही खतरा मौजूद है, क्योंकि यहां सिर्फ बमबारी से हालात नहीं बदलेंगे। </p>
<p>यही वजह है कि कई रणनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर ट्रंप सैन्य दबाव के साथ-साथ कूटनीतिक रास्ते को पूरी तरह छोड़ देते हैं और जमीनी युद्ध की ओर बढ़ते हैं, तो यह संघर्ष अमेरिका के लिए महंगा, लंबा और राजनीतिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकता है. उनके मुताबिक, ईरान के साथ टकराव जितना आसान दिखाई देता है, असल में उतना ही मुश्किल और उलझा हुआ है। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने दिया इस्तीफा, शेख हसीना को फोन कॉल के बाद ढाका में मचा था सियासी बवाल</title>
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<description><![CDATA[ ढाका  बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 50(3) के तहत राष्ट्रपति स्पीकर को संबोधित एक हस्ताक्षरित पत्र सौंपकर इस्तीफ़ा दे सकते हैं. मोहम्मद शहाबुद्दीन  तब विवादों में आ गए थे जब उन्होंने कुछ दिन पहले लंदन यात्रा के दौरान उन्होंने शेख हसीना के … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 18:45:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>बांग्लादेश, के, राष्ट्रपति, ने, दिया, इस्तीफा, शेख, हसीना, को, फोन, कॉल, के, बाद, ढाका, में, मचा, था, सियासी, बवाल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ढाका </strong><br>
बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 50(3) के तहत राष्ट्रपति स्पीकर को संबोधित एक हस्ताक्षरित पत्र सौंपकर इस्तीफ़ा दे सकते हैं. मोहम्मद शहाबुद्दीन  तब विवादों में आ गए थे जब उन्होंने कुछ दिन पहले लंदन यात्रा के दौरान उन्होंने शेख हसीना के साथ संपर्क साधने की कोशिश की थी. बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद शेख हसीना भारत में रह रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार मई में सेहत कारणों की वजह से लंदन गए राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शेख हसीना से बात करने की कोशिश की थी.  इसके बाद उनकी राजनीतिक निष्ठा को लेकर बांग्लादेश की राजनीति में सवाल उठने खड़े हो गए थे। </p>
<p>बांग्लादेश में अभी BNP की सरकार है और पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान वहां के प्रधानमंत्री हैं. शेख हसीना और तारिक रहमान बांग्लादेश के कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंदी हैं। </p>
<p>हाल ही में शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने की घोषणा की है. सत्ता परिवर्तन के दौरान ढाका छोड़कर भारत आईं शेख हसीना ने कहा था कि वे दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटेंगी। </p>
<p>पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक हलकों में राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफ़े की संभावना को लेकर अटकलें तेज़ हो गई थीं। </p>
<p>गुरुवार को जानकारी रखने वाले सूत्रों ने संकेत दिया कि वे पद छोड़ने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो गए थे. मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने यह भी दावा किया कि बंगभवन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान राष्ट्रपति ने पद छोड़ने की तैयारी करने की बात कही थी। </p>
<p>मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अवामी लीग सरकार के कार्यकाल के दौरान 24 अप्रैल 2023 को बांग्लादेश के 22वें राष्ट्रपति के रूप में पांच साल के संवैधानिक कार्यकाल के लिए पद संभाला था. उनका कार्यकाल अप्रैल 2028 में समाप्त होने वाला था, लेकिन उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा होने से लगभग दो साल पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>पार्टी के बाद होटल रूम में सऊदी प्रिंस की मौत, ब्रिटिश कोर्ट के खुलासे में शराब के नशे की बात सामने आई</title>
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<description><![CDATA[ दुबई  सऊदी अरब के 29 वर्षीय प्रिंस अब्दुल्ला बिन फहद बिन अब्दुलअजीज बिन जलावी अल सऊद की मौत को लेकर ब्रिटेन की कोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. जांच में पता चला कि लंदन के एक लग्जरी होटल में उनकी मौत ड्रग्स, शराब और डॉक्टर की लिखी दवाओं के खतरनाक मिश्रण की वजह से हुई … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 18:45:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>पार्टी, के, बाद, होटल, रूम, में, सऊदी, प्रिंस, की, मौत, ब्रिटिश, कोर्ट, के, खुलासे, में, शराब, के, नशे, की, बात, सामने, आई</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दुबई </strong></p>
<p>सऊदी अरब के 29 वर्षीय प्रिंस अब्दुल्ला बिन फहद बिन अब्दुलअजीज बिन जलावी अल सऊद की मौत को लेकर ब्रिटेन की कोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. जांच में पता चला कि लंदन के एक लग्जरी होटल में उनकी मौत ड्रग्स, शराब और डॉक्टर की लिखी दवाओं के खतरनाक मिश्रण की वजह से हुई थी. कोर्ट ने साफ कहा कि यह आत्महत्या या किसी साजिश का मामला नहीं, बल्कि दुर्घटना थी। </p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंस अब्दुल्ला 19 नवंबर को लंदन के केंसिंग्टन स्थित मैरियट होटल में ठहरे थे. वह करीब एक हफ्ते तक वहीं रहे. 24 नवंबर की रात उन्हें आखिरी बार होटल के CCTV में सिगरेट पीने के लिए बाहर जाते हुए देखा गया था। </p>
<p>अगली सुबह होटल के एक कर्मचारी ने उन्हें कमरे के बाथरूम में बेहोश पाया. तुरंत मेडिकल टीम को बुलाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके और मौके पर ही मृत घोषित कर दिया। </p>
<p><strong>कार्डियक अरेस्ट से हुई थी प्रिंस की मौत</strong><br>
कोर्ट में पेश टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट में बताया गया कि उनके शरीर में शराब की मात्रा इंग्लैंड में ड्रिंक एंड ड्राइव की कानूनी सीमा से करीब तीन गुना ज्यादा थी. इसके अलावा GHB नाम की पार्टी ड्रग, गांजा और एंटी-एंग्जायटी दवाओं के अंश भी मिले. डॉक्टरों के मुताबिक, इन सभी चीजों के एक साथ असर से उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया, जिससे उनकी मौत हो गई। </p>
<p><strong>शराब की लत से जूझ रहे थे प्रिंस अब्दुल्ला</strong><br>
सुनवाई में यह भी सामने आया कि प्रिंस अब्दुल्ला पहले से शराब और कुछ दवाओं की लत से जूझ रहे थे. साल 2025 में उन्होंने लंदन और ब्रिटेन के दूसरे पुनर्वास केंद्रों में इलाज भी कराया था. डॉक्टरों ने बताया कि इलाज के दौरान उन्होंने अच्छा सहयोग किया, लेकिन बाद में कुछ फॉलो-अप अपॉइंटमेंट में नहीं पहुंचे। </p>
<p>असिस्टेंट कोरोनर जीन हार्किन ने कहा कि जांच में आत्महत्या या किसी और की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला. न कोई सुसाइड नोट मिला और न ही CCTV फुटेज में किसी संदिग्ध व्यक्ति की मौजूदगी दिखी. इसी आधार पर कोर्ट ने इसे कई तरह के नशे और दवाओं के सेवन से हुई दुर्घटनावश मौत माना। </p>]]> </content:encoded>
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<title>नस्लभेद के सवाल पर एलन मस्क ने गिनाए भारत से रिश्ते, पत्नी को बताया ‘हाफ इंडियन’</title>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन नस्लभेदी बयानों को लेकर विवादों में घिरे एलन मस्क ने इन आरोपो को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पत्नी &#039;हाफ इंडियन हैं।&#039; दुनिया के सबसे अमीर शख्स ने कहा कि वह जिस तरह के लोगों को हायर करते हैं या फिर उनके परिवार को ही देख लिया जाए तो नस्लवाद का कोई सवाल … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 14:45:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन</strong></p>
<p>नस्लभेदी बयानों को लेकर विवादों में घिरे एलन मस्क ने इन आरोपो को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पत्नी 'हाफ इंडियन हैं।' दुनिया के सबसे अमीर शख्स ने कहा कि वह जिस तरह के लोगों को हायर करते हैं या फिर उनके परिवार को ही देख लिया जाए तो नस्लवाद का कोई सवाल ही खड़ा नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि अपने बेटे का नाम उन्होंने एक भारतीय भौतिकशास्त्री के नाम पर रखा है।</p>
<p>'द इकनॉमिस्ट' के ए़डिटर इन चीफ जैनी मिंटन बेडोस ने एलन मस्क से पूछा कि क्या वे नस्लवादी हैं। इसपर एलन मस्क ने कहा कि उनका पारिवारिक बैकग्राउंड और कंपनियों में कर्मचारियों की भर्ती इस बात की गवाही देती है कि उन्होंने नस्ल के हिसाब से कभी भेदभाव नहीं किया और वह नस्लवादी नहीं हैं। बता दें कि एलन मस्क अपनी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर इंटरनेट यूजर्स के निशाने पर हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में नस्ल, श्वेत होने और इमिग्रेशन का जिक्र किया था।</p>
<p><strong>किसके नाम पर रखा बेटे का नाम?</strong><br>
एलन मस्क ने कहा कि उनकी पत्नी हाफ इंडियन हैं। उन्होंने अपनी पार्टनर शिवोन जिलिस की बात की थी जिनका संबंध भारतीय मूल से है। मस्क और शिवोन से चार बच्चे हैं। हालांकि मस्क और शिवोन ने कभी शादी नहीं की है। शिवोन कनाडा में पली-बढ़ी हैं और उनकी मां भारतीय मूल की हैं। मस्क ने कहा कि उन्होंने अपने बेटे का नाम भारतीय नोबेल विजेता सुब्रमण्यम चंद्रशेखऱ के नाम पर ही रखा है। बता दें कि मस्क के बेटे का नाम स्ट्राइडर शेखऱ है। उन्होंने स्ट्राइडर नाम जेआरएर टॉकिन की किताब द लॉर्ड ऑफ रिंग्स के अरागॉर्न से लिया है।</p>
<p><strong>AI से खतरे से इनकार नहीं किया जा सकता</strong><br>
मस्क ने इस बातचीत में स्वीकार किया कि एआई से खतरे हैं और इसे खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि तकनीक ने जो गति पकड़ी है उसे रोकना अब आसान नहीं है। ऐसे में मानवता को इसके फायदों पर गौर करना चाहिए और इसके नकारात्मक इस्तेमाल से बचना चाहिए।</p>
<p>बता दें कि जनवरी महीने में एलन मस्क हर दिन एक ऐसी पोस्ट डालते थे जिसमें श्वेत नस्ल के खतरे की बात होती थी। वहीं दावोस के मंच से उन्होंने कहा था कि श्वेत लोग तेजी से कम हो रहे हैं। एलन मस्क से जब मुसलमानों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें किसी धर्म से कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा कि दिक्कत उन लोगों से है जो बाहर से आकर अपराध करते हैं और उनसे सामाजिक व्यवस्था बिगड़ती है। इसका संबंध किसी खास धर्म से नहीं लेकिन उन खास मानसिकता वाले लोगों से है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>निकारागुआ में अब नहीं होंगे चुनाव? राष्ट्रपति ओर्टेगा के फैसले से दुनिया में मचा बवाल</title>
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<description><![CDATA[ मानागुआ करीब दो दशक से सत्ता में काबिज निकारागुआ के राष्ट्रपति डेनियल ओर्टेगा ने एलान किया है कि देश में अब चुनाव नहीं होंगे. इस फैसले ने लोकतंत्र, मानवाधिकार और सत्ता के केंद्रीकरण को लेकर दुनिया भर में बहस छेड़ दी है. संयुक्त राष्ट्र संघ, अमेरिका और मानवाधिकार संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बड़ा … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 22:45:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>निकारागुआ, में, अब, नहीं, होंगे, चुनाव, राष्ट्रपति, ओर्टेगा, के, फैसले, से, दुनिया, में, मचा, बवाल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मानागुआ</strong></p>
<p>करीब दो दशक से सत्ता में काबिज निकारागुआ के राष्ट्रपति डेनियल ओर्टेगा ने एलान किया है कि देश में अब चुनाव नहीं होंगे. इस फैसले ने लोकतंत्र, मानवाधिकार और सत्ता के केंद्रीकरण को लेकर दुनिया भर में बहस छेड़ दी है. संयुक्त राष्ट्र संघ, अमेरिका और मानवाधिकार संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बड़ा हमला बताया है. आखिर ओर्टेगा ने ऐसा क्यों कहा, निकारागुआ में क्या हो रहा है और इसका असर क्या होगा? आइए समझते हैं। </p>
<p><strong>निकारागुआ में क्या हुआ?</strong><br>
मध्य अमेरिकी देश निकारागुआ के राष्ट्रपति डेनियल ओर्टेगा ने साफ शब्दों में कहा कि अब उनके देश में चुनाव नहीं कराए जाएंगे. उन्होंने कहा कि अमेरिका समर्थित दलों को दोबारा सत्ता में आने का मौका नहीं दिया जाएगा. इस बयान के साथ ही नवंबर 2027 में प्रस्तावित अगले राष्ट्रपति चुनाव पर लगभग विराम लग गया। </p>
<p><strong>कौन हैं डेनियल ओर्टेगा?</strong><br>
डेनियल ओर्टेगा निकारागुआ की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा रहे हैं. पहली बार 1979 की सैंडिनिस्टा क्रांति के बाद सत्ता में आए. 1985 से 1990 तक राष्ट्रपति रहे. 2007 में दोबारा सत्ता में लौटे और तब से लगातार राष्ट्रपति बने हुए हैं. साल 2025 में उन्होंने संविधान में बदलाव कर अपनी पत्नी रोसारियो मुरिलो को संयुक्त राष्ट्रपति बना दिया. आज सरकार, संसद, न्यायपालिका, सेना और प्रशासन सभी पर उनके परिवार को मजबूत नियंत्रण माना जाता है। </p>
<p><strong>आखिर चुनाव खत्म करने की जरूरत क्यों पड़ी?</strong><br>
ओर्टेगा का कहना है कि चुनाव का इस्तेमाल अमेरिका समर्थित ताकतें सरकार बदलने के लिए करती रही हैं. उनका दावा है कि विदेशी दखल रोकने और देश की क्रांति को बचाने के लिए यह कदम जरूरी है. लेकिन विपक्ष और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का कहना है कि असली वजह यह है कि ओर्टेगा सत्ता में हमेशा बने रहना चाहते हैं। </p>
<p><strong>क्या निकारागुआ पहले भी लोकतांत्रिक चुनाव कराता था?</strong><br>
तकनीकी रूप से कहा जा सकता है कि हां निकारागुआ में अब तक लोकतांत्रिक चुनाव हुआ करते थे लेकिन बीते कई वर्षों से नतीजों की <strong>निष्पक्षता पर सवाल उठते रहे हैं। </strong></p>
<p>चुनावों को लेकर सबसे बड़ा विवाद 2021 में हुआ था, तब मतदान से पहले कई विपक्षी नेताओं और राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवारों को गिरफ्तार कर लिया गया था। </p>
<p>इसके बाद ओर्टेगा ने चुनाव जीता, लेकिन अमेरिका, यूरोपीय देशों और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इस चुनाव को स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं माना। </p>
<p>ओर्टेगा ने 2021 के चुनाव में खुद को विजेता घोषित किया जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने बड़े पैमाने पर अवैध माना. ओर्टेगा ने तब उन सभी उम्मीदवारों को जेल में डाल दिया था जो उन्हें हरा सकते थे. अमेरिका आज ओर्टेगा के राष्ट्रपति पद को मान्यता नहीं देता है। </p>
<p><strong>पूर्व चुनाव प्रत्याशी ने क्या कहा? </strong><br>
2021 के चुनाव में प्रत्याशी रहे सेबेस्टियन चमोरा कहते हैं कि चुनाव न कराने की ताजा घोषणा ओर्टेगा की उस लंबे समय से चली आ रही योजना को उजागर करती है जिसके तहत वे चीन और क्यूबा जैसे एक-दलीय शासन वाले देशों की तरह सैंडिनिस्टा पार्टी के हाथों में सत्ता केंद्रित करना चाहते हैं. चमोरा 200 से अधिक अन्य राजनीतिक कैदियों के साथ 2023 में अमेरिका भेजे जाने तक जेल में थे। </p>
<p><strong>2018 के प्रदर्शन क्यों अहम हैं?</strong><br>
2021 से पहले 2018 में निकारागुआ में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे. सरकारी कार्रवाई में 300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई. इसके बाद सरकार ने विपक्ष, पत्रकारों, चर्च, सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी. हजारों लोग देश छोड़कर भाग गए और हजारों संगठनों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया। </p>
<p><strong>अभी देश में क्या स्थिति है?</strong><br>
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, कम से कम 46 राजनीतिक कैदी अभी भी जेल में हैं. 5,000 से ज्यादा गैर-सरकारी संगठनों को बंद किया जा चुका है. कई पत्रकार और विपक्षी नेता निर्वासन में रह रहे हैं. हाल ही में बड़ी संख्या में वकीलों के लाइसेंस भी रद्द कर दिए गए. हालांकि, सरकार इन सभी आरोपों से इनकार करती रही है। </p>
<p><strong>संयुक्त राष्ट्र ने क्या कहा?</strong><br>
संयुक्त राष्ट्र संघ ने निकारागुआ के राष्ट्रपति डेनियल ऑर्टेगा के भविष्य में चुनाव न कराने की घोषणा पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। </p>
<p>संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टुर्क ने कहा, "हर नागरिक को चुनाव लड़ने और वोट देने का अधिकार होना चाहिए. निकारागुआ में राजनीतिक और नागरिक अधिकार लगातार कमजोर हो रहे हैं. सरकार को राजनीतिक कैदियों को रिहा करना चाहिए। </p>
<p>यूएन का यह भी कहना है कि निकारागुआ में अभिव्यक्ति की आजादी की गुंजाइश लगभग खत्म हो चुकी है। </p>
<p><strong>अमेरिका की प्रतिक्रिया क्या रही?</strong><br>
अमेरिका पहले से ही ओर्टेगा को बतौर राष्ट्रपति मान्यता नहीं देता है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो उनके इस घोषणा पर निकारागुआ पर दबाव बढ़ाने की बात कही है। </p>
<p>अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने कहा, "ओर्टेगा सरकार ने लोकतंत्र का दिखावा भी छोड़ दिया है. दुनिया को निकारागुआ को सामान्य लोकतांत्रिक देश की तरह नहीं देखना चाहिए. दूसरे देशों को भी निकारागुआ पर दबाव बढ़ाना चाहिए। </p>
<p><strong>विपक्ष क्यों चिंतित है?</strong><br>
विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनाव खत्म होने का मतलब है कि अब सत्ता बदलने का संवैधानिक रास्ता लगभग बंद हो गया है. उनका आरोप है कि सरकार निकारागुआ को चीन और क्यूबा जैसी एक-दलीय राजनीतिक व्यवस्था की ओर ले जा रही है। </p>
<p><strong>क्या निकारागुआ में सचमुच चुनाव नहीं होंगे?</strong><br>
फिलहाल राष्ट्रपति ओर्टेगा ने सार्वजनिक रूप से यही घोषणा की है. हालांकि इस फैसले को लागू करने के लिए कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया क्या होगी, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है. लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार के पास संसद और सरकारी संस्थानों पर पूरा नियंत्रण होने के कारण इस फैसले को लागू करना उसके लिए मुश्किल नहीं होगा। </p>
<p><strong>दुनिया को इसकी चिंता क्यों करनी चाहिए?</strong><br>
किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव सत्ता परिवर्तन का सबसे शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीका होते हैं. अगर चुनाव ही खत्म कर दिए जाएं तो जनता के पास सरकार बदलने का लोकतांत्रिक अधिकार खत्म हो जाता है. सत्ता एक ही व्यक्ति या दल के हाथों में लंबे समय तक रहने से मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर और दबाव बढ़ सकता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश की लोकतांत्रिक साख कमजोर हो सकती है। </p>
<p>फिलहाल ऐसे कोई संकेत नहीं हैं कि ओर्टेगा सरकार अपने फैसले से पीछे हटेगी। </p>
<p>अब दुनिया की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या निकारागुआ औपचारिक रूप से चुनावी व्यवस्था खत्म करता है, अंतरराष्ट्रीय दबाव कितना बढ़ता है और विपक्ष के लिए लोकतांत्रिक राजनीति की कितनी गुंजाइश बचती है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान की 9/11 जैसी हमले की धमकी से बढ़ा तनाव, होर्मुज संकट पर ट्रंप की कड़ी प्रतिक्रिया</title>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन/ तेहरान  अमेरिका और ईरान के बीच धमकियों का दौर रुक नहीं रहा है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद किए जाने से आगबबूला हो गए हैं, वहीं अमेरिका के लगातार हमलों के बाद ईरान भी बौखला गया है। इस बीच अब ईरान ने अमेरिका को बड़ी धमकी … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 19:45:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, की, 911, जैसी, हमले, की, धमकी, से, बढ़ा, तनाव, होर्मुज, संकट, पर, ट्रंप, की, कड़ी, प्रतिक्रिया</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन/ तेहरान </strong></p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच धमकियों का दौर रुक नहीं रहा है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद किए जाने से आगबबूला हो गए हैं, वहीं अमेरिका के लगातार हमलों के बाद ईरान भी बौखला गया है। इस बीच अब ईरान ने अमेरिका को बड़ी धमकी दे दी है। ईरान ने कहा है कि अमेरिका ने अगर जल्द ही अपने हमले नहीं रोके तो उस पर 9/11 जैसा होगा। इस धमकी के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तबाही की आशंका गहरा गई है।</p>
<p>इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले की चेतावनी दी थी। इसके कुछ घंटों बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने डरावनी धमकी दे डाली। IRGC ने अमेरिका को 9/11 जैसे हमले की धमकी देते हुए कहा कि अगर यह युद्ध जारी रहा तो अमेरिका में राष्ट्रीय शोक की स्थिति पैद कर जाएगी। ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम के मुताबिक IRGC ने अपने बयान में कहा, “अगर युद्ध जारी रहा तो हम ऐसे ऑपरेशन चलाएंगे, अमेरिका पछताएगा… अमेरिका में राष्ट्रीय शोक की नौबत आ जाएगी।”</p>
<p><strong>9/11 को मची थी तबाही</strong><br>
बता दें कि अमेरिका में आखिरी बार 9/11 के हमलों के बाद ही राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई थी। 11 सितंबर 2001 को हुआ यह हमला अमेरिकी इतिहास का सबसे भयानक आतंकवादी हमला था। आतंकवादियों ने अमेरिकी यात्रियों से भरे 4 विमानों को हाइजैक कर लिया था। इनमें से 2 विमानों को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर्स से टकरा दिया गया। इससे 110-मंजिला इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। वहीं तीसरा विमान वर्जीनिया स्थित अमेरिकी रक्षा मंत्रालय से और चौथा विमान पेन्सिल्वेनिया के एक खेत में क्रैश हो गया। इस हमले में करीब 3000 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग घायल हुए।</p>
<p><strong>ट्रंप की चेतावनी</strong><br>
इधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बौखलाए हुए हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान होर्मुज में किसी भी जहाज पर हमला करता है, तो अमेरिका ईरान के किसी भी पुल और पावर प्लांट पर बमबारी करेगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, “अब इसके बाद अगर ईरान ने होर्मुज में किसी भी जहाज पर हमला किया, चाहे वह मिसाइल से हो, रॉकेट से, ड्रोन से या दूसरे किसी हथियार से, तो अमेरिका ब्रिज या पावर प्लांट को बम से तबाह कर देगा। तेहरान के पास स्थित इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया जाएगा।”</p>
<p>अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक किसी भी संभावित युद्धविराम के लिए अमेरिका की पहली शर्त यह है कि ईरान वाणिज्यिक जहाजों पर हमले बंद करे और होर्मुज पर सामान्य रूप से आवाजाही होने दे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक ईरान ने पिछले 3 महीनों में 30 से अधिक जहाजों पर हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान ने जून में हुए युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया है और जहाजों पर लगातार हमले किए हैं।</p>
<p><strong>लगातार हमले कर रहा अमेरिका</strong><br>
अब अमेरिका ने ईरान पर बीते 2 सप्ताह से लगातार बमबारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका लगातार 12 दिनों से दक्षिणी ईरान में कई पुलों को निशाना बना चुका है। अमेरिका ने ईरान के अंडरग्राउंड न्यूक्लियर ठिकानों को निशाना बनाने की भी धमकी दी है। ट्रंप ने एक बयान में कहा था कि अमेरिका बहुत जल्द ईरान के बेहद सुरक्षित 'पिकैक्स माउंटेन' परमाणु ठिकाने को निशाना बनाएगा। इसके जवाब में ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि अगर अमेरिकी सेना ऐसा कोई कदम उठाती है, तो ईरान इसे क्षेत्र में युद्ध का विस्तार मानेगा। इसके साथ ही ईरान ने चेतावनी दी कि वह अमेरिका और उसके सहयोगियों को और बड़े हमले करेगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान जंग के बाद पाकिस्तान की नई चाल! अमेरिका से 10 अरब डॉलर की मांग, मची हलचल</title>
