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<title> &#45; : desh</title>
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<title>लू को प्राकृतिक आपदा घोषित करने का बड़ा फैसला! अब कुल 14 आपदाएं, जानें किसे और क्या मिलेगा फायदा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली केंद्र सरकार ने देश में लगातार बढ़ रहे तापमान और भीषण गर्मी के संकट को देखते हुए एक ऐतिहासिक और संवेदनशील फैसला लिया है। यानी केंद्र सरकार ने लू (हीटवेव) को एक &#039;अधिसूचित प्राकृतिक आपदा&#039; (Notified Natural Calamity) के रूप में मान्यता दे दी है। यह फैसला देश के उन करोड़ों अत्यंत संवेदनशील … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 22:31:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>लू, को, प्राकृतिक, आपदा, घोषित, करने, का, बड़ा, फैसला, अब, कुल, आपदाएं, जानें, किसे, और, क्या, मिलेगा, फायदा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>केंद्र सरकार ने देश में लगातार बढ़ रहे तापमान और भीषण गर्मी के संकट को देखते हुए एक ऐतिहासिक और संवेदनशील फैसला लिया है। यानी केंद्र सरकार ने लू (हीटवेव) को एक 'अधिसूचित प्राकृतिक आपदा' (Notified Natural Calamity) के रूप में मान्यता दे दी है। यह फैसला देश के उन करोड़ों अत्यंत संवेदनशील लोगों के लिए उम्मीद की एक नई किरण लेकर आया है, जो हर साल चिलचिलाती धूप और जानलेवा गर्मी का सामना करने को मजबूर होते हैं। चाहे वे मजदूर हों या बेसहारा गरीब या दोहरी शिफ्ट में काम करने वाले दिहाड़ी मजदूर या तंग बस्तियों में रहने वाले लोग। अब इस ऐतिहासिक कदम के बाद राज्य सरकारें गर्मी से लोगों की जान बचाने और उन्हें राहत पहुंचाने के लिए विशेष केंद्रीय आपदा फंड का उपयोग कर सकेंगी।</p>
<p>4 अगस्त को भारत ने लू और बिजली गिरने की घटना को प्राकृतिक आपदा घोषित किया। यानी पहले से मौजूद 12 अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं की सूची में लू और बिजली गिरने की घटना को भी शामिल कर लिया गया है, जिससे यह सूची 14 आपदाओं की हो गई। शमन कोष के दिशा-निर्देशों में 2024 में किए गए संशोधन के साथ, इस कदम से लू पूरी तरह से भारत के आपदा फ़ाइनेंसिंग सिस्टम के दायरे में आ गई है। इससे पहले जून 2026 में, गृह मंत्रालय ने 2026 से 2031 तक की अवधि के लिए राज्य और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के लिए नए ऑपरेशनल दिशा-निर्देश जारी किए थे। इससे पहले तक अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं की लिस्ट में भूकंप, बाढ़, सूखा, सुनामी, चक्रवात या तूफान, भूस्खलन, कीड़ों का हमला, जंगल की आग, हिमस्खलन, शीतलहर या पाला, बादल फटना और ओलावृष्टि शामिल था।<br>
<strong>फंडिंग का खुला रास्ता: अब जमीनी स्तर पर दिखेगा ठोस काम</strong></p>
<p>राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के प्रमुख कृष्ण एस. वत्सा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि हाल के दिनों में हीटवेव एक बेहद गंभीर खतरे के रूप में उभरी है। इसलिए सरकार के लिए जरूरी है कि वह लॉन्ग टर्म को ध्यान में रखते हुए इस पर काम करे और ज़रूरी संसाधन मुहैया कराए। वत्सा ने बताया, "एक बार आपदा के तौर पर घोषित होने के बाद, राज्य सरकारें बिजली गिरने और लू यानी दोनों से निपटने और उनके असर को कम करने के लिए 'स्टेट डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फंड' (SDRF) और 'स्टेट डिज़ास्टर मिटिगेशन फंड' (SDMF) का इस्तेमाल कर पाएँगे। चूँकि हाल के समय में ये समस्याएँ तेज़ी से बढ़ी हैं, इसलिए सभी स्तरों पर सरकार के लिए जरूरी है कि वह पर्याप्त संसाधनों के साथ लंबे समय के लिए इनका समाधान करे। यह एक ऐसा कदम होगा जिसका लंबे समय तक सकारात्मक असर पड़ेगा।"<br>
<strong>फंड जुटाना होगा आसान</strong></p>
<p>उन्होंने आगे कहा, "अब तक, इस पर प्रतिक्रिया ज़्यादातर योजनाओं, रूपरेखाओं और जागरूकता तक ही सीमित रही है; अब ज़मीनी स्तर पर ठोस उपायों की ज़रूरत है, और यह फंड आवंटन ठीक इसी काम के लिए संसाधन तय करने का एक अच्छा मौका देता है।" योजना कैसे काम करेगी, इस बारे में बताते हुए वत्सा ने कहा कि सरकार की फंडिंग 'सीड मनी' (शुरुआती पूंजी) की तरह काम करती है। यह एक शुरुआती मदद है जो शहरों को 'हीट एक्शन प्लान' (HAP) बनाने में मदद करती है, जिससे नागरिकों, CSR और दूसरी योजनाओं से अतिरिक्त फंड जुटाना आसान हो जाता है।<br>
<strong>हीट एक्शन प्लान लागू करने में होगी सुविधा</strong></p>
<p>वत्सा ने कहा, "अगर कोई शहर या शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, या नगर निगम 'कूलिंग शेल्टर' बनाना चाहता है, ज़्यादा पानी के पॉइंट बनाना चाहता है, या सार्वजनिक जगहों पर गर्मी से राहत देने वाली सुविधाएँ बेहतर करना चाहता है, तो इन संसाधनों का इस्तेमाल ऐसे कामों में किया जा सकता है। यह एक शुरुआती मदद की तरह काम करता है, जिसका इस्तेमाल करके दूसरे स्रोतों से और संसाधन जुटाए जा सकते हैं।" उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और नगर निगम स्थानीय स्तर पर HAP लागू करने और यह तय करने के लिए ज़िम्मेदार हैं कि संसाधन कहाँ से जुटाए जाएँ और कहाँ निवेश किए जाएँ। वत्सा ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि इससे अगले पांच सालों में और ज़्यादा HAP (हीट एक्शन प्लान) और स्थानीय उपाय लागू होंगे, साथ ही तापमान बढ़ने के पीछे के जलवायु संबंधी कारणों को भी बेहतर ढंग से समझा जाएगा।"<br>
<strong>बजट की पुरानी बाधाएं हुईं खत्म</strong></p>
<p>'काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर' (CEEW) के संस्थापक-सीईओ अरुणाभ घोष ने इस फैसले के वित्तीय महत्व को समझाते हुए एक बड़ी बात बताई। उन्होंने कहा कि पहले कोई भी राज्य अपने स्तर पर हीटवेव को आपदा घोषित तो कर सकता था, लेकिन वे SDRF के केवल 10 प्रतिशत और SDMF के केवल 20 प्रतिशत फंड का ही इस्तेमाल कर पाते थे। केंद्र की इस नई अधिसूचना ने इस वित्तीय सीमा और नीतिगत अस्पष्टता को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।<br>
<strong>जमीनी स्तर पर क्या बदलाव दिखेंगे?</strong></p>
<p>इस सरकारी फंड का उपयोग शहरों और जिलों में 'हीट एक्शन प्लान' (HAPs) को लागू करने के लिए 'सीड मनी' (प्रारंभिक सहायता राशि) के तौर पर किया जाएगा। स्थानीय प्रशासन इस राशि का उपयोग करके कूलिंग शेल्टर (ठंडे आश्रय स्थल) का निर्माण कर सकेंगे। सार्वजनिक स्थानों पर पीने के पानी के नए केंद्र स्थापित कर सकेंगे। सार्वजनिक क्षेत्रों में थर्मल आराम (Thermal Comfort) और छांव की व्यवस्था कर सकेंगे। ितना ही नहीं, इस सरकारी मदद के जरिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) और अन्य योजनाओं से अतिरिक्त फंड आकर्षित किया जा सकेगा। इससे गरीबों, दिहाड़ी मजदूरों, राहगीरों को बड़ी राहत मिलेगी।<br>
<strong>स्वास्थ्य प्रणाली का सुदृढ़ीकरण होगा</strong></p>
<p>एम्स (AIIMS) दिल्ली के चिकित्सक डॉ. हर्षल रमेश साल्वे ने जोर देकर कहा कि हीटवेव के असर को रोकना और इलाज करना बहुत कठिन नहीं है, इसके लिए केवल प्राथमिकता और संवेदनशील लोगों की पहचान की जरूरत है। उन्होंने बताया कि बीमारी के कारण गरीबों पर होने वाले भारी खर्च को रोकने के लिए अगर सरकारी पुनर्वास और वित्तीय सहायता दी जाए, तो इससे देश के आर्थिक और स्वास्थ्य ढांचे दोनों को मजबूती मिलेगी।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय और राज्य नीतियों का तालमेल दिखेगा</strong><br>
'नेचुरल रिसोर्सेज डिफेंस काउंसिल' (NRDC) के अभियंत तिवारी ने इस कदम की तुलना कोविड-19 महामारी से की। उन्होंने कहा कि आपदा घोषित होने से पूरी प्रणाली एकजुट और समन्वित होकर काम करती है। यह कानूनी अधिसूचना अब हीट एक्शन प्लान को राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत, कानूनी और वित्तीय (SDRF, NDRF, SDMF, NDMF के जरिए) ताकत देगी। चूंकि, भारत एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है जहां बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहा है और कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा खुले आसमान के नीचे काम करता है। ऐसे में यह कदम असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सीधा फायदा पहुंचा सकता है।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>‘WhatsApp&#45;ईमेल पर दे रहे तलाक’, SC में ‘Virtual Divorce’ मामले पर 27 अक्टूबर को सुनवाई</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली मुस्लिमों में तीन तलाक पर भले ही कानूनी रोक लग गई हो, लेकिन तलाक को लेकर अब भी कुछ प्रथाएं जारी हैं. इसे ही तलाक-ए-हसन और तलाक-ए-अहसन जैी प्रथाओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर हुई थीं, जिन पर अब सुनवाई शुरू होने वाली है. सुप्रीम कोर्ट इन याचिकाओं पर 27 … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 21:31:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>‘WhatsApp-ईमेल, पर, दे, रहे, तलाक’, में, ‘Virtual, Divorce’, मामले, पर, अक्टूबर, को, सुनवाई</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>मुस्लिमों में तीन तलाक पर भले ही कानूनी रोक लग गई हो, लेकिन तलाक को लेकर अब भी कुछ प्रथाएं जारी हैं. इसे ही तलाक-ए-हसन और तलाक-ए-अहसन जैी प्रथाओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर हुई थीं, जिन पर अब सुनवाई शुरू होने वाली है. सुप्रीम कोर्ट इन याचिकाओं पर 27 अक्टूबर को सुनवाई करेगा। </p>
<p>इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही नोटिस जारी कर चुका है. अगर सरकार की तरफ से या अन्य पक्षकारों की तरफ से इस मामले में कोई जवाब नहीं दिया जाता तो भी 27 अक्टूबर से 10 मुस्लिम महिलाओं की तरफ से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई शुरू हो जाएगी। </p>
<p><strong>क्या हैपूरा मामला?</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट में पत्रकार बेनजीर हीना समेत कई महिलाओं ने याचिकाएं दाखिल की थीं. इसमें मुस्लिमों की तलाक प्रथाओं को चुनौती दी गई थी। </p>
<p>पत्रकार बेनजीर हीना ने अपनी याचिका में तलाक-ए-हसन को संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया था. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का तब रुख किया था जब उनके पति ने कथित तौर पर तलाक-ए-हसन का नोटिस भेज दिया था। </p>
<p>उनके अलावा और कई महिलाओं ने याचिका में आरोप लगाया है कि उनके पति ने उन्हें वॉट्सऐप या ईमेल के जरिए तलाक भेज दिया. कुछ की शिकायत यह है कि उनके अशिक्षित होने का फायदा उठाते हुए उनके पति ने कोरे कागज पर उनसे दस्तखत करवा लिए। </p>
<p>चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच के सामने इन प्रथाओं पर रोक लगाने की मांग की गई है. अदालत को बताया गया है कि कुछ मुस्लिम पुरुष वॉट्सऐप और ईमेल के जरिए वर्चुअल तलाक देने की कोशिश कर रहे हैं। </p>
<p>इस मामले पर कोर्ट का कहना था कि अदालत को सभी धर्मों का सम्मान करते हुए धार्मिक मामलों में कम से कम दखल देना चाहिए, लेकिन धार्मिक मान्यताएं अगर सीधे मानवाधिकारों को प्रभावित कर रही हैं तो फिर कोर्ट को दखल देना होगा। </p>
<p><strong>तलाक-ए-हसन और तलाक-ए-अहसन क्या है?</strong><br>
2017 में सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-बिद्दत यानी तीन तलाक पर रोक लगा दी थी. इसके बाद 2019 में केंद्र सरकार इस पर रोक लगाने के लिए कानून लेकर आई थी. अब तीन तलाक देने पर 3 साल तक की जेल हो सकती है। </p>
<p><strong>लेकिन अब भी मुस्लिमों में तलाक की कई प्रथाएं चल रही हैं. इनमें सबसे अहम तलाक-ए-हसन और तलाक-ए-अहसन है। </strong></p>
<p>तलाक-ए-हसन में शौहर को तीन महीने में तीन बार तलाक देना होता है. इस प्रथा में तलाक बोलकर या लिखकर दिया जाता है. इसके तहत, पति को लगातार तीन महीने तक हर महीने एक बार तलाक देना होता है. तीन महीने की इस अवधि को 'इद्दत' कहा जाता है. इस दौरान अगर पति चाहे तो तलाक वापस ले सकता है। </p>
<p>वहीं, तलाक-ए-अहसन में पति को एक ही बात में तलाक देना होता है. इसमें भी तीन महीने की अवधि होती है. तीन महीने के भीतर अगर तलाक वापस नहीं लिया जाता है तो पति-पत्नी में तलाक मंजूर हो जाता है। </p>
<p><strong>क्या महिलाएं नहीं दे सकतीं तलाक?</strong><br>
इस्लाम में महिलाएं भी पति से तलाक ले सकती हैं. महिलाएं 'खुला' के जरिए तलाक ले सकती है. इसके लिए आपसी सहमति जरूरी है. अगर पति सहमत नहीं है तो अदालत के जरिए भी ऐसा किया जा सकता है. इसमें महिला को निकाह के वक्त जो 'मेहर' की रकम मिलती है, उसे लौटाना होता है। </p>
<p>इसके अलावा, इस्लाम में 'मुबारत' की भी इजाजत है. यह तलाक का ऐसा तरीका है जिसमें पति-पत्नी दोनों आपसी सहमति और अपनी मर्जी से शादी खत्म करने के लिए राजी होते हैं। </p>
<p><strong>तलाक की प्रथाओं पर क्या कह चुकी हैं अदालतें?</strong><br>
तीन तलाक के मामले में जब 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था तो अदालत ने बाकी प्रथाओं पर न तो कोई टिप्पणी की थी और न ही दखल दिया था। </p>
<p>अगस्त 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-हसन पर कहा था कि यह प्रथा गलत नहीं है, क्योंकि इसमें सुलह-समझौते का समय मिल जाता है. तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि महिलाओं के पास भी 'खुला' का विकल्प है। </p>
<p>इन प्रथाओं पर हाई कोर्ट्स का रुख भी साफ रहा है. हिमाचल प्रदेश और केरल हाई कोर्ट ने तलाक-ए-हसन में दखल देने से इनकार कर दिया था। </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>PM&#45;KUSUM&#45;2 पर किसानों को बड़ी राहत, सोलर पंप से होगी सिंचाई; खाली खेत से भी होगी कमाई</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली देशभर के किसानों को जिस योजना का बेसब्री से इंतजार था, उसको लेकर सरकार ने बड़ी खुशखबरी दी है. केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने पीएम-कुसुम योजना (PM-KUSUM) के दूसरे चरण को लेकर बड़ा अपडेट बताया हे; उन्होंने कहा कि पीएम-कुसुम के पहले चरण (PM-KUSUM 1) की सफलता के बाद, सरकार जल्द ही इसका … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 21:31:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>PM-KUSUM-2, पर, किसानों, को, बड़ी, राहत, सोलर, पंप, से, होगी, सिंचाई, खाली, खेत, से, भी, होगी, कमाई</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>देशभर के किसानों को जिस योजना का बेसब्री से इंतजार था, उसको लेकर सरकार ने बड़ी खुशखबरी दी है. केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने पीएम-कुसुम योजना (PM-KUSUM) के दूसरे चरण को लेकर बड़ा अपडेट बताया हे; उन्होंने कहा कि पीएम-कुसुम के पहले चरण (PM-KUSUM 1) की सफलता के बाद, सरकार जल्द ही इसका नया और उन्नत वर्जन यानी 'पीएम-कुसुम 2' (PM-KUSUM 2) लॉन्च करने की तैयारी कर रही है. चूंकि 'पीएम-कुसुम 1' को सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है, इसलिए सरकार अब बहुत जल्द 'पीएम-कुसुम 2' को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया में जुटी है।  </p>
<p>इस योजना के तरह खेती-किसानी में सिंचाई के लिए सोलर पंप पर भारी सब्सिडी देने की तैयारी है. साथ ही किसान अपनी खाली पड़ी जमीन पर या बंजर जमीन पर सोलर प्‍लांट लगाकर बिजली पैदा कर सकेंगे, इसे सरकार को बेच सकेंगे और PM सूर्य घर योजना की तरह मोटी कमाई भी कर सकेंगे। </p>
<p>अगर आप भी एक किसान हैं या ग्रामीण इलाके में सोलर एनर्जी के जरिए अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं, तो ये खबर आपके लिए बहुत काम की है. तो आइए, जानते हैं कि इसमें क्या खास प्रावधान किए गए हैं और इस नई योजना से किसानों को क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं। </p>
<p><strong>क्या है PM-KUSUM योजना?</strong><br>
'PM-KUSUM' यानी प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान' (PM-KUSUM) का मुख्य उद्देश्य किसानों को डीजल और पारंपरिक बिजली पर निर्भरता से पूरी तरह मुक्त करना है. इस योजना के तहत सरकार किसानों को कई बड़ी सुविधाएं देती है:</p>
<p>    सोलर पंप पर भारी सब्सिडी: PM-KUSUM योजना के तहत किसानों को सोलर पंप लगवाने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से 30 से 50 प्रतिशत तक की भारी केंद्रीय सब्सिडी दी जाती है. खेतों में जो अभी मौजूदा समय में बिजली वाले पंप लगे हैं, जो ग्रिड से जुड़े हैं, उन पंपों का सोलराइजेशन करने पर भी ये सब्सिडी मिलेगी। </p>
<p>    बंजर जमीन पर पैदा होगी बिजली: किसान अपनी बंजर या खाली पड़ी जमीन पर 2 मेगावाट तक के सोलर पावर प्लांट भी इंस्‍टॉल कर सकते हैं. इससे जो बिजली पैदा होगी, उसे स्थानीय डिस्कॉम यानी बिजली डिस्‍ट्रीब्‍यूशन को स्‍टेट-रेगुलेटेड टैरिफ पर बेचकर अच्‍छी कमाई भी कर सकते हैं. जैसा कि PM सूर्य घर योजना में प्रावधान है।   </p>
<p><strong>किसानों और आम लोगों को सीधा फायदा? </strong><br>
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने यह भी जानकारी दी कि सरकार और उद्योग जगत मिलकर रिन्यूएबल एनर्जी उपकरणों की लागत को कम करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं. हाल ही में नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों और उनके घटकों पर GST की दरों को 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है, जिससे यह तकनीक अब बहुत सस्ती हो गई है। </p>
<p>    GST कम होने से किसानों के लिए 5 हॉर्सपावर (HP) का सोलर पंप लगभग 17,500 रुपये तक सस्ता हो गया है. सरकार के 10 लाख नए सोलर पंप लगाने के लक्ष्य से किसानों को कुल मिलाकर लगभग 1,550 करोड़ रुपये की बड़ी बचत होने का अनुमान है। </p>
<p>    आम परिवारों के लिए भी छतों पर लगने वाला 3 किलोवाट का सोलर सिस्टम (जो 'पीएम सूर्य घर' योजना के तहत आता है) अब लगभग 9,000 से 10,500 रुपये तक सस्ता मिल रहा है। </p>
<p>    इस कटौती से यूटिलिटी और पावर प्रोजेक्ट्स की लागत भी काफी घटी है, जिसका सीधा सकारात्मक असर आम उपभोक्ताओं और बिजली कंपनियों पर पड़ेगा। </p>
<p><strong>कैसा रहा है PM-KUSUM योजना का पहला चरण? </strong><br>
ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पीएम-कुसुम के पहले चरण ने एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर में रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है. लॉन्‍ग टर्म लक्ष्‍य तो 10,000 मेगावाट का है, लेकिन अब तक इसमें 1986.3 मेगावाट क्षमता के ग्रिड-कनेक्टेड सोलर पावर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। </p>
<p>देश भर में 13.07 लाख से अधिक स्टैंडअलोन सोलर पंप मंजूर किए गए हैं, जिनमें से 11.69 लाख पंप पहले ही लगाए जा चुके हैं. इसके अलावा, किसानों के सिंचाई पंपों को सोलर ऊर्जा से जोड़ने का काम भी तेजी से चल रहा है, जिसके तहत लाखों एफएलएस (FLS) और आईपीएस (IPS) पंपों का सोलराइजेशन किया जा चुका है। </p>
<p><strong>PM-KUSUM 1 से कितनी अलग, क्‍या है तैयारी?  </strong><br>
पीएम-कुसुम के दूसरे चरण में सरकार लिथियम-आयन सेल मैन्युफैक्चरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को भी बढ़ावा दे रही है ताकि देश में ही सस्ते और टिकाऊ उपकरण तैयार हो सकें। </p>
<p>यदि आप भी डीजल के महंगे खर्च से परेशान हैं और अपने खेतों में सिंचाई के लिए सोलर पंप लगवाने या अपनी खाली जमीन का सही उपयोग करके बिजली बेचने के इच्छुक हैं, तो आने वाले दिनों में लॉन्च होने वाली 'पीएम-कुसुम 2' योजना आपके लिए एक बेहतरीन अवसर साबित हो सकती है। </p>
<p>योजना के आधिकारिक ऐलान के बाद किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग या सीएससी (CSC) सेंटर के जरिए इसके लिए आवेदन कर सकेंगे। </p>]]> </content:encoded>
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<title>दुबई का भारत से था गहरा नाता, आजादी के बाद बदला खाड़ी का नक्शा</title>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 20:31:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>दुबई, का, भारत, से, था, गहरा, नाता, आजादी, के, बाद, बदला, खाड़ी, का, नक्शा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 आज दुबई अपनी ऊंची इमारतों और दौलत के लिए जाना जाता है लेकिन इसके इतिहास का भारत से एक अनोखा संबंध रहा है। आजादी से पहले दुबई और खाड़ी के दूसरे देशों का प्रशासन ब्रिटिश भारत के जरिए चलाया जाता था।</p>
<p>1947 में लिए गए एक शांत फैसले ने उस रिश्ते को बदल दिया और खाड़ी का वह राजनीतिक नक्शा तैयार किया जिसे हम आज जानते हैं। इतिहासकार और लेखक सैम डैलरिम्पल के अनुसार, खाड़ी के कुछ हिस्सों, जिनमें आज का दुबई भी शामिल है का प्रशासन कभी ब्रिटिश भारत के हिस्से के तौर पर चलाया जाता था।</p>
<p><strong>क्या है वो अनजाना अध्याय?</strong><br>
और भी हैरानी की बात यह है कि आजादी के समय ब्रिटिश अधिकारियों ने कुछ समय के लिए इस बात पर विचार किया था कि बंटवारे के बाद ये इलाके भारत के पास रहने चाहिए या पाकिस्तान का हिस्सा बन जाने चाहिए। डैलरिम्पल ने अपनी किताब शैटर्ड लैंड्स के बारे में बात करते हुए इंस्टाग्राम पर इस अनजाने अध्याय का जिक्र किया है।</p>
<p>यह उस दौर पर रोशनी डालता है जब इस इलाके का राजनीतिक नक्शा आज के नक्शे से बिल्कुल अलग था। कई दशकों तक खाड़ी के ज्यादातर हिस्से का प्रशासन लंदन से नहीं चलाया जाता था। इसके बजाय, ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य के हिस्से के तौर पर इसे दिल्ली से नियंत्रित किया जाता था।</p>
<p><strong>'दुबई था भारत का हिस्सा'</strong><br>
इस पोस्ट में सैम डैलरिम्पल बताते हैं, "अदन से लेकर कुवैत तक अरब के संरक्षित इलाकों (प्रोटेक्टोरेट्स) का शासन दिल्ली से चलता था। इनकी देखरेख इंडियन पॉलिटिकल सर्विस करती थी, सुरक्षा भारतीय सैनिक संभालते थे और ये भारत के वायसराय के प्रति जवाबदेह थे। 1889 के इंटरप्रिटेशन एक्ट के तहत कानूनी तौर पर इन सभी संरक्षित इलाकों को भारत का ही हिस्सा माना जाता था।"</p>
<p>ये रिश्ते उतने ही गहरे थे, जितना कि बहुत से लोग समझते हैं। अबू धाबी भारत की रियासतों की आधिकारिक सूची में शामिल था और वायसराय लॉर्ड कर्जन ने तो ओमान को ब्रिटिश भारत की रियासत जैसा दर्जा देने का प्रस्ताव भी रखा था।</p>
<p><strong>'जारी किए जाते थे भारतीय पासपोर्ट'</strong><br>
यहां तक कि आधुनिक यमन में अदन तक भारतीय पासपोर्ट जारी किए जाते थे। अदन भारत का सबसे पश्चिमी बंदरगाह था और बॉम्बे प्रांत के हिस्से के तौर पर उसका प्रशासन चलाया जाता था।</p>
<p>एक्स पर किए गए एक पोस्ट में डैलरिम्पल कहते हैं, "ब्रिटिश भारत में हर कोई इंडियन एम्पायर पासपोर्ट पाने का हकदार था। यमन की एक यहूदी महिला, जो बालफोर घोषणा के बाद यरूशलेम जाना चाहती थी उसे भारतीय पासपोर्ट पर ही जाना पड़ा क्योंकि दक्षिण यमन में पैदा होने की वजह से वह कानूनी तौर पर भारतीय थी।"</p>
<p><strong>'अरब के कई युवा खुद को मानते थे भारतीय'</strong><br>
जब 1931 में महात्मा गांधी ने शहर का दौरा किया तो उन्होंने पाया कि अरब में कई युवा खुद को भारतीय राष्ट्रवादी मानते थे। जब 1947 में अंग्रेज उपमहाद्वीप छोड़ने की तैयारी कर रहे थे तो एक अहम सवाल उठा कि अंग्रेजी शासन खत्म होने के बाद इन खाड़ी के संरक्षित क्षेत्रों का प्रशासन कौन संभालेगा?</p>
<p><strong>भारत ने ठुकराया प्रस्ताव</strong><br>
असल में अंग्रेजों ने भविष्य की भारतीय सरकार को खाड़ी क्षेत्र की पेशकश की थी, लेकिन सरकार ने इसे ठुकरा दिया। डैलरिम्पल बताते हैं कि ब्रिटिश अधिकारियों के बीच कुछ समय के लिए इस बात पर बहस हुई थी कि क्या आजाद भारत या नए बने पाकिस्तान को फारस की खाड़ी का कामकाज संभालने की इजाजत दी जाए।</p>
<p>हालांकि, इस प्रस्ताव को ज्यादा समर्थन नहीं मिला। तेहरान में ब्रिटिश मिशन के एक सदस्य ने हैरानी जाहिर करते हुए लिखा कि दिल्ली के अधिकारियों के बीच इस बात पर साफ सहमति थी कि फारस की खाड़ी में भारत सरकार की कोई खास दिलचस्पी नहीं थी।</p>
<p><strong>जिम्मेदारी को लेकर चिंताएं</strong><br>
ब्रिटिश प्रशासन के भीतर इस इलाके की जिम्मेदारी सौंपने को लेकर भी चिंताएं थीं। खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले विलियम हे ने कहा, "खाड़ी के अरब लोगों के साथ व्यवहार करने की जिम्मेदारी भारतीयों या पाकिस्तानियों को सौंपना साफ तौर पर अनुचित होता।"</p>
<p>उस फैसले ने इतिहास की धारा ही बदल दी। 1 अप्रैल 1947 को यानी भारत और पाकिस्तान को आजादी मिलने से कुछ महीने पहले दुबई समेत खाड़ी के संरक्षित राज्यों (प्रोटेक्टोरेट्स) को ब्रिटिश भारत से औपचारिक रूप से अलग कर दिया गया।</p>
<p>बाद में जब इन दो नए देशों ने सैकड़ों रियासतों को अपने में मिलाना शुरू किया तो अरब के शेख-शासित राज्य उस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं रहे। अगर घटनाएं अलग तरह से घटी होतीं तो आज पश्चिम एशिया का राजनीतिक नक्शा बहुत अलग होता।</p>]]> </content:encoded>
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<title>केंद्र सरकार की 1,847 बड़ी परियोजनाओं पर ₹21.97 लाख करोड़ खर्च, 709 प्रोजेक्ट्स में 80% काम पूरा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली देश में सड़क, रेलवे, बिजली, बंदरगाह और दूसरे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर सरकार का खर्च लगातार बढ़ रहा है. केंद्र की निगरानी में चल रही 1,847 बड़ी परियोजनाओं पर जून 2026 तक 21.97 लाख करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं. इन प्रोजेक्ट्स के लिए कुल 40.54 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 19:31:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>केंद्र, सरकार, की, 1, 847, बड़ी, परियोजनाओं, पर, ₹21.97, लाख, करोड़, खर्च, 709, प्रोजेक्ट्स, में, 80, काम, पूरा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>देश में सड़क, रेलवे, बिजली, बंदरगाह और दूसरे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर सरकार का खर्च लगातार बढ़ रहा है. केंद्र की निगरानी में चल रही 1,847 बड़ी परियोजनाओं पर जून 2026 तक 21.97 लाख करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं. इन प्रोजेक्ट्स के लिए कुल 40.54 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है. यानी तय रकम का 54 फीसदी से ज्यादा हिस्सा खर्च हो चुका है। </p>
<p>सरकार के मुताबिक, कई परियोजनाएं अब पूरी होने के करीब हैं. करीब 709 प्रोजेक्ट्स में 80 फीसदी से ज्यादा काम पूरा हो चुका है. वहीं 337 परियोजनाओं में 80 फीसदी से ज्यादा वित्तीय खर्च किया जा चुका है. इन प्रोजेक्ट्स को देश की कनेक्टिविटी, आर्थिक विकास और रोजगार के लिए अहम माना जा रहा है। </p>
<p><strong>सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स से जुड़े</strong><br>
सरकार के आंकड़ों में ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर सबसे आगे है. इस क्षेत्र में 1,341 बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं. इनकी कुल अनुमानित लागत 22.32 लाख करोड़ रुपये है. इसमें सड़क, रेलवे और दूसरे कनेक्टिविटी से जुड़े काम शामिल हैं। </p>
<p>इन परियोजनाओं का मकसद देश के अलग-अलग हिस्सों को बेहतर तरीके से जोड़ना है. सड़क और रेलवे नेटवर्क मजबूत होने से लोगों और सामान की आवाजाही आसान हो सकती है. इससे कारोबार को भी फायदा मिल सकता है। </p>
<p>बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का असर सिर्फ निर्माण तक सीमित नहीं रहता. इनके लिए बड़ी संख्या में लोगों और कंपनियों की जरूरत होती है. इससे सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर बनते हैं. बेहतर सड़क, रेल और बंदरगाह सुविधाएं लंबे समय में उद्योग और व्यापार की लागत कम करने में भी मदद कर सकती हैं। </p>
<p><strong>150 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स की ऑनलाइन निगरानी</strong><br>
सरकार इन बड़ी परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखने के लिए PAIMANA डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रही है. इसे Ministry of Statistics and Programme Implementation (MoSPI) ने तैयार किया है। </p>
<p>इस प्लेटफॉर्म के जरिए 150 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा लागत वाली केंद्र सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की निगरानी की जाती है. इससे सरकार को यह पता लगाने में मदद मिलती है कि किसी प्रोजेक्ट पर कितना काम हुआ है और कितना पैसा खर्च किया गया है। </p>
<p>सरकार ने 16 अप्रैल 2026 को एक नया Performance Monitoring Dashboard भी शुरू किया. इसका मकसद अलग-अलग इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के प्रदर्शन को एक ही जगह पर देखने की सुविधा देना है। </p>
<p>इस डैशबोर्ड में अब 165 अलग-अलग इंडिकेटर्स शामिल हैं. इसमें पहले के मुकाबले 54 नए इंडिकेटर्स  जोड़े गए हैं. इनके जरिए अलग-अलग सेक्टर की स्थिति को ज्यादा विस्तार से समझने की कोशिश की जा रही है </p>
<p><strong>बिजली से लेकर रेलवे और पोर्ट्स तक नजर</strong><br>
नए डैशबोर्ड में इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े छह प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है. इनमें बिजली, सिविल एविएशन, टेलीकॉम, रेलवे, सड़क और पोर्ट्स, शिपिंग एवं जलमार्ग शामिल हैं। </p>
<p>इस सिस्टम की मदद से अधिकारी किसी सेक्टर की मौजूदा स्थिति को पहले के आंकड़ों से भी तुलना कर सकते हैं. इसमें साल-दर-साल और महीने-दर-महीने बदलाव देखे जा सकते हैं. इसके अलावा तय लक्ष्य के मुकाबले प्रदर्शन और कुछ क्षेत्रों में क्षमता के इस्तेमाल की जानकारी भी मिलती है। </p>
<p>सरकार का कहना है कि एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इन आंकड़ों को रखने से अलग-अलग इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के बीच तुलना करना आसान होगा. इससे नीतियां बनाने और जरूरी कदम उठाने में मदद मिल सकती है. केंद्र की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर आधे से ज्यादा तय खर्च हो चुका है. कई प्रोजेक्ट अब पूरा होने के करीब हैं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>बाइक में 1&#45;2 नहीं लगे थे 500 हॉर्न! पुलिस ने लिया एक्शन, Video हुआ वायरल</title>
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<description><![CDATA[ हरिद्वार हरिद्वार में चल रही कांवड़ यात्रा के बीच अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं. उत्तराखंड से जुड़े राज्यों के लाखों कांवड़िए गंगा जल लेने हरिद्वार पहुंच रहे हैं. कांवड़ मेले में श्रद्धालु दूसरों का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए अलग-अलग तरह के प्रयोग करते नजर आ रहे हैं. इसी दौरान 500 हॉर्न … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 19:31:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>बाइक, में, 1-2, नहीं, लगे, थे, 500, हॉर्न, पुलिस, ने, लिया, एक्शन, Video, हुआ, वायरल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हरिद्वार</strong></p>
<p>हरिद्वार में चल रही कांवड़ यात्रा के बीच अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं. उत्तराखंड से जुड़े राज्यों के लाखों कांवड़िए गंगा जल लेने हरिद्वार पहुंच रहे हैं. कांवड़ मेले में श्रद्धालु दूसरों का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए अलग-अलग तरह के प्रयोग करते नजर आ रहे हैं. इसी दौरान 500 हॉर्न लगी एक बाइक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। </p>
<p>जानकारी के मुताबिक, यह बाइक फरीदाबाद के रहने वाले अमन की बताई जा रही है. बाइक को सामान्य तरीके से मॉडिफाई करने के बजाय इसमें करीब 500 हॉर्न लगाए गए थे. इतनी बड़ी संख्या में हॉर्न लगी बाइक जब सड़कों पर दिखाई दी तो लोगों का ध्यान उसकी ओर चला गया. इसी बाइक को हरिद्वार पुलिस ने शंकराचार्य चौक पर रोक लिया। </p>
<p>पुलिस ने जांच के बाद बाइक को मॉडिफाइड पाए जाने पर सीज कर दिया. कार्रवाई के बाद जब पुलिसकर्मी बाइक को कनखल थाने लेकर जा रहा था, तभी किसी व्यक्ति ने इसका वीडियो बना लिया. देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और 500 हॉर्न वाली बाइक चर्चा का विषय बन गई। </p>
<p><strong>शंकराचार्य चौक पर पुलिस ने रोकी बाइक</strong><br>
कांवड़ मेले के दौरान हरिद्वार की सड़कों पर बड़ी संख्या में वाहन और श्रद्धालु मौजूद हैं. ऐसे में नियमों के विपरीत मॉडिफाइड वाहनों को लेकर पुलिस लगातार निगरानी कर रही है. इसी दौरान शंकराचार्य चौक पर पुलिस की नजर अमन की इस बाइक पर पड़ी. बाइक में लगे सैकड़ों हॉर्न देखकर पुलिस ने उसे रोककर कार्रवाई की। </p>
<p>कनखल थाने के एसएसआई अनुज कुमार ने बताया कि बाइक को 7 अगस्त को शंकराचार्य चौक पर सीज किया गया था. उन्होंने कहा कि बाइक में 500 हॉर्न लगाए गए थे और उसे मॉडिफाई किया गया था. इसी वजह से वाहन का चालान किया गया और बाइक को सीज कर दिया गया। </p>
<p>पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई के बाद बाइक को कनखल थाने ले जाया गया. इसी दौरान बाइक पर लगे सैकड़ों हॉर्न लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गए. किसी ने इसका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल होने लगा। </p>
<p><strong>कांवड़ मेले में अनोखा अंदाज पड़ा भारी</strong><br>
हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान इस तरह के अलग-अलग वाहन और सजावट अक्सर लोगों का ध्यान खींचते हैं. हालांकि, वाहन में नियमों के विपरीत बदलाव करना चालक के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. 500 हॉर्न वाली इस बाइक के मामले में भी पुलिस ने मॉडिफिकेशन को आधार बनाकर कार्रवाई की है। </p>
<p>फिलहाल, बाइक पुलिस के कब्जे में है और उसे सीज किया जा चुका है. इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद लोग बाइक में लगाए गए हॉर्न की संख्या को लेकर हैरानी जता रहे हैं. पुलिस की कार्रवाई के बाद यह मामला कांवड़ मेले की चर्चित घटनाओं में शामिल हो गया है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>AI Cyber Attack Alert: अगले 2 साल में सैटेलाइट सिस्टम पर मंडरा सकता है बड़ा खतरा, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जहां एक ओर नई तकनीकी क्रांति का प्रतीक बन चुका है, वहीं साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इसके संभावित दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंता जता रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि AI आधारित साइबर हमलों को समय रहते नहीं रोका गया, तो आने वाले दो वर्षों में पृथ्वी की कक्षा … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 18:31:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Cyber, Attack, Alert:, अगले, साल, में, सैटेलाइट, सिस्टम, पर, मंडरा, सकता, है, बड़ा, खतरा, विशेषज्ञों, ने, दी, चेतावनी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली </strong><br>
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जहां एक ओर नई तकनीकी क्रांति का प्रतीक बन चुका है, वहीं साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इसके संभावित दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंता जता रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि AI आधारित साइबर हमलों को समय रहते नहीं रोका गया, तो आने वाले दो वर्षों में पृथ्वी की कक्षा में मौजूद सैटेलाइट नेटवर्क गंभीर खतरे में पड़ सकते हैं।</p>
<p><strong>AI से कैसे बढ़ सकता है खतरा?</strong><br>
विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक AI सिस्टम बहुत कम समय में किसी भी सॉफ्टवेयर की कमजोरियों (Vulnerabilities) की पहचान कर सकते हैं। यही क्षमता अगर साइबर अपराधियों के हाथ लग जाए तो वे सैटेलाइट कंट्रोल सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश कर सकते हैं। इससे सैटेलाइट का नियंत्रण प्रभावित होने और उनके गलत दिशा में संचालित होने का खतरा बढ़ सकता है।</p>
<p><strong>सैटेलाइट टकराव से क्या होगा नुकसान?</strong><br>
अगर किसी साइबर हमले के कारण एक या अधिक सैटेलाइट अपनी निर्धारित कक्षा से भटक जाएं और आपस में टकरा जाएं, तो अंतरिक्ष में मलबे (Space Debris) की मात्रा तेजी से बढ़ सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी स्थिति में अन्य सैटेलाइट भी प्रभावित हो सकते हैं, जिससे एक श्रृंखलाबद्ध दुर्घटना (Cascade Effect) की आशंका पैदा हो सकती है।</p>
<p><strong>किन सेवाओं पर पड़ सकता है असर?</strong><br>
आज दुनिया की कई महत्वपूर्ण सेवाएं सैटेलाइट नेटवर्क पर निर्भर हैं। इनमें शामिल हैं—</p>
<ul>
<li>GPS और नेविगेशन</li>
<li>मोबाइल और इंटरनेट संचार</li>
<li>बैंकिंग एवं डिजिटल भुगतान</li>
<li>मौसम पूर्वानुमान</li>
<li>रक्षा और सैन्य संचार</li>
<li>विमानन एवं समुद्री परिवहन</li>
</ul>
<p>यदि सैटेलाइट नेटवर्क प्रभावित होता है, तो इन सेवाओं में व्यापक व्यवधान आ सकता है।</p>
<p><strong>विशेषज्ञों ने क्या सलाह दी?</strong><br>
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सैटेलाइट सिस्टम की सुरक्षा को अब पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है। उनका मानना है कि AI आधारित हमलों से बचाव के लिए उन्नत साइबर सुरक्षा, नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट, लगातार निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक होगा। इससे भविष्य में संभावित बड़े साइबर संकट के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>Inside Story: UPI पेमेंट बिल्कुल फ्री, फिर अरबों ट्रांजैक्शन का खर्च कौन उठाता है? जानिए पूरा खेल</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली भारत में UPI पेमेंट को लेकर एक बार फिर फीस लगाने की चर्चा तेज हो गई है. हालांकि, आम यूजर से कोई UPI चार्ज नहीं लिया जाएगा. सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम UPI यूजर्स पर शुल्क लगाने का कोई फैसला नहीं हुआ है. संसद में हुए हालिया कानूनी बदलाव से भविष्य … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 18:02:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारत में UPI पेमेंट को लेकर एक बार फिर फीस लगाने की चर्चा तेज हो गई है. हालांकि, आम यूजर से कोई UPI चार्ज नहीं लिया जाएगा. सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम UPI यूजर्स पर शुल्क लगाने का कोई फैसला नहीं हुआ है. संसद में हुए हालिया कानूनी बदलाव से भविष्य में कुछ डिजिटल पेमेंट पर शुल्क या छूट तय करने का रास्ता जरूर खुला है, लेकिन इससे अपने आप UPI पर कोई फीस लागू नहीं होती। </p>
<p>सरकार ने साफ किया है कि आम यूजर्स के लिए UPI ट्रांजैक्शन फिलहाल मुफ्त रहेगा. यानी बैंक अकाउंट से किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को पैसे भेजने या किसी दुकान पर UPI से भुगतान करने पर ग्राहक से अलग से शुल्क नहीं लिया जाएगा। </p>
<p>दरअसल, बहस का केंद्र Merchant Discount Rate यानी MDR है. यह वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट सिस्टम के इस्तेमाल पर आमतौर पर मर्चेंट से लिया जा सकता है. UPI के बैंक अकाउंट आधारित मर्चेंट ट्रांजैक्शन लंबे समय से जीरो-MDR मॉडल पर चल रहे हैं।</p>
<p><strong>संसद के बदलाव से क्यों बढ़ी चर्चा?</strong><br>
संसद से हुए कानूनी बदलाव ने सरकार को भविष्य में कुछ डिजिटल पेमेंट पर शुल्क या छूट से जुड़ा ढांचा तय करने की गुंजाइश दी है. हालांकि, यह अभी सिर्फ एक प्रावधान है. इसका मतलब यह नहीं है कि UPI पर तुरंत कोई नया शुल्क लागू हो गया है. असल सवाल यह है कि देश में हर दिन होने वाले अरबों UPI ट्रांजैक्शन के इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशन की लागत आखिर कौन उठाएगा। </p>
<p><strong>2016 में शुरू हुआ था UPI</strong><br>
यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी UPI की शुरुआत अप्रैल 2016 में नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने की थी. उस समय 21 बैंक इस सिस्टम से जुड़े थे और पहले महीने सिर्फ 373 ट्रांजैक्शन हुए थे. इसके बाद UPI ने तेजी से विस्तार किया. मई 2026 में UPI पर करीब 23.20 बिलियन यानी 2,320 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू लगभग ₹29.90 लाख करोड़ रही. FY2025-26 में UPI ने करीब 24,162 करोड़ ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए, जिनकी वैल्यू ₹314 लाख करोड़ से ज्यादा थी. सरकार के मुताबिक, देश के डिजिटल पेमेंट वॉल्यूम में UPI की हिस्सेदारी अब करीब 85% है। </p>
<p><strong>PhonePe और Google Pay क्या UPI हैं?</strong><br>
यहां एक अंतर समझना जरूरी है. PhonePe, Google Pay और Paytm खुद UPI नहीं हैं. ये ऐसे पेमेंट ऐप हैं, जिनके जरिए यूजर्स UPI नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं. UPI एक बेसिक डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर है, जो अलग-अलग बैंक खातों के बीच रियल टाइम में पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा देता है. इसी वजह से अब छोटे पेमेंट के लिए बैंक अकाउंट नंबर और IFSC की जरूरत कम हो गई है. UPI ID, मोबाइल नंबर या QR कोड के जरिए भुगतान करना संभव है। </p>
<p><strong>छोटे कारोबारियों के लिए UPI क्यों अहम?</strong><br>
UPI ने ₹20, ₹50 और ₹100 जैसे छोटे भुगतान को भी डिजिटल बनाना आसान किया है. डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज के 2026 के आकलन के मुताबिक, 94% छोटे कारोबारियों ने UPI स्वीकार करने की बात कही. वहीं 72% व्यापारी डिजिटल पेमेंट से संतुष्ट थे और 57% ने कहा कि इससे उनकी बिक्री बढ़ी. इसी आकलन में 57% यूजर्स ने UPI को अपना पसंदीदा पेमेंट मोड बताया. 65% UPI यूजर्स ने रोजाना कई डिजिटल ट्रांजैक्शन करने की बात कही। </p>
<p><strong>मुफ्त UPI मॉडल की लागत कौन उठाता है?</strong><br>
जीरो-MDR मॉडल का मतलब यह है कि ज्यादातर बैंक अकाउंट आधारित UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लिया जाता. सरकार ने इस मॉडल को बनाए रखने के लिए इंसेंटिव के जरिए समर्थन दिया है. डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज के मुताबिक, इसके लिए ₹8,276 करोड़ का बजटीय सपोर्ट दिया गया. अर्थशास्त्री अजीत रानाडे ने इसे ऐसी महत्वपूर्ण सब्सिडी बताया है, जिसने UPI को अंतिम यूजर के लिए मुफ्त बनाए रखने में मदद की है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा भी पहले यह सवाल उठा चुके हैं कि UPI के संचालन की लागत आखिर कोई न कोई चुका रहा है। </p>
<p><strong>बड़े कारोबारियों से MDR लेने की चर्चा</strong><br>
UPI की लागत को लेकर भविष्य में बड़े मर्चेंट से कुछ शुल्क लेने की चर्चा होती रही है. 2024 में NPCI के तत्कालीन MD और CEO दिलीप अस्बे ने कहा था कि बड़े मर्चेंट उचित चार्ज दे सकते हैं, जबकि छोटे कारोबारियों को इससे बचाया जाना चाहिए। </p>
<p>कुछ प्रस्तावित मॉडलों में ₹2,000 से अधिक के बड़े मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.3% से 0.5% MDR की चर्चा हुई है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ऐसे ट्रांजैक्शन कुल वॉल्यूम का करीब 4% हो सकते हैं, लेकिन वैल्यू के लिहाज से इनकी हिस्सेदारी करीब 67% है. दूसरी रिपोर्ट्स में 0.25% से 0.4% तक की संभावित दरों का जिक्र किया गया है. हालांकि, अभी न तो कोई अंतिम MDR दर तय हुई है और न ही कोई निश्चित थ्रेशोल्ड लागू हुआ है। </p>
<p><strong>क्या आम UPI यूजर पर पड़ेगा असर?</strong><br>
फिलहाल आम यूजर के लिए UPI इस्तेमाल करने का तरीका नहीं बदला है. दोस्त को ₹500 भेजना, परिवार के सदस्य को पैसे ट्रांसफर करना या किसी दुकान पर ₹200 का भुगतान करना अब भी बिना UPI चार्ज के किया जा सकता है. भविष्य में अगर कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू किया जाता है, तो यह मुख्य रूप से मर्चेंट-साइड लागत होगी. मर्चेंट इस लागत को खुद वहन कर सकता है या अपने कारोबार की कीमतों में उसका कुछ हिस्सा शामिल कर सकता है. यह अभी तय नहीं है। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>Raksha Bandhan Special Train: घर जाने वालों के लिए खुशखबरी, रेलवे ने चलाई स्पेशल ट्रेन; जानें रूट और टाइमिंग</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  गर्मी की छुट्टियों के बाद ट्रेनों में सावन माह में तीर्थ स्थलों पर जाने वाले यात्रियों की भीड़ है। ऐसे में ही रक्षा बंधन का पावन पर्व आ रहा है। एक तरफ बहनें, भाई को राखी बांधने आना चाहती हैं। दूसरी ओर भाई अपनी बहनों के घर जाने की योजना बना रहे हैं। … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 18:02:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Raksha, Bandhan, Special, Train:, घर, जाने, वालों, के, लिए, खुशखबरी, रेलवे, ने, चलाई, स्पेशल, ट्रेन, जानें, रूट, और, टाइमिंग</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 गर्मी की छुट्टियों के बाद ट्रेनों में सावन माह में तीर्थ स्थलों पर जाने वाले यात्रियों की भीड़ है। ऐसे में ही रक्षा बंधन का पावन पर्व आ रहा है। एक तरफ बहनें, भाई को राखी बांधने आना चाहती हैं। दूसरी ओर भाई अपनी बहनों के घर जाने की योजना बना रहे हैं। परेशानी यह है कि दोनों को ट्रेन का कन्फर्म टिकट नहीं मिल रहा है। भाई-बहनों की इसी समस्या का समाधान करते हुए रेलवे ने रक्षा बंधन विशेष ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है।</p>
<p><strong>कई रूट पर विशेष ट्रेनें घोषित</strong><br>
इसी कड़ी में हजरत निजामुद्दीन से जबलपुर के बीच विशेष ट्रेन चलाने की घोषणा की गई है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक रूट पर भीड़ की समीक्षा की जा रही है। आवश्यकता के अनुरूप अन्य रूट पर भी विशेष ट्रेनें घोषित की जाएंगी।</p>
<p>जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन रक्षा बंधन विशेष (01701/01702) ट्रेन जबलपुर से 29 अगस्त को रात 8.20 बजे रवाना होगी और अगले दिन दोपहर 2.25 बजे हजरत निजामुद्दीन पहुंचेगी। वापसी दिशा में 30 अगस्त को हजरत निजामुद्दीन से यह विशेष ट्रेन शाम पौने चार बजे चलेगी।</p>
<p>अगले दिन सुबह साढ़े नौ बजे यह जबलपुर पहुंचेगी। रास्ते में इसका ठहराव कटनी मुड़वारा, दमोह, सागर, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, ग्वालियर, धौलपुर, आगरा कैंट, मथुरा, कोसी कलां रेलवे स्टेशनों पर होगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>VB&#45;G RAM G योजना के पहले महीने में मनरेगा से पिछड़ी, जुलाई में ग्रामीण रोजगार 50% घटा</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली नई ग्रामीण रोजगार योजना विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G RAM G) के तहत जुलाई 2026 में 7.67 करोड़ व्यक्ति-दिन रोजगार दर्ज किए गए. पिछले साल जुलाई में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGS) के तहत यह आंकड़ा 15.33 करोड़ था. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस तरह सालाना … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 17:31:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>VB-G, RAM, योजना, के, पहले, महीने, में, मनरेगा, से, पिछड़ी, जुलाई, में, ग्रामीण, रोजगार, 50, घटा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>नई ग्रामीण रोजगार योजना विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G RAM G) के तहत जुलाई 2026 में 7.67 करोड़ व्यक्ति-दिन रोजगार दर्ज किए गए. पिछले साल जुलाई में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGS) के तहत यह आंकड़ा 15.33 करोड़ था. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस तरह सालाना आधार पर ग्रामीण रोजगार सृजन में करीब 49.94 फीसदी की गिरावट आई है। </p>
<p>यह आंकड़ा इसलिए अहम है क्योंकि 1 जुलाई 2026 से करीब दो दशक पुरानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की जगह विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण लागू की गई थी. सरकार ने नई योजना को ग्रामीण रोजगार व्यवस्था का अपग्रेडेड वर्जन बताया है और इसके तहत रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रावधान किया है। </p>
<p><strong>VB-G RAM G का पहला महीना</strong></p>
<p>विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण लागू होने के बाद जुलाई उसका पहला पूरा महीना था. इसलिए इस महीने के पर्सन-डे के आंकड़े योजना की शुरुआती रफ्तार का संकेत देते हैं. पर्सन-डे का मतलब एक व्यक्ति को एक दिन का रोजगार मिलना है. ग्रामीण रोजगार योजनाओं में रोजगार सृजन को मापने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. जुलाई में 7.67 करोड़ पर्सन-डे दर्ज होना पिछले साल के मुकाबले रोजगार सृजन में बड़ी गिरावट को दिखाता है। </p>
<p><strong>संसद में सरकार ने क्या कहा था?</strong><br>
सरकार ने जुलाई के आंकड़ों पर संसद में योजना के शुरुआती प्रदर्शन को लेकर सकारात्मक तस्वीर पेश की थी. पिछले महीने एक लिखित जवाब में सरकार ने कहा था कि काम की मांग करने वाले 99.5 फीसदी से ज्यादा श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया. सरकार के मुताबिक, 22 जुलाई तक VB-G RAM G के तहत 5.2 करोड़ से ज्यादा पर्सन-डे बन चुके थे. ग्रामीण विकास मंत्रालय ने यह भी कहा था कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की जगह नई योजना लागू करने के बावजूद इसके क्रियान्वयन पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा। </p>
<p><strong>जुलाई अंत में रफ्तार पड़ी धीमी</strong><br>
हालांकि, जुलाई के अंतिम आंकड़े शुरुआती दावों से अलग तस्वीर पेश करते हैं. 22 जुलाई तक 5.2 करोड़ से ज्यादा पर्सन-डे बनने के बाद पूरे महीने का आंकड़ा 7.67 करोड़ पर पहुंचा. इससे संकेत मिलता है कि महीने के आखिरी हिस्से में रोजगार सृजन की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही. हालांकि, जुलाई में पर्सन-डे में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई, इस पर सरकार की ओर से अभी विस्तृत वजह सामने नहीं आई है। </p>
<p><strong>125 दिन रोजगार का है दावा</strong><br>
सरकार ने VB-G RAM G को MGNREGS के मुकाबले ज्यादा व्यापक और बेहतर ग्रामीण रोजगार योजना के तौर पर पेश किया है. नई व्यवस्था में रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करने की बात कही गई है. इसके अलावा योजना के तहत ज्यादा मजदूरी, सस्टेनेबल रूरल इंफ्रास्टक्चर के निर्माण और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को मजबूत करने पर जोर दिया गया है. सरकार का दावा है कि योजना का उद्देश्य सिर्फ रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका के अवसरों को मजबूत करना भी है। </p>
<p><strong>नई योजना के लिए ज्यादा बजट</strong><br>
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए VB-G RAM G के तहत ₹1.52 लाख करोड़ का सालाना प्रावधान रखा गया है. यह MGNREGS के लिए किए गए ₹86,000 करोड़ के बजटीय प्रावधान से काफी ज्यादा है. यानी सरकार ने नई योजना के लिए MGNREGS की तुलना में बड़ा वित्तीय आवंटन रखा है. इसके बावजूद जुलाई में रोजगार सृजन के पर्सन-डे में करीब 50 फीसदी की गिरावट ने योजना की शुरुआती रफ्तार को लेकर सवाल खड़े किए हैं। </p>
<p><strong>अब आगे के आंकड़ों पर नजर</strong><br>
जुलाई के आंकड़ों से फिलहाल यह साफ नहीं है कि पर्सन-डे में गिरावट नई योजना में बदलाव की वजह से हुई या ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की मांग और उपलब्धता की रफ्तार पहले से ही कमजोर थी. सरकार ने भी अभी इस गिरावट की विस्तृत वजह नहीं बताई है. आने वाले महीनों के आंकड़े इसलिए महत्वपूर्ण होंगे. इससे पता चलेगा कि जुलाई में दर्ज करीब 50 फीसदी की गिरावट सिर्फ पुरानी की जगह नई योजना पर शिफ्ट होने के चलते हुई या VB-G RAM G के तहत ग्रामीण रोजगार सृजन की रफ्तार पर इसका लंबा असर पड़ता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>Karnataka Teacher Recruitment: सरकारी स्कूलों में 15,000 शिक्षकों की भर्ती, TET पास 18 अगस्त से करें आवेदन</title>
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<description><![CDATA[ बेंगलुरु. सरकारी स्कूल में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बेहद बड़ी और शानदार खबर आई है। कर्नाटक स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने सरकारी स्कूलों में 15,000 ग्रेजुएट प्राइमरी टीचर (6वीं से 8वीं कक्षा) के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती प्रक्रिया के … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 16:31:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Karnataka, Teacher, Recruitment:, सरकारी, स्कूलों, में, 15, 000, शिक्षकों, की, भर्ती, TET, पास, अगस्त, से, करें, आवेदन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बेंगलुरु.</strong></p>
<p>सरकारी स्कूल में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बेहद बड़ी और शानदार खबर आई है। कर्नाटक स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने सरकारी स्कूलों में 15,000 ग्रेजुएट प्राइमरी टीचर (6वीं से 8वीं कक्षा) के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है।</p>
<p>इस भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित अभ्यर्थी कर्नाटक के विभिन्न जिलों के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में चयनित होकर अपने टीचिंग करियर की शुरुआत कर सकते हैं। पात्र एवं इच्छुक उम्मीदवार 18 अगस्त 2026 से विभाग की आधिकारिक वेबसाइट schooleducation.karnataka.gov.in पर जाकर ऑनलाइन मोड में आवेदन कर सकेंगे।</p>
<p><strong>वैकेंसी की डिटेल्स-</strong><br>
GPSTR – 8500 पद<br>
असिस्टेंट मास्टर (AM)- 4500 पद<br>
प्राइमरी स्कूल टीचर (PST)- 900 पद<br>
फिजिकल एजुकेशन टीचर (PET)- 600 पद<br>
कंप्यूटर साइंस टीचर (CST)- 500 पद</p>
<p><strong>महत्वपूर्ण तारीखें-</strong><br>
आवेदन शुरू होने की तिथि- 18 अगस्त 2026<br>
आवेदन की अंतिम तिथि- 7 सितंबर 2026<br>
आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि- 10 सितंबर 2026<br>
परीक्षा की तिथि- जल्द ही</p>
<p><strong>शैक्षणिक योग्यता और पात्रता शर्तें</strong><br>
शैक्षणिक योग्यता: उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबंधित विषय (जैसे भाषा, गणित, विज्ञान या सामाजिक अध्ययन) में ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए। इसके साथ ही D.El.Ed (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) या B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन) की डिग्री अनिवार्य है।<br>
<strong>शिक्षक पात्रता परीक्षा: </strong>आवेदकों का कर्नाटक टीईटी (TET) या सीटीईटी (CTET) पास अनिवार्य है।</p>
<p><strong>आयु सीमा: </strong>सामान्य वर्ग के आवेदकों के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है। राज्य सरकार के नियमानुसार आरक्षित श्रेणियों ओबीसी, एससी, एसटी के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में विशेष छूट दी जाएगी।</p>
<p><strong>चयन प्रक्रिया और परीक्षा का पैटर्न</strong><br>
15,000 पदों पर योग्य उम्मीदवारों के चयन के लिए पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।<br>
प्रतिस्पर्धी लिखित परीक्षा: उम्मीदवारों को बहुविकल्पीय (MCQ) प्रश्नों और विषयगत प्रश्नों वाली लिखित परीक्षा में शामिल होना होगा। इसमें सामान्य ज्ञान, शैक्षणिक मनोविज्ञान, भाषा और संबंधित विषय के प्रश्न पूछे जाएंगे।<br>
<strong>मेरिट लिस्ट: </strong>लिखित परीक्षा के अंक और शैक्षणिक योग्यता के वेटेज के आधार पर फाइनल मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी।<br>
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन (DV): मेरिट लिस्ट में शामिल अभ्यर्थियों के शैक्षणिक और आरक्षण संबंधी प्रमाणपत्रों की जांच के बाद अंतिम नियुक्ति पत्र दिया जाएगा।</p>
<p><strong>आवेदन कैसे करें?</strong><br>
अभ्यर्थी 18 अगस्त 2026 से schooleducation.karnataka.gov.in पोर्टल पर जाएं। होमपेज पर 'Graduate Primary Teacher Recruitment 2026' लिंक पर क्लिक करके नया रजिस्ट्रेशन करें। इसके बाद अपनी शैक्षणिक जानकारी दर्ज करें, आवश्यक डॉक्यूमेंट व फोटो अपलोड करें तथा श्रेणी के अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान कर फॉर्म सबमिट करें।</p>]]> </content:encoded>
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<title>सहारा निवेशकों के ₹97,412 करोड़ अब भी अटके, 1.43 करोड़ लोगों को मिले सिर्फ ₹8,429 करोड़</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली सहारा इंडिया की निवेश योजनाओं में देशभर के करीब 1.43 करोड़ निवेशकों ने कुल ₹97,412 करोड़ जमा किए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद निवेशकों को पैसा लौटाने के लिए 18 जुलाई 2023 को सहारा रिफंड पोर्टल शुरू किया गया। लेकिन रिफंड की रफ्तार बेहद धीमी रही। मार्च 2026 तक 39.46 लाख … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 16:31:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
सहारा इंडिया की निवेश योजनाओं में देशभर के करीब 1.43 करोड़ निवेशकों ने कुल ₹97,412 करोड़ जमा किए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद निवेशकों को पैसा लौटाने के लिए 18 जुलाई 2023 को सहारा रिफंड पोर्टल शुरू किया गया। लेकिन रिफंड की रफ्तार बेहद धीमी रही। मार्च 2026 तक 39.46 लाख निवेशकों को महज ₹8,429 करोड़ ही वापस किए जा सके हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में निवेशक अब भी अपने पैसों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला?</strong><br>
सहारा इंडिया की अलग-अलग निवेश योजनाओं में देश के करोड़ों लोगों की मेहनत की कमाई फंसी हुई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने निवेशकों को पैसा लौटाने के लिए विशेष रिफंड पोर्टल लॉन्च किया था। उम्मीद थी कि ऑनलाइन आवेदन और सत्यापन के जरिए जल्द से जल्द रकम वापस मिल सकेगी।</p>
<p>हालांकि, निवेशकों का आरोप है कि रिफंड प्रक्रिया बेहद धीमी है। बड़ी संख्या में आवेदन खारिज हो रहे हैं और दस्तावेजों के सत्यापन में भी लगातार समस्याएं सामने आ रही हैं। इसके अलावा, <strong>ऑनलाइन वेरिफिकेशन से जुड़ी व्यवस्था लंबे समय से प्रभावित बताई जा रही है।</strong></p>
<p><strong>रिफंड की सीमा बढ़ी, लेकिन भुगतान अब भी सीमित</strong><br>
सरकार ने रिफंड के लिए अधिकतम दावे की सीमा ₹50 हजार से बढ़ाकर ₹10 लाख कर दी है। इसके बावजूद निवेशकों को फिलहाल एक बार में अधिकतम ₹50 हजार तक का ही भुगतान मिल रहा है।</p>
<p>यानी किसी निवेशक की सहारा में ₹5 लाख, ₹50 लाख या उससे भी अधिक रकम फंसी हो, तो भी उसे फिलहाल एकमुश्त ₹50 हजार से ज्यादा नहीं मिल रहे हैं। इससे बड़ी रकम वाले निवेशकों की परेशानी बनी हुई है।</p>
<p><strong>दस्तावेजों के सत्यापन में सबसे बड़ी अड़चन</strong><br>
रिफंड प्रक्रिया में सबसे बड़ी समस्या दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर सामने आ रही है। निवेशकों के रिकॉर्ड सहारा समूह के पास हैं और रिफंड के लिए जमा किए गए दावों का सत्यापन इन्हीं रिकॉर्ड से किया जाना है।</p>
<p>कई मामलों में रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने, दस्तावेजों का डेटा से मिलान नहीं होने या जानकारी में अंतर जैसे कारणों से आवेदन खारिज किए जा रहे हैं। कुछ स्थानों पर आवेदनों के रिजेक्शन की दर 90 प्रतिशत तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है।</p>
<p><strong>अक्टूबर 2025 से वेरिफिकेशन सिस्टम ठप?</strong><br>
निवेशक पोर्टल पर आवेदन करने के बाद उनके दस्तावेज सत्यापन के लिए सहारा के सिस्टम पर भेजे जाते हैं। लेकिन यह व्यवस्था अक्टूबर 2025 से बंद होने की बात सामने आई है।</p>
<p>बताया जा रहा है कि सिस्टम और सर्वर से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराने वाले वेंडरों को भुगतान नहीं मिलने के कारण वेरिफिकेशन का काम प्रभावित हुआ है। इसका सीधा असर निवेशकों के दावों की जांच और रिफंड प्रक्रिया पर पड़ा है।</p>
<p><strong>अब भी हजारों करोड़ रुपये फंसे</strong><br>
आंकड़ों के मुताबिक, देशभर के करीब 1.04 करोड़ निवेशकों की लगभग ₹89 हजार करोड़ की रकम अब भी वापस की जानी बाकी है। मार्च 2026 तक 39.46 लाख निवेशकों को ₹8,429 करोड़ का भुगतान ही हुआ है।</p>
<p>सहारा-सेबी रिफंड खाते में उपलब्ध रकम और वास्तविक दावों के बीच बड़ा अंतर भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे <strong>में करोड़ों निवेशकों की निगाहें अब इस बात पर हैं कि उन्हें उनकी पूरी जमा राशि कब और किस प्रक्रिया के तहत वापस मिलेगी।</strong></p>
<p><strong>सहारा इंडिया में लोगों का 97,412 करोड़ रुपया जमा था।</strong><br>
कहा गया कि संपत्ति लेकर लोगों को दिया जाएगा। लेकिन हकीकत में ऐसा होता नजर नहीं आ रहा।<br>
सिर्फ 8,429 करोड़ रुपए ही लौटाए गए। यानी कुल रकम का 10% हिस्सा भी नहीं।<br>
आगे लोगों को मिले, इसकी भी संभावना नहीं दिखती।<br>
 </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>Delhi&#45;Mumbai Expressway: 1380 KM का देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे, गुरुग्राम से सूरत तक जुड़ेंगे ये प्रमुख शहर</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे भारत का सबसे लंबा या सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे है. दिल्ली से महाराष्ट्र के बीच यह छह राज्यों के बीच 1380 किलोमीटर लंबा रूट है, जो लिंक एक्सप्रेसवे मिलाकर 1450 किमी तक हो जाता है. ये 8 लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जिसे 12 लेन तक चौड़ा किया जा सकता है.दिल्ली, हरियाणा, … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 16:31:03 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Delhi-Mumbai, Expressway:, 1380, का, देश, का, सबसे, बड़ा, एक्सप्रेसवे, गुरुग्राम, से, सूरत, तक, जुड़ेंगे, ये, प्रमुख, शहर</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे भारत का सबसे लंबा या सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे है. दिल्ली से महाराष्ट्र के बीच यह छह राज्यों के बीच 1380 किलोमीटर लंबा रूट है, जो लिंक एक्सप्रेसवे मिलाकर 1450 किमी तक हो जाता है. ये 8 लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जिसे 12 लेन तक चौड़ा किया जा सकता है.दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान के अलावा ये मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र को कनेक्ट करता है. पूरा कॉरिडोर चालू होने के बाद दिल्ली से मुंबई का सफर 24 घंटे की जगह 12 घंटे रह जाएगा.ये एशिया का पहला ऐसा एक्सप्रेसवे है, जिसमें वन्यजीवों की जंगलों, वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी में आवाजाही को देखते हुए ओवरपास और मुकुंदरा हिल्स में सुरंग के साथ बनाया गया है। </p>
<p>दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा (करीब 850 किलोमीटर) चालू हो चुका है. दिल्ली से गुजरात के वड़ोदरा गुजरात तक का एक्सप्रेसवे आवाजाही के लिए खुल चुका है. वड़ोदरा से मुंबई के बीच लगभग 450-500 किलोमीटर का काम पूरा किया जा रहा है। </p>
<p><strong>    दिल्ली और हरियाणा: 169 किमी: 100 फीसदी चालू<br>
    राजस्थान : 373 किमी: 98% पूरा, केवल टनल का थोड़ा काम<br>
    मध्य प्रदेश : 244 किमी : 100 फीसदी पूरा<br>
    गुजरात : 426 किमी : 85 फीसदी पूरा<br>
    महाराष्ट्र : 174 किमी : 60 फीसदी पूरा</strong></p>
<p><strong>दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का रूट</strong><br>
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (NHAI) देश के 20 बड़े शहरों और लिंक रूट को जोड़ दें तो 30 शहरों को कनेक्ट करके सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे का नेटवर्क तैयार करता है. दिल्ली के सराय काले खां, डीएनडी फ्लाईओवर से हरियाणा में गुरुग्राम, फरीदाबाद, बल्लभगढ़, नूंह मेवात,पलवल तक जाता है. राजस्थान में अलवर, बांदीकुई, दौसा, जयपुर (लिंक रूट), सवाई माधोपुर, कोटा और बूंदी को जोड़ता है। </p>
<p><strong>दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का एमपी का रूट</strong><br>
मध्य प्रदेश में मंदसौर, गरोठ,जावरा, रतलाम, झाबुआ को ये जोड़ता है. जबकि लिंक रूट से इंदौर, उज्जैन और भोपाल भी दायरे में आते हैं. गुजरात का दाहोद, गोधरा, वड़ोदरा, भरूच, सूरत, नवसारी, वलसाड, वापी इससे कनेक्ट होता है. महाराष्ट्र में पालघर,ठाणे, वसई, विरार, मुंबई  में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट इसका आखिरी पड़ाव है. जेवर के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जोड़ने के लिए भी लिंक रूट तैयार हो रहा है। </p>
<p><strong>दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का अपडेट</strong><br>
हरियाणा के सोहना से राजस्थान के दौसा और लालसोट का 246 किमी का हिस्सा सबसे पहले शुरू हुआ था.इससे दिल्ली से जयपुर, रणथंभौर का सफर तेज रफ्तार वाला बन गया. फिर मध्य प्रदेश में झाबुआ, रतलाम और मंदसौर का 244 किमी का पूरा हिस्सा चालू किया गया था. राजस्थान और कोटा बाईपास को जोड़ते हुए राजस्थान करीब 98 फीसदी काम हो चुका है.कोटा बाईपास का 80 किमी का एरिया और बांदीकुई-जयपुर लिंक रूट का 67 किमी का हिस्सा खोल दिया गया है। </p>
<p><strong>दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का गुजरात का रूट</strong><br>
गुजरात में वड़ोदरा से भरूच का 86 किमी का गलियारा भी आवाजाही के खोला गया है.गोधरा से वड़ोदरा का 81 किमी के रूट को ट्रायल में ट्रैफिक के लिए खोला गया है. दिल्ली एनसीआर में इसे डीएनडी-फरीदाबाद-कुंडली मानेसर पलवल लिंक एक्सप्रेसवे से जोड़ा गया है. दिल्ली के सराय काले खां से DND फ्लाईवे से फरीदाबाद होते हुए KMP को जोड़ने वाला 59 किमी का हिस्सा भी चालू होने के अंतिम चरण में है। </p>
<p><strong>अभी गुजरात और मुंबई के लिंक पर काम</strong><br>
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के आखिरी हिस्से के तौर पर वड़ोदरा से आगे सूरत, नवसारी और वलसाड जैसे जिलों का 20 फीसदी तक काम बाकी है. महाराष्ट्र में विरार, पालघर से लेकर वसई से JNPT पोर्ट 170 किमी के करीब का एरिया है. पहाड़ी और तटीय इलाके में भूमि अधिग्रहण से जुड़ी जटिलताओं से यह 60 फीसदी ही पूरा हो सका है. मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच मुकुंदरा हिल्स टनल का भी आखिरी चरण में है। </p>
<p>
<strong>दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कब होगा</strong><br>
दिल्ली से मुंबई और JNPT पोर्ट तक 1350 किमी एक्सप्रेसवे के पूरा  होने का लक्ष्य 2027 के आखिरी के महीनों तक तय किया गया है. इससे बुलेट ट्रेन वाली रफ्तार से दिल्ली से मुंबई का सफर 12 से 14 घंटे में पूरा किया जा सकेगा. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के तहत है. भारतमाला परियोजना के फेज-1 में इसका निर्माण हो रहा है। </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>एक ही घर में 6 सास और 14 बहुएं! खाने में 3 बकरे भी पड़ते हैं कम, आंध्र के इस परिवार की अनोखी कहानी</title>
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<description><![CDATA[ अनंतपुर  आज के इस दौर में जब छोटे परिवारों का जमाना है. लोग दो कमरों के मकान में सिमटते जा रहे हैं. वहीं आंध्र प्रदेश से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो आपको हैरान भी करेगी और आपके दिल को सुकून भी देगी।  अनंतपुर जिले के कुर्लापल्ली गांव में रहने वाला नागप्पा परिवार आज … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 15:02:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>एक, ही, घर, में, सास, और, बहुएं, खाने, में, बकरे, भी, पड़ते, हैं, कम, आंध्र, के, इस, परिवार, की, अनोखी, कहानी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अनंतपुर </strong><br>
आज के इस दौर में जब छोटे परिवारों का जमाना है. लोग दो कमरों के मकान में सिमटते जा रहे हैं. वहीं आंध्र प्रदेश से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो आपको हैरान भी करेगी और आपके दिल को सुकून भी देगी। </p>
<p>अनंतपुर जिले के कुर्लापल्ली गांव में रहने वाला नागप्पा परिवार आज भी संयुक्त परिवार की उस पुरानी भारतीय परंपरा को पूरी शान से जिंदा रखे हुए है. कहने को तो यह परिवार पास-पास बने चार अलग-अलग मकानों में रहता है, लेकिन असलियत में इनका दिल, इनकी रसोई और इनका पूरा जीवन एक ही धागे में पिरोया हुआ है। </p>
<p><strong>कैसे चलती है 83 लोगों की दिनचर्या?</strong><br>
इतने बड़े परिवार में व्यवस्था बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं है. पीटीआई  मुताबिक, हनुमंतरायुडू ने बताया कि रोज सुबह परिवार के बड़े-बुजुर्ग चाय-कॉफी की चुस्की के साथ एक जगह बैठते हैं और पूरे दिन का खाका तैयार करते हैं. किसे खेत में जाना है, किसे घर के काम देखने हैं और आज खाने में क्या बनेगा. यह सब सुबह की इसी बैठक में तय हो जाता है. इसके बाद कुछ सदस्य खेतों की ओर निकल जाते हैं, तो कुछ घर की जिम्मेदारी संभालते हैं। </p>
<p><strong>चौथी पीढ़ी के कंधे पर 83 लोगों की जिम्मेदारी</strong><br>
नागप्पा के परपोते महेश इस परिवार की चौथी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं. महेश बताते हैं, "हमारे परदादा नागप्पा के समय से शुरू हुई यह परंपरा आज छह पीढ़ियों तक पहुंच चुकी है. अब बुजुर्गों ने बाहर के सारे काम और जिम्मेदारियां मेरे कंधों पर डाल दी हैं. इन 83 लोगों के लिए घर का राशन लाना हो, किसी की बीमारी का इलाज हो, बच्चों की स्कूल फीस और किताबों का इंतजाम हो या गाड़ियों का रखरखाव और बैंक का काम. यह सब मैं अकेला संभालता हूं. इतने बड़े कुनबे की जिम्मेदारी उठाना मेरे लिए गर्व की बात है. हमारे बीच उम्र में थोड़े-बहुत छोटे-बड़े का फर्क जरूर है, लेकिन सम्मान और प्यार में कोई कमी नहीं है। </p>
<p><strong>घर चार, लेकिन चूल्हा एक</strong><br>
इस परिवार की सबसे खूबसूरत परंपरा है इनकी साझी रसोई. भले ही लोग चार अलग-अलग घरों में रहते हों, लेकिन खाना पूरे 83 लोगों का एक साथ ही बनता है. बाजार से राशन और जरूरी सामान लाने की जिम्मेदारी बुजुर्गों की होती है, जबकि घर की बहुएं मिलकर पूरे परिवार के लिए प्यार से खाना पकाती हैं। </p>
<p><strong>खेती भी और बसों का कारोबार भी</strong><br>
बात अगर रोजी-रोटी की करें तो 120 एकड़ जमीन पर खेती इस परिवार का मुख्य सहारा है. खेतों में मूंगफली, टमाटर, बैंगन, तरबूज, पपीता और मिर्च जैसी फसलें लहलहाती हैं. खेती के साथ-साथ यह परिवार मिलकर 'श्री कृष्णा हनुमान ट्रेवल्स' की 5 बसें चलाता है. इनके पास 1000 भेड़ें, 70 भैंसें, 3 ट्रैक्टर, एक बोलेरो और एक आयशर ट्रक भी है. इतना ही नहीं, इनके खान-पान में आज भी शुद्ध देसी स्वाद बसता है। </p>
<p>खान-पान में आज भी मिट्टी और लकड़ी के चूल्हे का देसी स्वाद ही चलता है. रोज सुबह-शाम चूल्हे पर रागी संगटी (रागी का पारंपरिक भोजन) और ज्वार की रोटियां सेकी जाती हैं. परिवार के सदस्य हंसते हुए बताते हैं कि जब कोई त्योहार आता है और पूरा कुनबा इकट्ठा होता है, तो एक ही वक्त के खाने में कम से कम तीन बकरे और कई किलो चिकन पक जाता है। </p>
<p><strong>शाम होते ही खत्म हो जाते हैं मनमुटाव<br>
अब आप सोच रहे होंगे कि जहां 83 लोग एक साथ र</strong>हते हों, वहां कहासुनी या मतभेद तो होते ही होंगे. बुजुर्ग भी इस बात को स्वीकारते हैं कि राय अलग हो सकती है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि सूरज ढलने और दिन खत्म होने से पहले हर मनमुटाव को आपस में बैठकर सुलझा लिया जाता है. आपसी सम्मान, एक-दूसरे का सहारा बनने की सोच और पारिवारिक संस्कार ही वो डोर हैं, जिसने छह-छह पीढ़ियों को आज भी एक साथ बांधकर रखा है। </p>
<p><strong>"हम देवरानी-जेठानी नहीं, सगी बहनें और दोस्त हैं"</strong><br>
दूसरे गांवों और शहरों से इस घर में आई बहुएं भी बिना किसी शिकायत के एक साथ हंसते-खेलते रहती हैं. घर की दूसरी बहू अनुराधा बताती हैं, "हमारे घर में करीब 20 औरतें हैं. हम सब मिलकर एक ही रसोई में खाना बनाते हैं और एक साथ खाते हैं. अगर घर में किसी को शुगर या कोई दिक्कत है, तो उसके लिए अलग से रोटी या दलिया बना दिया जाता है, बाकी खाना सबके लिए एक जैसा बनता है. घर के बड़े हम सभी बहुओं को अपनी सगी बेटियों की तरह प्यार देते हैं. हम देवरानी-जेठानी की तरह नहीं, बल्कि सगी बहनों और पक्की सहेलियों की तरह रहती हैं. इस घर की बहू बनकर मुझे बेहद खुशी और गर्व होता है." बहुओं और बेटों का साफ कहना है, "रहने के लिए जरूरत पड़ी तो चार घर और बना लेंगे, लेकिन परिवार का बंटवारा जीते जी कभी नहीं होने देंगे। </p>]]> </content:encoded>
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<title>अब PAK&#45;चीन की बढ़ेगी टेंशन! 2030 तक ज्यादातर नौसैनिक युद्धपोतों पर तैनात होगी BrahMos</title>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:31:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>अब, PAK-चीन, की, बढ़ेगी, टेंशन, 2030, तक, ज्यादातर, नौसैनिक, युद्धपोतों, पर, तैनात, होगी, BrahMos</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
भारतीय नौसेना अपने फ्रंटलाइन युद्धपोतों पर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल लगाने की प्रक्रिया को तेज कर रही है. लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में बेड़े के बड़े हिस्से में इस मिसाइल को एकीकृत किया जाए. सूत्रों के अनुसार नौसेना 2030 तक प्रमुख युद्धपोतों पर ब्रह्मोस की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।  </p>
<p>पिछले एक साल में छह से ज्यादा ब्रह्मोस सक्षम युद्धपोत बेड़े में शामिल हुए हैं जिससे कुल संख्या लगभग 20 पहुंच गई है. सभी नए कमीशन होने वाली जहाजें ब्रह्मोस सिस्टम से लैस होती हैं. मौजूदा जहाजों पर भी काम चल रहा है. यह मिसाइल समुद्री हमले की क्षमता को मजबूत बनाने वाला प्रमुख हथियार बन चुका है। </p>
<p>ब्रह्मोस की प्रासंगिकता ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और बढ़ गई जब यह भारतीय सशस्त्र बलों के प्रमुख स्ट्राइक सिस्टम में शामिल रहा. इस अभियान में मिसाइल ने अपनी सटीकता और प्रभावी रही. इसके बाद नौसेना ने इसे व्यापक स्तर पर अपनाने पर जोर दिया है। </p>
<p>ब्रह्मोस अब केवल परीक्षण या अभ्यास तक सीमित नहीं रह गया बल्कि वास्तविक संचालन में अपनी उपयोगिता दिखा चुका है. इसकी सुपरसोनिक गति और लंबी दूरी की मारक क्षमता दुश्मन के जहाजों या तटीय लक्ष्यों पर तेजी से हमला करने में मदद करती है। </p>
<p><strong>नए जहाजों में डिजाइन स्तर पर इंटीग्रेशन </strong><br>
नवीनतम पीढ़ी के भारतीय युद्धपोत ब्रह्मोस क्षमता को ध्यान में रखकर डिजाइन किए जा रहे हैं. नीलगिरी क्लास स्टील्थ फ्रिगेट्स जैसे आईएनएस उदयगिरी, आईएनएस हिमगिरी और आईएनएस महेंद्रगिरि में आठ वर्टिकली लॉन्च ब्रह्मोस मिसाइलें लगाई गई हैं. ये जहाजें स्वदेशी डिजाइन और निर्माण का हिस्सा हैं जिनमें उच्च स्तर की स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है। </p>
<p>विध्वंसक जहाजों में कुछ नए मॉडल 16 वर्टिकल लॉन्चर तक ले जा सकते हैं जबकि पुराने मॉडल में आठ की व्यवस्था है. इस तरह नौसेना अपने बेड़े की मारक क्षमता को लगातार बढ़ा रही है. फरवरी 2024 में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने नौसेना के युद्धपोतों के लिए 220 से ज्यादा ब्रह्मोस एक्सटेंडेड रेंज मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी थी।  </p>
<p>इसके बाद 2025 में अतिरिक्त फायर कंट्रोल सिस्टम और वर्टिकल लॉन्चर की मंजूरी मिली ताकि बेड़े में मिसाइल की मौजूदगी और बढ़ सके. ब्रह्मोस कार्यक्रम रेंज और प्लेटफॉर्म अनुकूलता के मामले में काफी विकसित हो चुका है. एक्सटेंडेड रेंज वेरिएंट ज्यादा स्टैंड-ऑफ क्षमता देते हैं. मिसाइल पहले से ही भूमि, समुद्र और हवा से लॉन्च होने वाले वर्जन हैं। </p>
<p>नौसेना का लंबा उद्देश्य पुराने जहाज पर एंटी-सरफेस मिसाइल सिस्टम को ब्रह्मोस से बदलना है. अगले चार वर्षों में ज्यादातर युद्धपोतों पर ब्रह्मोस एकीकरण का काम आगे बढ़ाया जा रहा है. 2030 तक प्रमुख सतह कॉम्बैटेंट्स पर ब्रह्मोस उपलब्ध होने की उम्मीद है जिससे भारत की लंबी दूरी की समुद्री स्ट्राइक क्षमता काफी मजबूत होगी. नौसेना एक साथ नए युद्धपोत जोड़ रही है. मौजूदा प्लेटफॉर्म को रेट्रोफिट कर रही है. इससे दशक के अंत तक ब्रह्मोस की पहुंच तेजी से बढ़ेगी। </p>
<p><strong>स्वदेशीकरण और भविष्य की दृष्टि</strong><br>
भारतीय नौसेना अपने बेड़े को तेजी से मजबूत कर रही है. नए युद्धपोतों की कमीशनिंग तेज गति से हो रही है. लक्ष्य 2047 तक शत-प्रतिशत स्वदेशी होना है. ब्रह्मोस भारत-रूस संयुक्त उद्यम का उत्पाद है लेकिन इसमें स्वदेशी सामग्री और तकनीक का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। </p>
<p>उत्पादन क्षमता बढ़ाने के प्रयास चल रहे हैं ताकि घरेलू जरूरत और निर्यात दोनों पूरे हो सकें. यह मिसाइल न केवल नौसेना बल्कि भारतीय थलसेना और भारतीय वायु सेना के प्लेटफॉर्म पर भी तैनात है. ब्रह्मोस के इंटीग्रेशन से भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी डेटरेंस क्षमता बढ़ाएगी। </p>
<p>सुपरसोनिक गति के कारण दुश्मन के लिए इसे रोकना मुश्किल होता है. सैचुरेशन स्ट्राइक यानी एक साथ कई मिसाइलें दागने की क्षमता दुश्मन की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दे सकती है. नए फ्रिगेट और विध्वंसक जहाजों के साथ मिलकर यह बेड़ा बहुआयामी खतरों का सामना करने में सक्षम बनेगा। </p>
<p>बेड़े के विस्तार के साथ मिसाइलों की संख्या, रखरखाव, प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक्स की जरूरत भी बढ़ेगी. एक्सटेंडेड रेंज और भविष्य के हाइपरसोनिक वर्जन पर काम जारी है. नौसेना को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी प्लेटफॉर्म पर एकीकरण सुचारू रहे और ऑपरेशनल तैयारियां बनी रहें. कुल मिलाकर ब्रह्मोस नौसेना की समुद्री शक्ति का केंद्रबिंदु बनता जा रहा है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>Defence Deal: F&#45;35 और Su&#45;57 नहीं, इस घातक फाइटर जेट पर आई बड़ी खुशखबरी; चीन&#45;पाकिस्तान की बढ़ेगी टेंशन</title>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:31:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बेंगलुरु </strong></p>
<p> चीन और पाकिस्‍तान जैसे दुश्‍मन देशों की धड़कनों की पहरेदारी करने के लिए भारत ने कई ठोस कदम उठाए हैं. इसमें राफेल फाइटर जेट का बेड़ा तैयार करना प्रमुख रणनीति है. इस दिशा में बड़ी खुशखबरी सामने आई है. फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट डील पर भारत को डिटेल्‍ड प्रोपोजल सौंपा है. तकरीबन 3.25 लाख करोड़ के इस रक्षा सौदे के तहत 94 राफेल लड़ाकू विमान का उत्‍पादन भारत में करने का प्रस्‍ताव है. डील के तहत 20 फाइटर जेट फ्लाई-बाई कंडीशन (यानी पूरी तरह से तैयार) में भारत को मिलेंगे. हालांकि, फाइटर जेट का ब्रेन कहा जाने वाला सोर्स कोड और इंटरफेस कंट्रोल डॉक्‍यूमेंट (ICD) साझा करने पर सहमति बनी है या नहीं, इसपर जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। </p>
<p>इंडियन एयरफोर्स की लड़ाकू क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए फ्रांस ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए भारत को लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव का विस्तृत तकनीकी और कमर्शियल डॉक्‍यूमेंट्स सौंपा है. रक्षा सूत्रों के अनुसार, फ्रांसीसी पक्ष ने भारत की ओर से जारी लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoR) के जवाब में यह प्रस्ताव प्रस्तुत किया है. रक्षा मंत्रालय का अधिग्रहण विंग और भारतीय वायुसेना द्वारा विस्तार से समीक्षा की जा रही है. इस प्रस्ताव की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता बड़े पैमाने पर भारत में स्थानीय मैन्‍यूफैक्चरिंग और स्वदेशीकरण पर जोर है. प्रस्ताव के तहत 114 में से 94 राफेल विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा. इसके लिए फ्रांस की विमान निर्माता कंपनी डसॉल्ट एविएशन के साथ मिसाइल निर्माता MBDA, इंजन निर्माता सफ्रान और थेल्स जैसी प्रमुख कंपनियां भारतीय औद्योगिक साझेदारों के साथ मिलकर उत्पादन करेंगी। </p>
<p><strong>भारत के फोकस पर क्‍या</strong><br>
भारत इस प्रस्ताव का विशेष रूप से इस आधार पर मूल्यांकन कर रहा है कि राफेल विमानों में स्वदेशी हथियारों खासकर अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल के विभिन्न संस्करणों के इंटीग्रेशन और स्वदेशी उपकरणों को कितनी प्राथमिकता दी गई है. रक्षा मंत्रालय चाहता है कि इस सौदे में अधिकतम स्वदेशी सामग्री शामिल हो, ताकि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी गति मिल सके. सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना से भारतीय उद्योग को करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये के कारोबारी अवसर मिलने की संभावना है. टाटा समूह, लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) सहित कई भारतीय रक्षा एवं विनिर्माण कंपनियां इस कार्यक्रम का हिस्सा बन सकती हैं. इससे रक्षा उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण और रोजगार सृजन को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। </p>
<p>भारत ने इसी वर्ष मई में 114 राफेल विमानों की गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट (जी-टू-जी) खरीद के लिए फ्रांस को औपचारिक एलओआर जारी किया था. भारतीय वायुसेना के घटते स्क्वाड्रन बल, पुराने रूसी मूल के मिग लड़ाकू विमानों की चरणबद्ध विदाई और स्वदेशी एलसीए मार्क-1A तथा LCA मार्क-2 कार्यक्रमों में देरी को देखते हुए यह खरीद अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है. वर्तमान में भारतीय वायुसेना और भारतीय नौसेना कुल 62 राफेल विमानों का ऑर्डर दे चुकी हैं. यदि 114 नए विमानों का सौदा अंतिम रूप लेता है तो देश में राफेल विमानों की संख्या बढ़कर 176 हो जाएगी. इसके अलावा भारतीय नौसेना भी समुद्री सुरक्षा आवश्यकताओं को देखते हुए 31 अतिरिक्त राफेल खरीदने की इच्छा जता चुकी है. ऐसा होने पर भारत के पास 200 से अधिक राफेल लड़ाकू विमान हो सकते हैं। </p>
<p><strong>2024 में डिटेल्‍ड स्‍टडी</strong><br>
उल्लेखनीय है कि रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में वर्ष 2024 में भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए व्यापक अध्ययन किया गया था. इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए. करीब पांच महीने पहले रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने भारतीय वायुसेना के 114 राफेल विमानों की खरीद संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. अब फ्रांस के विस्तृत प्रस्ताव पर तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के बाद इस बहुप्रतीक्षित रक्षा सौदे पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। </p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान आएंगे भारत, सितंबर में BRICS समिट में होंगे शामिल</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान सितंबर में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली आएंगे. न्यूज एजेंसी एएनआई ने ईरानी सूत्रों के हवाले से शुक्रवार, 14 अगस्त को यह रिपोर्ट छापी है. भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और 18वें ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी करेगा. यह … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:18:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान सितंबर में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली आएंगे. न्यूज एजेंसी एएनआई ने ईरानी सूत्रों के हवाले से शुक्रवार, 14 अगस्त को यह रिपोर्ट छापी है. भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और 18वें ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी करेगा. यह सम्मेलन भारत की राजधानी नई दिल्ली में होने वाला है. अमेरिका और ईरान के बीच 5 महीने से अधिक समय से जारी संघर्ष के बीच पेजेशकियन की भारत यात्रा काफी अहम मानी जा रही है। </p>
<p>इस सम्मेलन की मेजबानी भारत के तय किए गए विषय “मजबूती, नए प्रयोग, सहयोग और टिकाऊ विकास के लिए निर्माण” के तहत होगी. भारत ने 2026 की शुरुआत में ब्रिक्स की अध्यक्षता ब्राजील से संभाली थी। </p>
<p>बता दें अक्टूबर 2024 में पेजेशकियन ने रूस के कजान शहर में हुए ब्रिक्स सम्मेलन से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और ईरान के बीच संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की थी। </p>
<p>ईरान 2024 में ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बना था. उसके साथ मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी फुल टाइम मेंबर बने थे. इसके बाद 2025 में इंडोनेशिया भी ब्रिक्स में शामिल हुआ. इसके साथ संगठन के पूर्ण सदस्यों की संख्या बढ़कर 11 हो गई। </p>
<p>ईरान 2024 में BRICS का पूर्ण सदस्य बना था. इसके बाद से तेहरान इस मंच के जरिए आर्थिक और राजनीतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर देता रहा है. जून में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने भारत आए थे. उस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत पश्चिम एशिया में तनाव कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. उन्होंने कहा था कि ईरान भारत की किसी भी रचनात्मक भूमिका का स्वागत करेगा। </p>
<p>राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में हुए BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रिश्तों और पश्चिम एशिया समेत क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की थी. प्रधानमंत्री मोदी ने उस दौरान चाबहार बंदरगाह और भारत-ईरान सहयोग के महत्व पर भी जोर दिया था। </p>
<p><strong>पश्चिम एशिया संकट के बीच अहम दौरा</strong><br>
भारत और ईरान के बीच हाल के महीनों में कूटनीतिक संपर्क बढ़ा है. जुलाई में पीएम मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियान के बीच फोन पर बातचीत हुई थी, जिसमें पश्चिम एशिया के हालात और क्षेत्रीय शांति पर चर्चा हुई. मोदी ने बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान और होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही और व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की जरूरत बताई थी। </p>
<p><strong>जून में भारत आए थे ईरान के विदेश मंत्री</strong><br>
इससे पहले जून में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए भारत आए थे. बैठक के बाद नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अराघची ने दुनिया में शांति कायम करने में भारत की बढ़ती भूमिका की तारीफ की. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ती स्थिति को शांत करने में भारत और बड़ी भूमिका निभा सकता है। </p>
<p>अराघची ने साफ कहा कि तेहरान यानी ईरान को हथियारों या युद्ध के रास्ते में कोई भविष्य नजर नहीं आता. उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है. उनके मुताबिक, आगे बढ़ने का एकमात्र सही रास्ता बातचीत के जरिए समझौता करना है. ईरान की ओर से भारत की मध्यस्थता के लिए तैयार होने का संकेत देते हुए अराघची ने कहा, “भारत की किसी भी रचनात्मक भूमिका का हम स्वागत करेंगे। </p>
<p>अराघची ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मिलकर बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कहा कि ईरान के साथ दोस्ताना संबंध रखने वाले देश व्यापार और कारोबारी सुरक्षा के लिए ईरान पर भरोसा कर सकते हैं. अराघची ने यह भी साफ किया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा करने की अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी ईरान हमेशा निभाता रहेगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>चीन के टैरिफ बचाने के खेल में भारत का नाम! अमेरिका ने 40 से ज्यादा देशों पर लगाया गंभीर आरोप</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्‍ली अमेरिका ने टैरिफ को लेकर भारत पर फिर निशाना साध रहा है. अमेरिका ने भारत पर हैरान करने वाला एक आरोप लगाया है. उसका कहना है कि भारत &#039;गुप्त माल ढुलाई नेटवर्क&#039; का हिस्‍सा है और चीन को अमेरिका के भारी टैरिफ से बचने में मदद करता है. यह आरोप 40 अन्‍य देशों … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:18:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>चीन, के, टैरिफ, बचाने, के, खेल, में, भारत, का, नाम, अमेरिका, ने, से, ज्यादा, देशों, पर, लगाया, गंभीर, आरोप</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्‍ली</strong><br>
अमेरिका ने टैरिफ को लेकर भारत पर फिर निशाना साध रहा है. अमेरिका ने भारत पर हैरान करने वाला एक आरोप लगाया है. उसका कहना है कि भारत 'गुप्त माल ढुलाई नेटवर्क' का हिस्‍सा है और चीन को अमेरिका के भारी टैरिफ से बचने में मदद करता है. यह आरोप 40 अन्‍य देशों पर भी लगाया गया है। </p>
<p>सीधे शब्‍दों में कहे तो भारत समेत 40 देशों पर यह आरोप लगाया गया है कि ये अमेरिका को चीन का उत्‍पाद बेच रहे हैं और चीन को भारी टैरिफ से बचा रहे हैं. 'द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम' नामक एक रिपोर्ट में व्‍हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने कहा कि अमेरिका इस तरह की खेपों का पता लगाने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए AI का उपयोग करेगा। </p>
<p>नवारो ने कहा कि 2018 के बाद यह प्रथा अधिक आम हो गई, जब ट्रंप प्रशासन ने चीन पर अनुचित व्यापार प्रथाओं के आरोप में धारा 301 के तहत टैरिफ लगाए थे. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अवैध रूप से माल की ढुलाई का सालाना वैल्यू 40 अरब अमेरिकी डॉलर से 303 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच है। </p>
<p><strong>भारत, कनाड समेत यूरोपीय संघ का नाम </strong><br>
राष्ट्रपति के व्यापार और विनिर्माण सलाहकार पीटर नवारो ने कहा कि सालों से बड़े पैमाने पर माल ट्रांसफर घोटाले ने कम्युनिस्ट चीन को 40 से अधिक देशों के माध्यम से अपने निर्यात को वैध बनाने की अनुमति दी है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि चीन के तथाकथित 'शैडो ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क' में शामिल देशों में अमेरिका के कुछ सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार देश शामिल हैं, जिनमें मैक्सिको और कनाडा से लेकर यूरोपीय संघ, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। </p>
<p><strong>इन देशों से आयात में भी चीनी उत्‍पाद मिले </strong><br>
रिपोर्ट में नवारों ने कहा कि चीन ने मामूली प्रॉसेस‍िंग, रीलेबलिंग, रीपैकेजिंग, रीइनवॉइसिंग या रूटिंग चेंजेज के लिए इन तीसरे देशों का उपयोग करना शुरू कर दिया. देश तो बदला, लेकिन चीनी वस्‍तुओं का काफी हद तक मौजूदगी मिली। </p>
<p>उन्होंने कहा कि टैरिफ से बचने के लिए सामानों को दूसरे रास्ते से भेजकर, चीन और उसके राज्य समर्थित निर्माता और व्यापारिक फर्म सस्ते श्रम, कमजोर सीमा शुल्क जांच, उदार मुक्त क्षेत्रों या  अमेरिकी व्यापार पहुंच वाले स्थानों पर सामान पहुंचा सकते हैं। </p>
<p><strong>टैरिफ से कैसे बच रहा है चीन? </strong><br>
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की पुणे-गुजरात-चेन्‍नई उत्‍पादन पट्टी पंपों और कंप्रेसरों की मांग करती है, जिससे सिनसिनाटी, डेटन और कोलंबस में टेक्‍नोलॉजी सप्‍लाई चेन प्रभावित होती है. नवारो ने कहा कि पुणे से भारत में बिकने वाला चीनी पंप सिनसिनाटी, डेटन या कोलंबस में बनी हुई नहीं होती हैं. अमेरिका संदिग्ध माल ट्रांसफर की पहचान करने के लिए AI का उपयोग करने की भी योजना बना रहा है। </p>
<p>नवारो ने कहा कि अमेरिका तीसरे देशों के माध्यम से अमेरिकी बाजारों में पहुंचने वाले सामानों का पता लगाने में मदद करने के लिए एआई-सक्षम "डिटेक्टिव बॉर्डर" सिस्‍टम तैनात करेगा. इस सिस्‍टम से शिपमेंट डेटा, रूट‍िंग हिस्‍ट्री, प्रोडक्‍ट क्‍लारिफिकेशन, उत्‍पादन क्षमता और अन्‍य चीजों की जांच करने की उम्‍मीद है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>थलपति विजय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, करूर पीड़ितों को सरकारी नौकरी का फैसला बरकरार</title>
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<description><![CDATA[ चेन्नई  सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडू के मुख्यमंत्री विजय थलापति को बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें तमिलनाडु सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया गया था जिसमें करुर भगदड़ में मारे गए 41 लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:18:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>थलपति, विजय, को, सुप्रीम, कोर्ट, से, बड़ी, राहत, करूर, पीड़ितों, को, सरकारी, नौकरी, का, फैसला, बरकरार</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चेन्नई </strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडू के मुख्यमंत्री विजय थलापति को बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें तमिलनाडु सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया गया था जिसमें करुर भगदड़ में मारे गए 41 लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान था. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने तमिलनाडु सरकार और अन्य की याचिका पर नोटिस जारी किया है. साथ ही हाईकोर्ट के आदेश को अंतरिम रूप से स्थगित कर दिया है। </p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने हाईकोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताई. उन्होंने विजय सरकार के फैसले को चुनौती देने के आधार पर सवाल उठाया। </p>
<p>सिंघवी ने कहा, ‘अगर राज्य सरकार चाहती है कि भगदड़ पीड़ित लोगों के परिवारीजनों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी जाए, तो हाईकोर्ट को इसमें क्या आपत्ति हो सकती है?’</p>
<p><strong>उन्होंने दलील दी कि नौकरी से जुड़े मुद्दे पर जनहित याचिका (PIL) नहीं चलाई जा सकती। </strong><br>
वहीं बेंच ने भी सवाल किया कि राज्य सरकार को इस त्रासदी से प्रभावित परिवारों को नौकरी देने से क्यों रोका जाना चाहिए? क्या ऐसी कोई वजह है?</p>
<p>जस्टिस पारदीवाला ने कहा, “भगदड़ हुई, लोग मारे गए. अगर सरकार ने फैसला किया है कि उन्हें कुछ राहत दी जाए और पैसे से मुआवजा दिया जाए, तो आप कैसे कह सकते हैं कि नौकरी नहीं दी जानी चाहिए? मान लीजिए त्रासदी में परिवार का अकेला सदस्य मर गया, तो क्या सरकार को उसके बेटे या बेटी को नौकरी नहीं देनी चाहिए?”</p>
<p>हाईकोर्ट के द्वारा किए गए फैसले को वकील ने राजनीतिक हितों का टकराव बताया. वहीं राज्य की याचिका का विरोध कर रहे एक वकील ने दलील दी कि तमिलनाडु सरकार इस तरह सरकारी नौकरियां बांटने का विवेकाधिकार नहीं ले सकती। </p>
<p>उन्होंने दावा किया कि जिस राजनीतिक दल पर भगदड़ की जिम्मेदारी बताई जा रही है, वही दल अभी राज्य की सत्ता में है. इसलिए सरकार के फैसले में हितों का टकराव हो सकता है। </p>
<p>जब बेंच ने वकील से पूछा कि वह किस पार्टी की ओर से पेश हो रहे हैं, तो वकील ने बताया कि वह एक राजनीतिक दल की ओर से यहां सरकार के फैसले का विरोध कर रहे हैं। </p>
<p><strong>तब जस्टिस चंद्रन ने कहा, “यहां राजनीति मत लाइए.”</strong></p>
<p><strong>मद्रास हाईकोर्ट ने क्या कहा था?</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच के 27 जुलाई के फैसले के बाद आया है. हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के उस सरकारी आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें करुर स्टांपीड के पीड़ित परिवारों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का प्रावधान था। </p>
<p>हाईकोर्ट ने कहा था कि ये नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के खिलाफ हैं. जस्टिस सीवी कार्तिकेयन और जस्टिस आर शक्तिवेल की डिवीजन बेंच ने यह भी बताया कि सरकारी विभागों में कई लोग पहले से अनुकंपा नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। </p>
<p>बेंच ने कहा था कि करुर पीड़ितों के परिवारों को नौकरी देते समय उन लोगों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है जो पहले से इंतजार कर रहे हैं। </p>
<p><strong>करुर भगदड़ मामला क्या है और कितने लोगों की हुई थी मौत</strong><br>
जानकारी के मुताबिक करूर में भगदड़ 27 सितंबर 2025 को सीएम विजय थलापति की पार्टी टीवीके की रैली के दौरान हुई थी. इसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी. इस त्रासदी के बाद जवाबदेही और भीड़ प्रबंधन की कमियों को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था और विपक्ष सहित लोगों ने इसके लिए विजय थलापति को भी जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया था. हालांकि यह भगदड़ हाल के वर्षों में तमिलनाडु में किसी राजनीतिक कार्यक्रम में हुई सबसे बड़ी दुर्घटनाओं में से एक थी। </p>]]> </content:encoded>
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<title>पैकेज्ड फूड में नमक&#45;चीनी की मात्रा बतानी होगी साफ&#45;साफ! SC ने FSSAI को लगाई फटकार</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली पैकेज्ड फूड में मौजूद नमक, चीनी और सैचुरेटेड फैट की जानकारी सामने से साफ-साफ देने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने सवाल किया कि क्या सरकार अपने लोगों को स्वस्थ नहीं रखना चाहती. सुप्रीम कोर्ट … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:18:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>पैकेज्ड फूड में मौजूद नमक, चीनी और सैचुरेटेड फैट की जानकारी सामने से साफ-साफ देने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने सवाल किया कि क्या सरकार अपने लोगों को स्वस्थ नहीं रखना चाहती. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल लोगों को खासकर बच्चों को जंक फूड के नुकसान के बारे में जागरूक करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। </p>
<p>जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान FSSAI की ओर से हो रही देरी पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद लेबलिंग के मुद्दे पर पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है. जस्टिस पार्डीवाला ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से पूछा, "क्या आप कोर्ट को मजाक समझ रहे हैं?"</p>
<p><strong>कोर्ट ने यह भी कहा कि मामला जनहित से जुड़ा है और अगर सरकार खुद कदम नहीं उठाती तो अदालत को आदेश देना पड़ सकता है। </strong></p>
<p><strong>क्या है फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग?</strong><br>
फ्रंट-ऑफ-पैक वार्निंग लेबल का मकसद पैकेट के सामने ही यह बताना है कि किसी खाद्य उत्पाद में चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट की मात्रा कितनी है और वह स्वास्थ्य के लिहाज से कितनी चिंता वाली बात हो सकती है. सुप्रीम कोर्ट पहले भी इस तरह की व्यवस्था को दुनिया के कई देशों में अपनाई जाने वाली व्यवस्था बता चुका है। </p>
<p>मौजूदा व्यवस्था में पैकेज्ड फूड पर पोषण संबंधी जानकारी दी जाती है, लेकिन याचिकाकर्ता का कहना है कि महत्वपूर्ण जानकारी को पैकेट के सामने ज्यादा स्पष्ट तरीके से दिखाया जाना चाहिए, ताकि ग्राहक खरीदारी के समय तुरंत फैसला ले सके. FSSAI पहले भी पैकेट के सामने पोषण संबंधी जानकारी को प्रमुखता से दिखाने के प्रस्ताव पर काम कर चुका है। </p>
<p><strong>बढ़ते डायबिटीज और मोटापे के बीच अहम मामला</strong><br>
याचिका में कहा गया है कि ज्यादा चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट वाले खाद्य पदार्थ मोटापा, डायबिटीज और दिल से जुड़ी बीमारियों जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ा सकते हैं. इसी वजह से याचिकाकर्ता ने पैकेज्ड फूड पर स्पष्ट चेतावनी लगाने की मांग की है. सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि इस तरह की जानकारी उपभोक्ताओं को ज्यादा जागरूक और बेहतर विकल्प चुनने में मदद कर सकती है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>लाल किले पर सबसे ज्यादा बार तिरंगा किस प्रधानमंत्री ने फहराया? जानें नेहरू, इंदिरा और मोदी का रिकॉर्ड</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  स्वतंत्रता दिवस 2025 के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को लगातार 12वीं बार दिल्ली के लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और देश को संबोधित करेंगे। इसके साथ ही वे लगातार सबसे अधिक बार तिरंगा फहराने वाले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री के रूप में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम करेंगे। … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:18:28 +0530</pubDate>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली </strong><br>
स्वतंत्रता दिवस 2025 के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को लगातार 12वीं बार दिल्ली के लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और देश को संबोधित करेंगे। इसके साथ ही वे लगातार सबसे अधिक बार तिरंगा फहराने वाले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री के रूप में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम करेंगे।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रिकॉर्ड</strong><br>
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में पहली बार लाल किले से तिरंगा फहराया था। इसके बाद से उन्होंने हर स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हुए देश को संबोधित किया है। 15 अगस्त 2025 को उनका यह क्रम लगातार 12वें वर्ष में प्रवेश करेगा। इस उपलब्धि के साथ वे पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के 10 बार तिरंगा फहराने के रिकॉर्ड से आगे निकल चुके हैं।</p>
<p><strong>लाल किले पर सबसे ज्यादा बार तिरंगा फहराने का रिकॉर्ड किसके नाम?</strong><br>
लाल किले की प्राचीर से सबसे अधिक बार राष्ट्रीय ध्वज फहराने का रिकॉर्ड भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम दर्ज है। उन्होंने वर्ष 1947 से 1964 तक कुल 17 बार स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया। यह रिकॉर्ड आज भी कायम है और अब तक कोई प्रधानमंत्री इसे पार नहीं कर सका है।</p>
<p><strong>दूसरे स्थान पर इंदिरा गांधी</strong><br>
इस सूची में दूसरे स्थान पर भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हैं। उन्होंने अपने दोनों कार्यकालों (1966-1977 और 1980-1984) के दौरान कुल 16 बार लाल किले से तिरंगा फहराया। वह अपने पिता जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड से केवल एक बार पीछे रहीं।</p>
<p><strong>लाल किले पर तिरंगा फहराने वाले प्रधानमंत्रियों की सूची</strong></p>
<ul>
<li>पंडित जवाहरलाल नेहरू – 17 बार</li>
<li>इंदिरा गांधी – 16 बार</li>
<li>नरेंद्र मोदी – 12 बार (15 अगस्त 2025 सहित)</li>
<li>डॉ. मनमोहन सिंह – 10 बार</li>
<li>अटल बिहारी वाजपेयी – 6 बार</li>
<li>राजीव गांधी – 5 बार</li>
<li>पी.वी. नरसिम्हा राव – 5 बार</li>
<li>लाल बहादुर शास्त्री – 2 बार</li>
<li>मोरारजी देसाई – 2 बार</li>
<li>चौधरी चरण सिंह – 1 बार</li>
<li>वी.पी. सिंह – 1 बार</li>
<li>एच.डी. देवेगौड़ा – 1 बार</li>
<li>आई.के. गुजराल – 1 बार</li>
</ul>
<p>गौरतलब है कि कुछ प्रधानमंत्रियों, जैसे गुलजारीलाल नंदा और चंद्रशेखर, को अपने अल्पकालिक कार्यकाल के कारण लाल किले से तिरंगा फहराने का अवसर नहीं मिल सका।</p>
<p><strong>लाल किले पर तिरंगा फहराने की परंपरा क्यों है खास?</strong><br>
स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से तिरंगा फहराना भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक माना जाता है। 15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पहली बार लाल किले से राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। तब से हर वर्ष प्रधानमंत्री इसी ऐतिहासिक स्थल से तिरंगा फहराते हैं और राष्ट्र को संबोधित करते हुए सरकार की उपलब्धियों, भविष्य की योजनाओं तथा देश की दिशा पर अपने विचार रखते हैं।</p>
<p>यह परंपरा भारत की स्वतंत्रता, लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक मानी जाती है तथा हर वर्ष करोड़ों देशवासियों के लिए गर्व और प्रेरणा का अवसर बनती है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>15 अगस्त सिर्फ भारत के लिए नहीं, दुनिया के कई देशों के लिए भी है बेहद खास, जानिए इस तारीख का इतिहास</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली 15 अगस्त का नाम आते ही सबसे पहले भारत का स्वतंत्रता दिवस याद आता है। वर्ष 1947 में इसी दिन भारत ने लगभग दो सौ वर्षों की ब्रिटिश हुकूमत से आजादी हासिल की थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 15 अगस्त केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई अन्य … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:18:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>अगस्त, सिर्फ, भारत, के, लिए, नहीं, दुनिया, के, कई, देशों, के, लिए, भी, है, बेहद, खास, जानिए, इस, तारीख, का, इतिहास</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>15 अगस्त का नाम आते ही सबसे पहले भारत का स्वतंत्रता दिवस याद आता है। वर्ष 1947 में इसी दिन भारत ने लगभग दो सौ वर्षों की ब्रिटिश हुकूमत से आजादी हासिल की थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 15 अगस्त केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई अन्य देशों के लिए भी ऐतिहासिक महत्व रखता है? इस दिन कुछ देशों ने स्वतंत्रता प्राप्त की, जबकि कुछ देशों में राष्ट्रीय महत्व के विशेष दिवस मनाए जाते हैं।</p>
<p><strong>भारत</strong><br>
15 अगस्त 1947 को भारत ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ। हर वर्ष इस दिन प्रधानमंत्री लाल किले से राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं और देश को संबोधित करते हैं। पूरे देश में सांस्कृतिक कार्यक्रम, परेड और देशभक्ति से जुड़े आयोजन किए जाते हैं।</p>
<p><strong>दक्षिण कोरिया</strong><br>
दक्षिण कोरिया में 15 अगस्त को नेशनल लिबरेशन डे (Gwangbokjeol) मनाया जाता है। वर्ष 1945 में इसी दिन जापानी शासन का अंत हुआ था और कोरिया को स्वतंत्रता मिली थी। यह वहां का प्रमुख राष्ट्रीय पर्व है।</p>
<p><strong>उत्तर कोरिया</strong><br>
उत्तर कोरिया भी 15 अगस्त को जापानी कब्जे से मुक्ति की याद में राष्ट्रीय अवकाश मनाता है। यह दिन वहां स्वतंत्रता और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।</p>
<p><strong>कांगो गणराज्य</strong><br>
अफ्रीकी देश रिपब्लिक ऑफ कांगो (कांगो-ब्राज़ाविल) ने 15 अगस्त 1960 को फ्रांस से स्वतंत्रता प्राप्त की थी। इसलिए हर वर्ष इस दिन वहां स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है।</p>
<p><strong>लिकटेंस्टीन</strong><br>
यूरोप का छोटा देश लिकटेंस्टीन भी 15 अगस्त को अपना राष्ट्रीय दिवस मनाता है। इस अवसर पर सरकारी समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम और आतिशबाजी का आयोजन किया जाता है।</p>
<p><strong>15 अगस्त का वैश्विक महत्व</strong><br>
इतिहास में 15 अगस्त कई महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी रहा है। इसी दिन भारत स्वतंत्र हुआ, कोरिया को जापानी शासन से मुक्ति मिली और कांगो गणराज्य ने आजादी हासिल की। यही कारण है कि यह तारीख दुनिया के कई देशों के इतिहास में विशेष स्थान रखती है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>आज 80वां स्वतंत्रता दिवस 2026: कुछ 10 रोचक बातें, जो हर भारतीय को जाननी चाहिए</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  भारत आज 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। 15 अगस्त 1947 को देश ब्रिटिश शासन से आजाद हुआ था, लेकिन इसके बाद भी कई रियासतों और विदेशी उपनिवेशों का भारत में विलय अलग-अलग समय पर हुआ। इस खास अवसर पर आइए जानते हैं स्वतंत्रता दिवस से जुड़ी 10 … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:18:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>आज, 80वां, स्वतंत्रता, दिवस, 2026:, कुछ, रोचक, बातें, जो, हर, भारतीय, को, जाननी, चाहिए</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली </strong><br>
भारत आज 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। 15 अगस्त 1947 को देश ब्रिटिश शासन से आजाद हुआ था, लेकिन इसके बाद भी कई रियासतों और विदेशी उपनिवेशों का भारत में विलय अलग-अलग समय पर हुआ। इस खास अवसर पर आइए जानते हैं स्वतंत्रता दिवस से जुड़ी 10 दिलचस्प और ऐतिहासिक बातें, जिनके बारे में हर भारतीय को जानकारी होनी चाहिए।</p>
<p><strong><u>15 अगस्त क्यों चुना गया? जानिए स्वतंत्रता दिवस से जुड़े ऐतिहासिक तथ्य</u></strong></p>
<p><strong>1. 15 अगस्त की तारीख ही क्यों चुनी गई?</strong><br>
भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने 15 अगस्त 1947 को सत्ता हस्तांतरण की तारीख तय की थी। इसके पीछे एक प्रमुख कारण यह था कि 15 अगस्त 1945 को द्वितीय विश्व युद्ध में जापान ने मित्र राष्ट्रों के सामने आत्मसमर्पण किया था। माउंटबेटन इस दिन को अपने लिए शुभ मानते थे।</p>
<p><strong>2. स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के ध्वजारोहण में क्या अंतर है?</strong><br>
15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस): प्रधानमंत्री लाल किले पर नीचे से ऊपर तिरंगा फहराते हैं, जिसे ध्वजारोहण (Flag Hoisting) कहा जाता है।<br>
26 जनवरी (गणतंत्र दिवस): राष्ट्रपति कर्तव्य पथ पर पहले से बंधे तिरंगे की गांठ खोलते हैं, जिसे ध्वज फहराना (Flag Unfurling) कहा जाता है।</p>
<p><strong>3. आजादी के समय भारत का कोई आधिकारिक राष्ट्रगान नहीं था</strong><br>
15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ, लेकिन उस समय 'जन गण मन' आधिकारिक राष्ट्रगान नहीं था। इसे 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया।</p>
<p><strong>4. आजादी के जश्न में महात्मा गांधी मौजूद नहीं थे</strong><br>
जब पूरा देश स्वतंत्रता का जश्न मना रहा था, तब महात्मा गांधी दिल्ली में नहीं बल्कि बंगाल के नोआखली में सांप्रदायिक हिंसा रोकने और शांति स्थापित करने के प्रयास में लगे हुए थे।</p>
<p><strong>5. 15 अगस्त को केवल भारत ही नहीं, कई अन्य देश भी मनाते हैं स्वतंत्रता दिवस</strong><br>
15 अगस्त को भारत के अलावा कई अन्य देशों का भी स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है, जिनमें प्रमुख हैं—<br>
दक्षिण कोरिया<br>
उत्तर कोरिया<br>
बहरीन<br>
कांगो गणराज्य<br>
लिकटेंस्टीन (राष्ट्रीय दिवस इसी तिथि पर मनाया जाता है)</p>
<p><strong>6. भारत और पाकिस्तान की आजादी लगभग एक ही समय हुई</strong><br>
भारत और पाकिस्तान दोनों का विभाजन अगस्त 1947 में हुआ। पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त, जबकि भारत 15 अगस्त को मनाता है। सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया दोनों देशों में अलग-अलग समय पर पूरी हुई थी।</p>
<p><strong>7. तिरंगा बनाने के लिए भी हैं विशेष नियम</strong><br>
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण के लिए भारतीय ध्वज संहिता (Flag Code of India) और BIS मानकों का पालन किया जाता है। पहले केवल खादी से बने तिरंगे का प्रावधान था, जबकि वर्तमान नियमों के अनुसार निर्धारित मानकों के अनुरूप अन्य सामग्री का भी उपयोग किया जा सकता है।</p>
<p><strong>8. नेहरू का ऐतिहासिक भाषण 'Tryst with Destiny'</strong><br>
14 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संसद में अपना ऐतिहासिक भाषण 'Tryst with Destiny' (नियति से वादा) दिया, जिसे विश्व के महानतम राजनीतिक भाषणों में गिना जाता है।</p>
<p><strong>9. क्या 1947 में 1 डॉलर बराबर 1 रुपया था?</strong><br>
यह एक लोकप्रिय मिथक है। वास्तविकता यह है कि उस समय भारतीय रुपया ब्रिटिश पाउंड से जुड़ा हुआ था। इसलिए 1 डॉलर = 1 रुपया वाली बात ऐतिहासिक रूप से सही नहीं मानी जाती।</p>
<p><strong>10. 15 अगस्त 1947 के बाद भी कई क्षेत्र भारत में शामिल हुए</strong><br>
आजादी के समय भारत में 565 देसी रियासतें थीं। सरदार वल्लभभाई पटेल और वी.पी. मेनन के प्रयासों से अधिकांश रियासतों का भारतीय संघ में विलय कराया गया, जबकि कुछ क्षेत्रों का एकीकरण बाद में हुआ।</p>
<p><strong>प्रमुख विलय इस प्रकार हुए—</strong><br>
<strong>हैदराबाद:</strong> सितंबर 1948 में ऑपरेशन पोलो के जरिए भारत में शामिल हुआ।<br>
<strong>जूनागढ़</strong>: फरवरी 1948 में जनमत संग्रह के बाद भारत में विलय हुआ।<br>
<strong>जम्मू-कश्मीर:</strong> 26 अक्टूबर 1947 को विलय पत्र पर हस्ताक्षर के बाद भारत का हिस्सा बना।<br>
<strong>मणिपुर: </strong>1949 में विलय समझौते के तहत भारत में शामिल हुआ।<br>
<strong>गोवा, दमन और दीव:</strong> दिसंबर 1961 में ऑपरेशन विजय के बाद भारत का हिस्सा बने।<br>
<strong>दादरा और नगर हवेली: </strong>1961 में भारत में विलय हुआ।<br>
<strong>पुडुचेरी, कराईकल, माहे और यनम: </strong>1954 में भारत को सौंपे गए और 1962 में कानूनी रूप से विलय पूरा हुआ।<br>
<strong>सिक्किम: </strong>1975 में संविधान संशोधन के बाद भारत का 22वां राज्य बना।</p>]]> </content:encoded>
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<title>बेंगलुरु में पार्किंग पर बड़ा एक्शन! फुटपाथ पर गाड़ी खड़ी की तो कटेगा भारी चालान, तुरंत होगी टोइंग</title>
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<description><![CDATA[ बेंगलुरु कर्नाटक सरकार ने शहर की अनियंत्रित ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने और पार्किंग प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से &#039;ग्रेटर बेंगलुरु गवर्नेंस एक्ट, 2024&#039; की धारा 314 के तहत &#039;बेंगलुरु बृहत् क्षेत्र (पार्किंग) नियम, 2026&#039; का ड्राफ्ट जारी किया है. शहरी विकास विभाग द्वारा प्रकाशित इस मसौदे पर आम जनता और प्रभावित पक्षों से … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:18:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>बेंगलुरु, में, पार्किंग, पर, बड़ा, एक्शन, फुटपाथ, पर, गाड़ी, खड़ी, की, तो, कटेगा, भारी, चालान, तुरंत, होगी, टोइंग</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बेंगलुरु</strong><br>
कर्नाटक सरकार ने शहर की अनियंत्रित ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने और पार्किंग प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से 'ग्रेटर बेंगलुरु गवर्नेंस एक्ट, 2024' की धारा 314 के तहत 'बेंगलुरु बृहत् क्षेत्र (पार्किंग) नियम, 2026' का ड्राफ्ट जारी किया है. शहरी विकास विभाग द्वारा प्रकाशित इस मसौदे पर आम जनता और प्रभावित पक्षों से 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। </p>
<p>नए नियमों के लागू होने के बाद बेंगलुरु की मुख्य सड़कों और व्यस्त चौराहों पर मनमर्जी से गाड़ियां खड़ी करना संभव नहीं होगा. बृहत् बेंगलुरु प्राधिकरण (GBA) द्वारा चिन्हित 'हाई-डेंसिटी कॉरिडोर' यानी अत्यधिक यातायात वाली मुख्य सड़कों के मुख्य कैरिजवे पर पार्किंग पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी. इसके अलावा, ट्रैफिक में बाधा रोकने के लिए सिग्नल वाले जंक्शनों से 100 मीटर और बिना सिग्नल वाले <strong>चौराहों से 25 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का वाहन खड़ा करना मना होगा। </strong></p>
<p><strong>मेट्रो, रेलवे और बस स्टेशनों के आसपास 'नो-पार्किंग' का दायरा</strong></p>
<p>सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ाने और पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मेट्रो स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों और बस टर्मिनलों के 150 मीटर के दायरे को शुरुआत में 'नो-पार्किंग जोन' घोषित किया जाएगा. भविष्य में पार्किंग की मांग और सप्लाई का आकलन करने के बाद इस सीमा को बढ़ाकर 500 मीटर तक किया जा सकता है. ऑटो-रिक्शा और टैक्सी सेवाओं के लिए केवल निर्धारित <strong>पिक-अप और ड्रॉप-ऑफ पॉइंट ही उपलब्ध होंगे, जहां 5 मिनट से अधिक गाड़ी खड़ी करने की अनुमति नहीं होगी। </strong></p>
<p><strong>फुटपाथ सुरक्षा और पार्किंग के लिए कड़े नियम</strong><br>
सड़कों के किनारे बने फुटपाथों पर गाड़ियों की पार्किंग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है ताकि पैदल यात्रियों की आवाजाही प्रभावित न हो. फुटपाथ पर केवल साइकिल पार्किंग की अनुमति तब दी जाएगी जब पैदल चलने के लिए कम से कम 2 मीटर की जगह साफ और अबाधित बचे. इसके अतिरिक्त, सड़कों पर चलने वाले सामान्य ट्रैफिक में बाधा न पड़े, इसके लिए ऑटो-रिक्शा स्टैंड भी केवल कम ट्रैफिक वाली स्थानीय गलियों में ही बनाए जाएंगे। </p>
<p>अगर आपके पास अपनी निजी संपत्ति में पार्किंग की जगह नहीं है और आप सड़क पर गाड़ी खड़ी करते हैं, तो अब आपको इसके लिए नगर निगम से वार्षिक रेजिडेंशियल पार्किंग परमिट लेना अनिवार्य होगा. यह परमिट केवल उन्हीं वाहनों को जारी किया जाएगा जिनके आवासीय भवन बिल्डिंग बाय-लॉज़ का उल्लंघन नहीं करते हैं. इस परमिट के लिए सरकार ने गाड़ियों के हिसाब से भारी सालाना फीस तय की है:</p>
<p><strong>    छोटी कारें (Hatchback): ₹15,000 प्रति वर्ष<br>
    सेडान कारें (Sedan): ₹20,000 प्रति वर्ष<br>
    एसयूवी (SUV): ₹25,000 प्रति वर्ष<br>
    नॉन-रेजिडेंशियल में श्रेणी अनुसार पार्किंग फीस</strong></p>
<p>सार्वजनिक पार्किंग स्थानों को उनके व्यावसायिक महत्व और गतिविधियों के आधार पर A, B और C जैसी तीन श्रेणियों में बांटा गया है. 'A' श्रेणी में ऑन-स्ट्रीट पार्किंग के लिए टू-व्हीलर से ₹40/घंटा और फोर-व्हीलर से ₹80/घंटा वसूले जाएंगे. 'B' श्रेणी की सड़कों पर यह दर क्रमशः ₹30 और ₹60 और 'C' श्रेणी की सड़कों पर ₹20 और ₹40 प्रति घंटा होगी. ऑन-स्ट्रीट पार्किंग का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए 2 घंटे से अधिक गाड़ी खड़ी करने पर शुल्क तेजी से बढ़ाया जाएगा. हालांकि, ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग का इस्तेमाल करने पर शुल्क काफी कम रहेगा और रात के समय इसमें 50% की छूट भी मिलेगी।</p>
<p><strong>खाली जमीन के मालिकों को इंसेंटिव और छूट</strong></p>
<p>निजी और सार्वजनिक खाली जमीनों के मालिकों को अपनी जमीन पर पार्किंग सुविधा शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. यदि कोई मालिक अपनी खाली जमीन पर कम से कम 30 गाड़ियों की क्षमता वाली मल्टी-लेवल या मैकेनाइज्ड पार्किंग विकसित करता है, तो उसे 100% संपत्ति कर और सर्विस चार्ज से छूट मिलेगी. वहीं, कम से कम 15 गाड़ियों की क्षमता वाली सरफेस  पार्किंग विकसित करने पर 50% संपत्ति कर की छूट मिलेगी. इसके साथ ही इन प्लॉट मालिकों को अलग से ट्रेड लाइसेंस लेने की जरूरत भी नहीं होगी.</p>
<p>नए नियमों में पार्किंग ऑपरेटरों को लोक सेवक का दर्जा दिया गया है, जिससे वे नियम तोड़ने वाले वाहनों को टो (Tow) या क्लैंप (Clamp) कर सकेंगे. हालांकि, भ्रष्टाचार और विवाद रोकने के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि गाड़ी टो करने से पहले ऑपरेटर को वाहन के नंबर प्लेट के साथ स्पष्ट वीडियो रिकॉर्डिंग करनी होगी, जिसे कम से कम 3 महीने तक सुरक्षित रखना होगा. गलत पार्किंग करने पर कारों के लिए ₹500 और टू-व्हीलर के लिए ₹300 का जुर्माना तय किया गया है, जबकि फुटपाथ पर गाड़ियां खड़ी करने पर कारों के लिए ₹1,000 और टू-व्हीलर के लिए  ₹600 का भारी जुर्माना देना होगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>6000 करोड़ के ड्रग्स केस का आरोपी वीरेंद्र बैसोया UAE से भारत लाया गया, जानें ‘ड्रग सिंडिकेट’ की पूरी कहानी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  दुबई से भारत लाए गए ड्रग्स सिंडिकेट के कथित किंगपिन वीरेंद्र सिंह बैसोया की कहानी सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है. उसके तार उस बड़े ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं, जिसकी जांच में करीब 6,000 करोड़ रुपए के ड्रग्स केस का जिक्र सामने आया है. NCB के दस्तावेजों के … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:18:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>6000, करोड़, के, ड्रग्स, केस, का, आरोपी, वीरेंद्र, बैसोया, UAE, से, भारत, लाया, गया, जानें, ‘ड्रग, सिंडिकेट’, की, पूरी, कहानी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 दुबई से भारत लाए गए ड्रग्स सिंडिकेट के कथित किंगपिन वीरेंद्र सिंह बैसोया की कहानी सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है. उसके तार उस बड़े ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं, जिसकी जांच में करीब 6,000 करोड़ रुपए के ड्रग्स केस का जिक्र सामने आया है. NCB के दस्तावेजों के मुताबिक, बैसोया पर मेफेड्रोन की बड़ी खेप को विदेश भेजने की साजिश में शामिल होने का आरोप है. उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था. अब भारत सरकार की पहल के बाद दुबई से डिपोर्ट कर उसे भारत लाया गया है. यानी जिस आरोपी को एजेंसियां लंबे समय से तलाश रही थीं, वह अब भारतीय जांच एजेंसियों की पहुंच में है। </p>
<p>बैसोया को एयर इंडिया की फ्लाइट नंबर 4310 से भारत लाया गया. दुबई में गिरफ्तारी के बाद उसे भारत डिपोर्ट किया गया. अधिकारियों के मुताबिक, बैसोया दिल्ली पुलिस के करीब 13,000 करोड़ रुपए के ड्रग्स मामले के मुख्य आरोपी बताए जाने वाले संदीप धुनिया का करीबी भी है. खास बात यह है कि धुनिया कथित तौर पर दुबई से पाकिस्तान भागने में कामयाब रहा था. ऐसे में बैसोया की वापसी को भारत की ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई में बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। </p>
<p><strong>970 किलो मेफेड्रोन से खुला ड्रग्स नेटवर्क का राज</strong><br>
NCB के दस्तावेजों के मुताबिक, जांच में सामने आया कि वीरेंद्र सिंह बैसोया का संबंध अवैध ड्रग्स तस्करी के एक बड़े नेटवर्क से था. आरोप है कि वह मेफेड्रोन की एक बड़ी खेप लंदन भेजने की साजिश में शामिल था. इस मामले में पुणे पुलिस ने 21 फरवरी 2024 को दिल्ली में कार्रवाई की थी. इस दौरान दिवेश चरंजीत भूतानी और संदीपकुमार राजपाल बैसोया को गिरफ्तार किया गया था. दोनों के कब्जे से करीब 970 किलो मेफेड्रोन बरामद किया गया था। </p>
<p><strong>लंदन भेजी जानी थी करोड़ों की ड्रग्स की खेप</strong><br>
जांच एजेंसियों के मुताबिक बरामद मेफेड्रोन की यह बड़ी खेप लंदन भेजी जानी थी. इसके लिए डेल्टा लॉजिस्टिक्स के जरिए कंसाइनमेंट भेजने की तैयारी की जा रही थी. पुलिस की जांच में दावा किया गया कि दिवेश चरंजीत भूतानी और संदीपकुमार राजपाल बैसोया, वीरेंद्र सिंह बैसोया के निर्देश पर काम कर रहे थे. इससे जांच एजेंसियों के सामने कथित नेटवर्क में बैसोया की भूमिका का एक अहम लिंक सामने आया। </p>
<p><strong>लॉजिस्टिक्स कंपनी तक पहुंची जांच</strong><br>
इस मामले में डेल्टा लॉजिस्टिक्स के मालिक संदीप हनुमानसिंह यादव और कंपनी के मैनेजर देवेंद्र रामफुल यादव को भी 21 फरवरी 2024 को गिरफ्तार किया गया था. जांच एजेंसियों के अनुसार, नेटवर्क कथित तौर पर मेफेड्रोन की बड़ी मात्रा को भारत से बाहर भेजने के लिए लॉजिस्टिक्स और कंसाइनमेंट व्यवस्था का इस्तेमाल कर रहा था. करीब 970 किलो मेफेड्रोन की बरामदगी ने इस कथित नेटवर्क के पैमाने को सामने ला दिया। </p>
<p><strong>रेड कॉर्नर नोटिस के बाद दुबई में पकड़ा गया</strong><br>
वीरेंद्र बैसोया के खिलाफ NCB ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था. इसके बाद दुबई में उसे गिरफ्तार किया गया. अब भारत सरकार की पहल पर उसे डिपोर्ट कर भारत लाया गया है. एयर इंडिया की फ्लाइट से उसकी वापसी के बाद जांच एजेंसियां उससे ड्रग्स नेटवर्क, कथित तस्करी और विदेश में मौजूद संपर्कों को लेकर पूछताछ कर सकती हैं. भारत के लिए यह इसलिए भी अहम है क्योंकि इस केस के तार अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क से जुड़े बताए गए हैं। </p>
<p><strong>संदीप धुनिया से क्या है कनेक्शन?</strong><br>
जांच के दौरान वीरेंद्र बैसोया का नाम संदीप धुनिया के साथ भी जुड़ता है. धुनिया को दिल्ली पुलिस के करीब 13,000 करोड़ रुपए के ड्रग्स मामले में मुख्य आरोपी बताया गया है. अधिकारियों के मुताबिक बैसोया उसके करीबी सहयोगियों में शामिल है. रिपोर्टों के अनुसार संदीप धुनिया दुबई से पाकिस्तान भागने में सफल रहा. ऐसे में बैसोया की भारत वापसी जांच एजेंसियों के लिए उसके नेटवर्क और विदेशों में मौजूद कथित संपर्कों को समझने का अहम मौका हो सकती है। </p>
<p><strong>बेटे ऋषभ के खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस</strong><br>
वीरेंद्र बैसोया का परिवार भी जांच एजेंसियों के रडार पर रहा है. जानकारी के मुताबिक, उसके बेटे ऋषभ के खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी है. ऋषभ के फिलहाल विदेश में होने की बात बताई जा रही है. ऐसे में बैसोया की भारत वापसी के बाद एजेंसियों की जांच सिर्फ उसके कथित नेटवर्क तक सीमित नहीं रहने वाली. विदेश में मौजूद लोगों, ड्रग्स की सप्लाई चेन और कथित वित्तीय नेटवर्क की भी पड़ताल हो सकती है। </p>
<p><strong>भारत के लिए क्यों बड़ी कामयाबी?</strong><br>
ड्रग्स के इस मामले में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ 970 किलो मेफेड्रोन की बरामदगी का नहीं है. असली सवाल यह है कि इतनी बड़ी खेप को भारत से बाहर भेजने के पीछे कथित नेटवर्क कितना बड़ा था और इसके तार किन देशों तक फैले थे. दुबई से बैसोया का भारत आना एजेंसियों को इस नेटवर्क की परतें खोलने का मौका देता है. हालांकि, बैसोया पर लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में होना बाकी है. फिलहाल जांच एजेंसियों के लिए उसकी पूछताछ इस पूरे कथित ड्रग्स सिंडिकेट की कड़ियां जोड़ने में महत्वपूर्ण हो सकती है। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>‘कपड़े उतारो और पैसे कमाओ’! 10वीं पास युवक ने बनाया ऐप, फ्लैट में चल रहा था ऑनलाइन खेल</title>
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<description><![CDATA[ वडोदरा वडोदरा में पुलिस एक ऐसे फ्लैट तक पहुंची, जहां बाहर से सबकुछ बिल्कुल सामान्य दिख रहा था. लेकिन अंदर ऑनलाइन न्यूड वीडियो कॉल का धंधा चल रहा था. ग्राहक ऑनलाइन आते थे, पैसे रिचार्ज करते थे और फिर वीडियो कॉल पर युवतियां दिखाई देती थीं. जितनी देर कॉल, उतने ज्यादा कॉइन्स खर्च होते थे. … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:18:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>‘कपड़े, उतारो, और, पैसे, कमाओ’, 10वीं, पास, युवक, ने, बनाया, ऐप, फ्लैट, में, चल, रहा, था, ऑनलाइन, खेल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वडोदरा</strong></p>
<p>वडोदरा में पुलिस एक ऐसे फ्लैट तक पहुंची, जहां बाहर से सबकुछ बिल्कुल सामान्य दिख रहा था. लेकिन अंदर ऑनलाइन न्यूड वीडियो कॉल का धंधा चल रहा था. ग्राहक ऑनलाइन आते थे, पैसे रिचार्ज करते थे और फिर वीडियो कॉल पर युवतियां दिखाई देती थीं. जितनी देर कॉल, उतने ज्यादा कॉइन्स खर्च होते थे. पुलिस ने इस मामले में मनीष पढियार नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया है। </p>
<p>पुलिस के मुताबिक, मनीष ने करीब 11 लाख रुपये में फ्लैट खरीदा था और वहीं से ये पूरा नेटवर्क चल रहा था. मामला वडोदरा के मांजलपुर इलाके के प्रकृति फ्लैट्स का है.  मांजलपुर पुलिस को सूचना मिली कि एक रिहायशी फ्लैट में कुछ युवतियों को रखकर ऑनलाइन आपत्तिजनक गतिविधियां कराई जा रही हैं। </p>
<p>पुलिस ने सूचना को गंभीरता से लिया और फ्लैट पर छापा मारा. जांच आगे बढ़ी तो ऑनलाइन वीडियो कॉलिंग का नेटवर्क सामने आया. आरोप है कि युवतियां एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों से जुड़ती थीं और उनकी मांग के मुताबिक आपत्तिजनक गतिविधियां करती थीं. इस मामले में पुलिस ने मनीष पढियार को गिरफ्तार कर लिया है। </p>
<p><strong>पहले ग्राहक पैसे डालता, फिर शुरू होती थी कॉल</strong><br>
पुलिस के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क में StripChat नाम के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता था. ग्राहक पहले अकाउंट में पैसे डालते थे. इसके बदले उन्हें कॉइन्स मिलते थे. फिर वीडियो कॉल शुरू होती. कॉल जितनी देर चलती, ग्राहक के अकाउंट से उतने ज्यादा कॉइन्स कटते जाते. यानी पूरा सिस्टम कुछ ऐसा था कि पहले रिचार्ज, फिर कॉइन्स और उसके बाद वीडियो कॉल। </p>
<p>पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस नेटवर्क में कितना पैसा आया और किस-किस खाते में ट्रांसफर हुआ. पुलिस के मुताबिक, इस रैकेट में होने वाली कमाई का 50-50 प्रतिशत हिस्सा बांटा जाता था. ग्राहकों से मिलने वाली रकम आरोपी के खाते में ट्रांसफर कराई जाती थी. इसके बाद आरोपी अपना हिस्सा रखता था और बाकी रकम युवतियों को दी जाती थी. पुलिस के मुताबिक, मनीष पहले कॉल सेंटर चलाता था. इसी दौरान उसके संपर्क में आई एक युवती भी कथित तौर पर इस काम से जुड़ी. अब पुलिस ये पता कर रही है कि इस नेटवर्क में कुल कितनी युवतियां और कितने दूसरे लोग शामिल थे। </p>
<p>पुलिस के मुताबिक, मनीष ने करीब 11 लाख रुपये का फ्लैट खरीदा था. यही फ्लैट इस पूरे मामले में सबसे अहम जगह बन गया. बाहर से ये एक सामान्य रिहायशी फ्लैट था. लेकिन पुलिस का आरोप है कि अंदर से इसका इस्तेमाल ऑनलाइन वीडियो कॉल के जरिए पैसे कमाने के लिए किया जा रहा था. अब पुलिस आरोपी के बैंक अकाउंट और मोबाइल फोन की जांच कर रही है. साथ ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। </p>
<p><strong>गाजियाबाद की युवती से भी पूछताछ</strong><br>
जांच के दौरान पुलिस को गाजियाबाद की रहने वाली एक युवती के बारे में भी जानकारी मिली है. पुलिस के मुताबिक, ये युवती एयर होस्टेस बनने की पढ़ाई कर रही है और कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़ी थी. फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। </p>
<p>ACP विमल गामित के मुताबिक, पुलिस ये भी पता लगाएगी कि कहीं इस नेटवर्क के जरिए ग्राहकों को ब्लैकमेल तो नहीं किया गया? किसी के साथ धोखाधड़ी हुई या नहीं? फिलहाल पुलिस के सामने ब्लैकमेलिंग का कोई मामला नहीं आया है. लेकिन ऑनलाइन वीडियो कॉल और आपत्तिजनक कंटेंट से जुड़े मामलों में ब्लैकमेलिंग का खतरा रहता है, इसलिए पुलिस इस एंगल को भी जांच रही है. इस मामले में आरोपी मनीष के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। </p>
<p>अब पुलिस के सामने कई सवाल हैं. ये नेटवर्क कितने समय से चल रहा था?कितने ग्राहक इससे जुड़े थे? कितने लोगों को इसमें शामिल किया गया था?कुल कितने पैसे का लेनदेन हुआ? और क्या इस नेटवर्क का इस्तेमाल किसी को ठगने या ब्लैकमेल करने के लिए भी किया गया? इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच के बाद सामने आएंगे। </p>]]> </content:encoded>
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<title>मुंबई लोकल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी! रेलवे ने 238 नई AC ट्रेनों को दी मंजूरी</title>
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<description><![CDATA[ मुंबई  मुंबई की लाइफलाइन मानी जाने वाली लोकल ट्रेनों से सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है. केंद्र सरकार ने मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क के लिए 238 नई एसी लोकल ट्रेनों को मंजूरी दी है. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इन ट्रेनों का निर्माण तेजी से किया जाएगा, ताकि यात्रियों … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 10:45:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई </strong></p>
<p>मुंबई की लाइफलाइन मानी जाने वाली लोकल ट्रेनों से सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है. केंद्र सरकार ने मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क के लिए 238 नई एसी लोकल ट्रेनों को मंजूरी दी है. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इन ट्रेनों का निर्माण तेजी से किया जाएगा, ताकि यात्रियों को आधुनिक सुविधाओं से लैस पहली नई एसी लोकल ट्रेन का लाभ वर्ष 2027 तक मिल सके। </p>
<p><strong>2027 तक पहली नई AC लोकल ट्रेन लाने की कोशिश</strong><br>
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मुंबई लोकल शहर की लाइफलाइन है और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए 238 नई एसी लोकल ट्रेनों को मंजूरी दी गई है. उन्होंने बताया कि पहले अपनाई जा रही प्रक्रिया के तहत इन ट्रेनों को शामिल करने में काफी समय लग रहा था और पूरा प्रोजेक्ट 2030 तक पूरा होने की आशंका थी, जिसे एक्सेप्ट करना सही नहीं था। </p>
<p>इसी देरी को दूर करने के लिए सरकार ने नई रणनीति अपनाई है. अब इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), रेल कोच फैक्ट्री (RCF) और मॉडर्न कोच फैक्ट्री (MCF) मिलकर इन ट्रेनों का निर्माण करेंगी. रेल मंत्री के अनुसार, इस फैसले से काम में तेजी आएगी और यात्रियों को 2027 तक पहली नई एसी लोकल ट्रेन की सुविधा मिल सकेगी। </p>
<p><strong>यात्रियों को गर्मी से मिलेगी राहत, आरामदायक सफर का अनुभव</strong><br>
पश्चिम रेलवे के मुताबिक, 238 नई AC लोकल ट्रेनों के शामिल होने से मुंबई लोकल नेटवर्क में भीड़ कम करने में मदद मिलेगी और यात्रियों को खासकर गर्मी के मौसम में अधिक आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा. फिलहाल मुंबई में सीमित संख्या में ही एसी लोकल ट्रेनें संचालित हो रही हैं, जबकि उनकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है. नई ट्रेनों के आने से एसी सेवाओं का विस्तार होगा और अधिक यात्रियों को इसका लाभ मिल सकेगा। </p>
<p><strong>किन-किन स्टेशनों से गुजरेगी लोकल AC ट्रेन</strong><br>
मुंबई लोकल ट्रेन नेटवर्क में कुल 150 से अधिक स्टेशन हैं, जो मुंबई और उसके आसपास के इलाकों को जोड़ते हैं. इस विशाल रेल नेटवर्क को मुख्य रूप से 3 प्रमुख कॉरिडोर में बांटा गया है, जिसके तहत – वेस्टर्न लाइन, सेंट्रल लाइन और हार्बर लाइन शामिल हैं। </p>
<p><strong>वेस्टर्न लाइन (Western Line)</strong></p>
<p><strong>इस लाइन की प्रमुख स्टेशन-</strong></p>
<p><strong>    चर्चगेट (Churchgate)<br>
    मुंबई सेंट्रल (Mumbai Central)<br>
    दादर (Dadar) <br>
    बांद्रा (Bandra)<br>
    अंधेरी (Andheri)<br>
    बोरिवली (Borivali)<br>
    भायंदर (Bhayanadar)<br>
    वसई रोड (Vasai Road)<br>
    विरार (Virar)<br>
    डहानू रोड (Dahanu Road)</strong></p>
<p><strong>सेंट्रल लाइन (Central Line)</strong></p>
<p><strong>यह लाइन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) से शुरू होती है और आगे जाकर कल्याण जंक्शन पर 2 हिस्सों (कसारा और खोपोली) में बंट जाती है, इसके प्रमुख स्टेशन-</strong></p>
<p>    <strong>सीएसएमटी (CSMT)<br>
    बायकुला (Byculla)<br>
    दादर (Dadar)<br>
    कुर्ला (Kurla) <br>
    घाटकोपर (Ghatkopar)</strong></p>
<p><strong>हार्बर लाइन (Harbour Line)</strong></p>
<p><strong>यह लाइन नवी मुंबई को मुंबई शहर से जोड़ती है और CSMT से पनवेल तथा गोरेगांव यानि अंधेरी तक चलती है. इसके मुख्य स्टेशन हैं-</strong></p>
<p><strong>    सीएसएमटी (CSMT)<br>
    वडैला रोड (Wadala Road) <br>
    वाशी (Vashi) <br>
    नेरुल (Nerul)<br>
    बेलापुर (Belapur)<br>
    पनवेल (Panvel)</strong></p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>काजू कतली पर चांदी की जगह एल्युमिनियम वर्क! हलवाई को हुई थी 3 साल की जेल, 31 साल बाद जीता केस</title>
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<description><![CDATA[ अहमदाबाद  काजू कतली पर चमचमाता वर्क देखकर शायद ही कोई सोचे कि इसकी वजह से किसी मिठाई दुकानदार को तीन साल की जेल की सजा हो सकती है। गुजरात में ऐसा ही एक मामला सामने आया। काजू कतली पर चांदी की जगह एल्युमिनियम फॉइल मिलने के बाद मिठाई दुकानदार के खिलाफ मामला दर्ज हुआ और … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 10:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>काजू, कतली, पर, चांदी, की, जगह, एल्युमिनियम, वर्क, हलवाई, को, हुई, थी, साल, की, जेल, साल, बाद, जीता, केस</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अहमदाबाद </strong></p>
<p>काजू कतली पर चमचमाता वर्क देखकर शायद ही कोई सोचे कि इसकी वजह से किसी मिठाई दुकानदार को तीन साल की जेल की सजा हो सकती है। गुजरात में ऐसा ही एक मामला सामने आया। काजू कतली पर चांदी की जगह एल्युमिनियम फॉइल मिलने के बाद मिठाई दुकानदार के खिलाफ मामला दर्ज हुआ और निचली अदालत ने उसे तीन साल जेल की सजा सुना दी। करीब तीन दशक तक चले इस कानूनी विवाद में आखिरकार गुजरात हाई कोर्ट से दुकानदार को राहत मिली। दिलचस्प बात यह है कि दोनों लैब की जांच में एल्युमिनियम फॉइल मिलने के बावजूद दुकानदार केस जीत गया।</p>
<p><strong>1995 में शुरू हुआ था पूरा मामला</strong><br>
मामला 9 मार्च 1995 का है। फूड इंस्पेक्टर ने गुजरात के सूरत जिले के व्यारा में भानुभाई की मिठाई की दुकान से 96 रुपये की काजू कतली खरीदी। इसका सैंपल जांच के लिए भुज के पब्लिक एनालिस्ट के पास भेजा गया।</p>
<p>जांच में सामने आया कि काजू कतली पर चांदी के बजाय एल्युमिनियम का वर्क इस्तेमाल किया गया था। ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद दुकानदार और उसके पार्टनर्स के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ फूड अडल्टरेशन 1955 (Prevention of Food Adulteration Act) के तहत कार्रवाई शुरू हुई।</p>
<p>दुकानदार ने पहली लैब रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए दोबारा जांच की मांग की। इसके बाद सैंपल सेंट्रल फूड लेबोरेटरी गाजियाबाद भेजा गया। लेकिन यहां से भी दुकानदार को राहत नहीं मिली। दूसरी जांच में भी एल्युमिनियम फॉइल मिलने की पुष्टि हुई और सैंपल को मिलावटी बताया गया।</p>
<p><strong>निचली अदालत ने सुनाई 3 साल की जेल</strong><br>
मामला अदालत पहुंचा और लंबी सुनवाई के बाद 24 नवंबर 2006 को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने भानुभाई और उनके पार्टनर्स को तीन साल की साधारण कैद की सजा सुनाई। साथ ही 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना नहीं देने पर छह महीने की अतिरिक्त जेल का आदेश था। लेकिन भानुभाई ने हार नहीं मानी और फैसले को चुनौती देते रहे। आखिरकार मामला गुजरात हाई कोर्ट तक पहुंचा।</p>
<p><strong>फूड इंस्पेक्टर की एक गलती बनी अहम</strong><br>
गुजरात हाई कोर्ट में केस का रुख बदलने की सबसे बड़ी वजह सैंपल लेने का तरीका बना। फूड इंस्पेक्टर ने खुद माना था कि काजू कतली का सैंपल जिस कांच की बोतल में रखा गया था, उसे सैंपल लेने से पहले साफ नहीं किया गया था।</p>
<p>प्रिवेंशन ऑफ फूड अडल्टरेशन 1955 के Rule 14 के मुताबिक जांच के लिए खाने का सैंपल साफ और सूखी बोतल, जार या दूसरे उपयुक्त कंटेनर में लिया जाना जरूरी था। यानी सैंपल लेने की प्रक्रिया में ही जरूरी नियम का पालन नहीं हुआ था।</p>
<p><strong>एल्युमिनियम से नुकसान का सबूत भी नहीं मिला</strong><br>
मामले में दूसरा बड़ा सवाल था कि क्या काजू कतली पर मिला एल्युमिनियम फॉइल सेहत के लिए नुकसानदायक था? हाई कोर्ट ने पाया कि अदालत के सामने ऐसा कोई वैज्ञानिक या मेडिकल सबूत पेश नहीं किया गया, जिससे साबित हो कि इस मामले में मिला एल्युमिनियम फॉइल इंसानों की सेहत के लिए हानिकारक था या काजू कतली खाने लायक नहीं थी।</p>
<p>कोर्ट का कहना था कि सिर्फ एल्युमिनियम फॉइल मिलने भर से खाने की चीज को मिलावटी नहीं माना जा सकता, जब उसके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने का सबूत रिकॉर्ड पर न हो।</p>
<p><strong>31 साल पुराने केस में मिली राहत</strong><br>
17 जून 2026 को जस्टिस हेमंत एम प्रच्छक की गुजरात हाई कोर्ट बेंच ने दुकानदार के पक्ष में फैसला बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने माना कि आरोपी को कथित अपराध से जोड़ने के लिए पर्याप्त और भरोसेमंद सबूत नहीं हैं। अदालत ने अपीलीय अदालत के बरी करने के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया और उसके खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी। साल 1995 में 96 रुपये की काजू कतली से शुरू हुआ मामला करीब 31 साल बाद खत्म हुआ।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>Rafale के डर से PAK ने जमीन पर उतार दी थी पूरी F&#45;16 फ्लीट! पूर्व PAF अफसर का बड़ा खुलासा</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हवाई युद्ध की तस्वीर अब और साफ हो रही है. हाल ही में पाकिस्तान एयर फोर्स के रिटायर्ड एयर कमोडोर खालिद चिश्ती ने एक अहम बात स्वीकार की है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अपने पूरे F-16 फ्लीट को उस … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 09:45:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong><br>
मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हवाई युद्ध की तस्वीर अब और साफ हो रही है. हाल ही में पाकिस्तान एयर फोर्स के रिटायर्ड एयर कमोडोर खालिद चिश्ती ने एक अहम बात स्वीकार की है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अपने पूरे F-16 फ्लीट को उस दौरान जमीन पर ही रखा. यह सावधानी नहीं बल्कि डर की वजह से था. कारण था भारत के राफेल जेट्स पर लगे मेटियोर मिसाइल्स की लंबी रेंज और बेहतर क्षमता।  </p>
<p>F-16 पर लगे AMRAAM मिसाइल की रेंज करीब 70 से 100 किलोमीटर तक बताई जाती है जबकि राफेल के मेटियोर की रेंज 120 से 200 किलोमीटर तक पहुंच सकती है. यह अंतर इतना बड़ा था कि पाकिस्तानी पायलटों को लगता था कि वे लड़ाई शुरू होने से पहले ही निशाना बन सकते हैं। </p>
<p>इससे साफ होता है कि आधुनिक हवाई युद्ध अब सिर्फ पायलट की कुशलता या विमान की चपलता पर निर्भर नहीं रह गया है. अब रेंज, फर्स्ट-शॉट एडवांटेज और मिसाइल की नो एस्केप जोन जैसी तकनीकी बातें फैसला करती हैं. खालिद चिश्ती जैसे अनुभवी अधिकारी का यह बयान पाकिस्तान का डर बताता है। </p>
<p><strong>मेटियोर बनाम AMRAAM: रेंज का अंतर क्यों था?</strong><br>
मेटियोर मिसाइल यूरोपीय कंपनी एमबीडीए ने बनाई है. इसकी सबसे बड़ी खासियत रैमजेट इंजन है. सामान्य मिसाइलें ठोस ईंधन वाले रॉकेट मोटर से चलती हैं जो लॉन्च के कुछ सेकंड बाद जलकर खत्म हो जाता है. उसके बाद मिसाइल अपनी रफ्तार पर निर्भर रहती है. धीरे-धीरे ऊर्जा खोती जाती है. मेटियोर में रैमजेट इंजन पूरे उड़ान भर थ्रस्ट बनाए रखता है. इससे यह लंबी दूरी तक ऊंची स्पीड और ऊर्जा बनाए रखती है। </p>
<p>इसका नतीजा नो एस्केप जोन में दिखता है. नो एस्केप जोन वह इलाका है जहां लक्ष्य विमान मिसाइल से बच नहीं सकता चाहे वह कितना भी मुड़कर या भागने की कोशिश करे. मेटियोर का यह जोन 60 किलोमीटर से ज्यादा बताया जाता है जो AMRAAM के मुकाबले करीब तीन गुना बड़ा है। </p>
<p>राफेल पायलट दुश्मन को लॉक करके फायर कर सकता था. खुद AMRAAM की रेंज से बाहर सुरक्षित रह सकता था. पाकिस्तान के F-16 पायलट अगर आगे बढ़ते तो वे पहले ही निशाने पर आ जाते बिना जवाब देने का मौका पाए। </p>
<p>भारत ने इस तकनीकी बढ़त को और मजबूत बनाया. एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की कवरेज और लंबी दूरी वाले स्टैंड-ऑफ हथियारों ने पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र को लगभग बंद कर दिया. एस-400 ने लंबी दूरी से पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट और यहां तक कि कुछ हाई वैल्यू टारगेट को भी निशाना बनाया. पाकिस्तानी विमानों को अपने ठिकानों के पास या पश्चिमी इलाकों की तरफ पीछे हटना पड़ा. इस माहौल में F-16 को उड़ान भरने का जोखिम बहुत ज्यादा था। </p>
<p><strong>ऑपरेशन सिंदूर और जमीनी नुकसान</strong><br>
ऑपरेशन सिंदूर अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू हुआ था. भारत ने आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए. इसके बाद हवाई और मिसाइल हमलों का सिलसिला चला. भारतीय वायुसेना ने राफेल, सु-30 एमकेआई और अन्य प्लेटफॉर्म से स्टैंड-ऑफ वेपन्स का इस्तेमाल किया। </p>
<p>पाकिस्तान के कई एयरबेस पर नुकसान हुआ. जैकोबाबाद जैसे ठिकानों पर F-16 हैंगर क्षतिग्रस्त हुए. कुछ विमान जमीन पर ही प्रभावित हुए. रडार और कमांड सिस्टम भी निशाने पर आए. खालिद चिश्ती के अनुसार F-16 की मिसाइल रेंज की कमी के कारण उन्हें फ्रंटलाइन पर नहीं भेजा जा सका। </p>
<p>कुछ रिपोर्टों में बताया गया कि JF-17 और J-10सी जैसे प्लेटफॉर्म पर चीनी मिसाइलें थीं लेकिन F-16 जो पाकिस्तान की मुख्य शक्ति माना जाता था वह किनारे पर रह गया. यह घटना दिखाती है कि पुरानी पीढ़ी के विमान और मिसाइल नई तकनीक के सामने कैसे पीछे छूट जाते हैं। </p>
<p><strong>क्या जे-10सीई और पीएल-15 गैप को तेजी से भर सकते हैं</strong><br>
पाकिस्तान ने चीन से जे-10सीई फाइटर जेट और पीएल-15 मिसाइल हासिल की हैं. पीएल-15 की घरेलू चीनी वर्जन की रेंज 200 किलोमीटर या उससे ज्यादा बताई जाती है जबकि एक्सपोर्ट वर्जन पीएल-15ई की रेंज करीब 145 किलोमीटर मानी जाती है. इसे मेटियोर के करीब या बराबर बताया जाता है. ड्यूल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर से यह लंबी दूरी तय कर सकती है। </p>
<p>लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि सिर्फ अधिकतम रेंज काफी नहीं है. मेटियोर का रैमजेट सिस्टम नो एस्केप जोन में बेहतर प्रदर्शन देता है. पीएल-15 ऊर्जा खो सकती है जबकि मेटियोर अंत तक मजबूत रहती है. इसके अलावा भारत के पास S-400 मिसाइल सिस्टम, बेहतर सेंसर फ्यूजन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सुइट और नेटवर्क सेंट्रिक क्षमता है. राफेल का आरबीई2 एईएसए रडार और स्पेक्ट्रा सिस्टम कंडिशनल अवेयरनेस बढ़ाते हैं। </p>
<p>पाकिस्तान जे-10सीई और पीएल-15 के साथ गैप कम करने की कोशिश कर रहा है. लेकिन मात्रा, इंटीग्रेशन, ट्रेनिंग और सपोर्ट सिस्टम में भारत अभी आगे है. भारत अस्त्र मार्क-2 जैसी स्वदेशी मिसाइलों पर भी काम कर रहा है. मेटियोर स्टॉक बढ़ा रहा है. भविष्य में अगर पाकिस्तान को बेहतर वर्जन या ज्यादा संख्या मिलती है तो संतुलन बदल सकता है लेकिन रेंज और फर्स्ट-शॉट एडवांटेज भारत के पक्ष में है। </p>
<p><strong>हवाई युद्ध का नया सिद्धांत: रेंज अब राजा है</strong><br>
यह घटना आधुनिक हवाई युद्ध के सिद्धांत को दोहराती है. पहले डॉगफाइट और पायलट स्किल पर जोर था. अब बीवीआर यानी बियॉन्ड विजुअल रेंज मुकाबला मुख्य है. जो पहले फायर करे और सुरक्षित रहे वही जीते. मेटियोर जैसी मिसाइलें इसी सिद्धांत पर बनी हैं. एस-400 जैसी ग्राउंड बेस्ड सिस्टम हवाई क्षेत्र को नियंत्रित करती हैं। </p>
<p>कुल मिलाकर खालिद चिश्ती का बयान सिर्फ एक स्वीकारोक्ति नहीं है. यह बताता है कि तकनीक कैसे रणनीति को आकार देती है. ऑपरेशन सिंदूर में मिसाइल रेंज का अंतर निर्णायक साबित हुआ. भविष्य में जे-10सीई और पीएल-15 इस अंतर को कम कर सकते हैं लेकिन पूरी तरह बंद करने में समय और संसाधन दोनों लगेंगे. फिलहाल भारत की हवाई बढ़त मजबूत बनी हुई है। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>EPFO का बड़ा बदलाव! नौकरी जाते ही निकाल सकेंगे PF का 75%, घर रिपेयर के लिए भी मिलेगा पैसा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली अगर आप नौकरी करते हैं और हर महीने आपकी सैलरी से पीएफ कटता है, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है। ईपीएफओ ने पीएफ से पैसा निकालने के नियमों में बदलाव करते हुए कर्मचारियों के लिए निकासी को आसान किया है। अब जरूरत पड़ने पर कर्मचारी अपने पीएफ खाते में जमा … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 09:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>EPFO, का, बड़ा, बदलाव, नौकरी, जाते, ही, निकाल, सकेंगे, का, 75, घर, रिपेयर, के, लिए, भी, मिलेगा, पैसा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>अगर आप नौकरी करते हैं और हर महीने आपकी सैलरी से पीएफ कटता है, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है। ईपीएफओ ने पीएफ से पैसा निकालने के नियमों में बदलाव करते हुए कर्मचारियों के लिए निकासी को आसान किया है। अब जरूरत पड़ने पर कर्मचारी अपने पीएफ खाते में जमा रकम का एक बड़ा हिस्सा निकाल सकते हैं। खासकर नौकरी छूटने, बीमारी, पढ़ाई, घर और दूसरी जरूरी जरूरतों के लिए पीएफ का पैसा पहले के मुकाबले आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।</p>
<p>केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने लोकसभा में ईपीएफ निकासी के नए नियमों की जानकारी दी। सरकार के मुताबिक कर्मचारियों को आंशिक निकासी और एडवांस के नियमों को आसान और ज्यादा लचीला बनाया गया है।</p>
<p><strong>नौकरी चली गई तो पीएफ का 75% निकाल सकेंगे</strong><br>
सबसे बड़ी राहत उन कर्मचारियों के लिए है, जिनकी नौकरी चली जाती है। बेरोजगारी की स्थिति में कर्मचारी अपने पीएफ बैलेंस का 75 फीसदी तक तुरंत निकाल सकते हैं। यानी नौकरी जाने के बाद पैसों की जरूरत पड़ने पर कर्मचारी अपने पीएफ का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस बदलाव का मकसद बेरोजगार कर्मचारियों को आर्थिक मदद देना है, ताकि नई नौकरी मिलने तक उन्हें पैसों की परेशानी का सामना न करना पड़े।</p>
<p><strong>साल में दो बार निकाल सकेंगे 75% तक रकम</strong><br>
ईपीएफओ के नए नियमों के तहत कुछ खास परिस्थितियों में कर्मचारी अपने पीएफ खाते में जमा रकम का 75 फीसदी तक साल में दो बार निकाल सकते हैं। इसके लिए तीन केटेगरी बनाई गई हैं। इसमें जरूरी खर्च, घर से जुड़ी जरूरत और खास परिस्थितियां शामिल है। यानी मेडिकल इमरजेंसी, एजुकेशन, घर और पैसे से जुड़ी बड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक सहारा बन सकता है।</p>
<p><strong>बीमारी के लिए निकासी की कोई लिमिट नहीं</strong><br>
ईपीएफ से एडवांस निकालने के नियमों में बीमारी को भी शामिल किया गया है। बीमारी के मामले में एडवांस निकालने की संख्या पर कोई लिमिट नहीं रखी गई है। इससे कर्मचारी और उनके परिवार को मेडिकल खर्च के समय पीएफ की रकम का इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।</p>
<p><strong>पढ़ाई और शादी के लिए भी पीएफ का पैसा</strong><br>
नए नियमों के तहत कर्मचारी अपनी पीएफ सदस्यता के दौरान एजुकेशन के लिए अधिकतम 10 बार और शादी के लिए अधिकतम 5 बार पीएफ एडवांस ले सकते हैं। वहीं, घर से जुड़ी जरूरतों के लिए पीएफ एडवांस अधिकतम 5 बार लिया जा सकता है। इन आंशिक निकासी के लिए कम से कम 12 महीने की पीएफ सदस्यता जरूरी होगी।</p>
<p><strong>7 साल की जगह 12 महीने की सदस्यता</strong><br>
कर्मचारियों के लिए एक और बड़ा बदलाव न्यूनतम सर्विस पीरियड को लेकर है। कई तरह के पीएफ एडवांस निकासी के लिए पहले लंबे सर्विस पीरियड की जरूरत होती थी। अब कुछ मामलों में यह पीरियड घटाकर 12 महीने कर दिया गया है। इसका फायदा खासतौर पर उन युवा कर्मचारियों को मिल सकता है, जिन्हें नौकरी शुरू करने के कुछ समय बाद ही किसी जरूरी खर्च के लिए पैसों की जरूरत पड़ जाती है।</p>
<p><strong>EPS का पैसा निकालने के नियम अलग</strong><br>
सरकार ने यह भी साफ किया है कि समय से पहले अंतिम ईपीएफ सेटलमेंट के लिए 12 महीने का वेटिंग पीरियड और कर्मचारी पेंशन योजना यानी EPS के निकासी फायदे के लिए 36 महीने का वेटिंग पीरियड लागू है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>फुकेत&#45;दिल्ली फ्लाइट मामले के बाद बड़ा फैसला, Air India और AI Express सभी पायलटों का कराएगी साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्ट</title>
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<description><![CDATA[ मुंबई  फुकेत-दिल्ली एयर इंडिया फ्लाइट में टर्बुलेंस की घटना के बाद पायलट के नशे में होने की बात सामने आने से काफी किरकिरी हो रही है. इस बीच विमानन कंपनी आगे ऐसी घटना न हो, इसके लिए सख्त फैसला लिया है. सूत्रों के अनुसार, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस अपने सभी पायलटों का साइकोएक्टिव … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 20:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>फुकेत-दिल्ली, फ्लाइट, मामले, के, बाद, बड़ा, फैसला, Air, India, और, Express, सभी, पायलटों, का, कराएगी, साइकोएक्टिव, सब्सटेंस, टेस्ट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई </strong></p>
<p>फुकेत-दिल्ली एयर इंडिया फ्लाइट में टर्बुलेंस की घटना के बाद पायलट के नशे में होने की बात सामने आने से काफी किरकिरी हो रही है. इस बीच विमानन कंपनी आगे ऐसी घटना न हो, इसके लिए सख्त फैसला लिया है. सूत्रों के अनुसार, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस अपने सभी पायलटों का साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्ट करेंगी. टाटा समूह के स्वामित्व वाली दोनों एयरलाइनों में कुल मिलाकर 5,000 से अधिक पायलट हैं. ऐसे में अब कंपनी के सभी पायलटों की यह जांच होगी. फुकेत-दिल्ली फ्लाइट में हुई टर्बुलेंस की घटना के बाद अब सभी पायलटों की यह जांच कराई जाएगी। </p>
<p><strong>मालूम हो कि </strong></p>
<p><strong>पायलटों को भेजे इंटरनल मेल में दी गई टेस्ट की जानकारी</strong></p>
<p>पायलटों को भेजे गए एक इंटरनल मेल में दोनों एयरलाइन कंपनियों ने कहा कि किसी भी ऐसे पदार्थ या दवाओं की पूर्ण जांच करने का निर्णय लिया गया है, जिनकी मौजूदा नियमों के तहत अनुमति नहीं है. सूत्रों ने बताया कि यह परीक्षण अनिवार्य है और गुरुवार से शुरू होगा। </p>
<p>परीक्षण गुरुग्राम अकादमी में प्रशिक्षण के साथ-साथ, उड़ान ब्रीफिंग केंद्रों, एयरलाइंस के कार्यालयों या संबंधित अड्डों द्वारा प्रदान किए गए स्थानों पर उड़ान के बाद आयोजित किया जाएगा। </p>
<p>सूत्रों ने कहा कि यह पहल सुरक्षा के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के साथ-साथ यात्रियों, हितधारकों और बड़े पैमाने पर समुदाय को आश्वासन प्रदान करने के लिए सक्रिय रूप से की जा रही है। </p>
<p>4 अगस्त को, एयरबस A320 विमान के साथ संचालित फुकेत-दिल्ली उड़ान AI2379, मध्य हवा में अशांति के बीच अचानक 300 फीट की ऊंचाई खो गई, जिससे कम से कम 24 लोग घायल हो गए. विमान में 137 यात्रियों और 8 क्रू सदस्यों सहित 145 लोग सवार थे। </p>
<p>उड़ान के पायलट-इन-कमांड ने पुष्टिकरण स्क्रीनिंग परीक्षण में एक साइकोएक्टिव पदार्थ के लिए सकारात्मक परीक्षण किया. सूत्रों ने कहा कि पायलट को मारिजुआना, एक साइकोएक्टिव दवा के लिए सकारात्मक परीक्षण किया गया है।</p>
<p><strong>ट्रेनिंग के दौरान भी होगी पायलट्स की जांच</strong><br>
दोनों एयरलाइंस ने पायलटों को भेजे एक इंटरनल मैसेज में कहा कि मौजूदा नियमों के तहत प्रतिबंधित सभी पदार्थों और दवाओं की पूरी जांच कराने का फैसला लिया गया है।</p>
<p>यह जांच गुरुग्राम एकेडमी में ट्रेनिंग के साथ-साथ की जाएगी। इसके अलावा फ्लाइट के बाद फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटर, एयरलाइंस के ऑफिस या संबंधित बेस से तय जगहों पर भी टेस्ट होंगे।</p>
<p>एयरलाइंस के मुताबिक, यह पहल सुरक्षा के सबसे ऊंचे मानकों को बनाए रखने के लिए पहले से की जा रही है। इसका मकसद यात्रियों को एयरलाइन्स पर वापस भरोसा दिलाना भी है।</p>
<p><strong>फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में 24 लोग घायल हुए थे</strong><br>
4 अगस्त को फुकेट-दिल्ली फ्लाइट हवा में हलचल के बाद अचानक 300 फीट नीचे आ गया था। इस घटना में 24 लोग घायल हुए थे। प्लेन में 145 लोग सवार थे। इनमें 137 यात्री और 8 क्रू मेंबर शामिल थे।</p>
<p>फ्लाइट के कैप्टन की कन्फर्मेटरी स्क्रीनिंग साइकोएक्टिव ड्रग के लिए पॉजिटिव आई थी। पायलट के शरीर में साइकोएक्टिव ड्रग गांजा मिला था।</p>
<p> </p>
<p>पिछले मंगलवार को एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ़्लाइट उड़ाने वाले पायलट-इन-कमांड (PIC) का कन्फर्मेटरी डोप टेस्ट भी पॉज़िटिव आया है। यह नतीजा तब आया जब पायलट के पहुंचने पर किए गए पहले स्क्रीनिंग टेस्ट की रिपोर्ट "नॉन-नेगेटिव" आई और फिर प्रक्रिया के अनुसार अधिकारियों ने कन्फर्मेटरी टेस्ट किया, जिसकी रिपोर्ट मंगलवार को आई। TOI के हवाले से सूत्रों ने बताया कि 'पायलट का मारिजुआना (जिसे आम तौर पर 'वीड' कहा जाता है) टेस्ट पॉजिटिव आया है'। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन (DGCA) अब डोप टेस्ट के नियमों को और सख़्त बनाने पर काम कर रहा है ताकि इसे एक असरदार रोक के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके।</p>
<p>यह रिपोर्ट तब आई है जब भारत के एविएशन सेक्रेटरी समीर सिन्हा ने एयर इंडिया के निवर्तमान CEO कैंपबेल विल्सन को एक मीटिंग के लिए बुलाया था, जिसमें DGCA और AAIB के अधिकारी भी मौजूद थे। अधिकारियों ने टाटा ग्रुप की एयरलाइन से कहा कि वे हर तरह से ऑपरेशन की सुरक्षा सुनिश्चित करें और पूछा कि एयरलाइन इसके लिए क्या कदम उठा रही है। इससे पहले रविवार को, एविएशन मिनिस्ट्री ने बताया कि एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ़्लाइट के पायलटों का – जिनकी फ़्लाइट क्रूज़ के दौरान अचानक लगभग 300 फ़ीट नीचे आ गई थी – मंज़िल पर पहुँचने पर साइकोएक्टिव सब्सटेंस (डोप) स्क्रीनिंग टेस्ट किया गया। कैप्टन की स्क्रीनिंग टेस्ट रिपोर्ट "नेगेटिव नहीं" थी और फिर उसे कन्फर्मेटरी टेस्ट के लिए भेजा गया।</p>
<p>TOI के अनुसार, DGCA के नियमों में कहा गया है कि अगर (साइकोएक्टिव पदार्थों के लिए) स्क्रीनिंग टेस्ट का नतीजा 'नॉन-नेगेटिव' आता है, तो कन्फर्मेशन रिपोर्ट मिलने तक कर्मचारी को तुरंत सुरक्षा से जुड़े काम से हटा दिया जाएगा। अगर पहली बार कन्फर्मेशन टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो संबंधित कर्मचारी को नशा-मुक्ति के लिए भेजा जाएगा। नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि सरकार एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान की घटना पर बारीकी से नज़र रख रही है और आगे की कार्रवाई पर फ़ैसला लेने से पहले एयरक्राफ़्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की रिपोर्ट का इंतज़ार करेगी।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>AI ने लिखा कंटेंट अब पकड़ा जाएगा! Anthropic का नया Invisible Watermark ऐसे करेगा टेक्स्ट की पहचान</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल रोज के काम में मदद के लिए करते हैं और इससे हमारा काम आसान हो जाता है. लेकिन यही AI अगर गलत हाथों में चला जाए तो बहुत बड़ी दिक्कत हो सकती है. लोग इसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं. इसी को ध्या में रखते हुए कुछ नियम … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 19:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल रोज के काम में मदद के लिए करते हैं और इससे हमारा काम आसान हो जाता है. लेकिन यही AI अगर गलत हाथों में चला जाए तो बहुत बड़ी दिक्कत हो सकती है. लोग इसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं. इसी को ध्या में रखते हुए कुछ नियम भी बनाए गए हैं। जैसे AI से बनाई गई इमेज पर वॉटरमार्क लगाया जाता है, ताकि पता चल सके कि फोटो असली है या नकली। </p>
<p>लेकिन ऐसा फीचर टेक्स्ट के लिए नहीं बनाया गया था, जिससे लोगों को पता चल सके कि कोई टेक्स्ट AI से बनाया गया है. अब Anthropic एक नया फीचर लेकर आया है. आइए जानते हैं कि कॉपी-पेस्ट करने के बाद भी AI का टेक्स्ट कैसे पकड़ा जा सकता है। </p>
<p>एंथ्रोपिक के सपोर्ट पेज पर अनाउंस किया गया है कि Claude के सभी AI मॉडल अब एआईI से बनाए गए टेक्स्ट कंटेंट में इनविजिबल वॉटरमार्क जोड़ सकते हैं. खास बात यह है कि कॉपी-पेस्ट करने के बाद भी यह वॉटरमार्क टेक्स्ट के अंदर छिपा रह सकता है। </p>
<p>पूरी दुनिया में AI से लिखे कंटेंट इंटरनेट पर छाए हुए हैं. किस कंटेंट को AI ने लिखा और कौन इंसानी हाथों के लिखे गए हैं, इसमें फर्क करना लगभग नामुमकिन हो चला है. लेकिन अब इसका एक जबरदस्त काट निकलने जा रहा है. दरअसल, जेनरेटिव AI क्लाउड को बनाने वाली कंपनी एंथ्रोपिक ने एक बड़ा फैसला लिया है. उसने क्लाउड से बनाए जाने वाले कंटेंट पर अदृश्य निशान लगाने की तैयारी की है. ये निशान इंसानों को नहीं दिखेंगे और न ही इससे किसी भी कंटेंट का अर्थ, उसकी क्वालिटी या पढ़ने के तरीके में ही बदलाव होगा। </p>
<p>इसे कंपनी केवल कंटेंट तक ही सीमित नहीं रखेगी. क्लाउड से तैयार किए गए डॉक्युमेंट्स और इमेज में भी डिजिटल प्रिंट जोड़े जाएंगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वो कहां से लिए गए हैं? उसे किस तरह तैयार किया गया है? क्या उसमें कुछ बदलाव किया गया है, या बाद में उसके साथ कोई छेड़छाड़ हुई है?</p>
<p>एंथ्रोपिक ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब यूरोपीय संघ के नए नियमों के तहत AI से तैयार कंटेंट की पहचान और उसके बारे में पारदर्शिता को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है. यूरोपीय आयोग की AI Act की धारा 50 से जुड़े पारदर्शिता संबंधी नियम इसी महीने लागू हुए हैं। </p>
<p>तो सवाल ये है कि जब आपने क्लाउड से कोई सवाल पूछा तो वह अपने जवाबों में क्या ऐसा छिपाएगा जिसे इंसानी आंख नहीं देख सकेगा लेकिन मशीन पहचान सकेगी? यह व्यवस्था कैसे काम करेगी? और क्या इससे वाकई में AI और इंसान की लिखी सामग्री में फर्क करना संभव हो जाएगा?</p>
<p>दरअसल एंथ्रोपिक इसे वाटरमार्क करेगा, ये ठीक उसी तरह होगा जैसे आपने किसी इमेज या ऑनलाइन कंटेंट पर या अपने मोबाइल के कैमरे से तस्वीरें लेते समय कभी खुद ही इस्तेमाल किया होगा। </p>
<p>लेकिन क्लाउड का वॉटरमार्क अलग तरह का होगा क्योंकि यह कोई दिखाई देने वाला लोगो, शब्द या चेतावनी नहीं होगा। </p>
<p>एंथ्रोपिक के मुताबिक ये मार्क कंटेंट के भीतर इस तरह बुना जाएगा कि इंसान उसे सामान्य तौर पर देख या पढ़ नहीं सकेगा। </p>
<p>यानी क्लाउड से जब आपको पूछे गए सवाल का जवाब मिलेगा तब किसी वाक्य के बीच कोई खास चिह्न नजर नहीं आएगा लेकिन मशीन के लिए उस पाठ में मौजूद संकेत को पहचानना संभव होगा। </p>
<p><strong>कैसे छिपेगा वाटरमार्क, किसका फायदा?</strong><br>
एंथ्रोपिक के मुताबिक इसे टेक्स्ट वॉटरमार्क मॉडल के स्तर पर लगाया जाएगा. यानी क्लाउड परिवार के मॉडल से तैयार होने वाले किसी भी कंटेंट में इसे शामिल किया जाएगा। </p>
<p>इसका एक बड़ा फायदा यह है कि अगर उपयोगकर्ता क्लाउड का जवाब कॉपी करके किसी दूसरे डॉक्युमेंट, वेबसाइट या प्लेटफॉर्म पर चिपका दिया तो ये संकेत उस चिपकाए गए कंटेंट के साथ आगे भी जा सकता है. जिसे इंसानी आंख नहीं बल्कि मशीन पकड़ लेगी। </p>
<p><strong>क्या वाटरमार्क से बचने का कोई तरीका है?</strong><br>
एंथ्रोपिक का कहना है कि यह वॉटरमार्क उस कंटेंट को एडिट करने के बाद भी बना रह सकता है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि वह हर स्थिति में बना ही रहेगा। </p>
<p>यानी अगर किसी व्यक्ति ने AI से कंटेंट तैयार करवाने के बाद उसे रीराइट कर दिया या किसी दूसरे AI मॉडल से उसे फिर से लिखवाया, तो वाटरमार्क कमजोर पड़ सकता है या पूरी तरह से खत्म भी हो सकता है। </p>
<p>बता दें कि वाटरमार्क की तकनीक के लिए एंथ्रोपिक C2PA जैसे मानकों का इस्तेमाल कर रहा है. इसमें डिजिटल सिग्नेचर से जुड़े प्रमाणों के जरिए यह जांचने की व्यवस्था होती है कि जानकारी में बाद में छेड़छाड़ हुई है या नहीं। </p>
<p><strong>EU AI Act की इसमें क्या भूमिका है?</strong><br>
इस पूरे बदलाव का यही सबसे बड़ा कारण है. दरअसल, यूरोपीय संघ ने AI से तैयार कंटेंट को लेकर पारदर्शिता के नियम बनाए हैं. यूरोपीय आयोग के AI Act के मुताबिक AI से तैयार कंटेंट की पहचान और उसे चिह्नित करने से जुड़े दायित्व शामिल हैं। </p>
<p>यूरोपीय आयोग का ट्रांसपेरेंसी कोड इन कानूनी दायित्वों को पूरा करने में AI कंपनियों और दूसरे संबंधित पक्षों की मदद करने के लिए बनाया गया है. आयोग के मुताबिक इन पारदर्शिता संबंधी जिम्मेदारियों का उद्देश्य धोखे और हेरफेर के जोखिम को कम करना तथा सूचना व्यवस्था में भरोसा बनाए रखना है। </p>
<p>यानी मुद्दा सिर्फ ये नहीं है कि कोई व्यक्ति कंटेंट लिखने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहा है. बल्कि सवाल ये है कि AI जब इंसान की तरह कंटेंट तैयार कर रहा है, तस्वीरें बना रहा है, तो इंटरनेट पर उसे देखने पढ़ने वाला शख्स इसे कैसे समझे कि उसके सामने असली कंटेंट है या AI से लिखा हुआ। </p>
<p><strong>यूरोपीय संघ इसी समस्या से निपटने के लिए AI कंटेंट की पहचान को ज्यादा व्यवस्थित बनाना चाहता है। </strong></p>
<p><strong>तो क्या AI से लिखा हर कंटेंट पकड़ा जाएगा?<br>
वॉटरमार्किंग को AI कंटेंट की पहचान करने का अचूक तरीका समझना गलत होगा। </strong></p>
<p>मान लीजिए क्लाउड ने हजार शब्दों की एक स्टोरी लिखी. उसमें ऐसे अदृश्य संकेत मौजूद है जिससे उस कंटेंट की पहचान हो सकती है कि उसे किसने लिखा है. अब कोई व्यक्ति उस स्टोरी को लेकर दूसरे AI मॉडल से कहता है कि इसे पूरी तरह नए शब्दों में लिखो। </p>
<p>नए कंटेंट में पहले वाले वाटरमार्क का कितना हिस्सा बचता है, यह सबसे अहम बात है। </p>
<p>इसी तरह जब किसी वाक्य को रीराइट किया जाता है या फिर पूरे पैराग्राफ को दोबारा लिखा जाता है और सेंटेंस फॉर्मेशन यानी वाक्य की संरचना पूरी तरह बदल दी जाती है तो उस मामले में भी वाटरमार्क का कितना हिस्सा बचा रहता है यह स्पष्ट नहीं है। </p>
<p>इस स्थिति में AI से बने कंटेंट और पब्लिश किए गए कंटेंट के बीच अंतर पैदा हो सकता है तो उसे पूरी तरह से AI से लिखा गया कंटेंट नहीं माना जा सकता। </p>
<p><strong>AI से AI वॉटरमार्क हटाना कितना आसान है?</strong><br>
खास कर जब टेक्स्ट कंटेंट की बात आती है तब वाटरमार्क को बनाए रखना और भी बड़ी चुनौती है। </p>
<p>मसलन, इंटरनेट पर लंबे समय से यह दावा किया जाता रहा है कि AI लेखक बहुत ज्यादा em dash (—) का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन कोई इंसान भी em dash (—) का इस्तेमाल कर सकता है। </p>
<p>इसलिए किसी एक राइटिंग शैली को AI होने का प्रमाण मानना सही नहीं है.<br>
तस्वीरों में भी यही समस्या है। </p>
<p>AI से बनाई गई तस्वीरों में डिजिटल पहचान के अलग-अलग तरीके पहले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। </p>
<p>कुछ सिस्टम तस्वीर के पिक्सल में बहुत कम बदलाव करती हैं. कुछ फाइल के भीतर डिजिटल जानकारी रखती हैं। </p>
<p>लेकिन हर तरीका पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। </p>
<p>अगर कोई तस्वीर का स्क्रीनशॉट ले लेता है, तो मूल फाइल की कुछ जानकारी गायब हो सकती है। </p>
<p>इसी तरह तस्वीर को काटना, दोबारा सेव करना या दूसरे तरीके से एडिट करना भी वाटरमार्क को प्रभावित कर सकता है। </p>
<p>C2PA इसका एक समाधान देता है, जिसमें कंटेंट को पहली बार जेनरेट किए जाने के बाद से उसके सभी बदलावों का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाता है। </p>
<p><strong>वाटरमार्क से क्या फायदा हो सकता है?</strong><br>
AI से बनाए गए कंटेंट की मात्रा तेजी से बढ़ रही है. इससे तीन बड़ी समस्याएं पैदा हो रही हैं। </p>
<p>पहली, किसी व्यक्ति की पहचान या बयान को गलत तरीके से पेश किया जा सकता है। </p>
<p>दूसरी, नकली तस्वीर, आवाज या वीडियो को वास्तविक बताकर लोगों को धोखा दिया जा सकता है। </p>
<p>तीसरी, इंटरनेट पर इतने अधिक AI कंटेंट पहुंच सकते हैं कि उपयोगकर्ता के लिए वास्तविक और AI जेनरेटेड कंटेंट के बीच अंतर करना बहुत कठिन हो जाए। </p>
<p>ऐसे माहौल में कंटेंट के साथ उसके जेनरेट किए जाने की जानकारी जोड़ना एक तरह से डिजिटल पहचान पत्र तैयार करने जैसा है। </p>
<p><strong>पर क्या इससे इंसानी लेखन की पहचान भी हो जाएगी?</strong><br>
नहीं, इंटरनेट पर मौजूद हर लेख को देखकर कोई मशीन निश्चित रूप से ये नहीं कह सकेगी कि इसे इंसान ने लिखा है। </p>
<p>AI कंटेंट की पहचान करना और इंसानी लेखन को प्रमाणित करना एक ही चीज नहीं है.</p>
<p>अगर किसी कंटेंट में क्लाउड का वाटरमार्क नहीं मिला तो ये पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि उसे इंसान ने ही लिखा है। </p>
<p>हो सकता है कि उसे किसी दूसरे AI मॉडल ने लिखा हो। </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>RG Kar Case: तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक निर्मल घोष गिरफ्तार, केस में बढ़ी हलचल</title>
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<description><![CDATA[ कोलकाता  आरजी कर रेप और मर्डर केस में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व विधायक निर्मल घोष को गिरफ्तार किया गया है. 9 अगस्त को आरजी कर केस की दूसरी बरसी पर मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने पुलिस को निर्देश दिया था कि वे पीड़िता के शव के अंतिम संस्कार के मामले में नया केस दर्ज करें … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 18:45:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Kar, Case:, तृणमूल, कांग्रेस, के, पूर्व, विधायक, निर्मल, घोष, गिरफ्तार, केस, में, बढ़ी, हलचल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कोलकाता </strong></p>
<p>आरजी कर रेप और मर्डर केस में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व विधायक निर्मल घोष को गिरफ्तार किया गया है. 9 अगस्त को आरजी कर केस की दूसरी बरसी पर मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने पुलिस को निर्देश दिया था कि वे पीड़िता के शव के अंतिम संस्कार के मामले में नया केस दर्ज करें और फिर से जांच करें. पीड़िता का अंतिम संस्कार निर्मल घोष की मौजूदगी में पानीहाटी में जल्दबाजी में किया गया था। 9 अगस्त, 2024 की रात को आरजी कर अस्पताल में प्रशिक्षु डॉक्टर की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी, इससे राज्य के साथ-साथ पूरे देश में आक्रोश फैल गया था. आरोप हैं कि सबूतों को नष्ट किया गया और घटना के तुरंत बाद मामले को दबाने की कोशिश की गई। </p>
<p><strong>अंत‍िम संस्‍कार को लेकर गई तरह के सवाल</strong><br>
मुख्‍यमंत्री ने कहा था क‍ि अंत‍िम संस्कार की फीस माफ किया जाना और दस्‍तावेजों पर परिवार के सदस्यों के हस्ताक्षर न होने से कई सवाल हैं. उन्होंने कहा था कि न‍िर्मल घोष, काउंसलर सोमनाथ डे और परिवार के पड़ोसी संजीव मुखर्जी की भूमिका की जांच जरूरी है. मुख्‍यमंत्री ने बैरकपुर पुलिस कमिश्नर को इस पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। </p>
<p><strong>सुवेंदु अधिकारी ने अगस्त 2024 पोस्‍ट क‍िया था वीड‍ियो </strong><br>
अगस्त 2024 में तत्कालीन विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने एक वीड‍ियो पोस्ट किया था, जिसमें पूर्व टीएमसी विधायक निर्मल घोष लोगों को पीड़िता का शव श्मशान के अंदर ले जाने का निर्देश देते हुए दिखाई दे रहे हैं। </p>
<p>आरजी कर केस की दूसरी बरसी पर 9 अगस्त को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस को निर्देश दिया था कि वे पीड़िता के शव के अंतिम संस्कार के मामले में नया केस दर्ज करें और फिर से जांच करें. बता दें कि पीड़िता का अंतिम संस्कार निर्मल घोष की मौजूदगी में पानीहाटी में जल्दबाजी में किया गया था। </p>
<p>9 अगस्त 2024 की रात को आरजी कर अस्पताल में प्रशिक्षु डॉक्टर की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी. इसे लेकर बंगाल के अलावा पूरे देश में आक्रोश फैल गया था. आरोप हैं कि सबूतों को नष्ट किया गया और घटना के तुरंत बाद मामले को दबाने की कोशिश की गई थी। </p>
<p><strong>सीबीआई से अलग केस</strong><br>
निर्मल घोष के अलावा पानीहाटी नगरपालिका के काउंसलर सोमनाथ डे और पीड़िता के परिवार के पड़ोसी संजीव मुखर्जी को भी इस मामले में नामजद किया गया है. पुलिस अधिकारी के मुताबिक यह नया केस सीबीआई की उस जांच से अलग है जो रेप और मर्डर के मूल मामले में चल रही है. बता दें कि सीबीआई कोलकाता पुलिस से ये जांच अपने हाथ में ले चुकी है, जबकि अंतिम संस्कार से जुड़ा ये नया मामला सीधे पुलिस की जांच के दायरे में है। </p>
<p>पश्चिम बंगाल के मुख्‍यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा था क‍ि अंत‍िम संस्कार की फीस माफ किया जाना और दस्‍तावेजों पर परिवार के सदस्यों के हस्ताक्षर न होने से कई सवाल हैं. उन्होंने कहा था कि न‍िर्मल घोष, काउंसलर सोमनाथ डे और परिवार के पड़ोसी संजीव मुखर्जी की भूमिका की जांच जरूरी है. मुख्‍यमंत्री ने बैरकपुर पुलिस कमिश्नर को इस पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। </p>
<p><strong>अब उस रात की हर कड़ी खंगालेगी CBI</strong><br>
मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, सीबीआई की नई विशेष जांच टीम ने 8 अगस्त 2024 की रात आरजी कर अस्पताल की इमारत में मौजूद डॉक्टरों और कर्मचारियों से दोबारा पूछताछ शुरू की है. इसी इमारत के सेमिनार रूम में जूनियर महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की गई थी. नई टीम का फोकस यह पता लगाने पर है कि घटना के समय कौन-कौन लोग अस्पताल की इमारत में थे. किसकी क्या ड्यूटी थी? किसने क्या देखा? किसे कब जानकारी मिली? शुरुआती जांच में इन सवालों पर कितना काम हुआ था, इसे भी दोबारा परखा जा रहा है. पीड़िता के परिवार ने पहले ही आरोप लगाया था कि शुरुआती जांच में उस समय इमारत या संबंधित मंजिल पर मौजूद <strong>लोगों से पर्याप्त पूछताछ नहीं हुई. अब इसी बिंदु को जांच में अहम माना जा रहा है। </strong></p>
<p><strong>हाई कोर्ट के आदेश के बाद जांच ने पकड़ी रफ्तार</strong><br>
कलकत्ता हाई कोर्ट की खंडपीठ ने नई जांच टीम की प्रगति पर नाराजगी जताई थी. अदालत ने सीबीआई को सलाह दी थी कि वह पिछली जांच से प्रभावित हुए बिना मामले को नए सिरे से देखे. इसके बाद जांच एजेंसी की गतिविधियां तेज हुई हैं. नई टीम पुराने निष्कर्षों को अंतिम आधार मानने के बजाय घटनाक्रम को फिर से जोड़ने की कोशिश कर रही है. इसका मतलब है कि पहले दर्ज किए गए बयान, ड्यूटी से जुड़े रिकॉर्ड और उस रात की गतिविधियों को नए नजरिए से देखा जा सकता है. मामले में अब अस्पताल के भीतर मौजूद लोगों की भूमिका और उनकी जानकारी पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है. पूछताछ का यह दौर जांच की दिशा को और स्पष्ट कर सकता है। </p>
<p><strong>महिला कर्मचारी का फोन क्यों हुआ जब्त?</strong><br>
जांच में सबसे ज्यादा ध्यान जिस नए कदम पर है, वह एक महिला कर्मचारी का मोबाइल फोन जब्त किया जाना है. सूत्रों के अनुसार, 9 अगस्त की सुबह सेमिनार रूम में पीड़िता का शव मिलने के बाद सबसे पहले इसी कर्मचारी ने उसके परिवार से संपर्क किया था. परिवार की ओर से आरोप लगाया गया था कि अलग-अलग समय पर फोन पर दी गई जानकारी में विरोधाभास था. इसी वजह से जांचकर्ताओं ने मोबाइल फोन को अपने कब्जे में लिया है. अब फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. जांचकर्ता कॉल रिकॉर्ड और दूसरे डिजिटल डेटा की पड़ताल कर रहे हैं. इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि घटना के बाद किससे संपर्क हुआ, कब हुआ और बातचीत का घटनाक्रम क्या था। </p>
<p><strong>डिजिटल रिकॉर्ड खोल सकते हैं जांच का नया राज</strong><br>
मोबाइल फोन की जांच सिर्फ कॉल हिस्ट्री तक सीमित नहीं रह सकती. जांचकर्ता उपलब्ध डिजिटल डेटा से घटनाक्रम की टाइमलाइन तैयार करने की कोशिश कर सकते हैं. कौन-सा संपर्क किस समय हुआ, इसकी जानकारी घटनाओं को जोड़ने में मदद कर सकती है. सबसे अहम बात यह है कि नई टीम अब उस रात मौजूद लोगों से दोबारा पूछताछ कर रही है. इससे पहले दिए गए बयानों और नए जवाबों के बीच अंतर भी सामने आ सकता है. आरजी कर केस में जांच का यह नया चरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अदालत ने जांच को पुराने नजरिए से आगे बढ़ाने के बजाय नए सिरे से देखने की बात कही है. ऐसे में आने वाले दिनों में पूछताछ और डिजिटल फोरेंसिक जांच से कई नए तथ्य सामने आने की उम्मीद है। </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>15 अगस्त से पहले आतंकी साजिश का अलर्ट! दिल्ली&#45;NCR से कश्मीर तक हाई अलर्ट, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली पूरा देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन इससे पहले सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकी खतरे को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक आने वाले 2 से 3 दिन बेहद संवेदनशील हो सकते हैं और आतंकी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की कोशिश कर सकते … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 18:45:11 +0530</pubDate>
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<media:keywords>अगस्त, से, पहले, आतंकी, साजिश, का, अलर्ट, दिल्ली-NCR, से, कश्मीर, तक, हाई, अलर्ट, सुरक्षा, एजेंसियां, सतर्क</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>पूरा देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन इससे पहले सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकी खतरे को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक आने वाले 2 से 3 दिन बेहद संवेदनशील हो सकते हैं और आतंकी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं. मल्टीपल टेरर अलर्ट जारी होने के बाद कश्मीर से लेकर दिल्ली तक सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट मोड में हैं.  खुफिया इनपुट की कॉपी में दिल्ली-NCR को लेकर खास तौर पर गंभीर आशंकाएं जताई गई हैं। </p>
<p><strong>IED पहुंचाने की साजिश</strong><br>
11 अगस्त 2026 को मिले एक खुफिया इनपुट के मुताबिक पाकिस्तान स्थित ISI और प्रो-खालिस्तानी तत्वों से जुड़े नेटवर्क की ओर से दिल्ली-NCR में IED यानी विस्फोटक पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है. इनपुट में आशंका जताई गई है कि पाकिस्तान आधारित नेटवर्क अपने स्थानीय संपर्कों के जरिए विस्फोटक दिल्ली-NCR में मौजूद अज्ञात साथियों तक पहुंचा सकता है। </p>
<p>खुफिया जानकारी के मुताबिक यह IED अगले 2 से 3 दिनों के अंदर स्थानीय संपर्कों तक पहुंचाए जाने की कोशिश हो सकती है. इस इनपुट को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने दिल्ली-NCR में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है। </p>
<p><strong>एक नाम का आतंकी खतरा</strong><br>
खुफिया एजेंसियों के इनपुट में पाकिस्तान में मौजूद फरहतुल्लाह गौरी का नाम भी सामने आया है, जिसे भारत का मोस्ट वांटेड आतंकवादी बताया जाता है. गौरी पर गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर 2002 में हुए आतंकी हमले से जुड़े होने के आरोप हैं और सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रखती रही हैं। </p>
<p>इनपुट के मुताबिक वह सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिश कर रहा है. जून 2026 में 'स्टूडेंट ऑफ हिंद' नाम के सिग्नल ग्रुप पर कथित तौर पर एक मैसेज भेजकर युवाओं को 'आर्मी ऑफ महदी' में शामिल होने के लिए उकसाने की बात भी सामने आई थी। </p>
<p><strong>रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की रेकी</strong><br>
सुरक्षा एजेंसियों को इससे पहले पाकिस्तान-ISI नेटवर्क की ओर से दिल्ली में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की रेकी कराए जाने का इनपुट भी मिला था. खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि भारत में मौजूद स्थानीय संपर्कों की मदद से संवेदनशील जगहों और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर की जानकारी जुटाई जा सकती है। </p>
<p>मई 2026 में NIA कंट्रोल रूम को मिले एक व्हाट्सऐप मैसेज में ISI पर भारत में छह बड़े धमाकों की कथित साजिश रचने का आरोप लगाया गया था. इसी दौरान तलहा सईद से जुड़े आठ मुजाहिदीन के भारत में घुसने की जानकारी का दावा भी एक खुफिया इनपुट में किया गया था। </p>
<p><strong>गैंगस्टर नेटवर्क का इस्तेमाल!</strong><br>
मई में सामने आए एक अन्य इनपुट में सुरक्षा एजेंसियों को आशंका थी कि ISI से जुड़े तत्व भारत में अपने मकसद को पूरा करने के लिए गैंगस्टर नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकते हैं. इनपुट में दिल्ली की अहम इमारतों को निशाना बनाने की संभावित साजिश का भी जिक्र किया गया था। </p>
<p>इससे पहले अप्रैल 2026 में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकियों की ओर से दिल्ली, जम्मू और राजस्थान को निशाना बनाए जाने की आशंका जताई गई थी. संसद भवन और कनॉट प्लेस जैसे संवेदनशील इलाकों को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिले थे, जिसके बाद निगरानी बढ़ाई गई थी। </p>
<p><strong>ऑनलाइन गतिविधियों पर भी नजर<br>
सुरक्षा एजेंसियों ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े ऑनलाइन ने</strong>टवर्क की गतिविधियों को भी डिकोड करने का दावा किया है. फरवरी 2026 में इस्लामाबाद की एक मस्जिद पर हुए हमले के बाद बदले की कार्रवाई के नाम पर लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर आधारित आतंकियों की ओर से दिल्ली में IED धमाकों की कथित साजिश का इनपुट सामने आया था। </p>
<p>जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 'इस्लाह-ए-उम्मत' नाम के सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और अहम जगहों को निशाना बनाने के लिए उकसाने की जानकारी भी एजेंसियों को मिली थी. इन सभी पुराने और ताजा इनपुट को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां 15 अगस्त से पहले किसी भी संभावित आतंकी साजिश को नाकाम करने में जुटी हैं। </p>
<p><strong>लाल किले पर अभेद सुरक्षा</strong><br>
आतंकी अलर्ट के बीच दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं. लाल किले के चप्पे-चप्पे पर दिल्ली पुलिस के साथ पैरामिलिट्री फोर्स, NSG की हिट टीमें और प्रशिक्षित स्नाइपर्स तैनात रहेंगे. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए NDRF की टीमें भी तैयार रहेंगी और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाएगी. लाल किले और उसके आसपास करीब 5 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जा रही है, ताकि समारोह के दौरान किसी भी खतरे से तुरंत निपटा जा <strong>सके। </strong></p>
<p><strong>2000 से ज्यादा CCTV कैमरों से निगरानी</strong><br>
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लाल किले और आसपास के इलाकों में 2000 से ज्यादा CCTV कैमरों से निगरानी की जा रही है. इन कैमरों के साथ FRS और ANPR कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. इन तकनीकों की मदद से संदिग्ध लोगों और वाहनों की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ भीड़ के मूवमेंट को भी मॉनिटर किया जाएगा. मल्टीपल टेरर अलर्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियां दिल्ली के अलावा जम्मू-कश्मीर और दूसरे संवेदनशील इलाकों में भी लगातार इनपुट की समीक्षा कर रही हैं। </p>
<p><strong>अगले 2-3 दिन क्यों हैं बेहद अहम?</strong><br>
खुफिया एजेंसियों के ताजा अलर्ट में आने वाले 2 से 3 दिनों को खास तौर पर संवेदनशील बताया गया है. आशंका है कि आतंकी संगठन स्वतंत्रता दिवस के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने या किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं. हालांकि किसी भी संभावित हमले को लेकर एजेंसियां लगातार इनपुट की जांच और पुष्टि कर रही हैं तथा सुरक्षा बलों को अलर्ट पर रखा गया है। </p>
<p>15 अगस्त के मद्देनजर दिल्ली-NCR से लेकर कश्मीर तक सुरक्षा व्यवस्था को इसलिए पहले के मुकाबले और ज्यादा कड़ा किया गया है, ताकि आतंकियों की किसी भी साजिश को समय रहते नाकाम किया जा सके। </p>]]> </content:encoded>
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<title>‘12 बिल पास, सिर्फ एक पर चर्चा’, रिजिजू ने बताया संसद के हंगामेदार मॉनसून सत्र का पूरा हाल</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली संसद का मॉनसून सत्र इस बार भी बेहद हंगामेदार रहा. लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार विपक्ष और सत्ता पक्ष के हंगामे की वजह से स्थगित करनी पड़ी. गुरुवार को भी सदन में ऐसा ही नजारा देखा गया. आखिरकार लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।  मॉनसून … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 16:45:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>संसद का मॉनसून सत्र इस बार भी बेहद हंगामेदार रहा. लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार विपक्ष और सत्ता पक्ष के हंगामे की वजह से स्थगित करनी पड़ी. गुरुवार को भी सदन में ऐसा ही नजारा देखा गया. आखिरकार लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। </p>
<p>मॉनसून सत्र समाप्त होने के बाद संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि इस बार संसद के मॉनसून सत्र में 12 बिल पास हुए और सिर्फ एक विधेयक पर ही चर्चा हुई। </p>
<p>किरन रिजिजू ने बताया कि लोकसभा में सिर्फ 19 फीसदी काम हुआ. लोकसभा में सिर्फ एक दिन ही चर्चा हो पाई, नए सासंदों को अच्छी चर्चा का मौका नहीं मिला. विपक्ष ने सदन में चर्चा नहीं होने दी और चर्चा से भागने के लिए बहाने बनाए. विपक्षी सांसद सिर्फ नारेबाजी के लिए संसद आए, जो संसदीय लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। </p>
<p><strong>लोकसभा में 19 फीसदी तो राज्यसभा में 39 फीसदी काम</strong><br>
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू कहा कि मॉनसून सत्र आज खत्म हो गया, हम इसे दो नज़रिए से देखते हैं. कामकाज के लिहाज़ से यह बहुत सफल सत्र रहा. हमने कुल 12 बिल पास किए. हालांकि, बहस और चर्चा के नज़रिए से यह उतना सफल नहीं रहा। </p>
<p>उन्होंने कहा कि लोकसभा में हमें कुल तय समय के मुकाबले सिर्फ़ 19 फीसदी काम करने का मौका मिला. राज्यसभा में  39 फीसदी काम हुआ, जहां विपक्षी पार्टियों ने हंगामा किया और वॉकआउट किया, वहीं ज़्यादातर NDA पार्टियों और कुछ विपक्षी पार्टियों के सांसदों ने बहस और चर्चा में हिस्सा लिया। </p>
<p>किरन रिजिजू कहते हैं संसद में सिर्फ एक बिल पर ही चर्चा हो सकी, जो परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों के मुद्दे से जुड़ा था, उस पर लोकसभा में पूरी चर्चा हुई. इस सत्र के दौरान एंटी पेपर लीक बिल पास किया गया. इस कानून पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों में चर्चा हुई। </p>
<p><strong>संसद में कितने घंटे काम होना चाहिए</strong><br>
मॉनसून सत्र 20 जुलाई शुरू हुआ, जिसके बाद से लेकर सिर्फ 19 घंटे काम हुए. लोकसभा में कम से 108 घंटे का काम काज होना चाहिए था, लेकिन सिर्फ 19 घंटे. अगर एवरेज निकालेंगे तो रोजाना लोकसभा सिर्फ 60 मिनट ही चली है. इस दौरान 12 बिल पास किए गए, जिसमें एक बिल चर्चा के बाद पास हुई लेकिन 11 बिल ऐसे थे, जिस पर ना तो चर्चा हुई ना कोई बहस हुई. बस हंगामे के बीच पेश किया गया और ध्वनीमत से पास कर दिया गया। </p>
<p><strong>स्पीकर का इस बार नहीं हो सका संबोधन </strong><br>
सूत्रो के हवाले से खबर है कि लोकसभा में आज के हंगामे चलते स्पीकर ओम बिरला ने अपना पारंपरिक संबोधन नहीं दिया, क्योंकि सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही नारेबाज़ी शुरू हो गई थी. ऐसे में स्पीकर के संबोधन के लिए सदन में माहौल नहीं था। </p>
<p>गुरुवार को लोकसभा में जब 11:00 बजे से पहले गृह मंत्री अमित शाह संसद पहुंच गए थे. अमित शाह के पहुंचते ही विपक्ष के लोग माफी मांगो माफी मांगो, लाठी किसने चलाया नारा लगाते हुए शोर करने लगे, इसके बाद सत्ता पक्ष की तरफ से भी सांसदों ने हल्ला  शुरू किया तो गृह मंत्री अमित शाह ने सबको इशारा करके बैठने कहा। </p>
<p>अमित शाह के इशारा मिलने के बाद सत्तापक्ष के तमाम एनडीए सांसदों शांत होकर  बैठ गए. अमित शाह मुस्कुरा रहे थे और सामने कांग्रेस समेत विपक्ष के लोग नारा लगा रहे थे, माफी मांगो माफी मांगो इसके बाद प्रधानमंत्री आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आते ही वंदे मातरम का गान हुआ और लोकसभा की कार्यवाही को अनिश्चित काल के स्थगित कर दी गई। </p>]]> </content:encoded>
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<title>महाराष्ट्र में मराठी को लेकर बड़ा फैसला? ड्राइविंग लाइसेंस नियम से उत्तर भारतीयों की बढ़ी चिंता</title>
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<description><![CDATA[ मुंबई महाराष्ट्र सरकार ने यात्रियों के साथ बेहतर संवाद और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुचारू बनाने के उद्देश्य से राज्य भर में सभी व्यावसायिक वाहन चालकों को मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान होना अनिवार्य कर दिया है। राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने कमर्शियल पैसेंजर गाड़ी चलाने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा की जो … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 14:45:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>महाराष्ट्र, में, मराठी, को, लेकर, बड़ा, फैसला, ड्राइविंग, लाइसेंस, नियम, से, उत्तर, भारतीयों, की, बढ़ी, चिंता</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई</strong></p>
<p>महाराष्ट्र सरकार ने यात्रियों के साथ बेहतर संवाद और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुचारू बनाने के उद्देश्य से राज्य भर में सभी व्यावसायिक वाहन चालकों को मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान होना अनिवार्य कर दिया है। राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने कमर्शियल पैसेंजर गाड़ी चलाने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा की जो शर्त रखी है, वह ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवरों पर भी लागू होगी। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बुधवार (12 अगस्त) को यह साफ किया कि ओला, उबर और रैपिडो जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियों के ज़रिए गाड़ी चलाने वाले ड्राइवरों को राज्य के भाषा नियमों से कोई छूट नहीं मिलेगी।</p>
<p><strong>मराठी नहीं जानने वाले ऑटो, कैब ड्राइवर्स के लाइसेंस 18 अगस्त से 3 महीने तक के लिए सस्पेंड हो जाएंगे। वहीं, अगर ऐसा बार-बार होता है तो उनके लाइसेंस कैंसिल हो सकते हैं।</strong></p>
<p>यानी 'महाराष्ट्र मोटर वाहन (संशोधन) नियम, 2026' के तहत ऑटो-रिक्शा, पारंपरिक टैक्सी और ओला-उबर जैसे ऐप-आधारित एग्रीगेटर ड्राइवरों को अब स्थानीय भाषा (मराठी) में व्यावहारिक बातचीत की क्षमता साबित करनी होगी। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने घोषणा की है कि 1989 के नियमों में किए गए इस संशोधन का पालन न करने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। राज्य सरकार के इस फैसले से वैसे उत्तर भारतीयों के रोजी-रोटी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, जो लंबे समय से वहां कैब सर्विस मुहैया करा रहा थे।</p>
<p><strong>परमिट स्थायी रूप से रद्द करने के अधिकार</strong><br>
नए नियम के तहत प्रादेशिक परिवहन कार्यालयों को पहली बार नियम का उल्लंघन करने पर ड्राइवरों के लाइसेंस को तीन महीने तक निलंबित करने और बार-बार उल्लंघन करने पर परमिट स्थायी रूप से रद्द करने के अधिकार दिए गए हैं। यह नियम चालकों के साथ-साथ परमिट धारकों और नए परमिट आवेदन/नवीनीकरण कराने वालों पर भी समान रूप से लागू होगा। मुंबई और पुणे जैसे प्रमुख शहरों में इस नियम को सख्ती से लागू किया जा रहा है, जिससे चालकों के सामने जल्द से जल्द मराठी सीखने या फिर आजीविका गंवाने का दबाव बन गया है।</p>
<p><strong>ऐप बेस्ड कैब ड्राइवरों पर भी नियम लागू</strong><br>
'द इंडियन एक्सप्रेस' के अनुसार, पब्लिक सर्विस गाड़ियां चलाने के लिए मंज़ूरी से जुड़े संशोधित नियम 4(4), परमिट से जुड़े नियम 78 और परमिट रिन्यूअल से जुड़े नियम 85 में अब जरूरी शर्तों में मराठी भाषा की जानकारी होना भी शामिल है। यह शर्त इलेक्ट्रॉनिक मीटर वाली गाड़ियां चलाने वाले ऐप-बेस्ड मोटर कैब ड्राइवरों पर भी लागू होती है। प्रावधान 22(3A) के तहत, जो ड्राइवर मराठी नहीं बोल पाएंगे, उनके ख़िलाफ नियमों का पालन न करने पर कार्रवाई हो सकती है।</p>
<p><strong>ड्राइवरों के लिए मराठी की ट्रेनिंग</strong><br>
इस बीच, महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ जैसे साहित्यिक संगठनों के सहयोग से यात्री वाहन ड्राइवरों के लिए मराठी ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शुरू किया है। 105 दिन का यह प्रोग्राम रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस और भाषा ट्रेनिंग सेंटरों के ज़रिए चलाया जा रहा है, जिसका मकसद ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों को मराठी में कामकाजी दक्षता हासिल करने में मदद करना है। विभाग के अनुसार, 1.10 लाख से ज़्यादा गैर-मराठी भाषी यात्री वाहन ड्राइवरों ने चार घंटे का ट्रेनिंग प्रोग्राम पूरा कर लिया है। ड्राइवरों को 17 अगस्त को ठाणे में एक कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से सर्टिफिकेट मिलने हैं। उम्मीद है कि ट्रेनिंग की यह पहल ड्राइवरों को परिवहन विभाग द्वारा तय 15 अगस्त की समय सीमा से पहले भाषा संबंधी शर्त को पूरा करने में मदद करेगी।</p>]]> </content:encoded>
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<title>महिलाओं को बड़ा तोहफा! इस राज्य में जल्द फ्री होगी बस यात्रा, BJP सरकार ने की बड़ी तैयारी</title>
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<description><![CDATA[ देहरादून उत्तराखंड की महिलाओं को स्वतंत्रता दिवस पर बड़ा तोहफा मिल सकता है। पुष्कर सिंह धामी सरकार उत्तराखंड रोडवेज की साधारण बसों में महिलाओं को फ्री सफर की सुविधा देने का ऐलान कर सकती है। रोडवेज प्रबंधन ने इस संबंध में सरकार को प्रस्ताव भेजा है। उत्तराखंड रोडवेज की लगभग 900 बसें रोजाना सड़कों पर … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 13:45:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>महिलाओं, को, बड़ा, तोहफा, इस, राज्य, में, जल्द, फ्री, होगी, बस, यात्रा, BJP, सरकार, ने, की, बड़ी, तैयारी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>देहरादून</strong></p>
<p>उत्तराखंड की महिलाओं को स्वतंत्रता दिवस पर बड़ा तोहफा मिल सकता है। पुष्कर सिंह धामी सरकार उत्तराखंड रोडवेज की साधारण बसों में महिलाओं को फ्री सफर की सुविधा देने का ऐलान कर सकती है। रोडवेज प्रबंधन ने इस संबंध में सरकार को प्रस्ताव भेजा है।</p>
<p>उत्तराखंड रोडवेज की लगभग 900 बसें रोजाना सड़कों पर दौड़ती हैं। इनमें औसतन सवा लाख यात्री प्रतिदिन सफर करते हैं। दैनिक यात्रियों में करीब 50 हजार छात्राएं और महिलाएं होती हैं। रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद सभी आयु वर्ग की महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की मांग कर रही है। परिषद ने इसे लेकर हाल में सीएम से मुलाकात की थी। इसके चलते शासन की ओर से सुझाव मांगने पर रोडवेज प्रबंधन ने बुधवार को प्रस्ताव सौंप दिया।</p>
<p><strong>वित्तीय स्थिति सुधरने की उम्मीद</strong><br>
रोडवेज का मानना है कि इस कदम से न केवल महिला सशक्तीकरण को मजबूती मिलेगी, बल्कि घाटे से जूझ रहे रोडवेज की वित्तीय स्थिति भी सुधरेगी। उधर, यूपी की बसों में जल्द ही महिलाओं को मुफ्त सफर की सुविधा देने की तैयारी है। इससे आय के मामले में उत्तराखंड को यूपी रोडवेज से चुनौती मिलती।</p>
<p><strong>इन राज्यों में भी मुफ्त सफर की सुविधा</strong><br>
कर्नाटक में महिलाओं को मुफ्त सफर के लिए शक्ति योजना, तेलंगाना में स्त्री शक्ति योजना, केरल में प्रियदर्शनी और आंध्र प्रदेश में स्त्री शक्ति योजना चलाई जा रही है। इसके अलावा पंजाब, पश्चिम बंगाल, जम्मू कश्मीर व दिल्ली में भी महिलाओं को मुफ्त सफर की सुविधा दी जाती है। उत्तर प्रदेश सरकार स्वतंत्रता दिवस से 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को मुफ्त बस सफर की सुविधा देने जा रही है।</p>
<p><strong>रोडवेज की 'आमदनी अठन्नी- खर्चा रुपया’</strong><br>
वर्तमान में उत्तराखंड रोडवेज भारी वित्तीय संकट से गुजर रहा है। रोडवेज पर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारियां हैं। रोडवेज की दैनिक आय लगभग 1.5 करोड़ रुपये है, जबकि दैनिक खर्च 2.20 करोड़ रुपये से भी अधिक है। कर्मचारियों को समय पर वेतन भी नहीं मिल पा रहा है।</p>
<p>उत्तराखंड रोडवेज के महाप्रबंधक (संचालन) क्रांति सिंह ने कहा कि रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने सरकार को महिलाओं को मुफ्त यात्रा सुविधा देने का सुझाव दिया था। स्वतंत्रता दिवस पर घोषणा के लिए सुझाव मांगे जाने पर हमने इस संबंध में सरकार को प्रस्ताव भेजा है। यह व्यवस्था लागू होने से रोडवेज को लाभ ही होगा, क्योंकि ज्यादातर महिलाएं अकेले सफर नहीं करतीं, उनके साथ परिवार के अन्य सदस्य भी यात्रा करते हैं, जिससे हमारी बसों में यात्री संख्या बढ़ेगी।</p>]]> </content:encoded>
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<title>8th Pay Commission: ₹45 हजार से कम पेंशन नहीं! 4 बार बढ़ा DA, अब आयोग के सामने बड़ी चुनौती</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग के 9 महीने का समय बीत चुका है। अब आयोग के पास सिर्फ 9 महीने का ही समय बचा है। इस दौरान उसे अपनी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को देना है। इस बची भारत पेंशनर्स समाज ने बड़ी मांग कर दी है। आयोग से इस यूनियन ने महंगाई भत्ता, फिटमेंट … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>8th, Pay, Commission:, ₹45, हजार, से, कम, पेंशन, नहीं, बार, बढ़ा, DA, अब, आयोग, के, सामने, बड़ी, चुनौती</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>8वें वेतन आयोग के 9 महीने का समय बीत चुका है। अब आयोग के पास सिर्फ 9 महीने का ही समय बचा है। इस दौरान उसे अपनी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को देना है। इस बची भारत पेंशनर्स समाज ने बड़ी मांग कर दी है। आयोग से इस यूनियन ने महंगाई भत्ता, फिटमेंट फैक्टर्स से लेकर 45000 रुपये कम से कम पेंशन रखने की डिमांड की है। संगठन का कहना है कि बढ़ते खर्च को देखते हुए पेंशनर्स के लिए कम-कम पेंशन की व्यवस्था की जाए। जिससे कर्मचारी रिटायरमेंट के दौरान अच्छा जीवन व्यतीत कर सके।</p>
<p>मिंट की रिपोर्ट के अनुसार 7 अगस्त को इस संगठन ने दिल्ली में आयोग के सामने अपनी डिमांड को रखा है।</p>
<p><strong>4 बार बढ़े महंगाई भत्ता (8th pay commission da updates)</strong><br>
मौजूदा समय में केद्रीय कर्मचारियों को साल भर में दो बार महंगाई भत्ता और DR मिलता है। भारत पेंशनर्स समाज ने कहा है कि हर तीन महीने में डीए में इजाफा किया जाए। सगंठन का कहना है कि बढ़ती महंगाई की वजह से पेंशनर्स पर काफी दबाव होता है। ऐसे में 6 महीने का समय काफी अधिक हो जाता है।</p>
<p><strong>25% डीए पर मर्जर</strong><br>
भारत पेंशनर्स समाज की तरफ से मांग की गई है कि 25 प्रतिशत डीए होने पर उसका मर्जर बेसिक पे से कर दिया जाए। जिससे कर्मचारियों को महंगाई के अनुसार बेसिक पे मिलता रहे। मौजूदा समय में ऐसी कोई भी व्यवस्था नहीं है। इस समय केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 60 प्रतिशत है।</p>
<p><strong>फिटमेंट फैक्टर 3.83 करने की मांग (8th Pay Commission fitment factors)</strong><br>
बीपीएस ने सिर्फ पेंशन को 45000 रुपये करने की मांग नहीं की है। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों के लिए फिटमेंट फैक्टर 3.83 करने की मांग की है। अगर ऐसा हुआ तो मिनिमम बेसिक सैलरी 1800 रुपये से बढ़कर 69000 रुपये हो जाएगा।</p>
<p><strong>फैमिली यूनिट बढ़ाने की मांग (8th Pay Commission family unit)</strong><br>
इस संगठन ने फैमिली यूनिट को भी बढ़ाने की मांग की है। मौजूदा समय में फैमिली यूनिट 3 है। इस बढ़ाकर 5.2 करने की मांग की गई है। संगठनों का कहना है कि माता-पिता को भी फैमिली यूनिट में जोड़ा जाए।</p>
<p>8वें पेंशन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 में हुआ था। इस पे कमीशन के पास 18 महीने का समय है। बता दें, आयोग की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार की तरफ से केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए वेतन और पेंशन पर फैसला किया जाएगा। इस आयोग का गठन 10 साल के बाद किया जाता है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>भारत में रोजगार की आई बाढ़! फ्रीडम के साथ मिल रहा पैसा, युवाओं के लिए खुल रहे नए मौके</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली आज कंपटिशन के दौर में डॉक्टर इंजीनियर या टीचर का कर‍ियर अपनाना मुश्क‍िल हो गया है.वहीं सरकारी नौकरियां, जो निश्च‍ितता देती हैं वहां पेपर लीक से  लेकर कोच‍िंग इंडस्ट्री के लंबे खर्चे तक तमाम अन‍िश्च‍ितताएं हैं. अब बचता है जॉब… तो इंड‍िया में जॉब पाना तो आसान हो गया है. आपको कोई भी … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 09:45:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>आज कंपटिशन के दौर में डॉक्टर इंजीनियर या टीचर का कर‍ियर अपनाना मुश्क‍िल हो गया है.वहीं सरकारी नौकरियां, जो निश्च‍ितता देती हैं वहां पेपर लीक से  लेकर कोच‍िंग इंडस्ट्री के लंबे खर्चे तक तमाम अन‍िश्च‍ितताएं हैं. अब बचता है जॉब… तो इंड‍िया में जॉब पाना तो आसान हो गया है. आपको कोई भी बेसिक काम जैसे ड्राइव‍िंग, कुकिंग या घरेलू काम आते हैं तो आप तुरंत किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जॉब पा सकते हैं. लेकिन ये करियर या नौकरी तो नहीं कहलाएगी. एक तरह से देखा जाए तो ये अमेरिकी ट्रेंड है जहां लोग ग‍िग वर्क करके अपने खर्चे न‍िकाल लेते हैं. लेकिन भारत में इस पर  लोगों की लाइफ डिपेंड होती जा रही है। </p>
<p>मार्केट में घटते जॉब, ले-ऑफ के खतरे, एआई का मार्केट, महंगाई और परिवार की जिम्मेदारी ने लोगों को ग‍िग वर्क के लिए मजबूर कर दिया है. लोग अब केवल नौकरी तक खुद को सीमित नहीं रख रहे हैं. नौकरी करने के साथ ही वह अब अमेरिका के वर्क कल्चर यानी गिग वर्कर के ट्रेंड को फॉलो कर रहे हैं. वह खाली समय का भी यूज कर रहे हैं। </p>
<p>2026 के एक Indeed सर्वे में 68% भारतीय कर्मचारियों ने कहा कि उनकी मौजूदा आय आराम से जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं है, जो साइड इनकम की बढ़ती जरूरत को समझने में मदद करता है. लेकिन केवल सैलरी ही इस काम को करने का अहम कारण नहीं माना बल्कि गिग वर्क को फ्रीडम के साथ काम करने का मौका देता है. ऐसे में भारत का बदलता वर्क कल्चर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है क्या कर्मचारी अब एक नौकरी के बजाय कमाई के कई रास्तों को अपना भविष्य मानने लगे हैं? भारत में गिग इकोनॉमी के बढ़ने का अंदाजा सरकारी आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है. नीति आयोग के अनुमान के मुताबिक 2020-21 में देश में करीब 77 लाख यानी 7.7 मिलियन गिग वर्कर्स थे. यह संख्या 2029-30 तक बढ़कर 2.35 करोड़ यानी 23.5 मिलियन होने का अनुमान है। </p>
<p><strong>अमेरिका में कैसा है गिग वर्कर का काम? </strong><br>
अमेरिका में गिग और वैकल्पिक काम का दायरा केवल डिलीवरी या कैब चलाने तक सीमित नहीं है. इसमें स्वतंत्र कॉन्ट्रैक्टर, फ्रीलांसर, ऑन-कॉल वर्कर, टेंपरेरी वर्क और ऐप के जरिए मिलने वाला काम भी शामिल होते हैं. अमेरिकी ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स (BLS) के जुलाई 2023 के आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में 7.4% कामगार अपने मुख्य या एकमात्र काम में स्वतंत्र कांट्रेक्टर थे. वहीं 4.3% कामगार contingent jobs में थे, यानी ऐसी नौकरियां जिनके लंबे समय तक चलने की उम्मीद नहीं होती। </p>
<p>अमेरिका में इस तरह के काम को लेकर सबसे बड़ा मुद्दा फ्लेक्सिबिलिटी बनाम नौकरी की सुरक्षा है. स्वतंत्र कॉन्ट्रैक्टर को काम करने की ज्यादा आजादी मिल सकती है, लेकिन कर्मचारी के तौर पर मिलने वाले कुछ लाभ और सुरक्षा उन्हें नहीं मिलते. अमेरिका में केवल गिग वर्कर केवल ऐप के जरिए कैब चलाने या सामान पहुंचाने तक ही नहीं है. इसमें फ्रीलांसर, स्वतंत्र सलाहकार (Consultant) और दूसरे काम भी शामिल होते हैं. BLS के अनुसार, आर्ट्स, डिजाइन,  मनोरंजन, खेल और मीडिया से जुड़े कामों में हिस्सेदारी सबसे अधिक है। </p>
<p><strong>भारत में क्यों बढ़ रहा है इसका ट्रेंड?</strong><br>
भारत में इसके बढ़ने की कई सारी वजहें हैं. स्मार्टफोन और इंटरनेट की आसान उपलब्धता, ऑनलाइन पेमेंट, ई-कॉमर्स, फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स ने ऐसे कामों के अवसर बढ़ाए हैं. डिलीवरी पार्टनर, कैब ड्राइवर, फ्रीलांसर, घरेलू सेवाएं देने वाले कर्मचारी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े दूसरे कामगार अब इस नए वर्क कल्चर का हिस्सा बन रहे हैं. नीति आयोग के मुताबिक भारत में गिग वर्क का बड़ा हिस्सा मध्यम कौशल वाले कामों में है. 2020-21 में करीब 47% गिग वर्क मीडियम-स्किल्ड, 22% हाई-स्किल्ड और 31% लो-स्किल्ड कामों में था. भारत में गिग वर्कर्स को लेकर सरकार ने कानूनी स्तर पर भी कदम उठाए हैं.सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में पहली बार गिग वर्कर और प्लेटफॉर्म वर्कर की परिभाषा और उनके लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का प्रावधान किया गया है। </p>
<p><strong>क्या भारत अमेरिका के रास्ते पर चल रहा है?</strong><br>
काफी हद तक वर्क कल्चर में समानता जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन दोनों देशों की परिस्थितियां अलग हैं. अमेरिका में गिग वर्क का बड़ा हिस्सा स्वतंत्र कॉन्ट्रैक्ट और फ्रीलांस मॉडल से जुड़ा है, जबकि भारत में ऐप आधारित डिलीवरी, कैब और क्विक-कॉमर्स जैसे काम तेजी से दिखाई दे रहे हैं. भारत में गिग इकोनॉमी के सामने सबसे बड़ा सवाल सिर्फ रोजगार बढ़ने का नहीं है बल्कि कमाई की स्थिरता, सामाजिक सुरक्षा, दुर्घटना बीमा और काम की बेहतर परिस्थितियों का भी है. इसलिए आने वाले सालों में भारत में गिग वर्क का विस्तार कितना बड़ा होगा, यह सिर्फ ऐप और कंपनियों की संख्या पर निर्भर नहीं करेगा. सरकार की नीतियां, प्लेटफॉर्म कंपनियों की जिम्मेदारी और कामगारों को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा भी इस नए वर्क कल्चर की दिशा तय करेगी। </p>]]> </content:encoded>
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<title>PM E&#45;DRIVE Scheme: सरकार का बड़ा तोहफा! मार्च 2028 तक बढ़ी योजना, इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने पर मिलेगी छूट</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को बढ़ावा देने के लिए PM E-DRIVE Scheme की अवधि बढ़ा दी है. अब इस योजना का फायदा 31 मार्च 2028 तक लिया जा सकता है. भारत सरकार के इस फैसले से देश में Electric Vehicle यानी EV की बिक्री बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू EV मैन्युफैक्चरिंग को … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 09:45:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>E-DRIVE, Scheme:, सरकार, का, बड़ा, तोहफा, मार्च, 2028, तक, बढ़ी, योजना, इलेक्ट्रिक, गाड़ी, खरीदने, पर, मिलेगी, छूट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को बढ़ावा देने के लिए PM E-DRIVE Scheme की अवधि बढ़ा दी है. अब इस योजना का फायदा 31 मार्च 2028 तक लिया जा सकता है. भारत सरकार के इस फैसले से देश में Electric Vehicle यानी EV की बिक्री बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू EV मैन्युफैक्चरिंग को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने वाले कस्टमर्स को योजना के तहत मिलने वाला इंसेंटिव भी जारी रहेगा। </p>
<p><strong>31 मार्च 2028 तक जारी रहेगी PM E-DRIVE Scheme</strong><br>
भारी उद्योग मंत्रालय ने 10 अगस्त 2026 को जारी नोटिफिकेशन में PM E-DRIVE Scheme की अवधि बढ़ाने की जानकारी दी. अब योजना 31 मार्च 2028 तक लागू रहेगी. इस योजना के लिए कुल 11,900 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है. आपको बता दें कि PM E-DRIVE का मुख्य उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिर व्हीकल की बिक्री को बढ़ाना, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है. भारत में EV मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करना है. सरकार का फोकस इलेक्ट्रिक वाहनों को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ देश में इनके निर्माण से जुड़े पूरे सिस्टम को डेवलप करने पर है। </p>
<p><strong>इलेक्ट्रिक दोपहिया पर कितनी मिलेगी सब्सिडी?<br>
नई व्यवस्था के तहत रजिस्टर्ड इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स प</strong>र 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2028 तक खरीदारी इंसेंटिव जारी रहेगा. सरकार ने इंसेंटिव 2,500 रुपये प्रति kWh तय किया है. हालांकि एक इलेक्ट्रिक दोपहिया पर अधिकतम 5,000 रुपये तक का ही फायदा मिलेगा. यानी बैटरी की क्षमता के हिसाब से इंसेंटिव बढ़ेगा, लेकिन सरकार की तय अधिकतम सीमा से ज्यादा सब्सिडी नहीं मिलेगी. इसके अलावा इंसेंटिव वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत के 15% या तय इंसेंटिव राशि, जो भी कम होगी, तक सीमित रहेगा। </p>
<p>योजना के तहत एलिजिबल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन की अधिकतम एक्स-फैक्ट्री कीमत 1.5 लाख रुपये तय की गई है. इसका मतलब है कि इससे ज्यादा कीमत वाले वाहन इस इंसेंटिव के लिए एलिजिबल नहीं होंगे। </p>
<p><strong>45.79 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया को मिलेगा फायदा</strong><br>
सरकार के मुताबिक PM E-DRIVE के तहत अधिकतम 45,79,120 Electric Two-Wheelers को इंसेंटिव दिया जाएगा. इसके लिए भारी उद्योग मंत्रालय की ओर से कुल 2,767 करोड़ की फंडिंग का प्रावधान किया गया है. ये आंकड़ा इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के बाजार के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इंसेंटिव जारी रहने से ग्राहकों की शुरुआती खरीद लागत कम हो सकती है. इससे कंपनियों को भी ज्यादा इलेक्ट्रिक मॉडल बेचने में मदद मिल सकती है। </p>
<p>हालांकि, मौजूदा इंसेंटिव पहले की तुलना में कम है. FY2024-25 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के लिए इंसेंटिव 5,000 रुपये प्रति kWh था और इसकी अधिकतम सीमा 10,000 रुपये प्रति वाहन थी. अब प्रति kWh और अधिकतम दोनों इंसेंटिव को घटाया गया है। </p>
<p><strong>सरकार जरूरत के हिसाब से बदल सकती है इंसेंटिव</strong><br>
सरकार ने ये भी साफ किया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में कमी आने के आधार पर प्रति kWh इंसेंटिव की समीक्षा की जा सकती है. जरूरत के अनुसार इसे समय-समय पर नोटिफाई किया जाएगा. सरकार ने साफ किया है कि PM E-DRIVE एक फंड-लिमिटेड स्कीम है. इसका मतलब है कि योजना के तहत कुल भुगतान 11,900 करोड़ के निर्धारित बजट से ज्यादा नहीं होगा। </p>
<p>अगर 31 मार्च 2028 से पहले योजना के किसी हिस्से या पूरे फंड की राशि खत्म हो जाती है तो संबंधित कंपोनेंट्स को पहले ही बंद किया जा सकता है. इसके बाद नए क्लेम स्वीकार नहीं किए जाएंगे. इसलिए सिर्फ योजना की अंतिम तारीख देखकर ये मानना सही नहीं होगा कि हर एलिजिबल व्हीकल को 31 मार्च 2028 तक निश्चित रूप से इंसेंटिव मिलता रहेगा. फंड खत्म होने की स्थिति में संबंधित लाभ पहले बंद हो सकता है। </p>
<p><strong>क्लेम जमा करने की आखिरी तारीख</strong><br>
सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक PM E-DRIVE के सभी हिस्सों के लिए 31 मार्च 2028 अंतिम तारीख होगी. हालांकि Ministry of Heavy Industries या प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी के पास क्लेम जमा करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2027 रखी गई है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>दुनिया में बजेगा भारत का डंका! SBI का बड़ा अनुमान, US&#45;चीन को पीछे छोड़ सकता है भारतीय अर्थव्यवस्था का दम</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक शानदार रिपोर्ट आई है. एसबीआई रिसर्च (SBI Research) की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) में भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ लगभग 8% रहने का अनुमान है।  दरअसल, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट बेहद सकारात्मक संकेत है. क्योंकि यह भारतीय रिजर्व … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 22:30:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>दुनिया, में, बजेगा, भारत, का, डंका, SBI, का, बड़ा, अनुमान, US-चीन, को, पीछे, छोड़, सकता, है, भारतीय, अर्थव्यवस्था, का, दम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक शानदार रिपोर्ट आई है. एसबीआई रिसर्च (SBI Research) की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) में भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ लगभग 8% रहने का अनुमान है। </p>
<p>दरअसल, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट बेहद सकारात्मक संकेत है. क्योंकि यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा लगाए गए 7% के अनुमान से भी 1 फीसदी ज्यादा है. यह अनुमान न केवल आरबीआई के 7% के पूर्वानुमान से 1 फीसदी अधिक है, बल्कि यह दर्शाता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का आंतरिक आर्थिक आधार कितना मजबूत है। </p>
<p><strong>आरबीआई के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन</strong></p>
<p>एसबीआई रिसर्च ने अपने विस्तृत आकलन के आधार पर इसके 8% तक पहुंचने की संभावना जताई है. रिपोर्ट के अनुसार इस उछाल का सबसे बड़ा कारण भारतीय घरेलू मांग और उपभोक्ता विश्वास है. जून 2026 के आंकड़ों से साफ होता है कि लोग बड़े पैमाने पर खरीदारी और निवेश कर रहे हैं। </p>
<p>एसबीआई रिसर्च अर्थव्यवस्था के 50 प्रमुख लीडिंग इंडिकेटर्स पर नजर रखता है. इस साल पहली तिमाही में 86% संकेतकों में मजबूती और तेजी दर्ज की गई है. जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 69% था, जिससे ये साबित होता है कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार में समय से साथ मजबूती आई है. वहीं दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था खासकर चीन-अमेरिकी की जीडीपी ग्रोथ 2-4 फीसदी रहने का अनुमान है। </p>
<p><strong>मजबूत डिमांड और सेल </strong><br>
जून 2026 में कारों की बिक्री में 24.1% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई. इससे पहले मई में यह 27.3% थी. दोपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन में 18.7% और थ्री-व्हीलर की बिक्री में 26.1% का इजाफा हुआ। </p>
<p>इसके अलावा जून 2026 में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) का रजिस्ट्रेशन 55.3% बढ़ा है, जो कि मई के 38.7% से काफी अधिक है. जो कि ऑटो सेक्टर के ग्रीन ट्रांसफॉर्मेशन को दर्शाती है। </p>
<p>साथ ही लोगों द्वारा लिए जाने वाले कर्ज में 15.8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. व्यक्तिगत और उपभोक्ता कर्ज की मांग में 15.8% का इजाफा हुआ है, जिससे पता चलता है कि लोग खरीदारी के लिए कर्ज लेने में भी सहज महसूस कर रहे हैं। </p>
<p>अर्थव्यवस्था के दूसरे संकेतों को देखें तो देश में बिजली की मांग में 11.5% की बढ़ोतरी हुई है. डीजल की खपत भी 6.2% बढ़ी है, जो यह दर्शाती है कि माल ढुलाई और औद्योगिक गतिविधियां तेजी से चल रही हैं. ऐसे में इकोनॉमी के सभी प्रमुख इंडिकेटर्स खपत, औद्योगिक गतिविधियां, सेवाएं, सरकारी खर्च और क्रेडिट ग्रोथ एक साथ सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>कर्नाटक में गुटखा&#45;पान मसाला पर बड़ा एक्शन, तंबाकू&#45;निकोटिन वाले उत्पादों पर 1 साल का बैन</title>
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<description><![CDATA[ बेंगलुरु कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा आयुक्त कार्यालय ने राज्य में तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा व पान मसाला के निर्माण, भंडारण, वितरण, परिवहन और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। आदेश के तहत ऐसे उत्पादों की किसी भी तरह … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 19:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>कर्नाटक, में, गुटखा-पान, मसाला, पर, बड़ा, एक्शन, तंबाकू-निकोटिन, वाले, उत्पादों, पर, साल, का, बैन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बेंगलुरु</strong></p>
<p>कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा आयुक्त कार्यालय ने राज्य में तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा व पान मसाला के निर्माण, भंडारण, वितरण, परिवहन और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। आदेश के तहत ऐसे उत्पादों की किसी भी तरह की आपूर्ति और बिक्री पर रोक रहेगी। खाद्य सुरक्षा विभाग ने संबंधित कारोबारियों को प्रतिबंध का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य तंबाकू और निकोटीन के सेवन से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना है। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। </p>
<p><strong>कर्नाटक सरकार का खास अभियान</strong><br>
कर्नाटक सरकार ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के नेतृत्व में विशेष निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान भी शुरू किए हैं. अधिकारियों की टीमें प्रतिबंधित तंबाकू और निकोटिन उत्पादों की बिक्री और वितरण पर नजर रखेंगी तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी. विभाग ने यह आदेश खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(a) और खाद्य सुरक्षा और मानक (बिक्री पर निषेध और प्रतिबंध) विनियम, 2011 के विनियमन 2.3.4 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए जारी किया है। </p>
<p>यह आदेश खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (FSS Act) की धारा 30 की उप-धारा (2) के खंड (a) और खाद्य सुरक्षा और मानक (बिक्री निषेध और प्रतिबंध) विनियमन, 2011 के नियम 2.3.4 के तहत जारी किया गया है।</p>
<p>आदेश में साफ किया गया है कि अगर गुटखा, तंबाकू या निकोटिन को अलग-अलग पाउच/सैशेट में इस तरह बेचा जाता है, जिससे उपभोक्ता उन्हें आसानी से मिलाकर खा सकें, तो उन पर भी यह प्रतिबंध समान रूप से लागू होगा।</p>
<p>चाहे प्रोडेक्ट पैकेज्ड हो या बिना पैकेजिंग के, और उसे किसी भी ब्रांड या नाम से बेचा जा रहा हो- अगर उसके अंतिम रूप में तंबाकू या निकोटिन मौजूद है, तो उसकी बिक्री अवैध मानी जाएगी।</p>
<p><strong>गतिविधि                           प्रतिबंध की स्थिति<br>
उत्पादन और निर्माण          पूरी तरह बैन<br>
स्टोरेज और गोदाम            पूरी तरह बैन<br>
परिवहन व लॉजिस्टिक्स      पूरी तरह बैन<br>
थोक व खुदरा बिक्री           पूरी तरह बैन</strong></p>
<p>खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, जनस्वास्थ्य को तंबाकू के दुष्प्रभावों से बचाना इस फैसले का मुख्य उद्देश्य है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>क्या हैं FSSAI के पान मसाला की पैकिंग को लेकर नए नियम?</strong><br>
इससे पहले भारत के फूड सेफ्टी रेगुलेटर FSSAI ने पान मसाला की पैकिंग को लेकर नए नियम जारी किए हैं। अब पान मसाला की पैकिंग में प्लास्टिक और एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।</p>
<p>नए Fफूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स पैकेजिंग एमेंडमेंट रेगुलेशन 2025 के तहत पान मसाला बनाने वाली कंपनियां प्लास्टिक वाली पैकेजिंग, प्लास्टिक लैमिनेट, एल्युमिनियम फॉयल और मेटल की परत वाली पैकिंग का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगी।</p>
<p>अब पान मसाला को कागज, पेपर बोर्ड, सेलुलोज या प्राकृतिक चीजों से बने दूसरे मटेरियल में पैक करना होगा। इसके अलावा पारंपरिक और मजबूत कंटेनर में भी इसे पैक किया जा सकेगा।</p>
<p>ये नए नियम सरकारी गजट में प्रकाशित होने के साथ ही लागू हो जाएंगे। यानी अब पान मसाला के पैकेट का लुक और पैकेजिंग दोनों बदल सकते हैं, क्योंकि कंपनियों को प्लास्टिक और फॉयल वाली पैकिंग छोड़नी होगी।</p>
<p><strong>कर्नाटक सरकार का आम लोगों से अपील</strong><br>
कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि कहीं प्रतिबंधित तंबाकू या निकोटिन उत्पादों के निर्माण, बिक्री या वितरण की जानकारी मिले तो संबंधित अधिकारियों को सूचित करें. सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद राज्य में तंबाकू की लत पर अंकुश लगाना और स्वस्थ एवं नशा-मुक्त कर्नाटक के निर्माण की दिशा में काम करना है. सरकार ने इस फैसले को नशा-मुक्त और स्वस्थ कर्नाटक की दिशा में उठाया गया कदम बताया है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>West Bengal SIR: वोटर लिस्ट से हटाए नामों की अपील पर धीमी सुनवाई से SC नाराज, चुनाव आयोग से मांगी रिपोर्ट</title>
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<description><![CDATA[ कलकत्ता पश्चिम बंगाल में एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम हटाए गए थे उन्होंने अपील दायर की है। इसकी सुनवाई स्थानीय ट्रिब्यूनल में हो रही है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में धीमी सुनवाई के लिए फटकार लगाई है। ट्रिब्यूनल के काम-काज को लेकर चुनाव आयोग से विस्तृत रिपोर्ट … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 19:30:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>West, Bengal, SIR:, वोटर, लिस्ट, से, हटाए, नामों, की, अपील, पर, धीमी, सुनवाई, से, नाराज, चुनाव, आयोग, से, मांगी, रिपोर्ट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कलकत्ता</strong></p>
<p>पश्चिम बंगाल में एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम हटाए गए थे उन्होंने अपील दायर की है। इसकी सुनवाई स्थानीय ट्रिब्यूनल में हो रही है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में धीमी सुनवाई के लिए फटकार लगाई है। ट्रिब्यूनल के काम-काज को लेकर चुनाव आयोग से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह ट्रिब्यूनल द्वारा निपटाए गए मामलों का पूरा ब्योरा पेश करे। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया है।</p>
<p>सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, "मामलों के निपटारे की प्रक्रिया इतनी धीमी नहीं हो सकती है। अभी तो इस गति से सुनवाई हो रही है कि अपीलों पर निर्णय आने से पहले अगले विधानसभा चुनाव की नौबत ना आ जाए।"</p>
<p><strong>अधीर रंजन ने की थी कैसी मांग?</strong><br>
आपको बता दें कि अधीर रंजन चौधरी ने अपनी याचिका में मांग की थी कि पश्चिम बंगाल के प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर SIR ट्रिब्यूनल का गठन किया जाए ताकि प्रभावित लोग आसानी से अपनी अपील दर्ज करा सकें और मामलों का तेजी से निपटारा हो सके।</p>
<p><strong>समय सीम तय करने पर क्या बोला SC?</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समय सीमा तय करने से पहले वह मौजूदा ट्रिब्यूनल के कामकाज और पेंडिंग मामलों की संख्या की समीक्षा करेगा। याचिकाकर्ता द्वारा अपीलों के निपटारे के लिए एक निश्चित समय सीमा तय करने की मांग पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि अदालत अभी ऐसी कोई समय सीमा तय नहीं कर सकती। पहले ट्रिब्यूनल के फैसलों की संख्या और उनकी सटीकता का आकलन किया जाएगा।</p>
<p>सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं उन्हें राज्य सरकार द्वारा राशन और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा रहा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि पश्चिम बंगाल सरकार सामाजिक लाभों से वंचित कर रही है तो प्रभावित पक्षों को इस मामले की चुनौती लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट जाना चाहिए।</p>]]> </content:encoded>
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<title>पूर्व CJI चंद्रचूड़ बने पुतिन के ‘तारणहार’! रूस ने अरबों डॉलर के केस में सौंपी बड़ी जिम्मेदारी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को रूस ने यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशादबैंक (Oschadbank) से जुड़े निवेश विवाद में अपना आर्बिट्रेटर नियुक्त किया है. यह मामला रूस और यूक्रेन के बीच 1998 में हुए द्विपक्षीय निवेश समझौते से जुड़ा है. तीन सदस्यीय आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल इस विवाद की सुनवाई करेगा. इस घटनाक्रम … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 18:30:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को रूस ने यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशादबैंक (Oschadbank) से जुड़े निवेश विवाद में अपना आर्बिट्रेटर नियुक्त किया है. यह मामला रूस और यूक्रेन के बीच 1998 में हुए द्विपक्षीय निवेश समझौते से जुड़ा है. तीन सदस्यीय आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल इस विवाद की सुनवाई करेगा. इस घटनाक्रम की खास बात यह है कि चंद्रचूड़ पहले रूस की ओर से कुछ अन्य निवेश विवादों में आर्बिट्रेटर बनने के प्रस्ताव ठुकरा चुके हैं. ऐसे में इस बार उनकी नियुक्ति अंतरराष्ट्रीय कानूनी और निवेश मध्यस्थता के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है। </p>
<p>ग्लोबल आर्बिट्रेशन रिव्यू की रिपोर्ट के मुताबिक विवाद की रकम भी छोटी नहीं है. ओशादबैंक का दावा यूक्रेन के डोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में उसकी संपत्तियों और कारोबार से जुड़ा है. बैंक का कहना है कि रूसी सैन्य कार्रवाई के बाद उसे इन संपत्तियों और ऑपरेशंस का नुकसान उठाना पड़ा. दावा सैकड़ों मिलियन डॉलर का बताया जा रहा है. यानी यह सिर्फ दो देशों के बीच कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ी रकम और युद्ध के दौरान हुए आर्थिक नुकसान का सवाल भी है। </p>
<p>इस मामले की सुनवाई तीन सदस्यीय आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल करेगा. कोस्टा रिका की आर्बिट्रेटर और पूर्व ट्रेड मिनिस्टर ड्याला जिमेनेज को दोनों पक्षों ने मिलकर ट्रिब्यूनल का अध्यक्ष चुना है. ओशादबैंक की ओर से ग्रीक आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के प्रोफेसर स्टावरोस ब्रेकौलाकिस को नियुक्त किया गया है. रूस ने भारत के पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को अपना आर्बिट्रेटर चुना है। </p>
<p>यह मामला रूस और यूक्रेन के बीच 1998 में हुए Agreement on the Encouragement and Mutual Protection of Investments के तहत शुरू किया गया है. इस तरह की संधियां विदेशी निवेशकों को कुछ कानूनी सुरक्षा देती हैं और विवाद की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का रास्ता खोलती हैं. यहां एक और दिलचस्प बात है. ओशादबैंक रूस के खिलाफ पहले भी एक बड़े निवेश विवाद में जीत हासिल कर चुका है. वह मामला क्रीमिया में बैंक की संपत्तियों और कारोबार से जुड़ा था, जिसे रूस ने 2014 में अपने नियंत्रण में लिया था। </p>
<p>क्रीमिया से जुड़े पुराने मामले में Permanent Court of Arbitration के तहत गठित ट्रिब्यूनल ने रूस को गैरकानूनी तरीके से संपत्ति अधिग्रहण के लिए जिम्मेदार ठहराया था. ट्रिब्यूनल ने ओशादबैंक को करीब 1.1 अरब डॉलर का मुआवजा, ब्याज और आर्बिट्रेशन की लागत देने का आदेश दिया था. रूस ने उस कार्यवाही में हिस्सा लेने से इनकार किया था. इसके बावजूद लागू आर्बिट्रेशन नियमों के तहत प्रक्रिया आगे बढ़ी. मौजूदा विवाद उस पुराने मामले से अलग है और यूक्रेन के चार अन्य क्षेत्रों में ओशादबैंक की संपत्तियों से संबंधित है। </p>
<p>डीवाई चंद्रचूड़ की इस नियुक्ति को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह पहले रूस की ओर से आए कुछ प्रस्ताव स्वीकार नहीं कर चुके हैं. रिपोर्ट के अनुसार रूस ने उन्हें जर्मन ऊर्जा कंपनी Wintershall Dea और यूक्रेन की सरकारी ऊर्जा कंपनी Ukrenergo से जुड़े निवेश विवादों में अपना आर्बिट्रेटर बनाने के लिए संपर्क किया था. चंद्रचूड़ ने इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया था. Wintershall मामले में Permanent Court of Arbitration ने उन्हें appointing authority की भूमिका भी दी थी. बाद में रूस से हुई बातचीत की जानकारी साझा करने के बाद उन्होंने इस भूमिका से भी हटने का फैसला किया था। </p>
<p>अब ओशादबैंक मामले में रूस की ओर से चंद्रचूड़ की नियुक्ति उस पुराने घटनाक्रम से अलग तस्वीर दिखाती है. वह इस तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल में रूस की ओर से नियुक्त आर्बिट्रेटर के तौर पर काम करेंगे. हालांकि आर्बिट्रेटर की भूमिका किसी देश के पक्ष में फैसला सुनाने की नहीं होती. ट्रिब्यूनल का काम दोनों पक्षों की दलीलों, दस्तावेजों और लागू अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर विवाद का फैसला करना होता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>Weather Alert: जम्मू&#45;कश्मीर, हिमाचल समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, जानें आज का मौसम</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश जारी है. मौसम विभाग के अनुसार पूरे भारत में मॉनसून की गतिविधियां सक्रिय है. कई इलाकों में हल्की से लेकर भारी बारिश और कुछ जगहों पर छिटपुट बारिश होने की संभावना है. अगस्त के महीने में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून मुख्य मौसमी सिस्टम होता है, जिससे भारत के … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 14:30:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Weather, Alert:, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, समेत, कई, राज्यों, में, भारी, बारिश, का, अलर्ट, जानें, आज, का, मौसम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश जारी है. मौसम विभाग के अनुसार पूरे भारत में मॉनसून की गतिविधियां सक्रिय है. कई इलाकों में हल्की से लेकर भारी बारिश और कुछ जगहों पर छिटपुट बारिश होने की संभावना है. अगस्त के महीने में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून मुख्य मौसमी सिस्टम होता है, जिससे भारत के कई हिस्सों में व्यापक बारिश होती है। </p>
<p><strong>उत्तर-पश्चिम भारत</strong><br>
मौसम विभाग के अनुसार आज दिल्ली और हरियाणा में काफी ज़्यादा या व्यापक बारिश होने की संभावना है, क्योंकि दक्षिण राजस्थान के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र और मॉनसून का असर है. इसके अलावा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी हिमालयी राज्यों में भी अगले कुछ दिनों में व्यापक बारिश होने की उम्मीद है। </p>
<p>जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. उत्तराखंड के नौ जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है, जिनमें उत्तरकाशी और चमोली भी शामिल हैं. यहाँ भूस्खलन (landslides) और सड़कें बंद होने का खतरा ज़्यादा है। </p>
<p><strong>मध्य भारत</strong><br>
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में मॉनसून के जोरदार बने रहने की उम्मीद है. इन इलाकों में व्यापक बारिश हो सकती है, साथ ही बारिश के दौरान आंधी-तूफ़ान और बिजली कड़कने की भी संभावना है. पूर्वी मध्य प्रदेश में कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश हो सकती है। </p>
<p><strong>पूर्वी भारत</strong><br>
बिहार में मॉनसून सक्रिय है और पूरे राज्य में बादल छाए हुए हैं. कम बारिश के कारण लगातार उमस बनी हुई है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है. मॉनसून के दौरान ज़्यादा उमस की मुख्य वजह हवा में नमी का बढ़ना है. बिहार में अब तक सामान्य से 36फीसदी कम बारिश हुई है, जिसका असर खेती और जल स्तर पर पड़ सकता है। </p>
<p>समुद्र और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली हवाएं बिहार पहुँचती हैं और उमस बढ़ा देती हैं. कम दबाव के क्षेत्र के कारण ओडिशा में बारिश होने की संभावना है. आईएमडी ने सभी जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है. झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी बारिश होने की उम्मीद है। </p>
<p><strong>पूर्वोत्तर भारत</strong><br>
पूरे हफ़्ते अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिज़ोरम और त्रिपुरा में बारिश जारी रहने की उम्मीद है. इस इलाके के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है, जिससे जलभराव और स्थानीय स्तर पर बाढ़ आने का खतरा बढ़ सकता है। </p>
<p><strong>पश्चिमी भारत</strong><br>
इस हफ़्ते कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र और गुजरात में भारी बारिश होने की संभावना है. आईएमडी ने कोंकण और गोवा और मध्य महाराष्ट्र में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान लगाया है, जबकि गुजरात में भी भारी बारिश होने की उम्मीद है। </p>
<p><strong>दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत</strong><br>
आने वाले दिनों में केरल, तटीय कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और आस-पास के इलाकों में बारिश जारी रहने की संभावना है. केरल और तटीय कर्नाटक में तो अच्छी-खासी बारिश होने की उम्मीद है, जबकि दक्षिण के अन्य राज्यों में कहीं-कहीं या काफी हद तक बारिश हो सकती है. इस बीच समुद्र में खराब हालात और तेज हवा के कारण मछुआरों को अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में न जाने की सलाह दी गई है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>छात्र आंदोलन पर संसद में चर्चा को तैयार सरकार, अमित शाह बोले&#45; ‘दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा’</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में जारी गतिरोध के बीच बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार छात्र आंदोलन पर चर्चा को तैयार है. हम हर सवाल का जवाब देने को तैयार हूं. हम आज 3 बजे से कल तीन बजे तक चर्चा को तैयार हूं. दूध का दूध पानी का … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 13:45:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>छात्र, आंदोलन, पर, संसद, में, चर्चा, को, तैयार, सरकार, अमित, शाह, बोले-, ‘दूध, का, दूध, पानी, का, पानी, हो, जाएगा’</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में जारी गतिरोध के बीच बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार छात्र आंदोलन पर चर्चा को तैयार है. हम हर सवाल का जवाब देने को तैयार हूं. हम आज 3 बजे से कल तीन बजे तक चर्चा को तैयार हूं. दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा. विपक्ष सिर्फ हंगामा करने पर तुला है. चर्चा में जनता के सामने सब स्पष्ट हो जाएगा. जनता तय करे कि कौन चर्चा से भाग रहा है. सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है. विपक्षी नेताओं के बयानों पर शाह ने कहा कि लापता, भगोड़े और भाग गए जैसे शब्द ठीक नहीं हैं। </p>
<p>अमित शाह ने कहा कि नीट आंदोलन से जुड़े छात्रों के प्रदर्शन समेत सभी मुद्दों पर सरकार चर्चा के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भी पहले ही सरकार का रुख साफ कर चुके हैं. अमित शाह ने विपक्ष से कहा कि वह दोपहर 2 बजे तक लोकसभा स्पीकर को पत्र दे. इसके बाद 3 बजे से चर्चा शुरू की जा सकती है. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो क्वेश्चन ऑवर भी स्थगित किया जा सकता है. गृह मंत्री ने कहा कि वह खुद सदन में बैठेंगे. विपक्ष के हर सवाल को सुनेंगे और हर सवाल का जवाब देंगे. उनका कहना है कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है. शाह ने विपक्ष से सवाल किया कि आखिर वह चर्चा से क्यों भाग रहा है. उन्होंने कहा कि अब विपक्ष को तय करना है कि उसे चर्चा करनी है या सिर्फ हंगामा करना है. उन्होंने कहा कि संसद में गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए तय नियम और प्रक्रिया है. सिर्फ बयान देकर ऐसे मामलों को खत्म नहीं किया जा सकता. अमित शाह ने कहा कि सरकार चाहती है कि संसद चले और देश की जनता के सामने हर मुद्दे पर स्थिति साफ हो. उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह पत्र दे और चर्चा शुरू करे। </p>
<p>केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, मैं विपक्ष से कहना चाहता हूं. दोपहर 2 बजे तक लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंप दें. हम दोपहर 3 बजे चर्चा शुरू करेंगे और मैं कल दोपहर 3:00 बजे तक सभी सवालों के जवाब दे दूंगा. इसके लिए स्थापित नियम और प्रक्रियाएं हैं। </p>
<p>वहीं विपक्ष के नेता राशिद अल्वी ने कहा है कि हम चाहते हैं कि गृह मंत्री सदन में आकर जवाब दें. हम चर्चा की बात नहीं कर रहे हैं। </p>
<p><strong>राहुल गांधी से झारखंड मामले में जवाब की मांग<br>
NDA सांसद जब मीटिंग कर निकले तो वे मार्च करते</strong> हुए मकर द्वार की तरफ बढ़े। उनके हाथों में पोस्टर थे। उन पर लिखा था झारखंड में छात्रों पर हुई क्रूरता पर राहुल गांधी जवाब दो, राहुल गांधी भागो मत चर्चा करो। वे नारे लगाते हुए मकर द्वार के सामने पहुंचे और यहां विरोध-प्रदर्शन किया और नारेबाजी करने शुरू की। इसी बीच विपक्ष के सांसद भी वहां एकत्र हो गए जो पिछले कई दिनों से घदा चोरी मसले पर और गृह मंत्री अमित शाह के सदन में आकर जवाब देने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।</p>
<p><strong>प्रियंका ने कहा- राहुल दे रहे हैं जवाब</strong><br>
जब सत्ता पक्ष के सांसद राहुल गांधी जवाब दो के नारे लगा रहे थे तभी एक सांसद के पास से कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी गुजरीं और रुककर उनसे कहा कि राहुल गांधी तो सभी सवालों का जवाब दे रहे हैं। उसके बाद प्रियंका विपक्ष के दूसरे सांसदों के साथ जाकर खड़ी हो गईं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी सहित विपक्ष के सांसदों ने भी नारेबाजी शुरू की। प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, जया बच्चन सहित कई सीनियर नेता इसमें मौजूद थे। विपक्ष अमित शाह माफी मांगो के नारे लगा रहा था तो सत्ता पक्ष नारे लगा रहा था- राहुल गांधी माफी मांगो।</p>