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<description><![CDATA[ इस्लामाबाद पाकिस्तान कभी किसी का यूं ही भला नहीं चाहता. वह हर काम अपने फायदे के लिए करता है. ईरान-अमेरिका युद्ध में भी उसने अपने फायदे के लिए बीच-बचाव किया. अब इसकी कीमत वह वसूलना चाहता है. ईरान-अमेरिका जंग में मीडिएटर बनकर पाकिस्तान असल में दलाली कर रहा है. उसके रोल पर सबको पहले से … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 11:45:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, जंग, के, बाद, पाकिस्तान, की, नई, चाल, अमेरिका, से, अरब, डॉलर, की, मांग, मची, हलचल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इस्लामाबाद</strong></p>
<p>पाकिस्तान कभी किसी का यूं ही भला नहीं चाहता. वह हर काम अपने फायदे के लिए करता है. ईरान-अमेरिका युद्ध में भी उसने अपने फायदे के लिए बीच-बचाव किया. अब इसकी कीमत वह वसूलना चाहता है. ईरान-अमेरिका जंग में मीडिएटर बनकर पाकिस्तान असल में दलाली कर रहा है. उसके रोल पर सबको पहले से आशंका थी. पूरी दुनिया सोच रही थी कि आखिर आतंकवाद का जनक पाकिस्तान युद्ध खत्म करने में क्यों जुटा है? आखिर वह अमेरिका की जी हुजूरी क्यों कर रहा है, आखिर उसे ईरान के बीच मध्यस्थता की इतनी बेताबी क्यों है? आखिर इसके पीछे उसकी मंशा क्या है? अब इसके पीछे की असल वजह सामने आ गई है. जी हां, पाकिस्तान सच में दलाली ही कर रहा था. दरअसल, पाकिस्तान ने अमेरिका से 10 अरब डॉलर की मुद्रा सहायता यानी करेंसी सपोर्ट फैसिलिटी की मांग की है। </p>
<p>समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध में मध्यस्थता की भूमिका निभाने के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका से 10 अरब डॉलर की करेंसी सपोर्ट सुविधा मांगी है. सूत्र ने बताया कि इससे उसके विदेशी मुद्रा भंडार यानी फॉरेक्स रिजर्व को मजबूत करने और आर्थिक तंगी से जूझ रही अर्थव्यवस्था को राहत देने में मदद मिल सकती है। </p>
<p><strong>क्यों अहम है पाकिस्तान की यह मांग</strong><br>
पाक की ओर से यह मांग ऐसे समय में की गई है जब ईरान युद्ध से जुड़े बातचीत के प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका से उसकी कूटनीतिक स्थिति मजबूत हुई है. ईरान-अमेरिका युद्ध में अपने मध्यस्थ वाले रोल की वजह से इस्लामाबाद को उम्मीद है कि वह अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से आर्थिक लाभ हासिल कर सकता है। </p>
<p>सूत्र के अनुसार, पाकिस्तान ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय विनिमय स्थिरीकरण सहायता सुविधा (Bilateral Exchange Stabilisation Support Facility) शुरू करने का अनुरोध किया है. यह सुविधा अधिकतम पांच साल की अवधि के लिए होगी। </p>
<p><strong>पाकिस्तान की डिमांड का क्या मकसद</strong><br>
    इस सुविधा का मकसद विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये को सहारा देना है. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी होगी. इससे पाकिस्तानी रुपये पर दबाव कम होगा और देश की बहुपक्षीय संस्थाओं से मिलने वाली आर्थिक मदद पर निर्भरता भी घट सकती है. साथ ही, पाकिस्तान आईएमएफ यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष कार्यक्रम के तहत राजकोषीय और मौद्रिक सुधार भी लागू करता रहेगा। </p>
<p>    फिलहाल, पाकिस्तान आईएमएफ के 7 अरब डॉलर के कार्यक्रम के तहत काम कर रहा है. इसके लिए उसे टैक्स बढ़ाने, सरकारी खर्च पर नियंत्रण रखने और कई अन्य आर्थिक सुधार लागू करने पड़े हैं. इन फैसलों की राजनीतिक कीमत भी सरकार को चुकानी पड़ी है। </p>
<p>    अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से मिलने वाली एक्सचेंज स्टेबिलाइजेशन फैसिलिटी बहुत कम देशों को दी जाती है. इसके तहत डॉलर, करेंसी स्वैप या गारंटी जैसी सहायता देकर किसी देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत किया जाता है और उसकी मुद्रा को स्थिर रखने में मदद मिलती है. यह अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा कुछ बड़े केंद्रीय बैंकों के साथ किए जाने वाले स्थायी डॉलर स्वैप समझौतों से अलग व्यवस्था है। </p>
<p><strong>पहले भी आईएमएफ की मदद से टला डिफॉल्ट</strong><br>
साल 2023 में पाकिस्तान ने आईएमएफ से 3 अरब डॉलर का स्टैंडबाय पैकेज हासिल कर संभावित डिफॉल्ट टाल दिया था. इसके बाद उसे 7 अरब डॉलर की एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF) भी मिली. इसके अलावा जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की क्षमता बढ़ाने के लिए 1.3 अरब डॉलर का अलग कर्ज भी मिला. हालांकि, पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी चीन और सऊदी अरब जैसे देशों से मिलने वाली आधिकारिक फंडिंग, रोलओवर और जमा राशि पर काफी हद तक निर्भर है। </p>
<p><strong>अमेरिका के साथ आर्थिक रिश्ते मजबूत करना चाहता है पाकिस्तान</strong><br>
अमेरिका से इस मदद की मांग ऐसे समय में की गई है जब पाकिस्तान, वॉशिंगटन के साथ अपने आर्थिक संबंध और मजबूत करना चाहता है. अगर यह मुद्रा सहायता सुविधा मिलती है तो यह पाकिस्तान के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच के साथ-साथ एक मजबूत राजनीतिक संकेत भी होगी. इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा और आईएमएफ की किस्तों तथा आपातकालीन आर्थिक मदद पर निर्भरता घट सकती है। </p>
<p>हालांकि, पाकिस्तान के आर्थिक सुधारों से अर्थव्यवस्था में कुछ स्थिरता आई है, लेकिन इसके लिए लोगों पर ज्यादा टैक्स लगाए गए हैं, सरकारी खर्च में कटौती की गई है और विकास व कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च की गुंजाइश सीमित हुई है. इस तरह देखा जाए तो आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ अब तक अमेरिका की जी हुजूरी में क्यों लगे थे, इसका सबूत मिल गया है. अब समझ आ गया है कि आखिर पाकिस्तान काफी समय से अमेरिका की गुलामी क्यों क रहा था। </p>]]> </content:encoded>
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<title>‘मैं नेतन्याहू को गिरफ्तार नहीं कर सकता’, मेयर ममदानी का बड़ा बयान, बदले सुर</title>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 14:00:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>‘मैं, नेतन्याहू, को, गिरफ्तार, नहीं, कर, सकता’, मेयर, ममदानी, का, बड़ा, बयान, बदले, सुर</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन</strong><br>
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने माना कि वो बेंजामिन नेतन्याहू को गिरफ्तार नहीं कर सकते. इससे पहले उन्होंने इसके लिए कानूनी सलाह लेने की बात कही थी. अब ममदानी ने कहा कि न्यू यॉर्क, इजरायल के बेंजामिन नेतन्याहू के लिए दुनिया की शीर्ष युद्ध-अपराध अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट को लागू नहीं कर पाएगा, लेकिन उन्होंने केंद्रीय सरकार से ऐसा करने की गुजारिश की। </p>
<p>इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू सितंबर 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सेशन में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क जाने वाले हैं। वीडियो में ममदानी ने इजरायली प्रधानमंत्री को 'युद्ध अपराधी' बताया और कहा कि न्यूयॉर्क शहर में उनका स्वागत नहीं है। </p>
<p>न्यू यॉर्क मेयर ने X पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा, 'यह साफ है कि हमारे पास इस वारंट को लागू करने का स्वतंत्र कानूनी अधिकार नहीं है.' उन्होंने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) का जिक्र करते हुए कहा, 'हालांकि, केंद्र सरकार के पास यह अधिकार है और मैं उनसे ICC में शामिल होने और इस वारंट को लागू करने का आह्वान करता हूं। </p>
<p>ममदानी ने इस महीने की शुरुआत में न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया था कि वह और शहर का कानूनी विभाग इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि अगर नेतन्याहू सितंबर में UN महासभा के लिए न्यूयॉर्क शहर आते हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जाए या नहीं। </p>
<p>राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया पोस्ट में नेतन्याहू से कहा कि 'संयुक्त राज्य अमेरिका में रहने के दौरान उन्हें किसी भी तरह से गिरफ्तार नहीं किया जाएगा.' पोस्ट में ममदानी का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया गया था। </p>
<p>ममदानी ने पिछले साल अपने मेयर चुनाव अभियान के दौरान कहा था कि वह गाजा युद्ध में नेतन्याहू की भूमिका को लेकर आपराधिक अदालत के वारंट के तहत शहर की पुलिस को उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश देने की कोशिश करेंगे। </p>
<p>मंगलवार को अपने वीडियो संदेश में, ममदानी ने कहा कि उनके प्रशासन ने सभी उपलब्ध विकल्पों की समीक्षा की है और यह तय किया है कि शहर गिरफ्तारी वारंट को लागू नहीं कर सकता। </p>
<p>दुनिया की शीर्ष युद्ध-अपराध अदालत (ICC) ने 2024 में नेतन्याहू और अन्य लोगों के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किए, जिसमें उन पर गाजा युद्ध के संबंध में मानवता के खिलाफ अपराधों का आरोप लगाया गया। </p>
<p>ICC ने माना था कि नेतन्याहू और इजरायल के पूर्व रक्षा मंत्री योव गैलेंट ने मानवीय सहायता को रोककर 'युद्ध के तरीके के रूप में भुखमरी' का इस्तेमाल किया है और गाजा में हमास के खिलाफ इजरायल के अभियान में जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाया है – इन आरोपों से इजरायली अधिकारी इनकार करते हैं। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>लाल सागर में हूतियों की नाकेबंदी से बढ़ा संकट, सऊदी ही नहीं एशिया को भी लग सकता है बड़ा झटका</title>
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<description><![CDATA[ दुबई  अभी होर्मुज में तनाव बढ़ ही रहा है, हर रोज तेल जहाजों पर मिसाइल हमले हो रहे हैं, अमेरिका और ईरान दोनों ने नाकेबंदी कर रखी है. दुनिया फिर से तेल संकट की ओर मुंह बाए खड़ी है. ऐसे में यमन में बैठे ईरान के सहयोगी हूती ने एक ऐसा ऐलान कर दिया है … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 10:45:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>लाल, सागर, में, हूतियों, की, नाकेबंदी, से, बढ़ा, संकट, सऊदी, ही, नहीं, एशिया, को, भी, लग, सकता, है, बड़ा, झटका</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दुबई </strong></p>
<p>अभी होर्मुज में तनाव बढ़ ही रहा है, हर रोज तेल जहाजों पर मिसाइल हमले हो रहे हैं, अमेरिका और ईरान दोनों ने नाकेबंदी कर रखी है. दुनिया फिर से तेल संकट की ओर मुंह बाए खड़ी है. ऐसे में यमन में बैठे ईरान के सहयोगी हूती ने एक ऐसा ऐलान कर दिया है कि पूरा ग्लोबल तेल मार्केट डर गया है. हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊद अरब के जहाजों की घेराबंदी करके युद्ध का दायरा बढ़ाने की धमकी दी. हूती के लड़ाके वही करने की धमकी दे रहे हैं जो वह पहले कर चुके हैं- वे सऊदी जहाजों को लाल सागर के दक्षिणी एंट्री प्वाइंट, बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से नहीं गुजरने देंगे. हूती सऊदी की नब्ज दबाने को तैयार हैं लेकिन बड़ा झटका एशिया को लग सकता है. चलिए सब समझाते हैं। <br>
 <br>
<strong>होर्मुज बंद और ऐसे में सऊदी की नब्ज है बाब अल-मंदेब</strong><br>
बाब अल-मंदेब लाल सागर का प्रवेश द्वार यानी एंट्री गेट है. यहां से दुनिया का लगभग 12% व्यापार होता है. दुनिया का एक-चौथाई कंटेनर व्यापार इसी 32-किलोमीटर चौड़े समुद्री रास्ते से होकर स्वेज नहर तक जाता है. हूती विद्रोहियों ने यहां पहले भी जहाजों की आवाजाही में बाधा डालने की अपनी क्षमता दिखाई है. गाजा में इजरायल-हमास युद्ध के दौरान उन्होंने महीनों तक जहाजों को निशाना बनाया और 100 से ज्यादा जहाजों पर हमले किए थे। </p>
<p>अमेरिका के टेक्सास स्थित रिस्टैड एनर्जी के अनुसार अगर हूती लाल सागर में नाकेबंदी कर देते हैं तो अब सऊदी का रोजाना का लगभग 25 लाख बैरल तेल का व्यापार खतरे में पड़ सकता है. बाब अल-मंदेब से आवाजाही में रुकावट आने पर शिपिंग कंपनियों को अपने जहाज दक्षिण अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते भेजने पड़ते हैं, जिससे लागत काफी बढ़ जाती है. अमेरिकी सरकार पहले भी कह चुकी है कि केप ऑफ गुड होप के रास्ते जाने से सऊदी अरब से अमेरिका तक की यात्रा में लगभग 4,345 किलोमीटर की दूरी बढ़ जाएगी। </p>
<p>सऊदी अरब के लिए इस नौसैनिक नाकेबंदी का मतलब है कि वे अब पूर्वी एशिया को तेल निर्यात करने के लिए बाब अल-मंदेब का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. इसका सऊदी अरब की सालाना तेल आय पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा. इसका मतलब यह भी है कि कोई भी देश या शिपिंग कंपनी सऊदी अरब को निर्यात नहीं कर पाएगी. अगर वे निर्यात करने की कोशिश करते हैं या बाब अल-मंदेब के जरिए सऊदी अरब के साथ व्यापार करने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें बाब अल-मंदेब पर ही रोक दिया जाएगा और वापस भेज दिया जाएगा. अगर किसी ने नाकेबंदी को तोड़ते हुए गुजरने की कोशिश की तो हूती उन जहाजों पर हमला कर देगा। </p>
<p><strong>सबसे बड़ा झटका एशिया को क्यों लगेगा?</strong><br>
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर नियर ईस्ट पॉलिसी के सीनियर फेलो नोआम रायदान ने कहा कि अगर हूती विद्रोही लाल सागर में सऊदी अरब की समुद्री नाकेबंदी करते हैं, तो एशिया को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है. सऊदी अरब ने लाल सागर के यानबू बंदरगाह पर टैंकरों में जो कच्चा तेल और उससे जुड़े फ्यूल भरे हैं, उनमें से ज्यादातर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से होते हुए भारत, सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन की रिफाइनरियों तक भेजे गए हैं। </p>
<p>रायदान ने कहा कि हूती नाकेबंदी की स्थिति में सऊदी अरब को अपने शिपमेंट का रास्ता बदलकर स्वेज नहर और दक्षिणी अफ्रीका के रास्ते भेजना होगा. रायदान ने कहा कि इससे ट्रांसपोर्टेशन की लागत पर और दबाव पड़ेगा खासकर एशियाई बाजार के लिए। </p>]]> </content:encoded>
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<title>ब्रिटेन के पहले AI मंत्री बने कनिष्क नारायण, कैबिनेट में मिली बड़ी जिम्मेदारी</title>
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<description><![CDATA[ लंदन  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI इतना आगे बढ़ चुका है कि अब इसके लिए खास मंत्री रखना पड़ रहा है. सरकारों की प्राथमिकता भी एआई बन चुका है. ब्रिटेन ने एक बड़ा कदम उठाया है। ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने भारतीय मूल के सांसद कनिष्क नारायण को AI मंत्री के तौर पर कैबिनेट में … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 18:45:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ब्रिटेन, के, पहले, मंत्री, बने, कनिष्क, नारायण, कैबिनेट, में, मिली, बड़ी, जिम्मेदारी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लंदन </strong></p>
<p>आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI इतना आगे बढ़ चुका है कि अब इसके लिए खास मंत्री रखना पड़ रहा है. सरकारों की प्राथमिकता भी एआई बन चुका है. ब्रिटेन ने एक बड़ा कदम उठाया है। ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने भारतीय मूल के सांसद कनिष्क नारायण को AI मंत्री के तौर पर कैबिनेट में शामिल किया है. यह पहली बार है जब ब्रिटेन में AI मंत्री को प्रधानमंत्री की कैबिनेट में जगह मिली है। </p>
<p>कनिष्क नारायण पहले भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑनलाइन सेफ्टी से जुड़े मंत्री थे, लेकिन अब उनका रोल और बड़ा हो गया है. नई सरकार में उन्हें सीधे कैबिनेट स्तर पर काम करने का मौका मिलेगा. इसका मतलब है कि AI से जुड़े बड़े फैसलों में अब उनका ही रोल होगा। </p>
<p>कनिष्क नारायण भारतीय मूल के लेबर पार्टी के नेता हैं. उनका परिवार भारत से जुड़ा है, जबकि उनका राजनीतिक सफर ब्रिटेन में रहा है. वह साल 2024 में वेल्स के वेल ऑफ ग्लेमॉर्गन से सांसद चुने गए थे. सितंबर 2025 में उन्हें AI और ऑनलाइन सेफ्टी मंत्री बनाया गया था. अब प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने उन्हें कैबिनेट में प्रमोट कर नई जिम्मेदारी दी है। </p>
<p>नई सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है. डिपार्टमेंट ऑफ साइंस, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी (DSIT) को खत्म कर उसे बिजनेस एंड ट्रेड डिपार्टमेंट में मिला दिया गया है. हालांकि AI से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी कनिष्क नारायण के पास ही रहेगी. सरकार का कहना है कि इससे AI और बिजनेस से जुड़े फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे।  </p>
<p>ब्रिटेन पिछले कुछ सालों से खुद को AI हब बनाने की कोशिश कर रहा है. यहां Google DeepMind जैसी बड़ी AI कंपनियां मौजूद हैं. सरकार AI स्टार्टअप, रिसर्च और डेटा सेंटर में निवेश बढ़ा रही है. AI ग्रोथ जोन्स और सॉवरेन AI फंट जैसे प्रोजेक्ट्स भी इसी स्ट्रैटिजी का हिस्सा हैं। </p>
<p>हालांकि नई सरकार के कुछ फैसलों पर सवाल भी उठ रहे हैं. खासकर DSIT को दूसरे विभाग में मिलाने के फैसले की कई टेक एक्सपर्ट्स ने आलोचना की है. उनका कहना है कि AI और टेक्नोलॉजी के लिए अलग विभाग होना चाहिए. इसके बावजूद सरकार का दावा है कि AI उसकी सबसे बड़ी प्रायॉरिटी में रहेगा और कनिष्क नारायण इस एजेंडे को आगे बढ़ाएंगे। </p>
<p>AI को लेकर दुनिया में अमेरिका, चीन और यूरोप के बीच तेजी से कंपटीशन बढ़ रहा है. ऐसे समय में ब्रिटेन का AI मंत्री को कैबिनेट स्तर पर लाना एक बड़ा डेवेलपमेंट है. आने वाले समय में इस तरह के और भी अनाउंसमेंट्स दूसरे देशों में भी हो सकते हैं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>ट्रंप का टैरिफ बम! कनाडा पर 50% आयात शुल्क का ऐलान, व्यापारिक तनाव बढ़ा</title>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने फिर से टैरिफ का बम फोड़ डाला है. इस बार उन्‍होंने कनाडा की वस्‍तुओं पर टैरिफ लगाया है. सोमवार को शराब, ऑटोमोबाइल और डेयरी प्रोडक्ट्स के सेक्‍टर में &#039;भेदभाव&#039; का हवाला देते हुए कुछ कनाडाई वस्‍तुओं पर 50 फीसदी का नया टैरिफ लगाने का आदेश पर साइन कर दिया … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 17:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ट्रंप, का, टैरिफ, बम, कनाडा, पर, 50, आयात, शुल्क, का, ऐलान, व्यापारिक, तनाव, बढ़ा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन</strong></p>
<p>अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने फिर से टैरिफ का बम फोड़ डाला है. इस बार उन्‍होंने कनाडा की वस्‍तुओं पर टैरिफ लगाया है. सोमवार को शराब, ऑटोमोबाइल और डेयरी प्रोडक्ट्स के सेक्‍टर में 'भेदभाव' का हवाला देते हुए कुछ कनाडाई वस्‍तुओं पर 50 फीसदी का नया टैरिफ लगाने का आदेश पर साइन कर दिया है। </p>
<p>व्हाइट हाउस के अनुसार, ये शुल्क 30 दिनों में लागू हो जाएंगे. इसमें यह भी कहा गया है कि हालांकि एनर्जी, पोटाश और सेक्‍टर स्‍पेशल टैरिफ से प्रभावित कुछ आयातों को छूट दी गई है, लेकिन नए टैरिफ अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा व्यापार समझौते के तहत देश में प्रवेश करने वाले सामानों पर भी लागू होंगे। </p>
<p>ट्रंप द्वारा सोमवार को साइन तीन घोषणाओं के अनुसार, प्रभावित कनाडाई वस्तुओं में रेफ्रिजरेशन जैसे बिजली के उपकरण से लेकर मशीनरी तक शामिल हैं. व्‍हाइट हाउस के एक बयान में कहा गया है कि राष्‍ट्रपति ट्रंप कनाडा द्वारा अमेरिका के साथ लगातार किए जा रहे भेदभाव और अनुचित एवं असमान व्‍यवहार के लिए उसे जवाबदेह ठहराने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं, जिससे अमेरिका पर बोझ पड़ा है और उन्‍हें नुकसान हुआ है। </p>
<p><strong>किस कानून के तहत लगाया जा रहा ये टैरिफ? </strong><br>
ट्रंप ने 1930 के टैरिफ अधिनियम की धारा 338 का हवाला दिया, जो एक ऐसा कानून है जो राष्ट्रपति को किसी देश द्वारा अमेरिकी वस्तुओं के साथ भेदभाव करने के संदेह में कांग्रेस की मंजूरी के बिना वस्तुओं पर 50% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देता है। </p>
<p><strong>कनाडा पर क्‍यों लगाया टैरिफ? </strong><br>
पिछले हफ्ते ट्रंप ने कनाडा में लगी भीषण आग से हाल के दिनों में अमेरिकियों को हुए नुकसान के लिए कनाडा को सबक सिखाने के लिए कनाड़ा के सामानों पर हाई टैरिफ लगाने की धमकी दी थी. हालांकि, सोमवार को एक विशेष प्रशासनिक अधिकारी ने पत्रकारों को बतया कि यह कार्रवाई इससे संबंधित नहीं है. सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार अधिकारी ने कहा कि राष्‍ट्रपति के पास इस संबंध में अन्‍य विकल्‍प भी हैं। </p>
<p>गौरतलब है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप द्वारा कई देशों पर टैरिफ लगाया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी टैरिफ को गैर कानूनी बता दिया था और रिफंड जारी करने का आदेश दिया था, लेकिन फिर से कनाड़ा पर टैरिफ लगाकर ट्रंप ने एक नया डर पैदा कर दिया है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>अफगानिस्तान ने बदला रास्ता, पाकिस्तान को अरबों डॉलर के व्यापार का झटका</title>
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<description><![CDATA[ काबुल  दिन हो या रात, पाकिस्तान एक ही सपना देखता है कि कैसे भारत को बर्बाद किया जाए। उसका यह सपना आज तक सपना ही है, लेकिन भारत के दोस्त ने पाकिस्तान को बर्बाद करना शुरू कर दिया है। दरअसल, पाकिस्तान के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका देते हुए अफगानिस्तान ने अपने ट्रांजिट व्यापार को … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 22:45:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>अफगानिस्तान, ने, बदला, रास्ता, पाकिस्तान, को, अरबों, डॉलर, के, व्यापार, का, झटका</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>काबुल </strong><br>
दिन हो या रात, पाकिस्तान एक ही सपना देखता है कि कैसे भारत को बर्बाद किया जाए। उसका यह सपना आज तक सपना ही है, लेकिन भारत के दोस्त ने पाकिस्तान को बर्बाद करना शुरू कर दिया है। दरअसल, पाकिस्तान के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका देते हुए अफगानिस्तान ने अपने ट्रांजिट व्यापार को पाकिस्तानी मार्गों से तेजी से दूर कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान-पाकिस्तान ट्रांजिट ट्रेड पिछले वित्तीय वर्ष में तेज गिरावट के साथ मात्र 367 मिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया, जबकि वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 5 बिलियन डॉलर तक पहुंचा हुआ था।</p>
<p><strong>रिपोर्ट में क्या है?</strong><br>
डॉन अखबार ने रविवार को प्रकाशित अपनी विस्तृत रिपोर्ट में बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 (FY-26) में दोनों देशों के बीच ट्रांजिट व्यापार मात्र 11,592 कंटेनर तक सिमट गया। यह हाल के वर्षों में दर्ज की गई सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यह गिरावट अक्टूबर 2025 में पाकिस्तान द्वारा सुरक्षा कारणों से अफगानिस्तान के साथ सीमा बंद किए जाने से पहले ही शुरू हो चुकी थी।</p>
<p>दरअसल, तालिबान के सत्ता में लौटने से ठीक पहले का समय दोनों देशों के ट्रांजिट व्यापार के लिए स्वर्णिम रहा। वित्तीय वर्ष 2017 (FY-17) में ट्रांजिट ट्रैफिक लगभग 60500 कंटेनर था, जो FY-21 में बढ़कर करीब 89000 कंटेनर हो गया। इस दौरान व्यापार मूल्य लगभग 5 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। बता दें कि यह बढ़ोतरी पाकिस्तान और अशरफ गनी सरकार के बीच तनावपूर्ण राजनीतिक संबंधों के बावजूद हुई थी।</p>