<p><strong>F&O ट्रेडिंग में रिटेल निवेशकों का औसत नुकसान बढ़ा</strong></p>
<p>    इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में रिटेल निवेशकों का कुल नुकसान वित्त वर्ष 2025 में 1.12 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 में घटकर 91685 करोड़ रुपये पर आ गया।<br>
    हालांकि प्रति निवेशक नुकसान का आंकड़ा वित्त वर्ष 2026 में बढ़ गया।<br>
    वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने  एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को यह जानकारी दी।</p>
<p>    चौधरी ने बताया कि वित्त वर्ष 2022 में निवेशकों को कुल 40824 करोड़, वित्त वर्ष 2023 में 65747 करोड़ और वित्त वर्ष 2024 में 74812 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।<br>
    वित्त वर्ष 2025 में यह उछलकर 1,11,788 करोड़ रुपये हो गया।</p>
<p>    इस दौरान F&O सेगमेंट में ट्रेडर्स की संख्या वित्त वर्ष 2022 में 42.74 लाख से बढ़ते-बढ़ते वित्त वर्ष 2025 में 98.1 लाख पर पहुंच गई।</p>
<p>    चौधरी ने बताया कि सेबी के रेगुलेटरी कदम उठाने के बाद इस सेगमेंट में रिटेल निवेशकों की संख्या घटी।</p>
<p><strong>'राहुल को छात्र नहीं, राजनीति की चिंता'</strong><br>
BJP ने कहा है कि कांग्रेस और राहुल गांधी का आचरण लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। BJP सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि सरकार ने NEET, कठोर कानून, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और अन्य मांगों पर कदम उठाए हैं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में जवाब देने को तैयार हैं। इन सबके बावजूद विपक्ष चर्चा से बच रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को झारखंड के छात्रों की गूंज सुनाई नहीं दे रही है। कांग्रेस को छात्र हित नहीं बल्कि तुच्छ राजनीति की चिंता है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>8वें वेतन आयोग का नया नोटिफिकेशन जारी! केंद्रीय कर्मचारियों के लिए जानना जरूरी, क्या बदलेगा?</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों को बेसब्री से आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है। वेतन आयोग अगले साल की पहली छमाही तक अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप देगा। इससे पहले, कर्मचारियों के अलग-अलग संगठन के साथ बैठकें की जा रही हैं। इसके बाद वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। इससे पहले, … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 13:45:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>8वें, वेतन, आयोग, का, नया, नोटिफिकेशन, जारी, केंद्रीय, कर्मचारियों, के, लिए, जानना, जरूरी, क्या, बदलेगा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
केंद्र सरकार के कर्मचारियों को बेसब्री से आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है। वेतन आयोग अगले साल की पहली छमाही तक अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप देगा। इससे पहले, कर्मचारियों के अलग-अलग संगठन के साथ बैठकें की जा रही हैं। इसके बाद वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। इससे पहले, केंद्रीय कर्मचारी आठवें वेतन आयोग से जुड़े हर अपडेट को जानना चाहते हैं। आइए जान लेते हैं कि अब एक नया अपडेट क्या आएगा।</p>
<p><strong>वेबसाइट पर नोटिफिकेशन</strong><br>
आठवें केंद्रीय वेतन आयोग में कंसल्टेंट के तौर पर नियुक्ति के लिए पात्रता नियमों में आंशिक बदलाव किया गया है। आयोग ने अपनी वेबसाइट पर एक नोटिफिकेशन जारी कर इसकी जानकारी दी। इस नोटिफिकेशन में बताया गया है कि नए नियमों के तहत अलग-अलग श्रेणियों के कंसल्टेंट के लिए अनुभव और अधिकतम आयु सीमा निर्धारित की गई है।</p>
<p>संशोधित दिशा-निर्देशों के मुताबिक कंसल्टेंट पदों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। ये तीन पद सीनियर कंसल्टेंट, कंसल्टेंट और यंग प्रोफेशनल कंसल्टेंट हैं। सीनियर कंसल्टेंट के लिए कम से कम 10 वर्ष का अनुभव जरूरी है। वहीं, अधिकतम उम्र सीमा 45 वर्ष रखी गई है। दूसरी श्रेणी में कंसल्टेंट पद के लिए कम से कम छह वर्ष का अनुभव चाहिए। इसके लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष है।</p>
<p>वहीं, तीसरी श्रेणी के यंग प्रोफेशनल कंसल्टेंट की बात करें तो दो वर्ष का अनुभव होना चाहिए। इस श्रेणी में आवेदन करने वाले उम्मीदवार की अधिकतम उम्र 32 वर्ष होनी चाहिए। आयोग इस श्रेणी में अधिकतम 16 कंसल्टेंट नियुक्त कर सकता है।</p>
<p><strong>कौन कर सकता है आवेदन?</strong></p>
<p>-HR, इंडस्ट्रियल रिलेशंस (IR) या संबंधित विषय में मास्टर डिग्री अथवा MBA वाले उम्मीदवार हो सकते हैं ।</p>
<p>-संबंधित अनुभव के साथ बार काउंसिल या बार एसोसिएशन में नामांकित LLB उम्मीदवार भी इसके लिए पात्र हैं। कानून शोध, ट्रिब्यूनल और अदालतों में अधिवक्ता के तौर पर सेवा संबंधी मामलों को संभालने का अनुभव रखने वालों को भी वेतन आयोग योग्य मानता है।</p>
<p>– B.Tech/M.Tech और IT, डेटा एनालिसिस, डेटा विजुअलाइजेशन जैसे क्षेत्रों में अनुभव रखने वाले उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं।</p>
<p>– एक्सेल, स्प्रेडशीट और प्रेजेंटेशन तैयार करने का ज्ञान होना जरूरी है। वे उम्मीदवार, जिन्हें वेतन, भत्ते, क्षतिपूर्ति पैकेज या स्थापना संबंधी मामलों का अनुभव है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।</p>
<p>वेतन आयोग के नोटिफिकेशन में बताया गया है कि आवेदन केवल ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि डाक, ईमेल या किसी अन्य माध्यम से भेजी गई हार्ड कॉपी स्वीकार नहीं की जाएगी। वहीं, अगर आपने पहले आवेदन कर दिया है तो दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>भारत&#45;बांग्लादेश बॉर्डर पर तनाव! 2 भारतीय किसानों के अपहरण का आरोप, सीमा पार ले जाने का दावा</title>
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<description><![CDATA[ कलकत्ता भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अचानक तनाव बढ़ने की खबरें हैं। इसकी वजह है बॉर्डर पर बांग्लादेशियों की एक हरकत। मंगलवार को बांग्लादेश के कुछ लोगों ने 2 भारतीय किसानों का अपहरण कर लिया। रिपोर्ट के मुताबिक घटना पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के पास हुई। बांग्लादेशी ग्रामीणों का एक समूह सीमावर्ती इलाके में खेत … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>भारत-बांग्लादेश, बॉर्डर, पर, तनाव, भारतीय, किसानों, के, अपहरण, का, आरोप, सीमा, पार, ले, जाने, का, दावा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कलकत्ता</strong></p>
<p>भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अचानक तनाव बढ़ने की खबरें हैं। इसकी वजह है बॉर्डर पर बांग्लादेशियों की एक हरकत। मंगलवार को बांग्लादेश के कुछ लोगों ने 2 भारतीय किसानों का अपहरण कर लिया। रिपोर्ट के मुताबिक घटना पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के पास हुई। बांग्लादेशी ग्रामीणों का एक समूह सीमावर्ती इलाके में खेत में काम कर रहे दो भारतीय किसानों को खींचकर सीमा पार ले कर चला गया।</p>
<p>बताया जा रहा है कि बांग्लादेशी ग्रामीणों ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) की हिरासत से एक 70 वर्षीय बांग्लादेशी की रिहाई के लिए दबाव बनाने के इरादे से यह कदम उठाया था। बांग्लादेश की स्थानीय न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक बाद में BSF और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के बीच हुई फ्लैग मीटिंग के बाद तीनों नागरिकों की अदला-बदली कर उन्हें रिहा करा लिया गया।</p>
<p><strong>कैसे बढ़ी हलचल?</strong><br>
रिपोर्ट्स के मुताबिक, विवाद की शुरुआत मंगलवार सुबह हुई। यहां मेहेरपुर में इच्छाखाली बॉर्डर के पास अब्दुल मन्नान नाम का बांग्लादेशी किसान अपनी फसल पर कीटनाशक छिड़कने गया था। बांग्लादेशी मीडिया का दावा है कि इस दौरान BSF जवानों ने सीमा क्षेत्रों के नियमों के उल्लंघन के आरोप में मन्नान को हिरासत में ले लिया।</p>
<p>अब्दुल मन्नान के पकड़े जाने की खबर मिलते ही उसके रिश्तेदार और स्थानीय बांग्लादेशी ग्रामीण भड़क उठे। मन्नान के पोते इब्राहिम खलीलउल्लाह ने बताया कि बीएसएफ से मन्नान को छोड़ने के बार-बार अनुरोध के बावजूद जब उसे नहीं छोड़ा गया, तो ग्रामीणों ने भारतीय क्षेत्र में घुस गए। गुस्साए बांग्लादेशी ग्रामीण सीमा पार कर भारतीय इलाके में दाखिल हुए और वहां खेतों में काम कर रहे दो भारतीय किसानों को उठाकर जबरन बांग्लादेश ले गए और उन्हें BGB को सौंप दिया। भारतीय किसानों की पहचान सचिन कर्मकार और नारायण देब के रूप में हुई है।</p>
<p><strong>BSF-BGB की फ्लैग मीटिंग के बाद रिहाई</strong><br>
घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अचानक तनाव बढ़ गया था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मंगलवार दोपहर इच्छाखाली सीमा पर जीरो लाइन पर BSF और BGB के अधिकारियों के बीच तत्काल एक फ्लैग मीटिंग बुलाई गई। BGB के बटालियन कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल नजमुल हसन ने मीडिया को पुष्टि की कि बातचीत के बाद बांग्लादेशी किसान अब्दुल मन्नान को बीजीबी को सौंप दिया गया। वहीं बांग्लादेशी ग्रामीणों द्वारा पकड़े गए दोनों भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बीएसएफ के हवाले कर दिया गया।</p>
<p><strong>एक हफ्ते में दूसरी घटना</strong><br>
बांग्लादेशी नागरिकों द्वारा सीमा पार कर भारतीयों के अपहरण की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले बीते शनिवार को पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में भी ऐसी ही घटना हुई थी। जलपाईगुड़ी के रहने वाले 35 वर्षीय चाय किसान दीपंकर गोप को करीब 20 बांग्लादेशियों ने अगवा कर लिया था और खींचकर बांग्लादेश के पंचगढ़ जिले में ले गए थे। जानकारी के मुताबिक ग्रामीणों ने 6 अगस्त को भारत में फेंसिंग काटकर अवैध रूप से घुसने की कोशिश कर रहे एक बांग्लादेशी नागरिक को बीएसएफ द्वारा पकड़े जाने के विरोध में भारतीय किसान को पकड़ा था।</p>]]> </content:encoded>
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<title>CJI के ‘कॉकरोच’ बयान का हुआ गलत इस्तेमाल! सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और CBI से मांगा जवाब</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और सीबीआई से जवाब तलब किया है। यह मामला चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की तीन महीने पुरानी &#039;कॉकरोच&#039; वाली टिप्पणी से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्चुअल कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो को चालाकी से एडिट करके इस टिप्पणी … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 12:30:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>CJI, के, ‘कॉकरोच’, बयान, का, हुआ, गलत, इस्तेमाल, सुप्रीम, कोर्ट, ने, केंद्र, और, CBI, से, मांगा, जवाब</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और सीबीआई से जवाब तलब किया है। यह मामला चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की तीन महीने पुरानी 'कॉकरोच' वाली टिप्पणी से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्चुअल कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो को चालाकी से एडिट करके इस टिप्पणी का व्यावसायिक फायदा उठाया गया और इसे ऐसा मतलब दे दिया गया जो कभी कहा ही नहीं गया था।</p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला?</strong><br>
15 मई को CJI के नेतृत्व वाली बेंच 'संजय दुबे बनाम रजिस्ट्रार जनरल, दिल्ली हाईकोर्ट' याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान CJI ने अदालती प्रक्रिया के दुरुपयोग और वकालत के गिरते मानकों पर चिंता जताते हुए, खास तौर पर फर्जी वकीलों के संदर्भ में 'कॉकरोच' शब्द का इस्तेमाल किया था।</p>
<p><strong>विवाद और CJP का जन्म</strong><br>
CJI की इस टिप्पणी के बाद खासा बवाल खड़ा हुआ और इसी बीच 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) वजूद में आई। इस पार्टी ने NEET-UG <strong>पेपर लीक के खिलाफ जेन-जी के विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व किया।</strong></p>
<p><strong>मीम्स बनाकर मुनाफा कमाने का आरोप</strong><br>
याचिकाकर्ता और पेशे से वकील राजा चौधरी ने CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने अपनी दलीलें रखीं। करीब आधे घंटे चली बहस के दौरान उन्होंने कोर्ट को बताया कि 15 मई की घटना के बाद से अदालती कार्यवाही के चुनिंदा और एडिटेड क्लिप्स शेयर करने के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p>अदालती टिप्पणियों के अर्थ को तोड़-मरोड़ कर मीम्स में बदला जा रहा है और सोशल मीडिया पर मुनाफे के लिए इसे सर्कुलेट किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने शिकायत की कि जजों की छवि खराब करने और न्यायपालिका से जनता का भरोसा कम करने वाली इन साजिशों को रोकने के लिए फिलहाल कोई तंत्र मौजूद नहीं है।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट से क्या की गई है मांग?</strong><br>
याचिकाकर्ता ने इस बात की गहरी जांच की मांग की है कि कैसे एक अलग संदर्भ में इस्तेमाल किए गए शब्द को चुनकर, एडिट करके संस्थागत गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया गया। PIL में मुख्य रूप से कई मांगें रखी गई हैं, जैसे-</p>
<p>अधिकारियों को उन व्यक्तियों और संस्थाओं पर कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाए, जो अदालती टिप्पणियों का अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल और कमाई कर रहे हैं। याचिका में CJP की गतिविधियों सहित ऐसे शब्दों के ट्रेडमार्क के तौर पर इस्तेमाल पर भी एक्शन की मांग की गई है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>ATM से निकलेंगे प्लास्टिक वाले नोट! RBI का बड़ा प्लान, ₹10 और ₹20 के Polymer Notes पर होगा ट्रायल</title>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 11:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>अगर सबकुछ ठीक रहा तो नए साल में आप प्लास्टिक या पॉलिमर नोट का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके लिए केंद्रीय रिजर्व बैंक एक्शन मोड में आ चुका है। हालांकि, इसे लागू करने लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>बदलना होगा कैश रखने वाला कैसेट</strong><br>
एक बड़े सरकारी बैंक के सीनियर अधिकारी ने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पॉलिमर नोट लाने के प्लान में काफी खर्च आएगा, क्योंकि ATM में कैश रखने वाली कैसेट को बदलना होगा। बैंकर ने कहा कि कैसेट बदले बिना मौजूदा ऑटोमेटेड टेलर मशीनों (ATM) में पॉलिमर नोट नहीं डाले जा सकते। इसका मतलब बैंकों के लिए अतिरिक्त खर्च होगा। हालांकि, बैंकों ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि <strong>इस पर कितना खर्च आएगा।</strong></p>
<p><strong>कितना खर्च करना होगा?</strong><br>
नाम न बताने की शर्त पर बात करने वाले बैंकर ने कहा कि ATM बदलने का खर्च लगभग ₹2 लाख है। वहीं, कैसेट बदलने के खर्च की बात करें तो इससे कम होगा। बैंकर ने कहा, "जहां तक ​​हमें पता है, भारत में ऐसी कोई कंपनी नहीं है जो ये कैसेट बनाती हो, इसलिए इन्हें कहां से मंगाया जाए, इस पर चर्चा करनी होगी।" बैंकर के मुताबिक लंबे समय में पॉलिमर नोटों को शुरुआती दौर में अपनाने में बहुत खर्च आता है। जब पहले नोटों का साइज बदला गया था, तो बैंकों को ATM में कैसेट बदलने में लगभग एक साल लग गया था ताकि वे नए नोट निकाल सकें।" बता दें कि कैसेट वे बॉक्स होते हैं जिनमें ATM में अलग-अलग मूल्य के नोट रखे जाते हैं। हर ATM में हर मूल्य के नोट के लिए अलग-अलग कैसेट होती हैं।</p>
<p><strong>100 और 500 के नोट भी आएंगे</strong><br>
आरबीआई गवर्नर ने साफ संकेत दिया है कि 10 और 20 के पॉलीमर नोटों की सफलता के बाद 100 और 500 के नोट भी लॉन्च किए जाएंगे. इससे पहले आरबीआई ने साल 2009 में भी पॉलीमर के नोट लॉन्च करने की मंशा जताई थी, लेकिन तक इसमें सफलता नहीं मिली थी. पॉलीमर के नोट नमी से बचे रहते हैं और जल्दी गंदे भी नहीं होते. इनके कटने-फटने का भी कम चांस रहता है और लंबे समय तक सर्कुलेशन में बने रह सकते हैं। </p>
<p><strong>इन नोटों की 25 फीसदी हिस्सेदारी</strong><br>
आरबीआई ने 10 और 20 के नोटों को ही पॉलीमर में पहले लॉन्च करने का फैसला इसलिए किया है, क्योंकि इन नोटों की सर्कुलेशन में हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी है. हालांकि, वैल्यू के लिहाज से महज 1.4 फीसदी हिस्सा है. यही वजह है कि आरबीआई ने इसे अपने पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाया. इस पायलट प्रोजेक्ट के जरिये आरबीआई सर्कुलेशन में पॉलीमर के नोटों की पहुंच को सुनिश्चित करेगी. गवर्नर ने संकेत दिया है कि 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोट तैयार होने के बाद इसे बैंक की शाखाओं और एटीएम के जरिये सर्कुलेशन में पहुंचाया जाएगा और मौजूदा कागज की नोटों के साथ ही चलन में रखा जाएगा। </p>
<p><strong>आरबीआई गवर्नर ने क्या कहा था?</strong><br>
सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो अगले वित्त वर्ष के आरंभ तक प्लास्टिक के नोट लोगों के हाथों में होंगे। बीते दिनों आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि शुरुआत में इन नोटों को पायलट परीक्षण के लिए लाया जाएगा। यदि पायलट में सबकुछ ठीक रहा तो इसका आगे विस्तार किया जाएगा। संजय मल्होत्रा ने कहा, "यदि सबकुछ योजना के मुताबिक हुआ तो हमने अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में इसे लाने का लक्ष्य रखा है।" उन्होंने बताया कि अभी पॉलिमर के कागज के लिए निविदा आमंत्रित की है। उसके आने के बाद उस पर परीक्षण किए जाएंगे, सुरक्षा संबंधी स्वीकृतियां मिलेंगी, कई चरण हैं, कई सिक्योरिटी फीचर हैं। उन्होंने कहा कि सही समय पर लोगों को इसकी जानकारी दी जाएगी।</p>
<p>पॉलिमर के नोट लाने के दो उद्देश्य हैं। पहला, इससे नोट का जीवनकाल बढ़ जाता है। यह विशेष रूप से कम मूल्य के नोटों पर अधिक लागू होता है जिनका हस्तांतरण एक हाथ से दूसरे हाथ में अधिक होता है जिससे वे जल्दी खराब हो जाते हैं। कई देशों में 30 साल से इन नोटों का इस्तेमाल हो रहा है। वहां यह पाया गया है कि ये नोट कागज के नोटों की तुलना में तीन-चार गुना ज्यादा समय तक चलते हैं। <strong>इसके अलावा, इससे आरबीआई की क्षमता बढ़ जाती है। अर्थव्यवस्था के बढ़ते आकार के साथ क्षमता बढ़ाना जरूरी है। </strong></p>
<p><strong>प्लास्टिक नोटों का होगा ट्रायल</strong><br>
दरअसल हाल ही में सरकार ने 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोटों को बाजार में उतारने से पहले ट्रायल करने के लिए मंजूरी दे दी है. इसके तहत दोनों नोटों के 100-100 करोड़ पॉलिमर नोट तैयार किए जाएंगे. राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे लेकर लिखित जवाब दिया, जिसमें उन्होंने पूरी जानकारी दी है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>QS World University Rankings 2027 में भारत के 52 संस्थान शामिल, देखें पूरी लिस्ट</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली केंद्र सरकार की तरफ से संसद में बताया गया है कि प्रतिष्ठित QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स (QS World University Rankings) में भारत की यूनिवर्सिटीज ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है. रैंकिंग में शामिल होने वाले भारतीय संस्थानों की संख्या पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ गई है. जहां 2015 तक ये संख्या … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 11:30:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>World, University, Rankings, 2027, में, भारत, के, संस्थान, शामिल, देखें, पूरी, लिस्ट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>केंद्र सरकार की तरफ से संसद में बताया गया है कि प्रतिष्ठित QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स (QS World University Rankings) में भारत की यूनिवर्सिटीज ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है. रैंकिंग में शामिल होने वाले भारतीय संस्थानों की संख्या पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ गई है. जहां 2015 तक ये संख्या 11 थी, वहीं अब ये बढ़कर अब 52 तक पहुंच चुकी है. सरकार की तरफ से बताया गया कि भारतीय विश्वविद्यालयों और संस्थानों ने वैश्विक स्तर पर अपनी साख मजबूत की है. ऐसे में आज हम आपके लिए उन सभी 52 संस्थानों और यूनिवर्सिटीज की लिस्ट लेकर आए हैं, जिन्हें QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स में जगह मिली है। </p>
<p><strong>IITs का दबदबा </strong><br>
QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स में जगह बनाने वाले संस्थानों में सबसे ज्यादा IITs के नाम शामिल हैं. उनके अलावा केंद्रीय विश्वविद्यालयों के साथ-साथ कई प्राइवेट और डीम्ड यूनिवर्सिटीज ने भी अपनी जगह बनाई है. नीचे आप रैंकिंग के हिसाब से पूरी लिस्ट देख सकते हैं। </p>
<p>    <strong>IIT दिल्ली: 118 रैंक<br>
    IIT बॉम्बे: 134 रैंक<br>
    IIT मद्रास: 170 रैंक<br>
    IIT खड़गपुर: 205 रैंक <br>
    इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बेंगलोर: 221 रैंक <br>
    IIT कानपुर: 221 रैंक<br>
    दिल्ली यूनिवर्सिटी: 322 रैंक <br>
    IIT रुड़की: 335 रैंक <br>
    IIT गुवाहाटी: 349 रैंक <br>
    शूलनी यूनिवर्सिटी ऑफ बायोटेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट साइंस, सोलन: 452 रैंक <br>
    अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई: 470 रैंक <br>
    IIT BHU, वाराणसी: 510 रैंक <br>
    चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, पंजाब: 526 रैंक <br>
    IIT इंदौर: 546 रैंक <br>
    जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU, दिल्ली): 555 रैंक <br>
    बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, पिलानी: 575 रैंक <br>
    IIT हैदराबाद: 588 रैंक <br>
    वीआईटी वेल्लोर (VIT Vellore): 597 रैंक <br>
    सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी: 655 रैंक <br>
    जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली: – 686 रैंक <br>
    IIT धनबाद: 701-710 रैंक<br>
    थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, पटियाला: 701-710 रैंक<br>
    Bharathiar यूनिवर्सिटी, कोयंबटूर: 711-720 रैंक<br>
    जाधवपुर यूनिवर्सिटी, कोलकाता: 721-730 रैंक<br>
    NIT तिरुचिरापल्ली (NIT Trichy): 721-730 रैंक<br>
    ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी, सोनीपत: 751-760 रैंक<br>
    लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, चहेरू (LPU): 791-800 रैंक <br>
    सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी: 791-800 रैंक <br>
    सवीथा इंस्टीट्यूट, तमिलनाडु (SIMATS): 801-850<br>
    IIT गांधीनगर: 851-900 रैंक<br>
    मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन (MAHE): 851-900 रैंक<br>
    यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद: 851-900 रैंक<br>
    एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा: 901-950 रैंक<br>
    यूनिवर्सिटी ऑफ कोलकाता: 901-950 रैंक<br>
    यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई: 901-950 रैंक<br>
    UPES देहरादून: 901-950 रैंक<br>
    बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी: 951-1000 रैंक <br>
    अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU): 1001-1200 रैंक<br>
    चितकारा यूनिवर्सिटी, राजपुरा: 1001-1200 रैंक<br>
    गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU): 1001-1200 रैंक<br>
    IIT टेक्नोलॉजी भुवनेश्वर: 1001-1200 रैंक<br>
    कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (KIIT), भुवनेश्वर: 1001-1200 रैंक<br>
    पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़: 1001-1200 रैंक<br>
    शिव नादर यूनिवर्सिटी, दादरी: 1001-1200 रैंक<br>
    एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (SRM): 1001-1200 रैंक<br>
    अमृता विश्व विद्यापीठम: 1201-1400<br>
    गलगोटियास यूनिवर्सिटी (Galgotias University): 1201-1400 रैंक<br>
    IIIT अलाहाबाद, प्रयागराज: 1201-1400 रैंक<br>
    सत्यबामा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी: 1201-1400 रैंक<br>
    शिक्षा 'ओ' अनुसंधान (SOA), भुवनेश्वर:  1201-1400 रैंक<br>
    जामिया हमदर्द, नई दिल्ली: 1401+ रैंक<br>
    पोंडिचेरी यूनिवर्सिटी: 1401+ रैंक</strong></p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>TRAI का बड़ा फैसला: अब बिजली, LPG और कूरियर की कॉल 1601 सीरीज से आएगी, ऐसे पहचानें असली कॉल</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (TRAI) ने सोमवार को यूटिलिटी, कूरियर और लॉजिस्टिक्स कंपनियों की सर्विस और ट्रांज़ैक्शन से जुड़ी कॉल्स के लिए 1601- सीरीज़ के फ़ोन नंबर शुरू किए हैं।  यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि ग्राहक असली कॉल्स की पहचान कर सकें और उन्हें उन धोखेबाज़ों से बचाया जा सके … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 11:30:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>TRAI, का, बड़ा, फैसला:, अब, बिजली, LPG, और, कूरियर, की, कॉल, 1601, सीरीज, से, आएगी, ऐसे, पहचानें, असली, कॉल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (TRAI) ने सोमवार को यूटिलिटी, कूरियर और लॉजिस्टिक्स कंपनियों की सर्विस और ट्रांज़ैक्शन से जुड़ी कॉल्स के लिए 1601- सीरीज़ के फ़ोन नंबर शुरू किए हैं। </p>
<p>यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि ग्राहक असली कॉल्स की पहचान कर सकें और उन्हें उन धोखेबाज़ों से बचाया जा सके जो आम 10-अंकों वाले मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके खुद को असली सर्विस और ट्रांज़ैक्शन कॉल करने वाली कंपनी का प्रतिनिधि बताते हैं. इससे इस तरह की वॉइस-बेस्ड बातचीत पर भरोसा बढ़ेगा। </p>
<p>पहले चरण में, 1601 सीरीज़ बिजली वितरण कंपनियों, पानी की सप्लाई करने वाली कंपनियों, सिटी गैस कंपनियों, LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स, कूरियर कंपनियों, पार्सल डिलीवरी सेवाओं और सामान की डिलीवरी करने वाली लॉजिस्टिक्स फर्मों के लिए उपलब्ध होगी। </p>
<p>BFSI सेक्टर और सरकार की संस्थाओं के बीच होने वाले कम्युनिकेशन की अहम और संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए, यह निर्देश BFSI और सरकारी सेक्टर के अलावा दूसरे सेक्टरों के लिए जारी किया गया है, ताकि सर्विस और दूसरे सेक्टरों से आने वाली फाइनेंशियल बातचीत को आपस में मिलने से रोका जा सके। </p>
<p>TRAI ने घोषणा की है कि 1601 नंबर सीधे योग्य कंपनियों को दिए जाएंगे, न कि बिचौलियों या एग्रीगेटर्स को. टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर नंबर देने से पहले कंपनियों की जांच करेंगे. इसके अलावा, TRAI ने पहले चरण में शामिल योग्य कंपनियों की ऑनबोर्डिंग और माइग्रेशन प्रक्रिया पूरी करने के लिए 90 दिनों की समय-सीमा तय की है। </p>
<p>1601 नंबर का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों को यह अंडरटेकिंग देनी होगी कि इन नंबरों का इस्तेमाल सिर्फ़ सर्विस और ट्रांज़ैक्शन के लिए ही किया जाएगा. उन्होंने कहा कि किसी भी कंपनी या संस्था द्वारा इन नंबरों का इस्तेमाल प्रमोशनल वॉइस कॉल के लिए नहीं किया जा सकता है। </p>
<p>बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विस और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर की कंपनियों और सरकारी संस्थाओं द्वारा सर्विस और ट्रांज़ैक्शन से जुड़ी कॉल्स के लिए 1600 सीरीज़ को अपनाने के बाद 1601 सीरीज़ आई है। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>‘इस्लामिक NATO’ जैसा था बगदाद पैक्ट, जंग छिड़ी तो पाकिस्तान को नहीं मिली मदद; ऐसे टूटा गठबंधन</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली 6 सितंबर 1965. पाकिस्तान को लगा अरब के उसके देश उसके साथ उतरेंगे. भारत के खिलाफ जंग में मदद देंगे. भारतीय सेना ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पश्चिमी पाकिस्तान में मोर्चा खोल दिया था. लाहौर के आसपास गोलियां चल रही थीं, टैंक आगे बढ़ रहे थे और पाकिस्तान के सामने अब कश्मीर तक … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 10:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>‘इस्लामिक, NATO’, जैसा, था, बगदाद, पैक्ट, जंग, छिड़ी, तो, पाकिस्तान, को, नहीं, मिली, मदद, ऐसे, टूटा, गठबंधन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>6 सितंबर 1965. पाकिस्तान को लगा अरब के उसके देश उसके साथ उतरेंगे. भारत के खिलाफ जंग में मदद देंगे. भारतीय सेना ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पश्चिमी पाकिस्तान में मोर्चा खोल दिया था. लाहौर के आसपास गोलियां चल रही थीं, टैंक आगे बढ़ रहे थे और पाकिस्तान के सामने अब कश्मीर तक सीमित संघर्ष नहीं, एक बड़ा युद्ध खड़ा था. इस वक्त इस्लामाबाद को अपने पुराने दोस्तों की याद आई। </p>
<p><strong>लेकिन पाकिस्तान का भ्रम बहुत बुरी तरह से टूटा। </strong></p>
<p><strong>आइए थोड़ा पीछे चलते हैं. पाकिस्तान के भ्रम टूटने की कहानी का बैकग्राउंड समझते हैं। </strong></p>
<p>1950 का दशक था. दुनिया दो खेमों में बंट चुकी थी. एक तरफ अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी थे, तो दूसरी तरफ सोवियत संघ. शीत युद्ध अपने चरम पर था. अमेरिका को डर था कि सोवियत प्रभाव मध्य-पूर्व तक पहुंच गया तो तेल से लेकर यूरोप की सुरक्षा तक सब कुछ खतरे में पड़ सकता है। </p>
<p>इसी डर से एक ऐसा सुरक्षा घेरा बनाने की कोशिश हुई, जो मध्य-पूर्व को सोवियत संघ से दूर रख सके. 1955 में इराक, तुर्की, ईरान, पाकिस्तान और ब्रिटेन ने मिलकर बगदाद पैक्ट बनाया। </p>
<p><strong>इस संगठन का नाम बगदाद इसलिए पड़ा क्योंकि इसका मुख्यालय इराक की राजधानी में था। </strong></p>
<p>अमेरिका इसमें औपचारिक सदस्य नहीं बना, लेकिन उसने इस गठबंधन को मजबूत समर्थन दिया और बाद में इसके साथ रक्षा संबंधी समझौते किए. 1959 में इराक के हटने के बाद इसका नाम बदलकर CENTO यानी Central Treaty Organization कर दिया गया। </p>
<p><strong>पाकिस्तान का मकसद दूसरा था</strong><br>
<strong>जाहिर है पाकिस्तान को तब सोवियत रूस से कोई खतरा नहीं था. वो खुद तो अमेरिका की गोद में बैठा ही था। </strong></p>
<p><strong>हिन्दुस्तान के साथ हद तक बराबरी करने की आग में जल रहे पाकिस्तान का असल टारगेट नई दिल्ली था।</strong> </p>
<p>इन समझौते के बहाने पाकिस्तान ने पश्चिमी देशों के साथ सैन्य रिश्ते मजबूत किए. उसे अमेरिकी हथियार मिले, मिलिट्री ट्रेनिंग  और सुरक्षा सहयोग बढ़ा. पाकिस्तान ने SEATO में भी सदस्यता ली. इससे पाकिस्तान की सेना तेजी से आधुनिक हुई। </p>
<p><strong>पाकिस्तान सोचने लगा कि इस पूरी सैन्य ताकत का </strong><br>
फायदा उठाकर वो भारत पर हावी होने की कोशिश करेगा. अमेरिकी अपनी कूटनीति के तहत पाकिस्तान को गाहे-बगाहे उकसाता और उसे मदद भी देता. ये वो दौर था जब भारत सोवियत रूस के कैंप में था. पाकिस्तान को झूठा आत्मविश्वास होने लगा। </p>
<p>लेकिन इस पूरी व्यवस्था में एक बुनियादी गलतफहमी पैदा हो गई. पाकिस्तान ने अमेरिकी हथियारों को भारत के खिलाफ इस्तेमाल होने वाली ताकत समझ लिया, जबकि अमेरिका पाकिस्तान को मुख्य रूप से कम्युनिस्ट खतरे के खिलाफ तैयार कर रहा था. अमेरिका पाकिस्तान में अपना स्टेशन तैयार कर रहा था. वह सोवियत रूस और चीन पर नजर रखना था। </p>
<p><strong>यानी पाकिस्तान की दोस्ती तुर्की, ईरान, जैसे देशों से तो थी लेकिन दोस्ती की वजह अलग-अलग थी। </strong></p>
<p><strong>1965 का जंग आया, पाकिस्तान का दोस्ती का बुखार उतर गया</strong><br>
पाकिस्तान भारत के खिलाफ जंग में कूद चुका था. पाकिस्तान को उम्मीद थी कि सहयोगी मदद करेंगे. लेकिन CENTO के सदस्यों ने मुंह फेर लिया। <br>
अमेरिका ने दोनों तरफ हथियार बंद कर दिए. तुर्की और ईरान ने नैतिक समर्थन तो दिया, लेकिन सैन्य मदद नहीं. इस जंग में पाकिस्तान की बुरी तरह 'मरम्मत' हुई. पाकिस्तान का जिन अरब और अमेरिकी दोस्तों पर कूद रहा था उन्होंने उन्हें कुछ नहीं दिया. पाकिस्तान का दोस्ती का बुखार उतर चुका था। </p>
<p>दरअसल पाकिस्तान ने जिस चीज को अपनी सुरक्षा गारंटी समझ लिया था, अमेरिका ने उसे शीत युद्ध की रणनीति का हिस्सा माना था। </p>
<p><strong>1965 की जंग ने यह अंतर बिल्कुल साफ कर दिया। </strong></p>
<p><strong>6 साल बाद फिर जंग और टूट गया पाकिस्तान</strong><br>
1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध पाकिस्तान के लिए और भी बड़ा सबक बन गया. पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में विद्रोह के साथ भारत-पाकिस्तान के बीच के बीच जंग छिड़ गई. पाकिस्तान ने CENTO सहयोगियों से मदद की अपील की. अमेरिका ने सातवें बेड़े का जहाज यूएसएस एंटरप्राइज बंगाल की खाड़ी में भेजा, जो दबाव बनाने की कोशिश थी, लेकिन कोई सैन्य हस्तक्षेप नहीं हुआ। </p>
<p><strong>सोवियत रूस ने शक्ति संतुलन करते हुए अपना बेड़ा भारत की ओर से भेज दिया। </strong></p>
<p>ब्रिटेन भी सक्रिय मदद से दूर रहा. तुर्की और ईरान ने राजनयिक समर्थन और कुछ सीमित सहायता दी, लेकिन कोई सैनिक टुकड़ी या बड़े पैमाने पर हथियार नहीं भेजे. नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तान फिर पीटा और दुनिया के राजनीतिक मानचित्र पर एक नए देश का जन्म हुआ. 16 दिसंबर 1971 को ढाका में आत्मसमर्पण हो गया और बांग्लादेश बन गया। पाकिस्तान फिर से मुंह ताकता रह गया। </p>
<p><strong>पाक को मदद क्यों नहीं मिली? </strong><br>
तुर्की NATO का सदस्य था और यूरोप की तरफ देखता था. ईरान अपनी सुरक्षा सोचता था. ब्रिटेन और अमेरिका भारत के साथ भी संबंध रखना चाहते थे और सोवियत संघ को सीधे टकराव से बचना चाहते थे।  </p>
<p><strong>इसके अलावा इंदिरा गांधी के लीडरशिप वाले भारत के सामने कोई भी देश इतनी आसानी से टकराने की हिमाकत नहीं कर सकता था। </strong></p>
<p>आखिरकार 4 वर्ष बाद ईरान की क्रांति के बाद वहां के शाह की सत्ता चली गई और  मार्च 1979 में ईरान और पाकिस्तान ने CENTO छोड़ दिया. 16 मार्च 1979 को इसे औपचारिक रूप से भंग घोषित कर दिया गया. इस तरह बगदाद पैक्ट (बाद में CENTO) करीब 24 साल चला और 1979 में समाप्त हो गया। </p>
<p><strong>इस्लामिक NATO का शिगुफा</strong><br>
अब पाकिस्तान बगदाद पैक्ट जैसे ही एक समझौते का ढोल पीट रहा है. 7 अगस्त 2026 को मक्का में तीनों देशों ने Mecca Joint Defence Agreement पर हस्ताक्षर किए. समझौते के मुताबिक किसी एक देश पर सशस्त्र हमला तीनों पर हमला माना जाएगा. यह NATO के Article 5 की तर्ज पर है, इसलिए इसे 'इस्लामिक नाटो' कहा जा रहा है. इस समझौते में पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब और तुर्की शामिल हैं। </p>
<p>इसे 'इस्लामिक नाटो' नाम किसी एक सरकार ने आधिकारिक तौर पर नहीं दिया है. लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञ इसे इस्लामिक नाटो कह रहे हैं। इस समझौते रणनीतिक अहमियत इसलिए भी है क्योंकि सऊदी अरब के पास पैसा और ऊर्जा, तुर्की के पास बड़ी नाटो प्रशिक्षित सेना और रक्षा उद्योग, जबकि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार और बड़ा सैन्य बल है. इसलिए इसे पश्चिमी सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भरता कम करने और क्षेत्र में ईरान और इजरायल के प्रभाव का संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। </p>
<p><strong>लेकिन बगदाद पैक्ट की तरह मक्का एग्रीमेंट की ढाल लेकर पाकिस्तान भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा हैे। </strong></p>
<p><strong>7 अगस्त को मक्का में हुए समझौते में तय हुआ कि तीनों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला बाकी दोनों पर हमला माना जाएगा। </strong></p>
<p>पाकिस्तान के लिए इसका महत्व इसलिए ज्यादा है क्योंकि तुर्की NATO का सदस्य और मजबूत सैन्य शक्ति है, जबकि सऊदी अरब आर्थिक और कूटनीतिक ताकत रखता है. पाकिस्तान इस त्रिकोण को अपनी रणनीतिक हैसियत बढ़ाने और भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए पेश कर सकता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>दशहरी&#45;लंगड़ा आम के बाद अब दुबई पहुंचा 10 क्विंटल शहद, किसानों के चेहरे खिले</title>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 10:30:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>दशहरी-लंगड़ा, आम, के, बाद, अब, दुबई, पहुंचा, क्विंटल, शहद, किसानों, के, चेहरे, खिले</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>दशहरी और लंगड़ा आम के बाद अब दुबई के बाजारों में भारतीय शहद (Honey) का डंका बजने वाला है. पहली बार त्रिपुरा से एक मीट्रिक टन सरसों के शहद (Mustard Honey) की खेप दुबई भेजी गई. त्रिपुरा के कृषि और डेरी (मधुमक्खी) पालन करने वालों के लिए ये एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। </p>
<p>दरअसल, APEDA के सहयोग से डेरगांग फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FPO) ने 1 मीट्रिक टन शहद का निर्यात किया है. यह त्रिपुरा के स्थानीय किसानों और मधुमक्खी पालकों के लिए वैश्विक बाजार के दरवाजे खोलने वाला एक बड़ा कदम है. केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से शहद के एक्सपोर्ट को उत्तर पूर्वी भारत के कृषि क्षेत्र के लिए अद्भुत और ऐतिहासिक उपलब्धि बताई। </p>
<p><strong>त्रिपुरा से पहला निर्यात</strong><br>
यह त्रिपुरा के इस इलाके से सरसों के शहद का पहला अंतरराष्ट्रीय निर्यात है. इससे राज्य में शहद के कारोबार को एक नया आयाम मिलेगा. दुबई से जैसे बाजारों में त्रिपुरा के शहर पहुंचने से किसानों को स्थानीय बाजारों की तुलना में काफी बेहतर कीमत मिलेगी, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी होने वाली है। </p>
<p>इस पूरी प्रक्रिया में M/s Salt Range Foods Pvt. Ltd. ने डेरगांग FPO को तकनीकी सहायता, मधुमक्खी पालन सुधार और निर्यात के लायक गुणवत्ता तैयार करने में पूरी मदद की है. यह सफलता त्रिपुरा ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत के अन्य FPOs और किसानों को गुणवत्ता सुधारने और निर्यात की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करेगी। </p>
<p><strong>कृषि मंत्री ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना</strong><br>
इस ऐतिहासिक निर्यात खेप को त्रिपुरा के कृषि मंत्री रतन लाल नाथ ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस अवसर पर कई प्रमुख हस्तियां और अधिकारी उपस्थित थे. रतन लाल नाथ ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि डेरगांग FPO द्वारा सरसों के शहद का यह पहला निर्यात राज्य के किसानों और मधुमक्खी पालकों के लिए गर्व की बात है. यह साबित करता है कि त्रिपुरा के कृषि उत्पादों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का अपार संभावना है। </p>
<p>उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार जैविक खेती और मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. किसानों, FPOs, APEDA और निजी संस्थाओं के साझा प्रयासों से त्रिपुरा आने वाले समय में वैश्विक कृषि बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाएगा। </p>
<p>बता दें, सरसों के फूलों से मिलने वाला शहद (मस्टर्ड हनी) एंटीऑक्सीडेंट्स, पोलन ग्रेन्स और पोषक तत्वों से भरपूर होता है. यह प्राकृतिक रूप से सफेद रंग का होता है और जम जाने पर घी जैसा दिखता है। </p>
<p>गौरतलब है कि पिछले महीने उत्तर प्रदेश के अमरोहा से दशहरी और लंगड़ा आम की 12.5 टन की खेप 40 फीट के रेफ्रिजरेटेड कंटेनर में समुद्री मार्ग से दुबई भेजी गई थी. इस सफल निर्यात से भारतीय आम समेत दूसरे प्रोडक्ट्स के लिए खाड़ी देश एक बड़ा बाजार बनकर उभर रहा है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>8th Pay Commission: ₹20, ₹30 और ₹50 हजार पेंशन कितनी बढ़ेगी? Fitment Factor से समझें पूरा कैलकुलेशन</title>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 09:30:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। आयोग के पास अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय है। इस बीच करीब 33.76 लाख केंद्रीय पेंशनभोगियों के बीच यह सवाल सबसे अहम बना हुआ है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने पर उनकी पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी।फिलहाल, 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक पेंशन ₹9,000 प्रति माह है। लेकिन कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग के तहत इसमें कई गुना बढ़ोतरी की मांग रखी है।</p>
<p><strong>NC-JCM ने रखी है 3.83 फिटमेंट फैक्टर की डिमांड</strong><br>
पेंशन में होने वाली वास्तविक बढ़ोतरी पूरी तरह से फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगी। नेशनल काउंसिल-जेसीएम (NC-JCM) की स्टाफ साइड ने सरकार के समक्ष 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग रखी है। अगर सरकार इस मांग को मान लेती है, तो पेंशन की गणना का फॉर्मूला बेहद आसान हो जाएगा:</p>
<p><strong>अनुमानित नई बेसिक पेंशन = मौजूदा बेसिक पेंशन × 3.83</strong></p>
<p><strong>फिटमेंट फैक्टर 3.83 के आधार पर संभावित पेंशन</strong></p>
<p>अगर 3.83 के फिटमेंट फैक्टर की मांग को स्वीकार किया जाता है, तो अलग-अलग बेसिक पेंशन पाने वाले पेंशनभोगियों की नई बेसिक पेंशन का अनुमानित कैलकुलेशन इस प्रकार होगा:</p>
<p><strong>फिटमेंट फैक्टर 3.83 के आधार पर संभावित पेंशन</strong></p>
<p><strong>न्यूनतम पेंशन ₹45,000 करने की मांग</strong></p>
<p><strong>भारत पेंशनर्स समाज (BPS) जैसे प्रमुख संगठनों ने पेंशनभोगियों के लिए ये प्रमुख मांगें उठाई हैं:</strong></p>
<p><strong>न्यूनतम पेंशन:</strong> न्यूनतम बेसिक पेंशन को ₹9,000 से बढ़ाकर ₹45,000 किया जाए।</p>
<p><strong>महंगाई राहत (DR) का विलय</strong>: जैसे ही महंगाई राहत (DR) 25% के पार जाए, उसे बेसिक पेंशन में मिला दिया जाए।</p>
<p><strong>तिमाही संशोधन:</strong> महंगाई राहत की समीक्षा हर 3 महीने में की जाए।</p>
<p><strong>पेंशन में 5 साल में बदलाव की मांग</strong><br>
पेंशनर्स संगठन ने केवल एक बार पेंशन बढ़ाने की मांग नहीं की है. उसने पेंशन और वेतन की समीक्षा के लिए 5 साल का चक्र रखने की मांग भी की है। </p>
<p>यानी लंबे अंतराल के बाद होने वाली Pay Commission प्रक्रिया के बजाय हर पांच साल में पेंशन की समीक्षा हो. इससे महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत के हिसाब से पेंशन में बदलाव किया जा सकेगा। </p>
<p><strong>DA और DR में भी बदलाव की मांग</strong><br>
BPS ने Dearness Allowance और Dearness Relief को लेकर भी बदलाव का प्रस्ताव रखा है। </p>
<p>संगठन चाहता है कि DA/DR की समीक्षा हर तिमाही की जाए. इसके लिए तीन महीने के औसत को आधार बनाने की मांग की गई है। </p>
<p>साथ ही DR के 25% से ऊपर पहुंचने के बाद उसे बेसिक पेंशन के साथ मर्ज करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। </p>
<p><strong>पेंशनर्स के लिए मेडिकल सुविधा बढ़ाने की मांग</strong><br>
पेंशनर्स की जरूरतों में स्वास्थ्य खर्च सबसे अहम मुद्दों में से एक है. इसलिए BPS ने CGHS को मजबूत करने की मांग की है। </p>
<p>संगठन ने पेंशनर्स के लिए कैशलेस हेल्थकेयर सुविधा और ₹5,000 का Fixed Medical Allowance देने की मांग रखी है। </p>
<p>ग्रामीण और ऐसे इलाकों में रहने वाले पेंशनर्स के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा की भी मांग की गई है जहां CGHS की सुविधा उपलब्ध नहीं है। </p>
<p><strong>कम्यूटेड पेंशन को लेकर भी बड़ी मांग</strong><br>
BPS ने Commuted Pension की बहाली को लेकर भी प्रस्ताव रखा है। </p>
<p>मांग है कि रिटायरमेंट के समय कम्यूट की गई पेंशन की राशि को 11 साल बाद या 71 साल की उम्र में, जो पहले हो, बहाल किया जाए. यह प्रस्ताव 60 साल की उम्र में रिटायर होने वाले कर्मचारियों के संदर्भ में रखा गया है। </p>
<p><strong>65 साल से अतिरिक्त पेंशन की मांग</strong><br>
पेंशनर्स समाज ने उम्र बढ़ने के साथ अतिरिक्त पेंशन देने का प्रस्ताव भी रखा है। </p>
<p>संगठन की मांग है कि 65 साल की उम्र से Additional Pension शुरू हो और इसके बाद हर पांच साल के अंतराल पर इसमें बढ़ोतरी की जाए। </p>
<p><strong>1 जनवरी 2026 से मिले संशोधित लाभ</strong><br>
BPS ने 8वें Pay Commission से संशोधित वेतन, पेंशन और भत्तों को 1 जनवरी 2026 से लागू करने की मांग भी की है। </p>
<p>यह मांग इसलिए अहम है क्योंकि 8वें CPC का गठन हो चुका है और आयोग फिलहाल विभिन्न पक्षों से सुझाव और मांगें ले रहा है. आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अलग-अलग संगठनों के साथ बैठकों और राज्यों के दौरे की जानकारी जारी की जा रही है। </p>
<p><strong>पेंशनर्स की मांगों में सिर्फ पेंशन नहीं</strong><br>
BPS ने HRA और LTC जैसे लाभों को पेंशनर्स तक बढ़ाने की मांग भी की है. इसके अलावा Central Autonomous और Statutory Bodies के पात्र पेंशनर्स तक 8वें CPC के लाभों को समान रूप से पहुंचाने का प्रस्ताव है. BSNL पेंशनर्स से जुड़े पेंशन-पैरिटी और हेल्थकेयर के मुद्दे भी मांगों में शामिल हैं। </p>
<p><strong>8th CPC के लिए क्यों अहम है ये मांग?</strong><br>
8वां Pay Commission केवल कर्मचारियों की सैलरी तय करने तक सीमित नहीं है. इसके दायरे में पेंशन से जुड़े मुद्दे भी हैं. सरकार ने संसद में भी स्पष्ट किया है कि आयोग वेतन, भत्ते और पेंशन से जुड़े मामलों पर सिफारिशें करेगा। </p>
<p>आयोग अभी अलग-अलग हितधारकों से बातचीत और डेटा जुटाने की प्रक्रिया में है. आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक आयोग का गठन नवंबर 2025 में हुआ था और अगस्त-सितंबर 2026 में भी राज्यों में बातचीत और दौरे निर्धारित हैं। </p>
<p>इसलिए पेंशनर्स संगठनों की मांगें आने वाले महीनों में चर्चा का बड़ा हिस्सा बन सकती हैं। </p>
<p><strong>सबसे जरूरी बात</strong><br>
₹45,000 न्यूनतम पेंशन, 67% Last Basic Pay पर पेंशन और 50% Family Pension अभी प्रस्ताव हैं. इन्हें 8वें Pay Commission का अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। </p>
<p>आयोग अलग-अलग संगठनों की मांगों, सरकारी वित्तीय स्थिति, महंगाई, कर्मचारियों-पेंशनर्स की जरूरतों और अन्य आर्थिक पहलुओं को देखते हुए अपनी सिफारिशें देगा. अंतिम फैसला सरकार द्वारा सिफारिशों पर कार्रवाई के बाद ही होगा। </p>
<p><strong>क्या 7वें वेतन आयोग की तरह मिलेगा फिटमेंट फैक्टर?</strong><br>
7वें वेतन आयोग के समय सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर मंजूर किया था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 और न्यूनतम पेंशन ₹9,000 हो गई थी। 8वें वेतन आयोग के लिए अभी तक आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर की घोषणा नहीं हुई है, क्योंकि आयोग अभी अपनी रिपोर्ट तैयार कर रहा है।</p>
<p><strong>महंगाई राहत का क्या होगा?</strong><br>
पेंशनधारक ध्यान रखें कि नए वेतन आयोग के लागू होने पर वर्तमान में मिल रही महंगाई राहत (DR) को सीधे नई बेसिक पेंशन में नहीं जोड़ा जाता। जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है, मौजूदा DR को शून्य कर दिया जाता है और उसे नई बेसिक पेंशन के ढांचे में समाहित कर लिया जाता है।</p>
<p><strong>कब साफ होगी अंतिम तस्वीर?</strong><br>
आयोग 3 मई 2027 तक अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल इन सिफारिशों की समीक्षा करेगा और अंतिम फैसला लेगा। तभी पेंशनभोगियों को उनकी सटीक और संशोधित पेंशन की जानकारी मिल सकेगी।</p>]]> </content:encoded>
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<title>15 अगस्त पर क्यों नहीं गाया जाता था पूरा ‘वंदे मातरम’? अब नए कानून से बदलेगा नियम, जानें विवाद की जड़</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली भारत देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इस बार कुछ खास होने जा रहा है. 15 अगस्त के दिन देश की राजधानी दिल्ली के लालकिले की प्राचीर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार 13वें साल तिरंगा झंडा फहराएंगे. फिर वह देश के नाम अपना संबोधन देंगे. इस दौरान तमाम सांस्कृतिक उत्सव भी … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 09:30:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारत देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इस बार कुछ खास होने जा रहा है. 15 अगस्त के दिन देश की राजधानी दिल्ली के लालकिले की प्राचीर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार 13वें साल तिरंगा झंडा फहराएंगे. फिर वह देश के नाम अपना संबोधन देंगे. इस दौरान तमाम सांस्कृतिक उत्सव भी होंगे. अभी तक आपने जो भी पढ़ा उसमें कुछ अलग नहीं है, बल्कि खास तो यह है कि इस स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पहली बार ‘वंदे मातरम’ को गाया जाएगा. जी हां, अभी तक राष्ट्रीय गीत को कभी भी इस समारोह में नहीं गाया गया है. आखिर अभी तक ऐसा क्यों था? आजादी से पहले ऐसा क्या हुआ था कि वंदेमातरम को लेकर विवाद था? इसके साथ ही अब किस नियम में बदलाव के तहत शामिल क्या गया है?</p>
<p>लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस के आयोजन को लेकर रक्षा मंत्रालय की तरफ से प्राप्त जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण से पहले लाल किले की प्राचीर से देश का राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा. आजादी के जश्न के इतिहास में यह पहली बार होगा जब लाल किले पर मुख्य समारोह के दौरान ‘वंदे मातरम’ गूंजेगा. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि अब तक इसे स्वतंत्रता दिवस के मुख्य कार्यक्रम में शामिल क्यों नहीं किया जाता था और इसके पीछे क्या वजह रही है?</p>
<p><strong>अब तक क्यों नहीं गाया जाता था?</strong><br>
राष्ट्रीय प्रोटोकॉल और नियम के मुताबिक अब तक लाल किले पर होने वाले आधिकारिक ध्वजारोहण समारोह में सिर्फ राष्ट्रगान यानी ‘जन गण मन’ को ही प्राथमिकता दी जाती थी. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि साल 1937 में ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंदों को ही रखने का फैसला इसलिए लिया गया था ताकि देश की विविधता को ध्यान में रखते हुए किसी भी तरह के धार्मिक विवाद से बचा जा सके। </p>
<p><strong>क्यों छोटा किया गया था वंदे मातरम?</strong><br>
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के लिखे गए इस प्रसिद्ध गीत के शुरुआती दो छंद तो मातृभूमि की वंदना करते हैं लेकिन इसके बाद के छंदों में देवी दुर्गा और हिंदू देवियों से जुड़े संदर्भ और प्रतीक नजर आते हैं. इसको लेकर मुस्लिम लीग और अन्य संबंधित पक्षों की तरफ से इन धार्मिक संदर्भों पर आपत्ति जताए जाने के बाद साल 1937 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अहम फैसला करना पड़ा. तब महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर इसके शुरुआती दो छंदों को ही सार्वजनिक मंचों पर इस्तेमाल करने का फैसला किया था। </p>
<p>इसके बाद आया 1947 और देश की आजादी का साल. जब भारत गणतंत्र बना, तब 1950 में संविधान सभा ने ‘जन गण मन’ को आधिकारिक राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम’ के पहले 2 छंदों को राष्ट्रीय गीत घोषित किया. दोनों को बराबर सम्मान दिया गया, ताकि सरकारी प्रोटोकॉल में देश की धर्मनिरपेक्षता का संतुलन बना रहे। </p>
<p><strong>अब क्या बदल रहा है?</strong><br>
देश में राष्ट्रीय उत्सवों की पुरानी परंपरा अब बदल रही है. इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण से ठीक पहले लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ की प्रस्तुति दी जाएगी. हाल ही में हुए प्रोटोकॉल बदलावों के बाद अब इस पूरे गीत को आधिकारिक राजकीय कार्यक्रमों में शामिल कर लिया गया है. राष्ट्रगान जन-गण-मन को भी इस दौरान गाया जाएगा। </p>
<p><strong>किस कानून में हुआ बदलाव? </strong></p>
<p>संसद ने पिछले महीने जुलाई में ही Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 पास कर दिया है, जिसके तहत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान के बराबर कानूनी दर्जा मिल गया. इसके साथ ही इसके गायन के दौरान जानबूझकर बाधा पैदा करने को अपमान और दंडनीय अपराध के तौर पर माना जाएगा। </p>
<p>अभी तक साल 1971 में राष्ट्रगान से जुड़ा ‘प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर ऐक्ट’ आया था. इसके सेक्शन 2 और सेक्शन 3 के तहत गीत के गायन के दौरान अपमान करने को कानूनन अपराध घोषित किया गया. अब इसी 1971 के ऐक्ट में संशोधन करके वंदे मातरम को भी जोड़ दिया गया है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>FMCG Products Price Hike: तेल&#45;साबुन से बिस्किट&#45;ब्रेड तक महंगे होंगे सामान! कंपनियों ने दिए कीमत बढ़ाने के संकेत</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली तेल, साबुन से लेकर बिस्किट-ब्रेड तक महंगे हो सकते हैं. दिग्गज एफएमसीजी कंपनियों ने कुछ चुनिंदा उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी करने के संकेत दिए हैं और आम आदमी को महंगाई का ये झटका अगले महीने सितंबर में लग सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटानिया से लेकर हिंदुस्तान यूनीलिवर और डाबर तक कच्चे … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 22:45:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong><br>
तेल, साबुन से लेकर बिस्किट-ब्रेड तक महंगे हो सकते हैं. दिग्गज एफएमसीजी कंपनियों ने कुछ चुनिंदा उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी करने के संकेत दिए हैं और आम आदमी को महंगाई का ये झटका अगले महीने सितंबर में लग सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटानिया से लेकर हिंदुस्तान यूनीलिवर और डाबर तक कच्चे माल की बढ़ती लागत और जियोपॉलिटिकल तनाव का हवाला देते हुए कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं। </p>
<p><strong>FMCG कंपनियों की बड़ी तैयारी!</strong><br>
एजेंसी रिपोर्ट के मानें, तो भारत की दिग्गज फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स कंपनियां सितंबर तिमाही में चुनिंदा उत्पादों की कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं. बीते जून तिमाही के दौरान करीब 2-5% का औसत प्राइस हाइक करने के बाद अब FMCG सेक्टर की कंपनियां महंगाई के दबाव को कम करने के लिए टारगेटेड मूल्य निर्धारण उपायों की ओर बढ़ रही हैं। </p>
<p>इन कंपनियों का कहना है कि वस्तुओं की बढ़ती लागत और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से उनके मार्जिन पर बुरा असर पड़ रहा है और साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और मानसून, अल नीनो के संभावित प्रभावों से जुड़े जोखिमों पर भी कंपनियों की बारीक नजर है. इन सबके मद्देनजर कंपनियां कुछ पैकेजों में उत्पाद की मात्रा कम कर रही हैं या चुनिंदा प्रोडक्ट्स पर कीमतों में इजाफा करने की तैयारी में हैं। </p>
<p><strong>ब्रिटानिया ने दिए ये संकेत </strong><br>
ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज को उम्मीद है कि 5 रुपये और 10 रुपये वाले बिस्कुट के  पैकेट की कीमतों में मुख्य रूप से 1.5-2% की अतिरिक्त वृद्धि की जा सकती है. पीटीआई के मुताबिक, Britannia एमडी और सीईओ रक्षित हरगवे ने इस प्राइस हाइक का संकेत देते हुए कहा है कि कंपनी को चीनी और ताड़ के तेल जैसे प्रमुख कच्चे माल की बढ़ती लागत का सामना करना पड़ रहा है. इस तिमाही में आगे चलकर आपको कुछ और बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. अगर कुल प्रभाव 1 फीसदी था, तो संभवतः आपको 1.5-2 फीसदी की और बढ़ोतरी दिखेगी। </p>
<p><strong>गोदरेज के सामान भी होंगे महंगे</strong><br>
गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड ने बीते जून तिमाही में अपने तमाम प्रोडक्ट्स की कीमतों में औसतन करीब 5 फीसदी की बढ़ोतरी कर ग्राहकों को झटका दिया था, वहीं अब कंपनी सितंबर तिमाही में भी एक मूल्य वृद्धि कर सकती है. हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि <strong>कंपनी फिलहाल अतिरिक्त मूल्य निर्धारण संबंधी कदम उठाने से पहले कमोडिटी की लागत में होने वाले बदलावों पर नजर रख रही है। </strong></p>
<p><strong>डाबर भी Price Hike की तैयारी में</strong><br>
ब्रिटानिया और गोदरेज के साथ ही डाबर इंडिया भी आने वाले दिनों में अपने ग्राहकों पर महंगाई का बम फोड़ सकती है. हाई इनपुट कॉस्ट के चुनौतीपूर्ण बने रहने की आशंका के बीच कंपनी मार्जिन सेफ्टी के लिए अपने कुछ सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी करने का कदम उठा सकती है। </p>
<p><strong>TATA से HUL भी लिस्ट में शामिल</strong><br>
एफएमसीजी सेक्टर की अन्य कंपनियों की बात करें, तो हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड सितंबर तिमाही में कई प्रोडक्ट्स कैटेगरी में कीमतें बढ़ा सकती है. कंपनी ने FY27 की पहली तिमाही में अपने सामानों की कीमतों में 2-5 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। </p>
<p>रिपोर्ट में HUL CEO-MD प्रिया नायर के हवाले से कहा गया है कि महंगाई की स्थिति के आधार पर, हम सितंबर तिमाही के लिए कीमतों में संशोधन जारी रखेंगे. इसके अलावा टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स  के एमडी सुनील डिसूजा ने भी संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर प्रोडक्ट्स की कीमतों में और बदलाव पर विचार किया जा सकता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>अरुणाचल में भारत ने बदले 27 जगहों के नाम, चीन बौखलाया; संबंध खराब होने की दी दुहाई</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली सीमा पर अतिक्रमण की कोशिश में रहने वाला चीन भारत के एक कदम से बौखला गया है। भारत ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों के नाम बदले हैं। इसको लेकर चीन ने निंदा करते हुए बयान जारी किया है। बता दें कि भारत और चीन गलवान घाटी में हुई झड़पों के बाद रिश्ते … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 22:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>अरुणाचल, में, भारत, ने, बदले, जगहों, के, नाम, चीन, बौखलाया, संबंध, खराब, होने, की, दी, दुहाई</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>सीमा पर अतिक्रमण की कोशिश में रहने वाला चीन भारत के एक कदम से बौखला गया है। भारत ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों के नाम बदले हैं। इसको लेकर चीन ने निंदा करते हुए बयान जारी किया है। बता दें कि भारत और चीन गलवान घाटी में हुई झड़पों के बाद रिश्ते को सुधारने की कोशिश में लगे हैं। हालांकि भारत के इस कदम से तनाव एक बार फिर बढ़ सकता है। चीन की सरकार ने सोमवार को कहा कि भारत द्वारा इस तरह से नाम बदला जाना अस्वीकार्य और गैर-कानूनी है। चीन ने कहा कि ये इलाके जंगनान चीन का हिस्सा हैं। बता दें कि चीन अरुणाचल प्रदेश में 90 किलोमीटर तक जंगनान चीन का दावा करता है। जबकि भारत चीन को समय-समय पर बताता रहता है कि यह भारत का अभिन्न भाग है और इसको लेकर कोई भी फैसला भारत सरकार कर सकती है।</p>
<p><strong>चीन बदलता रहा है नाम</strong><br>
चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश में जगहों के नाम बदलने का सिलसिला जारी रखता है। इस बार जब भारत ने अपने ही क्षेत्र में नाम बदले तो चीन बौखला गया। भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से सर्वे ऑफ इंडिया मैप में अरुणाचल प्रदेश में झील, बस्तियां और स्मारक समेत 27 नाम बदले हैं। वहीं चीन 2017 से ही नाम बदलने के हथकंडे अपनाता रहता है।</p>
<p><strong>अरुणाचल के हिस्से पर कब्जा जनाता है चीन</strong><br>
चीन का मानना है कि अरुणाचल प्रदेश दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है और इसलिए उसका नाम भी जांगनान रखा है। हालांकि भारत ने इस दावे को हमेशा खारिज किया है और इसे आधारहीन बताया है। वहीं भारत सरकार ने अब अरुणाचल प्रदेश सरकार की सलाह पर 27 जगहों के सटीक नाम अपने आधिकारिक मैप में शामिल कर लिए हैं।</p>
<p><strong>चीनी मीडिया में भी उबाल</strong><br>
भारत के इस कदम को लेकर चीनी मीडिया भी उबलने लगा है। चीन के सरकारी मीडिया 'ग्लोबल टाइम्स' ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, चीन लंबे समय से इस इलाके को अपने मैप में शामिल करता रहा है। भारत-चीन संबंधों में सुधार के संकेतों के बीच भारत ने एकतरफा कदम उठाने शुरू कर दिया हैं। ऐसे में सीमा पर हालात खराब हो सकते हैं। इससे भारत को कोई फायदा नहीं होने वाला है।</p>
<p>अप्रैल महीने में ही विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने कहा था कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है और रहेगा। उन्होंने कहा था कि चीन का नाम बदलने का प्रयास करना गैरकानूनी है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बता दें कि 1914 में शिमला समझौते के दौरान ब्रिटिश इंडिया और तिब्बत के बीच मैकमोहन लाइन बनाई गई थी। हालांकि चीन इस बाउंड्री को नहीं मानता है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>तेल&#45;गैस की सप्लाई पर भारत का बड़ा दांव, 50 से ज्यादा देशों से मंगाया जा रहा कच्चा माल</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों पर जारी अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में जानकारी दी कि भारत ने तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी LNG और कच्चा तेल (Crude … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 21:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों पर जारी अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में जानकारी दी कि भारत ने तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी LNG और कच्चा तेल (Crude Oil) के आयात स्रोतों में भारी विविधता लाते हुए सप्लायर्स के नेटवर्क को कई गुना बड़ा कर दिया है, ताकि अब देश में किसी तरह की गैस और तेल की किल्लत पैदा न हो। </p>
<p>संसद में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक अब भारत किसी एक भौगोलिक क्षेत्र या समुद्री रास्ते की अनिश्चितता पर निर्भर नहीं रहेगा. आपको बता दें कि पिछले दिनों ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज बंद होने से देश में तेल और गैस की किल्लत पैदा हो गई थी. इसी के बाद सरकार ने ये कदम उठाया है। </p>
<p><strong>पहले और अब की स्थिति</strong><br>
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का 85% से अधिक हिस्सा आयात करता है. ऐसे में आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी रुकावट से निपटने के लिए वैश्विक बाजार में नेटवर्क को व्यापक बनाया गया है. पहले जहां सरकार 6 देशों से एलएनजी का आयात कर  रही थी. वहीं, अब इसे बढ़ाकर 15 कर दी है. इसके अलावा, कच्चा तेल पहले 27 देशों से आयात किए जा रहे थे, जिसे अब बढ़ाकर 41 कर दिया गया है. यानी अब 41 देशों से कच्चे तेल का आयात किया जा रहा है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता बनने में मदद मिल सकती है। </p>
<p><strong>आपूर्ति में विविधता से क्या होंगे बड़े फायदे?</strong><br>
इससे यह फायदा होगा कि किसी एक देश, युद्ध क्षेत्र या विशेष समुद्री मार्ग जैसे रेड सी या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संकट आने पर भी भारत की गैस और तेल आपूर्ति अब बाधित नहीं होगी. इसके अलावा, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अचानक उछलती हैं, तो अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीद करने पर प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य मिलने की संभावना बढ़ जाती है. सरकार के इस कदम से घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, क्योंकि सीएनजी, पीएनजी और रसोई गैस के साथ-साथ पावर और फर्टिलाइजर प्लांट्स के लिए गैस की सप्लाई बिना रुकावट जारी रहेगी। </p>
<p><strong>आपात स्थिति के लिए देश का बैकअप प्लान</strong><br>
आयात के स्रोतों में डायवर्सिफिकेशन के साथ-साथ सरकार देश के भीतर कच्चे तेल के आपातकालीन भंडारण को भी तेजी से बढ़ा रही है. इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड ने आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के तटीय इलाकों में कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाले तीन रणनीतिक तेल भंडार स्थापित किए हैं. इसके अलावा, ओडिशा के चांदीखोल और कर्नाटक के पडुर में कुल 6.5 MMT की अतिरिक्त वाणिज्यिक सह रणनीतिक रिजर्व सुविधाओं को मंजूरी दी जा चुकी है. साथ ही ओएनजीसी कर्नाटक में 1.75 MMT क्षमता की एक अलग भंडारण सुविधा विकसित कर रही है, जिसका आधा हिस्सा रणनीतिक भंडार के रूप में आरक्षित रहेगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>NASA का ISRO को बड़ा ऑफर! क्या है Artemis Mission, जिससे Moon Base प्रोग्राम में भारत की एंट्री होगी?</title>
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<description><![CDATA[ बेंगलुरु  अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) ने भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को बड़ा ऑफर दिया है। दरअसल, NASA ने ISRO को आर्टेमिस मिशन के तहत मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। अमेरिकी दूतावास ने मंगलवार को बताया कि NASA ने आर्टेमिस समझौते … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 20:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>NASA, का, ISRO, को, बड़ा, ऑफर, क्या, है, Artemis, Mission, जिससे, Moon, Base, प्रोग्राम, में, भारत, की, एंट्री, होगी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बेंगलुरु </strong></p>
<p>अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) ने भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को बड़ा ऑफर दिया है। दरअसल, NASA ने ISRO को आर्टेमिस मिशन के तहत मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। अमेरिकी दूतावास ने मंगलवार को बताया कि NASA ने आर्टेमिस समझौते (Artemis Accords) के तहत भारत-अमेरिका साझेदारी को और मजबूत करने के लिए ISRO को अपने मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है।</p>
<p>दोनों पक्ष समझौते के तहत ओपन साइंटिफिक डेटा शेयरिंग पर सहयोग के लिए बातचीत को आगे बढ़ाने पर भी सहमत हुए हैं। इस समझौते का मकसद बाहरी अंतरिक्ष के नागरिक अन्वेषण (civil exploration) और उसके उपयोग के गवर्नेंस को बेहतर बनाना है। NASA अंतरिक्ष में अमेरिका की लीडरशिप को मजबूत करने, वैज्ञानिक खोजों को बढ़ावा देने, इंडस्ट्री और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ इनोवेशन को आगे बढ़ाने और मंगल ग्रह के मिशन के लिए मानवता को तैयार करने के मकसद से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास एक मून बेस बना रहा है।</p>
<p><strong>आर्टेमिस समझौते पर दस्तखत करने वाला भारत 27वां देश</strong><br>
21 जून 2023 को भारत आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला 27वां देश बन गया था। यह समझौता देशों के बीच अंतरिक्ष अन्वेषण में सहयोग के लिए दिशा-निर्देश तय करता है। बयान में कहा गया है कि भारत और अमेरिका ने सिविल और कमर्शियल अंतरिक्ष सहयोग पर अपनी बातचीत को आगे बढ़ाया है और भविष्य में विज्ञान और मानव अंतरिक्ष उड़ान तकनीक में साझेदारी पर भी ध्यान केंद्रित किया है। बयान के अनुसार, ये बातचीत भारत-अमेरिका सिविल स्पेस जॉइंट वर्किंग ग्रुप (CSJWG) की 9वीं बैठक के दौरान हुई। इस बैठक की मेजबानी भारत ने 5 और 6 अगस्त को बेंगलुरु में ISRO मुख्यालय में की थी।</p>
<p><strong>क्या है आर्टेमिस मिशन?</strong><br>
आर्टेमिस मिशन नासा का एक महत्वकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य इंसानों को 50 साल बाद दोबारा चंद्रमा पर भेजना, चंद्रमा पर स्थाई बस्ती बसाना और भविष्य में मंगल ग्रह पर मानव मिशन की तैयारी करना है। आर्टेमिस I: पहला चरण था, जो नवंबर 2022 में लॉन्च किया गया एक मानव-रहित परीक्षण उड़ान था। इसमें ओरियन अंतरिक्ष यान ने चंद्रमा के पास से सफलतापूर्वक उड़ान भरी थी।</p>
<p>आर्टेमिस II: 1 अप्रैल 2026 को लॉन्च किया गया पहला मानवयुक्त मिशन था, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्रियों (रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हनसेन) ने चंद्रमा की परिक्रमा की और 10 दिन बाद अप्रैल 2026 में सुरक्षित पृथ्वी पर लौटे। इसके बाद के चरणों में आर्टेमिस III और IV हैं, जिनमें चंद्रमा की कक्षा में डॉकिंग परीक्षण और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अंतरिक्ष यात्रियों की लैंडिंग की योजना है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>तमिलनाडु में NEET के खिलाफ प्रस्ताव पास, ‘कोचिंग माफिया’ और छात्रों की आत्महत्या का मुद्दा उठा</title>
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<description><![CDATA[ चेन्नई  NEET पेपर लीक के बाद इस परीक्षा को लेकर तमाम तरह के सवाल उठने लगे थे और सबसे ज्यादा सवाल उठाने वाले राज्यों में एक बार फिर तमिलनाडु का नाम शामिल था. तमिलनाडु पिछले कई सालों से NEET परीक्षा का विरोध करता आया है और अब एक बार फिर राज्य में नीट को खत्म … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 19:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>तमिलनाडु, में, NEET, के, खिलाफ, प्रस्ताव, पास, ‘कोचिंग, माफिया’, और, छात्रों, की, आत्महत्या, का, मुद्दा, उठा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चेन्नई </strong></p>
<p>NEET पेपर लीक के बाद इस परीक्षा को लेकर तमाम तरह के सवाल उठने लगे थे और सबसे ज्यादा सवाल उठाने वाले राज्यों में एक बार फिर तमिलनाडु का नाम शामिल था. तमिलनाडु पिछले कई सालों से NEET परीक्षा का विरोध करता आया है और अब एक बार फिर राज्य में नीट को खत्म करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है. तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री केजी अरुणराज ने नीट खत्म करने के मुद्दे पर राज्य विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया, जिसके बाद इसे पारित किया गया. जोसेफ विजय सरकार से पहले स्टालिन सरकार ने भी ऐसा ही एक प्रस्ताव पारित किया था। <br>
 <br>
<strong>NEET खत्म करने की बताई वजह </strong><br>
विधानसभा में नीट-विरोधी प्रस्ताव पेश करते हुए मंत्री अरुणराज ने ‘पेपर लीक, युवाओं की जान जाने और छात्रों का भरोसा टूटने' का जिक्र किया, उन्होंने कहा, "नीट ने छात्रों का ध्यान स्कूल के पाठ्यक्रम से हटाकर सिर्फ कोचिंग पर केंद्रित कर दिया है. नीट की वजह से कोचिंग सेंटर की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और वे बहुत अधिक फीस वसूल रहे हैं. नीट ग्रामीण और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों के लिए मेडिकल शिक्षा के अवसरों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है. तमिलनाडु लगातार जोर देती रही है कि नीट सामाजिक न्याय, समानता, राज्यों के अधिकार के खिलाफ है। </p>
<p><strong>सीएम विजय भी कर चुके हैं विरोध</strong><br>
नीट पेपर लीक के बाद सबसे ज्यादा आक्रामक रुख तमिलनाडु के नए सीएम जोसेफ विजय उर्फ थलापति विजय का था. विजय ने कई बार कहा कि इस परीक्षा से गरीब छात्रों को नुकसान हो रहा है और छात्रों को 12वीं के नंबरों के आधार पर मेडिकल सीटें मिलनी चाहिए. उनका कहना है कि राज्य सरकार को ये छूट देनी चाहिए कि वो अपनी सरकारी सीटों पर राज्य के मेधावी छात्रों को एडमिशन दे सकें। </p>
<p><strong>तमिलनाडु में क्यों होता है नीट का विरोध?</strong><br>
तमिलनाडु में बाकी राज्यों की तरह पहले 12वीं के नंबरों के आधार पर ही मेडिकल सीट मिल जाती थी, लेकिन नीट के आने के बाद सब कुछ बदल गया. इसी दौरान अनिता नाम की एक गरीब लड़की का सपना भी अधूरा रह गया. इस लड़की ने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 98% नंबर हासिल किए, लेकिन नीट के चलते उसे सरकारी सीट नहीं मिल पाई. ये मामला सुप्रीम कोर्ट भी गया, लेकिन बाद में दिहाड़ी मजदूर पिता का सपना अधूरा रहने के चलते अनिता ने खुदकुशी कर ली. इस घटना के बाद पूरे राज्य में हिंसक प्रदर्शन हुए और नीट के खिलाफ माहौल बन गया। </p>
<p>इसके बाद से ही तमिलनाडु में हर राजनीतिक दल के लिए ये एक बड़ा मुद्दा रहा है. इससे नेता सीधे गरीबों और मध्यम वर्गीय परिवारों को टारगेट करते हैं. उनका कहना है कि पहले की तरह राज्यों को अपनी मेडिकल सीटों के लिए एडमिशन देने की छूट दी जाए। </p>]]> </content:encoded>
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<title>FCRA Bill पर सरकार का बड़ा यू&#45;टर्न? JPC में भेजने की तैयारी, PM मोदी से मुलाकात के बाद स्पीकर से मिले रिजिजू</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली   Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 यानी FCRA संशोधन विधेयक को लेकर संसद में जारी गतिरोध के बीच केंद्र सरकार संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का रास्ता अपनाने पर विचार कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार विधेयक को संसद में आगे बढ़ाने से पहले विस्तृत जांच और विचार-विमर्श के लिए JPC के पास … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 17:45:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली </strong><br>
 Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 यानी FCRA संशोधन विधेयक को लेकर संसद में जारी गतिरोध के बीच केंद्र सरकार संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का रास्ता अपनाने पर विचार कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार विधेयक को संसद में आगे बढ़ाने से पहले विस्तृत जांच और विचार-विमर्श के लिए JPC के पास भेजने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है। </p>
<p>यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब FCRA बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद बने हुए हैं. विपक्षी दलों की ओर से विधेयक के मौजूदा स्वरूप पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं. विपक्ष का एक वर्ग इसे सिर्फ JPC को भेजे जाने के बजाय पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रहा है। </p>
<p><strong>FCRA Amendment Bill 2026:PM मोदी से मिलने के बाद स्पीकर से मिले किरेन रिजिजू</strong><br>
FCRA बिल पर आम सहमति बनाने की कोशिशों के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से भी मुलाकात की. सूत्रों के अनुसार, सरकार संसद में विधेयक को लेकर जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से बातचीत कर रही है। </p>
<p>सरकार की ओर से JPC का विकल्प विपक्ष को साथ लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, अभी यह अंतिम निर्णय नहीं है कि विधेयक को निश्चित रूप से JPC के पास भेजा जाएगा। </p>
<p><strong>BAC की बैठक में FCRA और परिसीमन बिल का जिक्र नहीं</strong><br>
 लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में FCRA संशोधन विधेयक और प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को एजेंडे में शामिल नहीं किया गया. इसके बाद संसद के मानसून सत्र के बचे हुए दिनों में इन दोनों विधेयकों को पेश किए जाने को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। </p>
<p>संसद का मानसून सत्र पहले से ही विपक्ष के विरोध और विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के कारण प्रभावित रहा है. ऐसे में सरकार के सामने महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ विपक्ष के साथ सहमति बनाने की चुनौती भी है। </p>
<p><strong>क्या है FCRA Amendment Bill 2026?</strong><br>
Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 का उद्देश्य विदेशी योगदान प्राप्त करने वाले संगठनों और संस्थाओं के लिए नियामकीय व्यवस्था में बदलाव करना है. विधेयक में खास तौर पर उन परिसंपत्तियों के प्रबंधन से जुड़े प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं, जो विदेशी योगदान से बनाई गई हों और संबंधित संस्था का FCRA पंजीकरण रद्द, समाप्त या नवीनीकृत न हो। </p>
<p>विधेयक में ऐसी स्थिति में विदेशी योगदान और उससे जुड़ी परिसंपत्तियों के प्रबंधन के लिए एक Designated Authority की व्यवस्था का प्रस्ताव है. इसके अलावा ‘Key Functionary’ की परिभाषा और कुछ दंडात्मक एवं प्रक्रियात्मक प्रावधानों में बदलाव भी प्रस्तावित किए गए हैं। </p>
<p><strong>विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध?</strong><br>
विपक्ष का आरोप है कि प्रस्तावित कानून से सरकार को विदेशी फंड हासिल करने वाले NGO और अन्य संस्थाओं पर ज्यादा अधिकार मिल सकते हैं. विपक्षी दल विधेयक के प्रावधानों पर व्यापक संसदीय चर्चा की मांग कर रहे हैं.</p>
<p>वहीं सरकार का पक्ष है कि FCRA व्यवस्था में मौजूद कानूनी और प्रशासनिक खामियों को दूर करने के लिए संशोधन जरूरी हैं। विधेयक से विदेशी योगदान और उससे बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार करने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p><strong>सुप्रिया सुले ने भी की JPC की मांग</strong><br>
NCP (SP) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने FCRA संशोधन विधेयक के मौजूदा स्वरूप का विरोध किया है. उन्होंने केंद्र सरकार से विधेयक वापस लेने या इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की मांग की है। </p>
<p>सुले का कहना है कि विदेशी फंडिंग को हमेशा संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक, विदेशी योगदान से जुड़े इतने महत्वपूर्ण कानून पर सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक चर्चा और संसदीय जांच की जरूरत है। </p>
<p><strong>JPC का रास्ता क्यों अहम है?</strong><br>
यदि सरकार FCRA बिल को JPC के पास भेजने का फैसला करती है तो समिति विधेयक के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा कर सकती है. समिति सांसदों, विशेषज्ञों और संबंधित हितधारकों के विचार सुनकर अपनी रिपोर्ट संसद को सौंप सकती है। </p>
<p>ऐसे में JPC का विकल्प सरकार और विपक्ष के बीच तत्काल राजनीतिक टकराव को कम करने का रास्ता बन सकता है. हालांकि, विपक्ष की मौजूदा मांग को देखते हुए केवल JPC को भेजना पर्याप्त होगा या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। </p>
<p><strong>संसद में आगे क्या होगा?</strong><br>
फिलहाल FCRA बिल को लेकर सरकार की रणनीति और विपक्ष के रुख पर सबकी नजर है. सरकार यदि JPC का प्रस्ताव औपचारिक रूप से आगे बढ़ाती है तो विपक्ष के रुख में नरमी आने की संभावना बन सकती है. दूसरी ओर, विपक्ष यदि विधेयक की पूर्ण वापसी पर ही अड़ा रहता है तो संसद में गतिरोध जारी रहने की आशंका रहेगी। </p>
<p>इस पूरे घटनाक्रम में अब किरेन रिजिजू की विपक्षी नेताओं के साथ बातचीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात और लोकसभा अध्यक्ष से हुई चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है. संसद के मानसून सत्र के बचे दिनों में FCRA बिल को लेकर सरकार क्या अंतिम फैसला लेती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>‘सुयशक्ति’ पुरस्कार से महिला उद्यमियों को किया गया सम्मानित और प्रोत्साहित</title>
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<description><![CDATA[ ​चेन्नई महिला उद्यमियों और उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को पहचान देने और उन्हें प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, शक्ति मसाला पिछले नौ वर्षों से प्रतिष्ठित ‘सुयशक्ति’ पुरस्कार प्रदान करता आ रहा है। इसी पहल के तहत, इस वर्ष का पुरस्कार समारोह चेन्नई के चेटपट स्थिति आंडाल ऑडिटोरियम में भव्य रूप से आयोजित किया गया।​शक्ति … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>​चेन्नई</strong></p>
<p>महिला उद्यमियों और उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को पहचान देने और उन्हें प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, शक्ति मसाला पिछले नौ वर्षों से प्रतिष्ठित ‘सुयशक्ति’ पुरस्कार प्रदान करता आ रहा है। इसी पहल के तहत, इस वर्ष का पुरस्कार समारोह चेन्नई के चेटपट स्थिति आंडाल ऑडिटोरियम में भव्य रूप से आयोजित किया गया।​शक्ति मसाला द्वारा आयोजित इस पुरस्कार समारोह में तमिलनाडु के स्कूली शिक्षा मंत्री राजमोहन और वित्त मंत्री मारिया विल्सन ने विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर सांसद प्रवीण चक्रवर्ती और प्रसिद्ध अभिनेता सूरी भी उपस्थित रहे।</p>
<p>​कार्यक्रम की अध्यक्षता शक्ति मसाला के संस्थापक पी.सी. दुरैसामी और निदेशक शांति दुरैसामी ने की। इस कार्यक्रम में विधायक सौम्या अन्बुमणि और अभिनेत्री उर्वशी सहित कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। शिक्षा, साहित्य, समाज सेवा, खाद्य, कला और संस्कृति जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं को ‘सुयशक्ति’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।</p>
<p>​समारोह को संबोधित करते हुए विधायक सौम्या अन्बुमणि ने कहा कि उनके मायके और ससुराल दोनों की राजनीतिक पृष्ठभूमि रही है। डॉ. अन्बुमणि रामदास के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के रूप में कार्यकाल के दौरान की गई पहलों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सांप के काटने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए थे।</p>
<p>​उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उसी अवधि के दौरान 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा शुरू की गई थी और सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-स्नेक वेनम (सांप के जहर की दवा) की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए गए थे।<br>
​उन्होंने कहा, "मुझे धर्मपुरी के हर गांव का दौरा करना और लोगों से मिलना बहुत पसंद है। लोग ही मेरी प्रेरणा हैं। उन्हें देखकर मुझे खुशी होती है, और मुझे विश्वास है कि जब वे मुझे देखते हैं तो वे भी खुश होते हैं।"</p>
<p>​शक्ति मसाला के संस्थापक पी.सी. दुरैसामी ने अपने संबोधन में सौम्या अन्बुमणि के व्यक्तित्व और बात करने की शैली की सराहना की।<br>
​उन्होंने कहा, "सौम्या अन्बुमणि के भाषण रचनात्मक और सटीक होते हैं। वह एक उत्कृष्ट व्यक्तित्व के रूप में उभरी हैं। डॉ. अन्बुमणि रामदास इस कहावत का एक बेहतरीन उदाहरण हैं कि हर सफल महिला के पीछे एक पुरुष का हाथ होता है। मैं भी इसका एक उदाहरण हूँ।"​विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित और प्रोत्साहित करने वाले इस पुरस्कार समारोह को प्रतिभागियों और अतिथियों से काफी उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली।</p>]]> </content:encoded>
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<title>E20 पर बड़ा सवाल: ‘एथेनॉल के चक्कर में खाने के लाले न पड़ जाएं’, सरकार को किसने चेताया?</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली केंद्र सरकार की एथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल की नीति पर कई विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति से न केवल पर्यावरण और भूजल स्तर पर गहरा असर पड़ेगा, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि व्यवस्था भी खतरे में पड़ सकती है। इसके साथ ही, विशेषज्ञों ने … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>केंद्र सरकार की एथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल की नीति पर कई विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति से न केवल पर्यावरण और भूजल स्तर पर गहरा असर पड़ेगा, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि व्यवस्था भी खतरे में पड़ सकती है। इसके साथ ही, विशेषज्ञों ने सरकार को सलाह दी है कि एथेनॉल वाले पेट्रोल की कीमतें कम की जानी चाहिए, क्योंकि इससे गाड़ियों का माइलेज घट रहा है और इंजनों के कलपुर्जों के जल्दी खराब होने से उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।</p>
<p>सोमवार को 'इंडियन वीमेंस प्रेस कॉर्प्स' द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में इन अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। इस परिचर्चा में दिल्ली साइंस फोरम के वैज्ञानिक व सामाजिक कार्यकर्ता डी रघुनंदन, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के पूर्व सचिव सिराज हुसैन, और नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद शामिल थे।</p>
<p><strong>'भोजन' की बजाय 'ईंधन' वाली खेती की ओर बढ़ रहा देश</strong><br>
दिल्ली साइंस फोरम के डी रघुनंदन ने कहा कि एथेनॉल फ्यूल नीति ने भारतीय कृषि क्षेत्र की दिशा ही बदल दी है। अब हमारी खेती 'भोजन-उन्मुख' से 'ईंधन-उन्मुख' हो गई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एथेनॉल बनाने के लिए मक्के का भारी इस्तेमाल हो रहा है। इसका नतीजा यह है कि जो भारत पहले दुनिया को मक्के का निर्यात करता था, आज उसे अपनी घरेलू मांग पूरी करने के लिए मक्के का आयात करना पड़ रहा है। रघुनंदन ने इसे एक "विघटनकारी नीति" करार दिया, जो पानी के अत्यधिक दोहन और कृषि के पारंपरिक पैटर्न को बिगाड़ रही है।</p>
<p><strong>चावल-चीनी के सरप्लस से निपटने की कोशिश</strong><br>
नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद ने बताया कि हाल के वर्षों में सरकार ने चावल और चीनी के सरप्लस (जरूरत से ज्यादा) उत्पादन से निपटने के लिए ही एथेनॉल फ्यूल को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने चावल और चीनी की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की है, जो अंतरराष्ट्रीय और खुले बाजार की कीमतों से ज्यादा है। ऐसे में यह बचा हुआ स्टॉक न तो देश के अंदर खप पा रहा है और न ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में खरीदा जा रहा है।</p>
<p>चंद ने जोर देकर कहा कि देश में धान की खेती वाले एक बड़े हिस्से को मक्के की खेती से रिप्लेस करने की सख्त जरूरत है। धान की खेती में बहुत ज्यादा पानी लगता है और इससे मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैस भी भारी मात्रा में निकलती है।</p>
<p><strong>भारत की तुलना ब्राजील से करना गलत</strong><br>
पूर्व सचिव सिराज हुसैन ने स्पष्ट किया कि भारत के एथेनॉल प्रोग्राम की तुलना ब्राजील से नहीं की जा सकती। ब्राजील सालाना 45 मिलियन टन चीनी का उत्पादन करता है और उसमें से 36 मिलियन टन एक्सपोर्ट कर देता है। वहां की आबादी काफी कम है और खेती के लिए जमीन का बहुत बड़ा हिस्सा मौजूद है।</p>
<p>हुसैन ने चेतावनी देते हुए कहा, "कई स्टडीज बताती हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में भारत के कृषि उत्पादन में 25 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है, इसलिए ब्राजील से हमारी तुलना करना बिल्कुल गलत है।"</p>
<p><strong>E20 फ्यूल बंद करने की उठी मांग</strong><br>
रघुनंदन ने सरकार को सुझाव दिया कि उसे 20% एथेनॉल वाले 'E20' फ्यूल का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए और वापस 'E10' (10% एथेनॉल) पर लौट जाना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि वर्तमान में एथेनॉल के इस्तेमाल का खामियाजा सिर्फ पर्यावरण और आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है, जबकि किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। अगर E20 बंद होता है, तो नुकसान सिर्फ उन लगभग 400 डिस्टिलरीज को होगा जिन्होंने एथेनॉल बनाने का सेटअप लगाया है। सरकार चाहे तो उन्हें आसानी से इसका मुआवजा दे सकती है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>लाल सागर में उतरी भारतीय नौसेना! हूतियों के हमले का दिया जवाब, INS आदित्य&#45;त्रिशूल एक्शन में</title>
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<description><![CDATA[ मुंबई  लाल सागर में बढ़ते खतरे के बीच भारत ने अब साफ संकेत दे दिया है कि अपने समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए वह किसी और पर निर्भर नहीं रहेगा. भारतीय नेवी ने भारत से जुड़े दो तेल टैंकरों को यहां से सुरक्षित एस्कॉर्ट किया है. कुछ दिनों पहले भारतीय झंडे वाले एक जहाज … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 11:30:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई </strong></p>
<p>लाल सागर में बढ़ते खतरे के बीच भारत ने अब साफ संकेत दे दिया है कि अपने समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए वह किसी और पर निर्भर नहीं रहेगा. भारतीय नेवी ने भारत से जुड़े दो तेल टैंकरों को यहां से सुरक्षित एस्कॉर्ट किया है. कुछ दिनों पहले भारतीय झंडे वाले एक जहाज पर हमला हुआ था और वो डूब गया था. इसके बाद भारतीय नौसेना खुद मैदान में उतर गई है और हाई-रिस्क जोन में एक्टिव ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं. यमन के पास एक भारतीय जहाज पर हमले के बाद स्थिति अचानक बदल गई. यह सिर्फ एक घटना नहीं थी, बल्कि एक चेतावनी थी कि लाल सागर अब सुरक्षित वैकल्पिक रूट भी नहीं रहा। </p>
<p>इसी के बाद भारतीय नौसेना ने बाब-अल-मंदेब जैसे संवेदनशील जलडमरूमध्य में सीधे दखल देते हुए दो क्रूड ऑयल टैंकरों MT Compass और MT Thalatta को सुरक्षित बाहर निकाला. भारतीय नौसेना ने बाब-अल-मंदेब जैसे खतरनाक इलाके में दो तेल टैंकरों को अपनी सुरक्षा में बाहर निकाला. INS Trishul और INS Aditya ने 9 और 10 अगस्त को इन जहाजों को एस्कॉर्ट किया। </p>
<p>
<strong>क्यों अहम है बाब-अल-मंदेब?</strong><br>
बाब-अल-मंदेब दुनिया के सबसे अहम समुद्री चोकपॉइंट्स में से एक है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है. जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक किया, तो सऊदी ने तेल बेचने के लिए लाल सागर का रास्ता चुना. क्योंकि वह पूर्व और पश्चिम दोनों तरफ से समुद्र से जुड़ा है. कई तेल टैंकरों ने इसी रूट को विकल्प के तौर पर चुना. लेकिन अब यहां भी ईरान के समर्थन वाले हूती विद्रोहियों के <strong>हमले बढ़ने से यह रास्ता भी जोखिम में आ गया है. यानी दुनिया के दोनों बड़े तेल रूट होर्मुज और बाब-अल-मंदेब एक साथ अस्थिर हैं। </strong></p>
<p><strong>हूती बने समुद्र के लिए नया खतरा</strong><br>
यमन के हूती विद्रोही लगातार जहाजों को निशाना बना रहे हैं. हालिया हमले में एक भारतीय झंडे वाला जहाज डूब गया, हालांकि सभी 14 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया. यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने इस हमले के पीछे हूतियों को जिम्मेदार ठहराया है, हालांकि समूह ने आधिकारिक तौर पर जिम्मेदारी नहीं ली. हूतियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के रेड सी पोर्ट्स के खिलाफ ‘ब्लॉकेड’ का ऐलान भी किया था, जिससे पूरे इलाके में असुरक्षा और बढ़ गई है। </p>
<p><strong>भारत क्यों उतरा सीधे मैदान में?</strong><br>
भारतीय झंडे वाले जहाज के डूबने के बाद यह तय हो गया है कि अब ईरान-अमेरिका के जंग की आग हमारे घर तक पहुंच गई है. यही वजह है कि भारत को पहली बार इस तरह सीधे एस्कॉर्ट ऑपरेशन चलाना पड़ा है. अब तक समुद्री सुरक्षा के लिए बड़े देशों या अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर भरोसा किया जाता था, लेकिन मौजूदा हालात में वह व्यवस्था कमजोर पड़ती दिख रही है. भारत का यह कदम इसी बदलाव का संकेत है कि अब अपने जहाजों और ऊर्जा सप्लाई की सुरक्षा खुद करनी होगी। </p>]]> </content:encoded>
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<title>Smart Industrial City: देश में ₹16,172 करोड़ से बनेंगी 20 नई स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी, देखें पूरी लिस्ट</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली देश को वैश्विक विनिर्माण केंद्र (Global Manufacturing Hub) बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. दरअसल, केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास कार्यक्रम (NICDP) के तहत 20 नए औद्योगिक शहरों की स्थापना के लिए ₹16,172.95 करोड़ की भारी भरकम राशि जारी कर दी है।  Industrial Corridor Development … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 10:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Smart, Industrial, City:, देश, में, ₹16, 172, करोड़, से, बनेंगी, नई, स्मार्ट, इंडस्ट्रियल, सिटी, देखें, पूरी, लिस्ट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>देश को वैश्विक विनिर्माण केंद्र (Global Manufacturing Hub) बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. दरअसल, केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास कार्यक्रम (NICDP) के तहत 20 नए औद्योगिक शहरों की स्थापना के लिए ₹16,172.95 करोड़ की भारी भरकम राशि जारी कर दी है। </p>
<p>Industrial Corridor Development Programme:  संसद के लोकसभा सत्र में वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद की ओर से दी गई लिखित जानकारी के मुताबिक, केंद्र-राज्य भागीदारी मॉडल (Centre State Partnership Model) के जरिए से देशभर में इन 20 अत्याधुनिक औद्योगिक शहरों (Industrial Cities) के विकास को मंजूरी दी गई है। </p>
<p><strong>औद्योगिक शहर में होंगी ये सुविधाएं</strong><br>
औद्योगिक शहर के भीतर सड़कें, पानी की आपूर्ति, सीवरेज और बिजली वितरण सहित आंतरिक ट्रंक बुनियादी ढांचे को संबंधित परियोजना SPVs के जरिए लगे ईपीसी ठेकेदारों के जरिए से किया जाता है. थोक जल आपूर्ति, बिजली, दूरसंचार और सड़कों जैसे बाहरी कनेक्टिविटी बुनियादी ढांचे को पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान पोर्टल पर व्यापक रूप से मैप और जांचा गया है और राज्य के विभागों और केंद्रीय एजेंसियों के परामर्श से संबंधित राज्य SPVs की ओर से शुरू किया गया है। </p>
<p><strong>कैबिनेट से 12 शहरों की मिल चुकी है मंजूरी</strong><br>
इन औद्योगिक टाउनशिप (Industrial Townships) का विकास राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास और कार्यान्वयन ट्रस्ट के माध्यम से किया जा रहा है, जिसने परियोजना विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित योजना के लिए 16172.97 करोड़ रुपये की राशि जारी की है. इन सभी स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी का गठन केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से संयुक्त रूप से किया गया है. परियोजना विकास गतिविधियों में राज्य सरकार की प्राथमिकता के मुताबिक औद्योगिक नोड्स की पहचान, इसके बाद अवधारणा मास्टर प्लान और विकास योजना की तैयारी, पर्यावरण मंजूरी और विस्तृत डिजाइन योजना शामिल है. इसमें राज्य सरकार का योगदान भूमि (Land) के रूप में होता है, जबकि केंद्र सरकार का योगदान इक्विटी और ऋण (Equity & Debt) के रूप में होता है। </p>
<p>
<strong>10 राज्यों में 12 नए औद्योगिक क्षेत्रों की सूची: देखें अपना शहर</strong><br>
प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने NICDP के तहत 28,602 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ 12 नए परियोजना प्रस्तावों को मंजूरी दी है. 6 प्रमुख कॉरिडोरों के साथ रणनीतिक रूप से स्थित ये 12 औद्योगिक क्षेत्र भारत की विनिर्माण क्षमताओं और आर्थिक विस्तार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. स्वीकृत शहरों की सूची में उत्तर प्रदेश के आगरा और प्रयागराज, बिहार का गया, उत्तराखंड का खुरपिया और पंजाब का राजपुरा पटियाला शामिल हैं. 12 शहरों की लिस्ट नीचे देखें। </p>
<p>NICDP के तहत अनुमोदित 20 परियोजनाओं में से 4 परियोजनाओं को विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के साथ पूरा कर लिया गया है. जबकि शेष 16 अन्य चालू परियोजनाओं के काम में तेजी लाई गई है. मंत्री ने बताया कि परियोजना पूरा होने की कुल निर्माण समय सीमा ईपीसी ठेकेदार की नियुक्ति की वास्तविक तारीख से 36-48 महीने है.</p>
<p><strong>    खुरपिया (उत्तराखंड)<br>
    राजपुरा पटियाला (पंजाब)<br>
    दिघी (महाराष्ट्र)<br>
    पलक्कड़ (केरल)<br>
    आगरा (उत्तर प्रदेश)<br>
    प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)<br>
    गया (बिहार)<br>
    जहीराबाद (तेलंगाना)<br>
    ओर्वाकल (आंध्र प्रदेश)<br>
    कोप्पर्थी (आंध्र प्रदेश)</strong></p>]]> </content:encoded>
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<title>8th Pay Commission: बेसिक सैलरी में DA मर्ज होगा? सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में हो सकता है बड़ा इजाफा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग को लेकर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स में उम्मीदें बढ़ गई हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर नई सैलरी आने के बाद जेब में कितने रुपये ज्यादा आएंगे? हालांकि, अभी तक फिटमेंट फैक्टर, बेसिक सैलरी में डीए मर्ज करना या भत्ते को लेकर कोई भी अंतिम फैसला नहीं हुआ … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 09:45:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>8th, Pay, Commission:, बेसिक, सैलरी, में, मर्ज, होगा, सरकारी, कर्मचारियों, की, सैलरी, में, हो, सकता, है, बड़ा, इजाफा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>8वें वेतन आयोग को लेकर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स में उम्मीदें बढ़ गई हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर नई सैलरी आने के बाद जेब में कितने रुपये ज्यादा आएंगे? हालांकि, अभी तक फिटमेंट फैक्टर, बेसिक सैलरी में डीए मर्ज करना या भत्ते को लेकर कोई भी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। लेकिन फिटमेंट फैक्चर, डीए मर्जर और नए बेसिक पे के आधार पर सैलरी बढ़ोतरी के अलग-अलग अनुमान सामने आ रहे हैं। </p>
<p><strong>सरकार मानेंगी ये डिमांड</strong><br>
8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) ने कर्मचारियों, यूनियनों और दूसरे हितधारकों से सुझाव और आंकड़े लेने की प्रक्रिया जुलाई में पूरी कर ली है। अब इन सुझावों का अध्ययन किया जाएगा। इसके आधार पर केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी, भत्ते, पेंशन और दूसरे फायदों में बदलाव की सिफारिश की जाएगी।</p>
<p>आयोग ने अगस्त और सितंबर में अलग-अलग राज्यों में कर्मचारियों और संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात का कार्यक्रम भी जारी किया है। दिल्ली के अलावा चेन्नई, पुडुचेरी, चंडीगढ़, जयपुर और मुंबई में बैठकें प्रस्तावित हैं। इन बैठकों में कर्मचारी, पेंशनर्स, रेलवे और डिफेंस सेक्टर से जुड़े प्रतिनिधि अपनी मांगें रखेंगे।</p>
<p><strong>कितनी बढ़ सकती है सैलरी?</strong><br>
अभी यह साफ नहीं है कि 8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों की सैलरी कितनी बढ़ेगी। फिलहाल जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वह केवल अनुमान हैं।</p>
<p><strong>कम बढ़ोतरी का अनुमान: करीब 20-30 प्रतिशत</strong></p>
<p><strong>मध्यम अनुमान: करीब 30-50 प्रतिशत</strong></p>
<p><strong>सबसे ज्यादा अनुमान: 80 प्रतिशत से अधिक तक</strong></p>
<p>हालांकि सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि फिटमेंट फैक्टर कितना बढ़ता है। आपकी बेसिक पे कितनी है और साथ ही डीए को बेसिक पे के साथ मर्ज किया जाता है या नहीं।</p>
<p><strong>फिटमेंट फैक्टर क्यों है जरूरी?</strong><br>
फिटमेंट फैक्टर वह मल्टीप्लायर है, जिसके जरिए मौजूदा बेसिक सैलरी को नई बेसिक सैलरी में बदला जाता है। अभी 8वें सीपीसी का फिटमेंट फैक्टर तय नहीं हुआ है। अलग-अलग कर्मचारी संगठन और रिपोर्ट इसे 2.28 से 3.83 के बीच रहने का अनुमान लगा रही हैं।</p>
<p><strong>डीए मर्जर से भी बदल सकता है हिसाब</strong><br>
डीए यानी महंगाई भत्ते को बेसिक पे में मिलाने की मांग भी कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में शामिल है। अगर डीए का विलय बेसिक पे में होता है, तो इसका असर पीएफ, पेंशन, ग्रेच्युटी और दूसरे भत्तों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें आना बाकी हैं। उम्मीद है कि आयोग करीब 18 महीने में अपनी सिफारिशें देगा। ऐसे में 2027 में सैलरी बढ़ोतरी की तस्वीर साफ हो सकती है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>Russia&#45;India Train: राजधानी&#45;शताब्दी से मॉस्को पहुंचने में लगेंगे कितने दिन? सफर लंबा, फायदे अनगिनत</title>
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<description><![CDATA[  नईदिल्ली  रूस-भारत की दोस्ती के बारे में बताने की जरूरत नहीं है क्योंकि ये सोवियत संघ के जमाने से इतनी गहरी रही है कि गाढ़े वक्त में दोनों साथ रहे हैं. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब भारत दौरे पर आए थे, तब भी दोनों देशों ने इस दोस्ती को सेलिब्रेट करते हुए कहा था कि … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 09:45:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नईदिल्ली </strong><br>
रूस-भारत की दोस्ती के बारे में बताने की जरूरत नहीं है क्योंकि ये सोवियत संघ के जमाने से इतनी गहरी रही है कि गाढ़े वक्त में दोनों साथ रहे हैं. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब भारत दौरे पर आए थे, तब भी दोनों देशों ने इस दोस्ती को सेलिब्रेट करते हुए कहा था कि रूस और भारत बुरे वक्त के साथी हैं. अब इस दोस्ती को और पक्की करने के लिए रूस ने भारतीय महासागर तक पहुंचने वाले रेल मार्ग की संभावना तलाशने का प्रस्ताव रखा है. रूसी उप-प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने रूसी एजेंसी TASS को दिए इंटरव्यू में जैसे ही कहा कि वे भारत तक पहुंचने के लिए एक ट्रेन रूट पर काम करना चाहते हैं, ये पूरी दुनिया की सुर्खियों में आ गया. अब दिलचस्प सवाल ये है कि भारत की रूस से 4500 किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी ट्रेन से तय होगी, तो इसमें कितना वक्त लगेगा?</p>
<p>रूस का कहना है कि बोस्फोरस और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए वैकल्पिक रूट पर विचार करना जरूरी है. ऐसे में रूस से तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए भारत तक पहुंचने वाले संभावित मार्ग का उल्लेख किया गया है. रूसी उप प्रधानमंत्री के मुताबिक भारत तक पहुंच देने वाला कोई भी विकल्प स्वीकार्य है. हालांकि यह प्रस्ताव अभी चर्चा के चरण में है. इसे लेकर दोनों देशों की ओर से कोई स्पष्ट परियोजना, समय सीमा, यात्री ट्रेन सेवा, टिकट फेयर या लॉन्च की तारीख घोषित नहीं हुई है। </p>
<p><strong>हाई-स्पीड ट्रेन से मास्को पहुंचने में कितना वक्त लगेगा?</strong><br>
    भारत में वर्तमान में सबसे तेज चलने वाली ट्रेनें वंदे भारत जैसी सेवाएं हैं, जिनकी मैक्सिमम स्पीड कुछ रूट पर 160 किलोमीटर प्रति घंटा है. प्रस्तावित रूस-भारत रेल मार्ग की सटीक लंबाई अभी तय नहीं है, लेकिन मॉस्को से दिल्ली तक वायु मार्ग करीब 4,340 किलोमीटर है. अगर ये शताब्दी-राजधानी जैसी ट्रेनों से तय की जाए, जिनकी स्पीड 130-150 किलोमीटर प्रतिघंटा है, तो इसमें 33 घंटे का वक्त लगेगा। </p>
<p>    चूंकि रेल रूट को तुर्कमेनिस्तान-ईरान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान से गुजारा जाएगा, तो इसकी अनुमानित दूरी 6000 से 7500 किलोमीटर या उससे अधिक हो सकती है. मान लें कि कुल दूरी करीब 7000 किलोमीटर है और अगर ट्रेन लगातार 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलती है. ऐसे में इसमें करीब 44 घंटे यानी लगभग दो दिन लगेंगे लेकिन 130-150 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से इसमें 50-53 दिन लग जाएंगे। </p>
<p>    थोड़ा और व्यावहारिक होकर देखें, तो सीमा पार जांच, स्टॉप, गेज परिवर्तन, ट्रैक की स्थिति और औसत गति कम होने के कारण यह समय 3 से 5 दिन या उससे अधिक हो सकता है.  भविष्य में भारत की प्रस्तावित बुलेट ट्रेन जैसी 300-320 किलोमीटर प्रति घंटे की गति वाली सेवाएं उपलब्ध हों तो समय आधा रह सकता है, लेकिन तब भी अंतरराष्ट्रीय रूट पर आने वाली समस्याएं यात्रा को और लंबा करेंगी। </p>
<p>हालांकि यह अनुमान पूरी तरह काल्पनिक है क्योंकि मार्ग अभी प्रस्ताव मात्र है. यह विचार ऐतिहासिक रूप से भी दिलचस्प है. 19वीं सदी में भी रूस से भारत तक रेल जोड़ने के प्रस्ताव आए थे लेकिन आज के संदर्भ में यह रूस की रणनीतिक जरूरतों और भारत-रूस संबंधों को ये नई दिशा दे सकता है. सफलता कई देशों के सहयोग, निवेश और स्थिरता पर निर्भर करेगी. फिलहाल यह एक महत्वाकांक्षी प्रस्ताव है जो भविष्य की कनेक्टिविटी की संभावनाएं खोलता है, लेकिन इसे हकीकत में बदलने में काफी समय और प्रयास लगेंगे। </p>
<p><strong>रूस-भारत के बीच ट्रेन सेवा मील का पत्थर क्यों?</strong></p>
<p>    भारत-रूस रेल लिंक का मुख्य उद्देश्य माल ढुलाई के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार करना है, ताकि समुद्री मार्गों पर निर्भरता घटे. होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल व्यापार का करीब 25 प्रतिशत और एलएनजी शिपमेंट का करीब 20 प्रतिशत गुजरता है.क्षेत्रीय तनावों के बीच ऐसे चोकपॉइंट्स की सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है. ऐसे में ये अहम विकल्प बन सकता है। </p>
<p>    इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) जैसी पहल पहले से रूस, ईरान और भारत के बीच मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा दे रही है. रूस, मध्य एशिया और ईरान में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर का कुछ हिस्सा पहले से सक्रिय है और माल परिवहन बढ़ रहा है. ऐसे में उसे इसका अनुभव है। </p>
<p>    बावजूद इसके प्रस्तावित मार्ग में कई दिक्कतें भी आने वाली हैं- क्रॉस बॉर्ड स्टैंडर्ड, रेल गेज में समानता नहीं होना, जियोपॉलिटकल  कठिनाइयां और भारत तक निर्बाध कनेक्टिविटी. पाकिस्तान और अफगानिस्तान से गुजरने वाले रूट पर सुरक्षा और सहयोग संबंधी चुनौतियां आने वाली हैं. अगर यह हो जाता है तो रूस के लिए भारतीय महासागर तक सीधी भूमि पहुंच मिलेगी. भारत के लिए यह मध्य और दक्षिण एशिया के साथ ओवरलैंड कनेक्टिविटी मजबूत कर सकता है. माल ढुलाई में पारंपरिक स्वेज नहर मार्ग की तुलना में समय बचत की उम्मीद है। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>FCRA बिल पर NDA क्यों दिखा रहा नरमी? लोकसभा&#45;राज्यसभा में दो&#45;तिहाई बहुमत से कितनी दूर है सरकार</title>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 09:45:10 +0530</pubDate>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>संसद का मॉनसून सत्र अब महज चार दिनों में खत्म होने वाला है। हालांकि महिला आरक्षण, परिसीमन और FCRA जैसे अहम बिलों को लेकर अब भी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। इनमें से कोई भी विधेयक सोमवार को लोकसभा की कार्यसूची में शामिल नहीं है। अब खबर है कि सरकार इन महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर फूंक -फूंक कर कदम रख रही है। समझते हैं कि इस वक्त संसद में सीटों का गणित क्या कहता है।</p>
<p>बता दें कि कांग्रेस और उसके ज्यादातर सहयोगियों ने भले ही परिसीमन और FCRA संशोधन बिल का विरोध करने की बात कही है, लेकिन बीते कुछ दिनों में सरकार की ओर से संपर्क साधे जाने के बाद कुछ विपक्षी दलों ने इन विधेयकों को लेकर अपने रुख में नरमी के भी संकेत दिए हैं। अब माना जा रहा है कि केंद्र सरकार परिसीमन बिल और महिला आरक्षण को लागू करने के लिए DMK और NCP (शरदचंद्र पवार) का समर्थन जुटाने के उद्देश्य से FCRA विधेयक पर अपने कदम धीमे कर रही है।</p>
<p><strong>FCRA बिल फिलहाल होल्ड पर?</strong><br>
जानकारी के मुताबिक संसद की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में मॉनसून सत्र के बचे हुए चार दिनों के एजेंडे को अंतिम रूप दिया जाना है। हालांकि सोमवार के शुरुआती एजेंडे में चार नए विधेयक पेश करने की बात तो कही गई है, लेकिन FCRA संशोधन विधेयक का कहीं जिक्र नहीं है। ऐसे में यह संकेत हैं कि FCRA में संशोधन को लेकर जारी हंगामे के बीच सरकार फिलहाल इसे होल्ड पर रख सकती है।</p>
<p><strong>द्रमुक ने किया है विरोध</strong><br>
इससे पहले विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA को लेकर द्रमुक अपनी स्थिति साफ कर चुकी है। DMK नेता उदयनिधि स्टालिन ने पिछले सप्ताह एक इंटरव्यू कहा था कि उनकी पार्टी ने न तो अतीत में परिसीमन विधेयक का समर्थन किया है और न ही भविष्य में करेगी। दूसरी तरफ डीएमके प्रमुख एम के स्टालिन ने भी अलग अलग चर्च के प्रतिनिधिमंडलों की उस मांग का खुलकर समर्थन किया है, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह से विधेयक को वापस लेने या समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की अपील की गई थी।</p>
<p><strong>कई धीमी पड़ी सरकार?</strong><br>
भाजपा के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ NDA के लिए स्थिति फिलहाल पेचीदा है। सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण कानून को लागू कराने के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश में जिसके लिए DMK और NCP(SP) का साथ जरूरी है। हालांकि DMK और सुप्रिया सुले की अगुवाई वाली एनसीपी (एसपी) दोनों ही FCRA बिल के सख्त प्रावधानों के खिलाफ रही हैं। ऐसे में परिसीमन के मुद्दे पर इन पार्टियों को साथ लाने के लिए सरकार FCRA बिल को लेकर नरमी बरत रही है।</p>
<p><strong>सीटों का क्या गणित?</strong><br>
अगर लोकसभा के सभी 540 मौजूदा सांसद वोट डालते हैं तो परिसीमन विधेयक को पास कराने के लिए 360 वोट चाहिए होंगे। फिलहाल एनडीए के पास 319 सांसदों का समर्थन है। इसमें तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसद और शिवसेना (यूबीटी) से शिवसेना में आए 6 सांसद भी शामिल हैं। इसके अलावा एनडीए को YSR कांग्रेस के सांसदों समेत पांच और सांसदों के समर्थन का भी भरोसा है। YSR कांग्रेस ने अप्रैल में भी विधेयक के पक्ष में मतदान किया था।</p>
<p>अब अगर डीएमके सरकार के साथ आकर परिसीमन विधेयक के पक्ष में वोट करती है, तो एनडीए का आंकड़ा 346 तक पहुंच जाएगा। ऐसे में बहुमत के लिए उसे सिर्फ 14 और वोट चाहिए होंगे। वहीं, अगर डीएमके मतदान से वॉकआउट करती है, तो कुल मतदान करने वाले सांसदों की संख्या 518 रह जाएगी। ऐसे में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 345 होगा। ऐसी स्थिति में एनडीए को 21 और सांसदों का समर्थन जुटाना पड़ेगा।</p>
<p>वहीं राज्यसभा की बात करें तो एनडीए के पास फिलहाल 154 सांसद हैं। एनडीए को YSR कांग्रेस के चार सांसदों का समर्थन मिलने की उम्मीद है। इस तरह राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए एनडीए को सिर्फ छह और वोटों की जरूरत होगी।</p>]]> </content:encoded>
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<title>EPFO Alert: फर्जीवाड़े से बचना है तो तुरंत करें ये 6 काम, छोटी सी गलती पड़ सकती है भारी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली EPFO Fraud Alert: डिजिटल दौर में PF से जुड़ी ज्यादातर सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। ऐसे में EPFO (Employees’ Provident Fund Organisation) के सदस्य घर बैठे UAN, PF बैलेंस, क्लेम और दूसरी सर्विस का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन, सुविधा बढ़ने के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी का खतरा भी बढ़ा है। इसी को देखते हुए … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 09:45:06 +0530</pubDate>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p><strong>EPFO Fraud Alert:</strong> डिजिटल दौर में PF से जुड़ी ज्यादातर सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। ऐसे में EPFO (Employees’ Provident Fund Organisation) के सदस्य घर बैठे UAN, PF बैलेंस, क्लेम और दूसरी सर्विस का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन, सुविधा बढ़ने के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी का खतरा भी बढ़ा है। इसी को देखते हुए EPFO ने अपने सदस्यों को फर्जी वेबसाइट, संदिग्ध लिंक, SMS, ईमेल और सोशल मीडिया संदेशों से सावधान रहने की सलाह दी है। EPFO ने 9 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए सदस्यों से कहा कि किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले सोचें, वेबसाइट का URL जांचें और अपनी निजी जानकारी को सुरक्षित रखें। खासकर UAN, आधार, PAN, बैंक अकाउंट की जानकारी, पासवर्ड और OTP जैसी संवेदनशील जानकारी किसी अनजान वेबसाइट या व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।</p>
<p>EPFO की चेतावनी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि साइबर ठग अक्सर ऐसी फर्जी वेबसाइट या लिंक तैयार करते हैं, जो देखने में सरकारी वेबसाइट जैसी लगती हैं। कई बार लोगों को SMS, WhatsApp, ईमेल या सोशल मीडिया के जरिए संदेश भेजकर कहा जाता है कि उनका UAN बंद होने वाला है, PF अकाउंट अपडेट करना जरूरी है, KYC तुरंत पूरा करें या किसी समस्या के कारण उनका क्लेम अटक गया है। इसके साथ एक लिंक दिया जाता है। जैसे ही व्यक्ति उस लिंक पर क्लिक करके अपनी जानकारी भरता है, उसकी निजी और वित्तीय जानकारी ठगों के हाथ लग सकती है। कुछ मामलों में ठग OTP हासिल करके बैंक खाते से पैसे निकालने की कोशिश भी कर सकते हैं। इसलिए केवल किसी वेबसाइट का सरकारी जैसा दिखना यह साबित नहीं करता कि वह असली है।</p>
<p>EPFO के सदस्यों को सबसे पहले यह आदत डालनी चाहिए कि PF से जुड़ी किसी भी सर्विस के लिए आधिकारिक वेबसाइट का इस्तेमाल खुद करें। किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक करके EPFO की सेवा खोलने से बचें। अगर आपको कोई SMS, ईमेल या WhatsApp संदेश मिलता है और उसमें तुरंत कार्रवाई करने के लिए कहा जाता है, तो घबराने के बजाय पहले उसकी सत्यता जांचें। खास तौर पर ऐसे संदेशों से सावधान रहें, जिनमें अकाउंट बंद होने, पैसे मिलने, KYC अपडेट या PF क्लेम के नाम पर तुरंत OTP, पासवर्ड या बैंक डिटेल मांगी जाती हो।</p>
<p>दूसरा जरूरी कदम वेबसाइट का URL ध्यान से जांचना है। साइबर ठग असली वेबसाइट के नाम में मामूली बदलाव करके नकली वेबसाइट बना सकते हैं। उदाहरण के लिए किसी अक्षर की स्पेलिंग बदलना, अतिरिक्त शब्द जोड़ना या अलग डोमेन का इस्तेमाल करना आम तरीका है। इसलिए लॉगिन करने से पहले वेबसाइट के पते को ध्यान से देखें। अगर URL अजीब दिखाई दे, उसमें अनावश्यक शब्द हों या वेबसाइट पर पहुंचने का तरीका संदिग्ध हो, तो वहां अपनी जानकारी बिल्कुल न भरें।</p>
<p>तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण सावधानी है कि UAN, Aadhaar, PAN, बैंक डिटेल, पासवर्ड और OTP को किसी अनधिकृत वेबसाइट या व्यक्ति के साथ साझा न करें। OTP को कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति को बताना सुरक्षित नहीं है। इसी तरह ATM PIN, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड और अन्य वित्तीय जानकारी भी किसी के साथ शेयर नहीं करनी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति फोन करके खुद को EPFO अधिकारी बताता है और आपसे OTP या लॉगिन डिटेल मांगता है, तो तुरंत सावधान हो जाएं।</p>
<p>चौथा नियम यह है कि SMS, सोशल मीडिया और ईमेल से मिले अनवेरिफाइड लिंक पर क्लिक न करें। अगर आपको EPFO से संबंधित कोई सेवा इस्तेमाल करनी है, तो लिंक पर क्लिक करने के बजाय आधिकारिक वेबसाइट का पता अपने ब्राउजर में खुद टाइप करके वेबसाइट खोलना ज्यादा सुरक्षित तरीका है। इससे फर्जी लिंक के जरिए गलत वेबसाइट पर पहुंचने का जोखिम काफी कम किया जा सकता है।</p>
<p>5वीं सावधानी के तौर पर किसी भी संदिग्ध वेबसाइट, संदेश या साइबर फ्रॉड की कोशिश को नजरअंदाज न करें। अगर आपको लगता है कि कोई लिंक या संदेश फर्जी है, तो उसकी जानकारी संबंधित आधिकारिक माध्यम या साइबर अपराध रिपोर्टिंग चैनल के जरिए दें। इससे दूसरे लोग भी ऐसे धोखे से बच सकते हैं। साथ ही अगर गलती से आपने किसी संदिग्ध वेबसाइट पर अपनी संवेदनशील जानकारी डाल दी है, तो तुरंत संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान से संपर्क करना और आवश्यक सुरक्षा कदम उठाना जरूरी है।</p>
<p>छठी और सबसे जरूरी बात यह है कि EPFO खुद फोन कॉल, SMS, WhatsApp, सोशल मीडिया या ईमेल के जरिए OTP, पासवर्ड या लॉगिन क्रेडेंशियल मांगने की प्रक्रिया नहीं अपनाता। इसलिए अगर कोई व्यक्ति EPFO के नाम पर आपसे ऐसी जानकारी मांगता है, तो उस पर भरोसा न करें। ठग अक्सर सरकारी संस्थाओं का नाम और लोगो इस्तेमाल करके लोगों में विश्वास पैदा करने की कोशिश करते हैं।</p>
<p>आज PF से जुड़े कई काम ऑनलाइन किए जा सकते हैं, इसलिए UAN और दूसरी व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है। फर्जी लिंक पर क्लिक न करना, URL की जांच करना और OTP व वित्तीय जानकारी किसी के साथ साझा न करना साइबर फ्रॉड से बचने के सबसे आसान तरीकों में शामिल हैं। याद रखें, EPFO से जुड़ी किसी भी ऑनलाइन सेवा के लिए जल्दबाजी में लिंक खोलने के बजाय पहले उसकी प्रामाणिकता जांचना ज्यादा सुरक्षित है। आपकी कुछ सेकंड की सावधानी आपके PF खाते, बैंक खाते और वर्षों की मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।</p>
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<title>हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति कैसे होती है? जानें CJI, कॉलेजियम और केंद्र की पूरी भूमिका</title>
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<pubDate>Mon, 10 Aug 2026 23:15:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>हाईकोर्ट, के, चीफ, जस्टिस, की, नियुक्ति, कैसे, होती, है, जानें, CJI, कॉलेजियम, और, केंद्र, की, पूरी, भूमिका</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p> देश के सात हाईकोर्ट इस समय नियमित चीफ जस्टिस के बिना चल रहे हैं. इस बीच सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कोलेजियम ने चार हाईकोर्ट में नियमित चीफ जस्टिस नियुक्त करने के लिए चार नामों की सिफारिश की है. इनमें बॉम्बे, कलकत्ता, पटना और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट शामिल हैं. कोलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी को बॉम्बे हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है. बॉम्बे हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस जस्टिस रवींद्र वी. घुगे को कलकत्ता हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने का प्रस्ताव है. दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस वी. कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा को नियमित चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है। </p>
<p>यहां बड़ा सवाल यह है कि आखिर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति होती कैसे है? क्या इसमें राज्य सरकार की कोई भूमिका होती है? क्या मुख्यमंत्री या राज्यपाल किसी नाम को रोक सकते <strong>हैं? और क्या पूरी प्रक्रिया सीधे सीजेआई के हाथ में होती है?पहले समझिए, हाईकोर्ट के CJ की नियुक्ति कौन करता है</strong>। </p>
<p>हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 217 के तहत होती है. नियुक्ति का अंतिम अधिकार राष्ट्रपति के पास होता है. यानी तकनीकी तौर पर चीफ जस्टिस की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं. लेकिन, राष्ट्रपति किसी नाम का अपने स्तर पर चयन नहीं करते. नामो के चयन का काम कोलेजियम व्यवस्था करती है. यही वजह है कि व्यवहार में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम सबसे अहम भूमिका निभाता है. यहां एक बात समझना जरूरी है. सीजेआई अकेले किसी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का नाम तय नहीं करते. नाम पर फैसला सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम करता है. मौजूदा वक्त में कोलेजियम में चीज जस्टिस और उनके बाद कुछ <strong>सीनियर जज शामिल होते हैं</strong>। <br>
<strong>चीफ जस्टिस का नाम कहां से आता है?</strong></p>
<p>हाईकोर्ट के सामान्य जज की नियुक्ति और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति की प्रक्रिया में बड़ा अंतर है. हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव संबंधित हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अपने दो वरिष्ठतम जजों से सलाह लेकर तैयार करते हैं. इसके बाद यह प्रस्ताव राज्य सरकार और राज्यपाल की मंजूरी के बाद सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के पास पहुंचता है. फिर सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम केंद्र सरकार के जरिए राष्ट्रपति तक नाम भेजता है. फिर राष्ट्रपति हाईकोर्ट में जजों को नियुक्त करते हैं। </p>
<p>लेकिन किसी हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने के मामले में संबंधित हाईकोर्ट का कोलेजियम किसी व्यक्ति को चीफ जस्टिस बनाने का अंतिम फैसला नहीं करता. इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम करता है. यही कारण है कि देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में चीफ <strong>जस्टिस बनाने के लिए अक्सर दूसरे हाईकोर्ट के वरिष्ठ जजों के नाम सामने आते हैं</strong>। <br>
<strong>अपने हाईकोर्ट का जज वहीं का चीफ जस्टिस नहीं बनता?</strong></p>
<p>इसके पीछे न्यायपालिका में लंबे समय से चली आ रही एक परंपरा है. आमतौर पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के पद पर उसी हाईकोर्ट के बजाय दूसरे हाईकोर्ट के जज को नियुक्त करने की कोशिश की जाती है. इसका उद्देश्य जूडिशियरी की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को मजबूत करना है. माना जाता है कि किसी जज को उसके मूल हाईकोर्ट से बाहर चीफ जस्टिस बनाना स्थानीय प्रभाव और संभावित हितों के टकराव को कम करता है. मौजूदा सिफारिशों में भी इसका उदाहरण दिखाई देता है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी के नाम की बॉम्बे हाईकोर्ट के लिए सिफारिश हुई है. वहीं दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस वी. कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है। </p>
<p>
<strong>कोलकाता हाईकोर्ट के लिए भी जीफ जस्टिस की नियुक्ति हुई है.<br>
राज्य सरकार की भूमिका क्या होती है?</strong></p>
<p>इन नियुक्तियों में राज्य सरकार की भूमिका पूरी तरह खत्म नहीं होती. लेकिन राज्य सरकार के पास किसी नाम को अपनी पसंद से तय करने की शक्ति भी नहीं होती. हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया में राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री और राज्यपाल की भूमिका होती है. प्रस्ताव पर राज्य के संवैधानिक अधिकारियों के विचार लिए जाते हैं. इसके बाद मामला केंद्र सरकार के जरिए आगे बढ़ता है. केंद्रीय कानून मंत्रालय भी प्रस्ताव की जांच करता है. उपलब्ध रिपोर्ट और अन्य इनपुट पर विचार किया जाता है. इसके बाद पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के पास भेजा जाता है और सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम उस पर विचार करता है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि राज्य सरकार की कोई भूमिका ही नहीं है. लेकिन, यह भी कहना गलत होगा कि मुख्यमंत्री या राज्य सरकार किसी व्यक्ति को अपनी पसंद से हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बना सकती है। <br>
<strong>क्या राज्य सरकार किसी नाम को रोक सकती है?</strong></p>
<p>राज्य सरकार या राज्य के संवैधानिक अधिकारी प्रक्रिया में अपनी राय दे सकते हैं. किसी प्रस्ताव पर आपत्ति या इनपुट भी सामने आ सकता है. लेकिन अंतिम नियुक्ति की संवैधानिक प्रक्रिया न्यायपालिका और केंद्र के स्तर से होकर गुजरती है. सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम की सिफारिश इस पूरी व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण है. सरकार के पास सिफारिश पर विचार करने और सुझाव देने की भूमिका है. नियुक्ति <strong>का अंतिम आदेश राष्ट्रपति जारी करते हैं। </strong></p>
<p><strong>तो क्या सीजेआई के हाथ में पूरी ताकत होती है?</strong><br>
इसका सीधा जवाब है- नहीं. सीजेआई बेहद महत्वपूर्ण भूमिका में होते हैं. लेकिन वह अकेले फैसला नहीं करते. सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम सामूहिक रूप से नाम पर विचार करता है. मौजूदा व्यवस्था में हाईकोर्ट से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं. इसके बाद सिफारिश केंद्र सरकार के पास जाती है. सरकार प्रक्रिया पूरी करती है. अंत में राष्ट्रपति नियुक्ति का आदेश जारी करते हैं. इस तरह कोलेजियम नाम तय करने में निर्णायक भूमिका निभाता है, केंद्र सरकार प्रक्रिया को आगे बढ़ाती है और राष्ट्रपति नियुक्ति की संवैधानिक कार्रवाई पूरी करते हैं। </p>
<p><strong>हाईकोर्ट के दूसरे जजों की नियुक्ति कैसे होती है?</strong><br>
हाईकोर्ट के सामान्य जजों की नियुक्ति में प्रक्रिया कुछ अलग है. सबसे पहले संबंधित हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस अपने दो वरिष्ठतम जजों के साथ मिलकर नामों पर विचार करता है. इसके बाद प्रस्ताव राज्य और केंद्र के स्तर से गुजरता है. केंद्र सरकार प्रस्ताव की जांच करती है. फिर उसे सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम के सामने रखा जाता है. सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम नाम को स्वीकार कर सकता है, वापस भेज सकता है या किसी अन्य नाम पर विचार कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम की सिफारिश के बाद मामला केंद्र सरकार के पास जाता है और राष्ट्रपति नियुक्ति करते हैं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>पेपर लीक विवाद के बाद NTA का बड़ा कदम, ‘Build New NTA’ मिशन के तहत होंगी नई भर्तियां</title>
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<pubDate>Mon, 10 Aug 2026 23:15:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>पेपर, लीक, विवाद, के, बाद, NTA, का, बड़ा, कदम, ‘Build, New, NTA’, मिशन, के, तहत, होंगी, नई, भर्तियां</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>परीक्षा की सुरक्षा, टेक्नोलॉजी, पारदर्शिता और कामकाज को लेकर NTA पर कई सालों से सवाल उठते रहे हैं. अब NTA अपने काम में सुधार करने की तैयारी कर रहा है. इसके तहत नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने साइबर सिक्योरिटी, सतर्कता, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, रिसर्च, डेटा और कम्युनिकेशन जैसे कई क्षेत्रों में अलग-अलग पदों पर भर्ती निकाली है. इन पदों के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख 21 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है. NTA देश की बड़ी परीक्षाएं जैसे JEE Main, NEET UG, CUET और UGC NET का आयोजन करता है. एजेंसी ने इस नए भर्ती अभियान को “Build New NTA” नाम दिया है.  इसके जरिए अनुभवी प्रोफेशनल्स, रिसर्चर्स और युवाओं को NTA की टीम में शामिल किया जाएगा. यह कदम NEET-UG विवाद और NTA की ओर से 3 मई की परीक्षा को रद्द करके दोबारा आयोजित करने के फैसले के बाद लिया गया है। </p>
<p><strong>NTA को नए टीम की जरूरत</strong><br>
बता दें कि NTA की इस नई भर्ती के तहत अलग-अलग क्षेत्रों के एक्सपर्ट्स को शामिल किया जाएगा. एजेंसी ने 3 साल के कॉन्ट्रैक्ट पर महाप्रबंधक (GM) के लेवल पर भर्ती के लिए 4 पदों पर भर्ती निकाली है. इन पदों में मूल्यांकन, रिसर्च और साइकोमेट्रिक्स, टेस्ट सेंटर नेटवर्क और संचालन. सूचना सुरक्षा और सतर्कता, जांच और फोरेंसिक को शामिल किया गया है. टेस्ट सेंटर नेटवर्क और संचालन के GM की जिम्मेदारी देश के 500 से ज्यादा शहरों और कुछ विदेशी जगहों पर मौजूद NTA के परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था संभालना होगा. इसमें परीक्षा केंद्रों की गुणवत्ता, क्षमता और मानकों का ध्यान रखना शामिल है।  </p>
<p>इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी के GM (CISO) NTA की साइबर सुरक्षा संभालेंगे. वहीं, विजिलेंस, जांच और फोरेंसिक के GM आंतरिक जांच, सतर्कता और डिजिटल फोरेंसिक का काम देखेंगे. इन चीजों से साफ समझ आ रहा है कि NTA केवल परीक्षा कराने के लिए कर्मचारी नहीं रख रहा है, बल्कि परीक्षा की सुरक्षा, व्यवस्था और निष्पक्षता को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञों की भर्ती कर रहा है। </p>
<p><strong>क्यों खास हैं NTA की नई भर्ती </strong><br>
NTA में ये भर्तियां ऐसे समय में हो रही हैं, जब पेपर की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, टेक्नोलॉजी और जानकारी देने के तरीके को लेकर कई सवाल उठ चुके हैं. ऐसे में नई भर्तियों के तहत उनका मकसद इन कमियों को दूर करना है. CISO का काम साइबर सुरक्षा को मजबूत करना होगा. वहीं, सतर्कता, जांच और फोरेंसिक टीम किसी भी गड़बड़ी की जांच और डिजिटल सबूतों पर काम करेगी. इसके साथ ही टेस्ट सेंटर नेटवर्क और ऑपरेशन टीम देशभर के परीक्षा केंद्रों पर अपनी नजर बनाई रखेंगी. कुल मिलाकर, NTA इन नई भर्तियों के जरिए परीक्षा की सुरक्षा, टेक्नोलॉजी, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था और निगरानी को मजबूत करना चाहता है। </p>
<p><strong>डेटा और रिसर्च पर भी दे रहा है ध्यान </strong><br>
NTA में हो रही नई भर्ती केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है. एजेंसी रिसर्च और डेटा के क्षेत्र में भी लोगों को भर्ती कर रही है. NTA ऐसे रिसर्चर की तलाश कर रहा है, जो सही जानकारी और डेटा के आधार पर रिसर्च करने का तरीका तैयार कर सके.  इससे NTA को अपने फैसले, प्लानिंग और कामकाज बेहतर करने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही NTA डेटा एनालिस्ट और मीडिया मॉनिटरिंग से जुड़े पद पर भी भर्ती कर रहा है. इनका काम मीडिया में NTA से जुड़ी खबरों, लोगों की राय और नए मुद्दों पर नजर रखना होगा. इसका मतलब है कि NTA अब डेटा और लोगों की प्रतिक्रिया के आधार पर समस्याओं को पहले पहचानने और समय रहते कार्रवाई करने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। </p>
<p><strong>16 युवा पेशेवर होंगे शामिल </strong><br>
यह भर्ती सिर्फ वरिष्ठ अधिकारियों के लिए नहीं है. NTA ने UPSC के प्रतिभा सेतु पोर्टल के जरिए 16 युवा प्रोफेशनल्स के लिए भी पद निकाले हैं. NTA की ओर से इस तरह की यह पहली पहल है. इन पदों में अकादमिक रिसर्च, कानूनी रिसर्च, वित्त और लेखा जैसे क्षेत्रों में काम करने का मौका मिलेगा. संबंधित पोस्टग्रेजुएट डिग्री या प्रोफेशनल योग्यता वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी. इस तरह NTA की भर्ती में अनुभवी अधिकारी, अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ और करियर की शुरुआत करने वाले युवा शोधकर्ता सभी के लिए मौके हैं। </p>
<p><strong>21 अगस्त है लास्ट डेट </strong><br>
इन नए पदों पर आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए आवेदन की आखिरी तारीख 21 अगस्त 2026 है. NTA से जुड़े नोटिस के मुताबिक, इन प्रोफेशनल पदों पर मिलने वाली सैलरी उम्मीदवारों के अनुभव और इंडस्ट्री में चल रहे मानकों के हिसाब से तय की जाएगी.जो उम्मीदवार आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें NTA के आधिकारिक भर्ती नोटिस में अपने पद की योग्यता, पात्रता और आवेदन करने के तरीके की जानकारी जरूर देखनी चाहिए। </p>]]> </content:encoded>
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<title>छात्र आंदोलन पर संसद में चर्चा को तैयार सरकार, ‘गृह मंत्री देंगे जवाब’; विपक्ष की मांग पर बनी सहमति</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली    संसद के मॉनसून सत्र के बीच छात्र आंदोलन को लेकर सरकार ने बड़ा रुख साफ किया है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सदन में पूरी और विस्तार से चर्चा के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि विपक्ष जिन बिंदुओं को उठाना चाहता है, … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Aug 2026 18:15:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>छात्र, आंदोलन, पर, संसद, में, चर्चा, को, तैयार, सरकार, ‘गृह, मंत्री, देंगे, जवाब’, विपक्ष, की, मांग, पर, बनी, सहमति</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
   संसद के मॉनसून सत्र के बीच छात्र आंदोलन को लेकर सरकार ने बड़ा रुख साफ किया है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सदन में पूरी और विस्तार से चर्चा के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि विपक्ष जिन बिंदुओं को उठाना चाहता है, सरकार उन सभी का जवाब देगी और गृह मंत्री इस मुद्दे पर सरकार की तरफ से जवाब देंगे. हालिया NEET पेपर लीक और छात्र प्रदर्शन को लेकर संसद में विपक्ष लगातार चर्चा की मांग करता रहा है। </p>
<p>किरेन रिजिजू ने विपक्ष से अपील की कि जब छात्र आंदोलन पर चर्चा हो तो सदन में हंगामा न किया जाए. उन्होंने कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए. सरकार का कहना है कि छात्रों से जुड़े मुद्दे बेहद अहम हैं और संसद में इन पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए। </p>
<p><strong>BAC बैठक में सरकार ने रखा चर्चा का प्रस्ताव</strong><br>
बिजनेस एडवाइजरी कमेटी यानी BAC की बैठक में सरकार की ओर से छात्र आंदोलन के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही गई. हालांकि विपक्ष ने इस दौरान अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े चंदे में कथित गड़बड़ी के मामले पर भी चर्चा की मांग रखी. ऐसे में सदन में किन मुद्दों पर चर्चा होगी, इसे लेकर सरकार और विपक्ष के बीच अलग-अलग प्राथमिकताएं सामने आई हैं। </p>
<p>सरकार की तरफ से साफ किया गया है कि छात्र आंदोलन पर चर्चा के दौरान सरकार जवाब देने को तैयार है. रिजिजू ने कहा कि गृह मंत्री इस मुद्दे पर जवाब देंगे और विपक्ष को चर्चा के दौरान हंगामा करने के बजाय अपनी बात सदन में रखनी चाहिए। </p>
<p><strong>FCRA और परिसीमन बिल पर चर्चा नहीं</strong><br>
BAC में प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर चर्चा को लेकर फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया है. सरकार की प्राथमिकता में इस समय छात्र आंदोलन और उससे जुड़े परीक्षा सुधार के मुद्दे शामिल हैं। </p>
<p>इससे पहले सरकार लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 पेश कर चुकी है. यह विधेयक पेपर लीक और परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए मौजूदा कानूनी ढांचे को मजबूत करने से जुड़ा है. सरकार ने विपक्ष से इस पर भी विस्तृत चर्चा में शामिल होने की अपील की थी। </p>
<p><strong>विपक्ष और सरकार के बीच टकराव जारी</strong><br>
छात्र आंदोलन को लेकर संसद के बाहर और अंदर सियासी टकराव लगातार बना हुआ है. विपक्ष छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि छात्रों के हित में कानून और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के कदम उठाए जा रहे हैं. अब सरकार के चर्चा के लिए तैयार होने के बाद नजर इस बात पर है कि सदन में चर्चा कब शुरू होती है और विपक्ष किन मुद्दों को प्रमुखता से उठाता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>एक राज्य का बदलेगा नाम! संसद में पेश होंगे कई अहम बिल, विपक्ष की मांग पर फिर हंगामे के आसार</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली संसद के मानसून सत्र में सोमवार को एक बार फिर हंगामे के आसार हैं। विपक्ष छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संसद में जवाब की मांग पर अड़ा है। वहीं, सरकार लोकसभा में कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी में है। कांग्रेस ने प्रस्तावित विदेशी … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Aug 2026 13:15:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>एक, राज्य, का, बदलेगा, नाम, संसद, में, पेश, होंगे, कई, अहम, बिल, विपक्ष, की, मांग, पर, फिर, हंगामे, के, आसार</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
संसद के मानसून सत्र में सोमवार को एक बार फिर हंगामे के आसार हैं। विपक्ष छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संसद में जवाब की मांग पर अड़ा है। वहीं, सरकार लोकसभा में कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी में है। कांग्रेस ने प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (एफसीआरए) का भी संसद में पुरजोर विरोध करने का ऐलान किया है।</p>
<p><strong>छात्रों की पिटाई के मुद्दे पर अड़ी कांग्रेस</strong><br>
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने  कहा कि छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन गृह मंत्री ने इस पर एक शब्द नहीं कहा। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि बच्चों पर लाठी और पैलेट गन चलाए जाने की कार्रवाई की जवाबदेही तय करनी होगी। कांग्रेस नेता ने कहा कि गृह मंत्री को संसद में इसका जवाब देना ही पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी माफी मांगने के बजाय ‘क्षमा’ बांटने की बात कर रहे हैं।</p>
<p><strong>FCRA विधेयक का होगा विरोध</strong><br>
इस बीच, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केरल के अलाप्पुझा में कहा कि केंद्र सरकार ने अगर एफसीआरए संशोधन विधेयक संसद में पेश किया तो कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल उसका पुरजोर विरोध करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कानून अल्पसंख्यकों और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को निशाना बनाने वाला है। वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्ष इसे पारित नहीं होने देगा। उन्होंने कहा कि जब छात्र पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं तो सरकार को यह बताना चाहिए कि लाठीचार्ज, पैलेट गन और आंसू गैस के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया। वेणुगोपाल ने प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर भी आपत्ति जताई। कांग्रेस नेता वेणुगोपाल ने कहा कि इसका उन राज्यों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को सफलतापूर्वक लागू किया है।</p>
<p><strong>कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी</strong><br>
कांग्रेस एक ओर गृह मंत्री से जवाबदेही की मांग कर रही है तो दूसरी ओर केंद्र सोमवार को संसद में कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी में है। लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह से संबंधित केरल नाम परिवर्तन विधेयक और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयेक कार्यसूची में शामिल हैं। वहीं, राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी एक विधेयक पेश करेंगी।</p>
<p><strong>छात्रों के साथ पूरी ताकत से खड़ा हूं: राहुल गांधी</strong><br>
एनसीपी (एसपी) के सांसद सोमवार को पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले की अगुवाई में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करेंगे। सुले के मुताबिक, यह मुलाकात महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर है। हालांकि, पार्टी ने एफसीआरए बिल पर रुख साफ कर दिया। कहा, विधेयक का मौजूदा स्वरूप पार्टी के विचारों के खिलाफ है। राहुल गांधी ने छात्रों की मांग का समर्थन करते हुए कहा, वह पूरी ताकत से उनके साथ खड़े हैं। प्रयागराज में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में मिले एक छात्र की बात का जिक्र करते हुए कहा, यह सिर्फ उसकी नहीं, पूरी व्यवस्था की हार है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>CRPF के 600 जवानों के लिए ₹4.54 करोड़ मंजूर, बर्फीले मोर्चों पर मिलेंगे खास उपकरण</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके मुश्किल पहाड़ी इलाकों और 6,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर बने टेम्पररी ऑपरेटिंग बेस (TOB) में तैनात CRPF जवानों के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 4.54 करोड़ रुपये से अधिक का फंड मंजूर किया है। इस विशेष बजट से लगभग 600 जवानों के लिए माइनस तापमान में काम … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Aug 2026 11:15:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>CRPF, के, 600, जवानों, के, लिए, ₹4.54, करोड़, मंजूर, बर्फीले, मोर्चों, पर, मिलेंगे, खास, उपकरण</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके मुश्किल पहाड़ी इलाकों और 6,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर बने टेम्पररी ऑपरेटिंग बेस (TOB) में तैनात CRPF जवानों के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 4.54 करोड़ रुपये से अधिक का फंड मंजूर किया है। इस विशेष बजट से लगभग 600 जवानों के लिए माइनस तापमान में काम आने वाले उपकरण और कपड़े खरीदे जाएंगे। इनमें DRDO द्वारा विकसित विशेष ‘हिमसुरक्षा’ कपड़े, स्नो बूट, स्लीपिंग बैग, टेंट, गॉगल्स, थर्मल इनसोल और रेस्क्यू बैग शामिल हैं</p>
<p><strong>आतंकवाद को खत्म करने के लिए मिलेगी मदद</strong><br>
यह कदम अप्रैल 2025 में पहलगाम की बैसारन घाटी में पर्यटकों पर हुए भीषण आतंकी हमले के बाद उठाया गया है। हमले के बाद आतंकी अक्सर ऊंचे इलाकों की 'ढोक' (मिट्टी-पत्थर की झोपड़ियों) और गुफाओं में छिप जाते थे। आतंकियों के इन सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने और लंबी गश्त के दौरान जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए MHA ने जुलाई में इस खरीद प्रस्ताव को हरी झंडी दी, ताकि जवानों को कड़ाके की ठंड में अभियान चलाने में मदद मिले।</p>
<p><strong>सीआरपीएफ ने कब बनाया था पहला TOB</strong><br>
आपको बता दें कि CRPF ने जुलाई 2025 में पहला TOB स्थापित किया था और वर्तमान में जम्मू और कश्मीर दोनों संभागों के पहाड़ी इलाकों में ऐसे 55 बेस काम कर रहे हैं। 15 से 25 हथियाबंद कमांडो की क्षमता वाले इन बेस का मुख्य उद्देश्य आतंकवादियों को मैदानी इलाकों में पहुंचने से पहले ही पकड़ना या ढेर करना है। इन जवानों को प्रशिक्षित कर वहां रुकने, छानबीन और तुरंत हमला करने के लिए तैयार किया जाता है।</p>
<p><strong>पहलगाम हमले के आतंकियों को मारने में मिली थी सफलता</strong><br>
जुलाई 2025 में चलाए गए 'ऑपरेशन महादेव' के दौरान इन्हीं TOB का इस्तेमाल करके पहलगाम हमले में शामिल तीन मुख्य आतंकवादियों को मार गिराया गया था। 2022-23 से लंबित इस TOB योजना को पहलगाम घटना के बाद तेजी से लागू किया गया, और अब नए उपकरणों के मिलने से दुर्गम बर्फीली चोटियों पर सुरक्षा बलों की पकड़ और मजबूत होगी।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>250 साल में 120 किमी बदली कोसी की धारा, जानें क्यों कहलाती है बिहार का शोक</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  भारत की प्रमुख नदियों में से एक है कोसी। यह चीन, नेपाल और भारत से होकर बहने वाली अंतरराष्ट्रीय नदी है। यह भारत में गंगा की प्रमुख सहायक नदी है। कोसी नदी तीन धाराओं सुन कोसी, अरुण कोसी और तमुर कोसी के मिलने से बनती है। ये तीनों धाराएं नेपाल और तिब्बत के … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Aug 2026 10:15:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 भारत की प्रमुख नदियों में से एक है कोसी। यह चीन, नेपाल और भारत से होकर बहने वाली अंतरराष्ट्रीय नदी है। यह भारत में गंगा की प्रमुख सहायक नदी है। कोसी नदी तीन धाराओं सुन कोसी, अरुण कोसी और तमुर कोसी के मिलने से बनती है। ये तीनों धाराएं नेपाल और तिब्बत के हिमालयी इलाके से निकलती हैं। भारत-नेपाल सीमा से लगभग 48 किलोमीटर उत्तर में कोसी में कई बड़ी सहायक नदियां मिलती हैं और यह शिवालिक पहाड़ियों में संकरी 'छतरा गॉर्ज' (घाटी) से होते हुए दक्षिण की ओर बढ़ती है। इसके बाद यह नदी उत्तरी भारत के विशाल मैदान में बिहार में प्रवेश करती है और गंगा नदी की ओर बढ़ती है। लगभग 724 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद यह पूर्णिया के दक्षिण में गंगा नदी में मिल जाती है।</p>
<p><strong>कोसी: महाभारत काल में था 'कौशिकी' नाम</strong><br>
महाभारत और कई महाकाव्यों में कोसी का प्राचीन नाम 'कौशिकी' था। यह नदी मिथिला क्षेत्र की जीवनरेखा भी है। मिथिला क्षेत्र आज बिहार के आधे से अधिक हिस्से और उससे सटे नेपाल के कुछ हिस्सों में फैला हुआ है और यह नदी इस क्षेत्र की लोक-कथाओं और किंवदंतियों का आधार भी है।</p>
<p><strong>कोसी: इस नदी को कहा जाता है बिहार का शोक</strong><br>
    कोसी को अक्सर 'बिहार का शोक' कहते हैं, क्योंकि इससे भीषण बाढ़ आती है। खासकर बिहार में। कोसी नदी 74,500 वर्ग किलोमीटर के इलाके से होकर बहती है, जिसमें से महज 11,070 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा भारत में आता है।<br>
    भारी मात्रा में मलबे के बहाव के कारण अपने अनियमित प्रवाह के लिए जानी जाने वाली कोसी नदी का उत्तरी भारत के विशाल मैदानों में कोई स्थायी मार्ग नहीं है।<br>
    कोसी नदी ने नेपाल से बिहार की ओर बहते हुए बाढ़ और बार-बार अपना रास्ता बदलने के कारण अतीत में भारी तबाही मचाई है।</p>
<p><strong>250 साल में कोसी ने अपना रास्ता बदला</strong><br>
    पिछले 250 सालों में कोसी ने अपना रास्ता पूरब से पश्चिम की ओर 100 किलोमीटर से ज्याद बदला है। नदी के इस अस्थिर स्वभाव की वजह मानसून के मौसम में इसके साथ बहकर आने वाली भारी गाद है।<br>
    कोसी बेसिन की रेतीली मिट्टी में बड़े पैमाने पर मक्का उगाया जाता है। इसकी सात मुख्य सहायक नदियां हैं-सुन कोसी, तामा कोसी या ताम्बा कोसी, दूध कोसी, इंद्रावती, लिखु, अरुण और तामोर या तामार।</p>
<p><strong>कोसी ने ऐसे बदला अपना रास्ता</strong><br>
    भारत के उत्तरी हिस्से (उत्तर-पूर्वी बिहार) में स्थित कोसी नदी का 'फैन' (जलोढ़ शंकु) दुनिया में किसी भी नदी द्वारा बनाए गए सबसे बड़े जलोढ़ शंकुओं में से एक है। यह 180 किलोमीटर लंबा और 150 किलोमीटर चौड़ा है।<br>
    इससे पता चलता है कि पिछले 250 वर्षों में 12 से अधिक अलग-अलग धाराओं के माध्यम से नदी का रास्ता 120 किलोमीटर से अधिक बदला है। कोसी नदी, जो 18वीं सदी में पूर्णिया के पास बहती थी, अब सहरसा के पश्चिम में यह बहती है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>16 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, आंधी&#45;तूफान और बिजली गिरने का खतरा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली मौसम ने एक बार फिर करवट लेने के संकेत दिए हैं। अगले 12 घंटों में देश के कई हिस्सों में जोरदार बारिश का दौर तेज हो सकता है। कई राज्यों में भारी बारिश के साथ आंधी और गरज-चमक का खतरा बना हुआ है। पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन और अचानक … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Aug 2026 10:15:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>राज्यों, में, भारी, बारिश, का, अलर्ट, आंधी-तूफान, और, बिजली, गिरने, का, खतरा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
मौसम ने एक बार फिर करवट लेने के संकेत दिए हैं। अगले 12 घंटों में देश के कई हिस्सों में जोरदार बारिश का दौर तेज हो सकता है। कई राज्यों में भारी बारिश के साथ आंधी और गरज-चमक का खतरा बना हुआ है। पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन और अचानक जलस्तर बढ़ने की आशंका है। ऐसे में लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग के 10 अगस्त के अपडेट में पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सप्ताह के दौरान कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है।</p>
<p>मौसम की गतिविधियों के पीछे अलग-अलग मौसमी प्रणालियों की भूमिका है। दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्र में कम दबाव वाले क्षेत्र का प्रभाव पहले से दर्ज किया गया था। वहीं, IMD के 10 अगस्त के ताजा अपडेट में पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सप्ताह के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बताई गई है। भारी बारिश के बीच पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और अचानक जलस्तर बढ़ने का खतरा बना रहेगा। मैदानी क्षेत्रों में आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं परेशानी बढ़ा सकती हैं। तेज हवाओं के दौरान पेड़ और बिजली के खंभे गिरने का खतरा रहता है। नदी, नाले और जलाशयों के आसपास रहने वाले लोगों, किसानों और मछुआरों को मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जाती है।</p>
<p><strong>16 राज्यों में बारिश-आंधी का अलर्ट</strong><br>
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, उत्तर भारत से लेकर मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र और केरल में मौसम खराब रहने की संभावना जताई गई है। कई जगहों पर गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा भी रहेगा। किसानों और खुले इलाकों में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी।</p>
<p><strong>दिल्ली में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
<strong>दिल्ली (10 अगस्त- भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): </strong>राजधानी में 10 अगस्त को बारिश के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।</p>
<p><strong>यूपी में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
<strong>यूपी (10 अगस्त- बारिश-आंधी का अलर्ट): </strong>मेरठ, हापुड़, नोएडा, मथुरा, आगरा, बुलंदशहर, अलीगढ़, झांसी, इटावा, फिरोजाबाद, कानपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, गाजीपुर, बलिया, बांदा, प्रयागराज, गोरखपुर और देवरिया में बारिश और आंधी की संभावना है। कई इलाकों में 60 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। लखनऊ में अधिकतम तापमान 34 और न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।</p>
<p><strong>बिहार में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
<strong>बिहार (10 अगस्त- भारी बारिश-आंधी का अलर्ट):</strong> गया, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, रोहतास, नवादा, बांका, लखीसराय, मुंगेर, नालंदा, बक्सर, सिवान, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार, बेगूसराय, सहरसा और सुपौल में भारी बारिश के साथ आंधी की संभावना है। पटना में अधिकतम तापमान 34 और न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।</p>
<p><strong>झारखंड में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
<strong>झारखंड (10 अगस्त- भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): </strong>रांची, रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, जमशेदपुर, पलामू, खूंटी और दुमका में बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। कई इलाकों में हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। रांची में अधिकतम तापमान 27 और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।</p>
<p><strong>उत्तराखंड में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
<strong>उत्तराखंड (10 अगस्त- बारिश और आंधी की चेतावनी)</strong>: बागेश्वर, रुद्रप्रयाग, नैनीताल, हरिद्वार, ऋषिकेश, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और पौड़ी गढ़वाल में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। देहरादून में अधिकतम तापमान 28 और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।</p>
<p><strong>हिमाचल में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
<strong>हिमाचल प्रदेश (10 अगस्त- भारी बारिश का अलर्ट)</strong>: कांगड़ा, सिरमौर, शिमला, मंडी, चंबा, कुल्लू और सोलन में मध्यम से तेज बारिश की संभावना है। कुछ इलाकों में तेज हवाएं भी चल सकती हैं। मनाली में अधिकतम तापमान करीब 14 और न्यूनतम 11 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।</p>
<p><strong>जम्मू-कश्मीर में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
<strong>जम्मू-कश्मीर (10 अगस्त- भारी बारिश-आंधी की चेतावनी)</strong>: पुंछ, मीरपुर, कुलगाम, जम्मू, कठुआ, शोपियां, डोडा, राजौरी, किश्तवाड़ और अनंतनाग में भारी बारिश और आंधी की संभावना है। श्रीनगर में अधिकतम तापमान करीब 28 और न्यूनतम 18 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।</p>
<p><strong>पंजाब में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
<strong>पंजाब (10 अगस्त- भारी बारिश की संभावना)</strong>: होशियारपुर, बठिंडा, कपूरथला, मोहाली, पटियाला, संगरूर, बरनाला, अमृतसर और चंडीगढ़ में मध्यम से तेज बारिश हो सकती है। कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ मौसम खराब रहने की संभावना है।</p>
<p><strong>मध्य प्रदेश में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
<strong>मध्य प्रदेश (10 अगस्त- भारी बारिश-तूफान की चेतावनी):</strong> विदिशा, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, रीवा, इंदौर, भोपाल, कटनी, दमोह, पन्ना, टीकमगढ़, जबलपुर, सिवनी, भिंड और छतरपुर में मध्यम से तेज बारिश हो सकती है। इस दौरान तेज हवाएं चलने की संभावना है। भोपाल में अधिकतम तापमान 28 और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।</p>
<p><strong>राजस्थान में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
<strong>राजस्थान (10 अगस्त- बारिश-तूफान का अलर्ट):</strong> झुंझुनू, सीकर, चूरू, कोटा, जालोर, भरतपुर, अजमेर, उदयपुर, जैसलमेर, जयपुर, टोंक, दौसा और अलवर में भारी बारिश और आंधी की संभावना है। कई जगहों पर तेज हवाएं चल सकती हैं। जयपुर में अधिकतम तापमान 32 और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>PM मोदी और JD वेंस की अहम बातचीत, भारत&#45;अमेरिका रणनीतिक साझेदारी पर हुई चर्चा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच अहम बातचीत हुई है। पीएम मोदी ने इसको लेकर एक्स पर पोस्ट किया है। अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री ने बताया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का फोन आया था। हमारे बीच भारत और अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय रणनीतिक साझेदारी को लेकर अहम मुद्दों पर … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 19:15:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मोदी, और, वेंस, की, अहम, बातचीत, भारत-अमेरिका, रणनीतिक, साझेदारी, पर, हुई, चर्चा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच अहम बातचीत हुई है। पीएम मोदी ने इसको लेकर एक्स पर पोस्ट किया है। अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री ने बताया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का फोन आया था। हमारे बीच भारत और अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय रणनीतिक साझेदारी को लेकर अहम मुद्दों पर बात हुई। उन्होंने आगे लिखा कि इस बातचीत के दौरान मैंने अमेरिकी उपराष्ट्रपति और उनकी पत्नी को बेटे के जन्म को लेकर मुबारकबाद भी दी। पीएम मोदी ने जेडी वेंस के पूरे परिवार के शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।</p>
<p><strong>मक्का समझौते के ऐन बाद</strong><br>
पीएम मोदी के पास जेडी वेंस का यह फोन तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ ही दिन बाद आया है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच इस समझौते को काफी अहम माना जा रहा है। अमेरिकी पक्ष ने अभी तक बातचीत का कोई विवरण नहीं दिया है। गौरतलब है कि ईरान ने इस समझौते को एक कागजी आश्वासन भर बताया है। वहीं, उसने दुबई से कहा है कि यह समझौता रक्षा नहीं करेगा।</p>
<p><strong>100 परसेंट टैरिफ वाला बिल भी है टेंशन</strong><br>
बता दें कि अमेरिका में एक बिल पास हुआ है, जिसमें उन देशों पर 100 परसेंट टैरिफ की बात कही गई है जो रूस से तेल खरीदते हैं। इन देशों में भारत और चीन का भी नाम शामिल है। अगर यह बिल अमेरिका के दूसरे सदन में भी पास हो जाता है कि भारत के लिए काफी मुश्किल हो सकती है। अब देखने वाली बात यह है कि क्या अमेरिका इस प्रावधान को लागू करते हुए भारत के प्रति कोई नरमी दिखाता है या नहीं।</p>
<p>गौरतलब है कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत लगातार चल रही है। यह बातचीत दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद माइकल बोलोस शनिवार को निजी यात्रा पर कोच्चि पहुंचे। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार, ट्रंप की बेटी टिफनी ट्रंप के पति माइकल बोलोस के साथ भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर भी मौजूद थे। पुलिस सूत्रों ने कहा था कि अपने प्रवास के दौरान बोलोस कोच्चि और पड़ोसी अलप्पुझा के पर्यटन स्थलों की यात्रा कर सकते हैं। हालांकि उनके कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी की पुष्टि नहीं हुई है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>अरुणाचल के नक्शे में भारत ने जोड़े 27 स्थान, चीन के नामकरण अभियान को करारा जवाब</title>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 16:15:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>अरुणाचल, के, नक्शे, में, भारत, ने, जोड़े, स्थान, चीन, के, नामकरण, अभियान, को, करारा, जवाब</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश के आधिकारिक सर्वे ऑफ इंडिया नक्शे को अपडेट किया है. इसमें चीन की सीमा से जुड़े रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पास, झीलें, बस्तियां और एक युद्ध स्मारक शामिल किए गए हैं. कुल 27 स्थानों को मानक भारतीय नामों के साथ औपचारिक रूप से चिह्नित किया गया है. यह कदम चीन की ओर से अरुणाचल को 'जंगनान' या 'दक्षिण तिब्बत' कहकर बार-बार नाम बदलने के प्रयासों के जवाब में आया है.</p>
<p>भारत हमेशा से कहता रहा है कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न अंग है. नाम बदलने से हकीकत नहीं बदलती. यह अपडेट उस समय हुआ है जब भारत और चीन सीमा पर स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन क्षेत्रीय दावों पर कोई समझौता नहीं हुआ है. सितंबर में नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होने वाला है. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना है, इसलिए इस कदम का कूटनीतिक महत्व बढ़ जाता है.</p>
<p>विवादित सीमा पर जगहों के नाम और पहचान किसी देश की आधिकारिक स्थिति को मजबूत करते हैं. यह सिर्फ भौगोलिक दस्तावेज नहीं बल्कि प्रशासनिक और क्षेत्रीय दावे का बयान है. चीन ने 2017, 2021 और 2023 में अरुणाचल के कई स्थानों के चीनी नाम जारी किए थे. भारत ने हर बार इन दावों को खारिज किया.</p>
<p>अब भारत ने अपने नक्शे में इन स्थानों को स्पष्ट रूप से दर्ज कर अपने नामों को मानकीकृत किया है. सरकार का कहना है कि इससे इन जगहों की सटीक पहचान और जनता में जागरूकता बढ़ेगी. लेकिन चयनित स्थानों में कई 1962 के युद्ध और पहले के टकरावों से जुड़े हैं, जिससे इसका संदेश साफ हो जाता है. भारत सीमा प्रबंधन पर बातचीत जारी रखेगा, लेकिन क्षेत्रीय दावों में कोई नरमी नहीं बरतेगा.</p>
<p><strong>क्या-क्या जोड़ा गया है नक्शे में</strong><br>
सरकार ने चार पहाड़ी दर्रे शामिल किए हैं- द्जो ला, रिजा ला, पुकुर ला और थग ला. थग ला खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि 1962 के भारत-चीन युद्ध के शुरुआती चरण में यहां लड़ाई हुई थी. एक झील सांबो सरोवर को भारतीय नाम के साथ चिह्नित किया गया है.</p>
<p>बाकी 21 स्थानों में लॉन्गजू, माजा, बीसा, बड़ा कुंदुन, छोटा कुंदुन, धन बारी, प्रीतनगर, बुद्धमंदिर, जयरामपुर, तेरीतनगर, रामनगर, जसवंत गढ़, सागर, पद्मा, ज्योतिनगर, बैसाखी, छोटा रोपुक, बड़ा रोपुक, शिवाजी नगर, सुनपुरा और कामलंग नगर शामिल हैं.</p>
<p>इसके अलावा शेर-ए-थापा मेमोरियल भी जोड़ा गया है, जो 1962 के युद्ध में हवलदार शेर-ए-थापा की वीरता की याद दिलाता है. ये स्थान पहले सैन्य नक्शों पर थे, अब आधिकारिक राजनीतिक नक्शे पर आ गए हैं.</p>
<p>लॉन्गजू वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर है. 1959 में भारत-चीन के शुरुआती टकरावों में से एक था. थग ला 1962 युद्ध की शुरुआत से जुड़ा है. जयरामपुर पूर्वी अरुणाचल में लॉजिस्टिक्स हब है. म्यांमार सीमा की ओर कनेक्टिविटी देता है. जसवंत गढ़ 1962 के संघर्ष की याद दिलाता है.</p>
<p>ये सभी स्थान पूर्वी सेक्टर की संवेदनशीलता को रेखांकित करते हैं, जहां 1962 में भारी लड़ाई हुई थी और चीन के दावे अब भी बने हुए हैं. तावांग क्षेत्र के आसपास के स्थान भी शामिल हैं. यह अपडेट भारत की प्रशासनिक उपस्थिति और ऐतिहासिक स्मृति को मजबूत करता है.</p>
<p><strong>चीन की नामकरण रणनीति का जवाब</strong><br>
चीन लगातार अरुणाचल के स्थानों के नए नाम जारी कर रहा है. भारत का यह कदम कार्टोग्राफिक जवाब है. नई दिल्ली उन स्थानों के भारतीय नामों को औपचारिक रूप से दर्ज कर रही है जिन्हें वह अपना क्षेत्र मानती है. यह सीमा को फिर से नहीं खींच रहा बल्कि मौजूदा स्थिति को स्पष्ट और मजबूत कर रहा है.</p>
<p>हाल ही में 6 अगस्त को नई दिल्ली में भारत-चीन सीमा मामलों पर कामकाजी तंत्र यानी डब्ल्यूएमसीसी की 36वीं बैठक हुई थी. दोनों पक्षों ने एलएसी पर स्थिति की समीक्षा की, सीमा प्रबंधन और शांति बनाए रखने पर जोर दिया. ऐसे में नक्शा अपडेट दोनों प्रक्रियाओं को साथ चलाने का संकेत देता है- संवाद जारी रखो, लेकिन दावों पर अडिग रहो.</p>
<p><strong>ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और शी जिनपिंग की संभावित यात्रा</strong><br>
सितंबर 12-13 को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन है. यदि शी जिनपिंग आते हैं तो यह 2019 के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी. 2020 के पूर्वी लद्दाख संकट के बाद संबंधों में तनाव रहा है. अब सावधानीपूर्वक स्थिरता की कोशिश चल रही है. ब्रिक्स मंच पर उभरते देशों के सहयोग पर चर्चा होगी, लेकिन द्विपक्षीय स्तर पर सीमा स्थिरता पृष्ठभूमि में रहेगी.</p>
<p>भारत का संदेश साफ है कि संबंधों के सामान्यीकरण का मतलब क्षेत्रीय दावों में कमी नहीं है. नक्शा अपडेट इसी रुख को भौतिक रूप देता है. दोनों देश एलएसी पर शांति बनाए रखते हुए व्यापक संबंधों को आगे बढ़ा सकते हैं या नहीं, यह परीक्षा का विषय होगा.</p>
<p>यह अपडेट अचानक कोई नया दावा नहीं है बल्कि स्थापित स्थिति का स्पष्ट चित्रण है. भारत सीमा पर शांति चाहता है और सैन्य-कूटनीतिक संवाद जारी रखेगा, लेकिन अरुणाचल पर अपना अधिकार दोहराएगा. 1962 की यादें और वर्तमान संवेदनशीलता दोनों इस कदम में शामिल हैं.</p>
<p>ब्रिक्स जैसे मंच पर सहयोग की संभावनाएं बढ़ सकती हैं, लेकिन सीमा विवाद हल होने तक सतर्कता बनी रहेगी. भारत का यह कार्टोग्राफिक कदम रणनीतिक स्पष्टता और ऐतिहासिक स्मृति दोनों को मजबूत करता है.</p>]]> </content:encoded>
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<title>असम में बाढ़ का कहर, मृतकों की संख्या 99 पहुंची, 1.47 लाख लोग प्रभावित</title>
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<description><![CDATA[ असम असम में बाढ़ से हाहाकार मचा हुआ है। हालात गंभीर बने हुए हैं। शनिवार को एक और मौत की वजह से मरने वालों की संख्या 99 तक पहुंच गई है और 1.47 लाख से अधिक लोग अब भी प्रभावित हैं। असम आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) बुलेटिन में कहा गया है कि नवीनतम मौत गोलाघाट … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 15:15:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>असम, में, बाढ़, का, कहर, मृतकों, की, संख्या, पहुंची, 1.47, लाख, लोग, प्रभावित</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>असम</strong><br>
असम में बाढ़ से हाहाकार मचा हुआ है। हालात गंभीर बने हुए हैं। शनिवार को एक और मौत की वजह से मरने वालों की संख्या 99 तक पहुंच गई है और 1.47 लाख से अधिक लोग अब भी प्रभावित हैं। असम आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) बुलेटिन में कहा गया है कि नवीनतम मौत गोलाघाट जिले से हुई है। इसके साथ ही इस साल बाढ़ से मरने वालों की संख्या 99 तक पहुंच गई।</p>
<p>बुलेटिन में कहा गया है कि 12 जिले सोनितपुर, नागांव, गोलाघाट, शिवसागर, होजई, दरांग, जोरहाट, धेमाजी, चराइदेव, कार्बी आंगलोंग, लखीमपुर और बिश्वनाथ बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रभावित आबादी की संख्या 1,47,376 थी, गोलाघाट सबसे अधिक प्रभावित था क्योंकि 61,735 लोग बाढ़ की चपेट में थे, इसके बाद शिवसागर (43,492) और जोरहाट (24,283) थे। शुक्रवार को प्रभावित जिलों की संख्या 13 थी और जनसंख्या 1.55 लाख से अधिक थी।</p>
<p>प्रशासन 53 राहत शिविर संचालित कर रहा था, जिसमें 8,568 विस्थापित लोगों को आश्रय दिया गया था। अन्य 41 राहत वितरण केंद्र भी कार्यरत हैं। 10,599.89 हेक्टेयर फसल क्षेत्र जलमग्न रहा। एएसडीएमए बुलेटिन में कहा गया है कि धनसिरी (एस) गोलाघाट और नुमालीगढ़ में और कुशियारा श्रीभूमि में खतरे के स्तर से ऊपर बह रही है। प्रभावित जिलों से घरों और सड़कों सहित विभिन्न बुनियादी ढांचे को नुकसान की सूचना मिली है।</p>
<p><strong>'टूटे तटबंधों को ठीक करने के लिए उपाय किए जाएंगे'</strong><br>
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि टूटे हुए तटबंधों की मरम्मत के लिए विशेष उपाय किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने राज्य भर में बाढ़ से प्रभावित लोगों को हर संभव मदद का भरोसा दिया। दरांग जिले के कई बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के दौरान नाहरबारी में कुलसी नदी के किनारे टूटे हुए तटबंध का निरीक्षण करते हुए सरमा ने कहा कि तटबंधों के क्षतिग्रस्त होने के कारण इलाके के लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार टूटे हुए तटबंधों को और अधिक मजबूती के साथ फिर से बनाने के लिए विशेष उपाय करेगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि बाढ़ से प्रभावित सभी परिवारों को सरकारी नियमों के अनुसार जल्द से जल्द जरूरी मदद दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने और प्रभावित इलाकों की हालत देखने के लिए बेंगाबारा का भी दौरा किया। उन्होंने बेंगाबारा गांव के पास नोआ नदी के किनारे टूटे हुए तटबंध का निरीक्षण किया और जारी मरम्मत कार्यों की समीक्षा की। सरमा ने बेंगाबारा गांव में बन रहे आंगनवाड़ी केंद्र और ओटाला एचएस स्कूल में बनाए गए राहत शिविरों का भी दौरा किया और वहां शरण लिए हुए लोगों से बातचीत की।</p>]]> </content:encoded>
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<title>एयर इंडिया फ्लाइट के एक पायलट का डोप टेस्ट पॉजिटिव, दोनों ड्यूटी से हटाए गए</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली एअर इंडिया की AI 2379/फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के पायलटों का डोप टेस्ट किया गया है. कुछ दिन पहले यह फ्लाइट टर्बुलेंस की वजह से करीब 300 फीट नीचे आ गई थी. घटना के बाद तय SOP के तहत दोनों पायलटों का डोप टेस्ट कराया गया. सूत्रों के मुताबिक, AI2379 के पायलटों में से एक … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 13:15:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>एयर, इंडिया, फ्लाइट, के, एक, पायलट, का, डोप, टेस्ट, पॉजिटिव, दोनों, ड्यूटी, से, हटाए, गए</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
एअर इंडिया की AI 2379/फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के पायलटों का डोप टेस्ट किया गया है. कुछ दिन पहले यह फ्लाइट टर्बुलेंस की वजह से करीब 300 फीट नीचे आ गई थी. घटना के बाद तय SOP के तहत दोनों पायलटों का डोप टेस्ट कराया गया.</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, AI2379 के पायलटों में से एक का टेस्ट पॉज़िटिव आया और मामले की पूरी जांच होने तक दोनों पायलटों को ड्यूटी से हटा दिया गया है. फिलहाल इस घटना की जांच DGCA कर रहा है. MoCA के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, DGCA की जांच रिपोर्ट आने के बाद तय किया जाएगा कि मामले की आगे की जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) से कराने की जरूरत है या नहीं.</p>
<p>एअर इंडिया के प्रवक्ता ने इंडिया टुडे को बताया कि टेस्ट के नतीजे उनके पास नहीं हैं इसलिए डोप टेस्ट के बारे में वे कोई दावें या टिप्पणी नहीं कर सकते हैं.</p>
<p>एअर इंडिया के प्रवक्ता ने बताया कि नियमों के तहत फ्लाइट के बाद दोनों पायलटों का स्क्रीनिंग टेस्ट किया गया. हालांकि, टेस्ट के नतीजे एअर इंडिया के साथ साझा नहीं किए गए हैं, इसलिए कंपनी फिलहाल इसके नतीजों पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकती.</p>
<p>एअर इंडिया प्रवक्ता ने कहा, "हमें पता है कि लागू नियमों के अनुसार पायलटों का फ़्लाइट के बाद स्क्रीनिंग टेस्ट किया गया था. हालांकि, टेस्ट के नतीजे एअर इंडिया के साथ शेयर नहीं किए गए हैं, इसलिए हम इस पर कोई टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हैं. एअर इंडिया सिविल एविएशन नियमों के तहत क्रू मेंबर्स का नियमित ड्रग टेस्ट भी करती है. कंपनी जरूरत पड़ने पर जांच कर रहे अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग जारी रखेगी."</p>
<p>मालूम हो, 4 अगस्त को एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में उड़ान के दौरान तेज टर्बुलेंस की घटना सामने आई थी. इस घटना के बाद करीब 24 यात्रियों को मेडिकल परेशानी के चलते अस्पताल ले जाया गया था. सिविल एविएशन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने बताया था कि इनमें से ज्यादातर यात्रियों को शुरुआती कुछ घंटों में ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी.</p>]]> </content:encoded>
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<title>EPFO ने बदले PF से जुड़े 8 नियम, पैसा निकालने से नॉमिनेशन और क्लेम तक बड़ा अपडेट</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने EPF, EPS और EDLI स्कीम, 2026 के तहत प्रोविडेंट फंड से जुड़े नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं। इन बदलावों का मकसद PF खाताधारकों के लिए नियमों को आसान बनाना, निकासी की प्रक्रिया को सरल करना, सेवाओं को डिजिटल बनाना और PF क्लेम का निपटारा … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 11:15:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>EPFO, ने, बदले, से, जुड़े, नियम, पैसा, निकालने, से, नॉमिनेशन, और, क्लेम, तक, बड़ा, अपडेट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने EPF, EPS और EDLI स्कीम, 2026 के तहत प्रोविडेंट फंड से जुड़े नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं। इन बदलावों का मकसद PF खाताधारकों के लिए नियमों को आसान बनाना, निकासी की प्रक्रिया को सरल करना, सेवाओं को डिजिटल बनाना और PF क्लेम का निपटारा तेजी से करना है। नए नियमों में कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान की मौजूदा व्यवस्था को बड़े स्तर पर बरकरार रखा गया है, लेकिन PF से पैसे निकालने की शर्तों, बेरोजगारी के बाद पूरी रकम निकालने की समयसीमा, नॉमिनेशन और क्लेम सेटलमेंट जैसे मामलों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अगर आपका भी EPFO में PF खाता है, तो इन बदलावों को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि भविष्य में PF से पैसे निकालने या क्लेम करने पर इनका सीधा असर पड़ सकता है।</p>
<p>नए नियमों के तहत कर्मचारी के लिए वैधानिक PF योगदान बेसिक सैलरी का 12% बना रहेगा। नियोक्ता भी निर्धारित नियमों के अनुसार योगदान करता रहेगा। PF में अनिवार्य योगदान की सीमा फिलहाल ₹15,000 मासिक वेतन तक लागू रहती है। इसका मतलब है कि इस सीमा के आधार पर कर्मचारी का वैधानिक योगदान अधिकतम ₹1,800 प्रति माह होता है। अगर किसी कर्मचारी का वेतन ₹15,000 से ज्यादा है तो उससे ऊपर की राशि पर PF योगदान कुछ परिस्थितियों में स्वैच्छिक हो सकता है। यानी योगदान की मूल व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।</p>
<p>नए EPF नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव वेतन सीमा को लेकर है। पहले EPF Scheme में सीधे ₹15,000 की वेतन सीमा का उल्लेख था। अब 2026 के नियमों में वेतन सीमा को केंद्र सरकार की ओर से समय-समय पर अधिसूचित सीमा से जोड़ा गया है। इससे भविष्य में सरकार अगर PF के लिए वेतन सीमा में बदलाव करती है तो नियमों में अलग से व्यापक संशोधन करने की जरूरत कम होगी। इससे आगे चलकर PF से जुड़े बदलावों को लागू करना ज्यादा आसान हो सकता है।</p>
<p>EPFO ने PF निकासी से जुड़े कई अलग-अलग नियमों को सरल बनाने की कोशिश की है। पहले अलग-अलग परिस्थितियों में PF निकालने के लिए कई कैटेगरी और अलग शर्तें थीं। अब पात्र निकासी को तीन बड़े वर्गों में रखने का प्रावधान किया गया है—जरूरी जरूरतें, घर से जुड़ी जरूरतें और विशेष परिस्थितियां। इससे PF खाताधारकों के लिए यह समझना आसान हो सकता है कि वे किस स्थिति में अपने खाते से पैसा निकाल सकते हैं। इसका उद्देश्य अलग-अलग निकासी नियमों की जटिलता को कम करना और आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाना है।</p>
<p>नए नियमों में PF खाते की रकम को लेकर भी महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है। EPFO खाते में दो हिस्सों की व्यवस्था जारी रखेगा। इसमें 25% PF बैलेंस न्यूनतम बैलेंस के तौर पर बना रहेगा, जबकि पात्र सदस्य निर्धारित शर्तों के तहत 75% तक रकम की आंशिक निकासी कर सकेंगे। यानी सदस्य को जरूरत पड़ने पर अपने PF की बड़ी राशि तक पहुंच मिल सकती है, लेकिन पूरी रकम निकालने की अनुमति हर परिस्थिति में नहीं होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य रिटायरमेंट के लिए PF में कुछ रकम सुरक्षित रखना भी है।</p>
<p>नए नियमों में PF निकासी के लिए सर्विस अवधि को भी एक समान करने की कोशिश की गई है। पहले अलग-अलग जरूरतों के लिए अलग-अलग सेवा अवधि और शर्तें लागू होती थीं। अब सामान्य तौर पर पात्र निकासी के लिए कम से कम 12 महीने की सेवा पूरी करना जरूरी होगा। मेडिकल जरूरतों के मामले में भी न्यूनतम 12 महीने की सेवा की शर्त रखी गई है। इससे अलग-अलग निकासी कैटेगरी के लिए मौजूद अलग-अलग सेवा अवधि की जटिलता कम हो सकती है।</p>
<p>सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक नौकरी छोड़ने के बाद PF की पूरी रकम निकालने से जुड़ा है। पहले नौकरी छोड़ने के बाद लगातार 2 महीने तक बेरोजगार रहने पर पूरी PF रकम निकालने की सुविधा थी। नए नियमों के तहत पूरी रकम निकालने के लिए अब 12 महीने की बेरोजगारी का इंतजार करना होगा। हालांकि, पात्रता होने पर आंशिक निकासी की सुविधा बनी रहेगी। आंशिक निकासी के लिए भी प्रतीक्षा अवधि को बढ़ाकर 36 महीने किया गया है। इसलिए नौकरी बदलने या नौकरी छूटने की स्थिति में PF का इस्तेमाल करने वाले कर्मचारियों के लिए यह बदलाव खासा महत्वपूर्ण है।</p>
<p>EPFO ने नॉमिनेशन प्रक्रिया को भी डिजिटल बनाने पर जोर दिया है। नए नियमों के तहत फिजिकल नॉमिनेशन फॉर्म को चरणबद्ध तरीके से हटाकर ऑनलाइन नॉमिनेशन को औपचारिक मान्यता दी गई है। इससे कर्मचारियों को कागजी फॉर्म भरने और जमा करने की जरूरत कम होगी। ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए नॉमिनी की जानकारी अपडेट करना और रिकॉर्ड बनाए रखना आसान हो सकता है। खासकर ऐसे मामलों में जहां कर्मचारी के परिवार को भविष्य में PF या पेंशन से जुड़े लाभ प्राप्त करने हों, सही नॉमिनेशन काफी महत्वपूर्ण होता है।</p>
<p>नए नियमों में PF क्लेम के निपटारे की समयसीमा को भी कम किया गया है। अब EPFO को PF क्लेम का निपटारा 20 दिनों के भीतर करने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही देरी होने पर जवाबदेही बढ़ाने के लिए पेनल्टी का प्रावधान भी किया गया है। अगर बिना वैध कारण के क्लेम के निपटारे में देरी होती है तो EPFO को 12% की दर से पेनल इंटरेस्ट देना होगा। नियमों के अनुसार यह राशि संबंधित क्षेत्रीय PF आयुक्त के वेतन से वसूल की जा सकती है। इसका उद्देश्य अधिकारियों को समय पर क्लेम निपटाने के लिए जवाबदेह बनाना और कर्मचारियों को PF की रकम जल्द उपलब्ध कराना है।</p>
<p>EPFO के 2026 के नए नियमों में एक तरफ PF निकासी और डिजिटल सेवाओं को सरल बनाने पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ रिटायरमेंट बचत को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की कोशिश भी दिखाई देती है। कर्मचारी के लिए सबसे अहम बदलाव नौकरी छोड़ने के बाद पूरी PF रकम निकालने की अवधि का 2 महीने से बढ़कर 12 महीने होना, आंशिक निकासी के लिए सेवा और प्रतीक्षा अवधि में बदलाव, ऑनलाइन नॉमिनेशन और 20 दिन में क्लेम सेटलमेंट हैं। हालांकि, PF से पैसा निकालने से पहले कर्मचारी को अपनी पात्रता और लागू शर्तों की जांच जरूर करनी चाहिए, क्योंकि अलग-अलग परिस्थितियों में नियम अलग हो सकते हैं।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>नौकरी का झांसा देकर पुर्तगाल ले गए, पहुंचते ही बेच दी गई भारतीय महिला</title>
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<description><![CDATA[ नागपुर  महाराष्ट्र के नागपुर की 28 साल की एक महिला के साथ विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ऐसा खेल हुआ, जिसे सुनकर किसी के भी होश उड़ जाएं। पुणे की एक कंसल्टेंसी ने महिला को पुर्तगाल में अच्छी नौकरी और मोटी सैलरी का सपना दिखाया। लेकिन विदेश पहुंचते ही उसकी जिंदगी मुसीबत में … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 11:15:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>नौकरी, का, झांसा, देकर, पुर्तगाल, ले, गए, पहुंचते, ही, बेच, दी, गई, भारतीय, महिला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नागपुर </strong></p>
<p>महाराष्ट्र के नागपुर की 28 साल की एक महिला के साथ विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ऐसा खेल हुआ, जिसे सुनकर किसी के भी होश उड़ जाएं। पुणे की एक कंसल्टेंसी ने महिला को पुर्तगाल में अच्छी नौकरी और मोटी सैलरी का सपना दिखाया। लेकिन विदेश पहुंचते ही उसकी जिंदगी मुसीबत में फंस गई।</p>
<p>महिला को कथित तौर पर पुर्तगाल में एक बीयर शॉप मालिक को बेच दिया गया, जहां उससे जबरन काम कराया गया। इतना ही नहीं, उसके साथ मानसिक और शारीरिक रूप से भी प्रताड़ना की गई।</p>
<p><strong>1.5 लाख सैलरी, 8 घंटे काम का लालच</strong><br>
मामला पिछले महीने का बताया जा रहा है। महिला की इंस्टाग्राम के जरिए पुणे की 'We Migrate' नाम की कंसल्टेंसी से पहचान हुई थी। कंपनी के लोगों ने उसे पुर्तगाल में कैशियर की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। उसे बताया गया कि हर महीने करीब 1.5 लाख रुपए सैलरी मिलेगी और दिन में सिर्फ 8 घंटे काम करना होगा।</p>
<p>महिला उनके झांसे में आ गई। वीजा और दूसरे कागजात तैयार कराने के नाम पर उससे अलग-अलग किस्तों में करीब 11 लाख रुपए ले लिए गए।</p>
<p><strong>पासपोर्ट छीना, दो दिनों तक बंदी बनाया</strong><br>
इसके बाद जब महिला पुर्तगाल पहुंची तो कहानी पूरी तरह बदल गई। आरोप है कि वहां पहुंचते ही कथित एजेंटों ने उसका पासपोर्ट छीन लिया और उसे दो दिनों तक एक कमरे में बंद रखा।</p>
<p>इसके बाद महिला को कथित तौर पर एक बीयर शॉप के मालिक को बेच दिया गया। वहां उससे जबरन काम कराया गया। महिला ने विरोध किया तो उसे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।</p>
<p>महिला ने जब अपना पासपोर्ट वापस मांगा तो आरोपियों ने उसे लौटाने के बजाय उससे और पैसे की मांग कर दी। करीब एक महीने तक किसी तरह यह सब सहने के बाद महिला को वहां से निकलने का मौका मिला।</p>
<p>महिला पहले बस से पुर्तगाल के लिस्बन पहुंची और फिर वहां से मैड्रिड गई। इसके बाद वह दोहा के रास्ते किसी तरह भारत वापस लौट आई।</p>
<p><strong>भारत आने के बाद भी खत्म नहीं हुईं मुश्किलें</strong><br>
लेकिन भारत आने के बाद भी उसकी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। आरोप है कि कंसल्टेंसी से जुड़े लोगों ने उससे फिर 3 लाख रुपए मांगे। इस बार उसे माल्टा में नौकरी दिलाने का लालच दिया गया। महिला ने पैसे देने से इनकार किया तो आरोपियों ने उसके पति को जान से मारने की धमकी दी।</p>
<p>आरोपियों ने महिला को झूठे केस में फंसाने की धमकी भी दी। आखिरकार परेशान होकर महिला ने पुणे पुलिस से शिकायत की।</p>
<p>पुलिस ने इस मामले में 'We Migrate' के संचालकों समेत कुल 8 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोपियों पर मानव तस्करी, धोखाधड़ी और जबरन पैसे वसूलने समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस फिलहाल आरोपियों की तलाश में जुटी है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>रूस से भारत ने खरीदा सबसे ज्यादा तेल, अमेरिका भड़का; 100% टैरिफ लगाने की धमकी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्‍ली अमेरिकी सीनेट ने एक बिल को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वालों पर 100 फीसदी तक का टैरिफ लगाया जा सकता है. इस बिल के पास होने के बाद भारत-चीन जैसे देशों पर खतरा बढ़ चुका है.  86-11 के बहुमत से इस बिल को पास किया गया है … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 10:15:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>रूस, से, भारत, ने, खरीदा, सबसे, ज्यादा, तेल, अमेरिका, भड़का, 100, टैरिफ, लगाने, की, धमकी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्‍ली</strong></p>
<p>अमेरिकी सीनेट ने एक बिल को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वालों पर 100 फीसदी तक का टैरिफ लगाया जा सकता है. इस बिल के पास होने के बाद भारत-चीन जैसे देशों पर खतरा बढ़ चुका है.  86-11 के बहुमत से इस बिल को पास किया गया है और अब ये बिल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में जाएगा. अगर वहां भी मंजूरी मिल जाती है तो अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को अधिकार मिल जाएगा कि वो इन देशों पर टैरिफ लगा सकते हैं। </p>
<p>100 फीसदी टैरिफ लगने का ये बिल ऐसे समय में पास हुआ है, जब अमेरिका और भारत के बीच डील फाइनल की जा रही है. दोनों पक्षों की ओर से कहा गया है कि जल्‍द ही दोनों देशों के बीच में डील साइन हो सकती है. हालांकि, अब इस नए टैरिफ की वजह से डील रुकने की आशंका दिख रही है। </p>
<p><strong>इन पांच आयातकों पर लागू हो सकता है 100% टैरिफ</strong><br>
इस बिल के लागू होने के बाद राष्‍ट्रपति ट्रंप के पास, उन पांच देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार होगा, जो रूस से सबसे ज्‍यादा तेल-गैस खरीदते हैं. यह कानून वर्तमान में चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया को कवर करता है, जो रूसी तेल और गैस के सबसे बड़े खरीदारों में से हैं. बिल पास होने के बाद यह खुद से लागू नहीं होंगे, बल्कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति के हाथों में टैरिफ लगाने का अधिकार होगा। </p>
<p>अब इससे एक सवाल यह भी सामने आता है कि भारत आखिर रूस से कितना तेल खरीदा है कि उसपर इस टैरिफ का असर हो सकता है. वह रूसी तेल-गैस खरीदने वाले लिस्‍ट में किस पायदान पर स्थित है. क्‍योंकि कई बार भारत ने रूसी तेल-गैस को बढ़ाया और कम किया है। </p>
<p><strong>रूस से कितना तेल खरीदता है भारत</strong><br>
भारत रूसी तेल का एक बड़ा खरीदार माना जाता है. Kpler और LSEG के जून 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने रूस से करीब 27 लाख बैरल हर दिन तेल का आयात किया है. यह भारत के कुल कच्‍चे तेल का 50 फीसदी से ज्‍यादा है. इसी तरह, जुलाई में भारत ने रूस से 28 लाख बैरल प्रति दिन तेल खरीदा था।  </p>
<p>वहीं चीन ने इसकी तुलना में कम तेल आयात किया है. जून के दौरान चीन का कुल क्रूड आयल आयात गिरकर 29 मिलियन बैरल रह गया, जिसमें रूस से भी खरीद शामिल है. वहीं जुलाई के दौरान इसमें बढ़ोतरी देखी गई और यह 35 मिलियन बैरल हो गया. इसमें रूस से भी आयात शामिल है। </p>
<p><strong>रूसी तेल खरीद ने वाले टॉप 5 देश </strong><br>
सबसे पहले नाम चीन का आता है, जो रूसी तेल का करीब 50 फीसदी हिस्‍सा आयात करता है. इसके बाद, भारत 36 फीसदी रूसी तेल खरीदता है. फिर तूर्की 6 फीसदी, यूरोपीय संघ 5 फीसदी कच्‍चा तेल खरीदते हैं और बाकी देश करीब 3 फीसदी ही रूसी कच्‍चे तेल का आयात करते हैं। </p>
<p><strong>क्‍यों रूसी तेल खरीदारों को निशाना बना रहा अमेरिका? </strong><br>
अमेरिका का कहना है कि रूसी तेल के लगातार खरीदारी से रूस को रेवेन्‍यू मिल रहा है और उसे यूक्रेन जंग को जारी रखने में मदद मिल रही है. इस कारण ये बिल लाया गया है, ताकि रूस की शक्तियों को कम करके जंग को समाप्‍त किया जा सके. रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों को निशाना बनाने के अलावा, विधेयक में रूसी नेताओं, अधिकारियों, कुलीन वर्गों और वित्तीय संस्थानों के खिलाफ भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्‍ताव है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>Metaके एल्गोरिदम पर सरकार का कड़ा प्रहार: डीपफेक और प्रोपेगेंडा रोकने के लिए मांगा ठोस सुधार रोडमैप</title>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 10:15:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Metaके, एल्गोरिदम, पर, सरकार, का, कड़ा, प्रहार:, डीपफेक, और, प्रोपेगेंडा, रोकने, के, लिए, मांगा, ठोस, सुधार, रोडमैप</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारत सरकार ने Meta पर अपना रुख और कड़ा कर दिया है. सरकार ने कंपनी को एक कॉम्पलाइंस रोडमैप पेश करने का निर्देश दिया है. इसका मकसद अपने अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर फैलने वाले प्रोपेगेंडा, भ्रामक जानकारियों और अवैध कंटेंट पर लगाम लगाना है। </p>
<p>इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के साथ मेटा के अधिकारियों की शुक्रवार को एक अहम बैठक हुई. इस दौरान मेटा की तकनीकी टीम ने एक प्रेजेंटेशन दिया. सूत्रों के मुताबिक, पूरी चर्चा मेटा के एल्गोरिदम और उसके टेक्निकल सिस्टम के इर्द-गिर्द केंद्रित रही। </p>
<p>बैठक के दौरान मेटा ने स्वीकार किया कि उसके मौजूदा एल्गोरिदम सिस्टम में कुछ गंभीर खामियां मौजूद हैं. ऐसे में सरकार ने मेटा को अपने एल्गोरिदम सिस्टम में जरूरी और सख्त बदलाव करने को कहा है। </p>
<p>इससे पहले हुई बैठकों में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा को सभी समस्याओं और चिंताओं की पहचान करने और उनके समाधान के लिए एक 'करेक्टिव एक्शन प्लान' सौंपने का निर्देश दिया था। </p>
<p><strong>डाटा लोकलाइजेशन और तुरंत कंटेंट हटाने के निर्देश</strong><br>
सरकार ने कंपनी को देश के 'डाटा लोकलाइजेशन' नियमों का पूरी तरह से पालन करने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही, सरकारी अधिकारियों की फ्लैग किए गए आपत्तिजनक कंटेंट को तुरंत और तेजी से हटाने का सिस्टम बनाने को कहा है। </p>
<p><strong>डीपफेक रोकने के लिए QRTs के साथ तालमेल</strong><br>
इंटरनेट पर तेजी से फैल रहे डीपफेक वीडियो और मॉर्फ्ड कंटेंट पर लगाम लगाने के लिए सरकार बेहद गंभीर है. इसके लिए मेटा को भारत सरकार के कई विभागों में तैनात क्विक रिस्पॉन्स रिस्पॉन्स टीम्स (QRTs) के साथ मिलकर काम करने और मजबूत तालमेल बनाए <strong>रखने के निर्देश दिए गए हैं। </strong></p>
<p><strong>ग्लोबल टीम भारत में ही रहकर करेगी आगे की चर्चा</strong><br>
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मेटा की ग्लोबल टीम आगे की बातचीत के लिए फिलहाल भारत में ही रुकी रहेगी. आने वाले दिनों में आईटी सचिव के नेतृत्व वाली टीम के साथ मेटा अधिकारियों की कई और बैठकें होने की उम्मीद है। </p>
<p>दोनों पक्षों ने माना है कि जब तक इन सभी तकनीकी और सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान नहीं निकल जाता, तब तक बातचीत का ये सिलसिला लगातार जारी रहेगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>LPG सिलेंडर तुरंत मिलेगा! सुबह 6 बजे बुकिंग, 9 बजे तक घर पहुंचेगा सिलेंडर</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली इंडियनऑयल ने एलपीजी ग्राहकों के लिए ‘इंडेन एक्सट्रालाइट नाउ&#039; नाम से एक नई सेवा शुरू की है, जिसके तहत 10 किलोग्राम का हल्का और जंग-मुक्त कंपोजिट एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के सिर्फ 3 घंटे के अंदर घर तक पहुंचाने का दावा किया गया है. आधुनिक परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लॉन्च … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 10:15:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>LPG, सिलेंडर, तुरंत, मिलेगा, सुबह, बजे, बुकिंग, बजे, तक, घर, पहुंचेगा, सिलेंडर</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>इंडियनऑयल ने एलपीजी ग्राहकों के लिए ‘इंडेन एक्सट्रालाइट नाउ' नाम से एक नई सेवा शुरू की है, जिसके तहत 10 किलोग्राम का हल्का और जंग-मुक्त कंपोजिट एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के सिर्फ 3 घंटे के अंदर घर तक पहुंचाने का दावा किया गया है. आधुनिक परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लॉन्च किए गए इस सिलेंडर में ट्रांसपेरेंट बॉडी दी गई है, जिससे उपभोक्ता आसानी से गैस का स्तर देख सकते हैं। </p>
<p>कंपनी के अनुसार, यह नया प्रोडक्ट एक्सप्रेस डिलीवरी, पसंदीदा समय पर सप्लाई, न्यूनतम दस्तावेजों और बेहतर सुरक्षा जैसी सुविधाओं से लैस है, जिससे ग्राहकों को अधिक सुविधाजनक, पारदर्शी और डिजिटल रूप से सक्षम एलपीजी सेवा का अनुभव मिलेगा। </p>
<p><strong>क्या है इंडेन एक्सट्रालाइट नाउ?</strong><br>
इंडियनऑयल का इंडेन एक्सट्रालाइट नाउ 10 किलोग्राम का एक अत्याधुनिक कंपोजिट एलपीजी सिलेंडर है, जिसे ग्राहकों के लिए कुकिंग गैस को अधिक सुविधाजनक, सुरक्षित और सुलभ बनाने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया है. पारंपरिक स्टील सिलेंडरों की तुलना में यह सिलेंडर काफी हल्का और जंग-मुक्त है, जिससे इसे घरों और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आसानी से उठाया, ले जाया और इस्तेमाल किया जा सकता है। </p>
<p>इसकी ट्रांसपेरेंट बॉडी उपभोक्ताओं को सिलेंडर में बचे एलपीजी स्तर को आसानी से देखने की सुविधा भी देती है. इस सेवा की सबसे बड़ी खासियत बुकिंग के 3 घंटे के भीतर होम डिलीवरी का वादा है, जिससे ग्राहकों को गैस रिफिल के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। </p>
<p><strong>क्या है इस सेवा की खासियत?</strong></p>
<p><strong>लॉन्च की गई इस नई सेवा में एलपीजी बु</strong>किंग के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कई ग्राहक-अनुकूल सुविधाएं दी गई हैं। </p>
<p>    बुकिंग के 3 घंटे के अंदर होम डिलीवरी की सुविधा। <br>
    हल्का कंपोजिट एलपीजी सिलेंडर, जिसे पारंपरिक स्टील सिलेंडर की तुलना में आसानी से उठाया और ले जाया जा सकता है। </p>
<p>    न्यूनतम दस्तावेजों के साथ आसान कनेक्शन प्रक्रिया, जिससे नए ग्राहकों के लिए सेवा लेना सरल हो जाता है। </p>
<p>    डिजिटल रूप से सक्षम सेवा प्रणाली, जो बुकिंग और डिलीवरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाती है। <br>
    बेहतर सुरक्षा और उपयोग में आसानी, खासतौर पर शहरी परिवारों, कामकाजी पेशेवरों और छोटे परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए। </p>
<p><strong>कैसे कर सकते हैं इसकी बुकिंग?</strong></p>
<p>नया कनेक्शन और रिफिल बुकिंग कराने के लिए ग्राहक इंडियनऑयल वन (IndianOil ONE) ऐप, इंडियनऑयल की ग्राहक वेबसाइट IndianOil Customer Portal और व्हाट्सएप नंबर 7588888824 का उपयोग कर सकते हैं. इसके जरिए उपभोक्ता नए एलपीजी कनेक्शन के लिए पंजीकरण कराने के साथ-साथ रिफिल बुकिंग भी आसानी से कर सकेंगे। </p>
<p>कंपनी के अनुसार, ‘इंडेन एक्सट्रालाइट नाउ' सेवा इंडियनऑयल के व्यापक इंडेन वितरक नेटवर्क और चुनिंदा इंडियनऑयल रिटेल आउटलेट्स पर उपलब्ध होगी. इससे देश के अधिक उपभोक्ताओं तक इस नई सुविधा की पहुंच सुनिश्चित होगी और ग्राहकों को तेज, सुविधाजनक व बेहतर एलपीजी सेवा का लाभ मिल सकेगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन! संसद में बिल लाने की तैयारी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली बच्चों को इंटरनेट और सोशल मीडिया के दुष्परिणामों से बचाने और डिजिटल स्पेस में उनकी सुरक्षा मजबूत करने के लिए संसद में एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश करने की तैयारी की गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद बैजयंत &#039;जय&#039; पांडा की तरफ से तैयार &quot;सेफगार्डिंग हेल्दी इंटरनेट एनवायरनमेंट्स फॉर लिटिल डिजिटल-नेटिव्स&quot; … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 23:00:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>साल, से, कम, उम्र, के, बच्चों, के, लिए, सोशल, मीडिया, बैन, संसद, में, बिल, लाने, की, तैयारी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>बच्चों को इंटरनेट और सोशल मीडिया के दुष्परिणामों से बचाने और डिजिटल स्पेस में उनकी सुरक्षा मजबूत करने के लिए संसद में एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश करने की तैयारी की गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद बैजयंत 'जय' पांडा की तरफ से तैयार "सेफगार्डिंग हेल्दी इंटरनेट एनवायरनमेंट्स फॉर लिटिल डिजिटल-नेटिव्स" (SHIELD) बिल, 2025 में बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बनाने, डेटा प्राइवेसी, ऑनलाइन गेमिंग और पर्सनलाइज्ड विज्ञापनों को लेकर सख्त नियम प्रस्तावित किए गए हैं।</p>
<p>हालांकि, शुक्रवार को संसद में लगातार हंगामे और सदन के स्थगन के कारण यह बिल औपचारिक रूप से पेश नहीं हो सका।</p>
<p><strong>13 साल से कम उम्र के बच्चों के अकाउंट बनाने पर रोक</strong><br>
शील्ड (SHIELD) बिल में 18 साल से कम उम्र के सभी व्यक्तियों को बच्चा (Minor) माना गया है। बिल के प्रमुख प्रस्ताव हैं:</p>
<p>अभिभावक की सहमति अनिवार्य: 13 साल से कम उम्र के बच्चे बिना अपने माता-पिता या अभिभावक की वेरिफाइड सहमति के सोशल मीडिया या ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर अपना नया अकाउंट नहीं बना सकेंगे।</p>
<p>ट्रैकिंग और प्रोफाइलिंग पर बैन: टेक प्लेटफॉर्म्स को बच्चों के ऑनलाइन व्यवहार को ट्रैक करने, उनकी प्रोफाइलिंग करने या उनके डेटा के आधार पर पर्सनलाइज्ड विज्ञापन दिखाने पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव है।</p>
<p>डेटा रिटेंशन लिमिट: बच्चों का डेटा केवल सर्विस प्रोवाइड करने के लिए जरूरी सीमा तक ही लिया जा सकेगा और अकाउंट इनएक्टिव होने के 90 दिनों के भीतर इसे मिटाना होगा। अभिभावक की मांग पर डेटा को स्थायी रूप से हटाना अनिवार्य होगा।</p>
<p><strong>'पैरेंटल डैशबोर्ड' और ऐज वेरिफिकेशन सिस्टम</strong></p>
<p>ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को बच्चों के अनुकूल बनाने के लिए टेक कंपनियों पर कई तकनीकी जिम्मेदारियां तय करने की सिफारिश की गई है।</p>
<p>ऐसे प्लेटफॉर्म जो नाबालिगों की पहुंच में हैं, उन्हें उम्र की सही पहचान करने वाला मजबूत सिस्टम लागू करना होगा।</p>
<p>अभिभावकों को एक विशेष डैशबोर्ड मिलेगा, जिससे वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे, प्राइवेसी सेटिंग्स मैनेज कर सकेंगे और स्क्रीन टाइम सीमित कर सकेंगे।</p>
<p>प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चे पोर्नोग्राफी, ऑनलाइन सट्टेबाजी, हिंसक/उग्रवादी सामग्री और ड्रग्स से जुड़े कंटेंट के संपर्क में न आएं।</p>
<p><strong>शिकायत निवारण और ₹10 करोड़ तक का जुर्माना</strong><br>
बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाली टेक कंपनियों के खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान रखा गया है।</p>
<p>सभी प्लेटफॉर्म्स पर एक अलग 'Report Child Harm' बटन लगाना होगा। शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर उस पर रिस्पांस देना होगा और 48 घंटे के भीतर शिकायत का निपटारा करना होगा।</p>
<p>सामान्य हानिकारक कंटेंट की शिकायत मिलने पर उसे 36 घंटे के भीतर हटाना होगा। अगर मामला बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) से जुड़ा है, तो इसे 24 घंटे के भीतर टेकडाउन करना अनिवार्य होगा।</p>
<p>नियमों का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म्स पर ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। बार-बार या जानबूझकर उल्लंघन करने पर आईटी एक्ट (IT Act) की धारा 69A के तहत उस प्लेटफॉर्म को भारत में अस्थायी रूप से ब्लॉक किया जा सकता है।</p>
<p><strong>AI डीपफेक पर दूसरा प्रस्तावित बिल</strong><br>
सांसद बैजयंत पांडा का दूसरा बिल 'प्रोटेक्शन ऑफ पर्सनालिटी लाइकनेस फ्रॉम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिसयूज बिल, 2026' है।</p>
<p>यह कानून बिना सहमति के किसी व्यक्ति की आवाज, चेहरे या शारीरिक बनावट की फर्जी AI डीपफेक बनाने और फैलाने पर रोक लगाने का प्रस्ताव करता है। ऐसे AI कंटेंट को नोटिस मिलने के 24 घंटे के भीतर (यौन रूप से अश्लील कंटेंट के मामले में 12 घंटे के भीतर) हटाना होगा। धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग या अश्लीलता फैलाने के लिए डीपफेक बनाने पर 3 साल तक की जेल और ₹10 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>MBBS सीटों पर बड़ा अपडेट! NEET सीट मैट्रिक्स से भी बढ़ीं मेडिकल सीटें, केंद्र ने जारी किया नया ब्योरा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में एमबीबीएस की सीटों में 2014 की तुलना में 172.4 फीसदी का इजाफा हुआ है। वर्ष 2014 से पहले ये सीटें 51,348 थीं, जो अब बढ़कर 1,39,864 हो गई हैं। ये सीटें हाल ही में नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी) की ओर से जारी एमबीबीएस सीट मैट्रिक्स … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 22:00:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>MBBS, सीटों, पर, बड़ा, अपडेट, NEET, सीट, मैट्रिक्स, से, भी, बढ़ीं, मेडिकल, सीटें, केंद्र, ने, जारी, किया, नया, ब्योरा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में एमबीबीएस की सीटों में 2014 की तुलना में 172.4 फीसदी का इजाफा हुआ है। वर्ष 2014 से पहले ये सीटें 51,348 थीं, जो अब बढ़कर 1,39,864 हो गई हैं। ये सीटें हाल ही में नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी) की ओर से जारी एमबीबीएस सीट मैट्रिक्स से भी अधिक है। एमसीसी काउंसलिंग के लिए जारी सीट मैट्रिक्स में एमबीबीएस की 1,36,939 सीटें बताई गई लेकिन सरकार ने संसद में देश में 1,39,864 एमबीबीएस सीटें होने की जानकारी दी है। यानी करीब 2,925 और एमबीबीएस सीटें बढ़ गई हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि देश में मेडिकल कॉलेजों में 118.6% की वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 से पहले देश में 387 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 846 हो गए हैं।</p>
<p><strong>NEET काउंसलिंग 2026</strong></p>
<p><strong>NEET काउंसलिंग प्रक्रिया ऑनलाइ</strong>न होती है, जिसके माध्यम से NEET में उत्तीर्ण होने वाले उम्मीदवारों को उनकी NEET रैंक, श्रेणी, वरीयता और सीटों की उपलब्धता के आधार पर MBBS, BDS, BSc नर्सिंग आदि की सीटें आवंटित की जाती हैं। अखिल भारतीय 15% कोटा, AIIMS, JIPMER, केंद्रीय और डीम्ड विश्वविद्यालयों के लिए NEET काउंसलिंग का आयोजन मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) द्वारा किया जाता है, जबकि शेष 85% राज्य कोटा की सीटों का प्रबंधन संबंधित राज्य काउंसलिंग प्राधिकरणों द्वारा किया जाता है। NEET काउंसलिंग प्रक्रिया में पंजीकरण, चयन प्रक्रिया, सीट आवंटन, दस्तावेज़ सत्यापन और आवंटित कॉलेज में रिपोर्टिंग जैसे विभिन्न चरण शामिल हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने 5 अगस्त 2026 से NEET UG 2026 काउंसलिंग के पहले चरण के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी है।</p>
<p><strong>केंद्रीय विश्वविद्यालय में एमबीबीएस की 2026 की सीटें</strong><br>
केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 2026-27 सत्र के लिए एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) द्वारा NEET UG 2026 के अंकों के आधार पर किया जाता है। योग्य उम्मीदवारों को NEET UG परीक्षा में शामिल होना, एमसीसी काउंसलिंग के लिए पंजीकरण कराना, विकल्प भरना और सीट आवंटन प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक है। एमबीबीएस सीटें प्रदान करने वाले केंद्रीय विश्वविद्यालयों में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) द्वारा अधिसूचित अन्य योग्य विश्वविद्यालय शामिल हैं। एमसीसी और एनएमसी द्वारा अनुमोदित सीट मैट्रिक्स प्रवेश से पहले प्रकाशित किया जा चुका है, जिसमें 823 मेडिकल कॉलेजों में कुल 136,939 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं।</p>
<p><strong>पीजी की कितनी सीटें</strong><br>
अनुप्रिया पटेल ने कहा, देश में मेडिकल पीजी सीटों में 2014 की तुलना में 176.9% की वृद्धि हुई है। पहले ये सीटें 31,185 थीं, जो अब बढ़कर 86,360 हो गई हैं।</p>
<p><strong>बिहार में पिछले 5 वर्षों में वृद्धि:</strong></p>
<p>मेडिकल कॉलेज: बिहार में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में 35% की वृद्धि हुई है, जो 20 से बढ़कर 27 हो गई है।</p>
<p><strong>एमबीबीएस सीटें: </strong>इनमें 77.4% की वृद्धि हुई है, जो 2,415 से बढ़कर 4,285 हो गई हैं</p>
<p><strong>चिकित्सा शिक्षा में सुधार के लिए सरकार द्वारा उठाए गए मुख्य कदम</strong><br>
नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना (CSS): जिला/रेफरल अस्पतालों को अपग्रेड करके नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की योजना के तहत देशभर में 157 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है, जिसमें बिहार के 8 कॉलेज शामिल हैं।<br>
मौजूदा कॉलेजों का सुदृढ़ीकरण और सीटों में वृद्धि (CSS):</p>
<p>83 कॉलेजों में 4977 एमबीबीएस सीटों की वृद्धि के लिए ₹5,972.20 करोड़ की वित्तीय सहायता दी गई है।</p>
<p>प्रथम चरण में 72 कॉलेजों में 4058 पीजी सीटों के लिए ₹1,498.43 करोड़ और द्वितीय चरण में 65 कॉलेजों में 4000 पीजी सीटों के लिए ₹4,478.25 करोड़ मंजूर किए गए हैं।</p>
<p><strong>योजना का चरण-III: </strong>मौजूदा सरकारी मेडिकल कॉलेजों/अस्पतालों के अपग्रेडेशन के लिए इस चरण को मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य ₹1.5 करोड़ प्रति सीट की बढी हुई लागत के साथ 5000 पीजी सीटें और 5023 एमबीबीएस सीटें बढ़ाना है। इन दोनों योजनाओं को पूरा करने की समय-सीमा वर्ष 2028-2029 तक है।</p>
<p>सरकारी मेडिकल कॉलेजों का उन्नयन (PMSSY): सुपर स्पेशलिटी ब्लॉकों के निर्माण द्वारा कॉलेजों के उन्नयन के लिए कुल 75 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनमें से 71 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।</p>
<p>नए एम्स (AIIMS) की स्थापना: देश में 22 एम्स को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 19 एम्स में स्नातक (UG) पाठ्यक्रम शुरू हो चुके हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<title>मैं तो बाबा बागेश्वर नहीं हूं… IIT दिल्ली के छात्रों से PM मोदी ने ऐसा क्यों कहा?</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने छात्रों को उनकी नई शुरुआत के लिए बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों से मजाकिया अंदाज में कहा कि आज सभी छात्र दीक्षांत समारोह में मौजूद हैं, लेकिन … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 17:00:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मैं, तो, बाबा, बागेश्वर, नहीं, हूं…, IIT, दिल्ली, के, छात्रों, से, मोदी, ने, ऐसा, क्यों, कहा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने छात्रों को उनकी नई शुरुआत के लिए बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। </p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों से मजाकिया अंदाज में कहा कि आज सभी छात्र दीक्षांत समारोह में मौजूद हैं, लेकिन उनके मन में भविष्य को लेकर कुछ न कुछ जरूर चल रहा होगा. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं बाबा बागेश्वर तो नहीं हूं, लेकिन कुछ तो चलता होगा.” PM मोदी ने कहा कि हर छात्र के मन में आने वाले कल की अलग-अलग तस्वीर होती है। </p>
<p>PM मोदी ने छात्रों के भविष्य के सपनों का जिक्र करते हुए कहा कि किसी छात्र को अपनी पहली नौकरी और सैलरी का इंतजार होगा, तो कोई स्टार्टअप शुरू करने का सपना देख रहा होगा. वहीं, कुछ छात्र आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का लक्ष्य बना रहे होंगे. उन्होंने कहा कि हर छात्र का सपना और लक्ष्य अलग है, लेकिन सभी के मन में आज एक जैसा उत्साह है। </p>
<p>उन्होंने छात्रों से IIT दिल्ली में अपने पहले दिन को याद करने को कहा. PM मोदी ने कहा कि ऐसा लगता होगा जैसे कल ही ओरिएंटेशन हुआ था और देखते ही देखते आज दीक्षांत समारोह का दिन आ गया. उन्होंने कहा कि आज से सभी छात्रों के जीवन में एक नए अध्याय की <strong>शुरुआत हो रही है। </strong></p>
<p><strong>PM मोदी की GenZ को सलाह</strong></p>
<p>आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवा और खासकर Gen-Z के सामने आने वाली चुनौतियों और अवसरों पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी ताकत तकनीक की रफ्तार है. पीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि आने वाले 20-30 साल की दुनिया कैसी होगी, यह कोई निश्चित रूप से नहीं बता सकता. लेकिन बदलाव के इस दौर में चुनौतियां भी आएंगी और नए अवसर भी पैदा होंगे. उन्होंने छात्रों से कहा कि जो नए चैलेंज के नए समाधान खोजने का साहस रखेगा, उसके लिए मुश्किलें ही मौके में बदल जाएंगी. पीएम मोदी ने यह भी कहा कि युवाओं को सिर्फ सवालों के जवाब खोजने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन सवालों को पहचानना चाहिए जिन्हें दुनिया ने सवाल मानना ही छोड़ दिया है। </p>
<p><strong>'दुनिया तेजी से बदल रही है'</strong><br>
PM मोदी ने कहा कि आज दुनिया का ग्लोबल ऑर्डर तेजी से बदल रहा है और इसके पीछे टेक्नोलॉजी एक बड़ी वजह है. आने वाले 20-30 साल में दुनिया कैसी होगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है. उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी बदलेगी, दुनिया बदलेगी, लेकिन इस बदलती दुनिया में वही आगे बढ़ेगा जो लगातार सीखता रहेगा। </p>
<p>PM मोदी ने कहा, "कई छात्रों को उनकी उपलब्धियों के लिए मेडल मिले हैं. मैं आप सभी को दिल से बधाई देता हूं. हालांकि, अगर उनमें कुछ और लड़कियां होतीं तो और भी अच्छा होता. सिर्फ़ एक या दो ही क्यों? और भी होनी चाहिए थीं। </p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुलामी के दौर और उस समय की पीढ़ी के संघर्ष को भी याद किया. उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी का अपना एक राष्ट्रीय दायित्व होता है. आजादी से पहले लोगों के सामने देश को आजाद कराने का लक्ष्य था. इसके लिए उन्होंने लंबे समय तक संघर्ष किया और त्याग व बलिदान दिया।<br>
 <br>
PM मोदी ने कहा कि आज हम आजाद भारत में सांस ले रहे हैं तो इसके पीछे उस पीढ़ी की मेहनत और कुर्बानी है. आज की चुनौतियां अलग हैं, इसलिए हमारी जिम्मेदारियां भी अलग हैं. उन्होंने छात्रों से कहा कि अगले 30-35 साल में वे जो भी काम करेंगे, उसका असर विकसित भारत के सफर पर पड़ेगा. इसलिए उन्हें हर फैसला लेते समय यह सोचना चाहिए कि इससे देश को क्या फायदा होगा और देश की कौन सी जरूरत पूरी होगी। </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>PM Modi Raghav Chadha Meeting: सुबह&#45;सुबह पीएम मोदी से मिले AAP सांसद राघव चड्ढा, भेंट किया खास तोहफा; लिखा&#45;‘हमेशा याद रखूंगा’</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शनिवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। उन्होंने इस मुलाकात को हमेशा के लिए सुखद यादगार बताया है। पीएम संग अपनी मुलाकात के फोटो उन्होंने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर इसकी जानकारी साझा की है। राघव चड्ढा आम आदमी … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:00:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Modi, Raghav, Chadha, Meeting:, सुबह-सुबह, पीएम, मोदी, से, मिले, AAP, सांसद, राघव, चड्ढा, भेंट, किया, खास, तोहफा, लिखा-‘हमेशा, याद, रखूंगा’</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शनिवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। उन्होंने इस मुलाकात को हमेशा के लिए सुखद यादगार बताया है। पीएम संग अपनी मुलाकात के फोटो उन्होंने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर इसकी जानकारी साझा की है। राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी को छोड़कर हाल ही में भाजपा में शामिल हुए हैं।</p>
<p>राघव चड्ढा ने पोस्ट में लिखा, “एक ऐसी सुबह जिसे मैं हमेशा याद रखूंगा। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से मिलने का सौभाग्य मिला। उनके साथ विस्तार से और ज्ञानवर्धक बातचीत हुई। अपना कीमती समय देने और उनके विचारों व मार्गदर्शन से लाभ उठाने का अवसर देने के लिए मैं उनका बहुत आभारी हूं।”</p>
<p><strong>पीएम को भेंट की भगवान गणेश की प्रतिमा</strong><br>
राघव चड्ढा द्वारा शेयर की गई तस्वीरों में से एक में वह प्रधानमंत्री को भगवान गणेश की एक प्रतिमा भेंट करते हुए नजर आ रहे हैं। इन तस्वीरों में प्रधानमंत्री से संग उनकी इस मुलाकात के दौरान कोई और उनके साथ दिखाई नहीं देख रहा है। हालांकि, इस मुलाकात का मकसद या एजेंडा भी अभी साफ नहीं है।</p>
<p><strong>PM ने 3 दिन पहले भाजपा सांसदों से नाश्ते पर की थी बैठक</strong><br>
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने 5 अगस्त को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और पार्टी में हाल में शामिल हुए 'आप' के कुछ पूर्व नेताओं समेत 37 पार्टी सांसदों के साथ सुबह के नाश्ते पर बैठक की थी। इस बैठक में नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ और विनोद तावडे के साथ ही पूर्व 'आप' नेता स्वाति मालीवाल, राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक और विक्रमजीत सिंह साहनी भी शामिल हुए थे।</p>
<p>पीएम ने बैठक में इस बात पर जोर दिया कि संसद में बिना किसी अवरोध के सुचारू तरीके से कामकाज होना चाहिए। इस दौरान मोदी ने सार्वजनिक जीवन के अपने अनुभव साझा किए और इस बारे में मार्गदर्शन किया कि सांसदों को संसद को कितनी गंभीरता से लेना चाहिए। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री ने सांसदों से यह भी कहा कि वे रोजाना कम से कम एक या दो घंटे संसद की लाइब्रेरी में बिताएं। इसके अलावा, उन्होंने सांसदों को युवाओं से जुड़ने और अपने संसदीय क्षेत्रों में युवाओं व खेल गतिविधियों पर ध्यान देते हुए सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड्स) को सक्रिय रूप से लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया था।</p>
<p>बता दें कि, इसी साल 24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी को उस समय बड़ा झटका लगा था जब उसके 10 राज्यसभा सदस्यों में से सात ने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। इन सांसदों में राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत सहनी और स्वाति मालीवाल शामिल हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<title>Gen&#45;Z की नब्ज समझ गए मोहन भागवत? जानिए कैसे युवा पीढ़ी और BJP के बीच मजबूत पुल बना RSS</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वैचारिक रिश्तों के बीच, संघ प्रमुख मोहन भागवत का हर एक बयान सियासी गलियारों में बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जाता है. संघ प्रमुख जब कभी कोई बात कहते हैं तो कभी-कभी बीजेपी की नीतियों के समर्थन के तौर पर … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 15:00:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Gen-Z, की, नब्ज, समझ, गए, मोहन, भागवत, जानिए, कैसे, युवा, पीढ़ी, और, BJP, के, बीच, मजबूत, पुल, बना, RSS</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वैचारिक रिश्तों के बीच, संघ प्रमुख मोहन भागवत का हर एक बयान सियासी गलियारों में बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जाता है. संघ प्रमुख जब कभी कोई बात कहते हैं तो कभी-कभी बीजेपी की नीतियों के समर्थन के तौर पर देखा जाता है तो कभी लगता है कि किसी बदलाव या सुधार का संकेत है। </p>
<p>संघ प्रमुख मोहन भागवत का मुंबई में गुरुवार को Gen-Z' और 'Gen-अल्फा' यानी नई युवा पीढ़ी के साथ उनकी बातची सिर्फ एक संवाद नहीं, बल्कि आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक दिशा तय करने वाला एक गहरा वैचारिक संदेश है. Gen-Z की साथ संवाद के दौरान मोहन भागवत के जवाब, भाषा का चुनाव और बॉडी लैंग्वेज अहम संकेत थे। </p>
<p>दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन खत्म होने के दो हफ्ते बाद युवा पीढ़ी के साथ उनकी बातचीत क बड़ा संकेत है. बीजेपी छात्रों-युवाओं के नब्ज को समझने में नाकाम रही है, आरएसएस ने उसे बाखूबी समझते हुए युवा पीढ़ी को साधने की कोशिश शुरू कर दी है।</p>
<p><strong>संघ प्रमुख का Gen-Z के साथ संवाद</strong><br>
संघ प्रमुख का यह आउटरीच इवेंट उन छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के बाद हुआ है, जिन्होंने बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से बढ़ती दूरी को उजागर किया, जो अब सत्ता से सवाल पूछने, जवाब मांगने और अपनी शिकायतों को लेकर सड़कों पर उतरने के लिए तैयार है. मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में संघ प्रमुख ने युवाओं के साथ संवाद किया. भागवत  शायद ही कभी अंग्रेज़ी में बोलते हों, लेकिन गुरुवार को Gen-Z के साथ संवाद में उसी अंदाज, अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में बातचीत कर रहे थे। </p>
<p>युवा पीढ़ी की शिकायतों को संघ प्रमुख ने सुना और बकायदा माना भी. उन्होंने छात्रों के विरोध करने के अधिकार का बचाव किया. साथ ही इस बात को भी खारिज कर दिया कि विरोध करने वाले युवा 'राष्ट्र-विरोधी' करार दिया जाए. भागवत ने बेरोज़गारी, शिक्षा और आरक्षण के मुद्दे पर बात की. सबसे अहम बात यह रही कि उन्होंने युवा पीढ़ी के बारे में एक बुनियादी बात समझा कि यह सवाल पूछती है और बदले में तार्किक जवाब की उम्मीद करती है। </p>
<p><strong>संघ ने असहमति को देशद्रोह नहीं माना</strong><br>
संघ प्रमुख मोहन भागवत का छात्रों के साथ संवाद के दौरान सबसे अहम राजनीतिक कदम यह था कि उन्होंने असहमति को देशद्रोह नहीं माना. संघ प्रमुख ने कहा कि अगर Gen-Z विरोध कर रहा है,तो यह देश-विरोधी नहीं है. वे हमारे अपने ही लोग हैं, हमारी अगली पीढ़ी हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि Gen Z और Gen-अल्फा मौजूदा पीढ़ी से ज़्यादा ईमानदार हैं, देशभक्ति हैं और सेवा करने का जज्बा रखते हैं। </p>
<p>दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन के दौरान कई बीजेपी नेताओं ने जिस तरह की भाषा इस्तेमाल की, उससे संघ प्रमुख की बातों की तुलना करते हैं, तो ज़मीन-आसमान का फ़र्क दिखता है. प्रदर्शनकारियों को तरह-तरह से बुरा-भला कहा गया, जैसे कि वे उपद्रवी हैं, अराजकता फैलाने वाले हैं, राजनीतिक मकसद से ऐसा कर रहे हैं, 'भारत-विरोधी' इकोसिस्टम का हिस्सा हैं। </p>
<p>तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सीजेपी को उपद्रवी तत्वों की बी-टीम बताया था तो बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने प्रदर्शनकारियों पर 'अराजकता' फैलाने का आरोप लगाया. वहीं, पार्टी नेता जयवीर शेरगिल ने आरोप लगाया कि NEET आंदोलन को 'भारत-विरोधी अराजकतावादी' गिरोह ने हाईजैक कर लिया है. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी आंदोलन के मकसद और 'भारत-विरोधी ताकतों' के साथ कथित संबंधों पर सवाल उठाते हुए निशाना साधा था। </p>
<p>राजनीतिक पार्टियां अक्सर विरोध प्रदर्शन और आंदोलनों को टारगेट करती हैं, जो उन्हें चुनौती देते हैं. बीजेपी के लिए समस्या सिर्फ़ यह नहीं थी कि उसके कुछ नेताओं ने विरोध प्रदर्शनों की आलोचना की, समस्या यह थी कि यह आलोचना अक्सर प्रदर्शनकारियों के बारे में पहले से बनी धारणाओं पर आधारित होती थी,न कि उस शिकायत को समझने की कोशिश पर, जिसके कारण वे सड़कों पर उतरे थे. बीजेपी नेताओं के उल्टे मोहनभागवत ने बिल्कुल अलग सोच के साथ शुरुआत की। </p>
<p><strong>विरोध का अधिकार और लोकतंत्र का सबक</strong><br>
संघ प्रमुख भागवत ने यह नहीं कहा कि Gen-Z और युवा पीढ़ी को विरोध करना बंद कर देना चाहिए. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि विरोध भी लोकतांत्रिक बातचीत का एक तरीका हो सकता है. उन्होंने कहा कि विरोध भी बातचीत का एक ज़रिया है और तर्क दिया कि जब संवाद और बातचीत नहीं होती, तो विरोध मुद्दों को चर्चा में लाने का एक तरीका बन जाता है. संघ प्रमुख के द्वारा किया गया यह फ़र्क मायने रखता है। </p>
<p>मोहन भागवत विरोध करने वालों के हर तरीके का समर्थन नहीं कर रहे थे. उन्होंने खास तौर पर डॉ.भीमराव अंबेडकर का ज़िक्र करते हुए कहा कि आंदोलन करने के कुछ तरीके होते है, लेकिन यह बात भी तब कही, जब उन्होंने यह मान लिया था कि युवा इसलिए विरोध कर रहे थे, क्योंकि उन्हें अपनी जिंदगी में असल समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। </p>
<p>भागवत ने कहा कि आंदोलन को इसी नज़रिए से देखा जाना चाहिए और उसका समाधान किया जाना चाहिए. संघ के लिए  राजनीतिक रूप से यह काम का फ़र्क है, यह किसी शिकायत की जायज बात को विरोध के दौरान की गई हर कार्रवाई की जायज बात से अलग करता है। </p>
<p>सीजेपी आंदोलन के दौरान बीजेपी की प्रतिक्रिया ने अक्सर इसी फ़र्क को धुंधला कर दिया. नतीजा यह हुआ कि परीक्षा में गड़बड़ियों और NEET-UG पेपर लीक को लेकर शुरू हुआ विरोध धीरे-धीरे एक बड़ी बहस में बदल गया कि क्या युवा भारतीयों को सरकार के सिस्टम पर सवाल उठाने का अधिकार है भी या नहीं। </p>
<p>जब तक केंद्र सरकार बातचीत के लिए आगे बढ़ी और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की अहम राजनीतिक मांग को माना, तब तक विरोध का महत्व उसकी शुरुआती वजह से कहीं ज़्यादा बढ़ चुका<strong> था। </strong></p>
<p><strong>Gen Z को भागवत ने कैसे समझा</strong><br>
भागवत की यह बात कि आज के युवा 'सवाल पूछते हैं', शायद गुरुवार को मुंबई में हुई उनकी बातचीत का सबसे अहम हिस्सा थी. संघ प्रमुख ने संवाद के दौरान कहा कि जब हम लीडरशिप के बारे में सोचते हैं, तो मन में एक तस्वीर बनती है- कोई व्यक्ति सामने खड़ा है, वो भाषण दे रहा है, चुनाव जीत रहा है और लोगों को उपदेश दे रहा है, असल में ऐसा होता नहीं होता.' उन्होंने कहा कि असली लीडर अंदर से काम करते हैं और मिसाल कायम करके नेतृत्व करते हैं। </p>
<p>संघ प्रमुख की यह उस पीढ़ी से बातचीत करने के लिए लगभग एक गाइड की तरह है, जो ऐसे माहौल में बड़ी हुई है, जहां राजनीतिक भाषणों की तुरंत फैक्ट-चेकिंग होती है, उनके क्लिप बनाए जाते हैं, उन्हें ऑनलाइन ट्रोल किया जाता है और उन पर सवाल उठाए जाते हैं। </p>
<p>Gen-Z युवा पीढ़ी जरूरी नहीं कि सरकार विरोधी हो. यह युवा पीढ़ी तेजी से 'पेटरनलिज़्म' (अभिभावक की तरह हुक्म चलाने की सोच) के खिलाफ हो रही है. भागवत के भाषण में भी इस बात पर ज़ोर दिया गया. यह पीढ़ी इस बात को बिना सोचे-समझे नहीं मानती कि सिर्फ़ इसलिए किसी की बात मानी जानी चाहिए, क्योंकि वह सत्ता में है। </p>
<p>यह युवा पीढ़ी पूछती है 'क्यों?',  इसे सबूत चाहिए, इसे जवाबदेही चाहिए, और जब उसे लगता है कि संस्थागत तरीकों से जवाब नहीं मिल रहा है, तो वह इस मुद्दे को लेकर विरोध करती है और सार्वजनिक मंच पर ले जाना ज़्यादा बेहतर समझती है.  ऐसा लगता है कि भागवत ने Gen Z और Gen-अल्फा की सोच और तौर-तरीके को समझ लिया है. इसीलिए संघ प्रमुख उन्हीं के अंदाज में जवाब देते नजर आए। </p>
<p><strong>बीजेपी के लिए संघ बनता रहा संकटमोचक</strong><br>
मोहन भागवत का दखल आरएसएस-बीजेपी के रिश्तों के एक पैटर्न का हिस्सा है, जब कभी भी संघ को लगता है कि बीजेपी भटक गई है, गलत आकलन किया है या बड़े सामाजिक वर्ग से उसका संपर्क टूट गया है, तो वह अपनी सार्वजनिक भाषा के ज़रिए असंतोष जाहिर करता रहा है. इसका सबसे ताजा उदाहरण 2024के लोकसभा चुनाव के बाद देखने को मिला था।  </p>
<p>लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि पार्टी उस दौर से आगे निकल चुकी है जब उसे आरएसएस की ज़रूरत पड़ती थी और अब वह अपने कामकाज खुद संभालने में सक्षम है, नड्डा ने कहा था कि आज हम बढ़ गए हैं, सक्षम हैं, इसलिए बीजेपी खुद को निर्णय लेती है। </p>
<p>संघ ने इस असहमति को सार्वजनिक टकराव में नहीं बदला. इसके बजाय उसकी प्रतिक्रिया हमेशा की तरह संयमित रही. आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इसे पारिवारिक मामला बताया और कहा कि ऐसे मामलों को परिवार के भीतर ही सुलझाया जाता है, न कि सार्वजनिक मंचों पर उन पर चर्चा की जाती है, लेकिन जून 2024 में चुनाव के बाद भागवत की टिप्पणियों ने संघ की उम्मीदों की ओर ज़्यादा साफ़ इशारा किया था। </p>
<p>संघ प्रमुख ने चुनाव प्रचार के दौरान विनम्रता और मर्यादा की कमी के बारे में बात की और ज़ोर दिया कि विपक्ष को सिर्फ़ दुश्मन नहीं माना जाना चाहिए. यह संदेश छोटा था लेकिन साफ़ था, यह एक स्पष्ट संकेत था कि चुनावी ताकत संयम, विनम्रता और सामाजिक जुड़ाव की ज़रूरत को खत्म नहीं करती। </p>
<p>आरएसएस ने दूरी बनाए रखी और आम चुनाव में बीजेपी की पूरी तरह से मदद नहीं की. इसका नतीजा था कि लोकसभा में बीजेपी को अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा नहीं जुटा सकी, जिसके बीजेपी और वैचारिक संगठन के बीच संबंधों पर बहस और तेज़ हो गई. मुंबई में Gen-Z और Gen-अल्फा के बारे में मोहन भागवत की टिप्पणियों में भी कुछ ऐसा ही संदेश छिपा है। </p>
<p>उन्हें बीजेपी के नाम लेने की ज़रूरत नहीं है, उन्हें यह कहने की ज़रूरत नहीं है कि सरकार की प्रतिक्रिया गलत थी. उन्हें पूरे विरोध-प्रदर्शन का समर्थन करने की भी ज़रूरत नहीं है. यह कहकर कि Gen Z देश-विरोधी नहीं है,उनकी शिकायतें जायज़ हैं, विरोध लोकतांत्रिक बातचीत का हिस्सा है, और युवाओं को प्यार के साथ-साथ जवाबों की भी ज़रूरत है, वे इस पीढ़ी के साथ जुड़ने का एक तरीका बता रहे हैं। </p>
<p>मुंबई में भागवत की बातचीत को सिर्फ़ एक आम बातचीत नहीं माना जाना चाहिए. यह उन लोगों तक पहुंचने की एक कोशिश थी, लेकिन इसमें अपनी दिशा या तौर-तरीके सुधारने की बात भी शामिल थी.संघ प्रमुख ने 'जेन Z' से सवाल पूछना बंद करने के लिए नहीं कहा. उन्होंने उनसे कहा कि सवाल पूछना उनकी पीढ़ी के स्वभाव का हिस्सा है। </p>
<p>संघ प्रमुख ने युवा पीढ़ी से यह नहीं कहा कि विरोध करने से वे देश-विरोधी बन जाते हैं, उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले भी देश का ही हिस्सा हैं. इस तरह से उन्होंने अपनी बात सरकार का बचाव करते हुए शुरू नहीं की, बल्कि लोगों की शिकायतों को मानते हुए शुरुआत की. यही वजह है कि मुंबई के उस कमरे से बाहर भी उनकी बातों का असर हुआ। </p>
<p> </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>महुआ मोइत्रा विवाद: “अगर उन्हें कुछ हुआ तो सुप्रीम कोर्ट जिम्मेदार”, कॉकरोच ने जज को बताया ‘बड़बोला’</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने 7 अगस्त को तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने एक आपराधिक मामले में पुलिस के सामने वर्चुअली पेश होने की अनुमति मांगी थी। इस सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने महुआ मोइत्रा के वकील से कहा कि राजनीति में कदम … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 13:15:07 +0530</pubDate>
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<media:keywords>महुआ, मोइत्रा, विवाद:, “अगर, उन्हें, कुछ, हुआ, तो, सुप्रीम, कोर्ट, जिम्मेदार”, कॉकरोच, ने, जज, को, बताया, ‘बड़बोला’</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने 7 अगस्त को तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने एक आपराधिक मामले में पुलिस के सामने वर्चुअली पेश होने की अनुमति मांगी थी। इस सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने महुआ मोइत्रा के वकील से कहा कि राजनीति में कदम रखने के बाद उन्हें अंडों से क्यों डर लगता है, जबकि स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने सीने पर गोलियां खाई थीं। इस टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हल्कों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने महुआ मोइत्रा का समर्थन करते हुए जज पर अपनी भड़ास निकाली है।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?</strong><br>
दरअसल महुआ मोइत्रा के खिलाफ एक फेसबुक पोस्ट को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था।</p>
<p>महुआ मोइत्रा की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट से मांग करते हुए कहा कि सांसद को वर्चुअली पेश होने की अनुमति दी जाए। उन्होंने तर्क दिया कि पिछली बार जब वह अपने निर्वाचन क्षेत्र के पुलिस स्टेशन गई थीं, तो उन पर अंडे फेंके गए थे और उन्हें फिर से भीड़ द्वारा निशाना बनाए जाने का खतरा है।</p>
<p><strong>जस्टिस दीपांकर दत्ता की सख्त टिप्पणी</strong><br>
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने राहत देने से इनकार करते हुए कहा, "आप एक सांसद हैं? राजनीति में कदम रखने के बाद आपको अंडों से डर लगता है? हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने तो अपने सीने पर गोलियां खाई थीं"। सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख को देखते हुए वकील ने याचिका वापस ले ली, जिसके बाद अदालत ने इसे खारिज कर दिया।</p>
<p><strong>सौरव दास और CJP की प्रतिक्रिया</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी प्रतिक्रिया दी। सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट के जज पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा: "क्या सुप्रीम कोर्ट के ये जज चाहते हैं कि महुआ मोइत्रा गोलियां खाएं? हमने जजों के रूप में कैसे बड़बोले लोगों को नियुक्त कर दिया है? क्या संवैधानिक अदालत के जजों से हम ऐसे न्यायिक स्वभाव की उम्मीद करते हैं? यही कारण है कि हमें न्यायिक जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है।"</p>
<p><strong>जस्टिस दीपांकर दत्ता के नेतृत्व वाली यह बेंच जिम्मेदार होगी- सौरव दाव</strong><br>
सौरव दास ने आगे कहा कि बंगाल के मौजूदा हालात को देखते हुए यह बयान निंदनीय है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर महुआ मोइत्रा को कुछ भी होता है, तो जस्टिस दीपांकर दत्ता के नेतृत्व वाली यह बेंच जिम्मेदार होगी। उन्होंने यह भी लिखा कि किसी भी कार्यशील लोकतंत्र में ऐसे जजों को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जाता या उन पर महाभियोग चलाया जाता।</p>
<p>इसके अलावा, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी इस बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सवाल किया है कि "क्या सुप्रीम कोर्ट अब चाहता है कि हर कोई गोलियां खाए? जब सुप्रीम कोर्ट के जजों द्वारा विपक्षी नेताओं के खिलाफ इस तरह के बयान दिए जाते हैं, तो आम आदमी के लिए क्या उम्मीद बचती है?"।</p>
<p>कलकत्ता उच्च न्यायालय ने नफरत फैलाने वाले भाषण के एक मामले में मोइत्रा को पांच अक्टूबर तक हर प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से 21 जुलाई को अंतरिम राहत दी थी। मोइत्रा का दावा है कि यह मामला मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>एक पर हमला तीनों पर माना जाएगा’: पाक&#45;सऊदी&#45;तुर्की समझौते पर भारत का करारा जवाब, जानिए क्या कहा</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली भारत ने कहा है कि वह सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच &#039;मक्का संयुक्त रक्षा समझौते&#039; और पाकिस्तान और सोमालिया के बीच हाल ही में हुए रक्षा सहयोग समझौते से जुड़े घटनाक्रमों पर करीबी नजर रख रहा है। भारत ने अफ्रीकी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 13:00:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>एक, पर, हमला, तीनों, पर, माना, जाएगा’:, पाक-सऊदी-तुर्की, समझौते, पर, भारत, का, करारा, जवाब, जानिए, क्या, कहा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारत ने कहा है कि वह सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' और पाकिस्तान और सोमालिया के बीच हाल ही में हुए रक्षा सहयोग समझौते से जुड़े घटनाक्रमों पर करीबी नजर रख रहा है। भारत ने अफ्रीकी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए आशा व्यक्त की कि अगला भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन पारस्परिक रूप से सुविधाजनक तारीख पर आयोजित किया जाएगा।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को मीडिया ब्रीफिंग के दौरान पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की (तुर्किए) के बीच रक्षा समझौते के बारे में पूछे जाने पर कहा कि इस पर हमारी नजर है। उन्होंने कहा ,"हम इस घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि इन तीनों देशों ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत यदि तीनों में से किसी एक भी देश पर हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान और सोमालिया के बीच रक्षा समझौते के सवाल पर उन्होंने कहा ,"आपने जिस अन्य देश (पाकिस्तान) का उल्लेख किया है, उसके साथ सोमालिया के घटनाक्रमों पर हम लगातार करीबी नजर बनाए हुए हैं।"</p>
<p>सोमालिया और पाकिस्तान ने कुछ दिन पहले इस्लामाबाद में रक्षा सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं जिसका उद्देश्य आतंकवाद-रोधी सहयोग, सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा क्षमता विकास तथा व्यापक सुरक्षा सहयोग में साझेदारी का विस्तार करना है। अफ्रीका में प्रतिकूल स्वास्थ्य स्थिति के चलते कुछ महीने पहले स्थगित किए गए भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन के बारे में पूछे जाने पर जायसवाल ने अफ्रीकी महाद्वीप के साथ भारत की दीर्घकालिक सहभागिता का उल्लेख किया।</p>
<p><strong>'अफ्रीका दिवस पर एक बड़ा समारोह आयोजित'</strong><br>
उन्होंने कहा, "अफ्रीका दिवस पर एक बड़ा समारोह आयोजित किया गया। हर वर्ष हम अफ्रीका के साथ अपनी एकजुटता, समर्थन और साझेदारी को बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ मनाते हैं। इस बार विदेश मंत्री ने अफ्रीका दिवस समारोह में भाग लिया। वह पहले भी इसमें शामिल हुए हैं।"</p>
<p>अफ्रीकी देशों के साथ भारत के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, "अफ्रीका के सभी देशों, उनमें से अधिकांश के साथ, तथा पूरे महाद्वीप के साथ हमारे अत्यंत मजबूत और ऐतिहासिक संबंध हैं। हमारा विकास सहयोग निरंतर जारी है और यह हमारी ग्लोबल साउथ की एकजुटता तथा दक्षिण-दक्षिण सहयोग का एक सशक्त हिस्सा है।" भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह आयोजन अफ्रीकी संघ के साथ परामर्श के बाद स्थगित कर दिया गया था।</p>]]> </content:encoded>
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<title>हिमाचल के चंबा में दर्दनाक हादसा, पहाड़ी से सड़क पर गिरी बस; 7 लोगों की मौत, कई घायल</title>
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<description><![CDATA[ चंबा Chamba Bus Accident: हिमाचल के चंबा से एक बड़े बस हादसे की खबर सामने आई है. यहां एक बस अचानक पहाड़ी से नीचे आ गिरी. इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं. घटनास्थल से सामने आई तस्वीरें इस हादसे की भयावयता बता रही है. … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 11:15:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>हिमाचल, के, चंबा, में, दर्दनाक, हादसा, पहाड़ी, से, सड़क, पर, गिरी, बस, लोगों, की, मौत, कई, घायल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चंबा</strong><br>
Chamba Bus Accident: हिमाचल के चंबा से एक बड़े बस हादसे की खबर सामने आई है. यहां एक बस अचानक पहाड़ी से नीचे आ गिरी. इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं. घटनास्थल से सामने आई तस्वीरें इस हादसे की भयावयता बता रही है. हादसे के बाद बस के चारों पहिए ऊपर की ओर थे. जबकि बस की छत सड़क से लगी थी. हादसा इतना भीषण था कि कई लोगों के शव बस में ही फंसे थे. काफी मशक्कत से बस से घायलों को बाहर निकाला गया और फिर उन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। </p>
<p><strong>तीसा-बैरागढ़ रोड पर चालुज मोड़ के पास हुआ हादसा</strong><br>
मिली जानकारी के अनुसार यह हादसा तीसा-बैरागढ़ मार्ग पर चालुज मोड़ के पास हुआ. दुर्घनाग्रस्त हुई बस शर्मा बस कंपनी की बताई जाती है. इस हादसे में 7 लोगों की मौत की शुरुआती जानकारी सामने आई है. बताया गया कि बस में लगभग 15 से 20 लोग मोजूद थे। घायलों को इलाज के लिए सिविल हॉस्पिटल तीसा भेजा गया है। </p>
<p><strong>हादसे में 7 लोगों की मौत</strong><br>
जानकारी के अनुसार बस बैरागढ़ से चंबा की ओर जा रही थी. चालुज मोड़ के समीप दुर्घटनाग्रस्त हो गई. इस हादसे में 7 लोगों की मौत हुई, जिसमें चार पुरुष हैं और तीन महिलाएं हैं. बताया जा रहा है कि इस बस के चालक और खलासी की भी मौत हो गई है. हादसा कैसे हुआ, इस बारे में अभी विस्तृत जानकारी नहीं मिल<strong> पाई है। </strong></p>
<p><strong>छह को चंबा मेडिकल कॉलेज किया गया रेफर</strong><br>
एसडीएम चुराह राजेश कुमार जरियाल ने कहा कि, 'हादसे में 7 लोगों की मौत हुई है. स्थानीय लोगों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया था. घायलों के लिए उचित इलाज की व्यवस्था की गई है. उन्हें इलाज के अस्पताल पहुंचाया गया है. 11 घायलों में से छह को तीसा में प्राथमिक उपचार के बाद चंबा मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया गया है। </p>
<p><strong>चंबा के लिए रवाना हुई थी बस</strong><br>
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, हादसाग्रस्त निजी बस आज सुबह 6.30 बजे बैरागढ़ से चंबा के लिए रवाना हुई थी. अभी बस ने महज तीन किलोमीटर तक का सफर ही तय किया था कि चालुज मोड़ के पास सीधे नीचे खाई में लुढ़कती हुई नीचे दूसरी सड़क पर गिरी. हादसे के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है. पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है. वहीं, प्रशासन ने घायलों और मृतकों के नामों की सूची जार कर दी है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>गंगा जल संधि खत्म होने की कगार पर, भारत के सख्त रुख से बांग्लादेश की बढ़ी बेचैनी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को भंग करने के बाद भारत अब बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि को लेकर भी सख्त है। यह संधि इस साल खत्म हो रही है तथा सरकार पर राज्यों का दबाव है कि इसका नवीनीकरण इस स्वरूप में न किया जाए। केंद्र सरकार भी यही चाहती … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 11:15:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>गंगा, जल, संधि, खत्म, होने, की, कगार, पर, भारत, के, सख्त, रुख, से, बांग्लादेश, की, बढ़ी, बेचैनी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को भंग करने के बाद भारत अब बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि को लेकर भी सख्त है। यह संधि इस साल खत्म हो रही है तथा सरकार पर राज्यों का दबाव है कि इसका नवीनीकरण इस स्वरूप में न किया जाए। केंद्र सरकार भी यही चाहती है। वहीं बांग्लादेश बार-बार संधि के नवीनीकरण के लिए बातचीत करने के लिए गिड़गिड़ा रहा है। हालांकि भारत ने अभी इसपर चुप्पी <strong>साध रखी है।</strong></p>
<p><strong>बंगाल के साथ बिहार को भी बड़ा नुकसान</strong><br>
पश्चिम बंगाल के साथ-साथ बिहार ने भी चिंता जताई है कि बांग्लादेश को पानी देते समय पहले उनके राज्य के हितों की रक्षा हो। एनडीए के प्रमुख घटक दल जदयू ने तो बाकायदा गुरुवार को इस मुद्दे को राज्यसभा में विशेष उल्लेख के जरिये उठाया। बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि दिसंबर, 1996 में हुई थी, जो 30 साल के लिए थी। इसके तहत जनवरी से मई के बीच फरक्का बैराज में मौजूद पानी का 50% हिस्सा बांग्लादेश को देने का प्रावधान है। दूसरी शर्त यह है कि इस दौरान 70 हजार क्यूसेक पानी फरक्का बैराज में मौजूद रहना चाहिए। इन प्रावधानों के चलते इन महीनों में बिहार को गंगा का पानी नहीं मिल पाता है। दूसरी तरफ फरक्का में पानी रोके जाने से हुगली नदी के प्रवाह पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।</p>
<p><strong>क्या चाहती है केंद्र सरकार?</strong><br>
सूत्रों ने कहा, इस साल 12 दिसंबर को संधि खत्म हो रही है, पर अभी तक इसके नवीनीकरण को लेकर प्रयास शुरू नहीं हुए हैं। केंद्र सरकार भी इस स्वरूप में इसके नवीनीकरण के पक्ष में नहीं है। दरअसल, केंद्र को इस मुद्दे पर घरेलू दबाव का सामना करना पड़ रहा है। बंगाल-बिहार इसके खिलाफ हैं। दोनों राज्यों में इस समय भाजपा की सरकारें हैं। इस बीच गुरुवार को एनडीए के प्रमुख घटक दल जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने विशेष उल्लेख के जरिये इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाया। कहा, बिहार की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखे बैगर इस संधि का नवीनीकरण न हो।</p>