<p>काबुल ने उस समय पाकिस्तानी बंदरगाहों (कराची और ग्वादर) को अपने अंतरराष्ट्रीय व्यापार का मुख्य रास्ता बनाए रखा। अफगान आयातकों को इन बंदरगाहों का उपयोग करने से नहीं रोका गया, ताकि कम परिवहन लागत पर सामान लाया जा सके और मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित किया जा सके। तालिबान के सत्ता संभालने के बाद भी शुरुआती दौर में ट्रेड में सुधार देखा गया। FY-23 में कंटेनर ट्रैफिक बढ़कर 1,02,886 तक पहुंच गया और कार्गो का कुल मूल्य 6.7 बिलियन डॉलर हो गया। लेकिन इसके बाद अचानक गिरावट शुरू हुई। FY-24 में वॉल्यूम घटकर 54,114 कंटेनर रह गया और FY-25 में यह और गिरकर 42,959 कंटेनर (कुल मूल्य 1.36 बिलियन डॉलर) हो गया।</p>
<p><strong>गिरावट के कारण क्या है?</strong><br>
ट्रेड एनालिस्टों के अनुसार, अक्टूबर 2025 की सीमा बंदी ने गिरावट को तेज जरूर किया, लेकिन यह गिरावट काबुल की पहले से चल रही रणनीति का नतीजा है। अफगानिस्तान ने ईरानी मार्गों (चाबहार बंदरगाह समेत) की ओर तेजी से रुख किया और पाकिस्तानी बंदरगाहों पर अपनी निर्भरता कम कर दी। इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण अफगानिस्तान की पाकिस्तानी पोर्ट्स पर निर्भरता घटाने की दीर्घकालिक रणनीति मानी जा रही है। सुरक्षा चिंताओं, बार-बार सीमा विवाद और पाकिस्तान पर टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) को समर्थन देने के आरोपों ने भी इस प्रक्रिया को तेज किया।</p>
<p><strong>दोनों देशों पर क्या प्रभाव?</strong><br>
इस गिरावट से पाकिस्तान को सीधा आर्थिक नुकसान हुआ है। ट्रांजिट ट्रेड से मिलने वाला राजस्व, बंदरगाह शुल्क, परिवहन व्यवसाय और संबंधित नौकरियां प्रभावित हुई हैं। दूसरी ओर अफगानिस्तान को भी इस बदलाव की कीमत चुकानी पड़ रही है। ईरानी मार्ग लंबे और महंगे होने के कारण परिवहन तथा लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ गया है, जिसका बोझ सीधे अफगान उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। इससे महंगाई का दबाव बढ़ा है, खासकर पूर्वी और दक्षिणी अफगानिस्तान में। पख्तून बहुल इलाके, जो लंबे समय से पाकिस्तानी सामान और सीमा पार व्यापार पर निर्भर रहे हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, व्यावसायिक गतिविधियां कम होने से सीमा के दोनों ओर नौकरियां घटी हैं और परिवारों की आय प्रभावित हुई है। पाकिस्तान के बॉर्डर से लगे प्रांतों में मिलिटेंट हिंसा और अशांति भी जारी है, जिससे स्थिति और खराब हुई है। पाकिस्तान ने नवंबर 2022 में सीजफायर खत्म होने के बाद टीटीपी पर अफगान धरती से हमले कराने का आरोप लगाया है।</p>
<p><strong>अब आगे क्या होगा?</strong><br>
रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान ट्रांजिट ट्रेड अपने पीक स्तर से तेजी से दूर जा चुका है। यह गिरावट 2025 की सीमा बंदी से पहले शुरू हुई थी और काबुल के वैकल्पिक मार्गों की ओर तेज शिफ्ट के कारण आगे भी जारी रहने की संभावना है। जानकारों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच विश्वास का माहौल नहीं बना और सुरक्षा व आर्थिक सहयोग पर ठोस बातचीत नहीं हुई, तो इस ट्रेड को फिर से पहले के स्तर पर लाना मुश्किल होगा। फिलहाल, पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ा रणनीतिक और आर्थिक नुकसान साबित हो रहा है, जबकि अफगानिस्तान नई आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में लगा हुआ है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान में दिग्गज सुन्नी मौलवी मोहम्मद अनवर की हत्या, जुमे की नमाज की अगुवाई करने वाले धर्मगुरु पर हमला</title>
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<description><![CDATA[ तेहरान  ईरान में एक बड़े सुन्नी मौलवी की हत्या कर दी गई है. मिर्जावेह प्रांत के गवर्नर ने बताया कि अज्ञात हथियारबंद लोगों ने शहर की अली इब्न अबी तालिब मस्जिद में सुन्नी मौलवी मोहम्मद अनवर रीगी की हत्या कर दी है. उन्होंने इसे आतंकी हमला करार दिया है. मिर्जावेह ईरान के दक्षिण पश्चिमी प्रांत … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 18:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तेहरान </strong><br>
ईरान में एक बड़े सुन्नी मौलवी की हत्या कर दी गई है. मिर्जावेह प्रांत के गवर्नर ने बताया कि अज्ञात हथियारबंद लोगों ने शहर की अली इब्न अबी तालिब मस्जिद में सुन्नी मौलवी मोहम्मद अनवर रीगी की हत्या कर दी है. उन्होंने इसे आतंकी हमला करार दिया है. मिर्जावेह ईरान के दक्षिण पश्चिमी प्रांत का इलाका है. उन्होंने कहा कि कुछ हथियारबंद आतंकियों ने उसकी हत्या की है। </p>
<p>वे बलूच समुदाय के एक मौलवी थे. ईरान में सुन्नी आबादी वाले क्षेत्रों (खासकर बलूचिस्तान) में वे स्थानीय स्तर पर धार्मिक गतिविधियों से जुड़े रहे। उनकी नियुक्तिमिर्जावेह  की मस्जिद में इमाम-ए-जुम्मा के रूप में हुई थी. यह नियुक्ति विवादास्पद रही, क्योंकि इससे पहले मौलवी अब्दुल क़हार मीरबलोचज़ही को गिरफ्तार किया गया था और कई स्थानीय लोगों ने इस पर विरोध जताया था।  </p>
<p>सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत ईरान के सबसे गरीब प्रांतों में से एक है. जहां ईरान एक शिया बहुल देश है वहीं सिस्तान-बलूचिस्तान में सुन्नी बलूच आबादी बड़ी संख्या में रहती है. यह प्रांत लंबे समय से इस्लामी या जातीय उग्रवादियों और सुरक्षा बलों या तेहरान के समर्थक गुटों के बीच संघर्ष का गवाह रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि जांच चल रही है. उन्होंने यहां के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. ​​उन्होंने कहा कि इस हमले का मकसद सुरक्षा को कमजोर करना और प्रांत में सांप्रदायिक मतभेद भड़काना है। </p>
<p><strong>अमेरिका के साथ जंग में उलझा है ईरान</strong><br>
अमेरिका ने लगातार नौवीं रात ईरान के कई ठिकानों पर बमबारी की है, वहीं ईरान भी खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है. बढ़ती तल्खी के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका के साथ युद्ध तब तक नहीं रुकेगा, जब तक हमें लड़ाई में मजबूत बढ़त नहीं मिल जाती. ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी आईआरएनए को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "बातचीत भी तभी होनी चाहिए, जब ईरान ऐसी स्थिति में हो जहां उसे लगे कि हालात उसके पक्ष में हैं। </p>
<p>अराघची ने कहा कि किसी भी युद्ध का अंत दो तरह से होता है. पहला, जब किसी एक पक्ष को सैन्य जीत मिल जाए. दूसरा, जब दोनों पक्ष बातचीत करके समझौते पर पहुंचें. लेकिन बातचीत तभी करनी चाहिए, जब संघर्ष में अपनी स्थिति मजबूत हो. जल्दबाजी में बातचीत करना सही नहीं होगा. इसके साथ ही उन्होंने ईरान की सुरक्षा को भी अहम बताया. उन्होंने कहा कि लोगों की जान और देश के भविष्य को खतरे में नहीं डाला जा सकता. हर फैसला पूरी जानकारी और सही आकलन के बाद ही लिया जाना चाहिए। </p>
<p> मिर्जावेह  में मस्जिद के पास अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने उन पर गोलीबारी की. गोली लगने से वे मौके पर ही शहीद हो गए. यह उन पर दूसरा हमला था. दिसंबर 2024 में भी उन पर गोलीबारी हुई थी, लेकिन उस समय वे बच गए थे। </p>
<p><strong>विदेश मंत्री ने बयान देकर जले पर नमक छिड़का</strong></p>
<p>अमेरिका और ईरान की जंग एक बार फिर चरम पर पहुंच चुकी है. ईरानी हमलों में तीसरे अमेरिकी सैनिक की मौत की पुष्टि हो गई है और अब डोनाल्ड ट्रंप बदला लेने के मूड में हैं. अमेरिकी सेना ने लगातार नौवीं रात ईरान पर हमला बोला है. एक तरफ ट्रंप कह रहे हैं कि ईरानी हमलों में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की याद में, उन्हें सम्मान देने के लिए हमले किए जा रहे हैं. वहीं अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कह दिया है कि सेना का कोई भी काम सुरक्षित नहीं होता. यह सब अपने आप में खतरनाक होता है. इस नाजुक मोड़ पर मार्को रुबियो का यह बयान शहीदों के परिवारों को शायद रास नहीं आए। </p>
<p>ईरान की सरकारी मीडिया ने कहा है कि अमेरिका के नए हमलों के बाद तबरीज, चाबहार, कोणार्क, बंदर महशहर और बंदर इमाम खुमैनी में विस्फोट की सूचना मिली है। </p>
<p><strong>एक और अमेरिकी सैनिक की मौत</strong><br>
अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन नेकहा कि ईरान के हमलों में अमेरिकी सेना के एक तीसरे सैनिक की मौत हो गई है. युद्ध का दायरा लगातार बढ़ रहा है और अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में और लड़ाकू विमान भेजने शुरू कर दिए हैं. पेंटागन ने बताया कि शनिवार को उत्तरी इराक में ईरान के एक गिराए गए अटैक ड्रोन को नष्ट करने के दौरान सैनिक की मौत हो गई। </p>
<p><strong>मार्को रुबियो का बयान</strong><br>
जब अमेरिका के विदेश मंत्री से शहीद हुए सैनिकों के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, "लेकिन देखिए, हमारी सेना दुनिया भर में, खासकर उस इलाके में लेकिन हर जगह, हर दिन बहुत खतरनाक काम करती है. हमारे यहां ऐसे लोग भी रहे हैं जिनकी ट्रेनिंग के दौरान जान चली गई. सेना जो भी काम करती है, उसमें से कुछ भी सुरक्षित नहीं होता. यह सब अपने आप में खतरनाक होता है…" </p>
<p><strong>अभी भी बातचीत के लिए राजी अमेरिका- रुबियो</strong></p>
<p>विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पत्रकारों से कहा कि अमेरिका अभी भी ईरान के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है, लेकिन बातचीत असल होनी चाहिए. रुबियो ने कहा, "हम जवाब देते रहेंगे. अगर बातचीत का रास्ता खुलता है, यानी अगर ईरान के लिए कुछ अच्छा करने वाले लोग जीतते हैं और सिस्टम या बातचीत की कमान संभालते हैं, तो यह बहुत अच्छी बात होगी… लेकिन अफसोस की बात है कि अभी हालात ऐसे नहीं हैं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>Hormuz Ship Blast: होर्मुज जलडमरूमध्य में दो जहाजों में धमाका, एक में तेल&#45;LPG तो दूसरे में खाद थी लदी</title>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 16:30:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Hormuz, Ship, Blast:, होर्मुज, जलडमरूमध्य, में, दो, जहाजों, में, धमाका, एक, में, तेल-LPG, तो, दूसरे, में, खाद, थी, लदी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तेहरान</strong><br>
 ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सोमवार को दावा किया कि दक्षिणी होर्मुज स्ट्रैट में दो तेल टैंकरों में धमाका हुआ है, जिसके बाद दोनों जहाज बेकार हो गए। IRGC ने एक बयान में कहा कि दोनों टैंकरों ने होर्मुज स्ट्रैट से होकर गुजरने वाले एक असुरक्षित दक्षिणी रास्ते का इस्तेमाल करने की कोशिश की थी।</p>
<p><strong>IRGC का आरोप है कि उन्हें अमेरिकी सेना ने इस रास्ते का इस्तेमाल करने के लिए उकसाया था।</strong><br>
IRGC ने कहा, जब तक इस इलाके में अमेरिका की आक्रामकता जारी रहेगी, तब तक यह जलमार्ग असुरक्षित रहेगा। IRGC ने चेतावनी देते हुए कहा, यह रास्ता पेट्रोकेमिकल उत्पादों, या तेल और गैस की एक बूंद के भी आने-जाने के लिए सुरक्षित नहीं होगा।</p>
<p><strong>साथ ही अमेरिकी सेना से सजा देने वाले ऑपरेशन के लिए तैयार रहने को कहा गया है।</strong><br>
हालांकि अभी इस घटना की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। IRGC के बयान में जहाजों के नाम, वे किस देश के झंडे के नीचे चल रहे थे, क्रू में कितने लोग थे या किसी जान-माल के नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।</p>
<p><strong>ईरानी हमलों से दहल गया अमेरिका, 50000 सैनिक अलर्ट पर</strong></p>
<p>एक तरफ अमेरिका और ईरान की जंग तेज होने लगी है, तो दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरान के पास से अपने विमानों को हटाना शुरू कर दिया है. देखने में तो यह लगता है कि जैसे अमेरिका अपने कदम पीछे ले रहा है. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. सीधे तौर पर यह एक युद्ध स्ट्रैटेजी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने साल में दूसरी बार कतर स्थित अपने सबसे बड़े सैन्य अड्डे अल उदेद एयर बेस से अहम सैन्य विमानों को हटाना शुरू कर दिया है. इस बार अमेरिका अपने सबसे कीमती KC-135 स्ट्रैटोटैंकर विमानों को कतर से निकालकर दक्षिणी इजरायल के ओवडा एयर बेस भेज रहा है। </p>
<p><strong>ईरानी हमलों से दहल गया अमेरिका, ट्रंप आनन-फानन में कतर से हटाने लगे जेट</strong><br>
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. सैन्य विशेषज्ञ इसे केवल सुरक्षा उपाय नहीं, बल्कि अमेरिका की नई सैन्य रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं. इससे पहले खबर आई थी कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि पश्चिम एशिया में तैनात 50,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक पूरी तरह सतर्क हैं. अमेरिकी सेना ने ईरान पर हमलों का एक और दौर पूरा कर लिया है। </p>
<p>
<strong>साल में दूसरी बार एयरबेस से हटाने पड़े विमान</strong><br>
फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा और सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, जुलाई के मध्य से अल उदेद एयर बेस से दर्जनों KC-135 विमान उड़ान भर चुके हैं. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अब तक 60 से ज्यादा अमेरिकी एरियल रिफ्यूलिंग विमान इजरायल पहुंच चुके हैं, जबकि इनमें से कम से कम 33 विमान बेन गुरियन एयरपोर्ट पर देखे गए हैं. 18 और 19 जुलाई के बीच भी कई और विमानों के पहुंचने की उम्मीद जताई गई. यह इस साल दूसरी बार है, जब अमेरिका को अल उदेद एयर बेस से अपने विमान हटाने पड़े हैं. इससे संकेत मिल रहे हैं कि वॉशिंगटन अब अपने सबसे बड़े सैन्य अड्डे की सुरक्षा को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हो गया है। </p>
<p><strong>क्यों अहम हैं KC-135 टैंकर विमान?</strong><br>
KC-135 स्ट्रैटोटैंकर अमेरिकी वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट विमानों में गिने जाते हैं. इनका काम हवा में ही लड़ाकू विमानों और बॉम्बर्स को ईंधन उपलब्ध कराना है. इससे फाइटर जेट लंबी दूरी तक उड़ान भर सकते हैं और कई घंटों तक मिशन पर बने रह सकते हैं. अगर ये विमान उपलब्ध न हों तो किसी भी बड़े हवाई अभियान की क्षमता काफी सीमित हो जाती है। </p>
<p><strong>सिर्फ बचाव नहीं, हमले की तैयारी भी</strong><br>
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन विमानों को इजरायल भेजने के पीछे दो बड़े मकसद हैं. पहला, इन्हें संभावित ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों से सुरक्षित रखना. दूसरा, अगर क्षेत्र में हालात और बिगड़ते हैं तो इन्हें मोर्चे के करीब रखकर तुरंत सैन्य अभियान में इस्तेमाल किया जा सके। </p>
<p><strong>अल उदेद एयर बेस क्यों है इतना अहम?</strong><br>
कतर का अल उदेद एयर बेस मध्य पूर्व में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के सैन्य अभियानों का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है. यहीं से अमेरिका पूरे पश्चिम एशिया में अपने हवाई अभियानों का संचालन करता है. ऐसे में इस बेस से विमानों का हटाया जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका अब ईरानी खतरे को पहले से कहीं ज्यादा गंभीरता से ले रहा है। </p>
<p>ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड पहले भी अल उदेद एयर बेस को निशाना बनाने का दावा कर चुकी है. इसके अलावा 2025 में भी इस बेस पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले की आशंकाएं जताई गई थीं. ऐसे में अमेरिका का ताजा कदम बढ़ते तनाव के बीच एक बड़े रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। </p>
<p><strong>दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री रास्ता बना होर्मुज</strong><br>
ईरान-अमेरिका जंग की शुरुआत के बाद से ही होर्मुज स्ट्रेट इस समय दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों में गिना जा रहा है. खाड़ी से निकलने वाले बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस के टैंकर इसी रास्ते से गुजरते हैं. लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच यहां से गुजरने वाले जहाजों के सामने हर पल मिसाइल, ड्रोन या समुद्री माइन का खतरा बना हुआ है. यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने होर्मुज में टैंकरों के धमाके का दावा किया हो. पिछले सप्ताह भी IRGC ने कहा था कि दो ऑयल टैंकर माइन से टकराकर फट गए थे. हालांकि उस समय अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा था कि ‘ज्यादातर IRGC के दावों की तरह यह दावा भी गलत है.’ उस दौरान ईरान ने यह भी दावा किया था कि उसने मिसाइल और ड्रोन अभियान चलाकर होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे चार जहाजों को रोक दिया था। </p>
<p><strong>ईरान में MQ-9 ड्रोन मार गिराने का भी दावा</strong><br>
अमेरिका ने इस बीच ईरान पर लगातार 9वीं रात हमला किया है. ईरान के बंदरगाहों पर धमाके हो रहे हैं. इसी बीच ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने दावा किया है कि पश्चिमी ईरान के केरमानशाह प्रांत में एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, IRGC एयरोस्पेस फोर्स की एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम ने इस ड्रोन को निशाना बनाया. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है. वहीं, अमेरिका की ओर से भी इन ताजा घटनाओं पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान संकट से मिस्र के गार्बेज सिटी का प्लास्टिक कारोबार चमका</title>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 11:15:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, संकट, से, मिस्र, के, गार्बेज, सिटी, का, प्लास्टिक, कारोबार, चमका</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>काहिरा</strong><br>
 मिस्र की राजधानी काहिरा की भूलभुलैया जैसी गलियों में स्थित 'गार्बेज सिटी' (कचरा शहर) में रिसाइकिलिंग विशेषज्ञ पीटर रोमनी के पास इन दिनों फैक्ट्रियों के लगातार फोन आ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे माल की आपूर्ति में भारी कमी आई है, जिससे कारखाने प्लास्टिक के लिए तरस रहे हैं।</p>
<p>जब से होर्मुज बंद हुआ है, तब से मिस्र भर के सैकड़ों रिसाइकलर्स और निर्माताओं को प्लास्टिक की इस बढ़ी हुई मांग का सीधा लाभ मिल रहा है, जो प्लास्टिक बनाने वाले कच्चे माल के लिए एक प्रमुख शिपिंग मार्ग है।</p>
<p><strong>दुनिया का सबसे उन्नत रिसाइकिलिंग सिस्टम</strong><br>
इस अप्रत्याशित उछाल के केंद्र में पूर्वी काहिरा का एक विशाल इलाका मनशियत नासर है। यहां कचरा बीनने वालों की कई पीढ़ियों ने मिलकर दुनिया के सबसे उन्नत और परिष्कृत अनौपचारिक रिसाइकिलिंग प्रणालियों में से एक का निर्माण किया है।</p>
<p>25 वर्षीय रोमनी कंप्रेस्ड प्लास्टिक के बड़े ढेरों के पास खड़े होकर बताते हैं कि युद्ध से पहले हम कारखानों को फोन करते थे और अपना माल बेचने की कोशिश करते थे। लेकिन युद्ध छिड़ने के बाद से फैक्ट्रियां हमें फोन करने लगी हैं। वे पूछती हैं कि आपके पास कितना माल है? क्या आप आज ही डिलीवरी कर सकते हैं? ऐसा पहले कभी नहीं होता था।</p>
<p><strong>कचरे के पहाड़ों के बीच रहने को मजबूर हजारों परिवार</strong><br>
मोकट्टम पहाड़ी के ठीक नीचे स्थित और काहिरा के ऐतिहासिक सिटाडेल के सामने बसा 'मनशियत नासर' मुख्य रूप से कॉप्टिक ईसाई बहुल इलाका है, जहां 115,000 से अधिक लोग निवास करते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह बस्ती राजधानी के एक तिहाई से अधिक कचरे का प्रबंधन करती है। यहाँ परिवार एक ही छत के नीचे रहते और काम करते हैं।</p>
<p>अक्सर उनकी रहने की जगह और कचरे के पहाड़ों के बीच सिर्फ एक सीढ़ी या पर्दे का फासला होता है, जिससे वे लगातार दुर्गंध, जहरीले धुएं और स्वास्थ्य संबंधी कई गंभीर जोखिमों का सामना करते हैं।</p>
<p>घरों के निचले हिस्से में पुरुष प्लास्टिक, कार्डबोर्ड, कागज, धातु और कांच को अलग-अलग ढेरों में छांटते हैं ताकि उन्हें कारखानों में भेजा जा सके। वहीं, ऊपरी मंजिल की तंग जगहों पर बच्चे पढ़ाई करते हैं, महिलाएं खाना बनाती हैं और टीवी चलता रहता है।</p>
<p>इन सबके बीच, नीचे चलने वाली श्रेडर और बेलिंग प्रेस मशीनों का शोर लगातार गूंजता रहता है। अब यह पूरा इलाका एक सुचारू रूप से चलने वाली मशीन बन चुका है, जिसे हजारों किलोमीटर दूर हो रहे एक युद्ध ने और भी तेज कर दिया है।</p>
<p><strong>कीमतों में भारी उछाल</strong><br>
रोमनी मुख्य रूप से रिसाइकिल की गई पॉलीथीन का काम करते हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक में से एक है और पैकेजिंग का प्रमुख हिस्सा है। मूल्य निर्धारण एजेंसी इंडिपेंडेंट कमोडिटी इंटेलिजेंस सर्विसेज के अनुसार, मध्य पूर्व पॉलीथीन का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, और इसका लगभग 85% निर्यात इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।</p>
<p>चैंबर ऑफ केमिकल इंडस्ट्रीज के मुताबिक, मिस्र अपने कच्चे प्लास्टिक का लगभग 40% हिस्सा खाड़ी देशों, यूरोप, चीन और दक्षिण कोरिया से आयात करता है। उद्योग से जुड़े तीन सूत्रों का कहना है कि संकट के बाद कुछ पैकेजिंग और प्लास्टिक उत्पादों की कीमतें अब दोगुनी से भी अधिक हो गई हैं।</p>
<p><strong>स्थानीय व्यवसायों के लिए खुले अंतरराष्ट्रीय दरवाजे</strong><br>
सप्लाई चेन में आई इस बाधा ने पूरी वैल्यू चेन में स्थानीय व्यवसायों को फलने-फूलने का मौका दिया है। पुरानी प्लास्टिक की बोतलों से पॉलिएस्टर फाइबर बनाने वाली 'सादात सिटी केमिकल फाइबर फैक्ट्री' की मुख्य कार्यकारी अधिकारी फैरोज अल-सैयद ने कहा कि हम 16 साल से इस व्यवसाय में हैं, लेकिन इस हालिया संकट के बाद ही हम ब्राजील जैसे दूरस्थ नए बाजारों में अपनी पैठ बनाने में कामयाब हुए हैं।</p>
<p>वहीं, प्लास्टिक कचरे को नई पैकेजिंग सामग्री में बदलने वाली कंपनी यूफ्लेक्स इजिप्ट की वरिष्ठ विपणन प्रबंधक नेस्मा अल-अरीफ ने बताया कि कंपनी के रिसाइकिल किए गए उत्पादों की मांग में 40% तक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।</p>
<p><strong>भविष्य की अनिश्चितता और बाजार का उतार-चढ़ाव</strong><br>
इन बड़े फायदों के बावजूद, उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि आपूर्ति मार्ग स्थिर होने पर यह तेजी कम हो सकती है। यूसुफ नाम के एक व्यक्ति ने बताया कि पिछले महीने जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने यह घोषणा की थी कि ईरान के साथ बातचीत में प्रगति हो रही है, तब कीमतों और मांग में थोड़ी नरमी आना शुरू हो गई थी।</p>
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<title>ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई गायब, सत्ता संघर्ष हुआ तेज</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई इस समय ईरान में नहीं हैं, सऊदी समाचार चैनल अल-हदथ ने एक इजरायली सुरक्षा सूत्र के हवाले से यह दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, उनके नाम से जारी होने वाले संदेश सीधे उनकी ओर से नहीं, बल्कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के नए प्रमुख अहमद वहीदी … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 10:15:22 +0530</pubDate>
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<media:keywords>ईरान, के, सुप्रीम, लीडर, मोजतबा, खामेनेई, गायब, सत्ता, संघर्ष, हुआ, तेज</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई इस समय ईरान में नहीं हैं, सऊदी समाचार चैनल अल-हदथ ने एक इजरायली सुरक्षा सूत्र के हवाले से यह दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, उनके नाम से जारी होने वाले संदेश सीधे उनकी ओर से नहीं, बल्कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के नए प्रमुख अहमद वहीदी तैयार कर रहे हैं। हालांकि, इस दावे की ईरान की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईरान के भीतर गहरे राजनीतिक मतभेद पैदा हो गए हैं, जो IRGC की एकता और देश की सत्ता व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकते हैं।</p>
<p>इजरायली सूत्र ने दावा किया कि अमेरिका नहीं चाहता कि अगर ईरान हमला भी करे, तब भी इजरायल जवाबी कार्रवाई में सीधे शामिल हो। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में अमेरिका के साथ हुए 14 सूत्रीय समझौते के बाद सत्ता के भीतर संघर्ष और तेज हो गया है। कट्टरपंथी धड़े सरकार पर तख्तापलट करने का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि समझौता करके सरकार ने देश के हितों और मौजूदा सर्वोच्च नेता के निर्देशों की अनदेखी की है। इसे लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।</p>
<p><strong>खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान नाराजगी आई सामने</strong><br>
ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान भी यह नाराजगी खुलकर सामने आई। विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पथराव किया गया, जिन्होंने अमेरिका के साथ युद्धविराम वार्ता में अहम भूमिका निभाई थी। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें डील करने वाला और देश से गद्दारी करने वाला बताते हुए नारे लगाए। रिपोर्ट में कहा गया कि मोजतबा खामेनेई लंबे समय से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। ऐसे में संसद के पूर्व अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालीबाफ, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची युद्ध के बाद देश के प्रमुख फैसले लेते दिखाई दे रहे हैं।</p>
<p><strong>मोजतबा खामेनेई की लगातार गैरमौजूदगी से परेशानी</strong><br>
अमेरिकी रिसर्चर अराश अजीजी के अनुसार, मोजतबा खामेनेई की लगातार गैरमौजूदगी के कारण यही नेता सरकार का संचालन कर रहे हैं, जिससे कट्टरपंथी गुट खुद को सत्ता से अलग-थलग महसूस कर रहा है। इसी वजह से वे गालीबाफ और पेजेशकियन पर सत्ता पर कब्जा करने की साजिश रचने का आरोप लगा रहे हैं। कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियान और कमरान गजनफारी जैसे नेताओं ने भी सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि सरकार सर्वोच्च नेता और संसद की भूमिका कम करके राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को अधिक शक्तियां देना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह एक सुनियोजित राजनीतिक बदलाव है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान युद्ध पर सट्टेबाजी से हिला व्हाइट हाउस, कर्मचारियों की जांच शुरू</title>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 10:15:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
अमेरिका और ईरान इस वक्त युद्ध में उलझे हुए हैं। दुनिया की सबसे मजबूत और आधुनिक सेना रखने का दम भरने वाले अमेरिका को इस युद्ध से ज्यादा परेशानी नहीं हो रही है। लेकिन हाल ही में कुछ ऐसा हुआ है, जिसने ट्रंप प्रशासन को अंदर से हिलाकर रख दिया है। हां, वह है ईरान युद्ध पर लग रहे ऑनलाइन सट्टे ने। आलम यह है कि दुनिया के सबसे आधुनिक देश का तमगा लिए बैठे अमेरिका को अब अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के कर्मचारियों पर ही भरोसा नहीं है। वाइट हाउस में सभी की जांच हो रही है और इस बात का पता लगाया जा रहा है कि कहीं किसी ने जानकारी को लीक तो नहीं कर दिया।</p>
<p>वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों को संदेह है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स पर सट्टेबाजी के जरिए पैसा कमाने के लिए किसी कर्मचारी ने वाइट हाउस के अंदर की बातें लीक कर दी हों। इस संदेह का सबसे बड़ा कारण तब बना था, जब सीजफायर को लेकर सट्टा बाजार में दांव लगा था। उस समय पर तीन अज्ञात लोगों ने अप्रैल में सीजफायर होने का दावा किया था। इसके बाद जब डोनाल्ड ट्रंप ने 8 अप्रैल को सीजफायर का ऐलान किया तो इन लोगों ने करीब 600,000 डॉलर की राशि जीती थी।</p>
<p><strong>गुमनाम रहता है सट्टेबाजी वेबसाइट का उपयोगकर्ता</strong><br>
अमेरिकी अधिकारियों की सट्टाबाजार को लेकर दूसरी परेशानी यह है कि इसका पता नहीं लगाया जा सकता कि आखिर दांव खेल कौन रहा है। क्योंकि सट्टा लगवाने वाले बेवसाइट अपने उपयोगकर्ताओं को गुमनाम खाता बनाने की अनुमति देता है। इसलिए इनका पता नहीं लगाया जा सकता। वाइट हाउस के वकीलों ने बताया कि अब जबकि फिर से युद्ध शुरू हो गया है और बड़े स्तर पर सट्टा लगाया जा रहा है। इसलिए वाइट हाउस के कर्मचारियों की स्क्रूटनी शुरू की गई है। इसमें एक कार्रवाई भी की गई है।</p>
<p><strong>ट्रंप के टेली प्रॉम्पटर ऑपरेटर को छुट्टी पर भेजा</strong><br>
सट्टेबाजी में वाइट हाउस के अंदर की बातों के लीक होने के खतरे के देखते हुए सभी कर्मचारियों की स्क्रूटनी की गई। इसमें पता चला कि ट्रंप का टेली प्रॉम्पटर ऑपरेस करने वाले गैब्रियल पेरेज पहले से ही सट्टाबाजी में संलिप्त रहे हैं। इसके अलावा उनके ऊपर राष्ट्रपति के भाषणों पर पहले से पहुंच का फायदा उठाने का भी आरोप लगा है।</p>
<p>मीडिया में जब यह खबरें आई, तो वाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलीन लेविट से इसके बारे में पूछा गया। उन्होंने स्वीकार किया कि वाइट हाउस में किसी को इसके बारे में जानकारी नहीं थी। लेकिन गैब्रियल को कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन के तहत जांच के घेरे में लाया गया। और पता चला कि उन्होंने सट्टे में करीब एक मिलियन डॉलर का दाव लगाया था।</p>
<p>लैविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस बात से बेहद नाराज हैं कि उनके अपने प्रशासन के लोग ही अंदर की जानकारी का फायदा उठाकर सट्टेबाजी में पैसा कमा रहे हैं। जानकारी सामने आने के बाद पैरेज को बिना वेतन अवकाश पर भेज दिया गया है। बता दें, पेरेजे ट्रंप के साथ 2016 से जुड़े हुए हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<title>आठवीं रात भी ईरान पर अमेरिकी हमले, 50 हजार सैनिक हाई अलर्ट पर</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में तनाव अब चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ लगातार आठवीं रात भी भीषण बमबारी की है। यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इन सटीक हमलों में ईरान की एयर डिफेंस सिस्टम, निगरानी रडार, समुद्री ठिकान, मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज साइटों को भारी नुकसान पहुंचाया गया। … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 10:15:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>आठवीं, रात, भी, ईरान, पर, अमेरिकी, हमले, हजार, सैनिक, हाई, अलर्ट, पर</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
मिडिल ईस्ट में तनाव अब चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ लगातार आठवीं रात भी भीषण बमबारी की है। यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इन सटीक हमलों में ईरान की एयर डिफेंस सिस्टम, निगरानी रडार, समुद्री ठिकान, मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज साइटों को भारी नुकसान पहुंचाया गया। यह कार्रवाई जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य बेस पर ईरान समर्थित हमले के जवाब में की गई, जिसमें दो अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला सिर्फ शुरुआत है और अमेरिका अब पूर्ण पैमाने पर सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है।</p>
<p><strong>अलर्ट मोड में 50000 सैनिक</strong><br>
इस बीच द जेरूसलम पोस्ट की स्पेशल रिपोर्ट के हवाले से पता चला है कि मिडिल ईस्ट में तैनात 50000 से अधिक अमेरिकी सैनिकों को पूरी तरह हाई अलर्ट पर रखा गया है। रिपोर्ट में CENTCOM कमांड के सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए सैनिकों को किसी भी क्षण बड़े क्षेत्रीय संघर्ष के लिए तैयार रहने का सख्त निर्देश दिया गया है। ये सैनिक पहले से ही विभिन्न ठिकानों पर तैनात हैं और अब उन्हें अतिरिक्त हथियार, गोला-बारूद और लॉजिस्टिक सपोर्ट मुहैया कराया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि यह अलर्ट स्तर पिछले कई वर्षों में सबसे ऊंचा है।</p>
<p><strong>अमेरिका ने एयर पावर को दी भारी मजबूती</strong><br>
अमेरिकी रक्षा विभाग ने क्षेत्र में अपनी हवाई क्षमता को और मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। जर्मनी के स्पैंगडाहलेम एयर बेस से F-16 फाइटर जेट्स को तेजी से मध्य पूर्व भेजा जा रहा है। साथ ही, यूनाइटेड किंगडम से उन्नत F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट्स को भी तैनाती के लिए तैयार किया गया है। ये दोनों ही विमान इजरायल और क्षेत्र के अन्य प्रमुख अमेरिकी व एलाइड सैन्य बेस पर पहुंचाए जा रहे हैं। इसके अलावा, लंबे समय तक चलने वाले सैन्य अभियानों के लिए अमेरिका इजराइल को अतिरिक्त एरियल रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट भी उपलब्ध करा रहा है, जो युद्ध की स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं</p>
<p><strong>अमेरिकी नागरिकों के लिए एडवाइजरी</strong><br>
अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने सुरक्षा एडवाइजरी को और विस्तार देते हुए दुनिया भर के लिए अलर्ट जारी कर दिया है। एडवाइजरी में विदेश यात्रा कर रहे या विदेश में रह रहे सभी अमेरिकी नागरिकों से अत्यधिक सतर्क रहने और जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाने को कहा गया है। विभाग ने खासतौर पर चेतावनी दी है कि ईरान समर्थित आतंकी समूह न सिर्फ मध्य पूर्व बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी अमेरिकी हितों, दूतावासों और नागरिकों को निशाना बना सकते हैं। इस एडवाइजरी के बाद कई देशों में अमेरिकी नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक यात्राएं टालें और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क बनाए रखें</p>
<p><strong>इजरायल भी है अलर्ट पर</strong><br>
जेरूसलम पोस्ट के अनुसार, इजरायल अमेरिका-ईरान के बीच तेजी से बदल रही घटनाओं पर पूरी नजर रखे हुए है। लगातार आठ रातों के अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरान ने अब तक इजरायल को सीधे निशाना बनाने से परहेज किया है, लेकिन इजरायली अधिकारियों का आकलन है कि यह स्थिति बहुत जल्द बदल सकती है। अमेरिकी अधिकारियों ने इजरायल को फिलहाल मौजूदा लड़ाई से अलग रहने की सलाह दी है। सूत्रों के मुताबिक, इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन वॉशिंगटन ने इसे अभी स्वीकार नहीं किया है।</p>
<p>इजरायली सेना के उच्चाधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर ईरान ने इजरायल पर प्रत्यक्ष हमला किया तो इजरायली वायुसेना तेहरान समेत ईरान के अंदरूनी ठिकानों पर भारी हमले कर सकती है। साथ ही, अगर अमेरिका ने इजरायल की भागीदारी को मंजूरी दे दी तो इजरायल उन सभी लक्ष्यों पर दोबारा हमले शुरू कर सकता है जो पिछले संघर्षविराम से पहले अधूरे रह गए थे। इनमें ईरान के परमाणु सुविधाएं, मिसाइल फैक्टरियां और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे शामिल हो सकते हैं।</p>
<p><strong>क्या है ट्रंप प्रशासन का प्लान?</strong><br>
दूसरी ओर जानकारों का कहना है कि ये सभी कदम ट्रंप प्रशासन की 'मैक्सिमम प्रेशर' नीति का हिस्सा लगते हैं। अमेरिका का मकसद ईरान की सैन्य क्षमता को बुरी तरह कमजोर करना, उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकना और क्षेत्र में अपने सहयोगी देशों खासकर इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि, स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। माना जा रहा है कि अगर अमेरिका कोई भी बड़ा कदम उठाता है को पूरे मिडिल ईस्ट को बड़े युद्ध की आग में झोंक सकता है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>अमेरिका तनाव के बीच ईरान में सत्ता संघर्ष तेज, तख्तापलट की धमकी से हलचल</title>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 18:15:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>अमेरिका, तनाव, के, बीच, ईरान, में, सत्ता, संघर्ष, तेज, तख्तापलट, की, धमकी, से, हलचल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका लगातार होर्मुज के आसपास के इलाकों पर हमले कर रहा है। वहीं ईरान भी पड़ोसी खाड़ी देशों में अमेरिकी बेसों को निशाना बना रहा है। ईरान के अंदर भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। बाहरी चुनौती के बीच ईरान की इस्लामिक सरकार को कट्टरपंथियों की धमकी मिल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कट्टरपंथी ईरान में तख्तापलट करने की धमकी दे रहे हैं। मारे गए सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई की अंतिम विदाई में जो भीड़ दिखी थी, उसे देखकर डोनाल्ड ट्रंप भी हैरान रह गए थे। हालांकि सब लोग केवल मातम ही नहीं मना रहे थे बल्कि उस भीड़ में बड़ी संख्या में सत्ता विरोधी भी शामिल थे जो कि राष्ट्रपति और विदेश मंत्री के खिलाफ नारे लगा रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक विदेश मंत्री अराघची जब खामेनेई के ताबूत के पास खड़े थे तभी उनपर पत्थर चले और उन्हें वहां से जाना पड़ा।</p>
<p><strong>अमेरिका के सामने घुटने टेकने का आरोप</strong><br>
अब देश के कट्टरपंथियों ने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के खिलाफ विरोध तेज कर दिया है। कट्टरपंथियों का कहना है कि सुप्रीम लीडर की मौत के बाद ईरान को समझौते का रास्ता नहीं बल्कि खून के बदले खून का रास्ता चुनना चाहिए थे। उनका आरोप है कि इस्लामिक सरकार ने अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए।</p>
<p><strong>खामेनेई के जनाजे में विरोध प्रदर्शन</strong><br>
खामेनेई के जनाजे के दौरान जब राष्ट्र्पति मसूद पेजेश्कियन ताबूत के पास चल रहे थे, तब भी लोगों ने उनपर अपना गुस्सा निकाला और समझौतावादी होने के नारे लगाए। विदेश मंत्री अब्बास अराघची को बिकाई और गद्दार कहा गया। साथ ही जब लोग पत्थरबाजी करने लगे तो उन्हें वहां से जाना पड़ा। कट्टरपंथी गुट का मानना है कि ईरान का नेतृत्व खामनेई की मौत का बदला नहीं लेना चाहता बल्कि समझौते के जरिए सरेंडर कर रहा है</p>
<p><strong>सुप्रीम लीडर का 'गायब' होना, असंतोष की वजह</strong><br>
अमेरिका से तनाव और देश के अंदर चुनौतीपूर्ण माहौल के बीच भी नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई सामने नहीं आ रहे हैं। उनकी जनता की नजरों से दूरी भी असंतोष की बड़ी वजह है। लोगों का कहना है कि क्या मोजतबा शासन नहीं कर सकते या फिर उनके आसपास के लोगों ने सत्ता का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है।</p>
<p><strong>तख्तापलट की साजिश</strong><br>
अमेरिका के एक जानका ने कहा कि मोजतबा की गैरमौजूदगी में कई नेताओं का कद बढ़ गया है। कट्टरपंथियों का कहना है कि अब गलिबाफ और उनके सहयोगियों के हाथ मेंही ईरान की बागडोर आ गई है। ऐसे में कट्टरपंथियों का कहना है कि गालिबफ और पेजेश्कियन ने मुजतबा के खिलाफ तख्तापलट की साजिश रची है। ईरान के कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन ने भी सोशल मीडिया पर तख्ता पलट को लेकर आशंका जताई थी। कट्टरपंथियों का कहना है कि संसद को नजरअंदाज करके गलिबाफ और उनके साथी क्रांतिकारी संस्थानों को भी कमजोर कर रहे हैं। ईरान के सुरक्षा तंत्र से जुड़े अली बख्शी ने पेजेश्कियन को धमकी देते हुए यहां तक कहा था कि अगर अमेरिका से बदला नहीं लिया जाता है तो उनकी तलवार होगी और राष्ट्रपति का गला।</p>]]> </content:encoded>
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<title>B&#45;2 बॉम्बर वीडियो से बढ़ी ईरान पर अमेरिकी हमले की अटकलें, स्काविनो की पोस्ट चर्चा में</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ डैन स्काविनो का एक सोशल मीडिया पैटर्न फिर सुर्खियों में है. दावा किया जा रहा है कि जब-जब उन्होंने B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर का वीडियो पोस्ट किया, उसके कुछ समय बाद ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 15:15:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>B-2, बॉम्बर, वीडियो, से, बढ़ी, ईरान, पर, अमेरिकी, हमले, की, अटकलें, स्काविनो, की, पोस्ट, चर्चा, में</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ डैन स्काविनो का एक सोशल मीडिया पैटर्न फिर सुर्खियों में है. दावा किया जा रहा है कि जब-जब उन्होंने B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर का वीडियो पोस्ट किया, उसके कुछ समय बाद ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान शुरू हुए. अब उनके नए वीडियो पोस्ट ने एक बार फिर संभावित अमेरिकी कार्रवाई की अटकलों को हवा दे दी है.</p>
<p>बताया जा रहा है कि फरवरी 2026 में स्काविनो ने पहली बार B-2 बॉम्बर का वीडियो शेयर किया था. करीब 24 घंटे बाद अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले शुरू कर दिए थे.</p>
<p>इसके बाद फरवरी के आखिर और मार्च की शुरुआत में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने "ऑपरेशन मिडनाइट हैमर" की पुष्टि की. इस अभियान में चार B-2 बॉम्बर्स ने अंडरग्राउंड मिसाइल और परमाणु ठिकानों पर 2,000 पाउंड के बम गिराए और सैकड़ों सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया.</p>
<p>मई 2026 में स्काविनो ने बिना किसी कैप्शन के फिर वही 17 सेकंड का B-2 बॉम्बर वाला वीडियो पोस्ट किया. इसके तुरंत बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बंदर अब्बास समेत ईरान के कमांड सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइल ठिकानों पर नए हमलों का आदेश दिया.</p>
<p>अब फिर से स्काविनो ने एक और वीडियो शेयर किया है, जिसमें B-2 स्पिरिट बॉम्बर के साथ F-22 रैप्टर लड़ाकू विमान उड़ते दिखाई दे रहे हैं. यह पोस्ट ऐसे समय आया है जब ईरान लगातार अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है और राष्ट्रपति ट्रंप नए सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं.</p>
<p>B-2 स्पिरिट को अमेरिका का सबसे आधुनिक स्टील्थ स्ट्रैटेजिक बॉम्बर माना जाता है. यह भारी सुरक्षा वाले इलाकों में रडार से बचते हुए घुस सकता है और भूमिगत बंकरों को नष्ट करने वाले शक्तिशाली "बंकर बस्टर" बम ले जाने में सक्षम है. यही वजह है कि विश्लेषकों का मानना है कि इस विमान की तस्वीरें या वीडियो सिर्फ सैन्य ताकत दिखाने के लिए नहीं, बल्कि ईरान को रणनीतिक संदेश देने के लिए भी इस्तेमाल किए जाते हैं. हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा है कि स्काविनो की सोशल मीडिया पोस्ट किसी सैन्य कार्रवाई का संकेत होती हैं.</p>]]> </content:encoded>
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<title>बलूचिस्तान का इतिहास: आजादी की मांग, पाकिस्तान में विलय और विवादों की कहानी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली 1947 में जब भारत और पाकिस्तान के रूप में दो नए देशों का जन्म हो रहा था, उसी समय दक्षिण एशिया के एक कोने में एक ऐसा सियासी खेल खेला जा रहा था, जिसकी चिंगारी आज 70 से ज्यादा सालों बाद भी बलूचिस्तान में सुलग रही है। बलूचिस्तान का पाकिस्तान में विलय कैसे … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 13:15:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>बलूचिस्तान, का, इतिहास:, आजादी, की, मांग, पाकिस्तान, में, विलय, और, विवादों, की, कहानी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
1947 में जब भारत और पाकिस्तान के रूप में दो नए देशों का जन्म हो रहा था, उसी समय दक्षिण एशिया के एक कोने में एक ऐसा सियासी खेल खेला जा रहा था, जिसकी चिंगारी आज 70 से ज्यादा सालों बाद भी बलूचिस्तान में सुलग रही है। बलूचिस्तान का पाकिस्तान में विलय कैसे हुआ? क्या वहां के शासक भारत के साथ आना चाहते थे? और आज बलूचिस्तान पाकिस्तान और चीन (CPEC) के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है? आइए, इतिहास के उन पन्नों को पलटते हैं जो आज भी भारत-पाकिस्तान और बलूच राष्ट्रवादियों के बीच तीखी बहस का विषय हैं।</p>
<p><strong>1947 का वो विभाजन: दो हिस्सों में बंटा बलूचिस्तान</strong><br>
अंग्रेजों के शासनकाल में आज का बलूचिस्तान दो प्रशासनिक इकाइयों में बंटा हुआ था। यह सीधे ब्रिटिश सरकार के नियंत्रण में था और इसकी सीमाएं रणनीतिक रूप से तय थीं।<br>
इनमें सबसे बड़ी और सबसे प्रभावशाली रियासत थी 'कलात का खानत', जिसके शासक खान मीर अहमद यार खान थे।</p>
<p>ब्रिटिश कानून के मुताबिक, भारत की दूसरी रियासतों की तरह कलात के पास भी यह अधिकार था कि वह अंग्रेजों के जाने के बाद अपना राजनीतिक भविष्य खुद चुने। कलात के खान का तर्क था कि अंग्रेजों के साथ उनकी संधि का दर्जा बाकी रियासतों से अलग है, इसलिए वे भारत या पाकिस्तान किसी में शामिल न होकर एक स्वतंत्र राष्ट्र बने रहेंगे।</p>
<p><strong>कलात की आजादी और पाकिस्तान का 'दबाव'</strong><br>
पाकिस्तान बनने के ठीक एक दिन बाद, 15 अगस्त 1947 को कलात ने खुद को एक स्वतंत्र देश घोषित कर दिया। अगले कुछ महीनों तक कलात और पाकिस्तान के नए हुक्मरानों के बीच बातचीत का दौर चलता रहा।</p>
<p>यह बातचीत मार्च 1948 में खत्म हुई, जब खान मीर अहमद यार खान ने 'इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन' पर दस्तखत कर दिए और कलात औपचारिक रूप से पाकिस्तान का हिस्सा बन गया।</p>
<p>पाकिस्तान का दावा है कि यह विलय पूरी तरह कानूनी और स्वैच्छिक था। इसके उलट, कई बलूच राष्ट्रवादी संगठन और इतिहासकार मानते हैं कि पाकिस्तान ने कलात पर भारी सैन्य और राजनीतिक दबाव बनाया था, जिसके चलते खान को मजबूरन दस्तखत करने पड़े।</p>
<p><strong>पहले बलूच विद्रोह की शुरुआत</strong><br>
विलय के तुरंत बाद ही बलूचिस्तान में विरोध की आग भड़क उठी। कलात के खान के छोटे भाई, प्रिंस अब्दुल करीम ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने अफगान सीमा के पास से पाकिस्तान सरकार के खिलाफ एक सशस्त्र विद्रोह शुरू कर दिया।</p>
<p>हालांकि पाकिस्तानी सेना ने इस विद्रोह को कुचल दिया, लेकिन इतिहासकार इसे 'पहला बलूच उग्रवाद' मानते हैं। तब से लेकर आज तक बलूचिस्तान में स्वायत्तता और आजादी की मांग को लेकर कई बार हिंसक आंदोलन हो चुके हैं।</p>
<p><strong>क्या बलूचिस्तान भारत का हिस्सा बनना चाहता था?</strong><br>
यह बलूचिस्तान के इतिहास का सबसे रहस्यमयी और विवादित हिस्सा है। ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि 1947 में कलात ने भारत सरकार से संपर्क किया था, लेकिन वह भारत में शामिल होने के लिए नहीं, बल्कि अपनी स्वतंत्र पहचान को मान्यता दिलाने और दिल्ली में एक ट्रेड एजेंसी खोलने की इजाजत मांगने के लिए था।<br>
जब उस वक्त इस बात की अफवाहें उड़ीं, तो भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने संसद में स्थिति साफ की थी।</p>
<p>नेहरू ने साफ शब्दों में कहा कि कलात ने कभी भी भारत में विलय का औपचारिक प्रस्ताव नहीं दिया। उन्होंने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा कि बलूचिस्तान की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि भारत में इसके विलय का सवाल ही पैदा नहीं होता।</p>
<p>आज भी भारतीय अभिलेखागार में ऐसा कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है जो यह साबित करे कि भारत ने कभी कलात के विलय पर विचार किया था।</p>
<p><strong>आज बलूचिस्तान क्यों है बेहद खास?</strong><br>