<p><strong>तो बिहार को हो सकता है सबसे ज्यादा नुकसान</strong><br>
यदि इस संधि का इसी स्वरूप में नवीनीकरण किया गया तो इससे बिहार को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि फरक्का बैराज का निर्माण कोलकात्ता पोर्ट और हगुली नदी के प्रवाह को बनाए रखने के लिए किया गया था, लेकिन बांग्लादेश से संधि होने के कारण इसका नुकसान बिहार को उठाना पड़ा। पानी की एक तय मात्रा फरक्का बैराज में सुनिश्चित होने देने के लिए बिहार को गंगा का पानी नहीं मिल पाता है। उधर, पानी रोके जाने से हुगली नदी का प्रवाह भी प्रवाहित होता है।</p>
<p><strong>2000 क्यूसेक अतिरिक्त जल की जरूरत : JDU</strong><br>
जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा, 2050 तक बिहार को कृषि व उद्योगों के लिए 2000 क्यूसेक अतिरिक्त जल की जरूरत होगी, इसलिए इस संधि का नवीनीकरण नहीं होना चाहिए। ‘हिन्दुस्तान’ से उन्होंने कहा, सरकार यदि मौजूदा स्वरूप में संधि का नवीनीकरण करेगी तो उनकी पार्टी इसका विरोध करेगी। विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि भारत-बांग्लादेश के बीच 54 नदियां आरपार होती हैं, इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच स्थापित तंत्र के तहत चीजें तय होती हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<title>PM Kisan 24th Installment: इन किसानों को मिलेंगे ₹4,000, किस्त से पहले तुरंत पूरा करें यह जरूरी काम</title>
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<description><![CDATA[ नईदिल्ली  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे किसानों के लिए बड़ी खबर है. बहुत से किसानों को अभी भी 23वीं किस्त के 2,000 रुपये नहीं मिले हैं. किसी का पेमेंट टेक्निकल दिक्कत की वजह से अटक गया तो किसी के डॉक्यूमेंट्स या e-KYC पूरे नहीं थे. ऐसे में अब … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 10:00:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Kisan, 24th, Installment:, इन, किसानों, को, मिलेंगे, ₹4, 000, किस्त, से, पहले, तुरंत, पूरा, करें, यह, जरूरी, काम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नईदिल्ली </strong><br>
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे किसानों के लिए बड़ी खबर है. बहुत से किसानों को अभी भी 23वीं किस्त के 2,000 रुपये नहीं मिले हैं. किसी का पेमेंट टेक्निकल दिक्कत की वजह से अटक गया तो किसी के डॉक्यूमेंट्स या e-KYC पूरे नहीं थे. ऐसे में अब किसानों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि अगर पिछली किस्त नहीं मिली तो क्या अगली किस्त भी अटक जाएगी? और क्या अगली किस्त के साथ पिछली किस्त के 2,000 रुपये भी मिलेंगे?</p>
<p>अगर आपकी 23वीं किस्त किसी वजह से अटक गई थी, तो पिछली किस्त की राशि अगली किस्त के साथ मिल सकती है. ऐसे में कुछ किसानों के खाते में 2,000 रुपये की जगह सीधे 4,000 रुपये आ सकते हैं। </p>
<p><strong>किन किसानों को मिल सकते हैं 4,000 रुपये?</strong><br>
पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को साल में 6,000 रुपये मिलते हैं. यह रकम 2,000-2,000 रुपये की तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है. हालांकि ऐसा नहीं है कि 24वीं किस्त में 4,000 रुपये सभी किसानों को नहीं मिलेंगे. यह रकम उन पात्र किसानों को मिल सकती है, जिनकी 23वीं किस्त किसी टेक्निकल या दूसरी वजह से रुक गई थी. अगर 23वीं किस्त का पैसा अटक गया था और अब आपकी सभी जरूरी काम पूरी हो गई हैं, तो पिछली 2,000 रुपये की राशि अगली किस्त के 2,000 रुपये के साथ मिल सकती है। </p>
<p>पीएम किसान योजना के नियमों के अनुसार, जिस वजह  से किस्त के पैसे अटके थे वो समस्या दूर होते ही रोकी गई किस्त और उसके बाद की सभी बकाया किस्तों का पैसा एक साथ दे दिया जाएगा. यानी आप पिछली किस्त के साथ-साथ आने वाली सभी अगली किस्तों का लाभ पाने के पूरे हकदार होंगे। </p>
<p><strong>इन वजहों से अटक सकते हैं किस्त के पैसे</strong><br>
किसानों की किस्त रुकने की कई वजहें हो सकती हैं. सबसे बड़ी वजह e-KYC का पूरा न होना है. इसके अलावा जमीन का सत्यापन यानी लैंड सीडिंग न  होने, आधार और बैंक खाते में गड़बड़ी या बैंक डिटेल गलत होने की वजह से भी पैसा अटक सकता है.अगर आपके आवेदन में नाम, अकाउंट नंबर, IFSC या दूसरी जानकारी गलत है, तो इसे ठीक कराना जरूरी है। </p>
<p><strong>अगली किस्त समय पर चाहिए तो e-KYC जरूर कराएं</strong><br>
PM Kisan का लाभ लेने के लिए e-KYC जरूरी है. जिन किसानों की e-KYC अधूरी है, उन्हें अगली किस्त का फायदा नहीं मिलेगा. किसान PM Kisan के ऑफिशियल पोर्टल या नजदीकी CSC सेंटर पर जाकर e-KYC पूरी कर सकते हैं। </p>
<p><strong>लैंड सीडिंग भी है जरूरी</strong><br>
अगर e-KYC पूरी है लेकिन पैसा फिर भी नहीं आया है, तो Land Seeding का स्टेटस जरूर चेक करें. जमीन का रिकॉर्ड आपके नाम और सरकारी रिकॉर्ड से सही तरीके से मैच होना जरूरी है. अगर लैंड सीडिंग में दिक्कत है, तो अपने क्षेत्र के पटवारी, लेखपाल या संबंधित राजस्व अधिकारी से संपर्क कर जमीन का रिकॉर्ड वेरीफाई कराएं। </p>
<p><strong>आधार और बैंक खाते की डिटेल भी चेक करें</strong><br>
पीएम किसान की राशि DBT के जरिए सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. इसलिए बैंक अकाउंट का आधार से लिंक होना और DBT एक्टिव होना जरूरी है. बैंक खाते की डिटेल में गलती होने पर भी किस्त अटक सकती है. इसके अलावा योजना के तहत Farmer ID और सरकारी रिकॉर्ड में नाम की सही जानकारी भी जरूरी है। </p>
<p><strong>PM Kisan की 24वीं किस्त कब आएगी?</strong><br>
अभी सरकार ने पीएम किसान योजना 24वीं किस्त की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है. हालांकि, पिछली किस्तों के चार महीने के अंतराल वाले पैटर्न को देखें तो 24वीं किस्त अक्टूबर 2026 में आने की उम्मीद है. अंतिम तारीख सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी। </p>
<p><strong>अगली किस्त के पैसे आएंगे या नहीं, ऐसे चेक करें स्टेटस</strong><br>
किसान PM Kisan की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर Know Your Status ऑप्शन से अपना स्टेटस चेक कर सकते हैं. रजिस्ट्रेशन नंबर डालने के बाद e-KYC, Land Seeding और Eligibility Status जैसी जानकारी देखी जा सकती है. अगर इनमें से किसी के आगे 'No' दिखाई दे रहा है, तो इसका मतलब है कि आपका कोई न कई जरूरी काम पूरा नहीं किया है. इसे जल्दी से ठीक करा लें। </p>
<p><strong>23वीं किस्त नहीं मिली तो क्या करें?</strong><br>
अगर 23वीं किस्त का पैसा अब तक नहीं मिला है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. पहले अपने e-KYC, लैंड सीडिंग, आधार और बैंक अकाउंट की जानकारी चेक करें. इसमें जरूरी सुधार करने के बाद पात्र किसानों को अटकी हुई राशि अगली किस्त के साथ मिलने की संभावना है. लेकिन अगर फिर बी कोई दिक्कत आता है तो किसान PM Kisan की आधिकारिक हेल्पलाइन या जिला कृषि कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>इस्लामिक NATO’ की नई चर्चा, पाकिस्तान ने दो मुस्लिम देशों को साथ लाया; क्या भारत के लिए बढ़ेगा खतरा?</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली इस्लामिक नाटो का मंच सजकर तैयार हो गया है। पश्चिमी देशों के सैन्य संगठन की तर्ज पर अब सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच एक ऐसी ही साझेदारी हो रही है। रिपोर्ट्स की मानें तो तीनों देश शुक्रवार को एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। जेद्दा में सऊदी क्राउन … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 10:00:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>इस्लामिक नाटो का मंच सजकर तैयार हो गया है। पश्चिमी देशों के सैन्य संगठन की तर्ज पर अब सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच एक ऐसी ही साझेदारी हो रही है। रिपोर्ट्स की मानें तो तीनों देश शुक्रवार को एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। जेद्दा में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बैठक के दौरान इस समझौते को अंतिम रूप दिया जा रहा है। भारत इस समझौते पर करीब से नजर रखेगा।</p>
<p>बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ पहले ही संकेत दे चुके थे कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच मौजूदा रक्षा समझौते का दायरा बढ़ाकर इसमें कतर और तुर्की को भी शामिल किया जा सकता है। इसके बाद से ही इस्लामिक नाटो की चर्चाएं तेज हो गई थीं। बीते मई में पाकिस्तानी चैनल हम न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में आसिफ ने कहा था कि इस गठबंधन पर अलग-अलग स्तरों पर बातचीत चल रही है और भविष्य में इसमें कतर और तुर्की भी शामिल हो सकते हैं। गौरतलब है कि पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक बड़ा रक्षा समझौता हुआ था। इसके तहत किसी भी एक देश पर हमले को दोनों पर हमला माना जाएगा। अब इस समझौते में तुर्की भी शामिल हो सकता है।</p>
<p><strong>इस्लामिक नाटो में किसकी क्या भूमिका?</strong><br>
जानकारों की मानें तो इस समूह में तीनों देशों की भूमिका भी तय हो गई है। इस्लामिक नाटो को खड़ा करने में जहां सऊदी अरब वित्तीय सहायता देगा, वहीं पाकिस्तान अपने परमाणु हथियार, बैलिस्टिक मिसाइल और मैनपावर देगा। तुर्की अपनी सैन्य विशेषज्ञता और घरेलू रक्षा उद्योग का योगदान दे सकता है। अंकारा स्थित थिंक टैंक TEPAV के रणनीतिकार निहत अली ओजकान के मुताबिक, "जैसे-जैसे अमेरिका इस क्षेत्र में अपने और इजरायल के हितों को प्राथमिकता दे रहा है, बदलते समय में ये देश अपने दोस्तों और दुश्मनों की पहचान करने के लिए नए तरीके विकसित कर रहे हैं।”</p>
<p><strong>भारत के लिए खतरा?</strong><br>
इस्लामिक नाटो का यह विचार भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक संवेदनशील स्थिति पैदा करता है। कंगाली और आर्थिक मंदी झेल रहा पाकिस्तान इस ब्लॉक के जरिए खुद को इस्लामिक दुनिया में एक मजबूत सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है। वहीं तुर्की भी कश्मीर मुद्दे पर जहर उगलता रहा है। अब तुर्की और पाकिस्तान की नजदीकी से भारत को खतरा हो सकता है।</p>
<p>वहीं भारत और सऊदी अरब के बीच संबंधों की बात करें तो पिछले कुछ सालों में रिश्ते मजबूत हुए हैं। दूसरी तरफ पाकिस्तान संग सऊदी की साझेदारी के बाद भारत ने संयुक्त अरब अमीरात के साथ भी अहम रक्षा समझौता किया है। अब भारत के लिए यह देखना अहम होगा कि सऊदी अरब इस समझौते को केवल अपने ईरान-विरोधी एंगल तक सीमित रखता है, या पाकिस्तान इसे भारत-विरोधी एजेंडे के लिए इस्तेमाल करने में कामयाब होता है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>15 अगस्त को अंधेरे से मिलेगी आजादी, चीन सीमा से 35 KM दूर बसे भारतीय गांवों में पहुंचेगी बिजली</title>
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<description><![CDATA[ पिथौरागढ़ देश जब 15 अगस्त को आजादी का पर्व मना रहा होगा, तब भारत-चीन सीमा पर बसे उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में मुनस्यारी का रडगाड़ी, बुगडियार गांव अंधेरे से आजादी का जश्न मनाएगा। चीन सीमा से 35 से 40 किमी हवाई दूरी पर स्थित इस माइग्रेशन गांव तक बिजली की लाइन बिछ गई है। ट्रांसफार्मर … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 10:00:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>अगस्त, को, अंधेरे, से, मिलेगी, आजादी, चीन, सीमा, से, दूर, बसे, भारतीय, गांवों, में, पहुंचेगी, बिजली</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पिथौरागढ़ </strong></p>
<p>देश जब 15 अगस्त को आजादी का पर्व मना रहा होगा, तब भारत-चीन सीमा पर बसे उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में मुनस्यारी का रडगाड़ी, बुगडियार गांव अंधेरे से आजादी का जश्न मनाएगा। चीन सीमा से 35 से 40 किमी हवाई दूरी पर स्थित इस माइग्रेशन गांव तक बिजली की लाइन बिछ गई है। ट्रांसफार्मर भी लगा दिया गया है। स्वतंत्रता दिवस पर जैसे ही इसका औपचारिक शुभारंभ होगा, वैसे ही यह क्षेत्र पहली बार बिजली की रोशनी से जगमगा उठेगा।</p>
<p>गर्मियों में मुनस्यारी के निचले इलाकों से जनजाति समुदाय के ग्रामीण अपने मवेशियों को लेकर रड़गाडी और बुगडियार में रहते हैं। बिजली न होने पर ग्रामीण ढिबरी, लालटेन, मोमबत्ती और सोलर लालटेन के भरोसे रातें काटने को मजबूर थे।</p>
<p><strong>लंबे समय से बिजली की थी मांग</strong><br>
मल्ला जोहार विकास समिति के अध्यक्ष श्रीराम सिंह धर्मसक्तू ने कहा कि लंबे समय से इन गांवों को बिजली सेवा से जोड़ने की मांग उठ रही थी। माइग्रेशन गांवों में बिजली सेवा की सुविधा मिलने से बड़ी राहत होगी। यूपीसीएल मुनस्यारी के एसडीओ सद्दाम अली ने बताया कि रड़गाडी और बुगडियार तक लाइन बिछा दी गई है। अन्य माइग्रेशन गांवों को जल्द बिजली सेवा से जोड़ा जाएगा, यहां निर्माण कार्य जारी है।</p>
<p><strong>सुविधाओं में भारत से काफी आगे चीन के गांव</strong><br>
मुनस्यारी। भारतीय गांवों में जहां सड़क, बिजली की सेवा अब पहुंच रही है। वहीं चीन ने पिछले एक दशक में सीमांत क्षेत्रों में मॉडल विलेज रणनीति के तहत बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास किया है। वहां के गांवों में चौबीसों घंटे बिजली, हाई-स्पीड इंटरनेट, पक्के दो-मंजिला मकान और सीधी सड़क कनेक्टिविटी है। वहां नागरिक आबादी को बसाने के लिए भारी सब्सिडी और सुविधाएं दी जाती हैं।</p>
<p><strong>शेष माइग्रेशन गांव भी जल्द होंगे रोशन</strong><br>
मुनस्यारी। रडगाड़ी, बुगडियार के बाद माइग्रेशन गांव मिलम, लास्पा, मर्तोली, बल्जिू, बुर्फू, मापा, टोला, गनघर आदि जल्द बिजली सुविधा से जोड़े जाएंगे। योजना के तहत 21 करोड़ से लीलम से करीब 62 किमी लंबी लाइन बिछाई जानी है।</p>
<p><strong>सेना को होगा फायदा</strong><br>
बिजली लाइन शुरू होने का लाभ केवल ग्रामीणों को ही नहीं सेना, आईटीबीपी और बीआरओ को होगा। दरअसल बुगडियार सुरक्षा बलों का मुख्य केंद्र है। सुरक्षा बलों को सीमा पर पहरा देने के लिए सोलर, जनरेटर के भरोसे नहीं रहना होगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>2 करोड़ के बीमा ने बढ़ाया शक! सड़क हादसे में मौत के 3 महीने बाद कब्र से निकाला गया शव</title>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 23:00:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> बेलागावी</strong></p>
<p>किसी की मौत के तीन महीने बाद अगर पुलिस कब्र खुदवाकर शव बाहर निकाले, तो साफ है कि कहानी वहीं खत्म नहीं हुई. कर्नाटक के बेलगावी में रहने वाले पूर्व सैनिक संदीप मंजारी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. पहले सड़क हादसा हुआ, फिर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया और मामला खत्म मान लिया गया. लेकिन तीन महीने बाद ऐसे आरोप सामने आए कि पुलिस को कब्र तक पहुंचना पड़ा। </p>
<p>अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक सड़क हादसा था, या फिर करोड़ों रुपये के बीमा के लिए रची गई एक सोची-समझी साजिश? 45 साल के संदीप मंजारी बेलगावी के हुक्केरी तालुक के घोडगेरी गांव के रहने वाले थे. वह भारतीय सेना में रह चुके थे. इसी साल एक मंदिर मेले से लौटते समय उनकी सड़क दुर्घटना हो गई। </p>
<p>इसके बाद घायल हालत में उन्हें एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. उस समय किसी ने ज्यादा सवाल नहीं उठाए. हादसे के बाद मौत हुई और परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। </p>
<p>कुछ समय बाद संदीप के परिजनों ने पुलिस के सामने गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना था कि संदीप की पत्नी सुमा मंजारी और उसके कथित प्रेमी पुंडलिक डोंबर ने मिलकर उनकी हत्या की साजिश रची. परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान संदीप को ग्लूकोज की बोतल के जरिए जहर दिया गया. <strong>यही वजह थी कि हादसे से बचने के बावजूद उनकी जान चली गई। </strong></p>
<p><strong>जब सामने आया एक सेल्फी वीडियो</strong><br>
मामले में ट्विस्ट तब आया, जब पुंडलिक डोंबर का एक सेल्फी वीडियो सामने आया. इस वीडियो में उसने कई सनसनीखेज दावे किए. उसके मुताबिक, सुमा ने उससे अपने पति की करीब 2 करोड़ रुपये की बीमा पॉलिसी का जिक्र किया था. उसने यह भी दावा किया कि बीमा का पैसा मिलने के बाद दोनों बेलगावी में नई जिंदगी शुरू करने की बात कर रहे थे। </p>
<p>इसके आगे वीडियो में पुंडलिक ने यह भी कहा कि संदीप की मौत से पहले उससे कीटनाशक लाने के लिए कहा गया था. परिवार की शिकायत और सामने आए आरोपों के बाद पुलिस ने कोर्ट से अनुमति लेकर संदीप का शव करीब तीन महीने बाद कब्र से बाहर निकलवाया। </p>
<p>बेलगावी के सहायक आयुक्त श्रवण कुमार की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया कराई गई. शव से सैंपल लिए गए और उन्हें दोबारा जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेज दिया गया. पुलिस ने इस मामले में संदीप की पत्नी सुमा मंजारी और कथित प्रेमी पुंडलिक डोंबर से पूछताछ की है. यमकनमरडी थाने में मामला दर्ज है और जांच जारी है। <br>
अधिकारियों का कहना है कि आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी. सवाल है कि क्या संदीप मंजारी की मौत महज हादसा थी, या फिर यह बीमा की रकम के लिए रची गई हत्या की साजिश? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए अब फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>देवप्रयाग&#45;पौड़ी रोड पर भीषण हादसा, 250 फीट गहरी खाई में गिरी बोलेरो; एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत</title>
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<description><![CDATA[ देहरादून उत्तराखंड के पौड़ी-देवप्रयाग मोटर मार्ग पर एक सड़क हादसा हो गया. शुक्रवार को सबदरखाल के पास कुंडधार के पास एक बोलेरो गाड़ी बेकाबू होकर करीब 250 मीटर गहरी खाई में जा गिरी. इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक शख्स गंभीर रूप … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 20:00:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>देहरादून</strong><br>
उत्तराखंड के पौड़ी-देवप्रयाग मोटर मार्ग पर एक सड़क हादसा हो गया. शुक्रवार को सबदरखाल के पास कुंडधार के पास एक बोलेरो गाड़ी बेकाबू होकर करीब 250 मीटर गहरी खाई में जा गिरी. इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक शख्स गंभीर रूप से घायल हो गया। </p>
<p>जानकारी के मुताबिक, गाड़ी (नंबर UK08 BL 0387) देवप्रयाग से पौड़ी जा रही थी. जैसे ही गाड़ी कुंडधार के पास पहुंची, ड्राइवर अचानक नियंत्रण खो बैठा और गाड़ी सीधे गहरी खाई में जा गिरी. हादसे की तेज आवाज सुनकर स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को इसकी सूचना दी। </p>
<p>सूचना मिलते ही थाना देवप्रयाग पुलिस और SDRF की टीम तुरंत हादसे पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से राहत और बचाव कार्य शुरू किया। </p>
<p>पौड़ी के SSP सर्वेश पंवार ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी में कुल 6 लोग सवार थे. इनमें से 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. सभी मृतक जनपद हरिद्वार के थाना कोतवाली लक्सर स्थित रायपुर जीतपुर के रहने वाले थे। </p>
<p><strong>मृतकों की पहचान <br>
1. अफजाल (49 साल)<br>
2. शब्बो (40 साल) – अफजाल की पत्नी<br>
3. अन्नाविया (3 साल) – अफजाल की बेटी<br>
4. शादाब (14 साल) – अफजाल का बेटा<br>
5. गुफरान (34 साल) – अफजाल का भाई</strong></p>
<p>हादसे में अरमान गंभीर रूप से घायल हुआ है. पुलिस और रेस्क्यू टीम ने उसे खाई से निकालकर तुरंत बेस अस्पताल श्रीनगर इलाज के <strong>लिए भेजा है. पुलिस ने शवों को खाई से निकालकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। </strong></p>
<p><strong>मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जताया दुख</strong><br>
इस हादसे पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शोक जताया है. सीएम धामी ने कहा, 'देवप्रयाग-पौड़ी मार्ग पर हुई भीषण सड़क हादसे की खबर बहुत दर्दनाक है. जिला प्रशासन को दुर्घटना में घायलों के समुचित और तुरंत उपचार के साथ ही गंभीर रूप से घायलों को जरूरत के मुताबिक एयरलिफ्ट कर हायर सेंटर रेफर करने का निर्देश दिया है। </p>
<p>उन्होंने आगे कहा, 'ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगतों की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान और शोक संतप्त परिजनों को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति दें. प्रभु बदरी विशाल से सभी घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>SC, ST&#45;OBC आरक्षण में आर्थिक आधार पर उपकोटा नहीं, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने साफ किया अपना रुख</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) के लिए आरक्षण ऐतिहासिक और सामाजिक पिछड़ेपन पर आधारित है, न कि केवल आर्थिक स्थिति पर। केंद्र सरकार ने उस याचिका का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी है, जिसमें आरक्षित … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 18:00:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली</p>
<p>केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) के लिए आरक्षण ऐतिहासिक और सामाजिक पिछड़ेपन पर आधारित है, न कि केवल आर्थिक स्थिति पर। केंद्र सरकार ने उस याचिका का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी है, जिसमें आरक्षित श्रेणियों के भीतर आय-आधारित उप-कोटा लागू करने का आदेश देने की मांग की है।</p>
<p><strong>छुआछूत से नुकसान का सामना करना पड़ता है</strong><br>
सरकार ने हलफनामे में कहा कि अनुसूचित जातियों को छुआछूत के कारण ऐतिहासिक नुकसान का सामना करना पड़ता है, जबकि अनुसूचित जनजातियों की विशिष्ट संस्कृति, भौगोलिक अलगाव और पिछड़ापन होता है। सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक नुकसान के साथ-साथ सेवाओं में प्रतिनिधित्व की कमी से की जाती है</p>
<p>भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की ओर से शीर्ष अदालत में एक हलफनामा दाखिल किया गया। हलफनामे में कहा गया कि याचिका में आरक्षण पर नीति बनाने के लिए न्यायिक निर्देश मांगे गए हैं, जो कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसे परमादेश यानी रिट ऑफ मैंडमस के जरिए अनिवार्य नहीं किया जा सकता।</p>
<p><strong>आरक्षण के अंदर भी आरक्षण की मांग</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणियों के भीतर आय-आधारित प्राथमिकताएं शुरू करके और उप-वर्गीकरण बनाकर आरक्षण की अधिक न्यायसंगत नीति विकसित करने के लिए सरकार को आदेश देने की मांग की है, ताकि प्रत्येक आरक्षित श्रेणी के भीतर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को प्राथमिकता मिल सके।</p>
<p><strong>अधिसूचित सूचियों में संशोधन संसद का अधिकार</strong><br>
केंद्र सरकार ने याचिका पर कहा कि ‘अनुच्छेद-341 के तहत एससी, अनुच्छेद-342 के तहत एसटी और अनुच्छेद-342ए के तहत ओबीसी की पहचान करने वाली संवैधानिक व्यवस्था केवल आर्थिक मानदंडों के आधार पर बदलाव की अनुमति नहीं देती है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इन सूचियों में शामिल करना ऐतिहासिक, सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन पर आधारित है और राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित सूचियों में संशोधन करने का अधिकार केवल संसद को है।</p>
<p><strong>इन वर्गों पर क्रीमी लेयर का नियम लागू नहीं होता</strong><br>
केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि एससी/एसटी वर्गों पर ‘क्रीमी लेयर’ का नियम लागू नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित पूर्व के ऐतिहासिक फैसले जैसे इंदिरा साहनी, ई.वी. चिन्नैया, एम. नागराज और अशोक कुमार ठाकुर मामलों का जिक्र करते हुए सरकार ने कहा कि ‘क्रीमी लेयर’ को बाहर करने का सिद्धांत ओबीसी आरक्षण के संदर्भ में ही विकसित किया गया है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>हिमाचल में बारिश का कहर, 145 सड़कें बंद और 224 ट्रांसफार्मर ठप; अगले 48 घंटे भारी पड़ सकते हैं</title>
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<description><![CDATA[ शिमला  हिमाचल प्रदेश में मानसून का प्रकोप लगातार जारी है। बीते 24 घंटों में हुई मूसलाधार वर्षा ने राज्यभर में भारी तबाही मचाई है।मौसम केंद्र शिमला की रिपोर्ट के अनुसार, धर्मशाला में सर्वाधिक 79 मिलीमीटर जोगिंदरनगर में 76, मंडी में 63.4 और राजधानी शिमला में 54.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। वर्षा के कारण … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 16:00:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>हिमाचल, में, बारिश, का, कहर, 145, सड़कें, बंद, और, 224, ट्रांसफार्मर, ठप, अगले, घंटे, भारी, पड़, सकते, हैं</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong><br>
 हिमाचल प्रदेश में मानसून का प्रकोप लगातार जारी है। बीते 24 घंटों में हुई मूसलाधार वर्षा ने राज्यभर में भारी तबाही मचाई है।मौसम केंद्र शिमला की रिपोर्ट के अनुसार, धर्मशाला में सर्वाधिक 79 मिलीमीटर जोगिंदरनगर में 76, मंडी में 63.4 और राजधानी शिमला में 54.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। वर्षा के कारण राज्य में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।<br>
<strong>145 सड़कें यातायात के लिए बंद</strong></p>
<p>7 अगस्त सुबह 10 बजे तक प्रदेश भर में 145 सड़कें यातायात के लिए अवरुद्ध हो चुकी हैं। मंडी जिले में सबसे अधिक 66 सड़कें प्रभावित हुई हैं, जबकि कुल्लू में 31 और सिरमौर में 28 सड़कें बंद हैं।</p>
<p>वर्षा व भूस्खलन के कारण बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। प्रदेश में 224 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हैं, जिनमें अकेले मंडी जिले के 182 ट्रांसफार्मर शामिल हैं. इसके अलावा 14 पेयजल आपूर्ति योजनाएं बाधित हुई हैं। जिससे कई इलाकों में पानी का संकट पैदा हो गया है।</p>
<p><strong>भारी बारिश की आशंका</strong><br>
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला द्वारा जारी पूर्वानुमान ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक राहत के कोई आसार नहीं हैं। 10 और 11 अगस्त को राज्य के अलग-अलग हिस्सों में 'भारी से भारी वर्षा' का ऑरेंज व यलो अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन ने स्थानीय निवासियों व पर्यटकों को नदी-नालों से दूर रहने और अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी है।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>TCS केस में बड़ी कार्रवाई, AIMIM पार्षद मतीन पटेल गिरफ्तार; निदा खान को पनाह देने का आरोप</title>
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<description><![CDATA[ नासिक TCS केस में पुलिस एक्शन हुआ है. संभाजीनगर के AIMIM पार्षद मतीन पटेल को गिरफ्तार किया गया है. उनपर TCS केस की आरोपी निदा खान को पनाह देने का आरोप लगा था. कोर्ट में हाजिर न होने की वजह से उनके खिलाफ वारंट निकला था. अब नासिक पुलिस ने मतीन पटेल को अरेस्ट किया … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 15:00:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>TCS, केस, में, बड़ी, कार्रवाई, AIMIM, पार्षद, मतीन, पटेल, गिरफ्तार, निदा, खान, को, पनाह, देने, का, आरोप</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नासिक</strong><br>
TCS केस में पुलिस एक्शन हुआ है. संभाजीनगर के AIMIM पार्षद मतीन पटेल को गिरफ्तार किया गया है. उनपर TCS केस की आरोपी निदा खान को पनाह देने का आरोप लगा था. कोर्ट में हाजिर न होने की वजह से उनके खिलाफ वारंट निकला था. अब नासिक पुलिस ने मतीन पटेल को अरेस्ट किया है। </p>
<p>निदा खान के 'मददगार' AIMIM पार्षद मतीन के घर और ऑफिस पर पहले ही बुलडोजर चल चुका है. बता दें कि आरोपी निदा खान को जुलाई में जमानत मिल चुकी है. वह गर्भवती है। </p>
<p>मार्च 2026 में IT कंपनी TCS की नासिक यूनिट में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया था. इसके बाद HR निदा खान समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। </p>
<p>अभी पिछले हफ्ते एक कोर्ट ने इनमें से पांच आरोपियों को जमानत दी थी. कोर्ट ने माना कि चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और जांच लगभग पूरी हो चुकी है। </p>
<p>एडिशनल सेशन जज अमित विनायक खरकर ने 30 जुलाई को रजा रफीक मेमन, आसिफ आफताब अंसारी, शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी, शफी भिकन शेख और तौसीफ बिलाल अत्तार की जमानत अर्जी मंजूर की थी. उन्हें नासिक के मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज कई FIR के सिलसिले में जमानत दी गई। </p>
<p>कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी कोई गंभीर आशंका नहीं है कि रिहा होने पर आरोपी गवाहों को धमकाएंगे या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करेंगे। </p>
<p>इसमें TCS कर्मी रजा रफीक मेमन पर यौन टिप्पणी करने, पीड़िता को गलत तरीके से छूने, यौन संबंध बनाने की मांग करने और अपने धर्म को बेहतर बताते हुए पीड़िता के धर्म का अपमान करने का आरोप लगा था. पुलिस ने कहा कि अन्य आरोपियों ने कथित तौर पर उसकी हरकतों का समर्थन किया। </p>
<p>हालांकि, बचाव पक्ष के वकील राहुल कलीवाल ने दावा किया कि कथित टिप्पणियां, अगर उन्हें सच भी मान लिया जाए, तो वे ऑफिस में 'हल्की-फुल्की मजाक-मस्ती' थीं। </p>
<p><strong>दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि आरोपी तीन महीने से ज्यादा समय से जेल में हैं। </strong></p>
<p>फिलहाल SIT, TCS यूनिट में महिला कर्मचारियों के कथित शोषण, जबरन धर्म परिवर्तन की कोशिश, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न के सिलसिले में दर्ज कुल नौ मामलों की जांच कर रही है. TCS ने नासिक ऑफिस में यौन उत्पीड़न में कथित तौर पर शामिल कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>आज का मौसम 7 अगस्त: यूपी से बंगाल तक भारी बारिश का अलर्ट, कई राज्यों में आंधी&#45;तूफान की चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली इन दिनों देश के बड़े इलाके में बारिश का कहर जारी है। असम, जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों में मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने तबाही मचा दी है। इसी बीच मौसम विभाग ने 07 अगस्त को भी कम से कम 15 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग (IMD) के … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 14:00:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>आज, का, मौसम, अगस्त:, यूपी, से, बंगाल, तक, भारी, बारिश, का, अलर्ट, कई, राज्यों, में, आंधी-तूफान, की, चेतावनी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>इन दिनों देश के बड़े इलाके में बारिश का कहर जारी है। असम, जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों में मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने तबाही मचा दी है। इसी बीच मौसम विभाग ने 07 अगस्त को भी कम से कम 15 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक राजधानी दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, बिहार और असम में भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा कुछ राज्यों मे ओले भी गिर सकते हैं।</p>
<p><strong>इन राज्यों में भारी बारिश का अनुमान</strong><br>
मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, हरियाणा, उत्तराखंड झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, गुजरात, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम में मूसलाधार बारिश हो सकती है। इसके अलावा हवाओं की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रह सकती है।</p>
<p><strong>असम में बाढ़ से भारी तबाही, 97 की मौत</strong><br>
असम में बाढ़ की स्थिति गुरुवार को भी गंभीर बनी रही, और दो और लोगों की मौत के साथ इस साल बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 97 हो गई है। वहीं, 15 जिलों में प्रभावित लोगों की संख्या बढ़कर 1.68 लाख से अधिक हो गई है। आधिकारिक बुलेटिन में यह जानकारी दी गई। एएसडीएमए ने बताया कि वर्तमान में छह जिलों में 133 राहत शिविर और राहत सामग्री वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां करीब 45,000 विस्थापित लोगों को आश्रय और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।</p>
<p><strong>दिल्ली में कैसा रहेगा मौसम</strong><br>
राजधानी दिल्ली में पिछले दो दिनों से हो रही तेज बारिश की वजह से जल-जमाव की समस्या सामने आ रही है। लोगों के आने जाने पर ब्रेक लग गया है। मौसम विभाग ने 7 अगस्त को भी दिल्ली में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा 50 से 60 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। अगल दो दिन राजधानी में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।</p>
<p><strong>यूपी और बिहार का मौसम</strong><br>
मौसम विभाग ने पू्र्वी यूपी में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, बाराबंकी, अयोध्या, गोंडा, बहराइच, सीतापुर में मध्मय से भारी बारिश का अनुमान है इसके अलावा मेरठ, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, अलीगढ़, आगरा, मथुरा, हाथरस, इटावा और कानपुर में भीबारिश का अलर्ट जारी किया गया है। बिहार के रोहतास, भोजपुर, बक्सर, सिवान, अरवल, गया, पटना, समस्तीपुर, दरभंग, मधुबनी, पूर्णिया, किशनगंज, खगड़िया, बेगूसराय में भी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। यहां आंधी के साथ तेज बारिश हो सकती है।</p>
<p>राजस्थान के दौसा, सवाई माधोपुर, भरतपुर, शाहपुरा, चित्तौड़ढ़, भीलवाड़ा, अजमेर और अलवर में बारिश हो सकती है। मध्य प्रदेश के खंडवा, खरगोन, मांडला, देवास, बालाघाट, रायसेन, पन्ना, दामोह,, शहडोल, नीमच और विदिशा में बारिश का अलर्ट है।</p>
<p><strong>पहाड़ों में भारी बारिश का अलर्ट</strong><br>
जम्मू कश्मीर में आफत की बारिश हो रही है। मौसम विभाग के मुताबिक पुछ, जुम्मू, कुलगाम, कठुआ, गांरबल, बांदीपोरा, राजौरी, मुजफ्फराबाद और किश्तवाड़ में आज तेज हवाओं के साथ तूफानी बारिश हो सकीत है। इसके अलावा ऊंचाई वाले इलाकों में बादल भी फट सकते हैं। बादल फटने की वजह से नदियां उफान पर हैं।</p>
<p>उत्तराखंड में केदरानाथ हाइवे पर तिलवाड़ा के पास भूस्खलन की वजह से यातायात बाधित है और केदारनाथ का रास्ता बंद हो गया है। मौसि विभाग ने नैनीताल, हरिद्वार, ऋषिकेश, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, अल्मोड़ा में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। हिमाचल के कुल्लू, कांगड़ा, सोलन, मंडी, बिलासपुर और शिमला में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>UPI पर चार्ज लगेगा या नहीं? RBI ने अफवाहों पर लगाई रोक, बताई पूरी सच्चाई</title>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 12:00:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>UPI, पर, चार्ज, लगेगा, या, नहीं, RBI, ने, अफवाहों, पर, लगाई, रोक, बताई, पूरी, सच्चाई</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>वित्त मंत्रालय ने संसद में जो भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027 पेश किया है. उस बिल के तहत एमडीआर (MDR) लागू करने की बात कही गई है. यह चार्ज 2000 रुपये से ज्‍यादा की लिमिट पर लागू हो सकता है. ऐसा होता है तो फिर 2000 रुपये से ज्‍यादा के किसी भी एकमुश्त पेमेंट पर ये एमडीआर शुल्क देना होगा। </p>
<p>लोगों में इसे लेकर हड़कंप मचा है और तमाम सर्वे ये आशंका भी जता रहे हैं कि इस नए यूपीआई नियम (New UPI Rule) के चलते बड़ी संख्या में यूजर्स इससे किनारा कर सकते हैं. लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि अभी इसे लेकर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा, क्योंकि पेमेंट सिस्टम पर अभी संशोधन पर विचार-विमर्श कर रही हैं। </p>
<p><strong>'अभी कुछ कहना जल्दबाजी… '</strong><br>
RBI Governor संजय मल्होत्रा का कहना है कि यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के मुद्दे पर अभी जल्दबाजी में कुछ नहीं कहा जा सकता है. भुगतान प्रणाली पर अभी भी विचार-विमर्श जारी है, जिसने कई छोटे-मोटे लेन-देनों के लिए कैश की जरूरत को कम करने में मदद की है. उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक का फोकस UPI को अधिक से अधिक अपनाने पर है. सरकार अभी भी संशोधन कर रही है. संजय मल्होत्रा के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम में आने वाली लागत अंततः किसी न किसी को तो चुकानी ही होगी. बुधवार को रेपो रेट पर एमपीसी बैठक के नतीजों का ऐलान करने के बाद एक सवाल के जवाब में उन्होंने ये <br>
बातें कहीं। </p>
<p><strong>UPI से जुड़े नए विधेयक में क्या-क्या? </strong><br>
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा मंगलवार को संसद में कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक पेश किया गया, जो उन प्रतिबंधों को हटाने का प्रस्ताव देता है, जो बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को नोटिफाइड इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर एमडीआर लगाने से रोकते हैं. लेकिन यह लिमिट सभी यूजर्स के लिए नहीं है, बल्कि व्‍यवसाय से जुड़ा हुआ मामला है। </p>
<p><strong>आम यूजर्स पर नहीं होगा असर</strong><br>
जैसा कि बताया ये मर्चेंट यूपीआई ट्रांजेक्शन से जुड़ा मामला है, तो ऐसे में आम यूजर्स पर इसका कोई असर नहीं देखने को मिलेगा. यानी रोजमर्रा के जरूरी सामानों, दूध, सब्जियां, किराना की खरीदारी और ऑटो रिक्शा व टैक्सी के किराए पर इसका असर दिखने की संभावना नहीं है. हालांकि, सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी भ्रम फैला हुआ है कि कुछ पोस्‍ट में यह दावा किया गया है कि यह सभी यूजर्स पर लागू होगा। </p>
<p><strong>क्‍या है 2000 रुपये की लिमिट? </strong><br>
कई रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि यह प्रस्ताव खासतौर पर ₹2,000 से अधिक के व्यापारी लेनदेन और बड़े कमर्शियल संस्‍थानों को टारगेट करता है. इससे कंज्‍यूमर टू कंज्‍यूमर्स के बीच हुए ट्रांजेक्‍शन को छूट होगी. अगर आप 2000 रुपये से ज्‍यादा का भी पेमेंट करते हैं तो आपको कोई चार्ज नहीं देना होगा. यानी आम यूजर्स पहले की तरह ही ₹2,000 से अधिक का पेमेंट कर सकते हैं. सामान्य UPI सीमा ₹1 लाख प्रतिदिन पेमेंट कर सकते हैं और कुछ स्‍पेशल कैटेगरी (जैसे अस्पताल, शिक्षा, टैक्स) में इससे कहीं अधिक सीमा तक पेमेंट कर सकते हैं। </p>
<p><strong>क्या होता है MDR चार्ज? </strong><br>
MDR चार्ज एक ऐसा शुल्क है, जो बिजनेस, डिजिटल ट्रांजेक्शन करने के लिए बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देना होता है. ऐसे में साफ है कि ये चार्ज व्यापारियों पर लागू होगा, न कि आम UPI यूजर पर. यह कदम जनवरी 2020 में शुरू होने वाला था, लेकिन सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए इसे रोक दिया था। </p>
<p><strong>यह किन यूजर्स पर लागू होगा?</strong> <br>
यह मुख्‍य तौर पर बैंक, UPI सर्विस प्रोवाइडर, मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्‍टम, BHIM-UPI के माध्यम से छोटे भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों पर पड़ता है, क्योंकि इंसेंटिव इन्हीं ट्रांजेक्शनों के आधार पर दिया जाता है. एक आंकड़े के मुताबिक, 95 फीसदी 2000 रुपये से ज्‍यादा की लिमिट से कम वाले ही ट्रांजेक्‍शन होते हैं. सिर्फ 5 फीसदी ही ट्रांजेक्‍शन 2000 रुपये से ज्‍यादा का होता है. इसका मतलब है कि इन 5 फीसदी ही मर्चेंट ट्रांजेक्‍शन पर ये चार्ज लागू होगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>विदेश मंत्रालय अब Snapchat पर, जेन&#45;Z तक पहुंच बनाने की दिशा में सरकार का बड़ा कदम</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली हाल ही में पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली में हुए छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बाद सरकार युवाओं खास कर जेन-जी तक पहुंचने की कोशिश तेज कर रही है. छात्रों के इस विरोध-प्रर्दशन के बाद पीएम मोदी खुद इंस्टाग्राम पर आए. उन्होंने रात में रील बनाकर युवाओं को संबोधित किया. पीएम मोदी ने मंत्रियों … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 11:15:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>विदेश, मंत्रालय, अब, Snapchat, पर, जेन-Z, तक, पहुंच, बनाने, की, दिशा, में, सरकार, का, बड़ा, कदम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>हाल ही में पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली में हुए छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बाद सरकार युवाओं खास कर जेन-जी तक पहुंचने की कोशिश तेज कर रही है. छात्रों के इस विरोध-प्रर्दशन के बाद पीएम मोदी खुद इंस्टाग्राम पर आए. उन्होंने रात में रील बनाकर युवाओं को संबोधित किया. पीएम मोदी ने मंत्रियों को भी इंस्टाग्राम पर एक्टिव होने को कहा. अब इसी कड़ी में भारत का विदेश मंत्रालय जेन-जी के बीच लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग साइट स्नैपचैट पर मौजूदगी दर्ज कराई है। </p>
<p><strong>MEA स्पोकपर्सन बोले- आइए Snap करें </strong><br>
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर साझा किए एक पोस्ट में इस बात की जानकारी दी है. रणधीर जायसवाल ने लिखा- अब हम Snapchat पर भी हैं! हमें ऐड करें और खास कहानियों, अपडेट्स, दिलचस्प कंटेंट और बहुत कुछ के लिए हमसे जुड़े रहें. उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में अंत में लिखा- आइए Snap करें। </p>
<p>मालूम हो कि जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंस्टाग्राम पर एक्टिव हुए थे. उन्होंने गुरुवार देर रात एक वीडियो जारी कर युवाओं, छात्रों को संबोधित किया था. फिर अगले दिन शुक्रवार को पीएम मोदी ने एक नया वीडियो जारी कर देश के युवाओं (खासकर जेन-जी) और आम लोगों को धन्यवाद कहा था। </p>
<p>प्रधानमंत्री ने यह वीडियो अपनी पिछली वीडियो पर देशवासियों से मिली प्रतिक्रियाओं के बाद जारी किया है. वीडियो में प्रधानमंत्री ने कहा, "थैंक्स फ्रेंड्स, कल देर रात आपसे मिलने का मौका मिला. मेरे वीडियो पर आपने जिस तरह प्रतिक्रियाएं दीं और सकारात्मक सुझाव दिए, उसके लिए आप सभी का धन्यवाद. आपका यह प्यार बना रहेगा और हमारा नाता और अधिक सक्रियता से जुड़ता रहेगा. धन्यवाद दोस्तों। </p>
<p>वीडियो को शेयर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, "युवाओं का धन्यवाद, जिन्होंने कल मेरा वीडियो देखा और उस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। <br>
प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर रात लगभग 11 बजे इस वीडियो को जारी किया। </p>]]> </content:encoded>
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<title>NEET के बाद अभिजीत दीपके का नया ऐलान, अब इस मुद्दे को पूरे देश में उठाने की तैयारी</title>
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<description><![CDATA[ छत्रपति संभाजीनगर नीट पेपर लीक विवाद के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने नया मुद्दा ढूंढ लिया है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने देश में बेरोजगारी को एक बड़ी समस्या बताते हुए गुरुवार को कहा कि इसे देशभर में उठाएंगे। वह महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में कॉजपा की &#039;कोर टीम&#039; की … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:00:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>NEET, के, बाद, अभिजीत, दीपके, का, नया, ऐलान, अब, इस, मुद्दे, को, पूरे, देश, में, उठाने, की, तैयारी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>छत्रपति संभाजीनगर</strong></p>
<p>नीट पेपर लीक विवाद के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने नया मुद्दा ढूंढ लिया है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने देश में बेरोजगारी को एक बड़ी समस्या बताते हुए गुरुवार को कहा कि इसे देशभर में उठाएंगे। वह महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में कॉजपा की 'कोर टीम' की बैठक खत्म होने के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। यह बैठक बुधवार से ही दीपके के घर पर हो रही थी।</p>
<p>संवाददाता सम्मेलन में सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास, प्रवक्ता आशुतोष रांका और अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद थे। पिछले महीने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और परीक्षा में अन्य गड़बड़ियों को लेकर सीजेपी के नेतृत्व में हुए विरोध-प्रदर्शन के कारण धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। दीपके ने कहा, ''धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों के आंदोलन की सबसे बड़ी कामयाबी है।''</p>
<p>उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि बेरोजगार युवा भी शामिल हुए थे। उन्होंने कहा, ''बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है, हम इसे देशव्यापी मुद्दा बनाएंगे। हम शिक्षा में सुधार के लिए काम करेंगे। शिक्षा, स्कूली शिक्षा से ही वहनीय नहीं है। शिक्षा मुनाफा कमाने का कारोबार बन गयी है। लेकिन हम इसे बदलना चाहते हैं।'' दीपके ने बताया कि देश में 60 प्रतिशत लोग 35 साल से कम उम्र के हैं और जंतर-मंतर पर विरोध करने वालों में भी ऐसे ही लोग शामिल थे। सीजेपी के संस्थापक ने यह भी कहा कि मीडिया की विश्वसनीयता को फिर से बहाल करने की जरूरत है।</p>
<p>अभिजीत दिपके ने केंद्र की एनडीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों ने ही इस सरकार को इस्तीफा देने पर मजबूर किया है. उन्होंने दावा किया कि  पिछले 14 सालों में देश के दमन और तानाशाही देखी है, लेकिन अब लोगों के मन का डर खत्म हो गया है और सबसे अहम बात ये है कि लोग अब इनसे नहीं डरते। </p>
<p>अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया कि काकरोच जनता पार्टी डॉ बी आर आंबेडकर, महात्मा गांधी और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के आदर्शों से मार्गदर्शन लेगी. पार्टी की विचारधारा पूरी तरह से भारत के संविधान में निहित मूल्यों पर आधारित होगी। </p>
<p>पार्टी नेतृत्व ने अपने सिद्धांतों को दोहराते हुए कहा कि हम धर्मनिरपेक्ष हैं और लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं. काकरोच जनता पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से सामाजिक न्याय के लिए लगातार काम करती रहेगी। </p>
<p>अभिजीत ने अंत में बड़ा ऐलान करते हु बताया कि दो दिन की चर्चा के बाद, हमने फैसला किया है कि कॉकरोच जनता पार्टी अगले महीने एक देशव्यापी अभियान शुरू करेगी, जिसका नाम क्या बोलती पब्लिक होगा। </p>
<p><strong>क्या बोलती पब्लिक कैंपेन शुरू करेगी CJP</strong><br>
दीपके ने बताया कि कॉकरोच जनता पार्टी अगले महीने पूरे भारत में लोगों से बातचीत करने और उनके मुद्दों को जानने के लिए 'क्या बोलती पब्लिक' कैंपेन शुरू करेगी। उन्होंने कहा, "'क्या बोलती पब्लिक' कैंपेन के दौरान हम जानेंगे कि लोग देश के मौजूदा हालात के बारे में क्या सोचते हैं और उन्हें किन मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है।" केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को स्टूडेंट्स के आंदोलन की सबसे बड़ी कामयाबी बताते हुए दीपके ने कहा, "इस सरकार ने पिछले 10-12 सालों में लोगों के मन में जो डर पैदा किया था, वह अब खत्म हो गया है।"</p>]]> </content:encoded>
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<title>DA Hike: 8वें वेतन आयोग से पहले कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, महंगाई भत्ता बढ़कर 63% होगा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली केंद्र सरकार के एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए जुलाई 2026 में महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का रास्ता साफ हो गया है। लेबर ब्यूरो ने जून 2026 का CPI-IW डेटा जारी कर दिया है, जिसके बाद अब जुलाई में होने वाली DA रिवीजन की गणना पूरी हो चुकी है। … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:00:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>केंद्र सरकार के एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए जुलाई 2026 में महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का रास्ता साफ हो गया है। लेबर ब्यूरो ने जून 2026 का CPI-IW डेटा जारी कर दिया है, जिसके बाद अब जुलाई में होने वाली DA रिवीजन की गणना पूरी हो चुकी है। लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय कर्मचारियों को 3% की बढ़ोतरी मिल सकती है, जिसके बाद DA 60% से बढ़कर 63% हो जाएगा।</p>
<p><strong>8वें वेतन आयोग से पहले यह आखिरी बड़ी बढ़ोतरी?</strong><br>
जुलाई 2026 की यह DA रिवीजन 7वें वेतन आयोग के तहत आखिरी बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि सरकार ने 8वें वेतन आयोग का गठन कर दिया है, लेकिन उसकी सिफारिशें आने में अभी समय है। जब तक नया सैलरी स्ट्रक्चर लागू नहीं होती, तब तक सभी DA रिवीजन मौजूदा 7वें वेतन आयोग के तहत ही होंगे।</p>
<p><strong>कैसे हुई जुलाई DA की गणना</strong><br>
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले लेबर ब्यूरो ने जून 2026 का कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (CPI-IW) जारी कर दिया है। यह आंकड़ा 151.9 दर्ज किया गया है, जो मई 2026 के 150.8 से अधिक है। जून महीने का यह डेटा जुलाई में होने वाली DA रिवीजन के लिए आखिरी कड़ी थी और अब सभी आवश्यक आंकड़े उपलब्ध हो चुके हैं।</p>
<p><strong>कब मिलेगा डीए और एरियर</strong><br>
DA में यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होगी, लेकिन सरकार की ओर से आधिकारिक अधिसूचना केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद ही जारी की जाएगी। पिछले वर्षों में, जुलाई DA की घोषणा आमतौर पर सितंबर या अक्टूबर में की जाती रही है।</p>
<p>बता दें केंद्र सरकार साल में दो बार 1 जनवरी और 1 जुलाई को महंगाई भत्ते में संशोधन करती है। यह संशोधन 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत किया जाता है, जहां DA की गणना CPI-IW के 12 महीने के औसत के आधार पर होती है।<br>
<strong>63.75% बना DA, लेकिन सरकार 63% ही देगी</strong></p>
<p>CPI-IW डेटा और 7वें वेतन आयोग के कैलकुलेशन सिस्टम के अनुसार, महंगाई भत्ता लगभग 63.75% बन रहा है। हालांकि, सरकार की मौजूदा ट्रेंड के अनुसार, दशमलव के अंकों को नजरअंदाज कर दिया जाता है और भुगतान योग्य दर 63% होगी। यह वर्तमान 60% की तुलना में 3% अधिक है। गणना में 64% तक पहुंचने के लिए आवश्यक आंकड़े नहीं मिले हैं, इसलिए 4% की बढ़ोतरी की संभावना फिलहाल नहीं है।</p>
<p><strong>अलग-अलग लेवल पर कितना फायदा?</strong><br>
अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो DA में 3 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी होगी। पेंशनर्स को भी यह लाभ डियरनेस रिलीफ (DR) के रूप में मिलेगा। विभिन्न वेतन स्तरों पर कर्मचारियों को होने वाले लाभ की गणना इस प्रकार है…</p>
<p><strong>    18,000 रुपये मूल वेतन वाले कर्मचारी को प्रति माह लगभग 540 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे।<br>
    35,400 रुपये मूल वेतन वाले कर्मचारी को करीब 1,062 रुपये अतिरिक्त मिल सकते हैं।<br>
    56,100 रुपये मूल वेतन वाले कर्मचारी को प्रति माह लगभग 1,683 रुपये अधिक मिलेंगे।</strong></p>]]> </content:encoded>
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<title>PM मोदी की विदेश यात्राओं पर कितना हुआ खर्च? सरकार ने संसद में दिए पूरे आंकड़े</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर हुए खर्च को लेकर केंद्र सरकार ने संसद में खुलासा किया है. गुरुवार को राज्यसभा में विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर अब तक लगभग 74.5 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।  राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और CPI … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:00:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मोदी, की, विदेश, यात्राओं, पर, कितना, हुआ, खर्च, सरकार, ने, संसद, में, दिए, पूरे, आंकड़े</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर हुए खर्च को लेकर केंद्र सरकार ने संसद में खुलासा किया है. गुरुवार को राज्यसभा में विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर अब तक लगभग 74.5 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। </p>
<p>राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और CPI (M) सांसद डॉ. वी. शिवदासन ने प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं से जुड़ा अनतारंकित प्रश्न (संख्या 2172) पूछा था. सांसदों ने 2021 से अब तक हर साल और यात्राओं के हिसाब के खर्च, हस्ताक्षर किए गए समझौतों (MoUs) और देश में आए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की जानकारी मांगी थी। </p>
<p>विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने राज्यसभा में लिखित जवाब दाखिल किया. इसमें उन्होंने बताया कि साल 2021 से अब तक प्रधानमंत्री  की गई सभी विदेश यात्राओं और उन पर हुए कुल खर्च का पूरा ब्योरा पेश कर दिया गया है। </p>
<p><strong>पुराने आंकड़े भी सामने आए</strong><br>
सरकार ने इस दौरान पुरानी यात्राओं के खर्च के आंकड़े भी पेश किए. आंकड़ों के मुताबिक, 2011 में अमेरिका यात्रा पर 10.74 करोड़ रुपये, 2013 में रूस यात्रा पर 9.95 करोड़ रुपये, 2011 में फ्रांस यात्रा पर 8.33 करोड़ रुपये और 2013 में जर्मनी यात्रा पर 6.02 करोड़ रुपये खर्च हुए थे. ये आंकड़े बिना किसी बदलाव के सीधे-सीधे वही रकम हैं, जो उस समय असल में खर्च हुई थी। </p>
<p><strong>विदेश यात्राओं से भारत को 381.8 अरब डॉलर का FDI</strong><br>
विदेश मंत्रालय ने अपने जवाब में बताया कि पीएम मोदी की ये विदेश यात्राएं दूसरे देशों के साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक संबंधों को मजबूत करने का एक बेहद कारगर माध्यम हैं. इन यात्राओं के दौरान हुए समझौतों से तकनीक, नवाचार, व्यापार, निवेश, रक्षा और ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत हुई है। </p>
<p>सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, इन अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं और मजबूत कूटनीतिक संबंधों की वजह से अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 के बीच भारत में कुल 381.8 अरब डॉलर का एफडीआई (Foreign Direct Investment) हुआ है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>CNG&#45;PNG में भी मिलेगी बायोगैस! ₹20,000 करोड़ की GOBAR&#45;Dhan योजना को कैबिनेट की मंजूरी संभव</title>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:00:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>CNG-PNG, में, भी, मिलेगी, बायोगैस, ₹20, 000, करोड़, की, GOBAR-Dhan, योजना, को, कैबिनेट, की, मंजूरी, संभव</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>आपके घर की रसोई में पाइप के जरिये पहुंचने वाली रसोई गैस-PNG और ऑटो-कार वगैरह में इस्‍तेमाल होने वाली CNG में आने वाले समय में बायोगैस मिलाई जाएगी. ये CBG यानी कंप्रेस्‍ड बायोगैस होगी. इसके लिए बड़े पैमाने पर बायोगैस की जरूरत होगी और इसी जरूरत को पूरा करने के लिए देश में 600 से 700 नए बायोगैस प्‍लांट स्‍थापित किए जाएंगे. केंद्र सरकार इसके लिए 20,000 करोड़ रुपये की संपूर्ण गोवर्धन योजना (Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan- GOBAR-DHAN) को मंजूरी दे सकती है. अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 10 अगस्‍त को विश्व बायोफ्यूल दिवस (World Biofuel Day) पर ये योजना लॉन्‍च हो सकती है। </p>
<p><strong>बेहतर कीमत, सब्सिडी और CBG प्रोडक्शन है उद्देश्‍य </strong><br>
अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार 10 अगस्त को 'विश्व जैव-ईंधन दिवस' पर 'संपूर्ण गोवर्धन योजना' शुरू कर सकती है. इस योजना का मकसद CBG (कंप्रेस्ड बायोगैस) के लिए बेहतर और ज्‍यादा खरीद कीमतें और नए प्रोजेक्ट्स के लिए ज्‍यादा कैपिटल सब्सिडी देकर CBG प्रोडक्शन को तेजी से बढ़ाना है।  </p>
<p>ये कदम 'सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टुवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन' (SATAT) योजना के शुरू होने के 8 साल बाद उठाया जा रहा है. सरकारी पोर्टल के डेटा के मुताबिक, SATAT के तहत 5,000 CBG प्लांट लगाने का टारगेट था, लेकिन अभी महज 219 प्लांट ही चालू हैं. नई योजना से ये संख्‍या बढ़ेगी. सूत्रों के मुताबिक, ज्‍यादा सब्सिडी और बेहतर खरीद कीमतों से एक साल के भीतर 600-700 और CBG प्लांट लगाने में मदद मिल सकती है। </p>
<p><strong>CNG आर PNG में मिलाया जाना है बायोगैस </strong><br>
कंप्रेस्ड बायोगैस से जुड़ी बाध्यता (obligation) के कानूनी जरूरत बनने के बाद से इसकी अहमियत और बढ़ गई है. इस बाध्यता के तहत, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स को कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) सप्लाई में CBG को मिलाना जरूरी है. अधिकारियों का कहना है कि क्षमता बढ़ाने की मौजूदा रफ्तार अगले तीन सालों में ब्लेंडिंग (मिलावट) के ऊंचे लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्‍त नहीं है, इसलिए नए निवेश बहुत जरूरी हैं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>केंद्रीय संचार मंत्री  ज्योतिरादित्य सिंधिया से चेम्बर पदाधिकारियों ने की सौजन्य भेंट, विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर किया आग्रह</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  मध्यप्रदेश चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के पदाधिकारियों ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय संचार मंत्री मंत ज्योतिरादित्य सिंधिया से सौजन्य भेंट कर ग्वालियर एवं प्रदेश के व्यापार, उद्योग तथा जनहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। चेम्बर पदाधिकारियों ने ग्वालियर में प्रस्तावित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग एवं एक्सपोर्ट ज़ोन (TMEZ) की … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 06 Aug 2026 21:15:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>केंद्रीय, संचार, मंत्री, ज्योतिरादित्य, सिंधिया, से, चेम्बर, पदाधिकारियों, ने, की, सौजन्य, भेंट, विभिन्न, महत्वपूर्ण, विषयों, पर, किया, आग्रह</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली</p>
<p> मध्यप्रदेश चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के पदाधिकारियों ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय संचार मंत्री मंत ज्योतिरादित्य सिंधिया से सौजन्य भेंट कर ग्वालियर एवं प्रदेश के व्यापार, उद्योग तथा जनहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की।</p>
<p>चेम्बर पदाधिकारियों ने ग्वालियर में प्रस्तावित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग एवं एक्सपोर्ट ज़ोन (TMEZ) की पहल के लिए केंद्रीय मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें चेम्बर में आमंत्रित किया। साथ ही आग्रह किया कि TMEZ की संभावनाओं एवं निवेश के अवसरों की विस्तृत जानकारी उद्योगपतियों एवं व्यापारियों को उपलब्ध कराने हेतु  चेम्बर में विशेषज्ञों के साथ एक कार्यशाला आयोजित कराई जाए।</p>
<p>बैठक के दौरान पदाधिकारियों ने ग्वालियर में जीएसटी कमिश्नरेट की स्थापना की स्वीकृति शीघ्र प्रदान कराने का अनुरोध किया। इसके अतिरिक्त, शहर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त पासपोर्ट सेवा केंद्र की स्थापना तथा एलटीटी–हरिद्वार एक्सप्रेस का ग्वालियर में ठहराव सुनिश्चित कराने का भी आग्रह किया।</p>
<p>केंद्रीय संचार मंत्री मंत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चेम्बर के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी को शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि नई टीम ग्वालियर अंचल के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी। उन्होंने कहा कि टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग एवं एक्सपोर्ट ज़ोन (TMEZ) ग्वालियर-चंबल संभाग के लिए एक बड़ी सौगात है, जिससे नए उद्योगों की स्थापना के साथ ₹5,000 करोड़ से अधिक का निवेश तथा 10,000 से अधिक नए रोजगार सृजित होंगे।</p>
<p>उन्होंने TMEZ की विस्तृत जानकारी उद्योग एवं व्यापार जगत को उपलब्ध कराने के लिए विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को नामित करने की जानकारी दी। इसी क्रम में 18 अगस्त को मध्यप्रदेश चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में विशेषज्ञों की उपस्थिति में एक कार्यशाला आयोजित की जाएगी।</p>
<p>मंत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर में जीएसटी कमिश्नरेट की स्थापना, आधुनिक पासपोर्ट सेवा केंद्र की स्थापना तथा एलटीटी–हरिद्वार एक्सप्रेस के ग्वालियर में ठहराव के संबंध में भी उचित कार्यवाही कराने का आश्वासन दिया।</p>
<p>इस अवसर पर चेम्बर के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण अग्रवाल, संयुक्त अध्यक्ष सुरेश बंसल, मानसेवी सचिव दीपक अग्रवाल, मानसेवी संयुक्त सचिव दीपक पमनानी एवं कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल उपस्थित रहे।</p>]]> </content:encoded>
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<title>तरुण तेजपाल को यौन उत्पीड़न मामले में 10 साल की सजा, कोर्ट ने लगाया ₹5 लाख का जुर्माना</title>
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<description><![CDATA[  मुंबई तरुण तेजपाल केस में बॉम्बे हाई कोर्ट ने दोषी पाए गए पूर्व तहलका एडिटर-इन-चीफ की सजा का ऐलान कर दिया है. सजा तय करने से पहले कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं. बेंच ने कहा कि तेजपाल के खिलाफ बाद में किसी और दुर्व्यवहार की रिपोर्ट सामने नहीं आई और दोनों पक्ष अपनी … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 06 Aug 2026 19:00:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>तरुण, तेजपाल, को, यौन, उत्पीड़न, मामले, में, साल, की, सजा, कोर्ट, ने, लगाया, ₹5, लाख, का, जुर्माना</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> मुंबई</strong></p>
<p>तरुण तेजपाल केस में बॉम्बे हाई कोर्ट ने दोषी पाए गए पूर्व तहलका एडिटर-इन-चीफ की सजा का ऐलान कर दिया है. सजा तय करने से पहले कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं. बेंच ने कहा कि तेजपाल के खिलाफ बाद में किसी और दुर्व्यवहार की रिपोर्ट सामने नहीं आई और दोनों पक्ष अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुके हैं. इसके बाद कोर्ट ने अलग-अलग धाराओं के तहत तेजपाल को सजा सुनाई। </p>
<p>बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में तरुण तेजपाल को दोषी पाया था. कोर्ट ने गोवा की ट्रायल कोर्ट के 2021 के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें तेजपाल को बरी कर दिया गया था. इसके बाद सजा की अवधि को लेकर सुनवाई हुई और अब अदालत ने दो धाराओं के तहत 10-10 साल की कठोर कैद, जबकि एक अन्य धारा के तहत 3 साल की सजा सुनाई है। </p>
<p><strong>तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाई कोर्ट ने पाया दोषी</strong><br>
बॉम्बे हाई कोर्ट ने गोवा की ट्रायल कोर्ट के 2021 के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें तेजपाल को बरी कर दिया गया था. यह मामला 13 <strong>साल से अदालत में चल रहा था और अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद सजा का ऐलान किया गया है। </strong></p>
<p><strong>जब SG ने बोला अमिताभ बच्चन का डायलॉग</strong><br>
पिंक फिल्म में अमिताभ बच्चन ने वकील का किरदार निभाया था और उसमें तीन महिलाओं के लिए केस लड़ते हुए नजर आए थे. फिल्म में उनका एक डायलॉग भी बहुत फेमस हुआ था, जिसमें रिश्ते में महिला की मर्जी की जरूरत पर जोर देते हुए वह कहते हैं- नो मींस नो. बॉम्बे हाईकोर्ट में आज की सुनवाई के दौरान एसजी तुषार मेहता ने भी यही बात दोहराई।</p>
<p><strong>SG मेहता की दमदार दलील</strong><br>
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार सजा में नरमी बरते जाने की तरुण तेजपाल की अपील का सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विरोध किया और कहा, 'यह जानते हुए कि पीड़िता उनकी बेटी की उम्र की है, उन्होंने यह अपराध किया… वह उसके लिए पिता समान हैं, उन्हें ऐसी हरकत नहीं करनी चाहिए थी… पीड़िता के विरोध के बावजूद दो दिन तक लगातार इन्होंने ये किया… इस अदालत को समाज में एक साफ संदेश देना चाहिए कि जब एक लड़की न बोलती है तो उसका मतलब न होता है. A No Means No.'</p>
<p><strong>तरुण तेजपाल ने की सजा में नरमी बरती जाने की अपील</strong><br>
तरुण तेजपाल ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट से अपील की कि मेरी उम्र को देखते हुए सजा में नरमी बरती जाए. तरुण तेजपाल के वकील आबाद पोंडा ने कोर्ट से अपील की है कि उनके मुवक्किल के साथ नरमी बरती जाए और सजा सुनाते वक्त इस बात का ख्याल रखें कि यह 13 साल पुराना मामला है. एडवोकेट पोंडा ने यह भी अपील की है कि 8 हफ्तों के बाद सजा का आदेश सुनाया जाए, ताकि वह सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें. उन्होंने कहा कि तरुण तेजपाल के खिलाफ कोई और एफआईआर या केस दर्ज नहीं है। </p>
<p>तरुण तेजपाल ने कहा, 'मेरी उम्र अब 62 साल हो गई है और मुझे लगता है कि मैं पीड़ित हूं. मेरी पत्नी है और इसके अलावा मेरे पास कहने के लिए कुछ खास नहीं है. मैं बस यही कह सकता हूं कि हम अपील कर सकते हैं. कृप्या मेरे लिए नरमी रखें. बाकी तथ्य रिकॉर्ड में दर्ज हैं। </p>
<p><strong>सेशन कोर्ट ने 2021 में कर दिया था बरी</strong><br>
साल 2021 में गोवा की मपुसा कोर्ट की स्पेशल जज क्षमा जोशी ने तरुण तेजपाल को यौन उत्पीड़न मामले के सभी आरोपों से बरी कर दिया था. कोर्ट ने माना था कि इन आरोपों को साबित करने के लिए पीड़िता की तरफ से जो सबूत पेश किए गए वह तरुण तेजपाल के खिलाफ आरोपों की पुष्टि नहीं करते हैं. निचली अदालत ने कहा, 'रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों पर विचार करने के बाद हमें लगता है कि आरोपी को संदेह का लाभ दिया जा सकता है क्योंकि जो आरोप लगाए गए उनकी पुष्टि करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं और शिकायतकर्ता के बयानों में भी फेरबदल है। </p>
<p>सेशन कोर्ट के इस फैसले का राज्य सरकार और स्टेट सीआईडी ने विरोध किया और हाईकोर्ट में अपील की. अपील में कहा गया कि सेशन कोर्ट ने सबूतों की जांच के बजाय घटना के बाद पीड़िता के व्यवहार, रिएक्शन और उनके बैकग्राउंड का आकलन किया. उन्होंने कहा कि कोर्ट ने तरुण तेजपाल के खिलाफ ठीक से ट्रायल करने के बजाय पीड़िता को ही कटघरे में खड़ा कर दिया. राज्य सरकार ने सेशन कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए कि कोर्ट ने उन माफी के मैसेज की जांच क्यों नहीं की, जो कंपनी में पीड़िता की शिकायत के बाद तरुण तेजपाल ने उन्हें भेजे थे। </p>
<p><strong>महिला कर्मी ने तेजपाल पर लगाए थे आरोप</strong><br>
यह मामला 2013 में सामने आया था. तहलका के तत्कालीन एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल पर उनकी एक महिला सहकर्मी ने गोवा के एक होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. तेजपाल ने आरोपों से इनकार किया था. मामले में लंबी सुनवाई के बाद 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था। </p>
<p><strong>ट्रायल कोर्ट के आदेश को बॉम्बे हाईकोर्ट में दी गई थी चुनौती</strong><br>
गोवा सरकार ने इसके बाद ट्रायल कोर्ट के फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी. हाई कोर्ट ने मामले के सबूतों और दोनों पक्षों की दलीलों पर दोबारा विचार किया और अब निचली अदालत का फैसला पलटते हुए तेजपाल को दोषी करार दिया है. तेजपाल की तरफ से पहले ही कहा जा चुके हैं कि हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी. उन्होंने इस मामले में एक याचिका भी दाखिल की है। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>तरुण तेजपाल रेप केस में बड़ा फैसला, हाईकोर्ट ने बरी करने का आदेश पलटा; दोषी करार</title>
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<description><![CDATA[ मुंबई तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को 2013 के बहुचर्चित रेप मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार (6 अगस्त) को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मापुसा की ट्रायल कोर्ट के 2021 के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें तेजपाल को सभी आरोपों से … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 06 Aug 2026 16:00:10 +0530</pubDate>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई</strong></p>
<p>तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को 2013 के बहुचर्चित रेप मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार (6 अगस्त) को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मापुसा की ट्रायल कोर्ट के 2021 के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था। अदालत ने अब तेजपाल को इस मामले में दोषी करार दिया है।</p>
<p><strong>सजा का ऐलान आज ही</strong><br>
जब अदालत ने यह फैसला सुनाया, तब तरुण तेजपाल कोर्ट रूम में ही मौजूद थे। दोषी करार दिए जाने के बाद उन्होंने अदालत से सजा में नरमी बरतने की अपील की है। हाई कोर्ट आज दोपहर 2:30 बजे तेजपाल की सजा की अवधि का ऐलान करेगा। गौरतलब है कि गोवा सरकार ने 2021 में सेशंस कोर्ट द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने के फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर यह फैसला आया है।</p>
<p><strong>ट्रायल कोर्ट के फैसले पर उठे गंभीर सवाल</strong><br>
सुनवाई के दौरान गोवा सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि निचली अदालत का फैसला "खराब निष्कर्षों का एक क्लासिक मामला" था। राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने जिस तरह से इस मामले को डील किया, वह हैरान करने वाला था। ऐसा लग रहा था मानो कोर्ट ने आरोपी के बजाय पीड़िता को ही कटघरे में खड़ा कर दिया हो। सरकार की तरफ से यह भी कहा गया कि निचली अदालत ने यह तय करने की कोशिश की कि यौन उत्पीड़न की शिकार किसी महिला को घटना के बाद कैसा व्यवहार करना चाहिए।</p>
<p>तेजपाल की तरफ से यह दलील दी गई थी कि पीड़िता का बयान भरोसेमंद नहीं था और सीसीटीवी फुटेज भी आरोपों की पुष्टि नहीं करता। हालांकि, हाई कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलों और तेजपाल द्वारा पीड़िता को भेजे गए 'माफीनामे वाले ईमेल' को अहम आधार मानते हुए उन्हें दोषी पाया।</p>
<p>
यह मामला एक पूर्व कनिष्ठ सहयोगी के आरोपों से जुड़ा है, जिसमें उसने दावा किया था कि नवंबर 2013 में गोवा में ‘थिंकफेस्ट' कार्यक्रम के दौरान एक होटल की लिफ्ट में तेजपाल ने उसका यौन उत्पीड़न किया था. निचली अदालत द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने के बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और तेजपाल के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। </p>
<p><strong>तरुण तेजपाल ने कोर्ट में क्या कहा?</strong><br>
अदालत के फैसले पर तरुण तेजपाल ने कहा, "मैं 62 साल का हूं और मेरा मानना ​​है कि मैं पीड़ित हूं. मेरी पत्नी है और इसके अलावा मेरे पास कहने के लिए कुछ खास नहीं है. मैं बस इतना कह सकता हूं कि हम अपील कर सकते हैं. कृपया मेरे प्रति नरमी बरतें. बाकी सभी तथ्य रिकॉर्ड पर रखे गए हैं। </p>
<p><strong>सॉलिसिटर जनरल और बचाव पक्ष की दलीलें</strong><br>
तुषार मेहता ने राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखा. मेहता ने दलील दी कि सत्र अदालत ने यौन उत्पीड़न पीड़िता के व्यवहार को लेकर पहले से बनी धारणाओं के आधार पर शिकायतकर्ता के आचरण का आकलन कर गंभीर गलती की. सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि किसी यौन उत्पीड़न पीड़िता की प्रतिक्रिया को लेकर कोई सार्वभौमिक मानक नहीं हो सकता, क्योंकि यह व्यक्ति की शिक्षा, व्यक्तित्व, सामाजिक पृष्ठभूमि और परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है. निचली अदालत ने शिकायतकर्ता के बयानों में मामूली विरोधाभासों को जरूरत से ज्यादा तवज्जो दी, जबकि यह जांचना चाहिए था कि उसके मुख्य आरोपों में निरंतरता बनी रही या नहीं। </p>
<p><strong>बचाव पक्ष की दलीलें</strong><br>
वहीं बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी थी कि अभियोजन ने तेजपाल के माफी वाले ईमेल को यौन संबंध की स्वीकारोक्ति के रूप में गलत तरीके से पेश किया. उन्होंने शिकायतकर्ता की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कथित घटना से पहले और बाद में उसका व्यवहार, ईमेल, व्हाट्सऐप संदेश और दस्तावेजी रिकॉर्ड अभियोजन के मामले के विपरीत हैं. बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि चलती लिफ्ट में शिकायतकर्ता को कैद रखे जाने का उसका बयान विशेषज्ञ साक्ष्य और सीसीटीवी फुटेज से मेल नहीं खाता। </p>
<p><strong>क्या था पूरा मामला?</strong><br>
नवंबर 2013 में गोवा के एक फाइव-स्टार होटल के एलिवेटर (लिफ्ट) में तहलका मैगजीन के एक इवेंट (THiNK fest) के दौरान तरुण तेजपाल पर उनकी ही एक जूनियर महिला पत्रकार ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। मामले के तूल पकड़ने पर तेजपाल को 30 नवंबर 2013 को गिरफ्तार किया गया था। मई 2014 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी। 21 मई 2021 को गोवा की एक सेशंस कोर्ट ने उन्हें सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए बरी कर दिया था, लेकिन अब हाई कोर्ट ने उस फैसले को पलटते हुए उन्हें मुजरिम ठहराया है।</p>
<p>तेजपाल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद उन्हें 30 नवंबर 2013 को गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि, एक साल से भी कम समय में जुलाई 2014 में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई थी। सितंबर 2017 में सेशन कोर्ट ने उनके खिलाफ आरोप तय किए। दोनों पक्षों की निजता और सम्मान की रक्षा के लिए इस पूरे मामले का ट्रायल 'इन-कैमरा' किया गया। अंततः अभियोजन पक्ष के 71 गवाहों और सीसीटीवी फुटेज व ईमेल जैसे इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच के बाद सेशन कोर्ट ने 21 मई 2021 को तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था, जिसे अब हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>भारत बनेगा ग्लोबल कंटेंट हब! PM मोदी और Netflix के Co&#45;CEO के बीच हुई अहम चर्चा</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त को नेटफ्लिक्स के को-सीईओ टेड सारंडोस से मुलाकात की. इस दौरान भारत के मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर की संभावनाओं, देश की समृद्ध स्टोरीटेलिंग परंपरा और भारतीय क्रिएटिव टैलेंट को वैश्विक स्तर पर ले जाने के रोडमैप पर विस्तार से चर्चा हुई।  मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 06 Aug 2026 14:00:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>भारत, बनेगा, ग्लोबल, कंटेंट, हब, मोदी, और, Netflix, के, Co-CEO, के, बीच, हुई, अहम, चर्चा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong><br>
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त को नेटफ्लिक्स के को-सीईओ टेड सारंडोस से मुलाकात की. इस दौरान भारत के मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर की संभावनाओं, देश की समृद्ध स्टोरीटेलिंग परंपरा और भारतीय क्रिएटिव टैलेंट को वैश्विक स्तर पर ले जाने के रोडमैप पर विस्तार से चर्चा हुई। </p>
<p>मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'टेड सारंडोस से मिलकर खुशी हुई. भारत के मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर की अपार संभावनाओं पर सार्थक चर्चा हुई.' उन्होंने कहा कि भारत के पास कहानी कहने की समृद्ध परंपरा और असाधारण रचनात्मक प्रतिभा है.यही ताकत देश को वैश्विक कंटेंट क्रिएशन हब बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। </p>
<p><strong>भारत को ग्लोबल कंटेंट हब बनाने पर जोर</strong></p>
<p>बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भारतीय कहानियों और स्थानीय प्रतिभाओं को वैश्विक मंच तक कैसे पहुंचाया जाए. दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत का क्रिएटिव इकोसिस्टम दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचने की बड़ी क्षमता रखता है। </p>
<p><strong>नेटफ्लिक्स ने प्रधानमंत्री के साथ शेयर विजन</strong><br>
नेटफ्लिक्स इंडिया ने भी इस मुलाकात को लेकर X पर पोस्ट साझा किया. कंपनी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और टेड सारंडोस के बीच भारत के मीडिया और एंटरटेनमेंट उद्योग को वैश्विक स्तर पर आगे ले जाने की साझा सोच पर चर्चा हुई. कंपनी ने भारत में अपने 10 वर्ष पूरे होने का भी उल्लेख किया और कहा कि यह मुलाकात उनके लिए सम्मान की बात रही। </p>
<p><strong>Netflix इंडिया स्टोरीटेलिंग पहल की घोषणा</strong><br>
नेटफ्लिक्स ने इस अवसर पर 'Netflix India Storytelling Initiative' शुरू करने की घोषणा भी की. कंपनी के अनुसार यह पहल भारतीय क्रिएटिव इकोसिस्टम में दीर्घकालिक निवेश का हिस्सा है. इस कार्यक्रम को IICT और NFDC के सहयोग से चलाया जाएगा. इसका उद्देश्य अगली पीढ़ी के लेखकों, फिल्मकारों और अन्य क्रिएटिव टैलेंट को ट्रेनिंग, गाइडेंस और अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि भारतीय कहानियां वैश्विक दर्शकों तक और प्रभावी ढंग से पहुंच सकें। </p>
<p><strong>भारत के कंटेंट इकोसिस्टम पर रहेगा फोकस</strong><br>
नेटफ्लिक्स ने अपने बयान में कहा, 'हम यह देखने के लिए उत्साहित हैं कि भारत आगे क्या रचता है.' माना जा रहा है कि इस नई पहल के जरिए भारतीय कंटेंट इंडस्ट्री को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के साथ-साथ उभरते क्रिएटिव टैलेंट को भी बड़ा मंच मिलेगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>मार्क जुकरबर्ग ने मानी गलती, डीपफेक और कंटेंट गड़बड़ियों पर मांगी माफी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), डीपफेक और एल्गोरिदम संचालन में हुई गंभीर चूक के लिए आधिकारिक रूप से माफी मांगी ली और अपनी गलतियों पर खेद व्यक्त किया है. कंपनी ने स्वीकार किया कि कुछ खास प्रकार के कंटेंट को … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 06 Aug 2026 13:15:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मार्क, जुकरबर्ग, ने, मानी, गलती, डीपफेक, और, कंटेंट, गड़बड़ियों, पर, मांगी, माफी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), डीपफेक और एल्गोरिदम संचालन में हुई गंभीर चूक के लिए आधिकारिक रूप से माफी मांगी ली और अपनी गलतियों पर खेद व्यक्त किया है. कंपनी ने स्वीकार किया कि कुछ खास प्रकार के कंटेंट को बढ़ावा देने (बूस्ट करने) के लिए भारी पैसों का भुगतान किया गया था। </p>
<p>सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसी वीडियो को हटाए जाने का कोई उल्लेख नहीं हुआ. सरकार ने स्पष्ट किया कि एल्गोरिदम के जरिए कंटेंट चुनने के कारण मेटा को आईटी अधिनियम के तहत सेफ हार्बर की कानूनी सुरक्षा नहीं मिलेगी। </p>
<p>अधिकारियों ने स्पष्ट किया ये माफी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों और मेटा के ग्लोबल लीडरशिप के बीच प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, कंटेंट मॉडरेशन और भारतीय कानूनों के पालन पर हुई दो दिन की बैठक के दौरान मांगी गई है। </p>
<p>सूत्रों के अनुसार, मेटा ने कंटेंट मॉडरेशन में गलतियों को स्वीकार किया और अपने प्लेटफॉर्म पर हानिकारक कंटेंट को संभालने के तरीके पर खेद व्यक्त किया है। </p>
<p>सरकारी अधिकारियों ने यह भी बताया कि मेटा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत इंटरमीडियरी (मध्यस्थ) को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि इसके एल्गोरिदम सक्रिय रूप से यह तय करते हैं कि कौन सा कंटेंट आगे बढ़ाया जाएगा और यूजर्स को दिखाया जाएगा। </p>
<p><strong>'नहीं मिलेगी सेफ हार्बर सुरक्षा'</strong><br>
सरकारी अधिकारियों ने मेटा को स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह आईटी अधिनियम के तहत इंटरमीडियरी की परिभाषा के दायरे में नहीं आती है. चूंकि मेटा के एल्गोरिदम तय करते हैं कि कौन सा कंटेंट किसे दिखेगा. इसलिए IT अधिनियम के तहत 'सेफ हार्बर' सुरक्षा लागू नहीं होती है, उसे कानूनी सेफ हार्बर सुरक्षा का लाभ नहीं दिया जाएगा। </p>
<p>बातचीत में प्लेटफॉर्म के बिजनेस तौर-तरीकों पर भी चर्चा हुई. सूत्रों के अनुसार, मेटा ने माना कि कंटेंट की कुछ कैटेगरी को बढ़ावा देने पर काफी पैसा खर्च किया गया था और और इस फैसले पर खेद व्यक्त किया. कंपनी ने पूछताछ और समीक्षा के दौरान स्वीकार किया कि एक विशेष प्रकार के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए बहुत सारा पैसा दिया गया था. इस गलती को स्वीकार करते हुए कंपनी और जुकरबर्ग ने अपनी इस चूक पर खेद जताया है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बहू के नाम घर होने पर भी सास को रहेगा रहने का अधिकार</title>
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<description><![CDATA[ शिमला हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने घरेलू हिंसा के एक मामले में साफ किया कि बहू के नाम वाले घर में भी सास का रहने का अधिकार है. बहू सास को सिर्फ इसलिए बेदखल नहीं कर सकती कि मकान उसके नाम पर है और उसने ये मकान अपनी कमाई से खरीदा है. अदालत ने कहा … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 06 Aug 2026 13:00:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>हाई, कोर्ट, का, बड़ा, फैसला, बहू, के, नाम, घर, होने, पर, भी, सास, को, रहेगा, रहने, का, अधिकार</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong></p>
<p>हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने घरेलू हिंसा के एक मामले में साफ किया कि बहू के नाम वाले घर में भी सास का रहने का अधिकार है. बहू सास को सिर्फ इसलिए बेदखल नहीं कर सकती कि मकान उसके नाम पर है और उसने ये मकान अपनी कमाई से खरीदा है. अदालत ने कहा कि साझा गृहस्थी के अधिकार के तहत ये जरूरी नहीं है कि संपत्ति पति, सास या पीड़ित महिला के नाम पर हो। </p>
<p><strong>बहू के नाम वाले घर में सास को रहने का अधिकार</strong><br>
जस्टिस राकेश कैथला ने सुरभि बेदी बनाम मनजीत कौर मामले में बहू की याचिका को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि बहू के नाम वाले घर में भी सास को रहने का पूरा अधिकार है. कोर्ट ने मंडी जिले की निचली अदालत और अपीलीय अदालत के उस फैसले को सही माना, जिनमें सास के संयुक्त कब्जे को बहाल करने का आदेश दिया गया था। </p>
<p><strong>तीसरे व्यक्ति को किराएदार बना सास को बेदखल करना उचित नहीं</strong><br>
अदालत ने कहा कि साझा गृहस्थी की परिभाषा के लिए यह आवश्यक नहीं है कि संपत्ति पति, सास या पीड़ित महिला के नाम पर हो। यदि कोई महिला घरेलू संबंध के तहत किसी मकान में रह चुकी है, तो वह मकान साझा गृहस्थी माना जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि जब बहू ने स्वयं स्वीकार किया है कि सास-ससुर उसके साथ उसी मकान में रह रहे थे, तो दोनों के बीच घरेलू संबंध स्थापित होता है। ऐसे में किसी तीसरे व्यक्ति को किराएदार बनाकर सास को अप्रत्यक्ष रूप से बेदखल करना कानूनन उचित नहीं है।</p>
<p><strong>HC ने SC के इन 2 फैसलों का दिया हवाला</strong><br>
न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम का उद्देश्य महिलाओं के आवास संबंधी अधिकारों की रक्षा करना है. अदालत ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के दो महत्वपूर्ण फैसलों सतीश चन्द्र अहूजा बनाम स्नेहा अहूजा और प्रभा त्यागी बनाम कमलेश देवी मामलों का हवाला दिया. अदालत ने कहा कि साझा गृह वह है, जहां पक्षकार किसी भी समय घरेलू संबंध में साथ रह चुके हों, चाहे उस मकान का स्वामित्व किसी एक पक्ष के नाम ही क्यों न हो. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सास, बहू, पत्नी, मां, बेटी या संयुक्त परिवार की अन्य महिला सदस्य सभी को साझा गृह में निवास का अधिकार है. अगर किसी महिला को ऐसे घर से कानूनन प्रक्रिया अपनाए बिना निकाला जाता है, तो यह उसके अधिकारों का उल्लंघन होगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि बहू किरायेदार रखकर भी सास को साझा गृह से बेदखल नहीं कर सकती और संयुक्त कब्जा बहाल करने का निचली अदालत का आदेश पूरी तरह सही है। </p>
<p><strong>बहू सास को घर से बाहर नहींं निकाल सकती</strong><br>
अदालत ने साफ किया कि सिर्फ मालिकाना हक किसी एक के नाम पर होने से साझा गृहस्थी का अधिकार खत्म नहीं होता. इसीलिए सास को घर से नहीं निकाला जा सकता. बता दें कि मंडील जिले के रामनगर की महिला ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए कहा था कि उसके बेटे की शादी साल 2013 में हुई थी. पूरा परिवार एक ही घर में रहता था. साल 2025 में परिवार में विवाद हुआ तो बहू ने कहा कि ये घर उसने अपनी निजी कमाई से बनवाया है. मकान पर सिर्फ उसका अधिकार है. उसने किरायेदार रखकर सास को घर से बाहर निकाल दिया। </p>
<p><strong>घरेलू संबंध के तहत सास को बेदखल करना गैरकानूनी</strong><br>
सास ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कोर्ट का दवराजा खटखटाते हुए सुरक्षा, संरक्षण और निवास के अधिकार की मांग की. वहीं बहू ने कहा कि उसने ये मकान अपनी कमाई से खरीदा है. उसकी मालिक सिर्फ वही है. बहू ने अदालत को ये भी बताया कि पहले सास-ससुर उसके साथ ही रहते थे. इस पर कोर्ट ने कहा कि सास पहले बहू के साथ रहती थी ऐसे में उनके बीच घरेलू संबंध स्थापित होता है.  ऐसे में बहू का किसी तीसरे को किरायेदार बनाकर सास को घर से अप्रत्यक्ष रूप से बेदखल करना कानूनन सही नहीं है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>रेलवे का 5 मिनट वाला नियम क्या है? हर यात्री के लिए जानना है बेहद जरूरी</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली    अगर कभी ऐसा हो कि आपको अचानक कहीं जाना पड़ जाए और ट्रेन छूटने में सिर्फ कुछ मिनट ही बचे हों, तो घबराने की जरूरत नहीं है. भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए ऐसा नियम बनाया था, जिसके तहत ट्रेन रवाना होने से कुछ मिनट पहले तक भी टिकट बुक … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 06 Aug 2026 11:15:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>रेलवे, का, मिनट, वाला, नियम, क्या, है, हर, यात्री, के, लिए, जानना, है, बेहद, जरूरी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong><br>
   अगर कभी ऐसा हो कि आपको अचानक कहीं जाना पड़ जाए और ट्रेन छूटने में सिर्फ कुछ मिनट ही बचे हों, तो घबराने की जरूरत नहीं है. भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए ऐसा नियम बनाया था, जिसके तहत ट्रेन रवाना होने से कुछ मिनट पहले तक भी टिकट बुक या कैंसिल की जा सकती थी. यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद थी, जिन्हें अचानक यात्रा करनी पड़ती है या जिनका प्लान आखिरी समय में बदल जाता है। </p>
<p><strong>आखिर क्या था यह नियम?</strong><br>
पहले रेलवे का रिजर्वेशन चार्ट ट्रेन चलने से काफी पहले बन जाता था. चार्ट बनने के बाद ऑनलाइन टिकट बुक करना संभव नहीं होता था. लेकिन बाद में रेलवे ने सेकंड रिजर्वेशन चार्ट शुरू किया. इस व्यवस्था में पहला चार्ट ट्रेन रवाना होने से लगभग 4 घंटे पहले तैयार होता था, जबकि दूसरा चार्ट ट्रेन के चलने से 30 मिनट से लेकर 5 मिनट पहले तक तैयार किया जाता था. जब तक दूसरा चार्ट तैयार नहीं हो जाता, तब तक यात्री टिकट बुक या कैंसिल कर सकते थे। </p>
<p><strong>इससे यात्रियों को क्या फायदा हुआ?</strong><br>
मान लीजिए किसी यात्री ने अपनी टिकट कैंसिल कर दी. पहले ऐसी सीटें खाली रह जाती थीं, लेकिन अब दूसरे चार्ट की वजह से वही सीट किसी दूसरे जरूरतमंद यात्री को मिल सकती थी. इसका सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिला जिन्हें अचानक यात्रा करनी पड़ती है. अगर किसी सीट पर आखिरी समय में कैंसिलेशन होता है, तो दूसरे चार्ट से पहले तक वह सीट दूसरे यात्री को मिल सकती थी। </p>
<p><strong>टिकट कैसे बुक की जा सकती थी?</strong><br>
यात्री दो तरीकों से टिकट बुक कर सकते थे. पहला आईआरसीटीसी की वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए और रेलवे के PRS (पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम ) काउंटर से. अगर दूसरे चार्ट बनने से पहले सीट उपलब्ध होती, तो टिकट तुरंत कन्फर्म मिल सकती थी. अगर किसी कारण से यात्रा का प्लान बदल जाए, तो दूसरा चार्ट बनने से पहले टिकट कैंसिल करने की सुविधा भी उपलब्ध थी. इससे सीट किसी दूसरे यात्री को मिल जाती थी और ट्रेन में खाली सीटों की संख्या कम होती थी। </p>
<p>यह पूरी तरह सीट की उपलब्धता पर निर्भर करता था. अगर किसी यात्री ने टिकट कैंसिल की हो या कोई सीट खाली हो, तभी आपको कन्फर्म टिकट मिल सकती थी. अगर सभी सीटें पहले से भरी हों, तो टिकट मिलना संभव नहीं होता। </p>
<p><strong>रेलवे ने यह सुविधा क्यों शुरू की?</strong><br>
इस नियम का मकसद था कि ट्रेन में खाली सीटें कम रहें और ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को यात्रा करने का मौका मिले. पहले कई बार लोग आखिरी समय में टिकट कैंसिल कर देते थे, लेकिन चार्ट बन जाने के कारण वह सीट किसी दूसरे यात्री को नहीं मिल पाती थी. दूसरे चार्ट की व्यवस्था से इस समस्या को काफी हद तक दूर किया गया। </p>
<p><strong>यात्रियों के लिए क्या सीख है?</strong><br>
अगर आपको अचानक ट्रेन से यात्रा करनी पड़ जाए, तो ट्रेन छूटने से पहले एक बार आईआरसीटीसी ऐप या वेबसाइट पर जरूर सीट चेक करें. कई बार आखिरी समय में किसी यात्री के टिकट कैंसिल करने पर सीट खाली हो जाती है और आपको कन्फर्म टिकट मिल सकती है। हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि रेलवे समय-समय पर टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन के नियमों में बदलाव करता रहता है. इसलिए यात्रा से पहले आईआरसीटीसी या भारतीय रेलवे के नए नियम जरूर देख लें. हाल के वर्षों में टिकट कैंसिलेशन और रिफंड से जुड़े कुछ नियम बदले भी गए हैं. कुल मिलाकर, आखिरी समय तक टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन की यह व्यवस्था यात्रियों के लिए काफी उपयोगी साबित हुई. इससे अचानक यात्रा करने वाले लोगों को राहत मिली और रेलवे की खाली सीटों का बेहतर उपयोग भी संभव हो सका। </p>]]> </content:encoded>
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<title>एक टिकट पर घूमिए पूरा भारत! जानें भारतीय रेलवे के सर्कुलर जर्नी टिकट के नियम, फायदे और बुकिंग प्रोसेस</title>
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<description><![CDATA[ मुंबई  छुट्टियों के मौसम में परिवार या दोस्तों के साथ अलग-अलग धार्मिक स्थलों और टूरिस्ट प्लेस वाले शहरों के सफर (Pilgrimage &amp; City Tour) का प्लान बनाना काफी रोमांचक होता है. हालांकि, हर नए शहर के लिए अलग-अलग ट्रेन टिकट बुक करना, बार-बार लाइनों में लगना और भारी किराया चुकाना बजट को बिगाड़ देता है।  … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 06 Aug 2026 11:15:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>एक, टिकट, पर, घूमिए, पूरा, भारत, जानें, भारतीय, रेलवे, के, सर्कुलर, जर्नी, टिकट, के, नियम, फायदे, और, बुकिंग, प्रोसेस</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई </strong><br>
छुट्टियों के मौसम में परिवार या दोस्तों के साथ अलग-अलग धार्मिक स्थलों और टूरिस्ट प्लेस वाले शहरों के सफर (Pilgrimage & City Tour) का प्लान बनाना काफी रोमांचक होता है. हालांकि, हर नए शहर के लिए अलग-अलग ट्रेन टिकट बुक करना, बार-बार लाइनों में लगना और भारी किराया चुकाना बजट को बिगाड़ देता है। </p>
<p>आपकी इसी परेशानी को दूर करने के लिए भारतीय रेलवे सर्कुलर जर्नी टिकट (Circular Journey Ticket) की खास सुविधा प्रदान करता है. यह एक ऐसा विशेष ट्रैवल पास है, जिसके जरिए आप बार-बार अलग टिकट खरीदने के बजाय एक ही टिकट पर कई शहरों की यात्रा पूरी कर सकते हैं. यह टिकट मुख्य रूप से उन यात्राओं के लिए जारी किए जाते हैं, जिनकी यात्रा जिस स्टेशन से शुरू होती है, घूम फिर कर उसी स्टेशन पर आकर समाप्त होती है। </p>
<p><strong>सर्कुलर जर्नी टिकट से ऐसे होती है पैसे और समय की बचत</strong><br>
यह स्पेशल टिकट साधारण यानी पॉइंट-टू पॉइंट टिकटों के मुकाबले काफी किफायती और सुविधाजनक होता है. दरअसल, भारतीय रेलवे का नियम है कि यात्रा की दूरी जितनी अधिक होती है, प्रति किलोमीटर किराया उतना ही कम होता चला जाता है. सर्कुलर जर्नी टिकट में पूरी यात्रा की कुल दूरी को एक साथ जोड़कर किराया तय किया जाता है, जिससे कुल खर्च अलग-अलग टिकटों के मुकाबले बहुत कम हो जाता है. अगर आप अलग-अलग ट्रेनों से यात्रा करते हैं, तो हर बार सुपरफास्ट, एक्सप्रेस या सप्लीमेंट्री चार्ज देना पड़ता है. सर्कुलर टिकट में एक्स्ट्रा चार्ज सिर्फ एक ही बार लिया जाता है. हर नए शहर या स्टेशन से अगली ट्रेन पकड़ने के लिए आपको नए सिरे से टिकट काउंटर पर लाइन में लगने या बार-बार ऑनलाइन बुकिंग करने का तनाव नहीं रहता है। </p>
<p><strong>ये हैं सर्कुलर जर्नी टिकट के मुख्य नियम और शर्तें</strong><br>
सफर पर निकलने से पहले रेलवे की ओर से तय किए गए कुछ अहम नियमों को जानना जरूरी है.  सर्कुलर टिकट पर पूरी यात्रा के दौरान आप अपनी पसंद के मुताबिक ज्यादा से ज्यादा 8 स्टेशनों पर यात्रा विराम ले सकते हैं. इस टिकट की वैधता 56 दिनों तक रहती है, जिसका अर्थ है कि आप बिना किसी जल्दबाजी के आराम से हर शहर को एक्सप्लोर करते हुए सफर पूरा कर सकते हैं. यह सुविधा स्लीपर क्लास (Sleeper) से लेकर 3rd AC, 2nd AC, 1st AC और फर्स्ट क्लास तक सभी श्रेणियों में मिलती है. अगर कुल यात्रा की दूरी 1,000 किलोमीटर या उससे ज्यादा है, तो वरिष्ठ नागरिकों को किराए में नियम के मुताबिक विशेष छूट का लाभ मिलता है। </p>
<p>
<strong>जानें क्या होते हैं सर्कुलर टिकट के मानक और गैर मानक रूट</strong><br>
रेलवे ग्राहकों की सुविधा के हिसाब से दो तरह के सर्कुलर जर्नी टिकट की पेशकश करता है. इनमें से एक है मानक यानी रेलवे ने पहले से ही कुछ मशहूर पर्यटन, सांस्कृतिक और तीर्थ स्थलों को जोड़कर फिक्स टूरिस्ट रूट तय किए हुए हैं. आप सीधे काउंटर पर जाकर बने-बनाये मानक रूटों में से एक चुन सकते हैं. वहीं, दूसरा है गैर मानक यानी अगर आप अपनी पसंद के हिसाब से नए शहरों और अपनी सुविधा के मुताबिक रूट का चयन करना चाहते हैं, तो आप खुद की यात्रा का रूट तैयार कर सकते हैं। </p>
<p><strong>सर्कुलर टिकट बुक करने का स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस</strong><br>
सर्कुलर जर्नी टिकट को सामान्य टिकट की तरह सीधे IRCTC ऐप या रिजर्वेशन काउंटर से नहीं खरीदा जा सकता. इसके लिए आपको नीचे दी गई प्रक्रिया अपनानी होगी. यानी पहले आपको अपना रूट प्लान बनाना होगा. इसके बाद कमर्शियल मैनेजर से अप्रूवल लेना होगी, फिर बुकिंग काउंटर से टिकट लेना होगा. इसके बाद आप सीट रिजर्वेशन करा सकते हैं। </p>
<p>    सबसे पहले उन सभी स्टेशनों या शहरों की एक सूची तैयार करें जहां-जहां आप रुकना चाहते हैं. ध्यान रखें कि यात्रा का शुरुआती और अंतिम स्टेशन एक ही होना चाहिए। </p>
<p>    अपने नजदीकी मुख्य स्टेशन के डिविजनल कमर्शियल मैनेजर या स्टेशन मैनेजर से मिलकर अपना रूट प्लान दिखाएं. वे आपके रूट की कुल दूरी की गणना करके किराए का एक स्वीकृत फॉर्म तैयार करेंगे। </p>
<p>    इस अप्रूव्ड फॉर्म को अपने स्टेशन के पैसेंजर रिजर्वेशन काउंटर पर ले जाएं, तय किराया जमा करें और अपना सर्कुलर जर्नी पास प्राप्त करें। </p>
<p>    ध्यान दें कि सर्कुलर जर्नी टिकट केवल यात्रा की अनुमति देता है, सीट या बर्थ की गारंटी नहीं. टिकट लेने के बाद आपको रिजर्वेशन काउंटर पर जाकर अपनी यात्रा के प्रत्येक चरण के लिए अलग से रिजर्वेशन फॉर्म भरना होगा और केवल रिजर्वेशन फीस देकर अपनी सीट बुक करनी होगी। </p>]]> </content:encoded>
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<title>PM Kisan Update: 2031 तक जारी रहेगी किसान सम्मान निधि योजना, सालाना मिलेंगे ₹6,000; जानें 24वीं किस्त की तारीख</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली एक तरफ करोड़ों किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त का इंतजार है वही दूसरी तरफ 31 जुलाई को हुई मोदी कैबिनेट बैठक में 3.15 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय खर्च के साथ योजना को 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है। योजना के तहत अबतक 23 किस्तों … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 06 Aug 2026 11:00:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Kisan, Update:, 2031, तक, जारी, रहेगी, किसान, सम्मान, निधि, योजना, सालाना, मिलेंगे, ₹6, 000, जानें, 24वीं, किस्त, की, तारीख</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>एक तरफ करोड़ों किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त का इंतजार है वही दूसरी तरफ 31 जुलाई को हुई मोदी कैबिनेट बैठक में 3.15 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय खर्च के साथ योजना को 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है। योजना के तहत अबतक 23 किस्तों में किसानों के बैंक खातों में सीधे 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी जा चुकी है।</p>
<p>20 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के हुगली से 23वीं किस्त के तहत 9.44 करोड़ किसानों के बैंक खातों में 18,984 करोड़ रुपये जारी किए थे। कोविड-19 महामारी के दौरान किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई। पीएम-किसान योजना के तहत महिला किसानों को 1.06 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई है, और लाभार्थियों में से लगभग प्रत्येक चार में से एक महिला किसान है।</p>
<p><strong>PM KISAN: क्या कहता है नियम, कब तक आएगी 24वीं किस्त</strong><br>
पीएम किसान योजना के नियमानुसार, पहली किस्त अप्रैल-जुलाई, दूसरी किस्त अगस्त से नवंबर और तीसरी किस्त दिसंबर से मार्च के बीच जारी होती है। अगली किस्त (24वीं) चार महीने के चक्र के आधार पर अगस्त से नवंबर के बीच जारी होने की संभावना है। पिछली साल 21वीं किस्त 20 नवंबर 2025 को जारी की गई थी। उससे पहले 18वीं किस्त 5 अक्टूबर 2024 में आई थी। इस हिसाब से 24वीं किस्त अक्टूबर से नवंबर के बीच कभी भी जारी हो सकती है। हालांकि, सरकार की तरफ से अभी इसकी सटीक तारीख की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।</p>
<p><strong>24वीं किस्त चाहिए तो अपडेट करें ये सभी दस्तावेज​</strong><br>
ध्यान रहे अगली किस्त का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जिन्होंने e-KYC , भूलेखों का सत्यापन, बैंक खाता आधार से लिंक और फार्मर रजिस्ट्री का कार्य पूरा कर लिया है। ये सभी कार्य ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से किए जा सकते हैं। इसके अलावा जिन राज्यों में नए पंजीकरणों के लिए ‘फार्मर आईडी’ (Farmer ID) बनाना अनिवार्य है, ऐसे में किसानों को अगली किस्त से पहले ‘फार्मर आईडी’ भी अपडेट करना जरूरी है। साथ ही आवेदन फॉर्म में नाम , पता, मोबाईल नंबर, आधार संख्या में कोई गलती हो गई है तो सही कर लें, अन्यथा किस्त अटक सकती है। किसानों को सलाह दी जाती है कि किस्त से जुड़ी सभी जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर नजर बनाएं रखें।</p>
<p><strong>2019 में शुरू हुई थी PM KISAN योजना</strong><br>
प्रधानमंत्री-किसान योजना फरवरी 2019 में शुरू की गई थी। इस योजना के तहत पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता 3 समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में जारी की जाती है। यह पात्र किसान परिवारों को समय पर और पारदर्शी आय सहायता प्रदान करती है, जिससे किसानों को कृषि निवेश बढ़ाने और अपनी आजीविका को मजबूत करने में मदद मिलती है।</p>
<p><strong>2030-31 तक जारी रहेगी पीएम किसान योजना</strong><br>
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में 31 जुलाई को हुई कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने को मंजूरी दी गई है। इस अवधि के दौरान इस योजना के लिए कुल 3.15 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन स्वीकृत किया गया है।</p>
<p><strong>PM Kisan : लिस्ट में कैसे चेक करें अपना नाम</strong><br>
    प्रधानमंत्री किसान सम्‍मान निधि योजना की आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in/ पर जाएं।<br>
    Farmer corner पर क्लिक करने पर एक नया पेज खुलेगा।<br>
    यहां beneficiary list के विकल्प का चयन करने के बाद एक फॉर्म खुलेगा।<br>
    इसमें पहले राज्‍य, फिर जिला, ब्‍लॉक और गांव का नाम चुनें।<br>
    सभी जानकारी को भरने के बाद get report पर क्लिक करें।<br>
    अब आपके सामने आपके गांव के पीएम किसान योजना के लाभार्थियों की लिस्‍ट खुल जाएगी।<br>
    लिस्‍ट में अगर आपका नाम है, तो आपके खाते में भी पैसे आएंगे।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>NEET परीक्षा में होंगे बड़े बदलाव! JEE की तर्ज पर कंप्यूटर मोड और OMR खत्म? सरकार ने बताया पूरा प्लान</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली NEET पेपर लीक और इसे लेकर मचे बवाल के बाद अब सरकार की तरफ से कई तरह के कदम उठाए जा रहे हैं. एंटी पेपर लीक कानून के बाद अब सरकार ने बताया है कि अगले साल से NEET-UG की परीक्षा को अब JEE के तर्ज पर आयोजित किया जा सकता है. यानी … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 06 Aug 2026 11:00:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>NEET, परीक्षा, में, होंगे, बड़े, बदलाव, JEE, की, तर्ज, पर, कंप्यूटर, मोड, और, OMR, खत्म, सरकार, ने, बताया, पूरा, प्लान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>NEET पेपर लीक और इसे लेकर मचे बवाल के बाद अब सरकार की तरफ से कई तरह के कदम उठाए जा रहे हैं. एंटी पेपर लीक कानून के बाद अब सरकार ने बताया है कि अगले साल से NEET-UG की परीक्षा को अब JEE के तर्ज पर आयोजित किया जा सकता है. यानी नीट की दो परीक्षाएं आयोजित हो सकती हैं, साथ ही पेन-पेपर मोड की बजाय परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड करने पर भी विचार चल रहा है. ये जानकारी सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दी गई है। </p>
<p><strong>कमेटी ने दिया सुझाव </strong><br>
ISRO के पूर्व चेयरमैन की अगुवाई में बनी एक टीम ने परीक्षा को ज्यादा साफ-सुथरा और सुरक्षित बनाने के लिए कुछ सलाह दी हैं. इनमें कंप्यूटर पर परीक्षा (CBT) के अलावा जैसे JEE में पहले Main और फिर Advanced होता है, वैसे ही नीट में भी दो बार परीक्षा कराने का सुझाव है. सरकार ने कोर्ट में बताया है कि इन सुझावों को ध्यान से देखा जा रहा है और परीक्षा कराने वाली एजेंसी (NTA) में सुधार के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>सरकार ने बताया री-नीट में क्या हुए बदलाव?<br>
    प्रश्नपत्रों के कई सेट अलग-अलग सुरक्षित स्थानों पर तैयार किए गए<br>
    प्रश्नपत्रों की पैकिंग में छह स्तर की छेड़छाड़-रोधी सुरक्षा व्यवस्था अपनाई गई <br>
    QR कोड और आधार आधारित ट्रैकिंग से प्रश्नपत्र बॉक्स की निगरानी की गई <br>
    51,311 जैमर लगाए गए <br>
    1.38 लाख CCTV कैमरों से निगरानी की गई <br>
    87,000 कर्मचारियों को फ्रिस्किंग और बायोमेट्रिक जांच के लिए लगाया गया </strong></p>
<p><strong>NTA में बड़ा फेरबदल</strong><br>
इससे पहले सरकार की तरफ से एनटीए में बड़ा फेरबदल कर करीब 45 से ज्यादा लोगों को एजेंसी से बाहर कर दिया गया था. साथ ही अब नई भर्तियां की जा रही हैं. कुल मिलाकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में युवा अधिकारियों और नए लोगों को नियुक्त किया जा रहा है. आगे परीक्षा और इसके पूरे प्रोसेस में किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो, इसे लेकर बेहद सख्ती की गई है। </p>
<p><strong>CBT मोड पर भी सवाल</strong><br>
पेपर लीक की समस्या से बचने के लिए भले ही सरकार कंप्यूटर आधारित परीक्षा पर विचार कर रही है, लेकिन इसे लेकर कई एक्सपर्ट्स ने चिंता भी जताई है. उनका कहना है कि इस मोड में परीक्षा कराने का नुकसान सबसे ज्यादा उन छात्रों को होगा, जो दूर दराज के गांवों में पढ़ रहे हैं. उनके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के बिना ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ना ब्रह्मोस, ना अग्नि… सिर्फ ₹200 में दुश्मन के आत्मघाती ड्रोन होंगे तबाह! नई तकनीक ने चौंकाया</title>
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<description><![CDATA[ बेंगलुरु  ना ब्रह्मोस की भारी-भरकम लागत, ना अग्नि मिसाइल का गर्जन. महज 200 रुपये की बिजली का एक झटका और दुश्मन का घातक आत्मघाती कामिकेज ड्रोन पलक झपकाते ही हवा में जलकर स्वाहा हो जाएगा. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के इस नए स्वदेशी साइलेंट किलर लेजर हथियार यानी डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) ने … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 06 Aug 2026 10:00:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ना, ब्रह्मोस, ना, अग्नि…, सिर्फ, ₹200, में, दुश्मन, के, आत्मघाती, ड्रोन, होंगे, तबाह, नई, तकनीक, ने, चौंकाया</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बेंगलुरु </strong></p>
<p>ना ब्रह्मोस की भारी-भरकम लागत, ना अग्नि मिसाइल का गर्जन. महज 200 रुपये की बिजली का एक झटका और दुश्मन का घातक आत्मघाती कामिकेज ड्रोन पलक झपकाते ही हवा में जलकर स्वाहा हो जाएगा. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के इस नए स्वदेशी साइलेंट किलर लेजर हथियार यानी डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) ने आधुनिक युद्ध के सारे समीकरण ही बदलकर रख दिए हैं. जहां करोड़ों रुपये की मिसाइलें भी झुंड में आने वाले ड्रोन्स के आगे कभी-कभी बेबस महसूस करती थीं, वहीं इस तकनीक ने रक्षा विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है. लेकिन इस अजेय और असीमित क्षमता वाले महाहथियार के चमकदार भविष्य के पीछे एक ऐसा कमजोर पहलू भी छिपा है जो अचानक युद्ध के मैदान का पूरा खेल पलट सकता है। </p>
<p>इस महाशक्तिशाली लेजर बीम का सबसे बड़ा दुश्मन कोई आधुनिक रडार या शील्ड नहीं बल्कि प्रकृति का एक छोटा सा मिजाज है. बारिश, घना कोहरा और धुंध है ये हथियार बेअसर साबित नजर आता है. जैसे ही आसमान में बादल घिरते हैं या कोहरा छाता है, प्रकाश की गति से तबाही मचाने वाली यह अचूक किरण अपनी धार खो बैठती है और हवा में ही बिखर कर शांत हो जाती है। </p>
<p><strong>डीआरडीओ का प्रोजेक्‍ट सहस्र शक्ति</strong><br>
डायरेक्टेड एनर्जी वेपन यानी लेजर और माइक्रोवेव आधारित हथियार आधुनिक युद्धनीति के सबसे क्रांतिकारी गेम-चेंजर माने जा रहे हैं. परंपरागत बारूद, मिसाइल या गोलियों के विपरीत ये हथियार अत्यधिक केंद्रित इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा या लेजर बीम का इस्तेमाल कर दुश्मन के ड्रोन, फाइटर जेट्स और मिसाइलों को हवा में ही पिघलाकर या उनके इलेक्ट्रॉनिक्स को जलाकर नष्ट कर देते हैं. भारत का रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) अपने दो प्रमुख संस्थानों CHESS (हैदराबाद) और LASTEC (दिल्ली) के जरिए प्रोजेक्ट सहस्र शक्ति के तहत इन स्वदेशी हथियारों पर तेजी से काम कर रहा है। </p>
<p><strong>प्रमुख भारतीय प्रोजेक्ट्स</strong><br>
• प्रोजेक्ट तेजास्त्र/सहस्र शक्ति (DEW Mk-1 & Mk-2A): भारत द्वारा विकसित 30-किलोवॉट (kW) क्षमता वाला मोबाइल लेजर वेपन सिस्टम. इसे ट्रक पर माउंट करके सीमाओं पर तैनात किया जाता है। <br>
• DURGA-II (Directionally Unrestricted Ray-Gun Array): यह DRDO का 100-किलोवॉट क्लास का हल्का और अत्याधुनिक लेजर वेपन प्रोजेक्ट है। <br>
• प्रोजेक्ट सूर्य: 300-किलोवॉट क्षमता वाला भविष्य का प्रोजेक्ट जिसे सुपरसोनिक मिसाइलों और फाइटर जेट्स को रोकने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। </p>
<p> </p>
<table>
<tbody>
<tr>
<th>पैरामीटर</th>
<th>विवरण / आँकड़े</th>
</tr>
</tbody>
<tbody>
<tr>
<td>स्पीड (गति)</td>
<td><strong>प्रकाश की गति (~3,00,000 किमी/सेकंड):</strong> दागे जाने के तुरंत बाद (नैनोसेकंड्स में) लक्ष्य पर हमला।</td>
</tr>
<tr>
<td>प्रभावी रेंज</td>
<td><strong>2 किमी से 10 किमी (पावर पर आधारित):</strong> 30kW सिस्टम (4 किमी); 100kW दुर्गा-2 (5–10 किमी); भविष्य का ‘सूर्य’ प्रोजेक्ट (20 किमी तक)।</td>
</tr>
<tr>
<td>पेलोड (वारहेड)</td>
<td><strong>शून्य (जीरो पेलोड):</strong> इसमें कोई बारूद या मिसाइल नहीं होती, केवल ‘फोकस्ड फोटोन बीम’ होती है।</td>
</tr>
<tr>
<td>प्रति शॉट लागत</td>
<td>₹200 से ₹800 (मिसाइलों की तुलना में केवल बिजली का खर्च)</td>
</tr>
<tr>
<td>पावर सोर्स</td>
<td><strong>30 kW से 100 kW+:</strong> हाई-कैपेसिटी बैटरी पैक, डीजल जेनरेटर या शिप-बोर्ड पावर ग्रिड से संचालित।</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<div>
<table>
<tbody>
<tr>
<th> </th>
</tr>
<tr>
<th>विशेषता</th>
<th>पारंपरिक एयर डिफेंस मिसाइल(जैसे आकाश/स्पाइडर)</th>
<th>डायरेक्टेड एनर्जी वेपन(लेजर/DEW)</th>
</tr>
</tbody>
<tbody>
<tr>
<td>हमले का समय</td>
<td>मैक 2-4 (कुछ सेकंड से मिनट)</td>
<td>प्रकाश की गति (तत्काल इम्पैक्ट)</td>
</tr>
<tr>
<td>मैगजीन क्षमता</td>
<td>सीमित (मिसाइलों की संख्या खत्म होने पर रीलोड जरूरी)</td>
<td>असीमित (जब तक बिजली की सप्लाई है)</td>
</tr>
<tr>
<td>एक हमले की लागत</td>
<td>₹30 लाख से ₹3 करोड़ प्रति मिसाइल</td>
<td>मात्र ₹200 से ₹800 प्रति लेजर शॉट</td>
</tr>
<tr>
<td>स्वार्म ड्रोन का मुकाबला</td>
<td>बहुत खर्चीला और कठिन</td>
<td>बेहद आसान और किफ़ायती</td>
</tr>
<tr>
<td>मौसम का प्रभाव</td>
<td>मौसम से काफी हद तक अप्रभावित</td>
<td>धुंध, घने बादलों और बारिश में रेंज कम हो सकती है</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
<p><strong>तकनीकी और रणनीतिक विश्लेषण </strong></p>
<p><strong>फायदे</strong><br>
1. सस्ते ड्रोन हमलों का तोड़: रूस-यूक्रेन युद्ध में देखा गया है कि $20,000 के ड्रोन को गिराने के लिए $10 लाख की मिसाइलें दागनी पड़ती हैं. लेजर वेपन इस वित्तीय संतुलन को भारत के पक्ष में बदल देते हैं.<br>
2. सटीकता: लेजर बीम ड्रोन के विशिष्ट हिस्से (जैसे- फ्यूल टैंक, कैमरे या कंट्रोल सेंसर) को बिना आसपास नुकसान पहुंचाए निशाना बना सकती है.</p>
<p><strong>चुनौतियां</strong><br>
1. मौसम की बाधा: भारी बारिश, कोहरा या धूल भरी आंधी लेजर बीम की ऊर्जा को बिखेर देती है.<br>
2. बिजली और कूलिंग की आवश्यकता: 100kW की लेजर बीम पैदा करने के लिए भारी-भरकम पावर जेनरेटर और उन्नत कूलिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है.</p>
<p><strong>सवाल-जवाब </strong><br>
<strong>लेजर हथियार बिना किसी बारूद के ड्रोन या मिसाइल को कैसे तबाह करता है?</strong><br>
लेजर हथियार एक ही बिंदु पर अत्यधिक केंद्रित प्रकाश ऊर्जा (Photons) डालता है. यह ऊर्जा लक्ष्य की सतह पर कुछ ही सेकंड में हजारों डिग्री तापमान पैदा कर देती है, जिससे ड्रोन का फाइबर या मेटल ढांचा जल जाता है और उसके अंदर मौजूद इलेक्ट्रॉनिक्स और फ्यूल पिघल जाते हैं.<br>
<strong>DRDO का दुर्गा-2 (DURGA-II) प्रोजेक्ट क्या है?</strong><br>
DURGA-II भारत का 100-किलोवॉट क्षमता वाला स्वदेशी लेजर वेपन प्रोजेक्ट है. इसका मुख्य उद्देश्य थल सेना, वायुसेना और नौसेना को दुश्मन के झुंड ड्रोन्स (Swarm Drones), बैलिस्टिक/क्रूज मिसाइलों और आर्टिलरी गोलों से सुरक्षा देना है.<br>
क्या लेजर हथियारों से दुनिया की कोई भी मिसाइल बचाई जा सकती है?<br>
हाँ, लेजर हथियार प्रकाश की गति (3 लाख किमी/सेकंड) से काम करते हैं, जिससे यह हाइपरसोनिक मिसाइलों जैसी अत्यधिक तेज उड़ने वाली वस्तुओं को भी आसानी से ट्रैक करके उनके पतवार या सेंसर को तुरंत निष्क्रिय कर सकते हैं.</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>150 साल का रिकॉर्ड तोड़ सकता है अल&#45;नीनो, दुनिया पर मंडरा रहा भीषण गर्मी का खतरा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली दुनिया में एक बार फिर सुपर अल-नीनो को लेकर चिंता बढ़ गई है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस बार यह पिछले 150 सालों का सबसे ताकतवर सुपर अल-नीनो  बन सकता है. अगर ऐसा हुआ तो दुनिया का औसत तापमान नया रिकॉर्ड बना सकता है. कई देशों में भीषण गर्मी, सूखा और कुछ जगहों पर … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 06 Aug 2026 10:00:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>150, साल, का, रिकॉर्ड, तोड़, सकता, है, अल-नीनो, दुनिया, पर, मंडरा, रहा, भीषण, गर्मी, का, खतरा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>दुनिया में एक बार फिर सुपर अल-नीनो को लेकर चिंता बढ़ गई है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस बार यह पिछले 150 सालों का सबसे ताकतवर सुपर अल-नीनो  बन सकता है. अगर ऐसा हुआ तो दुनिया का औसत तापमान नया रिकॉर्ड बना सकता है. कई देशों में भीषण गर्मी, सूखा और कुछ जगहों पर भारी बारिश जैसी मौसम की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं. यह अनुमान कई जलवायु मॉडल्स के आंकड़ों के आधार पर लगाया गया है। </p>
<p>सुपर अल-नीनो कोई नई घटना नहीं है. यह तब बनता है, जब प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से काफी ज्यादा गर्म हो जाता है. इसका असर सिर्फ समुद्र तक नहीं रहता, बल्कि दुनिया के कई देशों के मौसम पर भी पड़ता है. इसलिए वैज्ञानिक लगातार नजर रख रहे हैं। </p>
<p>कैलिफोर्निया की संस्था बर्कले अर्थ के मुताबिक, 14 अलग जलवायु मॉडल्स से किए गए सैकड़ों अनुमान में करीब 90 फीसदी मॉडल्स बता रहे हैं कि इस बार ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर का तापमान पिछले 150 सालों में सबसे ज्यादा हो सकता है. समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 3.6 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर जा सकता है. इससे पहले सबसे मजबूत सुपर अल-नीनो 2015-16 में दर्ज किया गया था. उस समय यह बढ़त करीब 2.75 डिग्री सेल्सियस थी। </p>
<p>वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी पहले से ही ग्लोबल वार्मिंग की वजह से गर्म हो रही है. अगर इसी समय सुपर अल-नीनो भी बहुत मजबूत हो गया, तो दोनों का असर मिलकर दुनिया का तापमान और बढ़ा सकते हैं. इससे कई देशों में हीटवेव, सूखा और दूसरी अधिक मौसम की घटनाएं बढ़ सकती हैं। </p>
<p>भारत में अल-नीनो का असर अक्सर मॉनसून पर देखा जाता है. कई बार इसकी वजह से सामान्य से कम बारिश होती है, लेकिन हर बार ऐसा हो, यह जरूरी नहीं है. मौसम एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारतीय मॉनसून कई दूसरी चीजों पर भी निर्भर करता है. इसलिए सिर्फ अल-नीनो के आधार पर मॉनसून का पूरा अनुमान नहीं लगाया जा सकता. फिर भी अगर सुपर अल-नीनो मजबूत हुआ, तो गर्मी बढ़ सकती है और मौसम का मिजाज भी बदल सकता है। </p>
<p>फिलहाल यह एक अनुमान है. आने वाले महीनों में समुद्र के तापमान और मौसम के नए आंकड़ों से तस्वीर और साफ होगी. लेकिन अभी तक ज्यादातर क्लाइमेट मॉडल्स यही बता रहे हैं कि अगर अनुमान सही साबित हुए, तो यह पिछले 150 सालों का सबसे ताकतवर सुपर अल-नीनो हो सकता है. इसका असर दुनिया के मौसम और तापमान, दोनों पर देखने को मिल सकता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>प्रॉपर्टी का बनेगा ‘आधार कार्ड’! दिल्ली में Land Record Bill से खत्म होंगे जमीन के विवाद</title>
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<pubDate>Thu, 06 Aug 2026 10:00:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>प्रॉपर्टी, का, बनेगा, ‘आधार, कार्ड’, दिल्ली, में, Land, Record, Bill, से, खत्म, होंगे, जमीन, के, विवाद</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली   </strong></p>
<p>दिल्ली की ज़मीनी व्यवस्था और प्रॉपर्टी रिकॉर्ड्स को पूरी तरह पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए दिल्ली सरकार एक बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है. सरकार जल्द ही 'Delhi Land Record Bill' पेश करने की तैयारी में है. इस नए विधेयक का सबसे प्रमुख आकर्षण यह है कि अब दिल्ली की हर संपत्ति का एक विशिष्ट डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिसे आम भाषा में 'प्रॉपर्टी का आधार कार्ड' कहा जा रहा है। </p>
<p>इस विधेयक के लागू होने के बाद दिल्ली की सीमाओं में आने वाली हर छोटी-बड़ी ज़मीन का सटीक डिजिटल ब्योरा सरकार के पास उपलब्ध होगा. इस डिजिटल मैपिंग के दायरे में केवल कृषि भूमि ही नहीं, बल्कि रेजिडेंशियल, कमर्शियल और कृषि सभी प्रकार की संपत्तियों को शामिल किया जाएगा। </p>
<p>ज़मीनी स्तर पर इस योजना को सटीक बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है. दिल्ली के सभी गांवों की मैपिंग ड्रोन सर्वे के जरिए की जा रही है, जिससे हर ज़मीन की सटीक सीमाएं तय की जा सकें. इस वृहद सर्वे कार्य में आर्किओलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की भी मदद ली जा रही है। </p>
<p><strong>ग्रामीण इलाकों से शुरुआत: 30 गांवों से पहला चरण</strong><br>
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत दिल्ली के ग्रामीण इलाकों से की जा रही है, शुरुआती चरण में 30 गांवों के ज़मीनी दस्तावेज़ पूरी तरह से डिजिटल रूप में तैयार किए जाएंगे. इन 30 गांवों के मकान और जमीन मालिकों को सरकार की ओर से आधिकारिक 'स्वामित्व प्रॉपर्टी कार्ड' सौंपे जाएंगे. ग्रामीण क्षेत्रों में सफल क्रियान्वयन के बाद इस योजना का विस्तार दिल्ली के अन्य शहरी और अनधिकृत क्षेत्रों तक किया जाएगा. इस विषय पर सर्वसम्मति और ग्रामीणों के सुझाव लेने के लिए आज ग्राम प्रतिनिधियों के साथ एक अहम बैठक भी बुलाई गई है। </p>
<p><strong>आम जनता को क्या होगा फायदा?</strong><br>
दिल्ली में लंबे समय से ज़मीन के फर्जीवाड़े, एक ही संपत्ति को कई लोगों को बेचने और सीमाओं को लेकर पड़ोसियों के बीच अदालती मामले आम रहे हैं. 'प्रॉपर्टी आधार कार्ड' बनने से ज़मीन और संपत्ति से जुड़े दशकों पुराने अदालती और कचहरी के विवादों के निपटारे में बड़ी मदद मिलेगी. डिजिटलाइजेशन के कारण कोई भी व्यक्ति फर्जी दस्तावेज़ बनाकर दूसरों की संपत्ति पर कब्जा या उसे बेच नहीं पाएगा। </p>
<p>स्वामित्व कार्ड मिलने से ग्रामीणों और संपत्ति मालिकों को बैंकों से आसानी से लोन मिल सकेगा. दिल्ली सरकार का यह 'Land Record Bill' न केवल राजधानी के प्रॉपर्टी सेक्टर में पारदर्शिता लाएगा, बल्कि आम नागरिकों को अदालती चक्करों और धोखाधड़ी से भी मुक्ति दिलाएगा। </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>देश की 56% गाड़ियों का नहीं है बीमा! सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिना इंश्योरेंस वाहनों का चालान काटने के निर्देश</title>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 21:00:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>देश, की, 56, गाड़ियों, का, नहीं, है, बीमा, सुप्रीम, कोर्ट, सख्त, बिना, इंश्योरेंस, वाहनों, का, चालान, काटने, के, निर्देश</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारत की सड़कों पर दौड़ने वाले आधे से ज्यादा वाहनों का बीमा नहीं है। इस चौंकाने वाले आंकड़े पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने बिना बीमा वाले वाहनों से निपटने के लिए कई कड़े सुझाव भी दिए हैं। अगर आपके वाहन का बीमा नहीं है, तो भविष्य में पेट्रोल पंप पर आपको पेट्रोल-डीजल मिलने में भी परेशानी हो सकती है। इसके अलावा, हाईवे के कैमरों की मदद से ऐसे वाहनों की पहचान कर उनका ऑटोमैटिक चालान काटने के भी निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p><strong>16.5 करोड़ वाहन बिना इंश्योरेंस के</strong><br>
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। पीठ ने इस बात पर हैरानी जताई कि भारतीय सड़कों पर चलने वाले लगभग 56 फीसदी वाहनों (जिनमें ज्यादातर दोपहिया वाहन हैं) का बीमा ही नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल 30.4 करोड़ पंजीकृत वाहन हैं, जिनमें से 16.5 करोड़ बिना इंश्योरेंस के हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में होने वाले 22% सड़क हादसों में बिना बीमा वाले वाहन ही शामिल होते हैं। कोर्ट ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम (MVA) की धारा 146 के तहत अनिवार्य बीमा का उद्देश्य ही खत्म हो रहा है, जिससे दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवजे के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने को मजबूर होना पड़ता है।</p>
<p><strong>पेट्रोल पंप पर नहीं मिलेगा ईंधन</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट ने बीमा नियामक इरडा और सड़क परिवहन मंत्रालय को एक पायलट प्रोजेक्ट पर विचार करने का सुझाव दिया है। इसके तहत वाहनों को दिए जाने वाले ईंधन को उनके 'वैध बीमा स्टेटस' से जोड़ा जाएगा। यानी, जब तक वाहन का वैध बीमा नहीं होगा, उसे पेट्रोल पंपों पर ईंधन देने से मना किया जा सकेगा।</p>
<p>पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी इस पर सैद्धांतिक रूप से अपनी सहमति जता दी है। कोर्ट के अनुसार, इससे न सिर्फ बिना बीमा वाले वाहनों की आसानी से पहचान हो सकेगी, बल्कि लोग मजबूरी में ही सही अपना इंश्योरेंस अपडेट रखेंगे।</p>
<p><strong>कैमरों से कटेगा ऑटोमैटिक ई-चालान</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट ने मोटर वाहन कानून को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि हाईवे और सड़कों पर लगे ANPR कैमरों को 'इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो' और 'वाहन' (VAHAN) पोर्टल के डेटाबेस से जोड़ा जाए। इसके जरिए बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान कर उनका ऑटोमैटिक ई-चालान जनरेट किया जा सकेगा। ANPR कैमरे फिलहाल ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंपिंग या रॉन्ग साइड ड्राइविंग पकड़ने के लिए लगे हैं।</p>
<p>कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रैफिक पुलिस को हैंडहेल्ड डिवाइस या डाउनलोड करने योग्य मोबाइल ऐप दिए जाएं ताकि वे मौके पर ही गाड़ियों का बीमा स्टेटस चेक कर सकें।</p>
<p><strong>क्या है सजा और जुर्माने का प्रावधान?</strong><br>
मोटर वाहन अधिनियम के तहत बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के वाहन चलाने या चलवाने पर कड़ी सजा का प्रावधान है।</p>
<p><strong>    पहली बार पकड़े जाने पर- 3 म</strong>हीने तक की जेल या 2,000 रुपये का जुर्माना, या दोनों।<br>
<strong>    दूसरी बार पकड़े जाने पर- 3 म</strong>हीने तक की जेल या 4,000 रुपये का जुर्माना, या दोनों सजा हो सकती है।</p>
<p><strong>नए वाहनों के लिए इंश्योरेंस का नियम बदला</strong><br>
इससे पहले साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन के समय कारों के लिए 3 साल और दोपहिया वाहनों के लिए 5 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेना अनिवार्य होगा। लेकिन, बड़ी संख्या में वाहनों के अभी भी बिना बीमा के दौड़ने के मद्देनजर, पीठ ने अब इस अवधि को एक साल और बढ़ा दिया है। कोर्ट के नए निर्देश के अनुसार, अब ग्राहकों को नई कारों के लिए 4 साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए 6 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य रूप से खरीदना होगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>परिसीमन बिल पर सरकार बुला सकती है संसद का विशेष सत्र, राहुल गांधी ने रखी बड़ी शर्त</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली केंद्र सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है. मौजूदा मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होना है, लेकिन इसके बाद सत्रावसान (प्रोरोगेशन) नहीं किया जाएगा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर जल्द ही संसद का विशेष सत्र बुलाया … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 21:00:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>परिसीमन, बिल, पर, सरकार, बुला, सकती, है, संसद, का, विशेष, सत्र, राहुल, गांधी, ने, रखी, बड़ी, शर्त</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong><br>
केंद्र सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है. मौजूदा मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होना है, लेकिन इसके बाद सत्रावसान (प्रोरोगेशन) नहीं किया जाएगा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर जल्द ही संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सके। </p>
<p>बताया जा रहा है कि सरकार संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए दोनों सदनों में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है. सूत्रों का कहना है कि जैसे ही पर्याप्त समर्थन का भरोसा मिलेगा, 17 अगस्त से तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है. हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। </p>
<p><strong>राहुल गांधी ने रख दी शर्त</strong><br>
 संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने आज लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की और उनसे सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित करने में मदद मांगी. हालांकि, सूत्रों ने बताया कि राहुल ने रिजिजू से स्पष्ट कहा कि सदन में गृह मंत्री के बयान के बिना कार्यवाही नहीं चलेगी। </p>
<p><strong>परिसीमन बिल पर मांगा सहयोग </strong><br>
कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी से मुलाकात में रिजिजू ने परिसीमन और महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक पर कांग्रेस का सहयोग मांगा था. हालांकि, राहुल ने साफ किया कि चंदा चोरी और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के बारे में गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बिना सदन की कार्यवाही नहीं चलेगी. इसके बाद रिजिजू स्पीकर से मिले और फिर अमित शाह को जानकारी दी। </p>
<p><strong>करीब 50 मिनट तक चली बैठक </strong><br>
रिजिजू और राहुल गांधी के बीच करीब 50 मिनट तक बैठक चली. बैठक के दौरान प्रियंका गांधी भी मौजद रहीं. इस दौरान संसद में गतिरोध को खत्म करने को लेकर भी चर्चा हुई. राहुल गांधी के कमरे में चली बैठक.  गौरतलब है कि पिछले एक सप्ताह से ज्यादा वक्त से संसद का मॉनसून सत्र नहीं चल पा रहा है. नीट पेपर लीक पर लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा जरूर हुई लेकिन उसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही प्रभावित हुई है. सरकार ने कुछ जरूरी विधेयक विपक्ष के शोर शराबे के बीच में ही पास करवा लिया. ऐसे में राहुल और रिजिजू की ये मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है। </p>
<p><strong>वेणुगोपाल ने भी सरकार को घेरा</strong><br>
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि रिजिजू प्रधानमंत्री का एजेंडे को लेकर मिले. हम चंदा चोरी पर चर्चा चाहते हैं. पेपर लीक के खिलाफ सख्त क़ानून से जुड़ा विधेयक पारित होने के बाद विपक्ष इन दो मांगों को लेकर संसद में लगातार प्रदर्शन कर रहा है. मॉनसून सत्र में अब केवल छह दिन बचे हैं. राहुल गांधी और रिजिजू की मुलाकात के बावजूद गतिरोध खत्म होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। </p>
<p><strong>सरकार के पास क्या विकल्प?</strong><br>
ऐसे में सरकार के पास दो विकल्प हैं. विपक्ष को साथ में लेते हुए या तो सत्र के अंतिम हफ्ते में परिसीमन बिल पेश करे या फिर मॉनसून सत्र को पंद्रह अगस्त के ब्रेक के बाद आगे बढ़ाए. इससे पहले सरकार विस्तारित बजट सत्र के दौरान इस संविधान संशोधन विधेयक को पेश किया था लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण पास नहीं करा पाई थी. इस संविधान संशोधन विधेयक में लोकसभा और विधानसभा की सीटों <strong>में 50% इजाफे और अगले लोकसभा चुनाव से 33% महिला आरक्षण का प्रावधान है। </strong></p>
<p><strong>डीएमके सरकार का कर सकती है समर्थन </strong><br>
अप्रैल में विपक्ष परिसीमन बिल का यह कह कर विरोध किया था कि इससे दक्षिण और छोटे राज्यों की भागीदारी घटेगी. हालांकि सरकार ने भरोसा दिलाया था कि सभी राज्यों में सीटों की संख्या मौजूदा अनुपात में ही बढ़ेगी. लेकिन बात नहीं बन पाई. अब पांच महीनों के बाद सियासी समीकरण काफी बदल गए हैं. डीएमके विपक्षी इंडिया गठबंधन से दूर जा चुकी है, टीएमसी के बीस लोकसभा सांसद और उद्धव ठाकरे की शिवसेना के छह लोकसभा सांसद एनडीए में शामिल हो चुके हैं. इस तरफ सरकार दोनों सदनों में अब दो तिहाई बहुमत से ज्यादा दूर नहीं है. संख्या जुटाने के लिए सरकार इस पर परिसीमन बिल में सीटों में पचास फीसदी बढ़ोतरी का लिखित प्रावधान कर सकती है. सूत्रों के मुताबिक ऐसे में डीएमके इस बिल का समर्थन कर सकती है. मॉनसून सत्र के आखिरी हफ्ते में परिसीमन बिल के अलावा एनजीओ पर नकेल कसने वाले एफसीआरए बिल पर भी नजरें टिकी हुई हैं। </p>
<p><strong>आइए, इससे पहले समझते हैं कि परिसीमन बिल है क्या?</strong><br>
संसद में बीते सत्र में तीन बिल पेश किए गए थे, जिनके जरिए लोकसभा सीटों में विस्तार होना है. इनका मकसद लोक सभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई यानी 33 फीसदी आरक्षण जल्दी लागू करना और नए सिरे से परिसीमन करना है. इसके बाद देश में लोकसभा सीटें 800 से ज्यादा हो सकती हैं। </p>
<p>इन तीन बिलों में एक बिल परिसीमन विधेयक-2026 है. इसके जरिए नया परिसीमन आयोग बनेगा, जो नई जनसंख्या के आधार पर सीटों की सीमाएं और बंटवारा तय करेगा. इसके बाद से हर राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ जाएगी। </p>
<p><strong>क्या होता है परिसीमन?</strong><br>
परिसीमन का मतलब है चुनाव लड़ने के क्षेत्रों की सीमाएं और संख्या तय करना या बदलना. यानी चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव को ही परिसीमन कहते हैं. सरकार इन सीमाओं में बदलाव करती रहती है, जो वहां की जनसंख्या और वहां के इलाके के जनसंख्या घनत्व के आधार पर तय की जाती है. ये नगर निगम के वार्ड से लेकर लोकसभा सीटों तक होता है. जैसे अगर आप लखनऊ में रहते हैं तो वहां की लोकसभा सीट की एक सीमा होगी, जिसमें रहने वाले लोग उस सीट के जनप्रतिनिधि को चुनेंगे. इस सीमा में बदलाव परिसीमन के जरिए होता है. जैसे आपने देखा होगा कि आपका इलाका कई सालों से वार्ड नंबर-10 में आता होगा और परिसीमन के बाद से वार्ड नंबर-12 में आने लगे। </p>]]> </content:encoded>
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<title>RBI ने बताया कब आएंगे ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोट, जानिए क्या है पूरा प्लान</title>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 21:00:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को एमपीसी बैठक के नतीजों का ऐलान करते हुए रेपो रेट को स्थिर रखने के साथ ही एक और बड़ा अपडेट दिया है. ये पॉलिमर नोट या प्लास्टिक के नोटों (RBI On Plastic Currency Notes) से जुड़ा हुआ है. बीते दिनों मोदी सरकार ने 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलिमर करेंसी नोट जारी करने के केंद्रीय बैंक के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी और अब रिजर्व बैंक गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि FY28 की शुरुआत में इन्हें लॉन्च कर दिया जाएगा। </p>
<p><strong>रिजर्व बैंक ने तय किया ये टारगेट</strong><br>
RBI MPC Results का ऐलान करते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई का लक्ष्य वित्त वर्ष 2028 की शुरुआत में  पॉलिमर करेंसी नोटों या प्लास्टिक के नोटों को सर्कुलेशन में लाने का है और इसके लिए लगातार तैयारियां जारी हैं. MPC की बैठक के बाद मीडिया ब्रीफिंग में उन्होंने बताया कि पॉलिमर नोटों का पायलट कार्यक्रम चल रहा है और इन नोटों को बाजार में लाने से पहले हम इसका परीक्षण आकलन करेंगे। </p>
<p><strong>मोदी सरकार दे चुकी है मंजूरी</strong><br>
आरबीआई की ओर से 10-20 Plastic Notes को लेकर ये बड़ा अपडेट वित्त मंत्रालय द्वारा बीते दिनों संसद में इस प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद आया है. बता दें कि बीते दिनों नरेंद्र मोदी सरकार ने 10 रुपये और 20 रुपये के मूल्यवर्ग में पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल प्रपोजल को मंजूरी दी थी। </p>
<p>Modi Govt की ओर से संसद में पॉलिमर (प्लास्टिक) नोट से जुड़ी जानकारी शेयर करते हुए बताया गया था कि ₹10 और ₹20 के 100-100 करोड़ (एक-एक अरब) पॉलिमर नोटों का फील्ड ट्रायल किया जाएगा. ट्रायल सफल होने के बाद इन Plastic Notes को नियमित जारी करने की योजना है। </p>
<p><strong>मौजूदा कागजी नोटों का क्या होगा?</strong><br>
सरकार ने 10-20 रुपये के प्लास्टिक नोटों के ट्रायल को अप्रूवल देने के साथ ही साफ कर दिया था कि वर्तमान में सर्कुलेशन में मौजूद कागजी नोटों पर इसका कोई असर नहीं होगा. यानी कागजी नोट बंद नहीं होंगे, बल्कि ये पॉलिमर नोटों के साथ ही बाजार में मौजूद रहेंगे. सरकार की ओर से कहा गया है कि फिलहाल कागजी करेंसी को पूरी तरह पॉलिमर नोटों से बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। </p>
<p>पॉलिमर नोटों की लाइफ वर्तमान में मौजूद कागजी नोटों से अधिक होने का दावा है. हालांकि, फिलहाल प्लास्टिक नोटों से जुड़ी ये परियोजना शुरुआती चरण में. इसके साथ ही डिजिटल पेमेंट पर असर का आकलन ये नोट नियमित जारी होने के बाद होगा। </p>
<p><strong>इन देशों में आ चुके हैं प्लास्टिक नोट</strong><br>
भारत में प्लास्टिक करेंसी नोट को सर्कुलेशन में लाने का काम जोरों पर है और ये पहली बार सर्कुलेशन में दस्तक देने वाले हैं. लेकिन इन प्लास्टिक नोटों को पहली बार ऑस्ट्रेलिया ने साल 1988 में इंट्रोड्यूस किया था और अब करीब 50 से अधिक देशों में इनका उपयोग किया जाता है. इनकी खासियत ये है कि ये पॉलिमर नोट पारंपरिक कागजी करेंसी की तुलना में अधिक टिकाऊ तो होते ही हैं, इसके साथ ही<br>
ऐसे नकली नोट बनाना भी मुश्किल होता है। </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>जंतर&#45;मंतर प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट की नसीहत, CJI बोले&#45; युवाओं की बात सुनिए, संवाद ही समाधान</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन और उससे जुड़े विवादों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने युवाओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया. अदालत ने कहा कि यदि कुछ भटके हुए तत्व हिंसक घटनाओं या पत्थरबाजी में शामिल भी हो जाएं, … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 20:00:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन और उससे जुड़े विवादों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने युवाओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया. अदालत ने कहा कि यदि कुछ भटके हुए तत्व हिंसक घटनाओं या पत्थरबाजी में शामिल भी हो जाएं, तब भी राज्य का पहला दायित्व संवाद, समझाइश और काउंसलिंग के माध्यम से स्थिति को संभालना होना चाहिए. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आक्रामक रवैया सामाजिक तनाव को बढ़ा सकता है और हिंसा को जन्म दे सकता है. अदालत ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कानून-व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। </p>
<p><strong>युवाओं से संवाद की जरूरत: सुप्रीम कोर्ट</strong><br>
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में युवाओं को समझाने और उनसे संवाद स्थापित करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि यदि कुछ लोग भटककर पत्थरबाजी जैसी गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं, तब भी पूरे समूह को उसी नजर से नहीं देखा जाना चाहिए. युवाओं को उचित सलाह, काउंसलिंग और मार्गदर्शन दिया जाना जरूरी है ताकि वे हिंसा के रास्ते पर न जाएं. अदालत ने कहा कि सबसे प्रभावी तरीका उनकी बात सुनना है और यह समझना है कि वे अपनी आवाज क्यों उठा रहे हैं। </p>
<p>
<strong>पुलिस और प्रशासन को संयम बरतने की सलाह</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों को भी संयम बरतने की सलाह दी. अदालत ने कहा कि किसी भी तरह का आक्रामक रवैया सामाजिक तनाव को बढ़ा सकता है और हालात को और जटिल बना सकता है. पीठ ने कहा कि यदि किसी शांतिपूर्ण मार्च या प्रदर्शन के दौरान अप्रिय घटना हो भी जाए तो पुलिस को अत्यधिक संवेदनशीलता और धैर्य के साथ स्थिति को संभालना चाहिए. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ऐसी घटनाओं से बहुत सावधानी से निपटना आवश्यक है ताकि हालात नियंत्रण से बाहर न जाएं। </p>
<p><strong>एजेंसियों के विवेक पर जताया भरोसा</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों के विवेक पर भरोसा किया जाना चाहिए. पीठ ने टिप्पणी की कि सुरक्षा एजेंसियां ऐसी परिस्थितियों से निपटने का व्यावहारिक अनुभव रखती हैं और वे हालात को समझते हुए निर्णय लेने में सक्षम हैं. अदालत ने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। </p>
<p><strong>याचिका को लंबित मामलों के साथ जोड़ा</strong><br>
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि इस विषय से संबंधित कई याचिकाएं पहले से लंबित हैं. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि मौजूदा याचिका को उन लंबित मामलों के साथ जोड़ा जाएगा और अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। </p>
<p><strong>याचिकाकर्ता ने उठाया आयोजकों की जवाबदेही का सवाल</strong><br>
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत के सामने प्रदर्शन के कथित आयोजकों की जवाबदेही का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि घटना को 15 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन कथित आयोजकों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि वह उन्हें "तथाकथित आयोजक" इसलिए कह रहे हैं क्योंकि यह कोई पंजीकृत संगठन नहीं है. वकील ने तर्क दिया कि राष्ट्रीय राजधानी के हाई-सिक्योरिटी जोन में यदि बड़े पैमाने पर हिंसा हुई है तो आयोजकों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। </p>
<p><strong>टीवी चैनलों पर बयानबाजी का भी उठाया मुद्दा</strong><br>
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में कहा कि घटना के बाद भी कथित आयोजक विभिन्न टीवी चैनलों पर जाकर बयान दे रहे हैं और माहौल को शांत करने के बजाय उसे और भड़का रहे हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी पंडाल में आग लगती है तो आयोजकों को जिम्मेदार माना जाता है. इसी प्रकार बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। </p>
<p><strong>सामुदायिक सेवा की सजा की मांग</strong><br>
यह याचिका जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन की आड़ में कथित रूप से अभद्र, आपत्तिजनक और अश्लील टिप्पणियां करने वाले युवाओं को सात दिन की सामुदायिक सेवा की सजा देने की मांग से जुड़ी है. पूर्व आईएफएस अधिकारी मनीष सोलंकी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि युवाओं को अपनी गलती का अहसास कराया जाना चाहिए और सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए सामुदायिक सेवा जैसी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए. याचिका में यह भी कहा गया है कि गलती का एहसास होने के बाद ही संबंधित मामलों को बंद करने पर विचार किया जाए। </p>
<p><strong>20 जुलाई के प्रदर्शन को लेकर भी कार्रवाई की मांग</strong><br>
याचिका में 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजकों की जिम्मेदारी तय किए बिना भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना कठिन होगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>Vijay TVK First Budget: दुल्हनों को सोना, स्पेशल स्कूल समेत कई बड़े ऐलान; जानें विजय के पहले बजट की 10 बड़ी बातें</title>
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<description><![CDATA[ चेन्नई  साउथ फिल्म इंडस्ट्री के सुपर स्टार से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री तक का सफर तय करने वाले थलपति विजय (CM Thalapathy Vijay) की सरकार ने अपना पहला बजट पेश किया है. तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के वित्त मंत्री एन मैरी विल्सन ने बजट पेश करते हुए कई बड़े ऐलान किए … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 20:00:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Vijay, TVK, First, Budget:, दुल्हनों, को, सोना, स्पेशल, स्कूल, समेत, कई, बड़े, ऐलान, जानें, विजय, के, पहले, बजट, की, बड़ी, बातें</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चेन्नई </strong></p>
<p>साउथ फिल्म इंडस्ट्री के सुपर स्टार से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री तक का सफर तय करने वाले थलपति विजय (CM Thalapathy Vijay) की सरकार ने अपना पहला बजट पेश किया है. तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के वित्त मंत्री एन मैरी विल्सन ने बजट पेश करते हुए कई बड़े ऐलान किए हैं, जो महिलाओं, युवाओं से लेकर छात्रों तक को फायदा पहुंचाने वाले हैं. इसमें विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी की ओर से किए गए तमाम वादे भी शामिल हैं, जिनमें सबसे खास दुल्हनों को सोने का सिक्का (Gold Coin), छात्रों के लिए स्पेशल स्कूल खोना जाना शामिल है। </p>
<p>बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री मैरी विल्सन ने कहा कि TVK सरकार चरणबद्ध तरीके से अपने सभी चुनावी वादे पूरे कर रही है. बीते तीन महीनों में टेंडर प्रक्रिया में सुधार लागू किए गए हैं, जिससे युवाओं को टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के अवसर मिल रहे हैं. इसके साथ ही सामाजिक न्याय, समानता, महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन और ईमानदार शासन के सिद्धांतों पर बनी TVK सरकार ने इस <strong>अवधि में अपने किए कामों से साबित भी किया है। </strong></p>
<p><strong>दुल्हनों को Gold से लेकर ये बड़े ऐलान</strong><br>
वित्त मंत्री विल्सन ने विजय सरकार का बड़ा बजट पेश करते हुए स्कूल शिक्षा के लिए 44,567 करोड़ रुपये, समाज कल्याण विभाग के लिए 3,937 करोड़ रुपये का बजट रखा. इसके साथ ही सबसे खास सीएम विजय द्वारा चुनाव के दौरान किए गए राज्य की दुल्हनों के लिए ‘अन्नन सीर थिट्टम' योजना के तहत पात्र 8 ग्राम सोना और रेशमी साड़ी के लिए 812 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है. इसके अलावा तमिलनाडु के सरकारी अस्पतालों में पैदा होने वाले नवजात शिशुओं के लिए सोने की अंगूठी देने के वादे को पूरा करने के लिए 560 करोड़ रुपये के बजट रखा गया है। </p>
<p>Vijay Budget के अन्य बड़े ऐलानों की बात करें, तो कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए कामराज स्पेशल स्कूल खोले जाएंगे. शिक्षा, भोजन, हॉस्टल, कपड़े और कोर्स का सामान मुफ्त उपलब्ध कराया जाएगा. यही नहीं कक्षा 6 से 8 तक के लिए नाश्ता योजना के लिए 710 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं. बता दें कि यह स्कीम DMK सरकार के समय कक्षा 1 से 5 तक के लिए शुरू की गई थी, जिसे थलपति विजय सरकार ने कक्षा 8 तक बढ़ा दिया है। </p>
<p><strong>29863 करोड़ रुपये का बजट</strong><br>
तमिलनाडु की TVK Govt का कुल बजट 29,863 करोड़ रुपये का है. इसमें मेट्रो रेल प्रोजेक्ट्स का विस्तार भी शामिल है. वित्त मंत्री के मुताबिक, चेन्नई एयरपोर्ट से किलाम्बक्कम, कोयम्बेडु से पट्टाबिराम और पूनामल्ली से सुंगुवरचथिरम तक Metro Rail Line के लिए केंद्र सरकार से जल्द मंजूरी पाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. सरकार होसुर (कृष्णगिरि डिस्ट्रिक्ट) से कर्नाटक में बोम्मासंद्रा तक मेट्रो रेल के प्रपोजल पर भी काम कर रही है। </p>
<p><strong>'घबराकर छिपने लगे भ्रष्टाचारी'</strong><br>
बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री जोसेफ विजय का नाम सुनते ही भ्रष्ट लोग अब घबराकर छिपने लगे हैं. CM लगातार इस मामले पर सख्त रुख अपनाएंगे और उन्होंने पहले भी कहा था कि न तो हम भ्रष्टाचार करेंगे और न ही पहले भ्रष्टाचार करने वालों को बख्शेंगे। </p>
<p><strong>तमिलनाडु पर है इतना कर्ज</strong><br>
तमाम बड़ी घोषणाओं के साथ ही वित्त मंत्री ने तमिलनाडु राज्य पर मौजूदा कर्ज का भी खुलासा किया. मैरी विल्सन ने कहा कि हमारी सरकार द्वारा जारी श्वेत पत्र के अनुसार, राज्य पर 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है. राज्य को कर्ज से उबारने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>PM मोदी बोले&#45; अनुच्छेद 370 हटना ऐतिहासिक फैसला, श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना हुआ साकार</title>
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<description><![CDATA[ नई द‍िल्‍ली  जम्मू-कश्‍मीर से आर्ट‍िकल 370 हटाने जाने के सात साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा क‍ि सात साल पहले इसी दिन अनुच्छेद 370 और 35(A) इतिहास बन गए, जिससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की यात्रा में एक निर्णायक नया अध्याय शुरू हुआ. तब से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के जीवन में … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 20:00:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मोदी, बोले-, अनुच्छेद, 370, हटना, ऐतिहासिक, फैसला, श्यामा, प्रसाद, मुखर्जी, का, सपना, हुआ, साकार</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई द‍िल्‍ली</strong><br>
 जम्मू-कश्‍मीर से आर्ट‍िकल 370 हटाने जाने के सात साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा क‍ि सात साल पहले इसी दिन अनुच्छेद 370 और 35(A) इतिहास बन गए, जिससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की यात्रा में एक निर्णायक नया अध्याय शुरू हुआ. तब से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के जीवन में व्यापक बदलाव आए हैं. बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है और शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, उद्यमिता और खेल जैसे क्षेत्रों में अवसर बढ़े हैं. चाहे महिलाएं हों या हाशिए पर रहने वाले समुदाय, जिन्हें दशकों तक उनके बुनियादी संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखा गया था, उन्हें भारत के संविधान के पूर्ण कार्यान्वयन के कारण सशक्त बनाया गया है। </p>
<p>पीएम मोदी ने कहा क‍ि इस वर्ष 5 अगस्त का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि इसी वर्ष हमारा देश डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती मना रहा है. राष्ट्रीय एकता के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता पीढ़ियों को प्रेरित करती रही है. दशकों पहले उन्होंने जो सपना देखा था, वह 5 अगस्त 2019 को ऐतिहासिक रूप से साकार हुआ. हम जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की प्रगति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर नागरिक को बड़े सपने देखने, उन्हें हासिल करने और 'विकसित भारत' के निर्माण में योगदान देने का अवसर मिले। </p>
<p><strong>भाजपा ने बताया ऐतिहासिक दिन</strong><br>
अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने की छठी बरसी पर बुधवार को जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक माहौल गर्म रहा। एक ओर नेशनल कान्फ्रेंस (नेकां), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) समेत कई क्षेत्रीय दलों ने 5 अगस्त को 'काला दिवस' के रूप में मनाते हुए विरोध प्रदर्शन किए, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे देश के संवैधानिक इतिहास का ऐतिहासिक और निर्णायक दिन बताया।</p>
<p>इस बीच, प्रशासन ने पूरे प्रदेश में किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए सुरक्षा का कड़ा बंदोबस्त रखते हुए किसी भी जगह विरोध प्रदर्शनांं की अनुमति नहीं दी। सभी सीमांत इलाकों में सुरक्षाबलों की गश्त बढ़ाई गई है। श्री अमरनाथ जी की तीर्थयात्रा को भी जम्मू से श्रीनगर के लिए स्थगित रखा गया।</p>
<p><strong>नेशनल कान्फ्रेंस और पीडीपी ने जताया विरोध</strong><br>
प्रतिबंधों के बावजूद नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने पांच अगस्त 2019 के फैसले का विरोध दर्ज कराने का प्रयास किया।नेशनल कॉन्फ्रेंस मुख्यालय 'नवाए सुबह' में पार्टी नेताओं ने बैठक कर अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने के फैसले का विरोध दोहराया। पार्टी ने इंटरनेट मीडिया पर भी अभियान चलाते हुए कहा कि पांचअगस्त 2019 के फैसले को वह आज भी स्वीकार नहीं करती।</p>
<p>मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इंटरनेट मीडिया के एक्स प्लेटफार्म पर पांच अगस्त को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा है कि सात वर्ष बीत गए हैं, लेकिन हम न तो भूले हैं, न ही समझौता किया है, और उससे भी कम हमने अपनी वर्तमान परिस्थितियों को स्वीकार किया है।</p>
<p>मेरी पार्टी और मैं जम्मू-कश्मीर के साथ किए गए उन सभी फैसलों को पलटने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिन्होंने हमारे अधिकार हमसे छीन लिए और हमारी पहचान को खतरे में डाल दिया।' ये वन मनोहर हैं, अंधकारमय और गहरे। लेकिन मुझे अपने वादे निभाने हैं। और सोने से पहले मुझे अभी कई मील का सफर तय करना है।</p>
<p>शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने पांच 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए 'काला दिवस' बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से लोगों के संवैधानिक अधिकार, राज्य का दर्जा, जमीन और रोजगार से जुड़े संरक्षण छिन गए। उन्होंने राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा बहाल करने की मांग दोहराई।</p>
<p>नेकां मुख्य प्रवक्ता इमरान नबी डार ने भी 5 अगस्त 2019 की घटनाओं को लोकतांत्रिक इतिहास पर "स्थायी दाग" करार देते हुए कहा कि यह फैसला जम्मू-कश्मीर के लोगों की इच्छा के विरुद्ध लिया गया था। उन्होंने कहा कि राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने से उसकी गरिमा प्रभावित हुई, लेकिन लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों की बहाली के लिए संघर्ष जारी रहेगा।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>नितिन गडकरी मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, इथेनॉल से जुड़े अपमानजनक कंटेंट हटाने के निर्देश</title>
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<description><![CDATA[ मुंबई  बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार (05 अगस्त) को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने E20 इथेनॉल-ब्लेंडिंग विवाद में नितिन गडकरी और उनके परिवार को निशाना बनाकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक और &#039;अपमानजनक&#039; एआई (AI) कंटेंट को हटाने का आदे्श दिया है। अदालत ने बुधवार को एक … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 19:00:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>नितिन, गडकरी, मामले, में, बॉम्बे, हाईकोर्ट, का, बड़ा, आदेश, इथेनॉल, से, जुड़े, अपमानजनक, कंटेंट, हटाने, के, निर्देश</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई </strong></p>
<p>बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार (05 अगस्त) को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने E20 इथेनॉल-ब्लेंडिंग विवाद में नितिन गडकरी और उनके परिवार को निशाना बनाकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक और 'अपमानजनक' एआई (AI) कंटेंट को हटाने का आदे्श दिया है। अदालत ने बुधवार को एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए मेटा (Meta) और गूगल (Google) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे गडकरी को E20 ईंधन विवाद से जोड़ने वाले सभी डीपफेक वीडियो और एआई-जनरेटेड तस्वीरों को तुरंत प्लेटफॉर्म से हटाएँ।</p>
<p>ये आदेश जस्टिस आरिफ डॉक्टर की पीठ ने दिया। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश सही और निष्पक्ष आलोचना पर लागू नहीं होगा। गडकरी ने मेटा, X, गूगल/यूट्यूब, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग और "अशोक कुमार/जॉन डो" के रूप में बताए गए अज्ञात उपयोगकर्ताओं के खिलाफ मामला दायर किया था। उस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने माना कि गडकरी द्वारा बताए गए कंटेंट घिनौने और अभद्र थे।</p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला?</strong><br>
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रहे उन फर्जी वीडियो और पोस्ट को चुनौती दी थी, जिनमें उन्हें और उनके परिवार को सरकार के E20 इथेनॉल-मिश्रण कार्यक्रम में भ्रष्टाचार से जोड़ा गया था। इन पोस्ट्स में दावा किया गया था कि गडकरी के बेटे, निखिल गडकरी, 'सिएन एग्रो इंडस्ट्रीज' (CIAN Agro Industries) के माध्यम से इस नीति से अनुचित लाभ उठा रहे हैं। गडकरी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा संचालित है और उनका इससे कोई व्यक्तिगत हित नहीं है।</p>
<p><strong>अदालत की सख्त टिप्पणी: ‘भद्दी और अपमानजनक सामग्री’</strong><br>
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस आरिफ डॉक्टर ने इन वीडियो और तस्वीरों को "अत्यंत भद्दी और अपमानजनक" (vile and abusive) करार दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी सामग्री का सार्वजनिक मंचों पर कोई स्थान नहीं होना चाहिए, क्योंकि ये युवाओं सहित समाज के हर वर्ग के लिए उपलब्ध हैं। अदालत ने कहा कि गडकरी ने अंतरिम राहत के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है।</p>
<p><strong>मामले की सुनवाई 4 सप्ताह बाद</strong><br>
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने कहा, "अगर वादी को भविष्य में और कोई अपमानजनक कंटेंट पता चलता है, तो वे प्रतिवादियों को सूचित करेंगे जो कार्रवाई करेंगे।" सुनवाई के दौरान मेटा के वकील ने कहा, "हो सकता है कि कुछ कंटेंट निष्पक्ष हो।" इस पर गडकरी के वकील ने कहा, "मैं किसी को निष्पक्ष आलोचना करने से नहीं रोक रहा हूं।" जज ने भी कहा, "मैं सहमत हूं कि यह आलोचना के बारे में नहीं है।" कोर्ट ने कहा, "कोई भी अन्य अभद्र सामग्री या डीपफेक तस्वीरें प्रतिवादी को बताई जाएंगी। अगर कोई अस्पष्ट स्थिति होती है, तो उन्हें कोर्ट में जाने की स्वतंत्रता होगी।" मामले की सुनवाई 4 सप्ताह बाद फिर से होगी।</p>
<p>अंतरिम आदेश में अदालत ने कहा, ”ऐसी ही एक इंस्टाग्राम रील के ट्रांसक्रिप्ट के रूप में सामने आई है। इसके अलावा भी अन्य पोस्ट मौजूद हैं। वादी (नितिन गडकरी) जिन सामग्रियों को हटाने की मांग कर रहे हैं, उनके बारे में मैं केवल इतना ही कह सकता हूं कि वे पूरी तरह से घृणित और अपमानजनक हैं। ऐसे कॉन्टेन्ट को किसी भी सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर कोई स्थान नहीं होना चाहिए क्योंकि ये प्लेटफॉर्म्स हर किसी, यहां तक कि बच्चों और युवाओं के लिए भी सुलभ हैं। वादी ने अंतरिम राहत पाने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार पेश किया है। मेटा और गूगल अदालत में उपस्थित हुए और उन्होंने एग्ज़िबिट-सी में लिस्ट कंटेंट को हटाने पर सहमति जताई है। उनका यह बयान रिकॉर्ड पर लिया जाता है।”</p>
<p>इसके बाद अदालत ने मेटा और गूगल को निर्देश दिया कि याचिका में चिन्हित सभी संबंधित आपत्तिजनक, मानहानिकारक और डीपफेक सामग्री को अपने प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाया जाए। मामले की आगे की सुनवाई निर्धारित तारीख पर होगी।</p>
<p><strong>E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित</strong><br>
बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को बड़ी राहत दे दी है। HC ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अन्य डिजिटल मध्यस्थों (Intermediaries) को उनके और उनके परिवार को केंद्र सरकार के E20 एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से जोड़ने वाले कथित मानहानिकारक, डीपफेक और एआई से तैयार फर्जी कंटेंट को हटाने का अंतरिम आदेश दिया है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>क्या है Safe Harbour? सरकार ने हटाया तो Facebook&#45;Instagram की बढ़ जाएंगी मुश्किलें, जानें पूरा मामला</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाने का मामला तूल पकड़ते जा रहा है. संसद की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग से इस घटना के लिए माफी मांगने के लिए कहा है. अब इसको लेकर कहा जा रहा है कि … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 18:00:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>क्या, है, Safe, Harbour, सरकार, ने, हटाया, तो, Facebook-Instagram, की, बढ़, जाएंगी, मुश्किलें, जानें, पूरा, मामला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाने का मामला तूल पकड़ते जा रहा है. संसद की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग से इस घटना के लिए माफी मांगने के लिए कहा है. अब इसको लेकर कहा जा रहा है कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग और पीएम के वीडियो को हटाने को लेकर संसदीय समिति सख़्त हो गई है। </p>
<p>सूत्रों के लिए अनुसार, दूरसंचार और आईटी की संसदीय समिति ने सेफ हार्बर क्लॉज हटाने की चेतावनी दी है. समिति ने फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग को माफी मांगने के लिए तीन दिन का समय दिया है. अब इस पर जकरबर्ग की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, वह आने वाला समय बताएगा लेकिन आपको यहां पर सेफ हार्बर क्लॉज के बारे में जानना काफी जरूरी है। </p>
<p><strong>मुसीबत में आएंगे FB-Insta</strong><br>
सेफ हार्बर क्लॉज हटते ही केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे Facebook, Instagram, X (ट्विटर) ही नहीं बल्कि क्लाउड कंप्यूटिंग, मेटावर्स, ब्लॉकचेन, क्रिप्टोकरेंसी, डीप फेक और डॉक्सिंग सभी प्लेटफॉर्म की मुसीबत काफी बढ़ जाएगी। </p>
<p>सेफ हार्बर क्लॉज के अनुसार, Facebook, Instagram, X जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को यूजर्स  द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए जवाबदेह नहीं ठहराया जा सकता है. इस पर लंबे समय से बहस चल रही है क्या इस तरह के प्लेटफॉर्म पर यूजर्स द्वारा उनके प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की जाने वाली चीजों के लिए शून्य देनदारी बनी रहनी चाहिए?</p>
<p>आसान भाषा में इसको ऐसे समझिए, ऐसे प्लेटफॉर्म जहां पर यूजर्स अपने विचार (टेक्स्ट, फोटो या वीडियो) शेयर कर सकते हैं, सेफ हार्बर क्लॉज के अनुसार, उसकी जिम्मेदारी यूजर्स की होती है. जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं. उदाहरण के लिए अगर मैंने फेसबुक पर कुछ अमर्यादित टिप्पणी या पोस्ट की है तो उसकी जिम्मेदारी केवल मेरी होगी. लेकिन सेफ हार्बर क्लॉज हटने के बाद इसके लिए फेसबुक को भी जिम्मेदार माना जाएगा और उस पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। </p>
<p><strong>क्या है सेफ हार्बर प्रावधान?</strong><br>
आपको बता दें कि सेफ हार्बर प्रावधान आईटी अधिनियम 2000 की धारा 79 के तहत दिया गया है. इसमें कहा गया है कि "एक मध्यस्थ (यहां फेसबुक, इंस्टाग्राम या एक्स) किसी भी तीसरे पक्ष की जानकारी, डेटा, या उसके द्वारा उपलब्ध या होस्ट किए गए कम्युनिकेशन लिंक के लिए उत्तरदायी नहीं होगा" .</p>
<p>यानी सेफ हार्बर क्लॉज हटने से सबसे ज्यादा नुकसान इन कंपनियों को ही झेलना होगा. जिसकी वजह से कंपनियां ऐसे नियमों के हटने से डरती हैं. लेकिन, सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग और पीएम मोदी के वीडियो को हटाने को लेकर मेटा प्रमुख को माफी मांगनी होगी वर्ना उनको सेफ हार्बर के रूप में जो इम्युनिटी मिली हुई, उसको हटा लिया जाएगा। </p>
<p>सरकार का मानना ​​है कि सोशल मीडिया कंपनियों के लिए फ्री पास नहीं होना चाहिए और हानिकारक पोस्ट को रहने देने के लिए 'सेफ हार्बर' बहाना नहीं हो सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि सेफ हार्बर के कारण अक्सर कंटेंट मॉडरेशन की कमी, अपर्याप्त तथ्य-जांच और प्लेटफार्म्स पर मौजूद कंटेंट का उल्लंघन होता है. आपको बता दें कि साल 2021 के आईटी नियमों में यह अनिवार्य कर दिया था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को एक मुख्य अनुपालन अधिकारी (CCO), निवासी शिकायत अधिकारी (RGO) और नोडल संपर्क व्यक्ति नियुक्त करना होगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>भयंकर बारिश का अलर्ट! UP समेत 8 राज्यों में IMD की चेतावनी, तेज हवाओं के साथ होगी मूसलाधार बारिश</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली दिल्ली में बारिश का गति और तेज होने जा रही है। IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग का ताजा पूर्वानुमान है कि उत्तर प्रदेश और बिहार समेत भारत के कई राज्यों में तेज बारिश होने की संभावनाएं हैं। जबकि, राजस्थान और उत्तराखंड जैसे प्रदेश आंधी और तूफान का भी सामना करेंगे। वहीं, पूर्वोत्तर … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 17:00:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>भयंकर, बारिश, का, अलर्ट, समेत, राज्यों, में, IMD, की, चेतावनी, तेज, हवाओं, के, साथ, होगी, मूसलाधार, बारिश</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>दिल्ली में बारिश का गति और तेज होने जा रही है। IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग का ताजा पूर्वानुमान है कि उत्तर प्रदेश और बिहार समेत भारत के कई राज्यों में तेज बारिश होने की संभावनाएं हैं। जबकि, राजस्थान और उत्तराखंड जैसे प्रदेश आंधी और तूफान का भी सामना करेंगे। वहीं, पूर्वोत्तर के भी अधिकांश राज्यों में इस हफ्ते तेज बारिश के आसार हैं।</p>
<p>IMD का कहना है कि बुधवार को उत्तर पश्चिम, मध्य, पूर्व और पूर्वोत्तर के अधिकांश राज्यों में बारिश हो सकती है। खास बात है कि 2026 में मॉनसून की एंट्री देरी से हुई और बीच में लंबे समय के लिए बारिश की गतिविधियां रुक गईं थीं। हालांकि, मध्य प्रदेश के कई राज्य अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p><strong>आज कहां होगी बारिश</strong><br>
मौसम विभाग ने बताया है कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगिट, बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद में 5 अगस्त और 9 से 11 अगस्त के बीच भारी बारिश हो सकती है। ऐसा ही मौसम 5 से 11 अगस्त के बीच हिमाचल प्रदेश में रह सकता है। इसके अगले दिन यानी 6 अगस्त से 11 अगस्त तक उत्तराखंड में तेज बारिश होगी।</p>
<p>IMD के अपडेट के मुताबिक, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब में 5-6 अगस्त, पश्चिम उत्तर प्रदेश में 7 अगस्त, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 6 अगस्त को भारी बारिश हो सकती है। पश्चिम राजस्थान में 7 से 9 अगस्त, पूर्वी राजस्थान में 6 अगस्त और 9 से 11 अगस्त को तेज बारिश की संभावनाएं हैं।</p>
<p><strong>MP में बारिश</strong><br>
मौसम विभाग ने बताया है कि पश्चिम मध्य प्रदेश में 5-6 अगस्त और 8 अगस्त को भारी बारिश के आसार हैं। 7 अगस्त को यहां बहुत भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 5 और 8 अगस्त को तेज बारिश हो सकती है। जबकि, 6-7 अगस्त को अति भारी बारिश की <strong>संभावनाएं हैं। छत्तीसगढ़ में 5 से 8 अगस्त को ऐसा मौसम रह सकता है।</strong></p>
<p><strong>बिहार में होगी झमाझम बारिश</strong><br>
बिहार और उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम में 6 अगस्त, गंगीय पश्चिम बंगाल में 5 और 7 अगस्त, झारखंड में 5 से 8 अगस्त, ओडिशा में 7 से 11 अगस्त को भारी बारिश हो सकती है। वहीं, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 5 से 11 अगस्त के बीच बारिश की संभावनाएं हैं।</p>
<p><strong>ओडिशा में आज से होगी बारिश</strong><br>
IMD ने बुधवार से ओडिशा में बारिश का नया दौर शुरू होने का अनुमान जताया है। जबकि कई जिलों के गांव अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। अधिकारियों ने बताया कि कई नदियों का जलस्तर घटने लगा है, लेकिन जाजपुर, भद्रक और जगतसिंहपुर जिलों के अनेक गांवों से बाढ़ का पानी अब तक नहीं उतरा है। इसके कारण बड़ी संख्या में लोग अभी भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। आईएमडी ने बताया कि बारिश का दौर पांच अगस्त से शुरू होकर 10 अगस्त तक जारी रह सकता है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>RBI का अनुमान: वित्त वर्ष 2026&#45;27 में खुदरा महंगाई रहेगी 5%, खाद्य और ईंधन की कीमतों में तेजी के संकेत</title>
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<description><![CDATA[ मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (RBI MPC) ने बुधवार को अपनी समीक्षा बैठक के नतीजे घोषित कर दिए हैं. केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर 5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. हालांकि, नीति निर्माताओं ने आगाह किया है कि … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 17:00:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>RBI, का, अनुमान:, वित्त, वर्ष, 2026-27, में, खुदरा, महंगाई, रहेगी, 5, खाद्य, और, ईंधन, की, कीमतों, में, तेजी, के, संकेत</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई</strong><br>
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (RBI MPC) ने बुधवार को अपनी समीक्षा बैठक के नतीजे घोषित कर दिए हैं. केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर 5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. हालांकि, नीति निर्माताओं ने आगाह किया है कि निकट भविष्य में खाद्य और ईंधन की कीमतों के कारण महंगाई में और तेजी देखी जा सकती है। </p>
<p>पॉलिसी निर्णयों की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मुख्य रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा है. समिति ने सर्वसम्मति से अपने नीतिगत रुख को भी 'तटस्थ' (Neutral) बनाए रखने का फैसला किया है। </p>
<p><strong>तिमाही आधार पर अस्थिर रहेगा महंगाई का ग्राफ</strong></p>
<p>आरबीआई के नए अनुमानों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की विभिन्न तिमाहियों में मुख्य मुद्रास्फीति का रुख उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है:</p>
<p><strong>    दूसरी तिमाही (Q2): </strong>खुदरा महंगाई दर 4.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। </p>
<p><strong>    तीसरी तिमाही (Q3): </strong>आपूर्ति बाधाओं के कारण यह 5.9 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच सकती है। </p>
<p><strong>    चौथी तिमाही (Q4):</strong> इसके दोबारा घटकर 5.5 प्रतिशत पर आने का अनुमान है। <br>
    वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही (Q1): महंगाई दर 5.3 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। </p>
<p><strong>कोर इन्फ्लेशन स्थिर, मांग का दबाव कम</strong><br>
गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि लगातार 16 महीनों तक 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे रहने के बाद, जून में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.4 प्रतिशत पर पहुंच गई. राहत की बात यह है कि खाद्य और ईंधन को छोड़कर अन्य वस्तुओं की कीमतें यानी 'कोर इन्फ्लेशन' (Core Inflation) मई और जून में 3.9 प्रतिशत पर स्थिर रही. कीमती धातुओं को अलग करने पर यह दर 2.3 से 2.5 प्रतिशत के दायरे में रही, जो स्पष्ट करती है कि अर्थव्यवस्था में मांग आधारित चौतरफा दबाव नहीं है। </p>
<p><strong>आर्थिक विकास मजबूत, लेकिन बाहरी जोखिम बरकरार</strong><br>
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है. घरेलू मांग, विनिर्माण क्षेत्र में सुधार और मजबूत निर्यात के दम पर भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है. इसके साथ ही, केंद्रीय बैंक ने वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। </p>
<p>हालांकि, मानसून पर अल नीनो का असर, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल चुनौतियां महंगाई के लिए बड़े जोखिम बने हुए हैं. इन्हीं जोखिमों को देखते हुए आरबीआई ने दरों में कोई कटौती नहीं की है और कहा है कि नीतिगत कदम उठाने से पहले महंगाई के रुख पर अधिक स्पष्टता की आवश्यकता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>TATA Trusts का बड़ा ऐलान! 50 अस्पताल और वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी बनाएगा, नोएल टाटा ने पेश किया रोडमैप</title>
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<description><![CDATA[ मुंबई   टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने रविवार को भारत की सबसे बड़ी परोपकारी संस्था (Philanthropic Organization) के लिए एक नया रोडमैप पेश किया। उन्होंने देश भर में 40-50 नॉन-प्रॉफिट जनरल हॉस्पिटल बनाने और हेल्थकेयर व एजुकेशन के क्षेत्र में वर्ल्ड-क्लास इंस्टीट्यूशन बनाने पर अपना फोकस बढ़ाने की योजना का एलान किया। इंडियन इंस्टीट्यूट … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:00:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>TATA, Trusts, का, बड़ा, ऐलान, अस्पताल, और, वर्ल्ड, क्लास, यूनिवर्सिटी, बनाएगा, नोएल, टाटा, ने, पेश, किया, रोडमैप</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई </strong></p>
<p> टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने रविवार को भारत की सबसे बड़ी परोपकारी संस्था (Philanthropic Organization) के लिए एक नया रोडमैप पेश किया। उन्होंने देश भर में 40-50 नॉन-प्रॉफिट जनरल हॉस्पिटल बनाने और हेल्थकेयर व एजुकेशन के क्षेत्र में वर्ल्ड-क्लास इंस्टीट्यूशन बनाने पर अपना फोकस बढ़ाने की योजना का एलान किया।</p>
<p>इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट बैंगलोर (IIM-B) के प्रमुख एलुमनाई लीडरशिप कॉन्क्लेव, 'IIMBue 2026' में बोलते हुए टाटा ने कहा कि ट्रस्ट अब NGO और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को फंड देने की अपनी पारंपरिक भूमिका से आगे बढ़कर ऐसे संस्थान बना रहा है जो पीढ़ियों तक सेवा कर सकें।</p>
<p><strong>50 किफायती जनरल हॉस्पिटल किए जाएंगे तैयार</strong><br>
नोएल टाटा ने कहा कि यह उस विरासत को फिर से जीवित करने जैसा है जिसने भारत को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) और टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल जैसे संस्थान दिए। नई रणनीति के तहत, टाटा ट्रस्ट्स असम सरकार के साथ मिलकर राज्य में 17 कैंसर केयर हॉस्पिटल बनाने के बाद 40-50 किफायती जनरल हॉस्पिटल तैयार करने की योजना बना रहा है।</p>
<p><strong>किस मॉडल पर काम करेंगे ये हॉस्पिटल?</strong><br>
टाटा ने कहा कि ये हॉस्पिटल 'क्रॉस-सब्सिडी मॉडल' पर काम करेंगे। इसमें प्रीमियम सर्विसेज का विकल्प चुनने वाले मरीज आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के इलाज के लिए सब्सिडी देने में मदद करेंगे, और इससे डॉक्टरों, दवाओं या मेडिकल सुविधाओं की क्वालिटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि एजुकेशन टाटा ट्रस्ट्स के अगले चरण का दूसरा मेन पिलर होगा। IIM बैंगलोर के साथ मिलकर बनाए जा रहे प्रस्तावित अंडरग्रेजुएट इंस्टीट्यूशन को एक महत्वपूर्ण शुरुआत बताते हुए टाटा ने कहा कि बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत को और अधिक वर्ल्ड-क्लास एजुकेशनल इंस्टीट्यूशनंस की जरूरत है।</p>
<p><strong>प्राइवेट सेक्टर के लिए की ये मांग</strong><br>
टाटा ने कहा कि भारत में क्वालिटी इंस्टीट्यूशनंस की सीमित उपलब्धता के कारण हर साल हजारों प्रतिभाशाली भारतीय छात्र हायर एजुकेशन के लिए विदेश जाते हैं। टाटा ने कहा, "ऐसा कोई कारण नहीं है कि भारत पर्याप्त क्वालिटी इंस्टीट्यूशन न बना सके ताकि छात्र सिर्फ़ इसलिए देश छोड़कर न जाएं क्योंकि सीटें कम हैं।"<br>
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन ने उच्च शिक्षा में ज़्यादा प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने के लिए सुधारों की भी मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि मुनाफ़ा कमाने वाले शैक्षणिक इंस्टीट्यूशंस पर लगी पाबंदियों ने प्राइवेट कैपिटल को इस क्षेत्र में आने से हतोत्साहित किया है।</p>
<p><strong>'मज़बूत इंस्टीट्यूशनल इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत'</strong><br>
हार्वर्ड समेत दुनिया के प्रमुख विश्वविद्यालयों में पढ़ा रहे भारतीय मूल के फैकल्टी सदस्यों की बड़ी संख्या का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में एकेडमिक टैलेंट की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें आकर्षित करने और बनाए रखने के लिए मज़बूत इंस्टीट्यूशनल इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत है।</p>
<p>IIM बैंगलोर द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, टाटा ने परोपकार के क्षेत्र में ज़्यादा जवाबदेही की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठनों को प्रभाव के बड़े-बड़े दावों से आगे बढ़कर मापने योग्य नतीजों पर ध्यान देना चाहिए।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>महाराष्ट्र में एनालॉग पनीर पर पूरी तरह बैन, बेचते पकड़े गए तो होगी सख्त कार्रवाई</title>
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<description><![CDATA[ मुंबई  महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में एनालॉग पनीर, यानी नॉन-डेयरी पनीर, के निर्माण, बिक्री, भंडारण, परिवहन और वितरण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार ने यह फैसला सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया है. इस कदम के साथ महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ के बाद ऐसा फैसला लेने वाला देश का दूसरा राज्य बन … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 14:00:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>महाराष्ट्र, में, एनालॉग, पनीर, पर, पूरी, तरह, बैन, बेचते, पकड़े, गए, तो, होगी, सख्त, कार्रवाई</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई </strong></p>
<p>महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में एनालॉग पनीर, यानी नॉन-डेयरी पनीर, के निर्माण, बिक्री, भंडारण, परिवहन और वितरण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार ने यह फैसला सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया है. इस कदम के साथ महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ के बाद ऐसा फैसला लेने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। </p>
<p>सरकार ने साफ किया है कि नियम तोड़ने वालों पर खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होगी. अपराध की गंभीरता के आधार पर 6 महीने तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. अगर असुरक्षित खाद्य पदार्थ के सेवन से किसी व्यक्ति की मौत होती है, तो आजीवन कारावास और कम से कम 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। </p>
<p>30 जुलाई को खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंढे की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य में एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण, प्रोसेसिंग, पैकिंग, स्टोरेज, परिवहन, थोक और खुदरा बिक्री, साथ ही बिक्री के लिए पेश करने पर तत्काल प्रभाव से रोक रहेगी. यानी अब इस तरह के पनीर से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन पर प्रतिबंध लागू होगा। </p>
<p><strong>30 जुलाई से आदेश प्रभावी, बनाने से लेकर बिक्री तक सब बंद</strong><br>
खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा 30 जुलाई को जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, राज्य भर में एनालॉग पनीर से जुड़ी तमाम गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। प्रतिबंध की मुख्य बातें:</p>
<p>किन गतिविधियों पर रोक: एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण, प्रोसेसिंग, पैकिंग, स्टोरेज, परिवहन, थोक बिक्री, खुदरा बिक्री और बिक्री के लिए प्रदर्शित करने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू हो गया है।</p>
<p>ग्राहकों को गुमराह करने पर एक्शन: खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यापारी या प्रतिष्ठान एनालॉग पनीर को असली डेयरी पनीर बताकर बेचता है, तो इसे ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी और 'खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006' (Food Safety and Standards Act, 2006) के तहत अनुचित व्यापार माना जाएगा।</p>
<p><strong>सख्त सजा का प्रावधान: 6 महीने की जेल से लेकर आजीवन कारावास तक</strong><br>
नियमों का उल्लंघन करने वालों और उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कानून में कठोर दंड तय किए गए हैं। अपराध की गंभीरता के आधार पर 6 महीने तक की जेल की सजा और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि नकली या असुरक्षित खाद्य पदार्थ (एनालॉग पनीर) के सेवन से किसी व्यक्ति की जान जाती है, तो आरोपी को आजीवन कारावास और कम से कम 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष महाराष्ट्र विधानसभा के सत्र के दौरान विभिन्न विधायकों ने राज्य में धड़ल्ले से बिक रहे नकली और एनालॉग पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग प्रमुखता से उठाई थी। सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले से डेयरी किसानों के हितों की रक्षा होगी और आम जनता को शुद्ध खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।</p>
<p><strong>एनालॉग पनीर को असली डेयरी पनीर बताकर बेचने पर होगी कार्रवाई</strong><br>
खाद्य एवं औषधि प्रशासन, यानी एफडीए, ने भी इस मामले में अपना रुख साफ किया है. विभाग के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति या प्रतिष्ठान एनालॉग पनीर को असली डेयरी पनीर बताकर बेचता है, तो इसे उपभोक्ताओं को गुमराह करना माना जाएगा. साथ ही, इसे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत अनुचित व्यापारिक गतिविधि माना जाएगा. ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। </p>
<p><strong>एनालॉग पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की गई थी</strong><br>
यह मुद्दा नया नहीं है. पिछले वर्ष महाराष्ट्र विधानसभा में भी इसे उठाया गया था. उस दौरान विधायकों ने एनालॉग पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की थी. अब सरकार ने उस दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए राज्यभर में इस पर रोक लगा दी है। </p>
<p>कुल मिलाकर, महाराष्ट्र सरकार ने साफ संदेश दिया है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी. एनालॉग पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध, एफडीए की सख्त चेतावनी और जेल से लेकर भारी जुर्माने तक का प्रावधान, इस फैसले को राज्य की बड़ी कार्रवाई बनाता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>Repo Rate पर RBI का बड़ा फैसला, होम&#45;ऑटो लोन की EMI में फिलहाल नहीं होगा बदलाव</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली क्या आपने होम लोन या ऑटो लोन लिया है. अगर हां तो फिर ये खबर आपके लिए है. भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी में लिए गए फैसलों (RBI MPC Results) का ऐलान कर दिया है. केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि Repo Rate में इस बार भी … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 14:00:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Repo, Rate, पर, RBI, का, बड़ा, फैसला, होम-ऑटो, लोन, की, EMI, में, फिलहाल, नहीं, होगा, बदलाव</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>क्या आपने होम लोन या ऑटो लोन लिया है. अगर हां तो फिर ये खबर आपके लिए है. भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी में लिए गए फैसलों (RBI MPC Results) का ऐलान कर दिया है. केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि Repo Rate में इस बार भी किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है और इसे 5.25% पर बरकरार रखा गया है. यानी आपके लोन की ईएमआई (Loan EMI) पर कोई असर नहीं होगा और ये जस की तस रहेंगी। </p>
<p><strong>RBI गवर्नर बोले- ग्लोबल अनिश्चितता जारी</strong><br>
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आरबीआई एमपीसी के नतीजों का ऐलान करते हुए कहा कि न्यूट्रल रुख बरकरार रखते हुए इसे 5.25 फीसदी पर स्थिर रखने का फैसला किया गया है. इसके अलावा स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5%, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट 5.50% पर स्थिर रखा गया है। </p>
<p>RBI गवर्नर ने नतीजों का ऐलान करते हुए मिडिल ईस्ट टेंशन का जिक्र भी किया और कहा कि वेस्ट एशिया की वजह से वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता है और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उथल-पुथल देखने को मिल रहा है। </p>
<p><strong>इस साल Repo Rate में क्या बदलाव? </strong><br>
बता दें कि बीते जून महीने में हुई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एमपीसी बैठक ने रेपो रेट को स्थिर रखा गया था और ये फिलहाल 5.25% पर बरकरार है. इससे पहले बीते साल 2025 में आरबीआई ने एक के बाद एक कई बार रेपो रेट में कटौती कर लोन लेने वालों को तोहफा दिया था और Repo Rate में कुल मिलाकर 125 अंकों की कटौती की गई थी। </p>
<p>गौरतलब है कि रेपो रेट (Repo Rate) वह दर होती है, जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक तमाम बैंकों को कर्ज देती है. इसका उपयोग अर्थव्यवस्था में महंगाई को कंट्रोल करने के लिए भी किया जाता है. जब रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंकों के लिए लोन लेना महंगा हो जाता है, जिससे आम जनता के लिए होम लोन या ऑटो लोन की EMI बढ़ जाती है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>चुनाव से पहले भाजपा सरकार का बड़ा ऐलान, सरकारी अस्पतालों में सभी जांचें होंगी मुफ्त</title>
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<description><![CDATA[  देहरादून उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पूर्व लोगों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में सभी तरह की जांचें निशुल्क होने जा रही हैं। दरअसल, सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की ओपीडी में हर दिन औसतन 50 हजार … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 13:15:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>चुनाव, से, पहले, भाजपा, सरकार, का, बड़ा, ऐलान, सरकारी, अस्पतालों, में, सभी, जांचें, होंगी, मुफ्त</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> देहरादून</strong></p>
<p>उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पूर्व लोगों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में सभी तरह की जांचें निशुल्क होने जा रही हैं।</p>
<p>दरअसल, सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की ओपीडी में हर दिन औसतन 50 हजार मरीज आते हैं। तकरीबन 15 हजार मरीज किसी न किसी पैथोलॉजी या फिर दूसरी जांच से गुजरते हैं। अभी इसके लिए तय शुल्क देना पड़ता है, पर सरकार अब राहत देने की तैयारी कर रही है। सरकारी अस्पतालों का इलाज निजी सेंटर की तुलना में सस्ता है, लेकिन कई बार पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांच पर 500 से 1000 रुपये तक खर्च हो जाते हैं।</p>
<p><strong>जल्द आ रही नई व्यवस्था</strong><br>
जल्द नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह खर्च भी मरीजों को नहीं उठाना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के मुताबिक, सरकार जल्द ही इस योजना का औपचारिक ऐलान कर सकती है। बता दें कि, उत्तराखंड के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों में पैथोलॉजी की 200 से अधिक प्रकार की जांचें होती हैं।</p>
<p>उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि आम मरीजों को राहत देने के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में होने वाली इन-हाउस जांच को निशुक्ल करने का फैसला लिया जा रहा है। जल्द ही इस योजना का ऐलान किया जाएगा।</p>
<p><strong>15 हजार को रोज लाभ</strong><br>
सरकार की योजना लागू होने के बाद हर दिन औसतन पंद्रह हजार मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा। यह सुविधा 5 सरकारी मेडिकल कॉलेज, 13 जिला अस्पतालों के साथ ही 95 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने की तैयारी है। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग ने जिला, उप जिला और कुछ सामुदायिक अस्पतालों में मुफ्त जांच को निजी लैब से समझाैता किया है। इन अस्पतालों में इस लैब के काउंटर भी चल रहे हैं, जहां मरीजों से जांच का कोई शुल्क नहीं लिया जाता। हालांकि, अधिकांश मरीजों को इसकी जानकारी नहीं होती। ऐसे में वे शुल्क जमा कराकर जांच कराते हैं।</p>
<p><strong>विपक्ष को सद् बुद्धि दें भोलेनाथ : धामी</strong><br>
हरिद्वार: इस बीच हरिद्वार में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सनातन परंपरा और संत समाज भारतीय संस्कृति की मूल धारा हैं। इनके सम्मान के साथ किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने सांसद पप्पू यादव और उनके सहयोगियों पर सनातन परंपरा और संतों का उपहास उड़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह भोलेनाथ और मां गंगा से उन्हें सद् बुद्धि देने की प्रार्थना करते हैं।</p>
<p><strong>अटूट आस्था को कोई डिगा नहीं सकता</strong><br>
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग सनातन और आस्था के मार्ग में बाधाएं खड़ी करने की कोशिश करते हैं, लेकिन करोड़ों लोगों की अटूट श्रद्धा को कोई डिगा नहीं सकता। उन्होंने कहा कि संत समाज ने अपना पूरा जीवन धर्म, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित किया है। ऐसे में संतों के प्रति अपमानजनक टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण है।</p>
<p><strong>कांवड़ यात्रा में संयम और मर्यादा बनाए रखें भक्त</strong><br>
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए कांवड़ यात्रा मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन, एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। उन्होंने भक्तों से संयम और मर्यादा बनाए रखने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि होटल-ढाबों में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार मुहिम चला रहा है। उन्होंने माना कि कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ घटनाएं हुई हैं, मगर अधिकांश भक्त पूरी श्रद्धा के साथ यात्रा कर रहे हैं।</p>
<p><strong>हेलीकॉप्टर के जरिये की गई पुष्प वर्षा</strong><br>
मुख्यमंत्री मंगलवार को हरिद्वार स्थित अलकनंदा घाट पर कांवड़ियों के अभिनंदन समारोह में पहुंचे। उन्होंने पांच कांवड़ियों का ‘चरण प्रक्षालन’ किया। कांवड़ियों के बीच अपने हाथों से भोजन भी परोसा। वहीं, हरकी पैड़ी से कांवड़ यात्रा मार्ग तक हेलीकॉप्टर के जरिये फूल बरसाकर भक्तों का स्वागत किया गया।</p>
<p><strong>सामाजिक सद्भाव की प्रतीक है कांवड़ यात्रा</strong><br>
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सेवा, अनुशासन, समर्पण और सामाजिक सद्भाव की प्रतीक भी है। भगवान शिव अपने भक्तों पर सहज कृपा करते हैं और श्रद्धा से चढ़ाया गया एक लोटा जल भी भक्तों के कष्ट हरने का माध्यम बनता है। उन्होंने बताया, इस वर्ष अब तक एक करोड़ से अधिक भक्त हरिद्वार से गंगाजल लेकर जा चुके हैं।</p>
<p><strong>कांवड़ यात्रा मार्गों पर भी स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत</strong><br>
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। कांवड़ यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया गया। विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों में अब तक 48 हजार श्रद्धालुओं का उपचार किया जा चुका है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>टैक्सपेयर्स के लिए बड़ा अपडेट! सरकार टैक्स सिस्टम में करने जा रही बड़ा बदलाव, जानें क्या होगा नया</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्‍ली भारत में विदेशी निवेशकों की मौजूदगी को बढ़ाने और देश की इकोनॉमी को बूस्‍ट देने के लिए सरकार एक बड़ा काम करने जा रही है. दरअसल, भारत विदेशी निवेश को आकर्षित करने और घरेलू मैन्‍युफैक्‍चर को बढ़ावा देने के उद्देश्य से  Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 संसद में पेश कर सकती … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 10:15:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>टैक्सपेयर्स, के, लिए, बड़ा, अपडेट, सरकार, टैक्स, सिस्टम, में, करने, जा, रही, बड़ा, बदलाव, जानें, क्या, होगा, नया</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्‍ली</strong><br>
भारत में विदेशी निवेशकों की मौजूदगी को बढ़ाने और देश की इकोनॉमी को बूस्‍ट देने के लिए सरकार एक बड़ा काम करने जा रही है. दरअसल, भारत विदेशी निवेश को आकर्षित करने और घरेलू मैन्‍युफैक्‍चर को बढ़ावा देने के उद्देश्य से  Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 संसद में पेश कर सकती है। </p>
<p>प्रस्तावित विधेयक में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए टैक्स छूट का समय बढ़ाने, विदेशी निवेश फंड से जुड़े नियम आसान करने, REITs, InvITs, डेटा सेंटर और सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को टैक्‍स राहत देने जैसे कई खास बदलाव किए गए हैं। </p>
<p><strong>इन विदेशी निवेशकों को भी छूट का प्रस्‍ताव</strong><br>
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, संसद द्वारा घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं को प्रोडक्‍ट्स सप्‍लाई करने वाले विदेशी सप्‍लायर के लिए टैक्‍स छूट को बढ़ाने के साथ-साथ डेटा सेंटर्स और हीरा खनन क्षेत्र को टैक्‍स छूट लाभ प्रदान करने पर भी मंजूरी ली जा सकती है। </p>
<p>प्रस्‍ताव‍ित बदलावों में आयकर अधिनियम में संशोधन के तहत कॉन्‍ट्रैक्‍ट मैन्‍युफैक्‍चरिंग के लिए टैक्‍स छूट को मौजूदा एक्‍सपायरी डेट 2031 से बढ़ाकर 2041 तक करना शामिल है. इस विस्तार में मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट और सर्वर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद शामिल हैं। </p>
<p><strong>इस नए नियम पर भी विचार कर रही सरकार </strong><br>
रिपोर्ट में आगे यह भी कहा गया है कि सरकार एक मौजूदा अध्‍यदेश को कानून में बदलने की भी योजना बना रही है, जो विदेशी संस्‍थागत निवेशकों को सरकारी इक्विटीज से मिले ब्‍याज पर टैक्‍स छूट देता है. साथ ही उन सिक्‍योरिटी की सेल,  या ट्रांसफर से होने वाले कैपिटल गेन पर भी छूट देता है। </p>
<p><strong>इस प्रस्‍ताव से क्‍या लाभ होगा? </strong><br>
ये प्रस्ताव सरकार द्वारा व‍िदेशी फंड की बिक्री को रोकने, रुपये को सपोर्ट देने और अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद बाहरी झटकों से अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा हैं. अगर ये प्रस्‍ताव पास होता है तो भारतीय स्‍टॉक मार्केट को भी एक बड़ा सपोर्ट मिल सकता है, क्‍योंकि विदेशी निवेशकों की बड़े स्‍तर पर वापसी हो सकती है. जिस कारण शेयर बाजार में अच्‍छी तेजी आ सकती है। </p>
<p><strong>प्रस्‍ताव पास करने का है दबाव</strong><br>
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा मौजूदा संसदीय सत्र के दौरान विधेयक पेश किए जाने की संभावना है, जो 13 अगस्त तक चलेगा. हालांकि, परीक्षा पेपर लीक और छात्र विरोध प्रदर्शनों पर विपक्ष की बहस की मांगों के कारण सत्र में रुकावट आई है. सत्र समाप्त होने में दस दिन से भी कम समय बचा है और विधायी चुनौतियों के बावजूद सरकार पर टैक्‍स संबंधी उपायों को पास करने का दबाव है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>जनगणना का दूसरा चरण इस महीने से शुरू, जाति से माता&#45;पिता तक पूछे जाएंगे कई अहम सवाल</title>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 10:00:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>जनगणना 2027 के दूसरे चरण की शुरुआत इसी महीने यानी 17 अगस्त से होने जा रही है। 1931 के बाद यह पहला मौका होगा जब जनगणना में जाति के आंकड़े भी जुटाए जाएंगे। इसके साथ ही, लोगों से उनके माता-पिता के जन्म की तारीख और जन्मस्थान की भी जानकारी मांगी जाएगी। जनगणना के दौरान लोग स्वेच्छा से अपना आधार नंबर भी दे सकेंगे।</p>
<p><strong>किन राज्यों से होगी शुरुआत और क्या है शेड्यूल?</strong><br>
लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी वाले इलाकों में जनसंख्या गणना की शुरुआत 17 अगस्त से होगी। गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक अधिसूचना के मुताबिक इन 4 उत्तरी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जनगणना के संचालन के लिए, घर-घर जाकर जनसंख्या गणना शुरू होने से ठीक पहले 17 से 31 अगस्त तक स्व-गणना का विकल्प उपलब्ध रहेगा।</p>
<p>इन क्षेत्रों में जनसंख्या की जनगणना इस वर्ष एक से 30 सितंबर तक कराई जाएगी। इसके बाद एक से पांच अक्टूबर तक पुनरीक्षण चरण आयोजित किया जाएगा। अधिसूचना में कहा गया है कि लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के बर्फ से प्रभावित गैर-समान समय वाले क्षेत्रों के लिए जनगणना की संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर, 2026 की रात 12 बजे होगी। जल्द ही दूसरे चरण के लिए प्रश्नावली को भी नोटिफाई किया जाएगा।</p>
<p><strong>बिना प्रमाण पत्र के दर्ज होगी जाति</strong><br>
सूत्रों के अनुसार, नागरिक अपनी जो जाति बताएंगे, उसे उसी रूप में दर्ज कर लिया जाएगा। इसके लिए किसी भी तरह का जाति प्रमाण पत्र या दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं होगी। प्रश्नावली में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए एक ड्रॉप-डाउन <strong>मेन्यू होगा। यह मेन्यू केवल उसी राज्य की SC/ST लिस्ट दिखाएगा, जहां गणना हो रही है।</strong></p>
<p><strong>जो लोग SC/ST श्रेणी में नहीं आते, वे 'जाति' वाले विकल्प में अपनी जानकारी दे सकेंगे। जाति की स्पेलिंग ठीक वैसी ही दर्ज की जाएगी, जैसा नागरिक द्वारा बताया जाएगा।</strong></p>
<p>एक अधिकारी ने बताया कि 2011 की सामाजिक-आर्थिक जातिगत जनगणना में 45,000 से ज्यादा जातियां दर्ज हो गई थीं, जिससे उस डेटा का इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया था। हालांकि, इस बार डिजिटल टूल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से डेटा को संकलित करने और अलग करने की चुनौती को आसानी से पार कर लिया जाएगा।</p>
<p><strong>माता-पिता के जन्म की देनी होगी जानकारी</strong><br>
दूसरे चरण में पहली बार माता-पिता के जन्म की तारीख और जगह का भी डेटा जुटाया जाएगा। यह नागरिकता तय करने वाले अहम कारक हैं। माता-पिता के जन्म की जानकारी के लिए भी कोई दस्तावेज या प्रमाण नहीं मांगा जाएगा। व्यक्ति अपनी जानकारी के अनुसार जो बताएगा, वही दर्ज किया जाएगा। अगर किसी को माता-पिता के जन्म की सटीक तारीख नहीं पता है और सिर्फ साल याद है, तो डिफॉल्ट रूप से उस साल की 1 जनवरी को जन्म तिथि मान लिया जाएगा।</p>
<p>अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इसका मकसद केवल यह जानना है कि कितने लोग नागरिकता के मानदंडों को पूरा करते हैं। 'जनगणना अधिनियम' के तहत इस डेटा का इस्तेमाल किसी कानूनी सबूत, सरकारी लाभ या सार्वजनिक खुलासे के लिए नहीं किया जा सकता, इसलिए आम लोगों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। बता दें कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) की प्रक्रिया को जनगणना 2027 से अलग कर दिया गया है।</p>
<p><strong>पासपोर्ट और आधार नंबर की डिटेल भी होगी शामिल</strong><br>
इस चरण की प्रश्नावली में अगर किसी के पास पासपोर्ट है, तो उसका नंबर भी रिकॉर्ड किया जाएगा। वहीं, आधार नंबर जुटाने का भी विकल्प होगा, लेकिन यह पूरी तरह से नागरिक की इच्छा पर निर्भर करेगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>होर्मुज बंद, कतर से गैस सप्लाई 91% घटी… फिर भी भारत ने कैसे टाला LNG संकट?</title>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 10:00:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>होर्मुज, बंद, कतर, से, गैस, सप्लाई, 91, घटी…, फिर, भी, भारत, ने, कैसे, टाला, LNG, संकट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
   पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच भारत ने मई से जुलाई के दौरान लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का आयात तेजी से बढ़ाया. भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता घटाते हुए दूसरे देशों से ज्यादा सप्लाई ली, जिससे उसके पारंपरिक सप्लायर कतर से आई भारी कमी की भरपाई हो सकी. रिपोर्ट के अनुसार मई-जुलाई के दौरान भारत का एलएनजी आयात एक साल पहले के मुकाबले 15.4% बढ़कर 7.08 मिलियन टन पहुंच गया. इससे मार्च-अप्रैल में आई करीब 13% की गिरावट के बाद सुधार दिखा, जो पश्चिम एशिया संघर्ष के पहले दो महीने थे। </p>
<p>यह सुधार यूएस, ओमान, नाइजीरिया और अंगोला से ज्यादा कार्गो आने की वजह से हुआ. भारत अपनी नैचुरल गैस की करीब आधी जरूरत एलएनजी आयात से पूरी करता है. पहले इन आयातों का करीब 60% स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता था, जिसमें कतर और यूएई की बड़ी हिस्सेदारी थी. ईरान और ओमान के बीच यह संकरा समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का अहम मार्ग है और अमेरिका-ईरान संघर्ष की वजह से यहां गंभीर रुकावटें देखी गई हैं। </p>
<p>भारत ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन, फर्टिलाइजर, इलेक्ट्रिसिटी और सिरेमिक जैसे क्षेत्रों की मांग पूरी करने के लिए सप्लाई सुरक्षित करने को प्राथमिकता दी. रिपोर्ट के मुताबिक जब ऊंची कीमतों के बीच कई बड़े एलएनजी आयातक देशों ने खरीद कम कर दी, तब भी भारत ने मजबूत खरीदारी जारी रखी। </p>
<p><strong>US सबसे बड़ा LNG सप्लायर</strong><br>
डेटा एनालिस्ट केप्लर (Kpler) के जहाज ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक मई-जुलाई के दौरान यूएस 2.19 मिलियन टन के साथ भारत का सबसे बड़ा एलएनजी सप्लायर रहा. इसके बाद नाइजीरिया से 1.31 मिलियन टन, ओमान से 1.22 मिलियन टन और अंगोला से 0.80 मिलियन टन आयात हुआ. यूएस से आयात 252.8% बढ़ा, ओमान से 340.9% की छलांग रही, जबकि नाइजीरिया और अंगोला से आयात क्रमशः 123.8% और 71.3% बढ़ा. ये आंकड़े 2025 के दौरान इन देशों से औसत मासिक आयात के मुकाबले काफी ज्यादा हैं। </p>
<p><strong>कतर और यूएई से सप्लाई घटी</strong><br>
इस दौरान कतर से आयात एक साल पहले के मुकाबले 91.3% गिरकर 0.23 मिलियन टन रह गया. वहीं यूएई से आयात 34.4% घटकर 0.55 मिलियन टन पर आ गया. हालांकि पिछले महीनों की तेज गिरावट के बाद जून और जुलाई में यूएई से शिपमेंट में कुछ सुधार हुआ. होर्मुज की नाकेबंदी के बावजूद यूएई ने समुद्री सुरक्षा आकलन के आधार पर मिले छोटे मौके का इस्तेमाल करके निर्यात जारी रखा. कुछ मामलों में एलएनजी टैंकरों के ट्रांसपोंडर भी बंद किए गए ताकि उनका पता न चल सके. कतर ने भी इसी तरह के तरीके अपनाए, लेकिन कम स्तर पर।  </p>
<p>दोनों निर्यातकों को 17 जून को हुए शुरुआती यूएस-ईरान शांति समझौते के बाद ट्रांजिट में आई आंशिक बहाली का फायदा मिला. हालांकि जुलाई की शुरुआत में यह समझौता टूटने के बाद जहाजों की आवाजाही फिर धीमी पड़ गई. मई से जुलाई के दौरान भारत ने होर्मुज पर दबाव बढ़ने के बीच अपने एलएनजी स्रोतों में बदलाव किया और आयात बढ़ाया. इससे घरेलू मांग पूरी करने में मदद मिली, जबकि कतर से सप्लाई में बड़ी गिरावट आई और समुद्री रास्ते पर रुकावटें भी बनी रहीं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>LPG Rule: 16 अगस्त से पहले निपटा लें यह जरूरी काम, वरना गैस सिलेंडर मिलने में हो सकती है परेशानी</title>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 23:00:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>आप एलपीजी सिलेंडर यूज करते हैं, तो फिर आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भी एक मैसेज आया होगा, जिसमें e-KYC पूरा करने का अलर्ट (LPG e-KYC Alert) दिया गया है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से भेजे गए इस एसएमएस में एलपीजी यूजर्स को ये जरूरी काम जल्द से जल्द पूरा करने के लिए कहा गया है. इसके लिए डेडलाइन 16 अगस्त तय की गई है, ऐसे में अगर ये लास्ट डेट चूक जाती है, तो फिर एलपीजी सिलेंडर पाने में मुश्किल हो सकती है, इसके साथ ही प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को भी सरकारी सब्सिडी में रुकावट पेश आ सकती है।  </p>
<p><strong>राहत के साथ अगस्त की शुरुआत</strong><br>
अगस्त महीने की शुरुआत एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी हुई. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 1 अगस्त 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बड़ी कटौती कर राहत दी. हालांकि, घरेलू गैस सिलेंडर (14 Kg LPG Cylinder) का दाम जस का तस रखा गया. इसके साथ ही कंपनियों ने अलर्ट भी जारी किया है कि सिलेंडर की सप्लाई सुचारू पाने के लिए फटाफट ई-केवाईसी करा लें। </p>
<p>घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों पर नजर डालें, तो दिल्ली में सिलेंडर की कीमत (Delhi LPG Cylinder Price) 942 रुपये, कोलकाता में दाम (Kolkata LPG Cylinder Price) 968 रुपये, मुंबई में कीमत 941.50 रुपये और चेन्नई में ये 957.50 रुपये है। </p>
<p><strong>SMS अलर्ट के जरिए चेतावनी</strong><br>
घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को 16 अगस्त तक ये आधार बेस्ड ई-केवाईसी सत्यापन प्रोसेस पूरा करना है और इसके लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने उन्हें एसएमएस अलर्ट भेजना भी शुरू कर दिया है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि जो लोग डेडलाइन तक ये काम पूरा नहीं करते हैं, तो फिर अधिसूचित घरेलू दर पर LP Cylinder खरीदने में दिक्कत पेश आ सकती है. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को भी तय की गई लास्ट डेट तक LPG e-KYC पूरा करना जरूरी है। </p>
<p>बता दें 2016 में शुरू की गई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के देश में अब तक 10 करोड़ से ज्यादा लाभार्थी हैं और इसके तहत उन्हें हर साल चार एलपीजी सिलेंडर की रिफिल पर 300 रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मिलता है. इससे पहले 9 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलते हैं, जिसका नियम बीते जून महीने में ही बदला गया है। </p>
<p><strong>घर बैठे कर सकते हैं काम पूरा  </strong><br>
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से भी लगातार एसएमएस के जरिए अलर्ट भेजा जा रहा है. इनमें कहा गया है, 'प्रिय ग्राहक, घरेलू दरों पर एलपीजी सिलेंडर पाने के लिए आपको e-KYC करना जरूरी है, पहले भी कई बार रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद आपने अभी तक ई-केवाईसी नहीं किया है। </p>
<p>IOCL की ओर से इस जरूरी काम के लिए अलर्ट भेजने के साथ ही घर बैठे इसे पूरा करने का प्रोसेस भी शेयर किया गया है. मैसेज में आगे कहा गया है कि आप इंडियनऑयल वन ऐप (Indian Oil One App) के माध्यम से घर बैठे, अपने डिस्ट्रिब्यूटर के पास जाकर या डिलीवरी कर्मी के जरिए ई-केवाईसी प्रोसेस को पूरा कर सकते हैं. इसमें साफ कहा गया है कि, '16 अगस्त 2026 तक ये काम पूरा न करने पर, इसके पूरा होने तक आप घरेलू दरों पर सिलेंडर प्राप्त करने के पात्र नहीं रहेंगे. कृपया जल्द से जल्द ई-केवाईसी पूरा करें। </p>]]> </content:encoded>
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<title>PM की पोस्ट हटाने के मामले में सरकार ने Meta को किया तलब, मांग सकती है माफी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली केंद्र सरकार ने META के हेड ऑफ पब्लिक पॉलिसी जोएल कपलान को तलब किया है. उन्हें 5 अगस्त यानी कल तलब किया गया है. इसके अलावा इंस्टाग्राम के तकनीकी अफसरों को भी तलब किया गया है. सरकार सोशल मीडिया कंपनी के एल्गोरिदम को लेकर जानकारी चाहती है. यानी सरकार जानना चाहती है कि … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 21:00:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>की, पोस्ट, हटाने, के, मामले, में, सरकार, ने, Meta, को, किया, तलब, मांग, सकती, है, माफी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>केंद्र सरकार ने META के हेड ऑफ पब्लिक पॉलिसी जोएल कपलान को तलब किया है. उन्हें 5 अगस्त यानी कल तलब किया गया है. इसके अलावा इंस्टाग्राम के तकनीकी अफसरों को भी तलब किया गया है. सरकार सोशल मीडिया कंपनी के एल्गोरिदम को लेकर जानकारी चाहती है. यानी सरकार जानना चाहती है कि ये कंपनियां किस तरह के कंटेट को बढ़ावा देते हैं। </p>
<p>सूत्रों के मुताबिक,  सरकार को कई शिकायतें मिली हैं कि कुछ सरकार विरोधी पोस्ट को ज्यादा तूल दी गई.  सरकार तकनीकी गड़बड़ी को लेकर बड़ी टेक कंपनियों से लिखित जवाब चाहती है. इसके अलावा सरकार मेटा से PM का पोस्ट हटाने पर लिखित माफी मांग सकती है। </p>
<p><strong>संसद की स्थायी समिति के सामने मेटा ने दिया था क्या जवाब?</strong><br>
सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति की बैठक भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता में हुई। बैठक का मुख्य विषय सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के नियमन पर चर्चा था। इसमें गूगल, मेटा, यूट्यूब, एक्स, स्नैपचैट, गृह मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक वीडियो हटाए जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठा। मेटा ने कहा कि वीडियो तकनीकी त्रुटि के कारण हटा था और बाद में उसे बहाल कर दिया गया।</p>
<p><strong>निशिकांत दुबे ने की थी क्या मांग?</strong><br>
सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री का वीडियो हटाने जैसी घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को स्वयं इस मामले में माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कंपनी ऐसा नहीं करती है तो भारत में उसे मिली 'सेफ हार्बर' सुरक्षा पर पुनर्विचार होना चाहिए। उनका कहना था कि डिजिटल प्लेटफॉर्मों को भारतीय कानूनों और जवाबदेही के दायरे में रहकर काम करना होगा।निशिकांत दुबे ने एक्स पोस्ट में कहा, ''सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स भारत से 3 लाख करोड़ कमाते हैं, टैक्स का केवल 8 हजार करोड़ जमा करते हैं. हमारे ही पैसे का इस्तेमाल संविधान मिटाने, देश को टुकड़े टुकड़े करने तथा देश विरोधी ताक़तों को समर्थन देकर करते हैं। </p>
<p><strong>सेफ हार्बर सुरक्षा को लेकर सवाल क्यों उठे?</strong><br>
'सेफ हार्बर' एक कानूनी सुरक्षा है, जिसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ताओं द्वारा डाली गई सामग्री के लिए कुछ शर्तों के साथ सीमित कानूनी संरक्षण मिलता है। निशिकांत दुबे ने कहा कि अगर कोई डिजिटल मंच अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से पालन नहीं करता या गंभीर मामलों में लापरवाही बरतता है, तो इस सुरक्षा की समीक्षा की जा सकती है। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही पर बहस और तेज हो गई है। </p>
<p><strong>एल्गोरिदम को लेकर क्या हैं चिंताएं? </strong><br>
बीते दिन इलेक्ट्रोनिक और आईटी मामलों की संसदीय सीमिति के चेयरमैन निशिकांत दुबे ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के नियमन को लेकर हुई बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम को लेकर सवाल खड़े किए थे। </p>
<p>संसदीय सीमिति के चेयरमैन निशिकांत दुबे ने कहा, "एल्गोरिदम को लेकर जो मेटा, एक्स और यूट्यूब ने हालात पैदा किए हैं. वो देश के जानने लायक है. बीजेपी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी की सोशल मीडिया व्यूअरशिप 24 बिलियन है. लेकिन अभी-अभी जो न कोई रजिस्टर्ड पार्टी और न ही कोई एनजीओ उसका व्यूअरशिप 27 बिलियन है. अभी एंटी रिजर्वशन का एक फोरम बना है उसकी व्यूअरशिप 7 बिलियन है। </p>
<p><strong>समिति ने मेटा से कौन-कौन से सवाल पूछे?</strong><br>
बैठक के दौरान समिति के कई सदस्यों ने मेटा के अधिकारियों से कड़े सवाल किए। सदस्यों ने कहा कि मामला केवल माफी मांगने तक सीमित नहीं रह सकता। उन्होंने पूछा कि वीडियो हटाने के लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। कुछ सदस्यों ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की। इसके अलावा मेटा से यह भी पूछा गया कि उसके प्लेटफॉर्म पर मौजूद विवादित और आपत्तिजनक सामग्री के खिलाफ कंपनी ने अब तक क्या कदम उठाए हैं और ऐसे मामलों में उसकी जवाबदेही क्या है। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>‘क्लास 9 के छात्रों पर 3 भाषाएं न थोपें’… CBSE की भाषा नीति सुप्रीम कोर्ट पहुंची</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली CBSE की कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषा नीति को अनिवार्य किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने मामले को जल्द सुनने की मांग रखी. … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 21:00:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>‘क्लास, के, छात्रों, पर, भाषाएं, न, थोपें’…, CBSE, की, भाषा, नीति, सुप्रीम, कोर्ट, पहुंची</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>CBSE की कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषा नीति को अनिवार्य किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने मामले को जल्द सुनने की मांग रखी. वकील ने कोर्ट को बताया कि इस मामले को बुधवार को सुनाई के लिए सूचीबद्ध किया था लेकिन बाद में इस केस को सूची से हटा दिया गया. उन्होंने कहा कि इस मामले में तुरंत सुनवाई की जरूरत है क्योंकि कई छात्र ऐसी भाषा पढ़ने को मजबूर हैं, जिसके लिए उनके स्कूलों में पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। </p>
<p><strong>परेशान हैं छात्र </strong><br>
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने कोर्ट को बताया कि बहुत से बच्चों को वह भाषा नहीं पढ़ाई जा रही है जो उन्होंने चुनी थी. बच्चों के लिए किताबें और टीचर भी उपलब्ध नहीं हैं. यह क्लास 5-8 और क्लास 8-10 के लिए है. छात्र बिना किसी टीचर या किताबों के क्लासरूम में बैठे हैं। </p>
<p><strong>बंगाल में भी नहीं हैं टीचर </strong><br>
उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कोलकाता में हिंदी, बंगाली और संस्कृत के विकल्प हैं, लेकिन उनके पास संस्कृत या हिंदी के टीचर नहीं हैं. उन्होंने आगे बताया कि यह फार्मूला 2030 में लागू होना था इसके तहत भाषा चुनाव के लिए 22 भाषाओं का विकल्प देना जरूरी है लेकिन ज़्यादातर स्कूलों में ये विकल्प नहीं हैं.इस पर जस्टिस बागची ने कहा भाषा चुनने का विकल्प क्लास 6 में होना चाहिए और वह विकल्प भी ऐसे होने चाहिए जो असल में संभव हो। </p>
<p><strong>कोर्ट में की ये अपील </strong><br>
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने कहा कि कोर्ट से हमारा आग्रह है कि जो थ्री लैंग्वेज पॉलिसी का कंपल्शन क्लास नाइंथ के लिए है उसको हटा दिया जाए क्योंकि क्लास नाइंथ में आने वाले बच्चों के ऊपर बोर्ड का एक्स्ट्रा प्रेशर होता है. फिलहाल CJI ने आश्वासन दिया है कि कल इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है किया जा सकता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा से पास हुआ एप्रोप्रिएशन (नंबर&#45;3) बिल, ध्वनिमत से मिली मंजूरी</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली विपक्षी सांसदों के लगातार हंगामे और नारेबाजी के बीच लोकसभा ने &quot;द एप्रोप्रिएशन (नंबर-3) बिल को ध्वनिमत से पास कर दिया. विपक्षी सांसद सदन में लगातार विरोध और नारेबाजी करते रहे, लेकिन हंगामा नहीं थमने पर पीठ ने विधेयक को वोटिंग के लिए आगे बढ़ाया।  कार्यवाही के दौरान स्पीकर की तरफ से विपक्षी … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 19:00:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>विपक्ष, के, हंगामे, के, बीच, लोकसभा, से, पास, हुआ, एप्रोप्रिएशन, नंबर-3, बिल, ध्वनिमत, से, मिली, मंजूरी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong><br>
विपक्षी सांसदों के लगातार हंगामे और नारेबाजी के बीच लोकसभा ने "द एप्रोप्रिएशन (नंबर-3) बिल को ध्वनिमत से पास कर दिया. विपक्षी सांसद सदन में लगातार विरोध और नारेबाजी करते रहे, लेकिन हंगामा नहीं थमने पर पीठ ने विधेयक को वोटिंग के लिए आगे बढ़ाया। </p>
<p>कार्यवाही के दौरान स्पीकर की तरफ से विपक्षी सांसदों से अपनी सीटों पर लौटने और खर्च से जुड़े प्रावधानों पर निर्धारित चर्चा में हिस्सा लेने की अपील की गई. हालांकि, विपक्षी सदस्यों का विरोध जारी रहा. इसके बाद सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। </p>
<p>"The Appropriation (No. 3) Bill, 2026" के जरिए सरकार को भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से स्वीकृत वित्तीय आवंटन निकालने और विभिन्न सरकारी खर्चों को पूरा करने का कानूनी अधिकार मिलता है. संविधान के अनुच्छेद 114 के तहत संसद की मंजूरी के बिना संचित निधि से धनराशि नहीं निकाली जा सकती। </p>
<p><strong>विधेयक के पारित होने के बाद भी जारी रहा विपक्ष का हंगामा</strong><br>
इस विधेयक के पारित होने से पहले सदन में लगातार विपक्षी हंगामा जारी रहा. सरकार की ओर से वित्तीय प्रावधानों पर चर्चा कराए जाने की कोशिश की गई, लेकिन विपक्षी सांसदों के विरोध के कारण सदन में सामान्य तरीके से चर्चा नहीं हो सकी। </p>
<p><strong>हंगामे के बीच लोकसभा को स्थगित करना पड़ा</strong><br>
विधेयक पारित होने के बाद भी सदन में हंगामा जारी रहा. इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई. अब वित्तीय कामकाज से जुड़े अगले चरण में Finance Bill पर चर्चा और कार्यवाही होनी है। </p>
<p>Appropriation Bill संसद की वित्तीय प्रक्रिया का अहम हिस्सा है. इसके जरिए पहले से स्वीकृत Demands for Grants के तहत होने वाले खर्च के साथ-साथ उन खर्चों के लिए भी कानूनी आधार मिलता है, जो संचित निधि पर 'charged' होते हैं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>कोहरा या बारिश नहीं! जानिए किन वजहों से सबसे ज्यादा लेट होती हैं ट्रेनें</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली जब भी सर्दी का मौसम आता है या फिर तेज बारिश होती है तो ट्रेन के लेट होने का सिलसिला शुरू हो जाता है. हाल में तेज बारिश की वजह से गुजरात, मुंबई से दिल्ली की ओर से आने वाली ट्रेनें 17 घंटे तक लेट रहीं. इसके अलावा सर्दी में भी काफी ट्रेन … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:00:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>कोहरा, या, बारिश, नहीं, जानिए, किन, वजहों, से, सबसे, ज्यादा, लेट, होती, हैं, ट्रेनें</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
जब भी सर्दी का मौसम आता है या फिर तेज बारिश होती है तो ट्रेन के लेट होने का सिलसिला शुरू हो जाता है. हाल में तेज बारिश की वजह से गुजरात, मुंबई से दिल्ली की ओर से आने वाली ट्रेनें 17 घंटे तक लेट रहीं. इसके अलावा सर्दी में भी काफी ट्रेन कोहरे की वजह से लेट होती हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि कोहरा और बारिश ही नहीं… ट्रेन लेट होने के 33 से ज्यादा कारण हैं, जिनमें अधिकतर कारण रेलवे के कंट्रोल में हैं. इन कारणों में कुछ तो ऐसे हैं, जिनकी वजह से आधे से ज्यादा बार ट्रेन लेट होती है, जिसमें मौसम नहीं है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ट्रेन सबसे ज्यादा किस वजह से लेट होती हैं… </p>
<p>कुछ साल पहले रेलवे के प्रशिक्षण संस्थान IRITM की ओर से CAG की एक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर ट्रेनों के लेट होने को एक लेकर रिपोर्ट पब्लिश की थी. इसमें बताया गया था कि ट्रेन लेट होने के आमतौर पर 33 कारण बताए जाते हैं, जिसमें खराब मौसम भी है. खराब मौसम की वजह से भी काफी ट्रेनें लेट हो जाती हैं, लेकिन इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें 27 रेलवे के नियंत्रण वाले कारण हैं और इनमें 27 में से 6 कारण ऐसे हैं, जो 65-66 फीसदी ट्रेन लेट होने के लिए जिम्मेदार है. ऐसे में कहा जा सकता है कि 6 कारणों की वजह से ज्यादातर ट्रेन लेट होती हैं। </p>
<p><strong>ये हैं ट्रेन लेट करवाने वाले 6 कारण</strong></p>
<p><strong>आउट ऑफ पाथ- जब </strong>किसी ट्रेन को तय समय या तय ट्रैक पर नहीं चलाया जा पाता और उसे दूसरी ट्रेनों को रास्ता देने के लिए रोकना पड़ता है या दूसरे ट्रैक पर भेजना पड़ता है, तो देरी हो जाती है। </p>
<p><strong>इंजीनियरिंग- ट्रैक, पुल, </strong>सिग्नल या अन्य रेल ढांचे की मरम्मत और रखरखाव के काम के कारण ट्रेनों की गति कम करनी पड़ती है या उन्हें कुछ समय रोकना पड़ता है।  </p>
<p><strong>ट्रैफिक– किसी</strong> रूट पर ट्रेनों की संख्या बहुत अधिक होने या परिचालन दबाव की वजह से ट्रेनों को सिग्नल पर इंतजार करना पड़ता है। </p>
<p><strong>प्लान ब्लॉक- ट्रैक</strong> की मरम्मत या रखरखाव के लिए पहले से तय समय के लिए किसी रेल लाइन को बंद किया जाता है. इस दौरान गुजरने वाली ट्रेनों में देरी हो सकती है। </p>
<p><strong>जोन डिफरेंस- अगर</strong> कोई ट्रेन एक रेलवे जोन से दूसरे जोन में जाती है और पहले जोन से ही देर से पहुंचती है, तो अगला जोन भी उसी देरी के साथ ट्रेन को संचालित करता है। </p>
<p><strong>रीशेड्यूल- परिचालन</strong> कारणों, ट्रैफिक, रखरखाव या अन्य परिस्थितियों के कारण रेलवे ट्रेन का निर्धारित प्रस्थान समय बदल देता है, जिससे पूरी यात्रा का समय पीछे खिसक जाता है। </p>
<p><strong>बाकी किन कारणों से लेट होती है ट्रेन?</strong><br>
इनके अलावा खराब मौसम और चेन पुलिंग, असामाजिक तत्वों की गतिविधियां, आंदोलन, दुर्घटना, डीजल और इलेक्ट्रिक इंजन में खराबी, कोच और वैगन में खराबी, ओवरहेड बिजली लाइन, ग्रिड फेल होने,  सिग्नल में दिक्कत, रनओवर, लेवल क्रॉसिंग की दिक्कत आदि की वजह से भी कई बार ट्रेन लेट होती हैं। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>10 राज्यों में आंधी&#45;तूफान और भारी बारिश का अलर्ट, UP समेत कई इलाकों में बदलेगा मौसम</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक, बिजली और तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर जारी रहने के आसार है। IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मंगलवार सुबह जारी बुलेटिन में कहा कि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और पंजाब में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 14:45:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>राज्यों, में, आंधी-तूफान, और, भारी, बारिश, का, अलर्ट, समेत, कई, इलाकों, में, बदलेगा, मौसम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक, बिजली और तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर जारी रहने के आसार है। IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मंगलवार सुबह जारी बुलेटिन में कहा कि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और पंजाब में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है।</p>
<p>आईएमडी के अनुसार 4 से 7 अगस्त के दौरान जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद में तथा 4 से 9 अगस्त के दौरान हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में गरज-चमक, बिजली तथा 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक झोंकों के साथ व्यापक वर्षा होने की संभावना है।</p>
<p><strong>आज का मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
इसी प्रकार 4 से 6 अगस्त के दौरान हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब, 4 से 7 अगस्त तक पश्चिम उत्तर प्रदेश, 4 से 8 अगस्त तक पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा 8 और 9 अगस्त को पूर्वी राजस्थान में भी इसी तरह की मौसम गतिविधियां रहने का अनुमान है। उत्तर-पश्चिम भारत के शेष क्षेत्रों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना जताई गई है।</p>
<p>बुलेटिन के अनुसार 4 से 6 अगस्त के दौरान जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद और पश्चिम उत्तर प्रदेश, 4 से 9 अगस्त तक हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड, 4 अगस्त को हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब, 4 से 7 अगस्त तक पूर्वी उत्तर प्रदेश, 7 से 9 अगस्त तक पश्चिमी राजस्थान तथा 6 से 9 अगस्त तक पूर्वी राजस्थान में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है।</p>
<p>आईएमडी के अनुसार 6 से 9 अगस्त तक पश्चिम मध्य प्रदेश, 5 से 9 अगस्त तक पूर्वी मध्य प्रदेश, 7 से 8 अगस्त तक विदर्भ तथा 4 से 9 अगस्त तक छत्तीसगढ़ में गरज-चमक, बिजली और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ व्यापक वर्षा हो सकती है।</p>
<p><strong>UP का मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
इसके अलावा क्षेत्र के शेष हिस्सों में कहीं-कहीं वर्षा होने का अनुमान है, जबकि 6 से 8 अगस्त तक पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश तथा 4 से 9 अगस्त तक छत्तीसगढ़ में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना है।</p>
<p>पूर्वी भारत में 4 से 9 अगस्त तक अंडमान एंड निकोबार द्वीप समूह, गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम, 4 से 7 अगस्त तक झारखंड, 4 से 5 अगस्त तक बिहार तथा 5 से 9 अगस्त तक ओडिशा में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ व्यापक वर्षा होने का अनुमान है।</p>
<p>आईएमडी ने 4 से 7 अगस्त तक अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, 4 अगस्त तथा 6 अगस्त को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम, 4 से 7 अगस्त तक झारखंड, 5 से 6 अगस्त तक बिहार तथा 4 से 9 अगस्त तक ओडिशा में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई है। 5 अगस्त को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम तथा 4 अगस्त को बिहार में कहीं-कहीं बहुत भारी वर्षा हो सकती है।</p>
<p>इसके अलावा 4 से 9 अगस्त तक अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक झोंकों के साथ आंधी चलने की संभावना है। वहीं 4 अगस्त को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम में कहीं-कहीं अत्यंत भारी वर्षा होने का अनुमान है।</p>
<p><strong>नॉर्थईस्ट का बिगड़ेगा मौसम</strong><br>
पूर्वोत्तर भारत में 4 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश, 4 से 6 अगस्त तक असम और मेघालय तथा 4 से 9 अगस्त तक नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में गरज-चमक के साथ व्यापक वर्षा होने की संभावना है।</p>
<p>बुलेटिन के अनुसार 5 से 7 अगस्त तक अरुणाचल प्रदेश, 4 से 9 अगस्त तक असम और मेघालय, तथा 5 से 9 अगस्त तक नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है। 4 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश तथा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कहीं-कहीं बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है।</p>
<p>इसके अलावा आईएमडी ने 4 और 5 अगस्त को असम और मेघालय में अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा के साथ भारी से बहुत भारी वर्षा होने का पूर्वानुमान जारी किया है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>पूर्व डिप्टी CM उदयनिधि स्टालिन गिरफ्तार, एक्ट्रेस तृषा पर टिप्पणी के मामले में कार्रवाई</title>
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<description><![CDATA[ चेन्नई  कावेरी जल विवाद को लेकर सीएम विजय थलपति पर निशाना साधते-साधते एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने अभिनेत्री तृषा को लेकर विवाद टिप्पणी की थी। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। रैली के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने &#039;तृषा, तृषा&#039; के नारे … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 13:45:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>पूर्व, डिप्टी, उदयनिधि, स्टालिन, गिरफ्तार, एक्ट्रेस, तृषा, पर, टिप्पणी, के, मामले, में, कार्रवाई</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चेन्नई </strong></p>
<p>कावेरी जल विवाद को लेकर सीएम विजय थलपति पर निशाना साधते-साधते एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने अभिनेत्री तृषा को लेकर विवाद टिप्पणी की थी। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। रैली के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने 'तृषा, तृषा' के नारे लगाए। उदयनिधि ने इस पर अपना भाषण रोककर मुस्कुराते हुए कथित तौर पर ‘डबल मीनिंग’ अश्लील टिप्पणी की, जिसके बाद उनका राजनीतिक विरोध शुरू हो गया। उदयनिधि ने कहा है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं कहा था और ना ही किसी का नाम लिया था। अब कोर्ट ही सही गलत का फैसला करेगा। स्टालिन ने यह भी कहा कि इसका परिणाम भुगतने के लिए वह तैयार हैं।</p>
<p><strong>बीजेपी ने भी उदयनिधि की टिप्पणी की निंदा की<br>
तमिलनाडु की भाजपा इकाई के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुप</strong>ति ने 'एक्स' पर कहा कि उदयनिधि की कथित 'डबल मीनिंग' टिप्पणी ‘घृणित, अश्लील, आपत्तिजनक और शर्मनाक’ है। भाजपा नेता ने कहा, ''सचमुच, कोई बदमाश या चोर भी, जिसकी मां, पत्नी या बेटी हो, इतनी अभद्र भाषा में बात नहीं करेगा। कोई भी मां, पत्नी या बेटी ऐसी टिप्पणी करने वालों को माफ नहीं करेगी।' उन्होंने कहा था कि इस टिप्पणी के लिए उदयनिधि को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाना चाहिए।</p>
<p>तिरुपति ने कहा, ‘इस तरह की निम्नस्तरीय भाषा के लिए उदयनिधि स्टालिन को गिरफ्तार कर जेल भेजना तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के लिए मार्कंडेयन (द्रमुक विधायक) की गिरफ्तारी से अधिक श्रेयस्कर होगा। अब देखना होगा कि अदालतें इस टिप्पणी के लिए सजा देती हैं या जमानत मंजूर करती हैं।’ टीवीके विधायक रेवंत चरण ने भी इस बयान को घटिया बताया था और कहा थि कि जानबूझकर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि जब कावेरी मामले में उनके प्रोटेस्ट को सपोर्ट नहीं मिला तो वह घटिया भाषा का इस्तेमाल करने लगे।</p>
<p>बता दें कि यह विवाद तब सामने आया है जब कावेरी जल विवाद को लेकर तमिलनाडु सरकार कर्नाटक सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। विजय सरकार का आरोप है कि कर्नाटक, कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और कावेरी जल विनिमयन समिति के निर्देश के बाद भी उसके हिस्सा के पानी नहीं छोड़ रहा है। वहीं उदयनिधि स्टालिन ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री की उदासीनता के कारण तमिलनाडु को कावेरी का एक बूंद पानी भी नहीं मिला।</p>
<p>TVK ने DMK नेता की आपत्तिजनक टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की थी. NDTV से बात करते हुए TVK के अमेरिका नारायणन ने बदले की भावना के आरोप को खारिज करते हुए कहा, उदयनिधि स्टालिन को मुख्यमंत्री विजय या TVK के खिलाफ बोलने के लिए नहीं, बल्कि एक महिला का अपमान करने के लिए गिरफ्तार किया गया है। </p>
<p>TVK नेता ने उदयनिधि पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपना नाम बदलकर "वल्गर-निधि कर लेना चाहिए. सोमवार को तंजावुर में कावेरी विवाद को लेकर एक विरोध प्रदर्शनमें उदयनिधि ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि तमिलनाडु को कावेरी का एक बूंद पानी भी नहीं मिला, जबकि मुख्यमंत्री इस मामले को लेकर बेपरवाह बने रहे हैं। </p>
<p>यह रैली तब विवादों में घिर गई जब भीड़ में से किसी ने 'त्रिशा, त्रिशा' के नारे लगाए. उदयनिधि ने अपना भाषण रोककर एक कुटिल मुस्कान के साथ आपत्तिजनक और दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी की. उनकी इस टिप्पणी के बाद भारी राजनीतिक विरोध शुरू हो गया। </p>
<p>इस टिप्पणी की कड़ी आलोचना करते हुए TVK ने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) को पत्र लिखा और DMK नेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. पार्टी ने उदयनिधि के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है. TVK ने NCW को दी गई अपनी शिकायत में कहा है, भीड़ के नारों से प्रेरित होकर, उदयनिधि स्टालिन ने एक सेलेब्रिटी को निशाना बनाते हुए आपत्तिजनक दोहरे अर्थ वाली और अश्लील टिप्पणियां कीं. शिकायत में आगे कहा गया है कि एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक मंच से इस तरह की भाषा का इस्तेमाल सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं को वस्तु समझने और उनके मौखिक उत्पीड़न को सामान्य बनाता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>इनकम टैक्स पर बड़ा अपडेट! लोकसभा में संशोधन बिल पेश करेंगी वित्त मंत्री, बैंकिंग से जुड़े अहम फैसलों की भी तैयारी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली संसद में आज टैक्स से लेकर डिजिटल बैंकिंग तक कई बड़े फैसलों की तैयारी है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में कई अहम बिल पेश करने वाली हैं.  संसद के मौजूदा मॉनसून सत्र में मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान लोगों की नजर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर रहेगी, जो टैक्स और … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 12:00:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>इनकम, टैक्स, पर, बड़ा, अपडेट, लोकसभा, में, संशोधन, बिल, पेश, करेंगी, वित्त, मंत्री, बैंकिंग, से, जुड़े, अहम, फैसलों, की, भी, तैयारी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>संसद में आज टैक्स से लेकर डिजिटल बैंकिंग तक कई बड़े फैसलों की तैयारी है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में कई अहम बिल पेश करने वाली हैं.  संसद के मौजूदा मॉनसून सत्र में मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान लोगों की नजर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर रहेगी, जो टैक्स और डिजिटल बैंकिंग से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश करेंगी. बताया जा रहा है कि सबसे पहले वित्त मंत्री Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पेश करेंगी. इस बिल के जरिए पेमेंट सिस्टम, इनकम टैक्स और फाइनेंस एक्ट से जुड़े कुछ कानूनों में बदलाव का प्रस्ताव है। </p>
<p>सरकार का कहना है कि बदलती जरूरतों और नई व्यवस्था के मुताबिक इन कानूनों को अपडेट करना जरूरी है. वित्त मंत्री सदन में ये भी बताएंगी कि सरकार को Income-tax (Amendment) Ordinance, 2026 क्यों लाना पड़ा और इसे तुरंत लागू करने की जरूरत क्यों पड़ी। </p>
<p><strong>बैंकिंग रिकॉर्ड के डिजिटलाइजेशन से जुड़ा बिल </strong><br>
आज लोकसभा में सदन में Bankers' Books Evidence Bill, 2026 पर भी चर्चा होगी. इस बिल का मकसद बैंकों के रिकॉर्ड से जुड़े पुराने कानूनों को डिजिटल दौर के हिसाब से बदलना है. इससे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और डिजिटल बैंकिंग से जुड़े दस्तावेजों को कानूनी प्रक्रिया में और स्पष्ट तरीके से इस्तेमाल किया जा सकेगा। </p>
<p><strong>बजट से ज्‍यादा खर्च… मिल सकती है कानूनी मंजूरी </strong><br>
इसके अलावा साल 2022-23 के अतिरिक्त सरकारी खर्च (Excess Grants) पर भी चर्चा होगी. इसका मतलब है कि सरकार ने कुछ मदों में संसद से मंजूर राशि से ज्यादा खर्च किया था. अब उस अतिरिक्त खर्च को संसद से मंजूरी दिलाने के लिए चर्चा होगी. इसके बाद सरकार Appropriation (No. 3) Bill, 2026 भी पेश करेगी, ताकि उस अतिरिक्त खर्च को कानूनी मंजूरी मिल सके। </p>
<p>MSME पर लाए गए बिल पर भी चर्चा <br>
लोकसभा में आज राज्यसभा से पारित MSME Development (Amendment) Bill, 2026 का संदेश भी रखा जाएगा. इसके अलावा लोक लेखा समिति (PAC), सरकारी आश्वासन समिति और आवासन एवं शहरी कार्य संबंधी संसदीय समिति अपनी रिपोर्ट सदन में पेश करेंगी। </p>
<p>सदन में वाणिज्य, ग्रामीण विकास और कृषि मंत्रालय से जुड़ी संसदीय समितियों की सिफारिशों पर सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की है, इसकी जानकारी भी संबंधित मंत्री देंगे। </p>]]> </content:encoded>
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<title>लिव&#45;इन पार्टनर को पत्नी जैसे अधिकार, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; 498A सिर्फ शादी तक सीमित नहीं</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे लोगों को लेकर अहम फैसला दिया है. उच्चतम न्यायालय ने लिव इन पार्टनर को अपने साथी या उसके परिजनों के द्वारा उत्पीडन के मामले में पत्नी वाला अधिकार दिया है. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए, जो पति … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 10:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>लिव-इन, पार्टनर, को, पत्नी, जैसे, अधिकार, सुप्रीम, कोर्ट, का, बड़ा, फैसला, 498A, सिर्फ, शादी, तक, सीमित, नहीं</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट ने लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे लोगों को लेकर अहम फैसला दिया है. उच्चतम न्यायालय ने लिव इन पार्टनर को अपने साथी या उसके परिजनों के द्वारा उत्पीडन के मामले में पत्नी वाला अधिकार दिया है. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए, जो पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता से संबंधित है, अब लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले पार्टनर्स पर भी लागू होगी। </p>
<p> सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्रूरता के साथ बचाव के अधिकार को सिर्फ शादी तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए. कानून को बदलते सामाजिक हालातों के साथ आगे बढ़ना चाहिए. लिव इन में रहने वाला पार्टनर चाहे पुरुष है या स्त्री, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, ये अलग-अलग रूपों में भी हो सकते हैं. 498-ए के तहत सुरक्षा पाने का अधिकार शादी में रहने वाले लोगों की तरह इन्हें भी होना चाहिए। </p>
<p>बता दें कि आईपीसी की धारा 498ए के तहत पति या पति के परिजनों और रिश्तेदारों द्वारा पत्नी या घर की महिला के साथ क्रूरता करने पर तीन साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है. क्रूरता का मतलब है कि महिला के साथ ऐसा व्यवहार किया जाए जिससे महिला आत्महत्या करने को मजबूर हो जाए या उसे गहरा शारीरिक या मानसिक नुकसान पहुंचे, या संपत्ति या दहेज जैसी गैरकानूनी मांग के लिए परेशान किया जाए। ऐसी किसी भी परिस्थिति में महिला कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है और न्याय मांग सकती है. ऐसी ही परिस्थितियों का लाभ अब लिव इन में रहने वाले लोगों को भी मिलेगा। </p>
<p><strong>'लिव-इन में रहने वाली महिलाओं को भी कानूनी सुरक्षा का अधिकार'</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख का सीधा मतलब यह है कि अगर कोई महिला लंबे समय तक किसी पुरुष के साथ पति-पत्नी की तरह रह रही है और उसे रिश्ते में प्रताड़ना या क्रूरता का सामना करना पड़ता है, तो मामले की परिस्थितियों के आधार पर उसे कानूनी राहत मिल सकती है. अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ रिश्ते को ‘लिव-इन’ कह देने से महिला के साथ होने वाली कथित क्रूरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। </p>
<p><strong>क्या है धारा 498A?</strong><br>
धारा 498A का इस्तेमाल आम तौर पर शादीशुदा महिला को पति या उसके रिश्तेदारों की ओर से होने वाली क्रूरता और उत्पीड़न से बचाने के लिए किया जाता है. हालांकि, लिव-इन रिलेशनशिप में इस धारा के इस्तेमाल का सवाल कई बार कानूनी बहस का विषय रहा है. ऐसे मामलों में अदालत को रिश्ते की प्रकृति, दोनों लोगों के साथ रहने की स्थिति और सामने आए आरोपों समेत कई पहलुओं को देखना होता है। </p>