इतिहास के विवादों से इतर, आज बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक क्षेत्र बन चुका है। इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं:</p>
<p><strong>विशाल भूभाग और संसाधन: </strong>यह क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, जो देश के कुल 44 फीसदी हिस्से को कवर करता है (हालांकि यहां की आबादी सबसे कम है)। यह इलाका प्राकृतिक गैस, कोयला, तांबा और सोने जैसे बेशकीमती संसाधनों से समृद्ध है।</p>
<p><strong>ग्वादर पोर्ट और CPEC:</strong> अरब सागर के तट पर स्थित ग्वादर पोर्ट बलूचिस्तान में ही है। यह बंदरगाह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का मुख्य केंद्र है, जो चीन के महत्वाकांक्षी 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) का एक फ्लैगशिप प्रोजेक्ट है।</p>
<p>शोषण का आरोप: बलूच राष्ट्रवादियों का आरोप है कि इस्लामाबाद उनके प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहा है, लेकिन इसका आर्थिक लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा। वहीं पाकिस्तान सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए कहती है कि CPEC जैसी परियोजनाओं से इलाके में नौकरियां और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हो रहा है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>बिना चुनाव बने नए प्रधानमंत्री! इस देश में लोगों ने डाले बिना वोट, ऐसे चुना गया नया PM</title>
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<description><![CDATA[ लंदन  ब्रिटेन में एक बार फिर ऐसा होने जा रहा है, जो कई देशों में मुमकिन नहीं है. यहां कोई नया चुनाव नहीं हुआ, किसी ने वोट नहीं डाला, लेकिन देश को नया प्रधानमंत्री मिल गया. लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेता और मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहैम सोमवार को आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन के … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 22:15:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>बिना, चुनाव, बने, नए, प्रधानमंत्री, इस, देश, में, लोगों, ने, डाले, बिना, वोट, ऐसे, चुना, गया, नया</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लंदन </strong><br>
ब्रिटेन में एक बार फिर ऐसा होने जा रहा है, जो कई देशों में मुमकिन नहीं है. यहां कोई नया चुनाव नहीं हुआ, किसी ने वोट नहीं डाला, लेकिन देश को नया प्रधानमंत्री मिल गया. लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेता और मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहैम सोमवार को आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री का पद संभालेंगे। </p>
<p>बर्नहैम मौजूदा प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर की जगह लेंगे. स्टार्मर ने पिछले महीने लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया था. इसके बाद पार्टी के भीतर नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई. इस मुकाबले में बर्नहैम इकलौते उम्मीदवार रहे, जिन्हें लेबर पार्टी के 401 सांसदों में से 349 का समर्थन मिला। </p>
<p>ब्रिटेन की संसदीय व्यवस्था में प्रधानमंत्री का चुनाव सीधे जनता नहीं करती. आम चुनाव में लोग सांसद चुनते हैं. जिस पार्टी को संसद में बहुमत मिलता है, उसका नेता ही प्रधानमंत्री बनता है. अगर कार्यकाल के बीच पार्टी अपना नेता बदल देती है, तो नया नेता बिना आम चुनाव कराए सीधे प्रधानमंत्री बन सकता है। </p>
<p><strong>किएर स्टार्मर सोमवार को इस्तीफा देंगे</strong><br>
किएर स्टार्मर सोमवार को पहले किंग चार्ल्स तृतीय से मुलाकात कर औपचारिक रूप से इस्तीफा देंगे. इसके बाद एंडी बर्नहैम बकिंघम पैलेस पहुंचेंगे, जहां राजा उन्हें नई सरकार बनाने का न्योता देंगे. इस औपचारिक प्रक्रिया के बाद वह ब्रिटेन के 59वें प्रधानमंत्री बन जाएंगे और 10 डाउनिंग स्ट्रीट पहुंचकर अपना पहला संबोधन देंगे। </p>
<p><strong>किएर स्टार्मर क्यों दे रहे इस्तीफा?</strong><br>
स्टार्मर ने जून में इस्तीफे की घोषणा की थी. उनके कार्यकाल के दौरान कई राजनीतिक विवाद सामने आए. खास तौर पर अमेरिका में ब्रिटेन के राजदूत के रूप में जेफ्री एपस्टीन से जुड़े व्यक्ति की नियुक्ति को लेकर उनकी काफी आलोचना हुई. मई में स्थानीय निकाय चुनावों में लेबर पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद भी पार्टी के भीतर उनके खिलाफ दबाव बढ़ गया था। </p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि पिछले एक दशक में ब्रिटेन के अधिकांश प्रधानमंत्री इसी तरह पार्टी के अंदर नेतृत्व परिवर्तन के जरिए सत्ता में आए हैं. थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस और ऋषि सुनक भी बिना नए आम चुनाव के प्रधानमंत्री बने थे. अब एंडी बर्नहैम इस सूची में शामिल होने वाले सातवें प्रधानमंत्री होंगे. उनकी नियुक्ति एक बार फिर दिखाती है कि ब्रिटेन की संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार बदलने के लिए हर बार आम चुनाव कराना जरूरी नहीं होता। </p>]]> </content:encoded>
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<title>US&#45;ईरान जंग हुई और खतरनाक, MQ&#45;9 ड्रोन तबाह, होर्मुज में तेल टैंकरों पर हमला और कई शहर मिसाइलों की चपेट में</title>
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<description><![CDATA[ तेहरान  अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग अब पूरी तरह से विनाशकारी मोड़ पर पहुंच चुकी है. सैन्य संघर्ष के बीच ईरान ने कई बड़े दावे किए हैं. ईरानी मीडिया और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुताबिक, ईरान ने बुशेहर के ऊपर उड़ान भर रहे एक अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 14:15:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तेहरान </strong></p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग अब पूरी तरह से विनाशकारी मोड़ पर पहुंच चुकी है. सैन्य संघर्ष के बीच ईरान ने कई बड़े दावे किए हैं. ईरानी मीडिया और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुताबिक, ईरान ने बुशेहर के ऊपर उड़ान भर रहे एक अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है. ईरानी मीडिया ने दावा किया कि करीब 3.4 करोड़ डॉलर कीमत वाला यह ड्रोन कुछ ही पलों में नष्ट हो गया। </p>
<p>इसी बीच ईरान के सरकारी टीवी और तसनीम  समाचार एजेंसी ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिण में दो ऑयल टैंकर माइनफील्ड से गुजरने के दौरान विस्फोट का शिकार हो गए और उनमें भीषण आग लग गई. ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी कैंपों और ठिकानों को निशाना बनाया है। </p>
<p>ईरानी मीडिया का दावा है कि अमेरिका की दर्जनों एयर डिफेंस मिसाइलें छोड़े जाने के बावजूद, ईरान की मिसाइलों ने जॉर्डन के उस मुवाफ़्फ़क साल्टी एयर बेस पर अटैक किया है जहां अमेरिकी सेना मौजूद है. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी नौसेना की चेतावनी के बावजूद दोनों टैंकर आगे बढ़े, जिसके बाद वे कथित तौर पर बारूदी सुरंगों वाले क्षेत्र में पहुंच गए. IRGC ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के कारण होर्मुज स्ट्रेट अब पूरी तरह असुरक्षित और बंद है। </p>
<p>ईरान की सरकारी मीडिया तस्नीम ने 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) की नौसेना के हवाले से कहा कि अमेरिकी आक्रामकता और हमलों के कारण होर्मज  इस समय "अत्यधिक असुरक्षित और पूरी तरह से बंद" है. ईरानी नौसेना ने पहले ही जहाजों को इस रूट से न गुजरने की चेतावनी दी थी, जिसे दोनों तेल टैंकरों ने नजरअंदाज कर दिया था. इस घटना के बाद वैश्विक तेल बाजार में हाहाकार मचने की आशंका है। </p>
<p><strong>समझौते के बावजूद तनातनी</strong><br>
ईरान और अमेरिका के बीच शुरुआती समझौते के बावजूद कई मुद्दों पर तनातनी बरकरार है। इसमें सबसे अहम मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य का है। हर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से फीस लेने के मामले पर विवाद है। ईरान इस मुद्दे पर पीछने हटने को राजी नहीं है। वहीं अमेरिका का कहना है कि वह होर्मुज में टोल व्यवस्था को लागू नहीं होने दिया जाएगा।</p>
<p>ईरान का कहना है कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाज निगरानी में ही इस समुद्री रास्ते को पार करेंगे। हालिया विवाद की वजह भी कुछ जहाजों का ईरान के तय रूट को ना मानना है। इसके अलावा लेबनान और कुछ दूसरे मुद्दों पर भी दोनों पक्षों की ओर से आ रहे बयान अलग-अलग तरह के हैं। इससे दोनों देशों में शांति की उम्मीदों को झटका लगा है।</p>
<p><strong>ईरान के यज्द और अहवाज शहरों पर मिसाइल हमले</strong><br>
समुद्र और आसमान में जारी इस तबाही के बीच, अमेरिकी वायुसेना ने ईरान की मुख्य भूमि पर हमलों का दायरा बढ़ा दिया है. ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश के कई हिस्सों में सिलसिलेवार बड़े धमाके सुने गए हैं:</p>
<p><strong>यज्द प्रांत </strong>: ईरान की तस्नीम एजेंसी के मुताबिक, मध्य ईरान के ऐतिहासिक शहर यज्द में एक के बाद एक 5 भीषण विस्फोट सुने गए हैं। </p>
<p><strong>फार्स प्रांत:</strong> दक्षिण-पश्चिम फार्स प्रांत के लास इलाके के बाहरी हिस्सों में भी बड़े धमाके की पुष्टि हुई है। </p>
<p><strong>अहवाज: ईरान की 'मेहर' न्यूज एजेंसी </strong>के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी खुज़ेस्तान प्रांत के प्रमुख शहर अहवाज पर अमेरिकी मिसाइलों से बड़ा हमला किया गया है, जिसकी पुष्टि स्थानीय अधिकारियों ने भी की है। </p>
<p>ईरान पर अमेरिका की लगातार सातवें दिन भीषण बमबारी, ट्रंप ने ग्राउंड ऑपरेशन के भी दिए संकेत </p>
<p>चौतरफा मिसाइल हमलों, ड्रोन को मार गिराए जाने और तेल टैंकरों में लगी आग के बाद खाड़ी क्षेत्र पूरी तरह से बारूद के ढेर पर बैठ गया है. संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक समुदाय इस महाविनाश को रोकने में अब तक पूरी तरह बेअसर साबित हुए हैं. अमेरिका की ओर से भी MQ-9 ड्रोन गिराए जाने, टैंकरों में विस्फोट या ईरान के विभिन्न शहरों में हमलों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>PoK के गिलगित&#45;बाल्टिस्तान को पांचवां प्रांत बनाने की तैयारी में पाकिस्तान तेज हुआ</title>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 10:00:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>PoK, के, गिलगित-बाल्टिस्तान, को, पांचवां, प्रांत, बनाने, की, तैयारी, में, पाकिस्तान, तेज, हुआ</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
पाकिस्तान ने एक बार फिर अपने नापाक इरादों से बाज नहीं आ रहा है. कारण, पड़ोसी मुल्क ने PoK के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र को अपना पांचवां प्रांत बनाने की दिशा में एक बड़ा और विवादास्पद कदम उठाया है. गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर पाकिस्तान सरकार से संविधान में संशोधन कर इस क्षेत्र को देश का पांचवां प्रांत घोषित करने की मांग की है.</p>
<p>प्रस्ताव को अब पाकिस्तान की संसद के पास भेजा जाएगा. यदि संसद संविधान संशोधन को मंजूरी देती है तो गिलगित-बाल्टिस्तान को औपचारिक रूप से पाकिस्तान का प्रांत बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. प्रस्ताव में इस क्षेत्र को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली और सीनेट में प्रतिनिधित्व देने की भी मांग की गई है.</p>
<p>यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा और खैबर पख्तूनख्वा में उभरते विद्रोह जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम के जरिए सरकार और सेना आंतरिक संकट से ध्यान हटाने के साथ-साथ कब्जे वाले क्षेत्र पर अपना दावा मजबूत दिखाने की कोशिश कर रही हैं.</p>
<p><strong>चुनाव के बाद बदला राजनीतिक समीकरण</strong><br>
7 जून को हुए गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा चुनाव में धांधली के आरोपों के बीच बिलावल भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के बाद PPP और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के बीच गठबंधन हुआ. सत्ता साझेदारी के तहत मुख्यमंत्री और स्पीकर का पद PPP को, जबकि गवर्नर और डिप्टी स्पीकर का पद PML-N को मिला. इसके बाद ही विधानसभा ने पांचवां प्रांत बनाने का प्रस्ताव पारित किया.</p>
<p>फिलहाल पाकिस्तान के संविधान में केवल पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा ही आधिकारिक प्रांत हैं. गिलगित-बाल्टिस्तान अब तक एक सीमित स्वायत्त व्यवस्था के तहत चलता रहा है. नए प्रस्ताव को पाकिस्तान द्वारा इस कब्जे वाले क्षेत्र को अपने संविधान में शामिल करने की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है.</p>
<p><strong>2019 से जुड़ा है मामला</strong><br>
भारत द्वारा अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 और 35A हटाने के बाद पाकिस्तान ने पहली बार गिलगित-बाल्टिस्तान को पांचवां प्रांत बनाने की योजना सार्वजनिक की थी. हालांकि तत्कालीन इमरान खान सरकार इसे लागू नहीं कर सकी थी. अब शहबाज शरीफ सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है.</p>
<p>भारत का स्पष्ट और लगातार यही रुख रहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर, जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है. भारत पाकिस्तान के ऐसे किसी भी एकतरफा कदम को न तो मान्यता देता है और न ही उसे कानूनी वैधता स्वीकार करता है. भारत पहले भी इस मुद्दे पर पाकिस्तान के कदमों का विरोध दर्ज करा चुका है.</p>]]> </content:encoded>
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<title>चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी हमला, भारत के रणनीतिक निवेश पर बढ़ा संकट</title>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 10:00:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>चाबहार, पोर्ट, पर, अमेरिकी, हमला, भारत, के, रणनीतिक, निवेश, पर, बढ़ा, संकट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
ईरान के चाबहार पोर्ट पर भीषण अमेरिकी हमले में आखिरकार इस पोर्ट का आइकॉनिक मैरीटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टावर ध्वस्त हो गया. इस टावर को गिराने के लिए अमेरिकी ने एक नहीं तीन तीन बार हमले किए. पहला हमला 8 जुलाई को हुआ, 15 जुलाई को अमेरिका ने इस पर फिर मिसाइल दागे, लेकिन 16 जुलाई का रात को भीषण हमले के बाद आखिरकार ये टावर ध्वस्त हो गया. चाबहार तेहरान का मुख्य समुद्री गेटवे है जो होर्मुज स्ट्रेट से होकर नहीं गुजरता है. चाबहार का ट्रैफिक कंट्रोल तबाह होने से शिपिंग में रुकावट आ सकती है, लागत बढ़ सकती है और खाड़ी के बाहर ईरान की बची हुई कुछ आर्थिक जीवनरेखाओं में से एक पर और दबाव पड़ सकता है.</p>
<p>ईरान की फार्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार चाबहार फ्री जोन ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख मोहम्मद सईद अरबाबी ने पुष्टि की कि जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाला टावर नष्ट हो गया है.</p>
<p>ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि हमलों में बंदरगाह पर दो समुद्री पियर्स (घाट) को भी नुकसान पहुंचा है. जिनमें शहीद बेहेश्ती डॉक भी शामिल है. यह समुद्र के किनारे विकसित एक समुद्री परिवहन सुविधा है. इसे भारत की भागीदारी से विकसित किया गया था.</p>
<p>अमेरिकी हमले में स्थानीय पुलिस स्टेशन के डॉक को भी नुकसान पहुंचा है. हमलों के कारण चाबहार के लगभग आधे हिस्से में बिजली चली गई.</p>
<p>चाबहार ईरान का वो इलाका है, जहां भारत का तगड़ा निवेश है. यहां भारत 120 मिलियन डॉलर यानी कि लगभग साढ़े 11 अरब रुपये निवेश कर चुका है.  अमेरिका के इस हमले में भारत का निवेश भी प्रभावित हुआ है. अमेरिकी हमले में जो मैरीटाइम ट्रैफिक टावर गिरा है, वो शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल पर ही बना हुआ है. शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को भारत ने ही बनाया है.</p>
<p>भारत ने चाबहार परियोजना में पिछले कई वर्षों से बड़ा निवेश किया है. 2024 में इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड ने ईरान के साथ 10 वर्ष का संचालन समझौता किया था, जिसके तहत लगभग 37 करोड़ डॉलर (370 मिलियन डॉलर) तक के निवेश और विकास की योजना बनाई गई थी.  यह बंदरगाह भारत के लिए इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पाकिस्तान को दरकिनार कर व्यापारिक पहुंच मिलती है. चाबहार ईरान का एक मात्र पोर्ट है जो हिंद महासागर से जुड़ा है.</p>
<p>चाबहार पोर्ट में दो टर्मिनल हैं. शाहिद बेहेश्ती और शाहिद कलंतरी. इन टर्मिनल में कई बर्थ और कार्गो संभालने की आधुनिक सुविधाएं हैं. भारत सरकार की कंपनी 'इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड' (IPGL) 2018 से शहीद बेहेश्ती टर्मिनल का कामकाज संभाल रही है.</p>
<p>मई 2024 में ईरान के साथ हुए 10 वर्षीय समझौते के तहत IPGL को इस टर्मिनल के जनरल कार्गो और कंटेनर टर्मिनल का संचालन सौंपा गया था.</p>
<p><strong>IPGL चाबहार में क्या-क्या काम कर रही थी?</strong><br>
IPGL चाबहार के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल का संचालन और जहाजों की आवाजाही का प्रबंधन कर रही थी. इसके अलावा कंटेनर और बल्क कार्गो की लोडिंग-अनलोडिंग व्यवस्था को आधुनिक बनाने का जिम्मा भी IPGL के पास था.</p>
<p>बंदरगाह के लिए मोबाइल हार्बर क्रेन, रीच स्टैकर, फोर्कलिफ्ट और अन्य कार्गो हैंडलिंग उपकरण उपलब्ध कराने का जिम्मा भी भारत की कंपनी IPGL के पास है.</p>
<p>अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार अमेरिकी हमलों में सबसे अधिक नुकसान Maritime Traffic Control प्रणाली को हुआ है. अमेरिकी हमले में मैरीटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टावर तबाह हो गया है और बंदरगाह की नेविगेशन और जहाजों की आवाजाही की निगरानी प्रभावित हुई.</p>
<p><strong>भारत ने कितना निवेश किया है</strong><br>
2024 में ईरान के पोर्ट्स एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइज़ेशन के साथ 10 साल का ऑपरेशनल एग्रीमेंट साइन करने के बाद से भारत ने चाबहार में लगभग 120 मिलियन अमेरिकी डॉलर (साढ़े 11 अरब रुपये) का निवेश किया है. अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से यहां भारत का निवेश और काम की गति प्रभावित हो रही है.</p>
<p>ताजा अमेरिकी हमले से भारत के इस रणनीतिक निवेश पर अनिश्चितता बढ़ गई है. यदि बंदरगाह लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो भारत की इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से जुड़ी योजनाओं, अफगानिस्तान को मानवीय सहायता और मध्य एशिया के साथ व्यापारिक संपर्क पर असर पड़ सकता है. बीमा लागत, समुद्री मालभाड़ा और जहाजों की आवाजाही भी महंगी होने की आशंका है. बता दें कि अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां और बीमा कंपनियां ईरान से जुड़े जोखिम के कारण दूरी बनाती रहीं हैं.</p>
<p>इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) भारत, ईरान, रूस और मध्य एशियाई देशों को जोड़ने वाला लगभग 7,200 किलोमीटर लंबा समुद्री, रेल और सड़क व्यापार मार्ग है.</p>
<p>इसका उद्देश्य भारत से रूस और यूरोप तक माल पहुंचाने का समय और लागत कम करना है, जिसमें ईरान का चाबहार पोर्ट और बंदर अब्बास अहम कड़ियां हैं.</p>
<p><strong>क्या भारत का निवेश डूब गया?</strong><br>
भारत का निवेश डूब गया, ऐसा कहना ठीक नहीं होगा. अमेरिकी प्रतिबंध के बीच भारत चाबहार में अपने निवेश पर धीरे धीरे काम कर रहा है. लेकिन अमेरिकी हमले निश्चित रूप से भारत के लिए झटका हैं.  भारत अपने स्तर पर लगातार अमेरिकी प्रशासन से संपर्क में है. गौरतलब है कि चाबहार से न सिर्फ ईरान का फायदा है बल्कि अफगानिस्तान के लिए भी व्यापारिक गतिविधियों में उतरने का मौका है.</p>
<p>भारत के लिए असली चिंता प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान से ज्यादा रणनीतिक नुकसान है. चाबहार भारत की उस योजना का केंद्र है, जिसके जरिए वह पाकिस्तान को बायपास कर अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस तक पहुंच बनाना चाहता है. यदि हमलों के कारण बंदरगाह का संचालन लंबे समय तक बाधित रहता है, तो व्यापार, शिपिंग, बीमा लागत और INSTC कॉरिडोर की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं.</p>
<p>अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस निवेश से अपेक्षित आर्थिक और रणनीतिक लाभ मिलने की गति काफी धीमी हो गई है, और हर नए प्रतिबंध या सैन्य तनाव के साथ परियोजना पर अनिश्चितता बढ़ जाती है.</p>]]> </content:encoded>
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<title>चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी हमले का दावा, भारत के निवेश पर बढ़ी चिंता</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली पश्चिम एशिया में चल रहा भीषण युद्ध एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर आ गया है। अमेरिका ने अब ओमान की खाड़ी में स्थित ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद अहम चाबहार पोर्ट को तबाह करने का दावा किया है। इस पोर्ट पर भारत लंबे समय से निवेश करता आया है। जानकारी … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 20:00:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
पश्चिम एशिया में चल रहा भीषण युद्ध एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर आ गया है। अमेरिका ने अब ओमान की खाड़ी में स्थित ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद अहम चाबहार पोर्ट को तबाह करने का दावा किया है। इस पोर्ट पर भारत लंबे समय से निवेश करता आया है। जानकारी के मुताबिक अमेरिका ने शुक्रवार को चाबहार बंदरगाह पर कम से कम 3 मिसाइलें दागी हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में तबाही का मंजर साफ नजर आ रहा है।</p>
<p>अमेरिकी हमले में बंदरगाह का एक निगरानी टॉवर बढ़ गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी सोशल मीडिया पर इस हमले की तस्वीरें भी साझा की है। वीडियो में धुएं और धूल के गुबार के बीच एक टॉवर जैसी संरचना भरभराकर गिरती हुई दिखाई दे रही है। हालांकि ईरानी मीडिया ने बंदरगाह पर लगातार तीसरे दौर के हमलों की पुष्टि तो की है, लेकिन टॉवर के गिरने की बात को अभी आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया है।</p>
<p><strong>अमेरिकी हमले में कई मरे</strong><br>
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद अमेरिका ने ईरान पर एक बार फिर बमबारी शुरू कर दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया है कि अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह से नष्ट करने के लिए लगातार छठी रात भी ईरान पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, रातों-रात हुए इन अमेरिकी हमलों में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 20 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। वहीं ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से एएफपी ने बताया कि 22 जून को नए सिरे से शुरू हुई इस जंग में ईरान में मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 38 हो गई है, जबकि 400 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं।</p>
<p><strong>बुनियादी ढांचे को किया तबाह</strong><br>
ईरान की स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने बुनियादी ढांचे पर हमले किए हैं। दक्षिणी प्रांत होर्मोजगान में छह पुलों को निशाना बनाया गया। इसके अलावा बंदर अब्बास के हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास 2 पुलों पर भी अमेरिकी बम गिरे हैं। इधर ईरान के एकमात्र सिविल न्यूक्लियर प्लांट वाले शहर बुशहर में भी 2 जोरदार धमाके सुने गए हैं, जिससे हड़कंप मच गया है।</p>