<p>सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब देश में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर सामाजिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा बढ़ी है. आज कई लोग शादी के बजाय साथ रहने का विकल्प चुनते हैं. ऐसे रिश्तों में अगर किसी महिला को हिंसा, मानसिक प्रताड़ना या गंभीर दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है, तो उसके अधिकारों और कानूनी सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। </p>
<p><strong>शादी न होने की वजह से सुरक्षा से नहीं किया जा सकता वंचित</strong><br>
अदालत की टिप्पणी का एक अहम पहलू यह भी है कि किसी मामले में कानून लागू करने का फैसला केवल रिश्ते के नाम के आधार पर नहीं किया जा सकता. हर मामले की परिस्थितियों को अलग-अलग देखना जरूरी होगा. यानी हर लिव-इन रिलेशनशिप में धारा 498A अपने आप लागू नहीं होगी, लेकिन अगर मामले में कानून के तहत जरूरी परिस्थितियां मौजूद हैं तो महिला को सिर्फ शादी नहीं होने की वजह से सुरक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। </p>
<p>कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी से यह संदेश जाता है कि रिश्ते की कानूनी स्थिति के साथ-साथ उसमें शामिल महिला की सुरक्षा और उसके साथ होने वाले व्यवहार को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए. हालांकि, किसी भी मामले में धारा 498A लागू होगी या नहीं, इसका फैसला संबंधित मामले के तथ्यों और कानूनी परिस्थितियों के आधार पर ही किया जाएगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>भारत का ₹45,000 करोड़ का मेगा रेल प्लान, चीन&#45;पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा तक मजबूत होगी कनेक्टिविटी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्‍ली  भारत अपनी सीमाओं को एक ऐसे मजबूत कवच से सुरक्षित करने जा रहा है, जिससे न केवल सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों की जिंदगी बदलेगी, बल्कि भारतीय सेना भी बड़ी आसानी और कम समय में टैंक और तोपें बॉर्डर पर तैनात कर पाएगी. ब्‍लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत चीन, … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 09:45:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>भारत, का, ₹45, 000, करोड़, का, मेगा, रेल, प्लान, चीन-पाकिस्तान, और, बांग्लादेश, सीमा, तक, मजबूत, होगी, कनेक्टिविटी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्‍ली</strong><br>
 भारत अपनी सीमाओं को एक ऐसे मजबूत कवच से सुरक्षित करने जा रहा है, जिससे न केवल सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों की जिंदगी बदलेगी, बल्कि भारतीय सेना भी बड़ी आसानी और कम समय में टैंक और तोपें बॉर्डर पर तैनात कर पाएगी. ब्‍लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश से सटे बेहद संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में अपना रेल नेटवर्क मजबूत करेगा. इसके लिए ₹45,000 करोड़ (5 अरब डॉलर) की भारी-भरकम राशि खर्च की जाएगी। </p>
<p>सीमावर्ती इलाकों में रेलवे नेटवर्क को मजबूत बनाने को 18 से 24 महीनों के भीतर ही यह बड़ी धनराशि खर्च की जाएगी. पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम और पूर्वोत्तर के बाकी राज्यों में नई रेलवे लाइनें बिछाई जाएंगी, प्लेटफॉर्म्स को आधुनिक बनाया जाएगा और नेटवर्क को दोहरे इस्तेमाल के लायक बनाया जाएगा. नाम न छापने की शर्त पर सूत्रों ने बताया कि प्रस्‍तावित पांच अरब डॉलर सीमावर्ती राज्यों के लिए प्रस्तावित कार्यक्रम अगले दो वर्षों में रेलवे के लिए निर्धारित कुल बुनियादी ढांचा खर्च का करीब 22% है. इससे इस योजना के महत्‍व का अंदाजा लगाया जा सकता है। </p>
<p><strong>सेना और आम जनता, दोनों को फायदा</strong><br>
इस रणनीतिक प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इसे ‘डुअल-यूज़ इंफ्रास्ट्रक्चर’ (dual-use infrastructure) यानी दोहरे इस्तेमाल के तौर पर तैयार किया जा रहा है. इससे हिमालय के दुर्गम इलाकों, लद्दाख, सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वोत्तर में किसी भी तनाव के वक्त सेना को भारी हथियार, राशन और सैनिकों की तैनाती में लगने वाला समय घटकर आधा रह जाएगा. इसके अलावा सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को हर मौसम में कनेक्टिविटी मिलेगी. इससे व्यापार, रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। </p>
<p><strong>पड़ोसियों की मजबूत घेराबंदी</strong><br>
भारत के चीन, पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश के साथ संबंध अब काफी संवेदनशील दौर में हैं. चीन के साथ एलएसी (LAC) पर तनाव अब न हो, लेकिन ड्रैगन की चालबाजियां जारी हैं. पाकिस्तान के साथ सीमा पर तनातनी हमेशा ही रहती है. अब तो 2024 के बाद बांग्लादेश के राजनीतिक हालात ने भी पूर्वी सीमा पर नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. ऐसे में भारत अपनी सैन्‍य चौकियों तक हर मौसम में काम करने वाला मजबूत रेल नेटवर्क बनाकर पड़ोसियों को कड़ा संदेश देना चाहता है। </p>
<p><strong>ड्रैगन की तैयारियों का भी मुंहतोड़ जवाब</strong><br>
चीन ने साल 2017 के डोकलाम विवाद के बाद से तिब्बत और भारतीय सीमाओं के पास तेजी से हवाई अड्डे, हेलिपैड और रेलवे लाइनें बनाई हैं. इससे उसकी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को तेजी से मूवमेंट करने में आसानी हुई है. भारत की यह ₹45,000 करोड़ की योजना सीधे तौर पर चीन की इसी चुनौती से निपटने की तैयारी है. भारत कश्मीर में दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल बना चुका है। </p>
<p>पूर्वोत्तर क्षेत्र में पिछले एक दशक के दौरान सरकार ने करीब 1,700 किलोमीटर नई रेलवे लाइनें बिछाई हैं. भारत ने अपने पूर्वोत्तर क्षेत्रों में हवाई बुनियादी ढांचे को भी दोबारा सक्रिय किया है. इनमें कुछ ऐसे एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं जो 1962 से निष्क्रिय थे और अब हेलीकॉप्टरों तथा सैन्य विमानों के इस्तेमाल के लिए तैयार किए जा रहे हैं. अब इस नए मेगा प्रोजेक्ट से भारत की सीमाएं और भी अभेद्य होने जा रही हैं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>होर्मुज संकट के बीच भारत को बड़ी राहत, ओमान बना संकटमोचक; अब आसानी से आएंगे तेल और LPG टैंकर</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  ईरान-अमेरिका युद्ध का सबसे अहम मुद्दा बना रहा – स्ट्रेट ऑफ होर्मुज. ये वो रास्ता है, जहां से दुनिया का 20 फीसदी तेल-गैस की ट्रेडिंग होती है. इस मामले को लेकर कई बार बैठकों में बातचीत की गई, लेकिन इसका कोई समाधान नहीं निकल सका. अमेरिका इसे मुफ्त पैसेज का रास्ता मानता है … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 09:45:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>होर्मुज, संकट, के, बीच, भारत, को, बड़ी, राहत, ओमान, बना, संकटमोचक, अब, आसानी, से, आएंगे, तेल, और, LPG, टैंकर</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p> ईरान-अमेरिका युद्ध का सबसे अहम मुद्दा बना रहा – स्ट्रेट ऑफ होर्मुज. ये वो रास्ता है, जहां से दुनिया का 20 फीसदी तेल-गैस की ट्रेडिंग होती है. इस मामले को लेकर कई बार बैठकों में बातचीत की गई, लेकिन इसका कोई समाधान नहीं निकल सका. अमेरिका इसे मुफ्त पैसेज का रास्ता मानता है और ईरान इस पर अपना कब्जा चाहता है, ऐसे में किसी एक जगह पर बात बन नहीं पा रही थी. अब ओमान इस परिस्थिति में संकटमोचक बनकर उभरा है. उसके दिए हुए प्रस्ताव पर ईरान सकारात्मक रुख दिखा रहा है और अगर वो मान गया तो एक बड़ा टंटा खत्म हो जाएगा। </p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत अपने अंतिम चरण में है. सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए की रिपोर्ट की मानें तो अरागची ने रविवार को कैबिनेट की बैठक में कहा कि बातचीत आगे बढ़ी है और अब यह अंतिम रूप लेने की ओर है. ये सिर्फ खाड़ी देशों नहीं बल्कि एशिया के सभी देशों के लिए उम्मीद की तरह है, जो अपने जोखिम पर यहां से तेल और गैस के टैंकर मंगा रहे थे. डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर हमले टालने के बाद ये इस युद्ध की सबसे बड़ी पॉजिटिव अपडेट है। </p>
<p><strong>ईरान-ओमान के बीच होर्मुज को लेकर बनी बात?</strong><br>
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट की मानें तो सरकारी आईआरआईबी टीवी को दिए एक इंटरव्यू में ईरान-ओमान बातचीत के बारे में विस्तार से बताते हुए ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने कहा कि दोनों देशों के बीच किसी समझौते पर पहुंचना जलमार्ग के फिर से खुलने या बंद रहने से संबंधित नहीं है. बघाई ने कहा कि ईरान और ओमान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ‘ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम’ के तहत एक नया रास्ता तय करने पर काम कर रहे हैं, जो दोनों पक्षों के संप्रभु अधिकारों के साथ-साथ ईरान के राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को भी सुनिश्चित कर सके। </p>
<p><strong>अमेरिका को लेकर सख्त हैं तेहरान के तेवर </strong><br>
ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री सैयद माजिद एब्न अल-रेजा ने रविवार को कहा कि ईरान अमेरिका की की हर धमकी को असली मानता है और उसका जवाब देने के लिए तैयार है. वो इसे सिर्फ मनोवैज्ञानिक युद्ध मानने से इनकार करता है. अल-रेजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा-</p>
<p>    ‘हम न तो हैरान होंगे और न ही चुपचाप बैठे रहेंगे. हम धमकियों का इस्तेमाल अपनी तैयारी बढ़ाने, अपनी प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने और अपनी ताकत बढ़ाने के आधार के तौर पर करते हैं। </p>
<p>यह बात उन्होंने तब कही जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वे ईरान पर नए हमले न करने पर सहमत हो गए हैं. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ संयुक्त हमले किए जाने के बाद तेहरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ऐसा घेरा है कि उसे छुड़ाने में अमेरिका भी परेशान है। </p>
<p><strong>ओमान का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर क्या है प्लान?</strong></p>
<p>    ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर पहले यह सुझाव दिया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रबंधन ओमान के साथ मिलकर किया जाए और वहां से गुजरने वाले जहाजों से सेवा शुल्क लिया जाए। </p>
<p>    उस वक्त ओमान ऐसे किसी टैक्स के बिल्कुल खिलाफ था और इसे अंतरराष्ट्रीय जल मानकर फ्री पैसेज की बात कह रहा था. इस बार ओमान के नए प्रस्ताव में भी इसी तरह की व्यवस्था का जिक्र है, हालांकि इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि शुल्क देना पूरी तरह स्वैच्छिक होगा। </p>
<p><strong>भारत को कैसे होगा फायदा?</strong><br>
ओमान ने इस समुद्री मार्ग को लेकर जो प्रस्ताव रखा है, उसके मुताबिक इस पर केवल ईरान का नियंत्रण नहीं रहेगा. अगर कोई व्यवस्था होती है तो दोनों देश मिलकर इस व्यवस्था को देखेंगे. ईरान ने पहले भी ये बात कही है कि वो ऐसी किसी भी व्यवस्था में अपने दोस्तों को प्राथमिकता देगा. ईरान के साथ भारत के रिश्ते बुरे नहीं हैं लेकिन ओमान के साथ भारत के रिश्ते ऐतिहासिक और घनिष्ठ रहे हैं. ऐसे में स्वाभाविक है कि भारत होर्मुज में अगर ओमान की सहमति के कोई भी सिस्टम लागू होता है, उसका फायदा जरूर मिलेगा. पिछले दिनों जब होर्मुज में हुए जहाजों पर हमले में भारतीय नाविक फंसे थे, तो ओमान की सेना ने उन्हें निकालने में मदद की थी. ऐसे में इस संबंध की घनिष्ठता समझी जा सकती है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>EPFO Big Update: ₹25,000 बेसिक सैलरी वालों को भी मिलेगा ज्यादा पेंशन का फायदा? 10 साल पुराना नियम बदलने की तैयारी</title>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 09:45:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>EPFO, Big, Update:, ₹25, 000, बेसिक, सैलरी, वालों, को, भी, मिलेगा, ज्यादा, पेंशन, का, फायदा, साल, पुराना, नियम, बदलने, की, तैयारी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>ईपीएफओ (कर्मचारी भविष्य संगठन) से जुड़ी बड़ी खबर आ गई है. वित्त मंत्रालय के द्वारा ईपीएफ के तहत सैलरी लीमिट यानी वेतन सीमा (Wage Ceiling) को 15000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इससे 25,000 रुपये तक मंथली सैलरी पाने वाले अधिक कर्मचारी EPF और पेंशन योजना के दायरे में आएंगे. हालांकि, यह बदलाव अभी लागू नहीं हुआ है. इसे लागू करने से पहले केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलना बाकी है। </p>
<p>EPFO के नियमों के तहत जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 15,000 रुपये तक होती है, उनके लिए पीएफ (PF) में कंट्रीब्यूशन अनिवार्य रखा हुआ था. इससे अधिक बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों के लिए यह नियम अनिवार्य नहीं होता. हालांकि, वित्त मंत्रालय ने इस लीमिट को बढ़ाकर 25,000 रुपये रखने का फैसला इसलिए लिया ज्यादा नौकरीपेशा लोग EPF और पेंशन के दायरे में आ सकें। </p>
<p><strong>30,000 करने का था प्लान</strong><br>
वित्त मंत्रालय ने EPFO की सैलरी लीमिट बढ़ाने के प्रोपोजल को मंजूरी दे दी है. इसके तहत मौजूदा 15,000 रुपये की जगह 25,000 रुपये प्रति माह तक की सैलरी वाले कर्मचारियों को पीएफ और पेंशन योजना के दायरे में लाने की तैयारी तेज हो गई है। </p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआत में इस लीमिट को 30,000 रुपये तक बढ़ाने पर भी विचार किया गया था. लेकिन आखिरकार वित्त मंत्रालय ने 25,000 रुपये की नई सीमा को मंजूरी दी. कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद सरकार इसकी लागू होने की तारीख का ऐलान करेगी. इससे ज्यादा नौकरीपेशा कर्मचारियों को EPF और पेंशन का फायदा मिल सकेगा। </p>
<p><strong>कब तक लागू होगा ईपीएफओ का नया नियम?</strong><br>
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद भी नया नियम तुरंत लागू होने की संभावना नहीं है. इसकी वजह यह है कि कंपनियों और नियोक्ताओं को अपने पेरोल सिस्टम, कंप्लायंस प्रोसेस और दूसरे जरूरी कामों में बदलाव करने के लिए समय चाहिए होगा. इसलिए सरकार नए नियम लागू करने से पहले कुछ समय का ट्रांजिशन पीरियड दे सकती है। </p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, नई EPF सैलरी लीमिट 1 अप्रैल 2027 से लागू की जा सकती है. हालांकि, इसकी अंतिम तारीख कैबिनेट की मंजूरी और कंपनियों की तैयारियों को देखते हुए तय की जाएगी. बता दें कि EPFO की सैलरी लीमिट में आखिरी बार सितंबर 2014 में बदलाव हुआ था, जब इसे 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया था। </p>
<p><strong>सरकार और कंपनी कितना करेगी पीएफ कंट्रीब्यूशन?</strong><br>
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अगर EPFO की सैलरी लीमिट बढ़ाती है, तो उसका फाइनेंशियल बोझ भी बढ़ सकता है. कर्मचारी के पीएफ और पेंशन फंड में कंपनी के साथ-साथ सरकार भी कंट्रीब्यूशन देती है. कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत नियोक्ता (Employer) बेसिक सैलरी का 8.33% और केंद्र सरकार 1.16% का योगदान करती है. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने EPS के लिए 11,144 करोड़ रुपये का बजट रखा है। </p>
<p><strong>किन कर्मचारियों को मिलेगा बड़ा फायदा?</strong><br>
यह नियम फिलहाल सिर्फ उन कंपनियों पर लागू होता है, जहां 20 या उससे ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं. इससे छोटे संस्थान चाहें तो खुद से ही EPFO से जुड़ सकते हैं, लेकिन उनके लिए यह जरूरी नहीं है. इसके अलावा यह प्रोसेस मुख्य रूप से ऑर्गेनाइज्ड प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए है यानी ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर वाले कर्मचारियों को इससे बड़ी फायदा है. केंद्र सरकार के कर्मचारी अलग पेंशन व्यवस्था के तहत आते हैं, इसलिए उन पर EPS के नियम लागू नहीं होते। </p>
<p><strong>पहले क्यों सरकार ने टाला था ये फैसला?</strong><br>
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जुलाई के महीने में सरकार ने इस प्रपोजल पर पहले अंतिम फैसला टाल दिया था. इसकी बड़ी वजह यह थी कि सैलरी लीमिट बढ़ने से कंपनियों पर PF का ज्यादा फाइनेंशियल बोझ बढ़ सकता है. साथ ही कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी पर भी असर पड़ने की आशंका है. इसके अलावा सरकार अभी इस बदलाव के आर्थिक असर का भी एनालिसिस रही थी. यही कारण है कि इस प्रस्ताव को तब आगे नहीं बढ़ाया गया था। </p>]]> </content:encoded>
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<title>‘हिंदुत्व से जुड़ रहीं बेटियां ही निशाने पर क्यों?’ कंगना रनौत का नया बयान, धर्म परिवर्तन पर उठाए सवाल</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद कंगना रनौत इन दिनों अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में बनी हुई हैं. हाल ही में कंगना ने जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल हुए Gen Z और युवा पीढ़ी को &#039;गटरछाप&#039; कहा था. अब कंगना ने हीरोइनों के शादी के लिए धर्म बदलने पर तंज कसा है. साथ ही … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 03 Aug 2026 18:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>‘हिंदुत्व, से, जुड़, रहीं, बेटियां, ही, निशाने, पर, क्यों’, कंगना, रनौत, का, नया, बयान, धर्म, परिवर्तन, पर, उठाए, सवाल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद कंगना रनौत इन दिनों अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में बनी हुई हैं. हाल ही में कंगना ने जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल हुए Gen Z और युवा पीढ़ी को 'गटरछाप' कहा था. अब कंगना ने हीरोइनों के शादी के लिए धर्म बदलने पर तंज कसा है. साथ <strong>ही एक्ट्रेस ने हिंदू बेटियों के लिए भी इक्वालिटी की मांग की है। </strong></p>
<p><strong>कंगना ने किसपर किया वार?</strong><br>
कंगना ने वीडियो शेयर करके कहा- मैं पार्लियामेंट के लिए लेट हो रही हूं, फिर भी मैंने सोचा कि मैं अपने विचार और फीलिंग्स आप लोगों के साथ शेयर करूं. आज सुबह मैं कुछ पोस्ट कर रही थी. तब मैंने देखा कि हमारी फिल्म इंडस्ट्री की एक बहन हैं…हालांकि, हमने फिल्म इंडस्ट्री में बहुत सी ऐसी हिंदू बहन-बेटियों को करीब से देखा और जाना है, जो हिंदू तो हैं, लेकिन पॉलिटिक्स और धर्म को लेकर उनकी कोई विचारधारा नहीं है। </p>
<p>'यूथ में खासकर ऐसा होता है, वो बहुत ही न्यूट्रल हैं. लेकिन जैसे ही वो इस्लामिस्ट के संपर्क में आती हैं, भले ही दोस्ती हो, शादी हो या फिर संबंध हो तो उनकी सोच इतनी डिफाइन हो जाती है. इतनी कट्टरपंथी वो बन जाती हैं. इसमें कुछ बुराई नहीं है, क्योंकि संविधान आपको ये आजादी देता है कि आप अपनी मर्जी से कोई भी धर्म या आईडियोलॉजी अपना सकते हैं. लेकिन समस्या ये है कि जब हिंदू बेटियों की बात आती है तो सोच बदल जाती है। </p>
<p><strong>कन्वर्जन पर कंगना ने कही ये बात</strong><br>
कंगना ने आगे कहा- अब मैं खुद को डिफेंड नहीं करूंगी कि मैंने आइटम सॉन्ग किए. मैं हमेशा से एक मॉडरेट हिंदू थी. आज अगर मैंने खुद को डिफेंड कर लिया तो न जाने कितनी बेटियां, जिसे कहते हैं लीप नहीं ले पाएंगी. मैं कहूंगी कि हां मैं मॉडरेट हिंदू थी. मुझपर आज तंज कसा जाता है कि तुम कबसे संघी बन गईं. हां, मुझे संघी बनना है. मुझे बीजेपी और आरएएस की आईडियोलॉजी बनना है. मुझे कंवर्ट होना है. मैं क्यों नहीं कंवर्ट हो सकती?</p>
<p>'ये जो दोगलापन है समाज का जब हिंदू लड़कियों की बात आती है, तो जो समाज के ठेकेदार हैं, वो अग्निपरीक्षा के लिए हमारी 10 साल पुरानी चीजें ले आते हैं कि तुम तो पार्टी करती थीं, तुम तो ये करती थीं, ठीक मैं सबकुछ करती थी, लेकिन आज मुझे भी कंवर्ट होना है. मुझे डिफाइन और जागृत हिंदू बनना है. तो मेरे लिए ये रास्ता क्यों बंद है? मेरे लिए ये दोगले विचार नहीं चलेंगे. मुझे लगता है कि हमारी बेटियों को भी वो आजादी होनी चाहिए. अगर हिंदू बेटियों को डिफाइन हिंदू में कंवर्ट होना है तो वो क्यों नहीं हो सकतीं?</p>
<p>कंगना रनौत का वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. फैंस कंगना के बेबाक अंदाज की तारीफ कर रहे हैं. कुछ फैंस उन्हें शेरनी का टैग दे रहे हैं. फैंस का कहना है कि उनमें आवाज उठाने का जज्बा है. वैसे कंगना के विचारों पर आपकी क्या राय है?</p>]]> </content:encoded>
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<title>हेट स्पीच केस में अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से राहत, FIR की मांग खारिज</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ हेट स्पीच के आरोपों में एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है।  जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सीपीएम नेता वृंदा करात की … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 03 Aug 2026 17:45:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>हेट, स्पीच, केस, में, अनुराग, ठाकुर, और, प्रवेश, वर्मा, को, सुप्रीम, कोर्ट, से, राहत, FIR, की, मांग, खारिज</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ हेट स्पीच के आरोपों में एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। </p>
<p>जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सीपीएम नेता वृंदा करात की तरफ से दायर रिव्यू पिटीशन को खारिज करते हुए अपने पहले के फैसले को बरकरार रखा. याचिका में अनुरोध किया गया था कि दोनों नेताओं के खिलाफ कथित भड़काऊ भाषणों के मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। </p>
<p>इससे पहले अप्रैल 2026 में भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में दोनों नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को ठुकरा दिया था. अब पुनर्विचार याचिका भी खारिज होने के बाद दोनों नेताओं को मिली राहत बरकरार रहेगी। </p>
<p>यह मामला वर्ष 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान दिए गए कथित भाषणों से जुड़ा है. आरोप था कि अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के बयानों से नफरत फैलाने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश हुई थी। </p>
<p>हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी. अब इस मामले में शीर्ष अदालत का पहले दिया गया आदेश ही प्रभावी रहेगा। </p>
<p><strong>वृंदा करात भागी-भागी सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं तो जजों ने उल्टे पांव लौटाया</strong></p>
<p>माकपा नेता वृंदा करात हेट स्पीच के एक मामले में बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को दी गई क्लीन चिट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं। सुप्रीम अदालत ने यह कहकर उन्हें लौटा दिया कि फैसले में कोई गलती नहीं है। ऐसे में दोबारा विचार करने की जरूरत नहीं है। यह मामला 2020 में CAA का विरोध करने वालों के खिलाफ अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के विवादित <strong>भाषण देने के मामले से जुड़ा था।</strong></p>
<p><strong>वृंदा करात ने की आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग</strong></p>
<p>   एक रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने हेट स्पीच के इस मामले में कहा कि 29 अप्रैल को सुनाए गए फैसले में कोई गलती नहीं थी। बेंच ने CPM की वृंदा करात की ओर से दायर रिव्यू पिटीशन (पुनर्विचार याचिका) को खारिज कर दिया। करात ने एक समुदाय के खिलाफ कथित तौर पर नफरत भरे भाषण देने के लिए इन नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने और आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की थी।</p>
<p>    सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश 29 जुलाई को इन-चैंबर कार्यवाही में पारित किया गया था, लेकिन हाल ही में इसे कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। बेंच ने रिव्यू पिटीशन पर ओपन कोर्ट में सुनवाई की अनुमति देने से भी इनकार कर दिया।</p>
<p>
एक समुदाय के खिलाफ कथित तौर पर नफरत भरे भाषण देने के लिए अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने और आपराधिक मुकदमा चलाया जाए।</p>
<p><strong>वृंदा करात, माकपा ने अपनी याचिका में की मांग</strong></p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट बोला-खारिज की जाती है रिव्यू पिटीशन</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'मौजूदा रिव्यू पिटीशन को ओपन कोर्ट में लिस्ट करने की अर्जी खारिज की जाती है। हमने रिव्यू पिटीशन और उसके समर्थन में दिए गए आधारों को देखा है। हमें आदेश में कोई गलती नहीं मिली और न ही ऐसी कोई स्पष्ट गलती दिखी जिसके लिए उस पर दोबारा विचार करने की जरूरत हो। इसलिए, रिव्यू पिटीशन खारिज की जाती है।'</p>
<p>हमें आदेश में कोई गलती नहीं मिली और न ही ऐसी कोई स्पष्ट गलती दिखी जिसके लिए उस पर दोबारा विचार करने की जरूरत हो। इसलिए, रिव्यू पिटीशन खारिज की जाती है।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट<br>
सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में दिए आदेश में क्या कहा था</strong></p>
<p>    दोनों नेताओं के भाषणों की सामग्री की जांच करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में कहा था कि नेताओं के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है और दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया था जिसमें उन्हें क्लीन चिट दी गई थी।</p>
<p>    सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'हाई कोर्ट ने स्वतंत्र रूप से मामले की जांच करने के बाद यह माना है कि जिन भाषणों की बात हो रही है, उनसे किसी संज्ञेय अपराध के होने का पता नहीं चलता।'</p>
<p>    सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा- 'हाई कोर्ट ने पाया कि ये बयान किसी खास समुदाय के खिलाफ नहीं थे और न ही इनसे हिंसा या सार्वजनिक अव्यवस्था भड़की। रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री कथित भाषण, 26 फरवरी 2020 को ट्रायल कोर्ट में सौंपी गई स्टेटस रिपोर्ट और निचली अदालतों द्वारा दर्ज किए गए कारण शामिल हैं। इन पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद हम इस निष्कर्ष से सहमत हैं कि कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है।'</p>
<p>हाई कोर्ट ने स्वतंत्र रूप से मामले की जांच करने के बाद यह माना है कि जिन भाषणों की बात हो रही है, उनसे किसी संज्ञेय अपराध के होने का पता नहीं चलता। कोर्ट ने पाया कि ये बयान किसी खास समुदाय के खिलाफ नहीं थे और न ही इनसे हिंसा या सार्वजनिक अव्यवस्था भड़की।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट<br>
वृंदा करात ने अपनी रिव्यू याचिका में क्या कहा था</strong></p>
<p>    करात ने दिल्ली हाई कोर्ट और ट्रायल कोर्ट द्वारा अपनी याचिका खारिज किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने दोनों नेताओं द्वारा दिए गए कई भाषणों का जिक्र किया, जिसमें 27 जनवरी 2020 को ठाकुर द्वारा एक रैली में दिया गया भाषण भी शामिल है। जिसमें भड़काऊ नारा लगाया गया था।</p>
<p>    याचिका के अनुसार, वर्मा ने भी 27-28 जनवरी 2020 को कथित तौर पर नफरत फैलाने वाला भाषण दिया और शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ 'भड़काऊ' भाषण दिया।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के तर्क को गलत ठहराया</strong></p>
<p>    हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट और निचली अदालत का यह तर्क गलत था कि उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सक्षम अधिकारी से मंजूरी की आवश्यकता थी, लेकिन वह मामले के नतीजे से सहमत था।</p>
<p>    शीर्ष अदालत ने कहा कि मंजूरी की आवश्यकता FIR दर्ज करने या जांच करने के लिए नहीं थी और कोई भी ऐसी व्याख्या जो FIR दर्ज करने को पूर्व मंजूरी पर निर्भर बनाती है, वह इस कानूनी व्यवस्था को उलट देगी और जांच से संबंधित प्रावधानों को अव्यावहारिक बना देगी।</p>]]> </content:encoded>
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<title>महिला पहलवानों के यौन शोषण मामले में बृजभूषण सिंह को बड़ी राहत, कोर्ट ने किया बरी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली बृजभूषण सिंह महिला पहलवानों के यौन शोषण केस में बरी हो गए हैं. कोर्ट ने उन्हें सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है. सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने ये अहम फैसला सुनाया है. बता दें कि बृजभूषण शरण सिंह 20 जुलाई 2023 से नियमित जमानत पर थे. 10 मई … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 03 Aug 2026 14:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>महिला, पहलवानों, के, यौन, शोषण, मामले, में, बृजभूषण, सिंह, को, बड़ी, राहत, कोर्ट, ने, किया, बरी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
बृजभूषण सिंह महिला पहलवानों के यौन शोषण केस में बरी हो गए हैं. कोर्ट ने उन्हें सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है. सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने ये अहम फैसला सुनाया है. बता दें कि बृजभूषण शरण सिंह 20 जुलाई 2023 से नियमित जमानत पर थे. 10 मई 2024 को अदालत ने दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के आधार पर आरोप तय किए थे, जिसके बाद ट्रायल शुरू हुआ था। </p>
<p><strong>बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर बरी</strong><br>
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में सोमवार को फैसला सुना दिया है। महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले को लेकर अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया है। इससे पहले पूरे विवाद के चलते उत्तर प्रदेश के कैसरगंज से भारतीय जनता पार्टी के सांसद रहे बृज भूषण को बीते चुनाव में टिकट नहीं दिया गया था।</p>
<p><strong>आरोपों के चलते बृजभूषण को नहीं मिला था लोकसभा टिकट</strong><br>
बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद 2024 लोकसभा चुनाव में उनका टिकट कट गया था। हालांकि, पार्टी ने इस सीट से उनके बेटे करण भूषण सिंह को मैदान में उतारा। बावजूद इसके क्षेत्र में उनकी मजबूती का असर नजर आया और बेटे करण भूषण ने जीत दर्ज की। अब दिल्ली की अदालत से राहत मिलने के बाद बड़ा सवाल यही है कि क्या बृजभूषण शरण सिंह फिर से चुनावी रण में उतर सकते हैं।</p>
<p><strong>फैसले के बाद क्या बोले बृजभूषण शरण सिंह</strong><br>
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अदालत के आदेश के बाद प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने पहले जो कहा था, वही अब सही साबित हुआ है. वहीं, उनके वकील ने कहा कि वे अदालत के विस्तृत आदेश का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही उनका पक्ष यह रहा है कि शिकायत और शिकायतकर्ता के बयानों में कई विसंगतियां और विरोधाभास मौजूद थे. वकील के अनुसार, अदालत का विस्तृत आदेश जल्द जारी किया जाएगा, जिसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विस्तार से टिप्पणी की जाएगी। </p>
<p><strong>साढ़े तीन साल चली लंबी कानूनी प्रक्रिया</strong></p>
<p>भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले में करीब साढ़े तीन साल की कानूनी प्रक्रिया के बाद 3 अगस्त 2026 को अदालत ने फैसला सुनाया. इस मामले की शुरुआत जनवरी 2023 में पहलवानों के जंतर-मंतर पर धरने से हुई थी। </p>
<p><strong>18 जनवरी 2023 को जंतर-मंतर पर शुरू किया था पहलवानों ने प्रदर्शन</strong><br>
18 जनवरी 2023 को पहलवानों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू किया. 19 जनवरी को बबीता फोगाट ने प्रदर्शनकारी पहलवानों से मुलाकात की और सरकार से बात करने का भरोसा दिया. उसी दिन पहलवानों ने तत्कालीन खेल मंत्री अनुराग ठाकुर से भी मुलाकात की. 20 जनवरी को विनेश फोगाट ने भारतीय ओलंपिक संघ, प्रधानमंत्री कार्यालय, अनुराग ठाकुर और अमित शाह को ट्वीट कर शिकायत दर्ज कराई. 21 जनवरी को अनुराग ठाकुर से बातचीत के बाद पहलवानों ने अपना पहला धरना समाप्त कर दिया था। </p>]]> </content:encoded>
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<title>‘PM मोदी ने मेरी बेटी को नया जीवन दिया’, अपशब्द बोलने वाली नाबालिग की मां ने जताया आभार</title>
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<description><![CDATA[   नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करने वाली 15 वर्षीय लड़की की मां ने पीएम मोदी के माफ करने के फैसले पर उनका आभार जताया है. मां ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनकी बेटी को &#039;नई जिंदगी&#039; दी है और माफी को उसके लिए सबसे बड़ा जन्मदिन … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 03 Aug 2026 13:45:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>  नई दिल्ली</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करने वाली 15 वर्षीय लड़की की मां ने पीएम मोदी के माफ करने के फैसले पर उनका आभार जताया है. मां ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनकी बेटी को 'नई जिंदगी' दी है और माफी को उसके लिए सबसे बड़ा जन्मदिन का तोहफा बताया। </p>
<p>लड़की की मां ने कहा कि वह हाथ जोड़कर प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद करती हैं कि उन्होंने बदले की कार्रवाई के बजाय माफी का रास्ता चुना. उन्होंने कहा, 'पीएम मोदी ने अभद्र और अश्लील शब्दों का इस्तेमाल करने वाली बच्ची को माफ करके अपनी महानता दिखाई है. आज उसका जन्मदिन है और पीएम मोदी ने उसे सबसे बड़ा उपहार दिया है- जीवनदान. आज इस लड़की का दोबारा जन्म हुआ है। </p>
<p>शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी ने Instagram पर एक वीडियो साझा कर लोगों से संयम बरतने की अपील की थी. यह मामला जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ CJP के नेतृत्व में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ कथित तौर पर लगाए गए आपत्तिजनक नारों से जुड़ा है। </p>
<p>पीएम मोदी ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वालों को 'भटका हुआ' बताते हुए कहा था कि इसका जवाब गुस्से या बदले की भावना से देना उचित नहीं है. इसके कुछ ही समय बाद लड़की का माफी मांगते हुए वीडियो सामने आया. वीडियो में उसने खुद को 15 वर्षीय बताते हुए कहा कि उसे अपनी गलती की गंभीरता का एहसास हो गया है। </p>
<p>लड़की ने कहा कि उसने जो किया वह माफी के लायक नहीं था और उसने प्रधानमंत्री के खिलाफ कई गलत बातें कहीं. उसने बताया कि वह दोस्तों के साथ कनॉट प्लेस घूमने के बाद प्रदर्शन में पहुंची थी और वहां आसपास मौजूद लोगों को प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाते देखकर प्रभावित हुई. लड़की ने इसे अपनी 'पहली और आखिरी गलती' बताते हुए पूरे देश से माफी मांगी। </p>
<p><strong>लड़की के खिलाफ FIR भी दर्ज</strong><br>
माफी मांगने के बावजूद, 23 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान कथित आपत्तिजनक नारे लगाने को लेकर लड़की के खिलाफ नोएडा के एक थाने में शिकायत पहले ही दर्ज हो चुकी थी. नोएडा पुलिस ने Zero FIR दर्ज की थी, जिसे बाद में नई दिल्ली के संसद मार्ग थाने को ट्रांसफर कर दिया गया। </p>
<p>शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि लड़की की टिप्पणी प्रधानमंत्री पद की गरिमा का अपमान करती है और इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने तथा सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की आशंका है. लड़की की मां का दावा है कि उन्होंने और उनकी बेटी ने कई बार माफी मांगते हुए FIR वापस लेने की अपील की है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि FIR में उनकी बेटी की उम्र गलत तरीके से 25 वर्ष दर्ज की गई है, जबकि वह नाबालिग है। </p>
<p><strong>मां ने सोशल मीडिया और प्रदर्शन को लेकर की अपील</strong><br>
लड़की की मां ने सरकार से नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल और प्रदर्शनों में भाग लेने पर रोक लगाने की अपील भी की. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया कि 20 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए Instagram और Facebook को ब्लॉक किया जाए, ताकि वे पढ़ाई पर ध्यान दें और राजनीतिक प्रदर्शनों का हिस्सा न बनें। </p>
<p>इस बीच CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो पर टिप्पणी करते हुए पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाया. उन्होंने लिखा, 'सिर्फ रील पर ही माफ करोगे या केस भी वापस लोगे?' मामले में अब प्रधानमंत्री की अपील, लड़की की सार्वजनिक माफी, उसके खिलाफ दर्ज FIR और CJP की प्रतिक्रिया के बाद विवाद ने एक नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले लिया है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>आज का मौसम 3 अगस्त: यूपी&#45;बिहार से कश्मीर तक मूसलाधार बारिश का अलर्ट, कई राज्यों में तेज हवाओं की चेतावनी</title>
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<pubDate>Mon, 03 Aug 2026 12:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>उत्तर भारत में कुछ समय के मॉनसूनी ब्रेक के बाद एक बार फिर बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, उत्तर, पूर्वोत्तर और पश्चिमी भारत के राज्यों में 7 अगस्त तक भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। इसके अलावा दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश कम होगी। अगले पांच दिनों तक कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। 3 अगस्त से 7 या 8 अगस्त तक पहाड़ों में भी भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। ऐसे में पर्यटकों को सावधान रहने की सलाह दी गई है।</p>
<p><strong>16 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट</strong><br>
मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, मेघायलट, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, ओडिशा, सिक्किम, मणिपुर और मध्य प्रेदश में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके अलावा ज्यादातर राज्यों में 30 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन का भी अलर्ट जारी किया गया है।</p>
<p><strong>यूपी-बिहार का मौसम</strong><br>
मौसम विभाग ने 3 से 8 अगस्त तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। बारिश का दौर पूरे रराज्यमें ही जारी रहेगा। मौसम विभाग ने कहा है कि 3 अगस्त को लखनऊ, उन्नाव, सीतापुर, बहराइच, बाराबंकी, गोंडा, रायबरेली, प्रयागराज, वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली, देविरिया, बलिया, सिद्धार्थनगर, कुशीनगर, संत कबीरनगर, आंबेडकर नगर, अयोध्या, बस्ती और अन्य पूर्वी जिलों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है।</p>
<p>मौसम विभाग ने बिहार में भी 3 अगस्त को भारी बारिश की संभावना जताी है। यहां अधिकतर जिले में 3 से 5 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहगा। इसके अलावा हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रह सकती है।</p>
<p><strong>दिल्ली में हो सकती बारिश</strong><br>
मौसम विभाग ने दिल्ली में 4 से 7 अगस्त तक मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं 3 अगस्त को हल्की बारिश हो सकती है। राजधानी का अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री रह सकता है। वहीं दिल्ली एनसीआर में बादल छाए रहेंगे।</p>
<p><strong>पहाड़ों में भारी बारिश का अलर्ट</strong><br>
मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश में 3 से 8 अगस्त तक कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसमें चंबा, हमीरपुर, किन्नौर, कांगड़ा, लाहौल, कुल्लू, मंडी, सिरमौर, शिमला और सोलन जिले शामिल हैं। वहीं उत्तराखंड के बागेश्वर, चमोली, देहरादून, उत्तर काशी, रूद्रप्रयाग जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। जम्मू-कश्मीर में बारिश से बुरा हाल है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले चार दिनों तक जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश जारी रहेगी। कश्मीर में कहीं पहाड़ दड़क रहे हैं तो कहीं बादल फट रहे हैं। ऐसे में अनंतनाग, कुलगाम, बारामूला समेत कई जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। कश्मीर की नदियां उफान पर हैं और जन-जीवन अस्तव्यस्त हो गया है।</p>
<p><strong>पंजाब और हरियाणा का मौसम</strong><br>
मौसम विभाग ने पंजाब और हरियाणा में भी 3 और 4 अगस्त को व्यापक बारिश की संभावना जताई है। इसके बाद 5 और 6 तारीख को भी अलग-अलग जगहों पर बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। वहीं 8 अगस्त को हल्की बारिश हो सकती है। साथ ही राजस्थान में भी 3 से 8 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहेगा। हवा की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रतिघंटा रह सकती है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>दक्षिण भारत में बारिश का कहर, केरल में 8 मौतें; कर्नाटक में भूस्खलन से परिवार खत्म</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  दक्षिण भारत के राज्यों में भारी बारिश ने भारी तबाही मचाई है। केरलम में बारिश से जुड़ी घटनाओं में आठ लोगों की मौत हो गई है और हजारों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। वहीं, पड़ोसी राज्य कर्नाटक के शिवमोगा में हुए भूस्खलन में एक ही परिवार के तीन लोगों की जान … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 03 Aug 2026 11:45:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>दक्षिण, भारत, में, बारिश, का, कहर, केरल, में, मौतें, कर्नाटक, में, भूस्खलन, से, परिवार, खत्म</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 दक्षिण भारत के राज्यों में भारी बारिश ने भारी तबाही मचाई है। केरलम में बारिश से जुड़ी घटनाओं में आठ लोगों की मौत हो गई है और हजारों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। वहीं, पड़ोसी राज्य कर्नाटक के शिवमोगा में हुए भूस्खलन में एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई है।</p>
<p><strong>केरल में बारिश से 8 की मौत</strong><br>
केरलम में बारिश से जुड़ी घटनाओं में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 8 अन्य लापता हैं। इसके अलावा 13 लोग घायल हुए हैं। हालात को देखते हुए राज्यभर में 5,792 लोगों को सुरक्षित निकालते हुए 209 राहत शिविरों में भेजा गया है।</p>
<p>आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री वीडी सतीशन राज्य में बारिश की स्थिति को लेकर विभिन्न जिलों के प्रभारी मंत्रियों और जिला प्रशासनों के लगातार संपर्क में हैं।</p>
<p>पिछले दिन की तुलना में बारिश में थोड़ी कमी आई है, जिससे लोगों को आंशिक राहत मिली है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सफाई और स्वच्छता अभियान शुरू कर दिया गया है। आपदा में 27 घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि 196 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।</p>
<p><strong>सबरीमाला तीर्थयात्रियों के लिए चेतावनी</strong><br>
राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि जान गंवाने वालों के परिवारों के साथ-साथ बेघर हुए और अपनी फसलें व आजीविका खोने वाले लोगों को पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।</p>
<p>सरकार ने पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। इस बीच, त्रावणकोर देवासम बोर्ड ने 2 और 3 अगस्त को निरपुथरी के अवसर पर सबरीमाला जाने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं को अपनी यात्रा पर पुनर्विचार करने की सलाह दी है। भारी बारिश, पंपा नदी में बाढ़ और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है।</p>
<p><strong>कर्नाटक में एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत</strong><br>
कर्नाटक के मलनाड क्षेत्र में हो रही लगातार बारिश के कारण शिवमोगा जिले के इंदिरा नगर इलाके में रविवार तड़के करीब 2:30 बजे भूस्खलन हुआ। इस हादसे में एक अस्थायी शेड मलबे में दब गया, जिससे उसमें रह रहे एक प्रवासी मजदूर परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई।</p>
<p>मृतकों की पहचान मल्लिकार्जुन (35), उनकी पत्नी नागवेणी (28) और उनके तीन वर्षीय बेटे के रूप में हुई है। यह परिवार कोप्पल जिले के गंगावती तालुक स्थित कोक्करेगारू गांव का रहने वाला था और पिछले दो वर्षों से इस शेड में रह रहा था।</p>
<p>पुलिस और अग्निशमन व आपातकालीन सेवा विभाग ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और तीनों शवों को मलबे से बाहर निकाला। पास के शेड में रहने वाला एक अन्य मजदूर इस घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसे तीर्थहल्ली के जयचामराजेंद्र अस्पताल में भर्ती कराया गया है।</p>
<p>पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे की जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने एक बार फिर मानसून के दौरान भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों के जोखिम को उजागर कर दिया है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>एल नीनो के बीच राहत की उम्मीद, पॉजिटिव IOD से सुधरेगा मानसून</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली  देश भर में मजबूत होते एल नीनो के असर के कारण मानसून सामान्य से कम रहने का जोखिम बना हुआ है, इस बीच विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की लेटेस्ट रिपोर्ट ने राहत की उम्मीद जगाई है। WMO की रिपोर्ट के अनुसार, हिंद महासागर में &#039;पॉजिटिव आईओडी&#039; (Positive Indian Ocean Dipole) विकसित होने … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 03 Aug 2026 10:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>एल, नीनो, के, बीच, राहत, की, उम्मीद, पॉजिटिव, IOD, से, सुधरेगा, मानसून</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong><br>
 देश भर में मजबूत होते एल नीनो के असर के कारण मानसून सामान्य से कम रहने का जोखिम बना हुआ है, इस बीच विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की लेटेस्ट रिपोर्ट ने राहत की उम्मीद जगाई है।</p>
<p>WMO की रिपोर्ट के अनुसार, हिंद महासागर में 'पॉजिटिव आईओडी' (Positive Indian Ocean Dipole) विकसित होने की संभावना है, जिससे एल-नीना का असर काफी हद तक बेअसर हो सकता है। इससे दक्षिण भारत समेत देश के अन्य हिस्सों में बारिश की स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है।</p>
<p>दरअसल, एल-नीनो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के सतह जल के गर्म होने का एक जलवायु पैटर्न (प्रवृत्ति) है, यह भारत में कमजोर मानसून और भीषण गर्मी से जुड़ा हुआ है।</p>
<p>वहीं, दूसरी तरफ, इंडियन ओशन डिपोल (IOD) का संबंध उष्णकटिबंधीय हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के समुद्री सतह तापमान के अंतर से है। यह मजबूत मानसूनी हवाओं के बनने में मदद करता है। जिससे बारिश होने की संभावना बढ़ जाती है।</p>
<p>फिहलाल IOD विकसित हो रही है, जिसके कारण हिंद महासागर का पैटर्न सामान्य हो जाएगा। इससे मानसून के बेहतर होने की उम्मीद जगी है। अगर डब्ल्यूएमओ का पूर्वानुमान सच होता है, तो दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में, उन क्षेत्रों में जहां 1 अगस्त तक हुई बारिश में 22% की भारी कमी दर्ज की गई थी, वहां सामान्य रूप से वर्षा की स्थिति में सुधार की संभावना है।</p>
<p>कुछ अंतरराष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्रों के जलवायु अनुमानों का हवाला देते हुए यह भी कहा कि सितंबर के दौरान 'सकारात्मक' (Positive) IOD स्थितियां विकसित होने की संभावना है। इससे अच्छी बारिश होने की संभावना है।</p>
<p>मौसम विज्ञानियों की निगाह अब हिंद महासागर में विकसित होने वाले इंडियन ओशन डायपोल (IOD) पर टिकी है, जो अभी न्यूट्रल है, लेकिन सितंबर में यह पॉजिटिव हो सकता है। ऐसा हुआ तो यह एल-नीनो की चपेट में आए मानसून को नई ताकत मिल सकती है।</p>
<p><strong>भारत में कैसे कम हो जाएगा एल-नीनो का प्रभाव?</strong><br>
IOD के पॉजिटिव होने पर हिंद महासागर से भारत की ओर अधिक नमी पहुंचती है, जिससे मानसून को अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है और एल-नीनो का नकारात्मक प्रभाव काफी हद तक कम हो सकता है।</p>
<p>हालांकि, भारत का मानसून केवल एल-नीनो से तय नहीं होता। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र, मानसूनी ट्रफ की स्थिति और हिंद महासागर की परिस्थितियां भी वर्षा की मात्रा एवं वितरण को प्रभावित करती हैं। यही वजह है कि कई बार मजबूत एल-नीनो के दौरान भी देश के कुछ हिस्सों में सामान्य या उससे अधिक बारिश देखने को मिलता है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>गोवा पर्यटन की छवि बचाने की तैयारी, सोशल मीडिया निगरानी के लिए बनेगा ‘वॉर रूम’</title>
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<description><![CDATA[  पणजी  हर साल अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही गोवा में चार्टर्ड पर्यटकों का आगमन, होटलों की बुकिंग, नवविवाहित जोड़ों का जमावड़ा शुरू हो जाता है। लेकिन इसके साथ ही सोशल मीडिया पर नकारात्मक टिप्पणियों की बौछार भी देखने को मिलती है। पिछले दो सालों में अपनी छवि पर लगे झटकों के बाद, इस बार … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 03 Aug 2026 10:00:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>गोवा, पर्यटन, की, छवि, बचाने, की, तैयारी, सोशल, मीडिया, निगरानी, के, लिए, बनेगा, ‘वॉर, रूम’</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> पणजी</strong><br>
 हर साल अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही गोवा में चार्टर्ड पर्यटकों का आगमन, होटलों की बुकिंग, नवविवाहित जोड़ों का जमावड़ा शुरू हो जाता है। लेकिन इसके साथ ही सोशल मीडिया पर नकारात्मक टिप्पणियों की बौछार भी देखने को मिलती है।</p>
<p>पिछले दो सालों में अपनी छवि पर लगे झटकों के बाद, इस बार गोवा पर्यटन विभाग ने केवल बचाव करने के बजाय आक्रामक रुख अपनाने का फैसला किया है। विभाग के अनुसार, आगामी पर्यटन सीजन शुरू होने से पहले राज्य में एक विशेष वॉर रूम स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है।</p>
<p><strong>क्या है वॉर रूम का उद्देश्य?</strong><br>
आधिकारिक तौर पर इसे गोवा टूरिज्म ऑनलाइन रेप्युटेशन मैनेजमेंट सेंटर कहा जाएगा। इस वॉर रूम को स्थापित करने और संचालित करने के लिए विभाग एक निजी एजेंसी की नियुक्ति के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी कर चुका है।</p>
<p>इसका मुख्य उद्देश्य गोवा के पर्यटन को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक, अतिरंजित, नकारात्मक या असत्यापित कंटेंट की निगरानी करना और उस पर रियल-टाइम एक्शन लेना है।</p>
<p>विभाग का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन रिव्यू, इन्फ्लुएंसर्स और वीडियो के जरिए पर्यटकों की धारणा तय होती है, ऐसे में इन भ्रामक खबरों से राज्य की छवि को भारी नुकसान पहुंचता है।</p>
<p><strong>प्लेटफॉर्म्स पर रखी जाएगी पैनी नजर</strong><br>
एजेंसी का काम ऑनलाइन सेंटिमेंट, सोशल मीडिया पर हो रही चर्चाओं और हानिकारक कंटेंट की रियल-टाइम निगरानी करना होगा। सितंबर से अप्रैल तक चलने वाले 9 महीने के पूरे पर्यटन सीजन के दौरान एक समर्पित टीम एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, ट्रैवल पोर्टल्स, ब्लॉग्स और रिव्यू साइट्स को ट्रैक करेगी।</p>
<p>यह निगरानी अंग्रेजी, हिंदी, कोंकणी और मराठी भाषाओं में की जाएगी। इसके अलावा, नियुक्त एजेंसी को रोजाना सरकारी दफ्तर खुलने से पहले अधिकारियों को एक विस्तृत मॉर्निंग ब्रीफ सौंपनी होगी, जिसमें इंटरनेट पर गोवा के खिलाफ चल रहे नकारात्मक समाचार, वायरल वीडियो, इन्फ्लुएंसर्स की आलोचनाओं, ऑनलाइन शिकायतों और अफवाहों का पूरा ब्योरा शामिल होगा।</p>
<p><strong>आखिर क्यों पड़ी वॉर रूम की जरूरत?</strong><br>
इस वॉर रूम को स्थापित करने का समय महज इत्तेफाक नहीं है। हाल के दिनों में भले ही गोवा के समुद्र तटों पर पर्यटकों की आवाजाही वापस पटरी पर लौटी है, लेकिन राज्य को पिछले एक साल से लगातार बैड प्रेस और नकारात्मक प्रचार का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>पर्यटक अक्सर अत्यधिक किराए और स्थानीय टैक्सी चालकों द्वारा ऐप-आधारित टैक्सियों को रोकने के लिए की जाने वाली मनमानी की शिकायत करते हैं।</p>
<p>इसके अलावा निवासियों को बीचों पर अत्यधिक भीड़, ट्रैफिक जाम, कचरे के ढेर और पर्यटकों की लापरवाही से गाड़ी चलाने जैसी समस्याएं परेशान करती हैं।</p>
<p>वहीं, पर्यटक खुद पीक सीजन में होटलों के महंगे टैरिफ और खाने के भारी-भरकम बिल से नाराज रहते हैं। ऐसे में बीच-बीच में वायरल होने वाले स्कैम के वीडियो ने विभाग को यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है।</p>
<p><strong>बिना सरकारी स्वीकृति के नहीं दिए जाएंगे जवाब</strong><br>
विभाग के नोट में स्पष्ट किया गया है कि यह एजेंसी डिजिटल लिसनिंग, सेंटिमेंट ट्रैकिंग, अलर्ट जारी करने और विभाग के अपने चैनलों पर हानिकारक कंटेंट के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होगी, ताकि ब्रांड गोवा को सुरक्षित और मजबूत रखा जा सके।</p>
<p>हालांकि, पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने यह भी बताया कि निजी एजेंसी को अपने स्तर पर कोई भी बयान या प्रतिक्रिया देने का अधिकार नहीं होगा। किसी भी नकारात्मक टिप्पणी का खंडन, स्पष्टीकरण या जवाब देने से पहले गोवा पर्यटन विभाग से उसकी लिखित मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>3 अगस्त 2026 मौसम अपडेट: 22 राज्यों में आंधी&#45;बारिश का अलर्ट, जानें आपके शहर का हाल</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली  देश के कई राज्यों में हो रही मूसलाधार बारिश के कारण आम जन-जीवन अस्त-व्यस्त है। असम, गुजरात में हालात ऐसे हैं कि सेना को मोर्चा संभालना पड़ा है। इस बीच मौसम विभाग ने देश के 22 राज्यों में भीषण आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 30 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 03 Aug 2026 09:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>अगस्त, 2026, मौसम, अपडेट:, राज्यों, में, आंधी-बारिश, का, अलर्ट, जानें, आपके, शहर, का, हाल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong><br>
 देश के कई राज्यों में हो रही मूसलाधार बारिश के कारण आम जन-जीवन अस्त-व्यस्त है। असम, गुजरात में हालात ऐसे हैं कि सेना को मोर्चा संभालना पड़ा है। इस बीच मौसम विभाग ने देश के 22 राज्यों में भीषण आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 30 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं कई जगहों पर बिजली गिरने की भी संभावना है।</p>
<p>मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की तीव्रता कुछ कम होगी, लेकिन तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में अगले दो दिनों तक कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं, पूर्वोत्तर भारत में वर्षा की गतिविधियां बढ़ेंगी और अगले पांच दिनों के दौरान कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। साथ ही मध्य और पूर्वी हिमालय की तलहटी में भी अगले 4-5 दिनों तक बारिश बढ़ने का अनुमान है।</p>
<p><strong>किन राज्यों में बारिश का अलर्ट</strong><br>
IMD ने 3 से 8 अगस्त के बीच हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में अलग-अलग दिनों में भारी बारिश, आंधी-तूफान, बिजली गिरने की संभावना जताई है। इस दौरान 70 किलोमीटर की स्पीड से तेज हवाएं चल सकती हैं।</p>
<p><strong>दिल्ली में कल कैसा रहेगा मौसम?</strong><br>
दिल्ली वेदर (3-5 अगस्त): मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, राजधानी दिल्ली में 5 अगस्त तक बादल छाए रहेंगे। सुबह से दोपहर के बीच कुछ जगहों पर एक-दो बार बहुत हल्की से हल्की बारिश हो सकती है। जबकि 4 और 5 अगस्त को भी राजधानी में बादलों का डेरा रहेगा। इस दौरान कुछ जगहों पर हल्की बारिश हो सकती है और करीब 12 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है।</p>
<p><strong>यूपी में कल कैसा रहेगा मौसम?</strong><br>
उत्तर प्रदेश का मौसम (3 से 8 अगस्त): लखनऊ, सीतापुर, हरदोई, उन्नाव, बाराबंकी, अयोध्या, गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती, मेरठ, बागपत, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, शामली, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, एटा, कासगंज, बदायूं, बरेली, मुरादाबाद, जौनपुर, वाराणसी, प्रयागराज, मिर्जापुर, सोनभद्र समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मौसम विभाग ने 3 से 6 अगस्त के दौरान भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। IMD के अनुसार, पूर्वी यूपी में 3 से 6 अगस्त और पश्चिमी यूपी में 3 से 6 अगस्त के बीच कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में 6 से 8 अगस्त के दौरान भी सामान्य से मध्यम स्तर की बारिश की संभावना है।</p>
<p><strong>बिहार में कल कैसा रहेगा मौसम?</strong><br>
बिहार का मौसम (3 अगस्त-8 अगस्त): बिहार मौसम विभाग ने 3 अगस्त से लेकर 8 अगस्त तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश के साथ वज्रपात होने की आशंका जताई है.। इस दौरान तेज हवाएं भी चल सकती हैं। IMD ने गोपालगंज, सीवान, किशनगंज, सुपौल, पश्चिम चंपारण, में तीन अगस्त को भारी बारिश होने का अनुमान जताया है। इस दौरान उत्तर-मध्य, उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व बिहार के साथ-साथ पूर्वी और पश्चिमी चंपारण तथा सारण में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं औरंगाबाद, भभुआ, भोजपुर, बक्सर, गया, रोहतास, बांका, भागलपुर, जमुई और नवादा में 4 और 5 अगस्त को भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, बारिश का यह सिलसिला 8 अगस्त तक जारी रहेगा।</p>
<p><strong>हिमाचल प्रदेश में कल कैसा रहेगा मौसम?</strong><br>
हिमचाल प्रदेश वेदर अपडेट (3 अगस्त-8 अगस्त): चंबा, हमीरपुर, कांगड़ा, किन्नौर, कुल्लू, लाहौल और स्पीती, मंडी, शिमला समेत हिमाचल प्रदेश के लगभग सभी जिलों में मौसम विभाग ने 3 से 8 अगस्त के दौरान भारी बारिश होने का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान आंधी-तूफान की भी चेतावनी है। साथ ही करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चल सकती हैं।</p>
<p><strong>उत्तराखंड में कल कैसा रहेगा मौसम?</strong><br>
उत्तराखंड वेदर अपडेट (3 अगस्त- 8 अगस्त): मौसम विभाग ने देहरादून, पिथौरागढ़, हल्दवानी समेत उत्तराखंड के कई जिलों में पूरे सप्ताह भारी बारिश होने की संभावना जताई है। 3 से 8 अगस्त के दौरान कहीं-कही आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश होने की भी संभावना है। जबकि कई जगहों पर बिजली भी गिर सकती है।</p>
<p><strong>पंजाब में कल कैसा रहेगा मौसम?</strong><br>
पंजाब वेदर (3-6 अगस्त): पंजाब में 3 से 6 अगस्त के दौरान कई स्थानों पर बारिश की संभावना है। 3 और 4 अगस्त को कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा 2 अगस्त और 7-8 अगस्त को भी कुछ स्थानों पर बारिश का पूर्वानुमान है।<br>
झारखंड में कल कैसा रहेगा मौसम?<br>
झारखंड वेदर (3 अगस्त-8 अगस्त): मौसम विभाग के अनुसार, झारखंड में 3 से 8 अगस्त के दौरान कई स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। 2 से 6 अगस्त के दौरान कहीं-कहीं भारी बारिश भी हो सकती है। जबकि इस दौरान तेज हवा चलने का भी अनुमान है।</p>
<p><strong>जम्मू-कश्मीर में कल कैसा रहेगा मौसम?</strong><br>
जम्मू-कश्मीर वेदर अपडेट (3 अगस्त-8 अगस्त): जम्मू-कश्मीर में 3 से 6 अगस्त तक मूसलाधार बारिश होने की संभावना है। 2 से 5 अगस्त के दौरान कहीं-कहीं भारी बारिश भी हो सकती है। जबकि इस दौरान आंधी-तूफान आने की भी संभावना है। इस दौरान 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।</p>
<p><strong>महाराष्ट्र में कल कैसा रहेगा मौसम?</strong><br>
महाराष्ट्र का वेदर अपडेट (3 अगस्त-4 अगस्त): महाराष्ट्र में अगले पांच दिनों तक कई जिलों में गरज-चमक, बिजली गिरने और भारी बारिश का ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। IMD ने 3 अगस्त को रत्नागिरी, सतारा घाट क्षेत्र, बुलढाणा, अकोला, अमरावती और नागपुर जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी रहेगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>पीएम मोदी ने 15 वर्षीय लड़की को किया माफ, मां ने जताया आभार</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करने वाली 15 वर्षीय लड़की की मां ने पीएम मोदी के माफ करने के फैसले पर उनका आभार जताया है. मां ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनकी बेटी को &#039;नई जिंदगी&#039; दी है और माफी को उसके लिए सबसे बड़ा जन्मदिन का … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 17:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>पीएम, मोदी, ने, वर्षीय, लड़की, को, किया, माफ, मां, ने, जताया, आभार</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करने वाली 15 वर्षीय लड़की की मां ने पीएम मोदी के माफ करने के फैसले पर उनका आभार जताया है. मां ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनकी बेटी को 'नई जिंदगी' दी है और माफी को उसके लिए सबसे बड़ा जन्मदिन का तोहफा बताया.</p>
<p>लड़की की मां ने कहा कि वह हाथ जोड़कर प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद करती हैं कि उन्होंने बदले की कार्रवाई के बजाय माफी का रास्ता चुना. उन्होंने कहा, 'पीएम मोदी ने अभद्र और अश्लील शब्दों का इस्तेमाल करने वाली बच्ची को माफ करके अपनी महानता दिखाई है. आज उसका जन्मदिन है और पीएम मोदी ने उसे सबसे बड़ा उपहार दिया है- जीवनदान. आज इस लड़की का दोबारा जन्म हुआ है.”</p>
<p>शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी ने Instagram पर एक वीडियो साझा कर लोगों से संयम बरतने की अपील की थी. यह मामला जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ CJP के नेतृत्व में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ कथित तौर पर लगाए गए आपत्तिजनक नारों से जुड़ा है.</p>
<p>पीएम मोदी ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वालों को 'भटका हुआ' बताते हुए कहा था कि इसका जवाब गुस्से या बदले की भावना से देना उचित नहीं है. इसके कुछ ही समय बाद लड़की का माफी मांगते हुए वीडियो सामने आया. वीडियो में उसने खुद को 15 वर्षीय बताते हुए कहा कि उसे अपनी गलती की गंभीरता का एहसास हो गया है.</p>
<p>लड़की ने कहा कि उसने जो किया वह माफी के लायक नहीं था और उसने प्रधानमंत्री के खिलाफ कई गलत बातें कहीं. उसने बताया कि वह दोस्तों के साथ कनॉट प्लेस घूमने के बाद प्रदर्शन में पहुंची थी और वहां आसपास मौजूद लोगों को प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाते देखकर प्रभावित हुई. लड़की ने इसे अपनी 'पहली और आखिरी गलती' बताते हुए पूरे देश से माफी मांगी.</p>
<p><strong>लड़की के खिलाफ FIR भी दर्ज</strong><br>
माफी मांगने के बावजूद, 23 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान कथित आपत्तिजनक नारे लगाने को लेकर लड़की के खिलाफ नोएडा के एक थाने में शिकायत पहले ही दर्ज हो चुकी थी. नोएडा पुलिस ने Zero FIR दर्ज की थी, जिसे बाद में नई दिल्ली के संसद मार्ग थाने को ट्रांसफर कर दिया गया.</p>
<p>शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि लड़की की टिप्पणी प्रधानमंत्री पद की गरिमा का अपमान करती है और इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने तथा सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की आशंका है. लड़की की मां का दावा है कि उन्होंने और उनकी बेटी ने कई बार माफी मांगते हुए FIR वापस लेने की अपील की है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि FIR में उनकी बेटी की उम्र गलत तरीके से 25 वर्ष दर्ज की गई है, जबकि वह नाबालिग है.</p>
<p><strong>मां ने सोशल मीडिया और प्रदर्शन को लेकर की अपील</strong><br>
लड़की की मां ने सरकार से नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल और प्रदर्शनों में भाग लेने पर रोक लगाने की अपील भी की. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया कि 20 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए Instagram और Facebook को ब्लॉक किया जाए, ताकि वे पढ़ाई पर ध्यान दें और राजनीतिक प्रदर्शनों का हिस्सा न बनें.</p>
<p>इस बीच CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो पर टिप्पणी करते हुए पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाया. उन्होंने लिखा, 'सिर्फ रील पर ही माफ करोगे या केस भी वापस लोगे?' मामले में अब प्रधानमंत्री की अपील, लड़की की सार्वजनिक माफी, उसके खिलाफ दर्ज FIR और CJP की प्रतिक्रिया के बाद विवाद ने एक नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले लिया है.</p>]]> </content:encoded>
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<title>सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त रुख, क्वात्रा बोले&#45; पाकिस्तान ने तोड़ी सद्भावना</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि सिंधु जल संधि सद्भावना और मित्रता की भावना से की गई थी, लेकिन पाकिस्तान ने आधी सदी तक अपने आचरण से इस भावना को नष्ट कर दिया। &#039;न्यूजवीक&#039; पत्रिका में प्रकाशित एक लेख में क्वात्रा ने कहा कि सिंधु जल संधि को … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 16:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>सिंधु, जल, संधि, पर, भारत, का, सख्त, रुख, क्वात्रा, बोले-, पाकिस्तान, ने, तोड़ी, सद्भावना</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि सिंधु जल संधि सद्भावना और मित्रता की भावना से की गई थी, लेकिन पाकिस्तान ने आधी सदी तक अपने आचरण से इस भावना को नष्ट कर दिया। 'न्यूजवीक' पत्रिका में प्रकाशित एक लेख में क्वात्रा ने कहा कि सिंधु जल संधि को स्थगित करना कोई नई स्थिति पैदा करना नहीं है, बल्कि पहले से बिगड़े हुए संबंधों को औपचारिक रूप से स्वीकार करना है। क्वात्रा का यह लेख ऐसे समय में प्रकाशित हुआ है, जब पाकिस्तान ने भारत द्वारा 23 अप्रैल 2025 को सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के फैसले के विरोध में हाल ही में एक सम्मेलन आयोजित किया था। भारत ने यह निर्णय 22 अप्रैल 2025 को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा 26 लोगों की हत्या के एक दिन बाद लिया था। मारे गए लोगों में अधिकतर पर्यटक थे।</p>
<p><strong>याद रखनी चाहिए संधि की प्रस्तावना</strong><br>
क्वात्रा ने लिखा, ''यह याद रखना चाहिए कि संधि की प्रस्तावना में कहा गया है कि इसे 'सद्भावना और मित्रता की भावना' से किया गया था। पाकिस्तान ने आधी सदी तक इसी सद्भावना और मित्रता को नष्ट करने का काम किया। संधि को स्थगित रखना केवल उस स्थिति को स्वीकार करना है, जिसे पाकिस्तान अपने आचरण से पहले ही समाप्त कर चुका था।''</p>
<p>वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि के तहत सिंधु नदी तंत्र की छह नदियों में से तीन नदियों का नियंत्रण भारत को मिला, जिनमें बेसिन के लगभग 20 प्रतिशत जल का प्रवाह होता है जबकि पाकिस्तान को उन नदियों पर अधिकार मिला, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत जल प्रवाहित होता है। क्वात्रा ने कहा, ''इस असमान व्यवस्था ने भारत के उन क्षेत्रों के विकास को दशकों तक बाधित किया, जिन्हें बेहतर जल अधिकार मिलने से लाभ हो सकता था। इसके बावजूद भारत ने संधि का पूरी निष्ठा से पालन किया।''</p>
<p><strong>पाकिस्तान ने बार-बार तोड़े संधि के नियम</strong><br>
उन्होंने कहा कि इसके जवाब में पाकिस्तान ने 1965, 1971 और 1999 में भारत के खिलाफ युद्ध छेड़े। इसके अलावा उसने दशकों तक शत्रुतापूर्ण रवैया और सीमा पार आतंकवाद जारी रखा, जिसमें 2001 में भारतीय संसद पर हमला, 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले, 2016 के उरी और पठानकोट हमले, 2019 का पुलवामा हमला और 2025 का पहलगाम हमला शामिल हैं।</p>
<p>क्वात्रा ने कहा कि यदि पाकिस्तान वास्तव में द्विपक्षीय मुद्दों पर भारत का सहयोग चाहता है, तो उसे सबसे पहले वर्षों में तैयार किए गए अपने आतंकी ढांचे को समाप्त करना होगा। उन्होंने कहा कि संधि के तहत भारत द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं के प्रति पाकिस्तान की मुख्य प्रतिक्रिया अड़चनें पैदा करना और नौकरशाही स्तर पर देरी करना रही है। उन्होंने कहा, ''पाकिस्तान ने लगातार भारत के उन प्रयासों को भी अवरुद्ध किया, जिनके तहत छह दशकों में हुए तकनीकी बदलावों को ध्यान में रखते हुए संधि में संशोधन किया जा सकता था। इससे भारत अपनी जलविद्युत क्षमता का बेहतर विकास कर सकता था।''</p>
<p>क्वात्रा ने कहा, ''पाकिस्तान के लगातार इस रवैये और अड़चनों के कारण भारत का यह भरोसा धीरे-धीरे खत्म हो गया कि वह सिंधु जल संधि के तहत अपने वैध अधिकारों का पूरी तरह उपयोग कर पाएगा या बदलते समय के अनुरूप संधि में सुधार कर सकेगा।'' उन्होंने कहा कि जो लोग भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से बातचीत की वकालत कर रहे हैं, वे या तो अतीत के अनुभवों को नजरअंदाज कर रहे हैं, या फिर यह मानते हैं कि एक ही तरीका बार-बार अपनाने पर भी अलग नतीजे मिल सकते हैं।</p>
<p><strong>साथ नहीं चल सकते आतंक और व्यापार</strong><br>
क्वात्रा ने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज भारत का स्पष्ट रुख व्यक्त किया है: 'आतंक और वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते… आतंक और व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते… पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।''' उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जिस जल संकट का सामना कर रहा है, वह इस्लामाबाद की सरकार के कुप्रबंधन का परिणाम है।</p>
<p>भारतीय राजदूत ने कहा, ''…पाकिस्तान सरकार को भारत को दोषी ठहराने और धमकियां देने के लिए सम्मेलन आयोजित करने के बजाय अपनी बेहद खराब जल उत्पादकता और जल प्रबंधन को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि हर आंतरिक विफलता का ठीकरा भारत के सिर फोड़ने की पाकिस्तान की आदत अब पुरानी हो चुकी है। क्वात्रा ने कहा, ''दुनिया को इस बात को बिना किसी हिचकिचाहट या अस्पष्टता के स्पष्ट रूप से कहना चाहिए।'</p>]]> </content:encoded>
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<title>जम्मू&#45;कश्मीर में 9800 करोड़ की दो सुरंग परियोजनाओं को कैबिनेट की मंजूरी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जम्मू-कश्मीर में नेशनल हाईवे ( NH-244 ) पर दो महत्वपूर्ण सुरंग परियोजनाओं और उनसे जुड़ी संपर्क सड़कों के निर्माण की मंजूरी दे दी है। केंद्रीय कैबिनेट ने यह मंजूरी शुक्रवार को बैठक में दी। करीब 9,800 करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं का उद्देश्य कश्मीर घाटी और जम्मू क्षेत्र … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 16:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>जम्मू-कश्मीर, में, 9800, करोड़, की, दो, सुरंग, परियोजनाओं, को, कैबिनेट, की, मंजूरी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जम्मू-कश्मीर में नेशनल हाईवे ( NH-244 ) पर दो महत्वपूर्ण सुरंग परियोजनाओं और उनसे जुड़ी संपर्क सड़कों के निर्माण की मंजूरी दे दी है। केंद्रीय कैबिनेट ने यह मंजूरी शुक्रवार को बैठक में दी। करीब 9,800 करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं का उद्देश्य कश्मीर घाटी और जम्मू क्षेत्र के बीच हर मौसम में बेहतर संपर्क सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही चेनाब घाटी तक पहुंच भी आसान होगी।</p>
<p>इन परियोजनाओं में अनंतनाग-चेनानी कॉरिडोर पर सिंहपोरा-वैलू सुरंग और सुधमहादेव-द्रंगा सुरंग शामिल हैं। इनके पूरा होने से डोडा, किश्तवाड़ और उधमपुर जिलों की सड़क कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यात्रा का समय भी कम हो जाएगा।</p>
<p><strong>केंद्र सरकार दोनों परियोजनाओं को करेगी फंड</strong><br>
जानकारी के मुताबिक, करीब 39 किलोमीटर लंबे सिंहपोरा-वैलू मार्ग पर 10 किलोमीटर लंबी एकतरफा दोहरी सुरंग बनाई जाएगी। जबकि 13 किलोमीटर लंबे सुधमहादेव-द्रंगा खंड पर 8 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण होगा। इन दोनों परियोजनाओं को पूरी तरह केंद्र सरकार फंड करेगी और इन्हें अगले पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।</p>
<p><strong>आसान हो जाएगा रास्ता</strong><br>
अधिकारियों के अनुसार, इन सुरंगों के निर्माण से एनएच-244 के उन कठिन इलाकों से बचा जा सकेगा, जहां खराब मौसम और भारी बर्फबारी के कारण अक्सर यातायात बाधित हो जाता है। परियोजनाएं पूरी होने के बाद यात्रियों, पर्यटकों और माल ढुलाई के लिए सुरक्षित तथा तेज परिवहन व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी। इसके अलावा दूरदराज के इलाकों तक पूरे साल पहुंच सुनिश्चित होने से क्षेत्र के आर्थिक और पर्यटन विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p>परियोजनाओं के पूरा होने के बाद जम्मू-कश्मीर में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बूस्ट मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। बेहतर सड़क नेटवर्क से कृषि उत्पादों, आवश्यक वस्तुओं और अन्य माल की आवाजाही आसान होगी।</p>]]> </content:encoded>
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<title>पीएम मोदी ने लॉन्च किया नशा मुक्त युवा से विकसित भारत अभियान</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए &#039;नशा मुक्त युवा से विकसित भारत संकल्प अभियान&#039; का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने संबोधन दिया। केंद्रीय मंत्री ने विकसित भारत का किया जिक्र केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि नशा मुक्त … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 14:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>पीएम, मोदी, ने, लॉन्च, किया, नशा, मुक्त, युवा, से, विकसित, भारत, अभियान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 'नशा मुक्त युवा से विकसित भारत संकल्प अभियान' का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने संबोधन दिया।</p>
<p><strong>केंद्रीय मंत्री ने विकसित भारत का किया जिक्र</strong><br>
केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि नशा मुक्त युवा से विकसित भारत संकल्प अभियान' के लॉन्च के अवसर पर प्रधानमंत्री हमारे साथ हैं। हम उनका स्वागत करते हैं। जब देश आजादी का अमृत महोत्सव वर्ष मना रहा था, उस वक्त लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री की ओर से विकसित भारत की संकल्पना की गई थी। इसी संकल्पना को साकार करने के लिए 140 करोड़ की जनता को सहयोगी के तौर पर देखा गया था। किसी भी देश को समृद्ध राष्ट्र बनने के लिए, देश के नागरिकों का स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक होता है।</p>
<p><strong>स्वस्थ समाज से ही समृद्ध राष्ट्र का होता है निर्माण</strong><br>
उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक की ओर से स्वस्थ समाज का निर्माण किया जाता है और स्वस्थ समाज से समृद्ध राष्ट्र का निर्माण होता है। स्वस्थ समाज बनाने के लिए प्रधानमंत्री की ओर से देश के युवा सशक्त हों, इसका आह्वान किया गया है। अमृत काल में प्रधानमंत्री की ओर से मार्गदर्शन किया गया, और उन्होंने कहा कि देश के युवा अमृत काल के सारथी हैं।</p>
<p><strong>'माई भारत' की उपलब्धि को किया रेखांकित</strong><br>
उन्होंने कहा कि युवा देश के लिए जिएं; युवाओं की अपेक्षाएं होती हैं, उनके मन में कई विचार होते हैं। युवाओं को मार्गदर्शन मिले, इसके लिए प्रधानमंत्री की ओर से 'माई भारत' की स्थापना की गई थी। 'माई भारत' युवा संगठन आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दो करोड़ 26 लाख युवाओं का संगठन बन चुका है।</p>
<p><strong>'नशा मुक्त भारत' की दिशा में किया काम शुरू</strong><br>
केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि इसी संगठन ने प्रधानमंत्री के संकल्प को आगे बढ़ाया है। 15 अगस्त, 2020 को प्रधानमंत्री की ओर से लाल किले से ये भी कहा गया था कि देश को 'नशा मुक्त' बनाना है। प्रधानमंत्री के 'नशा मुक्त भारत' के संकल्प को साकार करने के लिए 'माई भारत' युवा संगठन ने कमर कस ली है और इस दिशा में काम शुरू कर दिया है।</p>
<p><strong>दो दिवसीय आध्यात्मिक सम्मेलन का किया आयोजन</strong><br>
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि प्रधानमंत्री के इस संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए एक वर्ष पहले देश के सभी आध्यात्मिक गुरुओं और संगठनों के यूथ विंग्स को साथ लेकर, विविध नशा मुक्त कार्य से जुड़े लोगों को साथ लेकर दो दिवसीय आध्यात्मिक सम्मेलन का आयोजन किया गया था।</p>
<p><strong>सम्मेलन में दो दिनों तक चला विचारों पर मंथन</strong><br>
केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री ने आगे कहा कि आध्यात्मिक युवा सम्मेलन में दो दिनों तक विचार विमर्श किया गया। युवाओं की ओर से देश को नशा मुक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन के साथ आगे बढ़ने के लिए 'काशी आध्यात्मिक समिति घोषणा पत्र' कार्य योजना बनाया गया। इसमें तय किया गया कि आने वाले दिनों में किस तरह के कार्यक्रम चलाए जाएंगे।</p>
<p><strong>28 स्थानों पर हुआ कार्यक्रमों का आयोजन</strong><br>
उन्होंने कहा कि आज के कार्यक्रम में 26 राज्यों के राज्यपाल उपस्थित हैं। एक करोड़ से अधिक युवाओं की ओर से संकल्प लिया गया है। 28 स्थानों पर कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के एक आह्वान पर युवा शक्ति का जनआंदोलन खड़ा होना, बताता है कि प्रधानमंत्री पर मजबूत भरोसा कभी नहीं बदलने वाला है। मुझे विश्वास है कि यह अभियान युवाओं का जीवन बदलेगा।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>पीएम मोदी ने लॉन्च किया नशा मुक्त युवा&#45;विकसित भारत संकल्प अभियान</title>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 12:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को  'नशा मुक्त युवा – विकसित भारत संकल्प अभियान' कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं. देश के 1 करोड़ से ज्यादा युवा इस कार्यक्रम में शामिल जुड़ने वाले हैं. यह कार्यक्रम देश भर में 28,000 से ज़्यादा जगहों पर आयोजित किया जा रहा है. इस लॉन्च कार्यक्रम में कई मुख्यमंत्री और राज्यपाल भी हिस्सा ले रहे हैं.</p>
<p>यह कार्यक्रम 125 से ज़्यादा आध्यात्मिक संगठनों, स्कूलों, कॉलेजों, संस्थानों, सार्वजनिक संगठनों और औद्योगिक संघों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है. इसमें ब्रह्माकुमारीज़, इस्कॉन, चिन्मय मिशन और ऑरोविले के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी शामिल होंगे.</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा कि ड्रग्स जैसी घातक आदतों से दूर रहें, यही इस अभियान का संकल्प है. उन्होंने कहा, "हमें संकल्प लेना है कि हमारे युवा नशे और ड्रग्स के खतरों को समझें. हर तरह से जागरूक रहें और उससे दूर रहें. इस संकल्प में अब राष्ट्रीय नशामुक्ति अभियान की शुरूआत हुई."</p>
<p>प्रधानमंत्री ने इस बात की खुशी जताई कि काशी से पिछले साल इस अभियान के पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी. उन्होंने कहा, "काशी से इस अभियान का पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ इसलिए वैज्ञानिक पद्धता के साथ ही इसमें अध्यात्मिक ऊर्जा भी है. इसमें वह सांस्कृतिक समर्पण भी है जिसने सदियों से नशे को खारिज किया है. यही वजह से है कि देश के 125 से अधिक अध्यात्मिक संगठन देशवासियों के हित के लिए आज हमारे साथ जुड़ रहे हैं. सामाजिक संगठन, NGO ने इस दिशा में संकल्प लिया. सबने मिलकर काशी डिक्येरेशन के जरिए रोडमैप तैयार किया है."</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, "काशी से उठा वह कल्याणकारी विचार नेशनल प्रोजेक्ट बन गया है. आज से देश भर में नशामुक्त युवा अभियान शुरू हो रहा है. यह अभियान हर युवा वर्ग को जोड़ने वाला है. लाखों युवाओं ने थोड़ी देर पहले नशामुक्ति की शपथ ली है. यह संकल्प आने वाले 100 हफ्ते तक चलेगा. हर रविवार कला, संस्कृति, अध्यात्म और सेवा से जुड़ी गतिविधियां नशामुक्ति का संदेश नए लोगों तक पहुंचेगा. आने वाले 100 रविवार नशा मुक्त भारत की दिशा में 100 मजबूत कदम होंगे."</p>
<p>पीएम ने नशामुक्ति के लिए युवाओं को जागरूक करते हुए कहा कि नशा एक मां के सपने को चूर-चूर कर देता है, नशा एक बहन को उसके भाई से दूर कर देता हैं. पीएम ने युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया.</p>]]> </content:encoded>
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<title>Education Loan पर बड़ा फैसला! 10 दिन में होगा लोन अप्रूव, सरकार दोगुना करेगी कर्ज वितरण का लक्ष्य</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  केंद्र सरकार देश के छात्रों के लिए पढ़ाई का खर्च आसान करने के लिए एजुकेशन लोन के नियमों में बड़ी ढील देने जा रही है। सरकार का टारगेट अगले साल तक लोन बांटने की रफ्तार को दोगुना करना है। इसके लिए अब बैंकों को 10 दिन के भीतर लोन फाइनल करना होगा। बैंक … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 11:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 केंद्र सरकार देश के छात्रों के लिए पढ़ाई का खर्च आसान करने के लिए एजुकेशन लोन के नियमों में बड़ी ढील देने जा रही है। सरकार का टारगेट अगले साल तक लोन बांटने की रफ्तार को दोगुना करना है। इसके लिए अब बैंकों को 10 दिन के भीतर लोन फाइनल करना होगा। बैंक खुद 50 हजार कॉलेजों में जाकर कैंप लगाएंगे। साथ ही, बिना कुछ गिरवी रखे ज्यादा रकम का लोन देने और ब्याज में सब्सिडी देने की भी तैयारी है।</p>
<p>शिक्षा मंत्रालय और वित्त मंत्रालय मिलकर रोडमैप तैयार कर रहे हैं। इसमें राज्यों के शिक्षा विभागों, बैंक कमिटियों और उच्च शिक्षण संस्थानों को भी शामिल किया गया है। इसका मकसद छात्रों के लिए लोन लेना आसान बनाना है। बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 39,000 करोड़ रुपये के एजुकेशन लोन बांटे थे।</p>
<p><strong>अब 10 दिन में पास होगा लोन</strong><br>
एक अधिकारी ने TOI को बताया, करीब 50,000 बड़े कॉलेजों-संस्थानों में बैंक कैंप लगाएंगे ताकि छात्रों को मौके पर ही लोन मिल सके। बैंकों को निर्देश है कि वे लोन की प्रक्रिया को घटाकर 10 दिन तक लाएं। मतलब, आवेदन के 10 दिन के भीतर लोन फाइनल हो जाना चाहिए।</p>
<p><strong>छात्रों के लिए राहत<br>
10 दिन: लोन पास करने की नई समय सीमा का लक्ष्य।<br>
50,000: कॉलेजों में बैंक कैंप लगाकर लोन देंगे।<br>
7.5 लाख: वर्तमान में बिना गारंटी वाले (कोलैटरल फ्री) लोन सीमा।<br>
20 लाख रुपये: संसदीय समिति द्वारा सुझाई गई नई गारंटी सीमा।<br>
3,600 करोड़ रुपये: पीएम विद्यालक्ष्मी योजना के लिए ब्याज सब्सिडी का बजट (2024-31)।<br>
39,000 करोड़ रुपये: वित्त वर्ष 2025-26 में कुल बांटे गए लोन।<br>
3,80,000: वित्त वर्ष 2025-26 में मंजूर किए गए कुल आवेदन।</strong></p>
<p>
<strong>क्या है सरकार की योजना?</strong><br>
फिलहाल, नैशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी की क्रेडिट गारंटी फंड स्कीम फॉर एजुकेशन लोन्स (CGFSEL) के तहत 7.5 लाख रुपये तक के लोन पर 75% की गारंटी मिलती है। दिसंबर 2025 में एक संसदीय समिति ने इसे 20 लाख रुपये तक करने की सिफारिश की थी। मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बताया कि प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना (PMVLS) के तहत साल 2024-25 से 2030-31 के बीच व्याज में छूट (सब्सिडी) देने के लिए 3,600 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।</p>
<p>छो<strong>टे-मोटे चार्ज भी नहीं लगेंगे</strong><br>
बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि करीब 1.000 ऐसे संस्थानों की पहचान पहले ही की जा चुकी है, जहां छात्रों को हाथों-हाथ लोन की सुविधा दी जा रही है। उन्होने बताया कि कुछ मामलों में बैंक दूसरे छोटे-मोटे चार्ज भी माफ कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में 3,80,000 से ज्यादा एजुकेशन लोन मंजूर किए गए थे।</p>
<p><strong>गारंटी कवर बढ़ाने पर विचार</strong><br>
सरकार बिना कुछ गिरवी रखे (कोलैटरल-फ्री) मिलने वाले लोन के लिए गारंटी कवर बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। इससे बैंक 7.5 लाख रुपये की मौजूदा सीमा से ज्यादा का लोन बिना किसी गारंटी के दे सकेंगे। इस स्कीम के तहत ब्याज दरें भी एक तय सीमा (बेंचमार्क लेंडिंग रेट 50 बेसिस पॉइंट्स) के भीतर रखी गई है। अधिकारी ने कहा कि जिन लोन पर गारंटी कवर मिलता है, उनमें अब साथ में किसी सह आवेदक की शर्त को हटाने पर भी विचार हो रहा है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>2029 चुनाव में Gen Z बनेगा सबसे बड़ा गेमचेंजर? हर चौथा वोटर होगा युवा, क्या कहते हैं आंकड़े</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली छात्रों के विरोध प्रदर्शनों की लहर, जिसके परिणामस्वरूप केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा, ने एक राजनीतिक वास्तविकता को और मजबूत कर दिया है जिसे सरकारें अब नजरअंदाज नहीं कर सकतीं: भारत की जेनरेशन जेड देश के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक समूहों में से एक के रूप में उभर रही है। … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 11:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>छात्रों के विरोध प्रदर्शनों की लहर, जिसके परिणामस्वरूप केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा, ने एक राजनीतिक वास्तविकता को और मजबूत कर दिया है जिसे सरकारें अब नजरअंदाज नहीं कर सकतीं: भारत की जेनरेशन जेड देश के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक समूहों में से एक के रूप में उभर रही है।</p>
<p>NEET-UG परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन जल्द ही पारदर्शिता, जवाबदेही और भारत की शिक्षा प्रणाली के भविष्य पर एक व्यापक चर्चा में तब्दील हो गया। इस आंदोलन ने यह भी उजागर किया कि डिजिटल रूप से तेजी से जुड़ चुके युवा भारतीय किस प्रकार राष्ट्रीय विमर्श को आकार दे सकते हैं और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं।</p>
<p>ये विरोध प्रदर्शन एक बहुत बड़े राजनीतिक बदलाव की झलक साबित हो सकते हैं। 2029 के आम चुनाव तक, जेनरेशन Z देश की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी बन चुकी होगी, जिससे यह एक ऐसी चुनावी ताकत बन जाएगी जिसे कोई भी राजनीतिक दल नजरअंदाज नहीं कर सकता।</p>
<p>
<strong>भारत की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी</strong><br>
2029 तक, 18 से 32 साल की उम्र वाले 'Gen Z' की आबादी लगभग 38 करोड़ होने का अनुमान है, जिसमें लगभग 19.9 करोड़ पुरुष और 18.1 करोड़ महिलाएं शामिल होंगी। यह उन्हें भारत की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी बना देगा, जो 'मिलेनियल्स' (Millennials) से आगे निकल जाएगी, जिनकी आबादी निकल जाएगी, जिसकी आबादी लगभग 35.7 करोड़ होने का अनुमान है।</p>
<p>इस बदलाव का महत्व केवल आबादी के आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। 'Gen Z'देश में छात्रों, पहली बार वोट देने वालों, करियर की शुरुआत करने वाले पेशेवरों और युवा परिवारों का सबसे बड़ा समूह होगा। इसलिए, रोजगार, शिक्षा, खर्च की क्षमता, आवास, जलवायु परिवर्तन और शासन जैसे मुद्दे राजनीतिक रूप से और भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।</p>
<p>इनके पीछे 'जेन अल्फा' (Generation Alpha) की और भी बड़ी पीढ़ी तैयार हो रही है। हालांकि, 2029 में इसके सदस्य वोट देने की उम्र से कम होंगे, लेकिन उनकी आबादी 41.7 करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान है, जो कुल मिलाकर भारत की सबसे बड़ी पीढ़ी होगी।</p>
<p><strong>हिस्सा कम, लेकिन वोट ज्यादा प्रभावशाली</strong><br>
भले ही 'Gen Z'की भारत की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी बन रही है, लेकिन वोटरों में युवाओं की कुल हिस्सेदारी लगातार कम हो रही है क्योंकि भारत की आबादी धीरे-धीरे बूढ़ी हो रही है। 1988 में भारत की वोट देने लायक आबादी में 18 से 29 साल के लोगों की हिस्सेदारी 38.3 प्रतिशत थी। 2024 तक यह हिस्सा घटकर 30.1 प्रतिशत हो गया और यूएन के अनुमान बताते हैं कि 2019 तक यह और घटकर 27.8 प्रतिशत हो जाएगी।</p>
<p><strong>दूसरे शब्दों में, इस दशक के आखिर तक हर चार योग्य वोटर में लगभग एक वोटर 18-29 साल की उम्र का होगा।</strong></p>
<p>लेकिन सिर्फ संख्या ही राजनीतिक असर तय नहीं करती। 'Gen Z' में बड़ी संख्या के साथ-साथ जबरदस्त डिजिटल कनेक्टिविटी, बेहतर शिक्षा की चाहत और सोशल मीडिया के जरिए तेजी से लोगों को एकजुट करने की क्षमता भी है। हाल के छात्र विरोध-प्रदर्शनों ने दिखाया है कि युवाओं पर असर डालने वाले मुद्दे कितनी तेजी से राष्ट्रीय राजनीतिक एजेंडे पर छा सकते हैं।</p>
<p>राजनीतिक पार्टियों के लिए, 'Gen Z' का समर्थन हासिल करना उतना ही जरूरी हो सकता है जितना कि बुजुर्ग वोटरों का समर्थन बनाए रखना।</p>
<p><strong>बूढ़ी हो रही भारत की आबादी</strong><br>
'Gen Z' का उभार एक बड़े डेमोग्राफिक बदलाव के साथ-साथ हो रहा है। भारत की आबादी बूढ़ी हो रही है, बच्चों की हिस्सेदारी लगातार कम हो रही है, जबकि ज्यादा उम्र वाले लोगों की आबादी में हिस्सेदारी बढ़ रही है।</p>
<p>पुरुषों में, 18 साल से कम उम्र वालों की हिस्सेदारी 1989 में 45.2 प्रतिशत से घटकर 2029 में 27.8 प्रतिशत होने का अनुमान है। महिलाओं में, इसी दौरान यह 44.8 प्रतिशत से घटकर 27.3 होने की उम्मीद है।</p>
<p>वहीं, 46 से 61 साल की उम्र के लोगों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ है। पुरुषों में यह 10.9 प्रतिशत से बढ़कर 18.3 प्रतिशत और महिलाओं में 11.3 प्रतिशत से बढ़कर 18.6 प्रतिशत हो गई है।</p>
<p>62 साल और उससे ज्यादा उम्र की आबादी और भी तेजी से बढ़ी है। पुरुषों में इस ग्रुर की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत से लगभग दोगुनी होकर 9.9 प्रतिशत होने का अनुमान है, जबकि महिलाओं में इसके 5.7 प्रतिशत से बढ़कर 11.3 प्रतिशत होने की उम्मीद है, जो महिलाओं की ज्यादा उम्र तक जीने की क्षमताओं को दिखाता है।</p>
<p>जैसे-जैसे भारत की आबादी बूढ़ी हो रही है, युवा आबादी से मिलने वाला डेमोग्राफिर डिविडेंड धीरे-धीरे कम होता जाएगा। इसलिए अभी का समय बहुत अहम है। 'Gen Z' ऐसे समय में वयस्क हो रही है, जब यह देश की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी, सबसे ज्यादा डिजिटल रूप से जुड़ी और सबसे ज्यादा जागरूक पीढ़ी बन रही है।</p>
<p>NEET विवाद को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों को शायद सिर्फ एक परीक्षा से जुड़े आंदोलन के तौर पर नहीं, बल्कि इस पीढ़ी के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव के शुरुआती प्रदर्शन के तौर पर याद किया जाएगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>त्योहारों से पहले महंगाई का झटका! टूथपेस्ट, पेंट समेत कई रोजमर्रा के सामान होंगे महंगे</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  अभी मानसून का सीजन चल रहा है. जैसे ही मानसून विदा होगा भारतीय त्‍योहारों के स्‍वागत की तैयारियां शुरू कर देंगे. घर के रंग-रोगन कराने से लेकर रसोई में नए साज्‍जो-सामान लाने की योजना बनने लगेगी. लेकिन, पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव आने वाले त्‍योहारी सीजन में आम उपभोक्‍ता के जेब पर … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 09:45:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>त्योहारों, से, पहले, महंगाई, का, झटका, टूथपेस्ट, पेंट, समेत, कई, रोजमर्रा, के, सामान, होंगे, महंगे</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 अभी मानसून का सीजन चल रहा है. जैसे ही मानसून विदा होगा भारतीय त्‍योहारों के स्‍वागत की तैयारियां शुरू कर देंगे. घर के रंग-रोगन कराने से लेकर रसोई में नए साज्‍जो-सामान लाने की योजना बनने लगेगी. लेकिन, पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव आने वाले त्‍योहारी सीजन में आम उपभोक्‍ता के जेब पर भारी पड़ने वाला है. इसका कारण यह है कि टूथपेस्ट, कपड़े धोने के सर्फ और घर की दीवारों पर लगने वाले पेंट से लेकर टायरों तक के दाम बढ़ाने का मन कंपनियों ने बना लिया है। </p>
<p>फेस्टिव सीजन से पहले एफएमसीजी (FMCG) और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियां लगातार दूसरी तिमाही में दाम बढ़ाने की सोच रही हैं. ब्‍लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसान, हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), एशियन पेंट्स, हैवेल्स और डोडला डेयरी समेत कम से कम 8 बड़ी कंपनियां अपने प्रोडक्‍ट्स के रेट बढ़ाएंगी. अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से कच्चे माल और कमोडिटी की लागत बढ़ गई है. इससे कंपनियों के खर्च में इजाफा हो गया है. बढ़े हुई लागत का भार कंपनियां आम आदमी पर ही डालेगी. नोमुरा होल्डिंग्स की एशिया (जापान को छोड़कर) की मुख्य अर्थशास्त्री सोनल वर्मा का कहना है कि इनपुट लागत और कंपनियों के मार्जिन पर बढ़ते दबाव को देखते हुए कीमतों में कुछ बढ़ोतरी होना लगभग तय है। </p>
<p><strong>विम और सर्फ एक्‍सेल के बढ़ सकते हैं दाम</strong><br>
हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) ने संकेत दिया है कि अगले कुछ महीनों में डिटर्जेंट और बर्तन धोने वाले बार जैसे उत्पादों की कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की जाएगी. कंपनी विम, सर्फ एक्‍सेल, रिन और व्‍हील जैसे ब्रांड बनाती हैं. एचयूएल के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) निरंजन गुप्ता ने विश्लेषकों से कहा कि बाहरी अस्थिरता के चलते कच्चे तेल से जुड़े डेरिवेटिव की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. ऐसे में होम केयर उत्पादों की विभिन्न श्रेणियों में चरणबद्ध तरीके से कीमतें बढ़ाई जा रही हैं। </p>
<p><strong>पेंट भी होगा महंगा</strong><br>
एशियन पेंट्स और डोडला डेयरी समेत कम से कम सात अन्य कंपनियां भी कीमतें बढ़ाने की योजना बना रही हैं. इसकी जानकारी कंपनियों ने तिमाही नतीजों के बाद आयोजित कॉन्फ्रेंस कॉल और मीडिया ब्रीफिंग में दी है. ऐसा होने पर घर के रंग-रोगन के लिए जरूरी पेंट के साथ ही साबून, टूथपेस्‍ट और घी-मक्‍खन जैसे रोज इस्‍तेमाल होने वाले उत्‍पाद महंगे हो जाएंगे। </p>
<p><strong>मांग मजबूत तो बोझ ग्राहकों पर</strong><br>
रक्षाबंधन, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली, ये चार त्‍योहार कंपनियों की तिजोरी के लिए सबसे अहम होते हैं. पूरे साल की कुल बिक्री का एक-तिहाई हिस्सा इसी दौरान आता है. त्योहारों में लोग खरीदारी रोकते नहीं हैं. इसी का फायदा कंपनियां उठाना चाहती हैं और वे अपनी बढ़ी हुई इनपुट लागत का बोझ सीधा आम जनता की जेब पर पास ऑन करने जा रही हैं. ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उपभोक्ता मांग अब तक स्थिर बनी हुई है. रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सर्वे के मुताबिक जून में खुदरा बिक्री पिछले वर्ष की तुलना में 6% बढ़ी, जो मई के मुकाबले बेहतर रही। </p>
<p>द नॉलेज कंपनी के चेयरमैन अरविंद सिंघल ने कहा कि फिलहाल मांग संतोषजनक स्थिति में है. हालांकि, कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी के असर और कमजोर मानसून से जुड़े जोखिमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. भारत में पिजा हट और केएफसी क संचालन करने वली कंपनी देवयानी इंटरनेशनल के चेयरमैन रवि कांत जयपुरिया ने कहा कि अभी मांग स्थिर है, लेकिन सामान्य से कमजोर मानसून और एल-नीनो का खतरा यह याद दिलाता है कि भारत में खपत की रिकवरी हमेशा सीधी रेखा में आगे नहीं बढ़ती। </p>
<p><strong>सरकार और रिजर्व बैंक के सामने चैलेंज</strong><br>
जून में खुदरा महंगाई दर डेढ़ साल में पहली बार RBI के 4% के प्राइमरी टारगेट को पार कर चुकी है. वित्त मंत्रालय का कहना है कि महंगाई अब सिर्फ आलू-प्याज और दाल-चावल तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर अब अन्‍य प्रोडक्‍ट्स पर भी पड़ेगा जिनका इस्‍तेमाल आम आदमी रोजाना करता है। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>PM Kisan 24th Installment: 24वीं किस्त पर बड़ा अपडेट, जानें किसानों के खाते में कब आएंगे ₹2,000</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं तो ये खबर आपके काम की हो सकती है। दरअसल, सरकार नवरात्रि के दौरान 24वीं किस्त को ट्रांसफर कर सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 09:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं तो ये खबर आपके काम की हो सकती है। दरअसल, सरकार नवरात्रि के दौरान 24वीं किस्त को ट्रांसफर कर सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले से PM-किसान योजना की 23वीं किस्त जारी की थी। इसके तहत, 9.44 करोड़ किसानों को ₹18,880 करोड़ ट्रांसफर किए गए थे।</p>
<p><strong>eKYC करवाना जरूरी</strong><br>
PM-किसान में रजिस्टर्ड किसानों के लिए eKYC करवाना जरूरी है। योजना में eKYC पूरा करने के लिए आप PM-KISAN मोबाइल ऐप या पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं। अब eKYC के लिए फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा उपलब्ध है। मोबाइल ऐप पर अपनी फोटो स्कैन करके घर बैठे eKYC कर सकते हैं। कहने का मतलब है कि OTP या फिंगरप्रिंट की जरूरत नहीं है। अगर मोबाइल ऐप इस्तेमाल नहीं करना चाहते, तो नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर भी eKYC करवा सकते हैं। eKYC पूरा होने के बाद आपकी किस्त की राशि सीधे आपके आधार लिंक बैंक खाते में ट्रांसफर होती है।</p>
<p><strong>योजना के बारे में</strong><br>
भारत सरकार द्वारा छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता देने के लिए इस योजना की शुरुआत की गई। योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल तीन बराबर किस्तों में ₹6000 की आय सहायता दी जाती है। एक तरह से किसानों को हर चार महीने पर ₹2000 की किस्त मिलती है। पहली किस्त अप्रैल–जुलाई, दूसरी किस्त अगस्त–नवंबर और तीसरी किस्त दिसंबर–मार्च में दी जाती है।</p>
<p>लाभार्थियों को ये रकम बैंक खाते में डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण) के माध्यम से भेजी जाती है। केवल वही किसान परिवार योजना का लाभ उठा सकते हैं जिनकी भूमि उनके नाम पर है और वे छोटे या सीमांत किसान हैं। सरकार की ओर से लाभार्थियों की पहचान राज्य सरकारों द्वारा की जाती है और आवेदन ग्राम पंचायत, कृषि विभाग या सरकारी पोर्टल पर किया जा सकता है। आवेदन के लिए किसान को अपनी भूमि संबंधी दस्तावेज, बैंक खाता, आधार कार्ड आदि जमा करने होते हैं।</p>
<p>किस्त की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर होती है जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाती है। किसानों को किसी भी किस्त की स्थिति जानने के लिए पीएम-किसान पोर्टल या मोबाइल ऐप पर अपना पंजीकरण नंबर डालकर जानकारी मिल सकती है। बता दें कि पीएम-किसान पोर्टल पर शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं। शिकायत के लिए रजिस्टर्ड और समस्या का विवरण देना जरूरी है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>LPG E&#45;KYC: 16 अगस्त तक e&#45;KYC नहीं कराया तो क्या बंद हो जाएगा गैस सिलेंडर? जानें सच्चाई</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  रसोई गैस सिलेंडर बिना तो अब किचन की कल्‍पना भी नहीं की जा सकती. अब लगभग हर घर में गैस सिलेंडर है. सरकार सब्सिडी पर आम आदमी को घरेलू गैस उपलब्‍ध कराती है. सिलेंडर हकदार आदमी को ही मिले, इसके लिए तेल कंपनियों ने ‘नो योर कस्‍टमर’ (KYC) के अनिवार्य किया है. सोशल … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 09:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>LPG, E-KYC:, अगस्त, तक, e-KYC, नहीं, कराया, तो, क्या, बंद, हो, जाएगा, गैस, सिलेंडर, जानें, सच्चाई</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 रसोई गैस सिलेंडर बिना तो अब किचन की कल्‍पना भी नहीं की जा सकती. अब लगभग हर घर में गैस सिलेंडर है. सरकार सब्सिडी पर आम आदमी को घरेलू गैस उपलब्‍ध कराती है. सिलेंडर हकदार आदमी को ही मिले, इसके लिए तेल कंपनियों ने ‘नो योर कस्‍टमर’ (KYC) के अनिवार्य किया है. सोशल मीडिया और एसएमएस के माध्‍यम से हिन्‍दुस्‍तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन जैसी कं‍पनियां ग्राहकों से अपना केवाईसी पूरा करने की अपील कर रही हैं. कुछ ऐसी भी खबरें चल रही हैं कि 16 अगस्‍त तक अगर कोई ग्राहक अपना ई-केवाईसी पूरा नहीं करेंगे, उनका आगे से गैस सिलेंडर बुक नहीं होगा और न ही सब्सिडी मिलेगी। </p>
<p>यह खबर पूरी तरह सही नहीं है. क्‍योंकि कंपनियों ने लोगों से अपना ई-केवाईसी पूरा करने की अपील जरूर की है, लेकिन स्‍पष्‍ट रूप से ऐसा नहीं कहा है कि उनके गैस सिलेंडर की बुकिंग रोक दी जाएगी या उन्‍हें बाजार दर पर सिलेंडर लेना होगा. भारत पेट्रोलियम ने 1 अगस्‍त को अपने आधिकारिक एक्‍स अकाउंट पर एक पोस्‍ट शेयर की. इसमें लिखा था, “बिना किसी रुकावट के एलपीजी सेवा का लाभ जारी रखने के लिए अपना ई-केवाईसी पूरा करें. आसानी से HelloBPCL App के माध्यम से, या आपके गैस एजेंसी जाकर eKYC पूरा करें.” हिन्‍दुस्‍तान पेट्रोलियम ने भी एक्‍स पर जो पोस्‍ट की है, उसमें भी गैस बुकिंग बंद होने की बात नहीं कही गई है। </p>
<p><strong>जरूरी है ईकेवाईसी</strong><br>
घरेलू गैस उपभोक्‍ता के लिए केवाईसी करवाना अनिवार्य है. इससे यह सत्‍यापित हो जाता है कि गैस सिलेंडर सही और पात्र व्‍यक्ति को ही मिल रहा है. लेकिन, कंपनियों के बार-बार कहने के बावजूद भी बड़ी संख्‍या में एलपीजी उपभोक्‍ताओं ने अभी केवाईसी नहीं कराया है. अकेले मध्‍य प्रदेश में ही 39 लाख से ज्यादा ग्राहकों की ई-केवाईसी नहीं हुई है। </p>
<p><strong>कैसे करवाएं एलपीजी ई-केवाईसी?</strong></p>
<p>राहत की बात यह है कि ई-केवाईसी की प्रक्रिया बेहद आसान है. आप इसे 3 तरीकों से पूरा कर सकते हैं-</p>
<p><strong>    मोबाइल ऐप से: </strong>आप इंडियन ऑयल के ग्राहक हैं तो IndianOil ONE ऐप से और अगर हिन्‍दुस्‍तान पेट्रोलियम के कस्‍टमर हैं तो एचपी पे ऐप से घर बैठे बायोमीट्रिक/फेस ऑथेंटिकेशन के माध्‍यम से केवाईसी की प्रक्रिया पूर कर सकते हैं.</p>
<p><strong>    गैस एजेंसी जाकर</strong>: अपने आधार कार्ड और गैस कनेक्‍शन की पास बुक लेकर गैस एजेंसी जाएं और वहां अपने फिंगरप्रिंट की सहायता से ई-केवाईसी पूरा करें.</p>
<p><strong>    डिलीवरी बॉय की मदद</strong> से: जब सिलेंडर घर आए, तो डिलीवरी मैन के पास मौजूद मशीन से बायोमीट्रिक सत्यापन कराकर आप ई-केवाईसी करा सकते हैं.</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>₹125 का पेट्रोल ₹95 से भी कम में? E20 ईंधन पर मोदी सरकार का बड़ा दावा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली केंद्र सरकार ने अपने E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग पेट्रोल प्रोग्राम का एक बार फिर से बचाव किया है। इसके साथ ही सरकार ने यह भी दावा किया कि अगर इथेनॉल ब्लेंडिंग से भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम नहीं हुई होती तो हालिया पश्चिम एशिया संकट के दौरान पेट्रोल की कीमतें ₹125 … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 22:45:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>₹125, का, पेट्रोल, ₹95, से, भी, कम, में, E20, ईंधन, पर, मोदी, सरकार, का, बड़ा, दावा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>केंद्र सरकार ने अपने E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग पेट्रोल प्रोग्राम का एक बार फिर से बचाव किया है। इसके साथ ही सरकार ने यह भी दावा किया कि अगर इथेनॉल ब्लेंडिंग से भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम नहीं हुई होती तो हालिया पश्चिम एशिया संकट के दौरान पेट्रोल की कीमतें ₹125 प्रति लीटर तक पहुंच सकती थीं। अभी देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 95 रुपये से भी कम पर बिक रहा है।</p>
<p><strong>क्या कहा सरकार ने?</strong><br>
लोकसभा में पेश किए गए एक लिखित बयान में, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया, ‘’हाल ही में ग्लोबल संकट के दौरान E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम ने ग्राहकों को ग्लोबल स्तर पर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाने में अहम भूमिका निभाई। इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ीं लेकिन सरकार के सही समय पर किए गए उपायों और देश में बने इथेनॉल के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से घरेलू पेट्रोल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी ही हुई।''</p>
<p>सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इस हालात में पेट्रोल की मार्केट कीमत लगभग ₹125 प्रति लीटर हो सकती थी। हालांकि, भारतीय ग्राहकों को ₹94.77 प्रति लीटर (दिल्ली में) ही चुकाना पड़ा क्योंकि पब्लिक सेक्टर की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां लगभग ₹70 प्रति लीटर की दर से इथेनॉल खरीद पा रही थीं।</p>
<p><strong>कैसे लागू किया गया ब्लेंडिंग पेट्रोल?</strong><br>
लोकसभा में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लिखित जवाब में बताया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग पेट्रोल प्रोग्राम को नीति आयोग, व्हीकल मैन्युफैक्चरर, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम), तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) और अन्य तकनीकी संस्थानों के साथ परामर्श कर चरणबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से लागू किया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि एआरएआई, सियाम, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारतीय पेट्रोलियम संस्थान और व्हीकल मैन्युफैक्चरर द्वारा किए गए लैब स्टडी और क्षेत्रीय परीक्षणों से पुष्टि हुई है कि निर्धारित मानकों के तहत E20 फ्यूल का उपयोग सुरक्षित है।</p>
<p>सरकार ने कहा कि व्यापक स्तर पर E15प्लस पेट्रोल (15 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग पेट्रोल) का इस्तेमाल साढ़े तीन साल से अधिक समय से और E19-E20 (19/20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग पेट्रोल) ईंधन का उपयोग ढाई साल से अधिक समय से हो रहा है। उसने कहा कि 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और तीन करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें इन ब्लेंडिंग ईंधनों के जरिये चल रही हैं लेकिन इथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण व्यापक स्तर पर इंजन खराब होने या वाहनों के बड़े पैमाने पर खराब होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।</p>
<p>मंत्री ने कहा कि वाहन विनिर्माताओं के आंकड़ों से भी ई20 ईंधन के कारण इंजन को असामान्य नुकसान पहुंचने, उनमें जंग लगने या वाहन की आयु घटने की बात सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि विनिर्माता ई20 ईंधन का उपयोग करने वाले वाहनों के लिए वारंटी दायित्वों को पूरा कर रहे हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>रूसी सेना में मारे गए भारतीयों का DNA टेस्ट कराने का सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, पहचान प्रक्रिया होगी तेज</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली रूस-यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना की ओर से लड़ते हुए जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम और संवेदनशील फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय (MEA) को निर्देश दिया है कि रूस से भारत लाए जाने वाले 20 भारतीय … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 21:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>रूसी, सेना, में, मारे, गए, भारतीयों, का, DNA, टेस्ट, कराने, का, सुप्रीम, कोर्ट, का, निर्देश, पहचान, प्रक्रिया, होगी, तेज</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>रूस-यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना की ओर से लड़ते हुए जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम और संवेदनशील फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय (MEA) को निर्देश दिया है कि रूस से भारत लाए जाने वाले 20 भारतीय नागरिकों के शवों को परिजनों को सौंपने से पहले अनिवार्य रूप से डीएनए टेस्ट कराया जाए ताकि उनकी सही पहचान सुनिश्चित हो सके।</p>
<p>चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने विदेश मंत्रालय को पीड़ित परिवारों की मदद के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का भी आदेश दिया है।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बड़ी बातें</strong><br>
<strong>DNA मिलान अनिवार्य: </strong>कोर्ट ने कहा कि विदेश मंत्रालय मृत नागरिकों के अवशेषों का परिजनों के साथ डीएनए टेस्ट कराएगा। डीएनए सैंपल मैच होने के बाद ही पार्थिव शरीर आधिकारिक तौर पर परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंपा जाएगा।</p>
<p><strong>मुफ्त कानूनी सहायता:</strong> अदालत ने राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों (NALSA/SLSA) को निर्देश दिया कि वे पीड़ित परिवारों को मुआवजा दावा करने और डीएनए सैंपल देने की प्रक्रिया के लिए फ्री कानूनी सहायता उपलब्ध कराएं।</p>
<p><strong>क्षेत्रीय भाषाओं में जानकारी: </strong>कोर्ट ने निर्देश दिया कि विदेश मंत्रालय मुआवजे और कागजी कार्रवाई से जुड़ी सभी जानकारियां और दस्तावेज पीड़ित परिवारों को उनकी क्षेत्रीय/स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराए ताकि उन्हें समझने में सहूलियत हो।</p>
<p><strong>सरकार ने दी मौतों और लापता भारतीयों की रिपोर्ट</strong><br>
केंद्र सरकार ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को रूसी सेना में शामिल हुए भारतीय नागरिकों का ताजा आंकड़ा सौंपा:</p>
<div>
<table>
<thead>
<tr>
<th>कैटेगरी</th>
<th>संख्या</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><strong>रूसी सेना में शामिल कुल भारतीय</strong></td>
<td><strong>करीब 217 या 219</strong></td>
</tr>
<tr>
<td><strong>कॉन्ट्रैक्ट से पहले रिहा हुए</strong></td>
<td><strong>139</strong></td>
</tr>
<tr>
<td><strong>मौतों की पुष्टि</strong></td>
<td><strong>51</strong></td>
</tr>
<tr>
<td><strong>भारत लाए जा चुके पार्थिव शरीर</strong></td>
<td><strong>29</strong></td>
</tr>
<tr>
<td><strong>रूस में स्थानीय स्तर पर अंतिम संस्कार</strong></td>
<td><strong>2</strong></td>
</tr>
<tr>
<td><strong>भारत लाए जाने बाकी शव</strong></td>
<td><strong>20</strong></td>
</tr>
<tr>
<td><strong>लापता या जिनकी तलाश जारी है</strong></td>
<td><strong>29 (5 की रूस ने पुष्टि की, 24 की तलाश जारी)</strong></td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
<div>
<p><strong>DNA टेस्ट का मुद्दा क्यों उठा? </strong></p>
<p>याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कोर्ट में चिंता जताई थी कि युद्ध क्षेत्र से लाए जा रहे ताबूतों में केवल कंकाल और क्षत-विक्षत अवशेष मिल रहे हैं, जिससे बिना डीएनए जांच के परिजनों के लिए यह पहचानना असंभव है कि वे अवशेष उनके ही रिश्तेदार के हैं या नहीं।</p>
</div>
<p>केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने साफ किया कि भारत सरकार पहले से ही मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के जरिए डीएनए सैंपल इकट्ठा कर रही है और बिना मिलान के कोई भी शव नहीं सौंपा जा रहा है।</p>
<p>केंद्र ने अदालत को यह भी बताया कि युद्धग्रस्त इलाकों में लगातार ड्रोन हमलों और विस्फोटों के कारण मृत सैनिकों के अवशेषों को खोज पाना और रिकवर करना बेहद चुनौतीपूर्ण काम बना हुआ है।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>‘आजादी का मतलब मनमर्जी नहीं’, Gen&#45;Z को अजीत डोभाल का बड़ा संदेश</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली महाराष्ट्र के पुणे में शनिवार को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ. इस मौके पर गृहमंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) प्रमुख अजित डोभाल को &#039;लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026&#039; से सम्मानित किया. सम्मान स्वरूप उन्हें पारंपरिक पुणेरी पगड़ी, स्मृति चिह्न, चेक, गीता रहस्य की … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 21:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>‘आजादी, का, मतलब, मनमर्जी, नहीं’, Gen-Z, को, अजीत, डोभाल, का, बड़ा, संदेश</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>महाराष्ट्र के पुणे में शनिवार को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ. इस मौके पर गृहमंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) प्रमुख अजित डोभाल को 'लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026' से सम्मानित किया. सम्मान स्वरूप उन्हें पारंपरिक पुणेरी पगड़ी, स्मृति चिह्न, चेक, गीता रहस्य की प्रति भेंट की गई. पुरस्कार मिलने के बाद अपने संबोधन में डोभाल ने युवाओं को आजादी का सही मतलब समझने की बात कही, साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व की भी खुलकर सराहना की। </p>
<p>अजित डोभाल ने कहा कि हम बेहद सौभाग्यशाली हैं कि देश को पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसा मजबूत नेतृत्व मिला है. भारत इस समय आंतरिक, बाहरी दोनों तरह की चुनौतियों से निपट रहा है. देश तेजी से आगे बढ़ रहा है, इसलिए कई विरोधी ताकतें उसकी तरक्की से परेशान हैं. ऐसे समय में हर नागरिक को सबसे पहले सिर्फ देशहित के बारे में सोचना चाहिए। </p>
<p><strong>'आजादी का सही मतलब समझना होगा'</strong></p>
<p>युवाओं को बड़ी सीख देते हुए डोभाल ने कहा कि 'आज की पीढ़ी को आजादी का असली अर्थ जानना बेहद जरूरी है. कुछ लोग मान लेते हैं कि आजादी का मतलब मनमर्जी या कुछ भी करना है, जबकि ऐसी सोच बिल्कुल गलत है'. उन्होंने साफ कहा कि जो रास्ता राष्ट्रहित के खिलाफ हो, उस पर कदम भी नहीं बढ़ाना चाहिए. भारत को शक्तिशाली बनाना हम सभी का पहला कर्तव्य है। </p>
<p>अजित डोभाल ने अपने बचपन की यादें साझा करते हुए बताया कि शुरुआती पढ़ाई के दौरान पुणे में ही उन्होंने पहली बार लोकमान्य तिलक के विचारों को विस्तार से जाना था. अंग्रेजों के शासन में जब लोग डरकर चुप रहते थे, तब तिलक जी ने निडर होकर आवाज बुलंद की थी. जेल जाने के बाद भी उन्होंने समाज सेवा का मार्ग नहीं छोड़ा. डोभाल ने युवाओं से अपील की कि वे तिलक जी के जीवन, उनके संघर्षों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। </p>
<p><strong> राष्ट्रीय सुरक्षा में ऐतिहासिक योगदान</strong><br>
अजित डोभाल भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। उन्होंने देश के कई बेहद संवेदनशील इलाकों में अपनी सेवाएं दी हैं। मिजोरम, पंजाब, सिक्किम और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में शांति और सुरक्षा कायम करने में उनकी भूमिका बेहद अहम रही है।</p>
<p>इसके अलावा वे भारत और चीन के बीच सीमा वार्ता के लिए भारत के विशेष प्रतिनिधि भी रहे हैं। वर्ष 2017 के डोकलाम संकट के समय उन्होंने जिस तरह कूटनीतिक रास्ते से स्थिति को संभाला, उसकी सराहना पूरी दुनिया में हुई थी। भारतीय खुफिया तंत्र को मजबूत बनाने और देश की सुरक्षा रणनीति को नया रूप देने में उनके योगदान को देखते हुए ही तिलक स्मारक ट्रस्ट ने उन्हें इस पुरस्कार के लिए चुना है।</p>
<p><strong>पुणे के मंच से युवाओं को सीधा संदेश</strong><br>
अपने संबोधन में एनएसए अजित डोभाल ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को यह समझना होगा कि आजादी इतनी आसानी से नहीं मिली है। कई महान हस्तियों ने इसके लिए अपनी जान की बाजी लगाई थी। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग अपने अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन उन अधिकारों के पीछे छिपे त्याग को भूल जाते हैं।</p>
<p>डोभाल ने लोकमान्य तिलक के जीवन का एक भावुक प्रसंग साझा किया। जब पुणे में प्लेग की महामारी फैली थी, उस समय तिलक जी के 21 साल के बेटे का निधन हो गया था। इसके बावजूद वे शहर छोड़कर नहीं गए। वे लोगों की मदद के लिए वहीं डटे रहे। डोभाल ने कहा कि स्वतंत्रता केवल अपनी मनमर्जी करने का नाम नहीं है, बल्कि यह देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का माध्यम है।</p>
<p>इस अवसर पर बोलते हुए अमित शाह ने लोकमान्य तिलक और लोकशाहिर अन्नाभाऊ साठे के कार्यों को याद किया। उन्होंने अजित डोभालऔर लोकमान्य तिलक के बीच समानताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वे अजित डोभालको तब से जानते हैं जब वे गुजरात के गृह मंत्री थे और वे जन्म से ही देशभक्त हैं।</p>
<p>अपने 45 मिनट लंबे भाषण में शाह ने अजित डोभालके कार्यों की जमकर प्रशंसा की। शाह ने दो-तीन बार कहा, 'जिस प्रकार आप उन्हें पुरस्कार के लिए चुनकर प्रसन्न हैं, उसी प्रकार मैं अजित डोभालको यह पुरस्कार प्रदान करके प्रसन्न हूं।'</p>
<p>2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद, उन्होंने अजित डोभालको पहला राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया, जो उनके कार्यों के महत्व को दर्शाता है। अजित डोभालइस पद पर सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले सलाहकार हैं और शाह ने उनके 100 वर्ष के दीर्घायु होने की कामना की।</p>
<p>पुरस्कार स्वीकार करने के बाद, अजित डोभालने पुणेकर, तिलक मेमोरियल कमेटी और रोहित तिलक को धन्यवाद दिया। उन्होंने पुणे में बिताए अपने शुरुआती डेढ़ से दो वर्षों की यादें ताजा कीं। इसी दौरान उन्हें लोकमान्य तिलक के वास्तविक कार्यों का ज्ञान हुआ और उन्होंने कहा कि 76वर्षों के बाद यह पुरस्कार प्राप्त करना एक बड़ा संयोग है।</p>
<p> उन्होंने युवाओं को याद दिलाया कि यदि वे अपने कर्तव्यों का दुरुपयोग करते हैं, तो जिन्होंने उन्हें ये अधिकार दिए हैं, उन्हें दुख होगा। देश प्रगति कर रहा है और हमारी प्रगति सभी को पसंद नहीं आएगी, इसलिए हमें सावधान रहना चाहिए। जिस प्रकार लोकमान्य तिलक ने कहा था कि स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, यदि आज की बात हो, तो मैं कहता कि एक विकसित और बेहतर भारत का निर्माण मेरा अधिकार है और मैं इसे पूरा करूंगा; आइए हम भी यही प्रतिज्ञा लें, अजित डोभालने अपील की। ​​</p>
<p>देश के हित में कार्य करते समय, व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (वीईटी) के मानदंड, यानी पहले महत्वपूर्ण, फिर आवश्यक और अंत में वांछित, लागू किए जाते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इसमें देश के लिए जो महत्वपूर्ण है, उसे सबसे अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।</p>
<p>इस समारोह में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अजित डोभालके कार्यों की सराहना की। शिंदे ने कहा, 'जेम्स बॉन्ड की उपाधि अब पुरानी हो चुकी है और अजित डोभालएक ऐसे राष्ट्रीय नायक हैं जो इससे कहीं आगे हैं।' उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अजित डोभालके करियर की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में देश को रक्षात्मक आक्रमण के नए तंत्र और सिद्धांत मिले। सुप्रिया सुले ने भी उनके कार्यों की प्रशंसा की।</p>
<p>इस अवसर पर तिलक मेमोरियल ट्रस्ट के रोहित तिलक ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा, 'कई लोगों को लग सकता है कि हमने यह निर्णय फिल्म धुरंधर के बाद लिया है, लेकिन अजित डोभालका काम बहुत बड़ा है और हम उन्हें लंबे समय से जानते हैं। उन्हें यह पुरस्कार देना हमारे लिए गर्व की बात है। लोकमान्य तिलक पुरस्कार के लिए यह एक बहुत ही उपयुक्त चयन है और हमें बेहद खुशी है कि उन्होंने इस पुरस्कार को स्वीकार किया है।'</p>
<p> <br>
<strong>लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का योगदान</strong><br>
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और विचारक थे। उनका जन्म 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई ऊर्जा दी थी। उनका प्रसिद्ध नारा "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा" आज भी हर भारतीय के दिल में देशभक्ति का जज्बा पैदा करता है।</p>
<p>तिलक जी ने लोगों में राष्ट्रवाद की भावना जगाने के लिए समाचार पत्रों का सहारा लिया। उन्होंने मराठी भाषा में 'केसरी' और अंग्रेजी में 'मराठा' नाम से अखबार निकाले। इन अखबारों के जरिए उन्होंने ब्रिटिश सरकार की नीतियों का विरोध किया और आम जनता को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया।</p>
<p><strong>लोकमान्य तिलक पुरस्कार का इतिहास</strong><br>
तिलक स्मारक ट्रस्ट, पुणे ने वर्ष 1983 में इस पुरस्कार की शुरुआत की थी। इस पुरस्कार का मुख्य उद्देश्य लोकमान्य तिलक के विचारों को जीवित रखना और समाज के लिए उत्कृष्ट काम करने वाले लोगों को सम्मानित करना है। यह सम्मान हर साल 1 अगस्त को तिलक जी की पुण्यतिथि पर दिया जाता है।</p>
<p>पुरस्कार के तहत सम्मानित व्यक्ति को एक प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और नकद राशि प्रदान की जाती है। यह पुरस्कार किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह राजनीति, समाज सेवा, विज्ञान, उद्योग, प्रशासन, शिक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण काम करने वाली हस्तियों को दिया जाता है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>GST Collection: जुलाई में 15.4% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी, सरकारी खजाने में आए ₹2.11 लाख करोड़</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली देश के अर्थव्यवस्था और सरकारी खजाने के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है. जुलाई 2026 में देश का कुल जीएसटी (GST) कलेक्शन 15.4% बढ़कर 2,11,205 करोड़ रुपये  तक पहुंच गया है. घरेलू बाजार में खरीदारी और  इंपोर्ट बढ़ने से टैक्स कलेक्शन में यह बड़ा उछाल दर्ज किया गया है. शनिवार … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 20:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>GST, Collection:, जुलाई, में, 15.4, की, रिकॉर्ड, बढ़ोतरी, सरकारी, खजाने, में, आए, ₹2.11, लाख, करोड़</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>देश के अर्थव्यवस्था और सरकारी खजाने के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है. जुलाई 2026 में देश का कुल जीएसटी (GST) कलेक्शन 15.4% बढ़कर 2,11,205 करोड़ रुपये  तक पहुंच गया है. घरेलू बाजार में खरीदारी और  इंपोर्ट बढ़ने से टैक्स कलेक्शन में यह बड़ा उछाल दर्ज किया गया है. शनिवार ,1 अगस्त को वित्त मंत्रालय ने ये आंकड़े जारी किए। </p>
<p>अगर पिछले साल से तुलना करें, तो जुलाई 2025 में जीएसटी कलेक्शन 1.83 लाख करोड़ रुपये था. वहीं, एक महीने पहले यानी जून 2026 में सरकार को जीएसटी से लगभग 1.95 लाख करोड़ रुपये मिले थे। </p>
<p>जुलाई महीने में सरकार को मिले कुल 2.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक के जीएसटी कलेक्शन  में से केंद्र सरकार के हिस्से (CGST) में ₹39,835 करोड़ और राज्य सरकारों के हिस्से (SGST) में ₹47,881 करोड़ आए.  इसके अलावा,  आईजीएसटी (IGST) से सरकार को ₹1.23 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई हुई। </p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने जुलाई के दौरान ₹29,968 करोड़ का टैक्स रिफंड भी जारी किया, जो पिछले साल से 13.1% ज्यादा है. रिफंड (कर वापसी) घटाने के बाद सरकार के पास शुद्ध जीएसटी राजस्व 1.81 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। </p>
<p><strong>घरेलू और इंपोर्ट टैक्स कलेक्शन में भी उछाल</strong><br>
जुलाई 2025 में घरेलू GST रेवेन्यू 10.1% बढ़कर ₹1.31 लाख करोड़ से ₹1.45 लाख करोड़ हो गया। इंपोर्ट से मिलने वाला GST रेवेन्यू 28.8% बढ़कर ₹66,511 करोड़ हो गया, जिससे महीने का कुल ग्रॉस GST कलेक्शन ₹2.11 लाख करोड़ तक पहुंच गया।</p>
<p>हालिया GST कलेक्शन से पता चलता है कि वेस्ट एशिया में जियोपॉलिटिकल तनाव के बावजूद घरेलू खपत और बिजनेस एक्टिविटी स्थिर रही। घरेलू और इंपोर्ट से <strong>जुड़े टैक्स कलेक्शन में बढ़ोतरी ने कुल रेवेन्यू ग्रोथ में मदद की।</strong></p>
<p><strong>GST रिफंड में बढ़ोतरी</strong><br>
रिपोर्ट में यह भी पता चला कि GST रिफंड में बढ़ोतरी जारी रही। कुल रिफंड सालाना आधार पर 13.1% बढ़कर 29,968 करोड़ रुपये हो गए, जिसमें ICEGATE के ज़रिए प्रोसेस किए गए एक्सपोर्ट से जुड़े रिफंड 22.7% बढ़कर 12,288 करोड़ रुपये हो गए।</p>
<p><strong>RBI ने फिक्स्ड डिपॉज़िट के नियमों में बदलाव </strong><br>
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) के नियमों में बदलाव किया है। ये नए निर्देश 'रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (कमर्शियल बैंक – डिपॉज़िट पर ब्याज दर) दूसरा संशोधन निर्देश, 2026' के तहत जारी किए गए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, ये नए बदलाव 1 अक्टूबर, 2026 से लागू होंगे। RBI ने कहा है कि बैंकों को ग्राहकों द्वारा किसी खास दिन जमा की गई एक जैसी रकम पर अपनी सभी ब्रांच में एक समान ब्याज दर देनी होगी। सेंट्रल बैंक ने कहा डिपॉज़िट (जिसमें बल्क डिपॉज़िट भी शामिल हैं) पर दी जाने वाली ब्याज दरें सभी ब्रांच और सभी ग्राहकों के लिए एक जैसी होनी चाहिए। साथ ही, एक ही तारीख पर बैंक की किसी भी ब्रांच में स्वीकार की गई समान रकम वाली अलग-अलग डिपॉज़िट पर दिए जाने वाले ब्याज में कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। </p>
<p>पेट्रोल में 20% इथेनॉल (E20) मिलाने से पुराने इंजन में टूट-फूट और माइलेज कम होने की चिंताओं के बीच, सरकार ने शुक्रवार को कहा कि अगर इथेनॉल नहीं मिलाया गया होता, तो वेस्ट एशिया संकट के दौरान पेट्रोल की कीमत बहुत ज़्यादा होती। सरकार के मुताबिक, इथेनॉल मिलाने से न सिर्फ़ तेल आयात पर देश की निर्भरता कम हुई है, बल्कि आम लोगों को पेट्रोल की ऊंची कीमतों से राहत दिलाने में भी इसने अहम भूमिका निभाई है। सरकार ने कहा कि मिडिल ईस्ट संकट के दौरान, जब कच्चे तेल की कीमतें लगभग 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, तो भारत में पेट्रोल की कीमतें लगभग 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थीं।</p>
<p>हालांकि, इथेनॉल मिलाने की नीति, कच्चे तेल की उपलब्धता और तेल कंपनियों की खरीद रणनीतियों की वजह से, ग्राहकों को पेट्रोल लगभग 94.77 रुपये प्रति लीटर के भाव पर मिला। सरकार ने एक बयान में कहा इसके बजाय, ग्राहकों ने 94.77 रुपये प्रति लीटर का भुगतान किया क्योंकि हर लीटर में 20% हिस्सा देश में बने इथेनॉल का था, जिसे स्थिर और पहले से तय कीमतों पर खरीदा गया था और जिस पर ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर नहीं पड़ा… नतीजा? संकट के चरम पर पंप पर प्रति लीटर लगभग 30 रुपये की बचत हुई।</p>]]> </content:encoded>
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<title>अमित शाह के हाथों NSA अजीत डोभाल को मिला लोकमान्य तिलक अवॉर्ड, पगड़ी पहनाकर किया सम्मानित</title>
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<description><![CDATA[ पुणे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल पुणे में सम्मानित किया. अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक मेमोरियल ट्रस्ट की तरफ से से प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. अमित शाह ने उन्हें पारंपरिक पुणेरी पगड़ी, एक स्मृति चिन्ह, एक चेक और &#039;गीता रहस्य&#039; किताब … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 18:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पुणे</strong></p>
<p>केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल पुणे में सम्मानित किया. अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक मेमोरियल ट्रस्ट की तरफ से से प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. अमित शाह ने उन्हें पारंपरिक पुणेरी पगड़ी, एक स्मृति चिन्ह, एक चेक और 'गीता रहस्य' किताब की एक प्रति दी है. यह आयोजन स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की 106वीं पुण्यतिथि के अवसर पर किया गया था. अजीत डोभाल भारत की सुरक्षा व्यवस्था में सबसे अहम माने जाते हैं। </p>
<p><strong>इतिहास में शामिल हुए अजीत डोभाल का नाम </strong><br>
इस पुरस्कार के साथ ही अजीत डोभाल का नाम देश की उन महानतम हस्तियों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्हें पहले यह सम्मान दिया जा चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह और पूर्व पीएम इंदिरा गांधी शामिल हैं. तिलक स्मारक ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. दीपक तिलक ने बताया कि डोभाल को राष्ट्र की सुरक्षा में उनके अद्वितीय और साहसिक जीवन भर के योगदान के लिए सर्वसम्मति से चुना गया था. इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार भी मौजूद थे। </p>
<p><strong>गृह मंत्री ने NSA को पुणेरी पगड़ी पहनाई</strong><br>
गृह मंत्री ने उन्हें पारंपरिक पुणेरी पगड़ी, एक स्मृति चिन्ह, एक चेक और 'गीता रहस्य' किताब की एक प्रति दी। यह आयोजन स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की 106वीं पुण्यतिथि के अवसर पर किया गया।</p>
<p><strong>क्या है लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार?</strong><br>
लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार में एक स्मृति चिह्न, प्रशस्ति पत्र और 1 लाख रुपये की नकद राशि प्रदान की जाती है। यह सम्मान हर वर्ष उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में राष्ट्र के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया हो। इस वर्ष अजित डोभाल को भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा में उनके विशिष्ट योगदान के लिए चुना गया है। अपने लंबे खुफिया और राष्ट्रीय सुरक्षा करियर के दौरान उन्होंने ऑपरेशन ब्लैक थंडर, डोकलाम कूटनीतिक वार्ता और बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसी कई महत्वपूर्ण रणनीतिक कार्रवाइयों में अहम भूमिका निभाई।</p>
<p><strong>अजित डोभाल का करियर</strong><br>
1968 बैच के केरल कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी अजित डोभाल ने तीन दशकों से अधिक समय तक भारत की खुफिया व्यवस्था में सेवा दी और बाद में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के प्रमुख बने। अपने करियर के दौरान उन्होंने मिजोरम, सिक्किम, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में काम किया। इसके अलावा वे इस्लामाबाद और लंदन स्थित भारतीय मिशनों में भी तैनात रहे। 81 वर्षीय अजित डोभाल वर्तमान में भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) हैं। उन्हें देश के प्रमुख रणनीतिक और सुरक्षा विशेषज्ञों में गिना जाता है और पिछले एक दशक में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और ढांचे को आकार देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।</p>
<p><strong>लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार का महत्व</strong><br>
लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक माना जाता है। यह सम्मान स्वतंत्रता सेनानी और महान राष्ट्रवादी नेता लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की विरासत को समर्पित है तथा उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने राष्ट्र निर्माण और सार्वजनिक जीवन में उत्कृष्ट योगदान दिया हो।</p>
<p><strong>इसलिए अजीत डोभाल को मिला  सम्मान</strong><br>
2017 में डोकलाम गतिरोध को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने में उनकी भूमिका को विशेष रूप से सराहा गया था। राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर उनके रणनीतिक फैसलों और आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए उन्हें यह सम्मान दिया जा रहा है।</p>
<p><strong>हर साल 1 अगस्त को दिया जाता है यह सम्मान</strong><br>
लोकमान्य तिलक पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1983 में महाराष्ट्र मंडल, पुणे द्वारा की गई थी। यह पुरस्कार हर साल 1 अगस्त को स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने राष्ट्र की प्रगति, विकास और सामाजिक उत्थान में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। सबसे पहले यह पुरस्कार समाजवादी नेता एसएम जोशी को प्रदान किया गया था।</p>
<p><strong>अजीत डोभाल को मिल चुका है क्रीति चक्र</strong><br>
केरल कैडर के 1968 बैच के आईपीएस अधिकारी अजीत डोभाल भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले NSA हैं. पुलिस सेवा में रहते हुए पाकिस्तान में अंडरकवर मिशन और मिजोरम में शांति समझौता कराने वाले डोभाल शांतिकाल का दूसरा सबसे बड़ा सैन्य सम्मान 'कीर्ति चक्र' पाने वाले देश के पहले पुलिस अधिकारी भी हैं. 81 साल के अजीत डोभाल मूलरूप से उत्तराखंड से आते हैं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद पर केस दर्ज, भगवा वेश में प्रदर्शन को लेकर हुई कार्रवाई</title>
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<description><![CDATA[ वाराणसी लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, सांसद पप्पू यादव और अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ वाराणसी में केस दर्ज हुआ है. यह मामला संसद भवन में प्रदर्शन को लेकर दर्ज हुआ है. संसद भवन में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए पप्पू यादव भगवा वेश में नजर आए थे. … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 18:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>राहुल, गांधी, पप्पू, यादव, और, अवधेश, प्रसाद, पर, केस, दर्ज, भगवा, वेश, में, प्रदर्शन, को, लेकर, हुई, कार्रवाई</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाराणसी</strong></p>
<p>लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, सांसद पप्पू यादव और अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ वाराणसी में केस दर्ज हुआ है. यह मामला संसद भवन में प्रदर्शन को लेकर दर्ज हुआ है. संसद भवन में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए पप्पू यादव भगवा वेश में नजर आए थे. इस दौरान वह प्रतीकात्मक तौर पर दान पात्र लेकर बैठे थे. राहुल गांधी ने दान पात्र में कुछ पैसे डाले थे और फिर पप्पू यादव भागते दिखे थे. इसके जरिए राम मंदिर चढ़ावा चोरी को दर्शाने का प्रयास किया गया था. इस तरह भगवा ड्रेस में चोरी की घटना को दिखाने पर आपत्ति जताई जा रही है. भाजपा के अलावा कुछ अन्य संगठनों ने भी इसे लेकर निशाना साधा है. यही नहीं अब तीनों नेताओं के खिलाफ केस ही दर्ज कराया गया है। </p>
<p>संतों की शिकायत के आधार पर वाराणसी के कोतवाली पुलिस स्टेशन में यह केस दर्ज हुआ है. इस मामले में तीनों सांसदों पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगा है. इस मामले को लेकर बड़ी संख्या में संतों ने ऐतराज जताया है. इसके अलावा भाजपा, विश्व हिंदू परिषद समेत कई संगठनों का भी कहना है कि भगवा वेश में चोरी करते हुए दिखाना हिंदुओं का अपमान है. इसी को लेकर वाराणसी के कुछ संतों ने पुलिस में शिकायत दी थी और उसके आधार पर केस दर्ज हो गया है। </p>
<p><strong>संतों का आरोप</strong><br>
पातालपुरी मठ के महंत बालक दास के नेतृत्व में बनारस के आधा दर्जन संत शनिवार को डीसीपी काशी जोन गौरव बंसवाल से मिले और राहुल गांधी, सांसद अवधेश प्रसाद तथा सांसद पप्पू यादव के खिलाफ तहरीर सौंपकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की। संतों का आरोप है कि संसद में साधु के वेश में किया गया प्रदर्शन और कथित नुक्कड़ नाटक सनातन धर्म की मर्यादा के विपरीत है। उनका कहना है कि इस कृत्य से करोड़ों सनातनियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और साधु-संतों की छवि को भी ठेस पहुंची है। महंत बालक दास ने कहा कि धार्मिक प्रतीकों और संत परंपरा का राजनीतिक प्रदर्शन के लिए उपयोग करना अनुचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम से सनातन धर्म का अपमान हुआ है तथा श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट पहुंची है।</p>
<p><strong>संसद में चढ़ावा चोरी के नाटक का विरोध</strong><br>
दरअसल शुक्रवार को संसद के बाहर पप्पू यादव पुजारी के वेश में दानपेटी लेकर पहुंचे थे। इसमें राहुल गांधी ने चंदा डाला था। इसके बाद 'चोरी पकड़े जाने' का नाटक करते हुए अवधेश प्रसाद समेत कई विपक्षी सांसदों ने पप्पू यादव की सांकेतिक पिटाई की थी। इस पर भाजपा <strong>ने कटाक्ष किया था। संत समाज ने भी विरोध जताया है।</strong></p>
<p><strong>'राहुल, पप्पू यादव ने जो किया वह अक्षम्य है'</strong><br>
पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु बालक दास के नेतृत्व में संतों का प्रतिनिधिमंडल शनिवार की दोपहर एक बजे डीसीपी काशी गौरव बंसवाल के कार्यालय पहुंचज्ञ। डीसीपी से मुलाकात की। यहां उन्होंने उन्हें एक तहरीर की कॉपी दी।</p>
<p>इस दौरान जगद्गुरु बालक दास ने बताया कि- संसद में जिस तरह से पप्पू यादव ने भगवान राम का और सनातन का अपमान किया वह अक्षम्य है। जिस तरह से यह कृत्य किया गया उसे कोई भूल नहीं सकता और इससे हमारी धार्मिक भावना आहत हुई है। ऐसे में हमने FIR दर्ज करने की मांग की है।</p>
<p><strong>पप्पू यादव ने किया संत समाज का अपमान</strong><br>
महंत जगदीश्वनाथ ने कहा – देश के सबसे बड़े मंदिर संसद में पप्पू यादव नामक व्यक्त ने साधु का वेश धरकर भगवान, संत समाज और गेरुआ वस्त्र का अपमान कर रहा है। उसी के लेकर आज हम लोगों ने FIR दर्ज कराई है। उन्होंने कहा भगवान का चित्र रखकर गेरूआ पहनकर टीका लगाकर सनातन का इतना अपमान।</p>
<p><strong>टोपी लगाकर करें सिर तन से जुदा हो जाएगा</strong><br>
जगदीश्वरनाथ ने आगे कहा – संत समाज शांत है तो कुछ भी करोगे। हिम्मत है तो कभी सिर पर टोपी पहनकर कुछ करो तो जानें । सिर तन से जुदा न हो जाए तो कहना। देश में जो संतों का सम्मान नहीं करेगा, हम उसे माफ नहीं करेंगे।</p>
<p><strong>आगे की रणनीति</strong><br>
संतों ने अपनी तहरीर में राहुल गांधी, अवधेश प्रसाद और पप्पू यादव के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो संत समाज आगे की रणनीति तय करेगा।</p>
<p><strong>पुलिस की कार्रवाई</strong><br>
डीसीपी काशी जोन को सौंपे गए प्रार्थना पत्र में पुलिस से मामले की जांच कर विधिक कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया गया है। फिलहाल पुलिस ने तहरीर प्राप्त कर नियमानुसार जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। डीसीपी काशी जोन ने बताया कि तहरीर मिली है, जांच कर केस दर्ज किया जाएगा।</p>
<p><strong>भगवा के अपमान को मुद्दा बनाने की कोशिश में भाजपा, VHP भी भड़की</strong><br>
पप्पू यादव, राहुल गांधी और अवधेश प्रसाद की ओर से ऐसी एक्टिंग किए जाने को लेकर कुछ जानकार यह भी कह रहे हैं कि यह इंडिया गठबंधन को नुकसान पहुंचा सकता है. इन लोगों का कहना है कि इससे हिंदुत्व को गलत ढंग से प्रस्तुत करने का आरोप चस्पा हो सकता है. भाजपा और विश्व हिंदू परिषद ने तो सीधे तौर पर इसे हिंदुओं के अपमान से जोड़ दिया है. भाजपा के पूर्व प्रवक्ता शहजाद पूनावाला का कहना है कि क्या किसी और धर्म का मामला होता तो उनके जैसी ड्रेस पहनकर क्या चोरी की घटना को फिल्माया जा सकता था. इसी को लेकर विश्व हिंदू परिषद के नेता आलोक कुमार ने भी आपत्ति जताई है. यही नहीं लखनऊ में एक संगठन ने प्रदर्शन भी किया है और अखिलेश यादव एवं पप्पू यादव के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुतले भी जलाए हैं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>आंध्र प्रदेश को मिली बड़ी सौगात, पीएम मोदी ने भोगपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट का किया उद्घाटन</title>
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<description><![CDATA[ भोगापुरम  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के भोगापुरम में 4,750 करोड़ रुपये की लागत से निर्मितअल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन किया. इस दौरान राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू मौजूद रहे। राज्य के गवर्नर जस्टिस अब्दुल नजीर, मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, डिप्टी सीएम पवन कल्याण और मंत्री नारा … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>आंध्र, प्रदेश, को, मिली, बड़ी, सौगात, पीएम, मोदी, ने, भोगपुरम, इंटरनेशनल, एयरपोर्ट, का, किया, उद्घाटन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोगापुरम</strong><br>
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के भोगापुरम में 4,750 करोड़ रुपये की लागत से निर्मितअल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन किया. इस दौरान राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू मौजूद रहे।</p>
<p>राज्य के गवर्नर जस्टिस अब्दुल नजीर, मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, डिप्टी सीएम पवन कल्याण और मंत्री नारा लोकेश ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया. केंद्रीय मंत्री राममोहन, श्रीनिवास वर्मा और पेम्मासनी चंद्रशेखर ने भी गुलदस्ते देकर उनका स्वागत किया।</p>
<p>इसके बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने टर्मिनल बिल्डिंग का उद्घाटन किया. उसके बाद उन्होंने टर्मिनल का दौरा किया और लगभग 15 मिनट तक वहां लगी आधुनिक सुविधाओं का निरीक्षण किया. इस दौरान GMR के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री मोदी को चेक-इन हॉल और एयरपोर्ट के डिजाइन के बारे में जानकारी दी. मोदी ने एयरपोर्ट के मास्टर प्लान और एविएशन एजुकेशन के मॉडल देखे. उन्होंने अराकू कॉफी कियोस्क का भी दौरा किया और कॉफी का स्वाद चखा।</p>
<p>इसके बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एयरपोर्ट टर्मिनल से एक खुली जीप में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू और डिप्टी मुख्यमंत्री पवन कल्याण के साथ रैली में शामिल होने के लिए गए. प्रधानमंत्री ने टर्मिनल से मीटिंग की जगह तक के रास्ते में हजारों आदिवासी महिलाओं द्वारा किया गया थिम्सा डांस देखा।</p>
<p>पीएम मोदी यहां 17,900 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और राष्ट्र को समर्पित करेंगे. कुछ देर पहले उन्होंने इंटरनेशनल स्टैंडर्ड, स्टेट-ऑफ-द-आर्ट टेक्नोलॉजी और टॉप-टियर इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ बने अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का उद्घाटन किया।</p>
<p>नए आंध्र के इतिहास का एक सुनहरा अध्याय: भोगापुरम में अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन<br>
यह नए आंध्र प्रदेश के इतिहास का एक सुनहरा अध्याय है. राज्य के बंटवारे के बाद शुरू होने वाला यह पहला बड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है. यह उत्तरी आंध्र क्षेत्र के विकास के माहौल को बदलने की दिशा में एक अहम कदम है. यह पर्यटन, औद्योगिक और आर्थिक क्षेत्र में तरक्की का केंद्र बनने वाला है. सत्ता संभालने के बाद, गठबंधन ने इस परियोजना पर खास ध्यान दिया और एयरपोर्ट का निर्माण कार्य जल्दी पूरा किया।</p>
<p><strong>भव्य कार्यक्रम के लिए इंतजाम</strong><br>
राज्य सरकार ने इस भव्य कार्यक्रम के लिए बड़े इंतजाम किए हैं. एक मुख्य मंच तैयार किया गया है, जिसके दोनों ओर दो और मंच होंगे. इस कार्यक्रम के लिए कुल 3 लाख लोगों के बैठने का इंतजाम किया गया है, और पूरे वेन्यू में गैलरी बनाई गई हैं।</p>
<p>मुख्य मंच को दूर से भी देखा जा सके, यह पक्का करने के लिए पूरे क्षेत्र में बड़ी स्क्रीन लगाई गई हैं. जहां तक सुरक्षा की बात है तो, इसके लिए, 3,000 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और उन्हें एक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा गया है।</p>
<p><strong>जानें दो रनवे की खासियत</strong><br>
भोगापुरम में अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दो रनवे हैं. प्रत्येक रनवे 3.8 किलोमीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा है, जो एयरबस और बोइंग जैसे बड़े एयरक्राफ्ट को आसानी से खड़ा करने के लिए डिजाइन किया गया है।</p>
<p>5,000 स्क्वायर मीटर में फैला एक कार्गो टर्मिनल और लॉजिस्टिक्स जोन, जिसकी हैंडलिंग कैपेसिटी 25,000 टन है, जो फार्मास्यूटिकल्स, एक्वाकल्चर प्रोडक्ट्स और समुद्री संसाधन के एक्सपोर्ट के जरिए औद्योगिक विकास को बढ़ावा देता है।</p>
<p>79,000 स्क्वायर मीटर में फैली एक दो-लेवल पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग, जिसमें सेंट्रलाइज्ड डिजाइन, आसान चेक-इन प्रक्रिया, भरपूर प्राकृतिक रोशनी और आरामदायक ट्रैवल एक्सपीरियंस के लिए वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं हैं।</p>
<p>55 मीटर ऊंचा और 11,000 स्क्वायर मीटर में फैला एक एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर, जिसमें 360-डिग्री विजिबिलिटी और पूरी एयरोड्रोम फ्लाइट इन्फॉर्मेशन सर्विस हैं. एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) के लिए 25 एकड़ की फैसिलिटी, जिसमें एप्रन, एयरक्राफ्ट वॉशिंग बे, एयरसाइड और लैंडसाइड सर्कुलेशन एरिया, हैंगर और इंजन रन-अप बे हैं।</p>
<p>यह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा कौशल विकास को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को तेज करने के लिए GMR एविएशन यूनिवर्सिटी और एयरो सिटी वाला एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम है. इससे उत्तर आंध्र के इलाके में सीधे तौर पर 15,000 लोगों और अप्रत्यक्ष रूप से 5.85 लाख लोगों के लिए रोजगार के मौके मिलेंगे।</p>
<p>
<strong>पारंपरिक आदिवासी 'थिम्सा' डांस के साथ स्वागत</strong><br>
एयरपोर्ट के उद्घाटन के दौरान दुनिया को आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को दिखाने के लिए, 'थिम्सा' नृत्य प्रदर्शन का आयोजन किया गया. प्रधानमंत्री का शानदार स्वागत करने के लिए कुल 13,750 लोगों ने नृत्य किया. अल्लूरी सीताराम राजू, पार्वतीपुरम मान्यम और पोलावरम जिलों की आदिवासी महिलाएं, छात्राएं और महिला ग्रुप की सदस्य थिम्सा डांस में हिस्सा लिया।</p>
<p><strong>उड़ने वाली मछली के आकार का एयरपोर्ट</strong><br>
तट के पास बना यह एयरपोर्ट उड़ने वाली मछली के आकार का है. टर्मिनल की छत पर पारंपरिक 'मुग्गुलु' (रंगोली पैटर्न) और 'नादस्वरम' संगीत वाद्ययंत्र से प्रेरित डिजाइन हैं. GMR ग्रुप ने हर छोटी-बड़ी बात पर ध्यान देते हुए, एयरपोर्ट को आंध्र प्रदेश की संस्कृति, परंपराओं और कलाओं को दिखाने के लिए डिजाइन किया है. एंट्रेंस पर एक बड़ा एटिकोपका खिलौना लगाया गया है।</p>
<p>एयरपोर्ट के अंदर, राज्य की ऐतिहासिक शान और विरासत को दिखाने वाले शानदार नजारे हैं, जिसमें 'थोलू बोम्मालता' (चमड़े की कठपुतली), बोब्बिली वीणा और मशहूर बंगनापल्ली आम जैसी चीजें शामिल हैं. टर्मिनल बिल्डिंग की दीवारों पर इलाके की समृद्ध विरासत की तस्वीरें बनी हैं, जिसमें 'थप्पेटा गुल्लू' और 'धीमसा' डांस जैसे आर्ट फॉर्म और लैंडमार्क, विजयनगरम शाही किला और अरसविल्ली सूर्यनारायण स्वामी, श्री मुखलिंगम, श्रीकुरमम, सिंहाचलम, और कनक महालक्ष्मी जैसे खास मंदिर शामिल हैं।</p>
<p><strong>परियोजना अवलोकन</strong></p>
<p><strong>    निर्माण लागत: 4,750 करोड़ रुपये<br>
    क्षेत्र: 2,203 एकड़<br>
    इस एयरपोर्ट को 275 किलोमीटर प्रति घंटे तक की हवा की गति झेलने के लिए डिजाइन किया गया है.<br>
    चेक-इन काउंटर: 40<br>
    इमिग्रेशन काउंटर: 10<br>
    बैगेज बेल्ट: 5 डोमेस्टिक, 2 इंटरनेशनल<br>
    सेल्फ चेक-इन और बैगेज रिक्लेम फैसिलिटी<br>
    पैसेंजर कैपेसिटी: पहले फेज में सालाना 6 मिलियन, दूसरे फेज में 12 मिलियन और तीसरे फेज़ में 18 मिलियन.<br>
    GMR एयरो सिटी का विकास जिसमें एक कमर्शियल हब, होटल और एंटरटेनमेंट जोन होंगे.</strong></p>
<p>किसानों ने एयरपोर्ट के लिए दी थी जमीन, उन्हें वीवीआईपी गैलरी में जगह मिली<br>
बता दें कि, आंध्र प्रदेश सरकार ने भोगापुरम एयरपोर्ट के निर्माण के लिए अपनी जमीन देने वाले किसानों को खास मेहमान के तौर पर बुलाकर खास पहचान दी है. एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह में, इन किसानों को VVIP गैलरी की सबसे आगे की लाइन में बैठाया गया।</p>
<p>
भोगापुरम मंडल के गुडेपुवलासा, रवाड़ा, कांचेरू, कावुलुवाड़ा, ए. रविवलासा, सवाराविल्ली और मुंजेरू गाँवों के किसानों ने अपनी मर्जी से इस परियोजना के लिए अपनी जमीन दी है. 403 किसानों और लगभग 1,600 लोगों ने अपने घर दिए हैं.</p>
<p>अनुमान है कि 200 से ज्यादा लोगों ने जमीन और घर दोनों दिए हैं. मुख्यमंत्री चंद्रबाबू ने घोषणा की है कि उन सभी को कॉम्प्लिमेंट्री फ़्लाइट यात्रा दी जाएगी. किसानों को हैदराबाद ले जाया जाएगा. उन्हें तेलंगाना के शमशाबाद में एयरपोर्ट बनने से पहले की स्थिति और उसके बाद आस-पास के इलाकों में हुए विकास को दिखाया जाएगा, ताकि वे खुद इसका असर समझ सकें.</p>]]> </content:encoded>
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<title>PM मोदी ने गालियां देने वाले बच्चों को किया माफ, सुनील लहरी बोले&#45; हम भाग्यशाली हैं</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली रामायण की चर्चा इन दिनों हर तरफ है क्योंकि दीवाली 2026 में 4000 करोड़ी रामायणम् आने वाली है, जिसका निर्देशन नितेश तिवारी ने किया है. वहीं रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी अहम किरदार में हैं. जबकि दूरदर्शन की रामायण में राम की भूमिका निभाने वाले एक्टर अरुण गोविल भी इसमें राजा दशरथ … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 15:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मोदी, ने, गालियां, देने, वाले, बच्चों, को, किया, माफ, सुनील, लहरी, बोले-, हम, भाग्यशाली, हैं</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>रामायण की चर्चा इन दिनों हर तरफ है क्योंकि दीवाली 2026 में 4000 करोड़ी रामायणम् आने वाली है, जिसका निर्देशन नितेश तिवारी ने किया है. वहीं रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी अहम किरदार में हैं. जबकि दूरदर्शन की रामायण में राम की भूमिका निभाने वाले एक्टर अरुण गोविल भी इसमें राजा दशरथ की भूमिका निभाते हुए नजर आ रहे हैं. इसकी झलक हाल ही में ट्रेलर में नजर आई. वहीं सोशल मीडिया पर सेलेब्स और इंटरनेट यूजर्स ने रिएक्शन दिया. लेकिन अब रामानंद सागर की रामायण के लक्ष्मण के सुनील लहरी का 4000 करोड़ी रामायणम् के ट्रेलर पर रिएक्शन सामने नहीं आया है, जिसका फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. लेकिन सुनील लहरी ने अब एक नया वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह पीएम मोदी का जिक्र कर रहे हैं। </p>
<p><strong>सुनील लहरी ने शेयर किया वीडियो</strong><br>
रामायणम् के ट्रेलर पर रिएक्शन देने की बजाय एक्टर सुनील लहरी ने वीडियो शेयर किया और कैप्शन में लिखा, हम भाग्यशाली हैं कि हमारे देश के ऐसे दयालु प्रधानमंत्री हैं जो विरोध प्रदर्शनों के दौरान उनको उनकी माता जी और सेना के खिलाफ बुरे शब्द कहने वालों को माफ कर दिया. वहीं वीडियो में वह प्रधानमंत्री की तारीफ करते हुए नजर आ रहे हैं। </p>
<p><strong>पीएम मोदी ने शेयर किया था वीडियो</strong><br>
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो संदेश साझा करते हुए जंतर-मंतर पर हुई घटना पर प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर जो कुछ भी हुआ, उसे पूरे देश और दुनिया ने देखा. प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ "शरारती बच्चों" ने बेहद अभद्र और असभ्य भाषा का प्रयोग किया, जो किसी भी सभ्य समाज को शोभा नहीं देता. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से गालियां दी गईं और उनकी दिवंगत माता के लिए भी अत्यंत आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया. उन्होंने कहा कि घटना का स्वरूप बेहद दुखद था, लेकिन वह इस मुद्दे पर किसी के प्रति कटुता नहीं, बल्कि सुधार और सकारात्मक सोच के साथ बात करना चाहते हैं। </p>
<p><strong>जेन जी के बारे में कही ये बात </strong><br>
पीएम मोदी ने कहा कि बचपन में गलतियां होना स्वाभाविक है और बचपन की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि उसमें गलतियों को सुधारने का अवसर भी होता है. उन्होंने कहा कि समाज के भीतर इस घटना को लेकर जो आक्रोश है, उसे वह भली-भांति समझ सकते हैं. उनके अनुसार, यह एक "कल्चरल शॉक" है कि देश की बेटियां इस प्रकार की भाषा का प्रयोग कर सकती हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समय इन बच्चों को गले लगाकर उन्हें सही रास्ता दिखाने का है. उन्होंने कहा कि ये गुमराह बच्चे हैं और उन्हें सही दिशा देना पूरे समाज की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि इन बच्चों को सजा देना, अदालतों के चक्कर कटवाना या समाज में प्रताड़ित करना परिस्थितियों को नहीं बदल सकता. गुमराह लोगों को सही राह दिखाना आसान काम नहीं होता, लेकिन कठिन कार्यों को ही करने का संकल्प लेना चाहिए. उन्होंने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि वे अपनी गलतियों से सीखें, कुछ नया सीखें और देश के विकास की यात्रा में सहभागी बनें। </p>]]> </content:encoded>
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<title>आज का मौसम: यूपी&#45;बिहार में झमाझम बारिश, गुजरात में रेड अलर्ट; जानें अगस्त में कैसा रहेगा मॉनसून</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों में मॉनसून के फिर से सक्रिय होने और मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान खासतौर पर गुजरात के लिए सबसे बड़ा अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, मौसम विभाग ने मॉनसून के दूसरे भाग यानी अगस्त और सितंबर महीने के … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 14:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>आज, का, मौसम:, यूपी-बिहार, में, झमाझम, बारिश, गुजरात, में, रेड, अलर्ट, जानें, अगस्त, में, कैसा, रहेगा, मॉनसून</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p> भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों में मॉनसून के फिर से सक्रिय होने और मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान खासतौर पर गुजरात के लिए सबसे बड़ा अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, मौसम विभाग ने मॉनसून के दूसरे भाग यानी अगस्त और सितंबर महीने के लिए भी पूर्वानुमान जारी कर दिया है, जिसमें बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका जताई गई है।</p>
<p><strong>गुजरात पर सबसे बड़ा खतरा, 30 सेमी से अधिक बारिश का अलर्ट</strong><br>
मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, पश्चिमी विदर्भ और उससे सटे दक्षिण मध्य प्रदेश के ऊपर एक डिप्रेशन बना हुआ है। यह तेजी से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा है और इसके पश्चिमी मध्य प्रदेश और गुजरात को पार करते हुए अगले 12 घंटों में एक 'वेल-मार्क्ड लो प्रेशर एरिया' में तब्दील होने की संभावना है।</p>
<p>इस वेदर सिस्टम का सबसे ज्यादा खामियाजा गुजरात को भुगतना पड़ेगा। 1 अगस्त को गुजरात क्षेत्र के कई स्थानों पर 30 सेंटीमीटर से अधिक यानी 'अत्यधिक भारी बारिश' होने का अलर्ट जारी किया गया है।</p>
<p><strong>आज 1 अगस्त 2026 को यूपी बिहार का मौसम कैसा रहेगा?</strong><br>
आज शनिवार, 1 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश और बिहार में मॉनसून सक्रिय रहेगा। दोनों राज्यों में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है, जबकि कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं।</p>
<p>पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 1 से 4 अगस्त तक और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 2 से 4 अगस्त तक बारिश की संभावना जताई गई है। राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट भी जारी है। लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं और बाद में गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। अधिकतम तापमान लगभग 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। आर्द्रता अधिक रहने से मौसम उमस भरा महसूस होगा।</p>
<p>बिहार में 31 जुलाई से 4 अगस्त तक बारिश जारी रहने की संभावना है। राज्य के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, साथ ही गरज-चमक और तेज हवाओं का खतरा भी बना हुआ है। पटना और आसपास के क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 33-34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 26-27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। मौसम सामान्यतः बादल छाए रहने वाला और उमस भरा रहेगा।</p>
<p><strong>इन राज्यों में भी मूसलाधार बारिश की चेतावनी</strong><br>
गुजरात के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। कोंकण और गोवा, तटीय कर्नाटक, केरल, माहे, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु में भारी से बहुत भारी बारिश के आसार हैं। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, विदर्भ, पश्चिमी मध्य प्रदेश, मराठवाड़ा, पूर्वी राजस्थान, लक्षद्वीप, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक के साथ-साथ पूर्वोत्तर राज्यों (अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा) में भी भारी बारिश की संभावना है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और माहे, लक्षद्वीप तथा तेलंगाना में तेज सतही हवाएं चलने की भी चेतावनी दी गई है।</p>
<p><strong>इन इलाकों में 'फ्लैश फ्लड' (अचानक बाढ़) का रिस्क</strong><br>
IMD ने अगले 24 घंटों के लिए कई जिलों में 'फ्लैश फ्लड' का जोखिम भी जताया है। इनमें पश्चिमी मध्य प्रदेश, गुजरात क्षेत्र, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र और सौराष्ट्र-कच्छ शामिल हैं। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग ने लोगों को जलभराव वाले इलाकों और कमजोर इमारतों से दूर रहने और बाहर निकलने से पहले ट्रैफिक का हाल जानने की सलाह दी है।</p>
<p><strong>अगस्त और सितंबर में कैसा रहेगा मॉनसून?</strong><br>
वर्तमान में हो रही भारी बारिश के बावजूद, मौसम विभाग का अगस्त और सितंबर के लिए पूर्वानुमान किसानों की चिंता बढ़ा सकता है। IMD के अनुसार, अगस्त-सितंबर में देश भर में औसत बारिश 'सामान्य से कम' रहने की संभावना है। इसका मुख्य कारण 'अल नीनो' (El Niño) का लगातार बना रहना है, जो मानसून को कमजोर करने के लिए जाना जाता है। हालांकि, प्रायद्वीपीय भारत, मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत के उत्तरी हिस्सों और पूर्व-पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में इस दौरान 'सामान्य या सामान्य से अधिक' बारिश हो सकती है, लेकिन इससे देश भर के कुल औसत मात्रा में कोई खास बदलाव नहीं आएगा।</p>
<p><strong>जुलाई की बारिश से घटी मॉनसून की कमी</strong><br>
मौसम विभाग ने जुलाई के महीने में भी बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया था, लेकिन मध्य भारत में अच्छी बारिश के कारण यह महीना 'सामान्य' बारिश वाला साबित हुआ। IMD प्रमुख मृत्युंजय महापात्र के मुताबिक, जुलाई में 13.5 दिनों के सामान्य औसत की तुलना में रिकॉर्ड 24 दिनों तक 'लो प्रेशर सिस्टम' (LPS) का प्रभाव रहा। बंगाल की खाड़ी में 4 लो प्रेशर सिस्टम बने, जिसके कारण ओडिशा से गुजरात तक बेहतरीन बारिश हुई।</p>
<p>दो लंबे वेट स्पेल (बारिश के दौर) के कारण मानसून की कुल कमी में बड़ा सुधार हुआ है। जून में जो कमी 35% थी, वह जुलाई के अंत तक घटकर लगभग 13% रह गई। खेती के लिहाज से भी जुलाई की यह बारिश किसी वरदान से कम नहीं थी। गर्मियों में बोई जाने वाली फसलों के रकबे में 3 जुलाई तक जो 21% की कमी थी, वह 31 जुलाई तक घटकर केवल 3% रह गई है।</p>
<p>भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शुक्रवार को जारी अपने मासिक पूर्वानुमान में कहा कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दूसरे हिस्से के तहत अगस्त से सितंबर तक देशभर में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। बारिश 'दीर्घावधि औसत' 94 प्रतिशत से कम रहने का अनुमान जताया गया है। दीर्घावधि औसत (एलपीए) 1971 से 2020 के ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर, अगस्त से सितंबर की अवधि के दौरान पूरे देश में बारिश का एलपीए 422.8 मिलीमीटर है। एलपीए, किसी खास इलाके में एक तय समय (जैसे महीना या मौसम) में हुई बारिश का औसत होता है, जो आमतौर पर 30 से 50 साल की लंबी अवधि के आधार पर निकाला जाता है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>भारत में पहली बार ट्रेन से लाइव हार्ट का परिवहन, वंदे भारत एक्सप्रेस से सूरत से अहमदाबाद पहुंचा जीवित हृदय</title>
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<description><![CDATA[ भारत में पहली बार ट्रेन से लाइव हार्ट का परिवहन, वंदे भारत एक्सप्रेस से सूरत से अहमदाबाद पहुंचा जीवित हृदय भारतीय रेल ने रचा इतिहास, यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट में होगा प्रत्यारोपण अहमदाबाद भारतीय रेल ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से जीवित … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 12:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>भारत, में, पहली, बार, ट्रेन, से, लाइव, हार्ट, का, परिवहन, वंदे, भारत, एक्सप्रेस, से, सूरत, से, अहमदाबाद, पहुंचा, जीवित, हृदय</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भारत में पहली बार ट्रेन से लाइव हार्ट का परिवहन, वंदे भारत एक्सप्रेस से सूरत से अहमदाबाद पहुंचा जीवित हृदय</strong></p>
<p><strong>भारतीय रेल ने रचा इतिहास, यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट में होगा प्रत्यारोपण</strong></p>
<p><strong>अहमदाबाद</strong></p>
<p>भारतीय रेल ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से जीवित हृदय (Live Heart) का सफलतापूर्वक परिवहन किया। सूरत से अहमदाबाद तक हृदय को ट्रेन संख्या 20901 मुंबई सेंट्रल–गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस से सुरक्षित एवं निर्धारित समय में पहुंचाया गया। इस हृदय का प्रत्यारोपण यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर, अहमदाबाद में किया जाएगा।</p>
<p><strong>यह अत्यंत संवेदनशील और समयबद्ध जीवनरक्षक अभियान भारतीय रेल, गुजरात राज्य पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) तथा चिकित्सा टीमों के बीच उत्कृष्ट समन्वय का उदाहरण रहा।</strong></p>
<p>हृदय को अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 से यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर तक सुरक्षित एवं निर्बाध रूप से पहुंचाने के लिए RPF और गुजरात राज्य पुलिस द्वारा ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इसके माध्यम से अंग को निर्धारित समयसीमा के भीतर अस्पताल पहुंचाया गया, ताकि प्रत्यारोपण प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।</p>
<p>मंडल रेल प्रबंधक, अहमदाबाद, श्री वेद प्रकाश ने कहा, “यह भारतीय रेल के लिए अत्यंत गर्व और संतोष का क्षण है कि वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से एक जीवित हृदय को सूरत से अहमदाबाद तक सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से पहुंचाया गया। ऐसे जीवनरक्षक मिशन में समय का प्रत्येक क्षण महत्वपूर्ण होता है। भारतीय रेल, RPF, गुजरात राज्य पुलिस और चिकित्सा टीमों के बीच उत्कृष्ट समन्वय ने इस अभियान को सफल बनाया। किसी व्यक्ति का जीवन बचाने में भारतीय रेल की भूमिका निभाना हमारे लिए केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सेवा और मानवता का सर्वोच्च दायित्व है।”</p>
<p>वंदे भारत एक्सप्रेस की गति, समयपालन और विश्वसनीयता ने इस जीवनरक्षक अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय रेल केवल यात्रियों और माल के परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर आपातकालीन एवं जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाओं में भी महत्वपूर्ण सहयोगी की भूमिका निभा रही है।</p>
<p>इस ऐतिहासिक मिशन की सफलता में भारतीय रेल के विभिन्न विभागों, RPF, गुजरात राज्य पुलिस, चिकित्सकों, अंग प्रत्यारोपण समन्वयकों तथा सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सभी एजेंसियों के बीच प्रभावी एवं त्वरित समन्वय के कारण यह चुनौतीपूर्ण जीवनरक्षक अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।</p>
<p>यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय रेल की त्वरित, सुरक्षित और विश्वसनीय सेवाओं के साथ-साथ मानव जीवन की रक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>Rules Change From Today: LPG, रेलवे से टैक्स तक… आज से बदल गए 8 बड़े नियम, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर</title>
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<description><![CDATA[ नईदिल्ली        हर महीने की तरह इस महीने से भी ढेरों वित्तीय नियमों में बदलाव हुआ है. 1 अगस्‍त से बहुत से नियम बदल गए हैं, जो सीधे आपकी जेब पर असर डालेंगे. इन बदलाव में LPG गैस की कीमत से लेकर तत्‍काल टिकट बुकिंग तक के नियम शामिल हैं. आइए आनते हैं … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 12:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Rules, Change, From, Today:, LPG, रेलवे, से, टैक्स, तक…, आज, से, बदल, गए, बड़े, नियम, आपकी, जेब, पर, पड़ेगा, सीधा, असर</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नईदिल्ली   </strong><br>
   <br>
हर महीने की तरह इस महीने से भी ढेरों वित्तीय नियमों में बदलाव हुआ है. 1 अगस्‍त से बहुत से नियम बदल गए हैं, जो सीधे आपकी जेब पर असर डालेंगे. इन बदलाव में LPG गैस की कीमत से लेकर तत्‍काल टिकट बुकिंग तक के नियम शामिल हैं. आइए आनते हैं आज से क्‍या-क्‍या बदल गया है। </p>
<p><strong>पहला बदलाव: </strong>हर महीने की तरह इस बार भी LPG के दाम में बदलाव हुआ है. आज से 19 किलो वाले कमर्शियल गैस की कीमतों में 202 रुपये की कटौती हुई है. अब दिल्ली में 19 किलो के एलपीजी सिलेंडर की कीमत 2728 रुपये रह गई है. वहीं कोलकाता में इसका दाम 2872.50 रुपये हो गया है. जबकि रसोई गैस सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं देखा गया है। </p>
<p><strong>दूसरा बदलाव: </strong>1 अगस्‍त से रेलवे को लेकर भी बड़ा बदलाव हो रहा है. भारतीय रेलवे तत्‍काल टिकट बुकिंग को लेकर नियम में बदलाव (Tatkal Ticket Booking Rule Change) कर रही है. इसके तहत अब टोकन देने का समय तत्काल टिकट बुकिंग शुरू होने के समय के साथ होगा, जिससे रिजर्वेशन काउंटर पर भीड़ कम होगी. पहले यात्रियों को टोकन दिया जाएगा, फिर टोकन के हिसाब से ही टिकट जारी की जाएगी। </p>
<p><strong>तीसरा बदलाव:</strong> एक बैंक से जुड़ा भी बदलाव हो रहा है. पहली तारीख से कई बैंक भी अपनी सर्विसेज पर लागू चार्ज में चेंज कर रहे हैं. इनमें उज्जिवन स्मॉल फाइनेंस बैंक (Ujjivan Small Finance Bank) अपने ग्राहकों के लिए SMS Alert चार्ज में बदल रहा है। </p>
<p><strong>चौथा बदलाव</strong>: इस महीने कई चीजों की महंगाई बढ़ने का अनुमान लगाया गया है. दरअसल, मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि चाय की चुस्की से लेकर कपड़े, टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन तक की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, क्‍योंकि जियो पॉलिटिकल तनाव के कारण इनपुट कॉस्‍ट बढ़ रही है. ऐसे में कार के दाम से लेकर साबुन की कीमत तक सभी के दाम 4 से 6 फीसदी तक बढ़ सकते हैं। </p>
<p><strong>पांचवा बदलाव</strong>: आईटीआर 1 और आईटीआर 2 भरने की डेडलाइन 31 अगस्‍त को समाप्‍त हो गई थी और अब 1 अगस्‍त से ब‍िलेटेड आईटीआर भरना होगा, जिसके लिए 1000 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। </p>
<p><strong>छठवां बदलाव:</strong> कई बैंक 1 अगस्त से अपनी क्रेडिट कार्ड पॉलिसी में बदलाव कर रहे हैं. इन बदलावों में रिवॉर्ड पॉइंट प्रोग्राम, वार्षिक रखरखाव शुल्क और अन्य सेवा शुल्कों में संशोधन शामिल हो सकते हैं. ये बदलाव अलग-अलग बैंकों में भिन्न होते हैं, इसलिए ग्राहकों को अपने बैंक द्वारा जारी नवीनतम शुल्क अनुसूची और क्रेडिट कार्ड की शर्तों की जांच करनी चाहिए। </p>
<p><strong>7वां बदलाव: </strong>बैंकिंग को आसान बनाने के लिए CKYC 2.0 का रोलआउट शुरू हो रहा है. बैंकिंग, बीमा और म्यूचुअल फंड सेक्टर 1 अगस्त से एडवांस्ड केंद्रीय ग्राहक पहचान 2.0 को लागू कर सकते हैं. इसके तहत, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन डिजिटल अप्रूवल हासिल करने के बाद एक सेंट्रल डेटाबेस के जरिए ग्राहक की पहचान संबंधी जानकारी तक पहुंच सकेंगे. इसका फायदा ये है कि ग्राहकों को बैंक <strong>खाता खोलने, बीमा पॉलिसी खरीदने या अन्य वित्तीय लेनदेन के लिए हर बार एक ही तरह के KYC डॉक्युमेंट जमा नहीं करने होंगे। </strong></p>
<p><strong>8वां बड़ा बदलाव: </strong>1 अगस्त से लागू होने वाला अगला चेंज GST से जुड़ा है. जीएसटी से जुड़े नियम में बदलाव (GST Rule Change) सीधे बिजनेस, दुकान या ट्रेडिंग करने वालों पर असर डालेंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, ई-इनवॉइस और ई-वे बिल (e-Way Bill) सिस्टम को बेहतर और ट्रांसपरेंट बनाया जा रहा है. इसके तहत बिल-टू-शिप-टू (Bill To–Ship To) लेन-देन में शिप-टू GSTIN देना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही GSTIN, <br>
स्टेट कोड समेत अन्य जानकारियों को चेक करेगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>PM मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद छात्रा रुचिका का माफीनामा वायरल, बोली&#45; ‘मुझसे बड़ी गलती हुई’</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली दिल्ली के जंतर मंतर पर 23 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने की आरोपी रुचिका सिंह का एक माफी वाला वीडियो सामने आया है. वायरल वीडियो में वह खुद को 15 साल की बताते हुए हाथ जोड़कर माफी मांग रही है. उसका कहना है … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 11:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>दिल्ली के जंतर मंतर पर 23 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने की आरोपी रुचिका सिंह का एक माफी वाला वीडियो सामने आया है. वायरल वीडियो में वह खुद को 15 साल की बताते हुए हाथ जोड़कर माफी मांग रही है. उसका कहना है कि वह कनॉट प्लेस घूमने के बाद दोस्तों के साथ प्रदर्शन में गई थी और वहां मौजूद लोगों के प्रभाव में आकर उसने ऐसी बातें कहीं. इस वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पाया है। </p>
<p>वीडियो में रुचिका कहती है कि वह उन लोगों के प्रभाव में आ गई थी और उसने जो कुछ भी कहा वह माफी के लायक नहीं था. उसने इसे अपनी पहली और आखिरी गलती बताते हुए पूरे देश से माफी मांगी और कहा कि उसे खुद पर शर्म आ रही है। </p>
<p>यह वीडियो पीएम मोदी के उस बयान के कुछ घंटों बाद सामने आया जिसमें उन्होंने शुक्रवार को इंस्टाग्राम पर कहा था कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान उन्हें गाली देने वाले छात्रों को माफ कर दिया है. मोदी ने कहा कि उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ इस्तेमाल किए गए अपशब्द उन्हें परेशान करने वाले थे, लेकिन युवाओं को अपनी गलतियों से सीखने का मौका मिलना चाहिए। </p>
<p>इससे पहले 29 जुलाई को नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में रुचिका सिंह के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की गई थी. आरोप है कि उसने पीएम के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल कर संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई और जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया, जिसे बाद में दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने भेज दिया गया। </p>
<p>जानकारी के अनुसार रुचिका अपनी मां के साथ नोएडा की एक हाउसिंग सोसाइटी में रहती थी. उसका फ्लैट फिलहाल बंद है और सुरक्षाकर्मियों के मुताबिक वह प्रदर्शन के बाद से वापस नहीं लौटी है. पुलिस भी सोसाइटी पहुंचकर वहां के लोगों से पूछताछ कर चुकी है। </p>
<p>इस एफआईआर पर प्रदर्शन आयोजित करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी ने आपत्ति जताई है. पार्टी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि आपत्तिजनक भाषा का समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन ऐसी बातों पर आपराधिक मुकदमा चलाने से बोलने की आजादी पर बुरा असर पड़ सकता है. उनका सुझाव था कि पीड़ित पक्ष को मानहानि का मामला दर्ज कराना चाहिए, आपराधिक कार्रवाई का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए। </p>]]> </content:encoded>
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<title>अब ट्रेन में सामान ले जाने की होगी ऑनलाइन बुकिंग, जानें कितना सामान ले जा सकेंगे और किसे मिलेगा फायदा</title>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 09:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p> अगर आप ट्रेन से सफर करते हैं और अपने साथ ज्यादा सामान लेकर जाते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए एक नया नियम लागू किया है. अब कन्फर्म ट्रेन टिकट (Confirmed Train Tickets)वाले यात्री अपने साथ डिब्बे में ले जाने वाले पर्सनल सामान की ऑनलाइन बुकिंग (Personal Luggage Online booking) भी कर सकेंगे.यानी स्टेशन पर लाइन में खड़े होने के बजाय यह काम चुटकियों में ऑनलाइन होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना एक्स्ट्रा चार्ज दिए आप अपने साथ कितना सामान ले जा सकते हैं?आइए जानते हैं कि किस क्लास के कोच में कितना सामान ले जाने की छूट मिलेगी…</p>
<p>
<strong>31 जुलाई 2026 से ऑनलाइन लगेज बुकिंग शुरू</strong><br>
रेलवे की यह नई सुविधा 31 जुलाई 2026 से लागू हो गई है. रेलवे बोर्ड ने 20 जुलाई 2026 को सभी जोनल रेलवे को इस व्यवस्था को लागू करने के निर्देश दिए थे. यह सुविधा केवल उन यात्रियों के लिए है, जिनके पास कन्फर्म रिजर्वेशन टिकट है और जो अपना सामान अपने साथ रिजर्व कोच में लेकर यात्रा करेंगे। </p>
<p><strong>नए नियम में क्या बदला है?</strong><br>
अब यात्रियों को अपने साथ ले जाने वाले अपने पर्सनल सामान की बुकिंग के लिए स्टेशन पर अलग से पूरी प्रक्रिया नहीं करनी होगी. अगर सामान रेलवे की तय सीमा के भीतर है, तो उसकी ऑनलाइन बुकिंग की जा सकेगी. इसका मकसद लगेज बुकिंग को आसान बनाना और पूरी प्रक्रिया को ज्यादा सुविधाजनक बनाना है। </p>
<p><strong>किन यात्रियों को मिलेगा इस सुविधा का लाभ?</strong><br>
यह सुविधा सिर्फ उन्हीं यात्रियों को मिलेगी जिनके पास कन्फर्म ट्रेन टिकट है. वेटिंग लिस्ट या आरएसी (RAC) टिकट पर यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए फिलहाल यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। </p>
<p>
<strong>कितना सामान मुफ्त में ले जा सकेंगे?<br>
रेलवे ने अलग-अलग क्लास के लिए पहले से तय मुफ्त सामान ले जाने की सीमा में कोई बदलाव नहीं किया है.</strong></p>
<p><strong>    फर्स्ट एसी (First AC) में यात्रा करने वाले यात्री 70 किलोग्राम तक सामान मुफ्त ले जा सकते हैं.</strong></p>
<p><strong>    फर्स्ट क्लास और सेकेंड एसी (2AC) के यात्रियों के लिए यह सीमा 50 किलोग्राम है.</strong></p>
<p><strong>    थर्ड एसी (3AC), एसी चेयर कार (CC) और स्लीपर क्लास के यात्री 40 किलोग्राम तक सामान मुफ्त ले जा सकते हैं.</strong></p>
<p><strong>    वहीं सेकेंड क्लास के यात्रियों के लिए मुफ्त सामान ले जाने की सीमा 35 किलोग्राम तय है.</strong></p>
<p><strong>अगर सामान तय लिमिट से ज्यादा हो तो क्या होगा?</strong><br>
अगर कोई यात्री फ्री लिमिट से ज्यादा सामान लेकर यात्रा करना चाहता है, तो रेलवे के नियमों के मुताबिक  अतिरिक्त सामान की बुकिंग की जा सकेगी. इसके लिए यात्रियों को लागू लगेज दर का 1.5 गुना शुल्क देना होगा. इसके बाद अतिरिक्त सामान को भी रिजर्व कोच में अपने साथ ले जाया जा सकेगा. इस हफ्ते ट्रेन से कहीं घूमने या घर जाने का प्लान बना रहे हैं तो अपने साथ रखे सूटकेस और बैग्स का वजन एक बार जरूर चेक कर लें। </p>
<p><strong>ऑनलाइन बुकिंग के समय क्या-क्या जानकारी मिलेगी?</strong><br>
रेलवे ने कहा है कि ऑनलाइन लगेज बुकिंग करते समय यात्रियों को जरूरी जानकारी भी दिखाई जाएगी. इसमें यह बताया जाएगा कि उनकी क्लास में कितना सामान मुफ्त ले जाने की अनुमति है, अधिकतम कितना वजन ले जा सकते हैं, कौन-कौन सी वस्तुएं सामान के रूप में ले जाने की अनुमति नहीं है और तय सीमा से ज्यादा सामान होने पर कितना शुल्क या जुर्माना देना पड़ सकता है। </p>
<p>इस नई सुविधा मकसद यात्रियों के लिए लगेज बुकिंग की प्रक्रिया को आसान बनाना है. अब कन्फर्म टिकट वाले यात्री यात्रा से पहले ही अपने सामान की ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे. इससे स्टेशन पर समय भी बचेगा और सफर की तैयारी पहले से आसान हो जाएगी। </p>]]> </content:encoded>
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<title>परिसीमन बिल पर सरकार की अग्निपरीक्षा! क्या संसद में मिलेगा दो&#45;तिहाई बहुमत?</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली संसद के दोनों ही सदन से एंटी पेपर लीक बिल पास हो गया है. मॉनसून सत्र का दूसरा सप्ताह शुक्रवार को पूरा हो जाएगा. मोदी सरकार हंगामे के बीच विधायी कामकाज निपटाना शुरू कर दिया है. सरकार संसद सत्र के दूसरे सप्ताह में दो महत्वपूर्ण बिल को पास कराने में सफल रही है … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 09:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>परिसीमन, बिल, पर, सरकार, की, अग्निपरीक्षा, क्या, संसद, में, मिलेगा, दो-तिहाई, बहुमत</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
संसद के दोनों ही सदन से एंटी पेपर लीक बिल पास हो गया है. मॉनसून सत्र का दूसरा सप्ताह शुक्रवार को पूरा हो जाएगा. मोदी सरकार हंगामे के बीच विधायी कामकाज निपटाना शुरू कर दिया है. सरकार संसद सत्र के दूसरे सप्ताह में दो महत्वपूर्ण बिल को पास कराने में सफल रही है और अब सभी की निगाहें महिला आरक्षण से जुड़े बिल और लोकसभा-विधानसभा सीटों को बढ़ाने वाले परिसीमन से जुड़े विधेयक पर है। </p>
<p>संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ है और 13 अगस्त 2026 तक चलेगा. संसद सत्र का पहला सप्ताह पेपर लीक और जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन पर पुलिस एक्शन के विरोध में हंगामे के भेंट चढ़ गया. दूसरे सप्ताह में एंटी पेपर लीक बिल और वंदे मातरम बिल को सरकार पास करा ली है। </p>
<p>शुक्रवार के बाद सोमवार को संसद सत्र शुरू होगा, जिसके बाद 13 अगस्त तक चलना है. इस तरह आखिरी के 9 दिन में संसद सत्र में सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण के जुड़े विधेयक को पास कराने के लिए अपने कदम को आगे बढ़ाएगी. इस दिशा में मोदी सरकार आगे बढ़ती है तो फिर दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े को कैसे पार कर पाएगी? </p>
<p><strong>महिला आरक्षण-परिसीमन बिल का क्या होगा</strong><br>
संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले तय माना जा रहा था कि मोदी सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को पास कराने की दिशा में अपने कदम बढ़ाएगी. इसकी वजह टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) लोकसभा सांसदों की बगावत रही, जिसके चलते मोदी सरकार का संसद में नंबर गेम बेहतर हुआ है. पेपर लीक के मुद्दे पर छात्र आंदोलन के चलते सरकार के सारे मंसूबों पर पानी फिर गया. मॉनसून सत्र के शुरूआती दो हफ्ते हंगामे के भेंट चढ़ गए, लेकिन अब अगले हफ्ते विधायी कामकाज को निपटाएगी। </p>
<p>हालांकि, कुछ बिलों पर टकराव की स्थिति बन सकती है, जिनमें एफसीआरए प्रमुख है. हंगामा होने पर संविधान संशोधन बिल पेश करने पर भी संशय गहरा गया है. महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर सरकारी की स्थिति साफ नहीं है. ऐसे में माना जा रहा है कि मोदी सरकार इन दिनों विधेयक को तभी लाएगी जब वह इसे पारित कराने के लिए पूरी तरह से आश्वस्त होगी। </p>
<p><strong>परिसीमन के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए</strong><br>
महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए, क्योंकि इन दोनों विधेयक संविधान संशोधन के जरिए हो सकता है. लोकसभा में कुल 543 सीटों में से 3 सीटें खाली हैं. इस तरह लोकसभा के 540 सदस्यों में से दो-तिहाई के लिए 360 सांसदों का समर्थन चाहिए। </p>
<p>मोदी सरकार ने अप्रैल 2026 में परिसीमन बिल पहली बार लोकसभा में पेश किया था, उस समय वोटिंग के दौरान एनडीए को 298 सांसदों का समर्थन मिला था. सरकार दो-तिहाई बहुमत न जुटा पाने के चलते विधेयक को पास नहीं करा सकी थी. हालांकि, बदले हुए सियासी समीकरण में बीजेपी का नंबर गेम पहले से मजबूत हुआ है। </p>
<p><strong>दो-तिहाई के नंबर गेम से कितनी दूर सरकार</strong><br>
बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए के पास 293 सांसदों का समर्थन है. तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनसीपीआई में शामिल हुए 20 सांसदों का समर्थन मोदी सरकार को है. इसके अलावा उद्धव ठाकरे की पार्टी के 6 सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं. इस तरह मोदी सरकार के समर्थन में सांसदों की संख्या 319 हो रही है. इसके अलावा वाईएसआरसीपी के 4 और 1 निर्दलीय को मिलाकर यानि 5 सांसदों का समर्थन पहले से हैं, उन्हें मिला देते हैं तो फिर यह आंकड़ा 324 पहुंच जा रह है। </p>
<p>मोदी सरकार के दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों के समर्थन चाहिए. ऐसे में सरकार की नजर डीएमके के 22 सांसदों और शरद पवार की पार्टी के 8 सांसदों पर थी. एंटी पेपर लीक के मुद्दे पर शरद पवार की पार्टी ने जिस तरह से आक्रामक तेवर अपनाए रखा गया, उसके चलते मोदी सरकार के लिए एनसीपी (एसपी) का समर्थन हासिल करना अब मुश्किल दिख रहा है. हालांकि, सरकार अभी इन दोनों विधेयक पर अपने पत्ते नहीं खोल रही है.माना जा रहा है कि सरकार दो-तिहाई का नंबर पूरी तरह से जुगाड़ कर लेगी, तभी संसद में बिल लेकर आएगी?</p>]]> </content:encoded>
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<title>CBI का बड़ा खुलासा! टीचर्स को घर जाने की छूट, कोचिंग में पढ़ाए गए वही सवाल; ऐसे लीक हुआ NEET पेपर</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच में CBI को बड़ा सुराग मिला है. जांच एजेंसी का दावा है कि पेपर लीक का सबसे बड़ा कारण NTA की परीक्षा प्रक्रिया में मौजूद एक गंभीर खामी थी. जिन शिक्षकों को मेडिकल प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी, उन्हीं को … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 20:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच में CBI को बड़ा सुराग मिला है. जांच एजेंसी का दावा है कि पेपर लीक का सबसे बड़ा कारण NTA की परीक्षा प्रक्रिया में मौजूद एक गंभीर खामी थी. जिन शिक्षकों को मेडिकल प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी, उन्हीं को बाद में उसी प्रश्नपत्र का मराठी भाषा में ट्रांसलेट करने का काम भी सौंप दिया गया. CBI का कहना है कि इसी वजह से आरोपियों को अंतिम प्रश्नपत्र लंबे समय तक देखने और याद करने का मौका मिला. CBI के मुताबिक गिरफ्तार किए गए तीनों शिक्षक NTA के पेपर सेटिंग पैनल का हिस्सा थे। </p>
<p><strong>टीचर्स ने दिया धोखा</strong><br>
इन टीचर्स में केमिस्ट्री के टीचर पी. वी. कुलकर्णी, फिजिक्स की टीचर मनीषा गुरुनाथ मंडारे और बायोलॉजी की टीचर मनीषा संजय हवलदार शामिल हैं. जांच एजेंसी का आरोप है कि इन तीनों ने अंतिम प्रश्नपत्र के सवाल याद कर लिए और बाद में उन्हें पुणे में अपनी कोचिंग क्लास में पढ़ने वाले चुनिंदा छात्रों तक पहुंचाया। </p>
<p>जांच में सामने आया है कि इन शिक्षकों को परीक्षा से पहले कई दिनों तक अंतिम प्रश्नपत्र के साथ काम करना पड़ा, क्योंकि उन्हें प्रश्नपत्र तैयार करने के अलावा उसका मराठी में अनुवाद भी करना था. CBI का कहना है कि इसी दौरान आरोपियों ने सवालों को याद किया और उनका एक तरह का क्वेश्चन बैंक तैयार कर लिया। </p>
<p><strong>कोचिंग में छात्रों को पढ़ा दिए नीट के सवाल</strong><br>
CBI की जांच में यह भी सामने आया है कि इन शिक्षकों को सुरक्षा के लिहाज से एक सैनिटाइज्ड एनवायरमेंट में रखा गया था, ताकि प्रश्नपत्र पूरी तरह गोपनीय रहे. लेकिन जांच एजेंसी का आरोप है कि इस दौरान उन्हें घर जाने और अपनी कोचिंग क्लास लेने की भी अनुमति थी. इसी दौरान कथित तौर पर उन्होंने छात्रों को महत्वपूर्ण सवालों के नाम पर वही प्रश्न पढ़ाए, जो बाद में अंतिम NEET परीक्षा में पूछे गए। </p>
<p>जांच एजेंसी का दावा है कि छात्रों को कभी यह नहीं बताया गया कि ये सवाल सीधे अंतिम प्रश्नपत्र से लिए गए हैं. उन्हें केवल इतना कहा गया कि ये बहुत महत्वपूर्ण" प्रश्न हैं. इसी वजह से छात्रों को किसी तरह का शक नहीं हुआ। </p>
<p><strong>ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे का भी बड़ा रोल</strong> <br>
CBI के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क में पुणे की ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे की भी अहम भूमिका थी. जांच में आरोप है कि वाघमारे की पहचान तीनों शिक्षकों से थी. उसने कोचिंग में पढ़ने वाले छात्रों से ये सवाल इकट्ठा किए, फिर उन्हें टाइप करके एक PDF तैयार की. जांच एजेंसी का कहना है कि इसके बाद यह PDF धनंजय लोखंडे तक पहुंची. आरोप है कि लोखंडे ने इस लीक हुए पेपर को आगे अलग-अलग लोगों को बेचा. CBI का मानना है कि इसी नेटवर्क के जरिए यह प्रश्नपत्र देश के अलग-अलग राज्यों तक पहुंच गया और बड़े स्तर पर फैल गया। </p>
<p><strong>एनटीए को सौंपी जाएगी रिपोर्ट</strong><br>
CBI ने इस पूरी जांच के दौरान NTA को परीक्षा प्रक्रिया में मौजूद इस कथित खामी की जानकारी भी दी है. एजेंसी जल्द ही NTA को इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट सौंप सकती है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके. इस मामले में CBI ने मंगलवार को अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है. चार्जशीट में कुल 13 गिरफ्तार आरोपियों को नामजद किया गया है. फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं. जांच एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस केस में और भी खुलासे हो सकते हैं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>एमनेस्टी का बड़ा दावा: 7 अक्टूबर 2023 के बाद भारत से इजरायल भेजे गए हथियारों के हजारों शिपमेंट</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली गाजा युद्ध के दौरान भारत ने इजरायल को हथियार, गोला-बारूद और सैन्य उपकरणों के पुर्जों की बड़ी मात्रा में सप्लाई की. एमनेस्टी इंटरनेशनल की नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मौजूदा हालात को देखते हुए इस तरह की सैन्य सप्लाई अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन हो सकती है. हालांकि, भारत सरकार … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 19:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>गाजा युद्ध के दौरान भारत ने इजरायल को हथियार, गोला-बारूद और सैन्य उपकरणों के पुर्जों की बड़ी मात्रा में सप्लाई की. एमनेस्टी इंटरनेशनल की नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मौजूदा हालात को देखते हुए इस तरह की सैन्य सप्लाई अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन हो सकती है. हालांकि, भारत सरकार की ओर से इस रिपोर्ट पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। </p>
<p>'मेड इन इंडिया: द सप्लाई ऑफ वेपन्स एंड एम्युनिशन टू इजरायल' शीर्षक से जारी रिपोर्ट में एमनेस्टी ने दावा किया है कि 7 अक्टूबर 2023 से 30 नवंबर 2025 के बीच भारत से इजरायल के लिए कम से कम 2,596 हथियारों और सैन्य उपकरणों के शिपमेंट भेजे गए. संगठन का कहना है कि उसने अपने विश्लेषण में नागरिक इस्तेमाल के सामान और मिसाइल डिफेंस सिस्टम से जुड़े उपकरणों को शामिल नहीं किया है। </p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, भारत से इजरायल को करीब 3.90 लाख छोटे हथियारों के पुर्जे, 5.64 लाख से ज्यादा विस्फोटक उपकरणों के हिस्से और सैन्य वाहनों के सैकड़ों कंपोनेंट भेजे गए. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इनमें मशीन गन के पुर्जे, 155 एमएम आर्टिलरी शेल, ड्रोन वॉरहेड और बख्तरबंद वाहनों के पार्ट्स शामिल हैं, जिन्हें इजरायल की रक्षा कंपनियों ने प्राप्त किया। </p>
<p><strong>गाजा के हालात दुनिया के सामने लेकिन भारत ने इजरायल के साथ बढ़ाया सहयोग!</strong><br>
एमनेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव एग्नेस कैलामार्ड ने कहा कि गाजा में हालात पूरी दुनिया के सामने हैं, इसके बावजूद भारत ने इजरायली रक्षा क्षेत्र के साथ अपना सहयोग जारी रखा. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने न सिर्फ निजी कंपनियों के हथियार निर्यात पर पर्याप्त निगरानी नहीं रखी, बल्कि इजरायल के साथ अपनी रक्षा साझेदारी भी मजबूत की। </p>
<p>रिपोर्ट में कुछ भारतीय कंपनियों का भी जिक्र किया गया है, जिनमें पीएलआर सिस्टम्स, इंडो एमआईएम प्राइवेट लिमिटेड, कल्याणी सिस्टम्स, सरकारी कंपनी म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड और अल्फा एलसेक डिफेंस एंड एयरोस्पेस सिस्टम्स शामिल हैं. वहीं, इजरायल की जिन कंपनियों को कथित तौर पर सैन्य सामान मिला, उनमें एलबिट सिस्टम्स, राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स और इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के नाम शामिल हैं। </p>
<p>एमनेस्टी ने यह भी कहा कि भारत अभी तक आर्म्स ट्रेड ट्रीटी (ATT) का सदस्य नहीं है. संगठन का आरोप है कि भारत की मौजूदा निर्यात व्यवस्था में मानवाधिकारों से जुड़े जोखिमों का आकलन करने की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है और हथियारों के निर्यात की प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता भी नहीं है। </p>
<p><strong>एमनेस्टी ने भारत सरकार से की ये अहम मांग</strong><br>
रिपोर्ट के मुताबिक, जून और जुलाई 2026 में भारत सरकार और रिपोर्ट में नामित 9 कंपनियों को एमनेस्टी की तरफ से सवाल भेजे गए थे, लेकिन रिपोर्ट प्रकाशित होने तक किसी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला. एमनेस्टी ने भारत सरकार से मांग की है कि वह इजरायल को हथियार, गोला-बारूद और सैन्य उपकरणों के पुर्जों के निर्यात की अनुमति तत्काल रोक दे। </p>
<p>संगठन का कहना है कि कंपनियों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके उत्पाद किसी भी तरह अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन या मानवाधिकार हनन में इस्तेमाल न हों। </p>
<p>हालांकि, यह ध्यान देने वाली बात है कि रिपोर्ट में किए गए सभी दावे एमनेस्टी इंटरनेशनल के हैं. भारत सरकार ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की है. ऐसे में इस मामले में सरकार का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>SCO Summit 2027: क्या इस्लामाबाद जाएंगे PM मोदी? पाकिस्तान कर रहा न्योता भेजने की तैयारी</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से संकेत दिए हैं कि वह वर्ष 2027 में इस्लामाबाद में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करेगा।  पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि SCO के सभी सदस्य देशों को सम्मेलन … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 19:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>SCO, Summit, 2027:, क्या, इस्लामाबाद, जाएंगे, मोदी, पाकिस्तान, कर, रहा, न्योता, भेजने, की, तैयारी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong><br>
पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से संकेत दिए हैं कि वह वर्ष 2027 में इस्लामाबाद में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करेगा। </p>
<p>पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि SCO के सभी सदस्य देशों को सम्मेलन में आमंत्रित किया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष शामिल होंगे, यानी भारत भी आमंत्रित देशों में रहेगा। </p>
<p>पाकिस्तानी प्रवक्ता ने कहा कि SCO की प्रक्रिया और प्रोटोकॉल के तहत मेजबान देश के लिए सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करना उसका दायित्व है। </p>
<p>इस दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पाकिस्तान के विदेश मंत्री के बीच मनीला में ASEAN बैठकों के दौरान संभावित मुलाकात को लेकर भी सवाल पूछा गया. पाकिस्तान के प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें भारत की ओर से ऐसी किसी बैठक के अनुरोध की जानकारी नहीं है। </p>
<p><strong>मेजबान के नाते पाकिस्तान का दायित्व</strong><br>
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने हाल ही में आयोजित एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि SCO की निर्धारित प्रक्रिया और प्रोटोकॉल के तहत, मेजबान देश का यह दायित्व है कि वह संगठन के सभी सदस्य देशों को शिखर सम्मेलन के लिए निमंत्रण भेजे।</p>
<p>उन्होंने कहा है कि इस सम्मेलन में सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को आमंत्रित किया जाएगा, जिसका सीध मतलब है कि भारत के प्रधानमंत्री को भी औपचारिक रूप से न्योता भेजा जाएगा।</p>
<p><strong>विदेश मंत्री की मुलाकात पर सस्पेंस</strong><br>
इसी ब्रीफिंग के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पाकिस्तान के विदेश मंत्री के बीच मनीला में ASEAN बैठकों के इतर संभावित मुलाकात को लेकर भी सवाल पूछा गया। हालांकि, पाकिस्तानी प्रवक्ता ने इस पर कोई ठोस जानकारी होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्हें फिलहाल भारत की ओर से ऐसी किसी द्विपक्षीय बैठक के अनुरोध की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है।</p>
<p><strong>SCO: वैश्विक राजनीति का एक बड़ा मंच</strong><br>
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक प्रमुख वार्षिक अंतरराष्ट्रीय मंच है, जिसकी स्थापना 15 जून 2001 को बीजिंग में हुई थी। वर्तमान में इसमें भारत, पाकिस्तान, चीन और रूस समेत कुल 10 सदस्य देश शामिल हैं। कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस भी इस संगठन के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य पूरे यूरोएशियाई क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।</p>
<p><strong>कैसे तय होती है सम्मेलन की मेजबानी?</strong><br>
SCO का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय ‘काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट’ (CHS) है। इसकी अध्यक्षता हर साल सदस्य देशों के बीच Alphabetical order के अनुसार बदलती रहती है। जो देश अध्यक्षता संभालता है, वही उस वर्ष के राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करता है।</p>
<p>इसी क्रम के अनुसार, साल 2027 में पाकिस्तान के पास इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी का अवसर होगा। पाकिस्तान की ओर से न्योता भेजने की यह कवायद अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का हिस्सा है, लेकिन इस पर भारत का रुख क्या होगा, यह आने वाले समय में कूटनीतिक संबंधों की दिशा तय करेगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>बंगाल में जैश का संदिग्ध गिरफ्तार, शुभेंदु अधिकारी की रेकी के सुराग; आतंकी नेटवर्क की जांच तेज</title>
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<description><![CDATA[  कोलकाता पश्चिम बंगाल की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों से कथित संबंध रखने के शक में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान हमीम मंडल के रूप में हुई है, जो हावड़ा जिले का रहने वाला है. उसे शुक्रवार सुबह पूर्वी बर्दवान जिले के बर्दवान शहर स्थित एक … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 18:45:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> कोलकाता</strong></p>
<p>पश्चिम बंगाल की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों से कथित संबंध रखने के शक में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान हमीम मंडल के रूप में हुई है, जो हावड़ा जिले का रहने वाला है. उसे शुक्रवार सुबह पूर्वी बर्दवान जिले के बर्दवान शहर स्थित एक निजी टाउनशिप से पकड़ा गया। </p>
<p>पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हमीम पिछले चार से पांच दिनों से एजेंसियों की निगरानी में था, जबकि बर्दवान में रहने के दौरान महीनों से उस पर नजर रखी जा रही थी. उसके पास से मोबाइल फोन जब्त किया गया है, जिसमें पाकिस्तान के कुछ संपर्कों से बातचीत के सबूत मिले हैं। </p>
<p>पुलिस के अनुसार, निगरानी के दौरान हमीम को राज्य के कई इलाकों में आते जाते देखा गया था. उसके फोन की जांच में कुछ संदिग्ध चीजें भी मिली हैं. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसका शहजाद भट्टी गैंग से भी कोई संबंध है या नहीं।  </p>
<p>सूत्रों का कहना है कि हमीम को जल्द ही पूर्वी बर्धमान की स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा, इसके बाद आगे की पूछताछ के लिए उसे कोलकाता लाया जाएगा। </p>
<p>जांच में सामने आया है कि हमीम पहले हावड़ा के पिलखाना इलाके में रहता था और वहां दर्जी का काम करता था. वह वर्दियां सिलने के काम से जुड़ा था. पिलखाना के कुछ हिस्सों में हाल ही में बेदखली का नोटिस जारी होने के बाद वह वहां से बर्धमान चला गया था। </p>
<p>पुलिस को शक है कि हमीम बंगाल के बड़े राजनीतिक नेताओं की गतिविधियों पर नजर रखने के काम में भी शामिल हो सकता है, जिसमें राज्य की मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी शामिल हैं. फिलहाल पूरे मामले की गहराई से जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई और अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं. पुलिस इस बात का भी पता लगाने में जुटी है कि उसके तार और किन लोगों से जुड़े हैं। </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>मोदी कैबिनेट के बड़े फैसले: किसानों को अगले 5 साल तक ₹6,000 मिलेंगे, PM सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कई बड़े फैसले लिए हैं. मोदी कैबिनेट ने कुल 4.50 लाख करोड़ रुपये के पांच बड़े प्रोजेक्ट्स को अपनी मंजूरी दे दी है. इसमें किसानों से लेकर रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े अहम सेक्टर्स शामिल हैं. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट ब्रीफिंग में बताया कि सबसे … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 17:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मोदी, कैबिनेट, के, बड़े, फैसले:, किसानों, को, अगले, साल, तक, ₹6, 000, मिलेंगे, सूर्य, सरोवर, योजना, को, मंजूरी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कई बड़े फैसले लिए हैं. मोदी कैबिनेट ने कुल 4.50 लाख करोड़ रुपये के पांच बड़े प्रोजेक्ट्स को अपनी मंजूरी दे दी है. इसमें किसानों से लेकर रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े अहम सेक्टर्स शामिल हैं. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट ब्रीफिंग में बताया कि सबसे बड़ा फैसला पीएम किसान सम्मान निधि योजना को लेकर हुआ है. इस योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए एक्सटेंड कर दिया गया है. इसके लिए सरकार ने 3.15 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट रखा है. इसके साथ ही पानी पर तैरने वाले सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए पीएम सूर्य सरोवर योजना को भी हरी झंडी मिल गई है. सरकार का मुख्य फोकस किसानों की आय बढ़ाने और क्लीन एनर्जी सेक्टर को ज्यादा से ज्यादा प्रमोट करने पर है। </p>
<p><strong>क्या है पीएम किसान योजना में हुए बड़े बदलाव और किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?</strong><br>
सरकार ने पीएम किसान योजना को अगले पांच सालों के लिए बढ़ा दिया है. इस पर कुल 3.15 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा. हर साल किसानों के खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए 6000 रुपये भेजे जाएंगे. यह रकम दो हजार रुपये की तीन किस्तों में मिलेगी. इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को फसल की बुवाई और कटाई के वक्त आर्थिक मदद देना है. इससे किसान महंगे कर्ज लेने से बचेंगे. अब तक इस योजना के तहत 23 किस्तों में 4.47 लाख करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं. इसका फायदा छोटे और सीमांत किसानों को सीधे तौर पर मिलेगा। </p>
<p><strong>पानी पर सोलर पैनल लगाने वाली पीएम सूर्य सरोवर योजना से देश को क्या लाभ होगा?</strong><br>
कैबिनेट ने पीएम सूर्य सरोवर योजना के लिए 5070 करोड़ रुपये का बजट पास किया है. इसका टारगेट अगले पांच साल में 5000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर कैपेसिटी तैयार करना है. इसमें जमीन अधिग्रहण की कोई जरूरत नहीं होगी. इससे पानी भाप बनकर कम उड़ेगा और सिंचाई के लिए ज्यादा पानी बचेगा. सरकार फ्लोटिंग सिस्टम की मैन्युफैक्चरिंग को देश में ही प्रमोट करेगी. इस बड़े प्रोजेक्ट से करीब 17000 नए रोजगार के मौके भी पैदा होंगे. साथ ही कार्बन एमिशन में भी भारी कमी देखने को मिलेगी। </p>
<p><strong>कैबिनेट ब्रीफिंग में खेल और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए क्या बड़े ऐलान किए गए?</strong><br>
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए भी गंभीर है. खेलो इंडिया और नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन स्कीम के लिए 36441 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. इसके अलावा समुद्र मंथन प्रोजेक्ट के लिए 84084 करोड़ रुपये दिए गए हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए ट्विन ट्यूब टनल के निर्माण पर 9779 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इन सभी प्रोजेक्ट्स का मकसद देश की इकॉनमी को तेजी से आगे बढ़ाना है. सरकार हर सेक्टर को ग्लोबल लेवल पर कंपटीटिव बनाना चाहती है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>बॉक्स में धड़कता दिल, वंदे भारत से ढाई घंटे में सूरत से अहमदाबाद पहुंचा हार्ट; भारत में पहली बार हुआ ऐसा</title>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 16:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अहमदाबाद</strong></p>
<p> तेजी से बदलती मौजूदा जीवनशैली में दिल से जुड़ी बीमारियां बड़ी तेजी से बढ़ी है. हार्ट अटैक हो या हार्ट फेलियर कब किसे कहां हो जाए, कोई कह नहीं सकता. इसके कई उदाहरण भी सामने आए हैं. ऐसी स्थिति में तत्काल सही इलाज नहीं मिले तो इंसान का बचना मुश्किल हो जाता है. हार्ट फेलियर की स्थिति में हार्ट ट्रांसप्लांट करने की नौबत आती है. ऐसी स्थिति में लाइव हार्ट की जरूरत पड़ती है. फिर से जल्द से जल्द उस हॉस्पिटल तक पहुंचाने की चुनौती होती है, जहां मरीज एडमिट हो. इसके लिए एयर एंबुलेंस से लेकर ग्रीन कॉरिडोर बनाकर आवाजाही तक किए जाने के उदाहरण हैं. लेकिन भारत में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी ट्रेन से  हार्ट का ट्रांसपोर्टेशन हुआ हो। </p>
<p><strong>मुंबई गांधीनगर वंदे भारत ट्रेन से पहुंचा लाइव हार्ट</strong><br>
यह इतिहास रचा गया है गुजरात में. जहां वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन से जीवित हृदय (Live Heart) का सफलतापूर्वक परिवहन किया. सूरत से अहमदाबाद तक हार्ट को ट्रेन संख्या 20901 मुंबई सेंट्रल–गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस से सुरक्षित एवं निर्धारित समय में पहुंचाया गया. इस हृदय का प्रत्यारोपण यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर, अहमदाबाद में किया जाएगा. 2 घंटा 27 मिनट में ट्रेन से यह दूरी पूरी की। </p>
<p>भारतीय रेल, गुजरात राज्य पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और मेडिकल टीम ने शानदार समन्वय करते हुए इस अत्यंत संवेदनशील और समयबद्ध जीवनरक्षक अभियान को पूरा किया है। </p>
<p><strong>अहमदाबाद स्टेशन से यूएन मेहता हॉस्पिटल तक बना था ग्रीन कॉरिडोर</strong><br>
हार्ट को अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 से यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर तक सुरक्षित एवं निर्बाध रूप से पहुंचाने के लिए RPF और गुजरात राज्य पुलिस द्वारा ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया. इसके माध्यम से अंग को निर्धारित समयसीमा के भीतर अस्पताल पहुंचाया गया, ताकि प्रत्यारोपण प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो। </p>
<p><strong>रेल अधिकारी बोले- यह हमारे लिए गर्व और संतोष का पल</strong><br>
इस ऑपरेशन के बारे में अहमदाबाद मंडल रेल प्रबंधक वेद प्रकाश ने कहा, यह भारतीय रेल के लिए अत्यंत गर्व और संतोष का क्षण है कि वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से एक जीवित हृदय को सूरत से अहमदाबाद तक सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से पहुंचाया गया. ऐसे जीवनरक्षक मिशन में समय का प्रत्येक क्षण महत्वपूर्ण होता है। </p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि भारतीय रेल, RPF, गुजरात राज्य पुलिस और चिकित्सा टीमों के बीच उत्कृष्ट समन्वय ने इस अभियान को सफल बनाया. किसी व्यक्ति का जीवन बचाने में भारतीय रेल की भूमिका निभाना हमारे लिए केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सेवा और मानवता का सर्वोच्च दायित्व है। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>ITR Filing Last Date: आज ही भरें इनकम टैक्स रिटर्न, चूके तो ₹1,000 से ₹5,000 तक देना पड़ सकता है जुर्माना</title>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 15:45:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ITR, Filing, Last, Date:, आज, ही, भरें, इनकम, टैक्स, रिटर्न, चूके, तो, ₹1, 000, से, ₹5, 000, तक, देना, पड़, सकता, है, जुर्माना</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
अगर आपने अब तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल (ITR File) नहीं किया है, तो सब काम छोड़कर पहले इसे कर लें. दरअसल, आईटीआर फाइलिंग का आज आखिरी तारीख है. अगर आप इसे भरने से चूक जाते हैं, तो तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. इनकम टैक्स विभाग की ओर से जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जो इनकम के हिसाब से 1000 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक हो सकता है। </p>
<p><strong>5.5 करोड़ लोगों ने किया ITR फाइल</strong><br>
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट लगातार सोशल मीडिया पर पोस्ट के माध्यम से और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर मैसेज भेजकर अलर्ट करता आ रहा है कि इस काम को जल्द से जल्द करें. ताजा आंकड़ों को देखें, तो आयकर विभाग के मुताबिक, अब तक AY 2026-27 के लिए देश के 5.5 करोड़ से ज्यादा लोगों ने ये काम कर लिया है और इनमें 42 लाख लोगों ने सिर्फ 30 जुलाई को रिटर्न दाखिल किया. अगर आप अब भी इस लिस्ट में नहीं हैं, तो फटाफट इस काम को कर लें। </p>
<p><strong>डेडलाइन चूकी, तो क्या होगा? </strong><br>
आयकर रिटर्न को लेकर इनकम टैक्स विभाग द्वारा तय किए गए नियमों को देखें, तो ITR Filing तय डेडलाइन तक करना जरूरी है और अगर ऐसा नहीं होता है, तो भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. इसमें जुर्माने का भी प्रावधान है. इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234F के तहत डेडलाइन के बाद रिटर्न फाइल करने पर ऐसे टैक्सपेयर्स जिनपर टैक्स देनदारी है, उनपर इनकम के हिसाब से अधिकतम 5000 रुपये तक की पेनाल्टी लगाई जा सकती है। </p>
<p>IT नियम मुताबिक, अगर किसी टैक्सपेयर्स की कुल इनकम 5 लाख रुपये या इससे अधिक से अधिक है, तो फिर देरी से आईटीआर फाइल करने पर उन्हें 5,000 रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है. वहीं जिनकी आय 5 लाख रुपये से कम है, उनके लिए जुर्माने की राशि 1,000 रुपये निर्धारित है।</p>
<p><strong>डेडलाइन चूकी तो ये परेशानियां भी</strong><br>
आईटीआर फाइलिंग में देरी के चलते जहां जुर्माना भरना पड़ सकता है, तो वहीं अन्य परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है. अगर टैक्स बकाया है, तो सेक्शन 234A के तहत बकाया राशि पर 1% मंथली इंटरेस्ट देना पड़ेगा. इसके साथ ही बता दें कि ITR Filing की तय डेडलाइन के बाद दाखिल किए गए रिटर्न की प्रोसेसिंग में आमतौर पर लंबा समय लग जाता है, जिससे रिफंड के पैसे वापस पाने की उम्मीद लगाए बैठे टैक्सपेयर्स को देरी का सामना करना पड़ता है। </p>
<p><strong>जेल का भी है प्रावधान </strong><br>
आईटीआर फाइलिंग में जानकारी छिपाने या गलत जानकारी देने के मामले में जेल तक का सामना करना पड़ सकता है. लगातार टैक्स न भरने वालों या फिर जानबूझकर टैक्स चोरी करने के गंभीर मामलों के लिए इस तरह की कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है. जिसमें गंभीरता और इरादे के आधार पर तीन महीने से लेकर दो साल तक की जेल शामिल है। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>Weather Update 31 July: मॉनसून ने पकड़ी रफ्तार, यूपी&#45;बिहार समेत 15 राज्यों में झमाझम बारिश का अलर्ट</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली बिहार और उत्तर प्रदेश समेत देश के उत्तरी हिस्से में मॉनसून थोड़ा स्लो होने के बाद फिर से रफ्तार पकड़ रहा है। मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत 15 राज्यों में अगले पांच से छह दिन तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। 31 जुलाई को … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 15:45:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Weather, Update, July:, मॉनसून, ने, पकड़ी, रफ्तार, यूपी-बिहार, समेत, राज्यों, में, झमाझम, बारिश, का, अलर्ट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>बिहार और उत्तर प्रदेश समेत देश के उत्तरी हिस्से में मॉनसून थोड़ा स्लो होने के बाद फिर से रफ्तार पकड़ रहा है। मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत 15 राज्यों में अगले पांच से छह दिन तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। 31 जुलाई को ही उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में मौसम करवट लेने जा रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि 5 अगस्त तक भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक छत्तीसगढ़ के पश्चिमी इलाकों में और पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। वहीं मॉनसून ट्रफ बीकानेर, कोटा, गुना, सागर, गोपपालपुर से होकर बंगाल की खाड़ी तक फैली है। इसके अलावा जम्मू डिवीजन के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण के रूप में पशच्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय हो रहा है। इस वजह से कई राज्यों में, खासकर पहाड़ी राज्यों में अगले पांच दिन भारी पड़ सकते हैं।</p>
<p><strong>इन राज्यों में होगी झमाझम बारिश</strong><br>
मौसम विभाग के मुताबिक अगल 24 घंटे के अंदर जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित, बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, छत्तीसगढ़, बिहार, राजस्थान और झारखंड में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में भी मूसलाधार बारिश हो सकती है।</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश का मौसम</strong><br>
मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश में बारिश का अलर्ट जारी किया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, आगरा, शामली, बांदा, नोएडा, गाजियाबाद समेत कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 3 से 5 जुलाई तक पूरे उत्तर प्रदेश में भारी बारिश की संभावना है। बीते कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश में मॉनसून कमजोर रहा और ज्यादा बारिश नहीं हुई। हालांकि मौसम विभाग ने खुशखबरी देते हुए कहा है कि एक बार फिर यहां मॉनसून रफ्तार पकड़ रहा है और 5 या 6 अगस्त तक भारी बारिश की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या, उन्नाव, वाराणसी, प्रयागराज, देवरिया, बलिया, चंदौली, कुशीनगर, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बस्ती और बहराइच में भी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।</p>
<p><strong>दिल्ली का मौसम, बारिश का अलर्ट</strong><br>
मौसम विभाग (IMD) ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। 31 जुलाई और 1 अगस्त को बादल छाए रहेंगे, साथ ही हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। हालांकि इस बारिश से उमसभरी गर्मी से लोगों को काफी राहत मिलेगी।</p>
<p><strong>बिहार और झारखंड में बरसेंगे बादल</strong><br>
मौसम विभाग ने बिहार में भी अगले 24 घंटे में बारिश का अलर्ट जारी किया है। उम्मीद है कि अगस्त के पहले सप्ताह में बिहार और झारखंड में अच्छी बारिश हो। मौसम विभाग ने बिहार में 40 से 50 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना जताई है। पटना, गया,मुंगेर, सिवान, पश्चिमी चंपारण, बांका, अररिया, अरवल, औरंगाबाद, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, गोपालगंज, जमुई, जहानाबाद, कटिहार, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, मधुबनी और मुजफ्फरनगर में बारिश की संभावना है। इसके अलावा झारखंड के ज्यादातर जिलों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है।</p>
<p><strong>पहाड़ों में आफत की बारिश</strong><br>
पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की वजह से जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग, गांदरबल, कठुआ, सांबा, उधमपुर और रियासी में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला, कुल्लू, मनाली, चंबा और मंडी में भारी बारिश की संभावना है। उत्तराखंड के देबरादून, हरिद्वार, उत्तरकाशी, चमोली, रूद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, बागेश्वर, चंपावत, उधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ में भारी बारिश की संभावना है।</p>
<p><strong>असम में भयंकर बाढ़ से जन-जीवन अस्तव्यस्त</strong><br>
पूर्वोत्तर में भारी बारिश की वजह से नदियां उफान पर हैं। असम इन दिनों बाढ़ की विभीषिका झेल रहा है। जानकारी के मुताबिक राज्य में बारिश और बाढ़ की वजह से मरने वालों की संख्या 80 पहुंच गई है। बाढ़ से कम से कम 3 लाख लोग प्रभावित हैं। 31 जुलाई से अगले तीन दिन तक असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड मिजोरम समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।</p>
<p><strong>राजस्थान में होगी झमाझम बारिश</strong><br>
मौसम विभाग ने राजस्थान के जयपुर, भरतपुर, अजमेर, उदयपुर और कोटा में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा गुजरात के अहमदाबाद, नर्मदा, सूरत, वडोदरा समेत कई जिलों में 8 से 12 इंच तक बारिश का अलर्ट जारी किया है। मध्य प्रदेश के विदर्भ और मराठवाड़ा में भी बारिश की संभावना है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>15 साल बाद उमर अब्दुल्ला और पायल के तलाक पर बनी सहमति, सुप्रीम कोर्ट ने कहा&#45; सही कदम</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल के बीच तलाक को लेकर आपसी सहमति बन गई है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में ये बात कही. इस पर अदालत ने कहा कि इन्हीं शर्तों पर मामले का निस्तारण होगा.सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश वरिष्ठ वकील … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 15:45:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>साल, बाद, उमर, अब्दुल्ला, और, पायल, के, तलाक, पर, बनी, सहमति, सुप्रीम, कोर्ट, ने, कहा-, सही, कदम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल के बीच तलाक को लेकर आपसी सहमति बन गई है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में ये बात कही. इस पर अदालत ने कहा कि इन्हीं शर्तों पर मामले का निस्तारण होगा.सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि पति-पत्नी के बीच सभी विवाद आपसी सहमति से सुलझ गए हैं। </p>
<p><strong>उमर और पायल के बीच तलाक पर आपसी सहमति</strong><br>
उन्होंने कहा कि दोनों ने अपने-अपने रास्ते चुनने का फैसला कर लिया है और अब अदालत तलाक की डिक्री प्रदान कर सकती है. साथ ही, दोनों पक्षों की ओर से लंबित अन्य सभी मामलों को भी वापस ले लिया जाएगा. इस पर अदालत ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक सकारात्मक पहल है. बेंच ने कहा कि वह दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को रिकॉर्ड पर लेते हुए इन्हीं शर्तों के अनुसार मामले का निस्तारण करेगी। </p>
<p><strong>अच्‍छी बात है…</strong><br>
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि यह स्वागतयोग्य स्थिति और अच्‍छी बात है. सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने टिप्पणी की कि चूंकि दोनों पक्षों के बीच सभी विवाद आपसी सहमति से सुलझ चुके हैं, इसलिए इन्हीं शर्तों के आधार पर मामले का निपटारा किया जाएगा. अदालत के समक्ष यह भी स्पष्ट किया गया कि तलाक के अलावा दोनों पक्षों के बीच लंबित अन्य कानूनी मामलों को भी वापस लेने पर सहमति बन गई है. इसके बाद शीर्ष अदालत ने मामले का अंतिम निस्तारण करते हुए वैवाहिक संबंध समाप्त करने का आदेश पारित कर दिया। </p>
<p><strong>तलाक का मामला</strong><br>
पिछले साल अप्रैल में, सुप्रीम कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला (जिनसे वे अलग रह रहे हैं) को साथ बैठकर अपने वैवाहिक विवादों को सुलझाने की कोशिश करने का निर्देश दिया था। उमर और पायल ने सितंबर 1994 में शादी की थी, लेकिन वे लंबे समय से अलग रह रहे थे।</p>
<p>दिल्ली हाई कोर्ट ने 12 दिसंबर, 2023 को उमर की तलाक की अर्ज़ी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि उनकी अपील में कोई दम नहीं है और 2016 के फैमिली कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें उमर को तलाक की डिक्री देने से इनकार कर दिया गया था।</p>
<p><strong>लंबे समय से रह रहे थे अलग</strong><br>
उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला लंबे समय से अलग रह रहे थे. उनका तलाक का मामला काफी समय से न्यायिक प्रक्रिया में था. अब दोनों पक्षों के बीच सभी मुद्दों पर सहमति बनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से तलाक को मंजूरी देते हुए इस लंबे समय से चले आ रहे वैवाहिक विवाद का पटाक्षेप कर दिया। </p>
<p><strong>पायल पर 300 करोड़ की एलिमनी मांगने का आरोप</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दोनों पक्षों को एकसाथ बैठकर मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने को कहा था. अदालत ने कहा था कि हम उम्मीद करते हैं कि दोनों पक्ष गंभीरता दिखाएंगे और मामला सुलझ जाएगा. सुनवाई के दौरान उमर अब्दुल्ला के वकील कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया था कि पायल तलाक नहीं देना चाहतीं और 300 करोड़ की एलिमनी की मांग कर रही हैं, जबकि दोनों 17 सालों से अलग रह रहे हैं। </p>
<p><strong>2009 से उमर से अलग रह रहीं हैं पायल</strong><br>
बता दें कि उमर अब्दुल्ला ने पायल नाथ से सितंबर 1994 में शादी की थी. पायल आर्मी मेजर जनरल रामनाथ की बेटी हैं. उनके पिता मूल रूप से लाहौर के रहने वाले हैं. देश के विभाजन के बाद उनका परिवार लाहौर से भारत आ गया था. उमर और पायल ने लव मैरिज की थी. लेकिन शादी के 15 सालों बाद साल 2009 में उनके रिश्ते में दरार आ गई. जिसके बाद पायल उमर से अलग रहने लगीं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>PM मोदी पर आपत्तिजनक वीडियो से मचा बवाल, Meta हेड पर केस दर्ज; ‘कॉकरोच’ भी निशाने पर</title>
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<description><![CDATA[ हैदराबाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाते हुए सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों के खिलाफ पुलिस ऐक्शन जारी है। मॉर्फ्ड यानी एडिट किए गए वीडियो शेयर करने के मामले में कांग्रेस शासित राज्य तेलंगाना की हैदराबाद पुलिस ने कड़ा कदम उठाया है। पुलिस ने फेसबुक और इंस्टाग्राम के कई अकाउंट्स के साथ-साथ &#039;मेटा … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 14:45:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मोदी, पर, आपत्तिजनक, वीडियो, से, मचा, बवाल, Meta, हेड, पर, केस, दर्ज, ‘कॉकरोच’, भी, निशाने, पर</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हैदराबाद</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाते हुए सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों के खिलाफ पुलिस ऐक्शन जारी है। मॉर्फ्ड यानी एडिट किए गए वीडियो शेयर करने के मामले में कांग्रेस शासित राज्य तेलंगाना की हैदराबाद पुलिस ने कड़ा कदम उठाया है। पुलिस ने फेसबुक और इंस्टाग्राम के कई अकाउंट्स के साथ-साथ 'मेटा इंडिया' के हेड के खिलाफ दो मामले दर्ज किए हैं। यह कार्रवाई बीजेपी समर्थकों की ओर से दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर की गई है। पुलिस के निशाने पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के प्रोटेस्ट में शामिल हुए वे लोग भी हैं जिन्होंने पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट शेयर किया है।</p>
<p>यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रतिनिधियों ने यह चिंता जताई है कि केंद्र सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई न करने के अपने आश्वासन को पूरा करने में विफल रही है।</p>
<p><strong>किस आधार पर दर्ज हुआ केस?</strong><br>
हैदराबाद की साइबर क्राइम पुलिस ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए सोशल मीडिया अकाउंट्स के अज्ञात यूजर्स के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की संबंधित धाराओं में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। इन दोनों ही मामलों में 'मेटा इंडिया' के प्रमुख को भी सह-आरोपी बनाया गया है। बता दें कि भारत में मेटा के मैनेजिंग डायरेक्टर और कंट्री हेड अरुण श्रीनिवास हैं। उन्होंने 1 जुलाई, 2025 को यह पद संभाला था।</p>
<p>साइबर क्राइम के एक जांच अधिकारी ने बताया कि मेटा को दर्ज मामलों और आपत्तिजनक लिंक्स के संबंध में नोटिस जारी किया गया है। साथ ही अकाउंट्स चलाने वालों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिशें की जा रही हैं।</p>
<p><strong>भागने लगे इन्‍वेस्‍टर</strong></p>
<p>मेटा के लिए भारत संजीवनी है. यहां फेसबुक, इंस्‍टा पर इतने यूजर हैं, ज‍ितने उसके पूरी दुनिया में कहीं नहीं. कहा जा रहा है क‍ि मेटा के निवेशकों के बीच इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि अगर भारत सरकार मेटा के खिलाफ कोई सख्त रेगुलेटरी कदम उठाती है, तो इसका सीधा असर कंपनी के डेली एक्टिव यूजर्स और विज्ञापन से होने वाली कमाई पर पड़ेगा. वर्तमान में मेटा के ऐप्स पर डेली एक्टिव यूजर्स की संख्या 3% बढ़कर 360 करोड़ हो गई है. इसका बड़ा हिस्सा भारतीय यूजर्स का है. अगर भारत में कड़े नियम लागू होते हैं या कंपनी पर कोई बड़ा जुर्माना लगता है, तो मेटा के लिए पहले से ही बिगड़े हुए वित्तीय हालात और ज्यादा बदतर हो जाएंगे। </p>
<p><strong>वजह स‍िर्फ ये नहीं, नतीजे भी खराब आए</strong></p>
<p>    मेटा के Q2 के र‍िजल्‍ट ने उसकी मुसबीत बढ़ा दी है. जैसे ही र‍िजल्‍ट की भनक लगी, इन्‍वेस्‍टर छोड़कर भागने लगे और गुरुवार के रेगुलर सेशन की ट्रेडिंग में ही कंपनी के शेयर लगभग 9.1% तक गिर गए। </p>
<p>    क्‍योंक‍ि मेटा का रेवेन्यू तो 28% बढ़ गया लेकिन मुनाफा 6.18 डॉलर प्रति शेयर रहा, जो कि 7.17 डॉलर के अनुमान से लगभग 13.8% कम था. इसी वजह से मेटा के शेयरों में भारी बिकवाली शुरू हो गई। </p>
<p>    सबसे ज्यादा डराने वाला आंकड़ा फ्री कैश फ्लो का रहा. पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का फ्री कैश फ्लो 8.55 बिलियन डॉलर था, जो अब 91% की भयानक गिरावट के साथ मात्र 784 मिलियन डॉलर रह गया है। </p>
<p><strong>आफत की असली जड़ AI पर बेतहाशा खर्च</strong></p>
<p>    मेटा की वर्तमान हालत देखकर बाजार विशेषज्ञ कह रहे हैं कि कंपनी मूल रूप से दो अलग-अलग कंपनियों की तरह काम कर रही है. पहला, एक बेहद मुनाफे वाले फैम‍िली ऐप्‍स, ज‍िनपर भर भरकर व‍िज्ञापन म‍िल रहा है, तो दूसरी ओर कंपनी AI पर मोटा पैसा बहा रही है, ज‍िससे नकदी खत्‍म हो रही है। </p>
<p>    न‍िवेशकों को लग रहा क‍ि इससे खर्चे बढ़ रहे हैं. मेटा का कुल खर्च सालाना आधार पर 55% बढ़कर 42 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. इससे कंपनी पर कर्ज बढ़ता जा रहा है। <br>
    निवेशकों का धैर्य इसलिए भी टूट रहा है क्योंकि मेटा की वर्चुअल-रियालिटी ऑपरेशंस संभालने वाली विंग Reality Labs ने अब तक 80 बिलियन डॉलर से ज्यादा का भारी-भरकम घाटा जमा कर लिया है। </p>
<p>    इन बेतहाशा खर्चों के कारण मेटा का ऑपरेटिंग मार्जिन 43% से गिरकर 31% हो गया है, और ऑपरेटिंग इनकम 8% गिरकर 18.8 बिलियन डॉलर रह गई है। </p>
<p><strong>जुर्माने और छंटनी का भी बड़ा असर</strong><br>
मेटा को सिर्फ AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर ही खर्च नहीं करना पड़ रहा, बल्कि कंपनी को झटके भी लगे हैं जिन्होंने मुनाफा कम कर दिया है. कंपनी को वन-टाइम हिट के तौर पर 2.4 बिलियन डॉलर का कानूनी चार्ज भुगतना पड़ा है. मई 2026 में कंपनी ने लगभग 8,000 कर्मचारियों की छंटनी की थी. इसके एवज में कंपनी को 1.2 बिलियन डॉलर का सेवरेंस पैकेज देना पड़ा, जिसने शॉर्ट-टर्म सेविंग्स को खत्म कर दिया। </p>
<p><strong>बीजेपी नेताओं ने दी 2 अलग-अलग शिकायतें</strong><br>
बुधवार रात को तेलंगाना बीजेपी की सोशल मीडिया कोर कमेटी के सदस्य टी. साईकिरण गौड़ ने पुलिस से संपर्क किया। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर आपत्तिजनक रील्स देखने के बाद उन्होंने 20 लिंक पुलिस को सौंपे, जिनमें कथित तौर पर पीएम मोदी के मॉर्फ्ड वीडियो थे।</p>
<p>साईकिरण ने अपनी शिकायत में कहा कि यह कंटेंट पीएम के प्रति अपमानजनक है और ऐसे नरेटिव को बढ़ावा देता है जो देश की संप्रभुता, अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा हो सकता है। उन्होंने ऐसा कंटेंट होस्ट करने की अनुमति देने पर 'मेटा' के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की।</p>
<p>वहीं दूसरी शिकायत नामपल्ली के एक बीजेपी समर्थक एस. अरविंद रेड्डी ने दर्ज कराई है। उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि कुछ इंस्टाग्राम हैंडल लगातार पीएम मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति और पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अश्लील, अपमानजनक और डिजिटल तरीके से छेड़छाड़ की गई सामग्री सर्कुलेट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे जनता के बीच गलत जानकारी फैल सकती है। उन्होंने मेटा इंडिया के प्रमुख और पोस्ट करने वाले लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।</p>
<p><strong>कार्रवाई का दिखा असर</strong><br>
पुलिस की ओर से मामला दर्ज किए जाने और इस तेज ऐक्शन का असर भी देखने को मिला। गुरुवार शाम तक शिकायत में दिए गए सभी विवादित और आपत्तिजनक लिंक निष्क्रिय हो चुके थे।</p>]]> </content:encoded>
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<title>सास को सिर पर बैठाकर ब्रज 84 कोस यात्रा कराने वाली बहू ने फिर किया कमाल, नया कारनामा देख हर कोई हैरान</title>
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<description><![CDATA[  हरिद्वार  आपको सिर पर प्लास्टिक के काले टब में 90 साल की सास को बिठाकर ब्रज 84 कोस यात्रा कराने वाली बहू याद है? वहीं काजल चौधरी जिन्होंने भारत में बहू होने की मिसाल पेश कर दी थी. अब उसी बहू ने उससे भी बड़ी एक और तस्वीर पेश कर दी है जो लोगों के … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 13:45:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>सास, को, सिर, पर, बैठाकर, ब्रज, कोस, यात्रा, कराने, वाली, बहू, ने, फिर, किया, कमाल, नया, कारनामा, देख, हर, कोई, हैरान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> हरिद्वार </strong><br>
आपको सिर पर प्लास्टिक के काले टब में 90 साल की सास को बिठाकर ब्रज 84 कोस यात्रा कराने वाली बहू याद है? वहीं काजल चौधरी जिन्होंने भारत में बहू होने की मिसाल पेश कर दी थी. अब उसी बहू ने उससे भी बड़ी एक और तस्वीर पेश कर दी है जो लोगों के बीच में काफी लोकप्रिय हो रही है. काजल चौधरी इस बार अपनी सास को कांवड़ में बिठाकर हरिद्वार से दिल्ली के लिए निकल गई हैं। </p>
<p>कंधे पर एक ओर कांवड़ में अपनी सास को बिठाए और दूसरी ओर 71 किलो गंगाजल भरे तेज कदमों से चल रही इस बहू को जो भी देख रहा है वह उनकी जीवटता और हिम्मत को देखकर दांतों तले उंगली तो दबा ही रहा है, उनकी तारीफ करते नहीं थक रहा है. आज हर कोई यही कह रहा है कि इतना तो कोई बेटा-बेटी भी नहीं करते जो इस बहू ने कर दिखाया है। </p>
<p>
बता दें कि सावन शुरू होते ही कांवड़ यात्रा शुरू हो गई है और हजारों कांवड़िए हरिद्वार से गंगाजल लाने निकल गए हैं लेकिन इस बार भी सबसे ज्यादा हैरानी और खुशी लोगों को काजल चौधरी का साहस और भक्ति देखकर मिल रही है. काजल चौधरी हरिद्वार से जल लेकर फिलहाल मुजफ्फरनगर पहुंच चुकी हैं और लगातार दिल्ली की ओर आगे बढ़ रही हैं। </p>
<p>बता दें कि दिल्ली के शाहदरा निवासी काजल चौधरी अपनी 90 वर्षीय सासू मां चन्द्रिदेवी को कांवड़ में बिठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक की यात्रा करा रही हैं. इस दृश्य को जो भी देख रहा है वह भावुक हो रहा है और उन्हें कलयुग का असली श्रवण कुमार बता रहा है। </p>
<p>इससे पहले काजल चौधरी अपनी सास को सिर पर रखकर ब्रज 84 कोस की यात्रा करा चुकी हैं. इस दौरान वे काफी वायरल हुई थीं और लोगों ने उन्हें बहुत सम्मान दिया था. बताया जा रहा है कि ये काजल चौधरी की दूसरी कांवड़ यात्रा है. वर्ष 2025 में भी उन्होंने अपनी सास को कांवड़ में बिठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक की यात्रा पूरी की थी. इस कांवड़ में 71 किलो गंगाजल भी है। </p>
<p>बता दें कि काजल चौधरी पेशे से एक गायिका हैं, जो देहाती रागनी और भजनों के कारण सोशल मीडिया पर काफी फेमस हैं. वे अपने कामों की वजह से लगातार चर्चा में रहती हैं. इस साल कांवड़ यात्रा में उनके छोटे बेट मनीष चौधरी और परिवार के अन्य लोग भी शामिल हैं। </p>
<p>लोगों से बातचीत में अक्सर काजल कहती हैं कि अपने सास-ससुर माता-पिता की ऐसी सेवा करो कि जब वह हमारे पास से जाएं तो हमें अपना आशीर्वाद देकर जाएं सभी को अपने माता-पिता की सेवा करनी चाहिए यही हमारा कर्म भी है. अब काजल का अगला लक्ष्य अपनी सास की यूपी के योगी आदित्यनाथ से मिलने की इच्छा है, जिसके लिए काजल ने गुहार लगाई है। </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>Uttarakhand Weather: फ्लैश फ्लड का खतरा, केदारनाथ यात्रा रोकी गई; 850 श्रद्धालु फंसे</title>
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<description><![CDATA[ देहरादून/रुद्रप्रयाग उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण पहाड़ से मैदान तक हर ओर बारिश कहर बरपा रही है। लैंडस्लाइड के कारण केदारनाथ यात्रा रोक दी गई है। कम से कम 850 श्रद्धालु फंसे हुए हैं। हरिद्वार में दो कारें बह गईं। यमुनोत्री हाईवे पर पत्थर गिरने से कई घंटे यात्रा बाधित रही। देहरादून में भारी … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 12:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Uttarakhand, Weather:, फ्लैश, फ्लड, का, खतरा, केदारनाथ, यात्रा, रोकी, गई, 850, श्रद्धालु, फंसे</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>देहरादून/रुद्रप्रयाग</strong></p>
<p>उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण पहाड़ से मैदान तक हर ओर बारिश कहर बरपा रही है। लैंडस्लाइड के कारण केदारनाथ यात्रा रोक दी गई है। कम से कम 850 श्रद्धालु फंसे हुए हैं। हरिद्वार में दो कारें बह गईं। यमुनोत्री हाईवे पर पत्थर गिरने से कई घंटे यात्रा बाधित रही। देहरादून में भारी बारिश के बाद नाले के तेज बहाव में दो सगी बहनें बह गईं। उनके शव बरामद हुए हैं। मौसम विभाग ने आज 8 जिलों में फ्लैश फ्लड और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। देहरादून, रुद्रप्रयाग और चमोली समेत कुछ जिलों में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p>केदारनाथ हाईवे पर सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच कई स्थानों पर भूस्खलन और पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण गुरुवार को केदारनाथ यात्रा रोक दी गई। भारी बारिश के बीच प्रशासन ने केदारनाथ से वापस आने वाले करीब 600 यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोक लिया। केदारनाथ जाने वाले करीब 250 यात्रियों को सोनप्रयाग में रोका गया। बारिश से उत्तराखंड में कुल 91 सड़कें बंद हुईं।</p>
<p><strong>मुनकटिया में आया मलबा</strong><br>
केदारनाथ हाईवे सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच मुनकटिया में मलबा आने से बंद है। गौरीकुंड गेट से करीब 200 मीटर पर पहाड़ी से भूस्खलन हो रहा है। केदारनाथ पैदल मार्ग में भी छौड़ी, जंगलचट्टी और चीरबासा के पास कई जगहों पर मलबा बोल्डर गिर रहे हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि मौसम खुलने के साथ ही मार्ग खुलने की स्थिति में यात्रियों की आवाजाही करा दी जाएगी। उधर, कुमाऊं में बारिश के कारण तवाघाट-लिपुलेख हाईवे पर मल्लघाट के पास भूस्खलन हो गया। नौ घंटे बाद इसको खोला जा सका।</p>
<p><strong>आज 8 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट</strong><br>
शुक्रवार को भारी बारिश के पूर्वानुमान के मद्दनेजर आठ जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के डीएम को अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा है।</p>
<p><strong>कई घरों में घुसा मलबा</strong><br>
लगातार हो रही बारिश के कारण ज्योतिर्मठ के दूरस्थ गांव किमाणा के 7 आवासीय भवन खतरे की जद में आ गए हैं। लगातर पहाड़ी से बह कर आ रही गाद लोगों के घरों में घुसने लगी है। पहाड़ी से बह कर आ रहे मलबे और बोल्डरों से गांव के संपर्क और काश्तकारी मार्ग भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं पेयजल लाईन टूटने से पेयजल संकट भी गहरा गया है। बता दें कि किमाणा गांव की सरहद से लगभग 50 मीटर की दूरी पर स्थित पहाड़ी भारी बरसात के कारण बुधवार देर रात से लगातर दरकती रही। पहाडी से टूटकर लगातार बडे़ बडे़ बोल्डर बरसाती नाले में बहकर गाद गांव तक पहुंच रही है। इस मलबे की चपेट में आने से गांव की शीर्ष में स्थित चंडिका मंदिर की भोग मंडी और सभी सुरक्षा दीवारें पूरी तरह से टूट गई है। क्षेत्र पंचायत सदस्य मुकेश सेमवाल ने बताया कि पूरा गांव दहशत में है और गांव के 7 मकानों में लगातार बह कर आ रहा मलबा घुस रहा है। इन घरों के आंगन भी मलबे से भर चुके हैं, जिस कारण से इन परिवारों को भारी परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>हरिद्वार में दो कार बहीं, यमुनोत्री हाईवे पर गिरे पेड़</strong><br>
हरिद्वार में मूसलाधार बारिश के चलते खड़खड़ी स्थित सूखी नदी उफान पर आ गई। इससे नदी के बीच रपटे पर खड़ी दो कार बह गईं। घटना से मौके पर अफरातफरी मच गई। बहाव कम होने के बाद कारों को नदी से बाहर निकला गया। उधर, स्याना चट्टी और राना चट्टी के बीच भू-धंसाव होने से कई पेड़ यमुनोत्री हाईवे पर गिर गए। पेड़ों के गिरने से कुछ समय के लिए हाईवे पर यातायात बाधित हो गया।</p>
<p><strong>देहरादून में दो बहनों की दर्दनाक मौत</strong><br>
इधर, देहरादून के क्लेमनटाउन क्षेत्र की नई बस्ती में बारिश से उफनाई नाली में बहने से दो मासूम बहनों की मौत हो गई। सात वर्षीय लक्ष्मी कुमारी और तीन वर्षीय सोनाक्षी कुमारी के शवों को रैंप के नीचे से निकाला गया। बच्चियों के पिता रुदल सदा और मां रीना कुमारी यहां नई बस्ती में किराये पर रहकर मजदूरी करते हैं। रुदल सदा किसी काम से अपने गांव गए हुए हैं। बच्चियों की मां रीना ने पुलिस को बताया कि दोपहर करीब एक बजे दोनों बहनें खेलने गई थीं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>महाराष्ट्र के भिवंडी में 4 मंजिला इमारत ढही, 7 लोगों की मौत; मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका</title>
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<description><![CDATA[ मुंबई  महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी में इमारत का हिस्सा ढहने से बड़ा हादसा हो गया है। नारपोली स्थित भंडारी कंपाउंड में एक चार मंजिला कोहिनूर इमारत का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर ढह गया। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई। मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 12:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>महाराष्ट्र, के, भिवंडी, में, मंजिला, इमारत, ढही, लोगों, की, मौत, मलबे, में, कई, लोगों, के, फंसे, होने, की, आशंका</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई</strong><br>
 महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी में इमारत का हिस्सा ढहने से बड़ा हादसा हो गया है। नारपोली स्थित भंडारी कंपाउंड में एक चार मंजिला कोहिनूर इमारत का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर ढह गया। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई।</p>
<p>मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, नगर निगम की टीम और एनडीआरएफ (एडीआरएफ) की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं और युद्धस्तर पर बचाव कार्य जारी है।</p>
<p><strong>जर्जर घोषित थी इमारत, ग्राउंड फ्लोर पर चल रहा था काम</strong><br>
भिवंडी पश्चिम के विधायक महेश चौगुले ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि यह नारपोली के भंडारी कंपाउंड स्थित कोहिनूर इमारत है।नगर निगम ने पहले ही इस इमारत को 'सी-कैटेगरी' (बेहद खतरनाक और जर्जर) घोषित कर दिया था, जिसके बाद इसे खाली करा लिया गया था।हालांकि, इमारत खाली होने के बावजूद इसके ग्राउंड फ्लोर पर कुछ मजदूर काम कर रहे थे। अनुमान लगाया जा रहा है कि मलबे में अभी भी कुछ मजदूर दबे हो सकते हैं।</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, 30 जुलाई की देर रात बिल्डिंग थोड़ी झुक गई, जिसके बाद कई दूसरे मजदूर बिल्डिंग से बाहर भाग गए. बिल्डिंग में रिपेयरिंग का काम चल रहा था, इसलिए घटना के वक्त इमारत के अंदर कोई नहीं था। NDRF और SDRF की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी हुई हैं. मलबा हटाए जाने का काम जारी है। </p>
<p><strong>नींव कमजोर होने के चलते गिरी इमारत!</strong><br>
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने खुलासा किया कि पिछले कुछ दिनों से इस पुरानी इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था. ठेकेदार और मजदूरों ने मरम्मत के दौरान इमारत के 3 पिलर तोड़ दिए थे. पिलर टूटने की वजह से इमारत की नींव कमजोर हो गई और वो अपना संतुलन खोकर पूरी तरह जमींदोज हो गई। </p>
<p><strong>समय रहते बाहर निकले ज्यादातर लोग</strong><br>
इस भीषण हादसे के बीच राहत की बात ये रही कि इमारत ढहने से ठीक पहले कुछ सुगबुगाहट और आवाज हुई थी. खतरा भांपते ही ज्यादातर रहवासी समय रहते इमारत से बाहर भाग निकले, जिससे एक बड़ा जानी नुकसान होने से टल गया। </p>
<p>हालांकि, पहली मंजिल पर रहने वाले कुछ लोग और वहां काम कर रहे मजदूर अभी भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं. जिला प्रशासन और आपातकालीन टीमों की पहली प्राथमिकता मलबे को साफ कर सभी फंसे हुए लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालने की है। </p>
<p><strong>लोगों से सहयोग की अपील…</strong></p>
<p>हादसे के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई. रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई रुकावट न आए, इसके लिए प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे इलाके में भीड़ न लगाएं और अफवाहों पर ध्यान न दें. घटना में घायल या मरने वालों की सही तादाद के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। </p>
<p><strong>NDRF ने महिला को सुरक्षित निकाला बाहर</strong><br>
राहत और बचाव कार्य के बीच एनडीआरएफ (एनडीआरएफ) की टीम को एक बड़ी सफलता मिली है। मलबे के नीचे से एक महिला को जीवित और सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। महिला को तुरंत इलाज के लिए पास के नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>SC की दोटूक! ‘आप कोर्ट नहीं हैं, सिर्फ सलाह और सिफारिश दे सकते’, अनुसूचित जाति आयोग की शक्तियों पर बड़ी टिप्पणी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) सेवा (नौकरी या सर्विस) से जुड़े मामलों में बाध्यकारी आदेश जारी नहीं कर सकता इसलिए आयोग की भूमिका अनुच्छेद 338 के तहत केवल जांच, सलाह और सिफारिश तक सीमित है न कि विवादों का निपटारा करने या आदेश … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 11:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>की, दोटूक, ‘आप, कोर्ट, नहीं, हैं, सिर्फ, सलाह, और, सिफारिश, दे, सकते’, अनुसूचित, जाति, आयोग, की, शक्तियों, पर, बड़ी, टिप्पणी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) सेवा (नौकरी या सर्विस) से जुड़े मामलों में बाध्यकारी आदेश जारी नहीं कर सकता इसलिए आयोग की भूमिका अनुच्छेद 338 के तहत केवल जांच, सलाह और सिफारिश तक सीमित है न कि विवादों का निपटारा करने या आदेश लागू कराने की. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 338 के तहत NCSC को शिकायतों की जांच करने और अनुसूचित जातियों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की पड़ताल करने का अधिकार है.आपके पास अदालत की तरह न्यायिक आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है। </p>
<p><strong>अनुसूचित जाति आयोग को कुछ शक्तियां मिली हुई हैं, लेकिन अंतिम फैसला नहीं दे सकता</strong><br>
आयोग को जांच के दौरान सिविल कोर्ट जैसी कुछ शक्तियां प्राप्त हैं, जैसे गवाहों को बुलाना, दस्तावेज मंगाना और साक्ष्य लेना, लेकिन ये शक्तियां सिर्फ जांच तक सीमित हैं इसलिए इनके आधार पर आयोग किसी विवाद का अंतिम फैसला नहीं दे सकता. अदालत ने कहा कि आयोग जांच पूरी होने के बाद अपनी रिपोर्ट और सिफारिश केंद्र या राज्य सरकार को भेज सकता है, लेकिन उसके निर्देशों को कानूनी रूप से लागू कराने योग्य नहीं होता. पीठ ने कहा कि एनसीएससी की शक्तियां सीमित हैं और यह एक संवैधानिक संस्था है, जिसका उद्देश्य <strong>सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है, लेकिन इसकी भूमिका सलाह और सिफारिश तक सीमित है, न्यायिक निर्णय देना नहीं। </strong></p>
<p><strong>सुनवाई के दौरान NCSC ने दी ये दलील</strong><br>
सुनवाई के दौरान NCSC की ओर से ये दलील दी गई कि नियमों में सुरक्षा शब्द का जिक्र है, जिसका उद्देश्य कानून लागू कराना भी है. कोर्ट ने ये दलील खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि ये न्यायिक शक्तियां प्रदान नहीं करती, इसमें सिफारिश कर सकते हैं. कोर्ट ने ये भी कहा कि आयोग किसी अदालत की भूमिका नहीं निभा सकता। </p>
<p><strong>अनुसूचित जाति (SC) कर्मचारी की पदोन्नति से जुड़ा है ये मामला</strong><br>
अदालत ने यह भी कहा कि आयोग के पास विवादों का निपटारा करने या बाध्यकारी आदेश जारी करने की शक्ति नहीं है. यह फैसला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने 28 जुलाई को सुनाया है.अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया,जिसमें मुंबई पोर्ट अथॉरिटी को एक अनुसूचित जाति (SC) कर्मचारी को पदोन्नति का लाभ और बकाया वेतन देने के लिए एनसीएससी के आदेश को सही माना गया था. गौरतलब है कि ये मामला माधावी के चंदोरकर नामक कर्मचारी से जुड़ा है, जिन्होंने 1997 में मुंबई पोर्ट अथॉरिटी में नौकरी शुरू की थी. साल 2002 के एक कार्यालय ज्ञापन के तहत उन्हें आरक्षण नीति के अनुसार स्टेनोग्राफर ग्रेड-I में पदोन्नति मिली थी. बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में 2002 के इस कार्यालय ज्ञापन को रद्द कर दिया. इसके बाद मुंबई पोर्ट अथॉरिटी ने वरिष्ठता सूची में संशोधन करते हुए चंदोरकर को वापस स्टेनोग्राफर ग्रेड-II में भेज दिया था. इस फैसले के खिलाफ चंदोरकर ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) में शिकायत की थी और आयोग ने मुंबई पोर्ट अथॉरिटी को पदोन्नति का लाभ बहाल करने, बकाया वेतन देने और 30 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। </p>]]> </content:encoded>
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<title>जापान बढ़ाएगा ब्याज दर! क्या PM मोदी की बुलेट ट्रेन के लिए लिया गया लोन भी होगा महंगा?</title>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 10:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>जापान, बढ़ाएगा, ब्याज, दर, क्या, मोदी, की, बुलेट, ट्रेन, के, लिए, लिया, गया, लोन, भी, होगा, महंगा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्‍ली</strong><br>
 जापान का केंद्रीय बैंक, बैंक ऑफ जापान (BOJ)  अपनी मौद्रिक नीति बैठक में ब्‍याज दरों को लेकर महत्‍वपूर्ण ऐलान करेगा.  ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि जिस तरह से महंगाई में इजाफा हो रहा है, उससे  ब्‍याज दरों में बढोतरी हो सकती है. जून में बैंक ने ब्‍याज दर बढ़ाई थी. विश्‍लेषकों का कहना है कि मौद्रिक नीति के ऐलान में भी आगे ब्‍याज दर बढ़ाने के संकेत मिल सकते हैं. जापान ने भारत को अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए लोन दिया है. ऐसे में सवाल यह है कि अगर भविष्‍य में जापान अपने रेपो रेट बढ़ाता है तो क्‍या बुलेट ट्रेन के लिए मिले जापानी लोन की ब्‍याज दरों में भी इजाफा हो जाएगा। </p>
<p>जापान ने भारत को अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्‍ट के लिए 88 हजार करोड़ रुपये कर्ज दिया है. यह लोन जैपनीज इंटरनैशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (JICA) के जरिए मिला है. 0.1 फीसदी की मामूली ब्याज दर पर मिले इस लोन को 50 सालों में चुकाना है. बुलेट ट्रेन के लिए मिला यह लोन फिक्‍स्‍ड है. यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुलेट ट्रेन के लिए जो पैसा लाए हैं, उस पर जापान के ब्‍याज दर बढ़ाने का कोई असर नहीं होगा. बुलेट ट्रेन के लिए मिले लोन में 15 साल का ग्रेस पीरियड शामिल है. इसका मतलब है कि लोन मिलने के शुरुआती 15 वर्षों तक भारत को कोई मूलधन (Principal Amount) नहीं लौटाना है. ग्रेस पीरियड खत्म होने के बाद यानी 16वें साल से भारत सरकार इस लोन की किश्तों का भुगतान शुरू करेगी। </p>
<p><strong>कमजोर मुद्रा और युद्ध से दबाव में है जापानी अर्थ्‍व्‍यवस्‍था</strong><br>
पश्चिम एशिया में जारी जंग और अपनी मुद्रा येन के कमजोर होने से जापान की अर्थव्यवस्था पर महंगाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है. विश्लेषकों का कहना है कि बोओजे के गवर्नर काजुओ उएदा के सामने दोहरी चुनौती है. एक ओर उन्हें सख्त रुख (Hawkish Communication) अपनाकर येन में गिरावट पर दांव लगाने वाले निवेशकों को संदेश देना है, वहीं दूसरी ओर उन्हें सरकार को नाराज भी नहीं करना है. जापान की वर्तमान सरकार मौद्रिक नीति को और सख्त करने के पक्ष में नहीं है। </p>
<p>केंद्रीय बैंक भविष्य में ब्याज दरें कितनी तेजी से और कब बढ़ाई जाएंगी, इस पर स्पष्ट संकेत देने से बच सकता है. बैंक को फिलहाल यह देखना चाहता है कि ईंधन की कीमतों में उछाल के कारण उत्पादक मूल्य (Producer Prices) में हुई बढ़ोतरी का असर अर्थव्यवस्था और महंगाई पर कितना पड़ता है. इसका स्‍पष्‍ट पता चलने के बाद ही बैंक ऑफ जापान अपने पत्‍ते खोलेगा। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>1 अगस्त से बदल जाएंगे आपकी जेब से जुड़े 10 बड़े नियम, LPG, ITR और तत्काल टिकट समेत जानें क्या होगा नया</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  हर महीने की पहली तारीख के साथ कुछ ऐसे बदलाव आते हैं, जिनका सीधा असर हमारी जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है. इस बार भी 1 अगस्त से कई नए नियम लागू होने जा रहे हैं. LPG सिलेंडर की कीमतों से लेकर रेलवे के तत्काल टिकट, ITR, आधार, पोस्ट ऑफिस स्पीड … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 09:45:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>अगस्त, से, बदल, जाएंगे, आपकी, जेब, से, जुड़े, बड़े, नियम, LPG, ITR, और, तत्काल, टिकट, समेत, जानें, क्या, होगा, नया</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p> हर महीने की पहली तारीख के साथ कुछ ऐसे बदलाव आते हैं, जिनका सीधा असर हमारी जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है. इस बार भी 1 अगस्त से कई नए नियम लागू होने जा रहे हैं. LPG सिलेंडर की कीमतों से लेकर रेलवे के तत्काल टिकट, ITR, आधार, पोस्ट ऑफिस स्पीड पोस्ट, बैंक छुट्टियों और दूसरे कई नियमों में बदलाव होने वाला है. ऐसे में अगर आपको पहले से इन बदलावों के बारे में पता रहेगा तो बेवजह की परेशान से बच सकते हैं। </p>
<p><strong>आइए जानते हैं 1 अगस्त से लागू होने वाले 10 बड़े बदलाव क्या-क्या है….</strong></p>
<p><strong>1. LPG सिलेंडर की नई कीमतें होंगी जारी</strong><br>
हर महीने की तरह 1 अगस्त को भी सरकारी तेल कंपनियां HPCL,BPCL ,IOCL  घर की रसोई में इस्तेमाल होने वाले14.2 किलो के एलीपीजी सिलेंडर और 19 किलो कमर्शियल LPG सिलेंडर के नए दाम जारी करेंगी. अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल  में बदलाव के आधार पर कीमतें बढ़ या घट सकती हैं. अगर कमर्शियल सिलेंडर महंगा होता है, तो होटल, रेस्टोरेंट और फूड डिलीवरी जैसी सर्विस भी महंगी पड़ सकती हैं। </p>
<p><strong>2. तत्काल टिकट बुकिंग का नया टोकन सिस्टम</strong><br>
1 अगस्त से रेलवे रिजर्वेशन काउंटर पर Tatkal टिकट बुक कराने का तरीका बदल जाएगा. अब पहले यात्रियों को टोकन मिलेगा और फिर उसी क्रम के अनुसार टिकट बुक किया जाएगा. इससे लंबी लाइन, धक्का-मुक्की और बार-बार काउंटर के चक्कर लगाने की परेशानी कम होने की उम्मीद है. रेलवे ने टोकन डिस्ट्रीब्यूशन का समय भी तत्काल बुकिंग  (Tatkal Tके समय के साथ जोड़ा है ताकि पूरी प्रक्रिया आसान हो सके। </p>
<p><strong>3. ITR लेट भरने पर देना पड़ सकता है जुर्माना</strong><br>
सैलरी पाने वाले और नॉन-ऑडिट वाले इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स के लिए ITR-1 और ITR-2 फाइल करने की डेडलाइन31 जुलाई है. इसके बाद रिटर्न भरने पर लेट फीस देनी पड़ सकती है. वहीं ITR-3 और ITR-4 भरने वाले ऐसे टैक्सपेयर्स, जिनके खातों का ऑडिट जरूरी नहीं है, उनके लिए अंतिम तारीख 31 अगस्त है. तय समय तक रिटर्न दाखिल नहीं करने पर आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत ₹5,000 तक की लेट फीस लग सकती है। </p>
<p><strong>4. Aadhaar बेस्ड CKYC 2.0 होगा लागू</strong><br>
1 अगस्त से बैंक, बीमा कंपनियां और म्यूचुअल फंड हाउस CKYC 2.0 सिस्टम लागू करना शुरू करेंगे. इसके तहत ग्राहक की डिजिटल सहमति से केंद्रीय रजिस्ट्री में मौजूद KYC जानकारी सीधे प्राप्त की जा सकेगी. इससे बार-बार डॉक्यूमेंट्स जमा करने की जरूरत कम होगी, KYC प्रोसेस तेज होगी और धोखाधड़ी रोकने में भी मदद मिलेगी। </p>
<p><strong>5. स्पीड पोस्ट के नियम और रेट बदलेंगे</strong><br>
1 अगस्त से  स्पीड पोस्ट  के लिए नई कैटेगरी और नई दरें लागू होंगी. आधार, PAN, पासबुक, चेकबुक, बैंकिंग दस्तावेज और सरकारी पहचान पत्र अब 'डॉक्यूमेंट्स' कैटेगरी में आएंगे. 500 ग्राम तक के गैर-व्यावसायिक राखी वाले लिफाफे, छोटे पैकेट और ग्रीटिंग कार्ड भी डॉक्यूमेंट्स माने जाएंगे. बाकी सभी सामान पार्सल कैटेगरी में रहेगा. छह बड़े शहरों में नई व्यवस्था लागू होगी. खुदरा ग्राहकों के लिए 50 ग्राम तक के स्थानीय पैकेट का शुल्क ₹38 और दूसरे शहर भेजने पर ₹94 से शुरू होगा। </p>
<p><strong>6. अगस्त में 14 दिन बैंक रहेंगे बंद</strong><br>
अगर अगस्त में बैंक ब्रांच जाकर कोई जरूरी काम करना है, तो पहले छुट्टियों की लिस्ट जरूर देख लें. इस महीने रविवार, दूसरे और चौथे शनिवार, स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी और अलग-अलग राज्यों के त्योहारों को मिलाकर कुल 14 दिन बैंक बंद रहेंगे. हालांकि सभी छुट्टियां पूरे देश में एक साथ लागू नहीं होंगी.इसलिए RBI  हॉलिडे लिस्ट के हिसाब से देख लें कि आपके शहर में कब-कब बैंकों की छुट्टी है। </p>
<p><strong>7. चीनी पर नई स्टॉक लिमिट लागू</strong><br>
सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए 1 अगस्त से चीनी डीलरों पर नई स्टॉक लिमिट लागू की है. अब कोई भी डीलर 30 दिनों से ज्यादा और 4,000 क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेगा. यह नियम 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा. डीलरों को अपना स्टॉक तय पोर्टल पर अपडेट करना भी जरूरी होगा। </p>
<p><strong>8. दिल्ली में फ्री बस यात्रा के लिए स्मार्ट कार्ड जरूरी</strong><br>
दिल्ली में महिलाओं को 1 अगस्त से मुफ्त बस यात्रा का लाभ लेने के लिए वैलिड पिंक सहेली  स्मार्ट कार्ड  (Pink Saheli Smart Card) दिखाना होगा. बस में चढ़ते समय कार्ड टैप करने के बाद ही पिंक टिकट मिलेगा. सामान्य यात्रियों के लिए नीला कार्ड और वरिष्ठ नागरिकों  के साथ अन्य रियायत पाने वालों के लिए नारंगी कार्ड भी जारी किए जाएंगे, हालांकि नारंगी कार्ड की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है। </p>
<p><strong>9. Credit Card और FD नियमों में हो सकते हैं बदलाव</strong><br>
अगस्त की शुरुआत में कई बैंक अपने क्रेडिट कार्ड के नियम (Credit Card Rule) बदल सकते हैं. इनमें रिवॉर्ड प्वॉइंट्स, शुल्क, फीस और दूसरी सर्विस से जुड़े बदलाव शामिल हो सकते हैं. कुछ बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में भी बदलाव कर सकते हैं. अगर RBI की मॉनेटरी पॉलिसी  रेपो रेट में कोई फैसला करती है, तो उसका असर लोन EMI और FD दोनों पर पड़ सकता है। </p>
<p><strong>10. SEBI का नया Buyback नियम लागू</strong><br>
1 अगस्त से SEBI कंपनियों के लिए बायबैक का नया नियम लागू कर रही है. अब कोई भी कंपनी अपनी कुल पेड-अप कैपिटल का अधिकतम 15% हिस्सा ही बाजार से वापस खरीद सकेगी. साथ ही बायबैक की पूरी प्रक्रिया 66 वर्किंग डे के भीतर पूरी करनी होगी. इस बदलाव का मकसद ट्रांसपेरेंसी बढ़ाना और निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा करना है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>SC का बड़ा फैसला: असाधारण हालात में पैलेट गन का इस्तेमाल जायज, घायल के इलाज का सरकार को आदेश</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष न्यायालय ने गुरुवार को साफ किया है कि पैलेट गन के छर्रों से जख्मी हुए लोगों का इलाज दिल्ली सरकार कराएगी। साथ ही सरकार को भी हथियारों के इस्तेमाल के रिकॉर्ड रखने के लिए … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 21:45:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष न्यायालय ने गुरुवार को साफ किया है कि पैलेट गन के छर्रों से जख्मी हुए लोगों का इलाज दिल्ली सरकार कराएगी। साथ ही सरकार को भी हथियारों के इस्तेमाल के रिकॉर्ड रखने के लिए कहा गया है। 20 जुलाई को CJP के बैनर तले पेपर लीक के खिलाफ संसद मार्च किया गया था।</p>
<p>CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इसमें जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी मोहाना भी शामिल रहे। कोर्ट ने सरकार को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि घायलों को उचित इलाज मिले। इस दौरान खासतौर से पैलेट गन से घायल होने वालों का जिक्र किया गया है। कोर्ट ने कहा, 'दिल्ली सरकार घायल याचिकाकर्ता और अन्य लोगों का इलाज कराएगी।'</p>
<p><strong>पैलेट गन के इस्तेमाल का बचाव</strong><br>
आई भाषा के मुताबिक, शीर्ष अदालत ने पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के सेवानिवृत्त अधिकारी यशोवर्धन आजाद और पैलेट से घायल दो लोगों की उस याचिका में की गई एक मांग पर भी सवाल उठाया, जिसमें कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए धातु वाले पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया गया है।</p>
<p>कोर्ट ने BPRD यानी पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के परामर्श का हवाला देकर कहा कि असाधारण परिस्थितियों में पुलिस को पैलेट गन के इस्तेमाल का अधिकार है। हालांकि, पीठ ने कहा कि वह 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल पर मामले की सुनवाई करने के लिए तैयार है।</p>
<p><strong>रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश</strong><br>
एडवोकेट वृंदा ग्रोवर की दलीलों पर गौर कर सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान तैनात RAF यानी रैपिड एक्शन फोर्स के हथियारों के उपयोग का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर जनहित याचिका आजाद और दो ऐसे व्यक्तियों ने संयुक्त रूप से दायर की है, जिनका दावा है कि 20 जुलाई को मध्य दिल्ली में आयोजित 'संसद चलो' प्रदर्शन के दौरान वे पैलेट लगने से घायल हुए थे।</p>
<p>याचिका में घटना में कथित रूप से घायल हुए सभी लोगों को उचित मुआवजा, समुचित चिकित्सा सुविधा और पुनर्वास की सुविधा मुहैया कराने का भी अनुरोध किया गया है।</p>
<p>आरोप लगाए जा रहे थे कि दिल्ली पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया था और उनके खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल किया था। सीजेपी ने ये भी आरोप लगाए हैं कि पुलिस की कार्रवाई के चलते एक छात्र के आंखों की रोशनी चली गई है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>आधार, PAN और बैंक अकाउंट भी नहीं साबित करते भारतीय नागरिकता! कोर्ट की बड़ी टिप्पणी जानिए</title>
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<description><![CDATA[ कोलकाता वोटर आईडी कार्ड, आधार, पैन कार्ड या बैंक अकाउंट का होना भारतीय नागरिकता का पक्का और निर्णायक सबूत नहीं है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में यह बात कही। अदालत ने मुर्शिदाबाद के एक व्यक्ति से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए यह अहम टिप्पणी की। इस व्यक्ति को &#039;बांग्लादेशी&#039; होने के … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 20:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>आधार, PAN, और, बैंक, अकाउंट, भी, नहीं, साबित, करते, भारतीय, नागरिकता, कोर्ट, की, बड़ी, टिप्पणी, जानिए</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कोलकाता</strong></p>
<p>वोटर आईडी कार्ड, आधार, पैन कार्ड या बैंक अकाउंट का होना भारतीय नागरिकता का पक्का और निर्णायक सबूत नहीं है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में यह बात कही। अदालत ने मुर्शिदाबाद के एक व्यक्ति से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए यह अहम टिप्पणी की। इस व्यक्ति को 'बांग्लादेशी' होने के संदेह में डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। जस्टिस देबांग्सु बसाक और जस्टिस मोहम्मद शब्बर रशीदी की खंडपीठ ने इस मामले में राज्य सरकार की कार्यवाही में दखल देने से इनकार कर दिया है।</p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला?</strong><br>
यह मामला नासिर नाम के एक व्यक्ति का है, जो फिलहाल लालगोला डिटेंशन सेंटर में बंद है। अदालत ने नासिर और उसके चचेरे भाई सुमन मोल्ला को यह साबित करने के कई मौके दिए कि नासिर वंश (जन्म) के आधार पर एक भारतीय नागरिक है।</p>
<p>नासिर अपना कोई जन्म प्रमाण पत्र पेश नहीं कर सका। उसकी तरफ से सुमन ने कोर्ट में जो दस्तावेज पेश किए, उनमें एक वोटर कार्ड, एक आधार कार्ड, एक पैन कार्ड और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की पासबुक शामिल थी।</p>
<p><strong>कोर्ट ने दस्तावेजों पर क्या कहा?</strong><br>
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इन दस्तावेजों को नागरिकता का ठोस आधार मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा, "वोटर पहचान पत्र भारतीय नागरिकता का निर्णायक सबूत नहीं है। यह सिर्फ इस बात का सबूत है कि उस व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दर्ज है।" अदालत ने यह भी गौर किया कि SIR प्रक्रिया के तहत नासिर का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि 'आधार' भी अपने आप में भारतीय नागरिकता का पक्का सबूत नहीं हो सकता। कोर्ट ने पैन कार्ड और बैंक खाते को लेकर भी यही बात कही।</p>
<p><strong>उम्र और बयानों में उलझे दावे</strong><br>
अदालत ने पाया कि नासिर और सुमन साफ नीयत के साथ कोर्ट नहीं आए थे। उनके दावों में कई भारी विसंगतियां थीं। सुमन ने दावा किया था कि नासिर के पिता का 1980 में निधन हो गया था और उसके बाद उसने ही नासिर की परवरिश की। कोर्ट ने इस दावे को खारिज कर दिया क्योंकि रिकॉर्ड के मुताबिक नासिर की उम्र 46 साल है, जबकि उसे पालने का दावा करने वाले सुमन की उम्र महज 38 साल है। पुलिस पूछताछ के दौरान सुमन ने खुद को नासिर का चचेरा भाई बताया था, लेकिन अदालत में उसने खुद को नासिर का चाचा बताया।</p>
<p>जब सुमन के वकील को नासिर से उसकी मां के ठिकाने के बारे में पूछने की इजाजत दी गई, तो नासिर ने जवाब दिया कि उसके माता-पिता दोनों की मौत हो चुकी है और उन्हें दफना दिया गया है। हालांकि, वह दफनाने की जगह नहीं बता सका। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर नासिर दफनाने की जगह बता देता, तो सच्चाई का पता लगाने के लिए डीएनए (DNA) टेस्ट कराया जा सकता था।</p>
<p><strong>हिरासत में कबूली थी 'बांग्लादेशी' होने की बात</strong><br>
सुनवाई के पहले दिन राज्य सरकार के वकील ने खंडपीठ को बताया था कि नासिर ने पुलिस हिरासत में यह बात कबूल की थी कि वह एक बांग्लादेशी नागरिक है और सालों पहले अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ था।</p>
<p>हालांकि, कोर्ट ने इस बहस में पड़ने से परहेज किया कि पुलिस हिरासत में किए गए कबूलनामे की अहमियत डिटेंशन सेंटर में किए गए कबूलनामे के बराबर है या नहीं। लेकिन अदालत ने यह साफ कर दिया कि, "भले ही हम यह मान लें कि पुलिस कस्टडी में दिए गए बयान को खारिज कर दिया जाना चाहिए, फिर भी अपनी नागरिकता साबित करने की पूरी जिम्मेदारी हिरासत में लिए गए व्यक्ति (नासिर) की ही होती है।"</p>]]> </content:encoded>
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<title>E20 विवाद पर नया मोड़! रात 8 बजे फाइल साइन का दावा, जानिए पेट्रोल में ब्लेंडिंग का अधिकार किसके पास है</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली &quot;E20 से मेरा कोई लेना-देना नहीं है.&quot; केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का यह बयान इन दिनों चर्चा में है. वजह यह है कि पिछले कई सालों से गडकरी देश में इथेनॉल, फ्लेक्स-फ्यूल और वैकल्पिक ईंधनों के सबसे बड़े पैरोकार रहे हैं. उन्होंने कई मंचों से कहा कि भारत को … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 19:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>E20, विवाद, पर, नया, मोड़, रात, बजे, फाइल, साइन, का, दावा, जानिए, पेट्रोल, में, ब्लेंडिंग, का, अधिकार, किसके, पास, है</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>"E20 से मेरा कोई लेना-देना नहीं है." केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का यह बयान इन दिनों चर्चा में है. वजह यह है कि पिछले कई सालों से गडकरी देश में इथेनॉल, फ्लेक्स-फ्यूल और वैकल्पिक ईंधनों के सबसे बड़े पैरोकार रहे हैं. उन्होंने कई मंचों से कहा कि भारत को पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करनी होगी. उन्होंने E100 और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को फ्यूचर बताया. यहां तक कि एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि उन्होंने रात 8 बजे 100 प्रतिशत इथेनॉल से जुड़ी फाइल पर साइन कर दिए हैं। </p>
<p>अब नितिन गडकरी द्वारा इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) को लेकर कोर्ट में रखा गया उनका पक्ष चर्चा की वजह बन गया है. बॉम्बे हाईकोर्ट में उनके पक्ष से कहा गया कि, "E20 या इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम से उनका कोई लेना-देना नहीं है और यह उनके मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता." यह बयान ऐसे समय आया है, जब E20 फ्यूल को लेकर सड़क से संसद तक बहस छिड़ी हुई है. ऐसे में उनके इस बयान से लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर दोनों बातों में अंतर क्या है? </p>
<p><strong>कहां से शुरू हुआ मामला?</strong></p>
<p>केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट में 86 पन्नों की एक याचिका दाखिल की, जिसमें उन्होंने कहा है कि सरकार के E20 प्रोग्राम से उनका कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने मेटा, एक्स, गूगल, यूट्यूब और कुछ अन्य सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ कोर्ट में केस दाखिल किया. उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे AI-जेनरेटेड फर्जी वीडियो और तस्वीरें हटाने की मांग की है. साथ ही 11 करोड़ रुपये का हर्जाना भी मांगा। </p>
<p>इस याचिका में उन्होंने कहा कि, उनके परिवार को E20 पॉलिसी से कथित आर्थिक लाभ से जोड़ा जा रहा है. जो गलत है. उन्होंने अदालत में स्पष्ट किया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) और E20 पॉलिसी के बनने या उसके लागू होने में उनकी कोई प्रशासनिक भूमिका नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि वह 2014 से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री हैं, लेकिन E20 पॉलिसी उनके मंत्रालय के अधीन नहीं आती। </p>
<p><strong> E100 वाली फाइल पर साइन करने की बात?</strong><br>
यही वह प्वाइंट है, जहां सबसे ज्यादा भ्रम पैदा हुआ है. नितिन गडकरी ने बीते महीने माराष्ट्र के नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि, "उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि, कल रात 8 बजे उन्होंने 100 प्रतिशत इथेनॉल के कानूनी उपयोग को मंजूरी देने वाली फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं." इसके बाद संबंधित नियमों का रास्ता साफ हुआ। </p>
<p>पहली नजर में यह बयान और अदालत में पेश किया गया गडकरी के पक्ष के बयान एक-दूसरे के विपरीत लगते हैं. लेकिन यदि दोनों मंत्रालयों की जिम्मेदारियों को अलग-अलग समझा जाए तो तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाती है। </p>
<p><strong>किसके पास है पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग का अधिकार?</strong><br>
भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) का नोडल मंत्रालय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) है. यही मंत्रालय तय करता है कि पेट्रोल में कितना इथेनॉल मिलाया जाएगा, तेल कंपनियां किस तरह इथेनॉल खरीदेंगी और पूरे देश में E20 जैसी व्यवस्था कैसे लागू होगी. यानी पेट्रोल में 10 प्रतिशत, 20 प्रतिशत या उससे अधिक इथेनॉल मिलाने का नीतिगत फैसला सड़क परिवहन मंत्रालय नहीं, बल्कि पेट्रोलियम मंत्रालय करता है। </p>
<p><strong>सड़क परिवहन मंत्रालय की भूमिका क्या है?</strong><br>
यहीं पर दोनों बातों का अंतर समझना जरूरी है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का काम फ्यूल की ब्लेंडिंग तय करना नहीं, बल्कि उस फ्यूल पर चलने वाले वाहनों के लिए नियम बनाना है. मंत्रालय सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स (CMVR) में संशोधन करता है, E20, E85, E100 और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए टेक्निकल स्टैंडर्ड तय करता है और वाहन निर्माताओं को जरूरी नियमों की मंजूरी देता है। </p>
<p>दूसरे शब्दों में कहें तो यदि पेट्रोलियम मंत्रालय E20 लागू करता है तो सड़क परिवहन मंत्रालय यह तय करता है कि वाहन उस फ़्यूल पर सुरक्षित और कानूनी रूप से चल सके। </p>
<p>यही वजह है कि गडकरी का अदालत में यह कहना कि E20 पॉलिसी उनके मंत्रालय के अधीन नहीं है, प्रशासनिक दृष्टि से सही माना जा सकता है. वहीं सार्वजनिक मंचों पर E100 या फ्लेक्स-फ्यूल से जुड़ी फाइल पर हस्ताक्षर करने का उनका दावा भी सड़क परिवहन मंत्रालय की नियमों की भूमिका से जुड़ा हो सकता है। </p>
<p><strong>क्यों बढ़ा है विवाद?</strong><br>
हाल के महीनों में सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह के दावे किए गए. इनमें माइलेज कम होने, पुराने इंजनों पर असर पड़ने और कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाने जैसे आरोप शामिल रहे. इन्हीं आरोपों के बीच नितिन गडकरी और उनके परिवार को भी E20 पॉलिसी से जोड़ते हुए कई पोस्ट और कथित डीपफेक वीडियो वायरल हुए. गडकरी ने इन्हें मानहानि का कारण बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया और कहा कि उन्हें ऐसी पॉलिसी का जिम्मेदार बताना गलत है, क्योंकि EBP उनके मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। </p>
<p>इसमें कोई दो राय नहीं है कि, पिछले कई सालों से इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल को बढ़ावा देने के सबसे बड़े पब्लिक फेस में नितिन गडकरी का नाम रहा है. देश में अगर किसी नेता ने सबसे ज्यादा इथेनॉल, फ्लेक्स-फ्यूल, ग्रीन हाइड्रोजन, बायो-सीएनजी और ऑप्शनल फ्यूल की बात की है, तो वह नितिन गडकरी ही हैं. उन्होंने लगातार E20 और इथेनॉल के पक्ष में बयान दिए हैं. इसलिए आम लोगों के मन में यह धारणा बनी कि E20 पॉलिसी भी उन्हीं की पहल है. जबकि प्रशासनिक व्यवस्था में नीति बनाने और उस नीति के अनुसार वाहनों के लिए नियम तैयार करने की जिम्मेदारी अलग-अलग मंत्रालयों के पास होती है। </p>
<p>हाल के दिनों में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी लगातार नितिन गडकरी के साथ मंच साझा करते हुए नज़र आए है. बीते दिनों देश की पहली फ्लेक्स फ्यूल कार मारुति वैगनआर और हीरो मोटोकॉर्प की फ्लेक्स-फ्यूल बाइक्स (स्प्लेंडर प्लस और हीरो एचएफ) को दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने एक साथ लॉन्च किया था. इस दौरान हरदीप सिंह पुरी ने भी इथेनॉल ब्लेंडिंग और E20 फ्यूल को सही बताया. यहां तक कि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि, इस फ़्यूल से वाहनों के माइलेज में मामूली गिरावट संभव है, लेकिन यह वाहनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। </p>
<p><strong>बढ़ता E20 विवाद और आंदोलन की तैयारी</strong><br>
E20 पेट्रोल को लेकर विवाद अब आंदोलन का रूप लेने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. हाल ही में सोशल मीडिया पर 'E20 Janta Party' नाम से शुरू हुए डिजिटल कैंपेन ने लोगों का ध्यान खींचा है. हालांकि, ये कोई रजिस्टर्ड पॉलिटिकल पार्टी या संगठन नहीं है, लेकिन 'X' से लेकर इंस्टाग्राम तक इस हैंडल पर लाखों फॉलोवर हो चुके हैं। </p>
<p>इस बीच देश की राजधानी में अगले कुछ दिनों में E20 को लेकर 3 बड़े आंदोलनों की तैयारी है. सामाजिक कार्यकर्ता और इंडस्ट्रलिस्ट तहसीन पूनावाला ने 31 जुलाई को इंडिया गेट से पार्लियामेंट स्ट्रीट तक "गाड़ी मार्च" निकालने का ऐलान किया है. दूसरी ओर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 1 अगस्त 2026 को सुबह 11:30 बजे दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में "नेशनल टाउनहॉल अगेंस्ट E20" आयोजित करने की घोषणा की है. इसके अलावा दिल्ली की कई टैक्सी और ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने भी 4 अगस्त को संसद तक मार्च निकालने का ऐलान किया है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>सोनम वांगचुक ने की वंदे भारत की जमकर तारीफ, बोले&#45; भारतीय रेलवे का सफर रहा शानदार अनुभव</title>
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<description><![CDATA[ लद्दाख     सोनम वांगचुक लद्दाख लौट चुके हैं, उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार 26 दिनों तक अनशन किया था. दिल्ली से श्रीनगर लौटते वक्त उन्होंने वंदे भारत ट्रेन का आनंद लिया। वंदे भारत ट्रेन और चिनाब नदी पर बने दुनिया सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (X) पर एक वीडियो … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 17:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लद्दाख</strong><br>
   <br>
सोनम वांगचुक लद्दाख लौट चुके हैं, उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार 26 दिनों तक अनशन किया था. दिल्ली से श्रीनगर लौटते वक्त उन्होंने वंदे भारत ट्रेन का आनंद लिया। वंदे भारत ट्रेन और चिनाब नदी पर बने दुनिया सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (X) पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने रेलवे और वंदे भारत ट्रेन की जमकर तारीफ की है. इस वीडियो को देखकर लगता है कि सरकार को लेकर उनके सुर थोड़े बदल रहे हैं। </p>
<p>सोनम वांगचुक वीडियो में कहते हैं, 'मैं रेल से सफर करना पसंद करता हूं. लेकिन वंदे भारत से सफर करना एक अलग ही आनंद देता है'</p>
<p>दरअसल, पर्यावरण और शिक्षा सुधारों के लिए मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो में भारतीय रेलवे और उसके इंजीनियरिंग की खुलकर प्रशंसा की है. वो पहली बार वंदे भारत ट्रेन से सफर कर रहे थे. वांगचुक ने कहा कि ट्रेन उनका हमेशा से पसंदीदा यात्रा का माध्यम रहा है। </p>
<p>उन्होंने कहा, 'मुझे भारतीय रेलवे पर गर्व है. खासकर मुझे चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे अर्च ब्रिज (Chenab Railway Bridge) को देखने की इच्छा थी, वंदे भारत के जरिए इसके ऊपर से गुजरने के अनुभव बेहद खूबसूरत और शानदार रहा'. उन्होंने कहा कि इस तरह के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स देश की तकनीकी प्रगति और कनेक्टिविटी को दर्शाते हैं। </p>
<p><strong>इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर की तारीफ </strong><br>
रेलवे की तारीफ करने के साथ-साथ सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार से छात्रों पर कार्रवाई नहीं करने की अपील की है. दिल्ली के जंतर-मंतर पर 26 दिनों के अनशन के बाद सरकार से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए उन्होंने अपील की है कि सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं पर कोई कानूनी कार्रवाई न करने के अपने लिखित वादे पर कायम रहे, ताकि देश के युवाओं के बीच भरोसे का माहौल बने। </p>
<p><strong>चिनाब नदी पर बना ब्रिज भव्य </strong><br>
बता दें, इस रूट का सबसे आकर्षण रियासी जिले में चिनाब नदी पर बना दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे अर्च ब्रिज है. इसकी ऊंचाई नदी के तल से 359 मीटर है, जो पेरिस के एफिल टॉवर से भी लगभग 35 मीटर ऊंचा है. यह पुल 266 किमी/घंटे की रफ्तार की हवाओं और रिक्टर स्केल पर 8 तीव्रता के भूकंप को भी झेलने में सक्षम है। </p>
<p>वंदे भारत एक्सप्रेस (नई दिल्ली-श्रीनगर) भारतीय रेलवे की सबसे महत्वाकांक्षी और ऐतिहासिक रेल परियोजनाओं में से एक है. सड़क मार्ग (जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग) से यात्रा करने में जहां 7 से 10 घंटे लगते थे, वहीं ट्रेन से जम्मू से श्रीनगर की दूरी मात्र 3.5 घंटे में और दिल्ली से श्रीनगर की दूरी 13 घंटे से कम में तय हो जाती है। </p>
<p>.</p>]]> </content:encoded>
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<title>8th Pay Commission पर संसद में पहली बार बोली मोदी सरकार, फिटमेंट फैक्टर को लेकर दिया बड़ा जवाब</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली केंद्र सरकार ने पहली बार 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के फिटमेंट फैक्टर पर संसद में अपनी बात रखी है। हालांकि, सरकार ने कर्मचारी संघों की मांगों पर कोई जवाब नहीं दिया है, लेकिन उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि आयोग स्वतंत्र है और सरकार को उसके आंतरिक विचार-विमर्श के बारे में जानकारी … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 17:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>8th, Pay, Commission, पर, संसद, में, पहली, बार, बोली, मोदी, सरकार, फिटमेंट, फैक्टर, को, लेकर, दिया, बड़ा, जवाब</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>केंद्र सरकार ने पहली बार 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के फिटमेंट फैक्टर पर संसद में अपनी बात रखी है। हालांकि, सरकार ने कर्मचारी संघों की मांगों पर कोई जवाब नहीं दिया है, लेकिन उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि आयोग स्वतंत्र है और सरकार को उसके आंतरिक विचार-विमर्श के बारे में जानकारी नहीं दी जा रही है।</p>
<p>राज्यसभा में एक प्रश्न के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन और उसके कार्यक्षेत्र की अधिसूचना जारी की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि "3 नवंबर 2025 के संकल्प में कहा गया है कि 8वां केंद्रीय वेतन आयोग अपनी प्रक्रिया स्वयं तैयार करेगा।"</p>
<p><strong>फैमिली यूनिट को लेकर क्या बोली सरकार</strong><br>
राज्यसभा सांसद जावेद अली खान ने पूछा था कि क्या कर्मचारी संघों ने फिटमेंट फैक्टर की गणना के लिए फैमिली यूनिट की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच करने की मांग की है, जिसमें कर्मचारियों के माता-पिता को भी शामिल किया जाए। उन्होंने आयोग की बैठकों, कर्मचारी संघों के साथ विचार-विमर्श और इन मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया के बारे में भी जानकारी मांगी।</p>
<p>मंत्री ने स्पष्ट किया कि "आयोग के कार्यक्षेत्र में यह प्रावधान नहीं है कि आयोग सरकार को अपनी प्रगति, विचाराधीन सिफारिशों की प्रकृति या अपनी विचार-विमर्श प्रक्रिया के दौरान परामर्श प्रक्रिया के बारे में अपडेट रखेगा।" इसके परिणामस्वरूप सरकार के पास आयोग द्वारा आयोजित बैठकों की संख्या, अब तक किन कर्मचारी संघों से परामर्श किया गया है, या क्या ऐसी मांगों पर चर्चा हुई है, इसकी कोई जानकारी नहीं है।</p>
<p><strong>फिटमेंट फैक्टर क्यों है इतना महत्वपूर्ण?</strong><br>
फिटमेंट फैक्टर वह गुणक है, जिसका उपयोग नए वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करते समय केंद्रीय कर्मचारियों के मूल वेतन को संशोधित करने के लिए किया जाता है। यह हर वेतन आयोग का सबसे चर्चित पहलू होता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर वेतन, पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों को प्रभावित करता है।</p>
<p><strong>कर्मचारी संघों ने 3.68 का फिटमेंट फैक्टर मांगा</strong><br>
8वें वेतन आयोग की घोषणा के बाद से कर्मचारी संगठन 7वें वेतन आयोग की तुलना में काफी अधिक फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं। कई कर्मचारी संघों ने 3.68 का फिटमेंट फैक्टर मांगा है, जबकि कुछ ने 3.0 से 3.5 के बीच का सुझाव दिया है।</p>
<p>कुछ संगठनों ने न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर तय करते समय तीन की बजाय पांच परिवार इकाइयों पर विचार करने की मांग भी उठाई है, यह तर्क देते हुए कि पिछले कुछ वर्षों में घरेलू खर्च में काफी बदलाव आया है।</p>
<p><strong>8वां वेतन आयोग कब देगा अपनी रिपोर्ट?</strong><br>
समयसीमा पर सरकार ने स्पष्ट जवाब दिया। वित्त मंत्रालय के अनुसार, 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन के संकल्प में कहा गया है कि आयोग अपनी सिफारिशें गठन की तारीख से 18 महीने के भीतर प्रस्तुत करेगा। चूंकि आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 के संकल्प के माध्यम से किया गया था, इसलिए इसकी रिपोर्ट 2027 के मध्य तक आने की उम्मीद है, जिसके बाद केंद्र सरकार सिफारिशों की जांच करेगी और कार्यान्वयन पर अंतिम निर्णय लेगी।</p>
<p><strong>राज्यसभा के जवाब का क्या मतलब है?</strong><br>
सरकार के जवाब से यह स्पष्ट नहीं होता कि अंततः किस फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की जा सकती है, न ही यह पता चलता है कि आयोग ने कर्मचारी संघों के साथ परामर्श किया है या विशिष्ट प्रस्तावों पर चर्चा की है।</p>
<p>हालांकि यह एक बात स्पष्ट करता है कि केंद्र सरकार ने पूरी प्रक्रिया 8वें वेतन आयोग पर छोड़ दी है। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की बड़ी संख्या के लिए वेतन संशोधन पर स्पष्टता का इंतजार है, फिटमेंट फैक्टर सबसे बड़े प्रश्नों में से एक बना हुआ है, जिसका उत्तर अब आयोग की रिपोर्ट आने पर ही मिलेगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>थलपति विजय का बड़ा ऐलान! स्कूलों में बच्चों को हर हफ्ते मिलेगी चिकन बिरयानी, TVK सरकार का वादा</title>
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<description><![CDATA[ चेन्नई  तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय जल्द ही स्कूली बच्चों को बड़ा तोहफा दे सकते हैं। चर्चा है कि विजय की TVK सरकार स्कूली बच्चों को हर हफ्ते चिकन बिरयानी देने की तैयारी कर रही है। इस मामले में एक प्रस्ताव पर समीक्षा की जा रही है और जल्द ही इसे धरातल पर उतारा जा … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 16:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>थलपति, विजय, का, बड़ा, ऐलान, स्कूलों, में, बच्चों, को, हर, हफ्ते, मिलेगी, चिकन, बिरयानी, TVK, सरकार, का, वादा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चेन्नई </strong></p>
<p>तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय जल्द ही स्कूली बच्चों को बड़ा तोहफा दे सकते हैं। चर्चा है कि विजय की TVK सरकार स्कूली बच्चों को हर हफ्ते चिकन बिरयानी देने की तैयारी कर रही है। इस मामले में एक प्रस्ताव पर समीक्षा की जा रही है और जल्द ही इसे धरातल पर उतारा जा सकता है।</p>
<p>एक रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना को लागू करने के लिए तमिलनाडु की स्कूली पोषण योजना में बदलाव किया जाएगा। नए बदलावों में सरकारी स्कूलों के छात्रों को हफ्ते में एक दिन चिकन बिरयानी परोसने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री राजमोहन ने बीते दिनों यह विचार मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के सामने रख दिया है।</p>
<p><strong>क्या बोले शिक्षा मंत्री?</strong><br>
प्रस्ताव पर बात करते हुए स्कूली शिक्षा मंत्री राजमोहन ने तमिलनाडु के सियासी इतिहास और बच्चों के लिए पूर्व में मौजूद पोषण कार्यक्रमों का जिक्र किया। राजमोहन ने कहा, "के कामराज ने मिड-डे मील योजना की शुरुआत की, कलाईग्नार करुणानिधि ने इसमें अंडे जोड़े, एमजीआर (MGR) ने इसे 'न्यूट्रिशियस मील प्रोग्राम' में बदला और जयललिता ने पूरे हफ्ते अंडे बांटने की व्यवस्था की। इसी तरह, मेरी भी इच्छा है कि हमारी सरकार के तहत सरकारी स्कूलों में हफ्ते में एक दिन छात्रों को चिकन बिरयानी दी जाए।" रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि मुख्यमंत्री विजय इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं और फिलहाल अंतिम फैसला लिया जाना बाकी है।</p>
<p><strong>सुबह के नाश्ते के मेन्यू में भी होगा बदलाव</strong><br>
राज्य में दोपहर के खाने में बदलाव के अलावा पेरुंतलैवर कामराजर ब्रेकफास्ट स्कीम के मेन्यू को भी नया रूप देने की योजना बनाई है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि फिलहाल हर छात्र के लिए करीब 15 रुपये का बजट तय है। ऐसे में गेहूं और रवा उपमा जैसे खानों को हटाकर छात्रों को अधिक स्वादिष्ट और पौष्टिक विकल्प दिए जाएंगे। बता दें कि तमिलनाडु के प्राथमिक स्कूलों में पहले से ही सुबह का नाश्ता और दोपहर का भोजन यानी दो वक्त का खाना दिया जाता है।</p>
<p><strong>तमिलनाडु रहा है अग्रणी</strong><br>
गौरतलब है कि देश में मिड डे मील की शुरुआत तमिलनाडु से ही हुई थी। 1950 के दशक में तत्कालीन मुख्यमंत्री के. कामराज के नेतृत्व में मिड डे मील की शुरुआत की गई थी। इसके बाद आने वाली हर सरकार ने बच्चों की स्कूल में उपस्थिति बढ़ाने और कुपोषण दूर करने के लिए इसमें लगातार बदलाव किए। अब अगर सीएम विजय इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हैं, तो यह भारत के किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे अलग कदम होगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>आज राज्यसभा में पेश होगा एंटी&#45;पेपर लीक बिल, NDA के पास बहुमत या चुनौती? जानिए पूरा नंबर गेम</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली लोकसभा में हंगामे के बीच पास होने के बाद, अब मोदी सरकार गुरुवार यानी आज 30 जुलाई को &#039;लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026&#039; राज्यसभा में पेश करने जा रही है। देशभर में छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन के बाद लाए गए इस नए और सख्त संशोधन विधेयक पर आज पूरे … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 13:45:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>आज, राज्यसभा, में, पेश, होगा, एंटी-पेपर, लीक, बिल, NDA, के, पास, बहुमत, या, चुनौती, जानिए, पूरा, नंबर, गेम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>लोकसभा में हंगामे के बीच पास होने के बाद, अब मोदी सरकार गुरुवार यानी आज 30 जुलाई को 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' राज्यसभा में पेश करने जा रही है। देशभर में छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन के बाद लाए गए इस नए और सख्त संशोधन विधेयक पर आज पूरे देश की निगाहें टिकी हैं।</p>
<p>बुधवार को विपक्ष के भारी हंगामे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कड़े तेवरों के बावजूद सरकार ने इसे लोकसभा से ध्वनि मत से पारित करा लिया। अब सवाल यह है कि क्या उच्च सदन यानी राज्यसभा में सरकार को इस बिल को पास कराने में कोई अड़चन आएगी? आइए समझते हैं राज्यसभा का ताजा 'नंबर गेम'।</p>
<p><strong>राज्यसभा का नंबर गेम: क्या आसानी से पास होगा बिल?</strong><br>
 कुल संख्या 245 है, हालांकि अभी 242 सांसद हैं। अभी खास बहुमत के लिए 162 सांसदों की जरूरत है। वहीं साधारण बहुमत का आंकड़ा 123 है। एंटी-पेपर लीक वाले इस बिल के लिए साधारण बहुमत की ही जरूरत है।</p>
<p><strong>गठबंधन / दल    सांसदों की संख्या                      बहुमत का आंकड़ा (123) से तुलना</strong><br>
NDA (सत्ता पक्ष)       152                                           बहुमत से 29 सांसद ज्यादा<br>
INDIA (विपक्ष)            63    –<br>
अन्य दल                    29    –<br>
रिक्त सीट                    1    –<br>
कुल    245    –</p>
<p>राज्यसभा में NDA के पास अपने दम पर 152 सांसदों का मजबूत आंकड़ा है, जो बहुमत के जादुई आंकड़े (123) से काफी ज्यादा है। ऐसे में 'एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल 2026' को उच्च सदन से पास कराने में सरकार को कोई खास मुश्किल नहीं होगी, भले ही विपक्ष कितना भी हंगामा क्यों न करे।</p>
<p>इस कानून का मकसद लोगों, संगठित समूहों और संस्थाओं को अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने और अपराध करने से प्रभावी ढंग से रोकना है, जिससे सार्वजनिक परीक्षाओं की पवित्रता बनी रहे।</p>
<p><strong>'एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल 2026' में नया क्या है?</strong><br>
साल 2024 के मूल कानून को और अधिक सख्त बनाने के लिए इस 2026 के संशोधन विधेयक में कई कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा पेश किए गए इस बिल की मुख्य बातें इस प्रकार हैं।</p>
<ul>
<li>    संगठित पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोह, संस्थानों या अधिकारियों को अब 10 साल तक की सख्त कैद होगी (पहले यह अधिकतम 5 साल थी)।</li>
<li>    पेपर लीक सिंडिकेट और इसमें शामिल सर्विस प्रोवाइडर संस्थानों पर 10 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा।</li>
<li>    इन मामलों को लंबा खिंचने से रोकने के लिए हर राज्य में 'स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट' बनाए जाएंगे, जहां रोजाना सुनवाई होगी।</li>
<li>    किसी भी पेपर लीक मामले की जांच राज्य पुलिस या स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को अधिकतम 60 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।</li>
</ul>
<p><strong>लोकसभा में खूब हुआ हंगामा</strong><br>
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कुछ टिप्पणियों को लेकर सत्तापक्ष के सदस्यों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। इस दौरान हुए हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। दोपहर ढाई बजे प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने चर्चा का जवाब दिया। इसके बाद विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। विधेयक में पेपर लीक रोकने के कई कड़े प्रावधान किए गए हैं।</p>
<p><strong>क्यों मची है संसद में रार?</strong><br>
इस बिल के लोकसभा में पास होने के दौरान भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। हाल ही में हुए NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में 36 दिनों तक छात्रों का प्रदर्शन चला था, जिसके दबाव में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा तक देना पड़ा।</p>
<p>बुधवार को लोकसभा में चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया। इस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल के दावों को बेबुनियाद और तथ्यहीन बताते हुए खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया था।</p>]]> </content:encoded>
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<title>उत्तराखंड में बारिश का कहर, चेतावनी निशान पर पहुंची गंगा; बदरीनाथ हाईवे पर भूस्खलन से संकट</title>
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<description><![CDATA[ देहरादून उत्तराखंड में मॉनसून का कहर जारी है। भारी बारिश और भूस्खलन लगातार लोगों की जान जोखिम में डाल रही है। मौसम विभाग ने आज के लिए देहरादून समेत पांच जिलों में भारी से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। बदरीनाथ हाईवे के पास पहाड़ी पर भूस्खलन हुआ है। वहीं, मंगलवार से भूस्खलन के … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 13:00:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>उत्तराखंड, में, बारिश, का, कहर, चेतावनी, निशान, पर, पहुंची, गंगा, बदरीनाथ, हाईवे, पर, भूस्खलन, से, संकट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>देहरादून</strong></p>
<p>उत्तराखंड में मॉनसून का कहर जारी है। भारी बारिश और भूस्खलन लगातार लोगों की जान जोखिम में डाल रही है। मौसम विभाग ने आज के लिए देहरादून समेत पांच जिलों में भारी से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। बदरीनाथ हाईवे के पास पहाड़ी पर भूस्खलन हुआ है। वहीं, मंगलवार से भूस्खलन के कारण बंद पड़ा यमुनोत्री हाईवे अब खुल गया है। पहाड़ी इलाकों में बारिश की वजह से ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इससे लोगों में दहशत बनी हुई है।</p>
<p><strong>आज कहां-कहां अलर्ट</strong><br>
उत्तराखंड के दस जिलों में गुरुवार को भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. सीएस तोमर ने बताया कि बागेश्वर, नैनीताल, चंपावत और पिथौरागढ़ के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। उत्तरकाशी, देहरादून, चमोली, पौड़ी, टिहरी और ऊधमसिंह नगर के लिए येलो अलर्ट है।</p>
<p>इससे पहले बुधवार को सुबह तेज धूप निकलने से उमस और गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया, लेकिन दोपहर बाद मूसलाधार बारिश शुरू होने से मौसम सुहावना हो गया। 24 घंटे के दौरान दून का अधिकतम तापमान करीब तीन डिग्री बढ़कर 32.4 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। न्यूनतम तापमान 24.2 डिग्री दर्ज किया गया। दून जिले में सबसे अधिक 39.5 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।</p>
<p><strong>देहरादून में जगह-जगह जलभराव</strong><br>
वहीं, दूसरी और बारिश से वाहन चालकों, राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दून अस्पताल के बाहर, तहसील चौक, हरिद्वार रोड, सहस्रधारा रोड, डीएल रोड और राजपुर रोड सहित कई स्थानों पर सड़कों पर पानी भर गया, जिससे यातायात बाधित रहा और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। नगर निगम के कंट्रोल रूम में सुंदरवाला, डालनवाला, नेहरू कॉलोनी, नवादा समेत छह क्षेत्रों से जलभराव की शिकायतें प्राप्त हुईं। नगर आयुक्त ने सभी को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p><strong>गंगा और गौना के उफान से सहमी तटीय आबादी</strong><br>
ऋषिकेश। पहाड़ी इलाकों में बारिश की वजह से ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बुधवार को गंगा चेतावनी निशान को छूकर बही, जिससे तटीय इलाकों पर बसे लोग सहमे हुए हैं। वहीं, विकासनगर के रुद्रपुर क्षेत्र से होकर बहने वाली बरसाती गौना नदी भी बुधवार को उफान पर आ गई, जिससे एक बस समेत कई दुपहिया वाहन तेज बहाव में फंस गए।</p>
<p><strong>पेट्रोल पंप के पास कार पर गिरा बोल्डर</strong><br>
अगस्त्यमुनि। अगस्त्यमुनि कस्बे में पेट्रोल पंप के पास दोपहर में पहाड़ी से एक बोल्डर गिरने से नीचे खड़ी कार क्षतिग्रस्त हो गई। शुक्र रहा कि कार में कोई नहीं था और जनहानि नहीं हुई। लोगों के अनुसार, लगातार बारिश के चलते बुधवार दोपहर में अचानक पहाड़ी से बड़ा बोल्डर हाईवे पर गिर गया। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि किसी व्यक्ति को नुकसान नहीं हुआ।</p>
<p><strong>बदरीनाथ हाईवे जोड़ने वाली सुरंग के बाहर पहाड़ी पर भूस्खलन</strong><br>
रुद्रप्रयाग जनपद में हो रही लगातार बारिश के चलते बदरीनाथ हाईवे को केदारनाथ हाईवे से जोड़ने वाली सुरंग के बाहरी पहाड़ी पर भूस्खलन से एनएच के प्रशासनिक भवन के एक कक्ष को क्षति पहुंची है। हालांकि सुरंग पूरी तरह सुरक्षित है, अंदर किसी तरह की दिक्कत नहीं है। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बुधवार को सुरंग के बाहर क्षतिग्रस्त क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने तकनीकी टीम के साथ ही भूगर्भीय टीम ने इसका निरीक्षण कराने के निर्देश दिए।</p>
<p><strong>पाली गाड़ के पास खुला यमुनोत्री हाईवे</strong><br>
बड़कोट: पाली गाड़ के निकट मंगलवार सुबह से बंद पड़ा यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग बुधवार दोपहर करीब दो बजे यातायात के लिए खोल दिया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग की टीम ने लगातार राहत एवं मलबा हटाने का कार्य कर मार्ग को सुचारु किया, जिसके बाद हाईवे पर वाहनों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई।</p>]]> </content:encoded>
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<title>Raksha Bandhan 2026: राखी भेजने से पहले जान लें नए स्पीड पोस्ट नियम, 1 अगस्त से बदलेगी India Post की रेट लिस्ट</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली अगर आप अपने जरूरी कागजात, बैंक पासबुक या रक्षाबंधन पर राखी भेजने के लिए डाक घर की स्पीड पोस्ट (Speed Post) सेवा का उपयोग करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. दरअसल, डाक विभाग एक अगस्त 2026 से स्पीड पोस्ट के नियमों और दरों में बड़ा बदलाव करने जा रही … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 11:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Raksha, Bandhan, 2026:, राखी, भेजने, से, पहले, जान, लें, नए, स्पीड, पोस्ट, नियम, अगस्त, से, बदलेगी, India, Post, की, रेट, लिस्ट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>अगर आप अपने जरूरी कागजात, बैंक पासबुक या रक्षाबंधन पर राखी भेजने के लिए डाक घर की स्पीड पोस्ट (Speed Post) सेवा का उपयोग करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. दरअसल, डाक विभाग एक अगस्त 2026 से स्पीड पोस्ट के नियमों और दरों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। </p>
<p>नए नियमों के तहत डाक विभाग ने स्पष्ट रूप से 'डॉक्यूमेंट' (Document) और 'पार्सल' (Parcel) की कैटेगरी अलग-अलग तय कर दी है. <strong>इसके अलावा 6 प्रमुख शहरों के लिए 24 और 48 घंटे में फास्ट डिलीवरी की विशेष सुविधाएं भी शुरू की जाएगी। </strong></p>
<p><strong>किसे माना जाएगा डॉक्यूमेंट और किसे पार्सल?</strong><br>
डाक विभाग ने भ्रम दूर करने के लिए बिना कमर्शियल वैल्यू वाली चीजों को डॉक्यूमेंट श्रेणी में रखा है. डॉक्यूमेंट की श्रेणी में आने वाली चीजें नीचे दी गई है। </p>
<p>    आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट.<br>
    बैंक पासबुक, चेकबुक, वेलकम किट, बैंक स्टेटमेंट, क्रेडिट या डेबिट कार्ड्स और इंश्योरेंस पेपर्स.<br>
    रक्षाबंधन के लिए 500 ग्राम तक के नॉनकमर्शियल राखी वाले लिफाफे, छोटे पैकेट और ग्रीटिंग कार्ड्स को डॉक्यूमेंट माना जाएगा.</p>
<p><strong>ये हैं पार्सल की श्रेणी में आने वाली चीजें</strong></p>
<p><strong>    इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स और मोबाइल फोन<br>
    कपड़े और रेडीमेड गारमेंट्स<br>
    गिफ्ट आइटम्स और अन्य भारी सामान</strong></p>
<p><strong> 24 और 48 घंटे में डिलीवरी की नई स्पीड पोस्ट सर्विस</strong><br>
डाक विभाग तत्काल डिलीवरी के लिए 24 Speed Post और 48 Speed Post नाम से दो नई विशेष सेवाएं शुरू करने जा रही है. 24 Speed Post के तहत बुकिंग के 24 घंटे के भीतर डिलीवरी करने का लक्ष्य रखा गया है. वहीं, 48 Speed Post के तहत 48 घंटे के भीतर पैकेट डिलीवर किया जाएगा.हालांकि, यह एक्सप्रेस सुविधा फिलहाल देश के 6 प्रमुख महानगरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में शुरू की गई है. इससे बैंक, वित्तीय संस्थानों और नियमित कागजात भेजने वालों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। </p>
<p><strong>रिटेल ग्राहकों के लिए स्पीड पोस्ट की नई रेट लिस्ट</strong><br>
एक अगस्त से रिटेल ग्राहकों के लिए स्पीड पोस्ट का शुल्क दूरी, वजन और सर्विस के प्रकार के हिसाब से तय किया जाएगा. साथ ही GST अलग से देना  होगा। </p>
<p><strong>50 ग्राम तक सामान्य स्पीड पोस्ट चार्ज</strong></p>
<p><strong>     लोकल स्तर पर: ₹38 प्रति आर्टिकल<br>
     देश में अन्य जगहों पर: ₹94 प्रति आर्टिकल</strong></p>
<p><strong>वजन के साथ से भी तय होंगी दरें</strong></p>
<p><strong> 51 ग्राम से 250 ग्राम तक: ₹118 से ₹154 प्रति आर्टिकल<br>
 251 ग्राम से 500 ग्राम तक: ₹140 से ₹186 प्रति आर्टिकल</strong><br>
यह भी पढ़ें- नौकरी बदलने पर बंद हो गया था पुराना PF Account? नए ईपोर्टल से आसानी से करें बैलेंस ट्रैक और ट्रांसफर<br>
एक्सप्रेस 48 Speed Post चार्ज</p>
<p> रिटेल ग्राहकों के लिए 48 स्पीड पोस्ट का शुल्क ₹61 से ₹121 प्रति आर्टिकल के बीच तय किया गया है. हालांकि, व्यावसायिक और बल्क में डाक भेजने वाले अनुबंधित ग्राहकों के लिए विशेष दरें लागू की गई हैं, जो नीचे दी गई है। </p>
<p><strong>     24 Speed Post: ₹38 से ₹100 प्रति आर्टिकल.<br>
     48 Speed Post: ₹48 से ₹72 प्रति आर्टिकल.</strong></p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>Bank Charges: ग्राहकों से बैंकों ने वसूले ₹26,170 करोड़! क्या आपका बैंक भी कम बैलेंस पर काट रहा है भारी चार्ज?</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली अगर आपके बैंक खाते से कभी बिना जानकारी के कुछ रुपये कट गए हों, तो हो सकता है कि वह न्यूनतम औसत शेष (Minimum Average Balance- MAB) नहीं रखने का चार्ज हो। अब सरकार ने संसद में बताया है कि पिछले चार वित्तीय वर्षों (FY23-FY26) में बैंकों ने ग्राहकों से मिनिमम बैलेंस नहीं … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 10:45:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Bank, Charges:, ग्राहकों, से, बैंकों, ने, वसूले, ₹26, 170, करोड़, क्या, आपका, बैंक, भी, कम, बैलेंस, पर, काट, रहा, है, भारी, चार्ज</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>अगर आपके बैंक खाते से कभी बिना जानकारी के कुछ रुपये कट गए हों, तो हो सकता है कि वह न्यूनतम औसत शेष (Minimum Average Balance- MAB) नहीं रखने का चार्ज हो। अब सरकार ने संसद में बताया है कि पिछले चार वित्तीय वर्षों (FY23-FY26) में बैंकों ने ग्राहकों से मिनिमम बैलेंस नहीं रखने पर कुल ₹26,170 करोड़ से ज्यादा की पेनाल्टी वसूली है। इनमें सबसे ज्यादा हिस्सा निजी बैंकों का रहा है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि सिर्फ FY26 में ही बैंकों ने ₹7,086.63 करोड़ की पेनाल्टी वसूली। इसमें प्राइवेट बैंकों ने ₹4,948.71 करोड़, जबकि पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSBs) ने ₹2,137.92 करोड़ ग्राहकों से वसूले।</p>
<p><strong>HDFC बैंक सबसे आगे, एक्सिस बैंक दूसरे पर</strong><br>
निजी बैंकों की बात करें तो HDFC Bank ने FY26 में ₹1,798.14 करोड़ की सबसे ज्यादा पेनाल्टी वसूली। इसके बाद Axis Bank का नंबर रहा, जिसने ₹1,081.33 करोड़ वसूले। दोनों बैंकों ने मिलकर निजी बैंकों द्वारा वसूली गई कुल पेनाल्टी का करीब 58% हिस्सा अकेले वसूल किया।</p>
<p>इसके अलावा ICICI बैंक ने ₹353.50 करोड़, कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) ने ₹290.65 करोड़, Yes बैंक ने ₹195.05 करोड़ और IDBI Bank ने ₹175.15 करोड़ की पेनाल्टी वसूली।</p>
<p>पब्लिक सेक्टर बैंकों में SBI ने ₹477.27 करोड़ की सबसे ज्यादा पेनाल्टी दर्ज की। हालांकि सरकार ने साफ किया कि यह राशि करंट अकाउंट्स से संबंधित है, क्योंकि मार्च 2020 से SBI ने सेविंग अकाउंट पर मिनिमम बैलेंस नहीं रखने की पेनाल्टी खत्म कर दी है। इसके बाद BoB (Bank of Baroda) ने ₹394.10 करोड़ और इंडियन बैंक (Indian Bank) ने ₹299.17 करोड़ की पेनाल्टी वसूली।</p>
<p>सरकार ने बताया कि देश के 12 सरकारी बैंकों में से 10 ने सेविंग अकाउंट पर मिनिमम बैलेंस नहीं रखने की पेनाल्टी पूरी तरह समाप्त कर दी है। बाकी दो बैंक भी अपने बोर्ड की मंजूरी और व्यावसायिक नीति के अनुसार सीमित चार्ज ही लगा रहे हैं।</p>
<p>अगर आपके पास BSBDA (Basic Savings Bank Deposit Account) या प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) के तहत खोला गया खाता है, तो आपको मिनिमम बैलेंस रखने की जरूरत नहीं है। सरकार के मुताबिक देश में ऐसे करीब 73 करोड़ खाते हैं, जिन पर मिनिमम बैलेंस नहीं रखने पर कोई पेनाल्टी नहीं लगती।</p>
<p>RBI के नियमों के अनुसार, बैंक अपने बोर्ड की मंजूरी से सेविंग और करंट अकाउंट पर मिनिमम बैलेंस का नियम लागू कर सकते हैं। लेकिन चार्ज उचित, पारदर्शी और बैंकिंग सेवा की लागत के अनुरूप होना चाहिए। साथ ही, पेनाल्टी लगाने से पहले ग्राहकों को SMS, ईमेल या अन्य माध्यमों से सूचना देना और बैलेंस पूरा करने का मौका देना भी जरूरी है।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>DA Hike: दुर्गा पूजा से पहले कर्मचारियों को बड़ा तोहफा! अक्टूबर की सैलरी के साथ मिलेगा 20% अतिरिक्त DA</title>
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<description><![CDATA[ कलकत्ता त्योहारी सीजन से पहले सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। सरकार ने घोषणा की है कि कर्मचारियों को 20% अतिरिक्त महंगाई भत्ता (Dearness Allowance-DA) दिया जाएगा। इतना ही नहीं, दुर्गा पूजा से पहले अक्टूबर महीने का वेतन भी जारी किया जाएगा, ताकि कर्मचारियों को त्योहार के दौरान किसी तरह की … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 10:45:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Hike:, दुर्गा, पूजा, से, पहले, कर्मचारियों, को, बड़ा, तोहफा, अक्टूबर, की, सैलरी, के, साथ, मिलेगा, 20, अतिरिक्त</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कलकत्ता</strong></p>
<p>त्योहारी सीजन से पहले सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। सरकार ने घोषणा की है कि कर्मचारियों को 20% अतिरिक्त महंगाई भत्ता (Dearness Allowance-DA) दिया जाएगा। इतना ही नहीं, दुर्गा पूजा से पहले अक्टूबर महीने का वेतन भी जारी किया जाएगा, ताकि कर्मचारियों को त्योहार के दौरान किसी तरह की आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े। बता दें कि यह फायदा बंगाल के कर्मचारियों को मिलेगा।</p>
<p><strong>क्या हुआ ऐलान?</strong><br>
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि 1 अक्टूबर 2026 से कर्मचारियों को 20% अतिरिक्त महंगाई भत्ता (DA) दिया जाएगा। इसके साथ ही कर्मचारियों को अक्टूबर महीने की सैलरी भी दुर्गा पूजा से पहले उनके बैंक खातों में भेज दी जाएगी, ताकि वे त्योहार की तैयारियां बिना किसी आर्थिक परेशानी के कर सकें।</p>
<p><strong>मुख्यमंत्री ने क्या कहा?</strong><br>
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार सरकारी कर्मचारियों को राहत देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि बजट में किए गए वादे के मुताबिक 20% अतिरिक्त डीए (DA Hike) 1 अक्टूबर से लागू होगा, जिससे कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता 18% से बढ़कर 38% हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चाहती है कि कर्मचारियों को इस बढ़ोतरी का फायदा दुर्गा पूजा से पहले ही मिल जाए, इसलिए अक्टूबर का वेतन भी समय से पहले जारी किया जाएगा।</p>
<p><strong>7वें वेतन आयोग पर भी दिया बड़ा अपडेट</strong><br>
सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) का गठन कर चुकी है। आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने का काम सौंपा गया है। सरकार का लक्ष्य है कि आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद कर्मचारियों के वेतन और भत्तों से जुड़े फैसलों को भी आगे बढ़ाया जाए।</p>
<p><strong>लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को होगा फायदा</strong><br>
सरकार के इस फैसले का लाभ राज्य के करीब 7.5 लाख सरकारी कर्मचारियों, अर्द्धसरकारी कर्मचारियों (Semi-government employees), शिक्षकों (Teachers), गैर-शिक्षण कर्मचारियों (Non-teaching staff) और पेंशनर्स (pensioners)  को मिलेगा। डीए बढ़ने से उनकी मासिक आय (Monthly salary) में बढ़ोतरी होगी, जबकि त्योहार से पहले सैलरी मिलने से उन्हें खरीदारी और अन्य खर्चों के लिए अतिरिक्त सुविधा मिलेगी।</p>
<p><strong>अहम बातें</strong></p>
<p>* मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 20% अतिरिक्त डीए देने का ऐलान किया।<br>
* 1 अक्टूबर 2026 से बढ़ा हुआ डीए लागू होगा।<br>
* कुल DA 18% से बढ़कर 38% हो जाएगा।<br>
* दुर्गा पूजा से पहले अक्टूबर की सैलरी कर्मचारियों के खातों में भेजी जाएगी।<br>
* सरकार ने 7वें वेतन आयोग पर भी तेजी से काम करने की बात कही।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>Rule Change From 1 August: 1 अगस्त से लागू होंगे 5 बड़े बदलाव, LPG, रेलवे टिकट समेत आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर</title>
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<description><![CDATA[ नईदिल्ली  जुलाई का महीना खत्म होने वाला है और 1 अगस्त 2026 से कई नए फाइनेंशियल बदलाव लागू होने जा रहे हैं. इन बदलावों का सीधा असर आम लोगों की जेब और रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ सकता है. हर महीने की तरह इस बार भी बैंकिंग, निवेश, टैक्स, रेलवे टिकट बुकिंग, एलपीजी सिलेंडर की … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 10:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Rule, Change, From, August:, अगस्त, से, लागू, होंगे, बड़े, बदलाव, LPG, रेलवे, टिकट, समेत, आपकी, जेब, पर, पड़ेगा, सीधा, असर</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नईदिल्ली </strong><br>
जुलाई का महीना खत्म होने वाला है और 1 अगस्त 2026 से कई नए फाइनेंशियल बदलाव लागू होने जा रहे हैं. इन बदलावों का सीधा असर आम लोगों की जेब और रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ सकता है. हर महीने की तरह इस बार भी बैंकिंग, निवेश, टैक्स, रेलवे टिकट बुकिंग, एलपीजी सिलेंडर की कीमतों और कुछ अन्य जरूरी सर्विसेस से जुड़े नियमों में बदलाव होने की संभावना है. ऐसे बदलावों का असर कभी आपके मंथली बजट पर पड़ता है तो कभी पैसों के लेनदेन और बचत की योजना पर। </p>
<p>अगर आप भी चाहते हैं कि नए महीने की शुरुआत बिना किसी परेशानी के हो, तो इन बदलावों की जानकारी पहले से होना जरूरी है. कई बार छोटे-छोटे नियमों में बदलाव की जानकारी न होने पर अतिरिक्त चार्ज देना पड़ सकता है या जरूरी काम में दिक्कत आ सकती है. इसलिए अगस्त में लागू होने वाले नए नियमों को समझना आपके लिए फायदेमंद रहेगा. 1 अगस्त 2026 से कौन-कौन से बड़े वित्तीय बदलाव होने जा रहे हैं और उनका आपकी जेब पर क्या असर पड़ सकता है, ये आपको बताते हैं। </p>
<p><strong>रेलवे टिकट से जुड़ा नियम</strong><br>
1 अगस्त 2026 से रेलवे ने तत्काल टिकट बुकिंग के प्रोसेस में बदलाव किया है. नए नियमों के तहत अब टोकन देने का समय तत्काल टिकट बुकिंग शुरू होने के समय के साथ ही रखा गया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इसका मकसद रिजर्वेशन काउंटर पर भीड़ कम करना और यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग को आसान बनाना है. पहले लोगों को टोकन लेने और फिर टिकट बुक कराने के लिए अलग-अलग समय पर काउंटर जाना पड़ता था, लेकिन नए सिस्टम में यह परेशानी कम होगी. इससे यात्रियों का समय बचेगा और टिकट बुकिंग के प्रोसेस पहले के मुकाबले ज्यादा बेहतर हो जाएगी। </p>
<p><strong>इनकम टैक्स भरने वालों के लिए निमय</strong><br>
फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए आईटीआर 1 और आईटीआर2 फॉर्म भरने की डेडलाइन 31 जुलाई 2026 तय की गई थी. अब जिन भी लोगों ने इस डेडलाइन के अंदर ITR फाइल नहीं किया, उन्हें जुर्माना भरना पड़ेगा. साथ ही, रिटर्न में देरी होने पर कुछ खास टैक्स रिजीम को चुनने पर रोक लग सकती है. हालांकि, ITR -3 और ITR- 4 बिजनेस और बिना ऑडिट वालों के लिए डेडलाइन 31 अगस्त 2026 है. ITR-3 और ITR-4 (ऑडिट वाले मामलों में) 31 अक्टूबर 2026 है. बिलेटेड रिटर्न 31 दिसंबर और रिवाइज्ड रिटर्न के लिए डेडलाइन 31 मार्च 2027 है. साथ ही अपडेटेड रिटर्न के लिए लास्ट डेट 31 मार्च 2031 है। </p>
<p><strong>क्रेडिट कार्ड और एफडी से जुड़े नियम में बदलाव</strong><br>
1 अगस्त से कई बैंक अपने क्रेडिट कार्ड के नियमों में बदलाव कर सकते हैं. इसमें रिवॉर्ड पॉइंट्स, चार्ज, फीस या अन्य सर्विसेस में बदलाव शामिल हो सकते हैं. वहीं, कुछ बैंक अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में भी बदलाव कर सकते हैं. इसके अलावा, अगर इस दौरान आरबीआई की एमपीसी बैठक (मॉनिटरी पॉलिसी) में रेपो रेट को लेकर कोई फैसला आता है, तो उसका असर लोन की ईएमआई और एफडी पर मिलने वाले ब्याज दोनों पर पड़ सकता है. इसलिए नए महीने की शुरुआत में अपने बैंक की ओर से जारी अपडेट जरूर देख लें। </p>
<p><strong>एलपीजी रेट्स में बदलाव</strong><br>
ईरान और यूएस के बीच युद्ध की वजह से तेल और गैस सप्लाई का असर दुनियाभर पर देखने को मिला. मार्च के महीने में एलपीजी की कीमतों में 60 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई. इसके बाद जून में भी कॉमर्शियल गैस की कीमतों को बढ़ाया गया. अब गैस का दिल्ली में रेट 942 रुपये हो गया है। </p>
<p>बता दें कि हर महीने की पहली तारीख की तरह 1 अगस्त 2026 को भी एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव हो सकता है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियां घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के गैस सिलेंडर के नए रेट जारी कर सकती हैं. अगर कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो रसोई का बजट प्रभावित हो सकता है, वहीं दाम घटने पर उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। </p>
<p><strong>आधार कार्ड से जुड़ा नियम</strong><br>
1 अगस्त से आधार कार्ड से जुड़ा नियम बदलने वाला है. भारतीय बैंक और इंश्योरेंस कंपनियां अगस्त 2026 में एक कॉमन कस्टमर आइडेंटिफिकेशन सिस्टम को शुरू करेंगू. इसमें एसेट मैनेजर भी शामिल होंगे. इस नए सिस्टम को सेंट्रल नो योर कस्टमर 2.0 यानी CKYC कहा जाएगा. इससे अकाउंट को ओपन करने और जानकारियों को अपडेट करने के समय, संस्थानों को सेंट्रल रजिस्ट्री में स्टोर डेटा हासिल करने में सिर्फ कस्टमर की सहमति की जरूरत होगी. इससे किसी भी तरह के धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी। </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>Rule Change From 1st August: LPG से बैंकिंग और तत्काल टिकट तक, 1 अगस्त से बदल जाएंगे ये 5 बड़े नियम; हर परिवार पर पड़ेगा असर</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली जुलाई का महीना खत्म होने वाला है और 1 अगस्त 2026 से कई नए फाइनेंशियल बदलाव लागू होने जा रहे हैं. इन बदलावों का सीधा असर आम लोगों की जेब और रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ सकता है. हर महीने की तरह इस बार भी बैंकिंग, निवेश, टैक्स, रेलवे टिकट बुकिंग, एलपीजी सिलेंडर … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 09:45:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Rule, Change, From, 1st, August:, LPG, से, बैंकिंग, और, तत्काल, टिकट, तक, अगस्त, से, बदल, जाएंगे, ये, बड़े, नियम, हर, परिवार, पर, पड़ेगा, असर</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>जुलाई का महीना खत्म होने वाला है और 1 अगस्त 2026 से कई नए फाइनेंशियल बदलाव लागू होने जा रहे हैं. इन बदलावों का सीधा असर आम लोगों की जेब और रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ सकता है. हर महीने की तरह इस बार भी बैंकिंग, निवेश, टैक्स, रेलवे टिकट बुकिंग, एलपीजी सिलेंडर की कीमतों और कुछ अन्य जरूरी सर्विसेस से जुड़े नियमों में बदलाव होने की संभावना है. ऐसे बदलावों का असर कभी आपके मंथली बजट पर पड़ता है तो कभी पैसों के लेनदेन और बचत की योजना पर। </p>
<p>अगर आप भी चाहते हैं कि नए महीने की शुरुआत बिना किसी परेशानी के हो, तो इन बदलावों की जानकारी पहले से होना जरूरी है. कई बार छोटे-छोटे नियमों में बदलाव की जानकारी न होने पर अतिरिक्त चार्ज देना पड़ सकता है या जरूरी काम में दिक्कत आ सकती है. इसलिए अगस्त में लागू होने वाले नए नियमों को समझना आपके लिए फायदेमंद रहेगा. 1 अगस्त 2026 से कौन-कौन से बड़े वित्तीय बदलाव होने जा रहे हैं और उनका आपकी जेब पर क्या असर पड़ सकता है, ये आपको बताते हैं। </p>
<p><strong>रेलवे टिकट से जुड़ा नियम</strong><br>
1 अगस्त 2026 से रेलवे ने तत्काल टिकट बुकिंग के प्रोसेस में बदलाव किया है. नए नियमों के तहत अब टोकन देने का समय तत्काल टिकट बुकिंग शुरू होने के समय के साथ ही रखा गया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इसका मकसद रिजर्वेशन काउंटर पर भीड़ कम करना और यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग को आसान बनाना है. पहले लोगों को टोकन लेने और फिर टिकट बुक कराने के लिए अलग-अलग समय पर काउंटर जाना पड़ता था, लेकिन नए सिस्टम में यह परेशानी कम होगी. इससे यात्रियों का समय बचेगा और टिकट बुकिंग के प्रोसेस पहले के मुकाबले ज्यादा बेहतर हो जाएगी। </p>
<p><strong>इनकम टैक्स भरने वालों के लिए निमय</strong><br>
फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए आईटीआर 1 और आईटीआर2 फॉर्म भरने की डेडलाइन 31 जुलाई 2026 तय की गई थी. अब जिन भी लोगों ने इस डेडलाइन के अंदर ITR फाइल नहीं किया, उन्हें जुर्माना भरना पड़ेगा. साथ ही, रिटर्न में देरी होने पर कुछ खास टैक्स रिजीम को चुनने पर रोक लग सकती है. हालांकि, ITR -3 और ITR- 4 बिजनेस और बिना ऑडिट वालों के लिए डेडलाइन 31 अगस्त 2026 है. ITR-3 और ITR-4 (ऑडिट वाले मामलों में) 31 अक्टूबर 2026 है. बिलेटेड रिटर्न 31 दिसंबर और रिवाइज्ड रिटर्न के लिए डेडलाइन 31 मार्च 2027 है. साथ ही अपडेटेड रिटर्न के लिए लास्ट डेट 31 मार्च 2031 है। </p>
<p><strong>क्रेडिट कार्ड और एफडी से जुड़े नियम में बदलाव</strong><br>
1 अगस्त से कई बैंक अपने क्रेडिट कार्ड के नियमों में बदलाव कर सकते हैं. इसमें रिवॉर्ड पॉइंट्स, चार्ज, फीस या अन्य सर्विसेस में बदलाव शामिल हो सकते हैं. वहीं, कुछ बैंक अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में भी बदलाव कर सकते हैं. इसके अलावा, अगर इस दौरान आरबीआई की एमपीसी बैठक (मॉनिटरी पॉलिसी) में रेपो रेट को लेकर कोई फैसला आता है, तो उसका असर लोन की ईएमआई और एफडी पर मिलने वाले ब्याज दोनों पर पड़ सकता है. इसलिए नए महीने की शुरुआत में अपने बैंक की ओर से जारी अपडेट जरूर देख लें। </p>
<p><strong>एलपीजी रेट्स में बदलाव</strong><br>
ईरान और यूएस के बीच युद्ध की वजह से तेल और गैस सप्लाई का असर दुनियाभर पर देखने को मिला. मार्च के महीने में एलपीजी की कीमतों में 60 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई. इसके बाद जून में भी कॉमर्शियल गैस की कीमतों को बढ़ाया गया. अब गैस का दिल्ली में रेट 942 रुपये हो गया है। </p>
<p>बता दें कि हर महीने की पहली तारीख की तरह 1 अगस्त 2026 को भी एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव हो सकता है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियां घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के गैस सिलेंडर के नए रेट जारी कर सकती हैं. अगर कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो रसोई का बजट प्रभावित हो सकता है, वहीं दाम घटने पर उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। </p>
<p><strong>आधार कार्ड से जुड़ा नियम</strong><br>
1 अगस्त से आधार कार्ड से जुड़ा नियम बदलने वाला है. भारतीय बैंक और इंश्योरेंस कंपनियां अगस्त 2026 में एक कॉमन कस्टमर आइडेंटिफिकेशन सिस्टम को शुरू करेंगू. इसमें एसेट मैनेजर भी शामिल होंगे. इस नए सिस्टम को सेंट्रल नो योर कस्टमर 2.0 यानी CKYC कहा जाएगा. इससे अकाउंट को ओपन करने और जानकारियों को अपडेट करने के समय, संस्थानों को सेंट्रल रजिस्ट्री में स्टोर डेटा हासिल करने में सिर्फ कस्टमर की सहमति की जरूरत होगी. इससे किसी भी तरह के धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी। </p>]]> </content:encoded>
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<title>8th Pay Commission: इन कर्मचारियों को नहीं मिलेगा प्रमोशन? संसद में सरकार ने दिया साफ जवाब, जानें किस पर पड़ेगा असर</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  केंद्रीय कर्मचारियों (Central Government Employees) को आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का बेसब्री से इंतजार है। लेकिन इस इंतजार के बीच सरकार (Governement) की तरफ से एक ऐसा अपडेट आया है, जिसनें कई पूर्व कर्मचारियों को निराश कर दिया है। संसद में सरकार ने प्रमोशन से जुड़ी अहम MPCA स्कीम (Modified Assured … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 09:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 केंद्रीय कर्मचारियों (Central Government Employees) को आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का बेसब्री से इंतजार है। लेकिन इस इंतजार के बीच सरकार (Governement) की तरफ से एक ऐसा अपडेट आया है, जिसनें कई पूर्व कर्मचारियों को निराश कर दिया है। संसद में सरकार ने प्रमोशन से जुड़ी अहम MPCA स्कीम (Modified Assured Career Progression) को लेकर स्थिति साफ कर दी है। सरकार ने साफ शब्दों में बता दिया है कि खास समय सीमा के दौरान रिटायर (Retire) हुए कर्मचारियों (Employees) को इस योजना का कोई लाभ नहीं दिया जाएगा।</p>
<p>केंद्रीय कर्मचारियों के लिए मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) एक बेहद अहम योजना मानी जाती है। लेकिन केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि छठे वेतन आयोग (6th Pay Commission) के दौरान, यानी 1 जनवरी 2006 से लेकर 31 अगस्त 2008 के बीच रिटायर हुए केंद्रीय सिविलियन कर्मचारियों (Civilian employees)को इस MACP योजना का लाभ नहीं मिलेगा।</p>
<p>
<strong>आखिर इन कर्मचारियों को इस योजना से क्यों बाहर रखा गया है?</strong><br>
यह सवाल 23 जुलाई 2026 को राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने संसद में उठाया था। उन्होंने कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय से पूछा था कि 2006 से 2008 के बीच रिटायर हुए कर्मचारियों को MACP स्कीम के फायदे क्यों नहीं दिए गए?</p>
<p>इस सवाल पर पर्दा उठाते हुए राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने MACP स्कीम को छठे वेतन आयोग (6th pay commission) की सिफारिशों के तहत 1 सितंबर 2008 से लागू किया था। मंत्री ने कहा, "चूंकि 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 के बीच यह योजना अस्तित्व में ही नहीं थी, इसलिए उस दौरान सेवा दे रहे या सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों (Retired Employees) पर इस योजना को लागू करने या इसका लाभ देने का कोई सवाल ही नहीं उठता।"</p>
<p><strong>क्या है MACP?</strong><br>
MACP का विकल्प खासकर ग्रुप C और ग्रुप D के कर्मचारियों (Employess) के लिए एक संजीवनी की तरह है, क्योंकि उनके पास प्रमोशन के मौके अक्सर काफी कम होते हैं। इस योजना के तहत अगर किसी कर्मचारी को लगातार 10 साल तक कोई प्रमोशन नहीं मिलता, तो उसे नौकरी के 10, 20 और 30 साल की रेगुलर सर्विस पूरी करने पर या एक ही ग्रेड पे में 10 साल गुजारने पर तीन फाइनेंशियल अपग्रेडेशन (आर्थिक पदोन्नति/वेतन वृद्धि) दिए जाते हैं।</p>
<p><strong>8वें वेतन आयोग में उठ रही है नई मांग</strong></p>
<p>भले ही पुरानी तारीखों में रिटायर हुए कर्मचारियों को इस फैसले से निराशा हाथ लगी हो, लेकिन मौजूदा कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग (8th pay commission Dashboard) से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं।</p>
<p>
वर्तमान में, कर्मचारियों के प्रमुख संगठन 'नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM)' और 'ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन' ने 8वें वेतन आयोग को अपना मेमोरेंडम सौंपा है। इस ज्ञापन में प्रमुख मांग यह रखी गई है कि MACP के तहत मिलने वाले प्रमोशन (Promotion) की संख्या को 3 से बढ़ाकर 5 कर दिया जाए।</p>]]> </content:encoded>
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<title>भगवान जगन्नाथ पर बनी एनिमेशन फिल्म पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, याचिका खारिज</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को एनिमेटेड फिल्म &#039;महाप्रभु जगन्नाथ&#039; की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। साथ ही संवेदनशीलता के आधार पर कला पर बैन लगाने की बढ़ती याचिकाओं पर चिंता भी जताई। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर महादेवन सुप्रीम की बेंच ने यह भी … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 22:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>भगवान, जगन्नाथ, पर, बनी, एनिमेशन, फिल्म, पर, रोक, लगाने, से, सुप्रीम, कोर्ट, का, इनकार, याचिका, खारिज</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। साथ ही संवेदनशीलता के आधार पर कला पर बैन लगाने की बढ़ती याचिकाओं पर चिंता भी जताई। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर महादेवन सुप्रीम की बेंच ने यह भी कहा कि फिल्म किसी भी तरह से भगवान जगन्नाथ से जुड़ी भक्ति या श्रद्धा को कम नहीं करती है।</p>
<p><strong>रिलीज पर रोक वाली याचिका खारिज की</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट ने एनिमेटेड फिल्म की रिलीज रोकने की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी है। साथ ही 17 जुलाई के अपने उस ऑर्डर को बदलने से भी इनकार कर दिया, जिसमें प्रोड्यूसर को 28 जुलाई को पुरी में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा खत्म होने के बाद फिल्म रिलीज करने की इजाजत दी गई थी।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि भगवान जगन्नाथ को एनिमेटेड रूप में दिखाना गलत है। कोर्ट ने कहा कि अगर आर्ट को इसलिए कम किया जाता है, क्योंकि इससे कुछ लोगों की सेंसिटिविटी को ठेस पहुंचती है, तो 'रामायण' और 'महाभारत' पर आधारित काम कभी नहीं बन सकते। श्री जगन्नाथ मंदिर एडमिनिस्ट्रेशन और एक भक्त ने फिल्म की रिलीज रोकने के लिए 17 जुलाई के ऑर्डर में बदलाव के लिए एप्लीकेशन फाइल<strong> की थी।</strong></p>
<p><strong>'कड़े ऑर्डर देने पड़ सकते हैं'</strong><br>
आज सुनवाई के दौरान बेंच ने इस बात पर चिंता जताई कि सिर्फ इसलिए कि कला और रचनात्मकता कुछ लोगों की भावनाओं से मेल नहीं खाती, उन पर ज्यूडिशियल बैन लगाने की मांग बढ़ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर ऐसी याचिकाएं फाइल होती रहीं, तो कोर्ट को आखिर में हिंदू देवी-देवताओं को किसी भी तरह से आर्टिस्टिक रूप में दिखाने पर रोक लगाने के लिए कड़े ऑर्डर देने पड़ सकते हैं। </p>
<p>पूरे भारत में 'रामायण' के कई वर्जन और देश की समृद्ध कला परंपराओं का जिक्र करते हुए, जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि इस तरह के कदम से हिंदू पौराणिक कथाओं पर आधारित फिल्मों, टीवी सीरियलों, पेंटिंग, मूर्तियों और अन्य रचनात्मक कार्यों पर असल में रोक लग जाएगी। बेंच ने कहा, 'अगर ऐसी सोच और संवेदनशीलता हो और दो-तीन लोग रिट याचिका दायर कर दें, तो हम ऐसा आदेश दे देंगे कि हिंदू देवी-देवताओं या पौराणिक कथाओं से जुड़ी भारत में कोई भी कलाकृति न रहे'।</p>
<p><strong>कहा- 'फिल्म बच्चों के लिए बनाई गई'</strong><br>
जस्टिस नागरत्ना ने मंदिर प्रशासन की ओर से पेश हुए ओडिशा के एडवोकेट जनरल प्रीतांबर आचार्य से कहा, 'हमारे पास कबीर की रामायण है, हर राज्य की अपनी रामायण है। हर व्यक्ति की अपनी रचनात्मकता होती है। अगर हम ऐसा कोई आदेश पारित करते हैं, तो टेलीविजन पर सभी 'रामायण' और 'महाभारत' बंद हो जाएंगे। हिंदू देवी-देवताओं की किसी भी रूप में कला – चाहे वह टेलीविजन हो, रचनात्मकता हो, पेंटिंग हो या मूर्ति। अगर आप चाहें, तो हम ऐसा आदेश पारित कर देंगे'।</p>
<p>याचिकाकर्ता ने कहा कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ को 'डोरेमोन' और 'स्पाइडरमैन' के रूप में दिखाया गया है। बेंच ने भगवान जगन्नाथ को एनिमेटेड रूप में दिखाए जाने पर आचार्य की आपत्ति को खारिज कर दिया और कहा कि यह फिल्म बच्चों के लिए बनाई गई थी।</p>
<p><strong>प्रोड्यूसर से सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?</strong><br>
बेंच ने आदेश दिया, 'हमने एडवोकेट जनरल को सुना। हम ऑर्डर में बदलाव नहीं करना चाहते। एप्लीकेशन खारिज की जाती है'। ऑर्डर सुनाने के बाद, बेंच ने फिल्म के प्रोड्यूसर से कहा कि वह अपनी अंतरात्मा की आवाज पर, जो भी सही लगे, उसमें कोई भी बदलाव करने के लिए आजाद हैं। साथ ही यह भी साफ किया कि कोर्ट ऐसे क्रिएटिव फैसलों पर फैसला नहीं सुनाएगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>E20 Petrol से गाड़ियों पर कितना पड़ेगा असर? नितिन गडकरी ने बताया&#45; क्या इंजन बदलने की पड़ेगी जरूरत</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली E20 पेट्रोल को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने संसद में बड़ा बयान दिया है. सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल से कार और बाइक-स्कूटी के इंजन में किसी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं है. हालांकि ,1 अप्रैल 2005 से लागू BS-III स्टैंडर्ड वाले और … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 21:45:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>E20, Petrol, से, गाड़ियों, पर, कितना, पड़ेगा, असर, नितिन, गडकरी, ने, बताया-, क्या, इंजन, बदलने, की, पड़ेगी, जरूरत</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>E20 पेट्रोल को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने संसद में बड़ा बयान दिया है. सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल से कार और बाइक-स्कूटी के इंजन में किसी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं है. हालांकि ,1 अप्रैल 2005 से लागू BS-III स्टैंडर्ड वाले और साल 2016 से पहले बने कुछ गाड़ियों में रबर के कुछ पार्ट्स और गैस्केट बदलने की जरूरत पड़ सकती है. सरकार के मुताबिक यह काम रेगुलर सर्विसिंग के दौरान आसानी से किया जा सकता है। </p>
<p><strong>संसद में बोले नितिन गडकरी</strong><br>
राज्यसभा में एक लिखित जवाब में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहन की माइलेज को लेकर जो चिंताएं जताई जा रही हैं, उन्हें लेकर ऑटोमोबाइल कंपनियों और वाहन टेस्टिंग एजेंसियों ने साफ किया है कि किसी वाहन की माइलेज केवल ईंधन के प्रकार पर निर्भर नहीं करती. माइलेज कई अन्य तकनीकी और उपयोग संबंधी फैक्टर्स से भी प्रभावित होती है। </p>
<p><strong>किन वाहनों में बदलने पड़ सकते हैं रबर पार्ट्स?</strong><br>
सरकार के मुताबिक BS-III वाहन, जिन्हें 1 अप्रैल 2005 से पेश किया गया था और जिनका प्रोडक्शन 2016 से पहले हुआ है, उनमें E20 पेट्रोल के साथ इस्तेमाल करने पर कुछ रबर पार्ट्स और गैस्केट बदलने की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि, सरकार का कहना है कि यह कोई बड़ी तकनीकी समस्या नहीं है और रेगुलर सर्विसिंग के दौरान इन्हें आसानी से बदला जा सकता है। </p>
<p><strong>स्टडी में खुलासा</strong><br>
सरकार ने बताया कि E20 पेट्रोल के असर की स्टडी Indian Oil Corporation Limited (IOCL), Indian Institute of Petroleum (IIP) Dehradun, Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) और Automotive Research Association of India (ARAI) ने मिलकर किया। </p>
<p>स्टडी में दोपहिया और चारपहिया वाहनों की जांच की गई. इसके बाद नतीजा निकला कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से इंजन में किसी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं पड़ती. सरकार के अनुसार पुराने यानी Legacy Vehicles में भी परफॉर्मेंस में कोई बड़ा अंतर नहीं पाया गया. साथ ही असामान्य घिसावट या इंजन को नुकसान जैसी कोई समस्या भी सामने नहीं आई। </p>
<p><strong>किन चीजों में नहीं मिली कोई समस्या</strong>?<br>
सरकार ने कहा कि टेस्टिंग के दौरान गाड़ी की ड्राइविंग क्षमता, स्टार्ट होने की क्षमता, मेटल के पार्ट्स और प्लास्टिक के पार्ट्स की कम्पैटिबिलिटी जैसे स्टैंडर्ड में कोई दिक्कत नहीं मिली. यानी E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से इन एरिया में कोई असामान्य असर देखने को नहीं मिला। </p>
<p><strong>E20 पेट्रोल को लेकर हो रहा है विवाद</strong><br>
E20 पेट्रोल में 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनॉल होता है. इसके लागू होने के बाद विपक्षी दलों और कुछ कंज्यूमर ऑर्गेनाइजेशन ने चिंता जताई थी कि पुराने वाहन, जिन्हें E20 के हिसाब से डिजाइन नहीं किया गया, उन पर इसका असर पड़ सकता है. आलोचकों ने माइलेज में कमी, रखरखाव की लागत बढ़ने और इंजन या फ्यूल सिस्टम में खराबी आने की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने जैसे मुद्दे भी उठाए थे। </p>
<p><strong>सरकार ने दिया जवाब</strong><br>
सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है और इससे पहले बड़े स्तर पर लैब टेस्ट, टिकाऊपन टेस्टिंग और फील्ड वैलिडेशन किए गए थे. सरकार ने यह भी कहा कि ऑटोमोबाइल कंपनियां E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने वाले वाहनों की वारंटी पहले की तरह जारी रखे हुए हैं। </p>
<p>सरकार के अनुसार, NITI Aayog के तहत गठित एक इंटर मिनिस्ट्रियल कमिटी ने वाहन कम्पैटिबिलिटी, इंजन कैलिब्रेशन, फ्यूल सिस्टम, टिकाऊपन, इमिशन, माइलेज और अन्य तकनीकी पहलुओं की डेप्थ रिव्यू या विस्तृत समीक्षा की थी. इसके बाद जून 2021 में भारत में एथेनॉल ब्लेडिंग 2020-25 का रोडमैप जारी किया गया. जिसके आधार पर ही E20 पेट्रोल लागू किया गया। </p>
<p>भारत में Ethanol Blended Petrol Programme की शुरुआत वर्ष 2001 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी. इसके बाद 2006 में E5 ईंधन पेश किया गया और आवश्यक बुनियादी ढांचा तथा प्रोडक्शन क्षमता डेवलप होने के बाद चरणबद्ध तरीके से E20 पेट्रोल लागू किया गया। </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>Trump Tariff Shock: भारत पर 100% टैरिफ का खतरा, चीन की बढ़ी चिंता; अमेरिका में शुरू हुई बड़ी तैयारी</title>
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<description><![CDATA[ नईदिल्ली  भारत और चीन के ऊपर 100% ट्रंप टैरिफ (Trump 100% Tariff) का खतरा मंडरा रहा है. दरअसल, अमेरिकी सीनेट में रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक पर वोटिंग शुरू होने वाली है. खासतौर पर रूस को टारगेट करने वाले व्यापक प्रतिबंध विधेयक पर मतदान की तैयारी पूरी कर ली गई है और … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 21:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Trump, Tariff, Shock:, भारत, पर, 100, टैरिफ, का, खतरा, चीन, की, बढ़ी, चिंता, अमेरिका, में, शुरू, हुई, बड़ी, तैयारी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नईदिल्ली </strong><br>
भारत और चीन के ऊपर 100% ट्रंप टैरिफ (Trump 100% Tariff) का खतरा मंडरा रहा है. दरअसल, अमेरिकी सीनेट में रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक पर वोटिंग शुरू होने वाली है. खासतौर पर रूस को टारगेट करने वाले व्यापक प्रतिबंध विधेयक पर मतदान की तैयारी पूरी कर ली गई है और इसका भारत, चीन जैसे देशों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है, जो रूसी कच्चे तेल के दुनिया के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है। </p>
<p><strong>ट्रंप को 100% टैरिफ लगाने का अधिकार</strong><br>
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सीनेट में जिस विधेयक पर वोटिंग होने जा रही है, उसका उद्देश्य रूस पर प्रतिबंध लगाकर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों पर भी 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देना है, जो  बड़ी मात्रा में रूसी तेल (Russian Oil) और गैस (Russian Gas) खरीदना जारी रखे हुए हैं.  यूक्रेन पर मॉस्को के आक्रमण को लेकर उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। </p>
<p>अमेरिकी सीनेट में रूसी बैन से जुड़े विधेयक पर वोटिंग ठीक उसी दिन होगी, जब यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार के दिन कैपिटल हिल का दौ<strong>रा करेंगे. इस विधेयक को दिवंगत ग्राहम को श्रद्धांजलि के रूप में पेश किया जा रहा है। </strong></p>
<p><strong>इस विधेयक का उद्देश्य क्या है?</strong><br>
रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रस्तावित कानून का नाम बदलकर अब 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' कर दिया गया है. यह न केवल रूस के एनर्जी रेवेन्यू को टारगेट करेगा, बल्कि ईरान से संबंधित अमेरिकी कदमों का भी विस्तार करेगा. इस विधेयक का प्रमुख उद्देश्य रूस को यूक्रेन के साथ युद्ध में उपलब्ध होने वाले धन में कमी लाना है. इसके साथ ही ईरान की परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की क्षमता को भी सीमित करना है। </p>
<p>हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के इस प्रस्ताव पर कुछ डेमोक्रेटिक सांसदों ने चिंता जताई है. आलोचकों का तर्क है कि यह उपाय राष्ट्रपति को व्यापक नई टैरिफ शक्तियां देते हैं, जो अमेरिकी सहयोगियों को भी प्रभावित कर सकती हैं और अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ा सकती हैं। </p>
<p><strong>भारत के लिए क्यों बड़ी चिंता? </strong><br>
अमेरिका का ये विधेयक भारत के लिए बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि 2022 में यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) शुरू होने के बाद से देश में रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद में तेज बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में US में प्रस्तावित कानून लागू होता है, तो फिर भारत पर टैरिफ का बम फूटने का खतरा है। </p>
<p>गौरतलब है कि भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है. पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट में आए बदलावों के बाद से भारत रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक के रूप में उभरा है. रूसी तेल ने भारतीय रिफाइनरियों को रियायती कीमत पर कच्चा तेल दिया है, जिससे तमाम चुनौतियों के बीच भी देश में ईंधन की आपूर्ति में सहायता मिली है और रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार हुआ है। </p>
<p>अगर प्रस्तावित कानून अंततः लागू हो जाता है और टैरिफ लगाए जाते हैं, तो इससे रूस के साथ भारत के ऊर्जा व्यापार में बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है. इसके साथ ही India-US Trade Deal पर बातचीत में भी इसका असर देखने को मिल सकता है। </p>
<p><strong>भारत-China रूसी तेल की बड़े खरीदार</strong><br>
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बता दें कि चीन करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चा तेल की खरीदारी करता है, जबकि भारतीय आयात करी 17 लाख बैरल डेली का है. इस हिसाब से India-China दोनों ही देश सबसे बड़ी रूसी तेल खरीदार बने हुए हैं और यही कारण है कि Trump Tariff के खतरे में ये दोनों देश आगे हैं।  </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>NEET Protest पर राजनीति तेज, पंजाब&#45;झारखंड पर चुप्पी को लेकर विपक्ष और CJP पर उठे सवाल</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली/चंडीगढ़/रांची,     देशभर में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और नीट (NEET) जैसी केंद्रीय परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच अब गैर-भाजपा शासित राज्यों में भी भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद चर्चा में हैं. विशेष रूप से आम आदमी पार्टी (AAP) शासित पंजाब और झारखंड … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 21:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>NEET, Protest, पर, राजनीति, तेज, पंजाब-झारखंड, पर, चुप्पी, को, लेकर, विपक्ष, और, CJP, पर, उठे, सवाल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली/चंडीगढ़/रांची,</strong><br>
   <br>
देशभर में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और नीट (NEET) जैसी केंद्रीय परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच अब गैर-भाजपा शासित राज्यों में भी भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद चर्चा में हैं. विशेष रूप से आम आदमी पार्टी (AAP) शासित पंजाब और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेतृत्व वाली झारखंड सरकार के दौरान सामने आए मामलों को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं. आइए जानते हैं क्यों छ‍िड़ी ये बहस।  </p>
<p>अभी हाल ही में पेपरलीक को लेकर जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन की तस्वीरों के बीच व‍िपक्ष के नेता राहुल गांधी की तस्वीर भी वायरल हुई थी. वो पेपरलीक और छात्रों के साथ मारपीट को लेकर व‍िरोध कर रहे थे. लेकिन सत्तापक्ष अब ये सवाल उठा रहा है कि अगर पेपर लीक हो रहे हैं और श‍िक्षा मंत्री ने इस्तीफा भी दे दिया तो अब आख‍िर गैर भाजपा शास‍ित प्रदेशों के ल‍िए ये मांग क्यों नहीं उठती. क्यों वहां पर श‍िक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं मांंगा जा रहा है. यहां हैं वो मामले जिन पर घ‍िर रहा व‍िपक्ष। </p>
<p><strong>1. पंजाब का मामला: हाई-टेक चीटिंग रैकेट</strong><br>
पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार शिक्षा और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को अपनी प्रमुख उपलब्धियों में गिनाती रही है. हालांकि हाल ही में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा के दौरान सामने आए हाई-टेक नकल रैकेट ने सरकार को विपक्ष के निशाने पर ला दिया। </p>
<p><strong>फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा (जुलाई 2026):</strong><br>
19 जुलाई 2026 को पंजाब पुलिस ने एक अंतरराज्यीय हाई-टेक चीटिंग रैकेट का खुलासा किया. जांच के अनुसार परीक्षा शुरू होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने पेन कैमरा, मॉडिफाइड मोबाइल फोन और ब्लूटूथ इयरपीस के जरिए प्रश्न बाहर भेजे और बाहर बैठे लोगों से उत्तर प्राप्त किए. इस मामले में कथित मास्टरमाइंड और अभ्यर्थियों सहित कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई। </p>
<p><strong>विपक्ष का दावा:</strong><br>
पूर्व आप नेता स्वाति मालीवाल, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (SAD) का आरोप है कि पंजाब में पिछले कुछ वर्षों के दौरान PSTET, कक्षा 12वीं अंग्रेजी परीक्षा और अन्य भर्ती परीक्षाओं समेत कई परीक्षाओं में अनियमितताएं या पेपर लीक के मामले सामने आए हैं. राज्य सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है। </p>
<p><strong>सरकार का पक्ष:</strong><br>
मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि फार्मेसी भर्ती परीक्षा में पेपर पहले से लीक नहीं हुआ था, बल्कि हाई-टेक नकल की कोशिश को समय रहते पकड़ लिया गया और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. विपक्ष ने इस मामले को लेकर शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग की है। </p>
<p><strong>2. झारखंड का मामला: JSSC-CGL परीक्षा विवाद और जांच</strong></p>
<p><strong>झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा भी लंबे समय तक विवादों में रही.</strong></p>
<p><strong>जनवरी और सितंबर 2024 की परीक्षा:</strong><br>
जनवरी 2024 में परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी. इसके बाद सितंबर 2024 में 823 केंद्रों पर दोबारा परीक्षा आयोजित की गई, जिसके दौरान राज्य सरकार ने परीक्षा अवधि में इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद की थीं। </p>
<p><strong>जांच और गिरफ्तारियां:</strong><br>
दोबारा परीक्षा के बाद भी धांधली के आरोप लगे. जांच के दौरान सीआईडी ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से एक आरोपी को गिरफ्तार किया. जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि अभ्यर्थियों को नेपाल ले जाकर प्रश्न याद कराए जाते थे. मामले में सुरक्षा बल (IRB) के कुछ जवानों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई। </p>
<p><strong>अदालती घटनाक्रम:</strong><br>
फरवरी 2026 में झारखंड हाई कोर्ट ने वित्त विभाग के एक कर्मचारी को जमानत दी, जिसे कथित तौर पर पेपर लीक से जुड़ी अफवाह फैलाने के मामले में गिरफ्तार किया गया था. वहीं जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया, जिसमें परीक्षा परिणाम जारी रखने की अनुमति दी गई थी. इसके बावजूद परीक्षा प्रक्रिया को लेकर कई अभ्यर्थियों में असंतोष बना रहा। </p>
<p><strong>3. क्या विपक्ष के लिए नई चुनौती बन रहे हैं ये मामले?</strong><br>
संसद के मॉनसून सत्र में जब विपक्ष केंद्र सरकार और केंद्रीय परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार पर हमलावर है, तब भाजपा इन राज्यों के मामलों का हवाला देकर पलटवार कर रही है। </p>
<p>भाजपा और एनडीए के नेताओं का कहना है कि परीक्षा अनियमितताओं का मुद्दा केवल केंद्र या भाजपा शासित राज्यों तक सीमित नहीं है. उनका सवाल है कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग की जाती है, तो विपक्ष अपने शासित राज्यों में उठे विवादों पर समान राजनीतिक जवाबदेही क्यों नहीं तय करता। </p>
<p><strong>4. CJP और छात्र संगठनों को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल?</strong><br>
नीट और अन्य केंद्रीय परीक्षाओं से जुड़े विवादों के दौरान CJP जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और कई छात्र समूह सक्रिय रहे. हालांकि अब कुछ राजनीतिक दलों और विश्लेषकों का आरोप है कि पंजाब और झारखंड जैसे मामलों पर उनकी सक्रियता उतनी दिखाई नहीं दी। </p>
<p><strong>चयनात्मक विरोध के आरोप:</strong><br>
स्वाति मालीवाल समेत कुछ नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों का आरोप है कि छात्र आंदोलन और कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म केंद्र सरकार और NTA से जुड़े मामलों पर ज्यादा मुखर रहते हैं, जबकि विपक्ष शासित राज्यों में सामने आए विवादों पर अपेक्षाकृत कम प्रतिक्रिया देते हैं. इन आरोपों पर संबंधित संगठनों की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक जवाब सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। </p>
<p>कुछ प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग हर राज्य और हर परीक्षा के लिए समान रूप से उठनी चाहिए. उनका मानना है कि यदि किसी भी राज्य में भर्ती या परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो उस पर भी समान गंभीरता से आवाज उठनी चाहिए। </p>]]> </content:encoded>
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<title>कोयला घोटाला केस में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, मिली क्लीन चिट</title>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 20:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>कोयला, घोटाला, केस, में, पूर्व, प्रधानमंत्री, मनमोहन, सिंह, को, सुप्रीम, कोर्ट, से, बड़ी, राहत, मिली, क्लीन, चिट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ कोल ब्लॉक आवंटन मामले में समन को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है. पूर्व पीएम को उनके निधन के दो साल बाद क्लीन चिट मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को क्लीन चिट दी है. सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अदालत द्वारा उन्हें आरोपी के रूप में तलब करने के आदेश को रद्द कर दिया. सीबीआई की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर किया.यह मामला 11 साल से अधिक समय पहले शुरू हुआ था, जब विशेष जज ने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में डॉ. मनमोहन सिंह को आरोपी के रूप में समन जारी किया था. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ डॉ. मनमोहन सिंह को इस मामले में कानूनी तौर पर <strong>राहत मिली है. यह फैसला उनके निधन के करीब 2 साल बाद आया है। </strong></p>
<p><strong>सीबीआई ने दाखिल की थी क्लोजर रिपोर्ट</strong><br>
सीबीआई ने जांच के बाद मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है. डॉ. मनमोहन सिंह वर्ष 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे थे.कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े मामलों में उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों को लेकर कई जांच हुई थीं. डॉक्टर मनमोहन सिंह ने विशेष सीबीआई अदालत की ओर जारी किए गए समन को सुप्रीम  कोर्ट में   2015 में चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने पहली ही सुनवाई में मनमोहन सिंह को राहत देते हुए रोक लगा दी थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में यह मामला लंबे समय तक लंबित रहा और समन की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं आ सका.जबकि दिसंबर 2024 में मनमोहन सिंह का निधन हो गया.<br>
<strong>कोल ब्लॉक आवंटन केस में जांच</strong></p>
<p>कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े मामलों में उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों को लेकर कई जांच हुई थीं. डॉक्टर मनमोहन सिंह ने विशेष सीबीआई अदालत की ओर जारी किए गए समन को सुप्रीम  कोर्ट में   2015 में चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने पहली ही सुनवाई में मनमोहन सिंह को राहत देते हुए रोक लगा दी थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में यह मामला लंबे समय तक लंबित रहा और समन की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं आ सका.जबकि दिसंबर 2024 में मनमोहन सिंह का निधन हो गया। </p>
<p><strong>CJI सूर्यकांत ने दिया आदेश</strong><br>
CJI की बेंच ने कहा कि CBI की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने या उनके खिलाफ संज्ञान लेने का कोई ठोस कारण नहीं था. CJI सूर्यकांत ने कहा, हमने पक्षों के वरिष्ठ वकीलों की कुशल मदद से CBI द्वारा दाखिल दोनों क्लोजर रिपोर्ट को देखा है.जांच एजेंसी द्वारा दाखिल जांच रिपोर्ट को स्वीकार करने या खारिज करने के मामले में इस कोर्ट द्वारा लगातार तय किए गए पैमानों को ध्यान में रखते हुए, हम इस बात से संतुष्ट हैं कि CBI द्वारा दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को रद्द करने और संज्ञान लेने का कोई ठोस कारण नहीं था। </p>]]> </content:encoded>
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<title>राज्यसभा में पास हुआ वंदे मातरम् बिल, अपमान करने पर 3 साल तक की जेल का प्रावधान</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली राज्यसभा ने ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026&#039; पारित कर द‍िया है. इस संशोधन के तहत ‘वंदे मातरम्&#039; के अपमान से जुड़े प्रावधानों को कानूनी संरक्षण म‍िलेगा. कानून का मकसद &#039;वंदे मातरम&#039; को भी राष्ट्रगान &#039;जन गण मन&#039; की तरह ही कानूनी सुरक्षा देना है. इस कानून के लागू होने … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 19:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>राज्यसभा, में, पास, हुआ, वंदे, मातरम्, बिल, अपमान, करने, पर, साल, तक, की, जेल, का, प्रावधान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>राज्यसभा ने ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' पारित कर द‍िया है. इस संशोधन के तहत ‘वंदे मातरम्' के अपमान से जुड़े प्रावधानों को कानूनी संरक्षण म‍िलेगा. कानून का मकसद 'वंदे मातरम' को भी राष्ट्रगान 'जन गण मन' की तरह ही कानूनी सुरक्षा देना है. इस कानून के लागू होने के बाद अगर कोई जानबूझकर 'वंदे मातरम्' का अपमान करता है या गीत में रुकावट डालता है तो उसे 3 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। </p>
<p>बिल पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि बिल में किया गया संशोधन केवल एक विधायी बदलाव नहीं है. उन्होंने कहा कि यह भारत की आत्मा, राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। </p>
<p>बीजेपी सांसद विनोद तावड़े ने एक्‍स पर पोस्‍ट में कहा, ''वंदे मातरम् का सम्मान, भारत का अभिमान! जिस मंत्र ने, जिस जय घोष ने देश की आजादी के आंदोलन को ऊर्जा दी, प्रेरणा दी, त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया, उस राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् का गर्व के साथ पुण्य स्मरण करना हमारा बहुत बड़ा सौभाग्य है.'' उन्‍होंने कहा,  ''आज राज्यसभा में पारित हुआ 'राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026' भारत के सांस्कृतिक गौरव को पुनर्स्थापित करने का मोदी सरकार के संकल्प का प्रतिबिंब है।'</p>
<p><strong>विपक्ष ने विधेयक पर चर्चा के दौरान हंगामा क्यों किया?</strong><br>
दोपहर के सत्र में जैसे ही राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी दलों ने दिल्ली में NEET पेपर लीक प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की मांग करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। उपसभापति हरिवंश ने प्रदर्शन कर रहे सदस्यों से सदन की मर्यादा और अनुशासन बनाए रखने की अपील की। इसके बावजूद विरोध जारी रहा। हंगामे के बीच उपसभापति ने सूचीबद्ध कार्यवाही जारी रखी और विधेयक पर चर्चा शुरू कराई। बाद में जब केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले विधेयक पर बोल रहे थे, तब विपक्षी दल सदन से वॉकआउट कर गए।</p>
<p><strong>नए कानून में क्या-क्या प्रावधान जोड़े गए हैं?</strong><br>
संशोधन विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत को भी उसी तरह कानूनी सुरक्षा देना है, जैसी सुरक्षा राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान को पहले से प्राप्त है। इसके तहत 'वंदे मातरम्' का अपमान, उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालना या राष्ट्रीय सम्मान के खिलाफ माने जाने वाले कृत्य कानून के दायरे में आएंगे। विधेयक में राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान से जुड़े अपराधों के लिए अधिकतम तीन वर्ष तक की जेल का प्रावधान रखा गया है।</p>
<p><strong>'वंदे मातरम्' को लेकर आगे किस बात पर चर्चा हो सकती है?</strong></p>
<p>'वंदे मातरम्' की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और बाद में इसे उनके उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया गया। आजादी के आंदोलन के दौरान यह राष्ट्रीय चेतना का प्रमुख प्रतीक बना और बाद में इसे भारत का राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिला। नए संशोधन के बाद यह बहस भी तेज हो सकती है कि कानून में 'अपमान' और 'बाधा' की परिभाषा क्या होगी तथा क्या इसमें जानबूझकर व्यवधान पैदा करने और किसी व्यक्ति के राष्ट्रीय गीत के गायन में शामिल न होने के बीच स्पष्ट अंतर किया जाएगा।</p>
<p><strong>लोकसभा में एंटी पेपर लीक ब‍िल पास</strong><br>
उधर, लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल भी पास हो गया है. मॉनसून सत्र में लंबी चर्चा के बाद ध्वनि मत से यह बिल पास हो गया है.  इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष में जमकर नोकझोंक भी हुई. लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के भाषण को लेकर दोनों पक्षों में तनातनी दिखी. स्पीकर ओम बिरला ने एंटी पेपर लीक बिल के पारित होने का ऐलान किया और कल तक (गुरुवार) के लिए  सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। </p>]]> </content:encoded>
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<title>Anti Paper Leak Bill लोकसभा से पास, ध्वनिमत से मिली मंजूरी; अब राज्यसभा में कब होगी चर्चा?</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली भारी हंगामे के बीच लोकसभा में एंटी पेपर लीक (पेपर लीक रोकथाम संशोधन 2026) बिल पास हो गया अब इसे चर्चा के लिए कल राज्यसभा में रखा जाएगा. राज्यसभा में यह बिल आज ही रखा जाना था, लेकिन वंदे मातरम् के अपमान संबंधी बिल पारित होने के बाद सदन की कार्यवाही कल तक … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 18:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Anti, Paper, Leak, Bill, लोकसभा, से, पास, ध्वनिमत, से, मिली, मंजूरी, अब, राज्यसभा, में, कब, होगी, चर्चा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारी हंगामे के बीच लोकसभा में एंटी पेपर लीक (पेपर लीक रोकथाम संशोधन 2026) बिल पास हो गया अब इसे चर्चा के लिए कल राज्यसभा में रखा जाएगा. राज्यसभा में यह बिल आज ही रखा जाना था, लेकिन वंदे मातरम् के अपमान संबंधी बिल पारित होने के बाद सदन की कार्यवाही कल तक के लिए अस्थगित कर दी गई. इस वजह से इस वजह से पेपर लीक रोकथाम संशोधन संबंधित विधेयक 2026 कल राज्यसभा में पेश किया जाएगा। </p>
<p>नीट यूजी पेपर नीक को लेकर देश भर में हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने सोमवार को संशोधन बिल पेश किया था. इस प्रस्तावित कानून का मकसद ‘पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स) एक्ट’ में संशोधन करना है. इसके तहत पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है. जिसमें 10 साल तक की जेल और 50 लाख तक का जुर्माना शामिल है। </p>
<p><strong>एंटी पेपर लीक बिल 2026 में प्रावधान </strong></p>
<p><strong>एंटी पेपर लीक (सार्वजनिक परीक्षा</strong> – अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 में प्रावधान-</p>
<p><strong>कड़ी सजा:</strong> पेपर लीक या गंभीर परीक्षा धोखाधड़ी पर 5 से 10 वर्ष तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माना.</p>
<p><strong>संगठित गिरोहों पर सख्ती:</strong> संगठित तरीके से पेपर लीक करने वाले नेटवर्क के लिए कम से कम 7 वर्ष की जेल और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव.</p>
<p><strong>फास्ट ट्रैक कोर्ट:</strong> सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें बनाने का प्रावधान, जहाँ मामलों की दैनिक सुनवाई हो और चार्जशीट के 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। </p>
<p><strong>समयबद्ध जांच: </strong>जांच 60 दिनों (लगभग 2 महीने) में पूरी करने का लक्ष्य.</p>
<p><strong>नई परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था:</strong> बायोमेट्रिक सत्यापन, परीक्षा केंद्रों का प्री-ऑडिट, प्रश्नपत्र सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और अन्य सुरक्षा मानकों को मजबूत करने का प्रस्ताव। </p>
<p><strong>सिर्फ दो बिल हुए पेश </strong><br>
20 जुलाई को मॉनसून सत्र शुरू होने के बाद से ही विपक्ष NEET पेपर लीक मामले को लेकर सरकार पर दबाव बना रहा है. सत्ता पक्ष और विपक्ष में टकराव के चलते बार-बार सदन की कार्यवाही बाधित हुई. जिससे विधायी कामकाज मुख्य रूप से केवल दो बिल पेश करने तक ही सीमित रह गया है। </p>
<p><strong>उच्च शिक्षा के अवसरों में हुआ 30 परसेंट इजाफा- जितेंद्र सिंह</strong><br>
डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने कहा कि राहुल गांधी ने एक कहानी सुनाई. एक कहानी मैं भी सुनाता हूं 21 जुलाई की. ये हताश होकर प्रधानमंत्री के दरवाजे पर जा बैठे. इनकी हताशा हम समझ सकते हैं. बहुत समय से चाहते हैं कि देश की जनता इनको प्रधानमंत्री बनाए, 7 लोककल्याण मार्ग भेजे. जब इनसे कहा गया कि हट जाइए, इन्होंने कहा कि मुझे उठा लिया जाए. उन्होंने असम आंदोलन का उल्लेख करते हुए कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया. प्रियंका गांधी ने रोचक तथ्य बताया कि 150 से ज्यादा पेपर लीक हुए और 750 करोड़ से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए और कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. शायद वह ये भूल गईं कि 52 एफआईआर दर्ज हुई. वेणुगोपाल ने कहा कि हमने स्कूल बंद कर दिए. वे यह कहते कि उच्च शिक्षा के स्तर पर अवसरों में 30 परसेंट इजाफा हुआ है. हम चाहते तो थे, कि इस बिल पर गंभीर चर्चा हो। </p>
<p><strong>लोकसभा की कार्यवाही शुरू, हंगामे के बीच जितेंद्र सिंह दे रहे जवाब</strong></p>
<p>लोकसभा की कार्यवाही फिर शुरू हो गई है. प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह एंटी पेपर लीक बिल पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे हैं. डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस पर राजनीति करने का प्रयास हुआ, जो ठीक नहीं है. अगर कोई खुद को भी इडियट कहना चाहे, तो नहीं कह सकता. नेता प्रतिपक्ष को सार्वजनिक जीवन और प्रशासनिक प्रणाली के बुनियादी बिंदुओं की जानकारी का भी अभाव है. जब वो यह कहते हैं कि गृह मंत्री ने गोली चलाने का आदेश दिया और ऑथेंटिकेट नहीं कर सके, तो यह आदेश मजिस्ट्रेट देता है. दूसरी बात, गोली चली ही नहीं, तो आदेश का सवाल ही नहीं पैदा होता. फिर ये कहा कि गृह मंत्री के साथ 20 गाड़ियों का काफिला है. इतनी गाड़ियां गृह मंत्री के साथ कभी नहीं चलतीं. गृह मंत्री कभी भी विदेश नहीं गए. तथ्यों के बिना गैर जिम्मेदारी से बात कह देना और फिर निकल जाना, यह किसी जिम्मेदार नेता का व्यवहार हो ही नहीं सकता। </p>
<p>
<strong>दो ही विकल्प हो सकते हैं, सिर्फ इतना ही पूछा- राहुल गांधी</strong><br>
राहुल गांधी ने कहा है कि सिर्फ इतना पूछा है कि दो ही विकल्प हो सकते हैं. पहला विकल्प यह कि गृह मंत्री ने फायरिंग का आदेश दिया या दूसरा विकल्प यह है कि गृह मंत्री को मालूम ही नहीं था कि फायरिंग होने वाली है. पहले मामले में वह दोषी हैं. दूसरे मामले में वह अयोग्य हैं. तीसरा तो कोई विकल्प हो ही नहीं सकता. या तो गृह मंत्री को पता नहीं था कि गोली चल रही है, जिसका मतलब है कि वह अयोग्य हैं या फिर उन्होंने आदेश दिया, जिस स्थिति में वह दोषी हैं. मैं सिर्फ यही कह रहा हूं. यह सीधी-सी लॉजिक है। </p>
<p><strong>प्रियंका गांधी के साथ बैठक के बाद अब शाह से मिल रहे रिजिजू</strong><br>
लोकसभा में गतिरोध के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू लगातार बैठकें कर रहे हैं. गृह मंत्री पर राहुल गांधी के बयान से लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद रिजिजू ने अमित शाह के साथ बैठक की. इसके बाद स्पीकर की मौजूदगी में रिजिजू ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के साथ भी बैठक की. अब एक बार फिर रिजिजू गृह मंत्री शाह से मिलने पहुंचे हैं. किरेन रिजिजू और अमित शाह की इस दूसरे दौर की बैठक में पीयूष गोयल भी मौजूद हैं। </p>
<p><strong>ऑर्गेनाइजर ने लिखा था- राष्ट्रगान एंटरटेनमेंट का विषय, कार्रवाई हो- संजय सिंह</strong><br>
संजय सिंह ने कहा कि वंदे मातरम् का अपमान न हो, इसके लिए वह पार्टी बिल लेकर आ रही है जिससे जुड़े आरएसएस के मुख्यालय पर 52 साल तक तिरंगा नहीं फहराया. आज वो लोग वंदे मातरम् को लेकर सख्त कानून बनाने की बात कर रहे है. एक पत्रिका है ऑर्गेनाइजर, उसने लिखा कि राष्ट्रगान एंटरटेनमेंट का विषय है. उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. हेडगेवार जी ने 1923 में लिखा. संघ की शाखाओं में तिरंगा क्यों नहीं फहराते. वंदे मातरम् हम भी लगाते हैं. इसका मतलब होता है मातृभूमि की वंदना. हम कहते हैं भारत माता की जय. आप भारत माता की बेटियों के सिर तोड़ते हैं दिल्ली में. मातृभूमि की वंदना तब होगी, जब आप बेटे-बेटियों, किसानों-मजदूरों का सम्मान करेंगे. आप सबका शोषण कर रहे हैं, सब पर लाठियां चला रहे हैं. जिन लोगों ने अब तक भारत के राष्ट्रगान, तिरंगे का अपमान किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई का भी बिल लेकर आइए. हम उसका भी समर्थन करेंगे। </p>]]> </content:encoded>
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<title>शिक्षा मंत्री विवाद पर बाबा रामदेव का बयान, बोले&#45; ‘सड़क नहीं, संसद और PM तय करेंगे फैसला’</title>
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<description><![CDATA[ हरिद्वार योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा है कि देश का शिक्षा मंत्री कौन होगा, ये देश के प्रधानमंत्री और देश की संसद तय करेगी. ये सड़कों से तय नहीं होगा. उन्होंने कहा कि ब्राह्मणवाद से आजादी, आरएसएस से आजादी जैसे नारे कैसे ठीक हो सकते हैं. इस देश का संविधान जो अधिकार दलित, शोषित, … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 18:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हरिद्वार</strong></p>
<p>योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा है कि देश का शिक्षा मंत्री कौन होगा, ये देश के प्रधानमंत्री और देश की संसद तय करेगी. ये सड़कों से तय नहीं होगा. उन्होंने कहा कि ब्राह्मणवाद से आजादी, आरएसएस से आजादी जैसे नारे कैसे ठीक हो सकते हैं. इस देश का संविधान जो अधिकार दलित, शोषित, वंचित को देता है वही अधिकार इस देश के ब्राह्मण को भी देता है। </p>
<p>हरिद्वार में पत्रकारों से बात करते हुए योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि देश सड़कों से नहीं चलेगा, देश संसद से चलेगा. रामदेव ने कहा कि भारत का शिक्षा मंत्री कौन होगा और कौन नहीं होगा, ये सड़कों पर तय नहीं होगा, ये देश के प्रधानमंत्री और देश की संसद तय करेगी।</p>
<p>प्रदर्शनों में 'ब्राह्मणवाद से आजादी', 'आरएसएस से आजादी' जैसे नारे लगने पर पर बाबा रामदेव ने कहा कि अगर कोई ब्राह्मण कुल में पैदा हुआ है, यदि आरएसएस से उसने राष्ट्रवाद सीखा है तो इससे किसी के पेट में दर्द नहीं होना चाहिए. इसके बाद उन्होंने देश के नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी का उदाहरण दिया और कहा कि अगर उन्होंने आरएसएस से राष्ट्रवाद सीखा है तो इससे किसी के पेट में दर्द नहीं होना चाहिए। </p>
<p>आगे उन्होंने कहा कि जो अधिकार इस देश का संविधान किसी दलित, शोषित, वंचित को देता है, वहीं अधिकार वो संविधान इस देश में ब्राह्मण को भी देता है. उन्होंने कहा कि कोई भी वाद नहीं होना चाहिए, लेकिन ब्राह्मणों को भी गाली देना वह भी असंवैधानिक है, अलोकतांत्रिक है। </p>
<p><strong>बता दें कि राहुल गांधी ने संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए प्रह्लाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर विरोध जताया था। </strong></p>
<p><strong>प्रियंका गांधी ने भी सदन में इस फैसले पर प्रधानमंत्री को घेरा.</strong><br>
राहुल गांधी ने कहा कि इतने सारे युवा एजुकेशन सिस्टम को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और कई लड़कियां प्रदर्शन कर रही हैं. उन्हें पीटा गया. बीजेपी ने एक ऐसे व्यक्ति को बैठाया है जो बलात्कारियों का रक्षक है? वो सबसे गंदे किस्म का आदमी है. राहुल गांधी का इशारा प्रह्लाद जोशी के पुराने बयान पर है जो उन्होंने गुजरात दंगों की पीड़ित बिलकिस बानो केस में दोषियों की रिहाई के दौरान दिया था। </p>]]> </content:encoded>
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<title>आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप, टेलीग्राम के मालिक के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली    रूस की शीर्ष सुरक्षा एजेंसी फेडरल सिक्योरिटी सर्विस (FSB) ने बुधवार को टेलीग्राम के संस्थापक पावेल दुरोव के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज किया है और उनकी गिरफ्तारी के लिए इंटरनेशनल वारंट जारी किया है. हालांकि, डुरोव या टेलीग्राम की ओर से इस मुद्दे पर … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 16:45:05 +0530</pubDate>
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<media:keywords>आतंकवाद, को, बढ़ावा, देने, का, आरोप, टेलीग्राम, के, मालिक, के, खिलाफ, अरेस्ट, वारंट, जारी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली   </strong></p>
<p>रूस की शीर्ष सुरक्षा एजेंसी फेडरल सिक्योरिटी सर्विस (FSB) ने बुधवार को टेलीग्राम के संस्थापक पावेल दुरोव के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज किया है और उनकी गिरफ्तारी के लिए इंटरनेशनल वारंट जारी किया है. हालांकि, डुरोव या टेलीग्राम की ओर से इस मुद्दे पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। </p>
<p>एफएसबी के अनुसार, ये आरोप टेलीग्राम द्वारा उस सामग्री को नहीं हटाने से जुड़े हैं, जिसका उपयोग यूक्रेनी विशेष सेवाओं तथा आतंकवादी और उग्रवादी संगठनों द्वारा रूस के अंदर तोड़फोड़, आतंकवाद, सामूहिक हत्याओं और साइबर-फ्रॉड के अभियानों की तैयारी तथा समन्वय के लिए किया जा रहा था. पावेल डुरोव या टेलीग्राम की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। </p>
<p>साल 2013 में शुरू हुए एनक्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम के एक अरब से ज्यादा यूजर हैं और रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान दोनों पक्षों द्वारा इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है. रूस ने हाल के सालों में टेलीग्राम के इस्तेमाल को सीमित करने की कई बार कोशिश की है और अपनी सरकार समर्थित 'MAX' मैसेजिंग सर्विस को बढ़ावा दिया है। </p>
<p>रूस में जन्मे पावेल दुरोव के पास अब संयुक्त अरब अमीरात और फ्रांस का पासपोर्ट है. बताया जाता है कि उन्होंने रूसी अधिकारियों के दबाव के कारण 2014 में अपने सोशल प्लेटफॉर्म VKontakte की हिस्सेदारी बेच दी थी। </p>
<p>प्राप्त जानकारी के अनुसार, फ्रेंच अधिकारी डुरोव के खिलाफ इन आरोपों की जांच कर रहे हैं कि टेलीग्राम अपने प्लेटफॉर्म पर आपराधिक गतिविधियों को रोकने में नाकाम रहा और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के अनुरोधों पर उसने पर्याप्त सहयोग नहीं किया. हालांकि, डुरोव ने अपने प्लेटफॉर्म का किसी भी गलत में इस्तेमाल से इनकार करते हैं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>छात्रों पर लाठीचार्ज विवाद: जेपी नड्डा बोले&#45; ‘एक्टिविस्ट बनेंगे तो जेल जाएंगे ही’</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली संसद के मॉनसून सत्र में नीट पेपर लीक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर दोनों सदनों में हंगामा जारी है। इस बीच बुधवार को राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बीच तीखी … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 14:45:07 +0530</pubDate>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>संसद के मॉनसून सत्र में नीट पेपर लीक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर दोनों सदनों में हंगामा जारी है। इस बीच बुधवार को राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बीच तीखी बहस हुई है। खरगे ने जहां जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला, वहीं नड्डा ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह सही थी। उन्होंने यह भी कहा कि जिन छात्रों को एक्टिविज्म करना है, उन्हें इस तरह की सजा के लिए भी तैयार रहना चाहिए।</p>
<p>इससे पहले राज्यसभा में सदन की कार्यवाही शुरू होते ही हंगामा शुरू हो गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के छात्रों की गिरफ्तारी की कोशिश को लेकर सरकार पर निशाना साधा। इससे पहले CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने सदन में दिल्ली में माकपा के कार्यालय में दिल्ली पुलिस के घुसने और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष को गिरफ्तार करने की कोशिश का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा कि सादे कपड़ों में दिल्ली पुलिस की एक टीम 2021 में जेएनयू में हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में आइशी घोष को गिरफ्तार करने के लिए पार्टी कार्यालय में दाखिल हुई। ब्रिटास ने पुलिस कार्रवाई को हाल के छात्र प्रदर्शनों से जोड़ते हुए कहा कि आइशी घोष की एकमात्र गलती यह थी कि उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।</p>
<p>ख<strong>रगे का वार</strong><br>
इसे लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा की आज लोकतंत्र खतरे में है। उन्होंने कहा, “ब्रिटास ने जो मुद्दा उठाया है, ये बहुत ही शर्मनाक है कि अगर हम एक नेशनल पार्टी के ऑफिस में घुसकर जाते हैं, उसको अरेस्ट करने की बात करते हैं तो लोकतंत्र खतरे में नहीं हैं।” खरगे ने आगे कि जो लोग वहां गए थे उन्हें सजा मिलनी चाहिए। खरगे के इस बयान पर राज्यसभा में भारी हंगामा शुरू हो गया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा ने खड़े होकर जवाब दिया।</p>
<p><strong>नड्डा का पलटवार</strong><br>
जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि वे खुद छात्र के रूप में आंदोलनों का हिस्सा रहे हैं और उन्हें भी कई बार अरेस्ट किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी के दौरान उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। नड्डा ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की कार्रवाई का समर्थन भी किया। जेपी नड्डा ने कहा, “ये बहुत ही सामान्य स्थिति है। मैं खुद स्टूडेंट एक्टिविस्ट रहा हूं। इमरजेंसी के दौरान मुझे कई बार से क्लासरूम से उठाकर ले जाया गया। तब कांग्रेस की सरकार थी। तब मैं भी गिरफ्तार हुआ था।” नड्डा ने आगे कहा, “स्टूडेंट एक्टिविस्ट को जेल जाना पड़ता है। और जब कोई कानून हाथ में लेता है तो पुलिस को कार्रवाई करनी ही पड़ती है। इसे सनसनी मत बनाइए। अगर किसी छात्र को एक्टिविज्म करनी है तो ये सब झेलना ही पड़ेगा। मैंने भी बहुत बार झेला है। मैं दो बार गिरफ्तार हुआ था।”</p>
<p><strong>ठप हुआ कामकाज</strong><br>
इसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। हालांकि दोबारा कार्रवाई शुरू होते ही फिर हंगामा हुआ और कार्रवाई को 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। विपक्षी सांसदों ने जेएनयूएसयू की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष की गिरफ्तारी की कोशिश को लेकर हंगामा किया। सांसदों ने नीट पेपर लीक के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग भी दोहराई।</p>]]> </content:encoded>
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<title>उत्तराखंड में बारिश का कहर: भूस्खलन से 140 सड़कें बंद, अगले 2 दिन भारी बारिश का अलर्ट</title>
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<description><![CDATA[  देहरादून उत्तराखंड में लगातार भारी बारिश और भूस्खलन से तीन नेशनल हाईवे समेत 140 से अधिक सड़कें बंद हो गईं। बिगड़ते हालात और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रा को दो दिनों (28-29 जुलाई) के लिए रोक दिया। उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में सोमवार देर रात से ही मूसलाधार … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 13:45:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>उत्तराखंड, में, बारिश, का, कहर:, भूस्खलन, से, 140, सड़कें, बंद, अगले, दिन, भारी, बारिश, का, अलर्ट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> देहरादून</strong></p>
<p>उत्तराखंड में लगातार भारी बारिश और भूस्खलन से तीन नेशनल हाईवे समेत 140 से अधिक सड़कें बंद हो गईं। बिगड़ते हालात और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रा को दो दिनों (28-29 जुलाई) के लिए रोक दिया। उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में सोमवार देर रात से ही मूसलाधार बारिश शुरू हो गई थी। मंगलवार सुबह होते-होते सड़कें बाधित होने और भूस्खलन की खबरें आने लगीं। मौसम विभाग ने 29 और 30 जुलाई के लिए भी राज्य में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।</p>
<p><strong>दून में पुल की एप्रोच रोड बही, मलबे से रेस्तरां ध्वस्त</strong><br>
देहरादून में नंदा की चौकी के पास पुल की एप्रोच रोड पानी के तेज बहाव में बह गई। हालांकि शाम को क्षतिग्रस्त रोड को सही कर आवाजाही शुरू करा दी गई। वहीं मसूरी में पहाड़ी से मलबा गिरने के कारण एक रेस्तरां ध्वस्त हो गया।</p>
<p><strong>सभी महकमे चौबीस घंटे अलर्ट मोड पर रहें: मुख्यमंत्री</strong><br>
उत्तराखंड में वर्षा और आपदा की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी विभागों को चौबीस घंटे सातों दिन अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने मंगलवार तड़के आपदा प्रबंधन सचिव से राज्य की स्थिति का जायजा लिया। अफसरों को स्पष्ट किया कि राहत एवं बचाव कार्यों में एक क्षण की देरी नहीं हो।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने आपात स्थितियों से निपटने के लिए हेली सेवाओं को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि दुर्गम और प्रभावित क्षेत्रों तक तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। उन्होंने राज्य में भारी बारिश के कारण बाधित सड़क मार्गों को जेसीबी और पोकलेन जैसी मशीनों के जरिए प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र खोलने को कहा है। साथ ही, धामी ने जिलाधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों को स्वयं धरातल पर उतरकर स्थिति की निगरानी करने के निर्देश दिए। उधर, आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक और मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने भी सचिव से वर्षा से उत्पन्न स्थिति का अपडेट लिया।</p>
<p><strong>अगले दो दिन भारी</strong><br>
मौसम निदेशक डॉ. सीएस तोमर ने बताया कि अगले दो दिन प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ और सक्रिय मानसूनी सिस्टम के प्रभाव से भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। बीते 24 घंटे में देहरादून जिले में कुल 95.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। मालदेवता में 233 मिमी वर्षा हुई। हाथीबड़कला में 194.5 मिमी, देहरादून शहर में 107 मिमी, मोहकमपुर में 97.5 मिमी और रायवाला में 63.5 मिमी बारिश हुई। दून का अधिकतम तापमान सोमवार के 31.7 डिग्री सेल्सियस से करीब चार डिग्री गिरकर मंगलवार को 27.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।</p>
<p><strong>केदारनाथ हाईवे ठप रहा, यमुनोत्री पैदल मार्ग धंसा</strong><br>
केदारनाथ हाईवे पर जगह-जगह बोल्डर आने से यातायात ठप रहा। यमुनोत्री पैदल मार्ग पर राम मंदिर के पास नदी के बढ़े जलस्तर के कारण लगभग 25 से 30 मीटर लंबा रास्ता दो से 2.5 मीटर तक धंस गया है। रुद्रप्रयाग में तिलवाड़ा-सुमाड़ी पुल के नीचे लकड़ी इकट्ठा करने गई तीन महिलाएं नदी का जलस्तर बढ़ने से फंस गईं। कड़ी मशक्कत के बाद महिलाओं को निकाला गया।</p>
<p><strong>बदरीनाथ हाईवे कंचन नाला के पास बाधित</strong><br>
गोपेश्वर। चमोली जिले में बदरीनाथ हाईवे सोमवार रात्रि बारिश के कारण बदरीनाथ के पास कंचन नाला उफान पर आने से मंगलवार को भी बाधित रहा। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने बताया कि इस हाईवे को सुचारु कराया जा रहा है। भारी वर्षा के कारण और दो दिनों तक चारधाम यात्रा स्थगित करने का निर्णय लिया गया है‌। जिलेभर में बारिश से 21 सम्पर्क मार्ग अवरुद्ध हुए हैं।</p>
<p><strong>यमुनोत्री पैदल मार्ग का तीस मीटर हिस्सा बारिश से धंसा</strong><br>
बड़कोट,संवाददाता। जिले में बारिश के चलते यमुनोत्री यात्रा पर मौसम की मार जारी है। जानकीचट्टी-यमुनोत्री पैदल मार्ग पर राम मंदिर के पास नदी का जलस्तर बढ़ने से लगभग 25 से 30 मीटर पैदल मार्ग 2 से 2.5 मीटर तक धंस गया है।</p>
<p>प्रतिकूल मौसम को देख यमुनोत्री की यात्रा फिलहाल स्थगित कर दी गई है। लाेनिवि बड़कोट के अनुसार, यहां शीघ्र वैकल्पिक पैदल मार्ग बनाया जाएगा। उधर, केदारनाथ हाईवे पर कई स्थानों पर मलबा आने से आवाजाही दिनभर बंद रही। कुंड और मुनकटिया में बोल्डर को चार घंटे के बाद हटाया जा सका।</p>]]> </content:encoded>
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<title>ITR Filing Deadline Changed: 31 जुलाई नहीं है आखिरी तारीख, जानें आपके लिए क्या है नई डेडलाइन</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख को लेकर कई टैक्सपेयर्स के बीच भ्रम बना हुआ है। कुछ टैक्सपेयर्स को लगता है कि वे 31 जुलाई की जगह 31 अगस्त तक आईटीआर दाखिल कर सकते हैं। लेकिन ऐसा हर किसी के लिए संभव नहीं है। आपकी आईटीआर फाइलिंग की आखिरी तारीख … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 13:45:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ITR, Filing, Deadline, Changed:, जुलाई, नहीं, है, आखिरी, तारीख, जानें, आपके, लिए, क्या, है, नई, डेडलाइन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p> इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख को लेकर कई टैक्सपेयर्स के बीच भ्रम बना हुआ है। कुछ टैक्सपेयर्स को लगता है कि वे 31 जुलाई की जगह 31 अगस्त तक आईटीआर दाखिल कर सकते हैं। लेकिन ऐसा हर किसी के लिए संभव नहीं है। आपकी आईटीआर फाइलिंग की आखिरी तारीख इस बात पर निर्भर करती है कि आपकी इनकम का सोर्स क्या है और आप कौन-सा आईटीआर फॉर्म भरते हैं।</p>
<p><strong>31 जुलाई है आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख?</strong><br>
अगर आप नौकरीपेशा हैं, पेंशन पाते हैं या आपकी इनकम सिर्फ हाउस प्रॉपर्टी, कैपिटल गेन या अन्य सोर्स से होती है और आपका बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम नहीं है। तो आपके लिए आईटीआर दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 ही है। ऐसे <strong>टैक्सपेयर्स आमतौर पर आईटीआर-1 या आईटीआर-2 फॉर्म भरते हैं और उन्हें 31 अगस्त तक का समय नहीं मिलता।</strong></p>
<p><strong>31 अगस्त है आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख?</strong><br>
वहीं, 31 अगस्त 2026 की डेडलाइन केवल उन लोगों के लिए है जो आईटीआर-3 या आईटीआर-4 फॉर्म भरते हैं, जिनकी इनकम बिजनेस या प्रोफेशन से होती है और जिन्हें टैक्स ऑडिट कराने की जरूरत नहीं है। यानी सिर्फ ज्यादा समय पाने के लिए कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से आईटीआर-3 या आईटीआर-4 नहीं चुन सकता।</p>
<p><strong>क्या बढ़ी है आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख?</strong><br>
फिलहाल केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने 31 जुलाई की डेडलाइन बढ़ाने का कोई ऐलान नहीं किया है। इसलिए आईटीआर-1 और आईटीआर-2 भरने वाले टैक्सपेयर्स को आखिरी दिन का इंतजार नहीं करना चाहिए।</p>
<p><strong>नहीं भरें गलत आईटीआर</strong><br>
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि गलत आईटीआर फॉर्म भरना महंगा पड़ सकता है। अगर आपकी इनकम के हिसाब से फॉर्म सही नहीं हुआ, तो इनकम टैक्स विभाग आपकी रिटर्न को डिफेक्टिव घोषित कर सकता है। इसके बाद आपको तय समय के भीतर सही फॉर्म में दोबारा रिटर्न फाइल करनी होगी। अगर यह प्रोसेस तय समय सीमा के बाद पूरी होता है, तो आपकी रिटर्न को बिलेटेड रिटर्न माना जा सकता है।</p>
<p>इनकम टैक्स विभाग ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर टैक्सपेयर्स से जल्द आईटीआर दाखिल करने की अपील की है। विभाग का कहना है कि कल कर लेंगे वाली सोच अक्सर आखिरी दिन परेशानी का कारण बन जाती है। इसलिए सभी जरूरी डॉक्यूमेंट का मिलान करके समय रहते आईटीआर फाइल कर देना बेहतर है।</p>
<p><strong>नहीं करें ऐसी गलती</strong><br>
टैक्स एक्सपर्ट के मुताबिक आईटीआर भरते समय कुछ सामान्य गलतियों से बचना भी जरूरी है। इनमें गलत आईटीआर फॉर्म चुनना, सिर्फ फॉर्म 16 पर भरोसा करना, AIS और फॉर्म 26AS का मिलान नहीं करना, फॉरेन एसेट्स या क्रिप्टो निवेश की जानकारी छिपाना, गलत टैक्स रिजीम चुनना और रिटर्न दाखिल करने के बाद 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन नहीं करना शामिल है।</p>
<p>समय पर आईटीआर दाखिल करने से लेट फीस और ब्याज से बचाव होता है। साथ ही जरूरत पड़ने पर कैपिटल लॉस या बिजनेस लॉस को आगे ले जाने का फायदा मिलता है। इसके अलावा टैक्स रिफंड जल्दी मिलने, लोन या वीजा अप्लाई करने में बेहतर टैक्स रिकॉर्ड दिखाने और भविष्य में टैक्स नोटिस की संभावना कम करने में भी समय पर आईटीआर फाइल करना फायदेमंद माना जाता है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>Dehradun SIR: 5 लाख से ज्यादा वोटर्स को गड़बड़ी पर नोटिस, जानिए अब क्या हैं आपके विकल्प</title>
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<description><![CDATA[ देहरादून मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान(एसआईआर)के तहत देहरादून जिले में 5.47 लाख मतदाताओं को घर-घर जाकर व्यक्तिगत नोटिस दिए जाएंगे। यह नोटिस उन मतदाताओं को जारी किए जा रहे हैं, जिनका विवरण वर्ष 2003 और 2026 की मतदाता सूची से मेल नहीं खा रहा है या जिनकी जानकारी अपूर्ण पाई गई है। जिलाधिकारी … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 13:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Dehradun, SIR:, लाख, से, ज्यादा, वोटर्स, को, गड़बड़ी, पर, नोटिस, जानिए, अब, क्या, हैं, आपके, विकल्प</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>देहरादून</strong></p>
<p>मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान(एसआईआर)के तहत देहरादून जिले में 5.47 लाख मतदाताओं को घर-घर जाकर व्यक्तिगत नोटिस दिए जाएंगे। यह नोटिस उन मतदाताओं को जारी किए जा रहे हैं, जिनका विवरण वर्ष 2003 और 2026 की मतदाता सूची से मेल नहीं खा रहा है या जिनकी जानकारी अपूर्ण पाई गई है।</p>
<p>जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने मंगलवार को अजबपुरकलां पहुंचकर नोटिस वितरण अभियान का जायजा लिया। उन्होंने स्थानीय निवासी अरविंद नेगी के घर जाकर देखा कि बीएलओ किस तरह नाम में अंतर की जानकारी दे रहे हैं और मतदाताओं से कौन-कौन से दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। डीएम ने पूरी प्रक्रिया की जांच करते हुए अधिकारियों को इसे आसान और बिना किसी गलती के पूरा करने के निर्देश दिए।</p>
<p><strong>गलती सुधारने का दूसरा मौका</strong><br>
जिलाधिकारी ने कहा कि यह अभियान मतदाताओं को अपनी जानकारी ठीक कराने का मौका देता है। उन्होंने सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिए कि बीएलओ को काम करने की स्पष्ट जानकारी देने के लिए आसान भाषा में चेकलिस्ट और प्रक्रिया तैयार कर उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। 14 जुलाई को जारी प्रारूप मतदाता सूची के अनुसार जिले में अब तक 11,90,805 मतदाताओं की जानकारी का मिलान पूरा हो चुका है।</p>
<p><strong>घर-घर जाकर नोटिस</strong><br>
जिलाधिकारी आशीष चौहान ने कहा कि बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को नोटिस देंगे और इसकी फोटो आयोग के ऐप पर अपलोड करेंगे। इससे पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जा सकेगी और पारदर्शिता बनी रहेगी।</p>
<p>जिलाधिकारी ने सभी निर्वाचन अधिकारियों को तय समय में पूरी सावधानी के साथ अभियान पूरा करने के निर्देश दिए। इस दौरान सेक्टर अधिकारी डॉ. महेश कुमार, एईआरओ अपर्णा बहुगुणा, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र देवली सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।</p>]]> </content:encoded>
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<title>गुरु पूर्णिमा पर साईं बाबा को 1 करोड़ का स्वर्ण मुकुट भेंट, हीरे&#45;रत्नों से जड़ा अनोखा उपहार</title>
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<description><![CDATA[ शिरडी देशभर में आज आषाढ़ी गुरु पूर्णिमा धूमधाम से मनाई जा रही है. गुरु पूर्णिमा का दिन गुरु को समर्पित है. लोग अपने गुरुओं की वंदना और पूजा अर्चना कर रहे हैं. इस खास मौके पर एक भक्त ने शिरडी साईं बाबा को एक ऐसा उपहार समर्पित किया, जिसे देखने वाले भी हैरान रह गए. … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 13:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>गुरु, पूर्णिमा, पर, साईं, बाबा, को, करोड़, का, स्वर्ण, मुकुट, भेंट, हीरे-रत्नों, से, जड़ा, अनोखा, उपहार</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिरडी</strong></p>
<p>देशभर में आज आषाढ़ी गुरु पूर्णिमा धूमधाम से मनाई जा रही है. गुरु पूर्णिमा का दिन गुरु को समर्पित है. लोग अपने गुरुओं की वंदना और पूजा अर्चना कर रहे हैं. इस खास मौके पर एक भक्त ने शिरडी साईं बाबा को एक ऐसा उपहार समर्पित किया, जिसे देखने वाले भी हैरान रह गए. इस चमकदार तोहफे पर से जैसे ही पर्पल रंग का कपड़ा हटाया गया तो वहां मौजूद लोगों के चेहरे की खुशी देखते ही बन रही थी। </p>
<p><strong>शिरडी साईं बाबा को चढ़ाया 1 करोड़ से ज्यादा का मुकुट</strong><br>
दरअसल गुरु पूर्णिमा के मौके पर शिरडी के साईं बाबा मंदिर में भक्ति का अलग ही नजारा देखने को मिला, जब एक भक्त ने 1 करोड़ से ज्यादा कीमत का शानदार सोने का मुकुट गुरु-दक्षिणा के तौर पर भेंट किया. साईं बाबा को ये मुकुट भेंट किया है आंध्र प्रदेश के वेल्लोर के रहने वाले श्रीनिवास राव ने. इस सोने के चमकते खूबसूरत मुकुट का वजन 642 ग्राम है. इसकी कीमत करीब 1.03 करोड़ बताई जा रही है। </p>
<p><strong>सोने के मुकुट पर रत्न और डायमंड्स जड़े हैं</strong><br>
सोने के मुकुट पर नवग्रहों की बारीक नक्काशी की गई है. इसे अमेरिकन डायमंड्स से सजाया गया है, जिससे ये और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा है. गुरु पूर्णिमा उत्सव के पहले दिन साई बाबा को की गई यह भव्य भेंट भक्तों में चर्चा का विषय बनी हुई है. मंदिर प्रशासन के मुताबिक, गुरु पूर्णिमा उत्सव के मुख्य दिन साईं बाबा की प्रतिमा को यही सोने का मुकुट पहनाया जाएगा। </p>
<p><strong>गुरु पूर्णिमा पर भक्त की अनोखी श्रद्धा</strong><br>
ये पहली बार नहीं है जब साई बाबा को इतनी कीमती भेंट किसी ने समर्पित की है. पहले भी लाखों-करोड़ों की भेंट भक्त साई बाबा को चढ़ावे में चढ़ाते रहे हैं. गुरु पूर्णिमा के खास मौके पर सोने का ये खास मुकुट चर्चा में बना हुआ है. ये एक भक्त की अपने गुरु के प्रति श्रद्धा को दिखाता है. ये महज एक सोने का मुकुट नहीं बल्कि एक भक्त की अपने ईश्वर के प्रति आस्था है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>NEET पेपर लीक केस: CBI की बड़ी कार्रवाई, NTA के 3 एक्सपर्ट समेत 13 आरोपियों पर चार्जशीट</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली NEET UG परीक्षा पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने बड़ी कार्रवाई की है. CBI ने मंगलवार को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है. यह चार्जशीट CBI की आर्थिक अपराध शाखा की तरफ से दाखिल की गई है. … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 12:45:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>NEET, पेपर, लीक, केस:, CBI, की, बड़ी, कार्रवाई, NTA, के, एक्सपर्ट, समेत, आरोपियों, पर, चार्जशीट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>NEET UG परीक्षा पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने बड़ी कार्रवाई की है. CBI ने मंगलवार को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है. यह चार्जशीट CBI की आर्थिक अपराध शाखा की तरफ से दाखिल की गई है. CBI सूत्रों के मुताबिक, चार्जशीट को आगे की सुनवाई के लिए पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा. मामले में गिरफ्तार सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। </p>
<p>CBI ने जिन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, उनमें यश यादव, मंगलिलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रह्लाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे और मनीषा संजय हवालदार शामिल हैं. CBI ने अपनी चार्जशीट में 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 अहम सबूतों को शामिल किया है. जांच एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच के दौरान पेपर लीक की पूरी कड़ी का पता लगाया गया है। </p>
<p><strong>चार्जशीट में इन 13 आरोपियों के नाम हैं…</strong></p>
<p><strong>1)  मनीषा मंधारे – NTA बायोलॉजी विशेषज्ञ</strong></p>
<p><strong>2)  प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी – NTA केमिस्ट्री विशेषज्ञ</strong></p>
<p><strong>3)  मनीषा संजय हवालदार – NTA फिजिक्स विशेषज्ञ</strong></p>
<p><strong>4)  मनीषा संजय वाघमारे – बिचौलिया</strong></p>
<p><strong>5)  धनंजय निवृत्ति लोखंडे – बिचौलिया</strong></p>
<p><strong>6)  शुभम माधुकर खैरनार – बिचौलिया</strong></p>
<p><strong>7)  यश यादव – बिचौलिया</strong></p>
<p><strong>8)  मंगलिलाल बिवाल – बिचौलिया</strong></p>
<p><strong>9)  विकास बिवाल – बिचौलिया</strong></p>
<p><strong>10)  दिनेश बिवाल – बिचौलिया</strong></p>
<p><strong>11)  डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे – बिचौलिया</strong></p>
<p><strong>12)  शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर – RCC कोचिंग इंस्टीट्यूट, लातूर के मालिक</strong></p>
<p><strong>13)  तेजस हर्षदकुमार शाह – APMA कोचिंग इंस्टीट्यूट, पुणे में फिजिक्स फैकल्टी और COO</strong></p>
<p><strong>चार्जशीट में शामिल किए गए 360 गवाह और 43 अहम सबूत</strong><br>
एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि लीक हुए प्रश्नपत्र के स्रोत और उसे अभ्यर्थियों तक पहुंचाने वाले लोगों की पहचान की गई है. CBI के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, सबूत मिटाने, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और पब्लिक एग्जामिनेशन अधिनियम, 2024 के तहत कार्रवाई की गई है. इस मामले में BNS 2023 की धारा 315(5), 318(4), 61(2), 238 और 303(2) के तहत केस दर्ज किया गया है. इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(2) और 13(1)(a) के तहत भी कार्रवाई की गई है। </p>
<p>वहीं पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2024 की धारा 10 के साथ धारा 3, 4, 5 और 11 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है. 12 मई को दर्ज हुई थी FIR CBI के मुताबिक, यह मामला 3 मई 2026 को आयोजित NEET UG परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद सामने आया था. इसके बाद केंद्र सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने 12 मई 2026 को CBI को शिकायत दी थी. इसी शिकायत के आधार पर उसी दिन एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई. जांच के लिए CBI ने 72 अधिकारियों और 8 साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की कई टीमें बनाई थीं। </p>
<p><strong>आरोपियों के बैंक खाते और डीमैट खाते किए गए फ्रीज</strong><br>
एजेंसी ने महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में 92 जगहों पर छापेमारी की. छापेमारी के दौरान CBI ने मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज और अन्य अहम सबूत बरामद किए. इन सभी की फॉरेंसिक जांच कराई गई. 13 लोगों की हुई गिरफ्तारी CBI के मुताबिक, इस मामले में पहली गिरफ्तारी 13 मई 2026 को हुई थी. अब तक कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA से जुड़े केमिस्ट्री, बायोलॉजी और फिजिक्स के तीन विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं। </p>
<p>जांच में कई बिचौलियों की पहचान हुई है. आरोप है कि इन लोगों ने लीक प्रश्नपत्र हासिल कर आगे अभ्यर्थियों तक पहुंचाया. CBI ने दो कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोगों को भी गिरफ्तार किया है. इन पर लीक पेपर खरीदने और उसका इस्तेमाल करने का आरोप है. डिजिटल सबूतों की हुई जांच CBI ने जांच के दौरान आरोपियों के बैंक खातों, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाते को भी फ्रीज किया है. एजेंसी को डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की राय और विषय विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिली है. CBI का कहना है कि इन रिपोर्टों से यह पुष्टि हुई है कि परीक्षा से पहले ही लीक हुए प्रश्नों का प्रसार किया गया था। </p>
<p><strong>फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे भी हो सकती है कार्रवाई</strong><br>
CBI ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है. एजेंसी का कहना है कि फॉरेंसिक विश्लेषण और सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है. चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले की सुनवाई विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी. अदालत में पेश किए गए सबूतों और गवाहों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। </p>]]> </content:encoded>
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<title>आखिर फिर आंदोलन की राह पर क्यों है कॉकरोच जनता पार्टी? जानिए नई चेतावनी की वजह</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन को खत्म हुए अभी कुछ ही दिन हुए हैं, लेकिन एक बार फिर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई है. कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर पुलिस छात्रों को लगातार इसी तरह परेशान करती रही … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 12:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>आखिर, फिर, आंदोलन, की, राह, पर, क्यों, है, कॉकरोच, जनता, पार्टी, जानिए, नई, चेतावनी, की, वजह</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन को खत्म हुए अभी कुछ ही दिन हुए हैं, लेकिन एक बार फिर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई है. कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर पुलिस छात्रों को लगातार इसी तरह परेशान करती रही तो कॉकरोच जनता पार्टी एक बार फिर अपना शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करेगी। </p>
<p><strong>सीजेपी ने सरकार से क्या अपील की?</strong><br>
उन्होंने सरकार से अपील की है कि आंदोलनकारी छात्रों को किसी भी कीमत पर टारगेट न किया जाए. उनका उत्पीड़न तुरंत बंद होना चाहिए. जानकारी के लिए बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी और सरकार के बीच हुई तीसरी वार्ता में कहा गया था कि केंद्र सरकार लिखित में आश्वासन देगी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी तरह का मामला दर्ज नहीं होगा और उन्हें भविष्य में भी परेशान नहीं किया जाएगा. लेकिन सीजेपी का दावा है कि अब तक उन्हें कोई लिखित आश्वासन नहीं मिला है और इसके लिए तय समय-सीमा भी समाप्त हो चुकी है. ऐसे में, अगर सरकार उनकी मांगें नहीं मानती है तो एक बार फिर आंदोलन शुरू किया जा सकता है। </p>
<p><strong>क्या किसी तरह की वादाखिलाफी हुई?</strong><br>
सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष ने भी इस मामले पर खुलकर बयान दिया है. उनका कहना है कि केंद्र सरकार को समय पर अपने सभी वादे पूरे करने होंगे.सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ भविष्य में कोई कार्रवाई न हो.उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए तो देश की सड़कें एक बार फिर विरोध प्रदर्शनों से गूंज उठेंगी। </p>
<p>सीजेपी के सौरव दास ने इस बात पर भी जोर दिया है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एक्शन जारी रखा जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो यह सरकार के आश्वान के खिलाफ होगा </p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?</strong><br>
जानकारी के लिए बता दें कि दोबारा विरोध प्रदर्शन की चेतावनी के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 18 साल से कम किसी भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि 18 साल से कम उम्र के उन लोगों को तुरंत रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में कई लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर भी वापस ले ली गई हैं। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>चुनाव से पहले BJP का बड़ा दांव! EWS की आय सीमा बढ़ाने की तैयारी, लाखों परिवारों को मिल सकता है फायदा</title>
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<description><![CDATA[ अहमदाबाद  गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की भूपेंद्र पटेल सरकार सामान्य वर्ग को साधने के लिए एक बड़ा राजनीतिक दांव चलने जा रही है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के दायरे को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार अधिकतम आय सीमा को 6 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 10 लाख रुपये सालाना करने की … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अहमदाबाद </strong></p>
<p>गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की भूपेंद्र पटेल सरकार सामान्य वर्ग को साधने के लिए एक बड़ा राजनीतिक दांव चलने जा रही है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के दायरे को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार अधिकतम आय सीमा को 6 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 10 लाख रुपये सालाना करने की तैयारी में है। इस फैसले से उन लाखों युवाओं को सीधा फायदा मिलेगा जो अब तक मामूली आय अंतर के कारण आरक्षण और सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाते थे।</p>
<p><strong>6 लाख से बढ़कर 10 लाख होगी आय सीमा</strong><br>
न्याय और अधिकारिता विभाग के अंतर्गत आने वाले गुजरात अनरिजर्व्ड एजुकेशनल एंड इकनॉमिकल डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन (GUEEDC) ने इस अहम बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक एक दशक पहले जब इस कॉर्पोरेशन का गठन हुआ था तब आय सीमा तय की गई थी। अब महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए इसे 6 लाख से 10 लाख तक ले जाने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है।</p>
<p>इस कदम का सीधा असर आगामी विधानसभा चुनावों पर पड़ना तय माना जा रहा है। आय सीमा 10 लाख होने से मध्यवर्गीय सवर्ण परिवारों का एक बहुत बड़ा हिस्सा EWS कोटे के तहत मिलने वाली शिक्षा, रोजगार और आर्थिक मदद का हकदार बन जाएगा। विभाग यह आकलन कर रहा है कि इस बदलाव से कितने लाख नए युवा सीधे तौर पर सिस्टम से जुड़ेंगे।</p>
<p><strong>जनरल कैटेगरी को मिलेगा SC-ST जैसा फायदा</strong><br>
मौजूदा समय में GUEEDC की ज्यादातर योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आवेदक के परिवार की सालाना आय 6 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। हालांकि कुछ खास योजनाओं में यह सीमा 8 लाख रुपये तक है। लेकिन अब इसे सभी योजनाओं के लिए एक समान करते हुए अधिकतम सीमा 10 लाख करने की बात चल रही है।</p>
<p>अधिकारियों का कहना है कि सरकार का मकसद सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बिल्कुल वही सुविधाएं और सुरक्षा देना है जो वर्तमान में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को मिल रही हैं।</p>
<p><strong>बिना गारंटी मिलेगा लोन-EWS वर्ग के युवाओं के लिए एक और बड़ी खुशखबरी</strong><br>
आय सीमा बढ़ाने के अलावा एक और बड़ा फैसला लोन से जुड़ा है। अब तक GUEEDC द्वारा दिए जाने वाले किसी भी एजुकेशन या बिजनेस लोन के लिए कोई न कोई संपत्ति गिरवी रखनी पड़ती थी। जबकि SC/ST वर्ग के लाभार्थियों के लिए कई सरकारी लोन योजनाओं में किसी तरह की गारंटी की जरूरत नहीं होती।</p>
<p>सरकार अब EWS वर्ग के युवाओं के लिए भी कोलैटरल फ्री (बिना गिरवी) लोन योजना शुरू करने जा रही है। इससे उन छात्रों और छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी जो सिर्फ इसलिए लोन नहीं ले पाते थे क्योंकि उनके पास गारंटी के तौर पर बैंक में गिरवी रखने के लिए कोई संपत्ति नहीं होती थी।</p>
<p><strong>कुछ ही दिनों में 10 लाख वाली घोषणा संभव</strong><br>
इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा कि विभाग यह जानने की कोशिश कर रहा है अनारक्षित वर्ग के युवाओं के लिए इस सीमा को किस हद तक बढ़ाया जा सकता है। आमदनी की अधिकतम सीमा को 10 लाख रुपये सालाना करने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले कुछ सप्ताह में इसकी घोषणा हो सकती है।</p>
<p>वर्तमान में GUEEDC की अधिकतर योजनाओं में आय सीमा 6 लाख रुपये निर्धारित है, जबकि कुछमें 8 लाख रुपये सालाना आमदनी तक कमाने वाले आवेदकों को भी अनुमति दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि इस बदलाव का मकसद सामान्य वर्ग के लोगों को भी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के समान लाभ देना है।</p>
<p><strong>EWS के लिए लोन में भी एक बड़ा बदलाव संभव</strong><br>
सरकार GUEEDC के तहत बिना किसी बंधक के लोन देने की शुरुआत करने पर भी विचार कर रही है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों के लिए कई लोन योजनाओं में किसी भी संपत्ति को बंधक रखने की आवश्यकता नहीं होती है, वहीं GUEEDC द्वारा दिए जाने वाले किसी भी ऋण में बिना बंधक लोन की सुविधा नहीं है।</p>
<p><strong>क्या आपके पास EWS सर्टिफिकेट है?</strong><br>
अगर आपकी पारिवारिक आय 8 से 10 लाख के बीच है और आप अब तक जनरल कैटेगरी में आते थे, तो अपने जरूरी दस्तावेज तैयार रखना शुरू कर दें। सरकार की आधिकारिक घोषणा के तुरंत बाद नए आय प्रमाण पत्र और EWS सर्टिफिकेट बनने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।</p>
<p><strong>वर्तमान नियम क्या हैं?</strong><br>
अभी तक गुजरात में GUEEDC के तहत EWS योजनाओं का लाभ लेने के लिए पारिवारिक आय 6 लाख रुपये (कुछ मामलों में 8 लाख) से कम होनी चाहिए।</p>
<p><strong>नया नियम क्या होगा?</strong><br>
आय की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये सालाना कर दी जाएगी। साथ ही लोन के लिए किसी प्रॉपर्टी की गारंटी नहीं देनी होगी।</p>
<p><strong>घोषणा कब तक होगी?</strong><br>
सूत्रों के अनुसार न्याय और अधिकारिता विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है और अगले कुछ हफ्तों के भीतर इसकी आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। </p>]]> </content:encoded>
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<item>
<title>RBI का बड़ा फैसला: 10 और 20 रुपये के 100&#45;100 करोड़ प्लास्टिक नोट छापे जाएंगे, फुटकर की किल्लत होगी दूर</title>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 10:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>देश में जल्‍द ही प्‍लास्टिक के नोट चलेंगे. इसकी शुरुआत 10 और 20 रुपये के नोटों से होगी. ये खबर तो हम आपको पहले भी बता ही चुके हैं कि RBI पॉलिमर करेंसी नोटों के लिए ग्‍लोबल टेंडर भी निकाल चुका है. अब इस खबर पर ताजा अपडेट दिया है, सरकार ने. लोकसभा में केंद्र सरकार ने बताया कि 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलिमर करेंसी नोटों के फील्‍ड ट्रायल के लिए RBI के प्रस्‍ताव को वित्त मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है. वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में ये जानकारी दी। </p>
<p><strong>पहले 100-100 करोड़ नोट छापे जाएंगे </strong><br>
पायलट प्रोजेक्‍ट के तहत 10 और 20 रुपये के 200 करोड़ नोट छापे जाएंगे. सरकार ने संसद में बताया कि RBI फील्ड ट्रायल के तहत 10 रुपये और 20 रुपये के रुपए के एक-एक अरब यानी 100-100 करोड़ पॉलिमर नोट जारी करेगा. इन नोटों को परीक्षण के आधार पर बाजार में उतारा जाएगा ताकि ये आकलन किया जा सके क‍ि भारतीय परिवेश में प्रैक्टिकली यै कितना एक्‍सेप्‍टेबल और व्‍यवहारिक है. यदि ट्रायल सफल रहता है, तब व्‍यापक स्तर पर पॉलिमर नोट जारी किए जाने पर विचार किया जाएगा। </p>
<p><strong>10-20 रुपये के ही पॉलिमर नोट क्‍यों?  </strong><br>
केंद्रीय बैंक का कहना है कि कम मूल्यवर्ग यानी 10-20 रुपये के नोट जल्दी खराब हो जाते हैं, जिसके कारण उन्हें बार-बार छापना और नष्ट करना पड़ता है. पॉलिमर नोट इस समस्या को कम कर सकते हैं और लंबे समय में नोटों की छपाई और रिप्‍लेसमेंट पर होने वाला खर्च भी घटा सकते हैं। </p>
<p>इसके अलावा, पॉलिमर नोटों में पारदर्शी 'सी-थ्रू' विंडो और विशेष सुरक्षा धागे (सिक्योरिटी थ्रेड) जैसे उन्नत सुरक्षा फीचर शामिल किए जा सकते हैं, जिससे नकली नोटों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। </p>
<p>RBI ने कहा कि पॉलिमर नोट पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं. अंतरराष्ट्रीय अनुभव के आधार पर केंद्रीय बैंक का मानना है कि इनकी उम्र अधिक होती है, जिससे अधिक नकदी वाले देशों के लिए यह बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। </p>
<p><strong>क्‍या कागज वाले नोट बंद हो जाएंगे? </strong><br>
सरकार ने हालांकि स्पष्ट किया कि पॉलिमर नोटों पर इस फैसले का मतलब कागज के नोटों को बंद करना नहीं है. पॉलिमर नोट मौजूदा कागजी नोटों के साथ ही चलन में रहेंगे और फिलहाल कागज-आधारित बैंक नोटों को पूरी तरह पॉलिमर नोटों से बदलने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।  </p>
<p>डिजिटल पेमेंट सिस्‍टम यानी UPI, डेबिट कार्ड, ऑनलाइन ट्रांसफर जैसे तरीकों पर संभावित प्रभाव को लेकर RBI ने कहा है कि अभी इस बारे में कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी. पॉलिमर नोट नियमित रूप से चलन में आने के बाद ही इसका आकलन किया जा सकेगा. केंद्रीय बैंक का मानना है कि कैश करेंसी और डिजिटल पेमेंट दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और भविष्य में भी दोनों माध्यम साथ-साथ चलते रहेंगे। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>‘एक अफसर, एक कार’ नीति लागू, मोदी सरकार का बड़ा फैसला; अधिकारियों की कई गाड़ियों के इस्तेमाल पर रोक</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली केंद्र सरकार ने सरकारी गाड़ियों के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब किसी अधिकारी को अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलने पर दूसरी सरकारी गाड़ी नहीं दी जाएगी. सरकार ने साफ किया है कि एक अधिकारी के लिए सिर्फ एक ही सरकारी कार होगी. साथ ही, सरकारी उपक्रमों और स्वायत्त … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 10:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>‘एक, अफसर, एक, कार’, नीति, लागू, मोदी, सरकार, का, बड़ा, फैसला, अधिकारियों, की, कई, गाड़ियों, के, इस्तेमाल, पर, रोक</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>केंद्र सरकार ने सरकारी गाड़ियों के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब किसी अधिकारी को अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलने पर दूसरी सरकारी गाड़ी नहीं दी जाएगी. सरकार ने साफ किया है कि एक अधिकारी के लिए सिर्फ एक ही सरकारी कार होगी. साथ ही, सरकारी उपक्रमों और स्वायत्त संस्थाओं की गाड़ियों का निजी इस्तेमाल भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। </p>
<p>बता दें कि सरकारी वाहनों के दुरुपयोग को रोकने और सरकारी खर्च कम करने के लिए केंद्र सरकार ने यह फैसला लिया है. वित्त मंत्रालय ने आदेश जारी किया है कि किसी भी वरिष्ठ अधिकारी को एक से ज्यादा सरकारी गाड़ी नहीं दी जाएगी, भले ही उसके पास किसी दूसरे मंत्रालय, विभाग, सार्वजनिक उपक्रम (PSU) या स्वायत्त संस्था का अतिरिक्त प्रभार (Additional Charge) ही क्यों न हो। </p>
<p>इसे लेकर व्यय विभाग (Department of Expenditure) की ओर से कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) जारी किया गया है जिसमें सभी मंत्रालयों और विभागों को इस नियम का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। </p>
<p>आदेश में कहा गया है कि जिस अधिकारी को उसकी मूल नियुक्ति के लिए पहले से सरकारी स्टाफ कार मिली हुई है, उसे अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलने पर दूसरी सरकारी गाड़ी नहीं दी जाएगी। </p>
<p>सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य सरकारी वाहनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना और उनके दुरुपयोग पर रोक लगाना है. साथ ही जिन सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल नहीं हो रहा है, उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। </p>
<p>सरकार ने एक और महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए कहा है कि केंद्रीय सरकारी अधिकारी सरकारी उपक्रमों, अर्द्ध-सरकारी संस्थाओं, स्वायत्त निकायों या पीएसयू की गाड़ियों का निजी उपयोग नहीं कर सकेंगे. ऐसी गाड़ियों का इस्तेमाल केवल आधिकारिक दौरे के दौरान ही किया जा सकेगा। </p>
<p>ये नए निर्देश सितंबर 2022 में जारी सरकारी स्टाफ कारों के उपयोग संबंधी नियमों को और सख्ती से लागू करने के लिए जारी किए गए हैं. यह आदेश सभी केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों, वित्तीय सलाहकारों और केंद्रीय मंत्रियों के निजी सचिवों को भेज दिया गया है। </p>
<p>सरकार का मानना है कि “एक अधिकारी, एक सरकारी गाड़ी” का सिद्धांत अपनाने से सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, अनावश्यक खर्च कम होगा और अधिकारियों द्वारा अलग-अलग पदों के नाम पर कई सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल करने की व्यवस्था खत्म होगी. इससे प्रशासन में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन भी मजबूत होगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>LPG को लेकर सरकार का बड़ा फैसला! रसोई गैस सप्लाई में होगा बड़ा बदलाव, अमेरिका के साथ बना नया प्लान</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रहा है। खबर है कि सरकार 2027 से देश की कुल LPG (रसोई गैस) आयात का करीब 25% हिस्सा अमेरिका से खरीदने की योजना बना रही है। इस फैसले का मकसद मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम करना, गैस सप्लाई को … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 09:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>LPG, को, लेकर, सरकार, का, बड़ा, फैसला, रसोई, गैस, सप्लाई, में, होगा, बड़ा, बदलाव, अमेरिका, के, साथ, बना, नया, प्लान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रहा है। खबर है कि सरकार 2027 से देश की कुल LPG (रसोई गैस) आयात का करीब 25% हिस्सा अमेरिका से खरीदने की योजना बना रही है। इस फैसले का मकसद मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम करना, गैस सप्लाई को सुरक्षित बनाना और अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते (Trade Deal) को गति देना है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।</p>
<p>दरअसल, इस साल ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सप्लाई बाधित होने के कारण भारत को रसोई गैस की भारी कमी का सामना करना पड़ा था। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि सरकार को घरेलू उपभोक्ताओं तक LPG की आपूर्ति बनाए रखने के लिए उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक को भी घरेलू गैस सप्लाई की ओर मोड़ना पड़ा।</p>
<p>भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक और उपभोक्ता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में भारत ने करीब 2.18 करोड़ टन LPG आयात किया था, जिसमें लगभग 90% गैस मिडिल ईस्ट के देशों से आई थी। वहीं, देश में इस्तेमाल होने वाली कुल LPG का करीब 66% हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है। ऐसे में किसी भी भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारत की गैस सप्लाई पर पड़ता है।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) अगले 1 से 2 महीनों के भीतर अमेरिका से वर्ष 2027 के लिए LPG खरीदने के टेंडर जारी कर सकते हैं। इसके अलावा इन कंपनियों का एक प्रतिनिधिमंडल अगले महीने अमेरिका जाकर गैस आपूर्ति को लेकर बातचीत भी कर सकता है।</p>
<p>भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। भारत पहले ही निकट भविष्य में अमेरिका से ऊर्जा खरीद को 10 अरब डॉलर से बढ़ाकर 25 अरब डॉलर तक ले जाने की प्रतिबद्धता जता चुका है। दोनों देशों ने 2030 तक 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य भी तय किया है। ऐसे में अमेरिका से ज्यादा LPG खरीदना इस दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।</p>
<p><strong>वार्षिक लक्ष्य 22 लाख टन से भी ज्यादा</strong><br>
इस बीच भारत ने अमेरिका समेत अन्य देशों से स्पॉट मार्केट में भी LPG की खरीद बढ़ा दी है। जून 2026 में पहली बार अमेरिका से 10 लाख टन से ज्यादा LPG आयात किया गया। माना जा रहा है कि इस साल अमेरिका से आयात पहले से तय वार्षिक लक्ष्य 22 लाख टन से भी ज्यादा हो सकता है।</p>
<p><strong>मिडिल ईस्ट से सप्लाई कम</strong><br>
मिडिल ईस्ट से कम सप्लाई मिलने का असर भारत की खपत पर भी पड़ा है। जनवरी से जून 2026 के बीच देश में LPG की खपत करीब 8% घटकर 1.47 करोड़ टन रह गई, जबकि आयात 28% गिरकर 75 लाख टन के आसपास पहुंच गया।</p>
<p>हालांकि, एक्सपर्ट का मानना है कि जैसे-जैसे सप्लाई सामान्य होगी, 2027 में भारत का LPG आयात बढ़कर करीब 2 करोड़ टन तक पहुंच सकता है। वहीं, घरेलू मांग भी बढ़कर करीब 3.1 करोड़ टन रहने का अनुमान है।</p>
<p><strong>केंद्रीय पेट्रोलियम राज्य मंत्री ने क्या कहा?</strong><br>
केंद्रीय पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने भी संसद में कहा कि भारत LPG आयात के स्रोतों में विविधता (Diversification) ला रहा है, ताकि भविष्य में किसी क्षेत्रीय संकट या भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित न हो। सरकार का मानना है कि अलग-अलग देशों से LPG खरीदने की रणनीति भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी और उपभोक्ताओं के लिए गैस की उपलब्धता बेहतर बनाए रखने में मदद करेगी।</p>]]> </content:encoded>
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<title>चीन की बड़ी सैन्य चाल! सीमा के पास तैनात किए 11 J&#45;20 स्टील्थ फाइटर जेट, जानिए भारत के लिए कितना बड़ा खतरा</title>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 09:45:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>चीन, की, बड़ी, सैन्य, चाल, सीमा, के, पास, तैनात, किए, J-20, स्टील्थ, फाइटर, जेट, जानिए, भारत, के, लिए, कितना, बड़ा, खतरा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>चीन दोमुहां सांप है. उस पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता. चीन एक ओर भारत संग रिश्ते ठीक करने का ढोंग रच रहा है. दूसरी ओर भारत के खिलाफ साजिश भी कर रहा है. सैटेलाइट तस्वीरों ने चीन की नापाक चाल से पर्दा हटा दिया है. जी हां, भारत से लगी सीमा के पास चीन ने पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स तान दिए हैं. चीन ने लद्दाख और तवांग के पास अपने फ्रंटलाइन एयरबेस पर जून-जुलाई में फाइटर जेट्स को तैनात किया है. एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने भारत की सीमा के पास मौजूद एयरबेस पर अपने फ्रंटलाइन 11 J-20 ‘माइटी ड्रैगन’ स्टील्थ फाइटर जेट्स की तैनाती बढ़ा दी है। </p>
<p>चीन की इस चाल से पर्दाफाश सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ है. एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरें वेन्टॉर (Vantor) से ली गई हैं. इन सैटेलाइट तस्वीरों में जून के आखिर और जुलाई की शुरुआत में चीन के दो एयरबेस पर टोटल 11 J-20 जेट दिखाई दिए हैं. इनमें से इनमें 7 जेट होटन एयरबेस और 4 डैम्सुंग एयरबेस पर दिखाई दिए। </p>
<p><strong>सैटेलाइट तस्वीरों ने खोला राज</strong><br>
9 जुलाई को ली गई तस्वीरों में शिनजियांग उइगर ऑटोनॉमस रीजन के होटन एयरबेस पर 7 J-20 फाइटर जेट रनवे के पास खड़े दिखाई दिए. यह एयरबेस भारत के लेह से करीब 389 किलोमीटर और भारतीय वायुसेना के दौलत बेग ओल्डी एयरफील्ड से सिर्फ 245 किलोमीटर दूर है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सामने किसी चीनी एयरबेस पर एक साथ तैनात J-20 जेट्स की यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। </p>
<p><strong>और कहां है J-20 की तैनाती</strong><br>
इस रिपोर्ट में छपी एक दूसरी सैटेलाइट तस्वीर में तिब्बत के ल्हासा इलाके में मौजूद डैम्सुंग एयरबेस की फ्लाइटलाइन पर चार J-20 दिखाई दे रहे हैं. यह एयरबेस अरुणाचल प्रदेश के तवांग से 344 किमी उत्तर-पश्चिम में है. यहां बताना जरूरी है कि चीन के J-20 को माइटी ड्रैगन के नाम से भी जाना जाता है. यह फाइटर जेट विमान रडार की पकड़ से बचने में काफी सक्षम और उन्नत एईएसए रडार से लैस है. इस कारण भारत की सीमा के पास चीनी J-20 लड़ाकू विमान की तैनाती अपने आप में टेंशन वाली बात है। </p>
<p><strong>कितना घातक है J-20 फाइटर जेट</strong><br>
J-20 चीन का पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे रडार पर पकड़ना बेहद मुश्किल होता है. इसकी स्टील्थ टेक्नोलॉजी  इसे दुश्मन के हवाई क्षेत्र में बढ़त दिलाती है. इसके मुकाबले भारतीय वायुसेना के मौजूदा लड़ाकू विमान, जिनमें राफेल भी शामिल हैं, स्टrल्थ विमान नहीं हैं। </p>
<p><strong>भारत को कब तक मिलेंगे स्टील्थ फाइटर जेट्स?</strong><br>
भारत के पास अभी कोई स्टील्थ फाइटर नहीं है. भारत इस समय अपने पहले स्वदेशी स्टेल्थ फाइटर एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) पर काम कर रहा है. भारत का पहला स्टील्थ जेट यानी ‘एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट’ (AMCA), स्क्वाड्रन सर्विस में शामिल होने में अभी कम से कम एक दशक दूर है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसके जरूरी टेक्नोलॉजी का बड़े पैमाने पर फ़्लाइट-टेस्ट प्रोग्राम में सफलतापूर्वक सत्यापन हो जाए। </p>
<p><strong>चीन लगाता बढ़ा रहा J-20 का प्रोडक्शन</strong><br>
इस बीच चीन लगातार J-20 का प्रोडक्शन बढ़ा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2019 में चीन के पास करीब 50 J-20 थे. 2022 तक यह संख्या करीब 200 हो गई. 2026 के मध्य तक चीन के पास 300 से 500 J-20 होने का अनुमान है. वहीं, ब्रिटेन के रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (RUSI) का अनुमान है कि 2030 तक चीन के बेड़े में करीब 1000 J-20 स्टेल्थ फाइटर जेट शामिल हो सकते हैं. इससे भारत के सामने भविष्य में हवाई सुरक्षा की चुनौती और बढ़ सकती है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>Meta ने पीएम मोदी की पोस्ट हटाने पर मांगी माफी, कहा&#45; तकनीकी खराबी की वजह से हुई थी गलती</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीट पेपर लीक के मुद्दे पर देश के युवाओं को संबोधित किया था और एक सेल्फी वीडियो को पोस्ट किया था जिसने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। हालांकि, इस वीडियो को मेटा ने फेसबुक से हटा दिया। जब लोगों के नजर पड़ी तो वीडियो को हटाने को लेकर हंगामा … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 14:45:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीट पेपर लीक के मुद्दे पर देश के युवाओं को संबोधित किया था और एक सेल्फी वीडियो को पोस्ट किया था जिसने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। हालांकि, इस वीडियो को मेटा ने फेसबुक से हटा दिया। जब लोगों के नजर पड़ी तो वीडियो को हटाने को लेकर हंगामा मच गया। इस पूरे विवाद पर अब मेटा ने बयान जारी किया है और माफी मांगी है। आइए जानते हैं कि मेटा ने क्या कहा है।</p>
<p>23 जुलाई को जारी किया गया यह वीडियो कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में चल रहे 36-दिवसीय छात्र विरोध प्रदर्शन के बीच जेन जी के लिए पीएम मोदी का पहला संबोधन था। इस वीडियो में प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया था कि कल होने वाली कैबिनेट बैठक में पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान किया जाएगा। फेसबुक द्वारा एक्सेस को सीमित किए जाने से पहले ही इस वीडियो पर लाखों व्यूज आ चुके थे।</p>
<p>असल में हाल ही में पीएम मोदी ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर एक वीडियो साझा किया था, उन्होंने उस वीडियो में दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की बात कही थी. लेकिन मेटा ने बाद में उसी सोशल मीडिया पोस्ट को हटा दिया था जिस पर विवाद छिड़ गया। बताया जा रहा है कि भारत सरकार ने इस मामले में मेटा से एक विस्तृत जवाब मांगा है. जानने का प्रयास है कि आखिर  किस कारण से पीएम नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट को हटाया गया. वहीं मेटा ने इस मामले में अपनी गलती को स्वीकार कर लिया है. पीएम मोदी की हटी सोशल मीडिया पोस्ट को एक तकनीकी खराबी करार दिया है। </p>
<p><strong>तकनीकी खराबी से हटा था वीडियो</strong><br>
शुरुआत में, फेसबुक प्लेटफॉर्म पर एक नोटिस दिखाई दे रहा था जिसमें बताया गया था कि वीडियो को एक कानूनी अनुरोध के कारण प्रतिबंधित किया गया है। हालांकि, प्लेटफॉर्म की ओर से इसके बारे में कोई अन्य विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई थी। इसके बाद, फेसबुक के इस कदम पर कई भाजपा नेताओं ने सवाल खड़े किए थे।</p>
<p><strong>फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का निर्देश दिया था</strong><br>
उन्होंने यह भी कहा- हम इतने से संतोष करने वाले नहीं हैं। इसलिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का निर्देश दिया है।दरअसल, यह पूरा मामला 3 मई को हुए NEET UG पेपर लीक से जुड़ा है।</p>
<p><strong>मेटा ने क्या बताया?</strong><br>
मेटा ने फेसबुक पर PM मोदी का वीडियो ब्लॉक किए जाने पर बयान जारी किया है। मेटा के प्रवक्ता ने कहा, "वह कंटेंट गलती से हटा दिया गया था और अब उसे बहाल कर दिया गया है।" सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार ने इस घटना का संज्ञान लिया है और मामले को बहुत गंभीरता से लिया है। सरकार इस मामले की जांच कर रही है और मेटा के अधिकारियों से जवाब भी मांगा गया है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>Uttarakhand Weather: उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश से हालात बेकाबू, फ्लैश फ्लड का अलर्ट; कई जिलों में स्कूल बंद</title>
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<description><![CDATA[ देहरादून देश के कई हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। उत्तराखंड में भी भारी बारिश का दौर फिर लौट आया है। देहरादून समेत प्रदेश के कई हिस्सों में आधी रात से लगातार बारिश हो रही है। कई इलाकों में बिजली भी गुल है। आज मौसम विभाग ने … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 13:45:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Uttarakhand, Weather:, उत्तराखंड, में, मूसलाधार, बारिश, से, हालात, बेकाबू, फ्लैश, फ्लड, का, अलर्ट, कई, जिलों, में, स्कूल, बंद</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>देहरादून</strong></p>
<p>देश के कई हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। उत्तराखंड में भी भारी बारिश का दौर फिर लौट आया है। देहरादून समेत प्रदेश के कई हिस्सों में आधी रात से लगातार बारिश हो रही है। कई इलाकों में बिजली भी गुल है। आज मौसम विभाग ने प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है। यह अलर्ट देहरादून, रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, नैनीताल समेत 9 जिलों के लिए है। इतना ही नहीं मौसम विभाग ने कई हिस्सों में अचानक बाढ़ (फ्लश फ्लड) का भी अलर्ट जारी किया है। मौसम संबंधी चेतावनियों के बाद देहरादून, पौड़ी, पिथौरागढ़ समेत कई जिलों में आज स्कूलों की छुट्टी है।</p>
<p>मौसम विभाग ने उत्तराखंड में अधिकतर जिलों के कुछ क्षेत्रों में मंगलवार को भारी बारिश से बहुत भारी की चेतावनी देते हुए 'ऑरेंज अलर्ट' तथा शेष जिलों में 'यलो अलर्ट' जारी किया है जिसे देखते हुए अधिकारियों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p><strong>इन जिलों में अलर्ट</strong><br>
मौसम विभाग ने उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, उधमसिंह नगर, बागेश्वर, पिथौरागढ़ एवं नैनीताल जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है तथा उनके कुछ क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। इन जिलों में गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने एवं वर्षा के अत्यंत तीव्र दौर होने की संभावना व्यक्त की गयी है।</p>
<p><strong>फ्लश फ्लड की चेतावनी</strong><br>
राज्य के शेष जिलों में भी कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना के साथ 'यलो अलर्ट' जारी किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि अलर्ट के मद्देनजर जिला प्रशासनों को सतर्क रहने और सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, आईएमडी ने कई क्षेत्रों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का जोखिम भी जताया है।</p>
<p>उधर, सोमवार को भी राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में बारिश हुई । डंगोली में 65 मिमी, बेरीनाग में 41.5, घाट में 41, सोंग में 40, बस्तिया में 37, हल्द्वानी में 35, अल्मोड़ा में 33.5, जखोली में 32 मिमी और टनकपुर में 28 मिमी बारिश दर्ज की गयी ।</p>
<p><strong>हल्द्वानी में उमस के बाद बरसी राहत</strong><br>
हल्द्वानी में सोमवार को सुबह से हल्के बादलों के बीच धूप निकली रही। लेकिन दिन के समय उमस से लोग परेशान रहे। शाम होते-होते रिमझिम बारिश ने उमस से राहत दी। देर शाम तक हवाएं भी चलती रहीं। शहर में दोपहर बाद मौसम ने अचानक करवट ली। तीन बजे के आसपास तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई, जो देर शाम तक जारी रही। बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज हुई।</p>
<p>पंतनगर के मौसम विशेषज्ञ डॉ.एएस नैन ने बताया कि अधिकतम तापमान 32 और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। बारिश से शहर की कई सड़कों पर जलभराव हो गया। खासकर खुदी हुई सड़कों पर कीचड़ जमा होने से राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि बारिश के बावजूद अभी तक किसी भी सड़क के बंद होने की सूचना नहीं है। यातायात सामान्य रूप से चलता रहा। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में भी हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>‘बिना समय बर्बाद किए…’ पूर्व IPS किरण बेदी ने की पीएम मोदी की जमकर तारीफ, कही बड़ी बात</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने परीक्षा सुधारों पर नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली समिति का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बिना समय बर्बाद किए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सक्रियता दिखाते हुए एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन किया है। परीक्षा सुधारों पर टास्क फोर्स बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 13:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>‘बिना, समय, बर्बाद, किए…’, पूर्व, IPS, किरण, बेदी, ने, की, पीएम, मोदी, की, जमकर, तारीफ, कही, बड़ी, बात</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने परीक्षा सुधारों पर नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली समिति का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बिना समय बर्बाद किए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सक्रियता दिखाते हुए एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन किया है। परीक्षा सुधारों पर टास्क फोर्स बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उठाए गए कदमों को देखकर बहुत खुशी हुई। बेदी ने कहा कि नंदन नीलेकणि इस काम के लिए बहुत सम्मानित और विश्वसनीय व्यक्ति हैं। हम उनसे राष्ट्रीय हित में बड़े बदलाव की उम्मीद करते हैं।</p>
<p>पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के धरना-प्रदर्शन पर बारीक नजर रख रही हैं। इससे पहले भी बेदी ने इस मुद्दे पर अपने विचार और सलाह शेयर किए हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उन्होंने सुझाव दिया कि शिक्षा मंत्रालय अब एक नई शुरुआत कर सकता है। ये ऐसा मौका है जिसे हाथ से जाने नहीं देना चाहिए। उन सभी चीजों की पहचान करें जिन्हें सही करने और बदलने की जरूरत है। लीडरशिप के लिए साफ संदेश है कि वे बात सुनने और सुधार करने के लिए हमेशा तैयार रहें। बेदी ने कहा कि कहा कि लोगों की जरूरतों और उम्मीदों को लेकर संवेदनशील रहने की जरूरत है। खासकर युवाओं के प्रति यह और जरूरी है क्योंकि उनकी पूरी जिंदगी अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि हर तरह से असरदार और संवेदनशील गवर्नेंस पर फोकस करें। एक भी दिन बर्बाद नहीं करना है।</p>
<p><strong>देश को रचनात्मक नेतृत्व की जरूरत</strong><br>
किरण बेदी ने कहा कि अब संसद की ओर देश उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। उम्मीद है कि बहसें राजनीति से ऊपर उठकर व्यावहारिक समाधान देंगी। हम ऐसी रणनीतियों को सुनने के लिए उत्सुक हैं जो समाज के सभी वर्गों में भरोसा जगाएं। साथ ही मौजूदा सरकार के सामने मौजूद अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करने के लिए राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत करें। देश को रचनात्मक नेतृत्व की जरूरत है।</p>
<p><strong>हिंसा से बचाना चाहिए</strong><br>
इससे पहले बेदी ने ऐसे प्रदर्शनों से निपटने के लिए पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को एक सलाह भी दी थी। बेदी ने कहा था कि छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के लिए सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स को तैनात करना चाहिए। कहा कि सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स सुरक्षा की पहली पंक्ति हो सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे सीमा पर बीएसएफ होती है। उन्होंने कहा कि सुरक्षात्मक उपायों के साथ बिना लाठी-डंडे के इन वॉलंटियर्स को छात्र प्रदर्शनकारियों का सामना करना चाहिए। इसके अलावा दंगा-रोधी पुलिस को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और किसी भी तरह की हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाना चाहिए।</p>
<p>दिल्ली में काम कर चुकीं बेदी ने सुझाव दिया कि हर राज्य में सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स या होम गार्ड होते हैं। छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से पैदा होने वाली स्थितियों से निपटने के लिए उनके जवानों को बेहतर ट्रेनिंग दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि दंगा-रोधी पुलिस को तभी कार्रवाई करनी चाहिए जब सिविल डिफेंस की लाइन टूट रही हो या उस पर कोई खतरा हो।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>जीरा और सौंफ पर राजस्थान&#45;गुजरात में छिड़ी जंग! GI Tag को लेकर किसानों ने उठाए बड़े सवाल</title>
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<description><![CDATA[  मेहसाणा/बाड़मेर जीरा और सौंफ भारत में सबसे ज़्यादा उगाए जाने वाले दो मसालों हैं. इतना ही नहीं, जीरा और सौंफ एशिया में सबसे ज्यादा भारत में ही उगते हैं. जीरा और दोनों ही घरेलू मसाले हैं, जिनका हर घर में इस्तेमाल होता है. जीरा और सौंफ को लेकर गुजरात और राजस्थान के किसानों के बीच … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 11:45:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>जीरा, और, सौंफ, पर, राजस्थान-गुजरात, में, छिड़ी, जंग, Tag, को, लेकर, किसानों, ने, उठाए, बड़े, सवाल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> मेहसाणा/बाड़मेर</strong></p>
<p>जीरा और सौंफ भारत में सबसे ज़्यादा उगाए जाने वाले दो मसालों हैं. इतना ही नहीं, जीरा और सौंफ एशिया में सबसे ज्यादा भारत में ही उगते हैं. जीरा और दोनों ही घरेलू मसाले हैं, जिनका हर घर में इस्तेमाल होता है. जीरा और सौंफ को लेकर गुजरात और राजस्थान के किसानों के बीच विवाद छिड़ गया है. यह विवाद तब शुरू हुआ जब जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) रजिस्ट्री ने गुजरात के मेहसाणा जिले से जुड़े ‘ऊंझा जीरा’ और ‘ऊंझा सौंफ़’ को GI टैग दिया. GI रजिस्ट्रेशन का मकसद किसी खास भौगोलिक जगह से जुड़े उत्पादों की पहचान करना होता है, लेकिन राजस्थान के किसानों ने इस कदम का विरोध किया है. उनका तर्क है कि राजस्थान में भी जीरा और सौंफ की बड़े पैमाने पर खेती होती है और ऊंझा को खास भौगोलिक पहचान देने से गुजरात के बाहर के उत्पादकों के हितों पर असर पड़ सकता है। </p>
<p>यह विवाद ऊंझा जीरा-सौंफ को लेकर है. ऊंझा गुजरात के मेहसाणा ज़िले का एक शहर है. यह एशिया के सबसे बड़े मसाला व्यापार केंद्रों में से एक माना जाता है. दशकों से, ऊंझा जीरा और सौंफ के लिए एक बेंचमार्क बाज़ार रहा है, जहां पूरे भारत से व्यापारी अपनी उपज इसकी एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (APMC) में लाते हैं. इस शहर का नाम इन मसालों के व्यापार और निर्यात से गहराई से जुड़ गया है. इसी वजह से GI प्रोटेक्शन के लिए आवेदन किए गए। </p>
<p><strong>क्या है जियोग्राफिकल इंडिकेशन</strong><br>
जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) एक इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट है, जो उन प्रोडक्सट्स को दिया जाता है जिनमें ऐसी खूबियां, विशेषताएं या प्रतिष्ठा होती है जो मुख्य रूप से उनकी भौगोलिक उत्पत्ति से जुड़ी होती हैं. भारत में, GI रजिस्ट्रेशन ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स ऑफ़ गुड्स (रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन) एक्ट, 1999’ के तहत नियंत्रित होते हैं. GI टैग किसी उत्पाद की कहीं और खेती करने पर रोक नहीं लगाता है. इसके बजाय, यह उस रजिस्टर्ड भौगोलिक नाम के इस्तेमाल की सुरक्षा करता है जो तय क्षेत्र से आते हैं और तय मानकों को पूरा करते हैं। </p>
<p><strong>राजस्थान और गुजरात में कहां-कहां होती है जीरे की खेती</strong><br>
यह विवाद इसलिए पैदा हुआ है क्योंकि भारत में जीरा उत्पादन का लगभग सारा हिस्सा गुजरात और राजस्थान से आता है. राजस्थान के पश्चिमी ज़िले, खासकर जालोर, बाड़मेर, जोधपुर, नागौर और पाली देश के सबसे बड़े जीरा उत्पादक क्षेत्रों में से हैं. वहीं, गुजरात में बनासकांठा, पाटन, मेहसाणा, कच्छ और सुरेंद्रनगर जैसे ज़िलों में बड़े पैमाने पर खेती होती है, और ऊंझा मुख्य व्यापार केंद्र के रूप में काम करता है। </p>
<p><strong>राजस्थान के किसानों ने उठाए सवाल</strong><br>
राजस्थान में किसान संगठनों का तर्क है कि राज्य में पीढ़ियों से जीरा और सौंफ़ की खेती हो रही है और GI के तहत सिर्फ ऊंझा को मान्यता देने से घरेलू और निर्यात बाज़ारों में भ्रम पैदा हो सकता है. उन्होंने तर्क दिया है कि ये मसाले किसी एक भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं और उन्होंने रजिस्ट्रेशन की समीक्षा की मांग की है. इस मामले ने खेती और ब्रांडिंग के बीच के अंतर को भी उजागर किया है. GI रजिस्ट्रेशन के बाद भी, तय भौगोलिक क्षेत्र के बाहर के किसान जीरा और सौंफ उगाना और बेचना जारी रख सकते हैं. हालांकि, वे अपनी उपज की मार्केटिंग सुरक्षित GI नाम का इस्तेमाल करके नहीं कर सकते, जब तक कि वे रजिस्टर्ड भौगोलिक क्षेत्र के अंदर अधिकृत उत्पादक न हों। </p>
<p><strong>भारत में सैकड़ों जीआई टैग वाले प्रोडक्ट्स रजिस्टर्ड</strong><br>
भारत में अभी सैकड़ों रजिस्टर्ड GI उत्पाद हैं, जिनमें कृषि उपज, हस्तशिल्प, टेक्सटाइल और खाद्य पदार्थ शामिल हैं. दार्जिलिंग चाय, बासमती चावल, अल्फोंसो आम, गोरखपुर का काला नमक चावल और नागपुर के संतरे जैसे उत्पादों को उनकी भौगोलिक उत्पत्ति और स्थापित प्रतिष्ठा के आधार पर GI सुरक्षा मिली है. ऊंझा रजिस्ट्रेशन से गुजरात के ट्रेडिंग हब से जीरा और सौंफ भी उस सूची में जुड़ गए हैं, लेकिन राजस्थान के किसानों की आपत्तियों से संकेत मिलता है कि यह मामला GI फ्रेमवर्क के तहत उपलब्ध कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से आगे बढ़ सकता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>सोनम वांगचुक का बड़ा बयान! पत्थरबाजों पर कार्रवाई की मांग, CJP को जश्न मनाने पर दी नसीहत</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली नीट पेपर लीक के मुद्दे पर 26 दिनों तक अनशन करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक गुरुग्राम के अस्पताल से डिस्चार्ज होकर राजघाट पहुंचे और बापू को नमन किया। वांगचुक ने कहा कि महात्मा गांधी का तरीका 100 साल बाद भी उतना प्रासंगिक है और 1000 साल बाद इतना ही रहेगा। वांगचुक ने … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 11:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>नीट पेपर लीक के मुद्दे पर 26 दिनों तक अनशन करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक गुरुग्राम के अस्पताल से डिस्चार्ज होकर राजघाट पहुंचे और बापू को नमन किया। वांगचुक ने कहा कि महात्मा गांधी का तरीका 100 साल बाद भी उतना प्रासंगिक है और 1000 साल बाद इतना ही रहेगा। वांगचुक ने कहा कि सफलता (धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा) लाठी-पत्थर से नहीं, अपने शरीर पर लिए दर्द (अनशन) से मिली है। उन्होंने यह भी साफ किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर ऐक्शन ना हो, लेकिन गड़बड़ी करने वालों पर वह ऐसा नहीं कहेंगे। उन्होंने जश्न मना रही सीजेपी को भी नसीहत दी है।</p>
<p>लद्दाख वापस जाने से पहले पत्नी गीतांजलि के साथ राजघाट पहुंचे वांगचुक ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा, मैं सबसे पहले बापू को याद करने, उन्हें कृतज्ञता व्यक्त करने राजघाट आना चाहता था। देश को बताना चाहता था कि उनका बताया रास्ता आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना 100 साल पहले थे। लोग कहते हैं कि ऐसे शासन में या ऐसे शासक के सामने ऐसे तरीके नहीं चलते हैं। मुझे लगता है कि ऐसे तरीके जनता के दिल तक बात पहुंचाते हैं। मुझे लगता है कि कोई भी सरकार जनता की बात सुनती है, भले ही आंदोलन करने वालों की ना सुनें। उनका (गांधी का) जो तजुर्बा था उसे फिर सफल होते देखा। इससे पहले लद्दाख में हम इसका प्रयोग करते रहे हैं। मुझे देश के स्तर पर नहीं पता था। मुझे तस्सली हुई कि यह 100 साल बाद भी या 1000 साल बाद भी प्रासंगिक होगा। मैं भारत और दुनिया की जनता से कहना चाहता हूं कि बापू के दिखाए रास्ते पर ही अपनी व्यथा सुनाएं। इसमें देर है, लेकिन अंदेर नहीं।'</p>
<p><strong>लाठी-पत्थर नहीं, खुद को दी पीड़ा से सफलता मिली: वांगचुक</strong><br>
सोनम वांगचुक ने गांधीवादी तरीकों को असरदार बताते हुए कहा कि इस आंदोलन को जो सफलता मिली है वह लाठी-पत्थर से नहीं, बल्कि शांतपूर्ण तरीकों और अनशन से मिली है। उन्होंने कहा,'यदि आप खुद को पीड़ा दें, अपने शरीर पर पीड़ा लें और किसी दूसरे को पीड़ा ना दें तो कठोर से कठोर दिल को पिघला सकता है। यह हमने फिर देखा है। मैं इस देश के युवा पीढ़ी और सभी नागरिकों को, युवा आयोजकों को बधाई देता हूं। हमें यह समझना होगा कि अगर यह हल अगर हुआ है तो वह बाजुओं की ताकत, लाठियों या पत्थर से नहीं हुआ है। शांति की अपील से हुआ है, खुद पर जो हमने पीड़ा ली, उससे हुआ है, बल्कि पत्थर और लाठियों से बात और बिगड़ने का डर था। बहुत डर था, जिस कारण मुझे इस शांतपूर्ण पथ को समय से पहले रोका पड़ा।'</p>]]> </content:encoded>
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<title>सोसायटी के नियम तोड़ने पर किसे भरना होगा जुर्माना? जानिए मकान मालिक या किरायेदार, क्या कहता है नियम</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली भारत में अक्सर हाउसिंग सोसायटी में देर रात तक बजता डीजे, पार्किंग को लेकर पड़ोसियों में कहासुनी, इधर-उधर बिखरा कचरा या लिफ्ट-पार्क जैसी संपत्तियों को पहुंचाया गया नुकसान बड़ी बहस का कारण बन जाता है. ऐसी स्थिति में सोसायटी का रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना लगाने में … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 11:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>सोसायटी, के, नियम, तोड़ने, पर, किसे, भरना, होगा, जुर्माना, जानिए, मकान, मालिक, या, किरायेदार, क्या, कहता, है, नियम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारत में अक्सर हाउसिंग सोसायटी में देर रात तक बजता डीजे, पार्किंग को लेकर पड़ोसियों में कहासुनी, इधर-उधर बिखरा कचरा या लिफ्ट-पार्क जैसी संपत्तियों को पहुंचाया गया नुकसान बड़ी बहस का कारण बन जाता है. ऐसी स्थिति में सोसायटी का रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना लगाने में देर नहीं लगाता। </p>
<p>लेकिन असली पेंच तब फंसता है, जब नियम तोड़ने वाला कोई किरायेदार हो! ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर इस पेनल्टी या जुर्माने की भरपाई कौन करेगा, मकान मालिक अपनी जेब ढीली करेगा या गलती करने वाला किरायेदार? दरअसल, इस सवाल का जवाब सीधा नहीं है. यह पूरी तरह से उल्लंघन की प्रकृति और एग्रीमेंट की शर्तों पर निर्भर करता है। </p>
<p><strong>सोसायटी हमेशा फ्लैट मालिक पर ही क्यों लगाती है जुर्माना?</strong><br>
हाउसिंग सोसायटी का कानूनी संबंध केवल संपत्ति के पंजीकृत मालिक से होता है, न कि वहां रहने वाले किरायेदार से. यही वजह है कि अगर सोसायटी में किसी भी नियम का उल्लंघन होता है, तो जुर्माना सीधे फ्लैट मालिक के नाम पर ही जारी करती है. चाहे गलती किरायेदार की ही क्यों न हो, सोसायटी के बाय-लॉज़ के तहत प्राथमिक जवाबदेही मकान मालिक की ही मानी जाती है। <br>
 <br>
हालांकि, सोसायटी प्रबंधन किरायेदार को सीधे चेतावनी दे सकता है, लेकिन जुर्माने की वसूली के लिए वह केवल मालिक को ही जिम्मेदार ठहराता है. किरायेदार की गलती का नुकसान मकान मालिक को न उठाना पड़े, इसके लिए रेंट या लीव-एंड-लाइसेंस एग्रीमेंट में स्पष्ट शर्तें होना बेहद जरूरी है। </p>
<p>अगर एग्रीमेंट में यह साफ तौर पर लिखा है कि सोसायटी नियमों के उल्लंघन पर लगने वाले किसी भी जुर्माने के लिए किरायेदार जिम्मेदार होगा, तो मकान मालिक सोसायटी को भुगतान किए गए जुर्माने की राशि किरायेदार से वसूल कर सकता है. यह राशि या तो किरायेदार से अलग से ली जा सकती है या सिक्योरिटी डिपॉजिट से काटी जा सकती है. एग्रीमेंट में बना यह क्लॉज मकान मालिक को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। </p>
<p><strong>वे आम कारण जिन पर सोसायटी लगाती है पेनल्टी<br>
    अपनी तय जगह के अलावा किसी अन्य स्थान या विजिटर पार्किंग में गाड़ी खड़ी करना.<br>
    देर रात तक तेज आवाज में संगीत बजाना, पार्टियां करना या पड़ोसियों को परेशान करना.<br>
    लिफ्ट, कॉरिडोर, क्लब हाउस, या गार्डेन जैसे साझा स्थानों को नुकसान पहुंचाना.<br>
    गीला और सूखा कचरा अलग-अलग न करना या खुले में कचरा फेंकना.<br>
    सोसाइटी के सिक्योरिटी प्रोटोकॉल, बाय-लॉज़ या नियम-कायदों की अनदेखी करना.</strong></p>
<p><strong>विवादों से बचने के लिए पारदर्शी संवाद जरूरी</strong><br>
किसी भी संभावित विवाद से बचने के लिए मकान मालिक और किरायेदार दोनों को फ्लैट किराए पर देने से पहले ही सोसायटी के बाय-लॉज़ पर खुलकर बात कर लेनी चाहिए. रेंट एग्रीमेंट तैयार करते समय सोसायटी मेंटेनेंस, सुरक्षा नियमों और जुर्मानों की देनदारी से जुड़े सभी बिंदुओं को स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाना चाहिए। </p>]]> </content:encoded>
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<title>CJP की लग्जरी पार्टी पर बवाल! महेश जेठमलानी ने पूछा&#45; नाच&#45;गाने और जश्न की फंडिंग किसने की?</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के खत्म होते ही जश्न की कई वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रही हैं. इस बीच सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि CJP की लीडरशिप एक होटल में विक्ट्री पार्टी मना रही है. दिल्ली में कई दिनों … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 21:45:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>CJP, की, लग्जरी, पार्टी, पर, बवाल, महेश, जेठमलानी, ने, पूछा-, नाच-गाने, और, जश्न, की, फंडिंग, किसने, की</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के खत्म होते ही जश्न की कई वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रही हैं. इस बीच सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि CJP की लीडरशिप एक होटल में विक्ट्री पार्टी मना रही है. दिल्ली में कई दिनों तक हुई हिंसा के बाद, इन तथाकथित यूथ एक्टिविस्ट्स ने म्यूजिक ऑन किया और डांस करने लगे। </p>
<p>महेश जेठमलानी ने सवाल उठाया कि इस पूरे आंदोलन के दौरान ट्रैवल, फूड, स्टे, इक्विपमेंट और लॉजिस्टिक्स की फंडिंग किसने की. उन्होंने यह भी पूछा कि दिल्ली को अशांत बनाए रखने वाले लोगों को किसने फाइनेंस किया. महेश जेठमलानी ने एक्स पर जश्न की वीडियो शेयर करते हुए यह लिखा है। </p>
<p><strong>दिल्ली को उबाल पर रखने वाले लोगों को किसने पैसे दिए?</strong><br>
महेश जेठमलानी ने एक्स पर किए गए ट्वीट में लिखा- "सच में? CJP लीडरशिप एक होटल में जीत की पार्टी दे रही है! दिल्ली में कई दिनों तक हिंसा होने के बाद, इन तथाकथित यूथ एक्टिविस्ट ने म्यूज़िक चालू किया और डांस करना शुरू कर दिया।" इसके बाद सवाल करते हुए लिखा- "यह एक सीरियस सवाल है। इस पूरे आंदोलन के दौरान ट्रैवल, खाना, रहने की जगह, इक्विपमेंट और लॉजिस्टिक्स का खर्च किसने उठाया?" जेठमलानी ने अपनी बात को दोहराते हुए फिर लिखा- “दिल्ली को उबाल पर रखने वाले लोगों को किसने पैसे दिए?”</p>
<p><strong>होटल में जश्न मनाते दिखे सीजेपी नेता सौरव दास</strong><br>
जेठमलानी द्वारा शेयर किए गए वीडियो में सौरभ दास अपने साथियों के साथ नाचते-गाते जश्न मनाते दिखाई दे रहे हैं। एकदम खुशनुमा माहौल। वीडियो में लिखा है- रेजिगनेशन पार्टी। वीडियो में जश्न मनाने वाली जगह शानदार दिखाई दे रही है। इसी आधार पर जेठमलानी ने लिखा कि सीजेपी नेता एक होटल में पार्टी दे रहे हैं। इसके बाद फंडिंग को लेकर सवाल उठाए। आपको बतातें चलें कि प्रोटेस्ट के दौरान भी इस तरह के सवाल उठते रहे हैं- आखिर इस आंदोलन को कौन फंड कर रहा है। इस पर वहां मौजूद लोगों और सीजेपी नेताओं का कहना था- यहां आम जनता अपनी स्वेच्छा से खाना, पानी, दवाई और जरूरी सुविधाएं भेज रही है।</p>
<p>आंदोलन के शुरूआती दिनों में जब सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके से पूछा गया था कि कॉकरोच जनता पार्टी को कौन फंडिंग दे रहा है? बीबीसी में इंटरव्यू के दौरान सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके से जब ऐसा पूछा गया, तो उन्होंने बताया था- मैं ट्रैवल अपने खुदके पैसों से कर रहा हूं। पूणे में जो स्टूडेंट मूवमेंट कर रहे हैं, वो खुदसे कर रहे हैं। उन लोगों ने मुझसे कहा कि सर, आप आ जाइए। तो मैंने भी कहा कि ठीक है, मैं आ जाता हूं। फिर लखनऊ से मुझे फोन आया कि सर आप आ जाइए। तो मैं वहां भी जा रहा हूं। हालांकि बाद के दिनों में चल रहे आंदोलन पर उनका और उनके नेताओं (सौरव दास और आशुतोष रांका) का कहना था कि ये आंदोलन लोगों द्वारा चलाया जा रहा है, इसे आम लोग फंड कर रहे हैं। इसमें थोड़ा-थोड़ा सबका योगदान है। </p>
<p>बता दें, NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन पिछले कई हफ्तों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा था. सीजेपी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इसे अपनी बड़ी जीत बताते हुए आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया. अब जंतर-मंतर पर हालात सामान्य हो चुके हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी के जश्न की कई वीडियो वायरल हो रहीं हैं। </p>
<p>भले ही सीजेपी ने अपना 36 दिनों तक चला देशव्यापी आंदोलन खत्म कर दिया हो, लेकिन संगठन के नेताओं का कहना है कि आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है. यह केवल एक बड़े मिशन की शुरुआत है. अब संगठन का ध्यान शिक्षा सुधारों और युवाओं के कई मुद्दों को जमीनी स्तर तक ले जाने पर है. कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने बताया है कि संगठन जल्द ही अपनी अगली रणनीति की घोषणा करेगा। </p>
<p><strong>मदन राठौड़ बोले- सीजेपी प्रदर्शनकारियों की फंडिंग की जांच हो</strong></p>
<p>कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में दिल्ली में जंतर-मंतर पर चले धरने और आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग की आशंका जताते हुए बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने सरकार से जांच की मांग की। मदन राठौड़ ने संसद परिसर में मीडिया से कहा- यह बात सही है कि इन्हें कहीं से फंडिंग हो रही है। सोशल मीडिया, टीवी चैनल्स से पता लगा है कि प्रदर्शनकारियों के लिए दुबई, कुवैत, बांग्लादेश और पता नहीं कहां-कहां से खाने की बुकिंग हुई थी।</p>
<p>राठौड़ ने कहा- एक मामला तो ऐसा था, जो मोबाइल रिपेयरिंग का काम करता है। उसने हर दिन 10-10 लाख रुपए का खाना भिजवाया। यह कहां से हुआ। यह वाजिब सवाल है और इसकी जांच होनी चाहिए।</p>
<p><strong>कहा- धर्मेद्र प्रधान का दोष नहीं, टुकड़े-टुकड़े गैंग पीछे लगा था</strong><br>
राठौड़ ने एक दिन पहले कहा था- धर्मेंद्र प्रधान का कोई दोष नहीं है। छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर चलाने पूरा टुकड़े-टुकड़े गैंग उनके पीछे लग गया था। धर्मेंद्र प्रधान ने खुद अपना इस्तीफा सौंप दिया। प्रधान ने शिक्षा मंत्री रहते बहुत अच्छे काम किए।</p>
<p><strong>महेश जेठमलानी ने भी विदेशी फंडिंग पर उठाए थे सवाल</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट के वकील और पूर्व बीजेपी सांसद महेश जेठमलानी सहित कई बीजेपी नेताओं ने एक्स पर सीजेपी नेताओं के डांस करते वीडियो शेयर कर सवाल उठाए। यह वीडियो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जश्न का बताया जा रहा है। इस पर सवाल उठाते हुए महेश जेठमलानी ने एक्स पर लिखा- सीजेपी नेता होटल में पार्टी कर रहे हैं। इस विरोध-प्रदर्शन के दौरान यात्रा, खाना, रहना और दूसरे खर्च को कौन फंडिंग कर रहा है? जिन लोगों ने दिल्ली को उबाल कर रखा, उन्हें फंडिंग कौन कर रहा है? महेश जेठमलानी के पोस्ट के बाद मदन <strong>राठौड़ ने भी वही सवाल उठाया है।</strong></p>
<p><strong>राठौड़ बोले- प्रधानमंत्री शुरू से ही युवाओं के मुद्दों पर गंभीर</strong><br>
मदन राठौड़ ने कहा- युवाओं के मुद्दों को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी गंभीर हैं। पीएम ने नकल के मामलों के खिलाफ कड़ा रख अपनाया है। पीएम ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला किया है। नकल रोकने सख्त कानून ला रहे हैं। यह सब स्वागत योग्य कदम है। नकल को रोकने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<title>प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी के दावे पर भड़की CJP, सरकार को दिया एक दिन का अल्टीमेटम</title>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 21:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>प्रदर्शनकारियों, की, गिरफ्तारी, के, दावे, पर, भड़की, CJP, सरकार, को, दिया, एक, दिन, का, अल्टीमेटम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>आंदोलन खत्म करने के दो दिन बाद ही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का दावा करते हुए सरकार को फिर से धमकी दे डाली है। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि अलग-अलग राज्यों से छात्रों और प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाए जाने, हिरासत में लिए जाने और गिरफ्तारी की खबरें आ रही हैं। यह वादाखिलाफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अगर कल यानी मंगलवार तक सारी एफआईआर वापस नहीं ली गईं तो आगे के कदम पर विचार किया जाएगा।</p>
<p><strong>वादा पूरा करे सरकार- CJP</strong><br>
सीजेपी ने दावा किया कि असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में खास तौर पर एजेंसियां प्रदर्शन करने वाले छात्रों को टारगेट कर रही हैं। उन्होंने कहा, 'सरकार के इस वादे के बाद कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सारी एफआईआर वापस ली जाएंगी और भविष्य में भी कोई कार्रवाई नहीं कीज जाएगी, यह प्रदर्शन खत्म किया गया था।' हालांकि जो रिपोर्ट सामने आ रही हैं, वह चिंताजनक हैं।</p>
<p><strong>रिहा करवाने में लगी सीजेपी की लीगल टीम</strong><br>
दास, हमारी लीगल टीम संबंधित राज्यों में ऐक्टिव है और हिरासत में लिए गए लोगों को छुड़ाने की पूरी कोशिश कर रही है। यह सब पहले दिन से ही चल रहा है। दूसरा भारत सरकार, खास तौर पर जेपी नड्डा और जीतेंद्र सिंह जी से बात यही हुई थी कि प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ देश में कहीं भी ऐक्शन नहीं लिया जाएगा। 28 जुलाई को हमें लिखित में भी इसका आश्वासन दिया गया। इसी के बाद हमने सरकार के आश्वासन पर भरोसा करते हुए आंदोलन खत्म कर दिया। अब अगर सरकार अपने वादे से मुकरती है तो यह ना केवल कॉकरोच जनता पार्टी के साथ धोखा होगा बल्कि देश के लाखों युवाओं को ठगना होगा। इस तरह की वादा खिलाफी युवा बर्दाश्त नहीं करेंगे।</p>
<p>सौरव दास ने लिखा, सरकार को याद दिलाना चाहता हूं कि केवल वादा कर देने से विश्वसनीयता नहीं पैदा होती बल्कि उस वादे का सम्मान भी किया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से कहा, आप चिंता ना करें। हम आपके साथ हैं। सीजेपी स्थिति पर नजर बनाए है और खास तौर पर उन राज्यों में जहां एनडीए और बीजेपी की सरकार है, हमारी टीम ऐक्टिल है। हमारी यही मांग है कि जितने भी लोगों को हिरासत मे लिया गया है या फिर गिरफ्तार किया गया है, तुरंत रिहा कर दिया जाए। अगर कल लतक सभी एफआईआर वापस नहीं ली जाती हैं तो फिर आगे के कदम पर विचार किया जाएगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>मालदा के अदीना में आदिनाथ शिवलिंग स्थापना का ऐलान! हिंदू संगठनों की तैयारी, प्रशासन हाई अलर्ट पर</title>
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<description><![CDATA[ मालदा पश्चिम बंगाल में मालदा की अदीना मस्जिद या आदिनाथ मंदिर? इस विवाद के बीच, बंगाली हिंदू संरक्षण संघ मस्जिद से 50 मीटर की दूरी पर शिव की प्रतिमा स्थापित करने जा रहा है. संगठन ने वहां रुद्राभिषेक का ऐलान भी किया है. बता दें कि 20 जुलाई को तारकेश्वर से शोभायात्रा शुरू हुई थी, … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 20:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मालदा, के, अदीना, में, आदिनाथ, शिवलिंग, स्थापना, का, ऐलान, हिंदू, संगठनों, की, तैयारी, प्रशासन, हाई, अलर्ट, पर</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मालदा</strong></p>
<p>पश्चिम बंगाल में मालदा की अदीना मस्जिद या आदिनाथ मंदिर? इस विवाद के बीच, बंगाली हिंदू संरक्षण संघ मस्जिद से 50 मीटर की दूरी पर शिव की प्रतिमा स्थापित करने जा रहा है. संगठन ने वहां रुद्राभिषेक का ऐलान भी किया है. बता दें कि 20 जुलाई को तारकेश्वर से शोभायात्रा शुरू हुई थी, आदिनाथ शिवलिंग के साथ विभिन्न स्थानों से होते हुए शोभायात्रा रविवार को मालदा पहुंची. अब सोमवार को यहां पूजा-अर्चना होगी. आयोजकों ने बताया कि मालदा में शिवलिंग स्थापना को लेकर उत्सव का माहौल बना हुआ है. विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु <strong>यहां आने लगे हैं। </strong></p>
<p><strong>दावा- 1373 में हुआ था अदीना मस्जिद का निर्माण</strong><br>
ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, सुल्तान सिकंदर शाह ने 1373 में अदीना मस्जिद का निर्माण करवाया था. हालांकि, इस वास्तुकला को लेकर विवाद नया नहीं है. राज्य में सरकार परिवर्तन से पहले भी, हिंदू पक्ष यह दावा करता रहा है कि वास्तुकला के विभिन्न हिस्सों में शिव या आदिनाथ और हिंदू देवी-देवताओं के अस्तित्व के संकेत मिलते हैं. उनके अनुसार, जिस स्थान पर अदीना मस्जिद स्थित है, वह मूल रूप <strong>से प्राचीन आदिनाथ शिव मंदिर के ऊपर बना है. इस दावे से संबंधित एक मामला अदालत में लंबित भी है। </strong></p>
<p><strong>मस्जिद से 50 मीटर दूर रुद्राभिषेक</strong></p>
<p>इस स्थिति में, आदिना मस्जिद से 50 मीटर के दायरे में आदिनाथ का रुद्राभिषेक आयोजित करना विशेष महत्व रखता है. इसके लिए पूरे क्षेत्र को सजाया गया है. सुरक्षा कारणों से मालदा शहर और आसपास के इलाकों में कड़ी पुलिस व्यवस्था की गई है. बंगाल हिंदू प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने दावा किया है कि 'मामला अदालत में लंबित है. अयोध्या के राम मंदिर की तरह ही आदिनाथ मंदिर में भी आदिनाथ की प्रतिमा स्थापित की जाएगी.क्योंकि वहां मंदिर था. यह बात अदालत में भी साबित हो जाएगी। </p>
<p><strong>अदालत में विचाराधीन है मामला</strong><br>
यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब अदीना मस्जिद परिसर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है. कुछ हिंदू संगठनों का दावा है कि यह स्थान मूल रूप से प्राचीन आदिनाथ शिव मंदिर था. इस दावे को लेकर मामला फिलहाल कलकत्ता हाई कोर्ट में विचाराधीन है. आयोजकों का कहना है कि शिवलिंग की स्थापना कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए की जा रही है। </p>
<p>उनका यह भी कहना है कि भविष्य में इस स्थल पर आदिनाथ मंदिर के निर्माण का प्रयास किया जाएगा. हालांकि इस संबंध में अंतिम फैसला अदालत के निर्णय के बाद ही संभव होगा। </p>
<p>विवादित पृष्ठभूमि को देखते हुए मालदा पुलिस ने पूरे इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात किया है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सावन के दौरान हर वर्ष इस स्थान पर पूजा-अर्चना का आयोजन होता है और इस बार भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल लगाया गया है। </p>
<p>प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है. पुलिस का कहना है कि पूरे कार्यक्रम पर कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>Bank of Baroda का बड़ा डेटा लीक! अकाउंट डिटेल्स, आधार और मोबाइल नंबर तक लीक होने का दावा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली देश के बड़े सरकारी बैंकों में शामिल बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) के सर्वर से बड़े डेटा लीक की खबर है. दावा किया जा रहा है कि बैंक का करीब 1TB डेटा इंटरनेट और डार्क वेब पर लीक कर दिया गया है।  यह दावा एक थ्रेट एक्टर ने किया है, जिसने कहा … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 19:45:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Bank, Baroda, का, बड़ा, डेटा, लीक, अकाउंट, डिटेल्स, आधार, और, मोबाइल, नंबर, तक, लीक, होने, का, दावा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>देश के बड़े सरकारी बैंकों में शामिल बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) के सर्वर से बड़े डेटा लीक की खबर है. दावा किया जा रहा है कि बैंक का करीब 1TB डेटा इंटरनेट और डार्क वेब पर लीक कर दिया गया है। </p>
<p>यह दावा एक थ्रेट एक्टर ने किया है, जिसने कहा है कि उसने बैंक के सिस्टम में सेंध लगाई और बड़ी मात्रा में डेटा हासिल किया. फिलहाल बैंक की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और यह साफ नहीं है कि पूरा डेटा असली है या नहीं। </p>
<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक, लीक किए गए डेटा में ग्राहकों के नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, आधार नंबर, बैंक अकाउंट से जुड़ी जानकारी, नेट बैंकिंग रिकॉर्ड, लोन से जुड़े दस्तावेज, कॉरपोरेट बैंकिंग डेटा और कुछ इंटरनल फाइलें होने का दावा किया गया है। </p>
<p>दावा यह भी है कि कथित हैकर ने डेटा के कुछ सैंपल और डाउनलोड लिंक भी शेयर किए हैं. यह खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई कस्टमर्स चिंता जता रहे हैं। </p>
<p>श्रीकांत नाम के X यूजर जो हैकर होने का दावा करते हैं, उन्होंने ने एक पोस्ट में कथित डेटा लीक का स्क्रीनशॉट शेयर किया है. इस पोस्ट में उन्होंने RBI सहित कई अधिकारियों को टैग किया है. उन्होंने दावा किया है कि बैंक ऑफ बड़ौदा डेटा ब्रीच का डेटा डंप मिला है। </p>
<p>अगर दावा सही साबित होता है तो इसका इस्तेमाल साइबर अपराधी फिशिंग, फर्जी कॉल, KYC अपडेट के नाम पर धोखाधड़ी और पहचान की चोरी जैसी वारदातों में कर सकते हैं। </p>
<p>सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ग्राहकों का पैसा खतरे में है? इसका जवाब फिलहाल 'ज़रूरी नहीं' है. केवल डेटा लीक होने का मतलब यह नहीं है कि बैंक अकाउंट से अपने आप पैसे निकल जाएंगे. लेकिन अगर किसी के पास आपकी निजी जानकारी पहुंच जाती है, तो वह आपको बैंक अधिकारी बनकर कॉल कर सकता है, फर्जी लिंक भेज सकता है या OTP और नेट बैंकिंग की जानकारी लेने की कोशिश कर सकता है. ऐसे मामलों में ग्राहकों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है। </p>
<p>अभी तक बैंक ऑफ बड़ौदा की वेबसाइट पर इस कथित डेटा लीक को लेकर कोई आधिकारिक प्रेस रिलीज या पुष्टि जारी नहीं की गई है. हमने बैंक से संपर्क की है और स्टेटमेंट आते ही अपडेट करेंगे. बैंक के मीडिया और अनाउंसमेंट पेज पर भी इस घटना से जुड़ी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। </p>
<p>अगर आपका बैंक ऑफ बड़ौदा में अकाउंट है तो घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी जरूर बरतें. किसी भी अनजान कॉल पर अपनी बैंकिंग जानकारी, OTP, UPI PIN या पासवर्ड साझा न करें. नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग का पासवर्ड बदलना, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू रखना और अकाउंट का ट्रांजैक्शन हिस्ट्री नियमित रूप से चेक करना समझदारी होगी। </p>
<p>अगर कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें. फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि 1TB डेटा लीक का दावा किया गया है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. आने वाले दिनों में बैंक, साइबर सुरक्षा एजेंसियों या सरकारी जांच के बाद ही साफ होगा कि दावा कितना सही है और कितने ग्राहकों का डेटा वास्तव में प्रभावित हुआ है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>‘प्रधानमंत्री भगवान नहीं, मजाक लोकतंत्र का हिस्सा’— साइबर एक्शन पर सौरव दास का बड़ा बयान</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने दिल्ली समेत अन्य बीजेपी शासित राज्यों में पुलिस द्वारा छात्रों को धमकाने का आरोप लगाया है. उन्होंने आजतक से विशेष बातचीत में कहा, &#039;हमारे साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार की ओर से यह भरोसा दिया था … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 19:45:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>‘प्रधानमंत्री, भगवान, नहीं, मजाक, लोकतंत्र, का, हिस्सा’—, साइबर, एक्शन, पर, सौरव, दास, का, बड़ा, बयान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने दिल्ली समेत अन्य बीजेपी शासित राज्यों में पुलिस द्वारा छात्रों को धमकाने का आरोप लगाया है. उन्होंने आजतक से विशेष बातचीत में कहा, 'हमारे साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार की ओर से यह भरोसा दिया था कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर एफआईआर नहीं दर्ज होगी, जो एफआईआर दर्ज हैं उन्हें वापस लिया जाएगा और भविष्य में भी उनके खिलाफ बदले की भावना से कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी. सरकार ने हमें यह लिखित में देने को कहा था, जिसका कल आखिरी दिन है। </p>
<p>सौरव दास ने आगे कहा, 'हमें देशभर के कई राज्यों से यह पता चल रहा है कि काफी क्रैकडाउन हो रहा है. बच्चों को डिटेन किया जा रहा है, मास एफआईआर फाइल हो रही हैं. हमें बताया गया है कि बिहार में 500 एफआईआर फाइल हुई हैं और बहुत कड़ी धाराएं लगाई गई हैं. मैं कहना चाहूंगा कि सरकार ने हमें जो गारंटी दिया था, उस पर उसे अमल करना चाहिए. उन्होंने इस देश के युवाओं से जो वादा किया था उसे निभाना चाहिए. हमारी शर्तों में ये भी शामिल था कि सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बीजेपी शासित और उसके सहयोगी दलों के शासन वाले राज्यों में भी ये लागू होना चाहिए. हम केंद्र सरकार से उस लेटर का वेट कर रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि कल तक हमारे पास आ जाए वो लेटर। </p>
<p>दिल्ली पुलिस द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को लेकर की गईं भद्दी टिप्पणियों वाली पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटाए जाने पर सौरव दास ने कहा, 'क्या ऑफेंसिव है? क्या कोई मजाक ऑफेंसिव है, कोई बयान ऑफेंसिव है. आपके लिए जो ऑफेंसिव है, शायद हमारे लिए ऑफेंसिव नहीं है. इसी तरह जो हमारे लिए ऑफेंसिव है, हो सकता है आपके लिए ना हो. इसलिए अगर पुलिस को इतनी छूट दे दी गई तो इसे सेंसरशिप टूल की तरह ही यूज करेगी. फिलहाल ऐसा ही हो रहा है. अगर किसी ने हल्का सा मजाक कर दिया प्रधानमंत्री के ऊपर, तो क्या प्रधानमंत्री भगवान हैं? लोग मजाक तो करेंगे ही. ये तो लोकतंत्र का हिस्सा है. लेकिन ऐसा कॉन्टेंट हटाया जा रहा है। </p>
<p>सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि इस सरकार ने पिछले वर्षों में जितनी ज्यादा सेंसरशिप की है, उतना ही अधिक कॉन्टेंट बना है. सरकार से मैं कहना चाहूंगा कि उसने जो गारंटियां हमें दी हैं, उन्हें अमल में लाने पर ध्यान देना चाहिए. इस बात पर नहीं कि कैसे सेंसरशिप लागू कर दें, कैसे बच्चों को एफआईआर में फंसा दें. हमें जो गारंटी दी गई है सरकार की ओर से, वो सिर्फ कॉकरोच जनता पार्टी के लिए नहीं हैं, वो उन लाखों युवाओं के लिए भी हैं जो देशभर में सड़कों पर उतरे थे. अगर आप उसपे अमल नहीं करते हैं तो युवाओं को फिर से सोचना पड़ेगा कि क्या उन्हें सड़कों पर फिर से उतरना पड़ेगा. भले ही बच्चे जंतर-मंतर से अभी के लिए चले गए हों, लेकिन ज्यादा टाइम लगेगा नहीं वापस आने में. देश का युवा जागरूक हो चुका है और उनमें बहुत एकता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>‘सिर्फ आंदोलन करने पर लाठीचार्ज नहीं कर सकते’… दिल्ली पुलिस पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली     हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की ज्यादती को लेकर बढ़ते विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कड़ी टिप्पणी की. SC ने कहा कि सिर्फ आंदोलन होने के आधार पर लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता।  भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 19:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>‘सिर्फ, आंदोलन, करने, पर, लाठीचार्ज, नहीं, कर, सकते’…, दिल्ली, पुलिस, पर, सुप्रीम, कोर्ट, की, सख्त, टिप्पणी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong><br>
   <br>
हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की ज्यादती को लेकर बढ़ते विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कड़ी टिप्पणी की. SC ने कहा कि सिर्फ आंदोलन होने के आधार पर लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता। </p>
<p>भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की, जब देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग से जुड़ीयाचिकाओं का उल्लेख (मेंशनिंग) उसके समक्ष किया गया. इनमें एक याचिका उन छात्रों के समूह की ओर से दायर की गई है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। </p>
<p><strong>सिवान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ AK-47 राइफलों का इस्तेमाल का आरोप</strong></p>
<p>एक अन्य याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि बिहार के सिवान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ AK-47 राइफलों का इस्तेमाल किया गया. इस पर अदालत ने कहा कि पुलिस द्वारा अंधाधुंध या अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। </p>
<p>बता दें कि, जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए उसकी हाई-लेवल जांच की मांग वाली चिट्ठी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखने वाले वकील ने अब इसी मुद्दे पर जनहित याचिका (PIL) दायर की है. इससे पहले, तीन दिन पहले भेजी गई चिट्ठी पर चीफ जस्टिस ने कोई संज्ञान नहीं लिया था। </p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट में PIL, साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग</strong><br>
याचिकाकर्ता प्रिया मिश्रा की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा द्वारा दायर इस जनहित याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट प्रतिवादियों को निर्देश देते हुए रिट ऑफ मैंडेमस (Writ of Mandamus) जारी करे. इसके तहत संबंधित घटनाओं से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित रखने और संरक्षित करने का निर्देश दिया जाए। </p>
<p>इनमें सीसीटीवी फुटेज, बॉडी-वॉर्न कैमरा फुटेज, ड्रोन फुटेज, मोबाइल फोन रिकॉर्डिंग, सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो और पोस्ट, पुलिस वायरलेस एवं संचार रिकॉर्ड, कॉल लॉग, कंट्रोल रूम रिकॉर्ड, तैनाती संबंधी आदेश, जीपीएस रिकॉर्ड तथा अन्य सभी प्रासंगिक इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्य शामिल हैं। </p>
<p>याचिका में कहा गया है कि इन साक्ष्यों को नष्ट होने, बदले जाने, उनके साथ छेड़छाड़ किए जाने, दबाए जाने या गुम होने से बचाया जाए. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सभी साक्ष्य उचित न्यायिक और जांच प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं। </p>
<p>याचिका में यह भी मांग की गई है कि जहां उपलब्ध साक्ष्यों- जैसे आधिकारिक रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, मीडिया रिपोर्ट और अन्य विश्वसनीय सामग्री के आधार पर किसी व्यक्ति, लोक सेवक, पुलिस अधिकारी, सुरक्षा कर्मी या किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा कोई संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) किया जाना लगता होता हो, वहां संविधान और लागू कानूनों के अनुसार तत्काल FIR दर्ज की जाए तथा निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध आपराधिक जांच शुरू की जाए। </p>]]> </content:encoded>
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<title>‘मैं स्ट्रीट फाइटर हूं, AC एक्टिविस्ट नहीं…’ इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान का पहला बड़ा बयान</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद सोमवार को धर्मेंद्र प्रधान की पहली प्रतिक्रिया सामने आई. उन्होंने कांग्रेस नेता जयराम रमेश की बात पर रिएक्शन देते हुए कहा, &#039;आई एम ए स्ट्रीट फाइटर. नॉट एन एसी रूम ऐक्टिविस्ट&#039; . असल में सोमवार को जब धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे तब वहां … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 18:45:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>‘मैं, स्ट्रीट, फाइटर, हूं, एक्टिविस्ट, नहीं…’, इस्तीफे, के, बाद, धर्मेंद्र, प्रधान, का, पहला, बड़ा, बयान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद सोमवार को धर्मेंद्र प्रधान की पहली प्रतिक्रिया सामने आई. उन्होंने कांग्रेस नेता जयराम रमेश की बात पर रिएक्शन देते हुए कहा, 'आई एम ए स्ट्रीट फाइटर. नॉट एन एसी रूम ऐक्टिविस्ट' .</p>
<p>असल में सोमवार को जब धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे तब वहां कांग्रेस नेता जयराम रमेश उनसे सहानुभूति प्रकट करने पहुंचे थे. जयराम रमेश ने प्रधान से कहा 'इट हैपन्स'. इस पर प्रधान ने तुरंत जवाब दिया 'नथिंग हैपन्ड'. इसके बाद प्रधान ने रमेश से कहा 'आई एम ए स्ट्रीट फाइटर. नॉट एन एसी रूम ऐक्टिविस्ट' </p>