<p><strong>ईरान ने खाड़ी देशों को दहलाया</strong><br>
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान की सेना रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी बड़ा पलटवार करने का दावा किया है। ईरान का दावा है कि उसने ओमान में स्थित 2 अमेरिकी रडार साइटों को निशाना बनाकर पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। इनमें से एक रडार का इस्तेमाल समुद्री निगरानी के लिए और दूसरे का हवाई निगरानी के लिए किया जाता था। ईरान ने कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाने की बात कही है। इस बीच जॉर्डन की सेना ने बताया कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में ईरान की तीन मिसाइलों को मार गिराया है। शुक्रवार तड़के बहरीन और कतर से भी हमलों की खबरें सामने आई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।</p>
<p><strong>चाबहार पोर्ट में भारत का निवेश</strong><br>
गौरतलब है कि चाबहार ईरान के दक्षिण-पूर्वी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित एक अहम बंदरगाह है। इस समुद्री क्षेत्र को भारत लंबे समय से एक रणनीतिक वैकल्पिक मार्ग के रूप में देखता रहा है। चाबहार पोर्ट इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के लिए काफी अहमियत रखता है। इस रूट से भारत की यूरोप तक पहुंच आसान हो जाती। वहीं रूस और खुद ईरान को भी इसका फायदा होता। 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ईरान दौरे पर भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए चाबहार पोर्ट को विकसित और संचालित करने के लिए 55 करोड़ डॉलर निवेश का ऐलान भी किया था।</p>]]> </content:encoded>
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<title>ट्रंप का चीन पर बड़ा आरोप, चुनावी दखल के सबूत सार्वजनिक करने का दावा</title>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 18:00:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ट्रंप, का, चीन, पर, बड़ा, आरोप, चुनावी, दखल, के, सबूत, सार्वजनिक, करने, का, दावा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर चीन पर बड़ा इल्जाम लगाया है। गुरुवार को ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में एक बार फिर चीन की दखलअंदाजी का दावा किया। उन्होंने इसे साबित करने के लिए कुछ संवेदनशील खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की बात कही है। खास बात यह है कि ट्रंप का यह दावा अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के दावे के बिल्कुल उलट है। खुफिया एजेंसियों ने साफ किया था कि 2020 के चुनावों में चीन की दखलंदाजी के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं।</p>
<p>बता दें कि ट्रंप का यह 25 मिनट का संबोधन आगामी नवंबर में होने वाले मिडटर्म इलेक्शन से ठीक पहले आया है। इन चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के सामने संसद के दोनों सदनों में अपना बहुमत बचाने की बड़ी चुनौती है। इससे पहले ट्रंप ने चुनावी धांधली को लेकर एक बात फिर बहस छेड़ दी है।</p>
<p><strong>चीन ने चुराया 22 करोड़ वोटर्स का डेटा</strong><br>
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उनके द्वारा सार्वजनिक की गई संवेदनशील जानकारियों से पता चलता है कि चीन ने अवैध रूप से 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं की फाइलें हासिल कर ली थीं। ट्रंप के मुताबिक इन फाइलों में मतदाताओं के नाम, पते और वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाला अन्य डेटा शामिल था। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी से जुड़े लोगों ने चीन की इन गतिविधियों की गंभीरता से जुड़ी जानकारियों को जानबूझकर दबाया और छिपाया।</p>
<p><strong>चीन ने खारिज किया दावा</strong><br>
ट्रंप के इस भाषण से पहले ही चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू चांग ने अपनी प्रतिक्रिया में साफ कहा, "चीन ने अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों में कभी हस्तक्षेप नहीं किया है और न ही कभी करेगा।" हालांकि ट्रंप के इस कदम से दोनों देशों के उन रिश्तों में फिर से खटास आने का खतरा पैदा हो गया है। इससे पहले पिछले साल ट्रेड वॉर के बाद संबंध अभी पटरी पर लौटने के संकेत मिले थे। ट्रंप बीते दिनों व्यापार संबंधों को सुधारने के लिए खुद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने चीन भी पहुंचे थे। हालांकि अब उनके इस दावे से बात बिगड़ सकती है।</p>
<p>दूसरी तरफ, अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्यों ने भी ट्रंप का दावा खारिज किया है। हाउस परमानेंट सेलेक्ट कमेटी ऑन इंटेलिजेंस के डेमोक्रेटिक सदस्यों ने कार्यवाहक राष्ट्रीय खुफिया निदेशक बिल पुल्टे, FBI, CIA और NSA के प्रमुखों को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रंप को चुनावी सुरक्षा के बारे में झूठे दावों का समर्थन करने के लिए खुफिया जानकारियों को हथियार बनाने की अनुमति न दी जाए। सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने भी आरोप लगाया कि इसके जरिए ट्रंप सरकार नवंबर के चुनावों में हेरफेर करने की कोशिश कर सकता है।</p>
<p><strong>चुनावों पर कंट्रोल बढ़ाने की कोशिश</strong><br>
गौरतलब है कि जनवरी 2025 में दोबारा सत्ता में लौटने के बाद से ही ट्रंप चुनावों पर केंद्रीय नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप हाल के महीनों में सीनेट के रिपब्लिकन सदस्यों पर 'सेव अमेरिका एक्ट' पारित करने का भी दबाव बना रहे हैं। इस कानून के तहत वोट देने के लिए फोटो आईडी और रजिस्ट्रेशन के लिए अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण देना अनिवार्य होगा। साथ ही राज्यों को वोटर रजिस्ट्रेशन की जानकारी संघीय सरकार के साथ साझा करनी होगी। हालांकि, डेमोक्रेट्स और वोटिंग राइट्स कार्यकर्ताओं का कहना है कि वोटर फ्रॉड बेहद दुर्लभ है और यह कानून वैध वोटों को दबाने का काम करेगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>रूसी तेल खरीद पर भारत पर बढ़ सकता है अमेरिकी टैरिफ का खतरा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली रूसी कच्चे तेल की खरीदारी करने वाले भारत समेत पांच देशों की मुश्किलें जल्द बढ़ सकती हैं। अमेरिका में एक नया बिल लाया जा रहा है, जिसमें भारत और चीन जैसे देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। इस बिल को 60 अमेरिकी सांसदों का समर्थन मिल चुका है। साथ ही, … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 14:45:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>रूसी, तेल, खरीद, पर, भारत, पर, बढ़, सकता, है, अमेरिकी, टैरिफ, का, खतरा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
रूसी कच्चे तेल की खरीदारी करने वाले भारत समेत पांच देशों की मुश्किलें जल्द बढ़ सकती हैं। अमेरिका में एक नया बिल लाया जा रहा है, जिसमें भारत और चीन जैसे देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। इस बिल को 60 अमेरिकी सांसदों का समर्थन मिल चुका है। साथ ही, इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी समर्थन हासिल है। सीनेट में इसके समर्थकों का मानना है कि यह बिल अगस्त से पहले पास हो सकता है।</p>
<p><strong>क्या है यह बिल और किसे करेगा प्रभावित?</strong><br>
'सेंक्शनिंग रशिया एक्ट ऑफ 2026' नाम के इस बिल के जरिए ट्रंप प्रशासन को यह अधिकार मिल जाएगा कि वे रूसी तेल और प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगा सकें। अमेरिकी सीनेटरों ने इसी हफ्ते साफ किया था कि यह टैरिफ मुख्य रूप से भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान को निशाना बनाकर लाया जा रहा है।</p>
<p>रूस को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले शीर्ष पांच देशों पर भी यह टैक्स लगाने का प्रावधान है। हालांकि, टैरिफ की सटीक दर कितनी होगी, यह अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा तय किया जाएगा। सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के नेता जॉन थ्यून इस बिल के प्रमुख समर्थकों में से एक हैं, जिससे उच्च सदन (सीनेट) में इसके पास होने की संभावना काफी बढ़ गई है।</p>
<p><strong>किन्हें मिली है इस बिल से छूट?</strong><br>
अमेरिका ने अपने सगे और पुराने दोस्तों यानी यूरोपीय देशों को राहत दी है। उन यूरोपीय सहयोगियों को टैरिफ से बड़ी राहत दी गई है, जो रूस के कुल प्राकृतिक गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और इसे लगातार कम करने के लिए अहम कदम उठा रहे हैं। यूएसटीआर हर 180 दिन में शीर्ष 5 खरीदारों का दोबारा आकलन करेगा।</p>
<p><strong>अमेरिका ने खुद को भी दी छूट</strong><br>
बिल में अमेरिका को भी अपने परमाणु रिएक्टरों के लिए इस्तेमाल होने वाले कम संवर्धित यूरेनियम की खरीद पर इस टैरिफ से बाहर रखा गया है। इस नए बिल में एक खास 'छूट का प्रावधान' भी शामिल है। इसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति चाहें तो राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए और संसद को उचित कारण बताकर किसी भी देश को इन प्रतिबंधों से छूट दे सकते हैं।</p>
<p><strong>भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?</strong><br>
'सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर' के अनुसार, जून महीने में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिसमें महीने-दर-महीने 34% की बड़ी उछाल देखी गई। जून में भारत ने करीब 4.5 अरब यूरो का रूसी कच्चा तेल खरीदा, जो रूस के कुल निर्यात का लगभग 36% हिस्सा है। इस आंकड़े के साथ चीन के बाद भारत रूसी तेल का दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया है।</p>
<p>जून में ही अमेरिका (वाशिंगटन) ने उस सामान्य लाइसेंस की मियाद को खत्म होने दिया, जो भारत समेत अन्य देशों को बिना अमेरिकी प्रतिबंधों के ऊर्जा खरीदने की अनुमति देता था।</p>
<p><strong>पहले के मुकाबले 'नरम' है नया बिल</strong><br>
गुरुवार को पेश किया गया यह नया बिल दरअसल 'सेंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025' का ही नरम रूप है। पिछले साल अप्रैल में अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए पुराने बिल में रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों (भारत सहित) पर 500 प्रतिशत तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था। अब नए बिल में टॉप लाइन टैरिफ को घटाकर 100% कर दिया गया है। साथ ही, इसका दायरा बड़े पैमाने पर कई देशों पर लागू करने के बजाय केवल पांच सबसे बड़े खरीदारों तक ही सीमित कर दिया गया है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान&#45;सऊदी तनाव में फंसा पाकिस्तान, युद्ध में उतरने की बढ़ी आशंका</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली ईरान और अमेरिका के बीच डील कराने में जुटा पाकिस्तान अब युद्ध में भी उतर सकता है. ऐसी अटकलें इसलिए लगाई जा रही हैं क्योंकि यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइलें दागी हैं. इस अटैक के बाद इस्लामाबाद को सऊदी और ईरान दोनों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना मुश्किल … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 13:45:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान-सऊदी, तनाव, में, फंसा, पाकिस्तान, युद्ध, में, उतरने, की, बढ़ी, आशंका</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
ईरान और अमेरिका के बीच डील कराने में जुटा पाकिस्तान अब युद्ध में भी उतर सकता है. ऐसी अटकलें इसलिए लगाई जा रही हैं क्योंकि यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइलें दागी हैं. इस अटैक के बाद इस्लामाबाद को सऊदी और ईरान दोनों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना मुश्किल हो सकता है.</p>
<p>पाकिस्तान ने पिछले साल सऊदी अरब के साथ एक डिफेंस डील पर साइन किए थे, जिसके बाद उसके हजारों सैनिक सऊदी अरब में तैनात हैं. अब ऐसी आशंका है कि सऊदी और ईरान के बीच तनाव बढ़ सकता है, जो पाकिस्तान को भी युद्ध में घसीट सकता है.</p>
<p><strong>ये हमारी रेड लाइन है: PAK</strong><br>
पाकिस्तान के एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया, 'हमारी सरकार और फील्ड मार्शल ने ईरान की टॉप लीडरशिप को क्लीयर कर दिया है कि सऊदी अरब पर हमले पाकिस्तान पर हमले हैं. यह हमारी रेड लाइन है.'</p>
<p>इस्लामाबाद ने पहले ही सऊदी अरब पर ईरान के हमलों को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन अधिकारियों और विश्लेषकों ने रॉयटर्स को बताया कि हाल ही में हुए हूती हमलों ने इस्लामाबाद की चिंता को काफी बढ़ा दिया है. सिक्योरिटी एक्सपर्ट मुहम्मद आमिर राणा ने कहा कि पाकिस्तान को इतनी जल्दी तनाव बढ़ने की उम्मीद नहीं थी. अधिकारियों को यह भी आशंका है कि हूती विद्रोहियों के और हमले सऊदी-यमन सीमा के पास तैनात पाकिस्तानी सैनिकों की सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं और रियाद के साथ हुए रक्षा समझौते के तहत इस्लामाबाद पर जवाबी कार्रवाई करने का दबाव बढ़ा सकते हैं.</p>
<p><strong>पाकिस्तान को क्या है चिंता?</strong><br>
रिटायर्ड पाकिस्तानी जनरल गुलाम मुस्तफा ने कहा कि लीडरशिप अभी भी दोनों पक्षों को शांत करने में लगी हुई है. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हूती सऊदी अरब के अंदर अपने हमले बढ़ाते हैं तो हालात बदल सकते हैं. इस्लामाबाद को ये भी चिंता है कि इस रीजन में संघर्ष से लाल सागर के माध्यम से होने वाला समुद्री व्यापार बाधित हो सकता है.</p>
<p><strong>पाकिस्तान की मध्यस्थता ईरान को होगी स्वीकार?</strong><br>
 रिपोर्ट के मुताबिक, हूती-सऊदी के बीच हालिया तनाव ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका को और अधिक कठिन बना दिया है, हालांकि पिछले महीने दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौते में मध्यस्थता करने में पाकिस्तान ने मदद की थी. एक पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि बढ़ती निराशा के बावजूद पाकिस्तान मध्यस्थता के लिए प्रतिबद्ध है.</p>
<p>पाकिस्तानी अधिकारी ने रॉयटर्स से कहा, 'हां निराशा तो है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता को छोड़ रहे हैं. हमने इसमें बहुत निवेश किया है और हम इसे जारी रखने में रुचि रखते हैं.'</p>
<p> पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने गुरुवार को सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी. उन्होंने कहा, 'निरंतर जुड़ाव, संवाद और कूटनीति का कोई विकल्प नहीं है.'</p>]]> </content:encoded>
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<title>नेपाल में युवक की मौत पर बवाल, बालेन शाह सरकार पर बढ़ा जनता का दबाव</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली नेपाल की राजधानी काठमांडू की सड़कों पर इन दिनों भारी उबाल है। वजह है 25 साल के एक युवक की दर्दनाक मौत, जिसने सिस्टम की बेरुखी और कर्ज के तनाव में आकर सरेआम खुद को आग के हवाले कर दिया। गणेश नेपाली नाम का यह युवक अब बालेन्द्र शाह सरकार के खिलाफ चल … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 12:45:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>नेपाल, में, युवक, की, मौत, पर, बवाल, बालेन, शाह, सरकार, पर, बढ़ा, जनता, का, दबाव</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
नेपाल की राजधानी काठमांडू की सड़कों पर इन दिनों भारी उबाल है। वजह है 25 साल के एक युवक की दर्दनाक मौत, जिसने सिस्टम की बेरुखी और कर्ज के तनाव में आकर सरेआम खुद को आग के हवाले कर दिया। गणेश नेपाली नाम का यह युवक अब बालेन्द्र शाह सरकार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों का सबसे बड़ा चेहरा बन गया है। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि बढ़ते बवाल को देखते हुए चल रहे संसद सत्र तक को स्थगित करना पड़ा है। जेन-जी यानी युवा वोटर्स के भारी समर्थन से महज चार महीने पहले सत्ता में आई बालेन्द्र शाह की सरकार के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा संकट बन गया है।</p>
<p><strong>कैसे घटी यह दिल दहला देने वाली घटना?</strong><br>
घटना 10 जुलाई की है। गणेश नेपाली एक राइड-शेयरिंग ऐप के लिए बाइक चलाकर अपने परिवार का पेट पालता था। काठमांडू में पासपोर्ट विभाग के बाहर कथित तौर पर रास्ता ब्लॉक करने के आरोप में पुलिस ने उसकी मोटरसाइकिल के पहियों पर क्लैंप लगा दिया।</p>
<p>मोटरसाइकिल ही उसकी रोजी-रोटी का इकलौता साधन थी। इस बात पर उसकी एक अधिकारी से तीखी बहस हो गई और धक्का-मुक्की हुई। पुलिस की इस कार्रवाई से गणेश इस कदर टूट गया कि उसने अपनी ही बाइक से पेट्रोल निकाला, खुद पर छिड़का और आग लगा ली। 60% से ज्यादा जल चुके गणेश को तुरंत एक टॉप अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन जिंदगी और मौत के बीच एक दिन की जंग लड़ने के बाद उसने दम तोड़ दिया।<br>
कर्ज का बोझ और विदेश जाने का था सपना</p>
<p>गणेश का परिवार नेपाल के एक बेहद पिछड़े इलाके 'मुगु' से आता है। उसके माता-पिता सीमांत किसान हैं जो सरकारी पेंशन के सहारे गुजर-बसर करते हैं। बड़े भाई मदन नेपाली के मुताबिक गणेश ने यह बाइक लोन पर ली थी और उसकी अगली किस्त की तारीख बेहद करीब थी। पुलिस द्वारा बाइक जब्त किए जाने के बाद उसे किस्त चुकाने और परिवार पालने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था, जिससे वह गहरे तनाव में चला गया।</p>
<p>दोनों भाई दलित समुदाय से हैं। मदन खुद सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा धारक होने के बावजूद काठमांडू में मजदूरी करने को मजबूर है। दोनों भाइयों का सपना पैसे जोड़कर खाड़ी देशों और फिर जापान या दक्षिण कोरिया जाने का था।</p>
<p><strong>बैकफुट पर आई सरकार, किया डैमेज कंट्रोल</strong><br>
इस घटना के बाद नेपाल में पहले से चल रहे कई विरोध प्रदर्शनों को और हवा मिल गई। विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। गृह मंत्री सुधन गुरुंग ने विपक्ष पर इस मौत पर राजनीति करने का आरोप लगाया, जिससे जनता का गुस्सा और भड़क गया।</p>
<p><strong>हालात बेकाबू होते देख सरकार ने तुरंत डैमेज कंट्रोल शुरू किया</strong><br>
सरकार ने गणेश की 20 वर्षीय पत्नी एकमाया परियार के लिए सरकारी नौकरी और 2 साल की बेटी की शिक्षा का खर्च उठाने का ऐलान किया है। आईटी में डिप्लोमा कर चुकी एकमाया गर्भवती हैं। उनके पास 'नागरिकता प्रमाण पत्र' नहीं था। गृह मंत्री गुरुंग ने खुद जाकर उन्हें यह सर्टिफिकेट सौंपा ताकि उन्हें सरकारी राहत मिल सके। मौत की जांच के लिए डीआईजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में 5 सदस्यीय टीम बनाई गई है। खबरों के मुताबिक, सरकार गणेश को "शहीद" का दर्जा भी दे सकती है।</p>
<p>जिस जेन-जी ने बालेन शाह को कुर्सी पर बिठाया वही अब अपने पीएम के खिलाफ है। अगर ये गुस्सा बढ़ता गया तो बहुत जल्द बालेन शाह का काला चश्मा भी उतर सकता है। यही वजह है कि विपक्ष की बालेन के काले चश्मे पर तंज कस रहा है और उसे निकालने की हिदायत दे रहा है। बता दें कि नेपाली पीएम बालेन अपने स्टाइलिश लुक के लिए खासा चर्चा में रहते हैं। वे अक्सर बंद कमरे में भी काला चश्मा पहने दिखते हैं।</p>
<p><strong>सिर्फ गणेश की मौत नहीं, इन वजहों से भी है उबाल</strong><br>
गणेश की मौत तो सिर्फ एक चिंगारी थी, असल में नेपाल की जनता में सरकार के खिलाफ कई और मुद्दों को लेकर भी बारूद इकट्ठा हो रहा था। बालेन्द्र शाह सरकार के कुछ फैसलों ने लोगों को नाराज कर रखा है।</p>
<p>    ट्रेड यूनियनों और छात्र संगठनों को भंग करना।<br>
    संसद को दरकिनार करते हुए सीधे अध्यादेश पास करना।<br>
    अप्रैल में काठमांडू में चलाए गए डिमोलिशन ड्राइव यानी अतिक्रमण हटाओ अभियान में हजारों लोग बेघर हो गए थे।</p>
<p>सोमवार को जब पशुपतिनाथ मंदिर के पास गणेश का अंतिम संस्कार किया गया, तो वहां उसके 700 किलोमीटर दूर से आए बूढ़े माता-पिता के साथ-साथ अतिक्रमण अभियान में बेघर हुए कई परिवार भी मौजूद थे। हालात को शांत करने के लिए अब सरकार लगातार प्रदर्शनकारियों से बातचीत की कोशिश कर रही है। पीएम के प्रमुख सचिव ने 50,000 से ज्यादा संविदा कर्मचारियों से भी हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने की अपील की है और उन्हें नौकरी से न निकालने का भरोसा दिया है।</p>
<p><strong>विपक्ष का तंज- 'काले चश्मे उतारें पीएम'</strong><br>
नेपाली कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेर लिया है। संसद में नेपाली कांग्रेस की सांसद बसाना थापा ने पीएम बालेन शाह पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि प्रधानमंत्री अपने 'काले चश्मे' उतारें और जनता की हकीकत का सामना करें। वहीं, दूसरी तरफ गृह मंत्री सुधन गुरुंग ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि विपक्षी दल गणेश नेपाली की दुखद मौत पर राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं और युवाओं को भड़का रहे हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>Iran Hit List: ट्रंप के साथ मेलोनी&#45;मैक्रों भी निशाने पर? अखबार में छपी तस्वीर ने बढ़ाई हलचल, बदले की चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ तेहरान / वाशिंगटन ईरान के सरकारी अखबार हमशहरी ने खामेनेई की मौत के लिए 13 वर्ल्ड लीडर्स को जिम्मेदार ठहराते हुए उनकी तस्वीरें छापी हैं। इनमें ट्रम्प, नेतन्याहू, मेलोनी, मैक्रों समेत बड़े लीडर्स के नाम शामिल हैं। तस्वीरों में सभी लीडर्स को नारंगी रंग की जेल यूनिफॉर्म में दिखाया गया है। हिट लिस्ट में पहले … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:15:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तेहरान / वाशिंगटन</strong></p>
<p>ईरान के सरकारी अखबार हमशहरी ने खामेनेई की मौत के लिए 13 वर्ल्ड लीडर्स को जिम्मेदार ठहराते हुए उनकी तस्वीरें छापी हैं। इनमें ट्रम्प, नेतन्याहू, मेलोनी, मैक्रों समेत बड़े लीडर्स के नाम शामिल हैं। तस्वीरों में सभी लीडर्स को नारंगी रंग की जेल यूनिफॉर्म में दिखाया गया है।</p>
<p>हिट लिस्ट में पहले नंबर पर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, दूसरे नंबर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हैं, जिनके सिर पर (Target) निशाना बना हुआ है। इस हिट लिस्ट के पब्लिश होने से पहले ही ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अपने पिता की मौत का बदला लेने की बात कह चुके हैं।</p>
<p><strong>हिट लिस्ट में ट्रम्प-नेतन्याहू समेत ये बड़े चेहरे</strong><br>
हमशहरी अखबार में सिर्फ ट्रम्प और नेतन्याहू ही नहीं, बल्कि अमेरिका, इजराइल और यूरोप के कई बड़े नेताओं की तस्वीरें छापी हैं। इनमें, हिट लिस्ट में सबसे ऊपर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हैं। उनके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का नाम है।</p>
<p>इसके अलावा इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज, अमेरिकी सेंटकॉम कमांडर ब्रैड कूपर, US रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, इजराइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी, IDF चीफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जामिर, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री <strong>कीर स्टार्मर को भी इस लिस्ट में दिखाया गया है।</strong></p>
<p><strong>इन नेताओं को माना गया खामेनेई की मौत के लिए जिम्मेदार</strong><br>
ईरान के इस सरकारी अखबार ने इजरायल, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली के इन सभी बड़े नेताओं को सीधे तौर पर अपने सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत का जिम्मेदार ठहराया है. इस लिस्ट के सामने आने के बाद से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं। <br>