<p>धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के बाद आज जब सोमवार को पहली बार संसद भवन पहुंचे तो एनडीए सांसदों ने उनका स्वागत किया. इस दौरान धर्मेंद्र प्रधान के चेहरे पर मुस्कान थी. एक सांसद ने कहा पहली बार है जब किसी मंत्री ने बिना किसी आरोप के ही इस्तीफ़ा दे दिया। </p>
<p><strong>क्या नई भूमिका के लिए तैयार हैं प्रधान?</strong><br>
अब भविष्य में धर्मेंद्र प्रधान की क्या भूमिका रहेगी? वे ओडिशा बीजेपी के ताक़तवर नेता होने के साथ ही केंद्रीय राजनीति में भी अहम भूमिका निभाते आए हैं. हाल में बिहार विधानसभा चुनाव में प्रभारी रहे और उसके बाद प बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी की जीत के सूत्रधार बने.2024 के लोक सभा चुनाव में बीजेपी को झटका लगा तो उसके तुरंत बाद हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव में प्रधान ने बतौर प्रभारी हैट्रिक लगाने में बड़ा योगदान दिया. इससे पहले वे उत्तर प्रदेश, एमपी, उत्तराखंड, कर्नाटक जैसे कई राज्यों में प्रभारी के तौर पर पार्टी की जीत में भूमिका निभा चुके हैं। </p>
<p>इस्तीफे के बाद पार्टी ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उनके घर गए. भाजपा के शीर्ष नेताओं राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों का समर्थन किया है. भाजपा नेताओं का मानना है कि उनका इस्तीफा उनकी घटती साख का संकेत नहीं, बल्कि "राजनीतिक जवाबदेही", "त्याग" और "राष्ट्र हित" का एक बड़ा उदाहरण है। </p>
<p>आज संसद भवन के गलियारों में कांग्रेस नेता जयराम रमेश उनसे सहानुभूति प्रकट करने पहुंचे. रमेश ने प्रधान से कहा “इट हैपन्स”. इस पर प्रधान ने तुरंत जवाब दिया “नथिंग हैपन्ड”. इसके बाद प्रधान ने रमेश से कहा “आई एम ए स्ट्रीट फाइटर. नॉट एन एसी रूम ऐक्टिविस्ट। </p>
<p>धर्मेंद्र प्रधान का ऐसा कहना ये बताता है कि उनके हौंसले बुलंद हैं. वे अगली ज़िम्मेदारी संभालने के लिए भी तैयार हैं. माना जा रहा है कि उन्हें पार्टी संगठन में कोई ज़िम्मेदारी दी जा सकती है या आने वाले पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों में वे पार्टी की कमान सँभाल सकते हैं. 2022 में यूपी विधानसभा चुनाव में चुनाव प्रभारी रह चुके है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री पर बहू के गंभीर आरोप, पुलिस में दर्ज कराई शिकायत</title>
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<description><![CDATA[  विजयवाड़ा आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री और YSRCP के सीनियर नेता जोगी रमेश और उनके परिवार के लिए एक बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है. दरअसल, जोगी रमेश की बहू मेघना ने अपने ससुर, पति जोही राजीव और परिवार के 9 अन्य सदस्यों के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई है।  मेघना ने 11 लोगों … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 17:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>आंध्र, प्रदेश, के, पूर्व, मंत्री, पर, बहू, के, गंभीर, आरोप, पुलिस, में, दर्ज, कराई, शिकायत</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> विजयवाड़ा</strong></p>
<p>आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री और YSRCP के सीनियर नेता जोगी रमेश और उनके परिवार के लिए एक बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है. दरअसल, जोगी रमेश की बहू मेघना ने अपने ससुर, पति जोही राजीव और परिवार के 9 अन्य सदस्यों के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई है। </p>
<p>मेघना ने 11 लोगों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना, मारपीट और घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया है. एनटीआर जिले की पुलिस ने इस मामले में 24 पन्नों की लंबी शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली है. पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है। </p>
<p>पूर्व मंत्री जोगी रमेश के बेटे जोगी राजीव की शादी मेघना से हुई थी. पुलिस को दी अपनी शिकायत में मेघना ने बताया कि उनकी शादी दिखने में जितनी सामान्य लग रही थी, हकीकत में वैसा कुछ नहीं था. उन्होंने आरोप लगाया है कि शादी के कुछ समय बाद से ही<br>
 उनके साथ ससुराल में ज्यादती शुरू हो गई। </p>
<p>मेधना का कहना है कि उनके पति और ससुराल के बाकी लोग छोटी-छोटी बातों पर उन्हें गालियां देते, मानकिस रूप से प्रताड़ित करते थे और कई बार उनके साथ मारपीट भी की गई। </p>
<p><strong>धर्म छिपाकर शादी करने का बड़ा आरोप</strong><br>
इतना ही नहीं पूर्व मंत्री की बहू ने धार्मिक पहचान को छुपाने का आरोप भी परिवार पर लगाया है. उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि शादी तय होने के समय जोगी रमेश ने अपना धर्म हिंदू बताया था. शादी के दौरान हिंदू रीति-रिवाज ही निभाए गए थे. लेकिन जब शादी के बाद वह ससुराल पहुंची, तब धीरे-धीरे उन्हें सच्चाई का पता चला। </p>
<p>मेघना ने पुलिस को बताया कि हकीकत में यह परिवार ईसाई धर्म से जुड़ा हुआ है. मेघना का आरोप है कि यह बात जानबूझकर उनसे छिपाई जो एक तरह से बहुत बड़ा धोखा है.शिकायत में मेघना ने एक अजीब घटना का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया है कि एक दिन जब वह ससुराल वाले घर में पूजा कर रही थीं और उन्होंने भगवाने के सामने अगरबत्ती जलाई तो ससुराल वाले भड़क गए. मेघना का आरोप है कि ससुराल वालों ने अगरबत्ती की खुशबू का मजाक उड़ाया और उसकी तुलना किसी लाश (डेड बॉडी) के पास आने वाली गंध से कर दी। </p>
<p>इस बात का विरोध करने पर उन्हें बुरी तरह से डराया धमकाया गया, सुसराल वालों ने उन्हें वार्निंग दी कि घर के अंदर जो कुछ भी हो रहा है या धर्म से जुड़ी जो भी सच्चाई है, उसे वह अपने मां-पिता या मायकों वालों से बिल्कुल न बताएं. मेघना ने शिकायत में कहा कि सुसरालियों ने धमकी दी कि अगर उन्होंने अपना मुंह खोला, तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें। </p>
<p><strong>पूर्व मंत्री समेत 11 लोगों के खिलाफ केस दर्ज</strong><br>
मेघना ने शिकायत में कहा कि लगातार मिल रही धमकियों और रोज-रोज की प्रताड़ना से परेशान होकर आखिरकार मेघना ने कानून का दरवाजा खटखटाया. उन्होंने NTR जिला पुलिस के सीनियर अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी आपबीती सुनाई. 24 पन्नों की शिकायत में उन्होंने हर एक घटना का पूरा ब्योरा दिया है। </p>
<p>वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला बेहद संवेदनशील है क्योकिं इसमें एक बड़े राजनीतिक नेता का परिवार शामिल है. पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है. गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे है. पुलिस ने इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है. पुलिस ने कहा कि जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। </p>]]> </content:encoded>
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<title>लोकसभा में पेश हुआ एंटी&#45;पेपर लीक बिल, विपक्ष के हंगामे से संसद की कार्यवाही स्थगित</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली देश में पेपर लीक के बढ़ते मामलों के बीच मोदी सरकार लोकसभा में &#039;पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026&#039; पेश कर दिया है. बीते शुक्रवार को सरकार द्वारा इसी सिलसिले में एक ड्रॉफ्ट बिल पहले ही अप्रूल किया जा चुका है. असल में &#039;पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 14:45:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>लोकसभा, में, पेश, हुआ, एंटी-पेपर, लीक, बिल, विपक्ष, के, हंगामे, से, संसद, की, कार्यवाही, स्थगित</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>देश में पेपर लीक के बढ़ते मामलों के बीच मोदी सरकार लोकसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' पेश कर दिया है. बीते शुक्रवार को सरकार द्वारा इसी सिलसिले में एक ड्रॉफ्ट बिल पहले ही अप्रूल किया जा चुका है. असल में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल,2024 में ही कुछ जरूरी संशोधन किए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>नए बिल में क्या खास होगा?</strong><br>
संशोधित बिल के तहत पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की तैयारी है, इसके अलावा दो महीने के भीतर ही जांच पूरी करने की बात कही गई है. इसके अलावा पेपर लीक के आरोपियों के लिए कम से कम पांच और अधिकतम 10 साल की सजा प्रावधान किया जा रहा है. वहीं संगठित अपराधों के लिए कम से कम सात साल की सजा और 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रस्ताव है। </p>
<p><strong>लोकसभा में नहीं थमा विपक्ष का हंगामा</strong><br>
इसी बीच, विपक्ष की नारेबाजी और हंगामा बरकरार रहा. स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष के सदस्यों से अनुरोध करते हुए कहा, “इस विषय पर बोलने का आपको (विपक्षी सदस्यों को) बोलने का पर्याप्त समय दिया जाएगा. सदन की जितनी सहमति होगी, उतना समय इस विधेयक पर चर्चा के लिए दिया जाएगा. मेरा आग्रह है कि इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सदन का सहयोग करें और चर्चा करें। </p>
<p>उन्होंने विपक्षी सदस्यों से कहा, “आप बहुत दिन से इस विषय पर चर्चा की मांग कर रहे थे. इस पर आज चर्चा है. विधेयक के अलावा आप जो भी सुझाव देंगे, निश्चित रूप से उन सुझावों पर सरकार अमल लाने का प्रयास करेगी. यही लोकतंत्र है, जहां सबके मत और विचार आएं. लोकतंत्र की इस प्रक्रिया में मैं सदन से अपेक्षा करता हूं कि नारेबाजी और तख्तियां दिखाने की जगह चर्चा करें.” स्पीकर ओम बिरला के बार-बार अनुरोध के बावजूद विपक्ष के सदस्यों ने हंगामा जारी रखा. इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। </p>
<p><strong>एनडीए की क्या रणनीति?</strong><br>
जानकारी के लिए बता दें कि आज लोकसभा में डीओपीटी राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह इस बिल को पेश किया. लोकसभा में इस बिल पर आठ से 10 घंटे तक की चर्चा होनी थी. लेकिन विपक्ष के हंगामे की वजह से संसद को स्थगित कर दिया गया है. एनडीए ने तो रणनीति के तहत एक युवा ब्रिगेड आगे कर दी थी जो ना सिर्फ इस बिल के समर्थन में अपनी बात रखने वाली थी बल्कि विपक्ष को भी समझाने की कोशिश करने वाली थी। </p>
<p><strong>पुराने कानून और नए संशोधन बिल में क्या-क्या अंतर है?</strong></p>
<p><strong>    सजा</strong>: 2024 के कानून में जहां पहले 3 से 5 साल तक की सजा का प्रावधान था तो वहीं अब नए संशोधन बिल के मुताबिक इसे बढ़ाकर 5 से 10 साल कर दिया जाएगा।</p>
<p><strong>    जुर्माना:</strong> 2024 के कानून में जहां पहले पेपर लीक के लिए 10 लाख का जुर्माना लगाया जाता था तो वहीं अब इसे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया जाएगा।</p>
<p><strong>    जांच एजेंसी: </strong>पुराने कानून के तहत पहले सेंट्रल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच करती थी, तो वहीं अब नए संसोधन बिल के मुताबिक पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा।</p>
<p><strong>    जांच पूरी: </strong>2024 के कानून में पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच पूरी करने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं थी, लेकिन अब नए संशोधन में 2 महीने के भीतर जांच पूरी करने की बात कही गई है।</p>
<p><strong>    सुनवाई</strong>: पुराने कानून के तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई सामान्य अदालत में होती थी, जबकि संशोधन के बाद पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी।</p>
<p><strong>    फैसला:</strong> 2024 के कानून के मुताबिक पेपर लीक से जुड़े मामलों में फैसला सुनाने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं थी। हालांकि संशोधन बिल में पेपर लीक से जुड़े मामलों में 3 महीने के भीतर फैसला सुनाने का प्रावधान है।</p>
<p><strong>    हाईकोर्ट में अपील:</strong> पुराने कानून के मुताबिक पेपर लीक से जुड़े मामलों के लिए हाईकोर्ट में अपील का समय तय नहीं था, जबकि अब 30 दिन में ही हाईकोर्ट में अपील कर सकेंगे।</p>
<p><strong>    हाईकोर्ट का फैसला:</strong> 2024 के कानून के तहत हाईकोर्ट के फैसले के लिए कोई समय तय नहीं था, लेकिन संशोधन बिल के मुताबिक ऐसे मामलों में 3 महीने में ही हाईकोर्ट का फैसला भी आ जाएगा।</p>
<p><strong>पीएम मोदी युवाओं से कर रहे संवाद</strong><br>
पीएम मोदी पेपर लीक के मामले पर लगातार युवाओं से संवाद कर रहे हैं। उन्होंने पहली बार 23 जुलाई को वीडियो जारी कर पेपर लीक रोकने के लिए नया कानून लाने की बात कही थी, फिर 24 जुलाई को GenZ को सपोर्ट के लिए थैंक्यू कहा था। अब 26 जुलाई को उन्होंने हाई पावर टास्क फोर्स के गठन की बात कही। अपने तीसरे वीडियो संदेश में पीएम मोदी ने हाई पावर टास्क फोर्स के गठन का ऐलान किया है।</p>
<p><strong>हाई पावर टास्क फोर्स का गठन</strong><br>
पीएम मोदी ने अपने वीडियो संदेश में बताया कि नंदन नीलेकणि की अगुवाई वाली 6 सदस्यों की ये कमेटी सरकार को पेपर लीक रोकने के सुझाव देगी, साथ ही परीक्षा में पार्दर्शिता लाने के तरीके भी बताएगी। पीएम मोदी ने कहा कि पेपर लीक के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हमने फास्ट ट्रैक कोर्ट भी बना दिया है। परीक्षा प्रणाली को और पारदर्शी बनाया जाएगा। ये कमेटी सरकार को बताएगी कि एग्ज़ाम सिस्टम में टेक्नॉलाजी कैसे ट्रांसपेरेंसी लाएगी और परीक्षाओं पर भरोसा मज़बूत होगा।</p>
<p><strong>प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की कमान</strong><br>
जंतर मंतर पर प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद पीएम मोदी ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को दे दी है। नेतृत्व में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब भारत की शिक्षा व्यवस्था बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने और स्कूलों के लिए नया पाठ्यक्रम लाने में जुटी है। सरकार को उम्मीद है कि प्रह्लाद जोशी के अनुभव से शिक्षा क्षेत्र में चल रहे सुधारों को गति मिलेगी। शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी ने कहा कि वो पीएम मोदी की उम्मीदों को पूरा करने की पूरी कोशिश करेंगे।</p>
<p><strong>अबतक क्या-क्या कार्रवाई की गई?</strong><br>
फिलहाल पेपर लीक मामले में कड़ा एक्शन लेते हुए सरकार ने NTA के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। जिन अधिकारियों को बर्खास्त किया गया है, उनके खिलाफ क्रिमिनल केस भी दर्ज किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक यह कदम NTA में बड़े पैमाने पर हो रहे बदलाव के तहत उठाया गया है। NTA में सुधार के लिए जल्द ही और एक्शन लिए जाएंगे। इससे पहले गुरुवार को सरकार ने शिक्षा मंत्रालय के दो सचिवों को बदला था। इस एक्शन के साथ ही अब NTA के आउटसोर्सिंग व्यवस्था में बदलाव और तकनीकी सुधार लागू किए जाने की तैयारी है, जिससे परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित किया जा सके। इधर दिल्ली पुलिस ने देश की सभी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में गड़बड़ी की जांच के लिए STF का गठन किया है। इसके दायरे में UPSC से NTA तक सभी प्रमुख परीक्षाएं होंगी। पेपर लीक मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा जा चुका है। </p>
<p><strong>बिल पर कौन-कौन बोलेगा?</strong><br>
इस बिल पर बीजेपी की तरफ से बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या को बोलना था. इनके अलावा एनसीपीआई/टीएमसी के बाग़ियों में सयोनी घोष और मिताली बाग, टीडीपी से लावु श्री कृष्ण देवरायलु, जेडीयू से लल्लन सिंह, शिवसेना से डॉ श्रीकांत शिंदे, एनसीपी से सुनील तटकरे, अपना दल से अनुप्रिया पटेल, लोजपा रामविलास से अरुण भारती आदि भी चर्चा में हिस्सा लेना था। </p>
<p><strong>बड़ी बात यह है कि सोमवार को लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी भी मौजूद थे. प्रश्नकाल के दौरान शिक्षा </strong>विभाग से जुड़े कई सवाल पूछे गए। </p>
<p><strong>प्रधान के इस्तीफे से बदले समीकरण</strong><br>
जानकारी के लिए बता दें कि कुछ दिन पहले ही धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया है. उसके बाद ही प्रह्लाद जोशी को यह जिम्मेदारी मिली है. उन्होंने शनिवार को ही कर्तव्य भवन पहुंच बैठकों का दौर शुरू कर दिया था. उन्होंने एनटीए के अधिकारियों के सथ अलग से भी मीटिंग की है. कई दूसरे अधिकारियों ने भी उन्हें जरूरी ब्रीफ दिया है। </p>
<p><strong>राज्यसभा में आज क्या होगा?</strong><br>
राज्यसभा में आज वंदे मातरम बिल भी पेश होना है. गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय शुक्रवार को राज्य सभा में इसे पहले ही पेश कर चुके हैं. आज सोमवार को इस बिल को पारित करवाने का प्रयास है. इस विधेयक में प्रावधान है कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को भी वही दर्जा मिलेगा, जो राष्ट्रगान को दिया गया है. इस तरह वंदे मातरम के सार्वजनिक गान के दौरान यदि किसी ने उसका अपमान किया तो उसे सजा मिलेगी। </p>
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<title>संसद में धर्मेंद्र प्रधान का भव्य स्वागत, इस्तीफे के बाद पहली बार पहुंचे तो NDA सांसदों ने पाग पहनाकर किया अभिनंदन</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली    शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सोमवार को पहली बार संसद भवन पहुंचे तो उनके पहुंचते ही एनडीए सांसदों ने मकरद्वार पर उनका जोरदार स्वागत किया और उन्हें पाग पहनाया. इसके बाद सभी सांसद पूरे सम्मान के साथ उन्हें सदन के अंदर ले गए।  … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 12:45:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>संसद, में, धर्मेंद्र, प्रधान, का, भव्य, स्वागत, इस्तीफे, के, बाद, पहली, बार, पहुंचे, तो, NDA, सांसदों, ने, पाग, पहनाकर, किया, अभिनंदन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
   शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सोमवार को पहली बार संसद भवन पहुंचे तो उनके पहुंचते ही एनडीए सांसदों ने मकरद्वार पर उनका जोरदार स्वागत किया और उन्हें पाग पहनाया. इसके बाद सभी सांसद पूरे सम्मान के साथ उन्हें सदन के अंदर ले गए। </p>
<p>सूत्रों का कहना है कि इस स्वागत के जरिए सरकार ये साफ संदेश देना चाहती है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी अंतरात्मा की आवाज और स्वेच्छा से लिया गया फैसला था और पूरी सरकार और संगठन उनके इस कदम के साथ मजबूती से खड़ा है। </p>
<p>वरिष्ठ पत्रकारों और विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी द्वारा इस तरह का स्वागत एक तरह का डैमेज कंट्रोल है, ताकि उनकी छवि खराब न हो. सरकार ये साबित करना चाहती है कि प्रधानमंत्री ने उनसे इस्तीफा नहीं मांगा, बल्कि उन्होंने देश और छात्रों के हित में खुद ये निर्णय लिया. उधर, विपक्ष भी मकर द्वार के आसपास इकट्ठा होकर रणनीति बनाने में जुटा दिखा। </p>
<p>वहीं, जब धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के रूप में इस्तीफा दिया था, तब गृह मंत्री अमित शाह, पीयूष गोयल, जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह, निर्मला सीतारमण, दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके घर जाकर मुलाकात की थी. जिनमें बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन भी शामिल थे. बीजेपी के सभी नेताओं ने उनके इस्तीफे को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था, लेकिन ये भी साफ किया था कि प्रधान ने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है। </p>
<p>संसद परिसर में कुछ देर तक दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी का माहौल बना रहा। इस दौरान भाजपा और एनडीए के सांसद धर्मेंद्र प्रधान के साथ खड़े नजर आए और उन्हें अपने घेरे में लेकर संसद भवन के भीतर तक ले गए।<br>
इस दौरान संजय जायसवाल ने धर्मेंद्र प्रधान ने उनका स्वागत करते हुए पटका पहनाया। स्वागत करने के बाद बड़ी संख्या में बीजेपी सांसद मौजूद रहे।</p>
<p>वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष के सांसदों ने NEET पेपर लीक समेत शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।</p>
<p>धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संसद में उनकी यह पहली मौजूदगी रही जिसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से अलग-अलग राजनीतिक संदेश देने की कोशिश दिखाई दी। विपक्ष जहां उनके खिलाफ प्रदर्शन करता नजर आया, वहीं भाजपा सांसदों ने एकजुटता दिखाते हुए उनका समर्थन किया।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>पीएम किसान की अगली किस्त पर बड़ा अपडेट, जानें कब खाते में आएंगे पैसे</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  पीएम किसान योजना का लाभ उठा रहे करोड़ों किसानों के मन में सवाल है कि योजना की अगली किस्त कब जारी की जाएगी। तीसरी किस्त 20 जून को जारी हुई थी। अब किसानों को 24वीं किस्त का इंतजार है। साल सरकार में तीन बार इस किस्त के जरिए किसानों के खाते में पैसा … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 11:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>पीएम, किसान, की, अगली, किस्त, पर, बड़ा, अपडेट, जानें, कब, खाते, में, आएंगे, पैसे</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 पीएम किसान योजना का लाभ उठा रहे करोड़ों किसानों के मन में सवाल है कि योजना की अगली किस्त कब जारी की जाएगी। तीसरी किस्त 20 जून को जारी हुई थी। अब किसानों को 24वीं किस्त का इंतजार है।</p>
<p>साल सरकार में तीन बार इस किस्त के जरिए किसानों के खाते में पैसा भेजती है। वित्त वर्ष की एक किस्त और कैलेंडर ईयर में दो किस्त जारी हो चुकी है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी और कैलेंडर ईयर की आखिरी किस्त कब जारी होगी, इसके संकेत पिछले साल की किस्त से मिल सकते हैं। आइए जानते हैं कि आखिर 24वीं किस्त कब आ सकती है।</p>
<p><strong> किस महीने आ सकती है 24वीं किस्त</strong><br>
पीएम किसान योजना की 24वीं किस्त कब जारी होगी, इस संबंध में कृषि मंत्रालय की ओर से अभी कोई अपडेट नहीं दिया गया है। लेकिन अगर हम पिछले रुझानों से समझें तो अगली किस्त के जारी होने में कम से कम 2 से 3 महीने बाकी है।</p>
<p>दरअसल, पिछले कैलेंडर ईयर की तीसरी और वित्त वर्ष की दूसरी किस्त नवंबर में जारी हुई थी। दिवाली के एक महीने बाद। 20 नवंबर 2025 को पीएम मोदी ने तमिलनाडु के कोयम्बटूर से 21वीं किस्त जारी की थी।</p>
<p>वहीं, पीएम किसान योजना की 18वीं किस्त 5 अक्टूबर 2024 को आयी थी। इस किस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के वाशिम से जारी की थी। इन पिछले रुझानों से लगता है कि अगली किस्त अक्टूबर या फिर नवंबर में जारी हो सकती है।</p>
<p><strong>क्या पीएम किसान योजना की राशि में होगा इजाफा?</strong><br>
पीएम किसान योजना की राशि में इजाफा नहीं होगा। इसे लेकर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में पूछे गए एक सवाल का लिखित जवाब दिया था। जवाब में कहा गया था कि पीएम किसान योजना की राशि बढ़ाने का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>सरकार का बड़ा फैसला, न्यायिक ढांचे और ई&#45;कोर्ट के लिए 2010 करोड़</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  सरकार ने देश में न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और अदालतों के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए 2,010 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसमें न्यायिक आधारभूत संरचना के विकास के साथ-साथ ई-कोर्ट परियोजना के आधुनिकीकरण, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी शामिल हैं। ई-कोर्ट और कोर्ट पर बड़ा निवेश केंद्रीय … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 09:45:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 सरकार ने देश में न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और अदालतों के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए 2,010 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसमें न्यायिक आधारभूत संरचना के विकास के साथ-साथ ई-कोर्ट परियोजना के आधुनिकीकरण, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी शामिल हैं।</p>
<p><strong>ई-कोर्ट और कोर्ट पर बड़ा निवेश</strong><br>
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि जिला और अधीनस्थ न्यायालयों के लिए आधारभूत सुविधाओं के विकास की केंद्रीय प्रायोजित योजना के तहत केंद्रीय बजट 2026 में न्यायिक बुनियादी ढांचे के लिए 810 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा, अदालतों के डिजिटलीकरण के लिए लागू की जा रही ई-कोर्ट परियोजना के तीसरे चरण के लिए बजट में 1,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस राशि का उपयोग अदालतों के डिजिटल परिवर्तन के साथ-साथ आवश्यक प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए किया जाएगा।</p>
<p><strong>तेज न्याय में कई कारक अहम</strong><br>
कानून मंत्री ने कहा कि इन योजनाओं के तहत स्वीकृत खर्च और उपलब्ध धनराशि के आधार पर पर्याप्त बजटीय प्रावधान किए जाते हैं। हालांकि, मामलों के जल्द निपटारे की प्रक्रिया कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती है।</p>
<p><strong>केस निपटारे में प्रक्रिया की भूमिका</strong><br>
उन्होंने कहा कि मामलों की जटिलता, जांच की गुणवत्ता, संबंधित साक्ष्यों की उपलब्धता और उनकी अदालत में पेशी, न्यायालय की प्रक्रियाओं का समय पर पालन, पक्षकारों की सक्रिय भागीदारी और वकीलों द्वारा की जाने वाली पैरवी जैसे कई पहलू मामलों के शीघ्र निपटारे को प्रभावित करते हैं।</p>
<p>सुलभ न्याय के लिए सरकार के कदम<br>
सरकार ने राज्यों और न्यायपालिका के साथ मिलकर देशभर में सुलभ, तेज और प्रभावी न्याय व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं।</p>
<p><strong>2019 में शुरू हुआ फास्ट ट्रैक कोर्ट योजना</strong><br>
इसी क्रम में, अक्टूबर 2019 में बलात्कार और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से संबंधित लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट स्थापित करने की केंद्रीय प्रायोजित योजना शुरू की गई थी। इसमें पॉक्सो अधिनियम, 2012 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए विशेष ई-पॉक्सो अदालतों की स्थापना भी शामिल है।</p>
<p><strong>योजना की सितंबर 2026 तक विस्तार</strong><br>
इस योजना को दो बार आगे बढ़ाया गया। इसका अंतिम विस्तार 31 मार्च 2026 तक किया गया था, जिसके तहत 790 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया था। अब इस योजना को अस्थायी रूप से बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 तक कर दिया गया है।</p>
<p><strong>775 फास्ट ट्रैक कोर्ट सक्रिय</strong><br>
कानून मंत्री ने बताया कि उच्च न्यायालयों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 30 अप्रैल तक देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 775 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट काम कर रही थीं। इनमें 398 विशेष रूप से स्थापित ई-पॉक्सो अदालतें भी शामिल हैं</p>
<p><strong>डिजिटल और तेज न्याय व्यवस्था पर जोर</strong><br>
सरकार का कहना है कि न्यायिक बुनियादी ढांचे के विकास, अदालतों के डिजिटलीकरण और विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाने से देश में न्याय वितरण प्रणाली को और अधिक प्रभावी, तेज और आम नागरिकों के लिए सुलभ बनाने में मदद मिलेगी।</p>
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<title>भारत बना वैश्विक रक्षा साझेदार, मोदी ने पिनाका और कुशा मिसाइलों की सफलता गिनाई</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा साझेदार के रूप में उभर रहा है और लगातार अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कारगिल युद्ध में लड़ने वाले भारतीय सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि भी दी। … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 09:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>भारत, बना, वैश्विक, रक्षा, साझेदार, मोदी, ने, पिनाका, और, कुशा, मिसाइलों, की, सफलता, गिनाई</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा साझेदार के रूप में उभर रहा है और लगातार अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।<br>
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कारगिल युद्ध में लड़ने वाले भारतीय सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि भी दी।</p>
<p><strong>कारगिल वीरोंं को श्रद्धांजलि</strong><br>
उन्होंने कहा कि वर्ष 1999 में पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष के दौरान भारतीय सैनिकों ने कठिन मौसम और दुश्मन की चुनौतियों के बावजूद असाधारण वीरता का परिचय दिया।</p>
<p><strong>वीरता को किया नमन</strong><br>
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ कारगिल विजय दिवस हमें गर्व से भर देता है। यह दिन वीर सैनिकों के अद्भुत साहस की याद दिलाता है।’’</p>
<p><strong>रक्षा क्षेत्र में नई ऊंचाइयों</strong><br>
उन्होंने कहा कि आज रक्षा उत्पादन हो या रक्षा निर्यात , भारत लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।<br>
वैश्विक रक्षा साझेदार बना भारत<br>
उन्होंने कहा, ‘‘भारत एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा साझेदार के रूप में उभर रहा है और देश अपनी रक्षा क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है।’’</p>
<p><strong>ब्रह्मोस अस्त्र समझौता का जिक्र</strong><br>
प्रधानमंत्री ने कहा कि जुलाई की शुरुआत में वह इंडोनेशिया की यात्रा पर थे और उस दौरान ब्रह्मोस एवं अस्त्र मिसाइलों से संबंधित एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ।</p>
<p><strong>पिनाका का सफल परीक्षण</strong><br>
उन्होंने कहा कि इसी महीने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने लंबी दूरी की मारक क्षमता वाले पिनाका रॉकेट का भी सफल परीक्षण किया।</p>
<p><strong>कुशा मिसाइल की सफलता</strong><br>
उन्होंने कहा, ‘‘इस सफलता के पीछे हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की सामूहिक मेहनत है। दो-तीन दिन पहले ही डीआरडीओ ने कुशा मिसाइल का भी सफल परीक्षण किया है।’’</p>
<p><strong>विक्रम-1 ने रचा इतिहास</strong><br>
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले रविवार विक्रम-1 रॉकेट के सफल प्रक्षेपण से हर भारतीय गर्व महसूस कर रहा है और पूरा देश भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘यह निजी क्षेत्र द्वारा विकसित भारत का पहला रॉकेट है। हमारे युवा नवप्रवर्तकों ने वह उपलब्धि हासिल की है जिसकी कभी कल्पना करना भी कठिन था। उन्होंने अद्भुत कौशल, जुनून और धैर्य का परिचय दिया है।’’</p>
<p><strong>विज्ञान में बढ़ता भारत का दम</strong><br>
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण से लेकर अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड में भारत के शानदार प्रदर्शन तक, देश विज्ञान और नवोन्मेष के क्षेत्र में लगातार अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।’’</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>IMD अलर्ट: 27 जुलाई को 10 राज्यों में भारी बारिश, आंधी और वज्रपात की चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली देशभर में मानसून का असर लगातार तेज होता जा रहा है। मौसम विभाग (IMD) ने कल यानी 27 जुलाई को उत्तर, पूर्व और पश्चिम भारत के 10 राज्यों में मूसलाधार बारिश, तेज आंधी और वज्रपात का अलर्ट जारी किया है। अगले 14 घंटे कई राज्यों के लिए भारी पड़ सकते हैं। कई इलाकों … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 09:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>IMD, अलर्ट:, जुलाई, को, राज्यों, में, भारी, बारिश, आंधी, और, वज्रपात, की, चेतावनी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
देशभर में मानसून का असर लगातार तेज होता जा रहा है। मौसम विभाग (IMD) ने कल यानी 27 जुलाई को उत्तर, पूर्व और पश्चिम भारत के 10 राज्यों में मूसलाधार बारिश, तेज आंधी और वज्रपात का अलर्ट जारी किया है। अगले 14 घंटे कई राज्यों के लिए भारी पड़ सकते हैं। कई इलाकों में 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है, जिससे पेड़ उखड़ने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और जलभराव जैसी स्थिति बन सकती है। किसानों, यात्रियों और नदी-समुद्र किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी गई है।</p>
<p>वहीं, पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और अचानक नदियों का जलस्तर बढ़ने का खतरा बना हुआ है। मौसम विभाग ने पर्यटकों से यात्रा पर निकलने से पहले मौसम का ताजा अपडेट देखने की अपील की है। पूर्वी भारत के कई इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की भी आशंका जताई गई है।</p>
<p><strong>देश के 10 राज्यों में बारिश-आंधी का अलर्ट</strong><br>
मौसम विभाग के मुताबिक कल यानी 27 जुलाई को उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश, तेज आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है। कई इलाकों में 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।</p>
<p><strong>दिल्ली में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
दिल्ली (27 जुलाई- भारी बारिश की चेतावनी): दिल्ली में कल यानी 27 जुलाई को दिनभर बादल छाए रहेंगे। कई इलाकों में तेज बारिश के साथ आंधी चलने की संभावना है। इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।</p>
<p><strong>यूपी में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
उत्तर प्रदेश (27 जुलाई- बारिश और आंधी की चेतावनी): मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, मोरादाबाद, बरेली, कानपुर, बदायूं, रामपुर, मैनपुरी, ललितपुर, सीतापुर, हरदोई, बहराइच, कन्नौज, कुशीनगर, प्रयागराज, गोरखपुर और देवरिया में कल यानी 27 जुलाई को भारी बारिश और तेज आंधी की संभावना है। लखनऊ में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।</p>
<p><strong>बिहार में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
बिहार (27 जुलाई- बारिश और वज्रपात का अलर्ट): पटना, गया, सारण, जहानाबाद, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, कटिहार, किशनगंज, अररिया, भागलपुर, बांका, मुंगेर, जमुई, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण में कल यानी 27 जुलाई को भारी बारिश की चेतावनी है। इस दौरान 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका भी बनी हुई है।</p>
<p><strong>झारखंड में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
झारखंड (27 जुलाई- भारी बारिश की चेतावनी): रांची, साहेबगंज, पाकुड़, जामताड़ा, दुमका, बोकारो, हजारीबाग, गिरिडीह, जमशेदपुर, रामगढ़, खूंटी, पश्चिमी सिंहभूम, लोहरदगा, चतरा, गुमला, सिमडेगा और सरायकेला में कल यानी 27 जुलाई को भारी बारिश और तेज आंधी की संभावना है। इस दौरान 55 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।</p>
<p><strong>उत्तराखंड में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
उत्तराखंड (27 जुलाई- बारिश की चेतावनी): चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, हरिद्वार और ऋषिकेश में कल यानी 27 जुलाई को बारिश और तेज हवाओं की संभावना है। देहरादून में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।</p>
<p><strong>हरियाणा में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
हरियाणा (27 जुलाई- बारिश और आंधी की चेतावनी): पानीपत, सोनीपत, भिवानी, फरीदाबाद, पलवल और रेवाड़ी में कल यानी 27 जुलाई को बारिश और तेज आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।</p>
<p><strong>हिमाचल प्रदेश में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
हिमाचल प्रदेश (27 जुलाई- बारिश और आंधी का अलर्ट): बिलासपुर, चंबा, सिरमौर, कांगड़ा, कुल्लू, शिमला, किन्नौर, मंडी और सोलन में कल यानी 27 जुलाई को बारिश और तेज हवा की संभावना है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बना रहेगा। मनाली में अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 11 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।<br>
<strong>गुजरात में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
गुजरात (27 जुलाई- भारी बारिश की चेतावनी): नवसारी, सूरत, तापी, वलसाड, डांग, जूनागढ़, अमरेली, अहमदाबाद, बावला और भावनगर में कल यानी 27 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।</p>
<p><strong>महाराष्ट्र में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
महाराष्ट्र (27 जुलाई- भारी बारिश और आंधी का अलर्ट): मुंबई, ठाणे, पालघर, पुणे, रत्नागिरी, बुलढाणा, अमरावती, गढ़चिरौली और गोंदिया में कल यानी 27 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है। मुंबई में अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।</p>
<p><strong>राजस्थान में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
राजस्थान (27 जुलाई- भारी बारिश और तूफान की चेतावनी): बारां, कोटा, बूंदी, सिरोही, भीलवाड़ा, सीकर, उदयपुर, भरतपुर, अजमेर, जयपुर, जोधपुर, राजसमंद और टोंक में कल यानी 27 जुलाई को भारी बारिश और तेज आंधी की चेतावनी जारी की गई है। कई इलाकों में 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।<br>
मध्य प्रदेश में कल मौसम कैसा रहेगा</p>
<p>मध्य प्रदेश (27 जुलाई- भारी बारिश और आंधी का अलर्ट): खंडवा, देवास, छिंदवाड़ा, बेतूल, नर्मदापुरम (होशंगाबाद), विदिशा, बालाघाट, रीवा, सिंगरौली और उज्जैन में कल यानी 27 जुलाई को भारी बारिश और तेज हवा चलने की संभावना है। भोपाल में अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।</p>
<p><strong>जम्मू-कश्मीर में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
जम्मू-कश्मीर (27 जुलाई- भारी बारिश की चेतावनी): कठुआ, जम्मू, रियासी, रामबन, राजौरी, कुलगाम, पुंछ, कुपवाड़ा, बारामूला और पुलवामा में कल यानी 27 जुलाई को भारी बारिश और तेज आंधी की संभावना है। इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।</p>
<p><strong>पश्चिम बंगाल में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
पश्चिम बंगाल (27 जुलाई- भारी बारिश का अलर्ट): कोलकाता, कालिम्पोंग, कूचबिहार, बीरभूम, हुगली, मुर्शिदाबाद, पुरुलिया, नादिया और दक्षिण 24 परगना में कल यानी 27 जुलाई को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है।</p>
<p><strong>पंजाब में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
पंजाब (27 जुलाई- भारी बारिश और आंधी की चेतावनी): पठानकोट, होशियारपुर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर, एसएएस नगर (मोहाली) और रूपनगर में कल यानी 27 जुलाई को भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है। 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>पीएम मोदी ने मांगे 15 अगस्त भाषण के लिए देशवासियों से सुझाव</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  स्वतंत्रता दिवस के करीब आते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के लिए देशवासियों को विचार और सुझाव साझा करने के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने यह भी अपील की कि देशवासी इस साल भी &#039;हर घर तिरंगा&#039; अभियान की भावना को बेमिसाल उत्साह और गर्व के साथ आगे बढ़ाएं। मन की … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 21:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>पीएम, मोदी, ने, मांगे, अगस्त, भाषण, के, लिए, देशवासियों, से, सुझाव</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 स्वतंत्रता दिवस के करीब आते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के लिए देशवासियों को विचार और सुझाव साझा करने के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने यह भी अपील की कि देशवासी इस साल भी 'हर घर तिरंगा' अभियान की भावना को बेमिसाल उत्साह और गर्व के साथ आगे बढ़ाएं।</p>
<p><strong>मन की बात में किया संबोधित</strong><br>
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 136वें एपिसोड को संबोधित किया। इस दौरान, उन्होंने कहा, "कुछ ही सप्ताह बाद हम अपनी स्वतंत्रता का महापर्व भी मनाएंगे। 15 अगस्त हर भारतीय के लिए गर्व का दिन है। ये उन असंख्य वीरों को याद करने का दिन है, जिन्होंने 'भारत माता' की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया। उनके त्याग और तपस्या की वजह से आज हमारे हाथ में तिरंगा है। इस तिरंगे में हमारे संविधान के आदर्श हैं।"</p>
<p><strong>पूरे सम्मान के साथ अपने घर पर फहराएं तिरंगा</strong><br>
उन्होंने कहा, "पिछले कुछ वर्षों में 'हर घर तिरंगा' अभियान ने पूरे देश को एक अद्भुत भावना से जोड़ा है। हर घर-हर गली में तिरंगे का उत्सव दिखाई देता है। इस साल भी हमें 'हर घर तिरंगा' अभियान को पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ाना है। अपने घर पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराना है।"</p>
<p><strong>' माईगव ' पर मांगे सुझाव</strong><br>
इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने देशवासियों को आमंत्रित करते हुए कहा, "हर वर्ष 15 अगस्त से पहले आप मुझे बहुत से विचार और सुझाव भेजते हैं। इस वर्ष भी आप अपने विचार 'माईगव' पर जरूर साझा कीजिए। मुझे आपके सुझावों का इंतजार है।"</p>
<p><strong>मोदी ने अब्दुल कलाम को किया याद</strong><br>
वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को याद किया। उन्होंने कहा, "27 जुलाई को, भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि है। डॉ. कलाम के व्यक्तित्व में कई प्रेरक रूप थे, लेकिन, उनके हृदय के सबसे करीब एक शिक्षक की भूमिका थी। वे बच्चों और युवाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते थे।"</p>
<p><strong>माता-पिता हमारे पहले गुरु</strong><br>
उन्होंने कहा, "संयोग से, इसी हफ्ते हम 'गुरु पूर्णिमा' का पावन पर्व मनाएंगे। हमारे माता-पिता हमारे पहले गुरु होते हैं। स्कूल के शिक्षक हमें अक्षर ज्ञान देते हैं। गुरु पूर्णिमा ऐसे सभी गुरुओं के प्रति कृतज्ञता जताने का अवसर है। मैं देश के सभी शिक्षकों और गुरुजनों को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूं।"</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>प्रह्लाद जोशी ने संभाला शिक्षा मंत्रालय, परीक्षा सुधार और NEP पर होगी नजर</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। रविवार को उन्होंने मंत्रालय का कार्यभार संभाला और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक भी की। जोशी को यह जिम्मेदारी ऐसे समय सौंपी गई है, जब देश में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 20:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>प्रह्लाद, जोशी, ने, संभाला, शिक्षा, मंत्रालय, परीक्षा, सुधार, और, NEP, पर, होगी, नजर</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। रविवार को उन्होंने मंत्रालय का कार्यभार संभाला और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक भी की। जोशी को यह जिम्मेदारी ऐसे समय सौंपी गई है, जब देश में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा चल रही है।</p>
<p>रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट प्रह्लाद जोशी ने कहा, 'आज मैंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पदभार संभाला। मुझ पर भरोसा जताने और मुझे यह जिम्मेदारी सौंपने के लिए मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभारी हूं। मैं इसे विनम्रता और कर्तव्य-बोध के साथ स्वीकार करता हूं।'</p>
<p><strong>वरिष्ठ अधिकारियों के साथ की बातचीत</strong><br>
गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्वारा पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। कार्यभार संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी ने तुरंत ही शिक्षा मंत्रालय के कामकाज से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की। दरअसल शिक्षा मंत्रालय देश के भविष्य से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्रालय है। नए शिक्षा मंत्री के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ उच्च शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा, कौशल विकास और अनुसंधान को भी नई गति देने महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p><strong>केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों में से एक हैं प्रह्लाद जोशी</strong><br>
प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों में गिने जाते हैं। वह वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी पहले से ही संभाल रहे हैं। इससे पहले वह संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री जैसे महत्वपूर्ण विभागों का का कार्यभार संभाल चुके हैं। उनकी पहचान एक अनुभवी संसदीय रणनीतिकार और संगठनात्मक क्षमता वाले नेता के रूप में रही है। कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं।</p>
<p><strong>प्रह्लाद जोशी के सामने क्या हैं चुनौतियां</strong><br>
लंबे संसदीय अनुभव और प्रशासनिक कार्यशैली के कारण उन्हें सरकार में कई अहम जिम्मेदारियां मिलती रही हैं। फिलहाल जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की परीक्षा प्रणाली में लोगों का विश्वास मजबूत करना है। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत चल रहे सुधारों को गति देना भी उनकी प्राथमिकता है। इसके अलावा विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता, उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान को बढ़ावा, डिजिटल शिक्षा का विस्तार और कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहने की संभावना है।</p>
<p>शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने के साथ ही मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उनकी प्रारंभिक बैठकें शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मंत्रालय परीक्षा सुधार, तकनीक आधारित मूल्यांकन प्रणाली, विश्वविद्यालयों में अनुसंधान और छात्रों से जुड़े लंबित विषयों पर तेजी से निर्णय लेने की दिशा में काम करेगा। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और विद्यार्थियों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि नए शिक्षा मंत्री इन चुनौतियों से किस प्रकार निपटते हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया को किस गति से आगे बढ़ाते हैं।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>सिद्धारमैया का बड़ा ऐलान, 2028 कर्नाटक चुनाव नहीं लड़ेंगे पूर्व सीएम</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली 2028 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने उससे पहले ही बड़ा फैसला सुना दिया है. मंड्या में उन्होंने साफ कहा कि वह 2028 का चुनाव नहीं लड़ेंगे. साथ ही बोले कि सक्रिय राजनीति में बने रहेंगे और लोगों के सुख-दुख की आवाज उठाते रहेंगे. उनके … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 20:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>सिद्धारमैया, का, बड़ा, ऐलान, 2028, कर्नाटक, चुनाव, नहीं, लड़ेंगे, पूर्व, सीएम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
2028 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने उससे पहले ही बड़ा फैसला सुना दिया है. मंड्या में उन्होंने साफ कहा कि वह 2028 का चुनाव नहीं लड़ेंगे. साथ ही बोले कि सक्रिय राजनीति में बने रहेंगे और लोगों के सुख-दुख की आवाज उठाते रहेंगे. उनके इस बयान ने कर्नाटक की सियासत में नई चर्चा शुरू कर दी है.</p>
<p>मंड्या जिले के के.आर. पेट में  रविवार को आयोजित एक निजी कार्यक्रम में सिद्धारमैया ने कहा कि 'आज राजनीति पूरी तरह भ्रष्ट हो चुकी है. ऐसे माहौल में मैंने तय किया है कि 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ूंगा'. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि चुनाव न लड़ने का मतलब राजनीति से दूर होना नहीं है. उनका कहना था कि आगे भी वह जनता के मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते रहेंगे.</p>
<p>सिद्धारमैया के मुताबिक, उनकी उम्र अब 79 साल हो चुकी है. सरकार का कार्यकाल पूरा होने तक वह 81-82 साल के हो जाएंगे. पहले जैसी ऊर्जा अब नहीं रही, इसलिए चुनाव लड़ने का फैसला नहीं लिया है. उन्होंने बताया कि 2028 तक उनके राजनीतिक जीवन के 50 साल पूरे हो जाएंगे. उनकी राजनीतिक यात्रा 1978 में तालुक बोर्ड सदस्य के रूप में शुरू हुई थी.</p>
<p><strong>वरुणा से फिर चुनाव लड़ने का दबाव था</strong><br>
सिद्धारमैया ने कहा कि वरुणा विधानसभा क्षेत्र के लोग एक बार फिर उन्हें चुनाव लड़ते देखना चाहते थे. इसके बावजूद उन्होंने आगे कोई चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. उनका कहना था कि पहले चुनाव में जनता उम्मीदवार की मदद करती थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं.</p>
<p>अपने संबोधन में सिद्धारमैया ने कहा कि आज चुनाव लड़ने के लिए नेताओं को लोगों को पैसा देना पड़ता है. उनके मुताबिक, ईमानदार राजनीति के लिए जगह लगातार कम होती जा रही है. यही वजह है कि उन्होंने भविष्य में चुनाव न लड़ने का फैसला लिया. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनका बाकी जीवन भी जनता की सेवा के लिए ही समर्पित रहेगा.</p>
<p><strong>पहले छोड़ चुके हैं पद</strong><br>
सिद्धारमैया ने 28 मई 2026 को अपना इस्तीफा सौंपा था. अगले दिन, 29 मई को राज्यपाल ने उसे स्वीकार कर लिया. इसके बाद डी. के. शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली. अब चुनाव नहीं लड़ने के ऐलान को भी उनके राजनीतिक सफर के एक अहम पड़ाव के तौर पर देखा जा रहा है.</p>]]> </content:encoded>
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<title>मन की बात में पीएम मोदी ने गिनाई भारत की रक्षा उपलब्धियां</title>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 19:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मन, की, बात, में, पीएम, मोदी, ने, गिनाई, भारत, की, रक्षा, उपलब्धियां</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 136वें एपिसोड को संबोधित किया। मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश अपने सशस्त्र बलों के साहस के साथ-साथ अपनी तकनीकी क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है।</p>
<p>पीएम मोदी ने आईएनएस महेंद्रगिरी, पिनाका रॉकेट प्रणाली और कुशा मिसाइल का जिक्र कर भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने भारतीय नौसेना में आईएनएस महेंद्रगिरी के शामिल होने को स्वदेशी रक्षा विनिर्माण में भारत की प्रगति के उदाहरण के रूप में बताया।</p>
<p><strong>आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती ताकत का प्रतीक</strong><br>
पीएम मोदी ने आईएनएस महेंद्रगिरी की खूबियां बताते हुए कहा कि यह आधुनिक युद्धपोत भारत में ही डिजाइन किया गया है और भारत में ही बनाया गया है। इसमें 75% से ज्यादा स्वदेशी सामग्री लगी है। यह आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती ताकत का प्रतीक है।</p>
<p><strong>पिनाका का भी किया जिक्र</strong><br>
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वदेशी रूप से विकसित पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (एलआरजीआर-120) का भी जिक्र किया, यह रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा विकसित एक उन्नत सटीक निर्देशित तोपखाना रॉकेट प्रणाली है। इस प्रणाली की प्रमाणित मारक क्षमता 60 किमी से 120 किमी तक है। उन्होंने कहा कि इस सफलता के पीछे हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की सामूहिक मेहनत है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कुशा मिसाइल के सफल उड़ान परीक्षण पर भी प्रकाश डाला और इसे भारत की बढ़ती स्वदेशी रक्षा क्षमताओं में एक और मील का पत्थर बताया।</p>
<p><strong>कारगिल युद्ध में लड़ने वाले सैनिकों को दी श्रद्धांजलि</strong><br>
मन की बात कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने 1999 के कारगिल युद्ध में लड़ने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कारगिल विजय दिवस हर भारतीय को गर्व से भर देता है और सशस्त्र बलों द्वारा प्रदर्शित असाधारण साहस की याद दिलाता है।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा, "हमारे जीवन में कुछ ऐसी तारीखें होती हैं जिनके लिए हमें कैलेंडर देखने की जरूरत नहीं होती। आज, 26 जुलाई, ऐसी ही एक तारीख है। आज कारगिल विजय दिवस है। यह दिन हमें गर्व से भर देता है और हमारे बहादुर सैनिकों के असाधारण साहस की याद दिलाता है।</p>
<p>कारगिल की विशाल चोटियां, भीषण मौसम, शत्रु द्वारा खड़ी की गई चुनौतियां, हमारे सैनिकों ने हर परिस्थिति का सामना किया, फिर भी उनका मनोबल हर चुनौती से कहीं अधिक था। उन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। आज, कारगिल विजय दिवस पर, मैं सभी वीर शहीदों और सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि आज का भारत न केवल अपने वीर योद्धाओं के बलिदान को याद रखता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि उनकी कहानियां युवा पीढ़ियों तक पहुंचें।</p>]]> </content:encoded>
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<title>मीम से आंदोलन तक: भारत के Gen&#45;Z ने बदली विरोध की राजनीति</title>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 16:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मीम, से, आंदोलन, तक:, भारत, के, Gen-Z, ने, बदली, विरोध, की, राजनीति</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
अगर दस साल पहले कोई कहता कि एक दिन मीम बनाने वाली पीढ़ी किसी केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा ले लेगी, तो शायद लोग हंस देते. मतलब सालों तक एक बात बार-बार दोहराई जाती रही कि आज की Gen-Z सिर्फ मोबाइल स्क्रीन तक सीमित है. कहा जाता था कि यह पीढ़ी मीम बनाती है, रील्स देखती है, राजनीति से दूर रहती है और किसी बड़े सामाजिक मुद्दे के लिए सड़क पर उतरने की हिम्मत नहीं रखती. लेकिन दक्षिण एशिया की पिछले कुछ वर्षों की घटनाओं ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है.</p>
<p>नेपाल से लेकर बांग्लादेश, श्रीलंका और भारत तक युवाओं ने अपने-अपने मुद्दों पर सत्ता से सवाल पूछे. कहीं सरकारें गिर गईं, कहीं प्रधानमंत्री बदल गए और कहीं पूरी राजनीतिक व्यवस्था हिल गई. लेकिन इन सब आंदोलनों के बीच अगर किसी एक आंदोलन ने यह दिखाया कि लोकतंत्र में विरोध सिर्फ गुस्से से नहीं, बल्कि संयम, व्यंग्य और संवाद से भी जीता जा सकता है, तो वह भारत का Gen-Z आंदोलन था.</p>
<p>नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन कुछ ही घंटों में हिंसक टकराव में बदल गया था. बांग्लादेश में नौकरी में आरक्षण विवाद देखते-देखते सत्ता परिवर्तन तक पहुंच गया. प्रधानमंत्री को देश छोड़ना पड़ा. श्रीलंका में आर्थिक संकट की वजह से राष्ट्रपति भवन तक भीड़ पहुंच गई. तोड़फोड़ मचाई. आगजनी की और राष्ट्रपति और उनके परिवार को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया.</p>
<p>इन तीनों देशों में युवाओं ने इतिहास जरूर लिखा, लेकिन इसकी कीमत भी बहुत भारी चुकानी पड़ी. कहीं दर्जनों, कहीं सैकड़ों लोगों की जानें गईं, सरकारी इमारतें जलाई गईं, सेना सड़कों पर उतरीं और आखिर में सरकारें भी बदल गईं, लेकिन भारत की कहानी अलग थी.</p>
<p>भारत के Gen-Z में भी गुस्सा कम नहीं था. करोड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर था. मेडिकल प्रवेश परीक्षा में पेपर लीक सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं था, बल्कि उस भरोसे पर चोट थी जिसके सहारे लाखों परिवार अपने बच्चों के सपने देखते हैं. वर्षों की तैयारी, महंगी कोचिंग, आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव के बीच जब परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए तो स्वाभाविक था कि नाराजगी फूटती. लेकिन इसी मोड पर भारत के Gen-Z ने ऐसा रास्ता चुना जिसने पूरे आंदोलन को अलग पहचान दी.</p>
<p>दिल्ली का जंतर-मंतर सिर्फ धरना स्थल नहीं रहा. एक ऐसा सार्वजनिक मंच बन गया जहां गुस्सा भी था, तर्क भी था, व्यंग्य भी था और लोकतंत्र पर भरोसा भी. यहां किसी सरकारी इमारत में आगजनी नहीं की गई. कोई तोड़फोड़ नहीं की गई. किसी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने को आंदोलन की जीत नहीं बताया गया. सबसे बड़ी बात यह रही कि आंदोलन की भाषा ने मर्यादा बनाए रखी.</p>
<p><strong>Gen-Z ने मीम्स को बनाया अपना हथियार</strong><br>
शायद यही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत थी. जिस पीढ़ी पर अक्सर "मीम जनरेशन" होने का तंज कसा जाता है, उसी पीढ़ी ने मीम्स को आंदोलन का हथियार बना दिया. लेकिन ये मीम्स किसी शख्स का अपमान करने या गाली देने के लिए नहीं थे. ये व्यवस्था पर व्यंग्य थे. कई मौकों पर भड़काऊ मीम्स देखे भी गए लेकिन आंदोलन का मूल मकसद छात्रों ने नहीं छोड़ा.</p>
<p>किसी पोस्टर पर लिखा था, "मम्मी पोको पैंट्स की लीक प्रोटेक्शन भी NTA से बेहतर है." एक पोस्टर में अर्पित बाला का लोकप्रिय मीम इस्तेमाल करते हुए लिखा गया, "हम पे तो है ही ना… जवाबदेही." एक और पोस्टर ने सोशल मीडिया पर लाखों लोगों को हंसाया, "यहां क्वेश्चन लीक हो रहे हैं और वहां टेलर स्विफ्ट की शादी की एक फोटो तक लीक नहीं हुई." एक ने एक पोस्टर पर लिखा, "ना पढ़ा हूं, न पढ़ने दूंगा."</p>
<p>यह सिर्फ मजाक नहीं था. यह विरोध का नया तरीका था. पहले आंदोलनों में नारे दीवारों पर लिखे जाते थे. अब वही नारे प्लेकार्ड, इंस्टाग्राम रील, वायरल पोस्ट और मीम बनकर लाखों लोगों तक कुछ ही घंटों में पहुंच रहे थे. Gen-Z ने दिखाया कि इंटरनेट सिर्फ एंटरटेनमेंट का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद का भी सबसे बड़ा मंच बन सकता है.</p>
<p>जंतर-मंतर की तस्वीरें भी इस बदलाव की गवाही देती हैं. कहीं छात्र पुलिस बैरिकेड के सामने "फिट चेक" रील बना रहे थे. कहीं दो दोस्त हंसते हुए कह रहे थे, "मम्मी ने कहा है, अगर डंडे पड़ें तो खा लेना." कहीं लाठीचार्ज के बाद चाय पीते हुए छात्र कहते दिखे, "चाय पीकर ही अगला विरोध करेंगे." इन सबके बीच आंदोलन का मूल मकसद कभी गायब नहीं हुआ. यही इस पीढ़ी की सबसे बड़ी राजनीतिक समझ थी. उसने मनोरंजन और संदेश के बीच संतुलन बनाए रखा.</p>
<p><strong>भारत के Gen-Z आंदोलन में दिखा अनुशासन</strong><br>
भारत के इस आंदोलन की एक सबसे बड़ी ताकत उसका अनुशासन भी था. देशभर से हजारों छात्र दिल्ली पहुंचे. संसद मार्च हुआ. पुलिस से धक्का-मुक्की हुई. आंसू गैस और लाठियां चलीं. छात्र हिरासत में भी लिए गए. बड़ी संख्या में छात्र घायल भी हुए. लेकिन आंदोलन का मूल मकसद लगातार एक ही रहा. हिंसा नहीं करनी है. सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाना है. किसी समुदाय या शख्स के खिलाफ नफरत नहीं फैलानी है. संविधान के दायरे में रहकर जवाबदेही मांगनी है.</p>
<p>इतिहास बताता है कि जब आंदोलन हिंसक हो जाते हैं तो उनका मूल मुद्दा पीछे छूट जाता है. टीवी स्क्रीन पर फिर सिर्फ आग, पत्थर और टकराव दिखाई देता है. लेकिन जंतर-मंतर के आंदोलन में कैमरों ने कुछ और रिकॉर्ड किया. मीम्स से भरे प्लेकार्ड्स थे. नेशनल फ्लैग था. संविधान की बातें थीं. "जय हिंद" के नारे थे, और सबसे ज्यादा थे सवाल. शिक्षा मंत्री से सवाल. सिस्टम से सवाल.</p>
<p>यही वजह रही कि इस आंदोलन को समाज के अलग-अलग वर्गों का भी समर्थन मिला. परिवार भी छात्रों के साथ खड़े हुए. डॉक्टर, शिक्षक, एक्टर-एक्ट्रेस और कई सामाजिक संगठनों ने खुलकर आवाज उठाई. आंदोलन किसी दल का नहीं, एक पीढ़ी का आंदोलन बन गया.</p>
<p><strong>भारत के Gen-Z में लोकतंत्र की समझदारी</strong><br>
एक और अहम और बड़ी बात, जिसने भारत के Gen-Z को अलग बनाया, वह थी उसकी लोकतांत्रिक समझदारी. दक्षिण एशिया के कई आंदोलनों में बातचीत का रास्ता बहुत देर से खुला या बिल्कुल नहीं खुला. भारत में छात्रों ने सड़क का दबाव भी बनाए रखा और बातचीत का दरवाजा भी खुला रखा. सीजेपी प्रतिनिधिमंडल सरकार से मिला. मांगें रखीं. जवाब मांगा. बातचीत की, और जब प्रमुख मांगें स्वीकार हुईं तो उसी शांति से आंदोलन खत्म करने का फैसला भी लिया.</p>
<p>यहीं भारत का आंदोलन सबसे अलग नजर आता है. कई बार आंदोलन जीतने के बाद भी खत्म नहीं होते. वे नई राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का मंच बन जाते हैं. लेकिन यहां छात्रों ने कहा कि मकसद पूरा हो गया, इसलिए अब धरना समाप्त किया जाएगा. यह लोकतंत्र की उसी संस्कृति को मजबूत करता है जिसमें विरोध स्थायी टकराव नहीं, बल्कि समाधान तक पहुंचने का माध्यम होता है.</p>
<p><strong>सरकार गिराना ही जीत की पहचान नहीं!</strong><br>
इस आंदोलन ने एक और मिथ को तोड़ा. लंबे समय तक कहा जाता रहा कि आज की युवा पीढ़ी सिर्फ सोशल मीडिया पर सक्रिय रहती है. जंतर-मंतर ने साबित किया कि वही सोशल मीडिया जब वास्तविक मुद्दों से जुड़ता है तो लाखों लोगों को सड़क पर भी ला सकता है. फर्क सिर्फ इतना है कि यह पीढ़ी पोस्टर के साथ मीम भी बनाती है, भाषण के साथ रील भी बनाती है और नारे के साथ व्यंग्य भी करती है.</p>
<p>दक्षिण एशिया के दूसरे आंदोलनों ने सत्ता बदल दी. भारत के आंदोलन ने सोच बदलने की कोशिश की. उसने दिखाया कि लोकतंत्र में हर जीत सरकार गिराने से नहीं होती. कई बार सबसे बड़ी जीत यह होती है कि सत्ता जनता की आवाज सुनने पर मजबूर हो जाए.</p>
<p>यही वजह है कि भारत का Gen-Z आंदोलन सिर्फ एक छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्कृति का नया अध्याय बनकर सामने आया. इसने साबित किया कि नई पीढ़ी आक्रोश को अराजकता में बदले बिना भी प्रभावी हो सकती है. वह मीम बना सकती है, लेकिन मुद्दा नहीं भूलती. वह पुलिस बैरिकेड के सामने खड़ी हो सकती है, लेकिन पत्थर नहीं उठाती. वह सरकार से टकरा सकती है, लेकिन लोकतंत्र से नहीं.</p>
<p>शायद इसलिए आज जब दक्षिण एशिया के हालिया युवा आंदोलनों को एक साथ रखकर देखा जाएगा तो एक बात साफ दिखाई देगी. नेपाल ने सत्ता बदली, बांग्लादेश ने शासन बदला, श्रीलंका ने राष्ट्रपति बदला, लेकिन भारत के Gen-Z ने विरोध की भाषा बदल दी… और शायद इसी बदलाव को एक लाइन सबसे बेहतर तरीके से बयान करती है "ना ईस्ट-ना वेस्ट, भारत का जेन-जी सबसे बेस्ट."</p>]]> </content:encoded>
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<title>काला सागर में खतरा बढ़ा, भारतीय नाविकों के लिए सरकार की एडवाइजरी जारी</title>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 15:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>काला, सागर, में, खतरा, बढ़ा, भारतीय, नाविकों, के, लिए, सरकार, की, एडवाइजरी, जारी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong><br>
केंद्र सरकार ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे संघर्ष वाले समुद्री इलाकों खासकर काला सागर क्षेत्र में नौकरी करने से पहले सुरक्षा हालात का सावधानी से आकलन करें। विदेश मंत्रालय ने ब्लैक सी और उससे सटे समुद्री इलाकों में सुरक्षा जोखिमों के बारे में एक एडवाइजरी जारी की है।</p>
<p>एडवाइजरी में कहा गया है, "जो भारतीय नागरिक संघर्ष वाले इलाकों में या वहां से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर नौकरी करना चाहते हैं उन्हें सलाह दी जाती है कि वे ऐसे काम को स्वीकार करने से पहले वहां मौजूद सुरक्षा जोखिमों का अच्छी तरह से आकलन कर लें।"</p>
<p><strong>'बहुत सावधानी बरतने की जरूरत'</strong><br>
सरकार ने यह भी कहा कि जो लोग ऐसी नौकरी के ऑफर स्वीकार करते हैं उन्हें बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। यह एडवाइजरी पिछले हफ्ते ब्लैक सी इलाके में कमर्शियल जहाजों पर हुए दो हमलों में पांच भारतीयों की मौत के बाद जारी की गई है। कल हुए ताजा हमले में एक भारतीय की मौत हो गई, जबकि 19 जुलाई को इसी तरह के हमले में चार अन्य लोगों की जान चली गई थी।</p>
<p><strong>'हालात बेहद अस्थिर बने हुए हैं'</strong><br>
सरकार ने पहले कमर्शियल शिपिंग पर हुए उन हमलों की निंदा की थी, जिनसे निर्दोष नागरिकों की जान को खतरा पैदा हुआ था। सरकार ने अपनी ताजा एडवाइजरी में कहा है कि चल रहे संघर्ष की वजह से ब्लैक सी और उसके आस-पास के समुद्री इलाकों में हालात बहुत अस्थिर बने हुए हैं।</p>
<p>सरकार ने कहा, "इन इलाकों में चलने वाले या यहां से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को सुरक्षा के बड़े खतरों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें मिसाइल और ड्रोन हमले भी शामिल हैं। अप्रैल 2026 से कमर्शियल जहाजों पर ऐसी घटनाओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और इन घटनाओं में पांच भारतीयों की दुखद मौत भी हुई है।"</p>
<p><strong>सरकार ने और क्या कहा?</strong><br>
इसमें आगे कहा गया है कि जो लोग संघर्ष वाले इलाकों में नौकरी करना चाहते हैं उन्हें जहाज के तय रूट, जिन बंदरगाहों पर जहाज रुकेगा, सुरक्षा इंतजामों, इंश्योरेंस कवरेज और इमरजेंसी में की जाने वाली कार्रवाई के तरीकों के बारे में मालिकों और जहाज ऑपरेटरों से पूरी जानकारी लेनी चाहिए।</p>
<p>एडवाइजरी में कहा गया है, "यह सुनिश्चित करें कि रोजगार की शर्तें लागू अंतरराष्ट्रीय समुद्री मानकों के अनुरूप हों और आपातकालीन स्थिति में चिकित्सा देखभाल, निकासी, स्वदेश वापसी और मुआवजे के लिए उचित प्रावधान हों।"</p>
<p>सरकार ने भारतीय नाविकों से यह भी कहा कि वे अपने परिवार के सदस्यों को यात्रा के कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते रहें और उनसे नियमित संपर्क बनाए रखें। जिन लोगों को कांसुलर सहायता की जरूरत है उन्हें सलाह दी गई है कि वे उस क्षेत्र में भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास से संपर्क करें।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>धर्मेंद्र प्रधान के बाद प्रह्लाद जोशी बने शिक्षा मंत्री, चुनौतियां बड़ी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली कॉकरोच जनता पार्टी और छात्रों के 36 दिनों के आंदोलन के बाद शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद मंत्रालय की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को दी गई है। उन्होंने रविवार को शिक्षा मंत्री का पद संभाल लिया है। इस मौके पर उन्होंने अधिकारियों … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 14:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>धर्मेंद्र, प्रधान, के, बाद, प्रह्लाद, जोशी, बने, शिक्षा, मंत्री, चुनौतियां, बड़ी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
कॉकरोच जनता पार्टी और छात्रों के 36 दिनों के आंदोलन के बाद शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद मंत्रालय की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को दी गई है। उन्होंने रविवार को शिक्षा मंत्री का पद संभाल लिया है। इस मौके पर उन्होंने अधिकारियों के साथ संक्षिप्त बैठक भी की। प्रह्लाद जोशी के पास पहले से मौजूद मंत्रालयों की भी जिम्मेदारी बनी रहेगी। उनके पास फिलहाल नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय भी है।</p>
<p><strong>बीजेपी में अनुभवी नेता के तौर पर पहचान</strong><br>
बता दें कि बीजपी में प्रह्लाद जोशी काफी अनुभवी नेता के तौर पर पहचान रखते हैं। इसके अलावा संसद की कार्यवाही के दौरान भी वह काफी सक्रिय रहते हैं। वह लंबे समय तक आरएसएस से जुड़े रहे हैं। ऐसे में संगठन में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। प्रह्लाद जोशी ने अपनी राजनीति की शुरुआत कर्नाटक के धारवाड़ जिले से की ती। उन्होंने यहां पार्टी के लिए जमकर काम किया और उन्हें इसका इनाम 2004 के आम चुनाव में मिला।</p>
<p><strong>पांच बार के सांसद प्रह्लाद जोशी</strong><br>
2004 में पहली बार प्रह्लाद जोशी धारवाड़ से जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। इसके बाद लगातार पांच चुनाव में उन्होंने जीत हासिल की। प्रह्लाद जोशी पिछले 22 साल से लोकसभा सांसद हैं। पांच बार विजय हासिल करने की वजह से उनकी गिनती कर्नाटक के काफी लोकप्रिय और प्रभावशाली नेताओं में होती है।</p>
<p><strong>बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का भी संभाल चुके हैं जिम्मा</strong><br>
जानकारों का कहना है कि प्रह्लाद जोशी के कंधे यह जिम्मेदारी बीजेपी ने काफी सोच-समझकर डाली है। वह 2012 में कर्नाटक में बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 2014 के बाद उन्हें लोकसभा में अलग-अलग संसदीय समितियों का अध्यक्ष बनाया गया। वहीं 2019 में उन्होंने संसदीय कार्य, कोयल और खनन मंत्रालय का जिम्मा संभाला। तीसरी बार मोदी सरकार बनने के बाद उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई।</p>
<p><strong>नए शिक्षा मंत्री के आगे कई चुनौतियां</strong><br>
इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इतने बड़े आंदोलन के बाद नए शिक्षा मंत्रालय के सामने चुनौतियां बहुत बड़ी हैं। इसके अलावा छात्रों को उनसे उम्मीदें भी ज्यादा हैं। उनके सामने नई शिक्षा नीति को ठीक से लागू करने, आगे की सभी परीक्षाओं को ठीक से संपन्न करवाने, सीबीएसई और एनसीईआरटी में बदलाव करे की जिम्मेदारी होगी। इसके अलावा उन लूप होल्स को भी पता लगाना होगा जहां से पेपर लीक की संभावना होती है।</p>
<p>रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि NEET -UG परीङा में बड़ा बदलाव किया जा सकता है। अगले साल यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी और एससे पहले एनटीए के ढांचे में भी बड़ा परिवर्तन किया जा सकता है। यह भी चर्चा चल रही है कि परीक्षा दो चरणों में करवाई जाए जिससे किसी तरह की गड़बड़ की संभावनाएं खत्म हो जाएं।</p>]]> </content:encoded>
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<title>मन की बात में पीएम मोदी ने करगिल वीरों, स्वदेशी रक्षा और जल संरक्षण सराहा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात कार्यक्रम के 136वें एपिसोड में लोगों को संबोधित कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने सबसे पहले करगिल विजय दिवस के मौके पर शहीदों को याद किया। उन्होंने कहा कि करगिल विजय दिवस की तारीफ को याद करने की जरूरत नहीं है। यह हर भारतीय … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 13:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मन, की, बात, में, पीएम, मोदी, ने, करगिल, वीरों, स्वदेशी, रक्षा, और, जल, संरक्षण, सराहा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात कार्यक्रम के 136वें एपिसोड में लोगों को संबोधित कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने सबसे पहले करगिल विजय दिवस के मौके पर शहीदों को याद किया। उन्होंने कहा कि करगिल विजय दिवस की तारीफ को याद करने की जरूरत नहीं है। यह हर भारतीय के मन मस्तिष्क में रहती है। यह बलिदान की अमर गाथा है। उन्होंने कहा कि करगिल युद्ध में भारतीय जवानों ने कठिन चुनौतियों के बाद भी हार नहीं मानी और देश को जीत दिलाई। वीर जवानों की याद में इस बार नई दिल्ली से द्रास तक विशेष शौर्य यात्रा निकाली जा रही है। पीएम मोदी ने बताया कि स्वदेशी रक्षा तकनीक लगातार भारतीय सेनाओं को मजबूत बना रही हैं। उन्होंने बताया कि INS महेंद्र गिरी नौसेना में शामिल हुआ है और इसी साल पिनाका मिसाइल का भी सफल परीक्षण किया गया है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यक्रम में एक बार फिर से कैच द रेन अभियान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मैंने पिछले मन की बात कार्यक्रम में इसका जिक्र किया था। इसके बाद लोगों ने इस पर काम करना शुरू किया है। पीएम मोदी ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य जहां पानी गिरे उसे रोकना है। लोगों ने इसके लिए विशेष अभियान चलाया है। मध्य प्रदेश के सीधी जिले में 4 हजार तालाब बनाए गए हैं। इसके साथ ही कई राज्यों ने भी इसमें हिस्सा लिया है। कहीं नदियों की गाद साफ की जा रही है, तो कहीं कुओं और तालाबों को नया जीवन दिया जा रहा है।</p>
<p>तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि की पोती कयालविजी ने एसबीआई ब्रांच में मैनेजर को ही थप्पड़ मार दिया। इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है। जानकारी के मुताबिक उनकी लिफ्ट को लेकर बहस हो गई थी।</p>
<p>तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि की पोती कयालविजी ने एसबीआई के बैंक मैनेजर को थप्पड़ जड़ दिया। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि पहले वह बैंक मैनेजर का मजाक उड़ाने वाले हावभाव दिखाती हैं और फिर थप्पड़ मार देती हैं। जानकारी के मुताबिक लिफ्ट ठीक से ना चलने को लेकर उनकी मैनेजर से बहस हो गई थी।</p>
<p><strong>पूर्व केंद्रीय मंत्री की बेटी हैं कयालविजी</strong><br>
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना 20 जुलाई को है। अदियार इलाके में एसबीआई एनआरआई की ब्रांच में कयालविजी पहुंची थीं। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री एमके अलागिरी की बेटी हैं। कयालविजी मैनेजर के ऑफिस पहुंचीं। वीडियो में देखा जा सकता है कि वह बैठकर मैनेजेर से बात कर रही हैं। इसके बाद उनकी मैनेजर से तीखी बहस शुरू हो जाती है और वह अचानक कुर्सी से उठकर मैनेजर को एक थप्पड़ लगा देती हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>NEET आंदोलन में परिवारों के विरोध के बावजूद जंतर&#45;मंतर पहुंचे हजारों Gen Z युवा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली NEET पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए विशाल प्रदर्शन में भाग लेने पहुंचे कई Gen Z युवाओं के लिए पहली लड़ाई दिल्ली में नहीं, बल्कि उनके अपने घरों में लड़ी गई थी. पटना साहिब से आए 21 वर्षीय ऋषभ और उनके साथियों ने अपने … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 12:45:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>NEET, आंदोलन, में, परिवारों, के, विरोध, के, बावजूद, जंतर-मंतर, पहुंचे, हजारों, Gen, युवा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
NEET पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए विशाल प्रदर्शन में भाग लेने पहुंचे कई Gen Z युवाओं के लिए पहली लड़ाई दिल्ली में नहीं, बल्कि उनके अपने घरों में लड़ी गई थी. पटना साहिब से आए 21 वर्षीय ऋषभ और उनके साथियों ने अपने बीजेपी समर्थक परिवारों के कड़े विरोध के बावजूद दिल्ली का रुख किया.</p>
<p>20 जुलाई के पुलिस लाठीचार्ज के बाद उग्र हुए इस आंदोलन ने हजारों युवाओं को आकर्षित किया, जिनमें से कई ने अपने परिवारों की राजनीतिक विचारधारा से अलग हटकर अपने भविष्य के लिए आवाज उठाई और आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा.</p>
<p><strong>बीजेपी समर्थक पिता से विवाद</strong><br>
बिहार के पटना साहिब के रहने वाले 21 वर्षीय ऋषभ जब जंतर-मंतर पहुंचे तो उनके दाहिने हाथ पर पट्टी बंधी हुई थी. उन्होंने बताया कि ये चोट पुलिस कार्रवाई में नहीं, बल्कि उनके पिता के साथ हुए झगड़े में लगी थी. उनके पिता भारतीय जनता पार्टी के कट्टर समर्थक हैं और वो ऋषभ के दिल्ली जाने के पूरी तरह खिलाफ थे. पिता के धकेलने पर ऋषभ को चोट लगी, लेकिन वह अपने तीन चचेरे भाइयों शिवम, संकेत और निशांत के साथ दिल्ली आ गए.</p>
<p>ऋषभ के चचेरे भाई शिवम ने इंडिया टुडे डिजिटल को बताया कि उनके परिवारों में बीजेपी सिर्फ एक राजनीतिक पसंद नहीं, बल्कि परिवार की पहचान का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कट्टर समर्थक यानी 'भक्त' हैं. दूसरी ओर, लल्लनटॉप के कार्यकारी संपादक कुलदीप मिश्रा ने भी 'नेतानगरी' शो में जिक्र किया था कि एक बीजेपी विधायक की बेटी ने भी इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और इंस्टाग्राम पर फोटो शेयर की थी, जिसे बाद में हटा दिया गया था.</p>
<p><strong>पुलिस नहीं परिवार के डर से पहना मास्क</strong><br>
प्रदर्शन स्थल पर बिहार के 22 वर्षीय बीसीए स्नातक आनंद जैसे कई छात्र मास्क पहनकर शामिल हुए. आनंद ने बताया कि वो पुलिस के डर से नहीं, बल्कि अपने बीजेपी समर्थक माता-पिता की पहचान से बचने के लिए मास्क पहन रहे थे. आनंद के माता-पिता लगातार फोन करके उन्हें जंतर-मंतर से दूर रहने की हिदायत दे रहे थे, लेकिन आनंद का मानना था कि ये लड़ाई उनके अपने भविष्य से जुड़ी है.</p>
<p><strong>परिवार से छिपकर प्रदर्शन में पहुंचे</strong><br>
दिल्ली के रहने वाले हिमांशु शर्मा ने भी अपने परिवार से छिपकर प्रदर्शन में हिस्सा लिया. उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता कट्टर बीजेपी समर्थक हैं और उन्होंने घर पर बताए बिना यहां कदम रखा है. हिमांशु ने कहा कि उनके माता-पिता के गलत पार्टी को समर्थन देने के फैसले की वजह से ही आज उन्हें सडकों पर उतरना पड़ा है. वहीं, उनके दोस्तों अंकित और साकिब ने बताया कि उनके परिवारों को उनके प्रदर्शन में शामिल होने से कोई आपत्ति नहीं थी.</p>
<p>जंतर-मंतर पर हर कहानी सिर्फ टकराव की नहीं थी. दिल्ली के बाइपास इलाके की रहने वाली अर्पणा के पिता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े हैं. अर्पणा को लगा था कि उन्हें अनुमति नहीं मिलेगी, लेकिन उनके पिता ने कहा कि विरोध करना उनका अधिकार है और उन्हें सुरक्षित रहकर अपनी बात रखनी चाहिए. वहीं, दूसरी ओर 19 वर्षीय सुहानी ने बताया कि पीएम मोदी को पसंद करने वाले उनके परिवार को बिना बताए ही वो इस आंदोलन का हिस्सा बनी हैं.</p>
<p>दरअसल, सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी से उपजे कॉकरोच जनता पार्टी संगठन ने अभिजीत दिपके के नेतृत्व में ये आंदोलन शुरू किया था. सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के 26 दिनों के अनशन ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर लाकर खड़ा कर दिया. 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा लाठीचार्ज, पेलेट गन और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद छात्रों का गुस्सा बेहद बढ़ गया और जंतर-मंतर पर भारी भीड़ जमा हो गई.</p>
<p>जंतर-मंतर पर जुटे हजारों युवाओं की अपनी-अपनी कहानियां थीं. कोई घर की लड़ाई के निशान लेकर पहुंचा था तो कोई TV रिपोर्टों और रील्स में पहचाने जाने के डर से चेहरे पर मास्क लगाए हुए था. कइयों के फोन घर से लगातार बज रहे थे. इन सभी युवाओं के लिए सबसे बड़ी परीक्षा जंतर-मंतर पर नहीं, बल्कि अपने ही घरों में अपने 'भक्त' परिजनों के खिलाफ जाकर अपनी आवाज बुलंद करने की थी.</p>]]> </content:encoded>
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<title>UN Report: भारत में कुपोषण से ग्रस्त आबादी 42% घटी, लेकिन महंगा भोजन अब भी बड़ी चुनौती</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली भारत में भूख के खिलाफ चल रही लड़ाई में ठोस परिणाम दिख रहे हैं। लेकिन लाखों लोगों के लिए पौष्टिक भोजन अभी भी पहुंच से बाहर है।संयुक्त राष्ट्र की पांच एजेंसियों द्वारा जारी नवीनतम स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड (SOFI) 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पिछले दो दशकों … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 09:45:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Report:, भारत, में, कुपोषण, से, ग्रस्त, आबादी, 42, घटी, लेकिन, महंगा, भोजन, अब, भी, बड़ी, चुनौती</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारत में भूख के खिलाफ चल रही लड़ाई में ठोस परिणाम दिख रहे हैं। लेकिन लाखों लोगों के लिए पौष्टिक भोजन अभी भी पहुंच से बाहर है।संयुक्त राष्ट्र की पांच एजेंसियों द्वारा जारी नवीनतम स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड (SOFI) 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पिछले दो दशकों में भूख को कम करने में सबसे बड़ी प्रगति की है। साथ ही, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बढ़ती खाद्य लागत के कारण आबादी के एक बड़े हिस्से के लिए  पौष्टिक आहार वहन करना मुश्किल बना हुआ है।</p>
<p><strong>आंकड़े दो बिल्कुल अलग-अलग कहानियां बयां करते हैं।</strong><br>
पिछले 20 वर्षों में भारत की कुपोषणग्रस्त आबादी में लगभग 42 प्रतिशत की कमी आई है, जो खाद्य सुरक्षा और कल्याणकारी कार्यक्रमों में सुधार को दर्शाती है। 2019 और 2025 के बीच, स्वस्थ आहार खरीदने में असमर्थ भारतीयों की संख्या में भी लगभग 29 प्रतिशत की गिरावट आई है, हालांकि लगभग 52 करोड़ लोग अभी भी नियमित रूप से  पौष्टिक भोजन नहीं खरीद सकते हैं।</p>
<p><strong>'किफायती होना सबसे बड़ी बाधा है'</strong><br>
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्वस्थ आहार की लागत पिछले छह वर्षों में एक तिहाई से अधिक बढ़ गई है, क्रय शक्ति समता के हिसाब से यह लगभग 4.11 डॉलर प्रति व्यक्ति प्रति दिन तक पहुंच गई है। इसका मतलब है कि कई परिवारों के पास पेट भरने के लिए तो पर्याप्त भोजन होगा, लेकिन फलों, सब्जियों, दालों और प्रोटीन से भरपूर संतुलित और पौष्टिक भोजन करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। इसलिए, मुद्दा अब केवल कैलोरी की उपलब्धता का नहीं है। यह तेजी से किफायती पोषण की उपलब्धता का मुद्दा बनता जा रहा है।</p>
<p>ये निष्कर्ष ऐसे समय में सामने आए हैं जब खाद्य मुद्रास्फीति परिवारों के बजट पर लगातार दबाव डाल रही है, जिससे कई उपभोक्ता स्वास्थ्यवर्धक विकल्पों के बजाय सस्ते खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देने के लिए मजबूर हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत भूख को कम करने में हुई प्रगति को बेहतर पोषण परिणामों में बदलना चाहता है ,  तो कृषि में निरंतर निवेश, कुशल आपूर्ति श्रृंखला और खाद्य पदार्थों की बर्बादी को कम करना आवश्यक होगा।</p>
<p>महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत कुपोषण और मोटापे दोनों से जूझ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में पांच वर्ष से कम आयु के लगभग एक तिहाई भारतीय बच्चे, यानी 32.9 प्रतिशत, बौनेपन के शिकार थे, जो दीर्घकालिक कुपोषण का एक संकेतक है। यह आंकड़ा 2012 में 41.7 प्रतिशत था। हालांकि, बच्चों में बौनेपन में कमी आने के बावजूद, इसी अवधि में बच्चों में मोटापे का प्रचलन 2.1 प्रतिशत से बढ़कर 3.7 प्रतिशत हो गया है। वयस्क आबादी में मोटापा दोगुना हो गया है। </p>
<p><strong>वैश्विक भूख में लगातार तीसरे वर्ष गिरावट दर्ज की गई है।</strong></p>
<p><strong>भारत की प्रगति ने एक व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति में भी योगदान दिया है।</strong><br>
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक भूख में लगातार तीसरे वर्ष गिरावट दर्ज की गई। पिछले वर्ष लगभग 64.5 करोड़ लोग, यानी विश्व की 7.8 प्रतिशत आबादी, भूख से पीड़ित थी, जो 2024 में 8.1 प्रतिशत और 2022 में 8.6 प्रतिशत से कम है। भारत के नेतृत्व में एशिया ने इस सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जबकि लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भी सुधार देखा गया। </p>
<p><strong>फिर भी, दुनिया 2030 तक शून्य भूख के सतत विकास लक्ष्य को प्राप्त करने से अभी भी बहुत दूर है।</strong></p>
<p>रिपोर्ट के अनुमान के अनुसार, वैश्विक स्तर पर अभी भी 2.69 अरब लोग स्वस्थ आहार प्राप्त करने में असमर्थ हैं। अफ्रीका सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्र बना हुआ है, जहां 309 करोड़ से अधिक लोग भूख का सामना कर रहे हैं और इसकी लगभग दो-तिहाई आबादी पौष्टिक भोजन खरीदने में असमर्थ है । </p>
<p><strong>जलवायु परिवर्तन से खाद्य आपूर्ति खतरे में है</strong></p>
<p><strong>संयुक्त राष्ट्र ने आत्मसंतुष्टि के प्रति भी आगाह किया है।</strong><br>
जलवायु परिवर्तन, चरम मौसम की घटनाएं, संघर्ष और वैश्विक व्यापार में व्यवधान खाद्य आपूर्ति को लगातार खतरे में डाल रहे हैं और कीमतों को बढ़ा रहे हैं। अल नीनो की संभावना से जुड़े मौसम संबंधी झटके और वैश्विक व्यापार मार्गों को प्रभावित करने वाले भू-राजनीतिक तनाव सहित नए जोखिम , अगर सरकारें खाद्य प्रणालियों को मजबूत करने में विफल रहती हैं, तो हाल के लाभों को तेजी से उलट सकते हैं। </p>
<p>भारत के लिए अगली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक परिवार को ऐसा भोजन मिल सके जो न केवल पर्याप्त हो, बल्कि पौष्टिक भी हो।</p>]]> </content:encoded>
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<title>दिल्ली से चलेगी देश की सबसे लंबी बुलेट ट्रेन! प्रयागराज, वाराणसी और अयोध्या को जोड़ने वाला 865 KM रूट</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली भारत में मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के बाद 7 नए बुलेट ट्रेन का रोडमैप बनाया गया है. इसमें दिल्ली-वाराणसी (Delhi-Varanasi HSR Corridor) का सबसे पहले आगे बढ़ने के आसार हैं. उनमें 4 हजार किलोमीटर लंबा ट्रैक बिछाया जाएगा. इसके लिए एक स्टैंडर्ड डिजाइन बनाने की तैयारी है. दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन रूट 865 किमी … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 09:45:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारत में मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के बाद 7 नए बुलेट ट्रेन का रोडमैप बनाया गया है. इसमें दिल्ली-वाराणसी (Delhi-Varanasi HSR Corridor) का सबसे पहले आगे बढ़ने के आसार हैं. उनमें 4 हजार किलोमीटर लंबा ट्रैक बिछाया जाएगा. इसके लिए एक स्टैंडर्ड डिजाइन बनाने की तैयारी है. दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन रूट 865 किमी का है, जिसकी डीपीआर नेशनल हाई स्पीड रेल कारपोरेशन (NHSRCL) रेलवे को दे चुका है.  दिल्ली एनसीआर में नोएडा एयरपोर्ट के अलावा मथुरा, आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी जैसे स्टेशन जुड़ सकते हैं. यह देश का सबसे बिजी रूट है। </p>
<p><strong>दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर</strong><br>
डीपीआर मंजूरी, जमीन अधिग्रहण के बाद 2030-2031 तक कॉरिडोर के पहले चरण में दिल्ली-लखनऊ, आगरा तक रूट चालू करने का लक्ष्य रखा गया है. ये सबसे बड़ा बुलेट ट्रेन रूट दिल्ली के साथ उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ेगा. इसमें दिल्ली एनसीआर में सराय काले खां और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट हो सकते हैं.  जबकि बाकी उत्तर प्रदेश में मथुरा, आगरा, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी में स्टेशन होंगे. बिहार में बक्सर, पटना, बेगूसराय, पूर्णिया, किशनगंज स्टेशन और बंगाल में सिलीगुड़ी स्टेशन बनाए जा सकते हैं। </p>
<p><strong>    320 किमी प्रति घंटा की स्पीड से दौड़ेगी बुलेट ट्रेन<br>
    16 लाख करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान<br>
    2027 में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का एक रूट खुलेगा<br>
    मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन रूट 2029 तक पूरा होगा</strong></p>
<p><strong>दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन (Delhi–Varanasi Bullet Train)</strong><br>
दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पूरा होने पर दिल्ली से बनारस 3.5 घंटे में सफर होगा. वाराणसी से सिलीगुड़ी 2 घंटे 55 मिनट में पूरा होगा. ऐसे में दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी की दूरी 6 से 6.5 घंटे में तय की जा सकेगी. प्रोजेक्ट की डीपीआर के बाद केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी और फंडिंग पर बात आगे बढ़ेगी. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर 508 किलोमीटर लंबा है और अगस्त 2027 तक सूरत से बिलिमोरा रूट खोलने की तैयारी है. देश की पहली बुलेट ट्रेन 320 किमी प्रति घंटा की गति से चलेगी. इसकी डिजाइन स्पीड 350 किमी प्रति घंटे की होगी. दिल्ली से पटना की 1000 किमी की दूरी भी सिर्फ 4 घंटे 40 मिनट में तय होगी। </p>
<p><strong>2. दिल्ली-वाराणसी से सिलिगुड़ी सबसे लंबा रूट</strong><br>
दिल्ली-वाराणसी रूट को पश्चिम बंगाल में सिलीगुड़ी से जोड़ा जाएगा. वाराणसी का सिलिगुड़ी  (Varanasi–Patna–Siliguri Corridor) तक 805 का रूट है, जो दिल्ली-वाराणसी रूट से कनेक्ट होगा. इससे दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी 1705 किमी का देश का सबसे लंबा बुलेट ट्रेन रूट होगा. रेलवे वाराणसी-हावड़ा और वाराणसी-सिलिगुड़ी कॉरिडोर के लिए प्राथमिक हवाई और भू सर्वेक्षण कर फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर रहा है. वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच बुलेट ट्रेन से सफर 6 घंटे का हो सकता है। </p>
<p><strong>3. मुंबई-पुणे बुलेट ट्रेन</strong><br>
मुंबई से पुणे बुलेट ट्रेन (Mumbai–Pune Bullet Train) का 170 KM का है, जो सबसे छोटा रूट होगा. मुंबई, नवी मुंबई, लोनावला, खालापुर और पुणे में इसके स्टेशन हो सकते हैं. आर्थिक राजधानी मुंबई और आईटी हब पुणे के बीच की दूरी बुलेट ट्रेन से 48-50 मिनट में पूरी होगी। </p>
<p><strong>4. पुणे-हैदराबाद बुलेट ट्रेन</strong><br>
पुणे-हैदराबाद बुलेट ट्रेन (Pune-Hyderabad High Speed Rail Corridor) महाराष्ट्र और तेलंगाना के आईटी हब को जोड़ेगी. पुणे, अकलूज, पंढरपुर, सोलापुर, कलबुर्गी, तेलंगाना में जहीराबाद और हैदराबाद स्टेशन हो सकते हैं. पुणे से हैदराबाद तक बुलेट ट्रेन के 600 किमी लंबे रूट पर बुलेट ट्रेन 2 घंटे का वक्त लेगी। </p>
<p><strong>5. बेंगलुरु-चेन्नई बुलेट ट्रेन</strong><br>
बेंगलुरु-चेन्नई बुलेट ट्रेन साउथ इंडिया के दो इंडस्ट्रियल हब को जोड़ेगी. दोनों शहरों के बीच 358 किमी की दूरी 1 घंटा 15 मिनट में तय होगी. यह भी सरकार के प्रायोरिटी हाईस्पीड कॉरिडोर में से एक है. चेन्नई सेंट्रल, पूनमल्ली, अरक्कोनम, चित्तूर, बांगरपेट, बेंगलुरु का आईटी हब और बायप्पनहल्ली में बुलेट ट्रेन स्टेशन हैं। </p>
<p><strong>6. बेंगलुरु-हैदराबाद बुलेट ट्रेन</strong><br>
बेंगलुरु-हैदराबाद बुलेट ट्रेन (Bengaluru–Hyderabad High Speed Rail Corridor) इन दो शहरों के बीच हाईस्पीड कनेक्टिविटी देगा. आंध्र प्रदेश के साथ बेंगलुरु और हैदराबाद को कनेक्टिविटी मिलेगी. इसमें बेंगलुरु एयरपोर्ट, तुमकुर, चित्रदुर्ग, बेल्लारी, रायचूर, महबूबनगर, हैदराबाद एयरपोर्ट में स्टेशन बनाए जा सकते हैं. बेंगलुरु हैदराबाद बुलेट ट्रेन से 716 किमी की यात्रा ढाई घंटे में पूरी होगी। </p>
<p><strong>7. चेन्नई-हैदराबाद बुलेट ट्रेन</strong><br>
चेन्नई-हैदराबाद बुलेट ट्रेन (Chennai–Hyderabad High Speed Rail Corridor) दो बड़ी राजधानी को कनेक्ट करेगा.  ये रूट चेन्नई से आंध्र प्रदेश के रास्ते तेलंगाना के हैदराबाद तक जाएगा. हैदराबाद, हैदराबाद एयरपोर्ट, नलगोंडा, सूर्यापेट, खम्मम, विजयवाड़ा-अमरावती, गुंटूर, नेल्लोर, तिरुपति, तिरुवल्लूर और चेन्नई जैसे स्टेशन होंगे. चेन्नई-हैदराबाद बुलेट ट्रेन करीब 3 घंटे में तय होगी। </p>]]> </content:encoded>
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<title>NTA में बड़ा बदलाव! 4 महाप्रबंधकों और 16 युवा प्रोफेशनल्स की होगी भर्ती, विवादों के बीच बड़ा फैसला</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहा है. इस बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. एजेंसी अपने पुनर्गठन के तहत चार महाप्रबंधक (जनरल मैनेजर) और 16 युवा पेशेवरों की भर्ती शुरू की है. यह कदम परीक्षा व्यवस्था और निगरानी को मजबूत बनाने के लिए राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों के … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 09:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>NTA, में, बड़ा, बदलाव, महाप्रबंधकों, और, युवा, प्रोफेशनल्स, की, होगी, भर्ती, विवादों, के, बीच, बड़ा, फैसला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहा है. इस बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. एजेंसी अपने पुनर्गठन के तहत चार महाप्रबंधक (जनरल मैनेजर) और 16 युवा पेशेवरों की भर्ती शुरू की है. यह कदम परीक्षा व्यवस्था और निगरानी को मजबूत बनाने के लिए राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों के बाद उठाया गया है. शिक्षा मंत्रालय के तहत काम करने वाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने अपने पुनर्गठन के तहत बड़ी भर्ती शुरू कर दी है। </p>
<p>एजेंसी ने चार महाप्रबंधक (जनरल मैनेजर) पदों के लिए भर्ती निकाली है और यूपीएससी के टैलेंट सेतु पोर्टल के जरिए 16 युवा पेशेवरों से आवेदन मांगे हैं. यह कदम राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं को बेहतर और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है. इसके लिए गठित प्रोफेसर के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है.  बता दें कि एनटीए के चार महाप्रबंधक (जनरल मैनेजर) पद शुरुआत में तीन साल के अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर भरे जाएंगे। </p>
<p><strong>जाने पद से जुड़े डिटेल </strong></p>
<p><strong>महाप्रबंधक </strong><br>
महाप्रबंधक (मूल्यांकन अनुसंधान एवं विकास और साइकोमेट्रिक्स) का पद परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने से जुड़ा होगा. इस पद पर नियुक्त अधिकारी प्रश्न बैंक तैयार करने, परीक्षा के मानक तय करने, मूल्यांकन प्रक्रिया में सुधार करने और एआई आधारित परीक्षा व मूल्यांकन प्रणाली पर काम की निगरानी करेंगे. इस पद के लिए उम्मीदवार के पास साइकोमेट्रिक्स, शैक्षिक मापन, सांख्यिकी या संबंधित विषय में पीएचडी की डिग्री होनी चाहिए. इसके साथ ही पीएचडी के बाद कम से कम 12 साल का अनुभव और किसी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय परीक्षा संस्थान में कम से कम 5 साल वरिष्ठ पद पर काम करने का अनुभव जरूरी है। </p>
<p><strong>जनरल मैनेजर </strong><br>
जनरल मैनेजर (परीक्षा केंद्र नेटवर्क एवं संचालन) पूरे देश और कुछ विदेशी शहरों में होने वाली एनटीए की परीक्षाओं के संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे.  उनकी जिम्मेदारी परीक्षा केंद्रों का चयन और रजिस्ट्रेशन, उनकी क्षमता और गुणवत्ता की निगरानी, दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करना, परीक्षा के दिन की व्यवस्था संभालना और राज्य व जिला प्रशासन के साथ समन्वय करना होगा. इसके साथ ही छात्रों के पास कम से कम 200 स्थानों के नेटवर्क का प्रबंधन करने का वरिष्ठ परिचालन नेतृत्व अनुभव होना चाहिए। </p>
<p><strong>जनरल मैनेजर (सूचना सुरक्षा)</strong><br>
जनरल मैनेजर (सूचना सुरक्षा) एनटीए की साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे और मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी (CISO) के तौर पर भी काम करेंगे. उनका काम परीक्षा से जुड़े डिजिटल डेटा की सुरक्षा, साइबर हमलों से बचाव, डेटा सुरक्षा कानूनों और आईटी नियमों का पालन करना होगा और 24 घंटे चलने वाले सुरक्षा संचालन केंद्र की निगरानी करना होगा। </p>
<p>इस पद के लिए उम्मीदवार के पास सूचना सुरक्षा के क्षेत्र में कम से कम 12 साल का अनुभव होना चाहिए. साथ ही, वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिका में 5 साल का अनुभव और CISSP, CISM या CISA जैसे प्रोफेशनल सर्टिफिकेट होना जरूरी है। </p>
<p><strong>जनरल मैनेजर (सतर्कता, जांच और फोरेंसिक)</strong><br>
जनरल मैनेजर (सतर्कता, जांच और फोरेंसिक) ये एनटीए में परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच और निगरानी का काम संभालेंगे. उनकी जिम्मेदारी परीक्षा में गड़बड़ी या नकल के मामलों की जांच करना, डिजिटल फोरेंसिक सिस्टम विकसित करना और ऐसे मामलों में सीबीआई, आईबी, ईडी, राज्य पुलिस और साइबर क्राइम एजेंसियों के साथ समन्वय करना होगा। </p>
<p>इस पद के लिए उम्मीदवार के पास जांच, सतर्कता या कानून प्रवर्तन के क्षेत्र में कम से कम 15 साल का अनुभव होना चाहिए. साथ ही वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिका में 5 साल का अनुभव भी जरूरी है। </p>
<p><strong>इन पदों पर भी होगी भर्ती </strong><br>
इसके अलावा भी कई अन्य पदों पर भर्ती की जाएगी. बता दें कि एनटीए ने पहली बार यूपीएससी के टैलेंट सेतु पोर्टल के जरिए 16 युवा पेशेवरों की भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं. इसके लिए वही उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने सिविल सेवा परीक्षा दी है और जिनका नाम टैलेंट सेतु पोर्टल पर दर्ज है। </p>
<p>इन 16 पदों में 12 पद अकादमिक रिसर्च, 2 कानूनी रिसर्च और 2 फाइनेंस एंड अकाउंट्स के लिए हैं.  चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति शुरुआत में 24 महीने के लिए होगी, जिसे अच्छे प्रदर्शन के आधार पर 36 महीने तक बढ़ाया जा सकता है। </p>
<p>एनटीए ने यह भी बताया कि आने वाले हफ्तों में समिति की सिफारिशों के अनुसार अन्य पदों पर भी भर्ती की जाएगी. साथ ही विषय विशेषज्ञों और अनुवादकों का नया पैनल भी बनाया जाएगा, ताकि परीक्षा व्यवस्था, तकनीकी सिस्टम और पारदर्शिता को और मजबूत किया जा सके। </p>]]> </content:encoded>
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<title>नीट विवाद पर CJP का आंदोलन समाप्त, सरकार ने दिए बड़े आश्वासन</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने समेत सरकार के साथ सभी प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा अपना आंदोलन वापस लेने का ऐलान कर दिया है. सरकार और सीजेपी के प्रतिनिधियों के … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 19:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>नीट, विवाद, पर, CJP, का, आंदोलन, समाप्त, सरकार, ने, दिए, बड़े, आश्वासन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने समेत सरकार के साथ सभी प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा अपना आंदोलन वापस लेने का ऐलान कर दिया है. सरकार और सीजेपी के प्रतिनिधियों के बीच तीन दौर की बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया. सीजेपी की तीन प्रमुख मांगें थीं- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर व कानूनी मामलों को वापस लेना और नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देना.</p>
<p>सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ जितेंद्र सिंह और सीजेपी की ओर से सौरव दास और आशुतोष रांका इस वार्ता में शामिल थे. बैठक के बाद सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, 'कॉकरोच जनता पार्टी सद्भावना के आधार पर आंदोलन वापस लेने की घोषणा करती है. हमारी उम्मीद है कि सरकार तय समयसीमा के भीतर सभी सहमत शर्तों को लागू करेगी.' कॉकरोच जनता पार्टी का यह आंदोलन 6 जून को शुरू हुआ था. सौरव दास ने बताया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने की मांग भी स्वीकार कर ली है. उन्होंने कहा कि यह फैसला सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि भाजपा शासित और भाजपा सहयोगी दलों की सरकार वाले राज्यों में दर्ज मामलों पर भी लागू होगा.</p>
<p>उन्होंने कहा, 'हमारी दूसरी मांग थी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएं. सरकार ने इस मांग को भी स्वीकार कर लिया है.' सौरव दास के मुताबिक, सरकार ने भरोसा दिलाया है कि एफआईआर जल्द वापस ली जाएंगी और उनकी प्रतियां भी संगठन को उपलब्ध कराई जाएंगी. उन्होंने बताया कि दिल्ली में करीब 15 से 20 एफआईआर दर्ज हुई थीं, जिनकी प्रतियां तीन से चार दिनों के भीतर मिल जाएंगी. सीजेपी ने सरकार को एक ड्राफ्ट सौंपते हुए एफआईआर वापस लेने और भविष्य में किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं करने का लिखित आश्वासन मांगा था. सौरव दास ने कहा कि सरकार ने मंगलवार तक लिखित गारंटी देने का भरोसा दिया है. उन्होंने कहा कि आंदोलन वापस लेने का फैसला इन्हीं आश्वासनों के आधार पर लिया गया है.</p>
<p><strong>शिक्षा सुधारों पर आगे की बात</strong><br>
वार्ता के दौरान सीजेपी ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर पांच सूत्रीय चार्टर भी सरकार को सौंपा. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार इस चार्टर का अध्ययन करेगी और सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल के साथ आगे भी चर्चा जारी रखेगी. उन्होंने कहा, 'आपने शिक्षा सुधारों को लेकर जो चार्टर दिया है, उसका अध्ययन किया जाएगा और आपके प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत बातचीत भी होगी.' सूत्रों के मुताबिक, शिक्षा सुधारों के मुद्दे पर करीब चार सप्ताह बाद सरकार और सीजेपी के बीच अगली बैठक हो सकती है.</p>
<p><strong>मुआवजे पर भी बन गई सहमति</strong><br>
सीजेपी ने नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग भी उठाई थी. सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार ने नियमों के तहत पीड़ित परिवारों को अधिकतम संभव सम्मानजनक मुआवजा देने पर सहमति जताई है. सौरव दास ने भी कहा कि सरकार ने नीट से जुड़े आत्महत्या के मामलों में पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने का आश्वासन दिया है. सरकार की ओर से प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने और बाकी मुद्दों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद सीजेपी ने अपना आंदोलन वापस लेने का फैसला किया. हालांकि कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि सरकार द्वारा तय समयसीमा में सभी वादे पूरे किए जाने की उम्मीद के साथ ही वे आंदोलन समाप्त करने का फैसला ले रहे हैं.</p>]]> </content:encoded>
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<title>भारत को अमेरिकी टैरिफ से बड़ी राहत: अब 55% एक्सपोर्ट पर केवल 10% अतिरिक्त ड्यूटी</title>
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<description><![CDATA[ नईदिल्ली  भारत को अमेरिका से एक बड़ी राहत मिल गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के एक्सपोर्ट पर पहले 55 फीसदी का टैरिफ लगाया था, लेकिन अब वो घटकर 10 फीसदी रह गया है। असल में अमेरिका ने नया कानूनी प्रावधान लागू कर दिया है जिसके तहत भारत 12.5 फीसदी के टैरिफ ढांचे … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 19:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>भारत, को, अमेरिकी, टैरिफ, से, बड़ी, राहत:, अब, 55, एक्सपोर्ट, पर, केवल, 10, अतिरिक्त, ड्यूटी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नईदिल्ली </strong><br>
भारत को अमेरिका से एक बड़ी राहत मिल गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के एक्सपोर्ट पर पहले 55 फीसदी का टैरिफ लगाया था, लेकिन अब वो घटकर 10 फीसदी रह गया है। असल में अमेरिका ने नया कानूनी प्रावधान लागू कर दिया है जिसके तहत भारत 12.5 फीसदी के टैरिफ ढांचे से निकलर 10 फीसदी के टैरिफ ढांचे में आ गया है। कई दूसरे देशों पर तो अमेरिका ने कई अधिक टैरिफ लगाया है, ऐसे में जानकार इसे भारत के लिए राहत के तौर पर देख रहे हैं।</p>
<p>जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं की समीक्षा की थी। उसका तर्क था कि जबरन श्रम को रोकने के लिए कई देशों से आने वाले सामनों पर आयात शुक्ल लगाना जरूरी था। इसी कड़ी में चीन पर 12.5% टैरिफ लगाया गया है। 36 अन्य देशों पर भी इतना ही टैरिफ लगा दिया गया है। </p>
<p>जानकार मानते हैं कि भारत पर दूसरे देशों की तुलना में टैरिफ कुछ कम जरूर लगा है, लेकिन इसका भी व्यापक असर भारत की कई इंडस्ट्री पर पड़ने वाला है। सबसे ज्यादा असर भारत के कपड़ा उद्योग पर आ सकता है।</p>
<p><strong>भारत कैसे बाल बाल बचा?</strong><br>
भारत के अलावा USTR ने 16 अन्य अर्थव्यवस्थाओं को 10% वाले ब्रैकेट में रखा है इनमें पाकिस्तान, श्रीलंका और खास तौर पर बांग्लादेश शामिल हैं। बांग्लादेश टेक्सटाइल और गारमेंट्स के मामले में भारत का सीधा प्रतियोगी है जो अमेरिका को भारत के सबसे बड़े एक्सपोर्ट कैटेगरी में से एक है।</p>
<p>शुरुआत में भारत पर था 12.5 प्रतिशत वाले ब्रैकेट में जाने का खतरा था। जून 2026 में आई रिपोर्ट के मसौदे में भारत को भी उन देशों में शामिल किया गया था जिन पर 12.5% का कड़ा टैरिफ लगना तय था।</p>
<p>लेकिन भारत सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जून 2026 में अपनी विदेश व्यापार नीति में बड़ा संशोधन किया और जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर देश में पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। भारत के इस नीतिगत सुधार को देखते हुए अमेरिका ने भारत का टैरिफ घटाकर 10% कर दिया।</p>
<p><strong>भारतीय निर्यातकों और व्यापार पर इसका क्या असर होगा?</strong><br>
चूंकि अमेरिका की तरफ से सभी देशों पर पहले से लगाया गया 10% का अस्थाई वैश्विक टैक्स 24 जुलाई 2026 को समाप्त हो गया है इसलिए उसके स्थान पर आए इस नए 10% के स्थायी टैक्स के कारण भारतीय निर्यातकों पर तुरंत कोई नया अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं बढ़ेगा।</p>
<p>10% के इस सुरक्षित स्लैब में आने के कारण भारत अब अपने प्रमुख कपड़ा और गारमेंट प्रतिस्पर्धी देशों जैसे बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका और इंडोनेशिया के बिल्कुल बराबर खड़ा है क्योंकि इन देशों पर भी 10% ही टैक्स लगा है। लेकिन चूंकी भारत का सप्लाई चेन इन देशों के मुकाबले काफी ज्यादा मजबूत है जिसका फायदा मिलेगा।</p>
<p>भारत से अमेरिका होने वाले कुल निर्यात का लगभग 70% हिस्सा जैसे इंजीनियरिंग सामान, टेक्सटाइल, गारमेंट्स, केमिकल्स, लेदर उत्पाद और रत्न एवं आभूषण इस 10% अतिरिक्त शुल्क के दायरे में आएगा। रत्न और आभूषण जैसे उच्च मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए यह शुल्क फिर भी एक चुनौती बना रहेगा।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी थमेगा नहीं आंदोलन, CJP बोली&#45; ‘दो मांगें अभी बाकी हैं’</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जंतर-मंतर पर कॉक्रोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के बीच शनिवार दोपहर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. प्रधान के त्यागपत्र की खबर जैसे ही वायरल हुई, उस पर जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे कॉक्रोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके का रिएक्शन आया. उन्होंने इस्तीफे पर … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 18:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>धर्मेंद्र, प्रधान, के, इस्तीफे, के, बाद, भी, थमेगा, नहीं, आंदोलन, CJP, बोली-, ‘दो, मांगें, अभी, बाकी, हैं’</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जंतर-मंतर पर कॉक्रोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के बीच शनिवार दोपहर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. प्रधान के त्यागपत्र की खबर जैसे ही वायरल हुई, उस पर जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे कॉक्रोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके का रिएक्शन आया. उन्होंने इस्तीफे पर खुशी जताते हुए कहा कि अभी हमारी दो और मांगे हैं.  उन्होंने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन हमारी दो और मांगें हैं. धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है लेकिन जिन बच्चों ने सुसाइड किया है, उनके परिवारों को एक करोड़ रुपए का मुआवज़ा मिलना चाहिए और दूसरा, ये पुलिस वाले जिन्होंने 20 तारीख को एक्शन लिया. उसके लिए पुलिस अधिकारियों पर एक्शन होना चाहिए. याद रखना कॉकरोच से पंगा मत लेना। </p>
<p>दीपके ने कहा, मीडिया वाले कहते थे, राजनेता कहते थे, नहीं देंगे इस्तीफा.. ये बहुत जिद्दी सरकार है. आप जानते नहीं हो क्या इस सरकार को. 36 दिन मुझे हर रोज ये सवाल पूछा जाता था. हर किसी ने यही कहा. इस्तीफा नहीं होगा तो क्या होगा. जब मैं अमेरिका से निकला था तो कई सारे लोग ये कहते थे, तुझे क्या लगता है कि इंडिया में क्रांति आएगी, देखो क्रांति आ गई। </p>
<p>धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है. यह इस बात का सबूत है कि अगर आप डरते नहीं हैं और इस सरकार के सामने झुकते नहीं हैं, तो आप किसी का भी इस्तीफ़ा ले सकते हैं. लोकतंत्र में डरें नहीं. डरना नहीं है, डरेंगे तो कैसी डेमोक्रेसी. ये इस्तीफा इस बात का गवाह है, अगर आप झुकेंगे नहीं तो अच्छे अच्छों का इस्तीफा ले सकते हो। </p>
<p>दीपके ने कहा, कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं है. जिन बच्चों ने सुसाइड किया है, उनके परिवार वालों को मुआवजा मिलना चाहिए. दीपके ने कहा कि 20 जुलाई को जिन पुलिस अफसरों बल प्रयोग किया है, उन पर एक्शन होना चाहिए. अगर हम एक मंत्री का इस्तीफा ले सकते हैं तो याद रखना तुम लोग क्या हो. 20 जुलाई के बाद से जितने भी छात्रों पर केस हुए हैं, वो वापस होने चाहिए. ये हमारी जीत दिखाती है कि हमारा लोकतंत्र कैसा होना चाहिए. रैपिड एक्शन फोर्स और दिल्ली पुलिस वाले माफी भी मांगें। </p>
<p><strong>पीड़ित छात्रों के लिए लड़ाई जारी रखेंगे – अभिजीत दिपके</strong></p>
<p>अभिजीत दिपके ने कहा कि वह पीड़ित छात्रों और उनके परिवारों के लिए लड़ाई जारी रखेंगे और उन्हें न्याय दिलाने तक पीछे नहीं हटेंगे. दिपके ने अपने संबोधन में कहा कि पीड़ितों के लिए मैं लड़ूंगा, न्याय दिलाऊंगा. इस दौरान उन्होंने आंदोलन के प्रतीक का उल्लेख करते हुए कहा, ‘कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं है.’ अभिजीत दिपके ने सरकार के सामने अपनी अन्य मांगों को भी दोहराया. उन्होंने मांग की कि कथित तौर पर परीक्षा विवाद और उससे जुड़े घटनाक्रम के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए. उनका कहना था कि प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ न्याय भी मिलना चाहिए। </p>
<p><strong>अभी जारी रहेगा विरोध-प्रदर्शन</strong><br>
सके अलावा दिपके ने 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. उन्होंने दिल्ली पुलिस के डीसीपी संदीप लांबा, एसीपी अजय शर्मा और सचिन शर्मा का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई के लिए इन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए. दिपके ने कहा कि यदि आंदोलन के दबाव में एक केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा हो सकता है, तो पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी संभव है. उन्होंने समर्थकों से कहा कि अभी एक इस्तीफा हुआ है… अगर एक मंत्री का इस्तीफा ले सकते हो तो तुम लोग क्या हो? उन्होंने आंदोलन को जारी रखने और बाकी मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया. जंतर-मंतर पर मौजूद समर्थकों ने इस दौरान नारेबाजी की और इसे आंदोलन की पहली बड़ी सफलता बताया. वहीं, CJP नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी अन्य मांगें पूरी होने तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>होर्मुज स्ट्रेट के पास LPG टैंकर पर मिसाइल हमला, 28 भारतीय सवार; भारतीय दूतावास ने जारी किया बयान</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली ईरान के जलक्षेत्र में शुक्रवार को एक LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) टैंकर पर हमला हुआ. जहाज पर सवार सभी 28 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं. तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि वह संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है और पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।  भारतीय … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 16:45:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>होर्मुज, स्ट्रेट, के, पास, LPG, टैंकर, पर, मिसाइल, हमला, भारतीय, सवार, भारतीय, दूतावास, ने, जारी, किया, बयान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>ईरान के जलक्षेत्र में शुक्रवार को एक LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) टैंकर पर हमला हुआ. जहाज पर सवार सभी 28 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं. तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि वह संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है और पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। </p>
<p>भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में बताया कि मोजाम्बिक के झंडे वाले LPG टैंकर 'दिशा' पर हमला हुआ, लेकिन राहत की बात यह है कि सभी भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं। </p>
<p>भारतीय समुद्री कर्मचारियों के संगठन फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया के मुताबिक, यह हमला होर्मुज स्ट्रेट के पास एक अज्ञात मिसाइल से किया गया. उस समय टैंकर फारस की खाड़ी की ओर बढ़ रहा था. हालांकि, हमले के पीछे किसका हाथ है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। </p>
<p><strong>होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल</strong><br>
इस घटना ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है. ईरान और ओमान के बीच स्थित यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है. हालिया संघर्ष से पहले दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती थी। </p>
<p><strong>होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षा पर खतरा बरकरार</strong><br>
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ने के बाद इस इलाके में समुद्री गतिविधियां प्रभावित हुई हैं. जुलाई की शुरुआत में दोनों देशों के बीच बना अस्थायी युद्धविराम टूटने के बाद हमलों और जवाबी हमलों का दौर फिर शुरू हो गया, जिससे होर्मुज स्ट्रेट में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। </p>
<p>भारतीय दूतावास ने कहा है कि वह हालात पर लगातार नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>आज का मौसम: दिल्ली&#45;यूपी समेत 15 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, पहाड़ों में तबाही का खतरा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली देश के बड़े हिस्सों में इन दिनों मॉनसून मेहरबान है। पहाड़ों पर भारी बारिश की वजह से बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। वहीं मैदानी इलाकों में भी भारी बारिश की वजह से कई जगहों पर जन-जीवन अस्त-व्यस्त है। मौसम विभाग (IMD) ने 25 जुलाई को भी राजधानी दिल्ली, उत्तर … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 16:45:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>आज, का, मौसम:, दिल्ली-यूपी, समेत, राज्यों, में, भारी, बारिश, का, अलर्ट, पहाड़ों, में, तबाही, का, खतरा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>देश के बड़े हिस्सों में इन दिनों मॉनसून मेहरबान है। पहाड़ों पर भारी बारिश की वजह से बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। वहीं मैदानी इलाकों में भी भारी बारिश की वजह से कई जगहों पर जन-जीवन अस्त-व्यस्त है। मौसम विभाग (IMD) ने 25 जुलाई को भी राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल समेत बड़े क्षेत्र में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। कई जगहों पर बारिश के साथ 60 से 70 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। इसके अलावा बिजली गिरने की भी आशंका है। भारी बारिश के चलते असम की नदियां उफान पर हैं। इसके अलावा पश्चिम के राज्यों में भी भारी बारिश का अनुमान लगाया गया है।</p>
<p><strong>इन राज्यों में होगी मूसलाधार बारिश</strong><br>
मौसम विभाग ने पहाड़ी राज्यों के लिए खास तौर पर अलर्ट जारी किया है। जम्मू-कश्मीर, गिलगित, बाल्टिस्तान, उत्तराखंड. हिमाचल प्रदेश, असम. अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और जम्मू डिवीजन तक कम दबाव का क्षेत्र बन गया है। इस वजह से कई इलागों में मूसलाधार बारिश की संभावना है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में व्यापक बारिश की चेतावनी जारी की गई है।</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश में आज कैसा रहेगा मौसम</strong><br>
मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश में 60 से 70 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाओं के साथ ही बारिश का अलर्ट जारी किया है। मेरठ, मथुरा, आगरा, बांदा, कानपुर, ललितपुर, झांसी, मुजफ्फरनगर और अलीगढ़ में मध्यम से भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा पूर्वी यूपी में लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, प्रयागराज, गोरखपुर, बहराइच, गोंडा, बाराबंकी, संतकबीरनगर, आंबेडकर नगर, बस्ती, मिर्जापुर, वाराणसी, सोनभद्र, चंदौली में भी भारी बारिश हो सकती है।</p>
<p><strong>दिल्ली में होगी झमाझम बारिश</strong><br>
मौसम विभाग ने 25 जुलाई को राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में झमाझम बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके साथ ही आंधी की भी संभावना बताई ई है। दिल्ली ता अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री रह सकता है। एक दिन पहले भी दिल्ली में बारिश हुई थी और इस वजह से लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली है।</p>
<p><strong>बिहार का मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
बिहार में मौसम विभाग ने 25 से 30 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। पटना, गया, समस्तीपुर, दरभंगा, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सिवान, मधुबनी, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर, अररिया में भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने 50 से 60 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का भी अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा झारखंड के भी ज्यादातर जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।</p>
<p><strong>पहाड़ी इलाकों में आफत की बारिश</strong><br>
राजस्थान से जम्मू तक कम दबाव के क्षेत्र बनने की वजह से पहाड़ों में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा कई जगहों पर ओलावृष्टि की भी संभावना है। उत्तराखंड के देहरादून, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चमोली, अल्मोड़ा, नैनीतल, उधमसिंहनगर, पौड़ी गढ़वाल, चंपावत में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. इसके अलावा हिमाचल प्रदेश में चंबा, कंगड़ा, मंडी, शिमला, सिरमौर, हमीरपुर, सोलन, बिलासपुर, कुल्लू में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।</p>
<p><strong>जम्मू-कश्मीर के रामबन, पुलवामा,जम्मू, पुंछ, कुलगाम, कठुआ, डोडा. उधमपुर, गांदरबुल, अनंदनाग और कुपवाड़ा में भारी बारिश हो सकती है।</strong></p>
<p><strong>पश्चिम बंगाल का मौसम</strong><br>
पश्चिम बंगाल में बांकुड़ा, नादिया, पुरुलिया, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व बर्धमान, उत्तर 24 परगना, मुर्शिदाबाद, झाड़ग्राम और दुर्गापुर में भारी बारिश की संभावना है। पश्चिम बंगाल में भी नदियां उफान पर हैं। इसके साथ ही ओडिशा में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मछुआरों को गहरे समंदर में ना जाने की चेतावनी दी गई है।</p>
<p><strong>पंजाब और हरियाणा का मौसम</strong><br>
मौसम विभाग ने पंजाब में भी 26 से 30 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। लुधियाना, पटियाला, फरीदकोट, संगरूर, अमृतसर, पटियाला, जालंधर और गुरदासपुर में बारिश हो सकती है। इसके साथ ही हरियाणा में तेज हवाओं के साथ ही झमाझम बारिश की संभावना है। गुजरात और महाराष्ट्र के विदर्भ, गोंदिया, चंद्रपुर, मुंबई, ठाणे, बीड, नांदेड़ और हिंगोली में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, बोले&#45; देश के युवाओं को कुचक्र में नहीं फंसने देंगे; अभिजीत दीपके का बड़ा बयान</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है. NEET-UG परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर देशभर में जारी विवाद और जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच उन्होंने यह फैसला लिया. धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर एक इसका ऐलान किया … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 16:45:12 +0530</pubDate>
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<media:keywords>धर्मेंद्र, प्रधान, का, इस्तीफा, बोले-, देश, के, युवाओं, को, कुचक्र, में, नहीं, फंसने, देंगे, अभिजीत, दीपके, का, बड़ा, बयान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है. NEET-UG परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर देशभर में जारी विवाद और जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच उन्होंने यह फैसला लिया. धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर एक इसका ऐलान किया और इस्तीफा देने की वजह भी बताई। </p>
<p>अपने चिट्ठी में उन्होंने लिखा कि पिछले चार दशक से अधिक समय से वह छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं. उनका हमेशा से मानना रहा है कि मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला होती है। </p>
<p>धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, "3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आते ही सरकार ने तुरंत कार्रवाई की. मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई, परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया और अगले साल से NEET को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में आयोजित करने की घोषणा की गई। </p>
<p><strong>धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा-दीपके</strong><br>
अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर से कहा 'जब मैं अमेरिका से निकला था, तब कहा जा रहा था क्या होगा. लेकिन धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा.' अभिजीत दीपके और उनके साथी फिलहाल जंतर-मंतर पर जश्न मना रहे हैं. इससे पहले प्रधान ने इस्तीफा के साथ-साथ एक लेटर भी शेयर किया है। </p>
<p>धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा निष्पक्ष और सुचारु रूप से कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता थी. इसके लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, छात्रों और अभिभावकों के सहयोग से 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई. 16 जुलाई को घोषित परिणामों में गरीब और वंचित परिवारों के कई प्रतिभाशाली छात्रों को सफलता मिली, लेकिन कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा। </p>
<p>अपने इस्तीफे पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं ने उन्हें बेहद व्यथित किया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनके व्यक्तिगत सम्मान का विषय नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का सवाल है. उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि छात्रों का भविष्य कानूनी विवादों और राजनीतिक टकराव में उलझे या उनका ध्यान पढ़ाई से भटके. इसी भावना के साथ उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया। </p>
<p>चिट्ठी के आखिर में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में आगे भी वह भारत माता, ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम करते रहेंगे। </p>
<p><strong>'निरंतर सहयोग के लिए हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं'</strong><br>
प्रधान ने आगे कहा, ''मैं आदरणीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन, विश्वास और निरंतर सहयोग के लिए हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। साथ ही, मंत्रिपरिषद के अपने सभी सम्मानित सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा उन सभी व्यक्तियों का भी आभार व्यक्त करता हूँ, जिनके साथ मुझे कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। राष्ट्रसेवा मेरे जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मैं इसके लिए सदैव समर्पित रहूंगा। प्रभु श्रीजगन्नाथ जी के आशीर्वाद से मैं भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता तथा देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हर संभव रूप में स्वयं को समर्पित रखूंगा।''</p>
<p>
<strong>सीबीटी मोड में परीक्षा कराने का लिया निर्णय</strong><br>
किंतु 3 मई 2026 को हुई NEET-UG की परीक्षा में सामने आई अनियमितता पाई गई। भारत सरकार ने इसको तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद किया एवं पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की गई। इसके साथ ही अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी (Computer-based-test) मोड में करने का निर्णय लिया गया।</p>
<p>इस दौरान हमारी प्रमुख प्राथमिकता यह रही कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की जाए। इसके लिए whole of government approach के तहत काम किया गया। इसमें भारत सरकार के साथ राज्य सरकार, विशेषकर जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही, छात्रों, अभिभावक और माता-पिता के सहयोग से 21 जून 2026 को यह परीक्षा पूर्ण हुई।</p>
<p>पहले ही दिन से, इसपर मैंने जिम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे, किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।</p>
<p><strong>मेधावी छात्रों को मिली सफलता</strong><br>
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आगे लिखा कि 16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली। परंतु इस दौरान भी कई छात्रों को गुमराह करने के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे मन अत्यंत व्यथित हुआ।</p>
<p>मैं सदैव हमारे प्रजातंत्र की शक्ति में अटूट विश्वास रखने वाला रहा हूं तथा युवाओं की आकांक्षाओं, सपनों और अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता आया हूं। वे केवल भारत का भविष्य ही नहीं हैं, बल्कि एक नए और विकसित भारत के वाहक, निर्माता और भविष्य के शिल्पकार भी हैं।</p>
<p><strong>यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं</strong><br>
धर्मेंद्र प्रधान ने आगे लिखा कि पिछले 10 दिनों का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुःखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। भारत की युवाशक्ति ही, इस देश की असली ताकत है। देश की युवाशक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे, यही मेरा संकल्प है।</p>
<p>जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में ना उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र (इस्तीफा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है।</p>
<p>मैं प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन, विश्वास और निरंतर सहयोग के लिए हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। साथ ही, मंत्रिपरिषद के अपने सभी सम्मानित सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा उन सभी व्यक्तियों का भी आभार व्यक्त करता हूं, जिनके साथ मुझे कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। राष्ट्रसेवा मेरे जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मैं इसके लिए सदैव समर्पित रहूंगा।</p>
<p>प्रभु श्रीजगन्नाथ जी के आशीर्वाद से मैं भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता तथा देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हर संभव रूप में स्वयं को समर्पित रखूंगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>Gen Z पर दांव उल्टा पड़ा! PM मोदी के समर्थन में बढ़ते रुझान ने विरोधियों की रणनीति बदली</title>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 14:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>GenZ यानी आज की पीढ़ी. जेनजी आज के जमाने की ताकत है. इसकी झलक पूरी दुनिया देख चुकी है. बांग्लादेश और नेपाल में तो जेनजी ने तख्तापलट करवा दिया था. उसी जेनजी को लेकर अब भारत में नैरेटिव गढ़े जा रहे हैं. नैरेटिव यह कि कि भारत का युवा यानी जेनजी सरकार से दूर हो रहा है. सरकार और सिस्टम से नाराज है. पीएम मोदी से खफा है. यहां भी जेनजी नेपाल और बांग्लादेश जैसी स्थिति देख रहे हैं. इन नैरेटिव से देश के दुश्मन हमारे जेनजी को उकसाने में लगे हैं. भारत के दुश्मन जेनजी के सहारे ख्वाब देख रहे हैं कि यहां भी नेपाल और बांग्लादेश जैसी स्थिति बनाई जा सकती है. मगर उनके ख्वाबों पर खुद जेनजी ने ही पानी फेर दिया है. जी हां, जिस जेनजी को भड़का कर देश के दुश्मन नेपाल-बांग्लादेश जैसा हाल होने का ख्वाब देख रहे हैं, वह जेनजी तो पीएम मोदी का जबरा फैन हो चुका है. अगर आपको यकीन नहीं तो जरा नीचे के डेटा पर गौर करें। </p>
<p>जी हां, दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रोटेस्ट चल रहा है. नीट पेपर लीक के खिलाफ देश के अलग-अलग इलाकों में भी प्रदर्शन चल रहे हैं. इस बीच जेनजी को लेकर नैरेटिव भी खूब फैलाए जा रहे हैं. मगर अभी जो हकीकत सामने आई है, उसे देश के दुश्मन पचा नहीं पाएंगे. जिस जेनजी को वो भारत के खिलाफ भड़का रहे थे, वो तो खुद पीएम मोदी का फैन है. पिछले 24 घंटे में सोशल मीडिया पर जो तस्वीर सामने आई, उसने जेनजी वाले दावों को झटका दे दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो ने इंस्टाग्राम पर रिकॉर्ड तोड़ दिया है. पीएम मोदी के वीडियो को 24 घंटे के भीतर 30.6 करोड़ (306 मिलियन) से ज्यादा व्यूज मिले हैं. इतना ही नहीं, लाखों युवाओं ने वीडियो पर प्रतिक्रिया दी और रातोंरात उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से करीब 10 लाख नए लोग भी जुड़ गए. इसके बाद खुद प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को खास तौर पर धन्यवाद कहा। </p>
<p><strong>इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी का वीडियो</strong><br>
दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार देर रात इंस्टाग्राम पर एक नया वीडियो शेयर किया. इस वीडियो में उन्होंने कहा, ‘थैंक्स फ्रेंड्स… कल देर रात आपसे मिलने का मौका मिला. मेरे वीडियो पर आपने जिस तरह प्रतिक्रियाएं दीं और सकारात्मक सुझाव दिए, उसके लिए आप सभी का धन्यवाद. आपका यह प्यार बना रहेगा और हमारा नाता आगे भी ऐसे ही जुड़ा रहेगा.’ वीडियो शेयर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि वह खास तौर पर उन युवाओं का धन्यवाद करना चाहते हैं, जिन्होंने उनका वीडियो देखा और उस पर अपनी राय रखी।</p>
<p><strong> प्रधानमंत्री मोदी के इंस्टा वीडियो ने बनाया रिकॉर्ड, नए मैसेज में युवाओं को कहा- धन्यवाद</strong></p>
<p><strong>क्या था उस वीडियो में</strong><br>
यहां बताना जरूरी है कि इससे एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं, छात्रों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए एक वीडियो जारी किया था. नीट पेपर लीक और सीजेपी प्रोटेस्ट से जुड़ा यह वीडियो कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर छा गया. खबर लिखे जाने तक 322 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका था. किसी वीडर के लिए यह बेहद बड़ा डिजिटल रिकॉर्ड माना जा रहा है। </p>
<p><strong>पीएम का वीडियो बना रहा रिकॉर्ड</strong><br>
पीएम मोदी के इस वीडियो के वायरल होने का असर केवल व्यूज तक सीमित नहीं रहा. प्रधानमंत्री मोदी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक ही रात में करीब 10 लाख नए फॉलोअर्स जुड़ गए. इससे पहले भी वह इंस्टाग्राम पर दुनिया के सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले राजनेता बन चुके हैं. डेटा के मुताबिक, उनके इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ यानी 102 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं और यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह दुनिया के पहले राजनेता हैं। </p>
<p><strong>क्यों हो रही पीएम मोदी के वीडियो की चर्चा</strong><br>
प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि इसकी तुलना दुनिया के मशहूर यूट्यूबर IShowSpeed की वायरल इंस्टाग्राम रील से की जा रही है. हाल ही में फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल के दौरान बीटीएस के साथ IShowSpeed की रील को पहले 24 घंटे में करीब 30 करोड़ व्यूज मिले थे. अब प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो 30.6 करोड़ से ज्यादा व्यूज के साथ उस आंकड़े को पार करता दिखाई दे रहा है। </p>
<p><strong>पीएम मोदी जेनजी के बीच पॉपुलर</strong><br>
बहरहाल, आज सोशल मीडिया सबसे ज्यादा युवाओं का मंच माना जाता है. इंस्टाग्राम पर सबसे सक्रिय यूजर्स भी बड़ी संख्या में Gen Z हैं. ऐसे में किसी वीडियो का इतनी तेजी से वायरल होना और करोड़ों व्यूज हासिल करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि जेनजी के बीच प्रधानमंत्री मोदी की पहुंच अभी भी बेहद मजबूत है. अब भी जेनजी पीएम मोदी का फैन है. तभी तो जेनजी वाले प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी का यह वीडियो रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड तोड़ रहा है. पीएम मोदी भी जानते हैं कि जेनजी के बीच वह कितने पॉपुलर हैं. यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने धन्यवाद संदेश में सबसे पहले युवाओं का जिक्र किया। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>CJP प्रदर्शन के बीच मोहन भागवत का बड़ा संदेश, बोले&#45; नई पीढ़ी सवाल पूछती है, संवाद जरूरी</title>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:45:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>CJP, प्रदर्शन, के, बीच, मोहन, भागवत, का, बड़ा, संदेश, बोले-, नई, पीढ़ी, सवाल, पूछती, है, संवाद, जरूरी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>दिल्‍ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुआई में विरोध-प्रदर्शन चल रहा है. NEET पेपर लीक के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्‍तीफे की मांग तेज हो गई है. CJP के प्रतिनिधियों की शुक्रवार को सरकार के दो केंद्रीय मंत्रियों के साथ बातचीत हुई थी. इस वार्ता में CJP की तरफ से सरकार के प्रतिनिधियों के समक्ष कुछ मांगें रखी गईं. बाद में मीडिया से बात करते हुए CJP के प्रतिनिधियों ने साफ कर दिया कि धर्मेंद्र प्रधान जब तक इस्‍तीफा नहीं देंगे, CJP का प्रदर्शन यूं ही चलता रहेगा. युवाओं और छात्रों के इस विरोध-प्रदर्शन के बीच अब राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान सामने आया है. उन्‍होंने कहा कि नई पीढ़ी हर बात पर सवाल पूछती है और उन्‍हें तर्क से समझाना पड़ता है. मोहन भागवत ने कहा कि बच्चों और युवाओं को अधिक अपनापन, समय और संवाद की जरूरत है। </p>
<p>आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा है कि आज के समय में परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चों के साथ संवाद बनाए रखने की है. उन्होंने माता-पिता से आह्वान किया कि वे बच्चों को पर्याप्त समय दें, उनकी जिज्ञासाओं का धैर्यपूर्वक समाधान करें और अपने व्यवहार से उन्हें संस्कार दें, क्योंकि बच्चे केवल उपदेश से नहीं बल्कि माता-पिता के आचरण से अधिक सीखते हैं. मोहन भागवत शुक्रवार को अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में विश्वमांगल्य सभा की ओर से आयोजित ‘युगानुकूल मातृत्व’ विषय पर जागरूकता सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि मां ही मनुष्य के जीवन की पहली गुरु होती है और वही जीवनभर भावनात्मक संबल प्रदान करने वाली सबसे महत्वपूर्ण शक्ति है. सृष्टि का निर्माण, पालन-पोषण और उसके निरंतर विकास में मातृत्व की केंद्रीय भूमिका है। </p>
<p><strong>बच्चों के प्रश्नों का जवाब और मार्गदर्शन जरूरी</strong><br>
मोहन भागवत ने कहा कि समय और परिस्थितियां बदल सकती हैं, लेकिन मातृत्व के मूल मूल्य कभी नहीं बदलते. मातृत्व का आधार प्रेम, त्याग, करुणा और संस्कार है, जो हर युग में समान रूप से प्रासंगिक रहते हैं. उन्होंने कहा कि माता-पिता की जिम्मेदारी केवल बच्चों की शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तित्व निर्माण और नैतिक विकास की भी है. इसके लिए माता-पिता को स्वयं भी निरंतर सीखते रहना चाहिए ताकि वे बच्चों के प्रश्नों और बदलते समय की चुनौतियों का सही मार्गदर्शन कर सकें. आरएसएस के सरसंघचालक ने कहा कि भारतीय संस्कृति में परिवार व्यवस्था और मातृत्व को हमेशा विशेष महत्व दिया गया है. उन्होंने स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महान विचारकों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सभी ने मातृत्व और भारतीय जीवन मूल्यों की महत्ता को अपने विचारों में प्रमुख स्थान दिया है। </p>
<p><strong>‘भारतीय संस्‍कृति के बारे में भ्रम फैलाने का प्रयास किया जाता है’</strong><br>
मोहन भागवत ने कहा कि समाज में कई बार भारतीय संस्कृति और परंपराओं को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास किया जाता है, जबकि भारत की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध और सशक्त है. उन्होंने लोगों से अपने इतिहास, ज्ञान और परंपराओं पर विश्वास बनाए रखने का आग्रह किया. साथ ही कहा कि भारत की सबसे बड़ी पहचान विविधता में एकता है और देश में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भारतीय संस्कृति तथा जीवन मूल्यों के अनुरूप जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए. उन्होंने विदेशी जीवनशैली की अंधी नकल से बचने और भारतीय परिवार व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर जोर दिया. विश्वमांगल्य सभा ने 23 और 24 जुलाई को विश्व युवक केंद्र में उत्तर भारत का राष्ट्रीय जागरूकता सम्मेलन आयोजित किया था. सम्मेलन में लगभग 280 महिलाओं ने भाग लिया, जबकि समापन समारोह में विभिन्न क्षेत्रों की 900 से अधिक प्रमुख महिलाएं उपस्थित रहीं. ‘युगानुकूल मातृत्व’ विषय पर आयोजित इस संवाद के लिए करीब 2,000 से 2,500 महिलाओं ने रजिस्‍ट्रेशन कराया था। </p>
<p><strong>23 प्रांत में अधिवेशन</strong><br>
संगठन के अनुसार, वर्ष 2026 में देश के 23 प्रांतों में आयोजित अधिवेशनों में लगभग 37 हजार महिलाओं ने भाग लिया. विश्वमांगल्य सभा वर्तमान में 33 प्रांतों में सक्रिय है और उसके साथ करीब छह लाख महिलाएं जुड़ी हैं. भारत के अलावा संगठन की गतिविधियां अमेरिका और नीदरलैंड सहित 14 देशों में संचालित हो रही हैं. संगठन का उद्देश्य महिलाओं में मातृत्व, संस्कार, सांस्कृतिक चेतना, नैतिक मूल्यों और नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित कर परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को और सशक्त बनाना है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>पेपर लीक का मास्टरमाइंड बिहार से गिरफ्तार, NTA के 47 अफसर बर्खास्त; शिक्षा मंत्रालय का बड़ा एक्शन</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली    महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. लंबे समय से फरार चल रहे कथित पेपर लीक माफिया बिजेंद्र गुप्ता को बिहार से गिरफ्तार कर लिया गया है. उसके साथ एक अन्य आरोपी को भी हिरासत में लिया गया है।  महाराष्ट्र पुलिस के मुताबिक, बिजेंद्र … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 12:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>पेपर, लीक, का, मास्टरमाइंड, बिहार, से, गिरफ्तार, NTA, के, अफसर, बर्खास्त, शिक्षा, मंत्रालय, का, बड़ा, एक्शन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong><br>
   महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. लंबे समय से फरार चल रहे कथित पेपर लीक माफिया बिजेंद्र गुप्ता को बिहार से गिरफ्तार कर लिया गया है. उसके साथ एक अन्य आरोपी को भी हिरासत में लिया गया है। </p>
<p>महाराष्ट्र पुलिस के मुताबिक, बिजेंद्र गुप्ता कई महीनों से गिरफ्तारी से बचता फिर रहा था. उसे पकड़ने के लिए बिहार समेत कई राज्यों में लगातार छापेमारी की जा रही थी.आखिरकार पुलिस ने उसे बिहार से गिरफ्तार कर लिया। </p>
<p>बिजेंद्र गुप्ता का नाम देश के कई चर्चित पेपर लीक मामलों में सामने आ चुका है. साल 2024 में NEET पेपर लीक विवाद के बाद स्टिंग ऑपरेशन में उसने कथित तौर पर पेपर लीक सिंडिकेट के काम करने के तरीके और NTA की सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को लेकर कई दावे किए थे। </p>
<p><strong>NTA के 47 अफसर बर्खास्त</strong></p>
<p>एजुकेशन सिस्टम और एग्जाम आदि में बड़े सुधार की दिशा में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बड़ा कदम उठाया है. शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, NTA ने 47 अधिकारियों को टर्मिनेट कर दिया है. इसके साथ ही कुछ अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी। </p>
<p>सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई NTA में बड़े सुधार और जवाबदेही तय करने के लिए शुरू किए गए बड़े अभियान का हिस्सा है. मंत्रालय का कहना है कि आने वाले दिनों में एजेंसी में सुधार से जुड़े और भी कई अहम कदम उठाए जाएंगे. गौरतलब है कि हाल के समय में पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर NTA लगातार विवादों में रही है। </p>
<p>ऐसे में एजेंसी के ढांचे और कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव की प्रक्रिया शुरू की गई है. शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह कार्रवाई NTA के संपूर्ण पुनर्गठन (ओवरहॉल) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, ताकि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और जवाबदेह बनाया जा सके। </p>
<p><strong>बिजेंद्र गुप्ता चकमा देकर पुलिस से बचता रहा</strong><br>
जांच एजेंसियों के मुताबिक, महाराष्ट्र TET पेपर लीक मामले में इससे पहले बिजेंद्र गुप्ता की पत्नी समेत कई अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है. हालांकि, बिजेंद्र खुद लगातार पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था. उसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही थी। </p>
<p>अब मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद महाराष्ट्र पुलिस को उम्मीद है कि पेपर लीक नेटवर्क, उससे जुड़े अन्य आरोपियों और पूरे सिंडिकेट के संचालन को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं. पुलिस उससे पूछताछ कर मामले की आगे की जांच कर रही है। </p>
<p><strong>छात्र आंदोलन के बीच बिजेंद्र गुप्ता की गिरफ्तारी अहम</strong><br>
बिजेंद्र गुप्ता की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के कई हिस्सों में NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर छात्र आंदोलन जारी है. CJP के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे छात्र लगातार पेपर लीक सिंडिकेट के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं. ऐसे में महाराष्ट्र TET पेपर लीक के कथित मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी को जांच एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।</p>
<p><strong>NTA में केवल 39 स्थायी कर्मचारी</strong><br>
केंद्र सरकार ने राज्यसभा में NTA के स्टाफ से जुड़ी जानकारी शेयर करते हुए बताया कि एजेंसी में केवल 39 स्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 73 कर्मचारी संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) आधार पर नियुक्त हैं. शिक्षा मंत्रालय ने अपने लिखित जवाब में कहा कि NTA का काम केवल स्थायी और संविदा कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि एजेंसी आउटसोर्स स्टाफ और अल्पकालिक आधार पर नियुक्त कर्मियों पर भी काफी हद तक निर्भर रहती है। </p>
<p>मंत्रालय के अनुसार, परीक्षा की प्रकृति के आधार पर NTA देशभर में विभिन्न परीक्षा संबंधी कार्यों के लिए ऑब्जर्वर, सिटी कोऑर्डिनेटर, सेंटर सुपरवाइजर, राज्य स्तरीय समन्वय समितियों (SLCC) और जिला स्तरीय समन्वय समितियों (DLCC) के सदस्यों की सेवाएं लेती है. सरकार ने बताया कि इन कर्मियों की तैनाती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन, केंद्रीय वित्तपोषित उच्च शिक्षण संस्थानों तथा नवोदय विद्यालय और केंद्रीय विद्यालय जैसे सरकारी स्कूलों के सहयोग से असाइनमेंट के आधार पर की जाती ह.। इनकी मदद से देशभर में बड़े पैमाने पर परीक्षा संचालन से जुड़े विभिन्न कार्य संपन्न कराए जाते हैं। </p>
<p><strong>धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को स्वीकार नहीं करेगी सरकार!</strong><br>
इससे पहले सूत्रों के हवाले से सामने आया था कि सरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को स्वीकार नहीं करेगी. नीट पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्ष की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बीच सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि वह इस मांग को स्वीकार नहीं करेगी। </p>
<p>सरकारी सूत्रों के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे और सरकार इसे समस्या का समाधान नहीं मानती. सूत्रों के अनुसार, सरकार का मानना है कि इस्तीफा देना और जिम्मेदारी से पीछे हट जाना सबसे आसान रास्ता है. जनता ने सरकार को जनादेश दिया है और सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए व्यवस्था में सुधार करेगी. पूरी पार्टी धर्मेंद्र प्रधान के साथ खड़ी है। </p>
<p>NTA ने शुरू की भर्ती प्रक्रिया, निकाली वैकेंसी<br>
वहीं दूसरी ओर खबर सामने आई है कि, NTA ने अपने संस्थागत पुनर्गठन (Institutional Restructuring) के तहत बड़े पैमाने पर भर्ती प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. शिक्षा मंत्रालय के अधीन स्वायत्त संस्था NTA ने चार वरिष्ठ जनरल मैनेजर (General Manager) के पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया है. इसके अलावा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के प्रतिभा सेतु (Pratibha Setu) पोर्टल के माध्यम से 16 यंग प्रोफेशनल्स के आवेदन भी आमंत्रित किए गए हैं। </p>
<p>यह भर्ती प्रक्रिया प्रो. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति (High-Level Committee of Experts) की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में पहला बड़ा कदम मानी जा रही है. यह समिति राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं के संचालन को लेकर उठे सवालों और विवादों के बाद गठित की गई थी। </p>
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<title>350 KG थ्रस्ट के साथ भारत ने बनाया पहला स्वदेशी जेट इंजन, डिफेंस टेक्नोलॉजी में बड़ी छलांग</title>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 10:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>350, थ्रस्ट, के, साथ, भारत, ने, बनाया, पहला, स्वदेशी, जेट, इंजन, डिफेंस, टेक्नोलॉजी, में, बड़ी, छलांग</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 भारत ने आसमान में अपनी ताकत कई गुना बढ़ा ली है. देश को अपना पहला स्वदेशी एक्सपेंडेबल टर्बो जेट इंजन मिल गया है. यह भारतीय डिफेंस ईकोसिस्टम के लिए एक ऐतिहासिक पल है. DRDO के गैस टरबाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (GTRE) ने इसे डिजाइन किया है. इस इंजन को हैदराबाद की आजाद इंजीनियरिंग ने मैन्युफैक्चर किया है. यह 350 किलोग्राम थ्रस्ट क्लास का बेहद ताकतवर इंजन है. 22 जुलाई 2026 को यह पूरी तरह से बनकर तैयार हो गया. आजाद इंजीनियरिंग ने इसे GTRE को सौंप दिया है. यह सफलता भारत की साइंटिफिक और इंडस्ट्रियल कम्युनिटी की सालों की मेहनत का नतीजा है. जेट इंजन की तकनीक दुनिया की सबसे जटिल इंजीनियरिंग में गिनी जाती है. अब तक सिर्फ कुछ ही देश इस तकनीक में महारत रखते थे. भारत ने यह कारनामा करके अपनी तकनीकी क्षमता का लोहा मनवा लिया है। .</p>
<p><strong>आजाद इंजीनियरिंग ने कैसे पूरा किया यह सबसे मुश्किल टास्क?</strong><br>
इस स्वदेशी इंजन को बनाना कोई आसान काम नहीं था. इसमें बहुत ज्यादा प्रेसिजन और एडवांस्ड मेटलर्जी की जरूरत होती है. GTRE ने इस मुश्किल काम के लिए आजाद इंजीनियरिंग को चुना था. कंपनी ने असेंबली और मैन्युफैक्चरिंग की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया. 22 जुलाई को आजाद इंजीनियरिंग के सीईओ राकेश चोपदार ने यह इंजन अधिकारियों को सौंपा. उन्होंने इसे डॉ के राजलक्ष्मी मेनन और डॉ एसवी रमणमूर्ति को हैंडओवर किया. डॉ मेनन एरोनॉटिकल सिस्टम्स की डायरेक्टर जनरल हैं. वहीं डॉ रमणमूर्ति GTRE के डायरेक्टर हैं।</p>
<p> <strong>जेट इंजन की यह तकनीक भारत के लिए इतनी अहम क्यों मानी जा रही है?</strong><br>
जेट इंजन टेक्नोलॉजी हासिल करना बहुत बड़ी उपलब्धि है. यह डिफेंस सेक्टर में भारत की बढ़ती ताकत का सुबूत है. यह तकनीक दुनिया की सबसे एडवांस्ड इंजीनियरिंग में से एक है. बिना बेहतरीन मैन्युफैक्चरिंग स्टैंडर्ड्स के इसे नहीं बनाया जा सकता है. इसके सफल निर्माण से साबित हो गया है कि भारतीय इंडस्ट्री अब किसी से पीछे नहीं है. डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह ने भी इस पार्टनरशिप की जमकर तारीफ की है. उन्होंने कहा कि यह भारत के विजन को हकीकत में बदलने वाला मील का पत्थर है। </p>
<p><strong>‘कुशा’ मिसाइल के सफल टेस्ट से भारत को आसमान में क्या बढ़त मिली है?</strong><br>
भारत का अभियान सिर्फ जेट इंजन तक सीमित नहीं है. DRDO ने ‘कुशा’ लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल का भी सफल टेस्ट किया है. यह टेस्ट 23 जुलाई 2026 को ओडिशा के एपीजे अब्दुल कलाम आइलैंड से हुआ. इस मिसाइल ने हाई-स्पीड एरियल टारगेट को कामयाबी के साथ नष्ट किया। </p>
<p>यह मिसाइल फाइटर जेट और ड्रोन जैसे कई खतरों को खत्म कर सकती है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘यह मिसाइल सिस्टम एयर डिफेंस में बड़ी छलांग है’. अब हमें इन हथियारों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>पेंशनधारकों के लिए बड़ी खुशखबरी! मुफ्त इलाज वाला कार्ड बनवाना हुआ आसान, अब अलग से नहीं भरना होगा फॉर्म</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली रिटायर होने वाले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है. अब CGHS पेंशनर कार्ड बनवाना पहले से काफी आसान हो जाएगा. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने CGHS पोर्टल को भविष्य पोर्टल से जोड़ दिया है. इससे पेंशन से जुड़ी जानकारी अपने आप CGHS के आवेदन में आ जाएगी. कर्मचारियों को एक ही जानकारी दोबारा … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 09:45:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
रिटायर होने वाले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है. अब CGHS पेंशनर कार्ड बनवाना पहले से काफी आसान हो जाएगा. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने CGHS पोर्टल को भविष्य पोर्टल से जोड़ दिया है. इससे पेंशन से जुड़ी जानकारी अपने आप CGHS के आवेदन में आ जाएगी. कर्मचारियों को एक ही जानकारी दोबारा भरने की जरूरत नहीं होगी। </p>
<p><strong>अब नहीं भरनी होगी एक ही जानकारी दो बार</strong><br>
पहले कर्मचारियों को भविष्य पोर्टल पर पेंशन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद अलग से CGHS पेंशनर कार्ड के लिए अप्लाई करना पड़ता था. इस दौरान उन्हें वही जानकारी फिर से भरनी होती थी. इससे समय ज्यादा लगता था और डॉक्यूमेंट्स की जांच में भी देरी होती थी। </p>
<p>अब नए सिस्टम में जैसे ही भविष्य पोर्टल पर पेंशन से जुड़े डॉक्यूमेंट्स मंजूर होंगे, उनकी जानकारी अपने आप CGHS पोर्टल पर पहुंच जाएगी. इससे आवेदन जल्दी पूरा होगा और कागजी काम भी कम होगा। </p>
<p><strong>पैन बनेगा यूनिक पहचान</strong><br>
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, PAN को इस पूरी प्रक्रिया में यूनिक पहचान के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा. इसके जरिए CGHS और भविष्य पोर्टल के बीच जानकारी का रियल टाइम मिलान होगा. इससे गलतियां कम होंगी और डुप्लीकेट जानकारी की संभावना भी घटेगी। </p>
<p><strong>ऐसे मिलेगा CGHS पेंशनर कार्ड</strong><br>
जब हेड ऑफिस पेंशन से जुड़े फॉर्म को वेरिफाई कर देगा, तब PPO यानी पेंशन पेमेंट ऑर्डर जारी होगा. इसके बाद कर्मचारी भारतकोष पेमेंट गेटवे के जरिए CGHS का अंशदान ऑनलाइन जमा कर सकेंगे. पेमेंट पूरा होने के बाद CGHS पेंशनर कार्ड जारी कर दिया जाएगा। </p>
<p>मंजूरी मिलने के बाद कर्मचारी अपना कार्ड CGHS पोर्टल और भविष्य पोर्टल, दोनों से डाउनलोड कर सकेंगे. स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि यह नई डिजिटल सुविधा सिर्फ एक एक्स्ट्रा ऑप्शन है. जो कर्मचारी चाहें, वे पहले की तरह CGHS की आधिकारिक वेबसाइट से भी आवेदन कर सकते हैं। </p>
<p><strong>क्या है CGHS और क्या मिलती हैं सुविधाएं</strong>?<br>
सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को हेल्थ सर्विस देती है. फिलहाल देश के 80 शहरों में इसके करीब 42 लाख लाभार्थी हैं। </p>
<p><strong>CGHS के तहत कर्मचारियों और पेंशनर्स को कई सुविधाएं मिलती हैं:</strong></p>
<p>    OPD में इलाज और मुफ्त दवाएं.<br>
    सरकारी और पैनल में शामिल अस्पतालों के डॉक्टरों से इलाज.<br>
    सरकारी और मान्यता प्राप्त अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज.<br>
    सरकारी और पैनल वाले डायग्नोस्टिक सेंटर में जांच.<br>
    पेंशनर्स के लिए पैनल अस्पतालों में कैशलेस इलाज.<br>
    इमरजेंसी या खास परिस्थितियों में सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च नियमों के अनुसार वापस मिलने की सुविधा.</p>
<p>नई डिजिटल व्यवस्था से रिटायर होने वाले केंद्रीय कर्मचारियों का समय बचेगा, कागजी झंझट कम होगा और CGHS पेंशनर कार्ड पहले के मुकाबले ज्यादा तेजी से बन सकेगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>8वें वेतन आयोग पर बड़ा अपडेट, केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन को लेकर आई अहम जानकारी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग से जुड़े हर नए अपडेट का बेसब्री से इंतजार रहता है। अब एक बार फिर से आठवें वेतन आयोग ने केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों (UT) के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों, महासंघों और यूनियनों के साथ बैठकों का नया शेड्यूल जारी किया है। आइए … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 09:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>8वें, वेतन, आयोग, पर, बड़ा, अपडेट, केंद्रीय, कर्मचारियों, की, सैलरी, और, पेंशन, को, लेकर, आई, अहम, जानकारी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग से जुड़े हर नए अपडेट का बेसब्री से इंतजार रहता है। अब एक बार फिर से आठवें वेतन आयोग ने केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों (UT) के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों, महासंघों और यूनियनों के साथ बैठकों का नया शेड्यूल जारी किया है। आइए डिटेल में जान लेते हैं।</p>
<p><strong>दो हफ्ते के ब्रेक के बाद नोटिफिकेशन</strong><br>
दरअसल, वेतन आयोग ने बीते गुरुवार को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक नोटिफिकेश जारी किया। इस नोटिफिकेशन में आयोग ने कहा कि वह अगस्त में नई दिल्ली में बातचीत का अगला दौर आयोजित करेगा, जिससे कर्मचारी संगठनों और अन्य स्टेकहोल्डर्स को अपनी मांगें और सुझाव रखने का एक और मौका मिलेगा। बता दें कि 9 और 10 जुलाई को कोलकाता में बैठकें पूरी करने के बाद आयोग ने लगभग दो हफ्ते का ब्रेक लिया था। इस दौरान, केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के कई संगठनों ने आयोग के काम की रफ्तार और इसमें देरी की संभावना को लेकर चिंता जताई थी।</p>
<p><strong>दिल्ली में बैठक कब?</strong><br>
वेतन आयोग की दिल्ली में बैठक 7 और 10 अगस्त 2026 को होने वाली है। इस दौरान केंद्रीय कर्मचारियों के संगठन और हितधारकों से बातचीत की जाएगी। बता दें कि इन बैठकों में, वेतन आयोग वेतन, पेंशन, फिटमेंट फैक्टर, प्रमोशन, काम की स्थितियों और कर्मचारियों से जुड़े कई अन्य मुद्दों पर कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव लेता है।</p>
<p>वेतन आयोग ने नए नोटिफिकेशन में कहा कि जिन स्टेकहोल्डर्स ने अपना मेमोरैंडम पहले ही जमा कर दिया है लेकिन दिल्ली या किसी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में आयोग से अभी तक बातचीत नहीं की है, वे अपॉइंटमेंट के लिए अनुरोध कर सकते हैं। ऐसे संगठनों को 31 जुलाई 2026 तक अपनी यूनिक मेमो ID के साथ अनुरोध जमा करना होगा और वे मीटिंग की जगह और समय के बारे में अलग से जानकारी देंगे।</p>
<p><strong>आखिरी बैठक नहीं</strong><br>
8वें वेतन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह बातचीत का आखिरी दौर नहीं होगा। आयोग आने वाले महीनों में दिल्ली के साथ-साथ विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में और बैठकें करने की योजना बना रहा है। दिल्ली NCR क्षेत्र के बाहर स्थित संगठन अपने राज्य/केंद्र शासित प्रदेश या पास के किसी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में बातचीत के लिए अपॉइंटमेंट ले सकेंगे।</p>
<p>आयोग ने कहा कि भविष्य का शेड्यूल उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर पब्लिश किया जाएगा। बता दें कि वेतन आयोग हार्ड कॉपी या ईमेल के जरिए डेटा स्वीकार नहीं कर रहा है। 8वें वेतन आयोग ने फिर से कहा है कि केवल उसके पोर्टल के जरिए जमा किया गया डेटा ही स्वीकार किया जाएगा। आयोग ने स्टेकहोल्डर्स से कहा है कि वे हार्ड कॉपी या ईमेल के जरिए डेटा जमा न करें।</p>]]> </content:encoded>
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<title>सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, बिना अनुमति कोर्ट की वीडियो रीपोस्ट और मोनेटाइजेशन पर रोक</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने हाइब्रिड और ऑनलाइन सुनवाई के ऑडियो-वीडियो प्रसारण को लेकर सख्ती दिखाई है. कोर्ट ने नए अंतरिम निर्देश जारी करते हुए कहा है कि पहले से अनुमति के बिना अदालत की कार्यवाही की ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट, अपलोड, ब्रॉडकास्ट/टेलीकास्ट, रीपोस्ट, रिकॉर्ड, … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 09:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>सुप्रीम, कोर्ट, का, बड़ा, आदेश, बिना, अनुमति, कोर्ट, की, वीडियो, रीपोस्ट, और, मोनेटाइजेशन, पर, रोक</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने हाइब्रिड और ऑनलाइन सुनवाई के ऑडियो-वीडियो प्रसारण को लेकर सख्ती दिखाई है. कोर्ट ने नए अंतरिम निर्देश जारी करते हुए कहा है कि पहले से अनुमति के बिना अदालत की कार्यवाही की ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट, अपलोड, ब्रॉडकास्ट/टेलीकास्ट, रीपोस्ट, रिकॉर्ड, मॉडिफाई या मोनेटाइज नहीं किया जा सकेगा। </p>
<p>चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे, उन्होंने अदालत की कार्यवाही के वीडियो के अनथोराइज्ड इस्तेमाल और उनके मोनेटाइजेशन पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। </p>
<p>कोर्ट ने कहा कि संबंधित हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल या सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल की पूर्व अनुमति के बिना कोर्ट की लाइव-स्ट्रीम की गई कार्यवाही की रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करना, रीपोस्ट करना, निकालना (एक्सट्रैक्ट करना), एडिट करना, प्रसारित करना, मोनेटाइज करना या अपलोड करना बैन रहेगा. हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आदेश का न्यूज रिपोर्टिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा। </p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने अपने सेक्रेटरी जनरल और सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि इस आदेश को संबंधित अदालतों की ऑफिशियल वेबसाइट पर दिखाया जाए। </p>
<p><strong>राज्यों और हाईकोर्ट से मांगा जवाब</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सभी राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. साथ ही केंद्र सरकार से यह जांच करने को कहा है कि याचिका में उठाई गई मांगों को किस हद तक लागू किया जा सकता है. इसके अलावा, पीठ ने सभी हाईकोर्ट से अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग को रेगुलेट करने के लिए बनाए गए नियमों पर रिपोर्ट मांगी है. कोर्ट ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट यह बताएं कि लगातार लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाए गए हैं। </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>जिन्दल स्टील लिमिटेड में बड़े पदों पर कई नियुक्तियां, विद्या रतन शर्मा पुनः प्रबंध निदेशक नियुक्त</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली भारत जाने-माने उद्योगपति  नवीन जिन्दल के नेतृत्व वाली कंपनी जिंदल स्टील लिमिटेड ने आज 24 जुलाई, 2026 को आयोजित अपनी निदेशक मंडल की बैठक के बाद महत्वपूर्ण नियुक्तियों की घोषणा की। इन निर्णयों पर प्रकाश डालते हुए, बोर्ड ने 24 जुलाई, 2026 से प्रभावी दो साल की अवधि के लिए  विद्या रतन शर्मा … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 22:45:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>जिन्दल, स्टील, लिमिटेड, में, बड़े, पदों, पर, कई, नियुक्तियां, विद्या, रतन, शर्मा, पुनः, प्रबंध, निदेशक, नियुक्त</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारत जाने-माने उद्योगपति  नवीन जिन्दल के नेतृत्व वाली कंपनी जिंदल स्टील लिमिटेड ने आज 24 जुलाई, 2026 को आयोजित अपनी निदेशक मंडल की बैठक के बाद महत्वपूर्ण नियुक्तियों की घोषणा की। इन निर्णयों पर प्रकाश डालते हुए, बोर्ड ने 24 जुलाई, 2026 से प्रभावी दो साल की अवधि के लिए  विद्या रतन शर्मा को कंपनी के अतिरिक्त निदेशक और प्रबंध निदेशक के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है।</p>
<p>शर्मा, जो एक प्रतिष्ठित उद्योग विशेषज्ञ हैं और जिन्होंने पहले 2019 से 2022 तक प्रबंध निदेशक तथा 2010 से 2014 तक डिप्टी एमडी एवं सीईओ के रूप में कार्य किया है, वे जिंदल स्टील को विकास के अगले चरण में ले जाने के लिए नियुक्त किये गए हैं</p>
<p><strong>मुख्य कार्यकारी एवं वरिष्ठ नेतृत्व नियुक्तियां</strong></p>
<p>अपने कार्यकारी नेतृत्व तंत्र को मजबूत करने और अपने बढ़ते कारोबार को समर्थन देने के व्यापक प्रयास के तहत, जिंदल स्टील लिमिटेड ने 24 जुलाई, 2026 से प्रभावी निम्नलिखित प्रमुख नियुक्तियों की भी घोषणा की:</p>
<p>*  संदीप मोदी को मुख्य वित्तीय अधिकारी और प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक के रूप में नियुक्त किया गया है।  मोदी के पास दो दशकों से अधिक का वित्तीय नेतृत्व का अनुभव है। वे इससे पहले हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड और तलवंडी साबो पावर लिमिटेड के सीएफओ के रूप में कार्य कर चुके हैं। इस नियुक्ति के परिणामस्वरूप, अंतरिम सीएफओ के रूप में कार्य कर रहे  सुनील अग्रवाल अब वित्त विभाग में ही अन्य महत्वपूर्ण काम देखेंगे।</p>
<p>*  राजीव कुमार को मुख्य परिचालन अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है।  कुमार एक धातुकर्म इंजीनियर हैं, जिन्हें स्टील क्षेत्र में नेतृत्व का 35 से अधिक वर्षों का अनुभव है—जिसमें वेदांता एल्युमिनियम के सीईओ और टाटा स्टील में वीपी ऑपरेशन्स (कलिंगनगर) जैसी भूमिकाएं शामिल हैं। वे सभी संयंत्रों और खनन स्थलों के परिचालन की देखरेख करेंगे।</p>
<p>*  सुखजीत एस. पसरीचा को मानव संसाधन प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया है। इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फाइनेंस और एयरटेल जैसे प्रमुख ब्रांडों में लगभग 30 वर्षों का एचआर अनुभव रखने वाले  पसरीचा टैलेंट ट्रांसफॉर्मेशन एजेंडे का नेतृत्व करेंगे।</p>
<p>* एस एस कोठारी मेहता एंड कंपनी एलएलपी को आगामी 47वीं एजीएम के समापन से 52वीं एजीएम तक 5 साल की अवधि के लिए वैधानिक लेखा परीक्षक के रूप में अनुशंसित किया गया है, जो शेयरधारकों के अनुमोदन के अधीन है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>‘अदालत मनोरंजन का मंच नहीं’, सोशल मीडिया पर कोर्ट कार्यवाही के क्लिप प्रसारित करने पर SC की सख्त रोक</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और उसके वीडियो प्रसारित किए जाने पर रोक की मांग वाली याचिका शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंची. कोर्ट ने अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के चुनिंदा हिस्सों को दिखाकर न्यायपालिका की छवि खराब करने पर नाराजगी जताई. शीर्ष अदालत ने सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 22:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>‘अदालत, मनोरंजन, का, मंच, नहीं’, सोशल, मीडिया, पर, कोर्ट, कार्यवाही, के, क्लिप, प्रसारित, करने, पर, की, सख्त, रोक</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और उसके वीडियो प्रसारित किए जाने पर रोक की मांग वाली याचिका शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंची. कोर्ट ने अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के चुनिंदा हिस्सों को दिखाकर न्यायपालिका की छवि खराब करने पर नाराजगी जताई. शीर्ष अदालत ने सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अदालती कार्यवाही का कोई भी क्लिप प्रसारित करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। </p>
<p>इस दौरान वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर उन्हें लाइवस्ट्रीमिंग से कोई समस्या नहीं दिखती. हालांकि उन्होंने जस्टिस केवी विश्वनाथन की अदालत की कार्यवाही के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने का जिक्र करते हुए कहा कि यह मजाक बन गया है. इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अब इससे हर किसी को चीजें पढ़ने और देखने के लिए मजबूर होना पड़ता है। </p>
<p>वहीं जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने डिजिटल स्पेस में डेटा के नियमन को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि अदालत की कार्यवाही तक सीमित पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि लाइवस्ट्रीमिंग पर नियंत्रण होना चाहिए और जो पक्ष कार्यवाही देखना चाहता है, उसे इसके लिए स्पष्ट अनुरोध करना चाहिए. इस तरह उनका आशय यह था कि अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग पब्लिक प्लेटफॉर्म पर नहीं होनी चाहिए, यदि कोई पार्टी इसकी फीड चाहती है तो उसकी मांग पर ही इसे मुहैया कराया जाना चाहिए। </p>
<p><strong>जस्टिस बागची ने कहा- एंटरटेनमेंट चैनल नहीं बन सकती अदालत</strong><br>
अकसर लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान जजों की ओर से होने वाली कोई टिप्पणी या चर्चा पर भी खबरें बन जाती हैं. ऐसे में अदालत का फैसला अहम है. जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि कोर्ट 24/7 एंटरटेनमेंट चैनल नहीं बन सकता. फिलहाल इस मामले की अदालत में सुनवाई जारी है. अदालती कार्यवाही की क्लिप सोशल मीडिया पर प्रसारित करने पर अंतरिम रोक लगाने का फैसला CJI सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने सर्वसम्मति से लिया है. इस मामले में केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी किया गया है।  </p>]]> </content:encoded>
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<title>गुजरात में बारिश बनी आफत! हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू, अहमदाबाद&#45;सूरत समेत 5 शहरों में बाढ़ जैसे हालात</title>
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<description><![CDATA[ अहमदाबाद गुजरात में भारी बारिश से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. दक्षिण गुजरात के कई जिलों में तो त्राहिमाम जैसी स्थिति है. नदी-नाले तो छोड़िए गांव-कस्बे के साथ-साथ बाजारों में पानी भर गया है. कई जगहों पर हाईवे और रेल पटरियों पर भी पानी चढ़ आया है. आलम यह है कि हेलीकॉप्टर से लोगों का … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 20:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>गुजरात, में, बारिश, बनी, आफत, हेलीकॉप्टर, से, रेस्क्यू, अहमदाबाद-सूरत, समेत, शहरों, में, बाढ़, जैसे, हालात</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अहमदाबाद </strong></p>
<p>गुजरात में भारी बारिश से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. दक्षिण गुजरात के कई जिलों में तो त्राहिमाम जैसी स्थिति है. नदी-नाले तो छोड़िए गांव-कस्बे के साथ-साथ बाजारों में पानी भर गया है. कई जगहों पर हाईवे और रेल पटरियों पर भी पानी चढ़ आया है. आलम यह है कि हेलीकॉप्टर से लोगों का रेस्क्यू किया जा रहा है. इसके वीडियो भी सामने आए. NDRF, SDRF के साथ-साथ स्थानीय पुलिस-प्रशासन भी राहत-बचाव कार्य में जुटी है. सीएम भूपेंद्र पटेल भी बाढ़ग्रस्त इलाकों में लगातार दौरा कर राहत-बचाव कार्य का जायजा लेते नजर आए। </p>
<p><strong>गुजरात के किन इलाकों में बाढ़ की विभीषका</strong><br>
गुजरात में बीते कुछ दिनों से जारी से भारी बारिश के कारण दक्षिण गुजरात के नवसारी और वलसाड सबसे अधिक प्रभावित है. अधिकारियों ने बताया कि बताया कि अकेले वलसाड में करीब 1,200 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है. वहीं, वलसाड और पड़ोसी जिले नवसारी से मिलाकर 22,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। </p>
<p>नवसारी और वलसाड के अलावा सूरत, अहमदाबाद, खेड़ा, तापी और डांग में भी बुधवार से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। </p>
<p><strong>वलसाड के उमरगांव में बीते 36 घंटों में 1200 मिमी बारिश</strong><br>
वलसाड जिले के उमरगांव तालुका में बीते 36 घंटों के दौरान रिकॉर्ड 1,200 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित जिलों में NDRF और राज्य के आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमों को तैनात किया गया है. इसके अलावा, राहत और बचाव कार्यों के लिए नवसारी और वलसाड जिलों में सेना की दो टुकड़ियों को भी तैनात किया गया है। </p>
<p>गांधीनगर स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) के अनुसार, वलसाड जिले की उमरगांव तालुका में बुधवार सुबह 6 बजे से बृहस्पतिवार शाम 6 बजे तक 36 घंटों के भीतर 1,200 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। </p>
<p><strong>सभी प्रभावित जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद</strong><br>
कैबिनेट मंत्री जीतू वाघानी ने बताया कि राहत आयुक्त गौरांग मकवाणा ने शुक्रवार को सभी प्रभावित जिलों में स्कूल और कॉलेज बंद रखने की घोषणा की है. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से फोन पर बात की और बारिश से प्रभावित जिलों के लिए केंद्र सरकार की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया। </p>
<p><strong>22 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया</strong><br>
राहत आयुक्त गौरांग मकवाणा ने संवाददाताओं को बताया, 'अब तक वलसाड में 12,000 से अधिक और नवसारी में 10,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. नवसारी जिले में विभिन्न स्थानों पर फंसे 50 से अधिक लोगों को और वलसाड में 200 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। </p>
<p><strong>वलसाड, नवसारी और सूरत की सभी नदियां उफान पर</strong><br>
वलसाड, नवसारी और सूरत की सभी नदियां उफान पर हैं, जिससे आसपास के इलाकों और गांवों में पानी भर गया है. एसईओसी के अनुसार, नवसारी जिले के चिखली और खेरगाम तालुका में बुधवार सुबह 6 बजे से 36 घंटों के भीतर क्रमशः 800 और 650 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। </p>
<p>दक्षिण गुजरात के जिलों के अलावा, अहमदाबाद और खेड़ा जिलों में भी बृहस्पतिवार को मूसलाधार बारिश हुई. एसईओसी के आंकड़ों के मुताबिक, अहमदाबाद के ढोलका तालुका में सुबह 6 बजे समाप्त हुए 12 घंटों में 339 मिमी बारिश दर्ज की गई। </p>
<p>अहमदाबाद में भारी बारिश के कारण कई आवासीय सोसायटियों और सड़कों पर जलभराव हो गया. 225 मिमी से अधिक बारिश दर्ज किए जाने के बाद शहर में लोग लंबे ट्रैफिक जाम में फंसे रहे। </p>
<p>तापी और डांग दो अन्य ऐसे जिले रहे जहां भारी बारिश हुई. इन जिलों के 23 तालुकाओं में बृहस्पतिवार को महज 12 घंटों के भीतर 200 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई। </p>
<p><strong>गुजरात में कहां-कहां बारिश के अलर्ट</strong><br>
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शुक्रवार तक भरूच, सूरत, नवसारी, वलसाड, डांग, नर्मदा, वडोदरा, छोटा उदयपुर, पंचमहल और दाहोद जिलों के लिए 'रेड अलर्ट' (भारी से बहुत भारी बारिश) और अहमदाबाद, गांधीनगर, साबरकांठा, भरूच, आणंद तथा खेड़ा जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' (भारी से बहुत भारी बारिश) जारी किया है। </p>
<p><strong>गुजरात के इन जिलों के लिए रेड अलर्ट-</strong></p>
<p>    अहमदाबाद, अमरेली, आनंद, बनासकांठा, भरूच, भावनगर, बोटाद, गांधीनगर, कच्छ, खेड़ा, महेसाणा, पंचमहल, पाटन, साबर कांथा, सुरेंद्रनगर, वडोदरा</p>
<p><strong>गुजरात के इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट-</strong></p>
<p>    अरावली, छोटा उदेपुर, दादरा और नगर हवेली, दाहोद, दमन, डांग, देवभूमि द्वारका, दीव, गिर सोमनाथ, जामनगर, जूनागढ़, महिसागर, मोरबी, नर्मदा, नवसारी, पोरबंदर, राजकोट, सूरत, तापी, वलसाड </p>
<p><strong>4 हाईवे सहित 1200 से अधिक सड़कें बंद</strong><br>
वरिष्ठ नौकरशाह ने बताया कि जलभराव के कारण 1,200 से अधिक सड़कें बंद कर दी गई हैं. इनमें चार राष्ट्रीय और तीन राज्य राजमार्गों के अलावा बड़ी संख्या में पंचायत सड़कें शामिल हैं.  उन्होंने कहा, 'कल (शुक्रवार) तक भारी से बहुत भारी बारिश के पूर्वानुमान को देखते हुए रेड और ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में स्कूल और कॉलेज बंद रखे गए हैं। </p>
<p>मकवाणा ने बताया कि बारिश के कारण दक्षिण गुजरात के कई हिस्से अंधेरे में डूब गए हैं क्योंकि 35 से अधिक सब-स्टेशन काम नहीं कर रहे हैं। </p>
<p><strong>पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने फोन पर की बात</strong><br>
कैबिनेट मंत्री जीतू वाघानी ने कहा कि मुख्यमंत्री पटेल बारिश की स्थिति पर नजर रख रहे हैं और अधिकारियों के संपर्क में हैं. वाघानी ने कहा, 'व्यस्त होने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री से गुजरात में भारी बारिश का जायजा लिया और केंद्र से मदद की पेशकश की. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी पटेल से फोन पर बात की और कहा कि आवश्यकतानुसार एनडीआरएफ की टीमें भेजी जाएंगी। </p>
<p><strong>मुंबई जाने वाली कई ट्रेनें रद्द</strong><br>
दक्षिण गुजरात में रेल मार्गों के आसपास पानी का स्तर बढ़ने के कारण मुंबई जाने वाली कई ट्रेनों को या तो रद्द कर दिया गया या बीच में ही रोक दिया गया. पश्चिम रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए एक सहायता कक्ष शुरू किया है. भारी बारिश के कारण नर्मदा जिले के देदियापाड़ा और सागबारा तालुका के कई गांव राज्य के अन्य हिस्सों से कट गए हैं। </p>
<p><strong>दक्षिण गुजरात में औसत से 62 फीसदी अधिक बारिश</strong></p>]]> </content:encoded>
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<title>NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला&#45; इसे ऐसे ही नहीं चलने दिया जा सकता</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक मामले को स्थगित करते हुए कहा कि यह ऐसे ही जारी नहीं रह सकता और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर कड़ी नजर रखने का फैसला किया है. सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 20:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>NEET, पेपर, लीक, पर, सुप्रीम, कोर्ट, सख्त, बोला-, इसे, ऐसे, ही, नहीं, चलने, दिया, जा, सकता</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक मामले को स्थगित करते हुए कहा कि यह ऐसे ही जारी नहीं रह सकता और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर कड़ी नजर रखने का फैसला किया है. सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि वह पूरे साल सुधारों की प्रगति पर नजर रखेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता बनी रहे. कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करें. इसमें बताया जाए कि पेपर लीक रोकने और परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं. हलफनामा मिलने के बाद कोर्ट सरकार की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा करेगा। </p>
<p><strong>कड़ी कार्रवाई का आश्वासन </strong><br>
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह छात्रों की चिंताओं को दूर करने और निष्पक्ष परीक्षा कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. इस दौरान  सरकार ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में पेपर लीक रोकने और परीक्षा की सुरक्षा मजबूत करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार हर लेवल पर काम कर रही है और छात्रों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। </p>
<p>यह सुनवाई NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों को लेकर उठे सवालों के बीच हुई. इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दे चुका है। </p>
<p><strong>कोर्ट ने की स्थायी सुरक्षा प्रणाली की मांग </strong><br>
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ अस्थायी उपाय काफी नहीं हैं. कोर्ट ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए मजबूत और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था बनाने पर जोर दिया. इस कड़ी में कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह अपने हलफनामे में बताए कि पेपर तैयार करने और उसे सुरक्षित पहुंचाने के लिए क्या इंतजाम किए जा रहे हैं, पेपर लीक रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, गड़बड़ी होने पर किसकी जिम्मेदारी तय होगी और परीक्षा व्यवस्था को लंबे समय के लिए कैसे बेहतर बनाया जाएगा। </p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इन सुधारों पर लगातार नजर रखेगा. NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे.  अब कोर्ट चाहता है कि केंद्र सरकार ऐसी व्यवस्था बनाए, जिससे भविष्य में पेपर लीक न हो और छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा बना रहे। </p>]]> </content:encoded>
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<title>लाहौल&#45;स्पीति में दर्दनाक हादसा, टाटा सूमो पर पहाड़ गिरा, 13 लोगों की मौत</title>
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<description><![CDATA[ शिमला हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति के पांगी-उदयपुर मार्ग पर बड़ा हादसा हुआ है. यहां पर एक टाटा सूमो गाड़ी के ऊपर पहाड़ गिरा है और 13 लोगों की मौत हो गई है. लाहौल स्पीति पुलिस ने हादसे की पुष्टि की है. फिलहाल, लाहौल स्पीति पुलिस की टीम मौके के लिए रवाना हुई है. भरमौर-पाँगी … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 19:45:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>लाहौल-स्पीति, में, दर्दनाक, हादसा, टाटा, सूमो, पर, पहाड़, गिरा, लोगों, की, मौत</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong><br>
हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति के पांगी-उदयपुर मार्ग पर बड़ा हादसा हुआ है. यहां पर एक टाटा सूमो गाड़ी के ऊपर पहाड़ गिरा है और 13 लोगों की मौत हो गई है. लाहौल स्पीति पुलिस ने हादसे की पुष्टि की है. फिलहाल, लाहौल स्पीति पुलिस की टीम मौके के लिए रवाना हुई है.</p>
<p>भरमौर-पाँगी के विधायक जनक राज ने बताया कि उदयपुर मार्ग पर हुई दुर्घटना में गाड़ी में यात्रा कर रहे 15 लोगों में से 13 की मृत्यु की सूचना है. इसमें मृतकों में छह महीने का बच्चा भी शामिल है. दो लोग पूर्णतः स्वस्थ हैं.</p>
<p>जानकारी के अनुसार, लाहौल घाटी से करीब 60-70 किमी दूर कुडूनाला के पास यह घटना पेश आई है. यहां पर चलती टाटा सूमो पर पहाड़ी से बड़ी बड़ी चट्टानें गिरी हैं. बताया जा रहा है कि टाटा सूमो टैक्सी में कुल 15 लोग सवार थे. मलबे से एक व्यक्ति को घायल अवस्था में निकाला गया है. हादसे के बाद गाड़ी के पिछले हिस्से में आग भी लग गई. इसका वीडियो भी आया है. मृतकों की पहचान की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है. हालांकि, बताया जा रहा है कि सभी मृतक पाँगी घाटी के रहने वाले हैं. भरमौर के विधायक जनक राज ने बताया कि हमने चम्बा और लाहुल स्पीति ज़िलाधीश महोदय से राहत कार्यों में तेज़ी लाने का आग्रह किया है और घटनास्थल के लिए पुलिस और बचाव दल रवाना हुआ है.</p>
<p>लाहौल स्पीति की डीएसपी रश्मि शर्मा ने न्यूज18 से फोन पर बातचीत में बताया कि अभी केवल हादसे की सूचना मिली है और पुलिस टीम मौके के लिए रवाना हुई है. उधर, घटना के कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिन्हें देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि हादसा कितना दर्दनाक है. घटना में टाटा सूमो के पिछले हिस्से में आग भी लगी नजर आ रही है और कुछ लोग आग बुझाते दिख रहे हैं. इसमें आर्मी के जवान भी हैं, जो कि लेबर मंगवाने और पानी की बात कह रहे हैं. वीडियो में खून भी नजर आ रहा है. हादसे में टाटा सूमो के परखच्चे उड़ गए हैं.</p>
<p><strong>भरमौर के विधायक ने हादसे की पुष्टि की है.</strong><br>
बताया जा रहा है कि उदयपुर–किलाड़ मार्ग पिछले दिन बंद होने के कारण वाहन में सवार सभी यात्री तिंदी में रुके हुए थे. मार्ग खुलने के बाद वे पांगी की ओर रवाना हुए थे, तभी कडू नाला के पास यह हादसा हो गया. लाहौल स्पीति की विधायक अनुराधा राणा ने बताया कि अत्यंत दुःखद, लाहौल पांगी के बॉर्डर कडुनाला के पास पहाड़ से मलबा और पत्थर गिरने से एक टाटा सूमो गाड़ी चपेट में आने की सूचना प्राप्त हुई है l प्रारंभिक सूचना के अनुसार हादसे में कुछ लोगों की मृत्यु हो गई है. हालांकि मृतकों की संख्या और उनकी पहचान की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है. पुलिस, प्रशासन और बचाव दल की टीमें घटनास्थल के लिए रवाना हो चुकी हैं .</p>
<p>गौर रहे कि शुक्रवार सुबह मंडी जिले के जोगिंद्रनगर के गुम्मा में भी दो परिवारों पर लैंडस्लाइड हो गया था. कुल्लू का यह परिवार सिमसा माता मंदिर जा रहा था और रास्ते में हादसा हो गया, जिसमें महिला की मौत और सात लोग घायल हुए थे.</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा CJP, सरकार से वार्ता बेनतीजा, आंदोलन तेज करने का अल्टीमेटम</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन कर रही कॉकरोज जनता पार्टी (सीजेपी) ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना धरना खत्म नहीं होगी. सरकार को दो प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद सीजेपी के दो प्रवक्ताओं सौरभ दास और आशुतोष रांक ने स्पष्ट किया कि सरकार … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 19:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन कर रही कॉकरोज जनता पार्टी (सीजेपी) ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना धरना खत्म नहीं होगी. सरकार को दो प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद सीजेपी के दो प्रवक्ताओं सौरभ दास और आशुतोष रांक ने स्पष्ट किया कि सरकार धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा ले या फिर उनको बर्खास्त करे. उन्होंने कहा कि सरकार उनकी दो मांगों को मानने को तैयार है लेकिन, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर शनिवार दोपहर तक फैसला लेने की बात कही है। </p>
<p>बातचीत के बाद केंद्रीय जेपी नड्डा ने भी कहा कि सरकार सीजेपी की दो मांगों पर मानने को तैयार है. सीजेपी के प्रवक्ताओं ने कहा कि अगर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होगा तो धरने खत्म नहीं होंगे. यह आंदोलन पूरे देश में फैल चुका है. और यह और तेजी से आगे बढ़ सकता है। </p>
<p>बातचीत विफल होने के बाद आंदोलन खत्म होने की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है. आंदोलन के चेहरा रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के बीती रात अनशन खत्म होने के बाद ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी कि अब सीजेपी के साथ बातचीत में कोई बीच का रास्ता निकला आएगा. लेकिन, सीजेपी के नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होगा तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। </p>
<p>इस बीच उधर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होगा तब तक संसद की कार्यवाही नहीं चलेगी. उन्होंने कहा कि छात्रों की तीन मांगें हैं. इनमें सबसे प्रमुख मांग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है. उन्होंने कहा कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होगा तब तक विपक्ष चर्चा के लिए तैयार नहीं होगा। </p>
<p><strong>इस्तीफे से नीचे कुछ भी मंजूर नहीं- रांका</strong><br>
आशुतोष रांका ने आगे कहा, "हमने ये भी सरकार को बता दिया है कि इस बार का जो कॉल होगा वो 20 जुलाई से ज्यादा बड़ा होगा. हमने सरकार को समझा दिया. हमने लगता है कि वो समझ रहे हैं. हमने सरकार से कह दिया है कि वो मोदी जी को जाकर कह दें कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से नीचे कुछ भी मंजूर नहीं है। </p>
<p><strong>अगली बार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ वापस आएंगे- रांका</strong><br>
जंतर मंतर पर मंच से आशुतोष रांका ने प्रदर्शनकारी छात्रों से पूछा कि आप धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिए बिना यहां से जाएंगे तो नहीं, इस पर छात्रों ने ना में जवाब दिया. रांका ने कहा कि हमें उम्मीद है कि अगली बार जब मीटिंग होगी तो हम धर्मेंद्र के इस्तीफे के साथ वापस आएंगे. उम्मीद कायम रखिए, डटे रहिए, संघर्ष करते हुए. हम आपको इतना बता सकते हैं कि जीत बहुत करीब है। </p>
<p><strong>क्या बोले जेपी नड्डा?</strong><br>
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार को सीजेपी द्वारा रखी गई मांगों पर विचार और चर्चा करने के लिए समय चाहिए होगा। उन्होंने कहा कि सीजेपी के साथ आगे भी बातचीत हो सकती है, जिससे यह संकेत मिलता है कि बातचीत बंद नहीं हुई है (कोई गतिरोध नहीं है)।</p>
<p><strong>धर्मेंद्र प्रधान की मांग पर अड़िग CJP</strong><br>
बैठक के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से कहा गया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर समझौता नहीं होगा। हालांकि, केंद्र सरकार सीजेपी की दो मांगें तो मानने को तैयार हैं लेकिन, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विचार को लेकर सरकार ने कल तक का समय मांगा है। अब देखना यह होगा कि क्या कल सरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए तैयार होगी?</p>
<p><strong>सीजेपी की चेतावनी</strong><br>
कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से साफ कहा गया है कि अगर धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया तो आंदोलन और बड़ा होगा। सीजेपी की ओर से कहा गया कि सरकार द्वारा मांगें नहीं मानने पर पूरे देश में बड़ा आंदोलन होगा।</p>
<p>
<strong>क्या हैं तीन बड़ी मांगें?</strong></p>
<p><strong>1. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग।</strong></p>
<p><strong>2. पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग।</strong></p>
<p><strong>3. प्रदर्शन के दौरान जिन छात्रों पर FIR दर्ज हुई, सभी को रद किया जाए।</strong></p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>BRICS समिट के लिए भारत का बड़ा कूटनीतिक कदम, बांग्लादेश के PM तारिक रहमान को भेजा न्योता, अब ढाका के फैसले पर नजर</title>
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<description><![CDATA[ ढाका  बांग्‍लादेश में जबसे लोकतांत्रिक सरकार को सत्‍ता से बेदखल किया गया है, तब से भारत के साथ संबंध पटरी से उतर गए हैं. पड़ोसी मुल्‍क के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान स्‍थापित परंपरा से इतर पीएम की कुर्सी संभालने के बाद पहली विदेश यात्रा पर भारत के बजाय चीन गए. यह उनके रवैये को भी … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 19:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ढाका </strong><br>
बांग्‍लादेश में जबसे लोकतांत्रिक सरकार को सत्‍ता से बेदखल किया गया है, तब से भारत के साथ संबंध पटरी से उतर गए हैं. पड़ोसी मुल्‍क के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान स्‍थापित परंपरा से इतर पीएम की कुर्सी संभालने के बाद पहली विदेश यात्रा पर भारत के बजाय चीन गए. यह उनके रवैये को भी दिखाता है. हालांकि, इसे बावजूद भारत ने दोस्‍ती का हाथ बढ़ाया है. बांग्‍लादेशी पीएम तारिक रहमान को BRICS समिट में शामिल होने का न्‍योता भेजा गया है. बता दें कि बांग्‍लादेश BRICS का सदस्‍य देश नहीं है, इसके बावजूद ढाका को आमंत्रित करना द्विपक्षीय संबंधों की सुधार की दिशा में अहम माना जा रहा है. BRICS समिट 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्‍ली में आयोजित होने वाला है। </p>
<p>भारत ने वैश्विक सहयोग की अपनी व्यापक कूटनीतिक पहल के तहत बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है. बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने गुरुवार को पुष्टि की कि भारतीय पक्ष से प्राप्त निमंत्रण विदेश मंत्रालय को मिला है, जिसे आगे प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दिया गया है. हालांकि, उन्होंने इस बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी. भारत की ओर से निमंत्रण की आधिकारिक पुष्टि का अभी इंतजार है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले फरवरी में भी तारिक रहमान को भारत आने का निमंत्रण दे चुके थे. हालांकि, अब तक संकेत मिले हैं कि रहमान भारत यात्रा को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं. इसकी एक प्रमुख वजह यह मानी जा रही है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना अभी भी भारत में हैं और ऐसे समय में भारत की यात्रा करने से बांग्लादेश की घरेलू राजनीति में उनके खिलाफ प्रतिक्रिया हो सकती है। </p>
<p><strong>बांग्‍लादेश की क्‍या है महत्‍वाकांक्षा</strong><br>
बांग्लादेश की ब्रिक्स सदस्य बनने की महत्वाकांक्षा लगातार बनी हुई है. इस दिशा में उसे पहले ही चीन और रूस का समर्थन मिल चुका है. ऐसे में नई दिल्ली में होने वाला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ढाका के लिए कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भी शामिल होने की संभावना है. तारिक रहमान हाल के महीनों में मलेशिया और चीन की यात्रा कर चुके हैं. इसके अलावा वह इस वर्ष जापान और संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए अमेरिका की यात्रा की भी योजना बना रहे हैं. भारत इससे पहले वर्ष 2016 में भी, जब उसने पिछली बार प्रत्यक्ष रूप से ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, बांग्लादेश को बिम्सटेक सदस्य के रूप में ब्रिक्स आउटरीच सत्र में आमंत्रित कर चुका है। </p>
<p><strong>संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश</strong><br>
फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान क्षेत्रीय फोरम के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान की मुलाकात भी हुई. ढाका के अधिकारियों के अनुसार, दोनों नेताओं ने संक्षिप्त बातचीत की. क्षेत्रीय अस्थिरता से जुड़े एक सवाल पर शमा ओबैद इस्लाम ने कहा कि बांग्लादेश एक लोकतांत्रिक सरकार वाला देश है और वह क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता चाहता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत, एक बड़े लोकतांत्रिक देश के रूप में, अपने आंतरिक मुद्दों का समाधान तलाशने की दिशा में आगे बढ़ेगा। </p>
<p><strong>बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी</strong><br>
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता इस वर्ष ‘बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’ विषय पर केंद्रित है. वर्तमान में ब्रिक्स समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात सदस्य हैं. पिछले वर्ष 17वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 6-7 जुलाई 2025 को ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित हुआ था। </p>]]> </content:encoded>
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<title>इजरायल पर भी अमेरिका का भारी टैरिफ, फिर भारत पर क्यों दिखी ट्रंप की नरमी? जानिए बड़ी वजह</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधी रात से अपने 60 व्यापार सहयोगियों पर टैरिफ का बम फोड़ दिया है। जबरन मजदूरी का आरोप लगाते हुए अमेरिका ने भारत समेत 60 ट्रेड पार्टनर्स पर 10 या फिर 12.5 फीसदी का टैरिफ लगाया है। टैरिफ को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मात खाने के बाद भी … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 18:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>इजरायल, पर, भी, अमेरिका, का, भारी, टैरिफ, फिर, भारत, पर, क्यों, दिखी, ट्रंप, की, नरमी, जानिए, बड़ी, वजह</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधी रात से अपने 60 व्यापार सहयोगियों पर टैरिफ का बम फोड़ दिया है। जबरन मजदूरी का आरोप लगाते हुए अमेरिका ने भारत समेत 60 ट्रेड पार्टनर्स पर 10 या फिर 12.5 फीसदी का टैरिफ लगाया है। टैरिफ को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मात खाने के बाद भी डोनाल्ड ट्रंप ने इन देशों से आयात पर शुल्क लगाया है। उन्होंने यह भी कहा कि महीनेभर की चर्चा के बाद यह टैरिफ लगाया गया है। इसके सामने कोई कानूनी चुनौती भी नहीं है। अमेरिका ने इजरायल को भी बख्शा नहीं है और उसपर 12.5 फीसदी का टैरिफ लगाया है। जबकि अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के खिलाफ युद्ध भी लड़ रहे हैं।</p>
<p>वाइट हाउस ने अपने आदेश में कहा है कि चीन, यूके और जापान जैसे देश जिनके पास जबरन मजदूरी को रोकने का कोई कानून नहीं है, उनपर 12.5 फीसदी का टैरिफ लगाया जा रहा है। इसके अलावा भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश. यूरोपीय यूनियन पर 10 फीसदी का टैरिफ लगाया गया है। अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत इन देशों से तेल और गैस के आयात पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया है।</p>
<p>बता दें कि इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने जो 10 फीसदी का अस्थायी टैरिफ ळगाया था, उसकी मियाद गुरुवार रात ही खत्म हो रही थी। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने नए टैरिफ का ऐलान कर दिया। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अमेरिका करीब 100 साल से जबरन मजदूरी का विरोधी रहा है और अपनी पुरानी नीतियों के तहत ही यह फैसला लिया गया है। अमेरिका ने कहा कि मजदूरों की स्थिति सुधारने के लिए और मानवाधिकारों की रक्षा करने के लिए यह कदम उठाया गया है।</p>
<p><strong>भारत पर क्यों 10 फीसदी का टैरिफ</strong><br>
अमेरिका ने भारत पर कुल 10 फीसदी का टैरिफ लगाया गया है। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने पहले भारत पर 12.5 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। अब वाइट हाउस की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि कंबोडिया गुआतेमाला, होंडुरस, भारत, श्रीलंका, त्रिनिदाद,ने जबरन मजदूरी पर प्रतिबंध लगाने को लेकर प्रतिबद्धता जताई है।ऐसे में इन देशों ने कहा कि जबरन मजदूरी को रोकने की दिशा में सार्थक कदम उठाने और उत्साहवर्धन करने के लिए उनपर ज्यादा टैरिफ ना लगाया जाए।</p>
<p>अमेरिका का 1974 का ट्रेड ऐक्ट का सेक्शन 301उन ट्रेड पारन्टर्स के खिलाफ टैरिफ लगाने की छूट देता है जो कि गलत तरीके से ट्रेड करते हैं। अधिकारियों के हवाले से एएनआई ने बताया है कि पहले अमेरिका भारत पर भी 12.5 फीसदी टैरिफ लगाने वाला था लेकिन लेबर प्रैक्टिस को लेकर सकारात्मक बातचीत के बाद भारत को राहत मिल गई है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>8th Pay Commission पर बड़ा अपडेट! 7 और 10 अगस्त को होगी अहम बैठक, कर्मचारी&#45;पेंशनर्स आवेदन की डेडलाइन नोट करें</title>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 17:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>8th, Pay, Commission, पर, बड़ा, अपडेट, और, अगस्त, को, होगी, अहम, बैठक, कर्मचारी-पेंशनर्स, आवेदन, की, डेडलाइन, नोट, करें</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>आठवें वेतन आयोग को लेकर आज 24 जुलाई, शुक्रवार को बड़ी खबर सामने आई है. 8वां केंद्रीय वेतन आयोग एक बार फिर बैठकों का दौर शुरू कर रहा है. आयोग ने राजधानी दिल्‍ली में कर्मचारी संगठनों के साथ मीटिंग की तारीख भी जारी की है. नई दिल्‍ली में 7 और 10 अगस्‍त को कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों के साथ बड़ी बैठकें होनी है. इस बैठक में शामिल होने के लिए कर्मचारी और पेंशनर्स संगठन को क्‍या करना होगा, ये भी आयोग ने बताया है। </p>
<p>देश के करीब 1.19 करोड़ सरकारी कर्मियों और पेंशनर्स के लिए ये बड़ा अपडेट है जिन्‍हें 8वें वेतन आयोग के लागू होने का इंतजार है. दरअसल पिछले कुछ महीनों में हुई मीटिंग्‍स के बाद पिछले काफी दिनों से कोई सुगबुगाहट नहीं देखी जा रही थी. इस बीच 8वें वेतन आयोग की चेयरपर्सन जस्टिस रंजना देसाई को कई राज्‍यों में UCC बोर्ड की भी जिम्‍मेदारी दी गई. ऐसे में कर्मचारी संगठनों को संशय हो रहा था कि कहीं इससे 8वें वेतन आयोग का काम प्रभावित न हो. अब एक बार फिर बैठकों का शेड्यूल जारी होने पर कर्मचारी और पेंशनर वर्ग को राहत मिली है। </p>
<p>AINPSF के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डॉ मंजीत सिंह पटेल ने कहा कि पिछले दो हफ्तों से वेतन आयोग से कोई अपडेट नहीं मिल रही थी, जिससे कर्मचारियों और पेंशनर्स में चिंता थी कि कहीं कमीशन डिले न हो जाए. हमने भी पिछले हफ्ते ही कमीशन से गुजारिश की थी कि जल्द से जल्द नए शेड्यूल जारी हों ताकि कार्य जल्द से जल्द संपन्न हो. कमीशन के नए आधिकारिक शेड्यूल के लिए हम कर्मचारियों के परिवार की तरफ से हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं और गुजारिश करते हैं कि यथाशीघ्र रिपोर्ट सब्मिट की जाए ताकि लोगों को समय से लाभ सुनिश्चित हो सकें। </p>
<p><strong>वेतन विसंगतियां दूर करने के लिए पे मैट्रिक्स का होगा विलय</strong><br>
NC-JCM द्वारा दिए गए सुझावों के अनुसार, मौजूदा पे मैट्रिक्स के कई स्तरों (Levels) को आपस में मिलाया जा सकता है। इस योजना के तहत लोअर और मिडिल लेवल (जैसे लेवल 2 और 3, लेवल 4 और 5, लेवल 7 और 8, तथा लेवल 9 और 10) को एक करने की बात कही गई है। इस बदलाव से न केवल प्रशासनिक जटिलताएं कम होंगी, बल्कि कर्मचारियों को पदोन्नति (Promotion) और सालाना वेतन वृद्धि का लाभ अधिक स्पष्टता के साथ मिल सकेगा। इसके अलावा, अलग-अलग पदों के बीच सैलरी के बड़े अंतर को कम करके समान कार्य के लिए उचित वेतन संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।</p>
<p><strong>बेसिक सैलरी 18 हजार से बढ़कर हो सकती है 69 हजार रुपये</strong><br>
इस नए प्रस्ताव में कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन को लेकर भी एक बड़ा दावा किया गया है। संगठनों ने सरकार से 3.83 फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) लागू करने की पुरजोर मांग की है। यदि सरकार इस सिफारिश को स्वीकार कर लेती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी मौजूदा 18,000 रुपये से सीधे बढ़कर 69,000 रुपये प्रति माह हो जाएगी। इस ऐतिहासिक बढ़ोतरी का सीधा लाभ देश के लाखों सेवारत कर्मचारियों के साथ-साथ पेंशनभोगियों को भी मिलेगा, जिससे उनके कुल वेतन (CTC) में बंपर उछाल आएगा।</p>
<p><strong>सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने की मांग</strong><br>
प्रस्ताव में सिर्फ शुरुआती वेतन बढ़ाने पर ही जोर नहीं दिया गया है, बल्कि कर्मचारियों की वार्षिक आय में तेजी से बढ़ोतरी के लिए भी खाका तैयार किया गया है। इसके तहत वर्तमान में मिलने वाले 3 फीसदी सालाना इंक्रीमेंट (Yearly Increment) को दोगुना करके 6 फीसदी करने का सुझाव दिया गया है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि इस कदम से बाजार में बढ़ती महंगाई के असर को बेअसर करने और कर्मचारियों की क्रय शक्ति को बनाए रखने में मदद मिलेगी।</p>
<p><strong>क्यों पड़ी इस बड़े बदलाव की जरूरत?</strong><br>
प्रतिनिधिमंडलों का तर्क है कि वर्तमान वेतन प्रणाली काफी उलझी हुई है और विभिन्न पे-लेवल्स के बीच का फासला बहुत ज्यादा है। आज के समय में बढ़ती जीवन-यापन लागत और महंगाई सूचकांक को देखते हुए वेतनमान में व्यापक सुधार अपरिहार्य हो चुका है। यही वजह है कि पे स्केल मर्जर, उच्च फिटमेंट फैक्टर और बेहतर वार्षिक इंक्रीमेंट जैसे क्रांतिकारी बदलावों की वकालत की जा रही है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>पेपर लीक पर सरकार का सबसे बड़ा एक्शन! 10 साल की जेल, ₹10 करोड़ जुर्माना, नए कानून को कैबिनेट की मंजूरी</title>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 16:45:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>पेपर, लीक, पर, सरकार, का, सबसे, बड़ा, एक्शन, साल, की, जेल, ₹10, करोड़, जुर्माना, नए, कानून, को, कैबिनेट, की, मंजूरी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में 'पेपर लीक विधेयक संसोधन' को मंजूरी दे दी गई है. जिसमें पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ कड़े प्रावधान होंगे. इसमें स्पेशल फॉस्ट ट्रैक कोर्ट को लीगल बैकिग मिलेगी. साथ ही फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट को तीन महीनों में सुनवाई करने और फैसला देने को कहा जाएगा. जबकि पेपर लीक मामले में 10 साल की सजा और 10 करोड़ के जुर्माना का प्रावधान होगा। </p>
<p>वहीं दूसरी ओर, आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के मंत्रियों के बीच नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में बातचीत हुई। </p>
<p>कैबिनेट बैठक में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 को और सख्त बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई.  सरकार अगले सप्ताह मानसून सत्र के दौरान इस संशोधित विधेयक को संसद में पेश करने की तैयारी में है. पेपर लीक माफियाओ के ख़िलाफ़ कड़े प्रावधान होंगे. स्पेशल फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट लीगल बैकिंग मिलेगी और फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट को यह अधिकार होगा कि वह तीन महीनों में जांच कर फैसला दे. इसके अलावा पेपर लीक मामले में 10 साल की सज़ा और 10 करोड़ का जुर्माना का प्रावधान होगा। </p>
<p>इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि "पेपर लीक कोई मामूली मामला नहीं है." उन्होंने कहा कि यह लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा विषय है और सरकार दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए नया कानून लाने जा रही है। </p>
<p><strong>'वंदे मातरम् बिल'… राष्ट्रवाद की पिच पर लौटी मोदी सरकार</strong></p>
<p>संसद का मॉनसून सत्र शुरू होते ही NEET पेपर लीक मुद्दे पर विपक्ष आगबबूला है. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कुछ भी कम के लिए वह तैयार नहीं है. संसद से लेकर सड़क तक जारी इस सियासी घमासान और गतिरोध को तोड़ने के लिए मोदी सरकार ने एक बड़ा दांव चला है. सरकार की योजना सत्र की शुरुआत 'वंदे मातरम्' से जुड़े एक ऐतिहासिक विधेयक से करने की है। </p>
<p>सिनेमाघरों में राष्ट्रगान पर खड़े होने या न होने की पुरानी बहसों को पीछे छोड़ते हुए अब केंद्र सरकार 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' (Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026) लेकर आ रही है. शुक्रवार को इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा. इस बिल की टाइमिंग और इसकी जरूरत पर सवाल उठाए जा रहे हैं। </p>
<p>सरकार को उम्मीद है कि राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े इस मुद्दे पर तमाम राजनीतिक दल एक सुर में नजर आएंगे. हालांकि, संसद के मौजूदा मिजाज को देखते हुए सहमति की गुंजाइश बेहद कम नजर आ रही है। </p>
<p>वंदे मातरम् भले हमारा राष्ट्रीय गीत हो, लेकिन इसे लेकर एक राजनीतिक बहस 1937 से चली आ रही है. जब कांग्रेस द्वारा वंदे मातरम् के पहले दो अंतरों को ही आधिकारिक आयोजनों के लिए स्वीकार किया गया. बीजेपी इस फैसले पर अक्सर निशाना साधती रही है. और पिछले दिनों केंद्र सरकार ने एक आदेश के जरिए वंदे मातरम् के सभी पैरा को अधिकृत बनाने की मंजूरी दी है. विपक्ष यह भी मानता है कि इस बिल के जरिए पुराने राजनीतिक विवादों को फिर से उ<strong>केरा जा रहा है। </strong></p>
<p><strong>जनसभाओं से लेकर 'स्पेस' तक: मोदी और 'वंदे मातरम्'</strong><br>
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति में 'वंदे मातरम्' का हमेशा विशेष स्थान रहा है. चुनावी रैलियों में जब पीएम मोदी मंच से हुंकार भरते हैं- वे पुकारते हैं ’वंदे…’ और सामने खड़ी जनता का गूंजता जवाब आता है- ’मातरम्!’ इस घोष की पुनरावृत्ति धीरे-धीरे इतनी तीव्र हो जाती है कि पूरी जनसभा एक अलग ही ऊर्जा से भर उठती है। </p>
<p>यह सिर्फ भाषण की शुरुआत या अंत भर नहीं है, बल्कि बीजेपी की सांस्कृतिक और राजनीतिक विचारधारा का अभिन्न हिस्सा बन चुका है. चाहे बंगाल के चुनावी एजेंडे को ही ले लें. बैंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस गीत को बीजेपी ने बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान अपने राष्ट्रवाद के एजेंडे के केंद्र में रखा। </p>
<p>इसके अलावा हाल ही में भारत के पहले प्राइवेट रॉकेट के साथ स्पेस भेजी गई पर्ची पर खुद प्रधानमंत्री मोदी ने अपने हाथों से 'वंदे मातरम्' लिखकर देश की तकनीकी प्रगति को सांस्कृतिक गौरव से जोड़ा। </p>
<p><strong>1971 के मूल कानून में नया विधेयक क्या बदलाव लेकर आ रहा है:</strong><br>
-मौजूदा कानून (1971) में दायरा राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान (जन गण मन) और संविधान तक था. जिसमें राष्ट्रगान रोकने या बाधा डालने पर 3 साल तक की जेल या जुर्माने का प्रावधान था। </p>
<p>-प्रस्तावित संशोधन (2026) में राष्ट्रगीत (वंदे मातरम्) को भी समान कानूनी दर्जा दिया जा रहा है. अब वंदे मातरम् के गाने में बाधा डालने पर भी 3 साल की सजा या जुर्माना भुगतना पड़ेगा। </p>
<p>24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि 'वंदे मातरम्' को 'जन गण मन' के समान ही मान और दर्जा दिया जाएगा. सरकार का तर्क है कि यह बिल उसी ऐतिहासिक संकल्प को कानूनी अमलीजामा पहनाता है। </p>
<p><strong>मोदी सरकार के राजनीतिक लक्ष्य: एक तीर से कई निशाने</strong><br>
इस विधेयक के जरिए सत्ता पक्ष एक साथ कई राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश में है. सबसे पहले NEET पेपर लीक पर आक्रामक विपक्ष को राष्ट्रवाद के मुद्दे पर असहज करना. अगर विपक्ष बिल का विरोध करता है, तो बीजेपी उसे ’राष्ट्रगीत विरोधी’ ठहराने का नैरेटिव बना सकती है। </p>
<p>दूसरा, राष्ट्रवाद का एजेंडा सेट करना. संसद में मॉनसून सत्र की बहस का रुख सरकार अपने अनुकूल पिच पर मोड़ना चाहती है. और इसके लिए मौका भी है. सरकार वंदे मातरम् की रचना की 150वीं वर्षगांठ मना रही है. ऐसे में इस बिल को लाकर बीजेपी अपने कोर-वोटर को सांस्कृतिक गौरव का मैसेज देना चाहती है। </p>
<p><strong>विपक्ष के तर्क: 'मुद्दों से ध्यान भटकाने की साजिश'</strong><br>
विपक्षी खेमा इस बिल को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है. कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि NEET घोटाले, बेरोजगारी और महंगाई जैसे गंभीर जनहित के मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए 'वंदे मातरम्' को राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है। </p>
<p>यदि सरकार वाकई इस विधेयक को लेकर सीरियस है तो वह इसका मसौदा विपक्षी दलों को उपलब्ध कराती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. विपक्षी नेताओं का कहना है कि राष्ट्रभक्ति दिल से आती है, कानून या सजा के डर से जबरन नहीं थोपी जा सकती। </p>
<p><strong>सीजेपी के साथ वार्ता</strong><br>
उधर, छात्रों के आंदोलन के बीच CJP और केंद्र सरकार के बीच बातचीत को भी अहम माना जा रहा है. CJP ने पहले मंत्रियों के सरकारी आवास या कार्यालय में बैठक से इनकार करते हुए किसी तटस्थ स्थान पर वार्ता की मांग की थी. इसके बाद कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बैठक आयोजित की गई. CJP की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जवाबदेही तय करने और आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने जैसी प्रमुख मांगें उठाई जा रही हैं। </p>
<p>सरकार की रणनीति साफ है, एक ओर आंदोलनरत छात्रों के प्रतिनिधियों से संवाद के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानूनी ढांचे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>धर्मेन्द्र प्रधान पर फैसला तय? कैबिनेट बैठक से पहले पीएम मोदी के बड़े संकेत, डैमेज कंट्रोल में सरकार</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर देशभर में हो रहे छात्र प्रोटेस्ट और संसद में विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात बड़े संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को होने वाली केंद्रीय कैबिनेट बैठक में पेपर लीक के मामलों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त सजा के प्रावधान … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 13:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर देशभर में हो रहे छात्र प्रोटेस्ट और संसद में विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात बड़े संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को होने वाली केंद्रीय कैबिनेट बैठक में पेपर लीक के मामलों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त सजा के प्रावधान वाले कानून के मसौदे पर चर्चा की जाएगी। सोशल मीडिया पर लगभग तीन मिनट का वीडियो संदेश जारी करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कोई मामूली मुद्दा नहीं है। इससे लाखों छात्रों और उनके माता-पिता को बहुत दुख हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए दृढ़ संकल्पित है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने बताया कि कथित नीट पेपर लीक के बाद सरकार की पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना थी कि छात्रों का एक शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो। उन्होंने कहा कि हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह पक्का करना था कि स्टूडेंट्स का एकेडमिक साल बर्बाद न हो। जल्द से जल्द परीक्षा कराना जरूरी था। सरकार ने करीब 22 लाख छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित करने के लिए अपनी पूरी प्रशासनिक मशीनरी झोंक दी थी। परिणाम 19 जुलाई को घोषित किए गए।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि सरकार ने कम से कम समय में लगभग 22 लाख छात्रों के लिए परीक्षा आयोजित करने के लिए अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल किया। सिर्फ चार-पांच दिन पहले, 19 तारीख को रिजल्ट घोषित हुए और देशभर से सफल अभ्यर्थियों के अपनी उपलब्धियों का जश्न मना रहे हैं।</p>
<p><strong>पीएम मोदी फ्रंटफुट पर उतरकर संभाला मोर्चा</strong><br>
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को फ्रंटफुट पर उतरे और अपने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. पेपर लीक के दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए सरकार ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे. युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.  फास्ट ट्रैक कोर्ट का मकसद यह होगा कि पेपर लीक के दोषियों को जल्दी और सख्त सजा मिल सके. मामलों के निपटारे में देरी न हो, इसके लिए यह कदम उठाया जा रहा है। </p>
<p><strong>छात्र आंदोलन</strong><br>
पीएम मोदी के सख्त रुख के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय और संबंधित विभागों ने मिशन मोड में काम शुरू किया. सरकार ने चार राज्यों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का ऐलान कर दिया गया.   कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने स्पष्ट किया कि दिल्ली, बॉम्बे, कलकत्ता और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट्स के अधिकार क्षेत्र में विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने की तैयारी की जा रही है. इन अदालतों में मामलों की हर रोज सुनवाई होगी। </p>
<p><strong>प्रशासनिक फेरबदल और पीएम का कड़ा संदेश</strong><br>
मोदी सरकार ने पेपर लीक के मुद्दे पर  शिक्षा विभाग में बड़े बदलाव और प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने से हुई. केंद्र सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नरेश गंगवार को नया शिक्षा सचिव नियुक्त किया, जबकि विनीत जोशी को पद से हटाकर पंचायती राज विभाग में ट्रांसफर कर दिया गया. विनीत जोशी को शिक्षा विभाग से हटाकर मोदी सरकार ने छात्रों का सियासी संदेश देने की कवायद की. इसे मोदी सरकार के सख्त एक्शन के तौर पर देखा जा रहा है। </p>
<p><strong>पीएम मोदी ने वीडियो के जरिए दिया मैसेज</strong><br>
गुरुवार देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश जारी कर छात्रों और देशवासियों को सरकार की रणनीति से अवगत कराया. पीएम मोदी ने कहा कि   मैं जानता हूं कि पेपर लीक कोई छोटी-मोटी बात नहीं है. यह लाखों छात्रों और उनके माता-पिता के लिए बेहद दुखद है. पेपर लीक के गुनहगारों को पकड़ा गया है, वे जेल में पड़े हैं. हमारा सबसे महत्वपूर्ण जिम्मा था कि विद्यार्थियों का एक वर्ष बर्बाद न हो. तत्काल परीक्षाएं लेना बहुत जरूरी था। </p>
<p><strong>आरोपियों के खिलाफ जारी है कार्रवाई</strong><br>
उन्होंने बताया कि सरकार ने पहले ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। लेकिन इतना पर्याप्त नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम ऐसे लोग नहीं हैं जो सिर्फ इतने से संतुष्ट हो जाएं। इसलिए आज मैंने विभागों को फास्ट-ट्रैक कोर्ट्स के लिए प्रावधान तैयार करने का निर्देश दिया है।</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि अधिकारियों ने दिन भर काम करके कानून का मसौदा तैयार किया, जो गुरुवार देर रात सौंपा गया। पीएम मोदी ने कहा कि ड्राफ्ट कानून में फास्ट-ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा के प्रावधान शामिल हैं। इस पर कल कैबिनेट में चर्चा होगी। कैबिनेट के साथियों के सुझावों को शामिल करने के बाद बिल को अंतिम रूप दिया जाएगा।</p>
<p>नीट पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर चल रहे देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों को शांत करने के लिए केंद्र सरकार ने गुरुवार देर रात तीन मोर्चों पर बड़ी कार्रवाई की है। राजनीतिक बातचीत, कड़े कानून और प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव के जरिए सरकार ने परीक्षा प्रणाली में लोगों का भरोसा बहाल करने की अब तक की सबसे मजबूत कोशिश की है।</p>
<p><strong>1. वांगचुक ने तोड़ा 26 दिन का अनशन</strong><br>
सरकार की राजनीतिक पहल के तहत सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना 26 दिनों का अनशन खत्म कर दिया है। वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और लेह एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में लंबी बातचीत के बाद अनशन तोड़ने का फैसला लिया।</p>
<p>एक्स पर इसकी घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि देश में हिंसा की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि समझौते की विस्तृत जानकारी अलग से शेयर की जाएगी।</p>
<p>वांगचुक के अनशन समाप्त करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ''मैं सोनम जी से अनुरोध करता हूं कि वह चिकित्सकों की सलाह मानें और अपना वजन फिर से पुरानी स्थिति में लायें, मैं प्रार्थना करता हूं कि वह स्वस्थ रहें।'' इससे पहले, नड्डा ने वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो एवं अन्य लोगों की मौजूदगी में उन्हें सरकार का भरोसा दिलाते हुए कहा, "सरकार दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध-प्रदर्शन करने वालों और 20 जुलाई, 2026 को संसद तक मार्च में शामिल होने वालों के खिलाफ मामले दर्ज न करने को लेकर सकारात्मक रुख अपना रही है।"</p>
<p><strong>2. पेपर लीक पर आएगा और सख्त कानून</strong><br>
सरकार के दूसरे बड़े कदम के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश में परीक्षा प्रणाली को और मजबूत करने का ऐलान किया है। पीएम मोदी ने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली धोखाधड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए केंद्र नया कानून लाएगा।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, सरकार 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' में संशोधन करने जा रही है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा लाए जाने वाले इस संशोधन में संगठित नकल और पेपर लीक के मामलों में अधिक कठोर सजा, भारी जुर्माना और जांच व कार्रवाई के लिए एक तय समय-सीमा का प्रावधान होगा।</p>
<p><strong>3. उच्च शिक्षा सचिव को हटाया गया</strong><br>
सरकार ने प्रशासनिक मोर्चे पर भी सख्त कदम उठाया है। गुरुवार देर रात हुए एक बड़े नौकरशाही फेरबदल में केंद्र ने उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी को उनके पद से हटा दिया है। उनकी जगह अब नरेश पाल गंगवार को नया उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया गया है। परीक्षा तंत्र को लेकर उठ रहे सवालों, संसद में हो रहे हंगामे और विपक्ष के लगातार हमलों के बीच इसे एक बड़े 'प्रशासनिक रीसेट' के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि परीक्षा प्रणाली की सत्यनिष्ठा अभी भी बरकरार है, लेकिन राजनीतिक संवाद, विधायी पहल और प्रशासनिक कार्रवाई के जरिए सरकार ने जनता और छात्रों का विश्वास फिर से हासिल करने का एक स्पष्ट संदेश दिया है।</p>
<p><strong>जारी है विरोध-प्रदर्शन</strong><br>
बता दें कि नीट पेपर लीक को लेकर जंतर मंतर के साथ देश भर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। छात्र शिक्षा मंत्री धर्मेंन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी पार्टियां भी सड़क से लेकर संसद तक विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। उनका कहना है कि जब तक धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होगा, सदन में कोई चर्चा नहीं होगी।</p>]]> </content:encoded>
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<title>26 दिन बाद खत्म हुआ सोनम वांगचुक का अनशन, जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद लिया फैसला</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ मुलाकात के बाद अपना अनशन तोड़ दिया है. सोनम वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन के समर्थन में 28 जून से अनशन पर थे. सोनम वांगचुक ने शुक्रवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 12:45:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ मुलाकात के बाद अपना अनशन तोड़ दिया है. सोनम वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन के समर्थन में 28 जून से अनशन पर थे.</p>
<p>सोनम वांगचुक ने शुक्रवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ बैठक के बाद अपना अनशन खत्म कर दिया है। </p>
<p><strong>सोनम वांगचुक ने दी जानकारी</strong><br>
 सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि 'अभी-अभी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह व लेह-लद्दाख की 'एपेक्स बॉडी' के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में मैंने 26 दिनों के बाद अपना अनशन समाप्त किया। <br>
 <br>
वागंचुक ने आगे बताया कि इससे पहले, अलग-अलग राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने मुझसे मिलकर या पत्र लिखकर अनशन तोड़ने का आग्रह किया था. यह कदम विभिन्न शर्तों पर लंबी बातचीत और देश में संभावित हिंसा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है. मैं बहुत जल्द एक अलग वीडियो में इन शर्तों के बारे में विस्तार से बताऊंगा. इस बीच, मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि कहीं भी किसी भी तरह की हिंसा न होने देने को लेकर बहुत सतर्क रहें। </p>
<p><strong>अनशन का अंत… जवाबदेही की शुरुआत…!" देखिए सोनम वांगचुक ने क्या कहा?</strong></p>
<p>26 दिनों के उपवास के बाद सोनम वांगचुक ने सबसे पहले बातचीत और सहयोग की प्रक्रिया के प्रति आभार जताया. इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी संदेश में वांगचुक ने लिखा कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के अलावा लेह-लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त किया है. उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात की थी या पत्र लिखकर अनशन तोड़ने का आग्रह किया था। </p>
<p><strong>प्रदर्शनकारी छात्रों पर नहीं होगी कोई कार्रवाई</strong><br>
वांगचुक ने कहा कि सरकार ने लिखित आश्वासन दिया है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं तथा 20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' मार्च में शामिल लोगों के खिलाफ कोई एफआईआर, कानूनी कार्रवाई या अन्य दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।</p>
<p><strong>मृत छात्रों के परिवारों को मिलेगा मुआवजा</strong><br>
उन्होंने बताया कि कथित पेपर लीक प्रकरण से जुड़े जिन 20 से अधिक छात्रों की मौत हुई, उनके परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। सरकार ने इस मांग पर भी लिखित सहमति दी है।</p>
<p><strong>संसद में शिक्षा और परीक्षा प्रणाली पर चर्चा</strong><br>
वांगचुक ने कहा कि सरकार ने संसद में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और जवाबदेही के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराने का भी लिखित आश्वासन दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और जिम्मेदारी तय हो।</p>
<p><strong>धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर नहीं मिला आश्वासन</strong><br>
वांगचुक ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार की ओर से कोई आश्वासन नहीं मिला। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण तीन मांगें थीं, जिन पर लिखित सहमति मिलने के बाद उन्होंने अनशन समाप्त करने का फैसला किया।</p>
<p><strong>इस बीच, PM मोदी ने एक्स पर कहा कि मैं सोनम जी से आग्रह करता हूं की वो डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या </strong>रखें और जल्द से जल्द अपना पुराना वजन फिर से प्राप्त करें। <br>
 <br>
बता दें, सोनम वांगचुक को पहले दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किया गया था. वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने कोर्ट से मांग की थी कि वांगचुक को इलाज के लिए मेदांता भेजा जाए. दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि उनकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों की लगातार निगरानी जरूरी है। </p>
<p>वहीं अब जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने मेदांता अस्पताल में वांगचुक से मुलाकात की, जहां अनशन के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मेडिकल निगरानी के लिए भर्ती कराया गया था। </p>
<p>केंद्र सरकार ने बातचीत का दिया भरोसा<br>
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने कहा कि सरकार ने आंदोलनकारियों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा के लिए चार औपचारिक प्रस्ताव भेजे हैं. सरकार सभी मुद्दों पर किसी भी समय चर्चा करने को तैयार है. डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बातचीत जेपी नड्डा के कार्यालय या आवास पर भी हो सकती है और वे स्वयं तथा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा इसमें शामिल होंगे. उन्होंने इसे छात्रों और युवाओं के हित में सरकार द्वारा उठाए जा रहे निरंतर कदमों का हिस्सा बताया. संवाद और चर्चा के माध्यम से हम धीरे-धीरे समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे. मैं विनम्रतापूर्वक आप सभी से आग्रह करता हूं कि आइए और बातचीत कीजिए। </p>
<p>परिवार और समर्थकों का किया धन्यवाद<br>
अनशन समाप्त करने के दौरान वांगचुक ने अपने परिवार, समर्थकों, लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के नेताओं का विशेष रूप से आभार जताया. उन्होंने कहा कि कठिन समय में परिवार ने उन्हें लगातार ताकत और समर्थन दिया. डॉक्टरों ने भी बताया कि फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है। </p>
<p>PM मोदी ने की स्वस्थ रहने की अपील<br>
सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रतिक्रिया दी. PM ने कहा, "मैं सोनम जी से आग्रह करता हूँ कि वो डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या रखें और जल्द से जल्द अपना पुराना वज़न फिर से प्राप्त करें. मैं प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि सोनम जी स्वस्थ रहें." प्रधानमंत्री के इस संदेश को आंदोलन के बाद एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। </p>
<p>पेपर लीक पर PM का बड़ा संदेश<br>
इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने देर रात एक वीडियो संदेश जारी कर NEET और अन्य परीक्षाओं से जुड़े पेपर लीक मामलों पर भी सरकार का रुख स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि पेपर लीक कोई सामान्य विषय नहीं है और इससे लाखों छात्रों तथा उनके परिवारों को पीड़ा पहुंचती है. PM ने कहा कि पिछले ढाई महीनों में दोषियों की गिरफ्तारी समेत कई कदम उठाए गए हैं. सरकार की प्राथमिकता थी कि छात्रों का एक साल बर्बाद न हो, इसलिए कम समय में दोबारा परीक्षा कराई गई और 22 लाख छात्रों के लिए व्यवस्था सुनिश्चित की गई. उन्होंने बताया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट और कठोर सजा के प्रावधानों वाला मसौदा तैयार हो चुका है और इसे कैबिनेट बैठक में चर्चा के लिए रखा जाएगा. इसके बाद संसद में जल्द कानून लाने का प्रयास किया जाएगा। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>Weather Alert: गुजरात से जम्मू&#45;कश्मीर और यूपी तक IMD का रेड अलर्ट, कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली देश के कई हिस्सों में मॉनसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने गुजरात, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. विभाग के मुताबिक, अगले दो से तीन घंटों के दौरान कई इलाकों में तेज बारिश, गरज-चमक, बिजली गिरने … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 12:45:10 +0530</pubDate>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>देश के कई हिस्सों में मॉनसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने गुजरात, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. विभाग के मुताबिक, अगले दो से तीन घंटों के दौरान कई इलाकों में तेज बारिश, गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना है। </p>
<p>IMD ने गुजरात के अहमदाबाद, अमरेली, आनंद, बनासकांठा, भरूच, भावनगर, बोटाद, गांधीनगर, कच्छ, खेड़ा, महेसाणा, पंचमहल, पाटन, साबरकांठा, सुरेंद्रनगर और वडोदरा के लिए रेड अलर्ट जारी किया है. इन जिलों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के साथ भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। </p>
<p>मौसम विभाग ने यह अलर्ट 7.46 बजे जारी किया है और 10.46 बजे तक, तीन घंटे के लिए वैलिड होंगी. गुजरात के अरावली, छोटा उदयपुर, दाहोद, डांग, देवभूमि द्वारका, गिर सोमनाथ, जामनगर, जूनागढ़, मोरबी, नर्मदा, नवसारी, पोरबंदर, राजकोट, सूरत, तापी, वलसाड समेत कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। </p>
<p>उत्तर प्रदेश में लखनऊ, हरदोई, सीतापुर और उन्नाव में भी गरज-चमक के साथ मध्यम बारिश और 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। </p>
<p>वहीं जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग, डोडा, गांदरबल, जम्मू, कठुआ, किश्तवाड़, कुलगाम, पुलवामा, राजौरी, रामबन, रियासी, सांबा, शोपियां और उधमपुर समेत कई जिलों में भी ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। </p>
<p>मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की अपील की है. IMD ने सलाह दी है कि लोग पेड़ों या कमजोर ढांचों के नीचे शरण न लें, अनावश्यक यात्रा से बचें, सड़क और ट्रैफिक की स्थिति की जानकारी लेकर ही बाहर निकलें और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी सभी एडवाइजरी का पालन करें। </p>]]> </content:encoded>
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<title>रेलवे का नया नियम! कैमरे के साथ टिकट चेक करेंगे TTE, यात्रियों से हर बातचीत होगी रिकॉर्ड</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली ट्रेनों में अब आपके टिकट की जांच कैमरे की निगरानी में होगी. TTE के यूनिफॉर्म में एक कैमरा लगा होगा, जिसमें टीटीई और यात्री के बीच की बातचीत की वीडियो रिकॉर्ड होगी. बहस या विवाद होने की स्थिति में इसकी जांच हो सकेगी कि गलती किसकी है और फिर उसी आधार पर फैसला … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 11:45:16 +0530</pubDate>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>ट्रेनों में अब आपके टिकट की जांच कैमरे की निगरानी में होगी. TTE के यूनिफॉर्म में एक कैमरा लगा होगा, जिसमें टीटीई और यात्री के बीच की बातचीत की वीडियो रिकॉर्ड होगी. बहस या विवाद होने की स्थिति में इसकी जांच हो सकेगी कि गलती किसकी है और फिर उसी आधार पर फैसला लिया जाएगा. पायलट प्रोजेक्‍ट के तौर पर इसकी शुरुआत हो चुकी है और इसे चरणबद्ध तरीके से देशभर में लागू किया जा सकता है. उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO, NCR) डॉ शिवम शर्मा ने NDTV को ये जानकारी दी है। </p>
<p>उन्‍होंने बताया कि भारतीय रेलवे ने अपने टिकट चेकिंग स्टॉफ (TTE) को बॉडी वॉर्न कैमरा देने का फैसला किया है. अब से ड्यूटी के दौरान रेल कर्मी इस कैमरे को यूनिफॉर्म के साथ पहनेंगे, जिसमें टिकट जांच के दौरान होने वाली पूरी बातचीत और गतिविधियां, वीडियो-ऑडियो फॉर्मेट में रिकॉर्ड होंगी। </p>
<p><strong>कहां शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट?</strong><br>
रेलवे ने हाल ही इस व्यवस्था को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के प्रयागराज मंडल में शुरू किया है. अधिकारियों के अनुसार, महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के विशेष निर्देशों पर अभी दो ट्रेनों में इसकी शुरुआत की गई है. इसमें 12417/12418 प्रयागराज एक्सप्रेस (प्रयागराज-नई दिल्ली-प्रयागराज) और  12451/12452 श्रम शक्ति एक्सप्रेस (कानपुर-नई दिल्ली-कानपुर) शामिल है। </p>
<p>पहले चरण में कैमरे इन ट्रेनों के टिकट चेकिंग स्टाफ को दिए जाएंगे. अगर ये पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो इसे प्रयागराज मंडल की अन्य ट्रेनों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. फिलहाल अभी 30 कैमरे स्टाफ को दिए गए हैं  जिसके लिए दोनों ट्रेनों के स्टाफ को ट्रेनिंग दी जा रही है। </p>
<p><strong>क्यों खास है बॉडी वॉर्न कैमरे?</strong><br>
यह एक छोटा कैमरा होता है, जिसे कर्मचारी अपनी यूनिफॉर्म पर पहनते हैं. टिकट जांच के दौरान यह कैमरा पूरी प्रक्रिया की वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग करता है. इस बॉडी वॉर्न कैमरे की कई प्रमुख विशेषताएं है. ये हाई डेफिनिशन वीडियो रिकॉर्डिंग कैमरा है, जिसमें ऑडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा, रात में भी रिकॉर्डिंग के लिए नाइट विजन के साथ लंबी दूरी की यात्राओं के लिए लंबा बैटरी बैकअप भी उपलब्ध है. इसमें टैम्पर-प्रूफ रिकॉर्डिंग सिस्टम है, जिससे रिकॉर्ड किए गए वीडियो में बदलाव नहीं किया जा सके। </p>
<p>उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO, NCR) डॉ शिवम शर्मा ने कहा, 'यह नई पहल यात्रियों को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी यात्रा का अनुभव देगी. साथ ही टिकट जांच व्यवस्था को अधिक आधुनिक, प्रभावी और विश्वसनीय बनाएगी.' अधिकारी के अनुसार, अगर यह पायलट परियोजना सफल रहती है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से उत्तर मध्य रेलवे की अन्य ट्रेनों में भी लागू किया जाएगा। </p>
<p><strong>बॉडी वॉर्न कैमरे से क्या बदलेगा?</strong><br>
दरअसल, कई बार ऐसे मामले सामने आए जब टिकट जांच के दौरान यात्रियों और टिकट चेकिंग स्टाफ के बीच विवाद हुआ. ऐसे मामलों में अक्सर यह तय करना मुश्किल होता है कि सही कौन है. इंडियन रेलवे टिकट चेकिंग स्टाफ आर्गेनाईजेशन (IRTCSO) ने भी इसको लेकर चिंता जताते हुए तत्काल कैमरे की मांग की थी। </p>
<p>रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि काफी वक्त से इस प्रकार की कैमरे की मांग की जा रही थी.ऐसे में इसे पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर मध्य रेलवे (CR) और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) जोन के कुछ मंडलों में लागू किया गया था. यह परियोजना उन जगहों पर सफल साबित हुई जिसके बाद अब से उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में लागू किया गया है. फिलहाल हम देश भर के विभिन्न मंडलों में चरणबद्ध तरीके से कुछ-कुछ ट्रेनों में धीरे-धीरे लागू कर रहे हैं. अगर इसके नतीजे सही आए तो फिर से देश भर के रेलवे नेटवर्क में लागू किया जाएगा। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>फुटपाथ पर कार या बाइक दौड़ाई तो ₹5,000 का जुर्माना! कर्नाटक सरकार का बड़ा प्रस्ताव</title>
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<description><![CDATA[ बेंगलुरु  अगर आप ट्रैफिक से बचने के लिए फुटपाथ पर बाइक या कार चलाते हैं, तो आने वाले समय में आपकी यह आदत बहुत महंगी पड़ सकती है. कर्नाटक सरकार फुटपाथ पर वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की तैयारी में है. सरकार मौजूदा 500 रुपये के जुर्माने को बढ़ाकर 5,000 करने का … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 11:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>फुटपाथ, पर, कार, या, बाइक, दौड़ाई, तो, ₹5, 000, का, जुर्माना, कर्नाटक, सरकार, का, बड़ा, प्रस्ताव</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बेंगलुरु </strong><br>
अगर आप ट्रैफिक से बचने के लिए फुटपाथ पर बाइक या कार चलाते हैं, तो आने वाले समय में आपकी यह आदत बहुत महंगी पड़ सकती है. कर्नाटक सरकार फुटपाथ पर वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की तैयारी में है. सरकार मौजूदा 500 रुपये के जुर्माने को बढ़ाकर 5,000 करने का प्रस्ताव लेकर आई है. इसके साथ ही पैदल चलने वालों की सुरक्षा को लेकर भी कड़े नियम लागू करने की बात कही गई है। </p>
<p>बेंगलुरु में ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने कहा कि, शहर में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार फुटपाथों से अतिक्रमण हटाया जा रहा है, ताकि लोगों को सुरक्षित तरीके से पैदल चलने की सुविधा मिल सके. उन्होंने कहा कि फुटपाथ खाली कराए जाने के बाद भी कई लोग बिना किसी डर के वहां बाइक और दूसरे वाहन चला रहे हैं. यह बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जा सकता। </p>
<p>मंत्री ने कहा कि उन्हें इस मामले की कई शिकायतें मिल चुकी हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर फुटपाथ पर चल रहे लोगों को किसी वाहन से चोट लगती है या हादसा हो जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा. उन्होंने ट्रैफिक पुलिस को ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए. साथ ही परिवहन विभाग को पत्र लिखकर फुटपाथ पर वाहन चलाने का जुर्माना 500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये करने की सिफारिश करने की बात कही। </p>
<p>गौड़ा ने कहा कि, शहर के मेन और बिजी रोड्स पर पार्किंग की अनुमति नहीं होनी चाहिए. उन्होंने माना कि इसे पूरी तरह लागू करना आसान नहीं है, लेकिन कम से कम जो नियम पहले से लागू हैं, उनका सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि, शहर की कई प्रमुख सड़कों पर ऑल्टरनेट पार्किंग यानी एक तरफ पार्किंग का नियम पहले से लागू है. इसके बावजूद लोग सड़क के दोनों किनारों पर पूरे महीने वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम और बढ़ जाता है. उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि मौजूदा नियमों को लागू करने में आखिर दिक्कत क्या है। </p>
<p>मंत्री ने कहा कि अगर ऑल्टरनेट पार्किंग नियम का सही तरीके से पालन कराया जाए, तो सड़क के एक तरफ रोजाना 7 से 8 फीट एक्स्ट्रा जगह खाली रहेगी. इससे वाहनों की आवाजाही आसान होगी और ट्रैफिक जाम को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। </p>
<p>मंत्री ने कहा कि केवल करोड़ों रुपये खर्च करने से बेंगलुरु की ट्रैफिक समस्या खत्म नहीं होगी. जब तक लोग ट्रैफिक और पार्किंग नियमों को नहीं समझेंगे और उनका पालन नहीं करेंगे, तब तक कोई भी व्यवस्था पूरी तरह सफल नहीं हो सकती. उन्होंने अधिकारियों को पहले लोगों में जागरूकता फैलाने और उसके बाद नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए। </p>