ईरान ने यूरोपीय देशों पर आरोप लगाया कि जंग के दौरान उसके इलाके पर हुए हमलों की निंदा करने में नाकाम रहे. अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की इजाजत देकर हमलों में शामिल रहे. युद्ध शुरू होने के बाद से मोजतबा खामेनेई को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है. खबरों के मुताबिक जिस हमलों में उनके पिता मारे गए थे वे भी घायल हो गए थे। </p>
<p><strong>मुज्तबा खामेनेई ने कहा- बदला लेना जरूरी है</strong></p>
<p>मुज्तबा खामेनेई ने कहा था कि बदला लेना जरूरी है. बदला लेना हमारे देश की इच्छा है. इसे हर हाल में पूरा किया जाना चाहिए. ये अपराधी जिनके नाम लिस्ट में हैं, अपने बिस्तर पर शांति से मरने की इच्छा के साथ ही कब्र में ले जाएंगे। ईरान के सर्वोच्च नेता ने कहा था कि ईरान ने उन लोगों की लिस्ट तैयार की है, जिन्हें तेहरान निशाना बनाना चाहता है. हालांकि, मुज्तबा ने किसी के नाम नहीं बताए थे। </p>
<p><strong>मोजतबा बोले- जल्द बदला लिया जाएगा</strong><br>
रिपोर्ट के मुताबिक, यह हिट लिस्ट उस मैसेज के बाद पब्लिश की गई, जिसे ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई से जोड़ा गया है। मोजतबा खामेनेई के मैसेज में कहा गया, हम आपके खून और दोनों जंगों में मारे गए सभी लोगों के खून का बदला लेने का वादा करते हैं। यह हमारे देश की इच्छा है और इसका बदला जल्द लिया जाएगा। मोजतबा खामेनेई अब तक पब्लिक के सामने नहीं आए हैं। वह अपने पिता के अंतिम संस्कार में भी दिखाई नहीं दिए।</p>
<p><strong>ट्रम्प पहले भी कर चुके हैं दावा</strong><br>
पिछले कुछ दिनों में ट्रम्प कई बार कह चुके हैं कि वह ईरान की हिट लिस्ट में टॉप पर हैं। करीब दो हफ्ते पहले भी हमशहरी अखबार ने अपने पहले पन्ने पर ट्रम्प की तस्वीर छापी थी। उस तस्वीर में ट्रम्प के माथे पर निशाना बना था और साथ में Certain Revenge लिखा गया था।</p>
<p><strong>ट्रम्प बोले- मेरे साथ कुछ हुआ तो…</strong><br>
ट्रम्प ने NATO समिट में भी कहा था कि वह ईरान की हिट लिस्ट में टॉप पर हैं। इसके बाद न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अगर उनकी हत्या होती है, तो उन्होंने पहले ही अपने प्रशासन को जरूरी निर्देश दे दिए हैं। ट्रम्प ने कहा, अगर ऐसा हुआ तो ईरान पर पहले कभी नहीं देखा गया हमला होगा।</p>
<p><strong>ट्रुथ सोशल पर भी दी चेतावनी</strong><br>
ट्रम्प ने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान की तरफ 1,000 मिसाइलें तैनात हैं और जरूरत पड़ने पर हजारों दूसरी मिसाइलें भी तुरंत दागी जा सकती हैं। अगर ईरान अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति की हत्या करने या कोशिश करने की धमकी पर अमल करता है, तो अमेरिकी सेना ईरान के सभी इलाकों को पूरी तरह तबाह करने के लिए तैयार है।</p>
<p><strong>हिट लिस्ट में जॉर्जिया मिलोनी भी</strong></p>
<p>इस लिस्ट में डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू के अलावा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भी शामिल हैं। </p>
<p><strong>इन नेताओं को माना गया खामेनेई की मौत के लिए जिम्मेदार</strong><br>
ईरान के इस सरकारी अखबार ने इजरायल, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली के इन सभी बड़े नेताओं को सीधे तौर पर अपने सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत का जिम्मेदार ठहराया है. इस लिस्ट के सामने आने के बाद से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं। </p>
<p>ईरान ने यूरोपीय देशों पर आरोप लगाया कि जंग के दौरान उसके इलाके पर हुए हमलों की निंदा करने में नाकाम रहे. अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की इजाजत देकर हमलों में शामिल रहे. युद्ध शुरू होने के बाद से मोजतबा खामेनेई को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है. खबरों के मुताबिक जिस हमलों में उनके पिता मारे गए थे वे भी घायल हो गए थे। </p>
<p><strong>होर्मूज स्ट्रेट पर ईरान का बयान</strong><br>
ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने कहा कि होर्मूज स्ट्रेट को लेकर फैसला सिर्फ ईरान और ओमान ही करेंगे। यह स्ट्रेट केवल ईरान और ओमान के समुद्री क्षेत्र में आता है, इसलिए इसके प्रबंधन से जुड़ा फैसला भी यही दोनों देश लेंगे। कतर की मौजूदगी सिर्फ मध्यस्थ की भूमिका तक सीमित है और वह किसी तरह का फैसला लेने के लिए बातचीत में शामिल नहीं है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान के बंदर अब्बास और केश्म में फिर धमाके, तेल&#45;गैस की कीमतों में उछाल, बढ़ी वैश्विक चिंता</title>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:15:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, के, बंदर, अब्बास, और, केश्म, में, फिर, धमाके, तेल-गैस, की, कीमतों, में, उछाल, बढ़ी, वैश्विक, चिंता</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तेहरान </strong><br>
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बड़े पैमाने पर युद्ध का खतरा मंडरा रहा है. होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़े तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान पर लगातार दूसरे दिन हमला किया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर रविवार शाम से हमले शुरू किए गए. अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का मकसद ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और नागरिक नाविकों को निशाना बनाने में किया जा रहा है. ये हमले तीन घंटे से ज्यादा समय तक चलता रहा. इस बीच ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि दक्षिणी ईरान के फारुर द्वीप पर हुए एक हमले में कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट से जुड़े एक अधिकारी की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हुए हैं। </p>
<p><strong>तेल के सबसे अहम इलाके पर भी हमला</strong><br>
ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने बताया कि अमेरिकी हमले दक्षिण-पश्चिमी खुजेस्तान प्रांत तक हो रहे हैं. यहां पेट्रोलियम उद्योग के लिए मशहूर अहवाज शहर के आसपास दो जगहों को निशाना बनाया गया. बाद में अहवाज के उत्तर में स्थित अंदीमेश्क इलाके में भी एक और हमले की सूचना मिली. स्थानीय प्रशासन के मुताबिक नुकसान का आकलन किया जा रहा है। </p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है, "पिछले कुछ रातों में अमेरिकी आतंकवादी ताकतों ने देश के दक्षिणी तट पर हमले किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई मछुआरों और देश की रक्षा करने वालों की शहादत हुई है। </p>
<p>इस हमले के जवाब में ईरान ने जॉर्डन, ओमान, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया. इस हमले में फ्यूल डिपो, गोला-बारूद के बंकर, पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन कमांड सेंटर नष्ट कर दिए गए। </p>
<p>IRGC ने इन हमलों के बारे में तीन अलग-अलग बयान जारी किए. उन्होंने कहा कि ये हमले होर्मुज स्ट्रेट में नौसैनिक टकराव के बाद ईरानी तटीय ठिकानों पर अमेरिकी हमलों का जवाब थे। </p>
<p>पहले चरण में IRGC ने कहा कि उन्होंने मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल करके जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस पर कई बड़े मिसाइल डिपो और फ्यूल स्टोरेज टैंकों में आग लगा दी. दूसरे चरण में IRGC एयरोस्पेस फोर्सेज ने बहरीन के शेख ईसा स्थित अमेरिकी बेस पर हेलीकॉप्टर रखरखाव और मरम्मत केंद्रों, P-8 इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एयरक्राफ्ट हैंगर और ड्रोन कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर हमला किया। </p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच की ये ताजा लड़ाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कब्जे को लेकर है. सोमवार को अमेरिका और ईरान दोनों ने दावा किया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर उनका नियंत्रण है. यह दावा पूरे मध्य पूर्व में सप्ताहांत में हुए हमलों के बाद किया गया, जिससे युद्ध खत्म करने की कूटनीतिक कोशिशों पर और खतरा मंडराने लगा है। </p>
<p>ये हमले तब शुरू हुए जब ईरान ने रविवार को ओमान के तट के पास इस स्ट्रेट में एक कंटेनर जहाज पर हमला किया. इन हमलों ने एक बार फिर यह बात साफ कर दी कि यह जलमार्ग बातचीत में एक अहम मुद्दा बना हुआ है। </p>
<p>युद्ध शुरू होने के बाद से ही फारस की खाड़ी के इस संकरे मुहाने पर जहाजों की आवाजाही में रुकावट आ रही है, क्योंकि ईरान ने इसके आसपास कमर्शियल जहाजों पर हमले करके और शिपिंग कंपनियों को डरा-धमकाकर इस पर अपनी पकड़ बनाए रखी है।  </p>
<p>ईरान और अमेरिका उस 60-दिन के अंतरिम समझौते की लगभग आधी अवधि पूरी कर चुके हैं, जिसका मकसद युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए बातचीत शुरू करना था. इसके बजाय स्थिति ऐसी हो गई है कि इस जलडमरूमध्य और इसके भविष्य को लेकर लगातार हमले हो रहे हैं, जिससे दुनिया के नेताओं को चिंता सता रही है कि ईरान के साथ युद्ध फिर से पूरी तरह शुरू हो सकती है। </p>
<p><strong>होर्मुज के पास फारुर द्वीप क्यों अहम है?</strong><br>
हमलों में जिस फारुर द्वीप का नाम सामने आया है, वह ईरान के होर्मोजगान प्रांत में बंदर लेंगेह के पास स्थित है. यह द्वीप दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य के बेहद करीब है. दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का समुद्री निर्यात होर्मुज के रास्ते से गुजरता है. यही वजह है कि फारुर पर ईरान के सर्विलांस सिस्टम, सैन्य ठिकाने और समुद्री सुरक्षा नेटवर्क मौजूद हैं. मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक रविवार शाम हुए हमले में कम्युनिकेशन से जुड़े एक अधिकारी की मौत हो गई और दो अन्य लोग घायल हुए. हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है। </p>
<p><strong>ईरान का खाड़ी देशों को चेतावनी</strong><br>
ईरान ने खाड़ी के कुछ देशों पर आरोप लगाया कि उनकी जमीन और सैन्य बेस का इस्तेमाल ईरान पर हमलों में किया गया. ईरान ने चेतावनी दी कि अगर किसी देश की जमीन से हमला किया गया तो उसे भी जवाबी कार्रवाई के लिए वैध लक्ष्य माना जाएगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>Heatwave in UK: दो महीने में 2700 मौतें, हीटवेव ने बढ़ाई चिंता, यूरोप में सऊदी जैसी गर्मी के हालात</title>
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<description><![CDATA[ लंदन  एक समय था जब यूरोप, खासकर ब्रिटेन और उत्तरी यूरोप में, घरों में एयर कंडीशनर लगवाना बेवजह की फिजूलखर्ची माना जाता था. वहां की ठंडी जलवायु में इसकी जरूरत ही महसूस नहीं होती थी. लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. यूरोप ऐसी गर्मी झेल रहा है कि एयर कंडीशनर अब आराम की … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:15:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Heatwave, UK:, दो, महीने, में, 2700, मौतें, हीटवेव, ने, बढ़ाई, चिंता, यूरोप, में, सऊदी, जैसी, गर्मी, के, हालात</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लंदन </strong></p>
<p>एक समय था जब यूरोप, खासकर ब्रिटेन और उत्तरी यूरोप में, घरों में एयर कंडीशनर लगवाना बेवजह की फिजूलखर्ची माना जाता था. वहां की ठंडी जलवायु में इसकी जरूरत ही महसूस नहीं होती थी. लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. यूरोप ऐसी गर्मी झेल रहा है कि एयर कंडीशनर अब आराम की चीज नहीं, बल्कि सुरक्षा का साधन बनता जा रहा है. इनकी डिमांड बढ़ गई है. लेकिन साथ ही ताबूतों की भी डिमांड में उछाल आया है. हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सिर्फ मई और जून की हीटवेव में इंग्लैंड और वेल्स में कम से कम 2,700 लोगों की मौत का अनुमान लगाया गया है. वहीं एक्सपर्ट्स का मानना है कि असली चुनौती अभी आनी बाकी है। </p>
<p>इम्पीरियल कॉलेज लंदन, ब्रिटेन के मौसम विभाग (Met Office) और लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने मौतों का अनुमान लगाया है. सोमवार को आई स्टडी के मुताबिक मई की हीटवेव में करीब 550 और जून के अंत तक आई दूसरी लहर में <strong>लगभग 2,200 लोगों की जान गई. मई और जून में तापमान ने सभी रिकॉर्ड तोड़े हैं। </strong></p>
<p><strong>सऊदी जैसी गर्मी झेलने की तैयारी</strong><br>
यूरोप के देशों ने इस साल की गर्मी से यह समझ लिया है कि उनका इन्फ्रास्ट्रक्चर इसके लिए तैयार नहीं है. यही कारण है कि वह अब सऊदी जैसी गर्मी की तैयारी कर रहे हैं. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ा संकेत यूरोप की मेन हाई-स्पीड रेल कंपनी यूरोस्टार से मिला है. लंदन, पेरिस और ब्रसेल्स को जोड़ने वाली इस कंपनी ने अपनी नई ट्रेनों के डिजाइन में बड़ा बदलाव किया है. पहले जिन ट्रेनों को 45 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी झेलने के लिए बनाया जाना था, अब उन्हें 55 डिग्री सेल्सियस तक काम करने लायक बनाया जा रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि गर्मी के कारण उसकी ट्रेनें 2026 में लगातार रुकती रही है। </p>
<p>इससे पहले इन ट्रेनों में ऐसे एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगाए जाएंगे, जो 55 डिग्री तक भी काम करते रहें. ये ट्रेनें 2031 से सेवा में आएंगी और 2060 के दशक तक चलेंगी. यानी कंपनी मानकर चल रही है कि आने वाले वर्षों में उत्तरी यूरोप का मौसम आज के मुकाबले कहीं ज्यादा गर्म होगा. यूरोस्टार की मुख्य कार्यकारी अधिकारी ग्वेंडोलिन काजेनाव ने कहा कि कंपनी भविष्य में ऐसे तापमान के लिए तैयारी कर रही है, जो आज सऊदी अरब जैसे देशों में देखने को मिलता है। </p>
<p><strong>दो हीटवेव से हजारों मौतें</strong><br>
नई स्टडी के मुताबिक, 21 से 29 मई के बीच आई पहली हीटवेव में करीब 550 लोगों की मौत हुई, जबकि 18 से 28 जून के बीच दूसरी और अधिक गर्मी ने लगभग 2,200 लोगों की जान ले ली. इस तरह सिर्फ दो महीनों में अनुमानित मृतकों की संख्या 2,700 तक पहुंच गई. इसी दौरान इंग्लैंड में मई में 35.1 डिग्री सेल्सियस और जून में 37.7 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया गया, जो सामान्य से काफी ज्यादा था। </p>
<p><strong>2050 के लिए क्या मिल रही चेतावनी?</strong><br>
ब्रिटेन की क्लाइमेट चेंज कमेटी (CCC) पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि देश जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है. मई की रिपोर्ट में समिति ने अनुमान लगाया था कि 2050 तक ब्रिटेन के 92 प्रतिशत घर जरूरत से ज्यादा गर्म हो सकते हैं. समिति ने सरकार को सलाह दी है कि दफ्तरों के लिए अधिकतम तापमान सीमा तय की जाए और अस्पतालों, स्कूलों समेत सार्वजनिक इमारतों में एयर कंडीशनिंग की सुविधाओं में पैसा लगाया जाए। </p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान को लेकर आमने&#45;सामने अमेरिका और चीन, क्या खाड़ी का तनाव विश्व युद्ध की ओर बढ़ रहा है?</title>
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<description><![CDATA[ तेहरान   अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. इस बीच अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उसके बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी दोबारा लागू कर दी है. अमेरिकी सेना के मुताबिक यह नाकेबंदी पहले भी अप्रैल से जून के बीच लागू की गई थी और … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:15:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, को, लेकर, आमने-सामने, अमेरिका, और, चीन, क्या, खाड़ी, का, तनाव, विश्व, युद्ध, की, ओर, बढ़, रहा, है</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तेहरान</strong><br>
 <br>
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. इस बीच अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उसके बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी दोबारा लागू कर दी है. अमेरिकी सेना के मुताबिक यह नाकेबंदी पहले भी अप्रैल से जून के बीच लागू की गई थी और अब इसे फिर से शुरू किया गया है. इसका उद्देश्य ईरान पर दबाव बढ़ाना बताया जा रहा है. दूसरी ओर हालात ऐसे हो गए हैं कि पहले से लागू सीजफायर पूरी तरह टूटता नजर आ रहा है. अमेरिका ने लगातार चौथे दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए. इसके जवाब में क्षेत्र के कई हिस्सों में हमलों और धमाकों की खबरें सामने आईं. इस बीच अमेरिका के सहयोगी कुवैत और बहरीन ने अपने नागरिकों को संभावित खतरों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है. वहीं ईरान के सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। </p>
<p><strong>ट्रंप ने पुलों-बिजली संयंत्रों पर हमले की चेतावनी</strong><br>
इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक टीवी इंटरव्यू में ईरान को कड़ी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि यदि तेहरान जल्द बातचीत की मेज पर वापस नहीं आता, तो अगले सप्ताह अमेरिका ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों पर हमला कर सकता है. ट्रंप पहले भी इस तरह की चेतावनियां दे चुके हैं और उन्हें अक्सर बातचीत के दौरान दबाव बनाने की रणनीति माना जाता है। </p>
<p><strong>होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर नहीं लगेगी फीस</strong><br>
उधर ट्रंप ने अपने पहले किए गए एक फैसले में बदलाव भी किया. उन्होंने कहा कि अब हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर 20 प्रतिशत शुल्क नहीं लगाया जाएगा. इसके बजाय खाड़ी के देशों द्वारा अमेरिका में किए जाने वाले निवेश को प्राथमिकता दी जाएगी. इस फैसले को क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने और व्यापा<strong>रिक तनाव कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। </strong></p>
<p><strong>अमेरिका ने बुशहर में 4 जगहों पर की बमबारी</strong><br>
ईरान के बुशेहर प्रांत के गवर्नर मोहम्मद मोज़ाफरी ने कहा है कि अमेरिका के हमलों में शहर के चार स्थानों को निशाना बनाया गया. सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, मंगलवार सुबह हुए इन हमलों में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. गवर्नर ने बताया कि सभी राहत और बचाव एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है और फिलहाल शहर में स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है। </p>
<p><strong> चीन ने दिया अमेरिका को मुंहतोड़ जवाब- खतरनाक स्थिति के जिम्मेदार आप</strong><br>
संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत सुन लेई ने अमेरिका पर ईरान पर बड़े सैन्य हमले करके पूरे क्षेत्र को एक बार फिर खतरनाक स्थिति में पहुंचाने का आरोप लगाया है. सुन लेई ने यह बयान तब दिया, जब संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने आरोप लगाया कि चीन ईरान और यमन तक सामान की आपूर्ति रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा है. चीन ने इस आरोप को पूरी तरह बेबुनियाद बताया. सुन लेई ने कहा कि चीन ऐसे निर्यात पर सख्त नियंत्रण रखता है. उन्होंने कहा कि फिलहाल सबसे जरूरी है कि अमेरिका मध्य पूर्व में नए संघर्ष और अस्थिरता पैदा करना बंद करे। </p>
<p><strong> अमेरिका ने चीन पर लगाया आरोप, ईरान-हूतियों की कर रहा मदद</strong><br>
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने चीन पर आरोप लगाया है कि वह ईरान और यमन के हूती विद्रोहियों तक ऐसे सामान की आपूर्ति रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा, जिनका इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बोलते हुए वॉल्ट्ज ने कहा कि ईरान और चीन की कुछ कंपनियों ने हूतियों पर लगाए गए संयुक्त राष्ट्र के हथियार प्रतिबंध से जुड़े प्रस्ताव का उल्लंघन किया है, लेकिन इसके बावजूद उनके खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। </p>
<p><strong>अमेरिकी नाकेबंदी से पहले बढ़ी थी होर्मुज में जहाजों की संख्या</strong><br>
जहाजों की निगरानी करने वाली कंपनी कप्लर (Kpler) के अनुसार, अमेरिका की समुद्री नाकेबंदी लागू होने से पहले मंगलवार को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या बढ़ गई. आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान गुजरने वाले 11 जहाजों में से 9 ईरान से जुड़े व्यापारिक मार्ग का इस्तेमाल कर रहे थे. इनमें एक बहुत बड़ा तेल टैंकर लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल, एक टैंकर रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद और दो जहाज एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) लेकर निकले. वहीं, मंगलवार को अन्य खाड़ी देशों से तेल या गैस लोड करने वाले टैंकरों की आवाजाही नहीं देखी गई।<br>
 <br>
<strong>अमेरिकी सेना ने 7 घंटे तक किया ईरान पर हमला</strong><br>
अमेरिकी सेना की ओर से बताया गया है कि ईरान के खिलाफ सात घंटे तक चले अभियान में अमेरिकी लड़ाकू विमानों, ड्रोन और नौसैनिक जहाजों ने सटीक हथियारों का इस्तेमाल करते हुए ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों, नौसैनिक क्षमताओं तथा तटीय रक्षा प्रणालियों पर हमला किया. इसका उद्देश्य ईरान की वाणिज्यिक जहाज़रानी और नागरिक जहाज़ों के चालक दल को खतरे में डालने की क्षमता को और कमजोर करना था. ये हमले उसी दिन किए गए, जिस दिन अमेरिकी बलों ने ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से आने-जाने वाले जहाजों के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी फिर से शुरू की. सेंटकॉम की ओर से कहा गया है कि अमेरिकी बल सतर्क हैं और पूरी तरह युद्ध के लिए तैयार हैं।</p>
<p><strong>युद्ध के बीच ईरान में चल रही हैं परीक्षाएं</strong><br>
ईरान के शिक्षा मंत्रालय ने सुरक्षा कारणों से सैन्य ठिकानों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के पास बने परीक्षा केंद्रों को दूसरी सुरक्षित जगहों पर स्थानांतरित कर दिया है. फार्स समाचार एजेंसी के अनुसार, अब इन परीक्षा केंद्रों को सार्वजनिक सभागारों और धार्मिक केंद्रों जैसी सुरक्षित इमारतों में चलाया जाएगा. सरकार ने यह फैसला संभावित नए हमलों के खतरे को देखते हुए लिया है, ताकि परीक्षार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और परीक्षाएं बिना किसी बाधा के कराई जा सकें। </p>
<p><strong> ईरान का दावा, अमेरिका ने गेहूं भडारण साइलो को बनाया निशाना</strong><br>
ईरान की फार्स समाचार एजेंसी के मुताबिक अमेरिका के हमले में ईरान के खुज़ेस्तान प्रांत के होवेज़ेह काउंटी स्थित एक गेहूं भंडारण साइलो को निशाना बनाया गया. प्रांत के उप-गवर्नर ने बताया कि रात में हुए इस हमले में साइलो को नुकसान पहुंचा है, लेकिन राहत की बात यह है कि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ईरान&#45;अमेरिका सीजफायर खत्म, ट्रंप का बड़ा ऐलान; बढ़ा पश्चिम एशिया में नए टकराव का खतरा</title>
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<description><![CDATA[ नईदिल्ली  अमेरिका और ईरान के बीच हुआ संघर्ष-विराम (सीजफायर) टूटने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को पूरी तरह खत्म घोषित कर दिया है इसके जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने चाबहार और बुशहर सहित ईरान के लगभग 90 सैन्य ठिकानों और बंदरगाहों पर भारी बमबारी की है अमेरिका द्वारा किए गए इस … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:14:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान-अमेरिका, सीजफायर, खत्म, ट्रंप, का, बड़ा, ऐलान, बढ़ा, पश्चिम, एशिया, में, नए, टकराव, का, खतरा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नईदिल्ली </strong></p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच हुआ संघर्ष-विराम (सीजफायर) टूटने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को पूरी तरह खत्म घोषित कर दिया है इसके जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने चाबहार और बुशहर सहित ईरान के लगभग 90 सैन्य ठिकानों और बंदरगाहों पर भारी बमबारी की है अमेरिका द्वारा किए गए इस बड़े एक्शन और जवाबी कार्रवाई के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:<br>