<p><strong>ट्रैफिक सिग्नल के पास नहीं होंगे बस स्टॉप</strong><br>
बैठक में मंत्री ने यह भी कहा कि ट्रैफिक सिग्नल के पास वाहन रुकने से जाम की समस्या और बढ़ जाती है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बीएमटीसी बसों समेत किसी भी वाहन को ट्रैफिक सिग्नल के पास अनावश्यक रूप से रुकने की अनुमति नहीं दी जाए. किसी भी ट्रैफिक सिग्नल से 75 मीटर के भीतर और किसी भी चौराहे से 50 मीटर के अंदर बस स्टॉप नहीं होना चाहिए. जहां ऐसे बस स्टॉप मौजूद हैं, उन्हें दूसरी जगह ट्रांसफर किया जाए। </p>
<p>बैठक में ट्रैफिक पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर कार्तिक रेड्डी, एडिशनल कमिश्नर लता आर., लोखंडे स्नेहल सुधाकर, कविता राजाराम, वेंकट चालपति, नवीन कुमार राजू, चीफ इंजीनियर, ट्रैफिक पुलिस अधिकारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थें। </p>]]> </content:encoded>
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<title>PM Modi Video Message: छात्रों से बोले प्रधानमंत्री मोदी, पेपर लीक पर अब होगी और सख्त कार्रवाई</title>
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<description><![CDATA[   नई दिल्ली जंतर मंतर पर जारी आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने देर रात वीडियो संदेश जारी किया. PM मोदी ने कहा, पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है. उन्होंने साफ कहा कि आज इस मामले में और भी बड़ी और कड़ी कार्रवाई होगी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर यह भी … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 11:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>Modi, Video, Message:, छात्रों, से, बोले, प्रधानमंत्री, मोदी, पेपर, लीक, पर, अब, होगी, और, सख्त, कार्रवाई</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>  नई दिल्ली</strong><br>
जंतर मंतर पर जारी आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने देर रात वीडियो संदेश जारी किया. PM मोदी ने कहा, पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है. उन्होंने साफ कहा कि आज इस मामले में और भी बड़ी और कड़ी कार्रवाई होगी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर यह भी कहा कि पेपर लीक के खिलाफ और सख्त कार्रवाई के लिए कल कैबिनेट में चर्चा भी होगी। </p>
<p><strong>पीएम मोदी ने क्या कहा?</strong><br>
प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, ' फ्रेंड्स पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है. इससे लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों को बेहद पीड़ा होती है. उन्होंने कहा कि पिछले ढाई महीनों में पेपर लीक की घटनाओं के बाद सरकार ने कई कदम उठाए हैं और दोषियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह थी कि छात्रों का एक साल बर्बाद न हो. इसलिए कम से कम समय में करीब 22 लाख विद्यार्थियों की परीक्षाएं कराने की व्यवस्था की गई. प्रधानमंत्री ने कहा कि 19 तारीख को परीक्षा के नतीजे भी जारी कर दिए गए हैं और देशभर से सफल विद्यार्थियों की खुशी की खबरें सामने आ रही हैं। </p>
<p><strong>फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा का प्रस्ताव</strong></p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि 'सरकार केवल इतनी कार्रवाई से संतुष्ट होने वाली नहीं है. उन्होंने बताया कि आज उन्होंने संबंधित विभागों को पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के निर्देश दिए थे. विभागों ने लगातार मेहनत करके देर रात इसका मसौदा तैयार कर उन्हें सौंप दिया है। </p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि इस प्रस्ताव में फास्ट ट्रैक कोर्ट के साथ दोषियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है. इस मसौदे पर शुक्रवार को कैबिनेट में चर्चा होगी और मंत्रियों के सुझाव के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि सोमवार से संसद के दूसरे सप्ताह की कार्यवाही शुरू हो रही है और सरकार जल्द से जल्द इस विधेयक को सदन में पारित कराने का प्रयास करेगी। </p>
<p>बता दें, इस बीच केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग के सचिव के पद पर बड़ा बदलाव किया है. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनीत जोशी को उच्च शिक्षा विभाग के सचिव पद से हटाकर पंचायती राज मंत्रालय का सचिव नियुक्त किया गया है. वहीं, उनकी जगह नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव बनाया गया है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>दुबई में छाया यूपी का दशहरी&#45;लंगड़ा आम, समुद्री मार्ग से पहुंची 12.5 टन की पहली खेप</title>
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<description><![CDATA[ दुबई  उत्तर प्रदेश के बागों में उगने वाले मशहूर दशहरी और लंगड़ा आम अब खाड़ी देशों के बाजार में भी अपनी पहचान बना रहे हैं. भारत ने पहली बार उत्तर प्रदेश से दुबई तक समुद्री मार्ग के जरिए 12.5 टन आम की सफल कमर्शियल खेप भेजी है. इस उपलब्धि ने भारतीय आमों को नए निर्यात … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 10:45:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>दुबई, में, छाया, यूपी, का, दशहरी-लंगड़ा, आम, समुद्री, मार्ग, से, पहुंची, 12.5, टन, की, पहली, खेप</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दुबई </strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश के बागों में उगने वाले मशहूर दशहरी और लंगड़ा आम अब खाड़ी देशों के बाजार में भी अपनी पहचान बना रहे हैं. भारत ने पहली बार उत्तर प्रदेश से दुबई तक समुद्री मार्ग के जरिए 12.5 टन आम की सफल कमर्शियल खेप भेजी है. इस उपलब्धि ने भारतीय आमों को नए निर्यात अवसर मुहैया कराने के साथ-साथ किसानों के लिए भी बेहतर कमाई का रास्ता तैयार किया है। </p>
<p><strong>पहली बार समुद्री मार्ग से दुबई पहुंचा UP का आम</strong><br>
अब तक विदेशों में आम का निर्यात मुख्य रूप से हवाई मार्ग से किया जाता था, जिससे लागत काफी बढ़ जाती थी. इस बार अमरोहा से दशहरी और लंगड़ा आम की 12.5 टन की खेप 40 फीट के रेफ्रिजरेटेड कंटेनर में समुद्री मार्ग से दुबई भेजी गई. यह खेप दुबई के अल अवीर फ्रूट एंड वेजिटेबल मार्केट पहुंची. इस पहल को कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (ICAR-CISH) का सहयोग मिला। </p>
<p><strong>कम लागत, किसानों को बेहतर रिटर्न</strong><br>
हवाई परिवहन के मुकाबले समुद्री मार्ग काफी किफायती माना जाता है. इससे निर्यात लागत कम करने में मदद मिली है. अधिकारियों के मुताबिक कम लॉजिस्टिक्स लागत का फायदा किसानों तक पहुंचा और उन्हें आम की बिक्री पर प्रति किलो करीब 15 से 20 रुपये तक अतिरिक्त कीमत मिल सकी। </p>
<p><strong>आधुनिक तकनीक से बरकरार रही क्वालिटी!</strong><br>
अमरोहा स्थित आधुनिक पैकहाउस में आमों की प्रोसेसिंग और पैकिंग की गई. फलों की क्वालिटी और शेल्फ लाइफ बनाए रखने के लिए ICAR-CISH द्वारा विकसित METWASH तकनीक का इस्तेमाल किया गया. लंबी समुद्री यात्रा और मौसम संबंधी चुनौतियों के बावजूद करीब 25 दिन बाद दुबई पहुंची खेप का लगभग 90 फीसदी हिस्सा बाजार योग्य स्थिति में पाया गया। </p>
<p><strong>खाड़ी देशों में बढ़ेगी भारतीय आम की पहुंच</strong><br>
यह खेप संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख रिटेल समूह लुलु ग्रुप तक पहुंचाई गई. इस सफल निर्यात से भारतीय आमों के लिए खाड़ी क्षेत्र समेत दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नए अवसर खुलने की उम्मीद बढ़ी है. विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री मार्ग से निर्यात की यह सफलता भविष्य में भारतीय फलों को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकती है. कृषि क्षेत्र के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे निर्यात लागत कम करने, किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने और भारतीय बागवानी उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी। </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>जंतर&#45;मंतर हिंसा पर पाकिस्तान की डीपफेक साजिश बेनकाब, फर्जी वीडियो का ऐसे हुआ खुलासा</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली     दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और AI से तैयार किए गए वीडियो की बाढ़ आ गई है. भारतीय एजेंसियों का कहना है कि पाकिस्तान समर्थित और भारत विरोधी सोशल मीडिया हैंडल्स संगठित तरीके से गलत जानकारी फैलाने में जुटे हैं. इन फर्जी पोस्ट और … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 10:45:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>जंतर-मंतर, हिंसा, पर, पाकिस्तान, की, डीपफेक, साजिश, बेनकाब, फर्जी, वीडियो, का, ऐसे, हुआ, खुलासा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p> <strong>नई दिल्ली</strong><br>
   <br>
दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और AI से तैयार किए गए वीडियो की बाढ़ आ गई है. भारतीय एजेंसियों का कहना है कि पाकिस्तान समर्थित और भारत विरोधी सोशल मीडिया हैंडल्स संगठित तरीके से गलत जानकारी फैलाने में जुटे हैं. इन फर्जी पोस्ट और वीडियो का मकसद लोगों को भ्रमित करना, माहौल बिगाड़ना और सरकारी संस्थानों के प्रति अविश्वास पैदा करना बताया गया है. इसी को देखते हुए भारतीय सेना की फैक्ट चेक यूनिट और PIB फैक्ट चेक लगातार वायरल कंटेंट की जांच कर रहे हैं और फर्जी दावों का खुलासा कर रहे हैं। </p>
<p>सबसे चर्चित फर्जी वीडियो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नाम से वायरल किया गया. इस AI जनरेटेड डीपफेक वीडियो में दावा किया गया कि उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को 'राज्य की पूरी ताकत' इस्तेमाल करने की चेतावनी दी है. भारतीय सेना और PIB फैक्ट चेक ने जांच के बाद स्पष्ट किया कि यह दावा पूरी तरह झूठा है. अधिकारियों के मुताबिक मूल वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई, उसमें नकली ऑडियो जोड़ा गया और भ्रामक कैप्शन लगाकर उसे सोशल मीडिया पर फैलाया गया। </p>
<p>फर्जी प्रचार अभियान केवल रक्षा मंत्री तक सीमित नहीं रहा. सोशल मीडिया पर एक और वीडियो वायरल किया गया, जिसमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के नाम से प्रदर्शन को लेकर कथित बयान जोड़ा गया. जांच में यह दावा भी गलत निकला. इसी तरह एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह के नाम से भी AI तकनीक की मदद से तैयार किया गया वीडियो वायरल किया गया. PIB फैक्ट चेक ने साफ किया कि मूल वीडियो में AI आधारित नकली ऑडियो जोड़कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई थी। </p>
<p>सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया गया कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भारतीय सेना को तैनात कर दिया गया है और सैनिकों ने नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग किया है. भारतीय सेना ने इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है. सेना ने स्पष्ट किया कि दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPFs) और अन्य निर्धारित एजेंसियों के पास है. सेना का इस तरह की कार्रवाई से कोई संबंध नहीं है। </p>
<p>प्रदर्शन के दौरान कई सोशल मीडिया पोस्ट में लोगों की मौत होने का दावा भी किया गया. PIB फैक्ट चेक ने इन वायरल पोस्ट की जांच के बाद बताया कि दिल्ली पुलिस ने ऐसी किसी भी मौत की पुष्टि नहीं की है. यानी प्रदर्शन के दौरान मौतों से जुड़े वायरल दावे पूरी तरह गलत पाए गए. अधिकारियों ने कहा कि ऐसी अफवाहें लोगों में डर और तनाव पैदा करने के उद्देश्य से फैलाई जा रही हैं। </p>
<p>जांच एजेंसियों के मुताबिक कई पुराने वीडियो और AI से तैयार किए गए क्लिप को नए कैप्शन के साथ साझा किया जा रहा है. इन वीडियो को ऐसा दिखाया जा रहा है, मानो वे दिल्ली में चल रहे मौजूदा प्रदर्शनों के दृश्य हों. जबकि जांच में सामने आया कि इनका मौजूदा घटनाओं से कोई संबंध नहीं है. अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की एडिटिंग और भ्रामक कैप्शन सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाने का सुनियोजित तरीका बन चुके हैं। </p>
<p>भारतीय सेना की फैक्ट चेक सेल के अनुसार इस दुष्प्रचार अभियान का एक तय पैटर्न है. इसमें असली वीडियो लिए जाते हैं, फिर उनमें AI आधारित नकली ऑडियो जोड़ा जाता है. इसके बाद झूठे बयान किसी वरिष्ठ अधिकारी या संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के नाम से जोड़ दिए जाते हैं और भ्रामक कैप्शन लगाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया जाता है. इस रणनीति का मकसद भारतीय सशस्त्र बलों और सरकारी संस्थानों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाना है। </p>
<p>अधिकारियों का कहना है कि भारत विरोधी ताकतें दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों का फायदा उठाकर जनमत को प्रभावित करना चाहती हैं. सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को भड़काने, भ्रम फैलाने और समाज में अविश्वास पैदा करने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए फर्जी वीडियो, एडिटेड क्लिप और झूठे दावों का संगठित तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है. जांच एजेंसियां ऐसे नेटवर्क पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। </p>
<p>भारतीय सेना और PIB फैक्ट चेक ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी वीडियो या पोस्ट को बिना जांचे-परखे साझा न करें. लोगों से कहा गया है कि केवल आधिकारिक और सत्यापित स्रोतों से मिली जानकारी पर ही भरोसा करें. अधिकारियों का कहना है कि बिना पुष्टि के किसी भी सामग्री को शेयर करना अनजाने में फेक न्यूज और दुष्प्रचार अभियान को बढ़ावा दे सकता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>56 लाख किसानों को बड़ी राहत! 2 लाख रुपये तक का कृषि ऋण होगा माफ, सरकार ने जारी की सूची</title>
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<description><![CDATA[ मुंबई  किसानों का 2 लाख रुपये तक का कर्ज माफ होगा। सरकार ने उन किसानों की लिस्ट जारी कर दी है जिन किसानों का कर्ज माफ किया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर शेतकरी कर्जमुक्ती योजना 2026 के तहत किसानों का कर्ज माफ करने का प्रोसेस शुरू कर दिया है। सरकार ने … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 10:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई </strong></p>
<p>किसानों का 2 लाख रुपये तक का कर्ज माफ होगा। सरकार ने उन किसानों की लिस्ट जारी कर दी है जिन किसानों का कर्ज माफ किया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर शेतकरी कर्जमुक्ती योजना 2026 के तहत किसानों का कर्ज माफ करने का प्रोसेस शुरू कर दिया है। सरकार ने सात जिलों के 533 पात्र किसानों की लिस्ट जारी की है। इस योजना पर सरकार 36,585 करोड़ रुपये खर्च करेगी और इससे राज्य के करीब 56 लाख किसान परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। योजना के तहत पात्र किसानों का 2 लाख रुपये तक का फसल लोन माफ किया जाएगा।</p>
<p><strong>किसानों की लिस्ट जारी</strong><br>
सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने योजना की शुरुआत करते हुए बताया कि पात्र किसानों को जल्द ही एसएमएस भेजा जाएगा। इसके बाद किसानों को आधार प्रमाणीकरण कराना होगा। वैरिफिकेशन पूरा होने के बाद लोन माफ करने का अमाउंट सीधे उनके लोन खाते में डीबीटी यानी टायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के जरिए भेजी जाएगी।</p>
<p><strong>यहां मिलेगी जानकारी</strong><br>
योजना के लिए सरकार ने एक ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया है, जिसमें 53 बैंकों ने किसानों के लोन का डेटा अपलोड किया है। किसानों को पहले एग्रीस्टैक प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद राज्यभर के करीब 32,000 सरकार सेवा केंद्रों पर जाकर आधार वैरिफिकेशन कराया जा सकेगा। लाभार्थियों की लिस्ट ग्राम पंचायत, सहकारी समिति और बैंक ब्रांच में भी लगाई जाएगी।</p>
<p><strong>इन लोगों को नहीं होगा फायदा</strong><br>
हालांकि, सरकार ने कुछ लोगों को इस योजना से बाहर रखा है। इनमें मौजूदा और पूर्व सांसद-विधायक, सरकारी और अर्द्धसरकारी कर्मचारी, स्थानीय निकायों के पदाधिकारी, कृषि के अलावा अन्य इनकम पर इनकम टैक्स देने वाले लोग, जिला सहकारी बैंक, चीनी मिल, दुग्ध संघ और कृषि उपज मंडियों के पदाधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं।</p>
<p><strong>ये होंगे नियम</strong><br>
सरकार ने हाल ही में योजना के नियमों में भी राहत दी है। अब 2019 की महात्मा ज्योतिराव फुले किसान कर्जमाफी योजना के लाभार्थी भी 2 लाख रुपये तक की कर्जमाफी के पात्र होंगे। पहले उन्हें सिर्फ 50 हजार रुपये का प्रोत्साहन मिलता था। इसके अलावा अब किसानों को 2026-27 में ही कर्ज चुकाने की शर्त भी नहीं रहेगी। यदि उन्होंने पहले किसी भी दो सालों में फसल ऋण समय पर चुकाया है, तो वे भी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे।</p>]]> </content:encoded>
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<title>देश में गहराया भूजल संकट! पंजाब&#45;हरियाणा में तेजी से खत्म हो रहा ग्राउंडवाटर, आंध्र&#45;गुजरात बने मिसाल</title>
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<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 09:45:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक एक इंसान की दिनचर्या में एक चीज ऐसी है जिसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. ये चीज है पानी. भारतीय मानक ब्यूरो और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एक व्यक्ति को रोजाना 200 लीटर पानी की औसतन जरूरत होती है. इसमें नहाना-धोना, कपड़े और घर की सफाई, खाना पकाना व पीना शामिल है। </p>
<p>हमारी ये जरूरतें धरती के नीचे सदियों से दबे पानी से पूरी होती हैं. कह सकते हैं कि भूजल यानी ग्राउंडवाटर हमारी लाइफ-लाइन है. लेकिन, इसी लाइफलाइन का हम खुद दम घोंट रहे हैं. केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (CGWB), नीति आयोग और संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत ‘जल दिवालियापन’ (Water Bankruptcy) की ओर बढ़ रहा है. यानी धरती का पानी खत्म होने के कगार पर है. आईए, समझते हैं कि देश में भूजल संकट की बड़ी वजह क्या है? किस राज्य में संकट ज्यादा है और कहां पर स्थिति नियंत्रण में है?</p>
<p><strong>आंकड़ों में देखिए भारत में भूजल की स्थिति.</strong><br>
<strong>देश में भूजल रिचार्ज और निकासी कितनी</strong>: सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (CGWB) के 2025 के आकलन के अनुसार, देश में कुल सालाना भूजल (Groundwater) रिचार्ज 448.52 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) है. इसमें सालाना निकाले जा सकने वाले भूजल संसाधनों का अनुमान 407.75 BCM लगाया गया है. इसके अलावा, देश में कुल सालाना भूजल निकासी यानी दोहन का आकलन 247.22 BCM है. <strong>इसके आधार पर, भूजल निकासी और सालाना निकाले जा सकने वाले भूजल संसाधन का अनुपात है 60.63% है। </strong></p>
<p><strong>ग्राउंडवाटर निकालने में भारत की वैश्विक स्थिति:</strong> पानी एक नॉन-रिन्यूएबल (दोबारा न बनने वाला) संसाधन है. पानी की कमी मुख्य रूप से खेती और जलवायु परिवर्तन के कारण ग्राउंडवाटर के खत्म होने से हो रही है. भारत हर साल 250 क्यूबिक मीटर पानी निकालता है, जो दुनिया भर में निकाले जाने वाले कुल ग्राउंडवाटर का 25% है. भारत दुनिया भर में सबसे ज्यादा ताजा ग्राउंडवाटर निकालता है, जो हर साल लगभग 250 बिलियन क्यूबिक मीटर है. चीन भी इसके ठीक पीछे है, जो उत्तरी इलाकों में इंडस्ट्री और खेती की जरूरतों के लिए बहुत ज्यादा पानी निकालता है. जबकि, अमेरिका खासकर कैलिफोर्निया और टेक्सास में फसलों के लिए काफी मात्रा में पानी निकालता है।</p>
<p><strong>पाकिस्तान और ईरान भी खींच रहे ग्राउंडवाटर:</strong> पाकिस्तान, ईरान और सऊदी अरब भी ग्राउंडवाटर खींचने वाले टॉप देशों में शामिल हैं. पाकिस्तान के सिंधु बेसिन में ट्यूबवेल से कपास की खेती होती है और ईरान के सूखे इलाकों में गहरे एक्विफर (जमीन के नीचे पानी के भंडार) का इस्तेमाल होता है. हाल के आंकड़ों के अनुसार, ये देश दुनिया भर में निकाले जाने वाले कुल पानी के आधे से ज्यादा हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं। </p>
<p><strong>पंजाब में भूजल दोहन सबसे ज्यादा: </strong>CGWB की आकलन रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब का कुल सालाना भूजल रिचार्ज 18.60 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) है और सालाना निकाले जा सकने वाले संसाधनों का अनुमान 16.80 BCM. इसके सापेक्ष पंजाब में सालाना भूजल निकासी 26.27 BCM है. इसके आधार पर, भूजल निकासी का स्तर पंजाब में 156.36% है। </p>
<p>पंजाब के 153 ब्लॉकों में से 111 (72.55%) को 'ओवर-एक्सप्लॉयटेड' (अत्यधिक दोहन वाले) श्रेणी में रखा गया है. 10 ब्लॉक 'क्रिटिकल' (गंभीर), 15 'सेमी-क्रिटिकल' (आंशिक रूप से गंभीर) और 17 'सेफ' (सुरक्षित) श्रेणी में हैं। </p>
<p><strong>हरियाणा-राजस्थान में ग्राउंडवाटर लेवल गिरा: </strong>राजस्थान का स्वाभाविक रूप से शुष्क राज्य है. इसके 302 ब्लॉकों में से 214 अति-दोहित श्रेणी में आ चुके हैं. राज्य में भूजल दोहन की दर 147.11 फीसदी तक पहुंच गई है. इंदिरा गांधी नहर होने के बावजूद भूजल पर निर्भरता राज्य में कम नहीं हुई है. वहीं, हरियाणा में भूजल दोहन की दर 136% से अधिक हो चुकी है. पिछले एक दशक में हरियाणा राज्य के कई जिलों में जलस्तर औसतन 5 से 7 मीटर तक नीचे चला गया है। </p>
<p><strong>बेंगलुरु में हर साल दिखता जल संकट:</strong> दक्षिण भारत की जमीन कठोर चट्टानी (Hard Rock Aquifers) है. यहां उत्तर भारत के मैदानी इलाकों की तरह रेतीली या जलोढ़ मिट्टी नहीं है जो पानी को सोखकर नीचे स्टोर करके रख सके. यहां की चट्टानों में पानी सीमित मात्रा में रहता है जिसे एक बार निकाल लिया जाए तो रीचार्ज होने में सैकड़ों साल लगते हैं. यही कारण है कि बेंगलुरु जैसे शहरों में पानी का संकट हर साल गर्मियों में देखने को मिलता है। </p>
<p><strong>पूर्वोत्तर राज्यों में भूजल लेवल अच्छा लेकिन, क्वालिटी खराब</strong>: बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा जैसे राज्यों में ग्राउंडवाटर अभी सुरक्षित श्रेणी में है. यहां भूजल का दोहन 50% से भी कम है. इन राज्यों में अधिक बारिश और गंगा-ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों का होना, ग्राउंडवाटर लेवल को मेंटेन करके रखे हुए है. लेकिन, इस पानी की गुणवत्ता का संकट है. पश्चिम बंगाल और बिहार के कई जिलों के भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड खतरनाक स्तर पर है. इससे यह पानी पीने योग्य नहीं रह गया है। </p>
<p><strong>क्या ग्राउंडवाटर लेवल बढ़ाना संभव है: </strong>केंद्र सरकार अपनी विभिन्न योजनाओं के जरिए भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए काम कर रही है. राज्यों को केंद्र सरकार तकनीकी और वित्तीय सहायता दे रही है. देश में पानी/भूजल संसाधनों को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार मुख्य रूप से 'जल शक्ति अभियान' (JSA) चला रही है. यह एक समय-सीमा वाला और मिशन मोड कार्यक्रम है, जिसे 2019 से जल शक्ति मंत्रालय चला रहा है। </p>
<p>इसके तहत सभी प्रयासों और फंड को एक साथ लाकर जमीनी स्तर पर जल संचयन और कृत्रिम पुनर्भरण (artificial recharge) के काम किए जाते हैं. JSA के तहत पिछले 4 साल में देश भर में लगभग 1.21 करोड़ जल संरक्षण और कृत्रिम पुनर्भरण कार्यों को पूरा किया गया है, जिसने भूजल संसाधनों की स्थिरता को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। </p>
<p><strong>भूजल स्थिरता के लिए सरकार के प्रयास</strong></p>
<p><strong>    जल संचय जन भागीदारी: </strong>यह जल शक्ति अभियान का एक सामुदायिक विस्तार है, जिसका मकसद वर्षा जल संचयन को एक बड़े राष्ट्रीय आंदोलन में बदलना है। </p>
<p><strong>    अटल भूजल योजना:</strong> यह 7 राज्यों के 80 जल-संकट वाले जिलों में लागू की गई भूजल प्रबंधन की एक सहभागी योजना है। <br>
    अमृत (AMRUT) और अमृत 2.0: शहरी जल निकायों के कायाकल्प के माध्यम से शहरों को जल-सुरक्षित बनाने पर केंद्रित यह एक शहरी विकास योजना है। </p>
<p><strong>    शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM): </strong>शहरी भूजल की कमी और जल-जमाव की समस्या से निपटने के लिए आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के तहत यह एक लक्षित पायलट प्रोग्राम है। <br>
<strong>    मिशन अमृत सरोवर:</strong> हर जिले में कम से कम 75 जल निकायों को विकसित और पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से शुरू की गई यह एक राष्ट्रीय योजना है। <br>
<strong>    NAQUIM 2.0:</strong> जल-संकट और पानी की गुणवत्ता से प्रभावित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करने वाला यह एक एडवांस्ड एक्विफर मैपिंग प्रोजेक्ट है। <br>
    भूजल के कृत्रिम पुनर्भरण (Artificial Recharge) के लिए मास्टर प्लान-2020: कृत्रिम जल पुनर्भरण के लिए राज्यों के साथ साझा किया गया यह एक व्यापक राष्ट्रीय ब्लूप्रिंट है। <br>
    अटल भूजल योजना के तहत 83,000 संरचनाएं बनाई गईं, जिनमें चेक डैम, तालाब और शाफ्ट शामिल हैं। <br>
    9 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को कुशल सिंचाई प्रणालियों के दायरे में लाया गया। <br>
    पूरे भारत में 69,000 अमृत सरोवरों का सफलतापूर्वक निर्माण या कायाकल्प किया गया। <br>
    मास्टर प्लान के तहत 185 BCM पानी संचयन के लिए 1.42 करोड़ संरचनाओं की योजना बनाई गई। </p>
<p><strong>सरकारी प्रयासों ने भूजल में किया सुधार: </strong>सरकार के प्रयासों के परिणामस्वरूप देश में भूजल की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है. CGWB के डायनामिक भूजल संसाधन मूल्यांकन डेटा के अनुसार, 2017 से 2025 के बीच देश में कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 432 BCM से बढ़कर 448.52 BCM हो गया है. इसी तरह, सुरक्षित मूल्यांकन इकाइयों का प्रतिशत 62.6% से बढ़कर 73.14% हो गया है. अत्यधिक दोहन वाली इकाइयों का प्रतिशत 17.2% से घटकर 10.8% हो गया है। </p>
<p><strong>भूजल खत्म होने के कगार पर कैसे पहुंचा: </strong>सदियों से जमीन के नीचे दबा अकूत लीटर पानी आखिर खत्म कैसे हो रहा है. दरअसल, इसके जिम्मेदार हम इंसान ही हैं, इसका कोई प्राकृतिक कारण नहीं है. भारत हो या दुनिया का कोई अन्य देश सभी जगह पानी का सबसे ज्यादा प्रयोग खेती में होता है. बात भारत की करें तो यहां पर दोषपूर्ण फसल चक्र भूजल को खत्म करने का सबसे बड़ा कारण है। </p>
<p>उदाहरण स्वरूप, भारत के जिन इलाकों में बारिश कम होती है,वहां गन्ना और धान जैसी फसलें उगाई जा रही हैं. यह सीधे तौर पर पानी की बर्बादी जैसा है. ऐसे राज्य पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र का मराठवाड़ा है, जहां बारिश कम होती है लेकिन, इन फसलों को काफी ज्यादा क्षेत्र में उगाया जाता है। </p>
<p><strong>फ्री बिजली की राजनीति ने किया बेड़ागर्क:</strong> देश के कई राज्यों की सरकारें वोट के चक्कर में बिजली फ्री बांट रही हैं. किसानों को कृषि के लिए मुफ्त या अत्यधिक सब्सिडी वाली बिजली दी जाती है. इससे ट्यूबवेल दिन-रात चलते रहते हैं. क्योंकि पानी निकालने के लिए किसी तरह का पैसा नहीं चुकाना पड़ता। </p>
<p>ऐसे में भूजल का ज्यादा दोहन हो रहा है. इसके साथ ही शहरों में तालाबों, झीलों को पाटकर इमारतें बना दी गई हैं. जमीन की मिट्टी के ऊपर कंक्रीट बिछ रही है. ऐसे में बारिश का पानी जमीन के भीतर रिसकर नहीं जा पा रहा और वाटर रीचार्ज में कमी आ रही है। </p>
<p>क्या है भूजल: भूजल वह पानी है जो जमीन की सतह के नीचे सेचुरेटेड जोन में मौजूद होता है. इसकी ऊपरी सतह को वाटर टेबल कहा जाता है. आम धारणा के विपरीत, भूजल जमीन के नीचे नदियां नहीं बनाता है. यह रेत, बजरी और अन्य चट्टानों जैसी जमीन के नीचे की दरारों को भरता है. अगर भूजल चट्टानी सामग्रियों से प्राकृतिक रूप से बाहर बहता है या इसे पंपिंग के जरिए निकाला जाता है, तो उन चट्टानी सामग्रियों को 'एक्विफर' (aquifers) कहा जाता है। </p>
<p>भूजल धीरे-धीरे चलता है, आमतौर पर एक्विफर में इसकी गति 7-60 सेंटीमीटर (3-25 इंच) प्रति दिन होती है. नतीजतन, पानी एक्विफर में सैकड़ों या हजारों सालों तक रह सकता है. संयुक्त राज्य अमेरिका में सार्वजनिक आपूर्ति के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी का लगभग 40 प्रतिशत और खेती के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी का लगभग 39 प्रतिशत हिस्सा भूजल से आता है। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>कल का मौसम: दिल्ली&#45;यूपी से बिहार और गुजरात तक बारिश का अलर्ट, 24 राज्यों के लिए IMD की चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर के कई राज्यों में इन दिनों मौसम का मिजाज बदला हुआ है. इस हफ्ते की शुरुआत से ही मॉनसून एक्टिव है और कई जगहों पर बारिश का दौर जारी है. दिल्ली, यूपी, राजस्थान जैसे राज्यों में जहां बारिश से मौसम सुहाना हुआ है और लोगों को गर्मी से राहत मिली … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 19:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>कल, का, मौसम:, दिल्ली-यूपी, से, बिहार, और, गुजरात, तक, बारिश, का, अलर्ट, राज्यों, के, लिए, IMD, की, चेतावनी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p> दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर के कई राज्यों में इन दिनों मौसम का मिजाज बदला हुआ है. इस हफ्ते की शुरुआत से ही मॉनसून एक्टिव है और कई जगहों पर बारिश का दौर जारी है. दिल्ली, यूपी, राजस्थान जैसे राज्यों में जहां बारिश से मौसम सुहाना हुआ है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं हिमाचल, जम्मू-कश्मीर से लेकर नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में भारी बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं. इस बीच मौसम विभाग ने कल भी दिल्ली, यूपी, बिहार,राजस्थान और महाराष्ट्र समेत देश के 24 राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया है. जानिए कल कहां कैसा मौसम रहेगा। </p>
<p><strong>दिल्ली-NCR में बारिश रहेगी जारी</strong><br>
दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों बारिश का दौर जारी है. हालांकि भारी बारिश नहीं हो रही है. लेकिन मौसम जरूर सुहावना हो गया है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है. वहीं मौसम विभाग ने कल दिनभर आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी तथा हल्की बारिश होने की संभावना है. अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. इस दिन मौसम विभाग ने हल्की बारिश या बूंदाबांदी का पूर्वानुमान जारी किया है. इसके बाद 25 जुलाई को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. इस दिन सामान्य रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। </p>
<p><strong>यूपी के कई जिलों में भी बारिश</strong><br>
मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी बारिश का अलर्ट जारी किया है. आईएमडी का कहना है कि कल पूर्वी उत्तर प्रदेश में छिटपुट वर्षा होने की संभावना है. वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश छिटपुट बारिश होने की संभावना है. यूपी में बारिश का यह दौर 29 जुलाई तक जारी रहेगा। </p>
<p><strong>राजस्थान में भी बारिश का अलर्ट</strong><br>
मौसम विभाग ने कल राजस्थान के कुछ जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. मॉनसून के फिर से एक्टिव होने की वजह से राजस्थान में बारिश का दौर जारी है. मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के अधिकांश भागों में अगले चार-पांच दिन मॉनसून सक्रिय रहेगा. इस दौरान दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी भागों में कुछ स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. अजमेर, कोटा, जोधपुर और उदयपुर संभागों में 25 जुलाई तक मध्यम से भारी और कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है. इस दौरान जयपुर, भरतपुर और बीकानेर संभागों के कुछ हिस्सों में भी हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। </p>
<p><strong>गुजरात में बारिश का रेड अलर्ट</strong><br>
मौसम विभाग ने गुजरात में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है. लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन पूरी तरह प्रभावित कर दिया. कई इलाकों में सड़कें बंद हो गईं, नदियों का जलस्तर बढ़ गया और कई जगह जलभराव की स्थिति बन गई. मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. आईएमडी ने पंचमहल, दाहोद और महीसागर सहित मध्य गुजरात के कई जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है. साथ ही दक्षिण गुजरात के कई जिलों में भी आने वाले दिनों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है। </p>
<p><strong>कल इन राज्यों में भी बारिश का अलर्ट</strong></p>
<p><strong>    भारी से बहुत भारी बारिश: </strong>पूर्वी राजस्थान, मध्य महाराष्ट्र, गुजरात क्षेत्र, कोंकण और गोवा.</p>
<p><strong>    भारी बारिश:</strong> जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिमी राजस्थान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गांगेय पश्चिम बंगाल, बिहार और गुजरात क्षेत्र.</p>
<p><strong>    मध्यम बारिश: </strong>हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वी राजस्थान, गुजरात, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, तटीय कर्नाटक, केरल और माहे.</p>
<p><strong>    हल्की से मध्यम बारिश:</strong> पूर्वी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, पश्चिमी राजस्थान, छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, बिहार, झारखंड, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा.</p>]]> </content:encoded>
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<title>PM मोदी का बड़ा ऐलान, NEET पेपर लीक पर सख्त एक्शन! 4 राज्यों में बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  NEET पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार का एक्शन शुरू हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के ऐलान के बाद सरकार मिशन मोड में काम कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, अब NEET पेपर लीक मामले के आरोपियों पर सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 18:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मोदी, का, बड़ा, ऐलान, NEET, पेपर, लीक, पर, सख्त, एक्शन, राज्यों, में, बनेंगे, फास्ट, ट्रैक, कोर्ट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली </strong><br>
NEET पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार का एक्शन शुरू हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के ऐलान के बाद सरकार मिशन मोड में काम कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, अब NEET पेपर लीक मामले के आरोपियों पर सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा. इसी के साथ इन मामलों की सुनवाई के लिए चार राज्यों में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। </p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार संबंधित राज्य सरकारों और हाई कोर्ट से विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने का अनुरोध करेगी. इन अदालतों में NEET पेपर लीक से जुड़े मामलों की रोजाना सुनवाई होगी, ताकि जांच और ट्रायल में देरी न हो और जल्द फैसला आ सके। </p>
<p>यह कानून 21 जून 2024 से पूरे देश में लागू है. इसका मकसद सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल, सॉल्वर गैंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दुरुपयोग और अन्य अनुचित तरीकों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है. कानून के तहत दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। </p>
<p><strong>सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम में क्या-क्या?</strong><br>
यह अधिनियम संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), आईबीपीएस (IBPS), केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों की भर्ती परीक्षाओं के अलावा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित सभी प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं पर लागू होता है. चूंकि NEET का आयोजन भी NTA करती है, इसलिए इससे जुड़े पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों के मामलों में भी इसी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। </p>
<p><strong>NEET पेपर लीक मामले में दर्ज हैं FIR</strong><br>
सूत्रों के मुताबिक, NEET पेपर लीक मामले में इस कानून के तहत अब तक चार एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं. इन मामलों की सुनवाई के लिए बॉम्बे, कलकत्ता, दिल्ली और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है. इनमें से दो मामले बॉम्बे हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। </p>
<p>सरकार का मानना है कि विशेष अदालतों के गठन से न सिर्फ आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज होगी, बल्कि सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर भी मजबूत संदेश जाएगा. साथ ही भविष्य में पेपर लीक और संगठित नकल जैसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने में भी मदद मिलेगी। </p>]]> </content:encoded>
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<title>अमरनाथ यात्रा पर मौसम की मार, लगातार चौथे दिन भी नहीं खुला रास्ता, यात्रा ठप</title>
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<description><![CDATA[ बनिहाल साल भर श्रद्धालुओं को अमरनाथ यात्रा का इंतजार रहता है, लेकिन मौसम की खस्ता हालत को देखते हुए अमरनाथ यात्रा चौथे दिन भी रुकी हुई है. दरअसल, पिछले दो दिनों से खराब मौसम, भूस्खलन और कई जगहों पर पत्थरों के गिरने से जम्मू-कश्मीर नेशनल हाईवे (NH-44) बंद है. तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 18:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>अमरनाथ, यात्रा, पर, मौसम, की, मार, लगातार, चौथे, दिन, भी, नहीं, खुला, रास्ता, यात्रा, ठप</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बनिहाल</strong></p>
<p>साल भर श्रद्धालुओं को अमरनाथ यात्रा का इंतजार रहता है, लेकिन मौसम की खस्ता हालत को देखते हुए अमरनाथ यात्रा चौथे दिन भी रुकी हुई है. दरअसल, पिछले दो दिनों से खराब मौसम, भूस्खलन और कई जगहों पर पत्थरों के गिरने से जम्मू-कश्मीर नेशनल हाईवे (NH-44) बंद है. तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एहतियात के तौर पर अमरनाथ यात्रा रोक दी गई है. आज यात्रा को रुके 4 दिन हो गए हैं। </p>
<p>खराब मौसम के चलते अमरनाथ यात्रा को रविवार को कुछ समय के लिए रोका गया था लेकिन मौसम बिगड़ता ही गया और हालात यह हुए कि चौथे दिन भी यह यात्रा रुकी है. यात्रा रोके जाने पर रविवार को यात्रियों को यात्रा निवास चंदरकोट रामबन और लंबर ग्राउंड बनिहाल में ठहराया गया था। </p>
<p>खराब मौसम, कई जगहों पर भूस्खलन और पत्थरों के गिरने से यातायात भी प्रभावित हुआ है. इसके कारण जम्मू-कश्मीर नेशनल हाईवे( NH-44) बाधित हो गया है. हालांकि अधिकारी मौके पर मुस्तैद हैं और स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं. अब यह यात्रा दोबारा कब शुरू होगी वह मौसम पर निर्भर करता है। </p>
<p>NH-44 पर ट्रैफिक बहाली के बाद ही यात्रा दोबारा शुरू हो सकेगी. ऐसे में, प्रशासन द्वारा तीर्थयात्रियों को सलाह दी जाती है कि आधिकारिक ऐडवाइज़री का पालन करें और हालात सुधरने तक यात्रा करने से बचे। </p>
<p>आईएमडी ने कहा कि यह वेदर सिस्टम अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी आने और मॉनसून ट्रफ के जम्मू की ओर शिफ्ट होने की वजह से बना है. एडवाइजरी में चेतावनी दी गई है कि लंबे समय तक बारिश होने से कमजोर जगहों पर लैंडस्लाइड, मडस्लाइड, पत्थर गिरने और अचानक बाढ़ आ सकती है. खासकर पीर पंजाल रेंज और कश्मीर के ऊंचे इलाकों में, जिनमें अनंतनाग, पहलगाम, कुलगाम, शोपियां, गुलमर्ग, सोनमर्ग-ज़ोजिला एक्सिस, बांदीपोरा-राजदान पास और कुपवाड़ा-साधना पास शामिल हैं। </p>
<p>मौसम विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि मौसम की वजह से जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे और दूसरी बड़ी सड़कों पर ट्रैफिक समेत सरफेस ट्रांसपोर्ट में रुकावट आ सकती है. इसने नदियों, झरनों और सब-बेसिन में पानी का लेवल बढ़ने की चेतावनी दी है, जिससे निचले इलाकों में पानी भरने और हल्की बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। </p>
<p>मौसम विभाग ने यात्रियों और टूरिस्ट को अपनी यात्रा की प्लानिंग ध्यान से करने की सलाह दी है. ऊंचाई वाले इलाकों में रहने वाले लोगों से लैंडस्लाइड वाले इलाकों से बचने को कहा है. किसानों से कहा है कि वे फोरकास्ट पीरियड के दौरान फर्टिलाइजर का इस्तेमाल और केमिकल स्प्रे करना बंद कर दें. इसने दिन के टेम्परेचर में भी काफी गिरावट का अनुमान लगाया है। </p>
<p>अधिकारियों ने कहा कि इस साल की यात्रा शुरू होने के बाद से 3.70 लाख से ज़्यादा तीर्थयात्री अमरनाथ गुफा मंदिर में दर्शन कर चुके हैं. प्रशासन ने तीर्थयात्रियों को मौसम की ऑफिशियल एडवाइजरी मानने और यात्रा फिर से शुरू होने के बारे में आगे की घोषणाओं का इंतजार करने की सलाह दी है। </p>
<p><strong>कब से कब तक होती है अमरनाथ यात्रा</strong><br>
हर साल अमरनाथ यात्रा सावन मास के आसपास शुरू होती है. इस बार यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई है और 28 अगस्त तक चलेगी. यात्रा जम्मू-कश्मीर में पहलगाम या बालटाल से शुरू होकर पवित्र अमरनाथ गुफा तक जाती है. यात्रा के लिए पहलगाम और बालटाल मार्ग से जाया जा सकता है. पहलगाम मार्ग थोड़ा लंबा है जबकि बालटाल मार्ग छोटा लेकिन कठिन है। </p>
<p>खराब मौसम के चलते NH-44 बाधित होने कारण फिलहाल अमरनाथ यात्रा को रोका गया है. उम्मीद है कि जल्द मौसम के दुरुस्त होने के साथ यात्रा शुरू होगी। </p>]]> </content:encoded>
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<title>कांस्टेबल आशिक हुसैन की हत्या के बाद बड़ा एक्शन, अनंतनाग में दोनों लश्कर आतंकियों के घर ध्वस्त</title>
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<description><![CDATA[  अनंतनाग   दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में प्रशासन ने बुधवार देर रात बड़ी कार्रवाई की. हेड कॉन्स्टेबल की हत्या के आरोपी लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकियों के मकान ढहा दिए गए हैं. गुरुवार को अधिकारियों ने देर रात चले इस ऑपरेशन की जानकारी दी।  दरअसल, बुधवार को  दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग के लाल चौक में जम्मू-कश्मीर … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 17:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> अनंतनाग  </strong></p>
<p>दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में प्रशासन ने बुधवार देर रात बड़ी कार्रवाई की. हेड कॉन्स्टेबल की हत्या के आरोपी लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकियों के मकान ढहा दिए गए हैं. गुरुवार को अधिकारियों ने देर रात चले इस ऑपरेशन की जानकारी दी। </p>
<p>दरअसल, बुधवार को  दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग के लाल चौक में जम्मू-कश्मीर पुलिस के हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. वे अमरनाथ यात्रा ड्यूटी पर तैनात थे. स्थानीय प्रशासन ने पुलिसकर्मी की हत्या की सजा के तौर पर आरोपियों के मकान को ढहा दिया। </p>
<p><strong>गोली मारकर की थी पुलिसकर्मी की हत्या </strong><br>
आतंकियों की पहचान बिजबेहारा के गुरी निवासी आदिल ठोकर और हसनपोरा निवासी  हारून गनई के रूप में हुई है. आतंकियों ने अनंतनाग में पुलिसकर्मी आशिक हुसैन कुरैशी को बहुत करीब से निशाना बनाया. लाल चौक पर आतंकियों ने उन पर गोलीबारी की. अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। </p>
<p>मृतक आशिक हुसैन कुरैशी भारतीय रिजर्व पुलिस में तैनात थे. वे स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के साथ भी जुड़े हुए थे. आशिक हुसैन कुरैशी अपने पीछे पत्नी और तीन बच्चों को छोड़ गए हैं। </p>
<p><strong>प्रशासन ने दो आतंकियों के मकान ढहाए</strong><br>
हेड कॉन्स्टेबल का मर्डर उस समय हुआ, जब वे अमरनाथ यात्रा ड्यूटी पर तैनात थे. उस समय अमरनाथ यात्रा खराब मौसम के कारण अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई थी. अधिकारियों ने बताया कि मकान ढहाने की कार्रवाई का मकसद पूरे इलाके में आतंकी नेटवर्क को खत्म करना और उग्रवादियों के इस्तेमाल किए जाने वाले लॉजिस्टिकल सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को नष्ट करना है। </p>
<p><strong>जम्मू-कश्मीर पुलिस यह कार्रवाई  आतंकी संगठनों को लॉजिस्टिक, आर्थिक, संचार, परिवहन और ठिकाने जैसी मदद देने वाले नेटवर्क की पहचान करने के लिए कर रही है। </strong></p>
<p><strong>पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुआ था आतंकी हमला </strong><br>
पहलगाम आतंकी हमले को पूरा एक साल बीत चुका है, जब पिछले साल 22 अप्रैल 2025 को आतंकियों ने बैसरन घाटी में निर्दोष पर्यटकों को निशाना बनाया था. इस दर्दनातक हादसे में 26 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद पूरे देश में सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाए गए. हमलावरों ने कथित रूप से वहां मौजूद लोगों से उनका धर्म पूछकर उनपर अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं, जिसने घाटी समेत पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। </p>
<p>भारत ने इस आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में बड़े हवाई हमले किए. पाकिस्तान के कई एयरबेस को तबाह कर दिया गया. इतना ही नहीं आतंकियों पर चोट करते हुए भारतीय सेना ने जबरदस्त मिसाइलें दागी थीं. भारत ने साथ ही पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि अब अगर आतंकी हमला होता है तो उसे "एक्ट ऑफ वॉर" माना जाएगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ी राहत! CGHS में शुरू हुई नई सुविधा, इलाज होगा और आसान</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने रिटायर होने वाले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) पेंशनर कार्ड की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने सीजीएचएस पोर्टल को भविष्य (Bhavishya) पोर्टल से जोड़ दिया है। इससे पेंशन से जुड़ी जानकारी अपने आप सीजीएचएस आवेदन में आ जाएगी … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 17:00:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>केंद्रीय, कर्मचारियों, को, बड़ी, राहत, CGHS, में, शुरू, हुई, नई, सुविधा, इलाज, होगा, और, आसान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने रिटायर होने वाले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) पेंशनर कार्ड की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने सीजीएचएस पोर्टल को भविष्य (Bhavishya) पोर्टल से जोड़ दिया है। इससे पेंशन से जुड़ी जानकारी अपने आप सीजीएचएस आवेदन में आ जाएगी और कर्मचारियों को एक ही जानकारी दोबारा भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।</p>
<p>पहले कर्मचारियों को भविष्य पोर्टल पर पेंशन से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अलग से सीजीएचएस पेंशनर कार्ड के लिए आवेदन करना पड़ता था। इस दौरान वही जानकारी फिर से भरनी होती थी, जिससे समय भी लगता था और डॉक्यूमेंट्स की जांच में भी देरी होती थी।</p>
<p>अब नए सिस्टम में जैसे ही भविष्य पोर्टल पर पेंशन से जुड़े डॉक्यूमेंट मंजूर होंगे, वही जानकारी अपने आप सीजीएचएस पोर्टल पर पहुंच जाएगी। इससे आवेदन तेजी से पूरा होगा और कागजी कार्रवाई भी कम होगी।</p>
<p><strong>पैन बनेगा यूनिक पहचान</strong><br>
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में पैन कार्ड को यूनिक पहचान के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इसके जरिए सीजीएचएस और भविष्य पोर्टल के बीच जानकारी का रियल टाइम मिलान किया जाएगा, जिससे गलतियां और डुप्लीकेट जानकारी की संभावना भी कम होगी।</p>
<p><strong>ऐसे मिलेगा सीजीएचएस पेंशनर कार्ड</strong><br>
जब हेडऑफिस पेंशन से जुड़े फॉर्म को वैरिफाई कर देंगे, तब पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) जारी होगा। इसके बाद कर्मचारी भारतकोष (BharatKosh) पेमेंट गेटवे के जरिए सीजीएचएस का अंशदान ऑनलाइन जमा कर सकेंगे। पेमेंट पूरा होने के बाद सीजीएचएस पेंशनर कार्ड जारी कर दिया जाएगा।</p>
<p><strong>कहां से डाउनलोड कर सकेंगे कार्ड?</strong><br>
मंजूर होने के बाद कर्मचारी अपना सीजीएचएस पेंशनर कार्ड सीजीएचएस पोर्टल और भविष्य पोर्टल, दोनों से डाउनलोड कर सकेंगे।</p>
<p><strong>पुरानी व्यवस्था भी रहेगी जारी</strong><br>
स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ किया है कि यह नई डिजिटल सर्विस सिर्फ एक एक्स्ट्रा ऑप्शन है। जो कर्मचारी चाहें, वह पहले की तरह सीजीएचएस की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए भी अप्लाई कर सकते हैं।</p>
<p><strong>क्या है सीजीएचएस?</strong><br>
सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम यानी सीजीएचएस केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को हेल्थ सर्विस उपलब्ध कराता है। फिलहाल देश के 80 शहरों में इसके करीब 42 लाख लाभार्थी हैं।</p>
<p><strong>सीजीएचएस के तहत मिलती हैं ये सुविधाएं</strong></p>
<p><strong>ओपीडी इलाज और मुफ्त दवाएं।</strong></p>
<p><strong>सरकारी और पैनल में शामिल अस्पतालों के डॉक्टरों से इलाज।</strong></p>
<p><strong>सरकारी और मान्यता प्राप्त अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज की सुविधा।</strong></p>
<p><strong>सरकारी और पैनल वाले डायग्नोस्टिक सेंटर में जांच।</strong></p>
<p><strong>पेंशनर्स के लिए पैनल अस्पतालों में कैशलेस इलाज।</strong></p>
<p>आपातकालीन या खास परिस्थितियों में सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च नियमों के अनुसार वापस मिलने की सुविधा। नई डिजिटल सिस्टम से रिटायर होने वाले केंद्रीय कर्मचारियों का समय बचेगा, कागजी झंझट कम होगा और सीजीएचएस पेंशनर कार्ड पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बन सकेगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, वरिष्ठ IAS अनुराग जैन बने नीति आयोग के नए CEO</title>
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<description><![CDATA[ भोपाल /नई दिल्ली देश की आर्थिक नीतियों और लंबे समय की विकास योजनाओं पर काम करने वाली NITI Aayog को नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मिल गया है. 1989 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी अनुराग जैन को NITI Aayog का नया CEO नियुक्त किया गया है. केंद्र सरकार की कैबिनेट नियुक्ति समिति (ACC) ने उनकी नियुक्ति … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 15:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>केंद्र, सरकार, का, बड़ा, फैसला, वरिष्ठ, IAS, अनुराग, जैन, बने, नीति, आयोग, के, नए, CEO</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल</strong> /<strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>देश की आर्थिक नीतियों और लंबे समय की विकास योजनाओं पर काम करने वाली NITI Aayog को नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मिल गया है. 1989 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी अनुराग जैन को NITI Aayog का नया CEO नियुक्त किया गया है. केंद्र सरकार की कैबिनेट नियुक्ति समिति (ACC) ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. वे दो साल की अवधि या अगले आदेश तक इस जिम्मेदारी को संभालेंगे। </p>
<p> मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन को केंद्र ने नीति आयोग का सीईओ बनाया है। 1989 बैच के अनुराग जैन की छवि ब्यूरोक्रेस में एक सख्त अधिकारी की है। मीटिंग में वह खरी-खरी बातें करते हैं। एमपी आने से पहले वह पीएम मोदी की टीम के हिस्सा भी रहे हैं। काम टाइमलाइन पर पूरा हो यह उनकी पहचान है। यही वजह है कि दिल्ली उन पर भरोसा करती है।</p>
<p><strong>लगभग दो साल रहे एमपी के मुख्य सचिव</strong><br>
1989 बैच के आईएएस अधिकारी अनुराग जैन तीन अक्टूबर 2024 को मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव बने थे। 2025 में वह रिटायर होने वाले थे। लेकिन केंद्र की मंजूरी के बाद उन्हें सीधे एक साल एक्सटेंशन मिल गया था। सितंबर 2026 तक उनका कार्यकाल बचा हुआ था। इससे पहले उन्हें नीति आयोग का सीईओ बना दिया गया। आदेश जारी होने पर वह सीएम मोहव यादव से मिलने पहुंचे।</p>
<p><strong>एमपी में बेदाग रहा करियर</strong><br>
अनुराग जैन की छवि मध्य प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में अलग है। वह बेहद सादगी के साथ वह रहते हैं। वहीं, मीटिंग के दौरान हमेशा अधिकारियों के साथ उन्होंने खरी-खरी बातें की है। उनके कार्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश ने कई उपलब्धियां हासिल की। साथ ही हर टास्क को बखूबी पूरा किया है।</p>
<p><strong>पहली मीटिंग में ही इरादे स्पष्ट कर दिए</strong><br>
अक्टूबर 2024 में जब वह दिल्ली से मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव बनकर आए तो पहली मीटिंग में ही अधिकारियों के सामने अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे। उन्होंने अधिकारियों को नसीहत दी थी कि हम आईएएस हैं, हमें सब कुछ आता है। इस भावना से काम न करें। सभी के साथ समन्वय स्थापित करके चलें।</p>
<p><strong>'मैं चीफ कम्प्लेंट ऑफिसर बन गया हूं'</strong><br>
मध्य प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी के अंदर खटपट की खबरें भी आती थीं। अप्रैल 2026 में अधिकारियों की मीटिंग में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा था कि इस समय मैं चीफ कम्लपलेंट ऑफिसर बन गया हूं, हर तरह की विवाद और समस्याएं मेरे पास ही पहुंच रही है।</p>
<p><strong>कौन हैं अनुराग जैन</strong><br>
दरअसल, 11 अगस्त 1965 को जन्मे अनुराग जैन ने आईआईटी खड़गपुर से बीटेक किया है। वह कॉलेज के सेकंड टॉपर रहे हैं। यूएसए के मैक्सवेल यूनिवर्सिटी से 2005 में लोक प्रशासन में एमए किया था।</p>
<p><strong>पीएमओ में कर चुके हैं काम</strong><br>
नीति आयोग के नए सीईओ अनुराग जैन प्रधानमंत्री कार्यालय में भी काम कर चुके हैं। वह 2015 में पीएमओ में संयुक्त सचिव के रूप में तैनात रहे हैं। उनके पास पीएमओ में विभिन्न मंत्रालयों के बीच सम्नवय की जिम्मेदारी थी। इसकी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन पर भरोसा करते हैं।</p>
<p><strong>हाईवे मैन की उपाधि</strong><br>
अनुराग जैन केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय में सचिव भी रहे हैं। मंत्रालय के बड़े प्रोजेक्ट्स को उन्होंने गति दी है। खासकर पीएम गति शक्ति परियोजना काफी अहम रहा है। हाईवे प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने की वजह से ब्यूरोक्रेसी में लोग इन्हें हाईवे मैन भी कहते हैं।</p>
<p><strong>मध्य प्रदेश के कई जिलों में रहे हैं कलेक्टर</strong><br>
अनुराग जैन ने मध्य प्रदेश में भी काफी काम किया है। वह प्रदेश के मंदसौर, मंडला और भोपाल के कलेक्टर भी रहे हैं। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में भी उन्होंने काम किया है। ऐसे में उनकी छवि हमेशा निर्विवाद रही है। अब दो साल तक अनुराग जैन नीति आयोग के सीईओ रहेंगे।</p>
<p><strong>IIT खड़गपुर के सेकेंड टॉपर से IAS बनने तक का सफर</strong><br>
आईआईटी खड़गपुर से 1986 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक करने वाले और अपने बैच के सेकेंड टॉपर रहे अनुराग जैन की कहानी हर युवा के लिए प्रेरणादायक है. अपनी इंजीनियरिंग के बाद वे प्रशासनिक बारीकियों को समझने के लिए अमेरिका गए और सिरैक्यूज यूनिवर्सिटी के मशहूर 'मैक्सवेल स्कूल' से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (MPA) में मास्टर्स की डिग्री हासिल की. आईआईटी की तकनीकी समझ और विदेश से प्रशासनिक पढ़ाई के इसी बेहतरीन कॉम्बिनेशन के दम पर उन्होंने सिविल सेवा में लगभग चार दशकों तक बेहतरीन सेवा दी और आज NITI Aayog के CEO के रूप में देश के सबसे बड़े संस्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। </p>
<p><strong>करीब चार दशक का प्रशासनिक अनुभव, कई अहम जिम्मेदारियां निभाई</strong><br>
अनुराग जैन के पास लगभग चार दशक का प्रशासनिक अनुभव है. उन्होंने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है.अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, औद्योगिक नीति (Industrial Policy), निवेश को बढ़ावा (Investment Promotion) और प्रशासनिक सुधार (Governance Reforms) जैसे कई अहम क्षेत्रों में जिम्मेदारियां संभाली हैं. इन्हीं अनुभवों के आधार पर उन्हें NITI Aayog जैसी महत्वपूर्ण संस्था की कमान सौंपी गई है। </p>
<p><strong>जानिए कौन हैं अनुराग जैन?</strong><br>
अनुराग जैन मध्य प्रदेश कैडर के 1989 बैच के IAS अधिकारी हैं. वे अभी तक मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव (Chief Secretary) के पद पर कार्यरत थे. अब NITI Aayog के CEO के रूप में वे देश की सबसे अहम सार्वजनिक नीति (Public Policy) संस्था का नेतृत्व करेंगे। </p>
<p><strong>NITI Aayog में क्या होगी उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी?</strong><br>
NITI Aayog के CEO के तौर पर अनुराग जैन संस्था के कामकाज की निगरानी करेंगे. उनकी जिम्मेदारी ऐसी नीतियों को आगे बढ़ाने की होगी जो मजबूत आंकड़ों और रिसर्च पर आधारित हों.इसके साथ ही वे केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल मजबूत करने पर भी काम करेंगे. प्राथमिकता वाले सुधारों और सरकार की प्रमुख योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए वे राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों के साथ तालमेल भी करेंगे। </p>
<p><strong>इकोनॉमिक ग्रोथ, इनोवेशन और विकसित भारत विजन पर फोकस</strong><br>
अनुराग जैन ऐसे समय में NITI Aayog की कमान संभाल रहे हैं, जब संस्था देश की आर्थिक विकास (Economic Growth) को तेज करने, इनोवेशन को बढ़ावा देने, बेहतर गवर्नेंस सुनिश्चित करने और सरकार के  विकसित बारत विजन (Viksit Bharat Vision) को आगे बढ़ाने के लिए लगातार नीतिगत सुझाव तैयार कर रही है। </p>
<p><strong>रोजगार, स्किलिंग और एंटरप्रेन्योरशिप पर भी रहेगा जोर</strong><br>
अनुराग जैन की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब NITI Aayog की हाई-पावर्ड एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज स्टैंडिंग कमेटी रोजगार बढ़ाने और युवाओं को इंडस्ट्री की जरूरतों के मुताबिक तैयार करने पर काम कर रही है.यह समिति रोजगार के नए अवसर बढ़ाने, एंटरप्रेन्योरशिप को प्रोत्साहन देने, इंडस्ट्री के मुताबिक स्किलिंग को मजबूत करने और सर्विस सेक्टर की ग्रोथ तेज करने के लिए ठोस सुझाव तैयार कर रही है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>राहुल गांधी पर सोनम वांगचुक की पत्नी का सवाल, बोलीं&#45; PMO के बाहर धरना सही तरीका नहीं</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली NEET पेपर लीक के खिलाफ लगातार अनशन कर रहे सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने राहुल गांधी पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने साफ-साफ कहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के बाहर जाकर धरना देना ठीक नहीं था। उन्हें जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ आकर बैठना चाहिए था। उनके इस कदम की … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 14:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>राहुल, गांधी, पर, सोनम, वांगचुक, की, पत्नी, का, सवाल, बोलीं-, PMO, के, बाहर, धरना, सही, तरीका, नहीं</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>NEET पेपर लीक के खिलाफ लगातार अनशन कर रहे सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने राहुल गांधी पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने साफ-साफ कहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के बाहर जाकर धरना देना ठीक नहीं था। उन्हें जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ आकर बैठना चाहिए था। उनके इस कदम की आलोचना करते हुए आंग्मो ने इसे एक नॉन सिंसियर कदम बताया है।</p>
<p>इंडिया टुडे टीवी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अब वे लोगों को बहलाने-फुसलाने या भ्रमित करने का काम नहीं कर सकते हैं। वीडियो शेयर करते हुए आम आदमी पार्टी ने भी राहुल के इस कदम की निंदा की है। अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने एक्स पर शेयर किए इस वीडियो के कैप्शन में लिखा, 'पीएम आवास के बाहर हुआ प्रदर्शन पूरी तरह बनावटी था। अगर छात्रों के लिए नीयत साफ होती तो राहुल गांधी को जंतर मंतर पर छात्रों के साथ खड़ा होना चाहिए था। जनता अब ऐसे हथकंडों में फंसने वाली नहीं है।''</p>
<p><strong>गीतांजलि आंग्मो ने क्या कहा?</strong><br>
एक सवाल के जवाब में आंग्मो ने कहा, 'हम हर उस पार्टी और व्यक्ति के साथ हैं जो भारत के बेहतर भविष्य की चिंता कर रहे हैं। जहां तक पीएमओ के बाहर हुए धरना-प्रदर्शन का सवाल है तो सभी ने एक बात गौर किया कि इसमें ईमानदारी की कमी थी। अगर वह इस मुद्दे पर ईमानदार होते तो जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ खड़े होते। लोगों को आप मूर्ख नहीं बना सकते हैं। यह जागा हुआ भारत है। उन्हें इस मामले पर ईमानदारी से साथ देना चाहिए।'</p>
<p><strong>नड्डा ने भी राहुल गांधी को घेरा</strong><br>
वहीं, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बुधवार रात को प्रेस कांफ्रेस कर सरकार की स्थिति तो साफ की ही साथ ही विपक्ष को कठघरे में खड़ा किया। दरअसल मंगलवार लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के बाहर जाकर धरना प्रदर्शन के बाद सरकार व विपक्ष में टकराव बढ़ा है। बुधवार को विपक्ष के तीखे तेवरों पर सरकार ने भी पलटवार किया। संसद में भी और संसद के बाहर भी। इस बीच सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा व जितेंद्र सिंह ने अनशन कर रहे सोनम वांगचुक से मुलाकात की और उनसे अनशन तोड़ने का आग्रह भी किया।</p>
<p>सारे घटनाक्रम के बीच नड्डा ने प्रेस कांफ्रेस में विपक्ष खासकर राहुल गांधी को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि छात्रों ने पेपर लीक का जो मुद्दा उठाया है, हमें इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। इसका राजनीतिक लाभ भी नहीं लेना चाहिए। यह गहन चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में 150 पेपर लीक की चर्चा की है। निश्चित रूप से यह जांच का विषय है और जिम्मेदार सरकार होने के नाते हर बात का जवाब देंगे। जनता के सामने दूध का दूध पानी का पानी आएगा।</p>
<p>नड्डा ने लगभग एक दर्जन कांग्रेस, उसके सहयोग व समर्थन वाली विभिन्न सरकारों के समय हुए पेपर लीक के मुद्दे गिनाए और कहा कि इसकी लंबी सूची है। इस पर भी चर्चा चाहेंगे, लेकिन राहुल गांधी सिलेक्टिव क्यों है क्या उनकी, यूपीए की व अन्य सहयोग वाली सरकारों के समय हुए पेपर लीक पर चर्चा नहीं होनी चाहिए। वह खुद को क्यों अलग रख रहे हैं। दरअसल उनका उद्देश्य छात्रों का हित नहीं है। छात्रों को लाभ मिले, शिक्षा बेहतर हो इसमें उनकी रुचि नहीं है। वह राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>पेपर लीक पर PM मोदी का बड़ा एक्शन, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई समेत 5 अहम ऐलान</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली NEET-UG पेपर लीक विवाद और छात्रों के देशभर में जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बड़ा फैसला लिया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार पेपर लीक के मामलों में तेजी से सुनवाई और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करेगी. उन्होंने कहा कि … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 13:45:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>पेपर, लीक, पर, मोदी, का, बड़ा, एक्शन, फास्ट, ट्रैक, कोर्ट, में, सुनवाई, समेत, अहम, ऐलान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>NEET-UG पेपर लीक विवाद और छात्रों के देशभर में जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बड़ा फैसला लिया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार पेपर लीक के मामलों में तेजी से सुनवाई और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करेगी. उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। </p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, "देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड दिया जाएगा. इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा." उन्होंने बताया कि इस संबंध में संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दे दिए गए हैं। </p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के हितों की सुरक्षा के लिए सरकार लगातार फैसले ले रही है और फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने दोहराया कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। </p>
<p><strong>प्रधानमंत्री मोदी के 5 बड़े संदेश</strong></p>
<p><strong>1. देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.<br>
2. पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर सजा दिलाई जाएगी.<br>
3. ऐसे मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा.<br>
4. संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं.<br>
5. विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए सरकार लगातार फैसले ले रही है और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.</strong></p>
<p><strong>NEET पेपर लीक पर छात्रों का आंदोलन जारी</strong><br>
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली में NEET पेपर लीक को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है और विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है. सरकार पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। </p>
<p>प्रधानमंत्री के बयान के कुछ ही मिनट बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पलटवार किया. उन्होंने कहा, "देश के युवाओं का भविष्य सबसे ज्यादा आपने ही खराब किया है. आपने शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बर्बाद होने दिया और इसके जिम्मेदार लोगों को बचाया।</p>
<p> <strong>राहुल गांधी ने भी उठाई छात्रों की मांग</strong><br>
राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगें दोहराते हुए कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल बर्खास्त किया जाए, छात्रों से माफी मांगी जाए और प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कार्रवाई करने वालों के खिलाफ कदम उठाए जाएं। </p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी की यह घोषणा ऐसे समय आई है, जब संसद के भीतर और बाहर NEET-UG पेपर लीक को लेकर राजनीतिक घमासान जारी है. विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर चर्चा और जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। </p>
<p><strong>पीएम मोदी के ऐलान पर सीजेपी की प्रतिक्रिया</strong><br>
पेपर लीक मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बाद छात्र आंदोलन की अगुवाई कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) अभी भी अपने स्टैंड पर कायम है. सीजेपी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा की अपनी मांग दोहराई, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रधान पर कटाक्ष किया. उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर के रास्ते खुले हुए हैं., केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव पर अब जंतर-मंतर आने का हवाला दिया है। </p>
<p><strong>राहुल गांधी भी अपने स्टैंड पर पूरी तरह कायम</strong><br>
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा  कि हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है. आपने न सिर्फ हमारी शिक्षा व्यवस्था पर पूरा कब्जा होने और उसे बर्बाद होने दिया, बल्कि उसे बढ़ावा भी दिया। इसके जिम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया। </p>
<p><strong>विपक्ष के नेता</strong><br>
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की मांगें बिल्कुल साफ हैं, उन्होंने तीन मांगें फिर दोहराईं, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने, छात्रों से माफी मांगन और छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही। </p>
<p>कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री में संसद में खड़े होकर बोलने और गंभीर बहस में शामिल होने का साहस नहीं है, जैसा कि उनके सभी पूर्ववर्तियों ने जरूरत पड़ने पर किया था। </p>
<p><strong>पीएम मोदी के बयान पर सपा ने उठाए सवाल</strong><br>
पीएम नरेंद्र मोदी के नीट पेपर विवाद पर आए बयान के बाद सपा के सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि इनके(भाजपा) कार्यकाल में कितने पेपर लीक हुए हैं और कितनों के खिलाफ कार्रवाई हुई है? अभी तक किसी को कोई सजा हुई है? आप सत्ता में बैठे हैं और जनता आपसे जवाब चाहती है. ये प्रदर्शन कर रहे बच्चे कोई किराए पर लाए नहीं गए हैं… यह तरीका ठीक नहीं है. जो लोग सिविल कपड़ों में बच्चों पर लाठियां बरसा रहे थे, वे लोग कौन थे?</p>
<p><strong>सरकार से छात्रों का भरोसा टूट गया है-प्रियंका गांधी</strong><br>
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांध ने कहा कि बच्चों और छात्रों का सिस्टम से भरोसा टूट गया है, जब भरोसा ही नहीं रहा, तो उसी सिस्टम का दिया हुआ समाधान बच्चे कैसे स्वीकार करेंगे? यह बात हर मां-बाप समझते हैं और हमारे प्रधानमंत्री और सरकार को भी समझनी चाहिए, अगर सरकार समाधान चाहती है, तो पहले बच्चों की बात सुने और उनकी मांगें पूरी करे। </p>
<p>उन्होंने कहा कि आज देश के हजारों छात्र सड़कों पर हैं, इंडिया गेट पर हैं, जंतर-मंतर पर हैं और पूरे देश में प्रदर्शन कर रहे हैं, ऐसे समय में नेताओं को अपना डर छोड़कर जनता की बात सुननी पड़ेगी. प्रियंका ने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ, कई घायल हुए। कल रात उन्हें पीटा गया और सुबह ट्वीट करके कहा गया कि बच्चों की चिंता है. अगर सच में चिंता है, तो लाठी क्यों चली? आंसू गैस क्यों छोड़ी गई? </p>
<p>प्रियंका ने कहा कि बच्चों को बुलाइए, उनसे बात कीजिए और उनकी बात सुनिए. अगर सरकार भरोसा वापस लाना चाहती है, तो सिस्टम से बाहर निकलकर कुछ ठोस कदम उठाने होंगे. पहला कदम शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होना चाहिए। </p>]]> </content:encoded>
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<title>नवरात्रि पर सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा DA गिफ्ट? सरकार ने दिया बड़ा अपडेट</title>
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<description><![CDATA[ कलकत्ता  महंगाई भत्ता बढ़ने का इंतजार कर रहे लाखों कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। नवरात्रि के समय कर्मचारियों का डीए बढ़कर आ जाएगा। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी ने सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA)के बारे में मैसेज दिया है। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र के डीए के बीच का … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 10:45:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कलकत्ता</strong></p>
<p> महंगाई भत्ता बढ़ने का इंतजार कर रहे लाखों कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। नवरात्रि के समय कर्मचारियों का डीए बढ़कर आ जाएगा। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी ने सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA)के बारे में मैसेज दिया है। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र के डीए के बीच का अंतर धीरे-धीरे कम किया जाएगा। साथ ही डीए का बकाया पैसा चरणबद्ध तरीके से कर्मचारियों के दिया जाएगा।</p>
<p><strong>अक्टूबर में आएगा महंगाई भत्ता</strong><br>
पश्चिम बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी ने महंगाई भत्ता पर कहा कि पूजा के महीने में महंगाई भत्ता खाते में आ जाएगा। राज्य सरकार ने हाल ही में DA में 20 फीसदी की बढ़ोतरी की है, जिससे राज्य कर्मचारियों का DA बढ़कर 38 फीसदी हो जाएगा। देशभर के लाखों सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ते (DA) को लेकर कई राज्य ऐलान कर रही हैं। कई राज्य सरकारें बढ़ाने, बकाया एरियर देने और सैलरी से जुड़े पेंडिंग पेंडिंग मामलों पर फैसला लेने की तैयारी कर रही हैं। वहीं, केंद्र सरकार से भी साल 2026 की दूसरी डीए बढ़ोतरी की उम्मीद बढ़ गई है।</p>
<p><strong>ये राज्य करेंगे डीए बढ़ाने का ऐलान</strong><br>
पंजाब सरकार ने जुलाई 2021 से मार्च 2024 तक के पेंडिंग डीए और DR के पेमेंट पर विचार करने का फैसला किया है। इसके लिए एक सब कमेटी बनाई गई है, जो एरियर और रिवाइज सैलरी और पेंशन से जुड़े मामलों पर रिपोर्ट देगी। कर्मचारी संगठनों ने सरकार से 18 फीसदी डीए बढ़ाने, पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने और अन्य पेंडिंग मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की है।</p>
<p>हिमाचल प्रदेश सरकार भी कर्मचारियों और पेंशनर्स के डीए तथा एरियर की समीक्षा कर रही है। वहीं, हिमाचल प्रदेश स्टेट फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने अपने कर्मचारियों के लिए 3 फीसदी डीए बढ़ाने का ऐलान किया है। इसके अलावा बोनस और न्यूनतम मजदूरी में भी बढ़ोतरी की गई है।</p>
<p>पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में डीए में 20 फीसदी की बढ़ोतरी की है, जिससे राज्य कर्मचारियों का डीए बढ़कर 38 फीसदी हो जाएगा। राज्य में 7वें वेतन आयोग के गठन का प्रोसेस भी शुरू हो चुका है। दूसरी ओर केरल सरकार ओणम से पहले कर्मचारियों को 2 फीसदी डीए बढ़ोतरी का तोहफा देने पर विचार कर रही है।</p>
<p>इस साल अरुणाचल प्रदेश, असम, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों ने भी डीए बढ़ाया है। महाराष्ट्र ने अलग-अलग वेतन आयोगों के तहत पेंडिंग डीए एरियर जारी करने को मंजूरी दी है।</p>
<p><strong>केंद्र सरकार बढ़ाई जुलाई वाला महंगाई भत्ता</strong><br>
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में डीए को 58 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी किया था। अब जून 2026 के AICPI-IW आंकड़ों और महंगाई के रुख को देखते हुए कर्मचारियों को साल की दूसरी डीए बढ़ोतरी का इंतजार है। जानकारों का मानना है कि अगली बार 3 से 4 फीसदी तक डीए बढ़ने की संभावना बन सकती है, हालांकि अंतिम फैसला केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>15 अगस्त से दौड़ेगी बुलेट ट्रेन! 2 घंटे में 600 KM का सफर, 12 स्टेशनों पर मिलेगा स्टॉपेज</title>
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<description><![CDATA[ मुंबई भारत की पहली बुलेट ट्रेन (India&#039;s First Bullet Train) शुरू होने वाली है और इसके लॉन्च की तारीख भी तय कर ली गई है. हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट  मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन (Mumbai-Ahmedabad Bullet Train) अगले साल 15 अगस्त 2027 से चरणबद्ध तरीके से ऑपरेशनल होने के लिए तैयार है।          मुंबई-अहमदाबाद के बीच … ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 10:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई</strong><br>
भारत की पहली बुलेट ट्रेन (India's First Bullet Train) शुरू होने वाली है और इसके लॉन्च की तारीख भी तय कर ली गई है. हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट  मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन (Mumbai-Ahmedabad Bullet Train) अगले साल 15 अगस्त 2027 से चरणबद्ध तरीके से ऑपरेशनल होने के लिए तैयार है।  <br>
      <br>
<strong>मुंबई-अहमदाबाद के बीच दौड़ेगी</strong><br>
Bullet Train प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे में जापानी शिंकानसेन तकनीक को पेश करेगी और मुंबई-अहमदाबाद के बीच दौड़ेगी. ये भारत के दो सबसे महत्वपूर्ण शहरों के बीच यात्रा के समय को काफी कम कर देगी. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर 508 किमी लंबा है। <br>
     <br>
<strong>इस स्पीड से चलेगी बुलेट ट्रेन</strong><br>
बुलेट ट्रेन जब फुल स्पीड में होगी, तो 320 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी, जबकि अहमदाबाद से मुंबई के बीच औसतन 300 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बुलेट ट्रेन अगले साल से दौड़ेगी. बता दें, फिलहाल सबसे हाई स्पीड ट्रेनों के जरिये मुंबई से अहमदाबाद के बीच यात्रा करने में लगभग 6 घंटे का समय लगता है. बुलेट ट्रेन की शुरुआत के बाद यह दूरी महज 2 घंटे में पूरी की जा सकेगी. इससे न केवल यात्रियों के कीमती समय की बचत होगी, बल्कि दोनों राज्यों के बीच व्यापारिक गतिविधियां भी बढ़ने वाली हैं। </p>
<p><strong>किन रूट्स पर शुरू होगी बुलेट ट्रेन, चरणों में समझिए</strong><br>
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का 80 फीसदी काम पूरा हो गया है. इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा, जिससे पूरे रूट के पूरा होने से पहले ही प्रोजेक्ट के कुछ हिस्से चालू हो सकेंगे. यह पूरा कॉरिडोर 508 किलोमीटर का है. हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के बारे में जानकारी देते हुए रेल मंत्रालय ने वैष्णव ने कहा कि भारत का पहला बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट अपने अगले चरण में पहुंच गया है. मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का काम चल रहा है और इसे चरणों में शुरू किया जाएगा, जिसकी शुरुआत सूरत-बिलिमोरा सेक्शन से होगी। </p>
<p><strong>    सूरत-बिलिमोरा सेक्शन: सबसे पहले 15 अगस्त 2027 को शुरू होगा<br>
    वापी-सूरत सेक्शन: दूसरे चरण में शुरू होगा<br>
    वापी-अहमदाबाद सेक्शन: तीसरे चरण में शुरू होगा <br>
    अहमदाबाद-ठाणे सेक्शन: चौथे चरण में शुरू होगा <br>
    अहमदाबाद-मुंबई: ठाणे के बाद मुंबई वाला सेक्शन शुरू होगा और बुलेट ट्रेन अहमदाबाद से मुबंई तक शुरू हो जाएगी.</strong></p>
<p><strong>80 फीसदी काम हुआ पूरा</strong><br>
रेल मंत्री ने कहा कि इस बड़े प्रोजेक्ट का लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और तय समय-सीमा के अंदर काम पूरा करने के लिए निर्माण तेजी से चल रहा है. मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर भारत का पहला हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट है. इससे इन दो आर्थिक केंद्रों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा, साथ ही आधुनिक रेल तकनीक आएगी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी. इस प्रोजेक्ट से कॉरिडोर के आस-पास आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। </p>
<p><strong>हैदराबाद से चलेंगी तीन बुलेट ट्रेन</strong><br>
वैष्णव ने देश के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को बढ़ाने के लिए केंद्र की लंबी अवधि की योजनाओं के बारे में भी बताया और हैदराबाद को केंद्र में रखकर तीन प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की घोषणा की. इनमें पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-चेन्नई और हैदराबाद-बेंगलुरु रूट शामिल हैं, जिनसे दक्षिण भारत में कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है. उन्होंने यह भी बताया कि हैदराबाद-मुंबई हाई-स्पीड रेल लिंक की भी योजना है, जिससे इन दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। </p>
<p><strong>ये 7 बुलेट ट्रेन कॉरिडोर भी हैं प्रस्तावित</strong></p>
<p><strong>दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन<br>
वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी <br>
मुंबई-पुणे बुलेट ट्रेन<br>
पुणे-हैदराबाद कॉरिडोर <br>
बेंगलुरु-चेन्नई कॉरिडोर <br>
बेंगलुरु-हैदराबाद कॉरिडोर <br>
चेन्नई-हैदराबाद कॉरिडोर </strong></p>
<p><strong>12 स्टेशनों पर होगा स्टॉपेज</strong><br>
बुलेट ट्रेन की शुरुआत से जुड़ी खबर के साथ ही ये भी सामने आया है कि मुंबई और अहमदाबाद के बीच ये हाई स्पील रेल कितने स्टेशनों पर रुकेगी. बिजनेस टुडे पर छपी रिपोर्ट में बताया गया कि बुलेट ट्रेन कॉरिडोर महाराष्ट्र, गुजरात और दादरा और नगर हवेली से होकर 508 किमी तक फैला हुआ है. इसमें जिन 12 प्रमुख स्टेशनों स्टॉपेज तय किए गए हैं. उनमें मुंबई (BKC), ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं।        </p>
<p><strong>जापानी तकनीक का इस्तेमाल</strong><br>
ये मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का पहला चरण होगा और कॉरिडोर के एक हिस्से पर Bullet Train की शुरुआत होगी, इसके बाद चरणबद्ध तरीके से पूरा रेल मार्ग शुरू हो जाएगा. यह कॉरिडोर जापान की प्रसिद्ध शिंकांसेन सिस्टम पर बेस्ड है,  जो अपने बेहतरीन सेफ्टी रिकॉर्ड, टाइमबाउंड, भूकंपरोधी इंजीनियरिंग और एडवांस्ड सिग्नलिंग सिस्टम के लिए जानी जाती है. जापान भारत में इस प्रोजेक्ट के लिए तकनीक के साथ ही वित्तीय मदद भी दे रहा है। </p>
<p><strong>2017 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट</strong><br>
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे ने साल 2017 में अहमदाबाद में इस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया था. इसे शुरू करने के लिए पहले 2023 का टारगेट सेट किया गया था, लेकिन इसकी टाइमलाइन बढ़ती गई. अब अगले साल स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त से ये दौड़ने वाली है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>हर LPG गैस सिलेंडर पर ₹500 की राहत! इन उपभोक्ताओं के खाते में आएगा फायदा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली वैसे तो घरेलू इस्तेमाल के लिए ज्यादातर ग्राहक 14.2 किलोग्राम वाले LPG गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं लेकिन एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो 5 किलो वाले छोटू LPG सिलेंडर का यूज करता है। ऐसे ग्राहकों के लिए इंडियन ऑयल की &#039;छोटू&#039; (Chhotu) LPG सिलेंडर एक बढ़िया विकल्प हो सकता है। … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 22:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>हर, LPG, गैस, सिलेंडर, पर, ₹500, की, राहत, इन, उपभोक्ताओं, के, खाते, में, आएगा, फायदा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>वैसे तो घरेलू इस्तेमाल के लिए ज्यादातर ग्राहक 14.2 किलोग्राम वाले LPG गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं लेकिन एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो 5 किलो वाले छोटू LPG सिलेंडर का यूज करता है। ऐसे ग्राहकों के लिए इंडियन ऑयल की 'छोटू' (Chhotu) LPG सिलेंडर एक बढ़िया विकल्प हो सकता है। इस सिलेंडर की कई ऐसी खासियत हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। उदाहरण के लिए इस सिलेंडर के लिए किसी तरह के एड्रेस प्रूफ की जरूरत नहीं होती है। इसके अलावा, ग्राहक को प्रति सिलेंडर ₹500 की तय बायबैक राशि मिल सकती है। यह सिलेंडर खासतौर पर छात्रों, किराए पर रहने वाले लोगों, दूसरे शहर में काम करने वाले कर्मचारियों, छोटे परिवारों, हॉस्टल, छोटे दुकानदारों और सीमित जगह वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए उपयोगी है।</p>
<p><strong>क्या है डिटेल?</strong><br>
दरअसल, इंडियनऑयल ने 5 किलोग्राम FTL (Free Trade LPG) सिलेंडर को 'छोटू' के नाम से लॉन्च किया था। यह उन लोगों के लिए तैयार किया गया है जिन्हें कम मात्रा में गैस की जरूरत होती है। ग्राहक अपनी सुविधा के अनुसार इस सिलेंडर का इस्तेमाल किसी भी शहर में कर सकते हैं। अगर भविष्य में इसकी जरूरत नहीं रहती, तो अधिकृत बिक्री केंद्र से खरीदे गए सिलेंडर को वापस करने पर ₹500 प्रति सिलेंडर की निश्चित बायबैक राशि दी जाती है।</p>
<p>बता दें कि इस सिलेंडर को खरीदने के लिए किसी पारंपरिक घरेलू गैस कनेक्शन की जरूरत नहीं होती। ग्राहक सिर्फ पहचान पत्र दिखाकर नया छोटू LPG कनेक्शन ले सकते हैं। इसके बाद सिलेंडर की रिफिलिंग देशभर में किसी भी अधिकृत इंडेन डिस्ट्रीब्यूटर, इंडियनऑयल पेट्रोल पंप, चुनिंदा किराना स्टोर या सुपरमार्केट से कराई जा सकती है।</p>
<p><strong>एचपीसीएल की नई पहल</strong><br>
हाल ही में स्विगी के क्विक सप्लाई प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट के सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के साथ साझेदारी में रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति शुरू करने की बुधवार को घोषणा की। इस साझेदारी के तहत एचपीसीएल का नया 10 किलोग्राम के कंपोजिट एलपीजी सिलेंडर 'एचपी नव्या' इंस्टामार्ट पर उपलब्ध कराया गया है। एलपीजी सिलेंडर आपूर्ति सेवा की शुरुआत बेंगलुरु से होगी जहां उपभोक्ता 10 किलोग्राम वाले कंपोजिट सिलेंडर के अलावा पांच किलोग्राम के छोटे सिलेंडर भी ऑर्डर कर सकेंगे। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए ग्राहक के पास कोई मौजूदा घरेलू एलपीजी कनेक्शन होने की जरूरत नहीं होगी। इस वजह से छात्र, कामकाजी पेशेवर और छोटे परिवार भी जरूरत के अनुरूप सिलेंडर ऑर्डर पर मंगा सकेंगे।</p>
<p>ग्राहक इंस्टामार्ट के मंच पर 10 किलोग्राम के कंपोजिट सिलेंडर या पांच किलोग्राम वाले छोटे एलपीजी सिलेंडर का चयन कर ऑर्डर दे सकते हैं। पहली बार सिलेंडर नई खरीद के रूप में दिया जाएगा, जबकि बाद में खाली सिलेंडर लौटाकर रिफिल मंगाया जा सकेगा। पहली बार ऑर्डर करने पर ग्राहक की पहचान के सत्यापन और आपूर्ति से जुड़े दस्तावेज भी अनिवार्य होंगे।</p>]]> </content:encoded>
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<title>NMDC की बड़ी पहल: बालिका शिक्षा योजना के तहत 200 फ्री नर्सिंग सीटों पर आवेदन शुरू</title>
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<description><![CDATA[ हैदराबाद. भारत की सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक कंपनी एनएमडीसी ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए अपनी प्रमुख बालिका शिक्षा योजना (बीएसवाई ) के अंतर्गत संपूर्ण प्रायोजित 200  नर्सिंग सीटों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। छत्तीसगढ़ के छह जिलों की पात्र अनुसूचित जनजाति (एस टी) की बालिकाओं से आवेदन आमंत्रित करते हुए प्रवेश अधिसूचना … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 21:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>NMDC, की, बड़ी, पहल:, बालिका, शिक्षा, योजना, के, तहत, 200, फ्री, नर्सिंग, सीटों, पर, आवेदन, शुरू</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हैदराबाद.</strong><br>
भारत की सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक कंपनी एनएमडीसी ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए अपनी प्रमुख बालिका शिक्षा योजना (बीएसवाई ) के अंतर्गत संपूर्ण प्रायोजित 200  नर्सिंग सीटों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। छत्तीसगढ़ के छह जिलों की पात्र अनुसूचित जनजाति (एस टी) की बालिकाओं से आवेदन आमंत्रित करते हुए प्रवेश अधिसूचना प्रकाशित की गई है।</p>
<p>एनएमडीसी की नैगम सामाजिक दायित्‍व  (सीएसआर) पहल के तहत कार्यान्वित इस कार्यक्रम में बी.एससी. नर्सिंग के लिए 110 सीटें और जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी (जीएनएम) के लिए 90 सीटें प्रदान की जाती हैं। चयनित उम्मीदवारों को पूरी तरह से नि:शुल्क व्यावसायिक नर्सिंग शिक्षा प्राप्त होगी, जिसमें एनएमडीसी ट्यूशन फीस, छात्रावास आवास, अध्ययन सामग्री, यूनिफॉर्म, परीक्षा शुल्क और अन्य शैक्षणिक खर्चों का पूरा व्‍यय की जाएगी ।</p>
<p>यह कार्यक्रम विशेष रूप से बस्तर, दंतवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, कोंडागांव और नारायणपुर जिलों की उन अनुसूचित जनजाति (एसटी ) की बालिकाओं के लिए है, जिनके परिवार की वार्षिक आय ₹72,000 से अधिक न हो। आवेदकों की आयु 17 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। बी.एससी. नर्सिंग कोर्स  में प्रवेश पाने के इच्छुक उम्मीदवारों का नीट-2026 उत्तीर्ण होना अनिवार्य है, जबकि बी.एससी. नर्सिंग और जीएनएम (जीएनएम) दोनों पाठ्यक्रमों के आवेदकों को विज्ञान विषय (भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान) एवं अंग्रेजी के साथ 12वीं कक्षा में निर्धारित न्यूनतम अर्हता अंक प्राप्त होना आवश्यक है।</p>
<p>चयनित छात्राएं देश के प्रमुख संस्थानों में अपनी नर्सिंग शिक्षा पूरी करेंगी, जिनमें अपोलो स्कूल ऑफ नर्सिंग, हैदराबाद, अपोलो कॉलेज ऑफ नर्सिंग, चित्तूर, एसआरएम कॉलेज ऑफ नर्सिंग, चेन्नई, किम्स (केआईएमएस) कॉलेज ऑफ नर्सिंग, हैदराबाद, यशोदा कॉलेज ऑफ नर्सिंग, हैदराबाद शामिल हैं। इस पहल का उद्देश्य जनजातीय बालिकाओं को व्यावसायिक स्वास्थ्य सेवा कौशलों से सशक्त बनाना है।</p>
<p>पात्र उम्मीदवार 22 जुलाई, 2026 को सुबह 11:00 बजे से 5 अगस्त, 2026 को रात 11:59 बजे तक केवल एनएमडीसी की वेबसाइट के करियर अनुभाग (https://www.nmdc.co.in/careers) के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदकों को सभी आवश्यक दस्तावेजों की स्कैन की हुई प्रतियां अपलोड करनी होंगी, जिनमें 10वीं और 12वीं की अंकतालिकाएं, एसटी (एसटी) जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, पहचान पत्र (आधार या राशन कार्ड), पासपोर्ट आकार की फोटो, हस्ताक्षर, और बी.एससी. नर्सिंग आवेदकों के लिए नीट-2026 का स्कोरकार्ड शामिल है।</p>
<p>चयन ऑफलाइन मोड में ओएमआर शीट का उपयोग करके अंग्रेजी भाषा में आयोजित वस्तुनिष्ठ बहुविकल्पीय प्रश्नों (एमसीक्‍यू) वाली लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा। 30 अंकों की इस परीक्षा में निम्नलिखित अंक आबंटित होंगे।</p>
<p><strong>जीव विज्ञान (10 अंक), अंग्रेजी (07 अंक), भौतिकी (05अंक), रसायन विज्ञान (05)अंक सामान्य ज्ञान (3 अंक)</strong><br>
लिखित परीक्षा में चयनित (शॉर्टलिस्ट किए गए) उम्मीदवारों को अंतिम चयन से पहले दस्तावेज सत्यापन और चिकित्सा परीक्षण  किया जाएगा। एनएमडीसी के परियोजना स्थलों के आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले पात्र आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में सहायता के लिए उम्मीदवार बीएसवाई हेल्पडेस्क से 7044599061 पर संपर्क कर सकते हैं या nbsylbacheli002@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं।</p>
<p>इस कार्यक्रम की शुरुआत से वित्त वर्ष 2022 तक 330 जीएनएम छात्राओं का नामांकन किया जा चुका है, जिनमें से 230 स्नातक छत्तीसगढ़ के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं दे रही हैं। इसके अतिरिक्त, 75 जनजातीय बालिकाओं ने पूर्णतः प्रायोजित बी.एससी. नर्सिंग शिक्षा प्राप्त की है, जिनमें से लगभग 80% राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में सेवा देने के लिए वापस लौटी हैं। जनजातीय बालिकाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण नर्सिंग शिक्षा को सुलभ बनाने हेतु एनएमडीसी प्रति छात्र प्रति वर्ष ₹12 लाख तक का निवेश करता है, जिससे उनके सभी शैक्षणिक और छात्रावास के खर्च कवर होते हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<title>दिल्ली से कोलकाता सिर्फ 12 घंटे! 6 एक्सप्रेसवे का मेगा नेटवर्क बदलेगा सफर की रफ्तार</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली/कोलकाता  दिल्ली से कोलकाता तक छह बड़े एक्सप्रेसवे के जुड़ने से सीधा सुपरफास्ट नेटवर्क तैयार हो रहा है. इससे दिल्ली एनसीआर, यूपी, बिहार, झारखंड से बंगाल तक सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी. दरअसल, यूपी से वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे और विंध्य पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण हो रहा है. इससे दिल्ली से सीधे कोलकाता तक सुपरफास्ट सफर का … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 21:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>दिल्ली, से, कोलकाता, सिर्फ, घंटे, एक्सप्रेसवे, का, मेगा, नेटवर्क, बदलेगा, सफर, की, रफ्तार</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली/कोलकाता </strong></p>
<p>दिल्ली से कोलकाता तक छह बड़े एक्सप्रेसवे के जुड़ने से सीधा सुपरफास्ट नेटवर्क तैयार हो रहा है. इससे दिल्ली एनसीआर, यूपी, बिहार, झारखंड से बंगाल तक सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी. दरअसल, यूपी से वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे और विंध्य पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण हो रहा है. इससे दिल्ली से सीधे कोलकाता तक सुपरफास्ट सफर का रास्ता साफ होगा. ये दोनों एक्सप्रेसवे बन जाने से दिल्ली से कोलकाता तक एक्सप्रेसवे नेटवर्क तैयार होगा. इसमें दिल्ली डीएनडी से यमुना एक्सप्रेसवे, वहां से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, विंध्य एक्सप्रेसवे और विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे और वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे जुड़ जाएंगे. इससे दिल्ली से कोलकाता का सफर लगभग 12 से 13 घंटे होगी, जो NH-19, जीटी रोड से 22 से 24 घंटे लगता है. दिल्ली से वाराणसी पहुंचने में 6.5 से 7 घंटे, वाराणसी से कोलकाता तक 6 घंटे लगेगा. राजधानी, दुरंतो ट्रेन से भी दिल्ली से कोलकाता यात्रा में 17-18 घंटे लगते हैं। </p>
<p><strong>विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे को भी मंजूरी</strong><br>
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बुधवार को विंध्य एक्सप्रेसवे और विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे को मंजूरी दी है.साथ ही प्रदेश के बड़े एक्सप्रेसवे को मिलाकर एक ग्रिड बनाने का ऐलान किया है. इसके लिए विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए निर्माणाधीन वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे के साथ एक बड़ा इंटरचेंज बनाया जाएगा. सरकार ने प्रयागराज, भदोही, मिर्जापुर और सोनभद्र समेत छह जिलों को जोड़ने वाले 6 लेन के विंध्य एक्सप्रेसवे का ऐलान किया है.इस पर 26315 करोड़ रुपये खर्च होंगे. वहीं विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे 9039 करोड़ रुपये से बनेगा. यह प्रोजेक्ट गाजीपुर, मिर्जापुर और चंदौली को जोड़ेगा। </p>
<p><strong>वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे 6 से 7 घंटे में </strong><br>
वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे (NH-319B) की लंबाई 610 किमी है.इस पर 35 हजार करोड़ का खर्च आएगा. 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनने से वाराणसी से कोलकाता के बीच यात्रा का समय 13-14 घंटे से घटकर 6 से 7 घंटे रह जाएगा. NHAI ने 2027–2028 तक इसे बनाने का लक्ष्य रखा है. यह यूपी में चंदौली, बिहार में कैमूर-गया, झारखंड में रांची-बोकारो और पश्चिम बंगाल में हावड़ा, कोलकाता से कनेक्ट होगा। </p>
<p><strong>    610 किमी लंबे वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे पर 35 हजार करोड़ खर्च <br>
    26315 करोड़ खर्च विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे पर<br>
    यूपी के 6 बड़े एक्सप्रेसवे को मिलाकर बड़ा रोड नेटवर्क ग्रिड बनेगा</strong></p>
<p><strong>वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे: यूपी, बिहार, झारखंड भी जुड़ेंगे</strong><br>
उत्तर प्रदेश के 22 किमी के एक्सप्रेसवे की शुरुआत चंदौली जिले में वाराणसी रिंग रोड (बारहुली गांव, रेवासा) के पास NH-19 के इंटरचेंज से होगी. बिहार में यह एक्सप्रेसवे 159 किमी का होगा. कैमूर,रोहतास (सोन नदी क्रॉसिंग), औरंगाबाद और गया जिलों से गुजरेगा. कैमूर की पहाड़ी के पास 5 किमी लंबी सुरंग बन रही है. झारखंड में इस एक्सप्रेसवे की लंबाई 187 किमी रहेगी. झारखंड के चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, पेटरवार और रांची के पास बोकारो निकलेगा. पश्चिम बंगाल में 242 किमी की लंबाई होगी. झारखंड बॉर्डर से आगे ये पुरुलिया, बांकुरा, आरामबाग, हुगली होते हुए हावड़ा (उलुबेड़िया NH-16) पर खत्म होगा। </p>
<p><strong>आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे भी पूर्वांचल से जुड़ेगा</strong><br>
यूपी सरकार ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल और गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए 12264 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को भी हरी झंडी दिखाई है. प्रयागराज से गाजीपुर तक 26315 करोड़ का विंध्य एक्सप्रेसवे और 9039 करोड़ की लागत से विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे बनेगा.सरकार ने पूर्वांचल और गंगा एक्सप्रेसवे को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिंक एक्सप्रेसवे का भी  फैसला लिया गया है। </p>
<p><strong>गंगा एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा आगरा-लखनऊ</strong><br>
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक 50.98 किलोमीटर लंबे छह लेन के ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे पर 4776 करोड़ रुपये खर्च होंगे. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को फर्रुखाबाद के जरिये गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के 90.84 किमी लंबे छह लेन का ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे 7488 करोड़ से शुरू होगा. ये परियोजनाएं 3 साल में पूरी होंगी.वहीं वाराणसी रांची कोलकाता एक्सप्रेसवे (Varanasi-Kolkata Expressway) भी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना है. इस एक्सप्रेसवे दिल्ली यूपी समेत उत्तर भारत को सीधे पूर्वी भारत और कोलकाता बंदरगाह से जोड़ेगा। </p>
<p><strong>माल ढुलाई का समय आधा होगा</strong><br>
वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे के बाद दिल्ली से कोलकाता के बीच लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई का समय आधा हो जाएगा. इससे उत्तर भारत से पूर्वी भारत के बंदरगाह तक पहुंच बेहद तेज हो जाएगी. वहीं आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल और गंगा एक्सप्रेसवे के आपस में जुड़ने से यूपी में मजबूत एक्सप्रेसवे ग्रिड तैयार होगी. इससे उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के बीच एक्सप्रेसवे की इंटरकनेक्टिविटी होगी। </p>]]> </content:encoded>
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<title>16 साल बाद भारत लौटेंगे ललित मोदी! FEMA केस में राहत मिलते ही किया घर वापसी का ऐलान</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली इंड‍ियन प्रीम‍ियर लीग (IPL) के पहले चेयरमैन ललित मोदी को 2009 आईपीएल-साउथ अफ्रीका FEMA मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है. SAFEMA (Smugglers and Foreign Exchange Manipulators-Forfeiture of Property-Act) के अपीलीय ट्रिब्यूनल ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकांश निष्कर्षों और लगाए गए जुर्मानों को रद्द कर दिया है. फैसले के बाद ललित मोदी … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 20:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>साल, बाद, भारत, लौटेंगे, ललित, मोदी, FEMA, केस, में, राहत, मिलते, ही, किया, घर, वापसी, का, ऐलान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>इंड‍ियन प्रीम‍ियर लीग (IPL) के पहले चेयरमैन ललित मोदी को 2009 आईपीएल-साउथ अफ्रीका FEMA मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है. SAFEMA (Smugglers and Foreign Exchange Manipulators-Forfeiture of Property-Act) के अपीलीय ट्रिब्यूनल ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकांश निष्कर्षों और लगाए गए जुर्मानों को रद्द कर दिया है. फैसले के बाद ललित मोदी ने कहा कि 16 साल से जिस सच की बात वह लगातार करते रहे, अब उस पर अदालत की मुहर लग गई है। </p>
<p>फैसले के बाद ललित मोदी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा- मैं इस फैसले से बेहद खुश हूं. कल का दिन मेरे लिए शानदार रहा. पिछले 16 साल से मैं यह लड़ाई लड़ रहा था. मीडिया और सभी लोगों से मैं जो कुछ कहता रहा, आखिरकार वही सच साबित हुआ. मुझे खुशी है कि ट्रिब्यूनल ने मेरे पक्ष में फैसला सुनाया। </p>
<p>उन्होंने कहा कि उनका मकसद हमेशा आईपीएल का हित रहा. मेरी चिंता सिर्फ आईपीएल की भलाई को लेकर थी. मेरे लिए इससे बढ़कर कुछ नहीं था. अब वह अध्याय खत्म हो चुका है और मैं अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना चाहता हूं। </p>
<p>भारत वापसी पर ललित मोदी ने कहा कि अब वह देश लौटने की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने बताया- मैं इस साल के आखिर तक या फिर अगले साल की शुरुआत में भारत लौटने की प्लान‍िंग कर रहा हूं. अक्टूबर में मेरी बेटी मां बनने वाली है और मैं नाना बनने वाला हूं. उम्मीद है कि सब कुछ ठीक रहेगा और उसके बाद मैं भारत वापस आऊंगा। </p>
<p>दरअसल, SAFEMA के अपीलीय ट्रिब्यूनल ने 2009 में आईपीएल के दूसरे सीजन को साउथ अफ्रीका में आयोजित किए जाने से जुड़े FEMA मामले में ललित मोदी और अन्य अपीलकर्ताओं को बड़ी राहत दी है. ट्रिब्यूनल ने ED के अधिकांश निष्कर्षों और लगाए गए जुर्मानों को निरस्त कर दिया. यह मामला लंबे समय से लीगल प्रोसेस में था और अब आए इस फैसले को ललित मोदी के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है। </p>
<p>ललित मोदी 2010 में भारत छोड़ने के बाद से विदेश में रह रहे हैं. उन पर वित्तीय अनियमितताओं और FEMA नियमों के उल्लंघन से जुड़े कई आरोप लगे थे. हालांकि, ताजा फैसले के बाद उन्होंने साफ संकेत दिए हैं कि अब वह भारत लौटकर अपनी जिंदगी का नया अध्याय शुरू करना चाहते हैं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>भारतीय नौसेना को मिला INS मालवन, अब Hangor ही नहीं Ghazi जैसी पनडुब्बियां भी नहीं बच पाएंगी!</title>
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<description><![CDATA[ करवार  भारतीय नौसेना की पानी के भीतर दुश्मन की पनडुब्बियों पर नजर रखने और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता अब और मजबूत हो गई है. बुधवार, 22 जुलाई को पश्चिमी नौसेना कमान, कर्नाटक के करवार नौसैनिक अड्डे पर माहे क्लास एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) का दूसरा युद्धपोत INS मालवन भारतीय नौसेना में औपचारिक … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 19:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>करवार</strong><br>
 भारतीय नौसेना की पानी के भीतर दुश्मन की पनडुब्बियों पर नजर रखने और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता अब और मजबूत हो गई है. बुधवार, 22 जुलाई को पश्चिमी नौसेना कमान, कर्नाटक के करवार नौसैनिक अड्डे पर माहे क्लास एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) का दूसरा युद्धपोत INS मालवन भारतीय नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल कर लिया गया। </p>
<p>इस कमीशनिंग समारोह में भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे. INS मालवन अब भारतीय नौसेना के बेड़े का हिस्सा बनकर समुद्र की उथली गहराइयों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उनका मुकाबला करने की जिम्मेदारी निभाएगा। </p>
<p>कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) में निर्मित INS मालवन भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. इस युद्धपोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया है. यह भारत की आधुनिक युद्धपोत डिजाइन, निर्माण और एकीकरण (Integration) क्षमता को भी दर्शाता है। </p>
<p>आकार में कॉम्पैक्ट होने के बावजूद INS मालवन बेहद शक्तिशाली है. इसे खास तौर पर उथले समुद्री क्षेत्रों में तेजी से संचालन, सटीक कार्रवाई और लंबे समय तक मिशन पर बने रहने के लिए डिजाइन किया गया है. इसके नौसेना में शामिल होने के साथ भारत की स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) श्रृंखला को और मजबूती मिलेगी। </p>
<p>INS मालवन माहे क्लास का दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) है. इस श्रेणी के युद्धपोतों को खास तौर पर समुद्र के उथले इलाकों में छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैयार किया गया है। </p>
<p>भारतीय नौसेना के अनुसार, INS मालवन में फुर्ती (Agility), सटीकता (Precision) और लंबी अवधि तक संचालन (Endurance) जैसी क्षमताएं हैं. यही विशेषताएं इसे पानी के भीतर मौजूद खतरों की पहचान करने और उनका प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में सक्षम बनाती हैं। </p>
<p>ऐसे समय में INS मालवन की नौसेना में एंट्री को अहम माना जा रहा है, जब हिंद महासागर क्षेत्र में पनडुब्बियों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं. एंटी-सबमरीन युद्ध में विशेषज्ञ यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करेगा। </p>
<p>INS मालवन के शामिल होने से भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी. खासकर उथले समुद्री क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में यह युद्धपोत अहम भूमिका निभाएगा. यही वजह है कि इसे भारतीय नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>बंगाल विधानसभा में जबरदस्त हंगामा! TMC विधायक कुणाल घोष को मार्शलों ने सदन से बाहर निकाला</title>
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<description><![CDATA[  कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा में बुधवार को उस समय हंगामा हो गया, जब टीएमसी विधायक कुणाल घोष को मार्शलों के जरिए सदन से बाहर कर दिया गया. दरअसल, सदन में टीएमसी के बागी विधायक अखरुज्जमां भाषण दे रहे थे. इसी दौरान कुणाल घोष वेल में पहुंच गए और उनके भाषण में बाधा डालने लगे।  इस … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 19:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>बंगाल, विधानसभा, में, जबरदस्त, हंगामा, TMC, विधायक, कुणाल, घोष, को, मार्शलों, ने, सदन, से, बाहर, निकाला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> कोलकाता</strong><br>
पश्चिम बंगाल विधानसभा में बुधवार को उस समय हंगामा हो गया, जब टीएमसी विधायक कुणाल घोष को मार्शलों के जरिए सदन से बाहर कर दिया गया. दरअसल, सदन में टीएमसी के बागी विधायक अखरुज्जमां भाषण दे रहे थे. इसी दौरान कुणाल घोष वेल में पहुंच गए और उनके भाषण में बाधा डालने लगे। </p>
<p>इस पर बीजेपी विधायक तुरंत कुणाल घोष के पास पहुंच गए और उनसे बहस करने लगे. सदन में बढ़ते हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने कुणाल घोष से अपनी सीट पर लौटने की अपील की. हालांकि, स्थिति नहीं संभली. इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष के आदेश पर मार्शलों ने कुणाल घोष को सदन से बाहर कर दिया. घटना के दौरान सदन में काफी देर तक अफरा-तफरी और हंगामे का माहौल बना रहा। </p>
<p>वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि जब अखरुज्जमां भाषण देने खड़े होते हैं तो कुणाल घोष वेल में पहुंचते हैं और ठीक उनके सामने आकर खड़े हो जाते हैं. वह इस दौरान अखरुज्जमां पर टिप्पणी करते हैं. इसे देख बीजेपी के विधायक कुणाल घोष के करीब आते हैं और इनमें धक्का-मुक्की जैसी स्थिति पैदा हो जाती है. इस दौरान अध्यक्ष कई बार घोष को सीट पर वापस लौटने की अपील करते हैं. लेकिन ऐसा नहीं होने पर मार्शल्स को बुलाया जाता है और कुणाल घोष को बाहर निकालने के लिए कहा जाता है। </p>
<p><strong>इसके बाद मार्शल कुणाल घोष को बाहर निकलने को कहते हैं, इसका वह विरोध करते हैं. इसके बाद मार्शल जबरन घोष को उठाकर सदन से बाहर निकाल देते हैं। </strong></p>
<p>बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही ममता बनर्जी की पार्टी टूट की कगार पर है. तमाम विधायक और सांसद बागी हो चुकी हैं. विधायक ऋतब्रत ने बगावत करते हुए अलग गुट बना लिया, जिसमें करीब 60 विधायक शामिल हैं. इसके बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा स्पीकर रवीन्द्र नाथ बोस ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दे दी. ममता बनर्जी ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष घोषित किया था. इसके बाद पार्टी में बगावत हो गई है. 80 में से 60 विधायकों ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष मानने से इंकार कर दिया था। </p>
<p><strong>लोकसभा में कल्याण बनर्जी निलंबित</strong><br>
इससे पहले लोकसभा में भी टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई की गई. उन्हें महिलाओं के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। </p>
<p>यह कार्रवाई लोकसभा चैंबर में कल्याण बनर्जी और एनसीपीआई के कुछ सदस्यों के बीच तीखी बहस के बाद हुई. सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे दोबारा शुरू होने के बाद ध्वनिमत से निलंबन का प्रस्ताव पारित किया गया। </p>
<p>कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे कृष्ण प्रसाद टेन्नेटी ने बताया कि कुछ सदस्यों ने लोकसभा अध्यक्ष से कल्याण बनर्जी के खिलाफ शिकायत की थी. उन्होंने कहा कि बनर्जी की कथित टिप्पणियों से सदन की गरिमा को ठेस पहुंची है. इसके बाद केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कल्याण बनर्जी को निलंबित करने का प्रस्ताव सदन में पढ़ा, जिसे ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई। </p>
<p>प्रस्ताव पारित होने के बाद टेन्नेटी ने कल्याण बनर्जी से सदन परिसर छोड़ने को कहा. इस दौरान विपक्षी सांसद नीट पेपर लीक सहित कई मुद्दों को लेकर नारेबाजी करते रहे. हंगामा जारी रहने के बाद लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>केदारनाथ यात्रा पर बारिश का ब्रेक! गोरीकुंड के पास मलबा&#45;बोल्डर गिरने से यात्रा अगले आदेश तक स्थगित</title>
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<description><![CDATA[ रुद्रप्रयाग उत्तराखंड के कई इलाकों में बारिश जारी है. लगातार हो रही बारिश के कारण ज्यादातर पहाड़ी इलाकों के मार्गों पर बोल्डर गिरने, मलबा आने की घटनाएं दर्ज की जा रही है. इससे पर्यटकों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. रुद्रप्रयाग जिले के कई इलाकों में भी देर रात तेज … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 18:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>केदारनाथ, यात्रा, पर, बारिश, का, ब्रेक, गोरीकुंड, के, पास, मलबा-बोल्डर, गिरने, से, यात्रा, अगले, आदेश, तक, स्थगित</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रुद्रप्रयाग</strong><br>
उत्तराखंड के कई इलाकों में बारिश जारी है. लगातार हो रही बारिश के कारण ज्यादातर पहाड़ी इलाकों के मार्गों पर बोल्डर गिरने, मलबा आने की घटनाएं दर्ज की जा रही है. इससे पर्यटकों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. रुद्रप्रयाग जिले के कई इलाकों में भी देर रात तेज बारिश हुई, जिससे कई इलाके या तो जलमग्न हो गए या फिर मलबा और बोल्डर आने से बाधित हो गए. इसका असर केदारनाथ यात्रा पैदल मार्ग पर भी पड़ा है। </p>
<p>केदारघाटी में 21 जुलाई मंगलवार देर रात हुई तेज बारिश के बाद केदारनाथ पैदल मार्ग एक बार फिर बाधित हो गया. गौरीकुंड से करीब एक किलोमीटर आगे छौड़ी क्षेत्र में पहाड़ी से बड़े-बड़े बोल्डर और मलबा गिरने के कारण मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है. एहतियात के तौर पर प्रशासन ने यात्रियों की आवाजाही तत्काल रोक दी है और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ठहराया गया है। </p>
<p>लगातार हो रही बारिश से केदारनाथ पैदल मार्ग पिछले कई दिनों से संवेदनशील बना हुआ है. मंगलवार रात अचानक चट्टान टूटने और भारी मलबा आने से मार्ग पर खतरा बढ़ गया, जिसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यात्रा संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया। </p>
<p>जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि, मार्ग से बोल्डर और मलबा हटाने के लिए संबंधित विभागों की टीमें मौके पर तैनात कर दी गई हैं. बारिश थमने और मौसम अनुकूल होने पर मार्ग को जल्द से जल्द खोलने का प्रयास किया जाएगा। </p>
<p>उन्होंने यात्रियों से अपील की कि वे प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें और बिना अनुमति आगे बढ़ने का प्रयास न करें. प्रशासन की ओर से मार्ग की लगातार निगरानी की जा रही है और मौसम की स्थिति को देखते हुए आगे की यात्रा व्यवस्था पर निर्णय लिया जाएगा. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. मार्ग का सुरक्षा परीक्षण पूरा होने के बाद ही केदारनाथ यात्रा दोबारा सुचारु की जाएगी। </p>]]> </content:encoded>
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<title>महिला सांसदों पर अभद्र टिप्पणी पड़ी भारी! TMC सांसद कल्याण बनर्जी पूरे संसद सत्र के लिए निलंबित</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली संसद के मानसून सत्र के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ विवाद गहरा गया है. उन पर महिला सांसदों के प्रति असंसदीय भाषा के प्रयोग का आरोप लगा है, जिसके बाद इस मामले की शिकायत लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दी गई है. आरोप है कि उनका आचरण संसदीय मर्यादा और … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 17:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>महिला, सांसदों, पर, अभद्र, टिप्पणी, पड़ी, भारी, TMC, सांसद, कल्याण, बनर्जी, पूरे, संसद, सत्र, के, लिए, निलंबित</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>संसद के मानसून सत्र के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ विवाद गहरा गया है. उन पर महिला सांसदों के प्रति असंसदीय भाषा के प्रयोग का आरोप लगा है, जिसके बाद इस मामले की शिकायत लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दी गई है. आरोप है कि उनका आचरण संसदीय मर्यादा और सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं था. इस मुद्दे पर अर्जुन राम मेघवाल द्वारा कार्रवाई का प्रस्ताव रखे जाने की मांग की गई है. मामले की गंभीरता को देखते हुए सत्र की शेष अवधि के लिए कल्याण बनर्जी को निलंबित कर दिया गया है। </p>
<p>लोकसभा ने एक महिला सदस्य के खिलाफ असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करने की वजह से TMC के कल्याण बनर्जी को मॉनसून सत्र के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव पारित किया गया। </p>
<p>लोकसभा की अध्यक्षता कर रहे कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने कहा कि महिला सांसद के खिलाफ टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी की टिप्पणी ने सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। </p>
<p>बता दें कि मॉनसून सत्र का बुधवार का दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया. इसके चलते लोकसभा को गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया. राज्यसभा में फिलहाल कार्यवाही जारी है। </p>
<p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी को करारी हार मिली थी. इसके बाद कई सांसद, विधायकों ने उनका साथ छोड़ दिया. ये सांसद नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए थे। </p>
<p><strong>कल्याण बनर्जी की तीखी बहस</strong><br>
बुधवार को विपक्ष के हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने पर TMC नेता और ममता बनर्जी के वफादार कल्याण बनर्जी की अपनी पार्टी के कुछ पूर्व सहयोगियों और NCPI सांसदों के साथ तीखी बहस हुई। </p>
<p>इस बहस में शामिल NCPI के सदस्यों में मिताली बाग, शताब्दी रॉय और काकोली घोष दस्तीदार शामिल थीं. यह साफ नहीं हो पाया कि बहस किस वजह से हुई। </p>
<p>विपक्षी दलों के कुछ सदस्यों ने बीच-बचाव किया और दोनों पक्षों को शांत करने की कोशिश की. जब कुछ विपक्षी सांसदों ने पूछा कि क्या हुआ है, तो कल्याण बनर्जी सदन से चले गए। </p>
<p>इसके बाद बाग, दस्तीदार और NCPI के कुछ अन्य सदस्य लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके कक्ष में मिलने गए. फिर लिखित में शिकायत दी गई। </p>
<p>बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद TMC के 20 सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी और NCPI में शामिल हो गए. वे लोकसभा में TMC सांसदों से अलग बैठने लगे. NCPI सांसदों ने सत्ताधारी NDA और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति भी अपना समर्थन जताया। </p>]]> </content:encoded>
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<title>‘हमारा समय बर्बाद न करें’, प्रदर्शनकारियों की याचिका पर SC सख्त, तत्काल सुनवाई से किया इनकार</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस याचिका को तुरंत सुनवाई के लिए लिस्ट करने से इनकार कर दिया, जिसमें परीक्षा के पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में छात्र प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस के हमले का मुद्दा उठाया गया था। जिस वकील ने इस मामले … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 15:45:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>‘हमारा, समय, बर्बाद, न, करें’, प्रदर्शनकारियों, की, याचिका, पर, सख्त, तत्काल, सुनवाई, से, किया, इनकार</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस याचिका को तुरंत सुनवाई के लिए लिस्ट करने से इनकार कर दिया, जिसमें परीक्षा के पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में छात्र प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस के हमले का मुद्दा उठाया गया था।</p>
<p>जिस वकील ने इस मामले को अदालत में उठाया उससे भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, "हमारा समय बर्बाद न करें और अपना समय भी बर्बाद न करें।"</p>
<p>अदालत पहुंचे वकील की तरफ से वीडियो पेश किए जाने का अनुरोध किया था। साथ ही गुरुवार को याचिका पर सुनवाई की भी मांग की थी। बार एंड बेंच के अनुसार, उन्होंने कहा, 'मेरे पास वीडियोज भी हैं… पुलिस क्रूरता से जुड़े हुए। अगर कल यह के लिए यह मामला सूचीबद्ध कर लिया जाए तो…। वहां छात्र भी मौजूद थे।' CJP के बैनर तले प्रदर्शन में कई पुलिसकर्मी और छात्र घायल हुए थे।</p>
<p><strong>CJI क्या बोले</strong><br>
सीजेआई सूर्यकांत ने इस याचिका पर गुरुवार को भी गौर करने से मना कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कहा, 'हमारा और अपना समय खराब न करें।' उन्होंने कहा, 'हमारे पास कल समय नहीं है। हमारे पास समय नहीं है। हम कोई भी वीडियो नहीं देखना चाहते…।'</p>
<p><strong>सोमवार को क्या हुआ</strong><br>
जून से ही जंतर मंजर पर प्रदर्शन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई यानी सोमवार को संसद तक मार्च का ऐलान किया था। इसमें प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में पहुंचे थे। कुछ समय बाद दिल्ली पुलिस और छात्रों के बीच झड़प की खबरें भी सामने आईं। वहीं, इस दौरान कई पुलिस कर्मी भी घायल हो गए हैं। खबर है कि अब तक 6 FIR दर्ज की जा चुकीं हैं।</p>
<p> सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार सुबह आठ बजे तक 186 घायलों को राम मनोहर लोहिया अस्पताल के आपातकालीन विभाग में लाया गया। उनमें से 89 पुलिसकर्मी थे। पुलिस ने बताया कि 118 पुलिस कर्मी जख्मी हुए हैं।</p>
<p>कॉजपा के प्रवक्ता सौरव दास ने मंगलवार को आरोप लगाया था कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया। वीडियो में भी दिख रहे व्यक्ति के चेहरे पर ऐसी चोटें नजर आ रही हैं जो पैलेट गन से घायल होने पर लगती हैं।</p>
<p>इसके बाद दिल्ली पुलिस ने जवाब में 'एक्स' पर लिखा, 'फेक न्यूज अलर्ट।' पुलिस ने कहा, 'ऐसी खबरें कि पुलिस बल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल कर रहे हैं, पूरी तरह से झूठी और भ्रामक हैं।'</p>
<p>सोशल मीडिया पर एक अन्य पोस्ट में एक व्यक्ति ने दावा किया कि RAF यानी रैपिड ऐक्शन फोर्स ने प्रदर्शनकारियों पर स्टन गन का इस्तेमाल किया। पुलिस ने इस दावे को भी खारिज कर दिया। पुलिस ने कहा, 'ऐसी खबरें कि आरएएफ ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इलेक्ट्रिक स्टन गन का इस्तेमाल किया, पूरी तरह से झूठी और भ्रामक हैं।'</p>
<p><strong>HC ने भी तत्काल सुनवाई से किया इनकार</strong><br>
दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग के मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर मंगलवार को तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई बुधवार को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगी।</p>
<p><strong>दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था, ”कोर्ट को इस मामले में मत घसीटिए।”</strong></p>
<p><strong>सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के जनपथ, राजीव चौक समेत 16 स्टेशन बंद</strong><br>
दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशनों को एक बार फिर सुरक्षा कारणों के चलते बंद कर दिया गया है। दिल्ली मेट्रो के जनपथ, राजीव चौक, पटेल चौक और केंद्रीय सचिवालय समेत 16 मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>CJP मंच से PM मोदी तक! प्रदर्शन के बीच शरद पवार और सुप्रिया सुले ने की मुलाकात, बढ़ी सियासी चर्चा</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में नीट (NEET) परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर जंतर-मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बड़े विरोध प्रदर्शन और हंगामे के बीच एक बड़ी सियासी खबर सामने आई है. एनसीपी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले ने संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 15:45:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>राजधानी दिल्ली में नीट (NEET) परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर जंतर-मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बड़े विरोध प्रदर्शन और हंगामे के बीच एक बड़ी सियासी खबर सामने आई है. एनसीपी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले ने संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। </p>
<p>यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब एक दिन पहले ही शरद पवार और सुप्रिया सुले ने जंतर-मंतर पहुंचकर CJP और प्रदर्शनकारी छात्रों के आंदोलन का खुलकर समर्थन किया था और पुलिस कार्रवाई की निंदा की थी. संसद सत्र के दौरान हुई इस उच्च स्तरीय मुलाकात के बाद कयासों का बाजार गर्म हो गया है। </p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार के बीच रिश्ते राजनीतिक रूप से बेहद जटिल और उतार-चढ़ाव से भरे रहे हैं। दोनों नेताओं के संबंध निजी तौर पर बेहद सौहार्दपूर्ण और आदरपूर्ण हैं, लेकिन चुनावी राजनीति के मंच पर दोनों एक-दूसरे पर तीखे हमले करने से नहीं चूकते।</p>
<p><strong>    बारामती में थी तारीफ:</strong> पीएम मोदी ने 2015 में बारामती के एक दौरे के दौरान सार्वजनिक रूप से शरद पवार के लंबे राजनीतिक अनुभव की प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा था कि पवार ने राजनीति के शुरुआती दिनों में उनका हाथ पकड़कर चलना सिखाया था।<br>
<strong>    पद्म विभूषण सम्मान: </strong>वैचारिक मतभेदों के बावजूद, मोदी सरकार ने 2017 में शरद पवार को देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा था।</p>
<p><strong>    पीएम मोदी से सीधा संपर्क: </strong>शरद पवार देश के उन चुनिंदा विपक्षी नेताओं में गिने जाते हैं, जिनका प्रधानमंत्री से सीधा संपर्क है। वे राष्ट्रीय मुद्दों या महाराष्ट्र के प्रशासनिक संकटों पर अक्सर पीएम मोदी से वन-टू-वन मुलाकात करते हैं।</p>
<p>फोटो में पीएम मोदी कोई कागज पढ़ते दिख रहे हैं. इस दौरान शरद पवार पीएम मोदी से कुछ कह भी रहे हैं. शरद पवार के साथ उनकी बेटी सुप्रिया सुले भी पीएम से मिलने पहुंची थीं. शरद पवार जब पीएम से मिलने पहुंचे तो पीएम खुद उनका हाथ पकड़कर अंदर लाए. पिछले काफी समय से ऐसी अटकल है कि एसीपी शरद पवार गुट कई अहम विधेयकों पर एनडीए का समर्थन कर सकती है। </p>
<p>महिला आरक्षण बिल, परिसीमन बिल को लेकर एनडीए खेमा लगातार विपक्षी दलों से बातचीत कर रहा है. इसमें शरद पवार का खेमा भी शामिल है. टीएमसी के 20 सांसदों के टूटने के बाद एनडीए अब विपक्ष पर डोरे डाल रहा है. गौरतलब है कि एनसीपी नेता शरद पवार ने कुछ दिन पहले महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की थी। </p>
<p>एकनाथ शिंदे और शरद पवार की मुलाकात को लेकर चल रही चर्चाओं पर संजय देशमुख ने कहा था कि शरद पवार देश के वरिष्ठ और सम्मानित नेताओं में से एक हैं. उनका सम्मान केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश में किया जाता है. यदि कोई वरिष्ठ नेता किसी भी राजनीतिक दल के नेता से मिलने जाता है, तो उसका सम्मानपूर्वक स्वागत करना भारतीय संस्कृति और विशेष रूप से महाराष्ट्र की राजनीतिक परंपरा का हिस्सा है. इस मुलाकात को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। </p>
<p><strong>सियासी अटकलें: क्या NDA में जाएंगे पवार?</strong><br>
छात्रों के मुद्दे के इतर, इस मुलाकात ने महाराष्ट्र और केंद्र की राजनीति में बड़े उलटफेर के संकेत दिए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शरद पवार की पार्टी मॉनसून सत्र में मोदी सरकार के अहम और विवादास्पद 'परिसीमन बिल' का समर्थन कर सकती है। पिछले सत्र में विपक्ष ने एकजुट होकर इसके खिलाफ वोट किया था। अगर NCP (SP) इसका समर्थन करती है, तो मोदी सरकार को लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा जुटाने में बड़ी मदद मिलेगी।</p>
<p>पिछले कुछ दिनों में NCP (SCP) के नेता जयंत पाटिल और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच हुई बैठकों से भी NDA के साथ गठबंधन की सुगबुगाहट तेज हुई थी। हालांकि, सुप्रिया सुले ने हाल ही में NDA में शामिल होने की अटकलों को खारिज किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि न तो उन्हें और न ही पार्टी के किसी वरिष्ठ नेता को बीजेपी या किसी अन्य दल से ऐसा कोई प्रस्ताव मिला है, और नेताओं की हालिया मुलाकातें केवल प्रशासनिक कार्यों के लिए थीं न कि किसी राजनीतिक पुनर्गठन के लिए।</p>
<p>
<strong>चुनाव में हुआ था वार और पलटवार</strong><br>
साल 2014 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान पीएम मोदी ने शरद पवार की NCP को 'नेचुरली करप्ट पार्टी' करार दिया था और जनता से 'चाचा-भतीजा' (शरद पवार और अजीत पवार) की जोड़ी को उखाड़ फेंकने की अपील की थी। 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान पीएम मोदी ने शरद पवार का नाम लिए बिना उन पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'भटकती आत्मा' कहा था, जो राजनीतिक स्थिरता को नुकसान पहुंचाती है। तब शरद पवार भी मोदी सरकार की नीतियों की लगातार आलोचना करते आए हैं। उन्होंने पीएम मोदी की तुलना रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से करते हुए देश में डर का माहौल बनाने का आरोप लगाया था। इसके अलावा उन्होंने पीएम मोदी की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से करने पर भी आपत्ति जताई थी।</p>
<p><strong>NDA में जाने की लग रही हैं अटकलें</strong><br>
संसद के मानसून सत्र के दौरान शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की तस्वीरें काफी कुछ कह रही हैं। इस मुलाकात की हंसती-मुस्कुराती तस्वीरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। दरअसल परिसीमन बिल पर बीजेपी को एनसीपी (SP) के 8 सांसदों का समर्थन चाहिए। इस मुलाकात को उससे जोड़कर भी देखा जा रहा है। सुप्रिया सुले ने सीटों में 50 फीसदी बढ़ोतरी की लिखित गारंटी मिलने पर इस बिल को सशर्त समर्थन देने के संकेत दिए हैं। हालांकि सुप्रिया सुले ने एनडीए में शामिल होने या किसी भी तरह के विलय के प्रस्तावों को खारिज किया है। ऐसे में शरद पवार के अगले कदम पर सस्पेंस है।</p>
<p><strong>सुप्रिया ने जारी किया था बयान</strong><br>
शरद पवार और सुप्रिया सुले 21 जुलाई को सीजेपी के प्रदर्शन में भी गए थे. इतना ही नहीं सुप्रिया सुले ने दिल्ली पुलिस द्वारा पीएम हाउस के सामने धरना दे रहे नेताओं को जबरन उठाने पर आपत्ति जताते हुए सोशल मीडिया साइट एक्स पर बयान भी जारी किया था। </p>
<p>सुप्रिया ने अपने बयान में कहा था कि लोक कल्याण मार्ग पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ बदसलूकी की गई, जब वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे छात्रों पर हुए बर्बर हमले के बारे में जवाब मांग रहे थे. उन्हें धक्का देकर ज़मीन पर गिरा दिया गया और घसीटा गया. पुलिस ने उन्हें, साथ ही सांसद प्रियंका गांधी और समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव को हिरासत में लेने के लिए बल प्रयोग किया. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र, भारत के विपक्ष के नेता के साथ किया गया यह व्यवहार अलोकतांत्रिक है. हम देश के संवैधानिक मूल्यों और लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे. हम दमन की इस कार्रवाई की कड़ी से कड़ी निंदा करते हैं। </p>
<p>पवार की मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से चार तस्वीरें शेयर की गईं. इसमें लिखा गया- राज्यसभा सांसद शरद पवार और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले जी ने आज संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. बता दें बीते कुछ दिनों से यह चर्चा है कि एनसीपी एसपी, एनडीए के साथ आ सकते हैं.  इन सबके बीच यह मुलाकात कई मायनों में अहम मानी जा रही है। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>जम्मू&#45;कश्मीर में आतंकी हमले की आशंका! अनंतनाग के लाल चौक पर फायरिंग, हेड कॉन्स्टेबल शहीद</title>
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<description><![CDATA[ अनंतनाग जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में आतंकी हमले की आशंका है. अनंतनाग के लाल चौक पर कथित आतंकी हमले से दहशत फैल गई है. जी हां, अनंतनाग जिले में बुधवार को संदिग्ध आतंकवादियों की ओर से पुलिस पार्टी पर गोलीबारी की गई. इस फायरिंग में एक पुलिसकर्मी की जान चली गई . यह गोलीबारी दोपहर करीब … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 15:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>जम्मू-कश्मीर, में, आतंकी, हमले, की, आशंका, अनंतनाग, के, लाल, चौक, पर, फायरिंग, हेड, कॉन्स्टेबल, शहीद</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अनंतनाग</strong></p>
<p>जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में आतंकी हमले की आशंका है. अनंतनाग के लाल चौक पर कथित आतंकी हमले से दहशत फैल गई है. जी हां, अनंतनाग जिले में बुधवार को संदिग्ध आतंकवादियों की ओर से पुलिस पार्टी पर गोलीबारी की गई. इस फायरिंग में एक पुलिसकर्मी की जान चली गई . यह गोलीबारी दोपहर करीब 12.30 बजे अनंतनाग शहर के लाल चौक पर हुई, जहां पुलिस की एक टीम ड्यूटी पर तैनात थी। </p>
<p>सूत्रों के अनुसार, लालचौक पर हुए इस कथित आतंकी हमले में जो हेड कॉन्स्टेबल शहीद हुए हैं, उनकी पहचान बडगाम जिले के बीरवाह के रहने वाले आशिक हुसैन के तौर पर हुई. अनंतनाग में गोलीबारी की घटना के बाद तुरंत उन्हें अनंतनाग के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) अस्पताल ले जाया गया. जहां बाद में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। </p>
<p>इस हमले के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर ली है. हमलावरों का पता लगाने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया. चप्पे-चप्पे पर पुलिस और सुरक्षाबलों की टीम तैनात है. इतना ही नहीं, इलाके में अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया और ऑपरेशन जारी रहने के कारण इलाके में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनी हुई है। </p>
<p>यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब अमरनाथ यात्रा के लिए पहले से ही सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. सुरक्षा एजेंसियां ​​हजारों तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरे जम्मू-कश्मीर में कड़ी नजर रख रही हैं। </p>
<p>हाल के दिनों में सुरक्षा बलों ने तीर्थयात्रा के रास्ते पर सुरक्षा के एहतियाती उपाय बढ़ा दिए हैं. इस महीने की शुरुआत में नंतनाग पुलिस ने एक संदिग्ध ‘ओवरग्राउंड वर्कर’ (OGW) को हिरासत में लिया था. नुनवान बेस कैंप में लगे फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) ने सुरक्षा जांच के दौरान इस संदिग्ध की पहचान की थी। </p>
<p>अधिकारियों ने इस सफलता को टेक्नोलॉजी-आधारित निगरानी का एक उदाहरण बताया, जो सालाना तीर्थयात्रा के लिए कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाती है. सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके में एहतियाती जांच भी तेज कर दी है। </p>
<p>पिछले हफ्ते यात्रा के लिए सुरक्षा इंतजामों को मजबूत करने के तहत जम्मू रेलवे स्टेशन पर एक वेरिफिकेशन ड्राइव के दौरान सरकारी रेलवे पुलिस ने आठ लोगों को हिरासत में लिया, जबकि इससे पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत 14 अन्य लोगों के खिलाफ इसी तरह की एहतियाती कार्रवाई की गई थी. बुधवार को हुए हमले की आगे की जांच चल रही है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>उत्तराखंड से हिमाचल तक बारिश का कहर, चारधाम रूट पर येलो अलर्ट, कांगड़ा में फ्लैश फ्लड से भारी तबाही</title>
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<description><![CDATA[ देहरादून/ कांगड़ा उत्तराखंड में भारी बारिश की वजह से 142 सड़कें बंद हो गई। इस वजह से पर्वतीय क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हो गया और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। देहरादूनवासियों को मंगलवार रात हुई झमाझम बारिश ने गर्मी और उमस से बड़ी राहत दी। मौसम विभाग ने बुधवार के लिए उत्तरकाशी, … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 14:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>उत्तराखंड, से, हिमाचल, तक, बारिश, का, कहर, चारधाम, रूट, पर, येलो, अलर्ट, कांगड़ा, में, फ्लैश, फ्लड, से, भारी, तबाही</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>देहरादून/ कांगड़ा</strong></p>
<p>उत्तराखंड में भारी बारिश की वजह से 142 सड़कें बंद हो गई। इस वजह से पर्वतीय क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हो गया और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। देहरादूनवासियों को मंगलवार रात हुई झमाझम बारिश ने गर्मी और उमस से बड़ी राहत दी। मौसम विभाग ने बुधवार के लिए उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।</p>
<p><strong>142 सड़कें बंद</strong><br>
लोक निर्माण विभाग के अनुसार मंगलवार सुबह राज्य में बारिश से बंद सड़कों की संख्या 135 थी। दिन में बंद सड़कों की संख्या बढ़कर 142 तक पहुंच गई। हालांकि देर सांय तक 54 सड़कों को यातायात के लिए खोल दिया गया। इसके बाद अब बंद सड़कों की संख्या 88 रह गई है। लोनिवि की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को सर्वाधिक 37 सड़कें चमोली जिले में बंद हुई। इसके अलावा उत्तरकाशी में 27, टिहरी में 17, पौड़ी में 29 सड़कें बंद थी।</p>
<p><strong>दून में झमाझम बारिश, गर्मी और उमस से मिली राहत</strong><br>
देहरादून। दूनवासियों को मंगलवार रात हुई झमाझम बारिश ने गर्मी और उमस से बड़ी राहत दी है। सुबह के समय शहर के कई इलाकों में हल्की धूप खिली हुई थी, जिससे दिनभर लोगों को चिपचिपी गर्मी का अहसास हो रहा था। हालांकि, रात होते-होते मौसम ने अचानक करवट ली और आसमान से राहत की बूंदें झमाझम बरसने लगीं। इस तेज बारिश के बाद पूरे इलाके का मौसम सुहाना और काफी ठंडा हो गया है। बारिश की वजह से शहर के अधिकतम और न्यूनतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है।</p>
<p><strong>दून समेत सात जिलों में तीव्र बारिश, छह में येलो अलर्ट</strong><br>
राजधानी दून में मंगलवार सुबह हल्की बूंदाबांदी के बाद मौसम साफ हो गया और धूप निकलने से उमस बढ़ गई। मौसम विभाग ने बुधवार के लिए उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।</p>
<p>इसके अलावा प्रदेश के सभी जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और बारिश के तीव्र से अति तीव्र दौर की संभावना जताई गई है। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. सीएस तोमर ने बताया कि दून का अधिकतम तापमान 30.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री अधिक रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 24.1 डिग्री सेल्सियस रहा।</p>
<p>बीते 24 घंटे में मसूरी में नौ मिमी और पिथौरागढ़ में 1.8 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। चकराता में 4.5 मिमी बारिश हुई। वहीं मालदेवता, मसूरी, हाथीबड़कला, मोहकमपुर और कालसी में भी हल्की वर्षा दर्ज की गई। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।</p>
<p><strong>सुबह बूंदाबांदी, दिन में धूप, रात को बारिश हुई खूब</strong><br>
शहर के डीएल रोड, रायपुर, राजपुर रोड समेत विभिन्न क्षेत्रों में मंगलवार शाम हुई तेज बारिश से राहगीरों को भी आवाजाही के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं, गलियां नालों में तब्दील हो गईं और यहांं कई वाहन तेज बहाव की चपेट में आने से बहने लगे।</p>
<p>कई इलाकों में बारिश का पानी इतना ज्यादा भर गया कि लोगों के घरों के भीतर घुस गया। लोग बहते वाहनों को बचाने के साथ खुद को भी बचाते दिखे। इससे चारों ओर अफरा-तफरी का माहौल हो गया। उधर, मेयर सौरभ थपलियाल ने नगर निगम की क्विक रिस्पॉन्स टीमों को अलर्ट रहने और जलभराव और अन्य समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने, अनावश्यक रूप से जलधाराओं के पास न जाने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रशासन को सूचना देने की अपील की गई है।</p>
<p><strong>ग्राम्य विकास विभाग की दीवार गिरी, पानी घुसा</strong><br>
देहरादून। बारिश के कारण सिंचाई विभाग के नाले का पानी बढ़ने से आईटी पार्क के समीप ग्राम्य विकास विभाग की दीवार क्षतिग्रस्त हो गई। इससे पानी ग्र्राम्य विकास विभाग परिसर में घुस गया। पानी के साथ मिट्टी भी परिसर में घुस गई। खुले परिसर में मिट्टी का ढेर लग गया। तीन फीट तक पानी भर गया जो सरकारी कार्यालयों में घुस गया। ग्राउंड फ्लोर में मंगलवार की सुबह कर्मचारियों ने गंदगी को बाहर निकाला। वाइपर व झाड़ू से सफाई की गई। इसके बाद भी कर्मचारियों ने अंदर प्रवेश किया।</p>
<p><strong>घर और स्कूल बहा, हिमाचल में रेड अलर्ट</strong></p>
<p>हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश अब तबाही का रूप ले चुकी है. मौसम विभाग के रेड अलर्ट के बीच मंगलवार को कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों में सभी स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए. इस बीच कांगड़ा जिले की बोह घाटी में फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है. यहां 18 मकान, 9 गौशालाएं और एक प्राथमिक स्कूल भवन बह गया. हादसे में तीन महिलाएं घायल हुई हैं. कई जिलों में भूस्खलन से सड़कें बंद हैं और प्रशासन ने लोगों से गैरजरूरी यात्रा नहीं करने की अपील की है। </p>
<p>कांगड़ा जिले के शाहपुर उपमंडल की बोह घाटी के स्पैदा और गढ़गून गांवों में तेज बारिश के बाद आई फ्लैश फ्लड से भारी नुकसान हुआ है. शुरुआती जानकारी के अनुसार 18 मकान पूरी तरह बह गए हैं. इसके अलावा 9 गौशालाएं और एक प्राथमिक स्कूल भवन भी बाढ़ की चपेट में आ गया. बाढ़ के पानी में आठ मवेशी भी बह गए. घटना में तीन महिलाएं घायल हुई हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। </p>
<p><strong>राहत और बचाव अभियान जारी</strong></p>
<p>जिला प्रशासन ने प्रभावित गांवों में राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया है. शाहपुर के एसडीएम डॉ. गणेश ठाकुर ने बताया कि वह स्वयं प्रभावित क्षेत्र के लिए रवाना हो गए हैं. हालांकि डिब्बा और मानेड़ नाले के पास बड़े भूस्खलन होने के कारण घटनास्थल तक पहुंचने में काफी दिक्कत आ रही है. मौसम विभाग के रेड अलर्ट को देखते हुए कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों में सभी स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं. इसके अलावा शिमला जिले के ठियोग, चंबा के सलूणी और कुल्लू के निरमंड क्षेत्र में भी लगातार बारिश के कारण सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। </p>
<p>किन्नौर जिले में भूस्खलन के कारण पुराने हिंदुस्तान-तिब्बत रोड यानी राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है. शलखर के पास पहाड़ी से अचानक मलबा आने और समदो के पास चट्टानें गिरने से सड़क बंद हो गई है. इसके कारण काजा, स्पीति, पूह और रिकांग पिओ के बीच यातायात पूरी तरह ठप हो गया है. प्रशासन ने लोगों से केवल जरूरी होने पर ही यात्रा करने की अपील की है। </p>
<p><strong>भूस्खलन से बंद हुआ हिंदुस्तान-तिब्बत मार्ग</strong><br>
बारिश और भूस्खलन के कारण नूरपुर-लाहरू रोड, चुवाड़ी-डलहौजी मार्ग, शाहपुर-सिहुंता-चुवाड़ी रोड और पंजाब से भरमौर को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-154ए चक्की मार्ग भी बंद हो गया है. सोमवार शाम से कांगड़ा, चंबा और सिरमौर के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की गई. सबसे अधिक 136.4 मिलीमीटर बारिश पालमपुर में हुई. ददाहू में 105.6 मिलीमीटर, जत्तों बैराज में 103.6 मिलीमीटर, पांवटा साहिब में 79.8 मिलीमीटर, नाहन में 79.2 मिलीमीटर, धर्मशाला में 75.4 मिलीमीटर और भटियात में 71 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। </p>
<p>कांगड़ा, पच्छाद, संगड़ाह और धौलाकुआं में भी 60 से 68 मिलीमीटर के बीच बारिश हुई. मौसम विभाग ने चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और सिरमौर में बहुत भारी से अत्यंत भारी बारिश और फ्लैश फ्लड की चेतावनी जारी की है. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार प्रदेश में 36 सड़कें बंद हैं. इनमें 11 सड़कें मंडी और 10 चंबा जिले में हैं. इसके अलावा 43 पेयजल योजनाएं और पांच बिजली ट्रांसफार्मर भी प्रभावित हुए हैं। </p>
<p><strong>फ्लैश फ्लड का अलर्ट, 36 सड़कें बंद</strong><br>
सभी जिलाधिकारियों को जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र 24 घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन ने लोगों से नदियों, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने, गैरजरूरी यात्रा से बचने और केवल आधिकारिक एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है. किसी भी आपात स्थिति में राज्य आपदा हेल्पलाइन 1070 और जिला हेल्पलाइन 1077 पर संपर्क करने को कहा गया है.</p>]]> </content:encoded>
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<title>कांवड़ मेले में दुकान लगानी है? पहले कराएं पंजीकरण, इन 3 नियमों का पालन भी अनिवार्य</title>
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<description><![CDATA[ हरिद्वार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हरिद्वार को आधुनिक, सुरक्षित और विश्वस्तरीय आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकार तेजी से काम कर रही है। सीएम धामी ने मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि कांवड़ियों के स्वागत और सुगम सफर के लिए सभी इंतजामों को अंतिम रूप दिया … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 13:00:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>कांवड़, मेले, में, दुकान, लगानी, है, पहले, कराएं, पंजीकरण, इन, नियमों, का, पालन, भी, अनिवार्य</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हरिद्वार</strong></p>
<p><strong>मुख्यमंत्री पुष्कर </strong>सिंह धामी ने कहा कि हरिद्वार को आधुनिक, सुरक्षित और विश्वस्तरीय आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकार तेजी से काम कर रही है। सीएम धामी ने मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि कांवड़ियों के स्वागत और सुगम सफर के लिए सभी इंतजामों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कांवड़ मेले में दुकान लगाने के लिए पंजीकरण जरूरी है। साथ ही धामी ने बताया कि किसी तरह की गंदगी, मिलावट और नाम बदलकर दुकान चलाने वाले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा, धर्मनगरी के लोग, साधु-संत और सभी स्टेक होल्डर मिलकर शिवभक्तों का स्वागत करेंगे। इसके साथ ही, उन्होंने कांवड़ियों से भी कांवड़ यात्रा के दौरान निर्धारित नियमों का पालन करने की अपील की। कांवड़ मेले में दुकान लगाने वालों के पास पंजीकरण और वैध प्रमाणपत्र होना चाहिए। किसी भी तरह की गंदगी, खाद्य मिलावट या संदिग्ध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नाम बदलकर दुकानें चलाने से जुड़े सवाल पर उन्होंने यह बात कही।</p>
<p><strong>हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर के 4 प्रोजेक्ट का शिलान्यास</strong><br>
सीएम धामी ने अलकनंदा होटल में हुए कार्यक्रम में हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर के तहत करीब 235 करोड़ के चार प्रमुख प्रोजेक्ट का भूमि पूजन और शिलान्यास किया।</p>
<p><strong>चार कौन से प्रोजेक्ट</strong><br>
मंगलवार को अलकनंदा होटल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर के अंतर्गत करीब 235 करोड़ रुपये की चार प्रमुख परियोजनाओं का भूमि पूजन और शिलान्यास किया। इनमें 43.25 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मार्ग कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमि पूजन, जबकि 66.76 करोड़ रुपये की लागत से हरकी पैड़ी और सुभाष घाट के पुनरुद्धार, 66.34 करोड़ रुपये की लागत से हरकी पैड़ी के उत्तर क्षेत्र में आधारभूत अवसंरचना विकास तथा 58.84 करोड़ रुपये की लागत से रोड़ी बेलवाला क्षेत्र के पुनर्विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएं आगामी महाकुंभ-2027 और हर वर्ष आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं व कांवड़ यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। स्थानीय नागरिकों को भी बेहतर आधारभूत सुविधाएं मिलेंगी।</p>
<p><strong>देश पुनर्जागरण की दिशा में आगे बढ़ रहा</strong><br>
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पुनर्जागरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में राज्य सरकार हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर के साथ केदारखंड मंदिर माला मिशन, मानसखंड मंदिर माला मिशन, शारदा कॉरिडोर, गोल्ज्यू कॉरिडोर और विवेकानंद कॉरिडोर जैसी योजनाओं पर भी कार्य कर रही है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना भी है।</p>
<p><strong>महाकुंभ-2027 को इतिहास का सबसे दिव्य होगा</strong><br>
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकुंभ-2027 को इतिहास का सबसे दिव्य, भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन बनाने के लिए सरकार युद्धस्तर पर तैयारियां कर रही है। उन्होंने कहा कि विकास के साथ सरकार उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए भी प्रतिबद्ध है। समान नागरिक संहिता, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, नकल विरोधी कानून और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<title>खुदाई में मिलीं रावण की 35 दुर्लभ मूर्तियां, मांड्या&#45;मैसुरु में ASI की खोज ने चौंकाया</title>
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<description><![CDATA[  मांड्या कर्नाटक के मांड्या और मैसूर जिलों में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की खुदाई और रिसर्च के दौरान रावण की 35 से अधिक प्राचीन मूर्तियां मिली हैं. इस खोज ने इतिहासकारों को इसलिए चौंका दिया है क्योंकि मांड्या का &#039;मुथथी&#039; क्षेत्र पौराणिक तौर पर भगवान राम, माता सीता और रामायण काल से जुड़ा हुआ है, … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 11:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> मांड्या</strong></p>
<p>कर्नाटक के मांड्या और मैसूर जिलों में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की खुदाई और रिसर्च के दौरान रावण की 35 से अधिक प्राचीन मूर्तियां मिली हैं. इस खोज ने इतिहासकारों को इसलिए चौंका दिया है क्योंकि मांड्या का 'मुथथी' क्षेत्र पौराणिक तौर पर भगवान राम, माता सीता और रामायण काल से जुड़ा हुआ है, जबकि पास के पांडवपुरा और कुंती बेट्टा का संबंध महाभारत काल के पांडवों से दर्ज है. ऐसे पारंपरिक रूप से भारतीय महाकाव्यों से जुड़े क्षेत्रों में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में रावण की मूर्तियों का मिलना इस बात का साफ इशारा है कि प्राचीन काल में यहां के कुछ समुदायों में रावण के प्रति गहरी आस्था थी या उसकी पूजा की जाती थी। </p>
<p><strong>अलग-अलग जगहों पर खुदाई में मिली मूर्तियां</strong><br>
सियासत डेली की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ASI ने मद्दूर, मलावल्ली और मांड्या तालुकों में खुदाई करके करीब 15 से 20 रावण की मूर्तियां बरामद की हैं. ठीक इसी समय प्राचीन इतिहास और पुरातत्व विद्वान प्रोफेसर एन.एस. रंगराजू ने भी अपने स्वतंत्र रिसर्च के दौरान मलावल्ली, बन्नूर और टी. नरसीपुरा से करीब 15-20 और प्राचीन मूर्तियां ढूंढ निकाली हैं. इतिहासकारों का कहना है कि अलग-अलग उत्खनन स्थलों से इतनी मूर्तियां मिलना यह साबित करता है कि सदियों पहले इस इलाके में रावण के प्रति सम्मान की एक क्षेत्रीय धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विविधता मौजूद थी। </p>
<p><strong>कार्बन डेटिंग से पता चलेगा कितनी पुरानी मूर्तियां हैं</strong><br>
अब इन सभी मूर्तियों की सटीक उम्र और एक्चुअल हिस्टोरिकल कॉन्टेक्स्ट का पता लगाने के लिए इनकी इन डेप्थ साइंटिफिक इन्वेस्टिगेशनगहन, शिलालेख एनालिसिस और कार्बन डेटिंग की जा रही है. पुरातत्वविदों ने कहा है कि इस क्षेत्र के छिपे हुए इतिहास को पूरी तरह समझने के लिए आगे और खुदाई व डॉक्यूमेंटेशन करना बेहद जरूरी है, ताकि यह पता चल सके कि क्या जमीन के नीचे ऐसी और भी मूर्तियां या कलाकृतियां दबी हुई हैं?</p>
<p><strong>मांड्या का पुराना रावण कनेक्शन और इतिहास</strong><br>
आपको बता दें कि मांड्या जिले में रावण का मिलना कोई पहली घटना नहीं है. इसी जिले के मालवल्ली तालुक के निदघट्टा (Nidaghatta) गांव में रावण का एक प्राचीन मंदिर पहले से मौजूद है, जहां स्थानीय लोग सदियों से रावण को एक महान राजा और शिवभक्त मानकर पूजते हैं। </p>
<p>इतिहासकारों के मुताबिक, दक्षिण भारत की कई क्षेत्रीय परंपराओं में रावण की बुद्धिमत्ता, वेदों के ज्ञान और संगीत कला के कारण उसका गहरा सम्मान किया जाता रहा है. यही वजह है कि रामायण कालीन महत्व रखने वाले 'मुथथी' क्षेत्र (जहां मान्यता है कि हनुमान जी ने माता सीता की खोई हुई नथ ढूंढने के लिए कावेरी नदी को मथा था) के आस-पास इतनी बड़ी संख्या में इन मूर्तियों का मिलना इतिहास की कड़ियों को आपस में जोड़ता है। </p>
<p>वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज के बाद अब दक्षिण भारत में प्राचीन काल के सांस्कृतिक और धार्मिक इतिहास के कई नए पन्ने खुलेंगे। </p>]]> </content:encoded>
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<title>सिया गोयल का नया कांड! सुपारी देकर कराना चाहती थी वारदात, केतन का नाम सुनते ही किलर ने किया इनकार</title>
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<description><![CDATA[  पुणे पुणे में केतन अग्रवाल हत्याकांड को लेकर नए खुलासे जारी हैं। अब खबर है कि आरोपी सिया गोयल और उसके आशिक चेतन चौधरी ने वारदात को अंजाम देने के लिए सुपारी देने की भी योजना बना ली थी। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। अदालत ने दोनों की हिरासत … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 10:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> पुणे</strong></p>
<p>पुणे में केतन अग्रवाल हत्याकांड को लेकर नए खुलासे जारी हैं। अब खबर है कि आरोपी सिया गोयल और उसके आशिक चेतन चौधरी ने वारदात को अंजाम देने के लिए सुपारी देने की भी योजना बना ली थी। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। अदालत ने दोनों की हिरासत को बढ़ाकर 29 जुलाई तक कर दिया।</p>
<p> रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि सिया और चेतन ने एक कॉन्ट्रैक्ट किलर को पुणे के एक होटल में बुलाया था। साथ ही दावा किया जा रहा है कि इससे जुड़ी सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस को मिली है। जानकारों का मानना है कि दोनों के संपर्क में आया व्यक्ति आरोपियों के खिलाफ केस में अहम गवाह साबित हो सकता है।</p>
<p><strong>नाम सुनते ही मना किया</strong><br>
रिपोर्ट के अनुसार, जब कथित सुपारी किलर को केतन के बारे में जानकारी मिली, तो वह डर गया और काम करने से मना कर दिया था। इसके बाद चेतन और सिया ने मिलकर युवा कारोबारी को लोनावला स्थित लोहागढ़ किले से गिराने का प्लान बनाया था और 18 जून को उसकी हत्या कर दी थी।</p>
<p><strong>देख रहे थे जापानी वीडियो</strong><br>
रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के कुछ घंटे पहले दोनों जापानी वीडियो देख रहे थे। जांचकर्ताओं का कहना है कि वीडियो के जरिए दोनों जान रहे थे कि पुलिस की पूछताछ के दौरान शांत कैसे रहना है, खुद पर काबू कैसे करना है और जवाब किस तरह से देना है। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों की इंटरनेट हिस्ट्री में इन वीडियोज के लिंक मिले हैं।</p>
<p><strong>केतन के पिता ने मांगी कड़ी सजा</strong><br>
शुक्रवार को केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की है। उन्होंने इस हत्याकांड में गिरफ्तार दोनों आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिए जाने की भी मांग की। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, 'मेरे बेटे को जल्द से जल्द न्याय मिलना चाहिए और दोषियों को अधिकतम सजा मिलनी चाहिए। जांच सही दिशा में चल रही है और मामले की सुनवाई त्वरित अदालत में होनी चाहिए।'</p>
<p>आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी के पहले से शादीशुदा होने संबंधी खबरों पर विशाल अग्रवाल ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी और उन्होंने भी इसके बारे में मीडिया के माध्यम से ही पढ़ा। सिया गोयल और चेतन चौधरी को 23 जून को गिरफ्तार किया गया था और दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में हैं।</p>
<p>आरोप है कि सिया और चेतन ने 18 जून को पुणे जिले के लोहगढ़ किले की एक चट्टान से 26 साल के रियल एस्टेट कारोबारी को धक्का देकर मार डाला। यह किला पर्यटकों और ट्रेकर्स के बीच एक लोकप्रिय और खूबसूरत जगह है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>मैकेनिक की लापरवाही पड़ी भारी! बाइक खराब होने पर कंज्यूमर कोर्ट ने दिलाया ₹66 हजार मुआवजा</title>
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<description><![CDATA[ तिरुवनंतपुरम  केरलम के एक जिला कंज्यूमर कमीशन ने एक बाइक मैकेनिक को खराब मरम्मत के लिए जिम्मेदार ठहराया है, क्योंकि मरम्मत के कुछ ही महीनों बाद एक दिहाड़ी मजदूर की मोटरसाइकिल खराब हो गई थी। कमीशन ने मैकेनिक को शिकायतकर्ता को 66,000 रुपए से ज्यादा का भुगतान करने के आदेश दिया। कैसे शुरू हुआ विवाद? … ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 10:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मैकेनिक, की, लापरवाही, पड़ी, भारी, बाइक, खराब, होने, पर, कंज्यूमर, कोर्ट, ने, दिलाया, ₹66, हजार, मुआवजा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तिरुवनंतपुरम</strong><br>
 केरलम के एक जिला कंज्यूमर कमीशन ने एक बाइक मैकेनिक को खराब मरम्मत के लिए जिम्मेदार ठहराया है, क्योंकि मरम्मत के कुछ ही महीनों बाद एक दिहाड़ी मजदूर की मोटरसाइकिल खराब हो गई थी।</p>
<p><strong>कमीशन ने मैकेनिक को शिकायतकर्ता को 66,000 रुपए से ज्यादा का भुगतान करने के आदेश दिया।</strong></p>
<p><strong>कैसे शुरू हुआ विवाद?</strong><br>
तिरुवनंतपुरम के दिहाड़ी मजदूर रेंजिथ आर ने यह शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने जुलाई 2025 में अपनी हीरो ग्लैमर मोटरसाइकिल मैकेनिक अनिल कुमार बी की वर्कशॉप में दी थी, क्योंकि इंजन में कोई समस्या आ गई थी।</p>
<p>कोर्ट के आदेश के अनुसार, मैकेनिक ने पहले मरम्मत के लिए 10,000 रुपए बताए थे, लेकिन बाद में 12,000 रुपए एडवांड में ले लिए।</p>
<p>पूरा पेमेंट मिलने के बाद भी मैकेनिक मरम्मत में देरी करता रहा। रेंजिथ कई बार वर्कशॉप गए, लेकिन हर बार बाइक खुली हालत में पड़ी मिली। इससे उनकी आठ दिन की मजदूरी का नुकसान हुआ, इसलिए उन्होंने आखिरकार पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।</p>
<p>
पुलिस के दखल के बाद ही मैकेनिक ने बाइक वापस की। बिना किसी बिल के उसने रेजिंथ को भरोसा लिया कि इंजन अब एक लाख किलोमीटर तक ठीक से चलेगा। लेकिन तीन महीने के अंदर ही बाइक के 6,000 किलोमीटर चलने से पहले ही, इंजन फिर से खराब हो गया।</p>
<p><strong>दूसरे गैराज में ठीक करवाने में 17,610 रुपये खर्च </strong><br>
दूसरे मैकेनिक ने पाया कि क्रैंकशाफ्ट खराब हो गया था। जब रेंजिथ ने पैसे वापस करने या मरम्मत का खर्च उठाने के लिए कहा, तो मैकेनिक ने कुछ भी करने से इनकार कर दिया और उनसे इसे कहीं और ठीक करवाने को कहा। इसके बाद रेंजिथ ने इसे दूसरे गैराज में ठीक करवाने में 17,610 रुपये खर्च किए, जहां उन्हें पता चला कि पिस्टन गलत तरीके से लगाया गया था, इसी वजह से इंजन ज्यादा तेल जला रहा था।</p>
<p>कार्बन जमा हो रहा था और आखिरकार क्रैंकशाफ्ट बेयरिंग खराब हो गई थी। इससे परेशान होकर, उन्होंने कोल्लम के जिला कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन का दरवाजा खटखटाया।</p>
<p><strong>कंज्यूमर कमीशन ने मैकेनिक को क्यों ठहराया जिम्मेदार?</strong><br>
प्रेसिडेंट एसके श्रीला और सदस्य स्टैनली हेरोल्ड की बेंच ने गौर किया कि मैकेनिक ने पेश होने के बावजूद न तो कोई लिखित जवाब दाखिल किया और न ही शिकायतकर्ता के किसी सबूत को चुनौती दी। नतीजतन, आयोग ने कहा कि घटना के बारे में मजदूर का बयान और दस्तावेजी सबूतों को गलत साबित नहीं किया जा सका।</p>
<p>आयोग ने कहा कि ये तथ्य साफ तौर पर साबित करते हैं कि दूसरी पार्टी ने जो मरम्मत का काम किया, वह लापरवाही भरा, अधूरा और एक अच्छे मैकेनिक से उम्मीद किए जाने वाले स्टैंडर्ड से कमतर था। ऐसा व्यवहार साफ तौर पर सर्विस में कमी और कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के तहत गलत व्यापारिक तरीका माना जाएगा।</p>
<p><strong>बेंच ने शिकायतकर्ता की आर्थिक मुश्किलों पर किया गौर</strong><br>
बेंच ने शिकायतकर्ता की आर्थिक और निजी मुश्किलों पर भी ध्यान दिया। उसने देखा कि दिहाड़ी मजदूर होने के नाते, उसे न सिर्फ मोटरसाइकिल की दोबारा मरम्मत पर पैसे खर्च करने पड़े, बल्कि उसकी मजदूरी का भी नुकसान हुआ, उसे बार-बार वर्कशॉप जाना पड़ा और अपनी बाइक वापस पाने से पहले पुलिस के पास भी जाना पड़ा।</p>
<p><strong>बेंच ने कहा, "शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी, असुविधा और मुश्किल असली हैं और उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए।"</strong></p>
<p>शिकायत को मंजूरी देते हुए, आयोग ने मैकेनिक को शिकायतकर्ता के आर्थिक नुकसान के लिए 36,752 रुपये देने का निर्देश दिया, जिसमें नई मरम्मत का खर्च, मजदूरी का नुकसान और यात्रा का खर्च शामिल है। उसने मानसिक परेशानी के लिए 20,000 रुपये और कानूनी कार्यवाही के खर्च के लिए 10,000 रुपये का मुआवजा भी दिया, जिससे कुल राहत राशि 66,752 रुपये हो गई।</p>
<p>यह रकम 45 दिनों के अंदर चुकानी होगी, ऐसा न करने पर मुआवजे और आर्थिक नुकसान वाली रकम पर पैसे मिलने तक 9% सालाना ब्याज लगेगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त रुख, आतंकवाद बंद किए बिना बहाल नहीं होगी संधि</title>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 09:45:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>सिंधु, जल, संधि, पर, भारत, का, सख्त, रुख, आतंकवाद, बंद, किए, बिना, बहाल, नहीं, होगी, संधि</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>पाकिस्तान की ओर से सिंधु जल संधि को लेकर बढ़ती मांग के बीच भारत ने अपना रुख और कड़ा कर लिया है. सरकारी सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि भारत का कहना है कि 65 साल पुराने इस समझौते में पूरी तरह बदलाव की जरूरत है और ये अपने मौजूदा स्वरूप में जारी नहीं रह सकता. भारत ने ये भी स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य की किसी भी व्यवस्था के लिए पाकिस्तान को ये साबित करना होगा कि उसने सीमा पार आतंकवाद खत्म कर दिया है। </p>
<p>समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि यदि नदियों के पानी के बंटवारे से जुड़े प्रावधानों को दोबारा सक्रिय करना है तो उन्हें एक अलग और संशोधित रूप में ही करना होगा। </p>
<p>भारत का कहना है कि ये कदम तभी संभव है, जब इस्लामाबाद भारत के खिलाफ प्रायोजित आतंकवाद को पूरी तरह से बंद कर दे. हालांकि, भारत फिलहाल इस संधि से पूरी तरह हटने की कोशिश नहीं कर रहा है, लेकिन एक संप्रभु राष्ट्र होने के नाते उसके पास अपने हितों के खिलाफ जाने वाली किसी भी संधि को खत्म करने का पूर्ण अधिकार सुरक्षित है। </p>
<p><strong>'झूठा नैरेटिव फैला रहा पाकिस्तान'</strong><br>
भारतीय सूत्रों ने पाकिस्तान के उस झूठे नैरेटिव को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा जा रहा था कि भारत द्वारा संधि को स्थगित करने से वहां पानी की किल्लत हो रही है। </p>
<p>भारत का कहना है कि पाकिस्तान को मिलने वाले पानी का एक बड़ा हिस्सा उसके अपने पास भंडारण क्षमता (स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर) की कमी, व्यापक रिसाव (लीकेज) और उसके अपने प्रांतों के बीच जारी पानी के विवादों के कारण बर्बाद हो जाता है। </p>
<p>दरअसल, भारत द्वारा इस संधि को स्थगित करने का फैसला पिछले साल अप्रैल में पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद लिया गया था. इस आतंकी हमले में 26 नागरिकों की जान चली गई थी, जिसकी जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयाबा के प्रॉक्सी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने ली थी. इस हमले के जवाब में भारत ने कई राजनयिक और आर्थिक कदम उठाए थे, जिनमें सिंधु जल संधि को स्थगित करना भी शामिल था. इसके बाद मई में भारत ने पाकिस्तान में आतंकी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए 'ऑपरेशन सिंदूर' भी चलाया था। </p>
<p><strong>1960 में हुई थी सिंधु जल संधि</strong><br>
बता दें कि विश्व बैंक की मध्यस्थता में 19 सितंबर 1960 को भारत और पाकिस्तान के बीच 9 साल की लंबी बातचीत के बाद ये संधि हुई थी. इसके तहत भारत को पूर्वी नदियों- रावी, ब्यास और सतलुज पर अधिकार है, जबकि पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों- सिंधु, झेलम और चिनाब का नियंत्रण मिला है. ये समझौता भारत को पाकिस्तान जाने से पहले पश्चिमी सहायक नदियों पर किश्तवाड़ और रतले जैसी 'रन-ऑफ-रिवर' जलविद्युत परियोजनाएं बनाने की भी अनुमति देता है। </p>
<p><strong>अब मौजूदा स्वरूप में नहीं होगा सिंधु जल संधि</strong><br>
सूत्रों की मानें तो सिंधु जल संधि अब अपने मौजूदा स्वरूप में बिल्कुल भी काम नहीं करेगी. अगर भविष्य में नदियों के पानी के बंटवारे से जुड़े प्रावधान फिर से लागू किए जाते हैं तो उन्हें नए ढांचे और नई शर्तों के तहत लागू करना होगा. मौजूदा व्यवस्था में ऐसा नहीं होगा. सूत्र ने आगे कहा कि सिंधु जल संधि से पूरी तरह बाहर निकलने के कड़े कदम पर विचार करने से पहले भारत आगे के घटनाक्रम का इंतजार करेगा। </p>
<p><strong>क्या संधि से निकलने का कोई प्रावधान है?</strong><br>
हालांकि, सिंधु जल संधि में समझौते से बाहर निकलने का कोई प्रावधान यानी एक्जिट क्लॉज नहीं है, लेकिन भारत के लिए यह अहम है कि ‘संधि कानून पर वियना कन्वेंशन’ का अनुच्छेद 60 कहता है कि किसी एक पक्ष द्वारा संधि का गंभीर उल्लंघन होने पर प्रभावित अन्य पक्ष संधि को पूरी तरह या आंशिक रूप से निलंबित कर सकते हैं. हालांकि भारत और पाकिस्तान दोनों इस कन्वेंशन के सदस्य नहीं हैं, लेकिन भारत का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय प्रथागत कानून के तहत पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को समर्थन देना संधि के दायित्वों का गंभीर उल्लंघन माना जा सकता है। </p>
<p><strong>भारत को नहीं किया जा सकता संधि बहाल करने पर मजबूर</strong><br>
रिपोर्ट में भारतीय अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि एक संप्रभु देश होने के नाते भारत को ऐसी संधि में बने रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, जो उसके हित में न हो. ये बातें ऐसे समय में कही जा रही हैं जब पाकिस्तान सिंधु जल संधि के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश कर रहा है. पाकिस्तान का आरोप है कि भारत ने संधि को एकतरफा और गैरकानूनी तरीके से स्थगित किया है, जिससे उसके 24 करोड़ नागरिकों की जल सुरक्षा और आजीविका पर खतरा पैदा हो गया है। </p>
<p><strong>भारत तब भी करता है मदद</strong><br>
हालांकि, सिंधु संधि स्थगित होने के बावजूद भारत पाकिस्तान की मदद कर रहा है. भारत मानवीय आधार पर पाकिस्तान को बाढ़ संबंधी चेतावनियां देता रहता है, ताकि जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. भारत का कहना है कि पाकिस्तान खुद को पीड़ित दिखाने की कोशिश कर रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि सिंधु नदी प्रणाली का जितना पानी भारत के हिस्से में आता है, उससे ज्यादा पानी पाकिस्तान में खराब जल प्रबंधन और सतही बहाव के कारण बर्बाद हो जाता है। </p>
<p><strong>भारत का सिंधु पर क्या स्टैंड</strong><br>
सूत्रों का यह भी कहना है कि समझौते के तहत सिंधु बेसिन का लगभग 80 फीसदी पानी मिलने के बावजूद पाकिस्तान ने 1976 से न तो कोई बड़ा स्टोरेज प्रोजेक्ट बनाया है और न ही पानी के आधुनिक प्रबंधन में कोई निवेश किया है. भारत के नजरिए से पाकिस्तान की समस्या पानी की उपलब्धता नहीं, बल्कि पानी का प्रबंधन है. हालांकि, भारत के लिए मुख्य मुद्दा पाकिस्तान का सीमा-पार आतंकवाद को समर्थन देना है. भारत का कहना है कि सिंधु जल समझौता को रोके रखने की कोई समय-सीमा तय नहीं है. भारत का रुख साभ है कि जब तक पाकिस्तान भरोसेमंद और पक्के तौर पर सीमा-पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक यह समझौता रुका रहेगा. यह सबसे जरूरी शर्त है। </p>
<p><strong>विवाद समाधान में PAK का अड़ियल रवैया</strong><br>
सूत्रों का कहना है कि संधि को लागू करने के शुरुआती वर्षों से ही पाकिस्तान ने भारत की लगभग हर परियोजना पर आपत्ति जताई है, चाहे वह छोटी 200 किलोवाट की परियोजना हो या सलाल, तुलबुल, बगलिहार, किश्तवाड़, रैटल और पाकल दुल जैसी बड़ी परियोजनाएं हों. पाकिस्तान का रवैया सहयोग के बजाय हमेशा बाधा डालने वाला रहा है. उसने विवाद निवारण के क्रमिक तंत्र का उल्लंघन करते हुए तकनीकी मुद्दों को जबरन तीसरे पक्ष के मंचों पर उठाया है. संधि को निलंबित करने से पहले भारतीय पक्ष ने इसमें संशोधन की पुरजोर वकालत की थी और इसके लिए कुछ विवादों को सुलझाने में इस्लामाबाद के अड़ियल रवैये का हवाला दिया था। </p>
<p><strong>भारत ने जताई थी आपत्ति</strong><br>
वहीं, साल 2015 में पाकिस्तान ने किश्तवाड़ और रैटल परियोजनाओं पर आपत्तियों के लिए न्यूट्रल एक्सपर्ट नियुक्त करने की मांग की थी, लेकिन 2016 में वह एकतरफा रूप से पीछे हट गया और मध्यस्थता अदालत (कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन) की मांग करने लगा.<br>
विश्व बैंक ने दोनों को नियुक्त कर दिया, जिसे भारत ने स्वीकार नहीं किया. भारत न्यूट्रल एक्सपर्ट की बैठकों में शामिल तो हुआ, लेकिन मध्यस्थता अदालत की कार्यवाही से दूर रहा. क्योंकि एक साथ दो समानांतर प्रक्रियाएं नहीं चलाई जा सकतीं। </p>
<p><strong>पाकिस्तान में बेखौफ हैं आतंकी</strong><br>
भारत ने ये भी मुद्दा उठाया है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद को रोकने के लिए कोई विश्वसनीय कदम नहीं उठाए हैं. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति द्वारा प्रतिबंधित व्यक्ति और संगठन आज भी पाकिस्तान में सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखाई दे रहे हैं और खुलेआम जहर उगल रहे हैं. नियंत्रण रेखा (LoC) के पार की गतिविधियों से साफ पता चलता है कि आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए पाकिस्तान की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। </p>
<p>भारत ने अंत में ये पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि सिंधु जल संधि का भविष्य पूरी तरह से पाकिस्तान के व्यवहार पर निर्भर करेगा. पाकिस्तान को आतंकवाद पर अपना समर्थन हमेशा के लिए खत्म करना होगा और संधि के प्रति अपना अड़ियल रवैया छोड़ना होगा. जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक ये 65 साल पुरानी संधि अपने पुराने रूप में किसी भी कीमत पर दोबारा शुरू नहीं हो सकती है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>EPFO के 5 नए नियम 2026 लागू, PF क्लेम और ऑटो&#45;ट्रांसफर अब पहले से ज्यादा आसान</title>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 09:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>EPFO, के, नए, नियम, 2026, लागू, क्लेम, और, ऑटो-ट्रांसफर, अब, पहले, से, ज्यादा, आसान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) केवल एक बचत खाता नहीं, बल्कि बुढ़ापे की सबसे बड़ी आर्थिक सुरक्षा की नींव है. लेकिन अक्सर पीएफ क्लेम पास होने में देरी, केवाईसी की पेचीदा प्रक्रिया और नौकरी बदलने पर पीएफ ट्रांसफर जैसी समस्याओं से कर्मचारियों को जूझना पड़ता था। </p>
<p>नौकरीपेशा वर्ग की इन्हीं परेशानियों को खत्म करने के लिए EPFO Update 2026 के तहत सिस्टम में कई बड़े बदलाव किए गए हैं. इन नए अपग्रेड्स के जरिए डिजिटल सेवाओं को सुपर फास्ट और कागजी कार्रवाई को कं से कं कर दिया गया है. दरअसल, ईपीएफओ ने अपने आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह से अपग्रेड किया है, ताकि उमंग ऐप और यूनिफाइड मेंबर पोर्टल का सर्वर पीक आवर्स के दौरान डाउन न हो. इसकी वजह से नए और मजबूत डिजिटल प्लेटफॉर्म से पासवर्ड रीसेट करने, पासबुक डाउनलोड करने या क्लेम स्टेटस चेक करने में सर्वर एरर की समस्या से राहत मिली है. अब पीएफ बैलेंस चेक करना और क्लेम स्टेटस को ट्रैक करना पहले से कहीं अधिक तेज और पारदर्शी हो गया है. 2026 में लागू हुए EPFO के 5 नए नियम नीचे दिए गए हैं। </p>
<p><strong>ऑल सेटलमेंट से चुटकियों में होंगे पीएफ क्लेम</strong><br>
पहले पीएफ क्लेम फाइल करने के बाद पैसों के बैंक खाते में आने के लिए 7 से 20 दिनों तक का लंबा इंतजार करना पड़ता था. अब नए ऑटो सेटलमेंट सिस्टम के तहत योग्य क्लेम्स को बहुत तेजी से प्रोसेस किया जा रहा है. अगर आपका डाटा पूरी तरह सही है, तो बीमारी, शिक्षा, शादी या घर खरीदने जैसी जरूरतों के लिए एडवांस क्लेम बिना किसी इंसानी दखल के कंप्यूटर सिस्टम के जरिए ऑटोमेटिक तरीके से स्वीकृत हो जाता है. यानी इस सुविधा के शुरू होने से अब क्लेम का पैसा महज 3 से 4 दिनों में सीधे खाता धारकों के बैंक खाते में जमा हो जाता है। </p>
<p><strong>नौकरी बदलने पर आसान हुआ पीएफ ट्रांसफर</strong><br>
एक कंपनी छोड़कर दूसरी कंपनी ज्वाइन करने पर अक्सर पीएफ बैलेंस ट्रांसफर करने में कर्मचारियों के पसीने छूट जाते थे. पुरानी कंपनी के अप्रूवल के चक्कर में कई बार क्लेम अटक जाता था. लिहाजा, इस झंझट से खाता धारकों को मुक्ति दिलाने के लिए ईपीएफओ के नए अपग्रेड के बाद अब जब भी धाता धारक नौकरी बदलते हैं, तो आपका पुराना पीएफ बैलेंस यूएएन (UAN) के तहत अपने आप नई कंपनी के साथ लिंक और ट्रांसफर हो जाएगा. अब आपको बार-बार ऑनलाइन फॉर्म 13 भरने या एम्प्लॉयर के दफ्तर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। </p>
<p><strong>देश के किसी भी ईपीएफओ ऑफिस से लें सेवाएं</strong><br>
ईपीएफओ ने अपने क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के पुराने नियमों को खत्म करते हुए एनीवेयर सर्विस की शुरुआत की है. इसके तहत अब आप चाहे दिल्ली में रहते हों, मुंबई में या किसी छोटे शहर में अगर आपको ईपीएफओ से जुड़ी कोई शिकायत है या ऑफलाइन सेवा चाहिए, तो आप देश के किसी भी नजदीकी ईपीएफओ (EPFO) दफ्तर में जाकर अपनी समस्या का समाधान करवा सकते हैं. अब किसी खास क्षेत्रीय दफ्तर पर ही निर्भर रहने की मजबूरी खत्म हो गई है। </p>
<p><strong>झंझट मुक्त केवाईसी अपग्रेड<br>
पीएफ खाते से पैसे निकालने या प्रोफा</strong>इल में सुधार के लिए केवाईसी (KYC) का पूरा होना जरूरी है. पहले नाम की स्पेलिंग, डेट ऑफ बर्थ या माता-पिता के नाम में मामूली अंतर होने पर भी केवाईसी रिजेक्ट हो जाती थी. इस नए बदलाव के बाद अब बैंक विवरण, पैन (PAN) और जनसांख्यिकीय डेटा को अपडेट करने की प्रक्रिया को बेहद सरल और यूजर फ्रेंडली बना दिया गया है. अब जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करते ही सिस्टम उनका तुरंत वेरीफाई कर लेता है, जिससे पेंडिंग रिक्वेस्ट की संख्या में भारी कमी आई है। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>वंदे मातरम पर नया कानून क्या है? क्या राष्ट्रीय गीत के अपमान पर होगी 3 साल की जेल, समझिए पूरा मामला</title>
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<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 09:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान अपमान रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने वाले हैं. यह विधेयक 1971 के राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम में संशोधन करेगा. सरकार का कहना है कि वंदे मातरम ने आजादी की लड़ाई में करोड़ों भारतीयों को प्रेरित किया था, इसलिए इसे भी वही कानूनी सम्मान मिलना चाहिए जो राष्ट्रीय गान को मिला हुआ है. वहीं विपक्ष का एक वर्ग और कुछ संवैधानिक विशेषज्ञ इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं कि क्या देशभक्ति को कानून के जरिए लागू किया जा सकता है। </p>
<p>अभी इस कानून की धारा 3 केवल राष्ट्रीय गान 'जन गण मन' पर लागू होती है. इसके तहत अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गान गाने से रोकता है या गान के दौरान बाधा पैदा करता है तो उसे अधिकतम तीन साल की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. अब सरकार इसी धारा में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को भी शामिल करना चाहती है. यानी कानून बनने के बाद दोनों के लिए एक जैसी सजा का प्रावधान होगा। </p>
<p><strong>वंदे मातरम को लेकर अभी क्या नियम हैं?</strong><br>
फिलहाल वंदे मातरम को लेकर कोई अलग दंडात्मक कानून नहीं है. हाल ही में गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय गीत को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे. जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने के समय इसे गाया जा सकता है. सांस्कृतिक और सरकारी समारोहों में इसका उपयोग किया जा सकता है. राष्ट्रीय गीत गाए जाने के दौरान लोगों को सावधान की मुद्रा में खड़ा होना चाहिए. स्कूल चाहें तो दिन की शुरुआत सामूहिक वंदे मातरम से कर सकते हैं. लेकिन इन दिशानिर्देशों में किसी तरह की सजा का प्रावधान नहीं था। </p>
<p><strong>फिर कानून लाने की जरूरत क्यों पड़ी?</strong><br>
सरकार का कहना है कि वंदे मातरम भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे बड़ा प्रतीक रहा है. हजारों क्रांतिकारियों ने इसे आंदोलन का नारा बनाया. सरकार का तर्क है कि जब राष्ट्रीय गान को कानूनी सुरक्षा मिली हुई है, तब राष्ट्रीय गीत को भी समान सम्मान मिलना चाहिए. बिल के उद्देश्य और कारण में कहा गया है कि अभी राष्ट्रीय गीत के गायन में बाधा डालने पर कोई विशेष कानूनी प्रावधान नहीं है. इसलिए इसे कानून के दायरे में लाना जरूरी है। </p>
<p>स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बन गया था. सरकार पहले भी इस पर जोर दे चुकी है. पिछले साल संसद में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष चर्चा हुई थी. लोकसभा और राज्यसभा में कई घंटों तक इस पर बहस चली। </p>
<p><strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि उसने मुस्लिम लीग को खुश करने के लिए गीत के कुछ हिस्से हटा दिए थे। </strong></p>
<p><strong>विपक्ष क्या कह रहा है?</strong><br>
वहीं कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा था कि कांग्रेस कार्यसमिति ने 1937 में केवल शुरुआती दो अंतरों को सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए स्वीकार किया था क्योंकि बाद के हिस्सों पर कुछ समुदायों की आपत्तियां थीं। </p>
<p>उन्होंने कहा था कि "केवल पहले दो अंतरे ही ऐतिहासिक रूप से और सार्वजनिक रूप से गाए जाते रहे हैं, बाद के हिस्सों को लेकर पहले से मतभेद रहे हैं। </p>
<p><strong>वहीं सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने सरकार से इस बिल को वापस लेने की मांग की है। </strong></p>
<p>केरल से सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिख कर इस विधेयक को वापस लेने का आग्रह किया है। उन्होंने पत्र में लिखा, मैं यह पत्र लिखकर राज्यसभा में पेश किए जाने वाले प्रस्तावित राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 पर गहरी चिंता व्यक्त कर रहा हूं. उनका कहना है कि देशभक्ति स्वेच्छा से होनी चाहिए, न कि कानूनी मजबूरी के कारण। </p>
<p><strong>विवाद क्यों है?</strong><br>
वंदे मातरम को लेकर विवाद नया नहीं है. गीत के शुरुआती दो अंतरे सभी समुदायों में व्यापक रूप से स्वीकार किए जाते हैं. लेकिन बाद के हिस्सों में देवी दुर्गा सहित हिंदू धर्म के प्रतीकों का उल्लेख है. इसी वजह से आजादी से पहले भी कई नेताओं ने सुझाव दिया था कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाएं. 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने भी इसी आधार पर इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया था। </p>
<p><strong>क्या संविधान में राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान बराबर हैं?</strong><br>
24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की बैठक में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि वंदे मातरम को जन गण मन के समान सम्मान दिया जाएगा. इसी आधार पर सरकार कह रही है कि दोनों का दर्जा बराबर माना गया था. हालांकि संविधान में राष्ट्रीय गीत शब्द का अलग से उल्लेख नहीं है. संविधान ने केवल राष्ट्रीय गान को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया. वंदे मातरम को सम्मानजनक राष्ट्रीय गीत का दर्जा संविधान सभा की घोषणा के जरिए मिला। </p>
<p><strong>वंदे मातरम का इतिहास क्या है?</strong><br>
जन गण मन भारत का राष्ट्रीय गान है. वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है. दोनों का संवैधानिक महत्व अलग-अलग है, लेकिन दोनों का ऐतिहासिक महत्व बहुत बड़ा माना जाता है। </p>
<p>वंदे मातरम की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी. वंदे मातरम पहली बार साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में 7 नवंबर 1875 को प्रकाशित हुई थी. बाद में, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इसे अपने अमर उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल किया, जो 1882 में प्रकाशित हुई. रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे संगीतबद्ध किया था. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया। </p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट पहले क्या कह चुका है?</strong><br>
इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट के दो फैसले बेहद अहम हैं. पहला मामला बीजॉय इमैनुएल (1986) का है इसमें सु्प्रीम कोर्ट ने ये फैसला दिया था कि राष्ट्र गान गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. सम्मान दिखाने के लिए खड़े होना पर्याप्त है. कोई व्यक्ति राष्ट्र गान के दौरान चुप रहता है तो इसे अपमान नहीं माना जा सकता. तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि देश का संविधान देश के नागरिक की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा करता है। </p>
<p>वहीं दूसरा मामला केरल हाई कोर्ट में आया 2014 में एक मामला था, जिसमें अदालत ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति राष्ट्र गान के दौरान जानबूझकर शोर मचाता है या कार्यक्रम में बाधा डालता है, तो यह अपराध हो सकता है और पुलिस जांच कर सकती है। </p>
<p><strong>तो क्या अब वंदे मातरम गाना अनिवार्य हो जाएगा?</strong><br>
प्रस्तावित बिल किसी को वंदे मातरम गाने के लिए बाध्य नहीं करता. यह केवल उन मामलों पर लागू होगा जहां कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत गाने से रोकता है या गीत गाए जाने के दौरान व्यवधान पैदा करता है. हालांकि अगर कानून बनता है, तो भविष्य में अदालतों को यह तय करना होगा कि बाधा और सम्मान की कानूनी सीमा क्या होगी. साथ ही यह भी देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों, खासकर बीजॉय इमैनुएल के मामले में दिए गए निर्देशों के साथ इस कानून की व्याख्या कैसे की जाएगी। </p>]]> </content:encoded>
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<title>सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म दोषी की सजा घटाई, कहा&#45; कम उम्र और सुधार की संभावना पर किया विचार</title>
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<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 22:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने  एक बड़ा फैसला सुनाया है। करीब 10 साल पुराने दुष्कर्म के एक मामले में दोषी की सजा को घटाने का निर्णय लिया गया है। इसकी वजह न्यायाधीशों ने सुधार की गुंजाइश को बताया है। दोषी की तरफ से ही शीर्ष न्यायालय में याचिका दाखिल की गई थी। वहीं, अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि उसका आचरण जेल में अच्छा रहा है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई की थी।</p>
<p>न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा, "पुरुष-प्रधान सोच की बेड़ियों को तोड़ने के लिए सामाजिक और मानसिक स्तर पर काफी बदलाव आने के बावजूद, इस तरह की घटनाएं आज भी बिना किसी डर या शर्म के लगातार हो रही हैं। </p>
<p>पीठ ने आगे कहा, "कानून में पिछले कुछ वर्षों में कई तरह के सुधार और संशोधन किए गए हैं, और भले ही उनका कुछ हद तक सकारात्मक असर पड़ा हो, लेकिन ऐसे अपराधों को जड़ से खत्म करने की तत्परता को थोड़ा भी कम नहीं किया जा सकता. हमें तब तक प्रयास जारी रखने होंगे जब तक कि ये घटनाएं केवल इतिहास का हिस्सा न बन जाएं और पूरा समाज इन्हें नफरत की नजर से न देखने लगे। </p>
<p>पीठ ने अपराध की गंभीरता को बरकरार रखते हुए, 2016 के सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए गए याचिकाकर्ता की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया. पीठ ने कहा, "ऊपर चर्चा किए गए सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और दोषी-अपीलकर्ता के पक्ष में पहले नोट किए गए कारणों पर विचार करते हुए, हम उसकी सजा को बदलकर छूट के लाभ के साथ 20 साल करना उचित समझते हैं. इस प्रकार, याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार किया जाता है। </p>
<p>अपने फैसले में, शीर्ष अदालत ने 'आनुपातिकता के सिद्धांत' का हवाला दिया और कहा कि सजा ऐसी होनी चाहिए जो अपराध को रोकने, समाज की सुरक्षा करने और दोषी के सुधरने की संभावना के बीच एक सही संतुलन बनाए रखे. पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि इस मामले में दोषी का पहले का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है. जब यह अपराध हुआ तब उसकी उम्र केवल 25 साल थी. इतनी कम उम्र होने के कारण उसके सुधरने की पूरी गुंजाइश है। </p>
<p>कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार ने रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया जिससे यह साबित हो कि इस व्यक्ति का सुधरना नामुमकिन है. साथ ही, सरकार दोषी की इस दलील को भी नहीं काट सकी कि जेल में बिताए गए पिछले लगभग 10 सालों (छूट मिलाकर) के दौरान उसका आचरण और व्यवहार बेहद अच्छा रहा है। </p>
<p>पीठ ने कहा कि चाहे जो भी हो, वह इस तथ्य से आंखें नहीं मूंद सकती कि यह अपराध, जैसा कि पहले ही कहा जा चुका है, बेहद जघन्य है और यह न केवल पीड़िता के खिलाफ बल्कि पूरे समाज के खिलाफ है. पीठ ने कहा कि यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि जिस धारा (आईपीसी की धारा 376D) के तहत अपीलकर्ता को सजा सुनाई गई है, उसे 2013 के आपराधिक कानून संशोधन (2013 का अधिनियम 13) के जरिए बदला गया था. यह सख्त कानून राजधानी की सड़कों पर हुई भयावह 'निर्भया' घटना के बाद लाया गया था। </p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने 2016 में दुष्कर्म से जुड़े एक मामले में दोषी करार दिए गए व्यक्ति की उम्रकैद की सजा सोमवार को घटाकर 20 साल जेल की सजा में तब्दील कर दी। शीर्ष अदालत ने दोषी व्यक्ति को छूट का लाभ देते हुए कहा कि उसमें सुधार की गुंजाइश है, क्योंकि उसने यह अपराध तब किया था, जब वह महज 25 साल का था।</p>
<p>न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने इस बात पर गौर किया कि याचिकाकर्ता (दोषी व्यक्ति) का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जेल में उसका आचरण भी अच्छा रहा है। पीठ ने कहा, 'मौजूदा मामले में दोषी याचिकाकर्ता का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है; अपराध के समय उसकी उम्र महज 25 साल थी; कम उम्र को देखते हुए माना जा सकता है कि उसमें सुधार की गुंजाइश है।'</p>
<p><strong>अच्छे आचरण का जिक्र</strong><br>
उसने कहा, 'राज्य सरकार ने न तो रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ भी पेश किया है, जिससे साबित हो सके कि उसमें सुधार की गुंजाइश नहीं है। न ही उसने याचिकाकर्ता की इस दलील का खंडन किया है कि दोषसिद्धि के बाद लगभग दस वर्षों की अवधि में उसका आचरण अच्छा रहा है।'</p>
<p><strong>क्या मिली थी सजा</strong><br>
निचली अदालत ने व्यक्ति को उसके शेष जीवनकाल के लिए कठोर कारावास की सजा सुनाई थी और उसे पीड़िता को 25,000 रुपये का <strong>जुर्माना देने का भी निर्देश दिया था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था।</strong></p>
<p><strong>2 लोगों पर थे आरोप</strong><br>
पीड़िता ने राष्ट्रीय राजधानी के आईपी एस्टेट पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसने दिल्ली रेलवे स्टेशन से रात में रिक्शा लिया था, लेकिन चालक उसे उसके घर छोड़ने के बजाय एक सुनसान जगह पर ले गया, जहां एक व्यक्ति पहले से मौजूद था। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि दोनों व्यक्तियों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। शिकायत के आधार पर 27 सितंबर 2016 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी।</p>]]> </content:encoded>
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<title>ITR Filing Last Date Changed: 31 जुलाई नहीं, जानिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने की नई आखिरी तारीख</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  अगर आप यह सोच रहे हैं कि इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) प करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है, तो पहले यह अपडेट जरूर जान लें। कुछ टैक्सपेयर्स के लिए सरकार ने ITR भरने की डेडलाइन 31 अगस्त 2026 कर दी है। खास बात यह है कि अगर आपने पिछले फाइनेंशियल ईयर … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 16:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ITR, Filing, Last, Date, Changed:, जुलाई, नहीं, जानिए, इनकम, टैक्स, रिटर्न, भरने, की, नई, आखिरी, तारीख</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p> अगर आप यह सोच रहे हैं कि इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) प करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है, तो पहले यह अपडेट जरूर जान लें। कुछ टैक्सपेयर्स के लिए सरकार ने ITR भरने की डेडलाइन 31 अगस्त 2026 कर दी है। खास बात यह है कि अगर आपने पिछले फाइनेंशियल ईयर में सिर्फ एक बार भी इंट्राडे ट्रेडिंग या फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में ट्रेड किया है, तो आप भी इस एक्स्ट्रा समय के हकदार हो सकते हैं।</p>
<p><strong>31 अगस्त 2026 तक फाइल करना है आईटीआर</strong><br>
फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख हर किसी के लिए 31 जुलाई नहीं है। अगर आपकी इनकम में बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली कमाई शामिल है और आपके अकाउंट का टैक्स ऑडिट जरूरी नहीं है, तो आप 31 अगस्त 2026 तक आईटीआर फाइल कर सकते हैं।</p>
<p>नए नियम के मुताबिक अगर आपने पूरे साल में सिर्फ एक बार भी इंट्राडे शेयर ट्रेडिंग की है या फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में एक भी ट्रेड किया है, तो इनकम टैक्स विभाग आपको बिजनेस इनकम वाला टैक्सपेयर मानता है। ऐसे में आपकी ITR फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई की बजाय 31 अगस्त हो जाती है।</p>
<p>टैक्स नियमों के अनुसार इंट्राडे ट्रेडिंग से होने वाला फायदा या नुकसान स्पेकुलेटिव बिजनेस इनकम माना जाता है। इस इनकम पर सामान्य टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है और इससे होने वाले नुकसान को केवल स्पेकुलेटिव मुनाफे से ही एडजस्ट किया जा सकता है। वहीं, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग से होने वाली आय या नुकसान को नॉन-स्पेकुलेटिव बिजनेस इनकम माना जाता है। भले ही इसमें शेयरों की डिलीवरी नहीं होती, लेकिन इनकम टैक्स कानून के तहत इसे बिजनेस इनकम की केटेगरीे में रखा जाता है।</p>
<p><strong>कौन फाइल कर सकता है 31 अगस्त तक आईटीआर?</strong><br>
वित्त अधिनियम 2026 के तहत ऐसे टैक्सपेयर्स, जिनकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से है और जिन्हें टैक्स ऑडिट कराने की जरूरत नहीं है, उन्हें आईटीआर दाखिल करने के लिए 31 अगस्त 2026 तक का समय दिया गया है। इसका फायदा केवल ट्रेडर्स को ही नहीं बल्कि चार्टेर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर, वकील, आर्किटेक्ट, इंजीनियर और कंसल्टेंट जैसे प्रोफेशनल्स को भी मिलेगा। बशर्ते, उनका इनकम टैक्स ऑडिट लिमिट से कम हो।</p>
<p><strong>31 अक्टूबर तक फाइल कर सकते हैं आईटीआर</strong><br>
अगर आपने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग करते है, तो सबसे पहले अपना टर्नओवर जरूर निकालें। यदि आपका टर्नओवर टैक्स ऑडिट की तय सीमा से अधिक है, तो आपको ऑडिट कराना होगा। ऐसे मामलों में ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 होगी। इसलिए केवल सैलरी मिलने की वजह से यह न मानें कि आपकी आखिरी तारीख 31 जुलाई ही है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>सिक्किम सुरंग हादसा: 10 मजदूरों की मौत, NDRF बोली&#45; अंदर कितने लोग फंसे, अब भी स्पष्ट नहीं</title>
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<description><![CDATA[ गंगटोक सिक्किम में लैंडस्लाइड के बाद निर्माणाधीन समारदुंग सुरंग का एंट्री गेट बंद होने के बाद सोमवार से ही कई मजदूर अंदर फंसे हुए हैं. इस बीच टनल में मीथेन गैस रिसाव होने की वजह से हालात और भी खराब हो गए. अब तक 10 मजदूरों की मौत हो चुकी है. वहीं 12 मजदूरों को … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 15:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>सिक्किम, सुरंग, हादसा:, मजदूरों, की, मौत, NDRF, बोली-, अंदर, कितने, लोग, फंसे, अब, भी, स्पष्ट, नहीं</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गंगटोक</strong></p>
<p>सिक्किम में लैंडस्लाइड के बाद निर्माणाधीन समारदुंग सुरंग का एंट्री गेट बंद होने के बाद सोमवार से ही कई मजदूर अंदर फंसे हुए हैं. इस बीच टनल में मीथेन गैस रिसाव होने की वजह से हालात और भी खराब हो गए. अब तक 10 मजदूरों की मौत हो चुकी है. वहीं 12 मजदूरों को जिंदा बाहर निकाला गया है. NDRF ने कहा कि अब तक 10 शवों को बाहर निकाला गया है. हमें ठीक-ठीक नहीं पता कि अंदर कितने लोग और फंसे हैं. टनल लगभग 1.5 किलोमीटर लंबी है. अंदर गैस होने की वजह से हम ऑक्सीजन मास्क लगाकर काम कर रहे हैं. फंसे लोगों को बाहर निकालने क लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सिक्किम पुलिस और अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं की टीमें युद्धस्तर पर बचाव अभियान जारी रखे हुए हैं. हालांकि सही संख्या की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है. राहत और बचाव कार्य के दौरान कुछ कर्मियों के घायल होने की भी खबर है। </p>
<p><strong>कुछ रेस्क्यू वर्कर्स भी बेहोश</strong><br>
 नामची जिले के समरडुंग, झोलुंगे में NHPC के तीस्ता स्टेज VI हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की निर्माणाधीन सुरंग में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू टीमों को काफी दिक्कतें आ रही हैं. टनल के अंदर गैस रिसाव की वजह से भीतर घुसे कुछ रेस्क्यू वर्कर्स भी चक्कर खाकर बेहोश हो गए.लगातार बारिश और मुश्किल हालात के बावजूद, मुख्यमंत्री लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और संबंधित <strong>विभागों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि चल रहे बचाव अभियान के लिए सभी जरूरी संसाधन लगाए जाएं। </strong></p>
<p><strong>टनल में फंसे 10  मजदूरों की मौत</strong><br>
राहत और बचाव कार्य सोमवार से ही जारी है. 10  मजदूरों की मौत की जानकारी जिला प्रशासन की तरफ से दी गई है. मृतकों के शवों को सिंगतम जिला अस्पताल, STNM अस्पताल (गंगटोक) और नामची जिला अस्पताल ले जाया गया है. SSDMA हालात पर बारीकी से नजर रखे हुए है। </p>
<p><strong>मीथेन गैस जमा हो गई थी सुरंग के अंदर</strong></p>
<p>इंडिया टुडे ने अधिकारियों के हवाले से खबर  दी है. इसके मुताबिक, सुरंग के अंदर करीब 1.5 किलोमीटर की दूरी पर मीथेन गैस जमा हो गई थी. माना जा रहा है कि यह गैस जमीन के अंदर मौजूद चट्टानों या परतों से प्राकृतिक रूप से निकल रही थी. गैस को बाहर निकालने की कोशिश के दौरान धमाका हो गया, जिससे भूस्खलन हुआ और सुरंग का एक हिस्सा मलबे से बंद हो गया. हादसे के बाद कुछ मजदूर किसी तरह बाहर निकलने में कामयाब रहे, लेकिन कई मजदूर सुरंग के अंदर ही फंस गए। </p>
<p>जिला प्रशासन को सोमवार (20 जुलाई) दोपहर करीब 3:40 बजे इस हादसे की जानकारी मिली. सूचना मिलते ही राहत और बचाव टीमों को मौके पर भेजा गया। </p>
<p><strong>टनल में कैसे फंसे मजदूर?</strong><br>
निर्माणाधीन समारदुंग सुरंग में यह हादसा सोमवार को दोपहर करीब 3 बजकर 9 मिनट पर हुआ. यह सुरंग तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना के तहत पटेल इंजीनियरिंग द्वारा बनाई जा रही है. टनल के भीतर अचानक लैंडस्लाइड हुआ, जिससे रास्ता बंद हो गया और काम कर रहे मजदूरों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला. हालात तब और भी खराब हो गए जब सुरंग के भीतर मीथेन गैस का रिसाव शुरू हो गया, जिसकी वजह से बचावकर्मियों का अंदर घुसना बेहद जोखिम भरा हो गया। </p>
<p>
<strong>NDRF-SDRF टीमें राहत और बचाव कार्यों में जुटीं</strong><br>
नमची जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग ने बताया कि जैसे ही घटना की सूचना मिली सिलिगुड़ी और पाक्योंग में तैनात NDRF-SDRF टीमों को तुरंत अलर्ट कर मौके पर बुलाया गया. अग्निशमन विभाग और पुलिसकर्मियों ने बिना विशेष सुरक्षा उपकरणों के दो बार सुरंग में घुसने <strong>की कोशिश की, लेकिन अंदर के खतरनाक हालात की वजह से वे लोग टनल में फंसे लोगों तक नहीं पहुंच पाए। </strong></p>
<p><strong>गैस लीक की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कतें</strong><br>
 सुरंग के भीतर मीथेन गैस बहुत ज्यादा लीक होने की वजह से बचाव अभियान बहुत ही चुनौतीपूर्ण हो गया है.  पहली एनडीआरएफ टीम ने उन अग्निशमन कर्मियों को सुरक्षित बाहर निकाला, जो घटना के बाद अंदर गए थे. इसके बाद दूसरी एनडीआरएफ टीम ने सुरंग में दाखिल होकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। </p>
<p><strong>टनल में तेज विस्फोट की आवाज के बाद हादसा</strong><br>
लैंडस्लाइड की सही वजह का पता अब तक नहीं चल सका है. जिला कलेक्टर ने बताया कि सुरंग से बाहर निकले कुछ मजदूरों ने बताया कि उन्होंने अंदर से विस्फोट जैसी तेज आवाज सुनी थी, जिसके बाद वे तुरंत बाहर भागे. हालांकि कई मजदूर अंदर वही रह गए।  </p>]]> </content:encoded>
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<title>यूक्रेन के पास मिसाइल हमले में 4 भारतीयों की मौत, MV Golden जहाज बना निशाना</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली समंदर में एक जहाज पर हुए हमले में 4 भारतीय क्रू मेंबर्स की मौत हो गई है. जबकि एक भारतीय गंभीर रूप से घायल हो गया है. भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना की जानकारी दी है. ये हमला MV गोल्डन लियो नाम के जहाज पर हुआ है. ये जहाज यूक्रेन के … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 13:45:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>यूक्रेन, के, पास, मिसाइल, हमले, में, भारतीयों, की, मौत, Golden, जहाज, बना, निशाना</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>समंदर में एक जहाज पर हुए हमले में 4 भारतीय क्रू मेंबर्स की मौत हो गई है. जबकि एक भारतीय गंभीर रूप से घायल हो गया है. भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना की जानकारी दी है. ये हमला MV गोल्डन लियो नाम के जहाज पर हुआ है. ये जहाज यूक्रेन के ओडेशा बंदरगाह से निकल रहा था. तभी इस पर हमला हुआ। </p>
<p>भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार 19 जुलाई 2026 को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से निकलते समय MV GOLDEN LEO नाम के एक जहाज पर हमला हुआ. यूक्रेन का दावा है कि ये हमला रूस ने मिसाइलों से किया है. घटना के समय जहाज़ पर 17 क्रू सदस्य मौजूद थे, जिनमें 5 भारतीय नागरिक भी शामिल थे. इनमें से 4 भारतीयों की मौत हो गई है. जबकि एक भारतीय गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। </p>
<p>विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन में हमारा मिशन स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है और प्रभावित लोगों को हर संभव मदद पहुंचाने की पूरी कोशिश कर रहा है. विदेश मंत्रालय हम मारे गए भारतीय नागरिकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और घायल भारतीय नागरिक के जल्द और पूरी तरह ठीक होने की कामना करते हैं। </p>
<p>विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ऐसे हमलों की निंदा करता है और दोहराता है कि कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना, निर्दोष आम नागरिकों (क्रू सदस्यों) की जान जोखिम में डालना या नेविगेशन और व्यापार की आज़ादी में बाधा डालना निंदनीय है और ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। </p>
<p>ये जहाज यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से अनाज लेकर निकल रहा था. तभी इसे निशाना बनाया गया. विदेश मंत्रालय ने बताया कि ये जहाज पश्चिम अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ के झंडे के तहत समुद्र में चल रहा था। </p>
<p><strong>मरने वालों में एक शख्स केरल का</strong><br>
भारतीयों में मरने वालों में एक शख्स केरल का था. 26 साल के इस शख्स का नाम अखिल जोयन है. जो कासरगोड ज़िले के वेल्लारिक्कुंडु के रहने वाले जोयन और सैली का इकलौता बेटा था। </p>
<p>बलाल ग्राम पंचायत के वेल्लारिक्कुंडु वार्ड के सदस्य शोबी जोसेफ ने पीटीआई को बताया कि परिवार को सोमवार शाम शिपिंग कंपनी से अखिल की मौत के बारे में एक ईमेल मिला।  </p>
<p><strong>जहाज पर मिसाइलों से हुआ हमला</strong><br>
यूक्रेन के अधिकारियों के मुताबिक रविवार को ओडेसा से निकलने के कुछ ही देर बाद मक्का ले जा रहे कार्गो जहाज़ 'गोल्डन लियो' पर रूस की तीन क्रूज़ मिसाइलें गिरीं। </p>
<p>यूक्रेन की नौसेना ने बताया कि हमले के बाद जहाज़ में आग लग गई. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार तट के पास एक जहाज़ से घना धुआं उठता देखा गया, जिसकी पहचान बाद में 'गोल्डन लियो' के तौर पर हुई. इसके क्रू में भारत और सीरिया के सदस्य शामिल थे। </p>
<p>यूक्रेन के समुद्री बंदरगाह प्राधिकरण ने बताया कि रात भर खोज और बचाव अभियान चलता रहा. इस हमले में नौ क्रू सदस्य और एक समुद्री पायलट की मौत हो गई, जबकि 17 क्रू सदस्यों में से आठ को बचा लिया गया। </p>
<p>LSEG के शिपिंग डेटा के अनुसार, 'गोल्डन लियो' मुंबई स्थित 'ओशन ग्रेस शिपिंग लिमिटेड' का है. इस जहाज़ का प्रबंधन 'फ्रेंड्स शिपिंग कंपनी SA' करती है। </p>
<p><strong>काला सागर फिर से लड़ाई का मुख्य केंद्र बना</strong><br>
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब रूस और यूक्रेन काला सागर और आज़ोव सागर में सैन्य गतिविधियां तेज़ कर रहे हैं, जिससे कमर्शियल शिपिंग और अनाज के निर्यात पर लगातार खतरा बढ़ रहा है। </p>
<p>2022 में रूस के यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमले के बाद काला सागर इस संघर्ष के सबसे ज़्यादा विवादित इलाकों में से एक बन गया. हालांकि अंतरराष्ट्रीय समझौतों से कुछ समय के लिए अनाज के निर्यात को फिर से शुरू करने और ग्लोबल फ़ूड मार्केट पर दबाव कम करने में मदद मिली थी, लेकिन फिर से शुरू हुई लड़ाई ने दुनिया के सबसे व्यस्त एग्रीकल्चरल शिपिंग रूट में से एक को फिर से बाधित कर दिया है। </p>
<p>यूक्रेन ने रूस के एनर्जी इंफ़्रास्ट्रक्चर और तेल टैंकरों को लगातार निशाना बनाया है, जबकि रूस ने यूक्रेन के बंदरगाहों, फ़्यूल फ़ैसिलिटीज़ और कार्गो जहाज़ों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज़ कर दिए हैं। </p>
<p> </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>NEET पर पीएम मोदी का बड़ा बयान, बोले&#45; पेपर लीक घोर पाप है, दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली प्रधानमंत्री ने संसदीय दल की बैठक में नीट परीक्षा पेपर लीक मामले पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई की और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया गया. पेपर लीक के बाद दोबारा परीक्षा भी कराई गई. प्रधानमंत्री ने इस पूरे मामले को &#039;घोर पाप&#039; बताया … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 11:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ने संसदीय दल की बैठक में नीट परीक्षा पेपर लीक मामले पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई की और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया गया. पेपर लीक के बाद दोबारा परीक्षा भी कराई गई. प्रधानमंत्री ने इस पूरे मामले को 'घोर पाप' बताया और कहा कि सभी राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा ताकि आगे कभी पेपर लीक जैसी घटना न हो। </p>
<p>सूत्रों के अनुसार, बैठक में प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि इस मामले में शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. उन्होंने बताया कि अब तक कुल 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. प्रधानमंत्री ने इस पर जोर दिया कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सबसे सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी हरकत करने की हिम्मत न करे। </p>
<p>प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों में गुस्सा देखा गया. लाखों छात्रों का भविष्य इस परीक्षा से जुड़ा है, इसलिए पेपर लीक की खबर सामने आते ही यह मुद्दा बड़ा राष्ट्रीय विषय बन गया। </p>
<p>सरकार ने इसके बाद जांच एजेंसियों को मामले की तह तक जाने का निर्देश दिया, जिसके नतीजे में गिरफ्तारियां हुईं और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हुई। </p>
<p>प्रधानमंत्री ने संसदीय दल की बैठक में यह भी कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा कोई भी मामला हल्के में नहीं लिया जा सकता. उन्होंने राज्य सरकारों से अपील की कि परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाया जाए ताकि पेपर लीक जैसी घटनाएं दोबारा न हों। सरकार की तरफ से यह संदेश साफ है कि परीक्षा से जुड़े किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को सख्त सजा दी जाएगी। </p>
<p><strong>छात्रों के हित हमारे लिए सबसे ऊपर</strong></p>
<p>पीएम नरेंद्र मोदी ने आज एनडीए मंगल मिलन समारोह में नीट परीक्षा से लेकर हर मुद्दे पर बोले. उन्होंने कहा कि पेपरलीक पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि छात्रों के हित हमारे लिए सबसे ऊपर हैं. गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर सीजेपी नीट परीक्षा में पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन कर रही है। </p>
<p>पीएम मोदी ने एनडीए संसदीय दल को संबोधित करते हुए कई देशों के साथ जो एग्रीमेंट हुए हैं उसमें किसानों के हितों का खास ध्यान रखा गया है. उन्होंने कहा कि जिन भी देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हुए हैं उसमें किसानों के हितों का पूरा ख्याल रखा गया है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>LPG की जगह एथेनॉल पर बनेगा खाना! सरकार जल्द ला सकती है सब्सिडी स्कीम</title>
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<description><![CDATA[ नईदिल्ली  एथेनॉल वाले पेट्रोल से कथित रूप से गाड़ियों के इंजन खराब होने की खबरों के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। आने वाले दिनों में एथेनॉल आपके किचन में एंट्री कर सकता है। खाना LPG या PNG की जगह एथेनॉल वाले चूल्हे पर पकता नजर आ सकता है। इसके लिए पेट्रोलियम और … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 10:45:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नईदिल्ली </strong><br>
एथेनॉल वाले पेट्रोल से कथित रूप से गाड़ियों के इंजन खराब होने की खबरों के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। आने वाले दिनों में एथेनॉल आपके किचन में एंट्री कर सकता है। खाना LPG या PNG की जगह एथेनॉल वाले चूल्हे पर पकता नजर आ सकता है। इसके लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय जल्द ही एक नई नीति लाने जा रहा है, जिसमें एथेनॉल को खाना पकाने वाला मुख्य ईंधन बनाया जाएगा।</p>
<p>द इकनॉमिक टाइम्स ने यह जानकारी उद्योग जगत से जुड़े अधिकारियों के हवाले से दी है। इस नीति के तहत एथेनॉल को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी देने की शर्तों और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।</p>
<p>एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह नीति एलपीजी के साथ-साथ घरेलू खाना पकाने में एथेनॉल को अपनाने में मदद करेगी। उम्मीद है कि यह नीति सितंबर तक तैयार हो सकती है। इस बारे में मंत्रालय से कोई जवाब नहीं मिला है।</p>
<p><strong>2 लाख करोड़ रुपये की हो सकती है बचत</strong><br>
फरवरी में जारी 'इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट' की रिपोर्ट 'इंडियाज क्लीन कुकिंग शिफ्ट' के अनुसार, ई-कुकिंग और बायोगैस की ओर रुख करने से भारत को 2050 तक एलपीजी सब्सिडी में 2 लाख करोड़ रुपये (24 अरब डॉलर) से अधिक की बचत हो सकती है।</p>
<p><strong>क्यों जरूरी है एथेनॉल का यह कदम?</strong><br>
एथेनॉल पर्यावरण के अनुकूल एक ऐसा ईंधन है, जो गन्ना, अनाज और अन्य सुगर वाली फसलों के फर्मेंटेशन से बनता है। इस साल अप्रैल में 'इकनॉमिक टाइम्स' ने खबर दी थी कि सरकार के कहने पर एथेनॉल से चलने वाले चूल्हों (स्टोव) का परीक्षण किया जा रहा है। एथेनॉल को खाना पकाने में इस्तेमाल करने से भारत की एलपीजी पर निर्भरता कम होगी और ईंधन आयात पर होने वाला खर्च भी घटेगा।</p>
<p>उद्योग के एक अन्य अधिकारी के अनुसार, एथेनॉल को बढ़ावा देने के लिए सरकार एक बार का निवेश या फिर लगातार वित्तीय सहायता यानी सब्सिडी दे सकती है।</p>
<p><strong>भारत में एथेनॉल की भरमार<br>
एथेनॉल को खाना पकाने के ईंधन के रू</strong>प में बढ़ावा देने का एक बड़ा कारण यह है कि भारत में इसकी भरमार है। देश की एथेनॉल उत्पादन क्षमता सालाना 20 अरब लीटर से अधिक हो गई है और इस वित्त वर्ष में इसमें 4 अरब लीटर और जुड़ने वाला है।</p>
<p>सरकार के E20 ब्लेंडेड (पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाना) में लगभग 11 अरब लीटर एथेनॉल का उपयोग होता है, जबकि शराब, फार्मास्यूटिकल और रसायन कंपनियां 3 से 3.5 अरब लीटर का उपयोग करती हैं। इस हिसाब से करीब 7 अरब लीटर एथेनॉल बिना इस्तेमाल के बचा रहता है।</p>
<p><strong>पड़ोसी देशों में भी होगा निर्यात</strong></p>
<p>इतनी अधिक मात्रा को देखते हुए भारत पड़ोसी देशों नेपाल, बांग्लादेश और इंडोनेशिया को भी एथेनॉल निर्यात कर सकता है, क्योंकि इन देशों में 10% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य है, लेकिन उनके पास पर्याप्त कच्चा माल और आसवन क्षमता नहीं है।</p>
<p><strong>कैसे होगी शुरुआत?</strong><br>
ऑयल मार्केटिंग कंपनियां भी एथेनॉल आधारित चूल्हों पर रिसर्च एंड डेवलपमेंट का काम शुरू कर दी हैं। उद्योग अधिकारियों ने बताया कि इस योजना को शुरू करने के लिए तेल कंपनियों को एथेनॉल एटीएम लगाने को कहा जा सकता है, जहां से लोग गैलनों में एथेनॉल खरीद सकें। ये एटीएम तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर स्थापित किए जा सकते हैं।</p>
<p><strong>एलपीजी पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम</strong><br>
एक उद्योग अधिकारी ने कहा कि पश्चिम एशिया युद्ध ने भारत की एलपीजी सप्लाई को कितना प्रभावित किया, यह हम सभी ने देखा। अतिरिक्त एथेनॉल क्षमता को एलपीजी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करना एक अच्छा विकल्प है, जिससे एलपीजी आयात कम हो सकेगा।</p>
<p>हालांकि पश्चिम एशिया युद्ध के बाद से भारत ने एलपीजी सोर्सिंग में विविधता लाई है, फिर भी देश एलपीजी आयात के लिए खाड़ी देशों पर बहुत निर्भर है, और इसका अधिकांश हिस्सा होर्मुज से होकर गुजरता है। सरकारी तेल कंपनियां ईंधन सुरक्षा बढ़ाने के लिए 30 दिनों की एलपीजी स्ट्रेटजिक रिजर्व स्कीम भी तैयार कर रही हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<title>जापान की E&#45;10 में देरी तो भारत लाएगा देसी बुलेट ट्रेन B&#45;28, सरकार ने बताई स्पीड और पूरा प्लान</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने तस्वीर साफ कर दी है कि अगले साल से हाई स्पीड रेल पटरी पर जरूर दौड़ेगी. जब तक जापान से E10 सीरीज की शिंकानसेन ट्रेन मिलने में देरी के कारण भारत 2027 से अपनी देसी बुलेट ट्रेन B-28 हाई स्पीड ट्रैक … ]]></description>
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<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 10:00:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने तस्वीर साफ कर दी है कि अगले साल से हाई स्पीड रेल पटरी पर जरूर दौड़ेगी. जब तक जापान से E10 सीरीज की शिंकानसेन ट्रेन मिलने में देरी के कारण भारत 2027 से अपनी देसी बुलेट ट्रेन B-28 हाई स्पीड ट्रैक पर दौड़ाएगा. सूत्रों के अनुसार, मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना को लेकर भारत और जापान के बीच बातचीत अच्छी प्रगति पर है. जापान ने परियोजना के लिए नई पीढ़ी की E10 सीरीज हाई स्पीड ट्रेन देने पर सहमति जताई है, लेकिन E10 सीरीज ट्रेन अभी डेवलपमेंट के स्टेज में है. ये ट्रेनें 2030 के शुरुआती वर्षों में भारत को मिलने के आसार हैं। </p>
<p><strong>    B-28 का निर्माण कार्य बेंगलुरु में बीईएमएल कर रहा<br>
    8 कोच की इस ट्रेन में 560 यात्रियों के बैठने की क्षमता<br>
    250 से 280 किमी प्रति घंटे की रफ्तार इस बुलेट ट्रेन की</strong></p>
<p><strong>भारत में बुलेट ट्रेन कब चलेगी</strong><br>
बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और सरकार ने सूरत से बिलिमोरा तक इसका पहला सेक्शन 15 अगस्त 2027 में शुरू करने की योजना बनाई है. चूंकि E10 सीरीज ट्रेन 2030 के बाद उपलब्ध होगी, इसलिए भारत और जापान ने शुरुआती संचालन भारतीय हाई स्पीड ट्रेन से शुरू करने पर मुहर लगाई है. इसका उद्देश्य है कि परियोजना को बिना देरी के जल्द से जल्द यात्रियों के लिए शुरू किया जा सके. दोनों देशों की तैयारी है कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना का संचालन जल्द शुरू हो और यात्रियों को इसका लाभ मिले। </p>
<p>
<strong>मेड इन इंडिया बुलेट ट्रेन क्या है</strong><br>
रिपोर्ट के अनुसार, भारत खुद की डिजाइन की गई मेड इन इंडिया बुलेट ट्रेन का इस्तेमाल करेगा. जापान 2030 से पहले भारत को E10 शिन्कान्सेन ट्रेनें उपलब्ध नहीं करा सकता, ऐसे में यह फैसला लिया गया है. जापान अभी तक E10 ट्रेनों, सिग्नलिंग सिस्टम और ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर (OCC) सिस्टम के लिए फाइनल ऑफर नहीं दे पाया है, क्योंकि यह ट्रेन अभी भी जापान में डिजाइनिंग के चरण में है। </p>
<p><strong>जापान की बुलेट ट्रेन की स्पीड</strong><br>
जापान में पुरानी E5 सीरीज की ट्रेनों को धीरे-धीरे हटाया जा रहा है. ताइवान और दक्षिण कोरिया के अनुभवों और फिजिबिलिटी रिपोर्ट के आधार पर भारत ने बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के पहले सेक्शन को 15 अगस्त 2027 तक शुरू करने का ऐलान किया है. अगर भारत जापान की E10 ट्रेन का इंतजार करेगा तो प्रोजेक्ट 2034 तक खिंच सकता है. लिहाजा हाईस्पीड रेल प्रोजेक्ट को अभी भारत में तैयार ट्रेनों से ही समय पर चलाने का फैसला दोनों देशों ने लिया है. जापान की बुलेट ट्रेन 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती हैं। </p>
<p><strong>मेक इन इंडिया के B-28 कोच</strong><br>
मेक इन इंडिया के तहत रेलवे देश में ही हाई स्पीड ट्रेन B-28 के कोच बना रहा है. इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) के साथ मिलकर 280 किमी प्रति घंटे की स्पीड वाली स्वदेशी हाई स्पीड ट्रेन सेट डिजाइन और सेट तैयार हो रहे हैं. इससे देश में भविष्य के हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट के लिए जरूरी टूलिंग, टेस्टिंग और प्रोडक्शन का की राह खुलेगी. भारतीय कंपनियां हाई स्पीड रेल के जरूरी पुर्जे, निर्माण के उपकरण और स्लैब ट्रैक सिस्टम भी बना रही हैं. बेंगलुरु में आदित्य नाम के स्पेशल कॉम्प्लेक्स में B-28 कोच बनाए जा रहे हैं. IIT संस्थानों की रिसर्च, ट्रेनिंग और जापानी इंजीनियरिंग के जरिये भारत की हाई स्पीड रेल आत्मनिर्भर हो रही है। </p>
<p><strong>सिग्नलिंग सिस्टम में बदलाव </strong><br>
भारत की अपनी बुलेट ट्रेन अब यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ETCS) के इंटरनेशनल सिग्नलिंग सिस्टम पर चलेगी. ऐसा सिस्टम दक्षिण कोरिया, यूरोपीय देशों, ताइवान, चीन में भी इस्तेमाल होता है. रैपिड रेल यानी नमो भारत ट्रेन भी भी इसी सिस्टम पर चलती है। </p>
<p><strong>इंडिया शिन्कान्सेन पर सवाल </strong><br>
दरअसल, जापान की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता और पूर्व न्याय मंत्री ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए थे. उन्होंने दावा किया कि भारत के कारण प्रोजेक्ट में देरी हुई. उन्होंने कहा था कि सिग्नलिंग सिस्टम से जापान को बाहर कर देना 'इंडिया शिन्कान्सेन' की नाकामी को दिखाता है. लेकिन सच्चाई ये है कि 508 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट में सिविल कंस्ट्रक्शन का काम भारत पहले से खुद कर रहा था. अब जापान से ट्रेन और सिग्नलिंग न लेकर भारत अपने दम पर स्वदेशी बुलेट ट्रेन तकनीक से इसे 2027 तक ट्रैक पर लाने की तैयारी में है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>यूट्यूबर गुलशन पाहुजा को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, जज पर गंभीर आरोप लगाने पर सख्त टिप्पणी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका के खिलाफ बिना किसी ठोस सबूत के भ्रष्टाचार के आरोप लगाने पर सोमवार को कड़ी नाराजगी जताई. अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में न्यायिक अधिकारियों पर लगाए गए बेबुनियाद आरोप उनके पूरे करियर को प्रभावित कर सकते हैं. शीर्ष अदालत ने साफ किया कि न्यायिक भ्रष्टाचार … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 22:45:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>यूट्यूबर, गुलशन, पाहुजा, को, सुप्रीम, कोर्ट, की, फटकार, जज, पर, गंभीर, आरोप, लगाने, पर, सख्त, टिप्पणी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका के खिलाफ बिना किसी ठोस सबूत के भ्रष्टाचार के आरोप लगाने पर सोमवार को कड़ी नाराजगी जताई. अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में न्यायिक अधिकारियों पर लगाए गए बेबुनियाद आरोप उनके पूरे करियर को प्रभावित कर सकते हैं. शीर्ष अदालत ने साफ किया कि न्यायिक भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप तथ्यों और सबूतों के आधार पर ही लगाए जाने चाहिए, न कि महज आरोपों के रूप में। </p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने यूट्यूबर गुलशन पाहुजा की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की. पाहुजा ने दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से आपराधिक अवमानना के मामले में सुनाई गई छह महीने जेल की सजा को चुनौती दी है। </p>
<p><strong>‘याचिकाकर्ता की मंशा को लेकर सहानुभूति’</strong><br>
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यूट्यूबर से कहा, ‘आप बिना किसी सबूत के न्यायिक अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हैं. क्या आपको पता है कि सोशल मीडिया पर ऐसे आरोपों का क्या असर होता है? इससे किसी न्यायिक अधिकारी की छवि धूमिल होती है और उसका पूरा करियर दांव पर लग सकता है. उन्हें ऐसे आरोपों का बोझ जीवनभर उठाना पड़ता है। </p>
<p>हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि उसे याचिकाकर्ता की मंशा को लेकर सहानुभूति है, लेकिन न्यायिक भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप बिना पर्याप्त साक्ष्यों के नहीं लगाए जा सकते. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गैरजिम्मेदाराना आरोप और प्रमाणित भ्रष्टाचार के आरोपों में बड़ा अंतर है। <strong>पाहुज ने किया सरेंडर</strong><br>
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि गुलशन पाहुजा दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद आत्मसमर्पण कर चुके हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब इस याचिका पर तत्काल सुनवाई का सवाल नहीं रह जाता और यह याचिका इस स्तर पर निष्प्रभावी हो गई है। </p>
<p>अदालत ने यह भी कहा कि अगर सजा के निलंबन या अन्य राहत की मांग करनी है तो याचिकाकर्ता को दिल्ली हाई कोर्ट का रुख करना चाहिए। </p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला?</strong><br>
दरअसल गुलशन पाहुजा ‘Fight 4 Judicial Reforms’ नाम से यूट्यूब चैनल चलाते हैं. आरोप है कि उन्होंने अपने चैनल पर अपलोड किए गए वीडियो में न्यायपालिका और कई न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ अपमानजनक और भ्रष्टाचार संबंधी टिप्पणियां की थीं. इसी मामले में तीन न्यायिक अधिकारियों ने दिल्ली हाई कोर्ट में आपराधिक अवमानना की याचिका दायर की थी। </p>
<p>जांच के दौरान यह भी सामने आया कि उनके चैनल पर दो वकीलों के इंटरव्यू प्रसारित किए गए थे, जिनमें न्यायपालिका को लेकर विवादित टिप्पणियां की गई थीं. बाद में दोनों वकीलों ने अदालत से बिना शर्त माफी मांग ली. उन्होंने कहा कि वीडियो को जिस रूप में प्रकाशित किया गया, उसकी उन्हें जानकारी नहीं थी. हाई कोर्ट ने उनकी माफी स्वीकार कर उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी। </p>
<p>हालांकि, गुलशन पाहुजा ने अदालत में अपने बचाव में कहा कि उनका मकसद किसी जज को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना नहीं था, बल्कि न्यायिक सुधारों की मांग उठाना था. इसके बावजूद दिल्ली हाई कोर्ट ने माना कि इस तरह की टिप्पणियां न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं और भविष्य में ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए कड़ा संदेश देना जरूरी है. इसी आधार पर हाई कोर्ट ने उन्हें आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराते हुए छह महीने के कारावास की सजा सुनाई थी। </p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान दोहराया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका इस्तेमाल किसी न्यायिक अधिकारी पर बिना सबूत गंभीर आरोप लगाने के लिए नहीं किया जा सकता. अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में ऐसे आरोपों के दूरगामी और गंभीर परिणाम हो सकते हैं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान पर बढ़ेगा दबाव? ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में भेजे 50 और फाइटर जेट, सैन्य हलचल तेज</title>
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<description><![CDATA[ न्यूयॉर्क    ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में अमेरिका ने अपनी हवाई ताकत तेजी से बढ़ा दी है. CENTCOM क्षेत्र यानी मिडिल ईस्ट में 50 से ज्यादा अतिरिक्त फाइटर जेट भेजे गए हैं. यह कदम ईरान पर हमलों को और तेज करने और क्षेत्र में तनाव बढ़ने की तैयारी का संकेत देता है. अमेरिका … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 21:45:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, पर, बढ़ेगा, दबाव, ट्रंप, ने, मिडिल, ईस्ट, में, भेजे, और, फाइटर, जेट, सैन्य, हलचल, तेज</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>न्यूयॉर्क</strong><br>
   ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में अमेरिका ने अपनी हवाई ताकत तेजी से बढ़ा दी है. CENTCOM क्षेत्र यानी मिडिल ईस्ट में 50 से ज्यादा अतिरिक्त फाइटर जेट भेजे गए हैं. यह कदम ईरान पर हमलों को और तेज करने और क्षेत्र में तनाव बढ़ने की तैयारी का संकेत देता है. अमेरिका अब ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को और कमजोर करने के लिए बड़े पैमाने पर हवाई अभियान चला सकता है। </p>
<p><strong>कौन से जेट और कहां से भेजे गए?</strong></p>
<p><strong>अमेरिका ने यूरोप से कई एयर बेस से जेट तैनात किए…</strong></p>
<p><strong>    आरएफ लेकेनहेथ से 15 F-35A और 12 F-15<br>
    एवयानो एयर बेस से 12 F-16<br>
    स्पैंगडाहलेम एयर बेस से 12 F-16</strong></p>
<p>न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि जर्मनी से F-16 और ब्रिटेन से F-35 भी भेजे जा रहे हैं. साथ में एरियल रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट भी भेजे गए, जो लंबी दूरी के हमलों के लिए जरूरी हैं। </p>
<p>ये तैनातियां शुक्रवार को जॉर्डन में ईरानी हमले से पहले शुरू हुई थीं. CENTCOM ने इन तैनातियों पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन यह स्पष्ट है कि अमेरिका क्षेत्र में अपनी हवाई श्रेष्ठता सुनिश्चित करना चाहता है। </p>
<p><strong>क्यों बढ़ा रहा है अमेरिका हवाई ताकत?</strong><br>
ईरान युद्ध अब नौवीं रात तक पहुंच चुका है. अमेरिका ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमलों और मिसाइल हमलों को रोकना चाहता है. ईरान ने जॉर्डन, कतर, बहरीन जैसे देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए. इनमें अमेरिकी सैनिकों के मारे गए और घायल हुए। </p>
<p>अमेरिका की यह तैनाती डिटरेंस की रणनीति है. F-35 जैसी स्टेल्थ जेट्स दुश्मन के राडार से बचकर हमला कर सकती हैं, जबकि F-15 और F-16 हमले और डिफेंस के लिए मजबूत हैं. एरियल रिफ्यूलिंग विमान इन जेट्स को लंबे समय तक उड़ान भरने में मदद करेंगे। </p>
<p>अमेरिका ईरान पर और सटीक हमले करने की तैयारी कर रहा है. इससे पहले भी अमेरिका ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल साइटों, कमांड सेंटर और बंदरगाहों पर हमले किए. अब ज्यादा जेट्स से हवाई हमलों की संख्या और तीव्रता बढ़ सकती है। </p>
<p>मिडिल ईस्ट में यह बढ़ती तैनाती पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर रही है. जॉर्डन में पहले ही अमेरिकी बेस निशाने पर आए. कतर के अल उदेद बेस और बहरीन की सुविधाएं भी प्रभावित हुईं. ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों से जवाब दिया, लेकिन अमेरिका की हवाई श्रेष्ठता उसे मुश्किल में डाल रही है। </p>
<p>ईरान का दावा है कि उसके पास अभी भी काफी मिसाइल स्टॉक बचा है. लेकिन लगातार अमेरिकी हमलों से उसके बुनियादी ढांचे – पुल, पानी के प्लांट, तेल निर्यात केंद्र को नुकसान पहुंचा है. होर्मुज में तेल जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक तेल कीमतें बढ़ रही हैं। </p>
<p><strong>आगे क्या होने वाला है?</strong><br>
रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह तैनाती सिर्फ बचाव नहीं, बल्कि आक्रामक रुख है. F-35 और F-15 जैसे एडवांस जेट्स ईरान की एयर डिफेंस को भेद सकती हैं. इससे ईरान पर दबाव बढ़ेगा और वह होर्मुज में अपनी रणनीति बदल सकता है। </p>
<p>दूसरी तरफ, ईरान ड्रोन-मिसाइल पर भरोसा कर रहा है. जॉर्डन हमला इसका उदाहरण है. लेकिन अमेरिका की बढ़ती हवाई ताकत के सामने ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. यह तैनाती क्षेत्रीय सहयोगी देशों – जॉर्डन, सऊदी अरब, यूएई को सुरक्षा देती है. लेकिन पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से युद्ध फैलने का खतरा है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>भारत की पहली डेंगू वैक्सीन को मंजूरी, 4 से 60 साल तक के लोग लगवा सकेंगे QDENGA, WHO की भी सिफारिश</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली हर साल जैसा ही मॉनसून दस्तक देता है, वैसे ही डेंगू का प्रकोप भी बढ़ने लगता है. बारिश के मौसम में डेंगू लाखों लोगों को अपनी चपेट में लेता है. डेंगू के मरीजों से अस्पतालों का भरना तो अब जैसे आम बात बन गई है. कई मामलों में तो मरीजों की स्थिति बहुत … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 21:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>भारत, की, पहली, डेंगू, वैक्सीन, को, मंजूरी, से, साल, तक, के, लोग, लगवा, सकेंगे, QDENGA, WHO, की, भी, सिफारिश</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>हर साल जैसा ही मॉनसून दस्तक देता है, वैसे ही डेंगू का प्रकोप भी बढ़ने लगता है. बारिश के मौसम में डेंगू लाखों लोगों को अपनी चपेट में लेता है. डेंगू के मरीजों से अस्पतालों का भरना तो अब जैसे आम बात बन गई है. कई मामलों में तो मरीजों की स्थिति बहुत गंभीर हो जाती है. साल-दर-साल ये समस्या बढ़ती ही जा रही थी. इस बीच अब भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है. दरअसल,  भारत में पहली बार डेंगू से बचाव के लिए एक वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है. इस वैक्सीन का नाम QDENGA (क्यूडेंगा) है, जिसे जापान की फार्मा कंपनी Takeda ने तैयार किया है. भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल (DCGI) ने इसे 4 से 60 साल की उम्र के लोगों के लिए मंजूरी दी है। </p>
<p><strong>क्या है QDENGA वैक्सीन?</strong><br>
QDENGA भारत में मंजूर होने वाली पहली डेंगू वैक्सीन है. इसकी खासियत ये है कि इसे लगवाने से पहले ये टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होगी कि व्यक्ति को पहले कभी डेंगू हुआ है या नहीं. यानी ये वैक्सीन किसी को भी लगाई जा सकती है. अगर किसी को पहले डेंगू हो चुका है, उसे भी ये लगाई जा सकती है और अगर नहीं डेंगू नहीं हुई है तो भी इसे लगाया जा सकता है।   </p>
<p><strong>किन लोगों को लग सकेगी ये वैक्सीन?</strong><br>
इस वैक्सीन को 4 से 60 साल की उम्र के लोगों के लिए मंजूरी मिली है. इसकी कुल दो डोज लगेंगी. दोनों डोज के बीच 3 महीने का अंतर होगा. ये वैक्सीन स्किन के नीचे लगाई जाएगी। </p>
<p><strong>क्यों है ये मंजूरी इतनी अहम?</strong><br>
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां डेंगू के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं. अनुमान है कि दुनिया के कुल डेंगू मामलों का लगभग एक-तिहाई बोझ भारत पर है. कंपनी के मुताबिक, पिछले 20 साल में भारत में डेंगू के रिपोर्ट किए गए मामलों में करीब 11 गुना बढ़ोतरी हुई है. साल 2025 में देश में 1.13 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए थे. हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि असली संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। </p>
<p><strong>डेंगू के चारों प्रकारों से बचाने के लिए बनाई गई वैक्सीन</strong><br>
डेंगू वायरस के चार अलग-अलग प्रकार होते हैं. QDENGA को इस तरह से बनाया गया है कि ये इन चारों प्रकारों के खिलाफ सुरक्षा देने में मदद करे। </p>
<p><strong>डेंगू क्यों है चिंता का विषय</strong><br>
डेंगू एक मच्छरजनित वायरल बीमारी है, जो डेंगू वायरस से फैलती है। यह वायरस Flavivirus वंश से संबंधित है और इसके चार प्रमुख प्रकार होते हैं—DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4। यही वजह है कि डेंगू से बचाव केवल एक बार के संक्रमण या सीमित प्रतिरक्षा पर निर्भर नहीं हो सकता। भारत जैसे देश में, जहां Aedes aegypti मच्छर बड़े पैमाने पर पाए जाते हैं, यह बीमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए लगातार चुनौती बनी रहती है। यही मच्छर चिकनगुनिया और जीका वायरस भी फैलाते हैं।</p>
<p><strong>QDENGA की खासियत क्या है</strong><br>
QDENGA एक live-attenuated tetravalent vaccine है, यानी इसमें वायरस के कमजोर किए गए रूप का उपयोग किया गया है और यह चारों डेंगू सीरोटाइप के खिलाफ सुरक्षा देने के लिए तैयार की गई है। इसकी एक बड़ी विशेषता यह है कि इसे उन लोगों को भी दिया जा सकता है जिन्हें पहले डेंगू हो चुका है और उन्हें भी जिन्हें पहले संक्रमण नहीं हुआ। इससे टीका लगाने से पहले अलग से स्क्रीनिंग या टेस्टिंग की जरूरत नहीं पड़ती, जो इसे व्यवहारिक और व्यापक उपयोग के लिए उपयोगी बनाता है।</p>
<p><strong>निर्माण, वैश्विक उपयोग और भारत में महत्व</strong><br>
यह वैक्सीन जापान की Takeda Biopharmaceuticals ने विकसित की है। भारत में इसके निर्माण के लिए 2024 में Takeda और Biological E के बीच साझेदारी हुई थी। Biological E ने सालाना 50 मिलियन डोज़ उत्पादन क्षमता की योजना बनाई है। वैश्विक स्तर पर QDENGA को 2022 में लॉन्च किए जाने के बाद अब तक 43 देशों में मंजूरी मिल चुकी है और 32 मिलियन से अधिक डोज़ वितरित की जा चुकी हैं।भारत के लिए यह मंजूरी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में पिछले दो दशकों में डेंगू मामलों में 11 गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। 2025 में भारत में 1,13,000 से अधिक डेंगू मामले सामने आए और देश पर वैश्विक डेंगू बोझ का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है। ऐसे में वैक्सीन उपलब्ध होना रोकथाम के मौजूदा उपायों—जैसे मच्छर नियंत्रण, साफ-सफाई और समय पर जांच—को और मजबूत कर सकता है।</p>
<p><strong>खबर से जुड़े जीके तथ्य</strong></p>
<p><strong>    QDENGA भारत की पहली स्वीकृत डेंगू वैक्सीन है।<br>
    यह 4 से 60 वर्ष आयु वर्ग के लिए मंजूर है।<br>
    डेंगू वायरस के चार सीरोटाइप होते हैं: DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4।<br>
    यह वैक्सीन पहले डेंगू संक्रमण वाले और बिना संक्रमण वाले, दोनों तरह के लोगों को दी जा सकती है।</strong></p>
<p>कुल मिलाकर, QDENGA की मंजूरी भारत में डेंगू रोकथाम के लिए एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य कदम है। यदि उत्पादन और वितरण सुचारु रहता है, तो यह वैक्सीन आने वाले समय में डेंगू के गंभीर मामलों और अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत को कम करने में मददगार साबित हो सकती है।</p>
<p><strong>कितनी असरदार है ये वैक्सीन?</strong><br>
कंपनी के अनुसार, QDENGA पर अब तक सबसे बड़े स्तर पर रिसर्च की गई है. कंपनी के मुताबिक, इस वैक्सीन की अब तक 28,000 से अधिक लोगों पर टेस्टिंग की जा चुकी है. क्लीनिकल ट्रायल में दूसरी डोज लेने के 12 महीने बाद ये डेंगू से बचाव में 80.2% असरदार पाई गई है. वहीं, डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को 90.4% तक कम करने में भी ये सफल रही. लंबे समय के आंकड़ों में भी इसके अच्छे नतीजे सामने आए हैं. स्टडी के अनुसार, 4.5 साल बाद भी ये डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने से बचाव में 84.1% असरदार रही, जबकि 7 साल तक इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता बरकरार रहने के प्रमाण मिले हैं। </p>
<p><strong>WHO भी दे चुका है सिफारिश</strong><br>
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहले ही QDENGA की सिफारिश कर चुका है. WHO का कहना है कि जिन देशों में डेंगू का खतरा ज्यादा है, वहां इस वैक्सीन को पब्लिक वैक्सिनेशन प्रोग्राम में शामिल किया जा सकता है. इस वैक्सीन को WHO की प्रीक्वालिफिकेशन भी मिल चुकी है, जिसका मतलब है कि ये क्वालिटी, सुरक्षा और असरदार होने के मामले में अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरी है। </p>
<p><strong>दुनिया के कितने देशों में मिल चुकी है मंजूरी?</strong><br>
QDENGA को अब तक भारत समेत 43 देशों में मंजूरी मिल चुकी है. कंपनी के अनुसार, दुनिया भर में इसकी 3.2 करोड़ (32 मिलियन) से ज्यादा डोज बांटी जा चुकी हैं. ब्राजील, अर्जेंटीना, कोलंबिया और इंडोनेशिया जैसे देशों में इसे पब्लिक वैक्सिनेशन प्रोग्राम में भी शामिल किया गया है। </p>
<p><strong>क्या वैक्सीन लगने के बाद भी सावधानी जरूरी है?</strong><br>
हां. एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैक्सीन डेंगू से बचाव का एक मजबूत तरीका है, लेकिन इसके साथ-साथ मच्छरों से बचाव भी जरूरी है. <strong>इसके लिए:</strong></p>
<p><strong>    घर के आसपास पानी जमा न होने दें.<br>
    पूरी बाजू के कपड़े पहनें.<br>
    मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाले उपाय अपनाएं.<br>
    तेज बुखार, शरीर दर्द या प्लेटलेट्स कम होने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से कॉन्टैक्ट करें.</strong></p>
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<title>सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद लिया बड़ा फैसला</title>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 18:45:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>सोनम, वांगचुक, ने, खत्म, किया, अनशन, जेपी, नड्डा, से, मुलाकात, के, बाद, लिया, बड़ा, फैसला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार को अपनी 23 दिन लंबी भूख हड़ताल खत्म कर दी है. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के सीजेपी के प्रदर्शनकारियों से मुलाकात के बाद उन्होंने यह फैसला किया. जंतर मंतर पर अनशन की वजह से वांगचुक का स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद 18 जुलाई को उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों ने उनके शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन), पोटैशियम का स्तर काफी कम होने और कीटोन लेवल बढ़ने पर चिंता जताई थी। </p>
<p>वांगचुक पिछले 23 दिनों से अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर थे. सेहत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है. सोमवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ हुई बातचीत के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का फैसला लिया। </p>
<p>इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया है. दिपके ने 18 जुलाई को सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद भूख हड़ताल शुरू की थी। </p>
<p>बताया जा रहा है कि एक नीट अभ्यर्थी के पिता, जिसने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी, ने दिपके से मुलाकात कर अनशन खत्म करने की अपील की. इसके साथ ही सोनम वांगचुक की अपील के बाद उन्होंने भी अपना अनशन समाप्त कर दिया। </p>
<p>हालांकि, दिपके ने साफ किया कि उनका आंदोलन खत्म नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों पर उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। </p>