<strong>सीजफायर का अंत: </strong><br>
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होरमुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले करने और समझौते की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए सीजफायर समाप्त होने का ऐलान किया है <br>
<strong>अमेरिकी एयरस्ट्राइक: </strong><br>
अमेरिकी नौसेना और वायु सेना ने ईरान के चाबहार और बुशहर सहित कई तटीय ठिकानों पर विनाशकारी बमबारी की है<br>
<strong>ईरान का पलटवार: </strong><br>
जवाबी कार्रवाई में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं。भारत पर प्रभाव: होरमुज की खाड़ी से गुजरने वाले तेल व्यापार और चाबहार पोर्ट पर जारी इस तनाव से भारत की ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक हितों के प्रभावित होने की चिंता बढ़ गई है</p>]]> </content:encoded>
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<title>यूक्रेन का बड़ा जवाब, रूस के नौसैनिक जहाज को किया तबाह; बढ़ा युद्ध का तनाव</title>
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<description><![CDATA[ कीव  यूक्रेन की नौसेना ने एक बड़ा हमला करते हुए रूस के एफएसबी बॉर्डर पैट्रोल जहाज इजुमरुद को समुद्री ड्रोन से डुबो दिया है. इस हमले में जहाज पर सवार रूसी कर्मियों के हताहत होने की पुष्टि हुई है. सैटेलाइट तस्वीरों में जहाज के स्टारबोर्ड साइड पर बड़ा छेद दिख रहा है. यूक्रेन की नौसेना … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:14:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>यूक्रेन, का, बड़ा, जवाब, रूस, के, नौसैनिक, जहाज, को, किया, तबाह, बढ़ा, युद्ध, का, तनाव</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कीव </strong></p>
<p>यूक्रेन की नौसेना ने एक बड़ा हमला करते हुए रूस के एफएसबी बॉर्डर पैट्रोल जहाज इजुमरुद को समुद्री ड्रोन से डुबो दिया है. इस हमले में जहाज पर सवार रूसी कर्मियों के हताहत होने की पुष्टि हुई है. सैटेलाइट तस्वीरों में जहाज के स्टारबोर्ड साइड पर बड़ा छेद दिख रहा है. यूक्रेन की नौसेना ने कहा है कि बदला लेना जरूरी थी. अभी और भी हमले की लहर आने वाली है. यह घटना रूस-यूक्रेन युद्ध में यूक्रेन की बढ़ती समुद्री क्षमता को दिखाती है। </p>
<p>इजुमरुद वही रूसी जहाज है जिसने साल 2018 में केर्च की खाड़ी में तीन यूक्रेनी नौसेना के जहाजों पर हमला किया था. 24 यूक्रेनी नाविकों को पकड़ लिया था. उस समय यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चित हुई थी. अब लगभग साढ़े सात साल बाद यूक्रेन ने उसी जहाज को निशाना बनाकर जवाब दिया है. यूक्रेनी नौसेना इसे बदला बता रही है. इस जहाज को रूस की सीमा सुरक्षा सेवा (FSB) संचालित करती थी। </p>
<p>यूक्रेनी नौसेना ने बताया कि जहाज के चालक दल में कुछ लोग हताहत हुए हैं और कुछ घायल हुए हैं। कीव का दावा है कि यह वही रूसी जहाज है जिसने नवंबर 2018 में केर्च जलडमरूमध्य में यूक्रेनी नौसेना के जहाजों पर हमला किया था। </p>
<p><strong> रूस ने अभी तक इस जानकारी पर कोई टिप्पणी नहीं की है।</strong><br>
इज़ुम्रुद को 2014 में लॉन्च किया गया था। यह जहाज 62.5 मीटर लंबा है, इसकी विस्थापन क्षमता 750 टन तक है और इसमें हेलीकॉप्टर लैंडिंग डेक की सुविधा है। इसकी अधिकतम गति 27 समुद्री मील है।</p>
<p>13 जुलाई की रात को, यूक्रेनी मानवरहित हवाई वाहन इकाइयों ने रूस के "रात्रि बेड़े" से संबंधित 15 जहाजों पर हमला किया। इसके अलावा, रूस के अस्थायी नियंत्रण वाले क्षेत्रों में स्थित ऊर्जा सुविधाओं के साथ-साथ रूसी वायु रक्षा प्रणालियों को भी निशाना बनाया गया।</p>
<p>इससे पहले, 9 जुलाई की रात को, यूक्रेनी रक्षा बलों ने रूसी जहाजों, एक तेल बंदरगाह और एक गोला-बारूद डिपो पर हमला किया। गौरतलब है कि आज़ोव सागर में रूसी नौसेना के 12 जहाजों को गोलीबारी में निशाना बनाया गया।</p>
<p>इस महीने की शुरुआत में, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने घोषणा की कि रूस ने काला सागर में स्थिति पर अपना नियंत्रण खो दिया है। सैन्य अधिकारियों के साथ अपनी बैठक के दौरान, रूसी काला सागर बेड़े के नष्ट हुए जहाजों को दर्शाने वाला एक आरेख भी दिखाया गया।</p>
<p><strong>समुद्री ड्रोन से हमला</strong><br>
यूक्रेन ने इस हमले में सरगन-3000 (Sargan-3000) नामक समुद्री ड्रोन का इस्तेमाल किया. यह ड्रोन यूक्रेन की स्वदेशी तकनीक से बना माना जा रहा है. ड्रोन ने जहाज के दाईं तरफ (स्टारबोर्ड साइड) पर हमला किया, जिससे जहाज में बड़ा छेद हो गया. सैटेलाइट इमेजरी में साफ दिख रहा है कि जहाज को काफी नुकसान पहुंचा है. हमले में जहाज पर मौजूद क्रू मेंबर्स के हताहत होने की खबर है, हालांकि अभी सटीक संख्या की पुष्टि नहीं हुई है। </p>
<p>यूक्रेन अब समुद्री क्षेत्र में रूस पर और हमले करने की तैयारी कर रहा है. यूक्रेन की सेना ब्लैक सी में रूसी जहाजों को लगातार नुकसान पहुंचा रही है, जिससे रूस की नौसेना को भारी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>युद्ध पर असर</strong><br>
यह घटना रूस-यूक्रेन युद्ध के समुद्री मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण विकास है. रूस के लिए यह शर्मिंदगी भरी खबर है क्योंकि 2018 का केर्च हमला रूस की जीत माना जाता था. अब उसी जहाज का डूबना यूक्रेन के लिए सिम्बोलिक विक्ट्री है. विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन के समुद्री ड्रोन अब रूसी नौसेना के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, 85 FIR और 24 मौतों के बीच ‘5 नए संवेदनशील जोन’ बने चिंता का कारण</title>
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<description><![CDATA[ इंफाल पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर में एक बार फिर अशांति फैली हुई है। अंदर ही अंदर यह राज्य जातीय हिंसा से उबल रहा है। आलम यह है कि पिछले करीब सात महीनों में यानी जनवरी 2026 से जुलाई के दूसरे हफ्ते तक राज्य में नागा और कुकी समुदायों के बीच हिंसक झड़प और तनाव से … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:14:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मणिपुर, में, फिर, भड़की, हिंसा, FIR, और, मौतों, के, बीच, ‘5, नए, संवेदनशील, जोन’, बने, चिंता, का, कारण</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंफाल</strong></p>
<p>पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर में एक बार फिर अशांति फैली हुई है। अंदर ही अंदर यह राज्य जातीय हिंसा से उबल रहा है। आलम यह है कि पिछले करीब सात महीनों में यानी जनवरी 2026 से जुलाई के दूसरे हफ्ते तक राज्य में नागा और कुकी समुदायों के बीच हिंसक झड़प और तनाव से जुड़ी 85 FIR दर्ज की गई हैं, जबकि इन हिंसक झड़पों में 24 लोगों की मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं यह जातीय हिंसा भीषण रूप अख्तियार कर रहा है और तनाव राजधानी इंफाल से सटे पांच बड़े इलाकों में फैल चुका है। दरअसल, राज्य में पहले हुए मैतेई-कुकी संघर्ष के बाद, अब नागा और कुकी सशस्त्र समूहों के बीच हिंसक टकराव, अपहरण, आगजनी और आर्थिक नाकेबंदी की घटनाएं बढ़ गई हैं और उसका सिलसिला जारी है।</p>
<p>राज्य के पहाड़ी जिलों में नागा और कुकी समुदायों के बीच हिंसक झड़पें 2026 की शुरुआत से ही तेज हो गई हैं, जिससे राज्य में एक नया जातीय संकट पैदा हो गया है। पिछले छह महीने से ज्यादा समय में, पुलिस ने राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जातीय हिंसा पर काबू पाने के लिए 214 से ज़्यादा छापे मारे हैं और 75 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। न्यूज 18 की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से 19 लोगों को हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी से मध्य जुलाई के बीच हिंसा में 24 लोगों की मौत हुई है, जबकि कम से कम 47 लोग घायल हुए हैं।</p>
<p><strong>5 बड़े क्षेत्रों की हिंसाग्रस्त इलाके के तौर पर पहचान</strong><br>
मणिपुर प्रशासन ने पांच बड़े क्षेत्रों को हिंसाग्रस्त इलाकों के तौर पर पहचान की है, जो इस बात की तस्दीक करता है कि यह जातीय संघर्ष अब छोटे और स्थानीय पैमाने पर भड़का आक्रोश न रहकर व्यापक रूप ले चुका है। सरकारी डेटा के आधार पर रिपोर्ट में कहा गया है कि घटनाओं का क्रम एक स्पष्ट पैटर्न दिखाता है, जिसमें जनवरी का महीना शांतिपूर्ण रहा और कोई हताहत नहीं हुआ। पहली घटना फरवरी में उखरुल में दर्ज की गई, जिसमें एक व्यक्ति घायल हुआ। मार्च में हिंसा तेजी से बढ़ी और अप्रैल में भी जारी रही, फिर मई और जून में यह अपने चरम पर पहुँच गई, जब कई ज़िलों से एक साथ मौत और चोट की खबरें आईं। हालाँकि जुलाई में केवल एक व्यक्ति के घायल होने की सूचना मिली है, लेकिन कुल आँकड़े बताते हैं कि पिछले छह महीनों में यह संघर्ष कई पहाड़ी जिलों में फैल चुका है।</p>
<p><strong>कहां-कहां फैला संघर्ष?</strong><br>
उच्च-स्तरीय सूत्रों के अनुसार, तनाव वाले पहचाने गए इलाकों में उखरुल-इंफाल-उखरुल रोड, कांगपोकपी-इंफाल-कोहिमा रोड, कामजोंग में म्यांमार सीमा के पास के गांव, तामेंगलोंग और कांगपोकपी के बीच सीमावर्ती गांव, और सेनापति और कांगपोकपी के बीच सीमावर्ती गांव शामिल हैं। हाईवे, जिलों की सीमाओं और सीमावर्ती गांवों के आसपास घटनाओं का होना यह बताता है कि हिंसा वाले ये इलाके सुरक्षा और कनेक्टिविटी के नज़रिए से भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। 2 जुलाई 2026 को भी ⁠कामजोंग जिला में भारत-म्यांमार सीमा के पास गांवों में दोनों गुटों के बीच भारी गोलीबारी हुई, जिसमें 20 से अधिक घरों को आग के हवाले कर दिया गया।</p>
<p><strong>उखरुल मुख्य हॉटस्पॉट के रूप में उभरा</strong><br>
रिपोर्ट में कहा गया है कि विवाद की शुरुआत फरवरी 2026 में ⁠उखरूल जिला के लितान गांव में एक मामूली विवाद के बाद हुई थी, जिसने धीरे-धीरे बड़े टकराव का रूप ले लिया। प्रशासन ने उखरुल को सबसे पहले और लगातार प्रभावित होने वाले जिले के रूप में चिह्नित किया है। फरवरी से मई तक यहां कई घटनाएँ हुईं, जिनमें बार-बार मौतें और चोट के मामले सामने आए हैं। इस जिले में पुलिस की कार्रवाई भी सबसे ज़्यादा हुई हैं। यहां 46 FIR दर्ज की गईं हैं और 150 से ज़्यादा छापे मारे गए हैं। इसके अलावा उखरुल में 42 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया और उनमें से 13 को गिरप्तार भी किया गया है।</p>
<p><strong>कांगपोकपी दूसरा बड़ा हॉटस्पॉट</strong><br>
जातीय हिंसा में कांगपोकपी दूसरा बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभरा है। हिंसा की खबरें मार्च से शुरू हुईं और जुलाई तक जारी रहीं; मार्च, अप्रैल, मई, जून और जुलाई के दौरान भी हिंसा की घटनाओं में मौतें और घायल होने के मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने जिले में 23 FIR दर्ज कीं, जबकि 35 से ज़्यादा छापे मारे। इस दौरान 33 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया और उनमें से छह को गिरप्तार किया गया है। उखरुल और कांगपोकपी में कुल मिलाकर 85 में से 69 FIR दर्ज हुईं, जो इस संघर्ष में उनकी अहम भूमिका को दिखाती हैं।</p>
<p><strong>केंद्र सरकार से समाधान की गुहार</strong><br>
इस बीच, मणिपुर के एक कुकी-जो संगठन ने सोमवार (13 जुलाई) को दावा किया कि इस साल मार्च से उग्रवादी गुटों ने आदिवासी समुदायों के कम से कम 15 सदस्यों की हत्या की है और 14 गांवों में लगभग 55 घरों को आग के हवाले कर दिया है। संगठन ने केंद्र सरकार से इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और मणिपुर संघर्ष का राजनीतिक समाधान जल्द से जल्द निकालने की मांग की है। एक बयान में, संगठन ने यह भी कहा कि कुकी-जो इलाकों में स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं तक पहुंच पर रोक और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में रुकावट की वजह से मानवीय सहायता की स्थिति और खराब हो गई है, और उसने कानून के तहत समान सुरक्षा की मांग की।</p>]]> </content:encoded>
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<title>फ्रांस में भीषण गर्मी से बंद हुए न्यूक्लियर प्लांट, क्या भारत के परमाणु संयंत्रों पर भी मंडरा सकता है खतरा?</title>
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<description><![CDATA[ पेरिस  फ्रांस में तेज गर्मी का असर अब न्यूक्लियर पावर प्लांट पर भी दिखने लगा है. इस हफ्ते फ्रांस की सरकारी बिजली कंपनी EDF ने तीन न्यूक्लियर रिएक्टर बंद कर दिए और आठ अन्य रिएक्टरों का बिजली उत्पादन कम कर दिया. इसकी वजह उन नदियों का बढ़ता तापमान था, जिनके पानी से रिएक्टरों को ठंडा … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:14:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>फ्रांस, में, भीषण, गर्मी, से, बंद, हुए, न्यूक्लियर, प्लांट, क्या, भारत, के, परमाणु, संयंत्रों, पर, भी, मंडरा, सकता, है, खतरा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पेरिस </strong></p>
<p>फ्रांस में तेज गर्मी का असर अब न्यूक्लियर पावर प्लांट पर भी दिखने लगा है. इस हफ्ते फ्रांस की सरकारी बिजली कंपनी EDF ने तीन न्यूक्लियर रिएक्टर बंद कर दिए और आठ अन्य रिएक्टरों का बिजली उत्पादन कम कर दिया. इसकी वजह उन नदियों का बढ़ता तापमान था, जिनके पानी से रिएक्टरों को ठंडा किया जाता है. इससे करीब 6.3 गीगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ. इस घटना के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या भारत के परमाणु बिजलीघरों के साथ भी कभी ऐसा हो सकता है। </p>
<p>न्यूक्लियर रिएक्टर बिजली बनाने के दौरान बहुत ज्यादा गर्मी पैदा करते हैं. इसलिए उन्हें लगातार ठंडा रखना जरूरी होता है. इसके लिए नदी, झील या समुद्र का पानी इस्तेमाल किया जाता है. फ्रांस में इस बार हीटवेव के कारण कई नदियों का पानी पहले से ही काफी गर्म हो गया. ऐसे में रिएक्टरों को पहले की तरह ठंडा करना मुश्किल होने लगा। </p>
<p>फ्रांस में गोलफेच (Golfech), बुजे (Bugey) और चूज (Chooz) न्यूक्लियर बिजलीघरों के तीन रिएक्टर बंद किए गए. वहीं आठ दूसरे रिएक्टरों का बिजली उत्पादन भी कम कर दिया गया. हालांकि किसी प्लांट में कोई तकनीकी खराबी या सुरक्षा से जुड़ी समस्या नहीं आई. फैसला सिर्फ इसलिए लिया गया ताकि गर्म पानी वापस नदी में छोड़ने से वहां का तापमान और न बढ़े। </p>
<p>न्यूक्लियर रिएक्टर को ठंडा रखना क्यों जरूरी है?<br>
न्यूक्लियर रिएक्टर में यूरेनियम के परमाणु टूटने से गर्मी निकलती है. इसी गर्मी से भाप बनती है. टरबाइन घूमकर बिजली बनाती है. इसके बाद भाप को फिर से पानी में बदलना पड़ता है, ताकि यह प्रक्रिया लगातार चलती रहे. इसके लिए ठंडे पानी की जरूरत होती है। </p>
<p>अगर नदी का पानी पहले से ही ज्यादा गर्म हो, तो रिएक्टर की गर्मी उतनी आसानी से बाहर नहीं निकल पाती.  इससे बिजली उत्पादन पर असर पड़ता है। </p>
<p><strong>फ्रांस में रिएक्टर क्यों बंद करने पड़े?</strong></p>
<p>फ्रांस के कई न्यूक्लियर पावर प्लांट गारोन, रोन और मीयूज जैसी नदियों के पानी से ठंडे होते हैं. इस बार हीटवेव के कारण इन नदियों का तापमान काफी बढ़ गया. फ्रांस में नियम है कि अगर प्लांट से निकलने वाला गर्म पानी नदी का तापमान तय सीमा, करीब 28 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचा सकता है, तो बिजली उत्पादन कम करना या रिएक्टर बंद करना पड़ता है. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि नदी में रहने वाली मछलियों और दूसरे जीवों को नुकसान न पहुंचे। </p>
<p><strong>भारत में कितना है खतरा?</strong><br>
भारत में भी इस साल कई राज्यों में भीषण गर्मी पड़ी और बिजली की मांग 270 गीगावाट से ऊपर पहुंच गई. लेकिन भारत के ज्यादातर बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट फ्रांस जैसी स्थिति में आने की संभावना कम है। </p>
<p>कुडनकुलम, कलपक्कम और तारापुर जैसे बड़े परमाणु बिजलीघर समुद्र के किनारे बने हैं. ये समुद्र के पानी से ठंडे किए जाते हैं. समुद्र का तापमान नदियों की तुलना में बहुत धीरे बदलता है. इसलिए हीटवेव का असर वहां कम होता है। </p>
<p>रावतभाटा, नरोरा और काकरापार जैसे अंदरूनी इलाकों के प्लांट बड़े कूलिंग टावर का इस्तेमाल करते हैं. ये टावर गर्मी को हवा में छोड़ते हैं. इसलिए इन प्लांट्स में फ्रांस जैसी स्थिति बनने की संभावना कम रहती है। </p>
<p><strong>भारत के सामने असली चुनौती क्या है?</strong><br>
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता गर्म नदी नहीं, बल्कि पानी की कमी हो सकती है. कूलिंग टावर लगातार पानी इस्तेमाल करते हैं. अगर लंबे समय तक सूखा पड़ जाए और जलाशयों या नदियों में पानी कम हो जाए, तो बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। </p>
<p>यानी फ्रांस की चिंता गर्म होती नदियां हैं, जबकि भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल भविष्य में पानी की उपलब्धता है. इसलिए आने वाले समय में न्यूक्लियर पावर के साथ-साथ पानी का सही प्रबंधन भी उतना ही जरूरी होगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>कांगो में इबोला का कहर, 2,000 से ज्यादा संक्रमित; 754 मौतों ने बढ़ाई वैश्विक चिंता</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली अफ्रीकी देश कांगो में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में इबोला के 2,011 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 754 लोगों की मौत हो गई है. अधिकारियों का कहना है कि यह अब तक का सबसे तेजी से फैलने … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:14:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>कांगो, में, इबोला, का, कहर, 2, 000, से, ज्यादा, संक्रमित, 754, मौतों, ने, बढ़ाई, वैश्विक, चिंता</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>अफ्रीकी देश कांगो में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में इबोला के 2,011 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 754 लोगों की मौत हो गई है. अधिकारियों का कहना है कि यह अब तक का सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला प्रकोप बन गया है। </p>
<p>स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 753 मरीज अभी भी अस्पतालों या आइसोलेशन केंद्रों में भर्ती हैं, जबकि 366 लोग इलाज के बाद स्वस्थ हो चुके हैं. हालांकि संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने का काम अभी भी चुनौती बना हुआ है और फिलहाल केवल 67 फीसदी संपर्कों की ही पहचान हो पाई है। </p>
<p>विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, 15 मई से शुरू हुआ यह प्रकोप इतनी तेजी से फैल रहा है कि स्वास्थ्य अधिकारी इसकी रफ्तार को पकड़ने में नाकाम साबित हो रहे हैं. हालात यह हैं कि कम से कम 80 फीसदी नए मामले अज्ञात ट्रांसमिशन चेन से सामने आ रहे हैं, यानी यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि इन मरीजों को संक्रमण कहां से मिला। </p>
<p>स्वास्थ्य अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अब तक इस प्रकोप के पहले संक्रमित व्यक्ति यानी 'पेशेंट जीरो' की पहचान नहीं हो सकी है. वहीं, सशस्त्र संघर्ष के कारण लोगों का विस्थापन और खनन क्षेत्रों में लगातार आवाजाही भी संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने में बाधा बन रही है। </p>
<p>WHO के स्वास्थ्य आपातकाल प्रमुख डॉ. चीक्वे इहेक्वेआज़ू ने बताया कि हाल में सामने आई कई मौतें ऐसे लोगों की हैं, जिनकी समुदाय में ही मौत हो गई और वे इलाज के लिए किसी स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं पहुंच सके. इस बीच, इटुरी प्रांत के कई इलाकों में स्वास्थ्यकर्मियों ने वेतन नहीं मिलने के विरोध में हड़ताल शुरू कर दी है. कई कर्मचारियों का कहना है कि प्रकोप शुरू होने के बाद से उन्हें अब तक भुगतान नहीं किया गया है। </p>
<p>स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि बुंडीबुग्यो इबोला वायरस के लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं है. हालांकि इटुरी प्रांत में दो संभावित दवाओं के परीक्षण के लिए मरीजों का पंजीकरण शुरू कर दिया गया है, जिससे भविष्य में इलाज का रास्ता खुलने की उम्मीद है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>अमेरिका की महंगाई पर भारतीय दिग्गजों की नजर, फेड की खास टीम में रघुराम राजन समेत 3 विशेषज्ञ शामिल</title>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ने अपनी मौद्रिक नीति और कामकाज की समीक्षा करने के लिए 5 नए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया है. फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन केविन वॉर्श ने बताया क‍ि इन कमेट‍ियों में पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन समेत तीन भारतीय मूल के दिग्गजों को शामिल किया गया है. … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:14:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>अमेरिका, की, महंगाई, पर, भारतीय, दिग्गजों, की, नजर, फेड, की, खास, टीम, में, रघुराम, राजन, समेत, विशेषज्ञ, शामिल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन</strong></p>
<p>अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ने अपनी मौद्रिक नीति और कामकाज की समीक्षा करने के लिए 5 नए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया है. फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन केविन वॉर्श ने बताया क‍ि इन कमेट‍ियों में पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन समेत तीन भारतीय मूल के दिग्गजों को शामिल किया गया है. ये लोग अमेर‍िका में महंगाई पर काबू पाने के तरीके बताएंगे। </p>
<p><strong>रघुराम राजन</strong><br>
आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन फेड की बैलेंस शीट पॉल‍िसी की समीक्षा करेंगे. यह पैनल फेडरल रिजर्व की खरबों डॉलर के एसेट्स और मौद्रिक नीति पर उनके असर का आकलन करेगा, ताकि यह समझा जा सके कि महंगाई पर काबू पाने में ये कितने मददगार हैं। <br>
<strong>राज चेट्टी</strong><br>
दिल्ली में जन्मे और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के मशहूर अर्थशास्त्री राज चेट्टी इस डेटा पैनल के कोकोऑड‍िनेटर होंगे. इनका मुख्य काम फेड की नीतियां तय करने के लिए इस्तेमाल होने वाले इकोनॉम‍िक डेटा की गुणवत्ता और टाइमिंग को बेहतर बनाना है, ताकि फैसले सटीक समय पर लिए जा सकें। </p>
<p><strong>आशा शर्मा</strong><br>
माइक्रोसॉफ्ट की एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और एक्सबॉक्स की सीईओ आशा शर्मा को इस महत्वपूर्ण पैनल में जगह मिली है. यह ग्रुप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य नई तकनीकों का देश की उत्पादकता, जॉब्‍स और आर्थिक विकास पर पड़ने वाले असर का मूल्यांकन करेगा। </p>
<p><strong>क्‍यों भारतीयों को लाना पड़ा</strong><br>
फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के मुताबिक, इन कार्यबलों का उद्देश्य फेडरल रिजर्व के काम में पारदर्शिता लाना और नए विचारों को शामिल करना है. इन कमेटियों में नोबेल पुरस्कार विजेता थॉमस सार्जेंट, वॉलमार्ट के पूर्व सीईओ डोंग मैकमिलन और दिग्गज वेंचर कैपिटलिस्ट मार्क एंड्रीसन जैसे दुनिया के सबसे बेहतरीन दिमाग भी शामिल किए गए हैं। </p>]]> </content:encoded>
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