<p>वहीं, सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने के साथ फिलहाल इस चरण का आंदोलन खत्म हो गया है, लेकिन उनकी ओर से उठाए गए मुद्दों पर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच आगे भी बातचीत जारी रहने की संभावना है। </p>
<p>
<strong>पहली शर्त</strong><br>
सोनम वांगचुक की सबसे महत्वपूर्ण शर्त ये है कि केंद्र सरकार हाल के शिक्षा संबंधी विवादों, खासकर परीक्षा प्रश्नपत्र लीक जैसे मामलों पर जवाबदेही स्वीकार करे. उनका कहना है कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है. उनका मानना है कि केवल जांच कराने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि जिम्मेदारी तय कर ठोस सुधार लागू करने होंगे. अगर सरकार इस दिशा में स्पष्ट कदम उठाती है तो वह अपने अनशन को समाप्त करने पर विचार करेंगे। </p>
<p><strong>दूसरी शर्त</strong><br>
वांगचुक ने कहा है कि अगर सरकार उनकी पहली मांग पूरी नहीं करती तो उन्हें और उनकी पार्टी के नेताओं को संसद तक जाने दिया जाए. वहां वे अलग-अलग दलों के सांसदों और नेताओं के सामने अपनी मांगें सीधे रखना चाहते हैं. उनका कहना है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज संसद तक पहुंचनी चाहिए. अगर सांसद उनकी बात सुनकर संसद में मुद्दा उठाने का भरोसा देते हैं तो वो इसे सकारात्मक पहल मानते हुए अपना अनशन समाप्त कर सकते हैं। </p>
<p><strong>तीसरी शर्त</strong><br>
अगर स्वास्थ्य कारणों या किसी अन्य वजह से वह संसद तक नहीं पहुंच पाते हैं तो उन्होंने तीसरा विकल्प भी सुझाया है. उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता अस्पताल पहुंचकर उन्हें भरोसा दें कि उनकी मांगों को संसद में उठाया जाएगा. उनके अनुसार ऐसा आश्वासन मिलने पर भी वह भूख हड़ताल खत्म करने को तैयार हैं. इस शर्त से उन्होंने ये संकेत दिया है कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात उनकी मांगों पर गंभीर राजनीतिक पहल है। </p>
<p><strong>शिक्षा के मुद्दे को आंदोलन का केंद्र बताया</strong><br>
सोनम वांगचुक ने अपने संदेश में दोहराया कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं है. उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही समस्याएं, विशेष रूप से परीक्षा से जुड़े विवाद, देश के युवाओं के भविष्य पर असर डाल रहे हैं. उन्होंने सरकार और राजनीतिक दलों से अपील की कि इस मुद्दे को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाए. उनका मानना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुए तो छात्रों का भरोसा कमजोर होगा। </p>
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<title>त्रिपुरा के DGP अनुराग धनखड़ पुलिस मुख्यालय में मृत मिले, सुसाइड की आशंका से मचा हड़कंप</title>
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<description><![CDATA[ अगरतला त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनकड़ आज राज्य पुलिस मुख्यालय में मृत पाए गए हैं. माना जा रहा है कि उन्होंने सुसाइड किया है. इस खबर के सामने आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. पुलिस के वरीय अधिकारी मामले की जांच में जुटे हैं. हालांकि अनुराग धनकड़ ने यह आत्मघाती कदम क्यों … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 17:45:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>त्रिपुरा, के, DGP, अनुराग, धनखड़, पुलिस, मुख्यालय, में, मृत, मिले, सुसाइड, की, आशंका, से, मचा, हड़कंप</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अगरतला</strong><br>
त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनकड़ आज राज्य पुलिस मुख्यालय में मृत पाए गए हैं. माना जा रहा है कि उन्होंने सुसाइड किया है. इस खबर के सामने आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. पुलिस के वरीय अधिकारी मामले की जांच में जुटे हैं. हालांकि अनुराग धनकड़ ने यह आत्मघाती कदम क्यों उठाया, इसपर अभी ठोस जानकारी का इंतजार है. अनुराग धनखड़ यूपी के बागपत जिले के रहने वाले थे।</p>
<p><strong>1994 बैच के IPS अधिकारी थे अनुराग धनखड़</strong><br>
धनखड़ 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी थे. धनखड़ की मौत के बाद एजेंसिया जांच में जुट गई है. माना जा रहा है कि धनखड़ ने अपनी सर्विस पिस्तौल से खुद को गोली मार ली. इस घटना के बाद धनखड़ को तुरंत गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल ले जाया गया. जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. आखिर किस वजह से डीजीपी धनखड़ ने सुसाइड किया है इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. मामले की जांच शुरू हो गई है।</p>
<p><strong>फंदे से लटका मिला शव</strong><br>
सूत्रों के मुताबिक, अनुराग धनकर अपने कार्यालय कक्ष में फंदे से लटके हुए मिले। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें तत्काल अगरतला के गोविंद बल्लभ पंत (GBP) अस्पताल पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने आगे की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए और कार्यालय परिसर को सुरक्षा घेरे में लेकर जांच शुरू कर दी गई। फिलहाल इस मामले में अभी तक कोई भी अन्य जानकारी पुलिस की तरफ से नहीं साझा की गई है।</p>
<p><strong>मौके पर पहुंचे अधिकारी</strong><br>
इस दुखद घटना की खबर फैलते ही हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए त्रिपुरा के मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ) माणिक साहा तुरंत पुलिस मुख्यालय पहुंचे। मुख्य सचिव जे.के. सिन्हा सहित गृह विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और भारी संख्या में पुलिस बल जीबी अस्पताल पहुंचे। पुलिस मुख्यालय के भीतर वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति को संभाला और घटना के तुरंत बाद जरूरी साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।</p>
<p><strong>कौन थे अनुराग धनखड़</strong><br>
अनुराग धनखड़ 1994 बैच के IPS अधिकारी थे और उन्होंने 2025 में त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) का पद संभाला था। बता दें कि अनुराग धनखड़ ने CBI में नीरव मोदी मामले की जांच का नेतृत्व किया था। उन्होंने 1984 में सिख समुदाय के नरसंहार की जांच के लिए बनी SIT का भी नेतृत्व किया था।</p>
<p>अनुराग धनखड़ ने 2025 में त्रिपुरा डीजीपी पद का चार्ज लिया था. अब उन्होंने सुसाइड क्यों किया, इसकी जांच की जा रही है. डीजीपी के खुद को गोली मारने की जानकारी मिलने के बाद उन्हें तुरंत अगरतला के गोविंद बल्लभ पंत (GB) अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने <strong>उन्हें मृत घोषित कर दिया।</strong></p>
<p><strong>अस्पताल में किया गया मृत घोषित</strong><br>
गोली लगने की घटना के फौरन बाद अनुराग धनखड़ को आनन-फानन में गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल ले जाया गया। लेकिन, वहां पहुंचने पर जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हाई-प्रोफाइल घटना के बाद विभिन्न जांच एजेंसियां हरकत में आ गई हैं और मामले की तहकीकात शुरू कर दी गई है।</p>
<p>आईपीएस अधिकारी अनुराग धनखड़ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के निवासी थे। वे 1994 बैच के त्रिपुरा कैडर के आईपीएस अफसर थे। फिलहाल, पुलिस और एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर किस वजह या दबाव के चलते राज्य के डीजीपी ने अपनी जान दे दी।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>समृद्धि हाईवे पर भीषण हादसा, बेटी का एडमिशन कर लौट रहे परिवार की कार में आग; 6 लोग जिंदा जले</title>
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<description><![CDATA[ वर्धा  महाराष्ट्र में वर्धा समृद्धि हाइवे पर एक भीषण हादसा हुआ है. वर्धा के पास हाईवे पर एक कार और ट्रक की जबरदस्त टक्कर के बाद 6 लोगों की जलकर मौत हो गई. कार और ट्रक में टक्कर के बाद भीषण आग लग गई और कार धू-धू कर जलने लगी. टक्कर के बाद ट्रक में … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 16:30:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वर्धा </strong><br>
महाराष्ट्र में वर्धा समृद्धि हाइवे पर एक भीषण हादसा हुआ है. वर्धा के पास हाईवे पर एक कार और ट्रक की जबरदस्त टक्कर के बाद 6 लोगों की जलकर मौत हो गई. कार और ट्रक में टक्कर के बाद भीषण आग लग गई और कार धू-धू कर जलने लगी. टक्कर के बाद ट्रक में आग लग गई, जिससे दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कार में सवार चार लोगों की गाड़ी जलते हुए ट्रक के नीचे फंसने से दर्दनाक मौत हो गई. इस घटना से हर तरफ शोक और सदमे का माहौल है। </p>
<p>आग लगने से ट्रक ड्राइवर और क्लीनर की मौत हो गई है. बताया जा रहा है कि कार जलते हुए ट्रक के नीचे फंस गई, जिससे उसमें सवार चारों लोगों की मौत हो गई. इस घटना में कुल छह लोगों की मौत हुई है। </p>
<p><strong>कैसे हुआ हादसा?</strong><br>
हादसा वर्धा जिले की सीमा में समृद्धि महामार्ग पर हुई. इथेनॉल से भरा एक ट्रक पहले ही दुर्घटनाग्रस्त होकर हाईवे पर खड़ा था, जिसके कारण अधिकारियों ने ट्रैफिक का रास्ता बदल दिया था. इसी बीच, पुणे से वर्धा की तरफ जा रही एक कार जोरदार रफ्तार से ट्रक से टकरा गई. टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों गाड़ियां तुरंत आग की लपटों में घिर गईं. ट्रक के ड्राइवर और क्लीनर को बचने का कोई मौका नहीं मिला, जबकि कार में सवार चार यात्री अंदर ही फंस गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। </p>
<p>शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कार में सवार चारों लोग वर्धा जिले के सलोद गांव के रहने वाले थे. पीड़ितों में जुड़वां बहनें भी शामिल थीं, जो एडमिशन के सिलसिले में पुणे गई थीं, लेकिन वापसी के सफर में इस दर्दनाक हादसे का शिकार हो गईं. घटना की खबर मिलते ही हाईवे पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं. हादसा इतना भयानक था कि शवों को निकालने के लिए कार को काटकर खोलना पड़ा। </p>
<p><strong>पुलिस ने क्या बताया?</strong><br>
पुलिस के मुताबिक, कार सवार चारों मृतक वर्धा जिले के सालोड के निवासी थे. यह परिवार अपनी एक बेटी का पुणे में एडमिशन कराकर वापस घर लौट रहा था. मृतको में एक बेटी भी शामिल है, यह परिवार उसी की जुड़वां बहन को पुणे छोड़ने गया था और दूसरी बेटी के साथ लौटते समय ये हादसा हुआ। </p>
<p>इस हादसे में जान गंवाने वाले राजेश टिपले की दो जुड़वां बेटियां हैं, जिन पर माता-पिता की जान बसती थी. उनमें से एक बेटी का पुणे में एमबीए में एडमिशन हुआ था. बेटी की जिंदगी के इस अहम पड़ाव की खुशी में शामिल होने और उसे कॉलेज छोड़ने के लिए पूरा परिवार पुणे गया था। </p>
<p>इस भीषण हादसे में कार ड्राइवर अंकुश राऊत, राजेश टिपले, जाह्नवी टिपले और सुषमा टिपले की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं, ट्रक ड्राइवर संजय कुमार और क्लीनर समरजीत पाल की भी आग में झुलसकर मौत हो गई. एक ही झटके में दो परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>ट्रेनी IPS ने साथी अधिकारी पर लगाए गंभीर आरोप, आपत्तिजनक मैसेज और अभद्र हरकत का केस दर्ज</title>
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<description><![CDATA[ हैदराबाद  हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में ट्रेनिंग ले रहे आईपीएस ऑफिसर पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोपी की कलीग महिला ट्रेनी IPS अफसर की शिकायत पर यौन उत्पीड़न, पीछा करने और धमकी देने को लेकर केस दर्ज किया गया है। 30 वर्षीय महिला ट्रेनी आईपीएस अधिकारी ने आरोप लगाया कि आरोपी … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 16:30:16 +0530</pubDate>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हैदराबाद </strong><br>
हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में ट्रेनिंग ले रहे आईपीएस ऑफिसर पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोपी की कलीग महिला ट्रेनी IPS अफसर की शिकायत पर यौन उत्पीड़न, पीछा करने और धमकी देने को लेकर केस दर्ज किया गया है। 30 वर्षीय महिला ट्रेनी आईपीएस अधिकारी ने आरोप लगाया कि आरोपी जून के अंतिम सप्ताह से लगातार उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है। शिकायत के आधार पर अत्तापुर थाने में बीएनएस और आईटी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और सभी आरोपों की विस्तार से पड़ताल की जा रही है।</p>
<p>महिला अधिकारी ने अपनी शिकायत में कहा कि आरोपी ट्रेनी अधिकारी 23 जून से उन्हें मैसेजिंग ऐप से अश्लील और आपत्तिजनक मैसेज भेज रहा था। इसके अलावा वह अकादमी परिसर में उनके दोस्तों के सामने उनके बारे में अपमानजनक और अशोभनीय टिप्पणियां करता था। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने उन पर एक अन्य ट्रेनी अधिकारी के साथ शारीरिक संबंध होने का झूठा आरोप लगाया। साथ ही, लगातार दबाव बनाकर इस बात को स्वीकार करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की। महिला अधिकारी का आरोप है कि आरोपी ने गाली-गलौज की और मानसिक दबाव बनाकर उन्हें परेशान किया, जिससे उन्हें लगातार भय और तनाव का सामना करना पड़ा।</p>
<p><strong>प्राइवेट मैसेज दिखाने के लिए मजबूर</strong><br>
शिकायत में यह भी कहा गया कि आरोपी ने धमकी और ब्लैकमेल करके महिला अधिकारी को अपने प्राइवेट मैसेज दिखाने के लिए मजबूर किया। आरोप है कि 8 जुलाई को उसने उनका मोबाइल फोन अपने कमरे में ले जाकर उसका पासवर्ड बताने के लिए दबाव बनाया। महिला अधिकारी का कहना है कि इसी दौरान आरोपी ने उनके साथ छेड़छाड़ भी की। अगले दिन यानी 9 जुलाई को आरोपी ने उन्हें जबरन अपने कमरे में ले जाकर बाल पकड़कर खींचा, गला दबाने की कोशिश की और चाकू गर्दन पर रखकर उन्हें कमरे से बाहर जाने नहीं दिया। शिकायत के अनुसार, 10 जुलाई को भी आरोपी ने उनके साथ मारपीट की और शारीरिक हमला किया।</p>
<p><strong>निजी वीडियो भी रिकॉर्ड किया</strong><br>
महिला ट्रेनी ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उनकी जानकारी और इजाजत के बिना उनका एक निजी वीडियो रिकॉर्ड किया और बाद में ब्लैकमेल करने की नीयत से वह वीडियो उनके पति को भेज दिया। पुलिस के अनुसार, शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ महिला की गरिमा भंग करने के उद्देश्य से हमला करने, यौन उत्पीड़न, महिला की मर्यादा का अपमान करने वाले शब्द और इशारों का इस्तेमाल करने, पीछा करने, आपराधिक धमकी देने व सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>संसद मानसून सत्र: ‘वंदे मातरम’ समेत 7 बड़े बिल एजेंडे में, अमित शाह पेश करेंगे अहम प्रस्ताव</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली     संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी है. केंद्र सरकार राष्ट्रीय गीत &#039;वंदे मातरम&#039; के अपमान या उसे गाने में बाधा डालने को एक आपराधिक अपराध बनाने के लिए राज्यसभा में सोमवार को एक नया बिल पेश करने जा रही है।  सोमवार को … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 13:15:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>संसद, मानसून, सत्र:, ‘वंदे, मातरम’, समेत, बड़े, बिल, एजेंडे, में, अमित, शाह, पेश, करेंगे, अहम, प्रस्ताव</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली </strong><br>
  <br>
संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी है. केंद्र सरकार राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के अपमान या उसे गाने में बाधा डालने को एक आपराधिक अपराध बनाने के लिए राज्यसभा में सोमवार को एक नया बिल पेश करने जा रही है। </p>
<p>सोमवार को संसद सत्र की शुरुआत के साथ ही गृह मंत्री अमित शाह इस बिल को सदन के पटल पर रखेंगे. संसद के एजेंडे के मुताबिक, इस विधेयक का नाम 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026' है। </p>
<p>ये नया विधेयक 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971' में संशोधन करेगा. अब इस नए संशोधन विधेयक के जरिए सरकार राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को भी राष्ट्रगान 'जन गण मन' की तरह ही समान कानूनी और वैधानिक संरक्षण देना चाहती है। </p>
<p><strong>'वंदे मातरम' का अपमान करने पर होगी सजा</strong><br>
'वंदे मातरम' के मौजूदा 1971 के कानून के तहत देश के राष्ट्रीय प्रतीकों जैसे- राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा), संविधान और राष्ट्रगान (जन गण मन) का अनादर या अपमान करना एक बड़ा अपराध है. इस अपराध के लिए दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है। </p>
<p><strong>अपमान या बाधा डालने पर क्या हैं नए नियम?</strong><br>
इस विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक, अब से अगर कोई भी व्यक्ति राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गाए जाने के दौरान किसी भी तरह की रुकावट पैदा करता है, तो उसे सजा दी जाएगी. इसके अलावा, किसी भी रूप में राष्ट्रीय गीत का अपमान करने या उसका अनादर करने वाले को भी अपराधी माना जाएगा। </p>
<p><strong>वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर बड़ा फैसला</strong><br>
सरकार की ओर से राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने की ये पहल ऐसे समय में हो रही है, जब देश भर में 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में साल भर चलने वाले समारोह मनाए जा रहे हैं। </p>
<p>इससे पहले भी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाया था. गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को एक पत्र लिखा था. इस पत्र के जरिए उन सभी आधिकारिक और सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' को बजाना या गाना अनिवार्य कर दिया गया था, जहां राष्ट्रगान 'जन गण मन' गाया जाता है. अब इस नए कानून के आने के बाद राष्ट्रीय गीत का सम्मान न करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। </p>
<p><strong>परिसीमन और राम मंदिर विवाद सहित 7 अहम बिल एजेंडे में, सरकार के सामने विपक्ष की कड़ी परीक्षा</strong></p>
<p>संसद में आज सोमवार से शुरू होने जा रहे मानसून सत्र के हंगामेदार होने के आसार हैं क्योंकि जहां एक ओर सरकार पूर्व सत्र में पारित न हो पाए परिसीमन संबंधित संविधान संशोधन विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, वहीं विपक्ष परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक समेत विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है. परिसीमन संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को हालांकि अभी तक विधायी एजेंडे में शामिल नहीं किया गया है। </p>
<p>कुछ विपक्षी दलों में टूट के कारण बने नए राजनीतिक समीकरणों के बीच संसद का नया सत्र शुरू होने जा रहा है. यह सत्र कई बड़े और विवादित मुद्दों के साये में शुरू होगा. सूत्रों के अनुसार, सरकार के भी ‘आक्रामक रुख’ अपनाने की संभावना है और मानसून सत्र के दौरान उसकी ‘प्राथमिकता’ विधेयकों को पारित कराने की होगी। </p>
<p>परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर टकराव की स्थिति बन गई है. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सर्वदलीय बैठक बुलाने के लिए पत्र लिखा था. भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के रणनीतिकार महिला आरक्षण और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन को लागू करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के प्रयास में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं. वहीं, मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस इसके लिए एक आक्रामक रणनीति बनाने की योजना बना रही है। </p>
<p>सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस को हालांकि भरोसा है कि ‘इंडिया’ गठबंधन के दल इस विधेयक का विरोध जारी रखेंगे, लेकिन राकांपा (शप) और शिवसेना (उबाठा) समेत कई विपक्षी दल पहले ही संकेत दे चुके हैं कि यदि मसौदा कानून में राज्यों के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रावधान किए जाते हैं, तो वे सरकार के इस कदम के लिए तैयार हो सकते हैं. अप्रैल में हुए विशेष सत्र में खारिज हुए 131वें संविधान संशोधन विधेयक का कड़ा विरोध करने वाले द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने भी कहा है कि वह नये मसौदे की समीक्षा करने के बाद अपनी प्रतिक्रिया देगी. इस पार्टी ने कांग्रेस से अपना रास्ता अलग कर लिया है और बैठने की अलग व्यवस्था की मांग की है। </p>
<p>राजनीतिक समीकरणों में हालांकि कुछ और बदलाव भी आए हैं, खासकर पिछले विधानसभा चुनावों में ‘इंडिया’ गठबंधन के क्षेत्रीय आधार वाले प्रमुख दलों की करारी हार के बाद. सूत्रों का कहना है कि सरकार 2026 के 131वें संविधान संशोधन विधेयक को पेश करने और पारित कराने का एक और प्रयास करने के लिए दृढ़ संकल्पित है. सभी की नजरें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर भी हैं, जिन्हें तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ में विलय करने और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी से अलग लोकसभा में एक अलग गुट बनाने के मामले में फैसला लेना है। </p>
<p>तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने एक अलग याचिका के माध्यम से इस विलय को लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष चुनौती दी है. बिरला को शिवसेना (उबाठा) के छह सांसदों के एक अन्य दावे पर भी अपना निर्णय लेना है, जिन्होंने लोकसभा में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की है. यदि लोकसभा अध्यक्ष दोनों दलों के बागी सांसदों के पक्ष में फैसला देते हैं, तो लोकसभा में राजग की संख्या बढ़ जाएगी. हालांकि, इसके बावजूद वह दो-तिहाई बहुमत से पीछे रहेगा, जो वर्तमान में 540 सदस्यों वाली सदन में 360 सांसदों का है जबकि तीन सीट रिक्त हैं। </p>
<p>राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए राजग के पास कुछ सीट की कमी है और कुछ सदस्यों के मतदान से दूर रहने से उच्च सदन में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने में मदद मिल सकती है. संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है. मानसून सत्र में विचार और पारित करने के लिए सरकार ने जिन विधेयकों को सूचीबद्ध किया है, उनमें एफसीआरए संशोधन विधेयक और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक भी शामिल हैं। </p>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष खरगे पहले ही कह चुके हैं कि पार्टी संसद सत्र के दौरान सरकार को घेरने के लिए संस्थानों पर कब्जे, राजनीतिक दलों को तोड़ने, घोटालों और भ्रष्टाचार, महंगाई, विदेश नीति की विफलताओं और पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण जैसे मुद्दों को उठाएगी. विपक्ष अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे को भी उठाएगा. सूत्रों का कहना है कि सरकार इस मुद्दे पर यह कह सकती है कि यह मामला “राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है”. उन्होंने कहा कि सरकार की ‘प्राथमिकता’ मानसून सत्र के दौरान विधेयकों को पारित कराने की होगी। </p>]]> </content:encoded>
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<title>खराब मौसम के चलते माता वैष्णो देवी यात्रा पर रोक, प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए जारी किया बड़ा अपडेट</title>
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<description><![CDATA[ कटड़ा जम्मू-कश्मीर में मौसम ने करवट बदल ली है। भारी बारिश से जहां लोगों को तपती गर्मी से राहत मिली है वहीं कटड़ा आने वाले माता वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं की दिक्कतें बढ़ गई हैं। ताजा जानकारी के अनुसार खराब मौसम के चलते आज माता वैष्णो देवी की यात्रा स्थगित कर दी गई है। जानकारी … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 13:15:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>खराब, मौसम, के, चलते, माता, वैष्णो, देवी, यात्रा, पर, रोक, प्रशासन, ने, श्रद्धालुओं, के, लिए, जारी, किया, बड़ा, अपडेट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कटड़ा</strong><br>
जम्मू-कश्मीर में मौसम ने करवट बदल ली है। भारी बारिश से जहां लोगों को तपती गर्मी से राहत मिली है वहीं कटड़ा आने वाले माता वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं की दिक्कतें बढ़ गई हैं। ताजा जानकारी के अनुसार खराब मौसम के चलते आज माता वैष्णो देवी की यात्रा स्थगित कर दी गई है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश का दौर जारी है। ऐसे में लोगों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने माता वैष्णो देवी की यात्रा को स्थगित करने का फैसला किया है। खराब मौसम के चलते मां वैष्णो देवी की यात्रा सोमवार को भी अस्थाई रूप से स्थगित कर दी गई है। इसके चलते मां भगवती के दर्शनों के लिए आए हुए श्रद्धालुओं में निराशा लग रही है। लेकिन इसके साथ ही श्रद्धालु खराब मौसम को देखते हुए प्रशासन के इस लिए गए फैसले की सराहना भी कर रहे हैं। </p>
<p><strong>अमरनाथ यात्रा निलंबित</strong></p>
<p>जम्मू-कश्मीर में बारिश की चेतावनी के कारण बालटाल रूट से अमरनाथ यात्रा को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है। तीर्थयात्रियों से कहा गया है कि वे अगले आदेश तक बालटाल बेस कैंप और आस-पास के लंगरों में ही रुकें। अधिकारियों ने कहा कि खराब मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए 19 जुलाई से अमरनाथ यात्रा अस्थायी रूप से निलंबित रहेगी। बालटाल और नूनवान/चंदनवाड़ी आधार शिविरों से श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। भारी बारिश के चलते वैष्णो देवी की यात्रा भी ऐहतियातन अगले आदेशों तक रोक दी गई है।</p>
<p>कश्मीर के संभागीय आयुक्त अंशुल गर्ग ने एक बयान में कहा कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा जारी खराब मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भलाई के लिए एहतियाती कदम के तौर पर 19 जुलाई, 2026 से पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों से श्री अमरनाथजी यात्रा अस्थायी रूप से निलंबित रहेगी।</p>
<p><strong>4 लाख श्रद्धालु कर चुके हैं अमरनाथ के दर्शन</strong><br>
अंशुल गर्ग ने कहा कि मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने और मौसम की स्थिति का व्यापक आकलन करने के बाद यात्रा फिर से शुरू करने के संबंध में उचित समय पर सूचना जारी की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा श्री अमरनाथजी यात्रा के दौरान अब तक 3.76 लाख से अधिक श्रद्धालु गुफा मंदिर के दर्शन कर चुके हैं।</p>
<p><strong>तीर्थयात्री फंसे</strong><br>
अमरनाथ यात्रा को एहतियात के तौर पर रोके जाने पर एक तीर्थयात्री ने कहा कि हम अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू आए हैं। हमें पता चला कि यहां भारी बारिश होने की संभावना है, इसलिए सरकार ने तीन दिनों के लिए यात्रा रोक दी है। यात्रा फिर से शुरू करने से पहले प्रशासन मौसम का जायजा लेगा। प्रशासन का यह बहुत अच्छा फैसला है। अगर आगे भारी बारिश होती है, तो तीर्थयात्रियों को जहां वे हैं वहीं सुरक्षित रहना चाहिए, मौसम पर नजर रखनी चाहिए और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए।</p>
<p><strong>क्या बोले श्रद्धालु<br>
अमरनाथ यात्रा रोके जाने पर</strong> एक और तीर्थयात्री ने कहा कि हम कल यहां पहुंचे थे, लेकिन खराब मौसम के कारण यात्रा तीन दिनों के लिए रोक दी गई है। सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी है और हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है। श्रद्धालु ने आगे कहा कि अगर मौसम और ज्यादा खराब हो और आगे भी यात्रा रोकी जाती है तो भी हम रुकेंगे, जब आए हैं तो अमरनाथ जी के दर्शन करके ही जाएंगे। श्रद्धालु की ओर से यात्रा के लिए आने वाले लोगों से अपील की गई कि जो लोग अब आने वाले हैं, वे बच्चों और बुजुर्गों को साथ न ले आएं, नहीं तो परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>यूपी के प्रतापगढ़ से पहुंचे एक श्रद्धालु ने कहा कि हमारी सुरक्षा के लिए यात्रा रोकी गई है। रास्ते में भूस्खलन की आशंका रहती है, इस वजह से यात्रा रोकी जाती है। अमरनाथ यात्रा पर 14 बार हम आ चुके हैं, यह भी यात्रा का हिस्सा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि घर से निकलने से पहले समय और मौसम को जांच लेना चाहिए। अभी तीन दिनों के लिए यात्रा रोकी गई है। इसके बार फिर यात्रा चालू की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार हमारी सुरक्षा के लिए कदम उठाती है। एक-एक यात्री की सुरक्षा सरकार के लिए जरूरी है।</p>
<p><strong>मौसम की चेतावनी के चलते वैष्णो देवी के दर्शन बंद</strong><br>
माता वैष्णो देवी की यात्रा को भी अस्थाई रूप से स्थगित कर दिया गया है। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तरफ से बताया कि जम्मू-कश्मीर में लगातार खराब मौसम और भारी बारिश का दौर जारी है। ऐसे में खराब मौसम की चेतावनी के बीच प्रशासन ने इस यात्रा को 19 जुलाई से अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लिया है। इससे पहले 8 जुलाई को श्री माता वैष्णो देवी मंदिर मार्ग भूस्खलन से प्रभावित हुआ, लेकिन यात्रा अप्रभावित रही। अधिकारियों ने बताया कि रियासी जिले के कटरा कस्बे में त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित माता वैष्णो देवी मार्ग पर बारिश के कारण भूस्खलन हुआ।</p>
<p>भूस्खलन के कारण बैटरी कार सेवा को अस्थायी रूप से निलंबित करना पड़ा, लेकिन मंदिर की यात्रा अप्रभावित रही और सैकड़ों तीर्थयात्री भूस्खलन के बावजूद अपनी यात्रा जारी रखते रहे। अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के बाद मंदिर की ओर जाने वाले नए मार्ग पर हिमकोटी के पास भूस्खलन हुआ। उन्होंने बताया कि मंदिर बोर्ड ने तुरंत मलबे को मार्ग से हटाने के लिए कर्मचारियों और मशीनों को भेजा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>भारत में तैयार हो रहे C&#45;295 विमान, एयरोस्पेस क्षेत्र में बढ़ी ताकत</title>
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<description><![CDATA[ अहमदाबाद  गुजरात के वडोदरा में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) की फैसिलिटी में C-295 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट बनाए जा रहे हैं। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू किंजरापु ने शनिवार को इन एयरक्राफ्ट की झलक दिखाई। नायडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसे लेकर एक पोस्ट भी शेयर किया और बताया, &#039;भारत को अपने … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 11:15:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>भारत, में, तैयार, हो, रहे, C-295, विमान, एयरोस्पेस, क्षेत्र, में, बढ़ी, ताकत</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अहमदाबाद</strong><br>
 गुजरात के वडोदरा में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) की फैसिलिटी में C-295 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट बनाए जा रहे हैं। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू किंजरापु ने शनिवार को इन एयरक्राफ्ट की झलक दिखाई।</p>
<p>नायडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसे लेकर एक पोस्ट भी शेयर किया और बताया, 'भारत को अपने देश में ऐसे एयरक्राफ्ट बनाते हुए देखना सचमुच खास है।'</p>
<p><strong>भारत में बन रहे C-295 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट</strong><br>
एविएशन मिनिस्टर नायडू ने C-295 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को लेकर बताया, 'जैसे-जैसे भारत अपनी एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को मजबूत कर रहा है, हम धीरे-धीरे ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं जहां भारतीय गर्व के साथ भारत में बने सिविल एयरक्राफ्ट में उड़ान भरेंगे।'</p>
<p>मंगलवार को नायडू ने कहा था कि अहमदाबाद के पास बन रहे धोलेरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।</p>
<p>नायडू ने यह भी कहा कि टाटा ग्रुप की आने वाली सेमीकंडक्टर फैसिलिटी और एयरबस की डिफेंस पार्टनरशिप को इस फैसिलिटी के खास मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) हैंगर से सीधा फायदा होगा।</p>
<p><strong>भारत के लिए गेम चेंजर C-295</strong><br>
TASL ने मई 2026 में वडोदरा फैसिलिटी की फाइनल असेंबली लाइन से अपना पहला C-295 एयरक्राफ्ट बाहर निकाला और इसने 10 जून को अपनी पहली टेस्ट फ्लाइट सफलतापूर्वक पूरी की।</p>
<p>एयरबस के अनुसार, सफल टेस्ट फ्लाइट C-295 इंडिया प्रोग्राम में एक बड़ा कदम है और भारत सरकार के मेक इन इंडिया इनिशिएटिव के तहत भी बड़ी सफलता है।</p>
<p>इस प्रोजेक्ट को गेम चेंजर बताते हुए एयरबस डिफेंस ने कहा, 'भारत सरकार के 'मेक इन इंडिया' विजन में C295 इंडिया प्रोग्राम पहला ऐसा मामला है जिसमें प्राइवेट सेक्टर द्वारा भारत में मिलिट्री एयरक्राफ्ट बनाया जा रहा है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 जून को मन की बात कार्यक्रम के दौरान, भारत में बने C-295 एयरक्राफ्ट की पहली उड़ान का जिक्र किया था, जिससे एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग की क्षमताएं बढ़ेंगी। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।</p>
<p><strong>कैसे बनाए जा रहे ये एयरक्राफ्ट?</strong><br>
C-295 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के लिए इंडियन एयरक्राफ्ट कॉन्ट्रैक्टर (IAC) के तौर पर छोटे-छोटे पार्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग से लेकर पूरी फाइनल असेंबली तक की जिम्मेदारी संभाल रहा है।</p>
<p>इसमें इंजन और एवियोनिक्स की टेस्टिंग और इंस्टॉलेशन, बारिश के पानी का टेस्ट, फ्लाइट टेस्ट और लंबे समय तक फ्लीट सपोर्ट, मॉडिफिकेशन और अपग्रेड जैसी खास क्षमताएं विकसित करना भी शामिल है।</p>
<p>56 एयरक्राफ्ट खरीदने के साथ भारत C295 का सबसे बड़ा ग्राहक बन गया है। C295 'मेक इन इंडिया' प्रोग्राम के तहत भारत में 40 एयरक्राफ्ट की 85% से ज्यादा स्ट्रक्चरल और फाइनल असेंबली की जाएगी और 13,000 छोटे-छोटे पार्ट्स बनाए जाएंगे। इसके लिए 21 खास प्रक्रियाओं को सर्टिफाइड किया गया है और प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के 37 भारतीय सप्लायर्स को इसमें शामिल किया गया है।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>22 राज्यों में बारिश&#45;आंधी का अलर्ट, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली देश में भीषण गर्मी और उमस के बीच मौसम विभाग ने परेशानी बढ़ाने वाला अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक कल यानी 20 जुलाई को यूपी, बिहार समेत 22 राज्यों के लिए बारिश-आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 75 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से … ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 10:15:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>राज्यों, में, बारिश-आंधी, का, अलर्ट, मौसम, विभाग, ने, जारी, की, चेतावनी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
देश में भीषण गर्मी और उमस के बीच मौसम विभाग ने परेशानी बढ़ाने वाला अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक कल यानी 20 जुलाई को यूपी, बिहार समेत 22 राज्यों के लिए बारिश-आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 75 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तेज हवा के झोंके चलेंगे। इस दौरान पूर्वी भारत के राज्यों के लोगों के लिए खास चेतावनी जारी की गई है। आकाशीय बिजली और वज्रपात अपना कहर बरपा सकता है। इसलिए किसानों को खुले खेत में जाने से परहेज करना होगा। फसलों के नुकसान की होने की भी आशंका है। वहीं, पहाड़ी राज्यों में बारिश-आंधी का रौद्र रूप देखने को मिल सकता है।</p>
<p>वहीं तेज आंधी के चलते कुछ राज्यों में बड़े-बड़े वृक्ष सड़क किनारे गिर सकते हैं। वहीं, कुछ राज्यों में बड़े-बड़े ओले गिरने की भी चेतावनी है। वहीं, उत्तरी बिहार से बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम हिस्से तक निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके अलावा, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश और आसपास के इलाकों में हवा का ऊपरी चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। तो चलिए हम आपको बताते हैं कल यानी 20 जुलाई को देश के बाकी राज्यों में मौसम का हाल कैसा रहेगा। इसके अलावा हम जिलावार भी मौसम का हाल बताने जा रहे हैं…</p>
<p><strong>देश के 22 राज्यों में बारिश-आंधी की चेतावनी</strong><br>
मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक कल यानी 20 जुलाई को देश के 22 राज्यों यूपी, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, सिक्किम, असम, त्रिपुरा, मेघालय, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और नागालैंड में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलेगी। इसके अलावा मछुआरों को समुद्री किनारे से दूर रहने की चेतावनी दी गई है।</p>
<p><strong>दिल्ली में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
दिल्ली(20 जुलाई-बारिश-तूफान का अलर्ट): मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक दिल्ली में 20 जुलाई को भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान हवा की रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की संभावना है। वहीं, दिल्ली में कल यानी 20 जुलाई को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है।</p>
<p><strong>यूपी में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
यूपी(20 जुलाई-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): मेरठ, गौतमबुद्ध नगर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, आगरा, मथुरा, पीलीभीत, सीतापुर, बहराइच, बस्ती, आजमगढ़, गोंडा, जौनपुर, चंदौली,कुशीनगर, महाराजगंज, बाराबंकी, सुल्तानपुर, अयोध्या, इटावा, फिरोजाबाद, वाराणसी, प्रयागराज, देवरिया और गोरखपुर में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 70 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से बारिश-आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, लखनऊ में कल यानी 20 जुलाई को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा।</p>
<p><strong>बिहार में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
बिहार(20-21 जुलाई-तेज बारिश और आंधी का अलर्ट): पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, पटना, गया, जहानाबाद, गोपालगंज,भोजपुर, रोहतास,कैमूर, औरंगाबाद, बक्सर, सिवान, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, भागलपुर, मुंगेर, कटिहार, बेगूसराय, किशनगंज और बेगूसराय में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी है। इस दौरान 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी है। वहीं, पटना में कल यानी 20 जुलाई क का अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।</p>
<p><strong>झारखंड में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
झारखंड(20 जुलाई-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): साहेबगंज, रांची, हजारीबाग, लातेहार, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, खूंटी, बोकारो, जमशेदपुर, पलामू, धनबाद और हजारीबाग में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तूफान चलने की चेतावनी है। वहीं, 20 जुलाई को रांची का अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।</p>
<p><strong>उत्तराखंड में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
उत्तराखंड (20-22 जुलाई-बारिश-आंधी का अलर्ट): नैनीताल, हरिद्वार, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग, पौड़ी गढ़वाल, ऋषिकेश , पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और चमोली में बारिश-तूफानी की चेतावनी जारी की गई है। इस दैरान 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलेंगे। वहीं, देहरादून में कल यानी 20 जुलाई को अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा।</p>
<p><strong>हिमाचल में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
हिमाचल (20-21 जुलाई-बारिश-तूफान की चेतावनी): कुल्लू,कांगड़ा, बिलासपुर, ऊना, किन्नौर, शिमला, मंडी, चंबा, हमीरपुर और सिरमौर में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी कर दिया गया है। इस दौरान 50 से। वहीं, मनाली में कल यानी 20 जुलाई को अधिकतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।</p>
<p><strong>जम्मू-कश्मीर में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
जम्मू-कश्मीर (20 जुलाई-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): किश्तवाड़, जम्मू, पुंछ, कुपवाड़ा, कुलगाम, उधमपुर, गांदरबल, कठुआ, किश्तवाड़, अनंतनाग, रियासी और राजौरी में भारी बारिश-आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, श्रीनगर में कल यानी 20 जुलाई को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस जाएगा तो न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा।</p>
<p><strong>पश्चिम बंगाल में कल का मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
पश्चिम बंगाल(20 जुलाई-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): कोलकाता, हावड़ा, जलपाईगुड़ी, कालिम्पोंग, बांकुड़ा, बीरभूम, अलीपुर द्वार, मालदा, दुर्गापुर, हुगली और मुर्शिदाबाद में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलेगी। वहीं, कोलकाता में कल यानी 20 जुलाई को अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।</p>
<p><strong>पंजाब में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
पंजाब (20-21 जुलाई-भारी बारिश और आंधी की संभावना): लुधियाना, बठिंडा, अमृतसर, पठानकोट, फरीदकोट, फिरोजपुर, संगरूर, फाजिल्का, गुरदासपुर और होशियारपुर में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलेगी।</p>
<p><strong>राजस्थान में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
राजस्थान (20 जुलाई-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): नागौर, अजमेर, बूंदी, चुरू, सीकर, झुंझुनू, चित्तौड़गढ़, श्रीगंगानगर, अलवर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, भीलवाड़ा और झालावाड़ में मध्यम बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 50 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। वहीं, जयपुर में कल यानी 20 जुलाई को अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने संभावना है।</p>
<p><strong>मध्य प्रदेश में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
मध्य प्रदेश (20-21 जुलाई- भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): दतिया, दमोह, मंदसौर, राजगढ़, शाजापुर, विदिशा, बालाघाट, मांडला, सिवनी, खांडवा, डिंडोरी, होशंगाबाद, खरगोन और छतरपुर में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने का अलर्ट है। वहीं, भोपाल में 20 जुलाई को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा।</p>
<p><strong>छत्तीसगढ़ में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
छत्तीसगढ़(20 जुलाई-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): बिलासपुर, रायपुर, धमतरी, कोरबा, गाजियाबाद, बेमेतरा, जांजगीर चांपा, महासमुंद, दुर्ग, कोरिया और रायगढ़ में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चल सकते हैं।</p>
<p><strong>ओडिशा में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
ओडिशा(20-21 जुलाई-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): केंदुझार, बलांगिर, नौपाड़ा, सुंदरगढ़, मयूरभंज, संबलपुर और भुवनेश्वर में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>सोनम वांगचुक को प्राइवेट अस्पताल भेजने की मांग पर हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली सोनम वांगचुक को प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग पर दिल्ली हाईकोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है. कोर्ट ने कहा कि उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकार का उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने का फैसला सही था. अदालत ने यह भी साफ किया कि इलाज से जुड़े सभी मेडिकल … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 21:15:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>सोनम, वांगचुक, को, प्राइवेट, अस्पताल, भेजने, की, मांग, पर, हाईकोर्ट, ने, नहीं, दी, राहत</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
सोनम वांगचुक को प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग पर दिल्ली हाईकोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है. कोर्ट ने कहा कि उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकार का उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने का फैसला सही था. अदालत ने यह भी साफ किया कि इलाज से जुड़े सभी मेडिकल फैसले डॉक्टर, सोनम वांगचुक की सहमति के साथ लेंगे. फिलहाल उनकी निगरानी सफदरजंग अस्पताल और एम्स के डॉक्टरों की टीम करेगी. साथ ही कोर्ट ने सरकार, दिल्ली पुलिस और अस्पताल से तीन दिन के भीतर स्टेटस रिपोर्ट मांगी है.</p>
<p>दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि शरीर की मेडिकल स्थिति हर समय एक जैसी नहीं रहती. ऐसे मामलों में अदालत को पूरे घटनाक्रम और बड़े हित को ध्यान में रखना होता है. कोर्ट ने माना कि सोनम वांगचुक की तबीयत खराब होने पर सरकार ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया, जो मेडिकल जरूरत के हिसाब से उचित फैसला था.</p>
<p>अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक किसी तरह की हिरासत में नहीं हैं. उनके परिवार के लोगों को अस्पताल में मिलने की पूरी अनुमति दी गई है. इलाज के दौरान आगे जो भी मेडिकल फैसला होगा, वह डॉक्टर उनकी सहमति से करेंगे.<br>
 </p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तीन यूरोपीय देशों की यात्रा पर रवाना, बढ़ेगा सहयोग</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू व्यापार, प्रौद्योगिकी एवं अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने तथा लोगों के बीच आपसी संबंध को मजबूत करने के उद्देश्य से रविवार को मोल्दोवा, उत्तर मैसेडोनिया और रोमानिया की यात्रा पर रवाना हो गईं। मोल्दोवा से होगी राष्ट्रपति के दौरे की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यात्रा का … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 19:15:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>राष्ट्रपति, द्रौपदी, मुर्मू, तीन, यूरोपीय, देशों, की, यात्रा, पर, रवाना, बढ़ेगा, सहयोग</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू व्यापार, प्रौद्योगिकी एवं अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने तथा लोगों के बीच आपसी संबंध को मजबूत करने के उद्देश्य से रविवार को मोल्दोवा, उत्तर मैसेडोनिया और रोमानिया की यात्रा पर रवाना हो गईं।</p>
<p><strong>मोल्दोवा से होगी राष्ट्रपति के दौरे की शुरुआत</strong><br>
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यात्रा का पहला चरण सोमवार से मोल्दोवा में शुरू होगा। यह किसी भी भारतीय राष्ट्रपति की मोल्दोवा की पहली यात्रा होगी। मुर्मू मोल्दोवा की राष्ट्रपति मैया सैंडू के साथ द्विपक्षीय और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगी। इसके अलावा, वह मोल्दोवा की संसद के अध्यक्ष इगोर ग्रोसु से भी मुलाकात करेंगी।</p>
<p><strong>विदेश मंत्रालय ने जारी किया बयान</strong><br>
राष्ट्रपति का मोल्दोवा-भारत संसदीय मैत्री समूह के सदस्यों के साथ संवाद, भारत-मोल्दोवा व्यापार मंच को संबोधित करने और वहां रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात का भी कार्यक्रम है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि भारत और मोल्दोवा के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। राष्ट्रपति की यह यात्रा महत्वपूर्ण साबित होगी तथा द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक साझेदारी के नए स्तर पर ले जाएगी।</p>
<p><strong>मोल्दोवा के बाद उत्तर मैसेडोनिया जाएंगी राष्ट्रपति</strong><br>
बयान में कहा गया कि कृषि, स्वास्थ्य सेवा, औषधि उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।<br>
राष्ट्रपति मुर्मू 21 से 22 जुलाई तक उत्तर मैसेडोनिया की भी यात्रा करेंगी। राष्ट्रपति गोर्डाना सिलजानोव्स्का-दावकोवा के निमंत्रण पर होने वाली यह यात्रा भी किसी भारतीय राष्ट्रपति की इस देश की पहली यात्रा होगी।</p>
<p><strong>मैसेडोनिया की संसद को संबोधित करेंगी मुर्मू</strong><br>
उत्तर मैसेडोनिया में राष्ट्रपति मुर्मू अपनी समकक्ष राष्ट्रपति सिलजानोवस्का-दवाकोवा के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। इसके अलावा, वह प्रधानमंत्री ह्रिस्टिजन मिकोस्की, संसद के अध्यक्ष से मुलाकात करेंगी तथा उत्तर मैसेडोनिया की संसद को संबोधित भी करेंगी।</p>
<p><strong>मैसेडोनिया व्यापार मंच पर भी बोलेंगी</strong><br>
राष्ट्रपति भारत-उत्तर मैसेडोनिया व्यापार मंच को भी संबोधित करेंगी। दोनों देश कृषि, औषधि उद्योग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और आईटी-सक्षम सेवाओं (आईटीईएस) जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं।</p>
<p><strong>मामले में क्या बोले विदेश मंत्री के सचिव</strong><br>
विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने शुक्रवार को कहा कि तीन देशों की यह यात्रा मध्य और पूर्वी यूरोप के साथ भारत के बढ़ते जुड़ाव को प्रदर्शित करती है और इस क्षेत्र के देशों के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत करने के हमारे संकल्प को फिर से दोहराती है। यह यूरोप के साथ भारत के व्यापक जुड़ाव और यूरोपीय संघ के साथ रणनीतिक साझेदारी को भी आगे बढ़ाती है।</p>
<p><strong>रोमानिया दौरे के साथ खत्म होगी तीन देशों की यात्रा</strong><br>
विदेश मंत्रालय के अनुसार, रोमानिया के राष्ट्रपति निकुसोर डैन के निमंत्रण पर मुर्मू 23 से 25 जुलाई तक इस देश की यात्रा करेंगी। तीन दशक से भी अधिक समय के बाद किसी भारतीय राष्ट्रपति का इस दक्षिण-पूर्वी यूरोपीय देश का पहला दौरा होगा।</p>
<p><strong>रोमानिया ‘बिजनेस फोरम’ में भी देंगी व्याख्यान</strong><br>
राष्ट्रपति मुर्मू भारत-रोमानिया ‘बिजनेस फोरम’ को भी संबोधित करेंगी और प्रवासी भारतीयों से बातचीत करेंगी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि रोमानिया यूरोपीय संघ में एक अहम साझेदार है और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के पूरा होने से आगामी वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी और मजबूत होगी।</p>]]> </content:encoded>
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<title>कोविड मामलों में बढ़ोतरी, आंध्र में ओमिक्रॉन RF.5 वेरिएंट की पुष्टि</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली देश में कोविड-19 के मामले एक बार फिर बढ़े हैं। वहीं सबसे ज्यादा केस आंध्र प्रदेश कडप्पा जिले में दर्ज किए गए हैं। पता चला है कि कोविड-19 के बढ़ते मामलों के लिए इसका ओमिक्रॉन आरएफ.5 सब वेरिएंट जिम्मेदार है। जानकारों का कहना है कि जेनेटिक म्यूटेशन की वजह से ओमिक्रॉन वेरिएंट बदल … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 18:15:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>कोविड, मामलों, में, बढ़ोतरी, आंध्र, में, ओमिक्रॉन, RF.5, वेरिएंट, की, पुष्टि</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
देश में कोविड-19 के मामले एक बार फिर बढ़े हैं। वहीं सबसे ज्यादा केस आंध्र प्रदेश कडप्पा जिले में दर्ज किए गए हैं। पता चला है कि कोविड-19 के बढ़ते मामलों के लिए इसका ओमिक्रॉन आरएफ.5 सब वेरिएंट जिम्मेदार है। जानकारों का कहना है कि जेनेटिक म्यूटेशन की वजह से ओमिक्रॉन वेरिएंट बदल गया है। कडप्पा जिले के चार सैंपल पुणे के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी भेजे गए थे। जीनोम सिक्वेंसिंग के बाद इस बात की पुष्टि की गई है। जानकारों कहना है कि यह वेरिएंट ओमिक्रॉन के शुरुआती वेरिएंट से ज्यादा खतरनाक नहीं है।</p>
<p><strong>कितना खतरनाक है ओमिक्रॉन आरएफ.5</strong><br>
दुनियाभर में कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट के कई सब वेरिएंट पाए गए हैं। मेडिकल एजुकेशन के डायरेक्टर विष्णुवर्धन ने कहा कि SARC-CoV-2 की सर्विलांस के दौरान भी ओमिक्रॉन के सब वेरिएंट पर गौर किया जा रहा था। इसके अलावा डब्लूएचओ भी इसपर नजर बनाए हुए हैं। सिंगापुर और दक्षिण-पूर्व एशिया केअन्य देशों में भी कोरोना का यह वेरिएंट तेजी से बढ़ा था। अब तक के वैज्ञानिक टेस्ट के मुताबिक यह वेरिएंट ओमिक्रॉन के दूसरे वेरिएंट से ज्यादा खतरनाक नहीं है। ऐसे में लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि कोरोना के मरीजों को आइसोलेशन में रखना जरूरी है।</p>
<p>जानकारों का कहना है कि कोविड-19 उन लोगों के लिए ज्यादा घातक होता है जो कि पहले से ही गंभीर बीमारियों से ग्रसित होते हैं। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है जिससे मरीजों की जान पर बन जाती है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि यह प्राकृतिक रूप से बना वेरिएंट है जो कि जेएन.1 वेरिएंट से एलएफ.7, पीवाई 1.1.1.1 ब्रांच से बना है । इसके लक्षण ओमिक्रॉन के अन्य वेरिएंट की तरह ही हैं । आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्र ने कहा कि कोरोना के बढ़ते हुए मामलों को देखते हुए अस्पतालों क अलर्ट कर दिया गया है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>पुंछ में बारिश का कहर, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन से 10 लोगों की मौत</title>
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<description><![CDATA[ पुंछ  जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में भारी बारिश, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने भयानक तबाही मचा दी है. मौतों का आंकड़ा बढ़कर 10 हो गया है. सबसे ज्यादा नुकसान सुरनकोट में हुआ है, जहां एक ही परिवार के 6 सदस्यों समेत 9 लोगों की जान चली गई. हवेली में एक व्यक्ति की मौत हुई. कई … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 17:15:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>पुंछ, में, बारिश, का, कहर, फ्लैश, फ्लड, और, भूस्खलन, से, लोगों, की, मौत</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पुंछ</strong><br>
 जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में भारी बारिश, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने भयानक तबाही मचा दी है. मौतों का आंकड़ा बढ़कर 10 हो गया है. सबसे ज्यादा नुकसान सुरनकोट में हुआ है, जहां एक ही परिवार के 6 सदस्यों समेत 9 लोगों की जान चली गई. हवेली में एक व्यक्ति की मौत हुई. कई लोग अभी भी लापता हैं.</p>
<p>बचाव अभियान पूरे जोर-शोर से चल रहा है. हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में भी भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं, जहां पूरा पहाड़ सड़क पर गिर गया. केंद्र सरकार ने पूरे मामले पर नजर रखते हुए मदद का भरोसा दिया है.</p>
<p>पुंछ जिले में लगातार हो रही भारी बारिश ने कई इलाकों को तबाह कर दिया. सुरनकोट क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जहां 9 लोगों की मौत हो गई. इनमें एक परिवार के 6 सदस्य शामिल हैं. हवेली इलाके में भी एक मौत हुई और कम से कम 7 घर क्षतिग्रस्त हो गए. मंडी क्षेत्र में भी संपत्ति का नुकसान हुआ है.</p>
<p>प्रशासन का कहना है कि कई इलाकों से अभी भी लोग लापता बताए जा रहे हैं. इसलिए मौत का आंकड़ा और बढ़ सकता है. निचले इलाकों में पानी भर गया है. कई घरों को नुकसान पहुंचा और सड़कें जलमग्न हो गईं. SDRF, NDRF और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं. लापता लोगों की तलाश में बोट और हेलिकॉप्टर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.</p>
<p><strong>चंबा में दिल दहला देने वाला भूस्खलन</strong><br>
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के भटियात क्षेत्र में लाहडू-सिंहुंता सड़क मार्ग पर भारी भूस्खलन हुआ. लगातार भारी बारिश के बीच कुछ ही पलों में पूरा पहाड़ भरभराकर सड़क पर आ गिरा. सड़क पूरी तरह बंद हो गई. गनीमत रही कि उस समय कोई वाहन या राहगीर वहां से गुजर नहीं रहा था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था.</p>
<p>यह मार्ग धर्मशाला, चंबा और डलहौजी के बीच आने-जाने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. रोजाना बड़ी संख्या में वाहन इस रास्ते से गुजरते हैं. मौसम विभाग ने पहले ही भारी बारिश का अलर्ट जारी किया था, जिसके बावजूद पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं.</p>
<p><strong>केंद्र सरकार का त्वरित जवाब</strong><br>
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला से फोन पर बात की. उन्होंने भारी बारिश से हुई स्थिति की जानकारी ली. केंद्र सरकार की तरफ से हर संभव मदद का आश्वासन दिया. केंद्र की एजेंसियां पहले से ही राज्य सरकार के साथ मिलकर राहत कार्य में लगी हुई हैं.</p>
<p>इस आपदा में घायलों का इलाज, लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास की प्रक्रिया तेज की जा रही है. केंद्र ने अतिरिक्त फंड और संसाधन उपलब्ध कराने का वादा किया है.<br>
 <br>
<strong>मौसम की स्थिति और चेतावनी</strong><br>
पिछले कई दिनों से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश हो रही है. पुंछ में 77 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई. पहाड़ी इलाकों में बादल फटने और तेज पानी की धार ने फ्लैश फ्लड पैदा किए. नदियां उफान पर हैं और कई जगहों पर खतरे का निशान पार कर चुकी हैं.</p>
<p>मौसम विभाग ने इन राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट जारी रखा है. चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी समेत कई जिलों में लैंडस्लाइड और फ्लैश फ्लड का खतरा बना हुआ है. लोगों से अपील की गई है कि खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा न करें, नदियों और पहाड़ी रास्तों से दूर रहें.</p>
<p>बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं. लापता लोगों को ढूंढने के लिए ड्रोन और विशेष टीमें भेजी गई हैं. प्रभावित इलाकों में खाने-पीने का सामान, दवाइयां और जरूरी चीजें पहुंचाई जा रही हैं. कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है. स्थानीय प्रशासन ने राहत शिविर बनाए हैं.</p>
<p><strong>जलवायु परिवर्तन और पहाड़ी क्षेत्रों की चुनौतियां</strong><br>
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का पैटर्न बदल रहा है. कभी सूखा तो कभी अचानक भारी बारिश और बादल फटना आम हो गया है. अनियोजित निर्माण, जंगलों की कटाई और कमजोर ढांचागत सुविधाएं नुकसान को बढ़ाती हैं.</p>
<p>पुंछ और चंबा की यह आपदा एक बार फिर प्रकृति की शक्ति की याद दिलाती है. 10 लोगों की मौत और कई लापता लोगों की स्थिति बेहद दुखद है. केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर राहत कार्य चला रही हैं. लोगों को सतर्क रहना चाहिए और प्रशासन का सहयोग करना चाहिए.</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>गृहिणियां हर साल 22 लाख करोड़ रुपये का घरेलू काम करती हैं मुफ्त, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा</title>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 13:15:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>गृहिणियां, हर, साल, लाख, करोड़, रुपये, का, घरेलू, काम, करती, हैं, मुफ्त, रिपोर्ट, में, बड़ा, खुलासा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारत में करीब 21 करोड़ से अधिक महिलाएं बिना किसी वेतन के घरेलू कामकाज और अपने परिवार की देखभाल करती हैं। इन घरेलू कार्यों का यदि वेतन दिया जाए तो लगभग 22.7 लाख करोड़ रुपये की रकम होगी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी पहली बार गृहिणियों (होममेकर्स) द्वारा बिना पैसे के किए जाने वाले घरेलू कामकाज के महत्व को स्वीकारा था। शीर्ष अदालत ने घरेलू महिलाओं को ‘राष्ट्र निर्माता’ भी कहा था। भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी ‘टाइम-यूज सर्वे’ (जनवरी-दिसंबर 2024) की रिपोर्ट से पता चलता है कि महिलाएं बिना वेतन वाले घरेलू कामकाज और देखरेख पर रोजाना 7 घंटे खर्च करती है।</p>
<p><strong>महिलाओं का कार्य समय</strong><br>
रिपोर्ट के अनुसार महिलाएं (महज 6 साल और उससे अधिक उम्र की) बिना पैसे वाले घरेलू कामकाज जैसे साफ-सफाई, खाना बनाना, कपड़े धोना, जैसे कामों पर रोजाना 289 मिनट खर्च करती हैं, जबकि बच्चों और बुजुर्गों की देखरेख पर 137 मिनट लगाती हैं, लेकिन इन कामों के बदले उन्हें कोई पैसा नहीं मिलता है। एक शोध के मुताबिक भारत में करीब 21 करोड़ से अधिक महिलाएं बिना किसी वेतन के घरेलू कामकाज और अपने परिवार के देखभाल करती हैं। यदि महिलाओं को इन कार्यों के बदले वेतन देना पड़े तो यह लगभग 22.7 लाख करोड़ रुपये आंका गया है, जो कि देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 7.5 फीसदी है। भारतीय स्टेट बैंक की एक शोध रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय महिलाओं द्वारा किए जाने वाले बिना वेतन वाले घरेलू और देखभाल के कामों की सालाना आर्थिक कीमत का अनुमान ₹22.7 लाख करोड़ लगाया गया है।</p>
<p><strong>देशभर में यह रकम 10.8 ट्रिलियन डॉलर है</strong></p>
<p><strong>दुनिया भर में अवैतनिक कार्य</strong></p>
<p>ऑक्सफैम की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि दुनिया भर में 15 साल और उससे अधिक उम्र की महिलाएं हर दिन बिना पैसे वाले देखभाल के कामों में 12.5 अरब घंटे बिताती हैं, जिसकी सालाना कीमत कम से कम 10.8 ट्रिलियन डॉलर है।</p>
<p><strong>महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी करते हैं बिना पैसे वाले काम</strong></p>
<p><strong>पुरुषों का योगदान</strong></p>
<p>मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी बिना वेतन वाले घरेलू काम करते हैं, लेकिन महिलाओं की तुलना में काफी <strong>कम। रिपोर्ट मुताबिक घरेलू कामकाज में पुरुष महज 88 मिनट बिताते हैं, जबकि बच्चों-बुजुर्गों की देखरेख में 75 मिनट बिताते हैं।</strong></p>
<p><strong>उम्र का प्रभाव</strong><br>
रिपोर्ट के मुताबिक उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं पर बिना पैसे वाले घरेलू कामकाज और बच्चों-बुजुर्गों की देखभाल के कामों का बोझ बढ़ता जाता है। आंकड़ों के मुताबिक 15 से 59 साल की उम्र की महिलाएं ऐसे कामों में रोजाना 305 मिनट बिताती हैं। 2019 में यह समय 315 मिनट था, अब इसमें थोड़ी कमी आई है। इसी उम्र समूह के 41 फीसदी महिलाएं घर के सदस्यों की देखभाल में शामिल थीं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा महज 21.4 फीसदी था।</p>
<p><strong>सामान्य प्रश्न</strong></p>
<p>✦भारत में कितनी महिलाएं बिना वेतन घरेलू काम करती हैं?−</p>
<p>भारत में करीब 21 करोड़ से अधिक महिलाएं बिना किसी वेतन के घरेलू कामकाज और अपने परिवार की देखभाल करती हैं।</p>
<p>✦महिलाएं घरेलू कामों में रोजाना कितना समय बिताती हैं?+</p>
<p>✦महिलाओं द्वारा घरेलू कार्यों की आर्थिक कीमत क्या है?+</p>]]> </content:encoded>
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<title>उत्तराखंड में रेड अलर्ट, दिल्ली समेत 11 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, IMD का बड़ा अपडेट</title>
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<description><![CDATA[  नईदिल्ली  दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत में उमस भरी गर्मी से परेशान लोगों को जल्द ही मिलने की उम्मीद है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले 24 घंटे में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है. आईएमडी के मुताबिक, आज  19 जुलाई को मानसून 11 राज्यों में अपना जोरदार रंग दिखा सकता … ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 10:15:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>उत्तराखंड, में, रेड, अलर्ट, दिल्ली, समेत, राज्यों, में, भारी, बारिश, की, चेतावनी, IMD, का, बड़ा, अपडेट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नईदिल्ली </strong><br>
दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत में उमस भरी गर्मी से परेशान लोगों को जल्द ही मिलने की उम्मीद है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले 24 घंटे में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है. आईएमडी के मुताबिक, आज  19 जुलाई को मानसून 11 राज्यों में अपना जोरदार रंग दिखा सकता है. मौसम विभाग ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय समेत कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. इसके अलावा उत्तराखंड और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल-सिक्किम में कुछ जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी गई है. वहीं दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में भी झमाझम बारिश के आसार हैं। </p>
<p>मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिम बंगाल और झारखंड के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र भले ही कमजोर पड़ गया हो, लेकिन उससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) अभी भी सक्रिय है. मानसून ट्रफ पंजाब से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैला हुआ है, जबकि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, ओडिशा और दक्षिण भारत के ऊपर बने कई चक्रवाती सिस्टम लगातार नमी खींच रहे हैं. यही वजह है कि अगले 24 घंटे देश के बड़े हिस्से में तेज बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। </p>
<p><strong>दिल्ली में होगी राहत वाली बारिश</strong><br>
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इससे सटे आसपास के इलाकों में रविवार को मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आएगा. सुबह से ही आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और दिन चढ़ने के साथ कई इलाकों में बारिश शुरू हो सकती है. कुछ जगहों पर तेज बौछारें भी पड़ने की संभावना है. मौसम विभाग ने दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। </p>
<p>बारिश के चलते तापमान में भी गिरावट आने के आसार है और पिछले कई दिनों से परेशान कर रही उमस से लोगों को राहत मिलेगी. हालांकि तेज बारिश होने पर आईटीओ, मिंटो ब्रिज, रिंग रोड सहित अन्य निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है. इसके चलते सुबह और शाम के समय ट्रैफिक भी प्रभावित होने की आशंका है। </p>
<p><strong>यूपी में मेघ मेहरबान, उत्तराखंड में बड़ा खतरा</strong><br>
उत्तर प्रदेश में कल मानसून पूरे शबाब पर रहेगा. पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है, जबकि पश्चिमी यूपी में भी अच्छी बारिश का अनुमान है. गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी की गई है. मौसम विभाग ने लोगों से खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास जाने से बचने की अपील की है। </p>
<p>वहीं उत्तराखंड के कई जिलों में कल भारी से बहुत भारी और कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. इस कारण कल हालात ज्यादा गंभीर हो सकते हैं. लगातार बारिश के चलते पहाड़ों में भूस्खलन, चट्टानें गिरने, नदियों और गदेरों के उफान पर आने का खतरा बढ़ गया है. इस देखते हुए चारधाम यात्रा मार्गों पर भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि कई जगह सड़कें बाधित हो सकती हैं। </p>
<p><strong>बिहार-झारखंड में भी बारिश का जोर</strong><br>
बिहार में रविवार को मानसून पूरी ताकत के साथ सक्रिय रहेगा. राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है. खासकर उत्तर और मध्य बिहार में तेज बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है. मौसम विभाग ने किसानों और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को बिजली गिरने से सतर्क रहने की सलाह दी है। </p>
<p>झारखंड में भी लगभग सभी हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहेगा. राजधानी रांची समेत कई जिलों में अच्छी बारिश होने की संभावना है. कुछ इलाकों में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं. लगातार बारिश के कारण शहरी इलाकों में जलभराव और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क प्रभावित होने की आशंका <strong>है। </strong></p>
<p><strong>पहाड़ों में बारिश बनेगी बड़ी चुनौती</strong><br>
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में अगले 24 घंटे बेहद संवेदनशील रहने वाले हैं. हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में कई जगह भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है, जबकि उत्तराखंड में अत्यधिक भारी बारिश का सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पहाड़ी इलाकों में अचानक बाढ़, भूस्खलन और चट्टानें गिरने जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं। </p>
<p>यात्रियों और स्थानीय लोगों को नदी-नालों से दूर रहने और मौसम की ताजा जानकारी पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है. प्रशासन भी संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए है। </p>
<p><strong>पूर्वोत्तर में भी नहीं थमेगी बारिश</strong><br>
असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी रविवार को अच्छी बारिश का दौर जारी रहेगा. असम और मेघालय के कुछ हिस्सों में बहुत भारी बारिश हो सकती है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में भी तेज बारिश की संभावना है. कई नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। </p>
<p>उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी मौसम विभाग ने अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. यहां भूस्खलन और <strong>अचानक बाढ़ का खतरा बना रहेगा। </strong></p>
<p><strong>बाकी भारत में कैसा रहेगा मानसून का हाल?</strong><br>
इसके अलावा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, कोंकण-गोवा और विदर्भ में भी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा. पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है. महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र और गोवा में भी अच्छी बारिश का अनुमान है। </p>
<p>दक्षिण भारत की बात करें तो केरल, तटीय कर्नाटक, आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में बारिश का दौर जारी रहेगा. कई इलाकों में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। </p>
<p><strong>मछुआरों के लिए चेतावनी</strong><br>
मौसम विभाग ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में समुद्र के उग्र रहने की चेतावनी दी है. अरब सागर में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे और झोंकों के दौरान 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. बंगाल की खाड़ी में भी समुद्र अशांत रहेगा. ऐसे में मछुआरों को अगले कुछ दिनों तक समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है। </p>
<p>मौसम विभाग ने भारी बारिश वाले राज्यों के लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करें. बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें. पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वाले लोग मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही सफर करें. कुल मिलाकर 19 जुलाई को देश के बड़े हिस्से में मानसून अपना रौद्र रूप दिखा सकता है, इसलिए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव होगी। </p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>क्या फिर लौट रहा कोरोना? आंध्र प्रदेश के बाद महाराष्ट्र में 3 साल बाद मिले 21 नए केस, जानिए कैसी है स्थिति</title>
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<description><![CDATA[ पुणे कोरोना वायरस (Covid-19) ने करीब तीन साल की शांति के बाद महाराष्ट्र में एक बार फिर से दस्तक दी है। राज्य में विशेषकर पुणे शहर में पिछले 10 दिनों के भीतर कोविड के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। हालांकि, राहत की बात यह है कि ज्यादातर मामले हल्के लक्षणों वाले हैं और … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 23:15:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>क्या, फिर, लौट, रहा, कोरोना, आंध्र, प्रदेश, के, बाद, महाराष्ट्र, में, साल, बाद, मिले, नए, केस, जानिए, कैसी, है, स्थिति</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पुणे</strong></p>
<p>कोरोना वायरस (Covid-19) ने करीब तीन साल की शांति के बाद महाराष्ट्र में एक बार फिर से दस्तक दी है। राज्य में विशेषकर पुणे शहर में पिछले 10 दिनों के भीतर कोविड के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। हालांकि, राहत की बात यह है कि ज्यादातर मामले हल्के लक्षणों वाले हैं और स्वास्थ्य विभाग या विशेषज्ञों को फिलहाल किसी नई लहर का कोई संकेत नहीं दिखा है।</p>
<p><strong>आंकड़ों में कोरोना की वापसी</strong><br>
राज्य स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में इस साल अब तक कोविड-19 के 48 मामले सामने आ चुके हैं। गनीमत यह रही है कि इनमें से किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई है। लगभग तीन वर्षों तक यह वायरस रडार से बाहर रहा, लेकिन साल 2026 में इसके मामलों में धीरे-धीरे वृद्धि देखी जा रही है। इस साल जनवरी में 3, फरवरी में 1, जून में 11 और अब तक जुलाई में 21 मामले दर्ज किए गए हैं।</p>
<p><strong>रूटीन टेस्ट में नहीं, दूसरी बीमारियों की जांच में आ रहे पकड़ में</strong><br>
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, ज्यादातर पॉजिटिव केस नियमित कोविड टेस्टिंग के दौरान नहीं मिल रहे हैं। ये मामले तब सामने आ रहे हैं जब मरीज किसी अन्य बीमारी के लिए डॉक्टर की सलाह पर जांच करा रहे हैं या फिर किसी सर्जरी से पहले उनका प्री-ऑपरेटिव फिटनेस टेस्ट किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वायरस अब इन्फ्लूएंजा की तरह बर्ताव कर रहा है। लोगों में इम्युनिटी कम होने और नए वेरिएंट के उभरने के कारण हर एक-दो साल में इसके मामलों में इस तरह का उछाल आना स्वाभाविक है।</p>
<p><strong>क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स?</strong><br>
जहांगीर अस्पताल के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष चौधरी ने बताया कि 2023 के बाद यह पहली बार है जब कोविड के मामलों में इतनी स्पष्ट वृद्धि देखी गई है। पिछले 8 से 10 दिनों में कोविड और इन्फ्लूएंजा दोनों के मरीज बढ़े हैं। उन्होंने कहा, "अकेले हमारे अस्पताल में ही पिछले कुछ दिनों में 7 से 8 कोविड केस देखे गए हैं। अगर एक अस्पताल में इतने मामले हैं, तो पूरे शहर में ऐसे कई और मामले होने की आशंका है।"</p>
<p>डॉ. चौधरी के अनुसार, मौजूदा संक्रमण ओमिक्रॉन वेरिएंट से भी हल्का है। मरीजों में आमतौर पर खांसी, जुकाम, गले में खराश और थकान जैसे लक्षण दिख रहे हैं, जो 3 से 5 दिनों तक रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समुदाय में संक्रमण का वास्तविक आंकड़ा कहीं अधिक हो सकता है, क्योंकि हल्के लक्षण वाले बहुत से लोग टेस्ट ही नहीं कराते। उन्होंने लोगों को आगाह किया कि कोविड अब इन्फ्लूएंजा की तरह हमारे बीच ही रहने वाला है, इसलिए सावधानी जरूर बरतें और लापरवाही न करें।</p>
<p><strong>घबराने की जरूरत नहीं, कोई नई लहर नहीं</strong><br>
डॉक्टरों का कहना है कि मौजूदा स्थिति किसी 'कोविड लहर' जैसी बिल्कुल नहीं है। पहले टेस्टिंग कम होने की वजह से छिटपुट मामलों पर ध्यान नहीं गया। अब चूंकि अन्य रेस्पिरेटरी वायरल इन्फेक्शन बढ़ रहे हैं, इसलिए अस्पतालों में 'अपर रेस्पिरेटरी पैनल' का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है, जिससे कोरोना के केस भी पकड़ में आ रहे हैं।</p>
<p><strong>आंध्र प्रदेश में कोरोना वायरस के 12 मामले, चार लोगों की मौत</strong><br>
इससे पहले आंध्र प्रदेश में 26 जून से 16 जुलाई के बीच कोविड के 12 मामले सामने आए हैं, जिनमें से चार लोगों की मौत हुई है। राज्य के स्वास्थ्य सचिव वीरपांडियन ने गुरुवार को बताया कि 26 जून से 16 जुलाई के बीच कोरोनावायरस से चार लोगों की मौत हुई है। इनमें से तीन मामले कडप्पा जिले से और एक मामला काकीनाडा जिले से था। ये चारों लोग पहले से ही गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे और कोविड से संक्रमित थे।</p>
<p>इस साल कोविड का पहला मामला 26 जून को कडप्पा जिले में सामने आया था, जबकि एक जुलाई से 16 जुलाई के बीच 11 और लोगों में कोविड की पुष्टि हुई। अकेले कडप्पा जिले में कोरोनावायरस के आठ मामले दर्ज किए गए। गुंटूर जिले में दो मामले और विशाखापत्तनम व काकीनाडा जिलों में एक-एक मामला दर्ज किया गया। इन पांच लोगों के स्वाब के नमूने जांच के लिए पुणे स्थित नेशनल वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट भेजे गए थे।</p>]]> </content:encoded>
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<title>होर्मुज संकट के बीच भारत अलर्ट, तेल&#45;गैस आयात के लिए बदला समुद्री रास्ता</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्‍ली     अमेरिका और ईरान के बीच फिर से जंग छिड़ने से स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव काफी ज्‍यादा बढ़ चुका है. ज्‍यादातर जहाज होर्मुज के बजाय वैकल्पिक रास्‍ते को अपना रहे हैं. S&amp;P ग्‍लोबल एनर्जी के नए रिसर्च के अनुसार, जंग फारस की खाड़ी से तेल LNG और  निर्यात को तेजी से … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 21:15:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>होर्मुज, संकट, के, बीच, भारत, अलर्ट, तेल-गैस, आयात, के, लिए, बदला, समुद्री, रास्ता</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्‍ली</strong><br>
   <br>
अमेरिका और ईरान के बीच फिर से जंग छिड़ने से स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव काफी ज्‍यादा बढ़ चुका है. ज्‍यादातर जहाज होर्मुज के बजाय वैकल्पिक रास्‍ते को अपना रहे हैं. S&P ग्‍लोबल एनर्जी के नए रिसर्च के अनुसार, जंग फारस की खाड़ी से तेल LNG और  निर्यात को तेजी से कम कर रही है. जबकि 17 जून को समझौता होने के बाद से तेल और गैस का निर्यात तेजी से बढ़ा था, लेकिन अब ये कम हो चुका है। </p>
<p>इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि भारत होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते रिस्‍क से बचने के लिए कच्चे तेल और LNG के आयात को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ओमान के रास्ते मोड़ रहा है. इसका मतलब है कि भारत अपने तेल-गैस की आपूर्ति पूरी करने के लिए वैकल्किक रास्‍तों का अपना रहा है। </p>
<p><strong>ईरान की वैकल्‍प‍िक रास्‍तों पर हमले की चेतावनी</strong><br>
वहीं दूसरी ओर, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके तेल एक्‍सपोर्ट को रोका गया तो वह फुजैरा पाइपलाइन और सऊदी अरब की ईस्‍ट-वेस्‍ट पाइपलाइन समेत अन्‍य वैकल्पिक रास्‍तों को निशाना बना सकता है। </p>
<p><strong>तेजी से कम हो रही है टैंकरों की संख्‍या </strong><br>
एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के पोत ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले लदे एलएनजी के संयुक्त 10 दिन एवरेज में जून के अंत में लगभग 0.8 कार्गो प्रति दिन से घटकर 15 जुलाई तक केवल 0.2 कार्गो प्रति दिन रह गया है। </p>
<p>पिछले सप्ताह फारस की खाड़ी से केवल एक एलएनजी कार्गो के निकलने की जानकारी मिली है, जो कतर एनर्जी एलएनजी के अल रेकाय्यात पर 7 जुलाई को हुए हमले के बाद जहाज मालिकों के बीच बढ़ती सतर्कता के कारण है. संघर्ष शुरू होने के बाद से एलएनजी पोत पर यह पहला सीधा हमला था. रिसर्चर मेहरून एतेबारी ने कहा कि हमारा अनुमान है कि निर्यात को सीमित करने वाला मुख्‍य कारक गैस क्षमता में बढोतरी के बजाय जहाजरानी संबंधी बधाएं हैं। </p>
<p><strong>उत्‍पादन और लोडिंग में नहीं हो रही कमी</strong><br>
निर्यात में आई मंदी LNG प्‍लांटों की एक्‍शन के बिल्‍कुल अलग है. कतर एनर्जी एलएनजी और यूएसई की एडीएनओसी एलएनजी में एलएनजी उत्‍पादन और जहाजों पर माल की लोडिंग, बाहरी शिपिंग में रुकावट के बावजूद ज्‍यादा मजबूत गति से जारी है. इसके कारण फारस की खाड़ी में प्रतीक्षा कर रहे टैंकरों में LNG का भंडार बढ़ता जा रहा है। </p>
<p><strong>होर्मुज खुलते ही पूरी हो सकती है आपूर्ति</strong><br>
जुलाई के मध्य तक अकेले कतर के सात लदे हुए एलएनजी वाहक जहाजों में लगभग 0.57 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी होने का अनुमान था, जबकि एसएंडपी ग्लोबल का अनुमान है कि फारस की खाड़ी के भीतर वर्तमान में लगभग 1.9 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी टैंकर क्षमता मौजूद है. अगर आने वाले हफ्तों में होर्मुज जलडमरूमध्य की प्रभावी नाकाबंदी में ढील दी जाती है, तो ये जहाज निर्यात में तेजी आ सकती है, जिससे पहले से उत्पादित और लोड की गई एलएनजी आपूर्ति को सामान्‍य कर सकती है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>सोनम वांगचुक के समर्थन में अमेरिका में प्रदर्शन, वॉशिंगटन में गूंजा लद्दाख का मुद्दा</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक के समर्थन में अब अमेरिका में भी आवाज उठने लगी है. वॉशिंगटन डीसी में शुक्रवार को दो अमेरिकी नागरिक संगठनों ने प्रदर्शन कर भारत सरकार से कथित NEET परीक्षा पेपर लीक पर तत्काल कार्रवाई करने और प्रदर्शनकारियों से बातचीत शुरू करने की … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 21:15:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>सोनम, वांगचुक, के, समर्थन, में, अमेरिका, में, प्रदर्शन, वॉशिंगटन, में, गूंजा, लद्दाख, का, मुद्दा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong><br>
दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक के समर्थन में अब अमेरिका में भी आवाज उठने लगी है. वॉशिंगटन डीसी में शुक्रवार को दो अमेरिकी नागरिक संगठनों ने प्रदर्शन कर भारत सरकार से कथित NEET परीक्षा पेपर लीक पर तत्काल कार्रवाई करने और प्रदर्शनकारियों से बातचीत शुरू करने की मांग की। </p>
<p>'हिंदूज़ फॉर ह्यूमन राइट्स' और 'द आज़ादी प्रोजेक्ट' के कार्यकर्ता भारतीय दूतावास के पास महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने जमा हुए. प्रदर्शनकारियों ने सोनम वांगचुक के समर्थन में तख्तियां उठाईं और एजुकेशन सिस्टम में सुधार, जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। </p>
<p>प्रदर्शन से पहले 'हिंदूज़ फॉर ह्यूमन राइट्स' ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ओपन लेटर भी लिखा. संगठन ने कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों से तुरंत बातचीत करनी चाहिए, परीक्षा व्यवस्था में सामने आई खामियों पर ठोस जवाब देना चाहिए और जवाबदेही तय करने के लिए समय पर प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। </p>
<p><strong>भारत सरकार को प्रदर्शनकारियों से बात करना चाहिए- सुनीता</strong><br>
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स की कार्यकारी निदेशक सुनीता विश्वनाथ ने सोनम वांगचुक के समर्थन में अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, "भारत सरकार को अब प्रदर्शनकारियों से मिलना चाहिए। जो भी समस्या है उसको बातचीत के जरिए सुलझाना चाहिए। यह काम जल्दी होना चाहिए, इससे पहले की उदासीनता किसी व्यक्ति की जान ले ले।" सुनीता ने कहा कि भारत में जो कुछ भी हो रहा है। पूरी दुनिया की नजर उस पर है। उदासीनता दिखाने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से भी अपील की कि जान को जोखिम में डालना सही नहीं है। उन्होंने कहा, "प्रदर्शनकारियों की चिंताओं को भारत और दुनिया भर में लोगों ने सुना है। उन्हें अपनी मांगों की गंभीरता दिखाने के लिए अपनी सेहत का बलिदान नहीं देना चाहिए।"</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री मोदी को लिखा खुला खत</strong><br>
बता दें इससे पहले सप्ताह की शुरुआत में इस समूह ने प्रधानमंत्री मोदी को खुला खत लिखा था। इसमें उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए कहा था कि प्रदर्शनकारियों को नजरंदाज नहीं करना चाहिए। खत में लिखा था, "सरकार को प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने परीक्षाओं में जिन कमियों की पहचान की है। उन्हें देखना चाहिए और उसका सार्थक जवाब दिया जाना चाहिए। लोकतंत्र में जवाबदेही के साथ ही प्रक्रिया स्थापित की जा सकती है। सरकार को भी इसका ध्यान रखना चाहिए।"</p>
<p>गौरलतब है कि नीट पेपर लीक समेत तमाम मुद्दों को लेकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों ने जंतर मंतर पर डेरा डाला हुआ है। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और जेएनयू के कुछ छात्रों ने भी उनके समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की शुरुआत की थी। आज उनकी भूख हड़ताल का 21वां दिन है। दिल्ली पुलिस शनिवार को उन्हें उठाकर अस्पताल ले गई है। विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया है। वहीं दूसरी तरफ कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजित दिपके ने उनके समर्थन में भूख हड़ताल की शुरुआत की है।</p>
<p><strong>प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सरकार करे संवाद</strong><br>
संगठन की कार्यकारी निदेशक सुनीता विश्वनाथ ने कहा कि सरकार को अब और इंतजार नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए तुरंत संवाद शुरू किया जाए, ताकि किसी की जान पर संकट न आए। </p>
<p>संगठन ने सोनम वांगचुक और भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से भी अपील की कि वे अपनी सेहत को प्राथमिकता दें. बयान में कहा गया कि उनकी आवाज भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई हिस्सों तक पहुंच चुकी है और अपनी मांगों को साबित करने के लिए उन्हें अपनी जान जोखिम में डालने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। </p>
<p><strong>28 जून से भूख हड़ताल पर थे सोनम वांगचुक</strong><br>
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे. उनका आंदोलन कथित NEET परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग को लेकर शुरू हुआ था. शनिवार को उनकी बिगड़ती सेहत के चलते दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले गई. अब वॉशिंगटन में हुए इस प्रदर्शन ने इस आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना दिया है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>लद्दाख में ONGC का बड़ा कमाल, 14,000 फीट ऊंचाई पर खोदे 1000 मीटर गहरे जियोथर्मल कुएं, धरती की गर्मी से बनेगी बिजली</title>
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<description><![CDATA[ लेह  लद्दाख की Puga Valley में देश के पहले जियोथर्मल एनर्जी प्रोजेक्ट की शुरुआत हो गई है. उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने शुक्रवार को देश के सबसे गहरे जियोथर्मल कुओं को कमीशन किया. यह भारत के क्लीन एनर्जी मिशन की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है. ONGC एनर्जी सेंटर इस यूनियन टेरिटरी में दो जियोथर्मल … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 21:15:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>लद्दाख, में, ONGC, का, बड़ा, कमाल, 14, 000, फीट, ऊंचाई, पर, खोदे, 1000, मीटर, गहरे, जियोथर्मल, कुएं, धरती, की, गर्मी, से, बनेगी, बिजली</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लेह</strong><br>
 लद्दाख की Puga Valley में देश के पहले जियोथर्मल एनर्जी प्रोजेक्ट की शुरुआत हो गई है. उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने शुक्रवार को देश के सबसे गहरे जियोथर्मल कुओं को कमीशन किया. यह भारत के क्लीन एनर्जी मिशन की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है. ONGC एनर्जी सेंटर इस यूनियन टेरिटरी में दो जियोथर्मल कुओं पर काम कर रहा है. 14 हजार फीट की ऊंचाई पर 1000 मीटर गहरे दो कुएं तैयार किए गए हैं. इन कुओं से लद्दाख को क्लीन एनर्जी हब बनाने में काफी मदद मिलेगी. वीके सक्सेना ने कहा, ‘पुगा वैली में मिली यह कामयाबी भारत के नेट-जीरो सफर के लिए ब्लूप्रिंट का काम करेगी’. इससे लद्दाख को एक कार्बन-न्यूट्रल और इको फ्रेंडली रीजन बनाने में बहुत बड़ा सपोर्ट मिलेगा. यह अभी 1 मेगावॉट का पायलट प्रोजेक्ट है. इसे बाद में कमर्शियल लेवल पर बड़ा किया जाएगा। </p>
<p><strong>लद्दाख में शुरू हुए देश के पहले जियोथर्मल प्रोजेक्ट से आखिर क्या फायदे होंगे?</strong><br>
जियोथर्मल एनर्जी का मतलब धरती के अंदर मौजूद प्राकृतिक गर्मी से है. इस गर्मी का इस्तेमाल करके टर्बाइन चलाए जाते हैं और बिजली बनती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह 24 घंटे और 365 दिन काम करती है। </p>
<p>सोलर या विंड एनर्जी की तरह यह मौसम या सूरज की रोशनी पर निर्भर नहीं है. लद्दाख में सर्दियों में तापमान माइनस 20 से 30 डिग्री तक चला जाता है. ऐसे में यह जियोथर्मल प्रोजेक्ट वहां के लोगों के लिए वरदान साबित होगा। </p>
<p>इससे बनने वाली बिजली से घरों को गर्म रखने में बहुत मदद मिलेगी. स्पेस हीटिंग और ग्रीनहाउस फार्मिंग में भी इसका बड़ा यूज होगा. स्थानीय लोगों को जमा देने वाली सर्दी में भी ताजी सब्जियां उगाने का मौका मिलेगा. इसके अलावा टूरिस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को भी लगातार पावर सप्लाई मिल सकेगी। </p>
<p><strong>जियोथर्मल एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए पुगा वैली को ही क्यों चुना गया और कैसे काम होगा?</strong></p>
<p>    पुगा वैली भारत में जियोथर्मल एनर्जी का सबसे बड़ा और एक्टिव हॉटस्पॉट है. हिमालय के इस हिस्से में धरती की गर्मी काफी ऊपर मौजूद है। </p>
<p>    प्रोजेक्ट इंजीनियर्स के मुताबिक यहां जमीन के काफी करीब भारी मात्रा में गर्म पानी और भाप मौजूद है. 400 मीटर की गहराई पर ही 135 डिग्री सेल्सियस का अधिकतम तापमान रिकॉर्ड किया गया है। </p>
<p>    यह तापमान पायलट पावर प्लांट में बिजली बनाने के लिए काफी अच्छा माना जाता है. अभी इस गर्म पानी और भाप की आगे की टेक्निकल टेस्टिंग चल रही है। </p>
<p>    इंजीनियर्स को उम्मीद है कि 1000 मीटर की गहराई पर इससे भी ज्यादा तापमान मिलेगा. इस गर्मी से निकलने वाली स्टीम से पावर प्लांट के जेनरेटर चलेंगे। </p>
<p>    अभी यह 1 मेगावॉट का पायलट प्रोजेक्ट है. सफल होने पर इसे बड़े कमर्शियल पावर प्लांट में बदल दिया जाएगा. इससे पूरे लद्दाख को फायदा होगा। </p>
<p>
<strong>14 हजार फीट की ऊंचाई पर 1000 मीटर गहरे कुएं खोदने में क्या चुनौतियां सामने आईं?</strong></p>
<p>लद्दाख जैसी ऊंचाई वाली जगह पर कोई भी इंडस्ट्रियल कंस्ट्रक्शन करना आसान नहीं होता है. पुगा वैली समुद्र तल से 14 हजार फीट से ज्यादा ऊंचाई पर मौजूद है. यहां ऑक्सीजन की कमी और खराब मौसम सबसे बड़ी रुकावट होते हैं. भारी ड्रिलिंग मशीनों को खतरनाक पहाड़ी रास्तों से यहां तक लाना एक बड़ा टास्क था. इंजीनियर्स ने बताया कि जमीन के अंदर ड्रिलिंग के वक्त काफी कॉम्प्लेक्स हालात का सामना करना पड़ा। </p>
<p>इसके बावजूद 22 मई 2026 को पहले कुएं की ड्रिलिंग 1000 मीटर तक पूरी कर ली गई. इसके बाद 3 जून को दूसरे कुएं का काम शुरू हुआ. रिकॉर्ड एक महीने से भी कम समय में 8 जुलाई को दूसरा कुआं भी पूरा हो गया. यह ओएनजीसी एनर्जी सेंटर और पूरी प्रोजेक्ट टीम की बहुत बड़ी इंजीनियरिंग कामयाबी है। </p>
<p>प्रोजेक्ट में दे<strong>री क्यों हुई और लद्दाख के कार्बन न्यूट्रल मिशन के लिए यह कितना अहम है?</strong></p>
<p>यह ऐतिहासिक प्रोजेक्ट बीच में कुछ समय के लिए रुक गया था. लद्दाख प्रशासन, लद्दाख ऑटोनोमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल लेह और ओएनजीसी के बीच एक अहम एमओयू खत्म हो गया था. इसके कारण प्रोजेक्ट के काम में कई महीनों की क्रिटिकल देरी हुई। </p>
<p>इसके बाद एलजी वीके सक्सेना ने मामले में तुरंत दखल दिया. उन्होंने सभी पक्षों से बात करके इस एमओयू को अगले पांच साल के लिए रिन्यू करवाया. इसके बाद काम दोबारा शुरू हुआ और कुएं कामयाबी के साथ पूरे किए गए। </p>
<p>भारत सरकार ने लद्दाख को कार्बन न्यूट्रल बनाने का बड़ा विजन रखा है. यह जियोथर्मल प्रोजेक्ट उस विजन को जमीन पर उतारने का सबसे सॉलिड रास्ता है. इससे डीजल जेनरेटर और महंगे फॉसिल फ्यूल पर लद्दाख की निर्भरता खत्म हो जाएगी. इससे पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और इको टूरिज्म को भी नया बूस्ट मिलेगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>अभिषेक बनर्जी के कथित अवैध दफ्तर पर चला बुलडोजर, तीन JCB से ढहाई जा रही पांच मंजिला इमारत</title>
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<description><![CDATA[ कोलकाता पश्चिम बंगाल में बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है. ममता बनर्जी के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर बुलडोजर चला है. प्रशासन ने इसे &#039;अवैध रूप से निर्मित&#039; कार्यालय बताया है. उनका यह ऑफिस अमताला-बारुईपुर रोड पर स्थित है. बताया जा रहा है कि प्रशासन ने इस मामले में नोटिस जारी किया … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 19:15:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>अभिषेक, बनर्जी, के, कथित, अवैध, दफ्तर, पर, चला, बुलडोजर, तीन, JCB, से, ढहाई, जा, रही, पांच, मंजिला, इमारत</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कोलकाता</strong></p>
<p>पश्चिम बंगाल में बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है. ममता बनर्जी के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर बुलडोजर चला है. प्रशासन ने इसे 'अवैध रूप से निर्मित' कार्यालय बताया है. उनका यह ऑफिस अमताला-बारुईपुर रोड पर स्थित है. बताया जा रहा है कि प्रशासन ने इस मामले में नोटिस जारी किया था, लेकिन अभिषेक बनर्जी की तरफ से कोई जबाव नहीं दिया गया था. जिसके बाद शनिवार को इसके गिराने की कार्रवाई शुरू हुई है. प्रशासन ने इस इमारत को ढहा दिया है. सुबह बुलडोजर के साथ प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और पांच मंजिला इमारत में अवैध रूप से निर्मित वाले हिस्से को गिरा दिया गया। </p>
<p><strong>अभिषेक बनर्जी के ऑफिस पर लगा था नोटिस </strong><br>
बता दें कि अभिषेक बनर्जी का यह ऑफिस साउथ 24 परगना में स्थित है, जहां पहले पहले प्रशासन की तरफ से नोटिस लगाया गया था. जिसमें यह बताया गया था कि इमारत बिना मंजूरी के निर्माण हुई है. लेकिन जब इस पर डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी की तरफ से जबाव नहीं दिया गया तो यह एक्शन हुआ. वहीं कार्रवाई से पहले मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसबल तैनात किया गया था. इस एक्शन के बाद पश्चिम बंगाल में सियासी पारा गर्माता दिख रहा है. बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के बाद से ही यह कार्यालय बंद था. लेकिन कार्यालय के वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं हुए थे। </p>
<p>सुरक्षा के लिहाज से यहां बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं. इससे पहले प्रशासन ने एक नोटिस चिपकाकर आरोप लगाया था कि यह इमारत बिना मंज़ूरी के बनाई गई थी. विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद से यह कार्यालय बंद था. जिला प्रशासन का दावा है कि यह कार्यालय अवैध रूप से बनाया गया था. यह कार्यालय बिना किसी दस्तावेज़ के बनाया गया था. कार्यालय के निर्माण से संबंधित कोई वैध दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किया जा सका। </p>
<p>प्रशासन की इस कार्रवाई से पहले प्र एक नोटिस चिपकाया था जिसमें आरोप लगाया गया था कि कार्यालय का निर्माण बिना अनुमति के किया गया था.जिला प्रशासन का दावा था कि यह कार्यालय बिना मंजरी बिल्डिंग प्लान के गैर कानूनी तरीके से बनाया गया था. स आरोप के आधार पर पहले दो बार सुनवाई के लिए अभिषेक बनर्जी को नोटिस भेजा गया था, लेकिन तय सुनवाई में कोई नहीं आया, इसलिए आगे की कार्रवाई की गई। </p>
<p>शनिवार सुबह से ही भारी पुलिस बल, केंद्रीय बल, फ़ायर ब्रिगेड, BDO और BLRO के साथ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए. इस दौरान पूरे इलाके को गार्ड रेल से घेर दिया गया और सुरक्षा कड़ी कर दी गई. बिल्डिंग के शेड और ढांचे को चरणों में गिराने के लिए तीन बुलडोज़र मंगाए गए. यह भी पता चला है कि विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद से ही कार्यालय पर ताला लगा हुआ था। </p>
<p>यह घटनाक्रम कोलकाता नगर निगम (केएमसी) द्वारा अभिषेक बनर्जी, उनके परिवार के सदस्यों और उनकी कंपनी ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ से जुड़े नामों पर दर्ज 17 संपत्तियों के लिए नोटिस जारी करने के बाद सामने आया है. जिन संपत्तियों के लिए नोटिस जारी किए गए हैं, उनमें हरीश मुखर्जी रोड स्थित बनर्जी का आवास ‘शांतिनिकेतन’ भी शामिल है. यह मुद्दा तब सामने आया जब बीजेपी ने डायमंड हार्बर सांसद से जुड़ी 43 संपत्तियों की एक सूची जारी की, जिनमें से कई कथित तौर पर उनके सहयोगियों के संयुक्त स्वामित्व में थीं। </p>
<p>फिलहाल अभिषेक बनर्जी के सांसद कार्यालय और तृणमूल कांग्रेस ने इस कार्रवाई पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के कई नेताओं को संपत्ति से जुड़े इसी तरह के मामलों में कार्रवाई का सामना करना पड़ा है. दक्षिण 24 परगना जिले में इस महीने की शुरुआत में टीएमसी नेता सौकत मोल्ला के बेटे से जुड़े एक कैफे को कथित तौर पर अतिक्रमण की गई जमीन पर निर्मित होने के कारण ध्वस्त कर दिया गया था। </p>
<p><strong>पूर्व तृणमूल विधायक शौकत मोल्ला की डिग्री पर विवाद</strong></p>
<p>तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक शौकत मोल्ला की शैक्षणिक योग्यता व चुनावी हलफनामे में दी गई जानकारी पर प्रश्न उठाते हुए भाजपा नेता अभिजीत दास ने बारुईपुर के पुलिस अधीक्षक कार्यालय में प्राथमिकी दर्ज कराई है।</p>
<p>अभिजीत दास ने शौकत के फर्जी डिग्री व प्रमाणपत्र तैयार करने वाले गिरोह से जुड़े होने का भी संदेह जताया है। प्राथमिकी में तृणमूल (ममता गुट) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी, उनके सहयोगी सुमित राय और अयन घोष दस्तीदार सहित अन्य लोगों के भी नाम हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।</p>
<p><strong>अभिजीत दास ने शौकत मोल्ला की शैक्षणिक योग्यता पर उठाए सवाल</strong><br>
भाजपा नेता के अनुसार पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान आयोग को दिए गए हलफनामे में शौकत ने दावा किया था कि उन्होंने राजनीति विज्ञान में एमए किया है और राजस्थान के एक विश्वविद्यालय से नियमित (रेगुलर) पाठ्यक्रम के तहत स्नातक की डिग्री हासिल की है।</p>
<p>अभिजीत दास ने सवाल उठाया कि 2016 से कैनिंग पूर्व से विधायक रहने के दौरान शौकत मोल्ला नियमित रूप से राजस्थान जाकर पढ़ाई कैसे कर सकते थे और डिग्री कैसे प्राप्त की?</p>
<p>अभिजीत ने दावा किया कि शौकत की वास्तविक शैक्षणिक योग्यता इससे कहीं कम है और यह पूरा मामला फर्जी डिग्री एवं प्रमाणपत्र रैकेट का हिस्सा हो सकता है।</p>
<p>एफआइआर में अभिषेक और उनके सहयोगियों के नाम शामिल करने पर अभिजीत ने कहा कि शौकत अभिषेक के करीबी माने जाते हैं। लंबे समय से दस्तावेज के तौर पर फर्जी डिग्रियों के इस्तेमाल के पीछे किसी प्रभावशाली व्यक्ति या मध्यस्थ की भूमिका रही हो सकती है। इसी आशंका के आधार पर उन्होंने अभिषेक और उनके सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।</p>
<p>पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों के बाद ये दफ्तर बंद पड़ा हुआ था. डायमंड हार्बर में जब भी कोई बैठक होती थी, वह इसी कार्यालय में होती थी. इसका आयोजन तृणमूल कांग्रेस द्वारा किया जाता था। </p>
<p><strong>पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की सरकार पिछली सरकार में बने अवैध इमारत और सरकारी जमीनों पर हुए अवैध कब्जे पर बुलडोजर चला रही है। </strong></p>
<p>बुलडोजर एक्शन की यह कार्रवाई तब हो रही जब कोलकाता नगर निगम (KMC) ने अभिषेक बनर्जी, उनके परिवार के सदस्यों और उनकी कंपनी 'लीप्स एंड बाउंड्स' से जुड़े नामों पर दर्ज 17 संपत्तियों के लिए गिराने का नोटिस जारी किया है. जिन संपत्तियों को नोटिस भेजा गया, उनमें हरीश मुखर्जी रोड पर स्थित बनर्जी का घर 'शांतिनिकेतन' भी शामिल है। </p>
<p><strong>अभिषेक बनर्जी का यह ऑफिस टीमएमसी का अहम कार्यालय था. यहां अक्सर बड़ी बैठकें होती थी. लेकिन विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद यहां सन्नाटा पसरा रहा है।  </strong></p>]]> </content:encoded>
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<title>अहमदाबाद पटाखा फैक्ट्री विस्फोट पर पीएम मोदी ने जताया दुख, मुआवजे का ऐलान</title>
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<description><![CDATA[  गुजरात पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया और मुआवजे की घोषणा की. प्रधानमंत्री कार्यालय ने पोस्ट किया, &quot;गुजरात के अहमदाबाद में एक पटाखा फैक्ट्री में हुए हादसे में लोगों की मौत की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ. दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं. घायलों … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 19:15:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>अहमदाबाद, पटाखा, फैक्ट्री, विस्फोट, पर, पीएम, मोदी, ने, जताया, दुख, मुआवजे, का, ऐलान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p> <strong>गुजरात</strong><br>
पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया और मुआवजे की घोषणा की. प्रधानमंत्री कार्यालय ने पोस्ट किया, "गुजरात के अहमदाबाद में एक पटाखा फैक्ट्री में हुए हादसे में लोगों की मौत की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ. दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं. घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं. स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों को हर संभव मदद दे रहा है. PMNRF से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी. घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे."</p>
<p><strong>गुजरात के मुख्यमंत्री ने हादसे पर जताया दुख, मुआवजे की घोषणा</strong><br>
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने हादसे पर दुख जताया. उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया और लिखा- "अहमदाबाद में पटाखे की फैक्ट्री में हुए हादसे की खबर बेहद दुखद है. मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि इस त्रासदी में जान गंवाने वालों की आत्मा को शांति मिले. मैं उनके परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं. स्थानीय प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों को हर संभव मदद और इलाज मुहैया कराया जा रहा है. ईश्वर से प्रार्थना है कि हादसे में घायल हुए लोग जल्द स्वस्थ हों. राज्य सरकार मृतकों के परिवारों को 4 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की सहायता राशि देगी.</p>]]> </content:encoded>
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<title>भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट ‘विक्रम&#45;1’ लॉन्च, जानिए इसकी खासियत और मिशन का बड़ा मकसद</title>
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<description><![CDATA[ श्रीहरिकोटा भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट &#039;विक्रम-1&#039; शनिवार को सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से देश के पहले प्राइवेट रॉकेट ने तकनीकी पेलोड और विशेष पोस्टकार्ड के साथ उड़ान भरी. यह रॉकेट 450 किलोमीटर तक पृथ्वी की निचली कक्षा तक जाएगा. भारत के लिए ये किसी ऐतिहासिक … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 18:00:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>भारत, का, पहला, प्राइवेट, रॉकेट, ‘विक्रम-1’, लॉन्च, जानिए, इसकी, खासियत, और, मिशन, का, बड़ा, मकसद</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>श्रीहरिकोटा</strong></p>
<p>भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट 'विक्रम-1' शनिवार को सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से देश के पहले प्राइवेट रॉकेट ने तकनीकी पेलोड और विशेष पोस्टकार्ड के साथ उड़ान भरी. यह रॉकेट 450 किलोमीटर तक पृथ्वी की निचली कक्षा तक जाएगा. भारत के लिए ये किसी ऐतिहासिक उपलब्धि से कम नहीं है. देश में पहली बार कोई प्राइवेट रॉकेट लॉन्च हुआ है. इस खास मौके पर इसरो के वैज्ञानिक भी मौजूद रहे. लॉन्चिंग से पहले पीएम मोदी ने भी बधाई दी. इस लॉन्चिंग को 'मिशन आगमन' नाम दिया गया है. जिसके लिए पहले से तैयारियां जोर शोर से चल रही थीं। </p>
<p>इस बीच केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट, विक्रम-1 के लॉन्च का लाइव प्रसारण देखा। </p>
<p><strong>विक्रम-1 की खास बातें</strong></p>
<ul>
<li>    विक्रम-1 भारत का पहला कमर्शियल लॉन्च व्हीकल </li>
<li>    रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष प्रोग्राम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर विक्रम-1 रखा </li>
<li>    विक्रम-1 सैटेलाइट को 'लो अर्थ ऑर्बिट' में ले जाने के लिए डिजाइन किया गया </li>
</ul>
<p>स्काईरूट एयरोस्पेस कंपनी ने 18 नवंबर, 2022 को विक्रम-S नाम का एक सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था. यह पृथ्वी की सतह से 301.4 सेकंड की दूरी तय कर 88.8 किमी. की ऊंचाई पर 'लो अर्थ ऑर्बिट' में पहुंचा. इस टेस्ट रॉकेट की सफलता के बाद तीन साल में ही विक्रम-1 बना लिया गया। </p>
<p><strong>विक्रम-1 के बारे में जानें</strong></p>
<ul>
<li>    <strong> विक्रम-1 रॉकेट 24 मीटर लंबा</strong></li>
<li><strong>    पूरी तरह हल्के कार्बन कॉम्पोजिट ढांचे से तैयार </strong></li>
<li><strong>    तीन सॉल‍िड फ्यूल स्‍टेज और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल से ऑपरेट </strong></li>
<li><strong>    लगभग 350 किलो तक के पेलोड को 450 किमी. की पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित करने की क्षमता</strong></li>
<li><strong>    लैब में तैयार ‘डायमंड लोटस' भी पेलोड के रूप में भेजा गया</strong></li>
<li><strong>     भविष्य के वाणिज्यिक प्रक्षेपणों का मार्ग प्रशस्त </strong></li>
<li><strong>    पीएम मोदी का स्पेशल मैसेज भी साथ लेकर गया</strong></li>
</ul>
<p><strong>विक्रम-1 लॉन्च करने की वजह क्या?</strong><br>
इसे अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप्स की शुरुआत माना जा रहा है. विक्रम-1 की लॉन्चिंग देश के सरकारी स्पेस मिशन से इंडस्ट्री-लेड स्पेस मिशन की ओर बढ़ने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है. दरअसल केंद्र ने साल 2023 में भारतीय अंतरिक्ष नीति जारी की थी. 2024 से भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में 100 प्रतिशत फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट की परमिशन दी गई थी. केंद्र सरकार के मुताबिक, पिछले एक दशक में अंतरिक्ष क्षेत्र में 300 से ज्यादा स्टार्टअप शुरू हुए हैं। </p>
<p><strong>ऑर्बिटल रॉकेट क्यों है खास?</strong><br>
सब-ऑर्बिटल और ऑर्बिटल रॉकेट में बड़ा फर्क होता है. सब-ऑर्बिटल रॉकेट अंतरिक्ष तक जाकर वापस आ जाता है. लेकिन ऑर्बिटल रॉकेट सैटेलाइट को इतनी तेज रफ्तार देता है कि वह पृथ्वी की ऑर्बिट में घूमता रहता है. अगर विक्रम-1 सफल रहा, तो पहली बार किसी भारतीय प्राइवेट कंपनी का रॉकेट यह काम करेगा। </p>
<p><strong>कैसा है विक्रम-1 रॉकेट?</strong><br>
विक्रम-1 चार चरणों वाला रॉकेट है. इसके पहले तीन चरणों में ठोस ईंधन का इस्तेमाल किया गया है. चौथे चरण में लिक्विड फ्यूल इंजन लगा है, जिसे जरूरत पड़ने पर दोबारा चालू किया जा सकता है. इससे सैटेलाइट को उसकी तय ऑर्बिट में ज्यादा सही जगह पर पहुंचाने में मदद मिलती है. यह रॉकेट खास तौर पर छोटे सैटेलाइट लॉन्च करने के लिए बनाया गया है। </p>
<p><strong>स्काईरूट की शुरुआत कैसे हुई?</strong><br>
स्काईरूट एरोस्पेस की शुरुआत 2018 में इसरो के पूर्व इंजीनियर पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका ने की थी. 2020 में स्पेस सेक्टर खुलने के बाद कंपनी ने ऑर्बिटल रॉकेट बनाने पर तेजी से काम किया. अब विक्रम-1 उसी सफर का सबसे बड़ा पड़ाव है। </p>
<p>अगर यह मिशन सफल रहता है, तो भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर को बड़ी मजबूती मिलेगी और भविष्य में देश से ज्यादा कमर्शियल सैटेलाइट लॉन्च किए जा सकेंगे. इस लॉन्च पर पूरे देश की नजर है, क्योंकि यह भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर की अब तक की सबसे बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। </p>
<p><strong>विक्रम-1 लॉन्चिंग के लिए कितने समय में हुआ तैयार?</strong><br>
भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 को तैयार करने में लंबा समय लगा. इसे 1,000 वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम ने कड़ी मेहनत के बाद कई महीनों में तैयार किया. जिसके बाद अब इसकी लॉन्चिंग हुई है. यह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में अपनी कक्षा में स्थापित हो गया है। </p>
<p><strong>देश के पहले प्राइवेट रॉकेट विक्रम-1 की खास बातें</strong></p>
<p>    'विक्रम-1' भारत का पहला निजी तौर पर विकसित रॉकेट है।</p>
<p>    इसे सैटेलाइट को ऑर्बिट में पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है।</p>
<p>    विक्रम-1 के ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल को पूरी तरह से 3डी-प्रिंटेड लिक्विड इंजन से पावर मिलती है।</p>
<p>    यह पहली बार है जब किसी भारतीय ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल में इस तरह के इंजन का इस्तेमाल किया जा रहा है।</p>
<p>    मिशन 'आगमन' नाम से इसका प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी-एसएचएआर) के फर्स्ट लॉन्चिंग पैड से की गई।</p>
<p>    विक्रम-1 की इस परीक्षण उड़ान के साथ ही भारत वैश्विक निजी कक्षीय प्रक्षेपण बाजार में प्रवेश कर गया है।</p>
<p>    पूरी तरह एक भारतीय निजी कंपनी की ओर से विकसित विक्रम-1 देश का पहला निजी निर्मित कक्षीय प्रक्षेपण यान है।</p>
<p>    इसे भारत की वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p>
<strong>पीएम मोदी का हाथ से लिखा 'वंदे मातरम' पोस्टकार्ड ले जाएगा</strong></p>
<p>    मिशन 'आगमन' का विक्रम-एस सबऑर्बिटल रॉकेट के सफल प्रक्षेपण के बाद स्काईरूट एयरोस्पेस का दूसरा अंतरिक्ष मिशन है।</p>
<p>    इस मिशन के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तलिखित 'वंदे मातरम' संदेश वाला एक पोस्टकार्ड भी विक्रम-1 प्रक्षेपण यान के साथ भेजा गया है।</p>
<p>    स्काईरूट एयरोस्पेस के अनुसार, प्रधानमंत्री का यह हाथों से लिखित संदेश परीक्षण उड़ान में शामिल विशेष पेलोडों में से एक होगा।</p>
<p>    कंपनी ने बताया कि मिशन में स्काईरूट टीम के सदस्यों, निवेशकों, नीति-निर्माताओं और दुनिया भर के शुभचिंतकों के हस्तलिखित संदेश भी शामिल किए गए हैं।</p>
<p>    कंपनी ने इसे कई हाथों से मनाया गया और लाखों लोगों की ओर से साझा किया गया एक उत्सव बताते हुए कहा कि ये स्मृति-चिह्न भारत के उभरते प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम के प्रति सामूहिक समर्थन और आकांक्षाओं का प्रतीक हैं।</p>
<p>    कंपनी के अनुसार, ये प्रतीकात्मक पेलोड उस साझा दृष्टि और सहयोगात्मक प्रयासों को भी दर्शाते हैं, जिन्होंने अंतरिक्ष अन्वेषण और नवाचार के क्षेत्र में भारत के नए दौर को आकार देने में योगदान दिया है।</p>
<p>
<strong>पीएम मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस को दी शुभकामनाएं</strong><br>
स्काईरूट एयरोस्पेस ने कहा कि विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनियों की तकनीकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करेगा और वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा के लिए एक नया ऐतिहासिक अध्याय। उन्होंने देशवासियों, खासकर युवाओं से आग्रह किया कि इस ऐतिहासिक मिशन को देखें और 'इंडिया विद विक्रम-1' का उपयोग करते हुए टीम स्काईरूट को अपनी शुभकामनाएं दें।</p>
<p><strong>कब और किसने की स्काईरूट की शुरुआत?</strong><br>
स्काईरूट की शुरुआत  2018 में हुई. कंपनी के फाउंडर पवन चंदाना और नागा भरत डाका हैं. ये दोनों ISRO के पूर्व वैज्ञानिक हैं. अपना बिजनेस शुरू करने के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने नेशनल स्पेस प्रोग्राम में अपनी सुरक्षित और प्रतिष्ठित नौकरी छोड़ दी. एक रॉकेट कंपनी बनाने के लिए फंड जुटाने, कुशल इंजीनियरिंग टीमें बनाने, नई टेक्नोलॉजी विकसित करने के लिए ग्राहकों को यह भरोसा दिलाने की जरूरत थी कि एक भारतीय स्टार्टअप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला कर सकता है। </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>सिर्फ गाली&#45;गलौज या अभद्र भाषा अश्लीलता नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में स्पष्ट किया कानून का दायरा</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने गाली के मामले में साफ किया है कि  सिर्फ गाली-गलौज, अपशब्द, अभद्र या अशिष्ट भाषा का इस्तेमाल करना भारतीय दंड संहिता यानी IPC की धारा 294 के तहत ‘अश्लीलता&#039; नहीं माना जा सकता. पीठ ने स्पष्ट किया कि कानून की नजर में अश्लीलता और अभद्रता अलग-अलग अवधारणाएं हैं. कोर्ट ने … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 18:00:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>सिर्फ, गाली-गलौज, या, अभद्र, भाषा, अश्लीलता, नहीं, सुप्रीम, कोर्ट, ने, फैसले, में, स्पष्ट, किया, कानून, का, दायरा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने गाली के मामले में साफ किया है कि  सिर्फ गाली-गलौज, अपशब्द, अभद्र या अशिष्ट भाषा का इस्तेमाल करना भारतीय दंड संहिता यानी IPC की धारा 294 के तहत ‘अश्लीलता' नहीं माना जा सकता. पीठ ने स्पष्ट किया कि कानून की नजर में अश्लीलता और अभद्रता अलग-अलग अवधारणाएं हैं. कोर्ट ने साफ किया कि कानून की नजर में अश्लीलता, गाली-गलौज या अपशब्दों से अलग है. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह टिप्पणी तमिलनाडु के 70 साल के व्यक्ति की अपील पर सुनवाई के दौरान की.मामला  2017 में जमीन विवाद के दौरान हुए झगड़े से जुड़ा था, जिसमें आरोपी पर गाली देने, धमकी देने और बिलहुक (धारदार हथियार) से हमला करने का आरोप था। </p>
<p><strong>क्या था पूरा मामला</strong><br>
अभियोजन पक्ष का आरोप अगस्त 2017 में जमीन के विवाद को लेकर हुई बहस में अपीलकर्ता ने शिकायतकर्ता को अभद्र भाषा में गालियां दी और उस पर हमला किया, जिससे उसे नाक की हड्डी में चोट भी आई. ट्रायल कोर्ट ने उसे आईपीसी और अनूसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत दोषी ठहराया, लेकिन मद्रास हाईकोर्ट ने उसे SC/ST एक्ट के तहत अपराधों से बरी कर दिया. कोर्ट ने आरोपी को धारा 294(बी) (सार्वजनिक स्थान पर अश्लील शब्द बोलना) और धारा 506(II) (आपराधिक धमकी) के आरोपों से बरी कर दिया, हालांकि धारा 326 (खतरनाक हथियार से गंभीर चोट पहुंचाना) के तहत दोषसिद्धि बरकरार रखी. आरोपी की उम्र, खराब स्वास्थ्य और विवाद की प्रकृति को देखते हुए अदालत ने उसकी सजा को ‘अदालत उठने तक की कैद' कर दिया और उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। </p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट ने बताई ये परिभाषा</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून की नजर में सिर्फ गाली, अपशब्द या अभद्र भाषा अपने आप में अश्लील नहीं होती, धारा 294 लागू होने के लिए यह साबित होना जरूरी है कि इस्तेमाल किए गए शब्द कामुकता से भरे हों, यौन उत्तेजना या वासनात्मक रुचि  पैदा करते हों और लोगों के नैतिक चरित्र को भ्रष्ट या विकृत करने की प्रवृत्ति रखते हों. अदालत ने कहा कि केवल किसी की भावनाएं आहत होना या भाषा का अशिष्ट होना पर्याप्त नहीं है.सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस अपराध को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष को दो बातें सिद्ध करनी होंगी. कथित अश्लील शब्द किसी सार्वजनिक स्थान या उसके आसपास बोले गए हों. उन शब्दों से वहां मौजूद अन्य लोगों को वास्तविक रूप से परेशानी हुई हो. मौजूदा मामले में अदालत ने पाया कि इन दोनों शर्तों को साबित नहीं किया गया। </p>
<p><strong>गुस्से में कही गई धमकी मात्र से धमकी का अपराध नहीं बनता</strong><br>
अदालत ने कहा कि झगड़े के दौरान गुस्से में कही गई धमकी मात्र से धारा 506(II) के तहत धमकी का अपराध नहीं बनता. यह साबित होना चाहिए कि धमकी का उद्देश्य सामने वाले व्यक्ति में भय पैदा करना या उसे कोई काम करने या न करने के लिए मजबूर करना था. इस मामले में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने माना कि आरोपी ने बिलहुक से हमला कर शिकायतकर्ता की नाक की हड्डी तोड़ दी थी, जो कानून के अनुसार गंभीर चोट  है. मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं इसलिए धारा 326 के तहत दोषसिद्धि सही है.सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि समय-समय पर अदालत यह स्पष्ट कर चुकी है कि अभद्र या अपमानजनक भाषा और अश्लीलता एक जैसी नहीं हैं. अश्लीलता का निर्धारण समकालीन सामाजिक मानकों और उसके यौन या कामुक प्रभाव के आधार पर किया जाएगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>भारत में जल्द आएंगे प्लास्टिक के नोट! RBI ने छपाई के लिए निकाला टेंडर, जानिए कैसे होंगे नए नोट</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की करेंसी छापने वाली सहायक कंपनी, भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने एक &#039;ग्लोबल एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट&#039; (EOI) जारी किया है. इसमें दुनिया भर के निर्माताओं से भारतीय बैंकनोट छापने के लिए सिक्योरिटी फीचर्स वाली ओपेसिफाइड पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट की सप्लाई करने के लिए बोलियां मंगवाई … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 17:00:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>भारत, में, जल्द, आएंगे, प्लास्टिक, के, नोट, RBI, ने, छपाई, के, लिए, निकाला, टेंडर, जानिए, कैसे, होंगे, नए, नोट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की करेंसी छापने वाली सहायक कंपनी, भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने एक 'ग्लोबल एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (EOI) जारी किया है. इसमें दुनिया भर के निर्माताओं से भारतीय बैंकनोट छापने के लिए सिक्योरिटी फीचर्स वाली ओपेसिफाइड पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट की सप्लाई करने के लिए बोलियां मंगवाई गई हैं। </p>
<p><strong>EOI में क्या लिखा?</strong><br>
इस EOI में BOPP (बायएक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन)-बेस्ड पॉलीमर सबस्ट्रेट की 68,000 रीम की अनुमानित मात्रा मांगी गई है. इसमें दो अलग-अलग मूल्यवर्ग (डिनॉमिनेशन) के लिए 34,000-34,000 रीम की जरूरत है, और हर रीम में 500 शीट होंगी. इस मटीरियल में सिक्योरिटी फीचर्स होने चाहिए, जैसे कि पोर्ट्रेट वाली साफ खिड़की, मेटैलिक अंक, मैग्नेटिक स्यूडो थ्रेड, शैडो इमेज और इरिडेसेंट पैटर्न. ये फीचर्स BRBNMPL और SPMCIL प्रेस में छपाई के लिए इस्तेमाल होने चाहिए। </p>
<p><strong>10 और 20 रुपये के आ सकते हैं नए नोट</strong><br>
एएनआई के मुताबिक, जानकार सूत्रों का कहना है कि शुरुआती चरण में पॉलीमर नोट कम मूल्यवर्ग (जैसे ₹10 और ₹20) के हो सकते हैं. नोट छापने के लिए इस्तेमाल होने वाली स्याही भी सिक्योरिटी जरूरतों के आधार पर खास तौर पर बनाई जाती है। सूत्रों के अनुसार, शुरुआती दौर में इस प्रायोगिक प्रोजेक्ट के तहत केवल 10 रुपये और 20 रुपये के ही पॉलीमर नोट जारी किए जाने की संभावना है. बाद में अन्‍य मूल्‍यवर्ग के पॉलीमर नोट भी जारी हो सकते है। </p>
<p>इन प्लास्टिक नोटों में एडवांस सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जाएंगे, जिससे नकली नोटों पर लगाम लगाने में बड़ी मदद मिलेगी. साथ ही, ये नोट पेपर करेंसी के मुकाबले ज्यादा समय तक चलेंगे और जल्दी फटेंगे नहीं। </p>
<p>
<strong>कब से चलन में आएंगे नोट?</strong><br>
रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के मुताबिक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया पॉलीमर नोटों को चलन में लाने की तैयारी तेज कर दी है। और ₹10-₹20 के नोटों के साथ इसका संचालन भी शुरू होने की संभावना जताई गई है। हालांकि अब तक इसके चलन की तारीख को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्लास्टिक नोटों का फुल-स्केल रोलआउट साल 2027 से शुरू हो सकता है।</p>
<p>
<strong>प्लास्टिक नोट कागजी नोट से कितनी अलग?</strong><br>
प्लास्टिक के नोट पेपर करेंसी के मुकाबले ज्‍यादा टिकाऊ होते हैं। उन पर गंदगी और नमी का असर कागजी नोट की तुलना में कम होता है, जिसके कारण उनकी सेल्फ लाइफ अधिक होती है। हालांकि प्लास्टिक नोट की छपाई का शुरुआती खर्च मौजूदा नोट की तुलना में अधिक हो सकता है लेकिन इनकी सेल्फ लाइफ अधिक होने के कारण बार-बार छापने की जरूरत नहीं होती. जिसके कारण समय के साथ लागत में भी कमी आ सकती है।</p>
<p><strong>60 देशों में चलते हैं प्लास्टिक के नोट</strong><br>
आरबीआई की ओर से पॉलीमर नोट को चलन में लाने का प्रयास पहली बार नहीं हो रहा है। आपको बता दें कि दुनिया के करीब 60 देशों में पॉलीमर नोट चलन में हैं। इसकी शुरुआत सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में हुई, उसके बाद कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, मलेशिया, थाईलैंड, रोमानिया और ब्रुनेई जैसे देशों में भी ये नोट चलन में आया। अब भारत में भी इसको चलाने पर जोर दिया जा रहा है।</p>
<p><strong>…तो फिर कागजी नोटों का क्या होगा?</strong><br>
आपके मन में ये सवाल भी आ सकता है कि पुराने नोटों का क्‍या होगा, जो कागज के हैं. पॉलीमर नोटों के आने का ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट बंद हो जाएंगे. सूत्रों के अनुसार, RBI ने भी यही स्पष्ट किया है। </p>
<p>बाजार में पहले से मौजूद कागजी बैंक नोट पूरी तरह से वैध (Legal Tender) बने रहेंगे और वे प्रचलन (Circulation) में जारी रहेंगे. प्लास्टिक नोट केवल एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में सिस्टम में शामिल किए जाएंगे। </p>
<p><strong>ग्लोबल टेंडर हुआ जारी, 18 अगस्त तक का समय</strong><br>
इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की नोट मुद्रण शाखा (Note Printing Arm) ने पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट्स (प्लास्टिक नोट बनाने वाले बेस मटीरियल) के लिए एक ग्‍लोबल टेंडर (Global EOI) जारी किया है। </p>
<p>इस ग्लोबल टेंडर के जरिए अंतरराष्ट्रीय बिडर्स को देश के लिए पॉलीमर सबस्ट्रेट बनाने और उसकी आपूर्ति करने के लिए आमंत्रित किया गया है. EOI के तहत बोली जमा करने की अंतिम तिथि 18 अगस्त तय की गई है. इस पूरे मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया के लिए आरबीआई को ईमेल भेजा गया है, हालांकि खबर लिखे जाने तक फिलहाल कोई जवाब नहीं मिला है। </p>
<p><strong>सबसे बड़ी शर्त.. चीन-पाकिस्तान से कारोबारी दूरी जरूरी</strong><br>
खास बात यह है कि EOI में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी कड़ी शर्तें शामिल हैं: बोली लगाने वालों को यह पक्का करना होगा कि चीन या पाकिस्तान में उनके कामकाज भारत से जुड़े किसी भी कारोबार से पूरी तरह अलग (फायरवॉल) हों, वे किसी भी देश से कच्चा माल न लें, और ऐसे कर्मचारियों को काम पर न रखें जिन्होंने चीन या पाकिस्तान में किसी भी भूमिका में काम किया हो। </p>
<p>भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों को योग्य होने के लिए DPIIT की रजिस्ट्रेशन कमिटी के पास रजिस्टर होना जरूरी है. BRBNMPL ने कहा कि अभी की जरूरत सिर्फ तुरंत की है, और सबस्ट्रेट के फील्ड ट्रायल सफल होने के बाद, बाद के टेंडर में कई तरह के नोटों के लिए बड़ी मात्रा में खरीद होने की संभावना है। </p>
<p>बोली लगाने वालों (चाहे वे घरेलू हों या ग्लोबल, और इनमें टेक्नोलॉजी सहयोगी, जॉइंट वेंचर पार्टनर या सब्सिडियरी भी शामिल हैं) के पास किसी सेंट्रल बैंक या बैंकनोट/सिक्योरिटी प्रिंटिंग ऑर्गनाइजेशन को सिक्योरिटी फीचर्स वाले पॉलीमर सबस्ट्रेट की सप्लाई करने का कम से कम तीन साल का अनुभव होना चाहिए. साथ ही, क्वालिफाई करने के लिए उन्हें कम से कम 20,400 रीम (अनुमानित मात्रा का 30 प्रतिशत) की पेशकश करनी होगी। </p>
<p><strong>देने होंगे पॉलीमर शीट के 10 सैंपल</strong><br>
आवेदकों को लेबोरेटरी टेस्टिंग के लिए पॉलीमर शीट के कम से कम 10 सैंपल भी जमा करने होंगे, जो जानवरों की चर्बी या DNA कंटेंट से मुक्त होने के लिए सर्टिफाइड हों. इसके साथ ही, उन्हें अपनी फाइनेंशियल नेट वर्थ, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और सिक्योरिटी क्लियरेंस की योग्यता का सबूत भी देना होगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>भोजशाला के पास नहीं हुई जुमे की नमाज, प्रशासन ने तय किया नया स्थान</title>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 12:00:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>भोजशाला, के, पास, नहीं, हुई, जुमे, की, नमाज, प्रशासन, ने, तय, किया, नया, स्थान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट से मिले निर्देश के बाद भी मध्यप्रदेश सरकार धार में स्थित भोजशाला के करीब खुले स्थान पर जुमे की नमाज नहीं करवा सकी। हालांकि प्रशासन ने भोजशाला परिसर के पास नमाज नहीं करवा पाने से जुड़ी किसी विशेष वजह का खुलासा तो नहीं किया, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि इसके पीछे सर्वोच्च न्यायालय का विस्तृत आदेश देर से उपलब्ध होना तथा आदेश के अनुरूप नमाज के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थान तत्काल निर्धारित नहीं हो पाना प्रमुख कारण रहे। इसके चलते मुस्लिम समाज के लोगों ने अपने-अपने क्षेत्र की मस्जिदों में जुम्मे की नमाज अदा की। हालांकि मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने इस पर आपत्ति जताई है और निर्णय के खिलाफ एकबार फिर सर्वोच्च न्यायालय जाने की बात कही है।</p>
<p>उधर मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद प्रशासन ने शहर में एक स्थान को हर शुक्रवार जुमे की नमाज के लिए निर्धारित कर दिया। इस दौरान प्रशासन ने मालीवाड़ा स्थित 'चालीसा पीर परिसर' को प्रत्येक शुक्रवार जुमे की नमाज के लिए चिह्नित किए जाने की जानकारी दी।</p>
<p><strong>SC के आदेश के बाद प्रशासन ने की थी अहम बैठक</strong><br>
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा की मौजूदगी में पुलिस एवं राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें शहर काजी वकार सादिक सहित मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>'चालीसा पीर दरगाह' के पास की जगह नमाज के लिए दी</strong><br>
प्रशासन ने बैठक में प्रतिनिधियों को बताया कि सुरक्षा, सुगम आवागमन और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ग्राम मालीवाड़ा के सर्वे क्रमांक 664 स्थित 'चालीसा पीर दरगाह' के निकट खाली भूमि को जुमे की नमाज के लिए चिह्नित किया गया है। प्रशासन के अनुसार अब प्रत्येक शुक्रवार दोपहर एक बजे से तीन बजे के बीच इस स्थान पर जुम्मे की नमाज अदा की जा सकेगी।</p>
<p><strong>प्रशासन के फैसले से भड़का मुस्लिम पक्ष</strong><br>
उधर मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के प्रतिनिधि अब्दुल समद ने आरोप लगाया है कि भोजशाला परिसर के करीब नमाज की व्यवस्था के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का स्थानीय प्रशासन ने पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन के निर्णय के खिलाफ वे एकबार फिर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।</p>
<p><strong>'सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला परिसर से सटी जगह कहा था'</strong><br>
अब्दुल समद ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने अंतरिम आदेश में भोजशाला परिसर से सटी हुई जगह पर नमाज की व्यवस्था करने का उल्लेख किया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि अंतरिम राहत का मुख्य वाद पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसी आधार पर मुस्लिम पक्ष प्रशासन की तरफ से आयोजित बैठक में शामिल हुआ था, ताकि नमाज की व्यवस्था पुनः शुरू हो सके।</p>
<p><strong>'नमाज के लिए भोजशाला से 2 किमी दूर जगह दी'</strong><br>
अब्दुल समद का आरोप है कि प्रशासन ने करीब तीन घंटे तक चर्चा के बाद लिखित आदेश सौंपते हुए नमाज के लिए भोजशाला परिसर से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थान चिन्हित कर दिया, जो सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष ने इस निर्णय पर आपत्ति दर्ज करा दी है और उनका मानना है कि इससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तथा उनके अधिकारों का हनन हुआ है।</p>
<p><strong>हिंदू पक्ष ने की थी भोजशाला से 300 मीटर बाहर की जगह देने की मांग</strong><br>
इससे पहले भोजशाला परिसर के समीप नमाज की व्यवस्था को लेकर हिंदू पक्ष ने शुक्रवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की थी कि उच्चतम न्यायालय के अंतरिम आदेश का पालन करते हुए नमाज की व्यवस्था भोजशाला के 300 मीटर के दायरे से बाहर की जाए। हिंदू पक्ष के प्रतिनिधि गोपाल शर्मा ने इस बारे में मीडिया से चर्चा करते हुए बताया था कि 'उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के आदेशों में भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर बताया गया है तथा परिसर में नमाज की अनुमति नहीं है।'</p>
<p>शर्मा का कहना था कि 'सर्वोच्च न्यायालय ने भोजशाला परिसर के निकट खुले स्थान पर नमाज की व्यवस्था करने की बात कही है, लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के नियमों के अनुसार भोजशाला के 100 मीटर क्षेत्र को संरक्षित तथा 200 मीटर अतिरिक्त क्षेत्र को विनियमित माना गया है। ऐसे में नमाज़ की व्यवस्था इस पूरे 300 मीटर के दायरे से बाहर की जानी चाहिए।'</p>]]> </content:encoded>
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<title>ऑस्ट्रेलिया पहुंचा भारत का राफेल बेड़ा, पिच ब्लैक अभ्यास में दिखेगी ताकत</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  भारतीय वायुसेना (IAF) के ताकतवर 4 राफेल फाइटर जेट और 2 मालवाहक C-17 ट्रांसपोर्ट विमान शुक्रवार को ऑस्ट्रेलिया पहुंचे हैं। वे एक मल्टीनेशनल एक्सरसाइज में हिस्सा लेंगे, जिसमें क्वॉड पार्टनर अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया समेत 20 देश शामिल हैं। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया क्वॉड के सदस्य हैं, जो खुले और आजाद … ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:00:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ऑस्ट्रेलिया, पहुंचा, भारत, का, राफेल, बेड़ा, पिच, ब्लैक, अभ्यास, में, दिखेगी, ताकत</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 भारतीय वायुसेना (IAF) के ताकतवर 4 राफेल फाइटर जेट और 2 मालवाहक C-17 ट्रांसपोर्ट विमान शुक्रवार को ऑस्ट्रेलिया पहुंचे हैं। वे एक मल्टीनेशनल एक्सरसाइज में हिस्सा लेंगे, जिसमें क्वॉड पार्टनर अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया समेत 20 देश शामिल हैं। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया क्वॉड के सदस्य हैं, जो खुले और आजाद हिंद प्रशांत और प्रशांत क्षेत्र की वकालत करते हैं। इस इलाके में चीन अपने पांव पसार रहा है, जिसे देखते हुए यह अभ्यास अहम माना जा रहा है। यहां राफेल फाइटर जेट्स अमेरिका के पांचवी पीढ़ी के फाइटर F-35 के साथ युद्धाभ्यास करते हुए दिख सकते हैं।</p>
<p><strong>20 जुलाई से 17 अगस्त तक पिच ब्लैक 2026 अभ्यास</strong><br>
ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी तट पर 20 जुलाई से 17 अगस्त तक होने वाले 'पिच ब्लैक 2026' अभ्यास में 100 से ज्यादा विमान शामिल होंगे। IAF ने कहा, 'यह अभ्यास आपसी तालमेल और ऑपरेशनल सहयोग को मज़बूत करने के लिए एक अनोखा मंच देता है। इससे ऑपरेशनल तालमेल बेहतर होगा और बेहतरीन तौर-तरीकों के आदान-प्रदान में मदद मिलेगी।'</p>
<p>IAF की टीम ने इस अभ्यास के लिए चार राफेल जेट, दो C-17 ट्रांसपोर्ट विमान और 120 कर्मियों को तैनात किया है। सोशल मीडिया एक्स पर ऑल इंडिया रेडियो न्यूज ने यह जानकारी शेयर करते हुए बताया-भारत के Rafale फाइटर एयरक्राफ्ट और C-17 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स की प्रमुख मल्टीनेशनल एयर कॉम्बैट एक्सरसाइज़ Pitch Black 2026 में हिस्सा लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुंच गए हैं।<br>
    कैनबरा में भारत के हाई कमीशन ने कहा कि यह तैनाती, दोस्ताना देशों के साथ डिफेंस पार्टनरशिप को मज़बूत करने और ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन को बेहतर बनाने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दिखाती है।</p>
<p><strong>तीन हफ्ते तक युद्ध जैसे हालातों पर अभ्यास</strong><br>
ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि वह 'क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर मिलकर काम करने की क्षमता (इंटरऑपरेबिलिटी) को मजबूत करेगा'। मंत्रालय ने बताया कि यह रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय अभ्यास है, जिसमें दुनिया के सबसे बड़े मिलिट्री ट्रेनिंग इलाकों में से एक में तीन हफ्ते तक जटिल और युद्ध जैसी स्थितियों का अभ्यास किया जाएगा।</p>
<p><strong>20 देशों के 100 फाइटर जेट ले रहे हिस्सा</strong><br>
रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स ने बताया कि डार्विन, टिंडल और एम्बरली एयर बेस पर होने वाले इस अभ्यास में 20 देशों के 2,500 सैनिक और 100 तक जेट विमान शामिल होंगे।<br>
'पिच ब्लैक 2026' में भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, जापान, पापुआ न्यू गिनी, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, जर्मनी, फ्रांस और स्पेन के विमान शामिल होंगे। साथ ही, न्यूजीलैंड, फिजी, कनाडा, ब्रुनेई, मलेशिया, फिनलैंड और स्वीडन के सैनिक भी इस अभ्यास का हिस्सा बनेंगे।<br>
यह हमारे सहयोगियों और मित्र देशों के साथ मिलकर की जाने वाली सबसे बड़ी सामूहिक ट्रेनिंग एक्सरसाइज है।</p>
<p><strong>यह ऐसी जगह, जहां मिलकर बनाते हैं प्लानिंग</strong><br>
    'पिच ब्लैक 2026' के अभ्यास कमांडर एयर कमोडोर मैथ्यू मैककॉर्मिक ने कहा-यह एक ऐसी जगह है जहां हम मिलकर योजना बनाते हैं, मिलकर लड़ते हैं और वास्तविक व जटिल प्रशिक्षण स्थितियों के माध्यम से एक-दूसरे से सीखते हैं।<br>
    उन्होंने आगे कहा कि इस साल का अभ्यास 2024 के अनुभवों पर आधारित होगा और विशाल मिलिट्री ट्रेनिंग एयरस्पेस के कारण यह हमारे सहयोगियों के बीच एक बहुत पसंद की जाने वाली गतिविधि बनी हुई है।</p>
<p><strong>भारतीय उच्चायोग ने भी जता दी बड़ी खुशी</strong><br>
वहीं, ऑस्ट्रेलिया में भारतीय उच्चायोग ने शुक्रवार को X पर पोस्ट करते हुए कहा, 'रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फ़ोर्स के प्रमुख एयर कॉम्बैट अभ्यास 'पिच ब्लैक 2026' में भाग लेने के लिए डार्विन पहुंचे भारतीय वायु सेना के दल का स्वागत करते हुए गर्व हो रहा है। इस दल में चार राफेल और दो C-17 विमानों के साथ 120 से अधिक एयर वॉरियर्स शामिल हैं।'</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>मॉनसून की वापसी से उत्तर भारत में झमाझम बारिश का अलर्ट</title>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 10:00:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
देश के कई हिस्सों में लंबे समय से सूखे जैसी स्थिति बनी हुई थी, लेकिन अब मॉनसून आखिरकार एक्टिव हो रहा है. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, भूमध्य रेखा के पास BSISO और बंगाल की खाड़ी में LPS यानी लो-प्रेशर सिस्टम एक्टिव हो गए हैं. इन दोनों मौसमी सिस्टम के मिलने से उत्तर, पूर्वी और मध्य भारत में 20 से 30 जुलाई के बीच अच्छी बारिश होने की उम्मीद है.</p>
<p><strong>वर्तमान में दो बड़े मौसम मोड काम कर रहे हैं…</strong><br>
    पहला- इक्वेटर लाइल यानी भूमध्य रेखा के पास बोरियल समर इंट्रासीजनल ऑसीलेशन – BSISO पॉजिटिव स्टेज में प्रवेश कर गया है.<br>
    दूसरा – बंगाल की खाड़ी में रॉस्बी वेव्स से जुड़े लो-प्रेशर सिस्टम एक्टिव हो रहे हैं. इन दोनों के मिलने से मॉनसून की गति बढ़ रही है. उत्तर भारत की ओर नमी बढ़ रही है.</p>
<p>मौसम विभाग और निजी एजेंसियों के पूर्वानुमान के अनुसार शनिवार से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश शुरू हो जाएगी. रविवार-सोमवार तक पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा और पूर्वी राजस्थान भी इसके दायरे में आ जाएंगे.</p>
<p><strong>उत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट</strong><br>
अगले एक सप्ताह (19-25 जुलाई) में उत्तर भारत के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है…<br>
    उत्तराखंड: 300-500 मिमी  <br>
    उत्तर प्रदेश: 200-350 मिमी  <br>
    हिमाचल प्रदेश एवं जम्मू: 150-300 मिमी  <br>
    पंजाब एवं चंडीगढ़: 100-200 मिमी  <br>
    हरियाणा एवं दिल्ली NCR: 100-150 मिमी  <br>
    पूर्वी राजस्थान: 75-200 मिमी</p>
<p>यह बारिश इस सीजन में उत्तर भारत के लिए राहत भरी होगी, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में खतरा भी बढ़ा रही है. हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में इस सप्ताह और अगले सप्ताह भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसी घटनाएं हो सकती हैं. यात्रा पर जा रहे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.</p>
<p><strong>उत्तर-दक्षिण का विभाजन</strong><br>
इस समय भारत में उत्तर-दक्षिण अंतर साफ दिख रहा है. ECMWF मॉडल के अनुसार, 20-27 जुलाई के दौरान उत्तर और पूर्वी भारत में अच्छी बारिश होगी, जबकि पश्चिम और दक्षिण भारत में स्थिति कमजोर रहेगी. गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों में इस सप्ताह औसत से कम बारिश होने की संभावना है. इससे इन क्षेत्रों में सूखे का असर और बढ़ सकता है.</p>
<p>भारत की अर्थव्यवस्था और कृषि मुख्य रूप से मॉनसून पर निर्भर करती है. जून-जुलाई में बारिश की कमी से खरीफ फसलें प्रभावित हो रही थीं. अब हो रही इस तेज वापसी से किसानों को राहत मिल सकती है, लेकिन अचानक भारी बारिश से बाढ़ और जलभराव की भी आशंका है.</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि अगर BSISO और LPS दोनों मजबूत रहे तो अगस्त के पहले सप्ताह तक भी दक्षिण भारत और पश्चिमी तट पर कुछ सुधार हो सकता है.</p>
<p><strong>सावधानी और सलाह</strong><br>
    पहाड़ी राज्यों में यात्रा करने वाले लोग मौसम अपडेट लगातार चेक करें.  <br>
    निचले इलाकों में जलभराव और नदियों में उफान का खतरा रहेगा.  <br>
    किसान भारी बारिश के बाद खेतों में पानी निकासी का ध्यान रखें.</p>
<p>मॉनसून की यह वापसी उत्तर और पूर्वी भारत के लिए अच्छी खबर है, लेकिन पूरे देश में अभी भी असमानता बनी हुई है. अगले 10-15 दिनों का मौसम देश की कुल मॉनसून स्थिति तय करेगा.</p>]]> </content:encoded>
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<title>15 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, 70 किमी रफ्तार से चलेंगी हवाएं</title>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 10:00:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>राज्यों, में, भारी, बारिश, का, अलर्ट, किमी, रफ्तार, से, चलेंगी, हवाएं</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 देश में प्रचंड गर्मी और उमस के बीच मौसम विभाग ने अब राहत देने वाला अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विभाग ने कल यानी 18 जुलाई को यूपी, बिहार समेत 15 राज्यों में भारी बारिश और तूफान का अलर्ट जारी कर दिया है। इस बारिश के साथ 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चल सकती है। वहीं, तेज हवा के चलते पेड़-पौधे को नुकसान पहुंचने की आशंका है। वहीं, पहाड़ी राज्यों के लोगों के लिए भी टेंशन वाला अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, पूर्वी भारत के कई राज्यों में आसमानी बिजली गिरने और बादल गरजने की चेतावनी है।</p>
<p>वहीं, कुछ राज्यों में ओलावृष्टि की भी चेतावनी है। लोगों को बेहद सतर्क रहने के लिए कहा गया है। किसानों के फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं, उत्तर प्रदेश, उत्तरी हरियाणा और आस-पास के इलाकों में ऊपरी हवा का चक्रवातीय संचरण बना हुआ है। इसके अलावा गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल और उससे सटे झारखंड और उत्तरी ओडिशा के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है जिससे भारी से अति बारिश की संभावना बनी हुई है।</p>
<p><strong>देश के 15 राज्यों में बारिश-तूफान की चेतावनी</strong><br>
मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक कल यानी 18 जुलाई को देश के 15 राज्यों यूपी, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 60 से 70 किलोमीट प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलने की चेतावनी है। किसानों और मछुआरों को सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए कहा गया है।</p>
<p><strong>दिल्ली में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
दिल्ली(18-19 जुलाई-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक दिल्ली में 18 जुलाई से 19 जुलाई के बीच भारी बारिश और तूफान की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवा के झोंके चलने की संभावना है। वहीं, दिल्ली में कल यानी 18 जुलाई को अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस तक रहने की संभावना है। इस बारिश से गर्मी से राहत मिलेगी।</p>
<p><strong>यूपी में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
यूपी(18 जुलाई जून-भारी बारिश-तूफान की चेतावनी): गौतमबुद्ध नगर, मेरठ, मुजफ्फर नगर, सहारनपुर, गाजियाबाद, बरेली, बिजनौर, सीतापुर, अयोध्या, बहराइच, मोरादाबाद, आगरा, मथुरा, कानपुर, आजमगढ़, पीलीभीत, अमेठी, सोनभद्र, देवरिया, बलिया, कुशीनगर, बलिया, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर और गोरखपुर में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलेगी। वहीं, लखनऊ में 18 जुलाई को लखनऊ में अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा।</p>
<p><strong>बिहार में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
बिहार(18-19 जुलाई-भारी बारिश और आंधी का अलर्ट): भोजपुर, कैमूर, रोहतास, बक्सर, औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, पटना, गोपालगंज, सिवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, किशनगंज, भागलपुर, खगड़िया, बेगूसराय और लखीसराय में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। लोगों को इस दौरान लोगों से बेवजह बाहर निकलने से बचने के लिए कहा गया है। वहीं, पटना में कल यानी 18 जुलाई का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।</p>
<p><strong>झारखंड में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
झारखंड(18 जुलाई-बारिश-तूफान की चेतावनी): रांची, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर, दुमका, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम,रामगढ़, गुमला, पलामू और साहेबगंज में भारी बारिश और तूफान का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 55 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी है। वहीं, रांची में 18 जुलाई को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।</p>
<p><strong>उत्तराखंड में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
उत्तराखंड(18-19 जुलाई-भारी बारिश-आंधी की संभावना): देहरादून, नैनीताल, टिहरी गढ़वाल, पिथौरागढ़, चमोली, चपावत, बागेश्वर, पौड़ी गढ़वाल,हरिद्वार और ऋषिकेश में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। वहीं, देहरादून में 18 जुलाई को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा तो न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा।</p>
<p><strong>हिमाचल में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
हिमाचल(18 जुलाई-बारिश-आंधी का अलर्ट): मंडी, चंबा, किन्नौर, कांगड़ा, कुल्लू, सोलन, बिलासपुर और हमीरपुर में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, इस दौरान 50 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तूफान चलेग। वहीं, मनाली में कल यानी 18 जुलाई को अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।</p>
<p><strong>जम्मू-कश्मीर में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
जम्मू-कश्मीर(18-19 जुलाई-भारी बारिश-तूफान की चेतावनी): पुलवामा, अनंतनाग, किश्तवाड़, उधमपुर,बडगाम, गांदरबल, रामबन, बांदीपोरा, बारामूला, डोडा, कुपवाड़ा और शोपियां में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, श्रीनगर में कल यानी 18 जुलाई को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा।</p>
<p><strong>पश्चिम बंगाल में कल का मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
पश्चिम बंगाल(18 जुलाई-तेज बारिश-तूफान का अलर्ट): अलीपुरद्वार,जलपाईगुड़ी, कोलकाता, हावड़ा, बांकुड़ा, जलपाईगुड़ी, पुरबा बर्धमान, कालिम्पोंग, दुर्गापुर और मुर्शिदाबाद में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 55 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलेगी। वहीं, कोलकाता में कल यानी 18 जुलाई को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।</p>
<p><strong>पंजाब में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
पंजाब (18 जुलाई-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): अमृतसर, पठानकोट, फरीदकोट, होशियारपुर, संगरूर, बरनाला, फाजिल्का,कपूरथला, मानसा, मोगा, रूपनगर और गुरदासपुर में भारी बारिश-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की चेतावनी है।</p>
<p><strong>राजस्थान में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
राजस्थान (17 जुलाई-हल्की बारिश का अलर्ट): जयपुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बूंदी, बीकानेर, अजमेर, सीकर, बाड़मेर, शाहपुरा, पाली और डूंगरपुर में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की संभावना है। वहीं, जयपुर में कल यानी 18 जुलाई को अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।</p>
<p><strong>मध्य प्रदेश में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
मध्य प्रदेश (17 जुलाई-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): विदिशा, इंदौर, भोपाल, धार, कटनी, मुरैना, श्योपुर, उज्जैन, अशोक नगर, नीमच, मंदसौर, विदिशा और आगर-मालवा में भारी बारिश और तूफान का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा के झोंके चलेंगे। वहीं, भोपाल में 18 जुलाई को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।</p>
<p><strong>छत्तीसगढ़ में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
छत्तीसगढ़(18 जुलाई-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): बिलासपुर, कोरबा, रायपुर,बेमेतरा, बलौदा बाजार, महासमुंद, दुर्ग, रायगढ़, कोरिया और धमतरी में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चल सकते हैं।</p>
<p><strong>ओडिशा में कल मौसम कैसा रहेगा</strong><br>
ओडिशा(18-19 जुलाई-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): मयूरभंज, केंदुझार, बलांगिर, नौपाड़ा, झारसुगुड़ा, सुंदरगढ़ और भुवनेश्वर में मध्यम से भारी बारिश की संभावना है। इस दौरान 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>आंध्र प्रदेश में कोरोना के 12 नए मामले, वैरिएंट जांच के लिए सैंपल भेजे</title>
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<description><![CDATA[ अमरावती  आंध्र प्रदेश में 26 जून से 16 जुलाई तक 12 Covid-19 संक्रमण के मामले सामने आए हैं। इन मामलों की पुष्टि स्वास्थ्य अधिकारियों ने की है। राज्य सरकार ने मरीजों में फैल रहे वायरस के खास वैरिएंट की पहचान करने के लिए पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) को पांच सैंपल भेजे हैं। … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 19:15:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>आंध्र, प्रदेश, में, कोरोना, के, नए, मामले, वैरिएंट, जांच, के, लिए, सैंपल, भेजे</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अमरावती</strong><br>
 आंध्र प्रदेश में 26 जून से 16 जुलाई तक 12 Covid-19 संक्रमण के मामले सामने आए हैं। इन मामलों की पुष्टि स्वास्थ्य अधिकारियों ने की है। राज्य सरकार ने मरीजों में फैल रहे वायरस के खास वैरिएंट की पहचान करने के लिए पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) को पांच सैंपल भेजे हैं।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि ये मामले कडापा, गुंटूर, विशाखापट्टनम और काकीनाडा सहित अलग-अलग जिलों में फैले हुए हैं। किसी खास इलाके में इनके एक साथ फैलने का कोई सबूत नहीं मिला है।</p>
<p>KGH अस्पताल की सुपरिटेंडेंट डॉ. वाणी ने बताया कि विशाखापट्टनम में COVID-19 का एक पॉजिटिव मामला दर्ज किया गया है। मरीज ने कुछ दिन पहले इलाज के लिए एक जनरल फिजिशियन से सलाह ली थी। COVID-19 के लक्षण दिखने पर डॉक्टर ने मरीज को जांच के लिए एक प्राइवेट लैब में भेजा गया। प्राइवेट लैब में संक्रमण की पुष्टि के बाद, अधिकारियों ने पुष्टि के लिए वही सैंपल KGH अस्पताल भेजा, जहां जांच रिपोर्ट में एक बार फिर COVID-19 की मौजूदगी की पुष्टि हुई।</p>
<p>एक प्रेस रिलीज के अनुसार, आंध्र प्रदेश में COVID-19 के बारह मामले सामने आए और पांच सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजे गए। 1 जुलाई से पूरे भारत में COVID-19 के कुल 339 मामले सामने आए हैं।</p>
<p>आंध्र प्रदेश में COVID-19 के मामले छिटपुट रूप से सामने आए हैं। 26 जून से 16 जुलाई के बीच, कुल 12 लोग वायरस से संक्रमित पाए गए। इनमें से चार मरीजों की मौत हो गई।</p>
<p>प्रेस रिलीज के अनुसार, स्वास्थ्य सचिव और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण आयुक्त वीरा पांडियन ने बताया कि मरने वाले चारों मरीजों को पहले से ही गंभीर बीमारियां थीं, जिनमें हाइपरटेंशन, डायबिटीज, किडनी की बीमारी और अन्य गंभीर बीमारियां शामिल थीं।</p>
<p>आंध्र प्रदेश में इस साल COVID-19 का पहला मामला 26 जून को कडापा जिले में सामने आया था। 1 जुलाई से 16 जुलाई के बीच 11 और मामले सामने आए। संक्रमित लोगों में से दो की पहचान पहले से पुष्टि किए गए COVID-19 मरीजों के करीबी संपर्क के तौर पर की गई थी।</p>
<p>कुल मामलों में से, कडपा में आठ मामले, गुंटूर में दो, और विशाखापट्टनम और काकीनाडा में एक-एक मामला सामने आया। स्वास्थ्य सचिव ने साफ किया कि ये मामले अलग-अलग मंडलों और जगहों से आए हैं और किसी एक इलाके में मामलों का कोई क्लस्टर नहीं बना है।</p>
<p>26 जून से 15 जुलाई के बीच राज्य में कुल 67 COVID-19 टेस्ट किए गए, जिनमें से 11 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। काकीनाडा जिले के एक और मरीज की रिपोर्ट तमिलनाडु के CMC वेल्लोर में पॉजिटिव आई, जिससे कुल मामलों की संख्या 12 हो गई।</p>
<p>प्रेस रिलीज में बताया गया कि COVID-पॉजिटिव मरीज़ों में से तीन कडपा जिले से और एक काकीनाडा जिले से था। स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि इन चारों मरीजों को पहले से ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं थीं। वायरस के वैरिएंट का पता लगाने के लिए, 9 जुलाई को पांच सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी (NIV) भेजे गए।</p>
<p>स्वास्थ्य सचिव वीरा पांडियन ने कहा कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, साथ ही उन्होंने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि राज्य भर में डॉक्टरों, अस्पतालों और हेल्थकेयर स्टाफ को अलर्ट कर दिया गया है।</p>
<p>वीरा पांडियन के अनुसार, ज़िलेवार आंकड़ों से पता चलता है कि कडपा में 8 मामले दर्ज किए गए हैं, इसके बाद गुंटूर में 2 और विशाखापट्टनम और काकीनाडा में 1-1 मामला सामने आया है। इन मरीजों में से 3 अभी होम आइसोलेशन में हैं और 2 अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि 3 लोग ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं। गौरतलब है कि 4 लोगों की मौत भी हुई है।</p>
<p>राष्ट्रीय स्तर पर, आयुक्त ने बताया कि 1 जुलाई से पूरे भारत में COVID-19 के 339 मामले दर्ज किए गए हैं। राज्यों के आंकड़ों में केरल सबसे आगे है, जहां 115 मामले सामने आए हैं। इसके बाद कर्नाटक में 64, महाराष्ट्र में 43, तमिलनाडु में 39, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और दिल्ली में 18-18, और राजस्थान में 12 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि बाकी मामले अन्य राज्यों में हैं</p>]]> </content:encoded>
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<title>वोटर लिस्ट से नाम हटने पर नागरिकता खत्म नहीं होगी: सुप्रीम कोर्ट</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली वोटर लिस्ट के स्पेशल रिवीजन के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के बाद लोगों ने नागरिकता को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई है. इसे लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा है कि वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने से नागरिकता अपने आप खत्म नहीं हो जाती. सुप्रीम कोर्ट … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 19:00:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>वोटर, लिस्ट, से, नाम, हटने, पर, नागरिकता, खत्म, नहीं, होगी:, सुप्रीम, कोर्ट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
वोटर लिस्ट के स्पेशल रिवीजन के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के बाद लोगों ने नागरिकता को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई है. इसे लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा है कि वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने से नागरिकता अपने आप खत्म नहीं हो जाती. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि इसके लिए अलग प्रक्रिया है.</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान की. सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग का अधिकार केवल वोटर लिस्ट के नियंत्रण और पर्यवेक्षण तक ही सीमित है. सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून की स्थिति में कोई भ्रम नहीं है.</p>
<p>कोर्ट ने कहा कि कोई ट्रिब्यूनल किसी व्यक्ति का नाम एसआईआर की सूची में शामिल नहीं करने का फैसला देता है, तो निर्वाचन आयोग को नागरिकता निर्धारण के लिए मामला संबंधित मंत्रालय को भेजना होगा. मतदाता सूची में नाम नहीं होने से नागरिकता अपने आप खत्म नहीं होती. सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को भी सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया.</p>
<p>इस याचिका में पश्चिम बंगाल एसआईआर के विधानसभा क्षेत्र के आधार पर जानकारी मांगने की अपील की गई है. सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर अगली सुनवाई अब 25 अगस्त को करेगा. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी यह साफ कर चुका है कि नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का काम नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एसआईआर और वोटर लिस्ट का नागरिकता से कोई सीधा नाता नहीं है.</p>
<p>गौरतलब है कि हाल ही में झारखंड का एक वीडियो वायरल हुआ था. एसआईआर फॉर्म भरने के नाम पर कथित उगाही के इस वीडियो में दावा किया गया था कि नागरिकता न जाए, इसके लिए एसआईआर फॉर्म भरने के लिए 50 से सौ रुपये तक की उगाही की जा रही थी. यह धनराशि खर्चा-पानी के नाम पर ली जा रही थी.</p>]]> </content:encoded>
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<title>गुजरात ATS की बड़ी कार्रवाई, जैश&#45;ए&#45;मोहम्मद से जुड़े 5 संदिग्ध गिरफ्तार</title>
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<description><![CDATA[  अहमदाबाद  आतंकवाद रोधी दस्ता (ATS) ने गुजरात के विभिन्न जिलों में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े पांच और संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान बिलाल आबिद शेरा, मोहम्मद अयूब काडीवाल उर्फ मोहम्मद खड़ियासन, मोहम्मद शफी मुखी उर्फ शफी चापी, मोहम्मद हसन क राडिया … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 18:00:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>गुजरात, ATS, की, बड़ी, कार्रवाई, जैश-ए-मोहम्मद, से, जुड़े, संदिग्ध, गिरफ्तार</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> अहमदाबाद</strong><br>
 आतंकवाद रोधी दस्ता (ATS) ने गुजरात के विभिन्न जिलों में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े पांच और संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है।</p>
<p>गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान बिलाल आबिद शेरा, मोहम्मद अयूब काडीवाल उर्फ मोहम्मद खड़ियासन, मोहम्मद शफी मुखी उर्फ शफी चापी, मोहम्मद हसन क राडिया उर्फ हसन हैदरपुरी और मोहम्मद अयूब सुमासरा उर्फ मोहम्मद खली के रूप में हुई है।</p>
<p><strong>पिछले महीने पकड़े गए आतंकियों से संबंध</strong><br>
गुजरात ATS ने जिन पाकिस्तान आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद से जुड़े पांच संबंधित आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनका संबंध पिछले माह पकड़े गए देश के आठ आतंकियों के साथ बताऐ जा रहे हैं।</p>
<p>गुजरात में आतंकी संगठन के स्लीपर सेल तैयार करने के लिए जैश ऐ मोहम्मद लंबे समय से प्रयास कर रहा था। ‌ गुजरात दंगों के बाद इंडियन मुजाहिदीन ने अहमदाबाद में सिलसिले वार बम धमाके कर 50 से अधिक लोगों की हत्या कर दी थी और 200 से अधिक को घायल कर दिया था।</p>
<p><strong>गुजरात में बनाना चाह रहा था पैठ</strong><br>
जैश ऐ मोहम्मद भी लगातार भारत, खासकर गुजरात में अपनी पेठ बनाना चाहता था और उससे उत्तर गुजरात के कुछ लोगों को जोड़ कर अपने आतंकी मंसूबों को बढ़ाने का मौका मिल गया।</p>
<p> </p>]]> </content:encoded>
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<title>भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू, बिना डीजल&#45;बिजली तारों के भरेगी रफ्तार</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को जींद जंक्शन से सोनीपत के लिए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना कर दिया है। यह देश की पहले स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन है जो कि बिना डीजल और बिजली के तारों के चलेगी।जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली इस पैसेंजर ट्रेन में … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 13:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>भारत, की, पहली, हाइड्रोजन, ट्रेन, शुरू, बिना, डीजल-बिजली, तारों, के, भरेगी, रफ्तार</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को जींद जंक्शन से सोनीपत के लिए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना कर दिया है। यह देश की पहले स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन है जो कि बिना डीजल और बिजली के तारों के चलेगी।जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली इस पैसेंजर ट्रेन में 2600 लोग सफ़र कर सकेंगे। फिलहाल यह ट्रेन 89 किलोमीटर के रूट पर चलेगी और दो घंटे में यह दूरी तय करेगी। बीच में 12 स्टेशनों पर ट्रेन रुकेगी। ट्रेन की अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी।</p>
<p><strong>नहीं निकलता है धुआं</strong><br>
रेल मंत्रालय के अनुसार, 10 डिब्बों वाली यह ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली पैदा कर संचालित होती है तथा इससे केवल जलवाष्प का उत्सर्जन होता है। यह ट्रेन देश के नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को पाने और जीवाश्म ईंधन कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री करीब 26,800 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पित करेंगे। कार्यक्रमों में रेलवे, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत और हरित परिवहन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं।</p>
<p>आज शाम को जालंधर पहुंचेंगे, जहां वह 5,470 करोड़ रुपये से अधिक की रेल और सड़क अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करेंगे। राजनीतिक रूप से अहम दोआबा क्षेत्र में यह उनका पिछले साढ़े पांच महीनों में दूसरा दौरा होगा। इससे पहले वह एक फरवरी को भी जालंधर आए थे।</p>
<p><strong>यह कमाल करने वाला छठा देश भारत</strong><br>
हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाला भारत दुनिया का पांचवां देश है। इससे पहले यह तकनीक जर्मनी, चीन, जापान, फ्रांस और अमेरिका के पास है। रेलवे ने बताया है कि इस ट्रेन का इंजन पुराने इंजन जैसा ही है। बस इसमें डीजल या फिर बाहर से बिजली नहीं ली जाती है। इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से ट्रेन के अंदर ही बिजली बनती है। इस रासायनिक अभिक्रिया से केवल भाप निकलती है। इसके अलावा कोई भी प्रदूषक उत्सर्जित नहीं होता है।</p>
<p><strong>इन स्टेशनों पर रुकेगी ट्रेन</strong><br>
यह ट्रेन जींद से सोनीपत तक 89 किलोमीटर का सफर तय करेगी। एक दिन में दो राउंड ट्रिप मारेगी। इसका मतलब एक दिन में करीब 356 किलोमीटर चलेगी। जींद के बाद जींद सिटी, गोहाना, पांडु पिंडारा, लिलित खेड़ा, भांभेवा, इसापुर खेड़ी. बुटाना, खंडराई, राबरा, लाथ, मोहाना, सोनीपत में इसका स्टॉप होगा।</p>
<p><strong>कितना है किराया</strong><br>
इस ट्रेन में कुल 10 कोच हैं और 2600 यात्री सफर कर सकते हैं। इसकी कुल पावर 2400 किलोवाट है। एक बार हाइ्ड्रोजन भरने पर यह ट्रेन 250 किलोमीटर चलती है। वहीं ट्रेन का किराया 5 रुपये से अधिकतम 25 रुपये तक ही है। इस ट्रेन में सुरक्षा का खास धअयान रखा गाय है। इसमें मल्टी लेयर सेफ्टी सिस्मट लगे हैं। हाइड्रोजन लीक की स्थित में ट्रेन खुद ही रुक जाएगी। इसके अलावा फायर डिटेक्टर और मॉनिटरिंग सिस्टम में भी ट्रेन में लगाया गया है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>UNSC अस्थायी सदस्यता पर भारत की दावेदारी, चीन ने पहली बार दी प्रतिक्रिया</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली UNSC यानी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की अस्थायी सदस्यता के दावे पर अब चीन ने भी प्रतिक्रिया दे दी है। पड़ोसी मुल्क ने कहा है कि वह इस तरह की खबरों पर गौर कर रहा है। खास बात है कि पहले ही कई बड़े देश भारत का साथ दे रहे हैं। … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 12:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>UNSC, अस्थायी, सदस्यता, पर, भारत, की, दावेदारी, चीन, ने, पहली, बार, दी, प्रतिक्रिया</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली<br>
UNSC यानी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की अस्थायी सदस्यता के दावे पर अब चीन ने भी प्रतिक्रिया दे दी है। पड़ोसी मुल्क ने कहा है कि वह इस तरह की खबरों पर गौर कर रहा है। खास बात है कि पहले ही कई बड़े देश भारत का साथ दे रहे हैं। चीन की तरफ से यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर प्रचार अभियान की शुरुआत कर चुके हैं।</p>
<p><strong>क्या बोला चीन</strong><br>
चीन ने गुरुवार को कहा कि उसने 2028-29 की अवधि के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता हासिल करने की भारत की दावेदारी से जुड़ी खबरों पर गौर किया है। सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए चुनाव लड़ने की भारत की घोषणा पर चीन के रुख के बारे में पूछे जाने पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'चीन ने इससे जुड़ी खबरों पर गौर किया है।'</p>
<p><strong>क्या बोले जयशंकर</strong><br>
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत के आधिकारिक प्रचार अभियान की शुरुआत की। इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों के राजदूत, राजनयिक और अधिकारी शामिल हुए थे।</p>
<p>जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा था कि संयुक्त राष्ट्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण 'शांति अर्थात मानदंडों, विश्वास और सत्यनिष्ठा के जरिये समग्र प्रगति सुनिश्चित करने' पर आधारित है। उन्होंने सुरक्षा परिषद में भारत के संभावित कार्यकाल की प्राथमिकताओं का भी विस्तार से उल्लेख किया था।</p>
<p><strong>चीन नहीं करता भारत का समर्थन</strong><br>
चीन सुरक्षा परिषद के वीटो अधिकार प्राप्त पांच स्थायी सदस्यों में शामिल है लेकिन उसने अभी तक भारत की दावेदारी का समर्थन नहीं किया है। इसके विपरीत, पांच स्थायी सदस्यों में शामिल अन्य चार देश-अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और फ्रांस-सुधार के बाद गठित होने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का स्पष्ट रूप से समर्थन कर चुके हैं।</p>
<p><strong>किस देश से है मुकाबला</strong><br>
सुरक्षा परिषद में 2028-29 के कार्यकाल के लिए चुनाव अगले साल जून में होंगे। इसमें एशिया-प्रशांत समूह की एकमात्र सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा।</p>
<p>भारत पिछली बार 2021-22 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य बना था। यह संयुक्त राष्ट्र के 15 सदस्यीय इस शक्तिशाली निकाय में भारत का आठवां कार्यकाल था। इससे पहले भारत 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985, 1991-1992 और 2011-2012 में सुरक्षा परिषद का सदस्य रह चुका है।</p>
<p><strong>सुरक्षा परिषद में नहीं हुआ खास सुधार</strong><br>
भारत का कहना है कि UNSC का 80 साल पुराना ढांचा मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिहाज से उपयुक्त नहीं है। और इसी वजह से यह वैश्विक संस्था दुनिया भर में जारी संघर्षों से हो रही मानवीय पीड़ा को खत्म करने में प्रभावी साबित नहीं हुई। भारत ने यह भी कहा कि विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए वैश्विक वित्तीय ढांचे में भी बदलाव होना चाहिए।</p>
<p>स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने मंगलवार को कहा, 'हाल के वर्षों में संयुक्त राष्ट्र को लेकर लोगों की धारणा नकारात्मक हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों में सुरक्षा परिषद प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप नहीं कर पाई है।'</p>]]> </content:encoded>
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<title>सरकार बनने के 2 महीने में थलपति विजय पर बढ़ा विवाद, आखिर क्या है पूरा मामला?</title>
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<description><![CDATA[ चेन्नई  तमिलनाडु में बीते मई महीने में चुनाव जीतकर थलपति विजय ने राजनीति मे धांसू एंट्री मारी थी। हालांकि अब 2 महीने के भीतर ही TVK सरकार मुश्किलों में घिर गई है। इसके पीछे की वजह है राज्य में हाल ही में हुई एक सनसनीखेज घटना। दरअसल तमिलनाडु के नागरकोइल से बीते दिनों एक झकझोर … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 11:45:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>सरकार, बनने, के, महीने, में, थलपति, विजय, पर, बढ़ा, विवाद, आखिर, क्या, है, पूरा, मामला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चेन्नई </strong></p>
<p>तमिलनाडु में बीते मई महीने में चुनाव जीतकर थलपति विजय ने राजनीति मे धांसू एंट्री मारी थी। हालांकि अब 2 महीने के भीतर ही TVK सरकार मुश्किलों में घिर गई है। इसके पीछे की वजह है राज्य में हाल ही में हुई एक सनसनीखेज घटना। दरअसल तमिलनाडु के नागरकोइल से बीते दिनों एक झकझोर देने वाली खबर सामने आई थी। यहां की एक जेल में एक दिव्यांग कैदी की हिरासत में मौत हो गई। मामला सामने आते ही राज्य में भारी सियासी बवाल मच गया है। इस घटना को लेकर विपक्षी दलों ने विजय की सरकार पर तीखा हमला बोला है।</p>
<p>इससे पहले नागरकोइल के एथनकाडु के रहने वाले 35 वर्षीय दिव्यांग एस. सबरी वर्मन की संदिग्ध परिस्थितियों में न्यायिक हिरासत में मौत हो गई थी। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, सबरी वर्मन को 9 जुलाई को थेंथमराईकुलम पुलिस ने प्रतिबंधित गुटखा बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया था, जहां उसकी दुकान से करीब 200 ग्राम प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद जब्त किए गए थे। शुरुआत में इस मौत को सामान्य दिखाने की कोशिश हुई, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आते ही हड़कंप मच गया। रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर कोहनी, घुटनों, बांहों और पैरों समेत 19 अलग-अलग जगह पर चोटों के निशान पाए गए।</p>
<p>जानकारी के मुताबिक 13 जुलाई की आधी रात को सबरी वर्मन और बैरक में बंद दूसरे साथी कैदियों के बीच मारपीट हुई थी। इसके बाद बीच-बचाव करने पहुंचे जेल स्टाफ ने भी कथित तौर पर दिव्यांग कैदी को बेरहमी से पीटा, जिससे उसकी जान चली गई। बवाल बढ़ने के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर एक चीफ वार्डन सहित तीन जेल कर्मचारियों को सस्पेंड करके गिरफ्तार कर लिया है। वहीं जेल के 8 साथी कैदियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।</p>
<p><strong>तमाशा देख रही विजय सरकार- DMK</strong><br>
इस घटना के बाद तमिलनाडु में भारी राजनीतिक आक्रोश देखने को मिल रहा है। डीएमके सांसद कनिमोझी ने बुधवार रात पीड़ित परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और पुलिस व प्रशासन के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए। कनिमोझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में विजय को भी घेरा। उन्होंने लिखा, “हिरासत में हुई इस मौत के तीन दिन बाद भी मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की तरफ से कोई स्पष्टीकरण या बयान नहीं आया है। सरकार का कोई भी मंत्री पीड़ित परिवार से मिलने नहीं पहुंचा। इस सरकार ने प्रभावित परिवार को कोई राहत राशि देने की पहल तक नहीं की है। कुल मिलाकर, हमेशा की तरह टीवीके सरकार जिम्मेदारी लेने के बजाय सिर्फ तमाशा देख रही है।”</p>
<p><strong>सीबीआई जांच की मांग</strong><br>
इधर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने इसे एक भयावह घटना करार दिया। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जिस तरह पिछली सरकार में कस्टडी में मौतें होती थी, वही अब मौजूदा प्रशासन के अंदर भी जारी हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य में कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग की। वहीं PMK नेता डॉ. अंबुमणि रामदास ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष CBI जांच कराने की मांग की है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>पेट्रोल को भूल जाइए! भारत में गोबर से बन रहा सस्ता वाहन ईंधन, कीमत जानकर रह जाएंगे हैरान</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्‍ली वेस्ट एशिया में तनाव के कारण कच्‍चे तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं, जिस कारण पेट्रोल-डीजल और अन्‍य ईंधन की कीमतों में उछाल देखने को मिला है. इस बीच, दुनिया ने कच्‍चे तेल के कई विकल्‍प तलाशने पर फोकस किया है. अब गुजरात में गोबर से पेट्रोल के विकल्‍प के तौर पर … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 10:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्‍ली</strong><br>
वेस्ट एशिया में तनाव के कारण कच्‍चे तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं, जिस कारण पेट्रोल-डीजल और अन्‍य ईंधन की कीमतों में उछाल देखने को मिला है. इस बीच, दुनिया ने कच्‍चे तेल के कई विकल्‍प तलाशने पर फोकस किया है. अब गुजरात में गोबर से पेट्रोल के विकल्‍प के तौर पर ईंधन तैयार किया जा रह है और यह पेट्रोल की तुलना में काफी सस्‍ता भी है। </p>
<p>सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन और बनास डेयरी के सहयोग से बना बनासकांठा का एक बायो-CNG स्टेशन हरदिन 600 से 700 वाहनों को पशुओं के गोबर से बने ईंधन से फ्यूल सप्‍लाई कर रह है. यह सुनने में अनोखा लगता है, लेकिन वेस्‍ट एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतें अनिश्चित बनी हुई हैं, ऐसे में यह साधारण सा प्रयोग इस बात की एक झलक हो सकता है कि भारत महंगे आयातित ईंधन से कैसे छुटकारा पा सकता है। </p>
<p><strong>कितनी है इसकी कीमत? </strong><br>
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह स्टेशन पशुओं के गोबर से निकाले गए मीथेन से बने जैविक प्राकृतिक गैस बेचता है. इसकी कीमत लगभग 80 रुपये प्रति किलोग्राम है, जो भारत के कुछ हिस्सों में पेट्रोल से 20 रुपये से भी अधिक सस्ती है. इस प्‍लांट में 16 गांवों से प्रतिदिन लगभग 88 टन पशुओं का गोबर इकठ्ठा किया जाता है. किसानों को गोबर के लिए लगभग 1 रुपये प्रति किलोग्राम का भुगतान किया जाता है, जिससे उन्हें आय का एक अतिरिक्त सोर्स मिलता है। </p>
<p><strong>यह मॉडल कैसे काम करता है?</strong><br>
बनास डेयरी गांवों से गोबर की खरीद करता है, जबकि सुजुकी पूंजी और वाहनों की मांग लाती है. बुखाला गांव में, 32 वर्षीय भीमजीभाई नथुभाई, जिनके पास लगभग 30 मवेशी हैं, वे हरदिन प्‍लांट को लगभग 400 किलोग्राम गोबर बेचते हैं और बाजरे की फसल से होने वाली आय के अतिरिक्त ₹400 कमाते हैं. वे पास में उत्पादित बायोगैस से अपनी दो सीएनजी कारों में ईंधन भी भरते हैं। </p>
<p><strong>यह क्यों मायने रखती है?</strong><br>
यह प्रोजेक्‍ट्स ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत ईरान जंग के बाद एनर्जी सेफ्टी बढ़ाने और ईंधन सोर्स में विविधता लाने के प्रयास कर रहा है. भारत पहले से ही नगरपालिका के ठोस कचरे, कृषि अवशेषों और नेपियर घास जैसी चारा फसलों से बायो-सीएनजी का उत्पादन करता है, और इंदौर में बसें गीले कचरे से बनी बायोगैस पर चलती हैं. लेकिन इस ईंधन के उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ाने के प्रयास अब और भी जरूरी हो चुके हैं। </p>
<p><strong>सस्‍ते ईंधन के अलावा क्‍या हैं इसके फायदे? </strong><br>
यह परियोजना एक चक्रीय मॉडल के रूप में बनाई गई है. पशुओं के अपशिष्ट से निकलने वाली मीथेन गैस को एकत्रित करके परिवहन ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है, जबकि पाचन के बाद बचे हुए घोल को जैविक खाद में परिवर्तित करके आसपास के किसानों को बेचा जाता है. नथुभाई ने कहा कि कई सालों तक भारी मात्रा में यूरिया के उपयोग के बाद इस खाद ने मिट्टी की उर्वरता को बहाल करने में मदद की है. उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि ऐसी परियोजनाएं किसानों की आय बढ़ाने, उत्सर्जन कम करने और आयातित रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने में सहायक हो सकती हैं। </p>
<p><strong>क्या बायो-सीएनजी भारत के एनर्जी में बड़ा बदलाव ला सकता है? </strong><br>
ऑटोमोबाइल निर्माता और बड़ी कंपनियां इसमें रुचि दिखा रही हैं. सुजुकी मोटर और उसकी भारतीय यूनिट ने सीएनजी वाहनों में भारी निवेश किया है, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और अडानी ग्रुप भी बायोगैस उत्पादन में निवेश कर रहे हैं. भारत बायोगैस उत्पादकों को भुगतान की जाने वाली कीमत बढ़ाने की योजना बना रहा है, और इस महीने जापान यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित एक रणनीतिक योजना ने 1,000 नए बायोगैस संयंत्रों को जोड़ने में तेजी लाई है। </p>
<p><strong>रुकावट क्‍या आ सकती है? </strong><br>
उत्पादन की मात्रा ही मुख्य चुनौती बनी हुई है. केंद्रीय तेल मंत्रालय के अनुमानों के अनुसार, भारत हरदिन 19 करोड़ घन मीटर गैस की खपत करता है, जिसमें से आधी आयातित होती है, जबकि वर्तमान में इसका उत्पादन मात्र 0.3 करोड़ घन मीटर प्रतिदिन है. भारतीय उद्योग परिसंघ (CBG) का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में वार्षिक सीबीजी उत्पादन 2030 तक केवल 2.14 करोड़ टन तक ही पहुंच पाएगा, जबकि मध्यम वृद्धि दर के साथ यह 3.98 करोड़ टन तक ही पहुंच पाएगा, जो मूल 15 करोड़ टन के लक्ष्य से काफी कम है। </p>
<p>परेशानी सिर्फ फ्यूल का उत्‍पादन करना ही नहीं है, बल्कि गोबर को इकट्ठा करना और उन्‍हें प्‍लांटों तक पहुंचाना और गैस को खरीदारों तक ले जाना भी है. ई प्‍लांट्स पाइपलाइनों से दूर एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर में स्थ‍ित हैं, जिससे लागत बढ़ जाती है. बनासकांठा प्‍लांट से जुड़े अधिकारियों का अनुमान है कि पूंजी लागत और सीमित उत्पादन के कारण यह कम से कम अगले तीन वर्षों तक आर्थिक रूप से परेशानी बढ़ा सकता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>समंदर की 700 मीटर गहराई में मिला बेशकीमती खजाना! सामने आया दुनिया के सबसे बड़े सोने के भंडार का दावा</title>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 09:45:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>समंदर, की, 700, मीटर, गहराई, में, मिला, बेशकीमती, खजाना, सामने, आया, दुनिया, के, सबसे, बड़े, सोने, के, भंडार, का, दावा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>वैज्ञानिकों ने एक ऐसा खजाना खोजा है जो आंखों से दिखाई नहीं देता. जापान की राजधानी टोक्यो से 360 किलोमीटर दूर समुद्र में यह कामयाबी मिली है. वैज्ञानिकों ने 700 मीटर की गहराई में ‘फूल गोल्ड’ के अंदर असली सोना खोजा है. यह कोई आम सोना नहीं है. यह पत्थरों के अंदर परमाणु स्तर पर छिपा हुआ है. हिगाशी-आओगाशिमा काल्डेरा नाम की जगह पर यह रिसर्च की गई है. यहां समुद्र तल पर ज्वालामुखी मौजूद हैं. इन्हीं ज्वालामुखियों के पास मौजूद पत्थरों में यह अदृश्य सोना मिला है. रोबोटिक पनडुब्बियों की मदद से इन पत्थरों के सैंपल निकाले गए. इस खोज ने जियोलॉजिस्ट्स को हैरान कर दिया है. इससे भविष्य में दुनिया भर में सोने की खदानें खोजने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। </p>
<p><strong>आखिर क्या होता है ‘फूल गोल्ड’ और कैसे मिला इसके अंदर सोने का खजाना?</strong><br>
पाइराइट एक तरह का आयरन सल्फाइड अयस्क है. इसकी चमक और पीला रंग बिल्कुल असली सोने जैसा होता है. इसी वजह से इसे ‘फूल गोल्ड’ या मूर्खों का सोना कहा जाता है. बिना अनुभव वाले लोग अक्सर इसे असली सोना समझ लेते हैं. लेकिन इस बार इस पत्थर ने वैज्ञानिकों को एक बड़ा सरप्राइज दिया है। </p>
<p>रिसर्चर्स ने रोबोटिक पनडुब्बियों की मदद से समुद्र के नीचे से रॉक सैंपल इकट्ठा किए. इसके बाद लैब में इन पत्थरों में छोटे-छोटे छेद करके उनके अंदर झांका गया. इसके लिए सेकेंडरी-आयन मास स्पेक्ट्रोमेट्री तकनीक का इस्तेमाल हुआ. इसमें पता चला कि इन पत्थरों में सोने की मात्रा रिकॉर्ड स्तर पर है. यह मात्रा 1.9 वजन प्रतिशत तक दर्ज की गई है जो काफी ज्यादा है। </p>
<p><strong>समुद्र की गहराई में मौजूद यह सोना आम खदानों से कैसे बिल्कुल अलग है?</strong><br>
आम तौर पर सोने की खदानों में सोना दानों या टुकड़ों के रूप में मिलता है. लेकिन समुद्र की गहराई में मिला यह सोना बिल्कुल अलग है. यह धातु सीफ्लोर पाइराइट के क्रिस्टल लैटिस के भीतर एक सॉलिड सॉल्यूशन के रूप में मौजूद है. साइंटिफिक रिपोर्ट्स में पब्लिश इस रिसर्च ने कई पुरानी धारणाओं को तोड़ दिया है। </p>
<p>हिगाशी-आओगाशिमा काल्डेरा एक अंडरवाटर ज्वालामुखी क्रेटर है. इसके फर्श पर तीन एक्टिव हाइड्रोथर्मल फील्ड मौजूद हैं. इनमें सेंट्रल कोन, साउथईस्ट और ईस्ट साइट शामिल हैं. इन जगहों से पृथ्वी की क्रस्ट के नीचे से मिनरल से भरा सुपरहीटेड लिक्विड लगातार निकलता रहता है. यह पूरा इलाका काले धुएं वाली चिमनियों और सल्फाइड के बड़े टीलों से भरा हुआ है। </p>
<p><strong>ज्वालामुखियों के पास मौजूद पत्थरों में सोने की इतनी ज्यादा मात्रा कैसे आई?</strong></p>
<p>    वैज्ञानिकों ने 2015 में इस इलाके में अपनी रिसर्च शुरू की थी. उस समय पत्थरों में औसतन 102 पार्ट प्रति मिलियन यानी पीपीएम सोना मिला था। </p>
<p>    यह मात्रा दुनिया भर के अन्य डीप-सी डिपॉजिट की तुलना में बहुत ज्यादा थी. अन्य जगहों पर यह मात्रा 0.01 से 43 पीपीएम तक ही होती है। </p>
<p>    इस स्टडी में रिसर्चर्स ने सभी एक्टिव साइट्स से सैंपल लिए. इन सैंपल्स को उनके आकार के आधार पर चार हिस्सों में बांटा गया। </p>
<p>    कुछ पत्थरों को पीसकर पाउडर बनाया गया. फिर मास स्पेक्ट्रोमीटर से उनमें मौजूद सोना और आर्सेनिक मापा गया। </p>
<p>    इलेक्ट्रॉन बीम से लेड, कॉपर और आर्सेनिक जैसे मेटल्स का डिस्ट्रीब्यूशन देखा गया. इसके बाद अल्ट्रा-सेंसिटिव तकनीक से पत्थरों के अंदर परमाणु स्तर पर सोना खोजा गया। </p>
<p><strong>क्रिस्टल के अंदर परमाणु स्तर पर कैसे छिप जाता है सोने का यह विशाल भंडार?</strong><br>
वैज्ञानिक इस बात से सबसे ज्यादा हैरान थे कि सोना पत्थरों में कैसे मौजूद था. यह खनिज के अंदर फंसे छोटे टुकड़ों के रूप में नहीं था. बल्कि यह सोना पाइराइट के क्रिस्टल स्ट्रक्चर में परमाणु दर परमाणु बुना हुआ था। </p>
<p>रिसर्च में पाया गया कि ऐसा तभी होता है जब आर्सेनिक, लेड और कॉपर जैसे तत्व मौजूद हों. ये तत्व पाइराइट लैटिस के स्ट्रक्चर में बदलाव कर देते हैं. इससे खाली जगह बन जाती है और सोने के परमाणु उस क्रिस्टल में फिट हो जाते हैं। </p>
<p>पत्थरों में आर्सेनिक बढ़ने के साथ सोने का कंसंट्रेशन भी बढ़ता दिखा. आर्सेनिक असल में सल्फर की जगह ले लेता है, जिससे बड़े गोल्ड आयन के लिए जगह बन जाती है। </p>
<p><strong>क्या सभी पत्थरों में मिला है बराबर सोना और इससे भविष्य में क्या फायदा होगा?</strong></p>
<p>    रिसर्च में पता चला कि सभी तरह के पाइराइट में सोने की मात्रा बराबर नहीं होती. यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे कहां और किस कंडीशन में बने हैं. सेंट्रल कोन साइट पर सबसे ज्यादा सोना पाया गया। </p>
<p>    गर्म हाइड्रोथर्मल लिक्विड के ठंडे समुद्री पानी से टकराने पर बनने वाले क्रिस्टल में सबसे अधिक सोना था. इस खोज से पता चलता है कि एडवांस माइक्रो-एनालिटिकल टूल्स कितने मददगार हो सकते हैं। </p>
<p>ये टूल्स ऐसी कीमती चीजों को खोज सकते हैं जिन्हें पहले नजरअंदाज कर दिया जाता था. यह रिसर्च सोने की नई खदानें खोजने में एक अहम सुराग का काम कर सकती है. पत्थरों का टेक्सचर और केमिकल फिंगरप्रिंट सबसे अमीर गोल्ड जोन की पहचान करा सकते हैं। </p>]]> </content:encoded>
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<title>8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों को बड़ी राहत, बेसिक सैलरी के साथ HRA में भी हो सकती है भारी बढ़ोतरी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  8वें वेतन आयोग को लेकर देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों में उत्सुकता का माहौल है। ज्यादातर कर्मचारी इस बात का हिसाब लगाने में जुटे हैं कि उनकी बेसिक सैलरी में कितनी बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सैलरी स्लिप का एक और अहम हिस्सा है हाउस रेंट अलाउंस (HRA), जिस … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 09:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>8वें, वेतन, आयोग, से, कर्मचारियों, को, बड़ी, राहत, बेसिक, सैलरी, के, साथ, HRA, में, भी, हो, सकती, है, भारी, बढ़ोतरी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p><strong> 8वें वेतन आ</strong>योग को लेकर देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों में उत्सुकता का माहौल है। ज्यादातर कर्मचारी इस बात का हिसाब लगाने में जुटे हैं कि उनकी बेसिक सैलरी में कितनी बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सैलरी स्लिप का एक और अहम हिस्सा है हाउस रेंट अलाउंस (HRA), जिस पर उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए।</p>
<p>HRA सीधे बेसिक सैलरी से जुड़ा है: HRA सीधे बेसिक सैलरी से जुड़ा होता है, इसलिए फिटमेंट फैक्टर में किसी भी तरह की बढ़ोतरी का सीधा असर इस भत्ते पर पड़ेगा। खासतौर पर महानगरों में तैनात कर्मचारियों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है। आयोग द्वारा अनुशंसित फिटमेंट फैक्टर के आधार पर महीने के किराया भत्ते में हजारों रुपये का अंतर आ सकता है।</p>
<p>BankBazar के सीईओ आदिल शेट्टी के अनुसार, कर्मचारियों को केवल संशोधित बेसिक सैलरी पर ही ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, "8वें वेतन आयोग को लेकर ज्यादातर चर्चाएं मूल वेतन में होने वाली बढ़ोतरी पर केंद्रित हैं, लेकिन कर्मचारियों को इसके सैलरी से जुड़े अन्य कंपोनेंट जैसे HRA पर भी विचार करना चाहिए।"</p>
<p>चूंकि HRA की गणना बेसिक सैलरी के प्रतिशत के रूप में होती है, इसलिए अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर आउटलुक कुल मासिक आय के लिए बहुत अलग रिजल्ट दे सकते हैं।</p>
<p><strong>अभी कैसे मिलता है HRA?</strong></p>
<p><strong>केंद्रीय कर्मचारियों को फिलहाल तीन अलग-अलग दरों पर HRA मिलता है…</strong></p>
<p><strong>· X-कैटेगरी के शहरों के लिए बेसिक सैलरी का 30 प्रतिशत</strong></p>
<p><strong>· Y-कैटेगरी के शहरों के लिए 20 प्रतिशत</strong></p>
<p><strong>· Z-कैटेगरी शहरों के लिए 10 प्रतिशत</strong></p>
<p>हालांकि, ये प्रतिशत भविष्य में सरकारी फैसलों के बाद ही बदल सकते हैं, लेकिन अगर मौजूदा दरें बरकरार भी रहती हैं, तो भी यह भत्ता अपने आप बढ़ जाएगा, क्योंकि इसकी गणना संशोधित मूल वेतन पर होगी। इसका मतलब है कि अधिक फिटमेंट फैक्टर न केवल मूल वेतन बढ़ाता है, बल्कि HRA और कई अन्य सैलरी से जुड़े लाभों को भी बढ़ावा देता है।</p>
<p><strong>फिटमेंट फैक्टर कितना बढ़ाएगा HRA?</strong><br>
बैंकबाजार द्वारा तैयार कैलकुलेशन दिखाती हैं कि अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर के अनुमानों तहत HRA में कितना बदलाव हो सकता है..</p>
<p>लेवल 1 कर्मचारी की बात करें तो मौजूदा मूल वेतन 18,000 रुपये है। 2.0 के फिटमेंट फैक्टर पर संशोधित बेसिक सैलरी 36,000 रुपये हो जाती है, जिससे एक्स-श्रेणी शहर में HRA बढ़कर 10,800 रुपये हो जाता है।</p>
<p>2.28 के फिटमेंट फैक्टर पर बेसिक 41,040 रुपये और HRA 12,310 रुपये हो जाता है। यदि फिटमेंट फैक्टर 2.57 तक पहुंच जाता है, तो संशोधित बेसिक 46,260 रुपये हो जाता है, जिससे एक्स शहरों में HRA 13,880 रुपये, वाई शहरों में 9,250 रुपये और जेड शहरों में 4,630 रुपये हो जाता है।</p>
<p><strong>लेवल 10 कर्मचारी जिनकी मौजूदा बेसिक सैलरी 5</strong>6,100 रुपये है, के लिए 2.0 के फिटमेंट फैक्टर पर संशोधित बेसिक 1.12 लाख रुपये होगी, जिससे एक्स शहरों में HRA 33,660 रुपये हो जाएगा।</p>
<p>2.28 पर HRA बढ़कर 38,370 रुपये हो जाता है। 2.57 पर संशोधित बेसिक 1.44 लाख रुपये तक पहुंच जाती है, जिससे एक्स-श्रेणी शहरों में HRA 43,250 रुपये, वाई शहरों में 28,840 रुपये और जेड शहरों में 14,420 रुपये हो जाता है।</p>
<p><strong>फिटमेंट फैक्टर क्यों है इतना अहम?</strong><br>
फिटमेंट फैक्टर वह फैक्टर है, जिसका उपयोग नए वेतन आयोग के तहत संशोधित बेसिक सैलरी की गणना के लिए किया जाता है। अधिक गुणक का मतलब है अधिक वेतन और परिणामस्वरूप, बेसिक वेतन से जुड़े भत्तों में भी वृद्धि।</p>
<p>कर्मचारी संघों ने लगभग 2.57 के फिटमेंट फैक्टर की मांग की है, जबकि कई विश्लेषकों का मानना है कि सरकार इससे कम आंकड़े पर सहमत हो सकती है। विभिन्न रिपोर्टों में 2.0 से 2.57 के बीच कई संभावनाओं पर चर्चा की गई है, हालांकि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>अब बिना LPG कनेक्शन भी मिलेगा गैस सिलेंडर, मिनटों में होगी बुकिंग और डिलीवरी</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली अब आप बिना कनेक्शन के ही कुछ ही मिनटों में एलपीजी सिलेंडर घर मंगा सकेंगे। दरअसल, क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट (Instamart) ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के साथ साझेदारी कर देश की पहली ऑन-डिमांड LPG सिलेंडर डिलीवरी सर्विस शुरू की है। इसके तहत ग्राहक इंस्टामार्ट ऐप के जरिए घर बैठे LPG सिलेंडर … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:14:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>अब, बिना, LPG, कनेक्शन, भी, मिलेगा, गैस, सिलेंडर, मिनटों, में, होगी, बुकिंग, और, डिलीवरी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>अब आप बिना कनेक्शन के ही कुछ ही मिनटों में एलपीजी सिलेंडर घर मंगा सकेंगे। दरअसल, क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट (Instamart) ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के साथ साझेदारी कर देश की पहली ऑन-डिमांड LPG सिलेंडर डिलीवरी सर्विस शुरू की है। इसके तहत ग्राहक इंस्टामार्ट ऐप के जरिए घर बैठे LPG सिलेंडर ऑर्डर कर सकेंगे। बता दें कि इंस्टामार्ट, ऑनलाइन फूड डिलीवर करने वाले प्लेटफॉर्म स्विगी का प्लेटफॉर्म है।</p>
<p><strong>कनेक्शन की जरूरत नहीं</strong><br>
इंस्टामार्ट और HPCL की साझेदारी के तहत हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अपना नया 'HP Navya' 10 किलोग्राम का कंपोजिट LPG सिलेंडर भी लॉन्च किया है। इसके अलावा ग्राहक मौजूदा 5 किलोग्राम के मेटल LPG सिलेंडर का भी ऑर्डर कर सकेंगे। अहम बात है कि इस सर्विस के लिए LPG कनेक्शन होना जरूरी नहीं होगा। यानी छात्र, नौकरीपेशा लोग, किराए पर रहने वाले और छोटे परिवार भी बिना पारंपरिक घरेलू गैस कनेक्शन के सिलेंडर मंगा सकेंगे। इस सुविधा की शुरुआत बेंगलुरु से हो रही है।</p>
<p><strong>पहली बार ऑर्डर करने पर केवाईसी जरूरी</strong><br>
पहली बार सिलेंडर ऑर्डर करने वाले ग्राहकों को पहचान सत्यापन (KYC) और डिलीवरी से जुड़े जरूरी दस्तावेज पूरे करने होंगे। इसके बाद भविष्य में किए गए ऑर्डर रिफिल माने जाएंगे और डिलीवरी के समय खाली सिलेंडर वापस ले लिया जाएगा। इंस्टामार्ट पर किए गए सभी ऑर्डर HPCL के अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क के जरिए पूरे किए जाएंगे।</p>
<p>सिलेंडर की डिलीवरी प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए की जाएगी। HPCL ने बताया कि HP Navya सिलेंडर को पारंपरिक स्टील सिलेंडर के हल्के और जंग-रोधी विकल्प के तौर पर पेश किया है। इसकी बॉडी पारदर्शी है, जिससे यूजर गैस का लेवल देख सकते हैं। कंपनी ने कहा कि इसका कॉम्पैक्ट डिजाइन अपार्टमेंट, छोटे परिवारों और ऐसे घरों के लिए है जो एक सुविधाजनक सेकेंडरी LPG सिलेंडर चाहते हैं।</p>
<p><strong>इंस्टामार्ट के CEO ने क्या कहा?</strong><br>
इंस्टामार्ट के CEO अमितेश झा ने कहा कि कंपनी ने किराने के सामान से आगे बढ़कर ग्राहकों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनने के लिए विस्तार किया है। HPCL के साथ साझेदारी सुरक्षा और भरोसे के मानकों को बनाए रखते हुए इस सुविधा को एक जरूरी घरेलू सर्विस तक बढ़ाती है।</p>
<p>वहीं, HPCL के मार्केटिंग डायरेक्टर अमित गर्ग ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य LPG को ज्यादा लोगों तक आसान और सुरक्षित तरीके से पहुंचाना है। इंस्टामार्ट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ जुड़ने से ग्राहकों को तेज और सुविधाजनक सेवा मिलेगी। बत दें कि फिलहाल इंस्टामार्ट देश के 131 से अधिक शहरों में 50,000 से ज्यादा उत्पाद (SKU) की डिलीवरी करता है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>EPFO का नया नियम लागू, नौकरी बदलने वालों के लिए PF ट्रांसफर हुआ आसान; जानिए क्या बदला</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली क्या आप भी नौकरी बदल रहे हैं, अगर हां तो ये खबर आपके लिए खास है. दरअसल, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO से जुड़े तमाम नियम बदल चुके हैं और नई नौकरी ज्वाइन करने वालों के लिए इन पीएफ रूल चेंज (PF Rule Change) के बारे में जान लेना जरूरी है. इनमें … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:14:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>EPFO, का, नया, नियम, लागू, नौकरी, बदलने, वालों, के, लिए, ट्रांसफर, हुआ, आसान, जानिए, क्या, बदला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>क्या आप भी नौकरी बदल रहे हैं, अगर हां तो ये खबर आपके लिए खास है. दरअसल, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO से जुड़े तमाम नियम बदल चुके हैं और नई नौकरी ज्वाइन करने वालों के लिए इन पीएफ रूल चेंज (PF Rule Change) के बारे में जान लेना जरूरी है. इनमें एक खास है पीएफ ट्रांसफर, जिसे पहले से ज्यादा सरल बनाया गया है। </p>
<p><strong>नौकरी बदलते ही करना होता था ये काम </strong><br>
नई नौकरी शुरू करने पर आमतौर पर कई जरूरी काम करने होते हैं, जैसे दस्तावेजों को अपडेट करना, कागजी कार्रवाई पूरी करना और नए वर्कप्लेस में व्यवस्थित होना. अगर पीएफ खाते की बात करें, तो पुरानी कंपनी से से भविष्य निधि की राशि, यानी PF Balance ट्रांसफर करने के लिए अलग से अनुरोध करना होता था, लेकिन ताजा बदलावों के बाद अब यह प्रोसेस काफी सरल हो गया है. EPFO ने एक नई प्रणाली शुरू की है, जिसके तहत पात्र कर्मचारियों को नौकरी बदलने के बाद अलग से पीएफ ट्रांसफर (PF Transfer) अनुरोध जमा करने की जरूरत नहीं होगी। </p>
<p><strong>ऑटोमैटिक ट्रांसफर हो जाएगा पैसा</strong><br>
नए बदलाव के मुताबिक, अगर यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) आधार से जुड़ा हुआ है और अन्य सभी शर्तें पूरी होती हैं, तो फिर कर्मचारी के नए एंप्लॉयर के साथ जुड़ने पर पीएफ बैलेंस ऑटोमैटिक तरीके से ट्रांसफर हो जाएगा. यह चेंज ईपीएफओ द्वारा अपने सेंट्रलाइज्ड आईटी इनेबल्ड सर्विस (CITES) प्लेटफॉर्म पर आने के बाद लागू किया गया है, जिसे सदस्यों के रिकॉर्ड और सेवाओं को एक ही सिस्टम पर लाने के लिए डिजाइन किया गया है। </p>
<p><strong>अब ऐसे फटाफट होगा काम</strong><br>
अब तक कर्मचारियों को अपने पिछले नियोक्ता के पीएफ खाते से नए नियोक्ता के खाते में पीएफ राशि ट्रांसफर के लिए जो आवेदन करना पड़ता था. उस पर EPFO द्वारा कार्रवाई की जाती थी और कुछ मामलों में नियोक्ता द्वारा इसका सत्यापन भी किया जाता था। </p>
<p>नई प्रणाली के तहत, संगठन इन सदस्यों के पात्र पीएफ बैलेंस को स्वचालित रूप से ट्रांसफर करेगा, जिनका आधार-ऑथेंटिकेशन UAN सही तरीके से लिंक है. इस बदलाव से ये काम करने के लिए अलग से ऑनलाइन या ऑफलाइन ट्रांसफर आवेदन फाइल की जरूरत खत्म हो जाती है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>IRCTC की नई वेबसाइट आज होगी लॉन्च, AI फीचर्स के साथ बदलेगा रेल टिकट बुकिंग का पूरा अनुभव</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली भारतीय रेलवे जल्द ही IRCTC की नई वेबसाइट लॉन्च करने जा रहा है. अगर आप अक्सर ऑनलाइन ट्रेन टिकट बुक करते हैं, तो आने वाले दिनों में आपका अनुभव पूरी तरह बदल सकता है।  रेलवे का कहना है कि नई वेबसाइट पहले से ज्यादा तेज, आसान और स्मार्ट होगी. इसमें सिर्फ नया डिजाइन … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:14:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>IRCTC, की, नई, वेबसाइट, आज, होगी, लॉन्च, फीचर्स, के, साथ, बदलेगा, रेल, टिकट, बुकिंग, का, पूरा, अनुभव</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong><br>
भारतीय रेलवे जल्द ही IRCTC की नई वेबसाइट लॉन्च करने जा रहा है. अगर आप अक्सर ऑनलाइन ट्रेन टिकट बुक करते हैं, तो आने वाले दिनों में आपका अनुभव पूरी तरह बदल सकता है। </p>
<p>रेलवे का कहना है कि नई वेबसाइट पहले से ज्यादा तेज, आसान और स्मार्ट होगी. इसमें सिर्फ नया डिजाइन ही नहीं मिलेगा, बल्कि टिकट बुकिंग के पूरे प्रोसेस को आसान बनाने के लिए कई बड़े बदलाव किए गए हैं। </p>
<p><strong>नई वेबसाइट के लिए फीडबैक</strong></p>
<p>कुछ हफ्ते पहले छात्रों ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर मौजूदा IRCTC वेबसाइट की कई समस्याएं बताईं. उन्होंने कहा कि टिकट बुक करते समय वेबसाइट अक्सर धीमी हो जाती है, बार-बार कैप्चा भरना पड़ता है, बहुत ज्यादा पॉप-अप आते हैं और तत्काल टिकट के समय वेबसाइट कई बार काम करना बंद कर देती है। </p>
<p>इसके बाद रेल मंत्री ने अधिकारियों को वेबसाइट पूरी तरह नए तरीके से तैयार करने का निर्देश दिया. अब रेलवे ने छात्रों को ही नई वेबसाइट का बीटा वर्जन दिखाया है और लॉन्च से पहले उनका फीडबैक भी लिया है। </p>
<p><strong>सबसे पहले बदलेगा वेबसाइट का लुक</strong><br>
नई IRCTC वेबसाइट का डिजाइन पहले से काफी क्लीन और आसान होगा. मौजूदा वेबसाइट पर कई जगह विज्ञापन, पॉप-अप और अलग-अलग सेक्शन होने की वजह से नए यूजर्स को टिकट बुक करने में परेशानी होती है। </p>
<p>नई वेबसाइट में इंटरफेस को सरल बनाया गया है ताकि जरूरी जानकारी आसानी से दिखे और कम क्लिक में टिकट बुक हो सके। </p>
<p><strong>कैप्चा और बेवजह के पॉप-अप होंगे कम</strong><br>
रेलवे का कहना है कि नई वेबसाइट में बार-बार आने वाले कैप्चा, फ्लैशिंग एलिमेंट और दूसरे ऐसे हिस्सों को काफी हद तक कम किया जाएगा जो टिकट बुकिंग की रफ्तार धीमी करते हैं. इससे खासकर तत्काल टिकट बुक करते समय समय की बचत होगी। </p>
<p><strong>तत्काल टिकट बुक करना होगा पहले से आसान</strong><br>
सबसे ज्यादा दिक्कत लोगों को तत्काल टिकट बुकिंग में होती है. दरअसल वेबसाइट और ऐप लोड होते रह जाते हैं और तब तक तत्काल का विंडो बंद हो जाता है और टिकट बुक ही नहीं होता। </p>
<p>हर दिन लाखों लोग तत्काल टिकट बुक करने की कोशिश करते हैं. इसी दौरान वेबसाइट पर सबसे ज्यादा लोड आता है. नई वेबसाइट को इस तरह तैयार किया गया है कि ज्यादा ट्रैफिक आने पर भी इसकी स्पीड बनी रहे. रेलवे का मकसद है कि टिकट बुकिंग के दौरान वेबसाइट फ्रीज न हो और यूजर को बार-बार पेज रिफ्रेश न करना पड़े। </p>
<p><strong>सीट चुनना भी होगा आसान</strong><br>
नई वेबसाइट में सीट उपलब्धता देखने का तरीका भी बदलेगा. यात्री सीट और कोच की जानकारी पहले से ज्यादा आसान तरीके से देख सकेंगे. इससे टिकट बुक करते समय सीट चुनना और विकल्प समझना आसान होगा। </p>
<p>PNR स्टेटस, टिकट कैंसिल करना और रिफंड जैसी सेवाओं तक पहुंच भी पहले से सरल बनाई जा रही है. यही बदलाव RailOne ऐप में भी देखने को मिल सकते हैं। </p>
<p><strong>AI भी करेगा आपकी मदद</strong><br>
नई IRCTC वेबसाइट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक AI यूजर के व्यवहार को समझकर वेबसाइट का इस्तेमाल आसान बनाएगा। </p>
<p>अगर किसी यात्री को टिकट बुक करने या किसी सेवा का इस्तेमाल करने में दिक्कत आती है, तो AI बेस्ड सपोर्ट सिस्टम उसे सही जानकारी और ऑप्शन दिखाने में मदद करेगा. इसका मकसद वेबसाइट को ज्यादा स्मार्ट और यूजर फ्रेंडली बनाना है। </p>
<p><strong>सिर्फ वेबसाइट नहीं, पूरा सिस्टम हो रहा है अपग्रेड</strong><br>
रेलवे सिर्फ वेबसाइट का डिजाइन नहीं बदल रहा. इसके पीछे काम करने वाले पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को भी अपग्रेड किया जा रहा है. यही सिस्टम पूरे देश में ट्रेन टिकट बुकिंग संभालता है। </p>
<p>रेलवे का कहना है कि जब नया PRS पूरी तरह तैयार हो जाएगा, तब नई IRCTC वेबसाइट उसकी पूरी कैपेसिटी का फायदा उठा सकेगी. इसी वजह से बीटा वर्जन पहले आएगा, जबकि सभी फीचर्स वाला फाइनल पोर्टल कुछ महीनों बाद उपलब्ध होगा। </p>
<p><strong>क्या नई वेबसाइट से तुरंत बदल जाएगा सब कुछ?</strong><br>
ऐसा नहीं है. रेलवे ने साफ किया है कि शुरुआत में बीटा वर्जन लॉन्च होगा. इसमें यूजर्स और छात्रों से मिले सुझावों के आधार पर बदलाव किए जाएंगे. इसके बाद इसे सभी यात्रियों के लिए पूरी तरह जारी किया जाएगा. यानी शुरुआत में कुछ फीचर्स सीमित हो सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे नई वेबसाइट पूरी तरह पुराने पोर्टल की जगह ले लेगी। </p>
<p>अगर रेलवे अपनी प्लानिंग के मुताबिक नई वेबसाइट का फाइनल वर्जन लॉन्च करता है तो यात्रियों को सबसे बड़ा फायदा टिकट बुकिंग की स्पीड में मिलेगा. तत्काल टिकट के समय वेबसाइट के क्रैश होने की समस्या कम हो सकती है. हालांकि तत्काल बुकिंग में ज्यादा फर्जीवाड़ा एजेंट्स की वजह से भी होता है और मौजूदा सर्वर इतने लोड को ठीक से हैंडल ही नहीं कर पाता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>22 साल बाद बदली IRCTC की वेबसाइट, नई BETA साइट पर टिकट बुकिंग होगी पहले से ज्यादा आसान</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली अगर आप ट्रेन टिकट बुक करने के लिए IRCTC की वेबसाइट का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. रेलवे ने नई IRCTC वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च कर दिया है।  इस नए वर्जन को आम लोगों के लिए टेस्टिंग के तौर पर जारी किया जा रहा है ताकि यूजर्स इसका … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:14:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>साल, बाद, बदली, IRCTC, की, वेबसाइट, नई, BETA, साइट, पर, टिकट, बुकिंग, होगी, पहले, से, ज्यादा, आसान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
अगर आप ट्रेन टिकट बुक करने के लिए IRCTC की वेबसाइट का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. रेलवे ने नई IRCTC वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च कर दिया है। </p>
<p>इस नए वर्जन को आम लोगों के लिए टेस्टिंग के तौर पर जारी किया जा रहा है ताकि यूजर्स इसका इस्तेमाल करें और अपने फीडबैक दे सकें. रेलवे का कहना है कि लोगों के फीडबैक के बाद इसमें और सुधार किए जाएंगे. बाद में यही नया पोर्टल सभी यूजर्स के लिए लॉन्च <strong>होगा। </strong></p>
<p><strong>2002 से चल रही वेबसाइट अब बदलेगी</strong></p>
<p>IRCTC की वेबसाइट पहली बार साल 2002 में शुरू हुई थी. आज यह हर दिन औसतन 14.5 लाख से ज्यादा टिकट बुकिंग हैंडल है. इतने बड़े प्लेटफॉर्म पर करोड़ों लोग हर महीने टिकट बुक करते हैं। </p>
<p><strong>IRCTC वेबसाइट का नया लुक</strong><br>
अब करीब 24 साल बाद इसकी डिजाइन और काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव किया जा रहा है ताकि टिकट बुक करना आसान और तेज हो सके। </p>
<p><strong>क्लीन और आसान यूजर इंटरफेस</strong><br>
रेल मंत्रालय के मुताबिक नई वेबसाइट का सबसे बड़ा बदलाव इसका नया डिजाइन है. वेबसाइट पहले के मुकाबले ज्यादा क्लीन दिखेगी. स्क्रीन पर बेवजह के पॉप-अप, चमकती हुई चीजें और ध्यान भटकाने वाले एलिमेंट नहीं होंगे. इससे यूजर जरूरी जानकारी पर आसानी से ध्यान दे पाएंगे और टिकट बुकिंग का अनुभव बेहतर होगा.</p>
<p><strong>बार-बार Captcha भरने की परेशानी होगी कम</strong><br>
नई वेबसाइट में सबसे बड़ा बदलाव Captcha को लेकर किया गया है. टिकट बुक करते समय कई बार यूजर्स को बार-बार कैप्चा भरना पड़ता था, जिससे बुकिंग में समय लगता था। </p>
<p>नए बीटा वर्जन में इस परेशानी को काफी हद तक कम किया गया है. इससे खासकर तत्काल टिकट बुक करने वाले लोगों को राहत मिल सकती है। </p>
<p><strong>सभी क्लास की सीट एक साथ दिखेंगी</strong><br>
नई वेबसाइट में सीट उपलब्धता देखने का तरीका भी बदला गया है. अब अलग-अलग क्लास में सीट देखने के लिए बार-बार बदलने की जरूरत नहीं होगी. यूजर एक ही जगह पर अलग-अलग क्लास की सीट उपलब्धता देख सकेंगे. इससे सही विकल्प चुनना पहले से आसान होगा। </p>
<p>IRCTC ने चेकआउट प्रोसेस को भी आसान बनाया है. पहले टिकट बुक करते समय कई स्क्रीन और कई स्टेप पूरे करने पड़ते थे. नई वेबसाइट में इन्हें कम किया गया है. यानी टिकट बुक करने में कम समय लगेगा और पूरी प्रक्रिया पहले से तेज होगी। </p>
<p><strong>बार-बार पैसेंजर्स की जानकारी भरने की जरूरत नहीं</strong><br>
अगर आप अक्सर एक ही लोगों के लिए टिकट बुक करते हैं, तो नई वेबसाइट में यह काम भी आसान हो जाएगा. इसमें सेव किए गए यात्री की जानकारी दोबारा इस्तेमाल की जा सकेगी. हर बार नाम, उम्र और दूसरी जानकारी फिर से भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। </p>
<p>रेल मंत्रालय ने बताया कि इस नई वेबसाइट के डिजाइन में मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MNIT) जयपुर के छात्रों के सुझाव भी शामिल किए गए हैं. छात्रों ने वेबसाइट को ज्यादा आसान और यूजर फ्रेंडली बनाने के लिए कई सुझाव दिए थे. उन्हीं सुझावों के आधार पर यह नया बीटा वर्जन तैयार किया गया है। </p>
<p><strong>अभी सिर्फ बीटा वर्जन, बाद में होगा पूरा लॉन्च</strong><br>
सरकार का कहना है कि फिलहाल यह सिर्फ बीटा वर्जन है. इसका मकसद यूजर्स से फीडबैक लेना है. लोगों के सुझाव मिलने के बाद वेबसाइट में और सुधार किए जाएंगे. इसके बाद कुछ ही हफ्तों में नया IRCTC पोर्टल पूरी तरह लॉन्च किया जाएगा। </p>
<p><strong>नए पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन से भी जुड़ेगी वेबसाइट</strong><br>
रेल मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी है कि नई वेबसाइट को जल्द ही नए पैसेंजर रिजर्वेशन (PRS) से जोड़ा जाएगा. यही सिस्टम पूरे देश में रेलवे टिकट बुकिंग को संभालता है. इस सिस्टम को भी मॉडर्न बनाया जा रहा है ताकि ज्यादा ट्रैफिक के दौरान भी वेबसाइट बेहतर तरीके से काम कर सके। </p>
<p><strong>बीटा वेबसाइट कहां मिलेगी?</strong><br>
नई बीटा वेबसाइट को https://www.irctc.co.in/eticket/ पर जाकर इस्तेमाल कर सकेंगे. मौजूदा IRCTC वेबसाइट के होमपेज पर भी बीटा वर्जन का लिंक दिया जाएगा, ताकि लोग आसानी से नई वेबसाइट को आजमा सकें। </p>
<p>नई वेबसाइट का मकसद सिर्फ नया लुक देना नहीं है, बल्कि टिकट बुकिंग को तेज, आसान और कम परेशानी वाला बनाना है. अगर बीटा टेस्टिंग सफल रहती है, तो आने वाले हफ्तों में करोड़ों रेलवे यात्रियों को यही नया IRCTC पोर्टल इस्तेमाल करने को मिलेगा। </p>]]> </content:encoded>
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<title>ब्रेन ड्रेन रोकने के लिए ISRO का बड़ा फैसला, वैज्ञानिकों के इस्तीफे और VRS पर लगेगी रोक</title>
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<description><![CDATA[ बेंगलुरु  भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग ने 14 जुलाई 2026 को एक बड़ा आदेश जारी किया है. इसमें कहा गया है कि गगनयान मिशन और देश के अन्य महत्वपूर्ण कामों से जुड़े वैज्ञानिक और इंजीनियर इस्तीफा नहीं दे सकते और न ही जल्दी रिटायर हो सकते हैं. ऐसी अर्जी आने पर उसे सीधे ऊपर विभाग … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:14:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ब्रेन, ड्रेन, रोकने, के, लिए, ISRO, का, बड़ा, फैसला, वैज्ञानिकों, के, इस्तीफे, और, VRS, पर, लगेगी, रोक</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बेंगलुरु </strong></p>
<p>भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग ने 14 जुलाई 2026 को एक बड़ा आदेश जारी किया है. इसमें कहा गया है कि गगनयान मिशन और देश के अन्य महत्वपूर्ण कामों से जुड़े वैज्ञानिक और इंजीनियर इस्तीफा नहीं दे सकते और न ही जल्दी रिटायर हो सकते हैं. ऐसी अर्जी आने पर उसे सीधे ऊपर विभाग को भेजना होगा. यह खबर इसरो की बड़ी समस्या को सामने लाती है. इसरो एक समय सपनों का संस्थान था, लेकिन अब यहां से अच्छे लोग जा रहे हैं। </p>
<p><strong>सरकार का नया आदेश क्या कहता है?</strong><br>
सरकार ने सभी इसरो केंद्रों को निर्देश दिया है कि गगनयान और दूसरे बड़े प्रोजेक्ट्स के वैज्ञानिकों की इस्तीफे या रिटायरमेंट की अर्जियां सीधे स्वीकार न करें. हर केस को अंतरिक्ष विभाग को भेजो, वहां से फैसला होगा. सरकार ने खुद माना है कि ऐसे कई मामले आ रहे हैं जिससे देश के बड़े मिशन प्रभावित हो रहे हैं. यह आदेश दिखाता है कि समस्या छोटी नहीं है। </p>
<p>इसरो पहले देश के सबसे होशियार युवाओं को खींचता था. यहां काम करने वाले लोग देश के लिए कुछ बड़ा करना चाहते थे. लेकिन अब कई युवा वैज्ञानिक बाहर जा रहे हैं. कारण सरल हैं – बाहर ज्यादा सैलरी, तेज प्रमोशन, अच्छा माहौल, कम दफ्तरशाही और अच्छा वर्क-लाइफ बैलेंस। </p>
<p>निजी स्पेस कंपनियां अच्छे पैकेज दे रही हैं. इसरो में कुछ लोगों को लगता है कि नई सोच को जगह नहीं मिल रही, फैसले में देरी होती है और उनकी मेहनत पूरी तरह सराही नहीं जाती. जब मन नहीं लगता तो लोग चले जाते हैं। </p>
<p><strong>अंतरिक्ष क्षेत्र में नई बदलाव और मुश्किल</strong><br>
सरकार ने इन-स्पेस बनाकर निजी कंपनियों को अंतरिक्ष में काम करने की इजाजत दी. यह अच्छी बात है. निजी कंपनियां रॉकेट, सैटेलाइट और सर्विसेस बना रही हैं. लेकिन इसरो मजबूत रहे तभी यह सब काम करेगा. अगर इसरो के अनुभवी लोग चले गए तो नई टेक्नोलॉजी कौन बनाएगा? गगनयान मिशन में इंसान को अंतरिक्ष भेजना है. इसमें बहुत सावधानी और कुशल लोग चाहिए. अगर वे जा रहे हैं तो मिशन मुश्किल हो जाएगा। </p>
<p>इसरो की सफलता का राज था – यहां वैज्ञानिकों को आजादी थी, गलती से सीखते थे और टीम में काम करते थे. विक्रम साराभाई और सतीश धवन जैसे बड़े लोग यहां संस्कृति बनाकर गए. लोग इसलिए रुकते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि वे देश के बड़े काम में हिस्सा हैं. अब कुछ लोग कहते हैं कि संस्थान में संस्कृति बदल गई है. नेतृत्व, फैसले लेने का तरीका और युवाओं को मौके कम मिल रहे हैं. यही वजह है कि रोकने वाला आदेश निकाला गया। </p>
<p><strong>गगनयान मिशन पर खतरा</strong><br>
गगनयान भारत का पहला इंसानी अंतरिक्ष मिशन है. इसमें बहुत ऊंची तकनीक लगती है. अगर इससे जुड़े वैज्ञानिक चले गए तो काम प्रभावित होगा. सरकार ने सही पहचाना कि यह समस्या है, इसलिए आदेश जारी किया. लेकिन यह सिर्फ तुरंत का उपाय है. लंबे समय तक रोककर समस्या नहीं सुलझेगी। </p>
<p>निजी कंपनियां इसरो की पुरानी तकनीक और ज्ञान पर काम कर रही हैं. देश के टैक्स का पैसा दशकों से लगाकर इसरो ने बुनियाद बनाई. अगर इसरो कमजोर हुआ तो निजी क्षेत्र भी प्रभावित होगा. दोनों को साथ चलना चाहिए. इसरो बड़े-बड़े रिसर्च और नए मिशन पर ध्यान दे, निजी कंपनियां व्यापार करें. लेकिन इसके लिए इसरो को आकर्षक जगह बनाना जरूरी है। </p>
<p><strong>सरकार को क्या करना चाहिए?</strong><br>
यह आदेश समस्या दिखाता है लेकिन हल नहीं है. सरकार को वैज्ञानिकों से बात करनी चाहिए. उनकी शिकायतें सुननी चाहिए. सैलरी बढ़ानी चाहिए, प्रमोशन आसान बनाना चाहिए, रिसर्च के लिए पैसे देने चाहिए और अच्छा काम का माहौल बनाना चाहिए. युवा वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने के मौके देने चाहिए. तभी वे खुशी से रहेंगे। </p>
<p>भारत 2040 तक बड़ा अंतरिक्ष देश बनना चाहता है. इसके लिए इसरो को फिर से सपनों का केंद्र बनाना होगा. जहां लोग खुद आना चाहें और रहना चाहें. सिर्फ आदेश से नहीं, बल्कि अच्छे माहौल, अच्छी सैलरी और सही नेतृत्व से काम चलेगा. देश के वैज्ञानिक अभी भी इसरो में योगदान देना चाहते हैं. उन्हें सही मौका और प्रोत्साहन चाहिए। </p>
<p>इसरो का यह नया आदेश बताता है कि अच्छे वैज्ञानिक जा रहे हैं. गगनयान और देश के सपनों के लिए इसे गंभीरता से लेना होगा. रोक-टोक अस्थाई है. असली हल है – इसरो को फिर से आकर्षक और मजबूत बनाना. अगर आज ध्यान दिया तो कल भारत अंतरिक्ष में और आगे निकल जाएगा. वैज्ञानिकों को रोकने के लिए नियम नहीं, बल्कि सपना और प्रेरणा चाहिए। </p>]]> </content:encoded>
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<title>मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत की बड़ी आर्थिक बढ़त, चीन की अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव</title>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:14:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>मिडिल, ईस्ट, तनाव, के, बीच, भारत, की, बड़ी, आर्थिक, बढ़त, चीन, की, अर्थव्यवस्था, पर, बढ़ा, दबाव</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की रफ्तार एक बार फिर धीमी पड़ गई है. साल 2026 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में चीन की जीडीपी ग्रोथ घटकर 4.3% रह गई, जो 2022 के आखिर के बाद सबसे कम है. इससे पहले पहली तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था 5% की दर से बढ़ी थी. हालांकि, मार्केट को पहले से ही ग्रोथ में नरमी की उम्मीद थी, लेकिन ताजा आंकड़े यह दिखाते हैं कि चीन की अर्थव्यवस्था अभी भी कई चुनौतियों से जूझ रही है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की भारत की जीडीपी अभी भी स्थिर है। </p>
<p>वैसे तो चीन की सरकार लगातार अर्थव्यवस्था को संभालने की कोशिश कर रही है, लेकिन कमजोर घरेलू मांग, प्रॉपर्टी सेक्टर की परेशानी और ग्लोबल अनिश्चितताओं का असर अब भी साफ दिखाई दे रहा है. इसका असर सिर्फ चीन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत समेत दुनिया के कई देशों पर भी पड़ सकता है। </p>
<p><strong>क्यों धीमी हुई चीन की अर्थव्यवस्था?</strong><br>
चीन में सबसे बड़ी चिंता घरेलू मांग की कमजोरी है. लोग पहले की तुलना में कम खर्च कर रहे हैं, जिससे कंपनियों की सेल्स पर असर पड़ा है. वहीं, निजी निवेश भी उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ रहा है. लंबे समय से प्रॉपर्टी सेक्टर संकट का सामना कर रहा है, जिससे निर्माण और निवेश दोनों प्रभावित हुए हैं। </p>
<p>इसके अलावा, ग्लोबल लेवल पर बढ़ती अनिश्चितता और कुछ सेक्टर्स में बढ़ी लागत ने भी आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बनाया है. हालांकि, चीन के निर्यात ने कुछ राहत जरूर दी है. खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक प्रोडक्ट्स की मांग बनी रहने से निर्यात में मजबूती देखने को मिली है, लेकिन यह घरेलू कमजोरी की पूरी भरपाई नहीं कर सका। </p>
<p><strong>भारत की जीडीपी कितनी?</strong><br>
जुलाई 2026 MPC मीटिंग की बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% कर दिया. RBI के अनुसार, ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावट, जियो-पॉलिटिकल टेंशन और कच्चे तेल व गैस की बढ़ती कीमतों का असर आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है. केंद्रीय बैंक का अनुमान है कि जून 2026 तिमाही में GDP ग्रोथ 6.6%, सितंबर तिमाही में 6.3%, दिसंबर तिमाही में 6.5% और मार्च 2027 तिमाही में 6.8% रह सकती है। </p>
<p><strong>भारत ने चीन को दी मात</strong><br>
इन चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि चीन की तुलना में मजबूत बनी हुई दिखाई दे रही है. हाल ही में चीन की दूसरी तिमाही की GDP ग्रोथ 4.3% रही, जो 2022 के अंत के बाद सबसे धीमी है. वहीं भारत ने भी ईरान-इजरायल और अमेरिका से जुड़े जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण तेल और गैस की सप्लाई में अनिश्चितता का सामना किया, लेकिन इसके बावजूद RBI का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षा बेहतर स्थिति में बनी हुई है। </p>
<p><strong>चीन की इकोनॉमी का भारत पर पड़ेगा असर?</strong><br>
चीन भारत का बड़ा व्यापारिक साझेदार है. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, केमिकल और कई इंडस्ट्रियल सामान चीन से आयात करता है. अगर चीन की अर्थव्यवस्था धीमी रहती है और वहां मांग कमजोर बनी रहती है, तो कई उत्पादों की कीमतों में नरमी आ सकती है. इससे भारतीय कंपनियों को कुछ कच्चा माल और सामान सस्ती कीमत पर मिल सकता है। </p>
<p>दूसरी तरफ, अगर चीन की आर्थिक सुस्ती लंबे समय तक बनी रहती है, तो ग्लोबल ट्रेड और मांग पर भी असर पड़ सकता है. इससे भारतीय निर्यातकों को कुछ बाजारों में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह भारत के लिए मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन के सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का भी मौका हो सकता है। </p>
<p><strong>आगे चीन के सामने क्या चुनौती?</strong><br>
कई मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन के लिए सबसे बड़ी चुनौती डोमेस्टिक डिमांड और निजी निवेश को फिर से मजबूत करना है. अगर लोग ज्यादा खर्च करेंगे और कंपनियां निवेश बढ़ाएंगी, तभी आर्थिक रफ्तार तेज हो सकेगी. सरकार पहले भी अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए कई प्रोत्साहन कदम उठा चुकी है, लेकिन उनका असर अभी सीमित नजर आ रहा है। </p>
<p>आने वाले महीनों में चीन की आर्थिक नीतियों, ग्लोबल व्यापार की स्थिति और घरेलू मांग पर सभी की नजर रहेगी. अगर चीन की ग्रोथ लंबे समय तक कमजोर रहती है, तो इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था, कमोडिटी बाजार और इंटरनेशनल ट्रेड पर भी देखने को मिल सकता है। </p>]]> </content:encoded>
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<title>Jagannath Rath Yatra 2026: झमाझम बारिश के बीच जय जगन्नाथ के जयघोष से गूंजा पुरी, लाखों श्रद्धालुओं ने किए दिव्य रथों के दर्शन</title>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:14:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पुरी </strong></p>
<p>भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का शुभारंभ आज शुक्रवार को भारी उत्साह और श्रद्धा के साथ शुरू हुआ. इस बार इंद्रदेव भी मेहरबान नजर आ रहे हैं. यात्रा शुरू होने से पहले झमाझम बारिश हुई, लेकिन इसके बावजूद भक्‍तों की श्रद्धा में कोई कमी नहीं है. हजारों लोग सड़कों पर नजर आए. ओडिशा के पुरी शहर में भारी बारिश और कड़ी सुरक्षा के बीच भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा की रथ यात्रा के अनुष्ठान शुरू हो गए हैं. इस रथ यात्रा को देखने के लिए मंदिर के ‘बड़ा डंडा' (यात्रा मार्ग) पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु सुबह से ही एकत्र होने शुरू हो गए. प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए और रथों के गुजरने वाले रास्ते पर जल-जमाव की समस्या से निपटने के लिए कदम उठाए हैं. पूरे यात्रा मार्ग पर पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। </p>
<p><strong>सिंहद्वार तक पहुंचाए गए भगवान के तीनों रथ</strong><br>
रथ यात्रा से पहले पारंपरिक 'आज्ञामाला' रस्म संपन्न किया गया. इसके बाद भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष, भगवान बलभद्र के तालध्वज और देवी सुभद्रा के दर्पदलन रथ को श्री जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार के सामने लाया गया. इस दौरान मंदिर के सेवायत और श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ इस धार्मिक परंपरा में शामिल हुए। </p>
<p><strong>रथखला से मंदिर तक निकाले गए पवित्र रथ</strong><br>
ओडिशा के पुरी में सालाना जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले 'आज्ञानमाला' रस्म के बाद भक्त भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के तीनों रथों को श्री जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार तक खींचते हुए. लाखों श्रद्धालु इन दिव्य रथों के दर्शन करने के लिए पुरी पहुंच रहे हैं। </p>
<p><strong>रेत पर दिखी भगवान जगन्नाथ की अद्भुत झलक</strong><br>
रथ यात्रा की पूर्व संध्या पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर सैंड आर्टिस्ट और पद्म श्री से सम्मानित सुदर्शन पटनायक ने पुरी बीच पर भगवान जगन्नाथ की आकर्षक रेत आकृति बनाई. इस कलाकृति की खास बात यह रही कि इसके साथ रेत से बने 100 छोटे-छोटे रथ भी तैयार किए गए. इस अनोखी कला को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग बीच पर पहुंच रहे हैं। </p>
<p><strong>धाड़ी पहांडी परंपरा के साथ निकले श्री सुदर्शन</strong><br>
रथ यात्रा के धार्मिक अनुष्ठानों के तहत भगवान के चक्रराज श्री सुदर्शन को पारंपरिक 'धाड़ी पहांडी' शोभायात्रा के जरिए दर्पदलन रथ तक ले जाया गया. इस दौरान मंदिर परिसर 'जय जगन्नाथ' के जयकारों से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। </p>
<p><strong>यात्रा से पूर्व सुरक्षा के लिए किया गया मल्टी-एजेंसी मॉक ड्रिल</strong><br>
रथ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. यात्रा से पहले एनडीआरएफ, ओडिशा फायर एंड इमरजेंसी सर्विस, सेंट जॉन एम्बुलेंस, इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी, भारत स्काउट्स एंड गाइड्स, पुलिस और अन्य स्वयंसेवी संगठनों ने संयुक्त रूप से मॉक ड्रिल की. इसका उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति से तेजी से निपटने की तैयारी करना था। </p>]]> </content:encoded>
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<title>भारत&#45;UK FTA लागू होते ही बड़ा असर, सोना&#45;चांदी और हीरे की पहली खेप जीरो ड्यूटी पर रवाना</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली  भारत और यूके के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आज से लागू हो रहा है। इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए बांग्लादेश और चीन के मुकाबले बेहतर स्थिति में आने की उम्मीद है। साथ ही भारतीय सर्विस प्रोवाइडर्स और प्रोफेशनल्स के लिए ज्यादा मौके मिलने की संभावना है। भारत के लिए बहुत बड़ा … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:14:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br>
 भारत और यूके के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आज से लागू हो रहा है। इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए बांग्लादेश और चीन के मुकाबले बेहतर स्थिति में आने की उम्मीद है। साथ ही भारतीय सर्विस प्रोवाइडर्स और प्रोफेशनल्स के लिए ज्यादा मौके मिलने की संभावना है। भारत के लिए बहुत बड़ा मौका है क्योंकि यूके में होने वाले 949 अरब डॉलर के इंपोर्ट में भारत की हिस्सेदारी 2% से भी कम है।</p>
<p><strong>₹27 करोड़ के आभूषण रवाना </strong><br>
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता स्थित छह निर्यातकों द्वारा करीब 27 करोड़ रुपये मूल्य की ज्वेलरी भेजी गई है. जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC)  का कहना है कि UK के साथ मुक्त व्यापार समझौते के तहत शून्य शुल्क पर वहां के बाजार में एंट्री के द्वार खुल गए हैं और ब्रिटेन को भारत का पहला आभूषण निर्यात किया गया है। </p>
<p>GJEPC पूर्वी क्षेत्र के अध्यक्ष पंकज पारेख के हवाले से पीटीआई की रिपोर्ट में कहा गया कि India-UK FTA लागू होने के दिन से ही ब्रिटेन के बाजार में भारतीय निर्यात पर आयात शुल्क शून्य हो गए गए और भारत से 27 करोड़ रुपये मूल्य के आभूषणों को सीईटीए के तहत निर्यात के लिए हरी झंडी दिखाई गई, जिसे दो फीसदी आयात शुल्क की छूट का सीधा लाभ मिलेगा। </p>
<p>कई साल की बातचीत और एक साल से ज्यादा समय तक चली लागू करने की प्रक्रिया के बाद यह एग्रीमेंट लागू होने जा रहा है। टीओआई के मुताबिक कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने मंगलवार को कहा कि हमारा लक्ष्य अगले तीन-चार साल में द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। यूके ने 117 आइटम्स छोड़कर सभी प्रोडक्ट्स के लिए जीरो-टैरिफ व्यवस्था लागू की है। इससे भारतीय टेक्सटाइल्स, फूड प्रोडक्ट्स, लेदर और फुटवियर, इंजीनियरिंग गुड्स और फार्मा सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा होगा।</p>
<p><strong>FTA से आभूषण उद्योग को बढ़ावा </strong><br>
जेम एंड ज्वैलरी परिषद की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि भारत और ब्रिटेन के बीच इस मुक्त व्यापार समझौते से बड़े बाजार तक पहुंच में सुधार होने के साथ ही रोजगार के मौके बढ़ेंगे. इसके साथ ही पश्चिम बंगाल के रत्न और आभूषण उद्योग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। </p>
<p>जीजेईपीसी के चेयरमैन किरित भंसाली ने कहा कि यह FTA भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के 4 अरब डॉलर के आभूषण आयात बाजार में महत्वपूर्ण लाभ दिलाएगा. उन्होंने कहा, Zero Duty Export के साथ, उम्मीद है कि अगले 3 सालों में ब्रिटेन को भारत के रत्न और आभूषण निर्यात में करीब 2.5 अरब डॉलर की वृद्धि होगी. उन्होंने इस समझौते के लागू कराने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को दिया। </p>
<p><strong>99% भारतीय निर्यात पर 'Zero Duty'</strong><br>
भारत-यूके एफटीएक के बारे में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सीईटीए और सामाजिक सुरक्षा समझौते लागू हो गए हैं, जिससे भारत के लगभग 99% निर्यात के लिए शून्य शुल्क बाजार पहुंच प्राप्त हो गई है, जो व्यापार मूल्य के लगभग 100% को कवर करता है। </p>
<p><strong>इलेक्ट्रिक गाड़ियां पर टैरिफ</strong><br>
अग्रवाल ने कहा कि सरकार 12,000 प्रोडक्ट्स में से 89.5% पर ड्यूटी हटाने या कम करने पर सहमत हुई है। एफटीए के तहत 64% से ज्यादा प्रोडक्ट्स को भारत में तुरंत ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी। बाकी प्रोडक्ट्स के लिए ड्यूटी को धीरे-धीरे खत्म करने का वादा किया गया है। कारों समेत 4.4% टैरिफ लाइन वाले 536 और आइटम्स पर ड्यूटी में कटौती की जाएगी। पहले पांच साल के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियों को इस समझौते से अलग रखा गया है।</p>
<p>कॉमर्स डिपार्टमेंट में एडिशनल सेक्रेटरी दर्पण जैन ने कहा कि डेयरी, अनाज और कई कृषि उत्पाद जैसे संवेदनशील सेक्टर को एफटीए में शामिल नहीं किया गया है। सर्विस की डिजिटल डिलीवरी के लिए भी रास्ते पूरी तरह खोल दिए गए हैं। इससे देश में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स को बढ़ावा मिलेगा। इन सेंटर्स में कई ग्लोबल दिग्गज कंपनियां दिलचस्पी दिखा रही हैं जो भारत में कुशल और सस्ते मैनपावर का फायदा उठाना चाहती हैं।</p>
<p><strong>शराब और गाड़ियां होंगी सस्ती</strong><br>
ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की पर टैरिफ शुरू में 150% से घटाकर 75% किया जाएगा और फिर 10 साल में यह 40% तक आ जाएगा, जबकि ब्रिटिश ऑटोमोबाइल पर ड्यूटी को कोटा-आधारित सिस्टम के तहत धीरे-धीरे कम किया जाएगा। इसके तहत ब्रिटेन से आने वाली ऐसी कारों पर टैरिफ 110% से चरणबद्ध ढंग से घटकर 10% तक रह जाएगा। करार में कारों के कम ड्यूटी पर आयात के लिए एक कोटा तय किया गया है। सरकार ने कोटा आधारित छूट की मंजूरी पाने की प्रक्रिया नोटिफाई कर दी है।</p>
<p><strong>डबल कंट्रीब्यूशन कनवेंशन</strong><br>
बिजनेस विजिटर्स और प्रोफेशनल्स के लिए वीजा व्यवस्था ज्यादा साफ-सुथरी होगी। साथ ही यूके की कंपनियों को डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन से भी फायदा होगा क्योंकि उन्हें भारत से भेजे गए कर्मचारियों के लिए पांच साल तक सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन नहीं करना होगा। अभी, भारतीय कर्मचारी और उनके एम्प्लॉयर यूके के नेशनल इंश्योरेंस सिस्टम में सैलरी का 23% हिस्सा जमा करते हैं।</p>
<p>जैन ने कहा कि यह कंट्रीब्यूशन एक तरह का टैक्स है क्योंकि कर्मचारी इसका फायदा नहीं उठा पाते हैं। डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन यह पक्का करेगा कि वर्कर अपनी सोशल सिक्योरिटी के लिए डबल कंट्रीब्यूशन न दें। इससे सालाना 600 मिलियन डॉलर की बचत हो सकती है। इस कदम से 75,000 से ज्यादा भारतीय वर्करों और 900 से ज्यादा एम्प्लॉयर को फायदा होगा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान&#45;US तनाव के बीच एडवाइजरी जारी, होर्मुज रूट पर भारतीय नाविकों की तैनाती से बचने के निर्देश</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के एक बार फिर से धधक गया है. इस बीच जहाजरानी महानिदेशालय (डीजीएमए) ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा एडवाइजरी जारी किया है. खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात बिगड़ने के बाद डीजीएमए ने सर्कुलर नंबर 36/2026 जारी करते हुए सभी शिप … ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:14:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
<media:keywords>ईरान-US, तनाव, के, बीच, एडवाइजरी, जारी, होर्मुज, रूट, पर, भारतीय, नाविकों, की, तैनाती, से, बचने, के, निर्देश</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong></p>
<p>पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के एक बार फिर से धधक गया है. इस बीच जहाजरानी महानिदेशालय (डीजीएमए) ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा एडवाइजरी जारी किया है. खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात बिगड़ने के बाद डीजीएमए ने सर्कुलर नंबर 36/2026 जारी करते हुए सभी शिप ओनर, शिप मैनेजर और आरपीएसएल कंपनियों को निर्देश दिया है कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, तब तक होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती न की जाए. साथ ही फारस की खाड़ी और आसपास के इलाकों में सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाने के भी निर्देश दिए गए हैं। </p>
<p>डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है. इसी वजह से यह एहतियाती कदम उठाया गया है. सर्कुलर में साफ कहा गया है कि होर्मुज से होकर गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों को न भेजा जाए, जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते। </p>
<p>एडवाइजरी में कुछ अहम एहतियाती उपाय भी बताए गए हैं. सबसे पहले, होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती पर रोक रहेगी. दूसरा, फारस की खाड़ी, होर्मुज और आसपास के जलक्षेत्र में सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क रहा जाएगा। </p>
<p>तीसरा, सभी नौवहन चेतावनियों और सुरक्षा एडवाइजरी की लगातार निगरानी की जाएगी और आईएसपीएस कोड यानी अंतरराष्ट्रीय जहाज और पोर्ट सुविधा सुरक्षा संहिता को सख्ती से लागू किया जाएगा. चौथा, किसी भी आपात स्थिति में आईएफसी-आईओआर यानी इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर और DG कम्युनिकेशन सेंटर (MMDAC) के जरिए तुरंत मदद और रिपोर्टिंग की व्यवस्था की जाएगी। </p>
<p>DGMA ने कहा है कि वह खाड़ी क्षेत्र में बदलते सुरक्षा हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है. महानिदेशालय ने यह भी भरोसा दिलाया कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण को लेकर वह पूरी तरह प्रतिबद्ध है. यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी है, और शिपिंग कंपनियों तथा नाविकों के परिवारों में भी बेचैनी देखी जा रही है। </p>
<p><strong>सरकार बनाएगी रियल-टाइम निगरानी प्रणाली</strong><br>
इन घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने  डीजीएमए को निर्देश दिया था कि वह ऐसा रियल-टाइम डैशबोर्ड तैयार करे, जिससे फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में चल रहे हर जहाज पर मौजूद भारतीय नाविकों की जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सके।</p>
<p><strong>केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा?</strong><br>
केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने डीजीएमए से कहा है कि जहाज किसी भी देश का क्यों न हो, यदि उस पर भारतीय नाविक मौजूद हैं तो उनकी पूरी जानकारी एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड पर दर्ज की जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। सरकार का कहना है कि मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए भारतीय नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्थिति सामान्य होने तक एहतियाती कदम जारी रहेंगे।</p>
<p><strong>होर्मुज में न ले जाएं भारतीय नाविक</strong><br>
एडवाइजरी में कहा गया है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ी हुई सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए डीजीएमए ने शिप ओनर्स, शिप मैनेजरों और आरपीएसएल कंपनियों को निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती से परहेज करें।</p>
<p><strong>फारस की खाड़ी में भी लगातार अलर्ट रहें</strong></p>
<p><strong>    इस एडवाइजरी के जरिए कुछ और एहतियाती सुरक्षा उपाय बताए गए हैं।</strong></p>
<p><strong>    होर्मुज जलडमरूमध्य, फारस की खाड़ी और आसपास के जल क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर कड़ी सतर्कता बरती जाए।</strong></p>
<p><strong>    नैविकेशन से जुड़ी चेतावनियों और सुरक्षा सलाहों की लगातार निगरानी की जाए, साथ ही आईएसपीएस कोड को सख्ती से लागू किया जाए।</strong></p>
<p><strong>    किसी भी आपातकालीन स्थिति में आईएफसीआईओआर और डीजी कम्युनिकेशन सेंटर (MMDAC) के माध्यम से तत्काल सूचना पहुंचाएं और सहायता उपलब्ध कराएं।</strong></p>
<p><strong>    डीजीएमए पैदा होते हालातों पर नजदीकी नजर रख रहा है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।</strong></p>
<p>
<strong>जहाजों पर हमले में दो भारतीय नाविकों की मौत</strong></p>
<p><strong>    पश्चिम एशिया में अमेरिकी हमला दोबारा शुरू होने के बाद से फिर से हालात बिगड़ चुके हैं।</strong></p>
<p><strong>    ईरान-अमेरिका के बीच जबरदस्त लड़ाई चल रही है और होर्मुज से गुजर रहे जहाज निशाना बन रहे हैं।</strong></p>
<p><strong>    पिछले तीन दिनों में जहाजों पर किए गए हमले की चपेट में आने से दो भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है।</strong></p>
<p><strong>    बीआईएमसीओ के अनुमानों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समुद्री नाविकों की सप्लाई में भारत का स्थान दूसरा है।</strong></p>
<p><strong>    दुनिया भर के मर्चेंट शिप पर 3,10,000 से ज्यादा भारतीय नाविक काम कर रहे हैं।<br>
    बीआईएमसीओ एक वैश्विक शिपिंग संगठन है, जिसमें 120 देश शामिल हैं।</strong></p>
<p><strong>    इसके 2,100 सदस्य हैं, जिसमें लोकल, ग्लोबल, छोटी और बड़ी कंपनियां शामिल हैं।</strong></p>]]> </content:encoded>
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<title>तीसरी भाषा पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, 9वीं नहीं बल्कि 6वीं कक्षा से पढ़ाई की वकालत</title>
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<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 01:14:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान जस्टिस बी वी नागरत्ना ने कहा कि अगर किसी तीसरी भाषा को पढ़ाना है, तो उसकी शुरुआत कक्षा 6 से ही होनी चाहिए, न कि कक्षा 9 से. उन्होंने आगे कहा कि बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के दौर में नई भाषा अनिवार्य करने से छात्रों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. यह टिप्पणी तमिलनाडु सरकार की उस अपील पर सुनवाई के दौरान आई है जिसमें राज्य में जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना और थ्री लैंग्वेज नीति को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर विचार किया जा रहा था। </p>
<p><strong>छात्रों पर पड़ेगा तनाव </strong><br>
गुरुवार को सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत कक्षा 9 स्तर पर तीसरी भाषा की शुरुआत पर चिंता करते हुए उन्होंने कहा कि इससे बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों पर अनावश्यक तनाव पड़ता है. यह टिप्पणी राज्य के हर जिले में जवाहर नवोदय विद्यालयों (जेएनवी) की स्थापना को सुविधाजनक बनाने के मद्रास हाईकोर्ट के निर्देश के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की अपील की सुनवाई के दौरान की गई थी. तमिलनाडु ने स्कूलों की ओर से अपनाई जाने वाली तीन भाषाओं की नीति पर चिंताओं का हवाला देते हुए जवाहर नवोदय विद्यालय यानी जेएनवी की स्थापना का लगातार विरोध किया है। </p>
<p><strong>सिखाई जानी चाहिए राज्य की भाषा </strong><br>
हालांकि,  इस मामले में सीबीएसई भाषा नीति की वैधता सीधे तौर पर जारी नहीं थी. जस्टिस नागरत्ना ने सुनवाई के दौरान तीसरी भाषा शुरू करने के समय पर कई टिप्पणियां कीं. उन्होंने कहा कि यह नीति में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य नहीं किया गया है. उन्होंने आगे कहा कि राज्य की भाषा सिखाई जानी चाहिए, अंग्रेजी और किसी भी तीसरी भाषा को पढ़ाया जाना चाहिए. यह हिंदी नहीं कहता है. हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता एनजीओ के वकील जी प्रियदर्शिनी ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति विशेष रूप से प्रदान करती है कि किसी भी राज्य पर कोई भाषा नहीं थोपी जानी चाहिए। </p>
<p><strong>जस्टिस ने किया सवाल </strong><br>
जस्टिस नागरत्ना ने राज्य से पूछा कि आप हिंदी नहीं चाहते. लेकिन अगर यह संस्कृत है, तो फिर मुद्दा क्या है? राज्य के वकील ने जवाब दिया कि तीसरी भाषा केवल कक्षा 9 से अनिवार्य हो जाती है. इस मामले में जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि यदि कोई भी तीसरी भाषा को पढ़ाई जानी है, तो उसे कक्षा 6 से ही पढ़ाई जानी चाहिए। </p>]]> </content:encoded>
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